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दोस्तो, मैं यहाँ पहली Antarvasna बार लिख रही हूँ और हिंदी में भी पहली बार ! अगर कोई गलती हो जाए तो माफ़ कर देना।
आज मैं आपको अपना पहला अनुभव बताना चाहती हूँ कि कैसे मैंने अपने बॉय-फ्रेंड के साथ दिन में सुहागरात ओहऽऽ सुहागदिन मनाया।
मैं और वो दोनों अलग अलग शहर में रहते हैं। उसका नाम माणिक है, दिखने में लम्बा, गेहुंआ रंग, मुस्कुराते होंठ, नशीली आँखें जिसमें कोई भी देखे तो डूब जाये ! बहुत ही गठीला बदन और बांहें ऐसी जिसमे कोई भी लड़की आकर मर जाये ! मुझे उसकी बहुत याद सताती थी जब मैं अपनी सहेलियों को उनके बॉय-फ्रेंड से मिलते और घूमते-फिरते देखती थी। मेरा भी बहुत मन करता था कि मैं भी अपने माणिक के साथ घूमूं और उसे बहुत प्यार करूँ। उसके स्पर्श को तरस जाती थी मैं ! पर क्या कर सकती थी, वो और मैं दोनों ही अपनी पढ़ाई में लगे थे तो ऐसे मिल भी नहीं सकते थे। वो रहता था मुम्बई में और मैं दिल्ली में। मैं कभी-कभी उस पर इस बात को लेकर नाराज़ हो जाया करती थी कि सब मिल सकते हैं और हम नहीं। तब एक बार उसने वादा किया कि वो मुझसे मिलने आएगा। मैं बहुत खुश हुई और इंतज़ार करने लगी उस दिन का जब मैं अपनी सैंय्या से मिलूंगी।
खैर एक दिन मैंने उससे कहा कि मेरे जन्मदिन पर मैं उससे मिलना चाहती हूँ क्यूँकि मैं अपना जन्मदिन उसके साथ मानना चाहती थी।
उसने कहा कि वो एक दिन बाद बताएगा आने का।
मैंने कहा कि नहीं उसे आना ही पड़ेगा, हर बार अपनी सहेलियों के साथ मानती थी और इस बार उसके साथ मानना चाहती हूँ।
आखिर काफी जिद करने के बाद वो मान गया और उसने आने का वादा भी किया। मेरी ख़ुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं था, मैं दिन-रात बस उसके आने का इंतज़ार करने लगी।
एक दिन मैं टीवी पर पिक्चर देख रही थी ”मर्डर”। उसमें इमरान हाश्मी और मल्लिका शेरावत के गरम सीन देखकर मुझे भी कुछ होने लगा। मैं उन दोनों में खुद को और माणिक को देखने लगी। यह सोचकर ही मेरी चूत गरम हो गई और उसमें से पानी निकल गया। मैंने देखा तो कुछ सफ़ेद सफ़ेद सा पानी था। मैंने उसे चखा तो नमकीन सा था। मेरा भी माणिक के साथ चुदाई करने का मन हुआ और सोच लिया कि उसके साथ यह करके रहूंगी, लेकिन उसे यह बात नहीं कही।
आखिर वो दिन भी आ गया जब वो मुझसे मिलने आया, मैं तो उसे देखकर इतनी खुश हुई कि क्या बताऊँ। मैं उसे बस-स्टैंड पर लेने गई थी। उसे देखकर जाने क्या हुआ कि दिमाग पर रात का सीन छा गया और उसे वहीं चूम लिया सबके सामने !
वो सकपका गया और शरारती मुस्कान लाते हुआ बोला- सब देख रहे हैं !
उसके यह कहते ही मैंने आस-पास देखा और शरमा कर दूर हो गई।
उसने कहा- बहुत मीठा चुम्मा था !
यह सुनकर मैं और शरमा गई क्योंकि सब देख रहे थे। उसने पूछा कि मेरे रहने का क्या किया। वैसे तो मैंने उसके रहने का इंतजाम अपने एक फ्रेंड के यहाँ किया था पर तभी एक शरारत सूझी और मैंने उसे कहा कि मेरा फ्रेंड ज़रूरी काम से बाहर गया है और उसे होटल में रुकना होगा। मेरी आँखों की चमक को देखकर वो शरारत से मुस्काया और कहा- चलो !
मैं भी खुश हो गई अपना काम बनते देख और ”मर्डर” होने और करने का इंतज़ार करने लगी, लेकिन उसके सामने भोली ही बनी रही।
उसने कहा- चल सकोगी होटल मेरे साथ? और अगर किसी ने देखा तो क्या करोगी?
एक बार को तो मैंने भी सोचा कि अगर किसी ने देख लिया तो मैं तो गई काम से, लेकिन दिमाग में जो चल रहा था वो ज्यादा पागल कर रहा था। मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, हम यहीं मिल लेंगे !
फिर हम होटल में गए। वहाँ उसने एक कमरा लिया और फिर हम कमरे में चले गए। उसका साथ पाकर मैं तो पागल हुई जा रही थी।
कमरे में आते ही उसने मुझे चूम लिया और बाहों में ले लिया। मैं तो ख़ुशी से पागल हो रही थी उसकी बाहों में आकर। फिर उसने मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी और मुझे एक गुलाब दिया। उसका प्यार देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर उसने कहा कि वो लम्बे सफ़र से थक गया है और दस मिनट में नहाकर आ रहा है। तब तक मैं टीवी देख लूँ।
मैंने कहा- ठीक है !
फिर वो नहाने चला गया लेकिन उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद नही किया। शॉवर की आवाज़ आने पर मुझे पता नहीं मुझे क्या सूझी, मैं चुपके से दरवाज़े के पास जाकर खड़ी हो गई और अन्दर देखने की कोशिश करने लगी। उसे बाथरूम में लगे दर्पण में नंगा नहाते देख मैं बहुत रोमांचित हो गई और मेरे हाथ पैर मचलने लगे उसे छूने को।
उसका लिंग मैंने पहली बार देखा उस दिन ! इतना लम्बा और मोटा ! यह देखकर मेरी चूत में खुजली होने लगी और मैं उसे लेने को तड़प उठी। पर यह सोचकर कि वो क्या सोचेगा कि कैसी लड़की है, मैं चुपचाप पलंग पर आकर टीवी देखने लगी। पर टीवी में मन कहाँ लग रहा था, मन कर रहा था कि बस जाकर चिपक जाऊँ उसके नंगे बदन से ! यह सोचकर फिर मेरी चूत गीली हो गई।
इतने में वो नहाकर आ गया, उसके गीले बदन को देख मेरे बदन में तो आग ही लग गई। मन किया बस टूट पडूं अपने शिकार पर ! उसके गीले बालों का पानी मुझ पर पड़ा तो ऐसा लगा जैसे जलते बदन में ठंडक पड़ गई। उसने बस तौलिया लपेट रखा था। फिर उसने पैंट पहनी और पलंग पर आ गया। उसके बाद उसने मुझे अपने पास खिसकाया और मुझे माथे पर चूमा और पूछा- कैसी हो?
मैंने कहा- अब तुम आ गए तो बहुत खुश हूँ और अब हम जन्मदिन साथ मना पाएँगे।
मेरे यह कहते ही उसमे मुझे प्यार से देखा और मेरे गुलाबी होठों को चूम लिया। मैं तो जैसे शर्म से मर ही गई।
उसने पूछा- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं ! बस शर्म आ गई।
फिर उसने मेरा मुँह ऊपर उठाया और कहा- बाथरूम में मुझे नहाते देख मुझे शर्म नहीं आई?
यह सुनकर मैं तो चौंक गई और शर्म से और लाल हो गई और कुछ कहते नहीं बना और उससे थोड़ा दूर हो गई। उसने फिर मुझे पास खींच लिया और लगा चूमने ! मेरी तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई मानो। उसके सामने सीधी बनने का नाटक करती रही और मन में बुलबुले उठते रहे।
उसने मुझे कहाँ कहाँ नहीं चूमा- होंठ पर, कान पर, हाथ पर, वक्ष पर ! इतने में मैंने फिर उसे दूर कर दिया और उसे तड़पाने लगी।
उसने कहा- क्या तुम ये नहीं चाहती थी जो दूर जा रही हो?
और कहा कि वो आज तो मुझे बहुत प्यार करेगा क्यूंकि मेरा जन्मदिन जो है।
मैंने कहा- कोई ज़बरदस्ती है क्या?
तो बोला- मैं सब जानता हूँ कि तुम्हारे मन में क्या है !
यह सुनकर ऐसा लगा कि बोलूँ- आजा मेरे राजा, मैं भी यही चाहती हूँ जो तुम चाहते हो ! पर फिर चुप हो गई और उसके सामने शर्माने का ढोंग करने लगी।
वो मुझे पकड़ने की कोशिश करता रहा और मैं उससे दूर भागने की। उसने कहा कि चुपचाप उसके पास खुद आ जाऊँ वरना वो मुझे नंगा कर देगा। यह सुनकर मेरी आँखें चमक उठी और लगी उसे और परेशान करने। आखिर कुछ देर परेशान होने के बाद उसने मुझे पकड़ ही लिया और मुझे बेइंतहा चूमने लगा और मैं भी उसकी मस्ती में खोने लगी।
काफ़ी देर चूमने के बाद उसने मुझे कहा कि वो तभी समझ गया था जब मैंने उसे बीच बाज़ार चूम लिया था कि मैं क्या चाहती हूँ और जब उसने बाथरूम में चोरी छुपे देखते हुए मुझे देखा। मैंने कहा- बस आज बहुत प्यार करने को मन चाह रहा है और जब भी मैं दूसरी लड़कियों को उनके बॉय-फ्रेंड के साथ देखती हूँ तब मेरा भी मन करता है कि मैं भी उसके साथ घूमूँ और प्यार करूँ !
उसने कहा कि वो मेरी यह इच्छा ज़रूर पूरी करेगा और ऐसे करेगा कि मैं कभी अकेला नहीं महसूस करुँगी।
मैंने कहा- सच ! और मैं उससे लिपट गई। उसने मुझे कस के बाहों में भर लिया और मेरे होंठ चूसने लगा। फिर उसने मेरे बाल कान पर से हटाये और कानों के आस-पास चूसने लगा और उन्हें किस करता रहा। इससे मेरे बदन में एक अजीब सी खुमारी छा गई और मैं अपना आपा खोने लगी। वो मुझे चूमता रहा और मैं बेहोश सी होने लगी। मन करता रहा कि बस वो मुझे चूमता रहे और मैं जन्नत में चली जाऊँ।
फिर उसने धीरे से अपने हाथ मेरे वक्ष पर रखे और उन्हें दबाया…आआआआआह्ह्ह्ह्ह ऽऽ क्या स्पर्श था वो ! उसने फिर थोड़ा और जोर से दबाया और म्म्म्म्म्म्म्म्म्म बस पागल सी होने लगी मैं। फिर उसने दूसरे स्तन के साथ भी यही किया और अब तो मैं बस और खोना चाहती थी।
फिर उसने मुझे पलंग पर लेटाया, मेरे ऊपर आ गया, मेरी आँखों में देखने लगा और कहा- तुम्हारी आँखें इतनी सेक्सी क्यों हो रही हैं?
मैंने कहा- बस तुम्हारे प्यार का नशा चढ़ा हुआ है !
यह सुनते ही उसने मेरे होंठ फिर चूम लिए और दोनों दूध को दबा दिया- ऊऊऊऊऊओह्ह्ह्ह्ह्ह्हह क्या बताऊँ कि कैसा लगा ! ऐसा लगा कि हाँ, बस आजा राजा और मार दे मुझे ! मैं इसी दिन के लिए तड़प रही थी। फिर वो मुझे चूमता रहा- चूमता रहा और धीरे धीरे नीचे जाने लगा। मैं तो बस रंगीन दुनिया में खोई हुई थी, उसने धीरे से मेरा कुरता उठाया और पेट पर चूम लिया….. हाय क्या बताऊँ – क्या हुआ- एक करंट सा दौड़ गया पूरे बदन में ४४० वाल्ट का !
फिर उसने मेरा कुरता ही उतार दिया और मैं आधी नंगी हो गई। उसने मेरी ब्रा भी उतार दी और खड़े होकर मुझे देखने लगा। मैंने कहा- क्या कर रहे हो, ऐसे मत देखो ! शर्म आ रही है.. उसने कहा- मेरी जान, आज शर्म छोड़ दे और मेरा साथ दे !
मैंने कहा- दूंगी मेरे बच्चा…. बहुत साथ दूंगी !
उसने फिर मेरे दूध को जोर से दबाया और कहा- कितने मस्त हैं गोरे-गोरे और गोल-गोल ! मन कर रहा है कि नोच लूँ !
मैंने कहा- नोचने की क्या ज़रूरत, तुम्हारे लिए ही एक महीने से रोज़ मालिश कर रही हूँ कड़ा करने के लिए !
वो बोला- हाय मेरी जान, आज तूने दिल खुश कर दिया।
मैंने कहा- अब तुम मुझे मेरा उपहार दो मुझे खुश करके !
बस फिर क्या था, फिर जो नहीं होना था वो सब होने लगा। उसने झट से मेरे पजामे को उतार दिया और मेरी चड्डी भी फेंक दी। मैं अब पूरी नंगी थी उसके सामने। बहुत शर्म आ रही थी। मैंने दोनों हाथों से दूध छुपा लिए और पैरों को क्रॉस कर लिया।
उसने कहा कि अब क्यों शरमा रही है और मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और मेरे ऊपर चढ़ गया और पैरों को भी खुद के पैरों से अलग कर लिया। फिर उसने मेरे दूध को चूसना शुरू किया और तब तक चूसता और खाता रहा जब तक वो लाल नहीं हो गए। बीच बीच में साले ने इतना काटा कि जान निकल गई पर मीठा सा एहसास भी हुआ मन को, लगा बस ऐसे ही ज़िन्दगी भर हम एक दूसरे के साथ रहें।
फिर उसने पैंट उतार दी और चड्डी भी और मुझे लण्ड चूसने को कहा। मैंने यह कभी नहीं किया था तो मुझे अजीब सा लगा और मैंने कहा- मैं नहीं कर पाऊँगी।
उसने कहा- एक बार कर तो, बहुत अच्छा लगेगा।
मैंने उसकी बात मान ली और उसके लण्ड को हाथ में ले लिया, वो ८ इंच का लण्ड पकड़ के ऐसा लगा जैसे लोहा हो। फिर उसे पहले चारों तरफ से जीभ से चाटा और लगी चूसने धीरे धीरे। कितना मीठा था वो। मन करा बस ऐसे ही इस आइसक्रीम को खाती रहूँ।
अचानक मैंने देखा कि वो बड़ा और मोटा हो गया है। मैं घबरा गई क्यूँकि मैंने इतना मोटा कभी नहीं देखा था।
उसने कहा- क्या हुआ?
मैंने कहा- यह इतना मोटा कैसे हो गया?
उसने कहा- यह चोदने को तैयार है बस !
मैं शरमा गई।
फिर उसने मेरी टाँगें फैलाई और मेरी चूत में ऊँगली डाल दी। उईईईईईईईइ ये क्या करा? मेरी जान निकल गई- मैंने कहा।
उसने कहा- क्या हुआ? अभी तो गिफ्ट भी नहीं मिला और पहले ही यह हाल ?
मैंने कहा- जालिम हो तुम, मैंने कभी किया नहीं है यह सब !
उसने कहा- तभी तो वो चोदना चाहता है क्यूँकि कुंवारी चूत का मज़ा अलग ही होता है।
और फिर वो मेरी चूत को खोलने लगा और उसे जीभ से चाटने लगा। उह्ह्ह्ह् आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह क्या कहूँ दोस्तो कि कितना अच्छा लगा। मैंने उसका सर पकड़ के चूत में गाड़ दिया। वो मुझे बहुत देर तक ऐसे ही मेरी चूत के अन्दर चूसता रहा और इस दौरान मेरा दो बार पानी भी निकल गया जिसे वो पी गया। फिर उसने अपने लौड़े को मेरी चूत के छेद पर रखा और अन्दर डालने लगा, लेकिन नहीं डाल पाया क्यूँकि मेरा छेद बहुत ज्यादा टाइट था। उसने फिर कोशिश पर फिर वही हाल।
मैंने कहा- मत करो न राजा ! बहुत दर्द होगा !
उसने कहा- अगर आज उपहार नहीं दिया तो जन्मदिन कैसे मनेगा?
मैं भी चाहती तो यही थी पर दर्द का सोचकर डर भी लग रहा था। उसने फिर क्रीम ली और मेरी चूत पर लगाई और फिर अन्दर धक्का देने लगा और इस बार तो वो आआ आआऽऽ आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् माँ ! थोड़ा सफल भी हो गया लेकिन मेरी नानी याद आ गई मुझे।
मैंने कहा- नहीं ! निकालो इसे ! मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाउंगी ! प्लीज़ !उसने कहा- नहीं अब वो नहीं रुकेगा ! और फिर एक धक्का दिया और पूरा का पूरा लण्ड अन्दर !
मैं तो जैसे जन्नत से नीचे गिर गई, मुझे रोना आ गया और मेरी चूत से खून भी आने लगा। उसने मुझे चुप कराया और कहा- कुछ नहीं होता जान ! ये सब होता है शुरू शुरू में ! और अब मज़ा आएगा।
और सच में कुछ देर के दर्द के बाद मैं फिर जन्नत में पहुंच गई। उसके बाद उसने मेरी गांड भी मारी और बहुत देर तक हम यही खेल खेलते रहे।
मुझे मेरा बर्थडे गिफ्ट भी मिल गया …।
इस तरह मना मेरा पहला सुहाग-दिन मेरे बॉय-फ्रेंड के साथ।
दो दिन ऐसे ही मिलने के बाद उसने मुझे फिर आने का वादा किया और मैं अब फिर उसका इंतज़ार कर रही हूँ जो शायद जल्दी ही ख़त्म हो जायेगा।
तो दोस्तो …. कैसी लगी आपको मेरी कहानी, ज़रूर बताना !
आपकी दोस्त Antarvasna
होली का दिन मेरे लिये शुभ दिन बन Hindi Sex Stories कर आया। उस दिन मेरे मन की एक बड़ी इच्छा पूरी हो गयी। सुनील मेरे दूर के रिश्ते में मेरा चाचा ही लगता था उन दिनों वो भी आया हुआ था। मुझे सुनील बहुत अच्छा लगता था। मुझे ऐसा लगता था कि हाय ! कभी मैं उसके साथ चुदाई करूं। पर ऐसा मौका कभी नही मिला। मै उस पर दिल से मरती थी।
होली उसे हमारे साथ ही खेलना था। चाचा और चाची उसके आने से बहुत खुश थे। सुनील उम्र में मुझसे दो साल छोटा था। सुनील 19 साल का रहा होगा। शाम को होली जलने वाली थी… चाचा ने होली के बाद की रस्में पूरी की और अपनी रात की शिफ़्ट में काम करने को चले गये…
रात को अचानक मेरी नींद खुल गयी। मैंने करवट ली और फिर से आंखे बन्द कर ली। मुझे लगा कि कोई बात कर रहा है। चाची के कमरे से आवाज आ रही थी। चाचा तो थे नहीं…फिर किस से बात हो रही थी।
मेरी उत्सुकता बढ गयी। मै बिस्तर से उतरी और चाचा के कमरे के दरवाजे के छेद पर आंख लगा दी। सामने सुनील खड़ा था। मैंने समय देखा रात के लगभग 12 बज रहे थे। इतनी रात को…? अभी तक सोये नहीं थे। मैं स्टूल धीरे से दरवाजे के पास रख कर आराम से बैठ गई… मुझे लगा कि आज तक तो चाचा चाची की चुदाई देखती थी… शायद आज कुछ और नजारा दिख जाये…
मैंने बड़े आराम से छेद पर आंख लगा दी। सुनील पहले तो चाची से बात करता रहा… फिर उसने चाची के ब्लाऊज़ पर ऊपर से ही हाथ फ़ेरा। चाची ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूंचियों पर दबा दिया। मेरे शरीर पर चींटियां रेंगने लगी… तो सुनील भी चाची के साथ मजे करता है…
चाची का नाम गीता है… गीता ने अपना एक हाथ बढा कर उसका लन्ड पकड़ लिया… उनका कार्यक्रम शुरु हो चुका था… मेरी चूत भी गरम होने लगी… मैंने अपनी चूंचियां दबा ली… और देखती रही… न जाने कब मेरी उंगली मेरे चूत में घुस गयी… और अन्दर बाहर होने लगी… सुनील चाची को खूब मजे से चोद रहा था।
चाची अपना होली का त्योहार बड़े आनन्द से मना रही थी… कभी में अपने बोबे भींचती कभी चूत को उंगली से चोदती… मेरे मुख से भी कभी कभी आह निकल जाती… सिसकारियां फ़ूट पड़ती… अचानक में झड़ गयी… मैंने अपनी चूत दबा ली… और आकर बिस्तर पर लेट गयी… पर नींद कहां थी… आवाज़ें अभी भी आ रही थी… मैंने फिर से उठ कर देखा तो अब गान्ड चुदाई हो रही थी… मैं फिर तरावट में आने लगी… मेरी फ़ुद्दी फिर फ़ुदक उठी… हाय… मैंने अपनी चूत को दबाया और मन कड़ा करके बिस्तर पर आ गई।
कुछ ही देर में चाची के कमरे से आवाजें आनी बन्द हो गयी… मैं सोने की कोशिश करने लगी… सवेरे उठते ही देखा कि सभी सो रहे थे। सुनील भी अपने कमरे में सो रहा था। मैंने जल्दी से चाय बनाई… पहले सुनील को उठा कर चाय दी फिर चाची यानी गीता को चाय दी। गीता ने सुस्ताते हुये कहा,’ नेहा इधर बैठ…तुझसे कुछ पूछना है…’
‘हाऽ… आन्टी… कहो…’
‘एक बहुत पर्सनल सवाल है… सुनील के बारे में…’ गीता ने कहा। मैं एकदम से सहम कर गीता को देखने लगी।
‘सुनील के बारे में… हां… क्या?’
‘सुनील तुम्हारे बारे में कल पूछ रहा था… क्या तुम्हें वो अच्छा लगता है…’ मैं एकदम से झेंप गई।
‘आन्टी… हां अच्छा है… पर ऐसा क्यू पूछा…’
‘कल तुम रात को हमें उस छेद से देख रही थी ना…’ गीता ने तिरछी नजर से मुझे मुसकरा कर पूछा…
‘ना…नहीं तो… वो…तो…’ एकदम से सीधा वार हुआ।
‘हम दोनों को पता है…तुम देख रही थी… पर हमने तुम्हें देखने दिया…’ गीता ने मतलबी निगाहों से मुझे मुस्करा कर देखा।
‘आन्टी… सोरी… अब नहीं होगा…’
‘सुनील तुम्हारे साथ रात वाला काम करना चाहता है… बोलो है इच्छा…’
‘आन्टी… सच… ‘ मैंने शरमा कर गीता की गोदी में अपना मुहं छुपा लिया ‘पर आन्टी मुझे शरम आयेगी ना…’
‘जब दो दिल राज़ी तो वहां शरम का क्या काम… फिर मैं हू ना…’
सुबह सुबह होली खेलने के दिन मेरे लिये सुनील क पैगाम ले कर आया… मैंने गीता के गाल पर एक प्यार का चुम्मा ले लिया। गीता मुसकरा उठी… ‘ नेहा… बेस्ट ओफ़ लक…’
‘हटो आन्टी… आप बड़ी वो है…यानी अच्छी हैं…’ मैं खुशी से फ़ूली नहीं समा रही थी… मैंने तुरन्त कपड़े बदले और होली के लिये सफ़ेद ड्रेस पहन लिया। हल्का सा मेक अप किया और इठला कर सुनील के कमरे में गई…
‘चाय का कप?… ‘ मैंने सुनील से बड़ी अदा से कहा… सुनील मुझे देखता ही रह गया…उसने मुझे चाय का कप थमा दिया।
मैंने कहा- आज तो होली है… 8 बजे से हम तो होली खेलेंगे… तैयार रहना…
मेरी सहेलियां और गीता के मिलने वाले आने लगे थे। मिठाईयां खाई और खिलाई जा रही थी। सभी रंग में रंगे थे। मैं आज कुछ ज्यादा ही खुश थी… क्योंकि सुबह ही मुझे चुदाई का न्योता मिल गया था… रह रह कर मैं सुनील के पास जा कर उसे रंग लगा रही थी। सुनील भी अब शरारत करने लगा था… वो कभी मेरा हाथ पकड़ लेता… कभी मेरी पीठ पर धीरे से हाथ मारता। मुझे सिरहन होने लगती थी।
‘नेहा… एक काम करा दे… ये सामान ऊपर वाले कमरे में ले चल…’ गीता ने आवाज लगाई। मैं भाग कर अन्दर गई… और सामान ले कर गीता के साथ ऊपर कमरे में आ गई।
गीता ने पूछा- सुनील के क्या हाल है…?
‘आन्टी… बड़ी मस्ती कर रहा है…’
‘तेरी ऐसे करके… चूंचियां दबाई कि नहीं…’ गीता ने मेरी चूंची दबाते हुये कहा।
इतने में सुनील वहां आ गया… गीता ने सुनील को देखते ही कहा,’ले नेहा… सुनील आ गया… अब तू चुदेगी…’ फिर मेरे कान में बोली ‘तबियत से चुदवा लेना… इसका लन्ड सोलिड है…’
मैं शरमा गयी…
गीता ने सुनील को कहा,’आ गये तुम… अब ये रही नेहा… अब होली के मजे करो… मैं जा रही हूं… दरवाजा अन्दर से बन्द कर लेना…’
‘चाची…मत जाओ ना… मुझे शरम आयेगी…’
सुनील मुस्कराया… और बोला- अब चाची?… मेरे साथ होली तो खेलो… और नेहा…तुम बच कर कहां जाओगी’
कहते हुये सुनील ने मेरे चेहरे पर गुलाल लगा दी… उसके हाथ अचानक मेरी चूंचियों पर आ गये और मेरे कुरते में अन्दर हाथ डाल कर मेरे उभारों पर गुलाल मल दिया साथ में मेरे उभारों को भी मसल डाला… गीता ने देखा सुनील शुरु हो चुका है तो वो बाहर जाने लगी। इस हमले से मैं एकदम मस्त हो गयी। सुनील के मेरे उभारों को दबाने से मै उसे देखती रह गयी… मुझे शरम आने लगी पर साथ ही मैंने अपने उभारों को और आगे उभार दिया… उसे चूंचियां मसलने का पूरा मौका दिया। सुनील ने मेरे बोबे हाथों में भर लिये। मैं सिसक उठी।
‘सिर्फ़ तेरे बोबे ही तो मचका रहा है…अभी तो देखती जा…’ गीता ने कमरे को बन्द कर दिया। सुनील ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया। मैं सिमट कर खड़ी हो गयी। सुनील ने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और अपनी बाहों में भर लिया । उसके लन्ड का कड़ापन मुझे चूत के आसपास चुभने लगा था।
मैंने जानकर कहा- मेरे पीछे मत दबाना… गुदगुदी होती है…’
‘अच्छा… कहां पर… यहां चूतड़ों पर…’ और उसने मेरे दोनो गोल गोल चूतड़ मसल डाले। मै और शरमा कर सिमटने लगी।
‘जानती हो… शरमाने वाली लड़की को चोदने से बड़ा आता है…’
‘हाय…ऐसे नहीं बोलो ना…’
इधर सुनील ने अब मेरे कुर्ते को उतार दिया। मेरे दोनो उरोज तन कर सामने आ गये। फिर उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे उतार दिया और मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया। नंगी होने से मुझे शरम आने लगी मैं नीचे बैठ गयी।
सुनील ने प्यार से मुझे उठाया और कहा,’नेहा… तुम्हारी जगह बिस्तर पर है… उठो…’
मैंने जैसे ही नजर उठाई… सुनील सामने नंगा खड़ा था। उसने कब खुद के कपड़े कब उतार लिये थे ये पता ही नहीं चला। मैंने अपनी आंखे बन्द कर ली और अब मुझे होने वाली चुदाई नजर आने लग गयी थी। उसका लन्ड खड़ा हुआ था।
मैंने धीरे से उसका लन्ड पकड़ लिया। और उसकी चमड़ी ऊपर सरका दी… उसका फूला हुआ लाल सुपाड़ा मेरे सामने था। मैंने जीभ से उसे चाट लिया। सुनील कराह उठा। उसका लन्ड कड़क होता जा रहा था। मैंने अब सुपाड़ा मुँह में भर लिया। और उसका लन्ड नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करने लगी। सुनील ने मेरे बोबे पकड़ लिये और उन्हे धीरे मसलने लगा। बोबे पर से लाल गुलाल अब हटने लगा था।
उसने लन्ड मेरे मुंह से निकालते हुए सुनील ने कहा,’ झुक जाओ… घोड़ी बन जाओ… देखो नेहा… अब तुम चुदने वाली हो… तैयार हो ना…’
‘हाय रे… नंगी तो हूं ना…सुनील… ‘ मैंने कहा और शरमा गयी…
मैंने बिस्तर पर अपने दोनो हाथ रख लिये और गान्ड पीछे उभार कर गान्ड की दोनों गोलाईयां उसके सामने कर दी। उसने अपना लन्ड हाथ से सहला कर मेरी गोलाईयों के बीच दरार में रख दिया। उसका लन्ड जैसे ही मेरी दरारों में लगा मुझे झुरझुरी आ गयी। अब उसका लन्ड सरक कर मेरी गान्ड के छेद पर आ टिका था। उसकी इच्छा गान्ड चोदने की थी…
मेरी गान्ड उसके लिये पूरी तरह से तैयार थी। उसके दोनों हाथ मेरी चूंचियों पर आ कर जम गये थे। कुछ ही क्षणों में उसने मेरी चूंचियां भींचते हुये लन्ड पर जोर मारा… फ़क से उसका मोटा सुपाड़ा छेद में घुस पड़ा। मुझे हल्का सा दर्द हुआ। पर मोटे लन्ड का प्यारा सा अहसास हुआ। मेरी गान्ड में फंसा उसका लन्ड मुझे असीम आनन्द दे रहा था…
तभी उसका एक जोरदार धक्का पड़ा… मेरी चीख निकल गयी,’हायीईईऽऽऽ… ओह्… सोरी… ‘
‘नेहा… देखो ये कब से तुम्हारा दीवाना है…पूरा जाने दो अन्दर इसे…’
‘हाय सुनील… हां जाने दो…’
मेरी गान्ड पर उसने अपना थूक टपका कर उसे और चिकना बना दिया।
‘हाय मेरे राजा…थूक लगा कर चोदोगे…?’
सुनील हंस पड़ा… और उसका लन्ड मेरी गान्ड में अन्दर बाहर सरकने लगा। मेरे सारे शरीर में उत्तेजना की लहर दौड़ पड़ी। मुझे उसके लन्ड का अन्दर बाहर जाना और रगड़ का अह्सास मस्त किये दे रहा था।
‘हाय सुनील… ये तुम्हारा लन्ड कितना प्यारा है… कैसा सरक रहा है…’
सुनील को ये सुनते ही और मस्त हो गया और मुझे अच्छा लग रहा है ये जानकर और भी जोश में आ गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड में अब तेजी से उतरने लगा था। मेरी गान्ड चुद कर मस्त हो रही थी । मुझे हालांकि चुदाई जैसा तेज मजा तो नहीं आ रहा था…पर मैं सुनील को यही जता रही थी कि मैं आनन्द से पागल हुई जा रही हूँ।
‘हाय मेरे राजा चोद मेरी गान्ड को… पेल दे अपना लन्ड… हाय क्या लन्ड है…’
सुनील मेरे आनन्द को देख कर और ही मस्त हुआ जा रहा था। अब उसने मेरी गान्ड में से अपना लन्ड निकाल लिया… मुझे लगा कि शायद ये झड़ने वाला होगा… उसने अपने लन्ड को मेरी चूत पर मारा… मेरा चिकना पानी चूत में भरा था।
उसका गीला लन्ड मेरी चूत के बाहर फ़िसलने लगा फिर सरकता हुआ चूत में अन्दर बढ चला। अब सच में मेरी जान निकलने की बारी थी… तीखी मिठास के साथ मेरे चूत में उसका लन्ड अन्दर जा रहा था…ये था असली चुदाई का मजा। मै चिहुंक उठी। मुख से मीठी सी सिसकारी निकल पड़ी।
‘हाय रीऽऽऽ सुनील…मेरी चुद गई रे… हाय घुसा दे राम…’
‘नेहाऽऽऽऽ… तुम्हारी चूत मुझे मार डालेगी मुझे…’ सुनील भी कराहता हुआ बोला। उसके हाथ मेरी चूंचियो को मींज रहे थे। वो कभी मेरे चूंचक खींचता कभी जोर से मसक डालता। मै निहाल हो उठी थी। मेरी चूत में गजब की मिठास भरती जा रही थी… मैं तेजी से सीमाएँ पार करने लगी… लगभग मेरे मुँह से सीत्कारें निकलने लगी।
‘आये हाय रे…मेरे राजा… चोद दे रे… मेरी चूत तो गयी आज… हाय मै चुद गयी…’
‘मेरी रानी… तेरी चूत की मैं आज मां चोद दूंगा… साली को फ़ाड़ दूंगा…’
सुनील का धीरज भी छूटता जा रहा था। वो गालियों पर उतर आया था… यानी अब सब कुछ उसके आपे से बाहर था…
‘साली…रंडी… तेरी भोसड़ी मारूं… मेर लन्ड हाय रे…’
‘मेरे प्यारे सुनील।… हां हां…मेरी चूत का भोसड़ा बना दे… लगा…जोर से चोद्… हाय राम्…’
‘हाय मेरी छिनाल… तेरी बहन को…तेरी मां को… रे… आऽऽऽह… सबको चोदा मारू… मेरी नेहा…’
उसकी मीठी मीठी गालियां सुन कर मेरी चूत में जोरदार मिठास भरने लगी… मैं चरमसीमा पर पहुंचने लगी। उसकी नन्गी बातों ने मुझे झड़ने की ओर अग्रसर कर दिया। मैं अपने आप को रोकती रही…पर असफ़ल रही… मेरी चूत का पानी आखिर छूट ही पड़ा।
‘सुनील…आय राम…मैं तो गई… जरा जोर से झटके मार…’ उसने मेरी चूंचियां और दबाई और झटके मारने लगा… पर हाय रे…मै अब झड़ने लगी… मैं अपनी चूंचियां उससे छुड़ाने लगी…मेरी चूत अब बार बार लहरें मार मार कर अपना रस छोड़ रही थी। मै अब पूरी झड़ चुकी थी। मैं अब बस और नही चुदना चह्ती थी। पर उसने और जोर लगा कर लन्ड मेरी चूत में दबा दिया,’आह नेहा… मैं गया… आया… निकला रे…’ मैंने अपनी चूत में से उसका लन्ड तुरंत निकाल लिया।
‘ओह्…नहीं…रूको…ऽभी नहीं…’ पर मैंने लन्ड निकाल कर उसे मुठ में ऐसा दबाया कि उसके लन्ड ने मेरे हाथ में अपना वीर्य छोड़ दिया। मैं उसके लन्ड को दूध निकालने जैसे खींच कर दुहने लगी… उसके लन्ड से पिचकारी निकल कर मेरे हाथों को गीला कर रही थी…उसका सारा वीर्य उसके लन्ड पर मल दिया… और अपने गीले हाथों में उसका वीर्य अपने होंठो से चाट लिया… सुनील ने बड़े प्यार से मुझे देखा और अपने नंगे बदन से मेरा नंगा बदन चिपका लिया…हम कुछ पल ऐसे ही लिपटे खड़े रहे और प्यार करते रहे।
फिर सुनील अलग हो गया और अपने कपड़े पहनने लगा। मैंने भी जल्दी से कपड़े पहन लिये। सुनील ने ज्योंही दरवाजा खोला तो गीता सामने खड़ी थी…
‘अरे गीता… यहां कब से खड़ी हो…’
‘अरे सुनील जी… दिन को चुदाई कर रहे हो…बाहर पहरा दे रही थी…’ मैं सर झुका कर चुपके से निकलने लगी।
‘नेहा… चुदवा कर शरमा रही हो… अब इस चुदाई की हमें मिठाई तो खिला दो…’ गीता बड़ी बेशरमी से बोली।
‘रात को सब मिल कर खायें तो मजा आयेगा ना…’ गीता और सुनील दोनो हंस पड़े… मैंने शरमा कर अपने हाथों से अपना मुँह छुपा लिया… गीता से प्यार से मुझे चूम लिया। Hindi Sex Stories
मेरा नाम संजू सिंह, उम्र Indian Sex Stories चब्बीस साल, चेन्नैई में रहता हूँ। अमिं अन्तर्वासना पर नियमित रूप से कहानियाँ पढ़ता हूँ।
अब मैं आपको अपनी एक कहानी सुनाता हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं इन्ज़िनियरिंग कर रहा था। मेरे एक दोस्त ने मुझे काल-बॉय सेवा के बारे में बताया और कहा- इसमें आमदनी भी अच्छी है और मज़ा भी है। तो पैसे के लिए मैं भी यह काम करने को तैयार हो गया और मेरे दोस्त ने मेरा सम्पर्क ऐसे किसी आदमी से करा दिया जो इस तरह का काम करता था।
एक दिन उसने मुझे एक महिला से मिलवाया। उस औरत का नाम हिना था, वो लगभग ३३ साल की होगी पर उसका फ़ीगर मस्त था। उसके कपड़े देख कर लग रहा था कि वो बहुत अमीर है।
उस औरत ने मुझे एक होटल में मिलने को कहा। जब मैं वहाँ पहुँचा तो वो मेरा इन्तज़ार कर रही थी। हम दोनों होटल के कमरे में गए। उसने मेरा नाम पूछा और साथ ही यह भी पूछा- तुमने कभी चुदाई की है?
मैंने कहा- किया है पर आपकी उम्र की स्त्री के साथ नहीं। तब उसने मुझे मेरा लण्ड दिखाने को कहा और देख कर कहा कि यह तो बहुत ही लम्बा है, मेरे पति का तो इतना नहीं है। यह सुन कर मेरा थोड़ा आत्मविश्वास जागा और मैंने उसको बोला- कुछ घण्टे के लिए मैं आपका गुलाम हूँ और आपकी खिदमत के लिए आया हूँ, अगर आप मेरी बात मानती हैं और मेरे तरीके से चुदाई करवाती हैं तो आपको बड़ा मज़ा आएगा।
वो मैडम मान गई और मैंने अपना काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मैंने उसके होंठों को चूमा दस मिनट तक। उसको बड़ा मज़ा आया। फ़िर मैंने उसके स्तनों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाना शुरू किया तो वो आहऽ ह ऊहऽऽई करने लगी। फिर मैं धीरे धीरे उसके कट्स में किस करने लगा उसको बड़ा मजा आने लगा।
उसने कहा- तुम तो बड़े एक्सपर्ट हो !
तो मैंने उसको कहा- आपका सेवक हूँ !
फिर मैं अपने कम में लग गया और मैंने धीरे से उसके ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। अब वो कसमसाने लगी, फिर मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। उसके बूब्स देख कर मैं हैरान रह गया। क्या मस्त बूब्स थे ! मजा आ गया !
अब एक स्तन को मैंने मुंह में रखा और दूसरे को हाथ से दबा रहा था, उसे बहुत मजा आ रहा था, वो बोल रही थी- और दबाओ ! और चूसो !
मैंने और जोर से दबाना चालू कर दिया। अब मैंने धीरे से एक हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया। उसकी पैंटी उसके चूत के रस से भीगी थी। तब मैंने उसकी साड़ी भी खोल दी और उसकी पैंटी को भी निकाल दिया।
अब वो पूरी नंगी हो गई थी। मैं उसकी बूर में २ मिनट तक नीचे से ऊपर तक जीभ फिराता रहा। उसने बोला- ऐसे मत करो, नहीं तो मैं लीक हो जाऊँगी।
तो मैंने उसको कहा- यह तो पहली बार है, अभी तो मैं आपको कितनी बार लीक करूँगा। मैंने जीभ हिलाना चालू रखा और वो सचमुच लीक हो गई।
मैंने उसकी क्लिट को चूसना करना शुरू किया तो १० मिनट में ही फिर से वो सिसकियाँ लेने लगी और मुझे कहा- जल्दी से चुदाई करो ! मैं इंतजार नहीं कर सकती !
मैंने कहा- अभी तो शुरू ही किया है, और तुम बोलती हो कि चोदो !
मैंने फिर जीभ उसकी बूर में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा तो उसे मजा आने लगा। ऐसे मैंने ५ मिनट तक किया तो उसने कहा- मुझे कब तक तड़पाओगे? अब तो करो !
मैंने कहा- रुकिए मैडम ! अभी और मज़ा आएगा !
मैं उसके स्तन चूसने लगा और एक उंगली उसकी बुर में अन्दर बाहर करने लगा।
वाह डार्लिंग ! मज़ा आ रहा है।
थोड़ा ऐसे करने के बाद मैंने दो उंग्लियाँ उसकी बुर में डाल दी। उसे बड़ा मज़ा आया।
अब मेरा लण्ड भी काबू से बाहर होने लगा था तो मैंने अपने लण्ड को मैडम की बुर के सामने रखा और धीरे से घुसा दिया। उसने आह! किया और कहा- कितना बड़ा है तुम्हारा लण्ड ! प्लीज़ धीरे से करो !
तब मैंने धीरे से धक्का मारा तो पूरा अन्दर चला गया और फ़िर मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा। ८-१० धक्कों के बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी कमर उठा कर मदद करने लगी। मेरे करने के बीच वो दो बार लीक हो गई और जब मैं लीक होने वाला था तो उसने कहा- अन्दर लीक मत होना ! मेरे मुंह पर करना !
तब मैंने उसके मुंह पर लीक किया, उसे बड़ा मज़ा आया। फ़िर हम दोनों ने थोड़ी देर बेड पर आराम किया।
फ़िर मैंने कहा- यह तो पहली पारी थी, अब दूसरी पारी शुरु करते हैं।
वो मुझसे ही पूछने लगी- तुम ही बताओ कैसे शुरू करें?
तब मैंने कहा- तुम मेरा लण्ड चूसो और मैं आपकी चूसता हूँ।
हम दोनों ६९ होकर एक दूसरे को मुख-मैथुन सुख प्रदान करने लगे। फ़िर हमने एक बार और सम्भोग किया और फ़िर बाथरूम में फ़्रेश होकर कपड़े पहने। जब हम होटल से जा रहे थे तो उसने मुझे दस हज़ार रुपए दिए। मैंने मैडम को धन्यवाद दिया और हम अपने अपने रास्ते चले गए। Indian Sex Stories
दोस्तो, आज मैं Sex Stories अपनी कहानी आप को पहली बार लिख रहा हूँ। उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप को अच्छी लगेगी क्योंकि मेरी यह कहानी कहानी न हो करके एक असलियत है जो मेरे साथ घटित हुई है।
मेरा नाम सुरेश है और मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। मैं एक मध्यम परिवार का शादीशुदा मर्द हूँ, मेरा भी मन करता था कि मैं भी किसी के साथ सम्भोग करुँ। कोई ऐसी लड़की मिल जाये जो मुझे प्यार करे, जिसके साथ मैं खुल कर बातें कर सकूं और अपने मन की बात कह सकूँ।
दोस्तो और सहेलियो, अब आप मेरी कहानी सुनिए :
मैं एक बहुत ही शरीफ लड़का था, मेरी शादी को बारह साल हो चुके थे। मैंने अपनी पत्नी के अलावा और किसी भी लड़की की तरफ कभी आँख उठा करके भी नहीं देखा था। करीब गयारह साल के बाद मेरी भी इच्छा हुई कि मेरी भी कोई दोस्त होती जिसे मैं भी आराम से चोद सकता और वो मुझसे चुदाई करवा के खुश हो जाती।
मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई जो कि मेरी हम-पेशा है। मैं उसका नाम नहीं बता सकता (कृपया मुझे माफ़ करें) हम लोग करीब साल भर बात ही करते रहे, न मैंने पहल की और न ही उसने कभी कहा कि उसका मन मुझसे मिलने को कर रहा है।
वो भी शादीशुदा है और मैं भी!
हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास भी है, पर पिछले साल अचानक उसने मुझ से कहा कि वो मुझसे अकेले में मिलना चाहती है। मैं तो पहले से ही तैयार था पर डरता था कि कहीं वो गुस्सा न हो जाये। उसके कहने पर तो जैसे मुझे मन मांगी मुराद ही मिल गई हो।
मैंने तुंरत उसे फ़ोन करके पूछा- बताओ कहाँ चलें?
तो उसने कहा- जहाँ आपको अच्छा लगे, वहीं चलते हैं, लेकिन जल्दी वापिस आना होगा!
मैंने कहा- ठीक है!
मैंने तुंरत अपनी कार निकाली, उसे जहाँ उसने कहा था, वहां से लिया और चल पड़े! मैं कभी बाहर नहीं गया था, मैंने अपने एक दोस्त को फ़ोन किया (जो हर हफ्ते अपनी गर्ल फ्रेंड को लेकर जाता है ) और उसे कहा कि मेरे लिए एक कमरा बुक करवा दो!
उसने होटल में फ़ोन किया, उसके दो मिनट बाद ही हम वहां पहुँच गए और मैनेजर से बात करके कमरे में चले गए। कमरे में जाते ही हमने अन्दर से बंद कर लिया और जोर से जफ्फी डाली जैसे दो साथी जनम-जनम से बिछड़े पता नहीं कितनी देर बाद मिले हों!
इसके बाद हम दोनों ने आपस में मुँह में मुँह डाल कर किस किया और जाने कब तक करते रहे।
फ़िर उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया। मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि वो मुझे इस तरह का मज़ा देगी। उसने मेरे पूरे के पूरे लण्ड को अपने मुंह में भर लिया। मुझे तो बस कुछ मत पूछो कि कितना मज़ा आया! बता ही नहीं सकता!
थोड़ी देर चूसने के बाद उसने अपनी चूत की तरफ इशारा करके कहा- अब अपना लण्ड इसमें डालो! पता नहीं कब से प्यासी है यह तुम्हारे लण्ड के लिए!
मैंने उसे सीधा लिटाया और उसकी चूत पर लण्ड रखा और अन्दर डालने लगा तो ऐसे लगा थोड़ी टाइट है, मैंने उससे पूछा- क्या बात है? चूत बहुत टाइट है? (उसके दो बच्चे हैं)
तो उसने कहा- बहुत दिनों से प्यासी है चूत तुम्हारे लण्ड के लिए! जल्दी डालो! लेकिन आराम से! नहीं तो दर्द होगा!
मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए उसे मेरे लण्ड की बहुत जरूरत है। मैंने अपने लण्ड को उसकी चूत में डाला। मेरा लण्ड बहुत ही टाइट जा रहा था उसकी चूत में! मेरा लण्ड 7″ का है और 3″ मोटा है,
उसने कहा- तुम्हारा तो बहुत मोटा है!
तो मैंने कहा- कोई बात नहीं! तुम्हारे अन्दर फिट हो जायेगा!
मैंने जैसे ही उसकी चूत में अपना लण्ड डाला, वो चिल्लाने लगी- थोड़ा आराम से करो न! बहुत दर्द हो रहा है!
तो मैंने कहा- कोई बात नहीं मेरी जान! चिंता मत करो! सब ठीक हो जायेगा!
और उसके होंठ चूसने लगा।
थोड़ी देर लण्ड उसकी चूत में रहा तो वो कहने लगी- अब करो न प्लीज़!
तो मैंने उससे पूछा- अब दर्द कैसा है?
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी करो! मेरी चूत को फाड़ डालो! जल्दी करो! मेरी चूत को मसल डालो!
तो मैंने अपना काम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में ही वो झड़ गई लेकिन मेरा अभी तक नहीं हुआ था। (दोस्तों मैं आप को बात बता दूं कि मेरा तब तक नहीं होता जब तक मैं नहीं चाहता, यह मेरा अनुभव है)
फिर मैंने उसे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया।
वो बोली- आप बहुत जोर से करते हो और बहुत ज्यादा करते हो! क्या खाते हो?
मैंने कहा- मैं तो सिर्फ दूध ही पीता हूँ! और वो भी दो थन वाली गौ का!
वो बोली- धत्त! बेशरम! चलो अब जल्दी करो!
मुझे भी जल्दी थी क्योंकि इस बीच मेरे पास दो तीन फ़ोन आ गए थे कि कहाँ हो?
तो मैंने जल्दी-जल्दी जोरदार शॉट लगाये और 40-50 शॉट लगा के मैं भी झड़ गया। मैंने अपना सारा रस उसकी चूत में ही डाल दिया और 5 मिनट उसके ऊपर ही लेटा रहा। मैं पसीने से नहा गया था। उसने मेरे बदन से पसीना पौंछा और खड़ी हो गई।
मैंने उससे पूछा- कैसे लगा?
तो उसने कहा- आप बहुत जोर से करते हो और बहुत समय लगाते हो!
मैंने पूछा- मज़ा आया या नहीं?
तो उसने कहा- मज़ा तो बहुत आया! मैं पूरी तुम्हारी हो गई हूँ।
अब तक हम बहुत बार मिल चुके हैं, एक दो बार वो गर्भवती भी हो गई तो उसने वो गर्भ गिरा दिया क्योंकि वो और बच्चा नहीं चाहती थी और न ही मैं चाहता था। अब हम जब भी मिलते हैं तो कंडोम इस्तेमाल करते हैं ताकि कोई खतरा न रहे।
एक बात मैं आप को बता दूं यह कोई कहानी नहीं, मेरी लव स्टोरी है। दूसरी बार कुछ लिख पाऊँगा या नहीं यह सब आपके जवाब आने पर!
मुझे मेल करें। Sex Stories
हेल्लो Antarvasna के पाठकगण!
कैसे हैं आप सब! इस बार रमज़ान की वजह से मैं नेट पर रेगुलर नहीं आ पा रही हूं। खैर! अब वक्त मिला है
तो आप सबकी खिदमत में एक नई कहानी अर्ज है और आप सबके बहुत सारे मेल मिले।
शुक्रिया मेरी कहानिया पसन्द करने का।
हां तो आज मैं आप सबको बता रही हूं कि अम्मी कहीं बाहर गई हुई थी और जैसा कि आप सबको पता ही है मेरे अब्बू और भैया मुझे कई बार चोद चुके हैं और दो चार बार तो साथ में भी चोदा है उन दोनों ने।
खैर करीब 15 दिन हो गये थे और मैंने उन दोनो से चुदाया नहीं था क्यूंकि मैं अपने बॉयफ़्रेंड से चुदवा कर बहुत थक जाती थी साला हरामी पता नहीं क्या खा कर चोदता था सारे कस बल ढीले कर देता था. पर वो किसी काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और मेरी आदत लगभग रोज़ ही चुदाने की हो गई थी जब तक बुर में लण्ड ना डलवा लूं चैन ही नहीं आता था।
पर इधर करीब 15 दिन से मैंने नहीं चुदवाया था और उस दिन रात को मैं अपने रूम में एक ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी जिसमें एक लड़की को चार चार साले मुस्टण्डे चोद रहे थे और वो भी साले काले काले हबशी, जिनके मोटे मोटे लण्ड देख कर मेरी आंखें भी फ़ट गई और उस लड़की के तो कहने ही क्या साली इस तरह अपनी गाण्ड और बुर चारों से मरवा रही थी जैसे पता नहीं कबसे चुदवाती आ रही हो।
खैर जब मूवी देखने के बाद मुझपे भी मस्ती चढ़ी तब मैं अपने अब्बू के रूम की तरफ़ गई और धीरे से अन्दर चली गई अब्बू सो रहे थे। मैंने धीरे से उनकी लुंगी हटा दी और उनका मुरझाया हुआ लण्ड हाथ में लेकर सहलाने लगी।
अब्बू थोड़ा सा कुनमुनाये और करवट लेकर सीधे हो गये अब मैंने अपनी निकर उतारी और पूरी तरह से नंगी हो गई और अपने जलते हुए होंठ लेकर उनके लण्ड को इतनी जोर से काटा कि वो ‘आआह्ह हह्हह’ कर के उठ बैठे और मुझे देखते ही बोले- मेरी रानी बेटी को आज मेरी याद कैसे आ गई?
और मेरे बाल पकड़ कर फ़िर से मेरे मुँह में अपने लण्ड को धकेल दिया जिसे मैं मज़े से चूस रही थी.
तब अब्बू ने कहा- मेरी बेटी को आज मेरा ख्याल कैसे आ गया?
तो मैंने कहा- अब्बूजान, मैं आज अपने रूम में ब्ल्यू फ़िल्म देख रही थी, उसमें एक बहुत ही कम उमर की लड़की चार चार लोगों से एक साथ चुदवा रही थी।
तब अब्बू ने कहा- मां की लोडी साली फ़िरंगी (अमेरिकन) होगी। वहां के लोग ऐसे ही होते हैं।
तो मैंने कहा- अब्बू, मैं भी ऐसे ही चुदवाऊँगी।
तब अब्बू ने कहा- नहीं मेरी बच्ची, उस तरह तो यहां की अच्छी अच्छी चुदक्कड़ औरतें भी नहीं चुदा पाती, तो तू तो अभी बहुत कमसिन है.
मगर मैं ज़िद पे उतर आई और कहने लगी- नहीं अब्बू, आपको मुझे चार लोगों से एक साथ चुदवाना ही होगा। अपनी प्यारी बेटी के लिए चार लंड का इंतजाम करो!
तब अब्बू ने कहा- अच्छा … लेकिन अभी चार लोग कहां से लाऊं। अभी तो सिर्फ़ मैं ही हूं और ज्यादा चुदासी हो तो जा बगल के रूम में तेरा भैया साला हाथ की लगा रहा होगा उसको बुला ला!
और मैं नंगी ही भैया के कमरे की तरफ़ गई तो देखा कि भैया हकीकत में पूरी तरह से नंगा होकर अपने लण्ड को सहला रहा था। मैं दरवाज़े की आड़ से छुपकर देखने लगी और अब भैया जल्दी जल्दी हाथ चला रहा था और उसके मुँह से ‘ऊऊह ऊऊह्ह्ह आआअह्ह आआ आआह्ह …’ की आवाज़ निकल रही थी।
तभी मैं दौड़ कर भैया के पास पहुँची और जल्दी से उसके लण्ड को अपनी चूचियों पर पटकने लगी उसका लण्ड लम्बा होकर बस अपना रस उड़ेलने ही वाला था। जैसे ही मैंने उसके लण्ड को हाथ में लेकर अपनी चूची पे रगड़ा तो उसके लण्ड से ढेर सारा माल निकल पड़ा और मैं उसके गाढ़े रस को जल्दी जल्दी अपनी चूची पे रगड़ते हुए बोली- भाईजान अब्बू ठीक ही कह रहे थे; तुम तो सही में हाथ की लगा रहे हो। अरे मेरे प्यारे चोदू भैया जब तेरे पास इतनी खूबसूरत चूत है चोदने के लिये तो किसलिये हाथ की मार रहे हो?
तब भैया मेरी चूची को जोर से दबाते हुए बोला- अरे मेरी चुदक्कड़ बहन, हाथ की मारने में भी बहुत मज़ा आता है।
तो मैंने कहा- अच्छा, अब चलो, अब्बू अपने रूम में बुला रहे हैं और मैं उसके झड़े हुए लण्ड को हाथ से पकड़ कर खीचते हुए अब्बू के रूम में ले आई।
तब अब्बू ने कहा- क्या हुअ बेटी, बहुत देर लगा दी।
मैंने कहा- अब्बू, आपने सही कहा था भैया हाथ की लगा रहे थे, वो तो मैं सही वक्त पर पहुँच गई वरना तो इन्होने अपना कीमती माल बरबाद कर ही दिया होता!
तब अब्बू हंसते हुए बोले- बेटी तजुरबा भी कुछ होता है मैंने तो पहले ही कहा था ये साला हाथ की मार रहा होगा। अच्छा, अब जल्दी से बेड पर आओ और मज़ा करो!
फ़िर जैसे ही मैं बेड पर चढी अब्बू मुझसे बोले कि अपने दोनों पैर उनके कन्धों पर रखूं और एक दूसरे से लपेट लूं। मैंने ऐसा ही किया अब मेरी चूत अब्बू के बिल्कुल मुँह के पास थी और मैंने अपने दोनों पैर अब्बू की गर्दन के पीछे लपेटे हुए थे।
अब अब्बू धीरे धीरे खड़े होने लगे जिससे मुझे डर लगने लगा, मैंने कहा- अब्बू, क्या कर रहे हैं? मैं गिर जाऊँगी।
तब अब्बू ने कहा- मेरी बेटी, नहीं गिरोगी, आज नया स्टाईल देखो चूत, चुसाने का इस तरह तुमने ब्ल्यू फ़िल्म में भी नहीं देखा होगा.
और अब्बू खड़े हो गये। अब वो बिल्कुल सीधे खड़े थे और मेरी चूत को चूस रहे थे। मुझे इस तरह डर भी बहुत लग रहा था पर मज़ा भी बहुत आ रहा था।
तब ही अब्बू ने कहा- बेटी, अब तुम अपना सर नीचे की तरफ़ झुकाओ।
पर मैंने मना कर दिया इस पर वो एक चपत लगाते हुए बोले- साली जैसा कहता हूं कर … वरना आज हम दोनों जने एक साथ तेरी गाण्ड में लण्ड डाल कर फ़ाड़ देंगे।
तब मैं अपने सर को धीरे धीरे नीचे की तरफ़ ले आई और अब मेरा मुँह उनके मुरझाये हुए लण्ड के पास था जिसे वो आगे बढ़ाने लगे. मैं उनका मतलब समझ गई थी और मैंने उनका लण्ड हाथ से पकड़ कर गप्प से मुँह में डाल लिया और चूसने लगी।
‘वाआआह्ह …’ बिल्कुल नया तरीका, बुर और लण्ड की चुसाई का … इस तरह से अब मेरा डर जाता रहा और थोड़ी देर बाद ही मैं जोर जोर से अपना मुँह अब्बू के लण्ड पे चलाने लगी।
इस वक्त एक ज़रूरी कॉल आई है तो मुझे जाना पड़ रहा है, पर अपनी Antarvasna स्टोरी ज़रूर पूरी करुंगी। ओके।
जारी रहेगी!
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