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Massage Girl in Sivaganga: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Sivaganga who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Sivaganga that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Sivaganga massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Sivaganga who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Sivaganga massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Sivaganga massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Sivaganga who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Sivaganga employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Sivaganga helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Sivaganga

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Sivaganga at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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प्रेषक : अनी अरोड़ा हाय दोस्तो,Antarvasna

मेरा नाम अनी है। मैं फरीदाबाद का Antarvasna रहने वाला हूँ। मैं आपको अपनी कहानी बताता हूँ।

ये मेरे जीवन की सच्ची कहानी है। मैं प्रोफेशन से एक कॉलबाय हूँ।

मैं एक दिन घर पर था, मुझे उस दिन फ़ोन-काल आया, किसी कुसुम नाम की लड़की का। उसने मुझे अपने घर मालिश करने के लिए बुलाया। उसने मुझे अपना पता दिया, वो भी फरीदाबाद की ही रहने वाली थी। वह बड़े परिवार से थी। उसकी शादी हो चुकी थी, उसके पति एक महीने के लिये कनाडा गये हुए थे।

जब मैं उसके घर पहुंचा तो मैंने एक २२ साल की लड़की को देखा। बहुत ही सुंदर और बहुत ही स्टाइलिश टाइप की लड़की थी। जब उसने मुझे देखा तो वो मेरे बारे में पूछने लगी। मैंने उसे बताया कि किसी कुसुम का फोन आया था ! मैंने जैसे ही उसे अपना नाम बताया तो उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कान आ गई। तभी मैं समझ गया ये ही कुसुम है।

उसने मुझे घर में आने के लिए कहा, पानी दिया और मैं बैठ गया।

उसने मुझसे कहा- मुझे मसाज करानी है ! अच्छे से कर दोगे तो जितना बोलोगे उतना पैसा दे दूंगी।

मैंने कहा- ठीक है।

वो अपने कमरे में चली गई, तभी वो अपने कपड़े बदल कर आई। जब वो आई, मैं उसे देखता रहा। उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया और बोली- आराम से मालिश करना जो मजा आ जाये !

मैंने कहा- ठीक है !

मैंने जैसे ही उसका गाउन उतारा, वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, उसका बदन कोमल, नाज़ुक और गोरा था। उसका कद ५’९” होगा, उसका बदन ३६-२८-३६ का होगा। मैंने जैसे ही उसके चुचियों का हाथ लगाया और दबाया, वो सिस्कियाँ भरने लगी। तभी मैं समझ गया कि ये प्यासी है।

मैंने उसे बैड पर लेटा लिया, मैं भी सिर्फ अंडरवियर में ही था। मैं उसकी मालिश कर रहा था, उसे मजा आ रहा था।

अचानक उसने मेरा हाथ पकड़ा, मुझे अपने उपर ले लिया और बोली- मसाज को छोड़ो ! अब आप मेरी प्यास को बुझा दो ! जितने पैसे बोलोगे उतने दूंगी।

वो बहुत प्यासी थी। मैंने कहा- ठीक है, जैसे आप चाहें !

मैंने अपने होठों को उसके होंठों पर रख दिया। अब वो मेरे होंठो का रस चूसने लगी, मैं भी उसके होंठों का रस लेने लगा। तभी वो वोली- मजा आ रहा है तुम्हारे होंठ तो बहुत प्यारे हैं !

कुसुम मेरे लण्ड को पकड़ कर चूसने लगी, तभी वो सीधे लेट गई और बोली- मुझे चोदो !

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर लगाया और जोर से धक्का दिया तो वो चिल्ला उठी। उसकी आँखों से आंसू तो निकल रहे थे मगर उसे मजा भी आ रहा था। वो मुझे छोड़ने को तैयार ही नहीं थी। मैं उसे परेशान करने लगा। कभी मैं उसकी चूत में अपने लण्ड को घुसाता और निकाल कर शान्त हो जाता, मैं उसे तड़पा रहा था, वो बार बार मुझे अपनी तरफ खींचती और कहती- क्या कर रहे हो? प्लीजजजजजज करो ना !

मैं फिर शुरु हो जाता। मैं ३ घण्टे उसे मजा देता रहा और मजा लेता रहा। ३ घण्टे बाद मैं डिस्चार्ज हो गया। वो जोर जोर से साँस ले रही थी। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु कर दिया। वो बोली- मुझे ऐसा मजा कभी भी नहीं आया ! तुमसे पहले बहुत आये मगर तुम्हारे आगे सब बेकार हैं। मुझे तुमसे मिलकर अच्छा लगा।

फिर हम दोनों नहाने चले गये, एक साथ नहाये। जब हम नहाकर बाहर आये, वो मेरे बदन को पोंछ रही थी, मैं उसके बदन के पानी को अपनी जीभ से चाट रहा था। उसकी आँखें बंद हो गई और सीत्कार करने लगी- अअऽ॥अअअअअआहऽऽऽहहहहह। यह भी थोड़ी देर तक चलता रहा। फिर वो मुझे फरीदाबाद मैं शिव रेस्टॉरेन्ट, १७ सेक्टर में ले गई। हम दोनों ने खाना खाया।

उसने मुझे अपने साथ सोने को कहा मगर मुझे घर जाना था इसलिए मैंने मना कर दिया।

तो बोली- अब कब आओगे?

मैंने कहा- जब आप बुलाओगी, आ जाऊंगा !

उसने मुझसे पूछा- कितना दूँ?

मैंने कहा- जितना आप चाहो !

उसने मुझे दस हजार दिये और मैं अपने घर आ गया।

रात को उसका फिर फोन आया और हम दोनो ने रातभर सैक्सी बाते की।

जब भी कुसुम का दिल करता है वो मुझे ही बुलाती है। मैं भी उस मज़े को भूल नहीं सकता।

मैंने सैक्स कई बार किया है मगर ऐसा मजा मुझे पहली बार आया !

कुसुम आग है। Antarvasna

मेरा नाम साधना है और मेरी उम्र 23 साल है. मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ.

मैं अपने जिस्म की बात करूँ तो मेरे बूब्स 36 इंच के एकदम टाइट हैं, मेरी कमर 30 की है और गांड 38 इंच की है, जो चलते समय बहुत मटकती है.
मेरा जिस्म किसी पेप्सी की 300 एमएल की बोतल के जैसे है.

ये सेक्स कहानी मेरी और मेरे ब्वॉयफ्रेंड की चुदाई की तो है ही, पर उसके बाद भी मैंने इसमें चुदाई की दुनिया के कुछ और सच भी उजागर किए हैं, उनका आनन्द लीजिए.

मेरे घर में मैं, मेरी मॉम, डैड और एक भाई है … जो मुझसे बड़ा है.
भाई की शादी हो चुकी है.

मेरी भाभी बहुत अच्छी हैं, वे मेरे साथ सहेली की तरह रहती हैं.

मैं एक कंपनी में जॉब करती हूँ और मेरा ब्वॉयफ्रेंड मेरे ऑफिस की सामने वाली बिल्डिंग में जॉब करता है.

हमेशा की तरह मैं सुबह तैयार होकर लैगिंग्स और टॉप पहन कर अपने घर से निकली.

घर से बाहर निकल कर कुछ ही दूर मुझे मेरा ब्वॉयफ्रेंड अपनी कार से लेने आया हुआ था.
वह रोज ही आ जाता था और हम दोनों साथ में ऑफिस जाते थे.

हम दोनों ऑफिस के लिए निकल गए.
थोड़ी ही देर में हम ऑफिस पहुंच गए.

अपनी टेबल पर आकर मैं अपना काम करने लगी.

मैं अपना काम कर रही थी कि तभी मेरा बॉस मेरे पास आया और उसने मुझसे अपने केबिन में आने के लिए कहा.

मैं कुछ पल बाद उनके केबिन में गई और मैंने बाहर से ही उनसे अन्दर आने की आज्ञा मांगी.
उन्होंने सर हिला कर अन्दर आने का इशारा कर दिया.

मैं अन्दर गई और उनसे पूछा कि क्या बात है सर?
उन्होंने मुझे एक नए प्रोजेक्ट के बारे में बताया और कहा- ये प्रोजेक्ट तुम्हें पूरा करना है.

मैंने ‘ओके सर’ बोल कर पेपर्स ले लिए और बाहर आ गई.

अब मैंने उस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया.

काम करते करते दो बज गए.

मैं काम रोक कर लंच करने चली गई.
हमारा एक घंटे का लंच होता है.

मैं दस मिनट में खाना खाकर बाहर निकली और तभी ब्वॉयफ्रेंड की कॉल आ गई.

मैंने कॉल उठाई तो उसने कहा- जहां हम मिलते हैं, वहां आ जाओ.
मैं कॉल कट करके वहां जाने लगी.

मैं वहां पहुंच कर अपने ब्वॉयफ्रेंड से मिली.
हमने साथ में सिगरेट पी और फिर हम दोनों घूमने निकल गए.

मेरे ब्वॉयफ्रेंड के ऑफिस से थोड़ी ही दूर पर एक टॉयलेट है, जो हमेशा खाली रहता है.
वहां कोई नहीं आता है.

हम दोनों घूम ही रहे थे कि उसने मुझसे कहा- चलो ना बेबी, आज इसके अन्दर चलते हैं.
मैंने उसे मना किया पर वह जिद करने लगा.

उसकी काफी जिद के बाद मैं उसके साथ जाने को रेडी हो गई.

हम दोनों अन्दर गए.
वहां हम दोनों एक खाली वाशरूम में घुस गए.

उसने डोर लॉक किया और मुझसे लिपट कर मुझे चूमने लगा.
मैं एक Xxx लड़की हूँ, उसका साथ देने लगी.

चूमते चूमते उसने मेरा टॉप उतार दिया और मैंने उसकी शर्ट के बटन खोल दिए.

उसने मुझे दीवार से चिपकाया और मेरी ब्रा के हुक खोल कर उतार कर एक तरफ लटका दी.
अब वह मेरे मोटे मोटे बूब्स पर टूट पड़ा.

मैं उसके बाल सहलाने लगी और एक हाथ से उसके पैंट की जिप खोल कर उसका लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगी.

वह पागलों की तरह मेरे बूब्स चूस रहा था.
कभी वह निप्पल पर काट लेता तो कभी दूध को पूरा मुँह में भरने की कोशिश करने लगता.

मैं भी वासना में मदहोश हो गई और कामुक सिसकारियां लेती हुई जोर जोर से उसका लंड हिला रही थी- उम्म्म्म सीसीई आह अह्ह्ह्ह ओह गॉड बेबी … खा जाओ … इन्हें चूसो!

थोड़ी देर बाद वह मुझसे अलग हुआ और उसने नीचे बैठने को कहा.

मैं झट से नीचे बैठ गई और उसका लंड हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी, उसके पूरे लंड पर जीभ फिराने लगी.

‘उम्म्म उम्मम्म आह बेबी…’ वह पागल होने लगा और मेरे बाल पकड़ सहलाता हुआ सिसकारियां भरने लगा.
‘आह्ह्हह साधना चूसो बेबी … ओह तुम कितना मस्त लंड से खेलती हो यार!’

उसके लंड को जीभ से चाटने के बाद एक ही झटके में मैंने उसका पूरा लंड मुँह में भर लिया और तेज तेज चूसने लगी.
‘ऑव्व गुओ गुओ गाफ़ गाफ़ ग्लो ग्लो …’

वह भी मेरे बालों को पकड़ कर तेज तेज झटके देने लगा.
पांच मिनट तक ऐसे ही लंड चूसने के बाद उसने मुझे खड़ा कर दिया.

मैं वहीं दीवार पर हाथ रख कर घोड़ी बन गई और वह मेरे पीछे आ गया.
उसने तुरंत मेरी लैगी खींच कर घुटनों तक उतार दी और पैंटी भी नीचे कर दी.

अब उसने मेरी चूत पर अपना लंड रखा और जोर जोर से रगड़ने लगा.
मैं Xxx लड़की मचलने लगी- सी सी आआह बेबी प्लीज डाल दो ना!

मुझे ऐसे तड़पती हुई देख उसने मेरी कमर पकड़ी और पूरी दम से एक झटका लगा कर लंड चूत में घुसा दिया.
मैं चिल्ला पड़ी- आआहह आह आह्ह मेरी चूत फट गई … मैं तुमसे कहती हूँ ना कि पहले मेरी चूत चाट लिया करो!

उसने लंड दबाते हुए कहा- बाबू तुम्हें पता तो है कि मुझे उसे चाटना पसंद नहीं है.
वह मेरी कमर पकड़ कर लौड़े के झटके दिए जा रहा था.

थोड़ी देर बाद मुझे भी मजा आने लगा.
मैं अपनी गांड आगे पीछे करती हुई उसका साथ देने लगी- आह आआह आआह … फक चोदो चोदो मुझे … आह और तेज … और तेज बेबी आह्ह साले मां के लौड़े चोद मादरचोद मेरी चूत … साले बहन के लौड़े!

वह भी पूरे जोश में मेरी चूत में झटके देने लगा- आआआह आह आआ आह ले साली कुतिया रंडी साली … तू Xxx लड़की कितनी बड़ी रांड है मादरचोद पब्लिक टॉयलेट में मेरा लंड ले रही है छिनाल! कुतिया गंदा सेक्स कर रही है!

मैं भी गांड आगे पीछे करती हुई उसका पूरा साथ दे रही थी- आआ आह … आआह चोद … साले चोदता रहे साले … फाड़ दे मेरी चूत रंडी के जने!
हम दोनों चुदाई में मगन ऐसे ही सिसकारियां लेते हुए मजा लेने लगे.

फिर पांच मिनट बाद ही वह जोर जोर से झटके देता हुआ मेरी चूत में झड़ने लगा.
मैंने जैसे ही उसके माल का अहसास किया, अपने मुँह को पीछे करके उसे देखने लगी.

मैं गुस्से में बोली- बहन के लौड़े ने आज फिर इतनी जल्दी रस छोड़ दिया. साले … हरामी की औलाद … हमेशा तू ऐसे ही करता है!

उसने लंड झाड़ कर उसे चूत से बाहर निकाल लिया.

मैं झट से नीचे बैठी और उसका लंड मुँह में भर कर चूसने लगी.

‘आआह आआह साले इसे खड़ा कर भोसड़ी के … मेरी चूत की प्यास अभी नहीं बुझी … पहले मेरा पानी निकाल कुत्ते.’
मैं तेज तेज लंड को चूस रही थी.

तभी उसने लंड निकाल लिया और बोला- बेबी अब बस … अब ये खड़ा नहीं होगा.
इतना बोल उसने लंड चड्डी के अन्दर किया और पैंट पहनने लगा.

उसने पैंट के हुक लगा कर दरवाजा खोला और बोला- मैं जा रहा हूँ, तुम भी कपड़े पहन कर आ जाओ.
वह निकल गया.

मुझे उस पर बहुत गुस्सा आया.
वह हमेशा मुझे बिना झड़े छोड़ देता है.

मैंने दरवाजा बंद किया और अपनी चूत में तेज तेज उंगली करने लगी- आह आआअह आआआह मेरी चूत कोई चोदो … इसे शांत कर दो … आह!
मैं अपनी आंखें बंद किए हुई अपने मम्मों को मसलती हुई चूत में उंगली किए जा रही थी.

पांच मिनट के बाद मेरी जांघें कांपने लगीं और मैं जोर जोर से सिसकारियां लेती हुई झड़ने लगी.
मेरी चूत से पानी की धार बहने लगी.

‘आआअह आआअह ओह माय गॉड मेरी चूत … आह आआअह आआहह.’
मैं चिल्लाती हुई झड़ गई.

फिर मैंने अपनी चूत से उंगलियां निकालीं और उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगी- उम्म्म्म उम्मम्म सो टेस्टी!

यही बुदबुदाती हुई मैंने खुद को साफ किया और कपड़े पहनने लगी.
फिर बाल ठीक करके लिपस्टिक लगाई और दरवाजा खोल कर बाहर आ गई.

जैसे ही मैं बाहर निकली, मैंने देखा कि एक काला सा आदमी गंदे फटे कपड़ों में खड़ा पेशाब कर रहा है.
वह एक भिखारी था.

मैं Xxx लड़की उसे देखने लगी.
वह अपनी आंखें बंद करके मस्ती से मूत रहा था.

मेरी नजर उसके लंड पर गई और मैं लंड देखती ही रह गई.
इतना बड़ा और इतना मोटा लंड … मैंने आज तक नहीं देखा था.

मेरी नजरें उसके लंड से हट ही नहीं रही थीं.
तभी उसने आंखें खोल दीं और मुझे लंड को घूरते हुए देख लिया.

वह दांत निकाल कर बोला- क्या चाहिए मैडम?
उसकी आवाज सुन कर मैं डर गई और वहां से तुरंत निकल गई.

मैं अपने ऑफिस में आ गई और प्रोजेक्ट पर काम करने लगी.

मुझे काम करते करते 5 बज गए.
मैंने अपने लिए एक कॉफी मगायी और तसल्ली से पी.

उस समय मेरे दिमाग में अपनी प्यासी चूत और उस भिखारी का मोटा लंड ही घूम रहा था.

कॉफी खत्म करके मैं दोबारा काम में लग गई.
धीरे धीरे स्टाफ जाने लगा.

मैंने घड़ी की तरफ देखा तो 7 बज चुके थे.
तब मैंने लैपटॉप बंद करके बैग में रखा और घर के लिए बाहर निकल गई.

बाहर आकर मैंने ब्वॉयफ्रेंड को कॉल की.
उसने कहा- मैं बस पांच मिनट में आ रहा हूँ.

मैं वहीं खड़ी हो गई और सिगरेट पीती हुई उसका इंतजार करने लगी.

करीब दस मिनट बाद ब्वॉयफ्रेंड आया.
मैं कार में बैठ गई और हम दोनों घर के लिए निकल गए.

आज मैं थका थका फील कर रही थी.
मेरी आंख लग गई और मैं सो गई.

पांच मिनट बाद मुझे ब्वॉयफ्रेंड ने उठाया और कहा- हम पहुंच गए बेबी.
मैं अपने अपार्टमेंट के बाहर पहुंच गई थी.

मैंने ब्वॉयफ्रेंड को हग किया और बाई बोल कर उतर कर घर आने लगी.

मैं घर पहुंची और डोर बेल बजाई.
मॉम ने दरवाजा खोला और बोली- अरे बेटी आ गई तू!

मैं हां कह कर अन्दर आई और अपने रूम में आकर बेड पर बैग फेंक कर सीधा बेड पर गिर गई.
मुझे कब नींद आ गई, मुझे पता ही नहीं चला.

मेरी आंख खुली जब मेरा दरवाजा खटखटाया गया.

मैंने आंखें खोलीं तो बाहर भाभी आवाज लगा रही थीं- साधना साढ़े आठ बज गए हैं, उठो खाना खाने आ जाओ.

इसका मतलब था कि मैं करीब आधा घंटा सो चुकी थी.
मैंने कहा- ओके भाभी, आती हूँ.

मैं अपने बेड से उठी और अपने सारे कपड़े उतार नंगी हो गई और शॉवर लेने चली गई.
मैं शॉवर के नीचे खड़ी होकर नहाने लगी और जल्दी से नहा कर बाहर आ गई.

फिर बिना ब्रा पैंटी के एक शॉर्ट्स और टी-शर्ट डाल कर बाहर आ गई.
बाहर देखा तो सब डिनर टेबल पर बैठे थे.

मैं अपनी जगह पर जाकर बैठ गई.

भाभी ने मुझे खाना सर्व किया और मैं खाना खाने लगी.

थोड़ी देर में ही मैंने खाना खत्म किया और उठ कर अपने कमरे में आ गई.

Antarvasna

अन्तर्वासना पढ़ने Antarvasna वाले पाठकों को मेरी तरफ से यानी ॠचा सिंह की तरफ से एक बार फिर से बहुत बहुत प्यार ! सब के लौड़े खड़े रहें, हर औरत को उसका मर्द रात को रोज़ चोद कर संतुष्ट करे, किसी की चूत प्यासी न रहे !

खैर दोस्तो, अपने बारे में मैं पिछली लिखत में बता चुकी हूँ कि किस तरह पैसे के पीछे भागते हुए मैंने बड़ी उम्र के बंदे से अपना गर्भ छुपाने के लिए शादी की।

उस दिन ऑफिस में जब मैं ननद के जेठ के लौड़े के साथ खेल रही थी तो पति का फ़ोन आने से हमारा सारा काम खराब हो गया और पहली बार एक दूसरे के कुछ ही दिनों में बने दीवानों को सिर्फ चुम्मा-चाटी करके अलग होना पड़ा।

उसके बाद उसका जेठ एक ही मिशन में लग गया, मुझे चोदने के लिए सुरक्षित जगह और आखिर उसको अपने दोस्त के घर का सहारा लेना ही पड़ा और मुझे वहाँ ले गया। हम दोनों एक दूसरे के इतने दीवाने बन चुके थे कि कमरे में घुसते ही बिना देखे भूखे की तरह एक दूसरे के जिस्मों से लिपटने लगे। दोस्त के सामने ही एक दूसरे को नंगा करके खेलने लगे।

तभी पीछे चूत पर जब किसी का स्पर्श पाया तो देखा उसका दोस्त जिसका लौड़ा कोई कम नहीं था, मेरी चूत चाटने लगा।

दो हब्शी जैसे लौड़े मेरी आँखों के सामने थे। तभी जेठ जी ने मुझे अपने नीचे लिटा कर मेरे गोल-मोल मम्मों से खेलने लगे। इतने में उसका दोस्त अपना लौड़ा मेरे मुँह के पास लाया तो मैं रोक ना पाई और पक्की रंडी की तरह उसके साथ खेलने लगी। जल्दी ही उसने मेरे मुँह में घुसा दिया।

उसका इतना मोटा था कि चूसने में तकलीफ होने लगी। लौड़े को चाट-चाट कर उसको मजे देने लगी। जेठ जी मेरे मम्मों में इस कदर उलझे, इतने दीवाने हुए कि मानो खा ही जायेंगे।

तभी उनका दोस्त मुझे चूत चुदवाने के लिए कहने लगा। लेकिन तभी जेठ जी को होश आया और बोले- साले, मेरा माल है ! पहले मैं चोदँगा ! तब तक दारु और चिकन का इंतजाम करवा !

उसने अपनी जिप बंद की और दारु लेने चला गया। मैं अब उसका लौड़ा चूसने लगी। उसने मेरी चूत पर अपना लौड़ा रख दिया और झटके से अन्दर किया। थोड़ी सी चुभन हुई, सह गई। लेकिन जब दूसरा झटका लगा तो मेरी सांस अटक गई गले में !

कितना ज़बरदस्त लौड़ा होगा जो एक खेली-खाई को भी तकलीफ दे रहा था !

चीरता हुआ पूरा लौड़ा मेरी चूत में था, वो दोनों टाँगे कन्धों पर रख मेरा भरता बनाने लगा। मैं हाय हाय करके दर्द सहती हुई उसको भड़का रही थी।

कुछ देर सीधा चोदने के बाद उसने मुझे घोड़ी बना लिया और पीछे से चूत में घुसा दिया और घुसता गया। उसकी हर चोट से जब उसके टट्टे मेरे दाने पर लगता तो मुझे स्वर्ग दिखता। काफी देर ऐसे चोदा !
क्या बंदा था, झड़ने का नाम नहीं था !

मैं एक बार छुट चुकी थी। तभी फिर से उसने मुझे अपने नीचे लिटाया और मुझ पर छाने लगा। तेज़ तेज़ झटके मारता हुआ आखिर उसने अपना गाढ़ा गर्म-गर्म माल मेरी चूत में छोड़ा तो मैं भी उसके साथ दुबारा झड़ गई और उसको कस लिया। दोनों टांगों का नाग बल उसकी कमर के चुफेरे(चारों ओर) डाल दिया ताकि एक एक बूँद चूत में निकले।

दोस्तो, यह सुख मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सुख था, अब तक का सबसे बड़ा लौड़ा मेरी चूत में था।

उसका दोस्त दारु लेकर आया और मेरी ननद का जेठ उठ कर पेग बनाने लगा तो उसका दोस्त मुझ पर छाने लगा। उसने अपना मोटा लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया और फिर मैंने उसका मुँह में लेकर खूब चूसा। खड़ा होते ही फिर से तकलीफ देने लगा और चाटने लगी।

दोनों मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगे। एक पेग अन्दर जाते मैं और गन्दी औरत बन चुकी थी। कभी एक का चुप्पा मारती तो कभी दूसरे का !

मैंने पर्स से कंडोम निकाल कर उसके दोस्त को दिया। उसने कंडोम डाल मेरी चूत में घुसा दिया। कुछ देर पहले झड़ी थी, थोड़ा चुभ रहा था।

मैंने कहा- एक-दो पेग लगा लो ! तब तक मेरी चूत इसको सह लेगी !

उसने गांड के नीचे तकिया लगा दिया जिससे मेरी गांड का छेद साफ़ दिखने लगा। उसने पहले थूक लगा ऊँगली गांड में डाली। फ़िर उसने बिना तैयार करवाए एक दम से झटका देकर गाण्ड में पेल दिया। मेरी चीखें निकलने लगीं।

उसने म्यूजिक सिस्टम लगा आवाज़ तेज की, जेठ ने मेरी दोनों बाहें पकड़ ली और उसके दोस्त ने मेरी गांड चीर दी, फट गई मेरी गाण्ड ! मैं रोने लगी। वो पूरा डालकर रुका, खून से लथपथ उसका लौड़ा जब उसको निकाल साफ़ करते देखा तो मैं और रोने लगी। उसने नया कंडोम डाला और फिर से घुसा दिया।

अब जेठ का लौड़ा फिर से शबाब पर था। दो हब्शियों में फंसी पड़ी थी मैं ! लेकिन तीन पेग जाते ही मैं रंडी बन गई और उसकी ओर पीठ करके उसके लौड़े पर बैठ कर गांड मरवाने लगी। जेठ बीच में आया और एक साथ ही मेरी चूत में डालने की कोशिश करने लगा और घुसा ही दिया।
दोनों खुल कर फाड़ रहे थे मुझे !

कमीनो, मुझे चलने लायक छोड़ोगे या नहीं?
हट बहन की लौड़ी ! कुतिया ! रांड साली ! इतने लौड़े लिए हैं, फिर भी नाटक करती है?

पूरा दिन मुझे चोदते रहे ! सच में चलने लायक नहीं छोड़ा मुझे ! नशा भी पूरा !
किस्मत से पति उस रात घर नहीं आने वाले थे, दो दिन के लिए मुंबई गए हुए थे।

फिर एक रात पति ने मुझे उससे चुदवाते हुए पकड़ लिया। खूब पीटा, मारा कमीने ने !

यह घर मेरा है ! मेरे नाम में ! मैं नहीं रहना चाहती तेरे साथ !

उसने अपना बेटा लिया और चला गया, तलाक ले लिया।

ननद की जेठानी को भी जब पति की करतूत का पता चला तो वो भी उसको छोड़ चली गई।

उसके बाद इन्टरनेट पर मेरी दोस्ती एक असली अमेरिकन हब्शी से हुई। वो मुझे बहुत पसंद करने लगा। वेबकैम पर उसका लौड़ा देख में भी फ़िदा हो गई। उसने मुझे शादी के लिए कहा, मैंने हाँ कर दी उसने मुझे स्पोंसर किया और मैं अमेरिका गई, जहाँ उसने मेरे साथ कोर्ट मैरिज़ कर ली।

फ़िर क्या हुआ, वो अगली कड़ी में लिखूंगी ! Antarvasna

न्यू दुल्हन सेक्स कहानी में दुल्हन अपने पति के साथ सेक्स के लिए मान नहीं रही थी तो पति ने अपने दोस्त की बीवी को उसे मनाने के लिए कहा. लेकिन दोस्त कि बीवी ने उसे अपने शौहर से ही चुदवा दिया.

दोस्तो, आपने मेरी कहानी के पिछले भाग
कुंवारी दुल्हन को सेक्स के लिए मनाया
में पढ़ा कि तबस्सुम ने सानिया के मन से सेक्स का डर निकालने के लिए उसे अपने शौहर से सेक्स करने को कहा.
तीनों एक बेड पर लेट गए.

तबस्सुम बोली- ये तो सो गयी, चलो हम भी सो जाते हैं.
जुनैद ने तबस्सुम को अपने से चिपटा लिया.

अब आगे न्यू दुल्हन सेक्स कहानी:

तबस्सुम बोली- अभी रुको, इसे सो जाने दो पूरी तरह!
पर जुनैद माना नहीं. उसने तबस्सुम को चूमना चाटना शुरू कर दिया.

तबस्सुम भी गर्म हो गयी थी.
वह भी जुनैद के होंठों से होंठ भिड़ाये उसका साथ दे रही थी.

सानिया दम साधे उनकी आवाजें सुन रही थी.

जुनैद तबस्सुम से नाईटी उतारने की जिद कर रहा था.
पर तबस्सुम ने उतारी तो नहीं पर ऊपर कर दी.

जुनैद ने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू की, तबस्सुम की आह निकल गयी.

तब जुनैद 69 हो गया और अपना लंड तबस्सुम के मुंह में दे दिया.
तबस्सुम ने उसे लपक लिया और लपर लपर चूसने लगी.

जुनैद बिल्कुल नंगा हो गया था.
उसने तबस्सुम की भी नाईटी उतार ही दी और तबस्सुम के मम्मे चूसने लगा.

तबस्सुम भी अब बेकाबू हो रही थी पर उसने अपने को काबू किया और फुसफुसा कर जुनैद से कहा- रुको, मुझे ऊपर आकर चोदना है तुम्हें! पर अभी दो मिनट रुको.

कहकर तबस्सुम सानिया से चिपटी और उसके मम्मे दबा लिए.
सानिया जगी हुई तो थी ही, वह पलटी और उसने अपने होंठ ताबस्स्सुम के होंठों से भिड़ा दिए.

तबस्सुम ने उसकी नाईटी ऊपर की और उसकी चूत में उंगली घुसा दी.
सानिया की चूत तो पहले से ही पानी पानी हो रही थी.

तबस्सुम ने सानिया की नाईटी उतारने की कोशिश की तो सानिया हिचकती रही, पर गर्म वह भी हो चुकी थी.
तब तबस्सुम ने जबरदस्ती उसकी नाईटी उतार ही दी और उससे चिपट गयी.

सानिया उसे कस के भींचे थी.

तबस्सुम के पीछे से जुनैद चिपटा और अपना लंड उसकी गांड की दरार से टकराने लगा.
जुनैद उसकी पीठ चूम रहा था.

तबस्सुम ने जुनैद का हाथ पकड़ा और आगे सानिया के मम्मों पर रख दिया.

सानिया सन्न …
जुनैद के हाथ उसके नाज़ुक मम्मों पर मचलने लगे.

तबस्सुम से सानिया से पूछा- लंड पकड़ेगी जीजू का?
सानिया कुछ नहीं बोली.

तबस्सुम ने उसका हाथ पकड़ा और उसे थमा दिया जुनैद का टनटनानाता हुआ लंड.

सानिया ने एक बार तो उसे मजबूती से पकड़ा पर शर्मा कर छोड़ दिया.
वह तबस्सुम से बोली- दीदी, मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो सहा, मैं जा रही हूँ.

तबस्सुम ने उसे रोका और उसके कान में फुसफुसा कर कहा- अब मैं जुनैद के साथ चुदाई करने जा रही हूँ, तू सब देखना और मन करे तो तू भी आ जाना.

तब तबस्सुम सानिया को छोड़ जुनैद की और पलटी और उसे चूमते हुए उसके ऊपर चढ़ गयी.

जुनैद उसके मम्मे मसलने लगा और तबस्सुम ने उसे चूमते हुए उसका लंड पकड़ लिया और अपनी चूत में कर दिया.
एक धक्का नीचे से जुनैद ने मारा, तबस्सुम की आह निकली.
पर तब्सस्सुम लगी उछलने और जोर जोर से जुनैद को चोदने लगी.

जुनैद और तबस्सुम दोनों ही अश्लील भाषा पर उतर आये.

उस समय जुनैद बोल रहा था- आज तो तेरी चूत को फाड़ कर ही रख दूँगा. बहुत मज़ा दे रही हो आज तुम!
तबस्सुम बोली- बड़े आये फाड़ने वाले, आज तो मैं तुम्हें निचोड़ दूंगी. फिर सानिया भी तो है. आज तो हम दोनों मिलकर आपका कचूमर निकाल देंगी.

तबस्सुम पर चुदाई का भूत सवार था; वह बहुत मजे ले लेकर चल रही थी.

सानिया उन दोनों की चुदाई बड़े ध्यान से देख रही थी, उसके हाथ अपने मम्मे मसल रहे थे.

तब सानिया ने तबस्सुम की टांग पर चिकोटी काटी.
तबस्सुम ने देखा और मुस्कुरा कर बोली- जुनैद, यह तो हमारी गलत बात है कि हम मजे ले रहे हैं और बेचारी सानिया अकेली है. इसे भी थोड़ा मजे दो, पर बहुत आराम से और जब ये रोके, तब रुक जाना.

कहकर तबस्सुम ऊपर से उतर गयी और सानिया को बीचे में करके उसके पीछे लेट गयी.

जुनैद ने बहुत अहिस्ता से सानिया को चूमा.
पीछे से तबस्सुम उसकी पीठ और गर्दन पर चूम रही थी.

सानिया भी अब मचल उठी; वह जुनैद से चिपट गयी.
दोनों के होंठ भिड़ गए.

जुनैद बहुत आहिस्ता अहिस्ता आगे बढ़ रहा था.
उसे सब तबस्सुम ने पहले ही बता दिया था.

जुनैद ने अब सानिया को सीधे किया और उसके मम्मे चूमने लगा.
सानिया के हाथ में उसका लंड था, सानिया उसे मसल रही थी.

तबस्सुम नीचे झुककर उसकी चूत को चूमने लगी.
सानिया की चूत पानी बहा रही थी.

तबस्सुम अब वहां से हटते हुए बोली- जुनैद, सानिया का बहुत ध्यान रखना, नाज़ुक कली है. मैं अभी वाशरूम से आती हूँ.

कहकर तबस्सुम बेड से नीचे उतरी.
सानिया एक बार तो बुदबुदाई- दीदी … तुम कहाँ जा रही हो?
पर जुनैद ने उसके होंठों से अपने होंठ भिड़ा दिए.
दोनों फिर लिपट गए.

जुनैद ने अपनी उंगली सानिया की चूत में कर के उसकी मालिश शुरू की, वह उसका दाना मसल रहा था.

अब जुनैद ने सानिया को अपने ऊपर लिटा लिया.
दोनों के होंठ भिड़े थी, जीभ आपस में टकरा रही थीं.

जुनैद ने अपना लंड सानिया की चूत के मुहाने पर रखा और उसे नीचे से ऊपर उठाने लगा.

अब सानिया का डर कम हो रहा था.
उसने भी अपनी चूत ढीली छोड़ दी तो जुनैद का लंड थोड़ा अंदर दरक गया.

सानिया को दर्द हुआ, वह ऊपर से उतर गयी और बोली- अंदर मत करो, दर्द होता है.

जुनैद ने हँसते हुए सानिया की चूत चाटनी शुरू की और ढेर सारा थूक उसमें भर दिया.

अब जुनैद सानिया के मना करने के बाद भी ऊपर लेटा और उसके मम्मे और होंठ चूमते चूमते हल्के से फिर अपना लंड उसकी चूत में कर दिया.

सानिया फिर कसमसाई, उसने कोशिश की उठने की.
पर जुनैद ने उसके चेहरे को कस के पकड़ा था और चूमते हुए अपना लंड और अंदर कर दिया.

अब जुनैद ने फिर एक धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर कर दिया.
सानिया चीखी, बोली- दर्द हो रहा है, मुझे छोड़ो. दीदी तुम कहाँ हो, जीजू को हटाओ, मैं मर गयी.

पर जुनैद ने अपने धक्के शुरू कर दिए.
जल्दी ही सानिया को दर्द में मज़ा आने लगा; वह भी जुनैद का साथ देने लगी.

तबस्सुम आ गयी थी उसने सानिया के गालों को सहलाते हुए उसे चूमना जारी रखा.
अब तो जुनैद उसे ताबड़तोड़ चोद रहा था, सानिया भी उसका भरपूर साथ दे रही थी.

जुनैद को सेक्स के लिए न्यू दुलहन की नयी नयी चूत मिली थी, पूरी कसी हुई.

अब उसका होने वाला था.
उसने तबस्सुम से पूछा- मेरा होने वाला है, कहाँ निकालूं?
तबस्सुम बोली- बाहर निकलो जल्दी, अंदर मत कर देना.

जुनैद ने अपना लंड बाहर निकाला और सानिया के मम्मों पर खाली कर दिया.
सानिया के मम्मों और पेट पर जुनैद का वीर्य फ़ैल गया.
उसमें खून के छींटे भी थे.

सानिया की झिल्ली फट गयी थी.
चादर पर भी खून के धब्बे थे.
सानिया को दर्द भी हो रहा था.

तबस्सुम ने पहले ही गर्म पानी लाकर रख लिया था.
उसने तौलिया भिगो भिगो कर सानिया की चूत और पेट साफ़ किया और उसकी गर्म पानी से सिकाई करी.

सानिया जब कुछ नार्मल हुई तो तबस्सुम ने पूछा- कैसा रहा?
तो सानिया शर्मा कर बोली- दर्द तो बहुत हुआ पर मज़ा भी बहुत आया.
कहकर सानिया ने तबस्सुम को चूम लिया.

तबस्सुम किचन से उसके लिए हल्दी का गर्म दूध लायी और एक पेन किलर उसको दी और बोली- कल सब ठीक हो जाएगा, अब तू आराम से नीचे गद्दे पर सो! मैं भी ज़रा अपनी चुदाई पूरी कर लूं.
कहकर वह जुनैद से लिपट गयी.
जुनैद भी बहुत खुश था.

सानिया सुबह जल्दी उठकर अपने कमरे में जाकर सो गयी.

जुनैद के काम पर जाने के बाद तबस्सुम ने सानिया को जाकर देखा तो वह सो ही रही थी.
तबस्सुम ने उसे सोने दिया.

थोड़ी देर में सानिया उठी तो बोली- मेरे को नीचे पेट में दर्द अभी भी है.
तबस्सुम बोली- कोई बात नहीं, अभी नहाते में गर्म पानी की सिकाई कर लेना और नाश्ता करके दवाई ले लेना. और आज तुम आराम ही करो. उमेश आयेगा तो मैं कह दूंगी कि तुम्हें कल बुखार था.

दोपहर को उमेश का फोन आया कि वह वापिस तो आ गया है पर फैक्ट्री में ही है और शाम को ही आएगा.

शाम तक सानिया काफी ठीक थी.

रात को सबने साथ साथ खाना खाया.

तबस्सुम ने उमेश और सानिया को एक साथ ही सुलाया पर उमेश से कह दिया कि चूमा चाटी के अलावा कुछ न करे. एक दो दिन में उनकी अधूरी सुहागरात पूरी हो जाएगी.
उमेश ने वादा किया कि वह सानिया का ध्यान रखेगा.

तबस्सुम के कहने पर उमेश ने बेड पर सानिया के पैरों की मालिश की जबकि सानिया बार बार मना कर रही थी.
पर यह सानिया को बहुत अच्छा लगा. बाद में उसने उमेश को शायद पहली बार कस के चूम कर थैंक्स कहा.
रात को सानिया उमेश की बाहों में ही सोयी.

अगले दिन सानिया बिल्कुल नार्मल थी.

दोपहर को तबस्सुम ने सानिया से कहा कि आज रात वह उमेश को उसका हक दे दे. दोनों अपनी सुहागरात पूरी करके मनाएं.

सानिया डर तो रही थी कि फिर दर्द होगा.
तबस्सुम ने हंस कर कहा- अब दर्द कम होगा और धीरे धीरे ये दर्द मज़े में बदल जाएगा.

सानिया बोली- कभी उमेश को पता चल गया तो?
इस पर तबस्सुम बोली- चूत तो चुदने के लिए ही बनी और लंड चोदने के लिए! तू घबरा मत उमेश मुझे भी चोद चुका है. बस आपस में चारों की शर्म बाकी है.

तबस्सुम ने सानिया को समझाया कि अभी कुछ दिनों तो वह और उमेश ही चुदाई के मजे लें और फिर जब सबकी सहमति हो तो चारों एक साथ सेक्स किया करेंगे बदल बदल कर!

सानिया शर्मा गयी और बोली- दीदी, तुम तो बहुत बदमाश हो. पर अभी उमेश को कभी मत बताना कि मैं जीजू से चुदी हूँ.
तबस्सुम ने उससे वादा किया.
तभी तबस्सुम ने जुनैद को भी फोन करके कह दिया कि भूल से भी उमेश को रात की बात मत बताना.

दोपहर को तबस्सुम ने सानिया के हाथ परों पर मेहंदी लगवाई और शाम को उसे खूब सजाकर अपने कमरे में बिठा दिया.
तबस्सुम ने जुनैद को फोन कर दिया कि कमरे की सजावट के कुछ गुलाब की फूल माला और पंखुड़ी लेते आये, आज उमेश सानिया की सुहागरात है.

रात को जब जुनैद और उमेश आये तो तबस्सुम ने उमेश से कहा- तुम जाकर नहा लो, तैयार हो जाओ. तुम्हारी दुल्हन तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

जब तक उमेश नहाया तबस्सुम और जुनैद ने उसका कमरा सजा दिया.

उमेश नहाकर आया और बोला- सानिया कहाँ है?
तबस्सुम ने कहा- मेरे कमरे में तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

उमेश उनके कमरे में गया तो दुल्हन के लिबास में सानिया उसका इंतज़ार कर रही थी.
दोनों लिपट गए, दोनों के होंठ मिल गए.

उमेश बहुत खुश था सानिया को खुश देखकर.

तभी दरवाजे पर खड़े तबस्सुम और जुनैद बोले- बाक़ी का काम बेड पर कर लेना, पहले चलो खाना खा लें.

सबने खाना खाया और फिर उमेश सानिया का हाथ पकड़कर उसे अपने कमरे में ले गया और दरवाज़ा बंद कर लिया.

सानिया उमेश से चिपट गयी और बोली- तुम बहुत अच्छे हो, मैंने तुम्हें बहुत तड़पाया, मेरी गलती थी. मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ, बस डर गयी थी.

उमेश ने उसे बाँहों में भर कर कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो, मैं अपने पर काबू नहीं रख पाया. एक दिन में ही तुम्हें पूरा पाना चाहता था. मैं वैसे ही करूँगा, जैसे तुम्हें अच्छा लगेगा.

सानिया ने अपनी बाहें फैला दीं- मैं पूरी तुम्हारी हूँ, जैसे मर्जी करो, बस मुझे ढेर सारा प्यार दो.
कहकर सानिया ने धीरे धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू किये.

उसने उमेश से आँख बंद करने को कहा.
सारे कपड़े उतार कर वह नंगी ही नेड पर चादर के अंदर घुस गयी और फिर उमेश से कहा- अब तुम भी कपड़े उतार कर आ जाओ.

उमेश ने फटाफट कपड़े उतार फेंके और घुस गया चादर के अंदर!
उसे बहुत आश्चर्य हुआ सानिया को बिना कपड़ों के देख कर.

सानिया बोली- लाईट बंद करो, मुझे शर्म आती है.
उमेश ने लाईट बंद करके एक छोटी लाईट जला दी.

सानिया ने उसे कस के चिपटा लिया अपने से.
उमेश सानिया की खूबसूरती पर फ़िदा था. उसके मम्मे ज्यादा भारी तो नहीं थे पर नुकीले थे.

सानिया ने महसूस किया कि उमेश का लंड जुनैद के मुकाबले ज्यादा मजबूत था.
उसे घबराहट तो हुई पर फिर वह मन ही मन मुस्कुराई कि ये मज़ा भी तो ज्यादा देगा.

उमेश सानिया के मम्मे चूमता हुआ नीचे झुका और उसकी चूत में अपना मुंह लगा दिया.

सानिया ने बनावटी बात कही- ये क्या कर रहे हो?
उमेश हंस कर बोला- जन्न्नत की गुफा को घुसने से पहले चूम रहा हूँ.

उमेश ने खूब देर तक उसकी चूत को चूमा चाटा, अपनी जीभ को उसने जितनी गहराई तक पहुंचा सकता था, पहुंचाया.

जब उमेश ने सानिया से अपना लंड चूसने को कहा तो सानिया बोली- नहीं, मुझे नहीं चूसना.
उसने कभी जिन्दगी में किसी का लंड चूसा भी नहीं था.

पर उमेश के बार बार कहने पर सानिया ने थोड़ी देर के लिए उमेश का मूसल चूस ही लिया जो उसके मुंह में मुश्किल से आ रहा था.

अब उमेश ने तबस्सुम की राय पर वेसलीन अपने लंड पर पोती और सानिया को चूमते हुए उसकी टाँगें फिलाई और धीरे से अपना लंड सानिया की चूत में दरकाया.
सानिया कसमसाई पर उसने हिम्मत बनाए रखी.

अब उमेश ने धीरे से पूरा लंड ही घुसेड़ दिया.
सानिया की चीख निकल गयी पर वह उमेश को कस के भींची रही.

अब उमेश ने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया.
जल्दी ही सानिया भी उसका साथ देने लगी.

अब उमेश पूरी मस्ती से पेलमपेल करने लगा.

सानिया की वासना का वेग भी पूरे उफान पर था.
आखिर सुहागरात थी उसकी.

उमेश ने मसल मसल कर सानिया के मम्मे लाल कर दिए थे.
सानिया के चेहरे पर लिपस्टिक फ़ैल गयी थी. उसका सिंदूर माथे पर फ़ैल कर गवाही दे रहा था कि सुहागरात कामयाबी की ओर बढ़ रही है.

सानिया के नाखूनों की धारें उमेश की पीठ पर अपने निशाँ अंकित कर चुकी थी.

उमेश ने एक झटके में अपना सारा माल सानिया की चूत में भर दिया और निढाल होकर सानिया के पेट पर ही पड़ गया.
सानिया ने उसके कस के भींच लिया.

दोनों के होंठ फिर चिपक गए. न्यू दुल्हन सेक्स करके दोनों दोनों बहुत खुश थे.

उमेश सानिया की बगल में लेट गया.
सानिया की चूत से उमेश का गर्म लावा बाहर आकर बेड पर फ़ैल गया था.

उसने पास रखे तौलिये से अपने को और उमेश को पौंछा.
अभी दोनों का मन नहीं भरा था.

थोड़ी देर आराम करने के बाद एक और राउंड लगाने की बात कर के दोनों चिपक गये.
अगले दिन तबस्सुम के दरवाज़ा खटखटाने पर ही उनकी आंख खुली.

सानिया ने कपड़े पहने और दिर खोला और तबस्सुम से चिपट गयी.
उसकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे.

उमेश भी बाहर आया, वह जुनैद के गले लगा और तबस्सुम को गले लगाकर कहा- तुमने मेरी सानिया मुझे दे दी.

चारों बहुत खुश थे.

यह तय हुआ कि आज रात सब लोग बाहर खाना खायेंगे और मूवी देखेंगे.

तबस्सुम हंस कर बोली- हाँ भाई, दावत-ए-वलीमा तो बनती ही है.

(Naukrani Ki Bur Me Lund)-Hindi sex stories

Hindi sex stories दोस्तो, लड़की को सिड्यूस (कामोत्तेजित) करने में बड़ा मजा आता है. बस उसको कामोत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिए.

मैंने अपने घर की नौकरानी को ऐसे ही कामोत्तेजित करके खूब चोदा. आज मैं आप सब को वही कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मेरा नाम है अजय. मेरे घर में उलूल-जुलूल नौकरानियों के बाद एक दिन बहुत ही सुन्दर नौकरानी काम करने के लिए आई. वह बहुत ही खूबसूरत थी. सुन्दर होने के साथ-साथ वह सेक्सी भी लग रही थी. उसकी हाइट मीडियम थी, बदन सुडौल था. उसका फीगर 33-26-34 का रहा होगा. वह शादीशुदा भी थी.

उस नौकरानी को देखकर मुझे उसके पति से मन ही मन जलन होना शुरू हो गई थी. उसका पति मुझे बहुत ही किस्मत वाला लग रहा था कि जिसके पास ऐसी सेक्सी बीवी है. मुझे पूरा यकीन था कि वह साला इस सेक्सी नौकरानी को खूब चोदता होगा. उसके बूब्स ऐसे थे कि देखते ही मन करता था बस यहीं पर दबा दो इनको. वह अपनी चूचियों को साड़ी से कितना भी ढकने की कोशिश करती लेकिन उसके बूब्स कहीं न कहीं से बाहर आकर दिखाई देने लगते थे. वह बहुत कोशिश करने के बाद भी अपनी चूचियों के ऊपर की दरार को छिपा नहीं पाती थी. जब मैंने उसकी दरार को तिरछी नजर से देखा तो पता चला कि उसने तो अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी.

शायद हो सकता था कि उसको लगता हो कि ब्रा पर बेकार ही पैसे क्यों खर्च किए जाएं. जब वह ठुमकती हुई चलती थी तो उसके चूतड़ हिलते थे और हिलते हुए ऐसे लगते थे जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबा दो. अपनी पतली सी साटिन की साड़ी को जब वह चूत के पास से पकड़ कर संभालती हुई चलती थी तो मन करता था कि काश मैं भी इसकी चूत को छू सकूँ. काश मैं इसके मम्मों को दबा सकूँ. काश मैं इसकी चूचियों को चूस सकूँ. साथ ही साथ मेरा बहुत दिल करता था कि मैं इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मजा ले सकूँ. इसकी चूत में अपना लंड डालकर उसको चोद सकूँ. मेरा लंड भी मानता ही नहीं था.
उसकी चूत में घुसने के लिए मेरा लंड बेकरार रहता था. मगर मैं सोचता था कि मेरा ये सपना पूरा हो तो हो कैसे? वह साली तो मेरी तरफ देखती भी नहीं थी. वह बस अपने काम से ही मतलब रखती थी. काम करने के बाद ठुमकती हुई वापस चली जाती थी. मैंने भी कभी उसको अहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसकी चूत पर है और मैं उसको चोदने के लिए इतना बेताब रहता हूँ. मगर मुझे किसी न किसी तरह उसकी चूत को चोदना ही था. मैंने सोच लिया था कि इसको किसी न किसी तरह गर्म करके ही यह सब संभव हो सकता है.

मगर यह सब मुझे धीरे-धीरे करना होगा. अगर ये नाराज हो गई तो मेरा सारा भांडा फूट जाएगा. कुछ दिन के बाद मैंने उसके साथ बहाने से बातें करना शुरू कर दिया. उसका नाम था किरण. मैंने एक दिन उसको चाय बनाने के लिए कह दिया. जब उसने अपने नर्म हाथों से मुझे चाय पकड़ाई तो मेरा लंड तो जैसे उछल ही गया. मैंने चाय पीते हुए उससे कहा- किरण तुम तो चाय बहुत अच्छी बना लेती हो.
उसने कहा- हां, बाऊजी, चाय तो मैं बना ही लेती हूँ.

उसके बाद मैंने किरण से हर रोज ही चाय बनवाना शुरू कर दिया. फिर एक दिन जब मैं ऑफिस जा रहा था तो मैंने किरण को अपनी शर्ट प्रेस करने के लिए दे दी.
मैंने कहा- तुम तो प्रेस भी अच्छी कर लेती हो.

इस तरह से जब मेरी बीवी मेरे आस-पास नहीं होती थी तो मैं किरण से बातें करना शुरू कर देता था.
मैंने पूछा- किरण, तुम्हारा पति क्या करता है?
वह बोली- एक मिल में काम करता है मेरा आदमी.
मैंने कहा- कितने घंटे की नौकरी होती है उसकी?
उसने कहा- 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं और कई बार तो रात को भी ड्यूटी लगा देते हैं.
मैंने कहा- तुम्हारे बच्चे कितने हैं?
उसने शर्माते हुए जवाब दिया- अभी तो मेरे पास एक लड़की ही है 2 साल की.

मैंने पूछा- तो क्या तुम उसको घर में अकेली ही छोड़कर आ जाती हो?
उसने कहा- नहीं, मेरी एक बूढ़ी सास है. वह उसकी देखभाल कर लेती है.
मैंने पूछा- तुम कितने घरों में काम करती हो?
उसने कहा- साहब, बस एक आपके घर में काम करती हूँ और एक नीचे वाले घर में काम करने जाती हूँ.
मैंने फिर पूछा- तो क्या तुम दोनों का गुजारा हो जाता है?
उसने कहा- साहब हो तो जाता है लेकिन बड़ी मुश्किल से ही काम चल पाता है. मेरा आदमी शराब में बहुत सारे पैसे बर्बाद कर देता है.
अब मेरे काम की बात यहाँ से शुरू हो गई थी.
मैंने किरण से कहा- ठीक है, कोई बात नहीं. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ.

किरण ने मुझे अजीब सी नजरों से देखा.
उसने कहा- क्या मतलब है आपका?
मैंने कहा- अरे, मेरा मतलब है कि तुम अपने आदमी को मेरे पास ले आओ, मैं उसको समझा दूंगा.
उसने कहा- ठीक है साहब. कहते हुए उसने एक लम्बी और गहरी सांस ली.
इस तरह हम दोनों के बीच ये बातों का सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा और धीरे-धीरे बातों के सहारे मैंने किरण के मन में से उसकी झिझक को कम करने की कोशिश की.

एक दिन मैंने शरारत भरे लहजे में कहा- तुम्हारा आदमी तो पागल ही होगा. इतनी सुंदर बीवी होते हुए भी वह शराब पीता है.
दोस्तो, औरतें काफी समझदार होती हैं. किरण भी मेरा इशारा शायद समझ गई थी लेकिन उसने अपनी नाराजगी का मुझे जरा सा भी अहसास नहीं होने दिया. मुझे भी थोड़ा हिन्ट मिल गया था कि यह भी तैयार हो जाएगी. अगर मुझे मौका मिले इसे दबोचने का तो यह शायद चुदवा भी लेगी.

वो कहते हैं न कि भगवान के घर देर है मगर अंधेर नहीं है. एक दिन मेरे पास भी मौका आ ही गया. रविवार का दिन था. मेरी बीवी एक दिन पहले ही मायके चली गई थी. वह हमारे दोनों बच्चों को भी साथ में लेकर गई थी. मेरे बीवी ने कहा था कि अगर किरण आए तो घर का काम ठीक से करवा लेना. सुबह से ही मेरे मन लड्डू फूटने लगे थे और मेरा लंड फुदकने लगा था. मैं बार-बार किरण के बारे में ही सोच रहा था.

कुछ देर के बाद किरण घर में आ गई. उसने दरवाजा बंद कर दिया और अपने काम पर लग गई. इतने दिनों की बात-चीत के बाद हम दोनों अब आपस में काफी खुल भी गए थे. किरण को मेरे ऊपर भरोसा भी हो गया था. इसलिए शायद उसने मेरे बिना कहे ही दरवाजा बंद कर दिया था. मैंने सोचा कि अगर आज मैंने पहल नहीं की तो यह फिर कभी हाथ नहीं आएगी. बात मेरे हाथ से निकल जाएगी. फिर मैंने सोचा कि पहल मैं करूं कैसे? फिर दिल में ख्याल आया कि पैसे की बात ही कर लेता हूँ.
मैंने कहा- किरण, अगर तुम्हें पैसों की जरूरत हो तो मुझे बता देना. जरा सा भी झिझकना नहीं.
किरण ने कहा- साहब, क्या आप मेरी पगार काटने वाले हैं?

मैंने कहा- अरे नहीं पगली, अगर तुझे अगर कुछ फालतू पैसों की जरूरत हो तो मुझे बता देना. मैं तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूँ. मैं इस बारे में अपनी पत्नी को भी कुछ नहीं बताऊंगा. लेकिन एक वादा तुमको भी करना होगा कि तुम भी इस बारे में मेरे बीवी से कुछ नहीं कहोगी.
इतना कहकर मैं किरण के जवाब का इंतजार करने लगा.
किरण ने कहा- मैं क्यों बताने लगी आपकी बीवी को?

उसके मुंह से यह जवाब सुनकर मैं खुश हो गया. मेरा तीर एकदम सही निशाने पर जाकर लगा था.
मैंने कहा- तुम खुश हो जाओ अब.
वह बोली- हां साहब, इससे मुझे काफी आराम हो जाएगा.
मैंने कहा- किरण, मैंने तुम्हें खुशी दे दी. क्या तुम नहीं चाहती कि मैं भी खुश हो जाऊं? मगर उसके लिए तुमको अपना मुंह बंद रखना होगा.
कहते हुए मैंने किरण के हाथ में पांच सौ रुपये का नोट थमा दिया.

किरण ने पूछा- क्या करना होगा मुझे साहब?
मैंने कहा- पहले तुम अपनी आंखें बंद कर लो. अगर तुमने आंखें खोल दीं तो तुम शर्त हार जाओगी.
मेरे कहने पर किरण ने आंखें बंद कर लीं और मेरे सामने ही खड़ी रही. मैंने देखा कि किरण के गाल लाल हो रहे थे और उसके होंठ कांपने लगे थे.
मैंने फिर कहा- जब तक मैं ना कहूँ तब तुम्हें अपनी आंखें नहीं खोलनी हैं.
वह बोली- ठीक है साहब.

किरण शरमा रही थी और वहीं पर चुपचाप खड़ी हुई थी. उसने अपने दोनों हाथों को अपनी जवान चूत के सामने लाकर बांध रखा था. जैसे उसको छिपाने की कोशिश कर रही हो.
पहले मैंने किरण के माथे पर हल्का सा चुम्बन किया. अभी तक मैंने उसको अपने हाथों से नहीं छुआ था. वह चुपचाप आंखें बंद करके खड़ी हुई थी. फिर मैंने उसकी पलकों पर हल्के से चुम्बन किया. उसकी आंखें अभी भी बंद ही थीं. फिर मैंने आहिस्ता से उसकी आंखों को चूमने के बाद उसके गालों को भी धीरे से चूम लिया. इतनी ही देर में मेरा लंड तन गया था और मेरे कपड़ों के अंदर लोहे की तरह सख्त होकर खड़ा हो गया था.
उसके बाद मैंने किरण की ठुड्डी पर किस कर दिया.

अबकी बार किरण ने अपनी आंखें खोलने की कोशिश की लेकिन मैंने उसको पहले ही बोल दिया कि अगर उसने आंखें खोलीं तो वह शर्त हार जाएगी और इसलिए अभी अपनी आंखों को बंद ही रखे. उसने झट से आंखें बंद कर लीं.

अब मैं भी समझ गया था कि उसको तैयार करने में मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. अब मुझे बस उसको तैयार करना था, उसकी चूत की चुदाई का मजा लेना था. अबकी बार मैंने उसके कांपते हुए होंठों पर एक किस कर दिया.
मैंने अभी भी उसको अपने हाथों से टच नहीं किया था. उसके बाद किरण ने फिर आंखें खोलीं और मैंने अपने हाथों से ही उसकी पलकों को बंद कर दिया.

अब मैं थोड़ा और आगे बढ़ा, मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी कमर के दोनों तरफ रखवा दिया. फिर मैंने किरण को अपनी बांहों में लपेट लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर उसको चूसने लगा. उसके होंठ नहीं बल्कि शराब के प्याले थे. उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे थे. इधर मैं उसके गुलाबी होंठों को चूसकर उनका रस पीने में लगा हुआ था. बहुत मजा आ रहा था. मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी.

तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियां मेरे सीने पर दबाव बना रही हैं. उसकी चूचियां तनकर टाइट हो चुकी थीं. फिर मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और किरण को अपनी तरफ खींचते हुए उसके होंठों को जोर से चूसना शुरू कर दिया. उसकी चूचियां तो जैसे मलाई थी. अब मेरा लंड बहुत जोर से फुदकने लगा था. फिर मैंने किरण के चूतड़ों अपनी तरफ खींच कर अपने हाथों से दबाना शुरू कर दिया. मेरा लंड उसके बदन से सट गया. मैं किरण के शरीर पर अपने लंड को महसूस करवाना चाहता था.

दोस्तो, शादीशुदा लड़की को चोदना बहुत आसान होता है. इसका एक कारण यह है कि उन्हें सब कुछ पहले से ही पता होता है. इस तरह की लड़कियाँ घबराती नहीं हैं.
किरण ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी थी. उसके ब्लाउज के बटन पीछे की तरफ थे. मैंने अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसके ब्लाउज के बटन को टटोला और फिर आराम से उनको खोलना शुरू कर दिया. मैंने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए उसके ब्लाउज के बटनों को खोलकर उसके ब्लाउज को उतार फेंका. उसकी चूचियां तो पहले से ही तनी हुई थीं इसलिए खोलते ही उछल कर मेरे हाथों में आ गईं.

उसकी चूचियां वैसे तो कड़क थीं लेकिन मलाई की तरह मुलायम भी थी. फिर मैंने उसकी साड़ी को उतारना शुरू कर दिया. मैंने हल्के से उसकी साड़ी को खींचते हुए किरण को अपने बेड की तरफ ले जाना शुरू कर दिया. जब मैं उसको लेकर बेड के पास पहुंच गया तो मैंने उसको वहां पर आराम के साथ लिटा दिया.

मैंने कहा- किरण, अब तुम आंखें खोल सकती हो.
किरण ने कहा- आप बहुत ही रसीले हो साहब. यह कहकर किरण ने फिर से आंखें बंद कर लीं.
मैंने भी झट से अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये. जल्दी ही मैं भी नंगा हो गया.

मेरा लंड उछल-उछल कर दर्द करने लगा था. मैंने उसके पेटीकोट को जल्दी से खोला तो देखा कि उसकी चूत बिल्कुल नंगी थी. उसने नीचे कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी.
मैंने कहा- किरण, तुम्हारी चूत तो बिल्कुल नंगी है. क्या तुम कच्छी नहीं पहनती हो?
उसने मेरी इस बात का जवाब दिये बिना ही कहा- साहब, बहुत रौशनी आ रही है. पर्दे बंद कर दो ना.
मैंने उठकर पर्दों को खींच दिया और रूम में थोड़ा अंधेरा हो गया. उसके बाद मैं तुरंत वापस आकर किरण के ऊपर लेट गया.

मैंने किरण के होंठों कस कर चूम लिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा. फिर मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ फिराया. उसकी चूत पर घुंघराले से बाल थे. मुझे उसकी चूत के बाल बहुत अच्छे लग रहे थे. फिर मैंने उसकी चूची को मुंह में ले लिया और उसको पीने लगा. बहुत ही अच्छा लग रहा था मुझे.
उसके बाद मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत की दरार पर लगा दिया. फिर उसकी बुर में घुसा दिया. उसकी चूत में मेरी उंगली ऐसे घुस गयी जैसे मक्खन में छुरी घुस जाती है. उसकी चूत बहुत गर्म और गीली हो चुकी थी. उसके मुंह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गई थीं. उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्ती से भर रही थी.
मैंने कहा- किरण रानी, अब क्या करना है?
वह बोली- साहब, अब और मत तड़पाइये. अब बस कर दीजिए.
मैंने कहा- नहीं, ऐसे नहीं. जान कहकर बुलाओ.

उसने मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब कर दीजिए, अब मत तड़पाओ.
मैंने कहा- नहीं, ऐसे नहीं.
वह बोली- साहब डाल दो न.
मैंने कहा- क्या डाल दूँ? मैंने शरारत करते हुए पूछा.
मुझे उसके मुंह यह सब सुनना बहुत मजा दे रहा था. वह बार-बार डालने की बात कह रही थी लेकिन मैं उसके मुंह से पूरी बात सुनना चाहता था.
वह बोली- यह लंड मेरे अंदर डाल दो ना साहब …

उसने मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका दिये. मैंने भी उसकी चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
मैंने कहा- हाँ, मेरी रानी, अब यह लंड तुम्हारी चूत में अंदर जाएगा. कहो तो चोद दूँ तुमको?
वह बोली- हाँ साहब, मुझे चोद दीजिए.

किरण काफी गर्म हो चुकी थी. अब मैंने उसकी चूत के ऊपर अपने लंड को रख दिया. एक झटका दिया और लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया. उसके बाद मैंने अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. कभी उसके होंठों को, तो कभी उसके गालों को चूमते हुए उसको चोदना शुरू कर दिया. मैं किरण को चोदने में मशगूल हो गया.

मेरा मन कर रहा था कि उसको चोदता ही रहूँ. वह भी मेरे लंड से उछल-उछल कर चुदवा रही थी.
उसने कहा- साहब, आप तो बड़ी ही मस्त चुदाई कर रहे हैं. आह्ह् … आप बस मुझे चोदते ही रहिए. मुझे बहुत मजा आ रहा है. ओह्ह …

धीरे-धीरे किरण के हाथ मेरी पीठ पर कसने लगे थे. उसने अपनी टांगें मेरे चूतड़ों पर लपेट दी थीं. साथ ही साथ वह नीचे से अपनी गांड को भी उछाल रही थी. वह चुदवा रही थी और मैं मजे से उसको चोद रहा था.
मैंने कहा- किरण रानी, तुम्हारी यह चूत तो मेरे लंड से चुदने के लिए ही बनी है. बहुत ही मस्त चूत है तुम्हारी. बहुत मजा दे रही है. बता ना, कैसी लग रही है मेरी चुदाई. मेरे लंड को लेकर कितना मजा आ रहा है मेरी रानी?
वह बोली- आप बस चोदते रहिए. बहुत मजा आ रहा है. आह्ह् … ओह्ह .. उफ्फ … उम्म …

इस तरह से हम दोनों बातें करते हुए बहुत देर तक चुदाई का मजा लेते रहे. उसके बाद अचानक ही हम दोनों एक साथ झड़ गए. लेकिन मेरा मन तो अभी भी नहीं भरा था. 20 मिनट के बाद मैंने अपना लंड फिर से उसके मुंह में डाल दिया और उसको चुसवाने लगा. अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए थे. जब वह लंड चूस रही थी तो मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. वैसे दूसरी औरत को चोदने का मजा ही कुछ और होता है यारो.
बल्कि दूसरी बार तो उसको चोदने में और भी ज्यादा मजा आया मुझे. इतना मजा आया कि मैं बता ही नहीं सकता. इस बार लंड ने भी मेरा बहुत देर तक साथ दिया. मेरे लंड को झड़ने में बहुत समय लगा. मैं उसको भरपूर मजा देता रहा.
फिर जब हम थक गए तो वह अपने कपड़े पहनने लगी.

मैंने कहा- किरण रानी, अब तुम चुदवाती रहना मुझसे.
वह बोली- आपने तो बहुत मस्त चुदाई की है साहब. मैं तो अब आपके ही लंड से चुदवाती रहूंगी. चाहे आप मुझे पैसे भी मत देना लेकिन अपने लंड से ही मेरी चूत को चोदना.

उसके बाद मैंने उसकी चूचियों को हल्के से दबा दिया और उसके हाथों को सहलाने लगा.
फिर मैंने किरण को अपने पास बेड पर लेटा लिया और बहुत देर तक उसके होंठों को चूसता रहा.

अब जब भी मौका मिलता है किरण खुद ही अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है.

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