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हॉट साली सेक्स कहानी मेरी अविवाहित साली की चूत चुदाई की है. मैंने अपने ससुराल में रात भर साली के साथ सेक्स किया. सर्दियों की रात में मेरा बहुत बढ़िया जुगाड़ चला.
मेरा नाम आर्यन (बदला हुआ नाम) है.
मेरी उम्र इस समय 23 साल है और मैं जयपुर में हॉस्टल में रहकर चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहा हूँ पर मैं शादीशुदा हूं।
अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली सेक्स कहानी है।
हॉट साली सेक्स कहानी के पात्रों के नाम, प्राइवेसी और सुरक्षा कारणों के कारण बदल दिए गए हैं।
यह घटना मेरे साथ दिसंबर 2020 में घटित हुई जो आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ.
मेरे मामा के लड़के की शादी थी तो एग्जाम खत्म होने के दूसरे दिन ही में शादी के लिए निकल गया.
वहीं पास के ही गांव में मेरा ससुराल था और बीवी की प्रेगनेंसी का नौवां महीना चल रहा था तो मेरी बीवी अपने मायके आई हुई थी.
एग्जाम की वजह से 3 महीने से मेरी पत्नी से मिलना हो नहीं पाया था.
इस कारण मामा के घर से मैंने सीधा ससुराल चला गया।
मेरे ससुराल वाले अपने खेत वाले घर में रहते हैं.
ससुराल में मेरे सास ससुर, मेरे दो साले और मेरी एक साली है.
दोनों साले पास के शहर में रहते हैं.
इस कारण अभी घर पर मेरे सास ससुर, मेरी पत्नी और मेरी साली ही थे.
थोड़ी देर तक औपचारिक बातें हुई।
रात को सबके साथ खाना खाने के बाद तकरीबन 10 बजे मैं दूसरे रूम में सोने के लिए चला गया.
अन्य लोग दूसरे कमरे में सोने चले गए थे.
मेरा बिस्तर वहीं चरपाई पर ही लगा हुआ था. वहीं पास में जमीन पर मेरी साली भी सोई हुई थी।
उसका सरदर्द हो रहा था तो मैंने उसे बोला- तुम चारपाई पर सो जाओ।
तो वह चारपाई पर आ गयी.
मैंने नीचे लेट गया.
इस समय तक मेरे मन में मेरी साली साहिबा जिसका नाम रूबिया (बदला हुआ) के लिए कोई गलत ख्याल नहीं आया था।
मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं अपना फोन चलाने लग गया.
रूबिया के सर में दर्द हो रहा था तो वो उठकर अपने सर पे विक्स लगाने लगी.
लेकिन उसका सरदर्द कम नहीं हो रहा था तो मैंने उसे बोला- मैं मालिश कर देता हूँ.
तो वह चारपाई से उतरकर नीचे आ गई।
सर्दी का समय था तो वह अपना सर मेरी गोदी में रखकर सो गई और मैं मालिश करने लगा.
मालिश करते करते मेरा लन्ड भी खड़ा होने लगा. जिसका उसे भी पता लग गया लेकिन वो ऐसे ही लेटे रही और मेरे लन्ड का जायजा लेने लगी.
थोड़ी देर मालिश करवाने के बाद वह वापस चारपाई पे लेट गई।
अब मेरे मन में भी उसे चोदने का विचार आने लगा.
लेकिन मैं पहल भी नहीं करना चाह रहा था तो मैं ऐसे ही लेटे लेटे फोन चलाने लगा और रूबिया भी चारपाई पर लेटी हुई मेरी ओर देख रही थी।
अब उसकी भी चूत में खुजली होने लगी तो वापस चारपाई से उतरकर मेरी रजाई में घुस गई और अपनी गान्ड को लन्ड से लगा दिया।
मुझे अब रूबिया की ओर से संकेत मिल चुका था तो मैंने भी उसके बूब्स को मसलना और उसकी गर्दन पे किस करना शुरू कर दिया.
और इसके साथ ही उसके मुंह से हल्की हल्की सिसकारियां निकलने लगी।
अब मेरे हाथ उसके बूब्स को मसलते मसलते उसके सलवार तक पहुंच चुके थे.
मैंने सलवार का नाड़ा खोलकर उसे घुटनों तक कर दिया।
नीचे उसने पैंटी पहन रखी थी तो मैंने पैंटी के अंदर से ही चूत सहलाना शुरू कर दिया।
उसकी चूत पहले से ही गीली हो रही थी.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी, उंगली चूत में जाते ही उसकी सिसकारियां और तेज हो गई इसके साथ ही मैंने उसकी पैंटी भी नीचे कर दी।
तब मैंने अपनी लोअर को भी नीचे घुटनों तक कर दिया. अब मेरा छ: इंच लंबा और 3 इंच मोटा लन्ड पीछे से ही उसकी चूत से रगड़ने लगा।
अब रूबिया की चूत में भी आग लग चुकी थी और वह कहने लगी- जीजू, अब और मत तड़पाओ अब डाल भी दो मेरी चूत में अपना लन्ड!
उसके इतना कहते ही मैं उसके ऊपर आ गया और लन्ड का सुपारा उसकी चूत के मुंह पर लगा दिया.
तब उसको मैंने बोला- लन्ड डाल दूँ अंदर?
तो उसने हां में अपना सर हिला दिया।
हॉट साली सेक्स के लिए तैयार थी, यह इशारा मिलते मैंने एक हल्का सा झटका दिया तो आधा लन्ड चूत में चला गया और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई.
लेकिन समय रहते मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए.
अब मैंने दूसरा झटका दिया तो पूरा लन्ड उसकी चूत में जा चुका था.
साली की चूत में मेरा लन्ड जाते ही मुझे पता चल गया था कि साली की चूत चुदी चुदाई है.
मैंने उससे उसकी चुदाई के बारे में पूछा तो पहले तो पूछने पर उसने मना कर दिया.
लेकिन मेरे दोबारा पूछने पर बताया उसने कि दो बार पहले भी वह चुद चुकी है.
अब वह धीरे धीरे आहें भर रही थी.
धीरे धीरे अब मैंने लन्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
करीब दस मिनट तक चोदने के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और गर्म गर्म फव्वारा मुझे अपने लन्ड पे महसूस होने लगा.
हालांकि मेरा अभी तक हुआ नहीं था तो मैंने उसके बाद पांच मिनट तक ऐसे ही उसकी चूत को चोदना जारी रखा.
फिर मैं पीछे से उसके साइड में आ गया और साईड से उसकी चूत में अपना लौड़ा घुसा दिया और पीछे से उसकी चूत को पेलना शुरू कर दिया.
करीब 10 मिनट तक पीछे से चोदने के बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मेरे धक्के और तेज हो गए और 20-25 धक्कों के साथ ही मैंने अपना लन्ड बाहर निकाला और सारा माल उसकी गांड पे गिरा दिया।
उस रात मैंने उसकी एक बार और चूत मारी.
और अब सुबह हम दोनों अपने अपने बिस्तर पे जाकर सो गए क्योंकि गांव में सभी लोग सुबह जल्दी उठ जाते हैं।
उसके बाद मैं एक रात और वहाँ पर रुका और मैंने जमकर साली की चुदाई की।
उसके बाद मैं वापस जयपुर आ गया.
गोवा में लड़कियाँ Antarvasna Sex Stories जल्दी जवान हो जाती है। उसका मुख्य कारण है कि यहाँ सभी लोग मांस खाने शौकीन हैं। यहाँ पर तरह तरह की मछलियाँ, सूअर और बडे का मांस भी बहुत शौक से खाया जाता है। ये सब तामसी भोजन हैँ, इससे लड़कियाँ जल्दी बड़ी दिखने लग जाती है। उनमें गर्मी भी बहुत होती है। जवान होते होते कितनी ही बार चुद चुकी होती हैं। मैं अब जवान हो चली थी, मेरे मम्मे भी थोड़े उभार ले चुके थे। एक लड़का मेरा दोस्त भी बन गया था। एक दिन उसने मुझे चोद भी दिया था। फिर उसने मुझे दो तीन बार और मौका मिलने पर चोदा फिर उसके पिता की बदली हो गई और वो यहाँ से चला गया। बस तब से मैं चुदने के लिये तरसती रही।
शाम को मैं और मेरा छोटा भाई रोज ही पास के गार्डन में घूमने जाते थे। मेरे भाई मुन्ना की उम्र भी लगभग मेरे बराबर ही थी, बस एक साल छोटा था मेरे से।
एक दिन एक प्यारी सी घटना हो गई। मैं कभी सुनहरे पल याद करती हूँ तो बस भैया से चुदने का मन हो उठता है।
हम हमेशा की तरह गार्डन में घूम रहे थे। शाम का धुंधलका बढ़ चला था। बगीचे की लाईटें जल उठी थी। हम दोनों एक छोटी तलाई के किनारे रेलिंग के सहारे खड़े हो कर बाते कर रहे थे कि अचानक मैंने झुरमुट में एक लड़का और लड़की को देखा। वो आपस में लिपटे हुये एक दूसरे को चूम रहे थे।
मैंने मुन्ना को कोहनी मारी …
“क्या है … ?”
“वो देख … वो क्या कर रहे हैं … ”
“अरे हां … ये तो चूमा चाटी कर रहे हैं … ”
“और भी ध्यान से देख ना … ”
“अरे … ये तो कुछ गड़बड़ कर रहे हैं”
“भैया, इसमें मजा आता है क्या … ”
“पता नहीं … हो सकता है !”
“कैसा लगता होगा … तूने कभी किया है ऐसे?” हालांकि मुझे पता था कि कैसा लगता है।
“नहीं किया तो नहीं है … कर के देखें … ?”
“सच्ची … मजा आयेगा तो और करेंगे !” मैंने उत्साहित हो कर भोलेपने से कहा।
“चल उस झाड़ी के पीछे चलते हैं … ” हम दोनों जल्दी से वहां गये तो वहाँ पर पहले से ही एक लड़का और लड़की लिपटे हुये थे। लड़का लड़की के चूतड़ों को दबा रहा था। हम उन्हें अनदेखा करते हुये दूसरी झाड़ी की ओर मुड़ गये। वहाँ कोई नहीं था।
“मुन्ना कैसे करें अब … ?” मैंने मासूमियत से कहा।
“मुझे क्या पता … अच्छा अपन एक दूसरे से लिपट जाते हैं जैसे कि वो कर रहे थे।” मुन्ना बोला।
“अच्छा आ जा … !” मुन्ना ने मुझे लिपटा लिया। मैंने जानबूझ करके अपने मम्मे उसकी छाती पर रगड़ दिये।
“अब चूमें क्या … ?” मैंने उसे उत्साहित किया। मैंने अपने होंठ उसकी ओर बढ़ा दिये। मुन्ना ने भी अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। मुझे सनसनाहट सी होने लगी। तभी मुझे लगा कि मुन्ना का लण्ड खड़ा हो गया है। मैंने मुन्ना के चूतड़ पकड़ कर दबा दिये।
“मुन्ना ऐसे ही ना दबाते हैं … ” मैंने उसे अपनी ओर खींचते हुये कहा। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी चूत में गड़ने लगा। उसने भी मेरे चूतड़ पकड़ कर दबा दिये।
“ठीक है ना गुड़िया … ऐसे ही दबाते है ना?” उसके लण्ड का कड़ापन मुझे बहुत ही सुहाना लग रहा था। मुझे तो लगने लगा कि बस अब मुन्ना मुझे चोद ही दे। मैंने सोचा कि मुन्ना को अब उत्तेजित करना चाहिये।
“मुन्ना ये नीचे क्या लग रहा है … ?” मैंने भोलेपन से पूछा।
वो शर्मा गया,”ये तो जाने कैसा हो गया है … ” मुन्ना शर्माता हुआ बोला।
“पर मजा तो आता है ना … मैं देखूँ क्या?” मुझे पता था कि वो मना कर देगा। इसलिये जवाब के पहले ही मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया।
वो सी-सी कर उठा,”ये क्या कर रही है … ”
“ओह लग गई है क्या ?” मैंने लण्ड छोड़ दिया।
“नहीं नहीं … मजा आता है … !”
“ओह हो … मैं तो डर गई थी।” मैंने फिर से उसका लण्ड पकड़ लिया, पर इस बार उसे दबा भी दिया। मुन्ना ने मुझे कस कर लिपटा लिया और जोर जोर से चूमने लगा। यूं तो आस पास अंधेरा था पर खेल एक बार आरम्भ करना था, फिर बाद में तो हम ये खेल घर पर भी अकेले में खेल सकते थे। मैंने उसका लण्ड जोर जोर से मसल दिया ताकि उसे और मजा आये। कुछ देर तक मैं उसका लण्ड मसलती रही और उसे बहुत ही बैचेन कर दिया … अब मुझे लगने लगा था कि वो मुझे चोदे बिना नहीं छोड़ने वाला …
फिर बोली,”मुन्ना, कोई देख लेगा … बस अब घर चलते हैं … ”
“बस गुड़िया, थोड़ा सा और … ।” पर मैंने उसे मना कर दिया। वो भी मन मार कर मेरे साथ घर की तरफ़ चल दिया। रास्ते भर वो यही बात करता रहा … कि कितना मजा आया। मैं उसे और उत्तेजित करती रही। घर आते ही हमने खाना खाया और कमरे की तरफ़ चल दिये। मैंने अपनी किताबें खोली और पढ़ाई का बहाना करने लगी। मन में तो मुन्ना का लण्ड घूम रहा था। दूसरी मेज़ पर मुन्ना पढ़ रहा था। वो बार बार मेरी तरफ़ ही देख रहा था। रात गहरा गई थी। मम्मी पापा सो चुके थे। मुन्ना ने उठ कर दरवाजा बंद कर लिया और मुड़ कर मेरी तरफ़ देखा।
“चल गुड़िया … वो ही करें … ” मेरा दिल धड़क उठा। सवेरे तक अब हमे कोई छेड़ने वाला नहीं था। हम सुरक्षित भी थे।
“कपड़े तो बदल ले … बस पजामा ही पहनना !”
“आप भी दीदी … बदल लो” हमने दोनों ने कपड़े बदल लिये। मैंने एक ऊंचा सा पुराना स्कर्ट पहन लिया। ताकी बस उसे ऊंचा किया और चूत सामने आ जायेगी। मुन्ना ने बस कहे अनुसार अपना पजामा पहन लिया। उसका बैचेन लण्ड उसमें से साफ़ उभर कर नजर आ रहा था। उसने अपनी बाहें फ़ैला दी, मैं उसमें जाकर समा गई। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरी चूत पर अपने लण्ड को दबा दिया। मैंने उसका पजामा नीचे खिसका दिया। उसका लण्ड बाहर आकर किसी मस्त सांड की तरह झूमने लगा। उसने मुझे चूमना चालू कर दिया। अब से उसका लण्ड पकड़ना आसान था। वो मेरे चूतड़ मसलता रहा। मैं भी उसके चूतड़ दबाने लगी। अब उसके लण्ड की बारी थी। मैंने उसे थाम लिया। मुझे वो मोटा लगा … पूरा लण्ड मैंने हाथ में भर लिया और उसकी मुठ मारने लगी। वो लिपट गया और सिसकारी भरने लगा।
अचानक मेरी तेज नजर उसके लण्ड पर पड़ी, मैं बुरी तरह चौंक गई। उसके लण्ड की सुपाड़े से लगी हुई स्किन फ़टी हुई थी।
ओह, तो यह मेरी ही तरह भोला बनने का नाटक कर रहा था। वो ये सब नाटक मजा लेने के लिये कर रहा था। मेरा मन खुश हो गया, कि चुदाई भरपूर होगी। वो तो अपने में मगन कह रहा था
“गुड़िया, इसमें तो बहुत मजा आ रहा है यार !”
“हां मुन्ना, मुझे भी आ रहा है, और दबा पीछे … ” मैं भी अब खुलने लगी।
“गुड़िया, तेरी सू सू कहा है … खड़ा ही नहीं हुआ” मैं धीरे से हंस पड़ी।
“अरे भैया, हमारे ये डण्डा जैसी सू सू नहीं होती है, जैसे कि तेरे मम्मे नहीं है ना”
“अरे हां … तेरे मम्मे तो बता … ” उसने मेरे मम्मे पर हाथ घुमा दिया, फिर कुर्ते के अन्दर हाथ डाल दिया। और उसे टटोलने लगा। मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा। मैंने भी तबियत से मम्मे उसके हवाले कर दिये और मसलवाने लगी।
“भैया, थोड़ा जोर से दबा दे ना … ”
“उससे क्या होगा … ” उसने मेरे मम्मे दबा दिये। फ़िर घुण्डी भी घुमा दी। मैं मस्ती में झूम उठी।
“भैया, तुम्हारे डण्डे में जैसा मजा आता है ना, बस वैसा मजा आता है।”
“इतना ज्यादा मजा … निकाल तेरा डण्डा … ” और उसने मेरी चूत पर हाथ मार दिया। पर वहां कुछ होता तो तो पकड़ता ना … उसकी नाटक बाजी चलती रही। पता था कि ये सब तो उसे पता है।
“मुन्ना धीरे से … नाजुक जगह है … हां अब ढूंढ डण्डे को … जरा प्यार से, है ना” उसका हाथ मेरी चूत पर घूमने लगा, डन्डा तो मिला नहीं हां उसकी अंगुली चूत में जरूर घुस गई। मेरे मुख से आह निकल गई।
“मुन्ना खड़े खड़े थक गई, चल आराम से बिस्तर पर करते हैं !”
“गुड़िया कपड़े पूरे उतार दे, मजा आयेगा !” मैंने सहमति में सर हिला दिया। और कपड़े उतार दिये। अब हम दोनों बिस्तर में थे। मैंने अब खुलना ही बेहतर समझा। वर्ना नाटक में कही कोई कसर रह गई तो चुदाई में मजा नहीं आयेगा।
“मुन्ना एक बात कहूँ … सच बताना … तुझे मेरी कसम … !”
“पूछो दीदी … ”
“कभी किसी लड़की को तूने चोदा है तूने?” वो अब झेंप गया।
“नहीं तो दीदी … वो कैसे करते हैं … ?” बड़े भोलेपन से उसने पूछा।
मैंने उसे चूमते हुये कहा,”अरे मैं कुछ कह थोड़े रही हू … तेरा मामला है तू जाने … बता न !”
उसकी नजरें झुक गई। फिर कुछ सोच कर बोला,”नहीं तो दीदी … चल ना अपन मस्ती करें”
“मुझसे झूठ बोलता है … बता कौन थी वो … तेरा लण्ड कह रहा है तूने चोदी है, बड़ा भोला बनता है?” मैंने उसे जोर देकर कहा।
“हां गुड़िया, तेरी ही सहेली है … वो मुझसे बस चुदवाती है, प्यार नहीं करती है।”
“तो अब खुल कर मजे कर ना … आजा … ये देख मेरी चूत … मैं भी चुदा चुकी हूँ … ”
“अरे यार पहले क्यों नहीं बताया … ”
“यह नाटक तो खुलने के लिये किया था … अब तो मुझे चोद दे !”
मुन्ना सारी शरम छोड़ कर मुझे अपनी बाहों में लेकर बिस्तर पर लेट गया और हम अब खुल कर बेशर्मी से वासना का खेल खेलने लगे। मैंने भैया को नीचे चित्त लेटा दिया और उसका लण्ड मलने लगी। वो सिसकारियाँ भरने लगा, आह ऊह्ह करने लगा। मैं उसके ऊपर लण्ड के पास बैठ गई। उसका लौड़ा पकड़ कर मैंने अपनी चूत पर रख कर उसे अन्दर ले लिया। उसका लौड़ा मेरे बोझ से चूत के अन्दर उतर गया। कम चुदने के कारण मेरी चूत अभी पूरी खुली नहीं थी। मुन्ना का लण्ड तो मोटा और लम्बा था, मुझे लगा कि मेरी चूत को पूरी खोल देगा। उसका लण्ड कसता हुआ जैसे तंग गली में जा रहा था। चूत लण्ड की मोटाई के अनुसार फ़ैल कर लण्ड को अपने में समा रही थी। मुन्ना मस्ती में अपनी आंखे किये हुये था। धीरे धीरे लण्ड पूरा घुस गया। मुझे ना तो लगी और ना ही दर्द हुआ। चूत पानी छोड़ रही थी। अब मैंने हिम्मत करके धक्के तेज कर दिये। मैं बड़े आराम मैं चुद रही थी। भैया ने मेरे बोबे दबा डाले और वो अपने चूतड़ नीचे से हिलाने लगा। लण्ड मेरी चूत में असीम आनन्द देने लगा। मैं उसके ऊपर लेट गई और हम लिपट कर चुदाई करने लगे।
“भैया सच कहूँ, ये लण्ड क्या गाण्ड में भी घुस जाता है?”
“दीदी पता नहीं, मैंने कभी गाण्ड नहीं मारी … चल कोशिश करें … ?”
मैं इस एक नये अनुभव के लिये तुरन्त ही तैयार हो गई। तरह तरह से अंगों के इस्तेमाल की सोच ने मुझे रोमंचित कर दिया।
“गुड़िया, चल झुक जा, और गाण्ड मेरे सामने कर दे … मैं लण्ड घुसाने की कोशिश करता हूँ … ” मैं झुक गई, मेरे चूतड़ की दोनों फ़ांके खुल गई। उसे गाण्ड का छेद नजर आने लगा। मुन्ना ने छेद पर लण्ड रख दबाया तो कभी वो नीचे फ़िसल जाये या ऊपर आ जाये। बस थोड़ा सी गाण्ड खुलती पर लण्ड अन्दर नहीं जा पा रहा था।
“मुन्ना तेल लगा कर अंगुली से छेद चौड़ा कर दे … ” मुन्ना ने ऐसा ही किया। तेल लगा कर अंगुली अन्दर घुसेड़ दी। मेरे मुख से मीठी सी आह निकल गई। वो खींच खींच कर अन्दर अंगुली घुमाने लगा, फिर उसने दो अंगुली डाल दी। मुझे इसमें बड़ा मजा आ रहा था। अचानक छेद में लण्ड घुसता सा महसूस हुआ। मैंने अपनी गाण्ड का छेद ढीला कर दिया। मोटा लण्ड था लगा गाण्ड चिर जायेगी। मुझे अब दर्द होने लगा था। शायद उसे भी लग रही थी। उसने बहुत जोर लगाया और लण्ड फिर तो घुसता चला गया। मेरी आंखें उबल पड़ी।
“बस कर मुन्ना … फ़ट ज़ायेगी मेरी … अभी इतना ही काफ़ी है … कल फिर कोशिश करेंगे।”
“हां मुझे भी लग रही है … ” उसने खींच कर अपना कड़क लण्ड बाहर निकाल लिया। मुझे भी चैन की सांस आई। पर दूसरे ही क्षण मेरी चूत पर आक्रमण हुआ और लण्ड मेरी चिकनी चूत में सट से पूरा घुस गया। लण्ड अब फ़्री स्टाईल में चोदने लगा। मैं घोड़ी बनी चुदती रही। मेरे मम्मों की शामत आई हुई थी। बेचारे बेरहमी से मसले जा रहे थे। इस स्टाईल में लण्ड पूरा अन्दर तक चोद रहा था। बहुत देर तक चुदने के कारण मैं चरमसीमा पर पहुंच गई थी। मुझे बस खल्लास होना था। मैं छटपटा उठी, मेरा पानी निकलने को हो रहा था …
मुन्ना बड़ी तेजी से लण्ड चला रहा था। मेरा पानी बस निकला ही चाहता था। मैंने जोर से तकिया भींच लिया और आह कर उठी। मैं झड़ने लगी। पर वो चोदता चला गया। मैं झड़ती रही … और मैंने मुन्ना को रोक दिया।
“दीदी मेरा तो हुआ ही नहीं … ”
“चल खड़ा हो जा … और लण्ड दे मुझे … मुठ मार कर तेरा माल निकाल देती हूँ।” उसे मैंने सामने खड़ा किया और लण्ड मुँह में लेकर नीचे से उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारने लगी। वो तड़प उठा और मेरे मुँह में एक तेज पिचकारी छोड़ दी। मैंने मुठ मारना नहीं छोड़ा। मुठ मारती गई जब तक कि उसके लण्ड में एक भी बूंद रही। सारा वीर्य मैंने पी लिया। अब वो सन्तुष्ट था। उसने एक पांव मेरी कमर में डाला और सुस्ताने लगा। मैं भी उससे लिपटी पड़ी रही। मुझे अब उसके खर्राटे की आवाज आने लगी। मुन्ना सो चुका था। मैं मुस्कराई और उसे प्यार से चूम लिया। उसे चादर ओढ़ा दी और मैं जाकर मुन्ना के बिस्तर पर सो गई। आज की तरकीब और हिम्मत ने काम बना दिया था और अब हम हमेशा ही मजे कर सकते थे। मैंने चादर मुँह तक ओढ़ ली और सपनों में खो गई। Antarvasna Sex Stories
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मैं हूँ आपकी अंजू शर्मा ! मैं Antarvasna पच्चीस साल की हो चुकी हूँ। मैं आज आपको अपनी सच्ची कहानी अन्तर्वासना डॉट कॉम के माध्यम से बता रही हूँ कि मैंने अपने बड़े भाई से कैसे चुदवाया था।
मेरे बड़े भाई का नाम अजय है, वह सताईस साल का है। उसकी एक गर्लफ्रैंड भी है जिसका नाम शैली है। शैली मेरे साथ पढ़ चुकी है और मेरे घर से थोड़ी दूर ही रहती है। शैली अजय को पसंद करती है लेकिन शैली के कई दोस्त हैं। शैली एक चालू लड़की है। फ़िर भी अजय को शैली से अकेले में मिलने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।
एक दिन मेरे पापा और मम्मी दो दिन के लिए एक शादी में जबलपुर जाने वाले थे, हम पढ़ाई का बहाना करके घर में ही रुके रहे। वैसे अजय मेरा बड़ा भाई है लेकिन हम दोस्तों की तरह रहते हैं। हम एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते हैं और आपस में हर एक विषय पर खुल कर बातें करते हैं, यहाँ तक सेक्स की बात करने से भी हमें कोई शर्म नहीं आती है।
उस दिन अजय ने मुझसे कहा- अंजू, दो दिन तक हम लोग अकेले रहेंगे, अगर तुम किसी तरह शैली को दो दिन के लिए अपने घर रहने के लिए तैयार कर लो तो मैं तुम्हारी हर शर्त मान लूंगा।
मैंने भी अपनी शर्त रखी- मैं शैली को किसी भी बहाने अपने घर रुकने पर राजी कर लूंगी लेकिन तुम शैली के साथ जो भी करोगे मेरे सामने करना होगा।अजय बोला- लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरा पूरा साथ देना पड़ेगा !
इस तरह हम दोनों के बीच शर्तें तय हो गईं।
शाम को मैंने शैली को फोन किया कि मुझे अपना एक प्रोजेक्ट बनाने के लिए उसकी मदद चाहिए और दो दिनों में प्रोजेक्ट पूरा करना है, घर में अकेली हूँ मेरे घर में कोई परेशानी नहीं होगी, मिल कर पढ़ाई और मस्ती करेंगे।
मैंने कहा- अजय भी हमारी मदद करेगा !
शैली भी फ़ौरन तैयार हो गई। शैली काफी चालाक है, वह सारा मामला समझ गई और एक घंटे के बाद ही घर आ गई। वह काफी सजधज कर आई थी।
दरवाज़े पर अजय ने ही उसका स्वागत किया। शैली आराम से सोफे पर बैठ गई और इधर उधर की बातें करने बाद अजय तीन व्हिस्की के पैग बना कर लाया। हम धीमे धीमे व्हिस्की की चुस्कियाँ लेने लगे। अजय खड़े खड़े हमारी बातें सुन रहा था।
तभी अजय ने झुक कर शैली को चूम लिया। शैली खड़ी हो गई और अजय की पैंट की जिप खोल कर उसका लण्ड चूसने लगी। शैली ने अजय का दस इंची लण्ड पूरा अपने मुँह में ले लिया। मैं भी अजय के लण्ड का लाल लाल सुपारा देख कर दंग रह गई। ऐसा लग रहा था कि जैसे गुस्से से लण्ड का मुँह लाल हो गया हो और चूत पर हमला करने वाला हो। शैली बड़े प्यार से लण्ड चूस रही थी और सारा लण्ड निगल लेना चाहती थी। यह देख कर मेरी चूत भी गीली हो रही थी। शैली लण्ड को अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी, इससे लण्ड और सख्त और लंबा हो रहा था। लण्ड शैली के थूक से पूरी तरह से सना था।
तभी शैली ने अजय को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके बाक़ी के सारे कपड़े निकाल दिए। अजय का लण्ड कुतुबमीनार की तरह सीधा खड़ा था। एक एक करके शैली ने अपने कपड़े भी उतार दिए। जब शैली ने अपनी पैंटी भी उतार दी तो मैं उसकी गोरी गोरी चूत देख कर मोहित हो गई। शैली ने अपनी चूत के बाल अच्छी तरह से साफ़ किए थे। चूत से सेक्सी खुशबू आ रही थी। मैंने शैली की चूत को चूम लिया। आख़िर वह मेरे भाई का इतना लंबा मोटा लण्ड लेने जा रही थी। और कोई लड़की होती तो अजय के लण्ड से उसकी चूत जरूर फट जाती।
फ़िर शैली उठी और अजय के लण्ड को निशाना बना कर उस पर अपनी चूत रख दी। लण्ड का सुपारा चूत पर था, शैली लण्ड पर बैठ गई। शैली के दवाब से लण्ड अन्दर घुसने लगा। जब लण्ड का सुपारा चूत में घुस गया तो चूत में लण्ड के लिए रास्ता बनता गया। लण्ड चूत को चीरते हुए भीतर जाने लगा।
मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैं लगातार शैली को हिम्मत दिलाती रही और कभी उसे चूमती और कभी उसके स्तन सहलाती रही। जैसे ही पूरा लण्ड शैली की चूत में समा गया, मैंने ताली बजा कर शैली को बधाई दी। शैली अपनी चूत में अजय का लण्ड इस तरह अन्दर-बाहर करने लगी जैसे वह अजय की आज ठीक से चुदाई करे बिना नहीं मानेगी।
कुछ देर बाद अजय शैली के ऊपर आ गया और उसका लण्ड गच से शैली की चूत में धंस गया। अजय शैली को लगातार चूम रहा था और उसकी चूत की भगनासा को मसल रहा था।
शैली मस्ती में बक रही थी- अजय जोर जोर से डालो, फाड़ दो मेरी चूत ! उफ़ मज़ा आ रहा है ! जोर से धक्के मारो ! मेरी पूरी चूत भर गई है चूत में अब जगह नहीं है। चोदो ! लगे रहो ! आज मैं जन्नत का मज़ा ले रही हूँ ! तुम्हारा लण्ड कमाल है।
करीब आधा घंटे के बाद अजय ने शैली को पलंग पर घोड़ी बनाकर अपना लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुसा दिया और दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए। इस जबरदस्त चुदाई से शैली हाय हाय करने लगी। शैली हर धक्के पर अपनी चूत लण्ड की तरफ़ धकेल देती थी जिससे मजा दुगुना हो जाता था। शैली की चूत से पानी रिस रहा था, फ़िर भी वह लगातार चुदवा रही थी।
यह देख कर मुझे भी इसी तरह चुदवाने की इच्छा हो रही थी और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
इसी तरह आधा घंटा और चोदने के बाद अजय ने मुझे बुला कर कहा- शैली की चूत काफी चुद गई है, अब मैं शैली की गाण्ड मारूंगा, तुम ज़रा पास आकर शैली की कमर जोर से पकड़े रहना और शैली की चूत और वक्ष मसलते रहना। अगर शैली को दर्द हो तो उसकी चूत चाटते रहना, इससे दर्द कम हो जाएगा। वरना वह मेरा इतना लंबा मोटा लण्ड सह नहीं पायेगी, उसकी गाण्ड भी फट सकती है, तुम अपने हाथों से शैली के चूतड़ फैलाते रहना।
फ़िर अजय ने दोबारा शैली को घोड़ी बनाया। मैंने थोड़ा सा तेल शैली की गाण्ड और अजय के लण्ड पर लगा दिया और अजय को गाण्ड जीतने का आशीर्वाद दे दिया। अजय ने उठ कर अपने लण्ड का सुपारा शैली की गाण्ड के छेद पर रख कर थोड़ा सा दवाब डाला। सुपारा गाण्ड में घुस गया, शैली चिल्लाई- मर गई ! ओह ओह उई उई ! धीमे ! ज़रा धीमे से ! यह लण्ड काफी मोटा है ! मैं सह नहीं पाऊँगी।
अजय ने कहा- हिम्मत रखो ! हम तुम्हारी गाण्ड नहीं फटने देंगे ! आराम से डालेंगे !
फ़िर अजय ने चौथाई लण्ड अन्दर घुसा दिया जो आसानी चला गया। फ़िर शैली के दर्द की परवाह किए बिना आधा लण्ड जब चला गया तो मैंने कहा- अब रुको नहीं ! बाक़ी लण्ड भी घुसा दो !
अजय ने एक ऐसा जोर का धक्का मारा कि गाण्ड को फाड़ते हुए गाण्ड में समा गया। शैली ने इतनी जोर की चीख मारी कि मुझे उसका मुँह बंद करना पड़ा।
अजय बोला- अब थोड़ा सा दर्द सह लो ! गाण्ड में लण्ड के लिए रास्ता बन चुका है !
कुछ देर बाद अजय ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू किया तो लण्ड आसानी से घुसने लगा। शैली ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, उसका दर्द गायब हो चुका था। मुझे ताज्जुब हुआ कि लण्ड कैसे फचा फच गाण्ड में जा रहा है और शैली मजे से गाण्ड मरवा रही है। मैं शैली की हिम्मत की दाद देने लगी, मैं बोली- तुम्हें तो गाण्ड मरवाने का ओलम्पिक मैडल मिलना चाहिए।
यह सुन कर अजय ने अपनी स्पीड तेज कर दी। जब उसका लण्ड से बाहर आता तो तो ऐसा लगता था कि लण्ड के साथ पूरी गाण्ड बाहर आ जायेगी क्योंकि लण्ड गाण्ड में पूरी तरह से कसा हुआ था।
शैली कभी मुझे और कभी अजय को चूम लेती थी। आधे घंटे की गाण्ड मराई के बाद अजय ने अपना गर्म गर्म वीर्य शैली की गाण्ड में छोड़ दिया जो गाण्ड से बाहर बहने लगा। अजय के लण्ड से शैली की गाण्ड काफी चौड़ी हो गई थी। लण्ड निकलने के बाद गाण्ड का गुलाबी चौड़ा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था।
शैली ने अजय के लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया और एक तरफ़ लेट कर साँस लेने लगी।
मैंने पूछा- कैसा लगा अजय का लण्ड?
शैली ने लण्ड को चूम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। इससे लण्ड फ़िर से फड़कने लगा और कड़क होकर खड़ा हो गया। तभी शैली ने मुझे अपने पास पलंग पर गिरा लिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरे कपड़े उतार दिए और अजय का लण्ड मेरी चूत पर रख दिया।
शैली ने कहा- अंजू चुदाई कुदरत का वरदान है ! दुनिया के सभी प्राणी चुदाई करते हैं ! एक बार लण्ड किसी की चूत में घुस जाता है तो सारे रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, सिर्फ़ चूत और लण्ड का रिश्ता बाक़ी रह जाता है। इसलिए किसी लण्ड का अपमान नही करना चाहिए, जो भी मिले, जैसा भी मिले, जहाँ भी मिले, लण्ड का मजा जरूर लेना चाहिए। तू तो किस्मत वाली है कि घर में ही इतना मजेदार लण्ड मौजूद है। फ़िर भी पुराने विचारों में अपना मजा बरबाद कर रही है। हर एक चूत को हर एक लण्ड से मजा मिलता है। देख, मैंने इसी सुख के लिए अजय के घोड़े जैसे लण्ड से तेर सामने चुदा लिया और गाण्ड भी मरवाई। यह एसा मजा है जिसमे कोई खर्चा नहीं लगता, सिर्फ़ हिम्मत चाहिए। चल उठ और मेरे सामने ही अजय से चुदा ले ! फ़िर तुझे भी पता चल जाएगा कि ऐसे लण्ड से चुदाने में कितना मजा आता है। तू फ़िर रोज चुदवाने लगेगी और मुझे याद करेगी।
उस दिन से अजय से कई बार लण्ड का मजा ले चुकी हूँ। शैली की बात सच है, आज रात मैं फ़िर चुदवाने वाली हूँ ! आप रात को क्या करने वाले हैं ? Antarvasna
इस प्रकार दो दिन मस्ती Hindi Sex Stories से गुजार कर घर लौट आया ! घर आकर मैंने सीमा दीदी और विजय भैया को सारी बातें बताई और हम तीनों ने कई दिनों तक उसी तरीके से काफी मजे किये।
फिर मैं अपने एक केमिस्ट दोस्त के पास गया, उससे पूछा- क्या ऐसी कोई दवाई है जिससे कोई जल्दी से डिसचार्ज ना हो सके?
उसने कहा- है ना ! उसको वियाग्रा कहते हैं और मुश्किल से ही मिलती है ! अगर कोई खाकर किसी लड़की या औरत पर चढ़ जाये तो साला तीन चार घंटे तक उतरने का नाम ही नहीं लेगा ! लकिन बहुत प्रचलित नहीं है इसलिए बहुत मुश्किल से मिलती है !
मैंने उससे कहा- यार, जैसे भी हो कुछ गोलियाँ मंगवा दो ! लेकिन जल्दी करना, वर्ना तेरे दोस्त की नाक कट जायेगी !
उसने कहा- दो चार दिन तो लग ही जायेंगे !
मैंने कहा- ठीक है जल्दी मंगवाना !
तीन चार दिन बाद उसने मुझे चार गोलियाँ दी और पूछने लगा- क्या करोगे ?
मैंने उसे टाल दिया। फिर सीमा दीदी के ससुराल जाने का जुगाड़ बैठाने लगा ! मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे कुछ नहीं करना पड़ा।
घरवालों ने कहा- संजय, यह सामान सीमा की ससुराल पहुँचाना है ! अंधे को क्या चाहिए- दो आँखें !
मैं तुंरत तैयार हो गया और कहा- सुबह जल्दी निकल जाता हूँ जिससे उसी दिन लौट सकूँ !
मैं सुबह जल्दी निकाल पड़ा जिससे जीजू और उनके माता पिताजी के काम पर जाने के पहले ही पहुँच सकूँ ! पर रास्ते में बस के ख़राब हो जाने की वजह से परेशान था कि अगर समय पर नहीं पहुँचा तो शायद घर पर कोई नहीं मिलेगा और दिन भर परेशानी होगी।
जैसे ही मैं घर पंहुचा, मेरे आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा! घर पर टीना मौजूद थी। वह भी मुझे देखकर ताज्जुब में पड़ गई और खुशी से मुझसे लिपट गई और चुम्बनों से मेरा चेहरा लाल कर दिया। फिर उसने मुझे पानी पिलाया और कहा- थोड़ा इंतजार करो, खाना तो बना हुआ है, बस रीना आ जाती है तो तीनों मिलकर खायेंगे ! तब तक चलो एक राउंड हो जाये !
मैंने तब तक एक गोली खा ली थी !
मैंने उसे कहा- रीना को आ जाने दो और मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ !
फिर मैं नहाने चला गया। आकर देखा तो रीना आ चुकी थी और मेरे बाहर आने का इंतजार दोनों कर रही थी। रीना तुंरत आकर मुझसे लिपट गई। मैंने भी दोनों की चूचियाँ दबाकर और उन दोनों ने मेरा लंड सहलाकर स्वागत किया। फिर जल्दी से खाना खाकर टीवी देखने लगे। इधर मुझे चैन कहाँ ? हाँ चैन तो उनको भी नहीं था ! वे दोनों मेरे दोनों बगल में बैठ गई और मेरा हाथ पकड़कर अपनी अपनी चूचियों पर रख दिया और मेरा लंड पैंट में से निकालने लगी।
मैंने कहा- क्यों तकलीफ करती हो ? जो होना है उसमें कपड़ों का क्या काम !
ऐसा कह कर हम सबने अपने अपने कपड़े उतार दिए। पहले तो हम वहीं सोफे पर ही बैठे थे बाद में कारपेट पर आ गए। वहाँ पर भी असुविधा होने पर बेडरूम में आ गए।
मैंने उनसे कहा- आज दोनों को ऐसा चोदूंगा कि जब भी किसी से चुदवाओगी तो एक बार मेरा नाम जरुर याद करोगी कि किसी ने चोदा था !
उन्होंने कहा- तेरे जैसे बहुत देखे हैं ! अभी तेरे को दस मिनट में चूसकर निचोड़ लेंगी। पिछले बार की चुसाई भूल गए क्या ? कैसे निढाल हो गए थे?
फिर उन्होंने मेरे लंड को बारी बारी से चूसना चालू किया पर मेरा लंड तो मेरे काबू में नहीं था! मैंने पहले रीना को पकड़ कर चोदना चालू किया तो साली तीस मिनट में ही टें बोल गई, कहा- संजय, अ़ब बर्दाश्त नहीं होता ! मैं तो तीन बार झड़ चुकी हूँ, पहले एक बार टीना को कुछ देर मजा लेने दे!
टीना ने कहा- आज मैं तेरे को चोदूंगी !
मैंने कहा- नेकी और पूछ-पूछ ! जल्दी से ऊपर आ जा !
मेरा लंड तो आसमान की तरफ मुँह किये खड़ा था, टीना अपनी दोनों टांगें मेरे दोनों ओर करके बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लंड पर रखकर धम से मेरे लंड पर बैठ गई ! मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अन्दर बैठ गया ! टीना एक बार तो चिल्ला उठी, फिर धक्के पर धक्के लगाने लगी। वह जल्दी ही थक गई ! भला यह काम लड़कियों का कहाँ ! उसने कहा- संजय, मैं तो थक चुकी हूँ ! अ़ब जल्दी ऊपर आ जा और मेरी चुदाई चालू कर !
मैंने ऊपर आकर उसकी जो चुदाई चालू की, उसने तोबा बोल दी ! इधर रीना मुझे उत्तेजित करने के लिए कभी मेरे मुँह से अपना मुँह मिलाकर मेरी जीभ चूसती और कभी मेरी छाती के चुचूक को चूसती। पर मैं कहाँ रुकने वाला था, एक घंटे तक दोनों को चोदता ही रहा ! दोनों चिल्ला चिल्ला कर कहने लगी- आज तो तुमने हमारी चूत को भोसड़ा बना दिया ! अ़ब जब भी चुदेंगी, तेरे को जरुर याद करेंगी ! हमने काफी चुदवाया है पर तुम जैसा कोई नहीं मिला ! जिससे तेरी शादी होगी वह बहुत खुशनसीब होगी। क्यों ना तुम मुझसे ही शादी कर लो !
मैंने कहा- हमारा समाज इसकी इजाजत नहीं देता और मेरे और तेरे घरवाले भी नहीं मानेंगे। इसलिए जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दो, जब कहोगी तब आ जाया करूँगा !
इस प्रकार मैं वापस जाने के लिए तैयार होने लगा तो उन्होंने कहा- माँ-पिताजी के आने के पहले नहीं जाने देंगी !
और मुझे रुकना पड़ा। जब जीजू, उनके माँ-पिताजी आये तो बहुत देर हो चुकी थी और उनके कहने पर मुझे रुकना पड़ा !
रात को रीना, टीना ने जीजू को दिन की घटना के बारे में बताया तो वो मुझसे पूछने लगे- कोई दवाई खाई थी क्या ? जैसा ये कह रही हैं, तुमने तो सीमा की चूत को भोंसड़ा ही बना दिया होगा, मेरे लिए कुछ छोड़ा है क्या ?
मैंने कहा- नहीं जीजू ! ऐसी कोई बात नहीं है, रात को देख लेना, दोनों फिर से चुदवाने को तैयार मिलेंगी।
रात को खाना खाने के बाद हम लोगों की महफ़िल जमी ! मैंने गोली नहीं ली ! जब हम कमरे में गए तो रीना और टीना ने कपड़े उतारते हुए अपनी अपनी चूत जीजू के सामने कर दी और कहा- देखो भैया, कैसे सुजा दी है !
जीजू और मैंने देखा कि रीना की चूत सामान्य ही थी पर टीना की चूत कुछ फूली हुई थी।
मैंने कहा- जब तू ऊपर चढ़ेगी तो यही तो होगा ना !
इस तरह हम दोनों ने रीना, टीना को दो दो बार चोदा और सो गए !
सुबह मैं वापस आ गया !
दस दिनों में ही सीमा दीदी और भैया की शादी फिक्स हो गई ! पहले दीदी की शादी थी और एक हफ्ते बाद भैया की ! शादी में करीब दो महीने बाकी थे ! दोनों शादियाँ बहुत धूमधाम से हुई ! एक तरफ दीदी गई दूसरी तरफ भाभी आ गई ! भैया को तो चुदाई का परमानेंट लाइसेंस मिल गया, मैं सोचने लगा कि अ़ब मेरा गुजारा कैसे होगा !
खैर जैसे तैसे दिन गुजरते गए ! मैं बैचैन रहने लगा !
भैया ने पूछा- क्या बात है संजय? आज कल बहुत बैचैन रहते हो?
मैंने कहा- भैया, आपकी तो मौज है ! मुझे तो रात सूखी ही काटनी पड़ती है !
भैया ने कहा- तेरी भाभी बहुत चुद्दकड़ है ! लगता है बहुत खेली खाई हुई है, बस एक बार उसे अपना लंड दिखा दे, साली, अपने आप ही चुदने आ जायेगी ! मैंने उससे शादी के पहले की चुदाई की बात की तो साली फूटी ही नहीं ! तो मैंने भी कुछ नहीं बताया ! अगर एक बार तुझसे चुद लेगी तो खुद ही अपना भांडा फोड़ देगी !
मैं तो घर पर ही रहता था, मेरे पास समय भी था।
मैं अगले दिन से ही भाभी पर लाइन मारने लगा, उनसे मजाक करने लगा और उनकी चूचियों को निहारने लगा !
उन्होंने कहा- क्यों देवरजी, क्या बात है ?
मैंने कहा- भाभी, अकेले मन नहीं लगता ! कभी तो मेरे कमरे आ जाया करो जिससे बातें ही करके समय गुजर सके ! आपका भी तो समय मुश्किल से ही कटता होगा ?
दूसरे दिन खाना खाकर भाभी को बोलकर कि कमरे में जा रहा हूँ, कोई काम हो तो बुला लेना !
भाभी को भी चैन नहीं था ! मैं कमरे में जाकर एक सेक्सी नॉवल निकाल कर पढ़ने लगा। मेरा लंड खड़ा था और मैं उसे मसल रहा था। जब नहीं रहा गया तो मैं लंड निकालकर मुठ मरने लगा। कमरे का दरवाजा मैंने जानबूझ कर थोड़ा खुला छोड़ दिया था कि अगर भाभी उधर आये तो देख सके !
मैंने महसूस किया कि भाभी दरवाजे की झिर्री से मुझे देख रही है ! जब तक मेरा नहीं हो गया तब तक वहाँ से हटी ही नहीं !
दो घंटे बाद जब मैं कमरे से निकला तो भाभी ने पूछा- क्यों देवरजी ! कमरे में क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- कुछ नहीं भाभी, सो रहा था !
उन्होंने कहा- तुम सो नहीं रहे थे !
मैंने पूछा- बताओ ना क्या कर रहा था?
उन्होंने कहा- शर्म आती है !
मैंने कहा- जब देख ही लिया तो शर्माना क्या !
मैं भाभी के पास सरक आया और कहने लगा- बताओ ना !
वो फिर भी कुछ नहीं बोली तो मैंने उनका हाथ पकड़कर अपने पास खींचते हुए कहा- जब देख ही लिया है तो शर्माना क्यों !
वो नजरें नीची करके बोली- नहीं देवरजी, मुझे शर्म आती है !
मैंने कहा- अ़ब बता भी दो !
तो उन्होंने कहा- तुम कोई किताब पड़ते हुए अपने उसको हिला रहे थे !
मैंने पूछा- किसको ?
तो भाभी चुप रह गई !
मैंने फिर से पूछा तो उन्होंने कह ही दिया कि अपने लौड़े को !
मैंने कहा- भाभी, अगर फिर से और अच्छी तरह देखने का मन हो तो बता दो ! किसी को पता भी नहीं चलेगा !
मैं खुश हो गया कि चिड़िया जाल में फंस चुकी है ! मैं धीरे धीरे अपना हाथ उनके बोबे पर ले जाने लगा। वो कुछ नहीं बोल रही थी। जब मैं उनके बोबों को दबाने लगा तो उन्होंने कहा- देवरजी, क्या कर रहे हो ? कोई देख लेगा तो गजब हो जायेगा !
मैंने कहा- किसी को भी पता नहीं चलेगा और अपना काम भी बन जायेगा !
उन्होंने कहा- डर लगता है !
मैंने कहा- सब कुछ मुझ पर छोड़ दो ! अ़ब तुम मुझे देवरजी ना कह कर नाम से पुकारा करो !
कहते हुए उनका हाथ मेरे लंड पर रख दिया ! वो मजे ले ले कर मेरे लंड से खेलने लगी !
मैंने कहा- चलो भाभी, कमरे में चलो !
उसने कहा- नहीं, यहीं ठीक है, कोई आया तो तुंरत गेट खोल सकेंगे !
मेरा लंड तो उनके हाथ में ही था, फिर कहने लगी- संजय, तेरा लंड तो तेरे भैया से भी अच्छा है ! मुझे इसका स्वाद लेना है,
भाभी, अ़ब तो यह तुम्हारा हो चुका है, जैसी तुम्हारी इच्छा !
मेरे और कुछ बोलने के पहले ही भाभी मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। इधर मैं भाभी के बोबे दबा रहा था। मैंने कहा- भाभी, कपड़ों के ऊपर से मजा नहीं आ रहा है।
उन्होंने कहा- मजा तो मुझे भी नहीं आ रहा है पर शादी को अभी दस दिन ही हुए हैं, कब कौन टपक पड़ेगा, कोई भरोसा नहीं !
भाभी ने कहा- संजू राजा, चलो एक बार चोद दो !
मैंने कहा- जब तक मुझे बोबे चूसने नहीं दोगी मैं कुछ नहीं करूँगा !
उन्होंने हथियार डाल दिए और अपने बोबे आजाद कर दिए।
वाह क्या बोबे थे ! मैंने उनको चूस चूस कर लाल कर दिया और वो भी बेकाबू होने लगी। फिर मैंने जो उनकी चुदाई की कि वो मेरा लोहा मान गई !
मैं सोचने लगा कि ऐसा कुछ किया जाये कि दिन में भी भाभी को खुलकर चोदा जाये ! फिर मेरे दिमाग में एक विचार आया !
दूसरे दिन सबके चले जाने के बाद मैं पिछला गेट से निकला और मैं गेट पर ताला लगाकर फिर पिछले गेट से अन्दर आ गया! भाभी को कुछ पता ही नहीं चला !
मैं घर में घुसते ही अपने सब कपड़े उतारकर केवल अंडी में ही आकर भाभी को छेड़ने लगा।
भाभी ने कहा- क्या करते हो ? कोई आ जायेगा !
मैंने कहा- कोई नहीं आ सकता ! अगर कोई आ भी गया तो गेट पर ताला देखकर अपने आप चला जायेगा !
भाभी ने कहा- राज्जा, बहुत उस्ताद हो गए हो !
मैं भाभी के बोबे दबाने लगा साथ ही साथ उनके कपड़े भी उतारने लगा ! वो भी मेरा साथ देने लगी और हम दोनों एकदम नंगे हो गए !
मैं भाभी को लेकर कमरे में आ गया और हम दोनों किसी को भी सब्र नहीं था। भाभी ने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में ले लिया और आगे पीछे करने लगी ! मैं भी उनकी चूचियां दबाने लगा जो कि एकदम सख्त हो गई थी और चूसने लगा। उधर भाभी भी मेरा लंड चूसने लगी। इसमें कुछ दिक्कत हो रही थी इसलिए मैं भाभी को 69 के अवस्था करके लंड चूसाते हुए उनकी चूत को छेड़ने लगा तो भाभी ने कहा- रज्जा, मेरी चूत चूसो ना !
मैं भाभी की चूत चूसने लगा। दोनों को भरपूर मजा आ रहा था !
भाभी ने कहा- अ़ब अपना वीर्य मेरे मुँह में डाल कर मुझे निहाल कर दो !
मैं भी तेज तेज अपना लंड उनके मुँह में करने लगा ! फिर मैं भाभी के मुँह में झड़ गया उन्होंने मजे ले ले कर पूरा रस चूस लिया और साथ ही वो भी झड़ गई। मैंने भी उनका पूरा रस चूस लिया फिर दोनों ने एक दूसरे को चाट चाट कर साफ किया। फिर बैठ कर बातें करने लगे !
मैंने भाभी से पूछा- भाभी यह तो बताओ कि सबसे पहले तुमको किसने और कैसे चोदा?
भाभी ने कहा- मुझे शर्म आयेगी, तुम अपनी बताओ !
मैंने कहा- पहले तुम बताओ !
मैंने जिद करके भाभी को सब कुछ बोलने पर मजबूर कर दिया जो अगले अंश में लिखूंगा !
कृपया मुझे मेल करके अपने विचार बताएँ इस कहानी पर ! Hindi Sex Stories
मैं लक्ष्य हूँ दिल्ली से ! आई ऍम Sex Stories अ काल बॉय. मैं फ़िर आपको अपना नया अनुभव सुनाने आया हूं।
मेरी पिछली कहानी पढने के बाद कई लोगों ने मुझे ई-मेल भेजे, जिनमें एक दिल्ली की ही एक लड़की का था। उसने अपना फ़ोन नम्बर दिया हुआ था। मैंने उसे फ़ोन किया ओर बताया तो उसने कहा कि वो देहरादून की रहने वाली है और नोयडा में जोब करती है और लक्ष्मीनगर में रहती है।
तो मैंने उसे बताया कि मैं भी नजदीक ही मयूर विहार में रहता हूँ जब भी उसे सर्विस चाहिए तो मुझे मेल कर बुला सकती है तो उसने मुझे सन्डे को अपने फ्लैट पर आने के लिए कहा.
मैंने सन्डे को सुबह ११ बजे उसके फ्लैट के पास पहुँच कर फोन किया तो वो गेट पर मुझे लेने आ गई. फ़िर मैं उसके फ्लैट पर गया तो देखा कि वो २ रूम्स का फ्लैट था तब उसने बताया कि उसकी फ्रेंड्स भी उसके साथ रहती हैं और वो जॉब पर गई हुई हैं.
फ़िर हम दोनों बातें करने लगे तो उसने बताया कि उसने मेरी कहानी पढी, वो उसे अच्छी लगी और वो भी कोई साथी चाहती है गुप्त सेक्स के लिए. तो मैंने उसे आश्वस्त किया कि मेरा काम इसी पर निर्भर है कि बात छिपी रहे.
तभी वो उठी और बियर कि बोतल फ्रीज में से निकल लायी और बोली- मैंने कहानी में पढा था कि आपको पीने के बाद करना पसंद है. फ़िर हमने बियर पीनी शुरू की। धीरे -२ वो मेरे नजदीक आ गई और उसने मुझे गाल पर किस किया और मैंने भी कस कर गले लगा लिया और बेतहाशा किस उसके गले और लिप्स पर करने लगा. क्या रसभरे होंठ थे उसके. फ़िर मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी, उसने मेरी शर्ट. हम एक -दूसरे को किस करते रहे और नंगे होते रहे.
फ़िर मैं उसे गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया. तब मैंने गौर से उसे देखा क्या सुंदर साइज़ था उसका ३४ -२८ -३२. मैं उसके बूब्स को चूसने लगा उसके मुंह से आवाजें निकल रही थी- आ आ आया आ अ -औ ऊ ओऊ ओह ह्ह्ह हह जोर से —ओ ऊ ऊह ह्ह्छ हह उसके हाथ मेरे बालों और मेरी कमर पर घूम रहे थे. फ़िर वो उठ कर नीचे बैठ गई और मेरे ७ इंच के मोटे लंड को किस करने लगी, फ़िर धीरे से उसे अपने नरम होठों में दबाकर चूसने लगी। मैं तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रहा था.
तभी मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाल कर अन्दर बाहर करना शुरू किया तो वो बोली धीरे करो दर्द हो रहा है, यह मेरा पहली बार है. काफी देर फोरप्ले के बाद जब मैंने देखा कि वो भी उत्तेजित हो गई है तो मैंने उसकी टाँगें फैलाकर अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और एक झटका दिया तो वो रोने लगी कि दर्द हो रहा है तो मैंने उसे क्रीम लेन के लिए कहा वो क्रीम लेकर आई और मेरे लंड और अपनी चूत पर लगाई, फ़िर मैंने झटका दिया तो मेरा लंड ३ इंच अन्दर चला गया वो चिल्लाई ईई आया आ आ आह हह माँ आया आया अ आ आ मर गई ई ई
पर मैं लगातार धक्के लगाता रहा थोड़ी देर बाद दर्द कम होने पर वो कमर हिलाकर सहयोग देने लगी. फ़िर मैंने उसे कुतिया स्टाइल में चोदना शुरू किया करीब २५ मिनट उसे चोदने के बाद जिसमे वो ३ बार डिसचार्ज हो चुकी थी. मैंने उसे कहा कि मैं डिसचार्ज होने वाला हूँ तो उसने कहा कि अन्दर मत करो। तो जैसे ही मैंने लंड बाहर निकाला तो उसने अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी तभी मेरे लंड ने बारिश शुरू की और ६ -७ तेज़ धार सीधे उसके मुंह में उडेल दी.
वो भी थक कर वहीँ बेड पर लेट गई. ½ घंटे के बाद मैंने कपड़े पहने और जाने लगा तो उसने मुझे मेरी फीस के ३००० रुपए दिए और किस करके कहा कि मैं जल्दी ही तुम्हे अपनी फ्रेंड्स की सर्विस के लिए भी बुलाऊंगी. Sex Stories
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