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मैं उन दिनों अपने चाचा Sex Stories जान के यहाँ वाराणसी आई हुई थी। उनके लड़का सुनील बड़ा ही खूबसूरत था। गोरा चिट्टा, दुबला सा, लम्बा सा, उसे देखते ही मेरा दिल उस पर आ गया था।
यूँ तो कानपुर में मुझे चोदने वाले कम नहीं थे, पर उनमें ज्यादातर तो गाण्ड मारने के शौकीन थे। गाण्ड मरवाने में मुझे अच्छा तो लगता था पर असल में तो चूत चुद जाये उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं है ना।
सुनील को देख कर मुझे उससे चुदवाने की इच्छा बलवती होने लगी। सुनील भी मेरी हसीन जवानी पर फ़िदा तो था, पर रिश्ते में उसकी बहन जो लगती थी मैं !!!
उसे यह पता नहीं था कि कानपुर में तो कोई यह रिश्ता रखता ही नहीं था। उसे यह बात बताना जरूरी था वरना तो मुझे देख कर बस मुठ ही मार कर रह जायेगा। रात को मैं बिस्तर के अन्दर ही घुस कर उसके नाम की अंगुली चूत में घुसा कर पानी निकाल देती थी।
कहावत है ना, दिल को दिल से राहत होती है, यह बात हम में ज्यादा दिनों तक अन्दर नहीं रह पाई। एक दूसरे की नजरें आपस में लड़ती और दिल का फ़ूल खिल उठता था। नजरें आपस में आपस में सब कुछ कह जाती थी, पर दिल तड़प कर रह जाते थे।
मैं जान बूझ कर के कसी जीन्स और तंग और चिपका हुआ बनियान-नुमा टॉप सिर्फ़ उसके लिये ही पहनती थी, इसमें मेरे जिस्म की सारी गोलाईयाँ उभर कर सामने दिखने लग जाती थी। मेरी मस्त चूंचिया देख कर तो वो अपनी नजरें हटा ही नहीं पाता था। अब मैं हिम्मत करके उसे देख कर मतलब से मुसकराया करती थी।
उस बेचारे को यह नहीं पता था कि मैं उसे सिर्फ़ अपनी वासना शान्त करने के लिये काम में लाना चाहती हूँ, एक नया जिस्म, एक नया मस्त कड़क लण्ड, नई जवानी, नया अनुभव, नया सुख, नई मस्ती… सभी को यही तो चाहिये ना।
एक दिन शाम को सभी घर वाले शादी के खाने पर गए हुए थे। मैंने सोचा- खाने का समय नौ बजे का होता है तो मैं देरी से चली जाऊंगी। पर वहाँ पर घर वालों का कार्यक्रम बदल गया, वो लोग जल्दी खाना खाने के बाद दूसरी शादी में भी हाजिरी देना चाह रहे थे। उन्होने सुनील को मुझे लेने घर भेज दिया।
मैं उस समय अकेलेपन का फ़ायदा उठा कर कम्प्यूटर पर अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ रही थी। किसी को आया देख कर मैंने कम्प्यूटर बन्द कर दिया और बाहर आ गई। अकेले सुनील को देख कर मैं चौंक गई। मन में सोचा कि शायद इसको मेरे अकेले होने का फ़ायदा उठाना है, इसलिये इसने मौका देख कर इधर आया है। मैं भी इस मौके को नहीं जाने देना चाह रही थी। मैं दिल ही दिल में इसके लिये मैं अपने आप को तैयार करने लगी।
मैं ढीला ढाला पुराना सा कुरता पहने थी और अच्छी भी नहीं लग रही थी, मुझे अपने आप पर बहुत खीज आई।
“अरे ! ऐसे ही हो अब तक, तैयार तो हो लो, जल्दी चलना है।” उसने मेरे जिस्म को ऊपर से नाचे तक देखा।
“हां, अन्दर आ जाओ, अभी तैयार हो जाती हूँ !” मैं उसे मतलब से घूरने लगी।
“मैं कुछ मदद करूं क्या, कुछ लाना हो तो ?”
“बस दरवाजा बन्द कर दो… और कुछ नहीं !” उसने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया।
“बस, ठीक है ना… सुनो बानो, नाराज नहीं हो तो एक बात कहूं ?” उसने हिम्मत दिखाई और मेरा दिल धक धक करने लगा।
“अरे कहो ना, भाई हो, शरमाते क्यूँ हो ?” भाई का शब्द सुनते ही उसका सारा जोश ठण्डा पड़ गया।
“नहीं बस यूँ ही, कुछ नहीं !” उसका प्यारा सा मुखड़ा लटक गया।
“अच्छा भाई नहीं दोस्त हो बस, अब कहो…”
“मैं चाहता हूँ कि बस एक बार … बस एक बार… मेरे गाल पर प्यार कर लो !”
“बस इतनी सी बात …?”
मुझे लगा मौका है, बात आगे बढ़ा लो …
मैं उसके पास गई, और उसके गाल पर एक गहरा सा चुम्मा ले लिया।
“थेंक्स… अच्छा लगा !”
“बस एक ही… एक दो बार और कर दूँ …” मैंने एक किस गाल पर और दूसरा होंठ पर कर दिया। इतना उसे भड़काने के लिये बहुत था।
“मुझे भी करने दो ना सिर्फ़ एक बार !” मैंने अपनी आंखे बन्द कर दी और चेहरा ऊपर कर दिया।
उसने धीरे से मेरे निचले होंठ दबा कर चूस लिये और उसके हाथ मेरी कमर पर कस गए।
उसका लम्बा किस खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। मेरे मन की कली खिल उठी। मैंने सोचा कि ये तो गया काम से, चक्कर में आ ही गया। हो सकता है शायद वो यह सोच रहा हो कि उसने मैदान मार लिया।
“सुनील, बस कर न, कोई आ जायेगा….हाय अब्बा…. चल छोड़ दे अब !”
“बानो, बस थोड़ा सा और…. ! ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा ना, सब घर में रहते हैं और आप ऊपर मेरे कमरे में आती ही नहीं हैं !”
“हायऽऽ बसऽऽ मेरे अरमान जाग जायेंगे, सुनील, बस कर !” मैंने उसे और भड़काया।
मेरा मन खुशी के मारे उछल रहा था। उसे छोड़ने का दिल बिल्कुल ही नहीं कर रहा था। हम दोनों प्यार में एक दूसरे से लिपट पड़े। वो मेरे होंठो को बेतहाशा चूमने लग गया था, जैसे सब्र का बांध टूट गया हो। उसका जिस्म मेरे जिस्म से रगड़ खा कर उत्तेजित होने लगा था। जाने कब उसके हाथ मेरे उभरे अंगों तक पहुंच गए और उसे सहलाने और दबाने लगे।
ढीले कुरते का यह फ़ायदा हुआ कि उसके हाथ मेरी नंगी चूंचियों तक सरलता से पहुंच गये और अब मुझे भरपूर मजा दे रहे थे। मेरी चूत गीली हो उठी।
“सुनील अब तक तू कहाँ था रे ? मुझसे दूर क्यों रहा था? हाय तुझे पा कर मुझे कितना अच्छा लग रहा है ! कब से तो मैं तुझे लाईन मार रही थी !” मैंने अपनी दिल की बात उससे कह दी।
“मैं भी कबसे आपको प्यार करता हूँ… मैंने भी तो कितनी बार आपको देखा, पर हिम्मत नहीं होती थी … बानो सच तुम मेरी हो, मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है !”
“हाय सुनील, सच में मुझे प्यार करोगे… करो ना… मेरे दिल की हसरत निकाल दो, प्लीज !” मुझे लग रहा था कि शादी वादी की ऐसी की तैसी, अभी टांगे चौड़ी करके उसका लण्ड घुसा लूँ।
“देर हो जायेगी बानो, रात को आ जाना ऊपर मेरे कमरे में… मुझे भी अपनी दिल की हसरतें पूरी करनी हैं !”
“मेरे सुनील… !” और एक बार फिर से हम लिपट कर चुम्मा चाटी करने लगे।
उसके लण्ड का भी बुरा हाल था और मेरी चूत तो पानी टपकाने लगी थी। प्यार और वासना की एक मिली जुली आग लगी हुई थी, जिस्म मीठी आग में झुलसने लगा था। लग रहा था कि अभी चुदवा कर सारा पानी निकाल दूँ पर मेरे रब्बा ….हाय…. अभी इस आग में मुझे थोड़ी देर और जलना था।
रात को लगभग घर लौटते लौटते साढ़े ग्यारह बज रहे थे। मेरा मन सब जगह खाली खाली सा लग रहा था, बस सुनील ही नजर आ रहा था। इंतजार खत्म हुआ। हम सभी कपड़े बदल कर सोने की तैयारी करने लगे …
और मैं ….
जी हाँ, चुदने की तैयारी कर रही थी। चूत में और गाण्ड में चिकनाई लगा कर मल रही थी। चूंचियो में भी क्रीम लगा कर उसे खुशबूदार और चमकदार बना लिया था। बस एक हल्का सा नाईट गाऊन ऊपर से यूँ ही लटका लिया और समय का इन्तजार करती रही।
साढ़े बारह बजे तक जब मुझे यकीन हो गया कि अपने अपने कमरों में सब सो गये होंगे। तब मैं दबे पांव बैठक में से निकल पड़ी। पास के कमरे में सिसकारियों की आवाज से लगा कि भाभी और भैया का चुदाई का कार्यक्रम चल रहा था। आज सब औरते फ़्रेश थी, घर के काम से छुट्टी थी, सारी ताकत को चुदाई में लगा रही थी।
मैं बरामदे की सीढ़ियों से ऊपर आ गई। सुनील के कमरे की लाईट जली हुई थी। मैंने दरवाजा खोला तो सुनील तौलिया लपेटे खड़ा था। शायद अभी नहाया था, साबुन की खुशबू से मैंने अन्दाजा लगाया। मुझे ये अच्छा लगा,कि अब मैं उसके साफ़ सुथरे शरीर का पूरा आनद ले पाउंगी।
“बानो, तेरा तो अन्दर का सब कुछ दिख रहा है, बड़ी मस्त लग रही है तू !”
“तू भी तो मस्त लग रहा है, ये सिर्फ़ तौलिया ही है ना या अन्दर और भी है कुछ?” मैंने उसका तौलिया खींच लिया।
वो नंगा हो गया। उसका कड़क लण्ड सीधा खड़ा था। मेरा मन डोल उठा चुदने के लिये।
“चल आ मस्ती करें ! शावर के नीचे पानी में चलें, गीली गीली में करने से मजा आयेगा !”
मैंने देखा उसकी सांसे उखड़ने लगी थी। उसकी धड़कनें बढ़ गई थी। मैंने उसका हाथ पकड़ा और जा कर शावर के नीचे खड़ी हो गई। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और नीचे बैठ गई। उसके लौड़े को हाथ से सहलाने लगी। उसकी सुपाड़े की स्किन फ़टी हुई थी, मतलब वो पूरा मर्द था, किसी को चोद चुका था।
“किसी के साथ किया था… बता ना !” मैंने लण्ड मुँह में लेते हुए कहा।
“नहीं अभी तक तो नहीं … पर ये क्या कर रही हो, हटो !” उसने अपना लण्ड मेरे मुँह से बाहर निकाल लिया। शायद उसे ये अच्छा नहीं लगा।
“क्यूँ क्या हुआ….मजा नहीं आ रहा है क्या ?”
“बस ये नहीं करो…” मुझे बाहों से पकड़ कर उठा लिया, और हम पानी की बौछार में फिर से लिपट पड़े।
“अच्छा पर तुमने कुछ तो किया है ना, अन्दर तो घुसाया ही है तुमने?”
“बानो, तुमने तो पकड़ लिया मुझे ! पर सच में ! वो यूसुफ़ है ना वो बड़ा खराब है !”
“अच्छा, क्या गाण्ड मरवाई थी उसने ?” मैंने उसे और खोलने की कोशिश की।
“चुप बानो, ऐसे क्या बोलती है !” उसने मुझे ऐसे कहने से मना किया।
“बोल ना, गाण्ड मारी थी उसकी…?” मुझे तो मजा लेना था।
“हाँ, कोशिश की थी, पर जोर से लग गई थी यहाँ पर ! बहुत तकलीफ़ हुई थी !”
“तो फिर क्या उसने तेरी गाण्ड चोदी थी ?”
“अब तुमने गाली बोली तो ठीक नहीं होगा !” उसने मुझे आगाह किया। पर मैं तो वासना में बह निकली थी। मुझे चुदाई की ऐसी बातें ही चाहिये थी।
“बता ना ! तूने गाण्ड मराई थी ना?” मैंने फिर जिद की।
“हाँ, उसने मेरी गाण्ड मार दी थी, बहुत दर्द हुआ था !” उसने शिकायत भरे लहजे में कहा।
“मुझे गीली करके चूत मारेगा या गाण्ड मारेगा?” मेरी चूत लपलपा उठी, चिकना पानी भर गया चूत में।
मेरी बातों को सुनकर वो नाराज हो गया और वहां से कमरे में आ गया और बिस्तर पर लेट गया।
“बानो क्या हो गया है तुम्हें ? ऐसी गालियाँ क्यूँ निकाल रही हो?” उसने फिर से शिकायत की।
पर मुझे अपना मजा लेना था।
मैं उसके पास आ गई और अपनी एक टांग ऊपर उठा कर उसके गले के पास रख दी और अपनी भीगी हुई चूत को उसके मुँह से लगा दिया। मेरी चिकनी चूत का पानी उसके मुँह के आस पास लग कर फ़ैल गया। वो कुलबुला उठा।
“सुनील, चल चूस ले, मुझे मस्त कर दे भेन-चोद, ये दाना हौले से मसल डाल !” मैं अपनी असलियत पर आती जा रही थी।
“चल हट ना, तू तो बेशरम हो गई है !”
“भोसड़ी के ! गाण्ड मरवा सकता है, चूत से परहेज कर रहा है? चूतिया है तू तो !”
मैंने उसके दुबले शरीर को कस कर भींच लिया। और उस पर चढ़ गई। उसका लौड़ा तो पहले से ही तन्ना रहा था। उसे अपनी चूत में दबा लिया और देखते ही देखते वो चूत में घुस गया।
“हरामी साले ! बड़े नखरे दिख रहा है रे ! एक लौड़ा क्या मिल गया तेरे को ! तो क्या खुदा हो गया है रे? मादरचोद ! तेरे जैसे सौ लौड़ों से चुद चुकी हूँ मैं !!” मैं उत्तेजना में बह चली।
मै ऊपर को धक्के लगाने लगी।
“अरे छोड़ दे रण्डी, छिनाल मुझे ! तेरी भेन चोदूँ ! साली हरामी, हट जा !”
“लगा ले जोर, तुझे आज मैं नहीं छोड़ने वाली, साला बड़ा आया था आशिकी झाड़ने।” मैंने उसे और कस कर जकड़ लिया। उसने भी अपनी ताकत लगा दी। जैसे जैसे वो ताकत लगाता, उसका लण्ड भी जोर मारता।
मुझे बड़ा मजा आ रहा था। मेरे में जाने कहा से इतनी ताकत आ गई कि उसे मैंने बुरी तरह से दबा लिया। वो कराह उठा। मेरी चूत तेजी से भड़क उठी, और कस कस के उसके लौड़े पर चूत पटकने लगी। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी।
अचानक मेरा पानी निकल पड़ा और मैं झड़ने लगी। मैंने उसे और जोर से नीचे भींच लिया।
“बानो मेरी सांस रुक रही है, छोड़ दे प्लीज !” मुझे अचानक लगा कि अरे मैंने ये क्या कर दिया। सुनील का तो जैसे जबरन चोदन कर ही कर दिया। मैंने उसका कड़क लण्ड बाहर निकाला और उस पर से हट गई।
सुनील थका सा उठा, पर उठते मुझ पर झपट पड़ा और मुझे बिस्तर पर उल्टा पटक दिया।
“तेरी मां का भोसड़ा, अब बताता हू मैं….” उसने मुझे गाली देते हुये मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया। पर उसे क्या पता था कि मैं तो पूरी तैयारी से आई थी। लण्ड गाण्ड में घुसते ही मुझे मजा आ गया।
“हाय रे…. मेरी गाण्ड बजायेगा ना, देख धीरे बजाना, लग जायेगी मुझे !”
“हरामी तेरी माँ चुद जायेगी अब, तेरी गाण्ड फ़ाड़ कर रख दूंगा…. साली चुद्दक्कड़ …. मेरी माँ चोद दी तूने…. तेरी तो फ़ोड़ कर रख दूंगा !” गुस्से में वो कस के गाण्ड चोद रहा था। मुझे मस्त किये दे रहा था। मुझे इसी तरह की चुदाई चाहिए थी। मुझे ऐसी ही तूफ़ानी तरीके से चुदना अच्छा लगता था।
हां मेरे चूंचे जरूर उसने रगड़ कर रख दिये थे जो टीस रहे थे। पर उसमें भी मजा था। वो मेरे चूंचे अभी भी बुरी तरह से खींचे जा रहा था। बहुत दर्द होने लगा था। गाण्ड में भी आस पास दुखने लगा था। मेरे गालों पर उसने काट लिया था। मेरे चूचुकों को दांतो से कुचल दिया था।
और अब वो अंतिम चरण में था। कुछ ही देर में उसके लण्ड ने फ़ुफ़कार भरी और पिचकारी छोड़ दी, ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा और मेरे चूतड़ो पर फ़ैल गया। वो बार बार जोर मार कर लौड़े से अपना वीर्य बाहर फ़ेंक रहा था। कुछ ही पलो में वो पूरा झड़ गया।
मैं तुरन्त उसे धक्का दे कर अलग हो गई और खड़ी हो गई।
“मजा आया मेरे सुनील?”
“आप बहुत खराब हैं बानो, तुम भी युसुफ़ की तरह ही निकली…. देख मेरा लौड़ा, अब दर्द कर रहा है।”
“तू तो साला न तो लण्ड पीने दे और ना ही चूत का रस पीए, तो फिर जबरदस्ती करनी ही पड़ती है ना ! कोई एक और साथ में होती तो तेरे से जबरदस्ती अपनी रसीली चूत चुसवाती।”
“हाँ और ये लण्ड में दर्द जो हो रहा है, साली ऊपर से मुझे पूरा चोद दिया।” उसने अपना लौड़ा मुझे दिखाया। उसकी शिकायत पर मैं हंस पड़ी।
“दर्द तो तूने मेरी गाण्ड फोड़ी है ना उसका है, मेरी चूत तो देख अब तक रस से भरी खान है, लग ही नहीं सकती है तुझे।”
“तू अब जा बानो, मेरी तो तूने आज ऐसी तैसी कर दी !”
“और ये देख तूने तो मेरे चूचे लाल कर दिये, देख दोनों सूज के दुगने मोटे हो गए हैं, मर साले … सुन सुनील, कल फ़िर ऐसे ही एक दूसरे को बजायेंगे !” कह कर मैं हंसी और धीरे से दरवाजा खोल कर दबे पांव नीचे अपने कमरे में आ गई।
मैंने जल्दी से अन्दर पेंटी पहनी और ब्रा डाल ली और बिस्तर में घुस गई। सब कुछ याद करके मुझे हंसी आ रही थी और खुशी भी हो रही थी सुनील को चोद कर, आज चुदाई करके मुझे मजा आ गया था, ऐसा जबरदस्ती वाला सुख मुझे जाने फिर कब मिलेगा।
मेरे चेहरे पर सुकून और शान्ति थी, चेहरे पर मुस्कान थी, दिल राजी था कि आज सुनील से चुदवा लिया, उसे फ़ड़फ़ड़ाता देख कर मजा भी आया था, पर हरामी ने मेरे चूंचो पर उसकी कसर निकाल दी थी…
धन्यवाद ! Sex Stories
मित्रो, अंतर्वासना के लिए यह मेरी पहली Hindi Sex Stories कहानी है। यूं तो मैं अंतर्वासना की कहानियों को पिछले दो सालों से पढ़ रहा हूं। बहुत समय तक सोचने के बाद आज मैं अपनी एक सच्ची कहानी आप सब के साथ शेयर करना चाहता हूं। यद्यपि इस वाकये को दस बरस का लंबा समय बीत चुका है। मगर, गर्मी की उस रात का एक-एक अहसास आज भी मेरे जेहन में दर्ज है।
बात है 1999 की है, तब बारिश का मौसम चल रहा था।। तब मैं 22-23 बरस का नवजवान था। 18 साल की एक प्यारी से लड़की से मेरा प्रेम संबंध चल रहा था।
सही मायनों में पहले मुझे उससे प्यार नहीं था, मैं तो बस उसे चोदना चाहता था। योजना बनाकर मैंने उसे लाईन मारना शुरू कर दिया। उसके कालेज आने जाने के वक्त मैं रास्ते में खड़े होकर उसका इंतजार करता था। वह भी मुझमें शुरू से बराबर रूचि ले रही थी।
बात आगे बढ़ी और हम दोनों के बीच प्यार की शुरूआत हो गई। धीरे-धीरे ठंठ का मौसम आने तक हमारे संबंधों में इतनी प्रगाढ़ता आ चुकी थी, कि एक दूसरे पर गहरा विश्वास कायम हो गया था। एकांत में मिलने पर मैं उसके स्तन दबाता और निप्पल चूसता !
वह काफी सेक्सी थी। किस करते समय जब मैं गर्म व गहरी सांस छोड़ता, तो वह तड़फ जाती थी। हम 15-15 मिनट के लंबे समय तक प्रगाढ़ चुम्बन करते रहते थे। यकीन मानिये आज मेरी शादी हो गई, मगर उसके अधरों से निकलने वाले उस अमृत का स्वाद कहीं और नहीं मिल पाया।
और इस तरह गर्मी का दिन आ गया। उसकी परीक्षाएं शुरू हो गई। वह अपने कमरे में अकेली सोती थी। मैं देर रात उसके कमरे की खिडकी में कंकड मारकर उसे अपने आने का इशारा करता था। वह छत पर आ जाती थी। मै भी बाहर से ही छत पर चढ़ जाता था। फिर हम दोनों एक-दूसरे में घंटों तक खोए रहते थे।
एक दिन मैंने उसे कहा- चल तेरे कमरे में चलते है।
उसने हां कहा और उसके कमरे में हम पहुंच गए। उसका बिस्तर कम चौड़ाई का और छोटा सा था। सामने कूलर चल रहा था। हमने कई घंटों तक एक-दूसरे से प्यार किया। पूरी तरह निर्वस्त्र हो जाने के बावजूद उसने मेरा लंड अपने अंदर नहीं घुसाने दिया। मैने फोर्स किया, मगर उसने मेरे उस वादे की दुहाई देकर मुझे शांत करा दिया, जिसमें मैंने उससे वादा किया था, कि उसकी मर्जी के बगैर में उससे सेक्स संबंध स्थापित नहीं करूंगा। यद्यपि उस रात मैं दो बार झड़ा भी, और शायद वह भी झड़ी मगर अंदर घुसाने नहीं दिया। मैने भी जिद नहीं की।
मित्रो, 2003 तक हमारे बीच प्यार चलता रहा। फिर उसकी शादी हो गई और कहानी का समापन हो गया। मगर बाद में कभी उस तरह का मौका मुझे नहीं मिल सका। वे रातें अक्सर मुझे याद आती है। मैं चाहता तो उसे चोद भी सकता था। किंतु मैने ऐसा नहीं किया। अब कभी कभी मुझे रंज होता है कि काश उस रात मैंने उसका काम तमाम कर दिया होता, तो वह मुझे छोड़ कर दूसरे से शादी नहीं रचाती। किंतु मेरे मन में एक संतोष भी है कि मैंने उससे सच्चा प्यार किया है। वह आज भी जब मुझे याद करती होगी तो इज्जत व सम्मान के साथ करती होगी। क्योंकि मैंने उसका नाजायत फायदा नहीं उठाया था।
दोस्तो, अब मैं आप सब से पूछना चाहता हूं कि मेरा वह फैसला सही था अथवा नहीं। प्लीज मुझे मेल करें Hindi Sex Stories
मैं रेखा अपनी पहली Antarvasna चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ! उस समय मैं 18 साल की थी।
मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ और अभी इन्जिनियरिन्ग अन्तिम वर्ष की छात्रा हूँ। मेरे पिताजी बिजनेस मैन हैं। हम दो बहनें हैं, बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, वो अपने ससुराल में रहती है। मेरा कोई भाई नहीं है। मैं अपने मम्मी-पापा के साथ ही रहती हूँ। पापा भी बिजनेस के सिलसिले में ज्यादातर घर से गायब ही रहते हैं।
हमारे घर के सामने वाले मकान में मेरे पापा के एक दोस्त कुछ ही दिनों से रह रहे थे। उनके एक लड़का और एक लड़की है। लड़की तो तब छोटी थी लेकिन लड़का बाईस साल से कम का नहीं था। क्योंकि वो मेरे पापा के दोस्त का लड़का था इसलिये हमारे घर में आता-जाता रहता था। उसका नाम सुरेश था, देखने में काफी हैन्डसम था और बहुत अच्छी बॉडी थी उसकी !
मैं भी काफी जवान हो चुकी थी और बहुत सुन्दर दिखती थी। सबके सोने के बाद मैं बेड पर लेट कर अकसर ब्लू फ़िल्में देखा करती थी और अपनी उन्गलियों से ही अपनी चूत को शान्त कर लिया करती। मेरे स्तन उस समय भी बहुत बड़े थे।
मैं तो सुरेश पर लट्टू हो गई थी और उसके साथ सोने के सपने देखने लगी और सोचती रहती कि कैसे अपनी चूत की प्यास शान्त करूँ !
वो भी मेरे गदराये जिस्म को चोरी-चोरी निहारा करता था। मेरे बड़े बड़े स्तन किसी भी लड़के को पागल कर देने के लिये काफी थे। धीरे धीरे मेरी उससे बात होने लगी।
एक बार वो किसी काम से हमारे घर में आया। उस समय मम्मी बाजार गई हुई थी और मैं टीवी देख रही थी। वो भी मेरे कहने पर बैठ कर टीवी देखने लगा। अब मेरा मन टीवी में बिल्कुल भी नहीं था और सोचने लगी कि इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा चुदवाने का !
मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था ! उसकी हालत भी मेरे जैसी ही थी ! सुरेश के अन्दर भी खलबली मची हुई थी, उसका लंड खड़ा हो गया था और उसकी पैंट से निकलने के लिये कुलबुला रहा था !
हम दोनों धीरे धीरे पास आने लगे और दिल की धड़कने जोर जोर से चल रही थी हम दोंनो की !
मैने हिम्मत करके उसकी जान्घों पर अपना हाथ रख दिया और धीरे धीरे सरकाते हुए उसके लंड को पकड़ लिया। सुरेश का पूरा शरीर कांप रहा था। हम दोनों ही जल रहे थे और अपनी आग बुझाने के लिये आतुर हो रहे थे। हम बहुत करीब आ गये और गरम सासें आपस में टकराने लगी ! उसने झट से मेरी चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। उसके होंठ मेरे होठों का रस चूस रहे थे। मैंने उसकी पैन्ट की चैन खोलकर उसके लंड को अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगी।
मैं आपको कैसे बताऊँ कि क्या हालत हो रही थी मेरी उस समय !
मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी ! लेकिन उसी समय दरवाज़े पर घण्टी बज उठी !
मम्मी बाज़ार से लौट चुकी थी !
मेरी इच्छा अधूरी रह गई !
लेकिन मैने भी ठान लिया कि अब बिना चुदवाये नहीं रह सकती !
एक बार जब पापा किसी काम से बाहर गये हुये थे और घर में सिर्फ मैं और मम्मी ही थे, मैंने सोचा यह अच्छा मौका है अपनी चूत की प्यास शान्त करने का !
मौका देखकर मैंने उसका नम्बर ले लिया !
सोते समय जब मम्मी ने पीने के लिये दूध माँगा तो मैंने उसमें नीन्द की दवा मिला दी ताकि वो सुबह से पहले नहीं उठ सके और सुरेश को सारा कुछ बता दिया !
जब मम्मी सो गई तो मैंने उसे मिसकाल कर दिया !
रात काफी अन्धेरी थी और करीब 11 बज चुके थे, उसके घरवाले भी सो चुके थे।
उसे मैं अपने बेडरूम में ले गई। सिर्फ दो ही बेडरूम थे, एक में मम्मी पापा सोते थे और एक में हम !
मम्मी के बेडरूम का दरवाजा मैंने बाहर से लॉक कर दिया ताकि वो अचानक उठकर आ न जायें !
अब मेरी चुदाई का रास्ता साफ़ था !
हमने भी अपना दरवाजा अन्दर से लॉक कर लिया और एक दूसरे की बाहों में समा गये !
रात के 11 बज रहे थे और काली रात ! दो प्यासे बदन !
यह मौका मैं कैसे चूक सकती थी !
एक दूसरे से उलझ गये हम दोनों ! हम दोनों ही नंगे हो गये। काली रात थी तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा था ! वो मेरे वक्ष मसलने लगा और मैं उतेजना के मारे छटपटाने लगी !
वो कह रहा था कि तेरे गदराए हुए जिस्म के बारे में सोचकर मैंने न जाने कितनी बार मुठ मारी है !
वो मेरे ठीक उपर था और बिल्कुल नन्गा !
उसका लण्ड मेरी जान्घों और चूत को छू रहा था, मैं कह नहीं सकती कि कितनी उत्तेजित हो चुकी थी मैं !
वो भी होश में कहाँ था !
उसकी सांसें बहुत जोर जोर से चल रही थी !
मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगी और वो अपने काबू से बाहर होने लगा !
काफी देर सहलाने के बाद मैं उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी !
बहुत बड़ा था उसका गरम लंड और मेरे मुँह में ठीक से नहीं आ पा रहा था !
बहुत देर तक चूसती रही मैं ! कैसे कहूँ कि कितना मजा आ रहा था मुझे !
वो नीचे खड़ा था और मैं बेड पर लेट कर चूसे जा रही थी !
वो अपने लंड को मेरे मुँह में ही आगे पीछे करने लगा ! बहुत बड़ा होने के कारण मेरे मुँह में पूरा समा नहीं पा रहा था लेकिन वो धक्के मार मार कर मेरे कंठ तक उतार दे रहा था और मैं अकबका जाती थी !
तीन चार मिनट तक वो मेरे मुँह को ही चूत समझकर पेलता रहा !
मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था और उसे मैंने बेड पर खींच लिया अपने ऊपर !
और बोली- अब नहीं रुक सकती, चोदना शुरु करो !
मेरे कहते ही सुरेश ने अपना लंड मेरी बुर में धीरे से उतार दिया !
मैं दर्द से छटपटा उठी और कराहने लगी और उसका लंड अपने चूत से निकाल दिया !
बहुत खून भी निकल गया !
सुरेश ने मुझसे पूछा- पहले कभी किसी से भी नहीं चुदवाई?
मैंने कहा- नहीं ! पहली बार मुझे तुम ही चोद रहे हो !
मैंने उससे पूछा- क्या तूने इससे पहले किसी लड़की को चोदा है?
तो उसने कहा- हाँ मैं पहले भी लड़की की चूत का मजा ले चुका हूँ !
उसने मुझे समझाया कि शुरु में दर्द होगा लेकिन बाद में सही हो जायेगा।
सुरेश ने फिर से अपना कड़ा लण्ड मेरी चिकनी चूत में धकेल दिया। मुझे रोना आ गया लेकिन उस दर्द को मैं सह गई। सुरेश ने धीरे धीरे चोदना शुरु किया और मुझे मजा आने लगा। सारा दर्द गायब हो गया और मुझे असीम आनन्द आने लगा।
वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने छाती से मेरे वक्ष को रगड़ने लगा। फिर वो मेरे चुचूक को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा और हौले हौले अपने दांत मेरी मुलायम चूचियों में गड़ाने लगा।
सुरेश का लंड मेरी बुर में घुसा हुआ था और आगे पीछे हो रहा था। वो अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मुझे चोदे जा रहा था ! मैं भी अपने चूतड़ उचका उचका कर चुदवा रही थी !
मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी ! कभी मैं उसे नीचे पटक देती तो कभी वो मुझे अपने नीचे ले लेता था !
बुरी तरह से एक दूसरे से उलझे हुए थे हम दोनों !
सुरेश के चोदने की रफ्तार धीरे धीरे तेज होने लगी। उसका बड़ा और कठोर लण्ड मेरी मुलायम चूत को फाड़े जा रहा था। सुरेश अपने लंड को मेरी चूत की पूरी गहराई में उतार उतार कर पेल रहा था और बहुत जोर जोर से धक्का लगा रहा था।
मैं उई उई कर रही थी और अपनी पहली चुदाई का पूरा मजा ले रही थी।
वो भी अनछुई चूत का जमकर मजा उठा रहा था।
वो बीच-बीच में पूछता भी कि मजा आ रहा है?
और मैं कहती- पूछो मत क्या हाल है मेरा ! आह आह ! बस चोदते रहो नॉन स्टॉप !
वो और तेजी से चोदने लगता !
वो कहता- रेखा तेरी कुँवारी चूत का स्वाद मैं बयान नहीं कर सकता !
एकाएक उसके चोदने की रफ्तार बहुत तेज हो गई, पूरा बेड हिलने लगा, मेरी सिसकारियाँ निकलने लगी और उसने मेरा मुँह ढांप दिया।
मैं बेड में धंसी जा रही थी और उसका सारा बोझ उठाये हुए थी !
मैं उतेजना में जोर जोर से चोदो ! उई उई ! फाड़ डालो चूत को ! ओह बहुत मजा आ रहा है ! पेलते रहो ! रुको मत ! और ना जाने क्या क्या बड़बड़ाती रही और वो पेलता रहा मुझे नॉन-स्टॉप !
अन्त में सुरेश ने मुझे जोर से पकड़ लिया और मेरी चूत में झड़ गया !
अभी करीब रात के बारह बज रहे थे और मेरी चूत पूरी तरह से शान्त नहीं हुई थी। वो भी मेरी मस्त मस्त चूत और चूचियों का फिर से मजा उठाना चाहता था और रात भी बहुत बची हुई थी !
वो फिर से तैयार हो गया और एक बार फिर से चोदने लगा !
वो कह रहा था- रेखा, मैं तेरी बड़ी बड़ी रसीली दूधिया चूचियों और चिकनी चूत का स्वाद कभी नहीं भूल पाऊँगा ! मुझसे शादी कर लो डार्लिंग ! और फिर मैं तुम्हें दिन रात चोदता रहूंगा ! हम दोनों ही रात गंवाना नहीं चाहते थे !
उस रात मैं करीब तीन बजे रात तक चुदवाती रही और फिर सुरेश अपने घर चला गया !
मेरी दोनों चूचियाँ फ़ूल कर लाल हो गई थी और मेरी चूत अन्दर से छिल सी गई थी !
यह थी मेरी पहली चुदाई !
इसके बाद तो मैं काफी चुदक्कड़ हो गई थी !
सुरेश ने पता नहीं कितनी बार मेरी चिकनी चूत का आनन्द उठाया और मैंने उसके गरम कठोर लंड का !
मुझे जरुर मेल करें ! Antarvasna
हाय दोस्तो Hindi sex stories , मेरा नाम नवीन है, मैं जयपुर से हूँ. मेरी उम्र 28 साल है और मैं शादीशुदा हूँ. मैंने अन्तर्वासना की काफी सारी सेक्स स्टोरी पढ़ी हैं.
मुझे देसी सेक्स में चुदाई की कहानी पढ़ने में बहुत ही ज्यादा मज़ा आता है. अक्सर सुबह की चाय के बाद मैं सबसे पहले अन्तर्वासना खोल कर रोज प्रकाशित होने वाली नई सेक्स स्टोरी को पढ़ता हूँ.
तमाम सेक्स स्टोरी पढ़ने के बाद मैंने भी अपनी अन्तर्वासना लिखने का सोचा. मेरी भी एक स्टोरी है, लेकिन मैंने झिझक के चलते उसे कभी लिखा नहीं, पर आज आप सबके लिए मैं अपनी उस कहानी को लिख रहा हूँ.
जैसा कि मैंने लिखा कि मैं शादीशुदा हूँ और मेरी शादी को 5 साल हो गए हैं. मेरी एक साली है. वो 18 साल की है. अभी एक साल पहले तक तो मैंने उससे इस तरह की नज़र से नहीं देखा था, लेकिन उसकी तरफ से हरी झंडी मिलने पर मैं उसके लिए कुछ उत्तेजित हो गया.
इधर समस्या ये थी कि पहल कौन करे. मैं जयपुर में था और वो जयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर एक छोटे से कस्बे में थी. उससे फोन पर ही बातें होती थीं. मैं फोन पर उसे इस बात के लिए राजी कर भी लेता कि मैं क्या चाहता हूँ. तब भी मुझे कुछ शंका थी. क्योंकि लड़कियों की आदत होती है ना कि जल्दी से सब चाहते हुए भी हां नहीं करती हैं.
इसालिए एक दो बार जब उसकी खुली हंसी मजाक से आगे बढ़ कर, मैंने उसे एडल्ट जोक आदि सुना कर चुदाई के पूरे मूड में ला दिया और ये तय हो गया कि वो चुद सकती है. लेकिन वो सब बात हो जाने के बाद मना कर देती थी कि किसी को पता चल जाएगा … तो क्या होगा जीजाजी.
मैंने उससे कहा- किसी को पता नहीं चलेगा, मैं मौका देखकर ही काम करूंगा.
वो मुझ पर पूरा भरोसा करती थी और मुझे पसंद भी बहुत करती थी. उसे मेरी नाराज़गी पसंदगी सबका बड़ा ख्याल रहता है.
उससे यूं ही बात होती रही. हम दोनों अब बातों में पूरी तरह से खुल गए थे.
फिर उससे मिलने की चाहत ने जोर मारा तो एक दिन मैं अपनी ससुराल आ गया. मेरी ससुराल में सास ससुर दो साले … दो सालियां … और साले की बीवियां हैं.
मेरे पास उस वक्त 800 मारुति कार थी. मैं उसी से ही ससुराल गया था. मैं जब भी ससुराल जाता हूँ, तो दो दिन तक उधर रुकता हूँ. इस दौरान सब लोग आस पास कहीं भी मेरी कार में बैठकर घूमने भी जाते हैं. इस बार भी ऐसा ही हुआ. वो मेरे बगल की सीट पर आगे बैठ गई. पीछे दोनों सलहजें थीं.
वहां पर वो मौका लगते ही मेरे करीब आ जाती और सेक्सी बातें करने लगती थी.
सच बताऊं तो मैंने अभी तक उसे टच नहीं किया था क्योंकि मैंने उससे कह दिया था कि जब तक वो खुद से नहीं चाहेगी, मैं उसे टच नहीं करूंगा. इसलिए मैं उससे बस ये ही बात करता और उस पर जोर देता कि वो मान जाए.
लेकिन वो चाहती थी कि मैं सही मौके के इन्तजार में रहूँ. ये कहा तो नहीं उसने पर मुझे ऐसा लगा.
इस बार भी मैं खाली हाथ लौट आया. साली मेरे लंड के नीचे नहीं आ सकी. इस तरह मैंने दो तीन बार ससुराल के चक्कर लगाए, पर वो मुझसे चुद न सकी.
आखिरी बार अभी तीन महीने पहले जब मैं अपनी ससुराल गया, तब तक मैं उससे अन्दर टच नहीं कर सका था. पर मैं उसे और वो मुझे, सेक्सी बातों से उत्तेजित कर देते थे.
इस बार मैं ससुराल गया, तो हम लोग वहां से हरियाणा के एक धार्मिक जगह पर घूमने गए. जो वहां से डेढ़ घंटे की दूरी पर थी. मारुति में कितनी सी जगह होती है, तब भी तीन आगे और 4 पीछे बैठ गए. मेरे ससुर और बड़े साले सलहज को छोड़कर बाकी सब गए थे. वो हमेशा की तरह मेरे बाजू में आगे बैठ गई थी. मतलब आगे मैं ड्राईवर सीट पर और मेरे बगल में मेरी साली और उसके बगल में मेरा छोटा साला था. यानि वो बीच में थी. बीच में जहां पर गाड़ी के गियर होते हैं, उसके दोनों तरफ उसकी टांगें थीं. एक टांग तो मेरी टांग से सटी हुई थी और एक टांग मेरे साले से. उसकी दोनों टांगों के बीच में गाड़ी का गियर था.
मैं तो पहले से ही गरम था. उधर वो भी मुझे बड़ी ही नशीली आंखों से देख रही थी. मैं गाड़ी ड्राइव कर रहा था … तो गियर लगाते हुए मैंने पहल कर दी. जब भी मैं गियर बदलता, उसकी जांघों को टच करता था.
वो सलवार सूट में थी. लड़कियों का पजामा ढीला ढाला होता ही है, उसमें से मैं उसकी जांघ को रगड़ कर टच करता … फिर अपना हाथ गियर पर ही रखे रहता. मौका पाते ही मैं अपना अंगूठा उसकी चूत के पास रगड़ देता था.
जब हम जा रहे थे, तो दिन का उजाला था, सो मैंने ज्यादा रिस्क लेना ठीक नहीं समझा. मैं उसको सिर्फ टच ही करता रहा. जब भी मैं गियर लगाता, तो उसकी जांघों को सहला देता था. वो कसमसा जाती थी और मेरी तरफ झुकी नज़रों से देखती थी.
गियर लगाते टाइम मेरी कोहनी उसके मम्मों पर आती थी, तो वो भी अपने मम्मों को मेरी कोहनी पर रगड़ देती थी. ये सिलसिला करीब करीब पूरे रास्ते चला. फिर हम वहां पहुंच गए.
वो मुझसे वहां पर नजरें मिलाती और मुस्कुरा देती थी. मैं भी चुदास से भर कर मुस्कुरा कर जबाब दे देता. बस ये ही चलता रहा … हम दोनों एक दूसरे से कहते कुछ भी नहीं.
अब वापस आते टाइम शाम हो चुकी थी और अंधेरा हो चुका था.
उस अंधेरे में मैं अपने आपको उसकी तरफ से आमंत्रित समझ कर अपने बाएं हाथ को गियर लगाने के बाद उसकी जांघों को कस कर दबाता रहा. उसने भी अपनी टांगें खोल रखी थीं. मैं अपने हाथ को उसकी चुत पर भी ले जाने लगा, तो वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो रही थी. मेरी कोहनी उसके मम्मों को रगड़ रही थी. इससे मेरा लंड काफी कड़क हो चुका था.
फिर मैं थोड़ी देर बाद उसकी चुत में पजामे के ऊपर से ही अपनी उंगली से रब करने लगा और उंगली से धक्का लगाने लगा.
कुछ देर बाद मैंने उस अंधेरे में महसूस किया कि उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वो मस्त हो गई थी. इस दौरान ना मैं उससे कुछ बोल रहा था … और न ही वो मुझसे कुछ कह रही थी. बाकी सब लोग गाड़ी में बातें कर रहे थे और किसी को हमारी इस रासलीला का कुछ पता नहीं था. क्योंकि वो लोग सब मुझे बहुत ही शरीफ़ मानते हैं.
जब हम सब घर पर पहुंचे, तो वो मुझसे कुछ नहीं बोली, पर मैंने उससे मुस्कुरा कर एक आंख से इशारा किया. वो मुस्कुरा कर बाथरूम में चली गई.
फिर वो मेरे पास जिस कमरे में मुझे सोना था, उधर आ गई थी. ये कोई नया नहीं हुआ था, पहले भी जब भी मैं कमरे में जाता था, तो वो मेरे पास आ कर बैठ जाती थी और मुझसे बातें करने लगती थी, इसलिए उस दिन भी वो मेरे पास आ गई. मैं बेड पर लेटा हुआ था और उससे कोई बात नहीं कर रहा था.
पर मैं उसकी बेचैनी को समझ सकता था. उसने आंखों ही आंखों में मुझसे बहुत कुछ बोल दिया था.
मैंने मौका देखकर उसका हाथ पकड़ लिया और दबाने लगा. वो कुछ भी नहीं बोली. तो मैंने उसके हाथ को सहलाते हुए मेरे हाथ को उसके कंधों पर ले गया और सहलाने लगा. उसने सर झुका लिया, तो मैंने थोड़ा और आगे बढ़ते हुए उसके मम्मों को दबा दिया और सहलाने लगा.
तभी वो बोली कि जीजू कोई देख लेगा.
मैंने कहा कि सब सो गए हैं, कोई नहीं देखेगा.
वो नहीं मानी, तो मैंने उससे कहा कि मैं ऊपर छत वाले बाथरूम में जा रहा हूँ, तुम भी आ जाना.
उन दिनों गर्मी के दिन थे, मैं चला गया. वो कुछ देर बाद आ गई.
मैंने उसे वहां पर पकड़ लिया और चूमने और सहलाने लगा. मैं उसके शरीर के हर हिस्से को सहलाने लगा. वो नाइटी में थी और अन्दर उसके मम्मों पर ब्रा भी नहीं थी. मुझे तो जैसे जन्नत ही मिल गई थी.
पर मैं उसे वहां पर चोदूं कैसे, ये समझ नहीं आ रहा था. क्योंकि कोई भी वहां आ गया, तो मेरी तो वाट लग जाती. वो भी डरी हुई थी. लेकिन मैं मौका भी जाने नहीं दे सकता था.
मैंने अपना हाथ उसकी नाइटी में डालकर उसके मम्मों को दबाने लगा और नाइटी को ऊपर करके एक दूध चूसने लगा. इस दौरान मैंने उसकी पेंटी में एक हाथ डाल कर उसकी चूत को रगड़ने लगा. उसकी चूत पहले से ही गीली हुई पड़ी थी. वो और मस्त हो गई.
तभी उसने कहा कि जीजू अब रहा नहीं जा रहा है.
मैंने फर्श पर बैठ कर उसे मेरी गोद में दोनों तरफ टांगें करके बैठा लिया. फिर अपना लंड बाहर निकाल कर उसकी चूत पर लगा दिया … और धीरे धीरे अन्दर करने लगा. लेकिन मेरा 8 इंच का लंड उसकी चूत में घुस ही नहीं रहा था. उसे दर्द भी हो रहा था.
चुदाई तो न हो सकी, पर उस रात वो दो घंटे तक मुझसे मज़े लेती रही और मैं भी उसके साथ मज़े लेता रहा.
हालांकि उस रात मैं उसके साथ पूरा मज़ा नहीं ले पाया था और बेकरारी और भी ज्यादा बढ़ गई थी.
दूसरे दिन हम दोनों ने फिर कभी मिलने के लिए बाय की.
अब मैं जल्दी ही वहां पर जाने की तैयारी में हूँ. तब मैं आगे की Hindi sex stories लिखूँगा.
दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं मेरा Hindi Sex Stories नाम राकेश है और मैं दिल्ली से हूँ। मैंने अपनी पिछली कहानी छवि की चुदाई में बताया था अपने बारे में जो कि वास्तविक कहानी थी। इस बार भी मैं हाज़िर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर और आशा करता हूँ कि यह भी आप लोगों को पसंद आयेगी, हर बार की तरह आपका प्यार और इमेल मिलते रहेंगे।
बात पॉँच साल पुरानी है और मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी और नौकरी के लिए रोज़ ही प्रयास करता था जिससे कि जल्द से जल्द मेरा काम कहीं सेट हो जाये। इसी प्रयास में चार महीने निकल गए लेकिन कहीं बात नहीं बनी। दिन पर दिन खर्चे होने ही थे लेकिन पैसे थे ही नहीं। मेरे परिस्थिति से मेरा मकान मालिक परिचित था सो किराए का कुछ नहीं बोलता। लेकिन अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी, बिना किराए के कितना दिन माकन मालिक के मेहरबानी पर रह सकता था। अंत में हार कर सोचा कि क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाये। यह सोच कर मैंने अपने मकान- मालिक से बोला कि अंकल कोई ट्यूशन पढ़ने वाला हो तो बताना, मैं शाम में ट्यूशन पढ़ा दिया करूँगा।
मेरी बात सुन कर गुप्ता जी (मकान मालिक) बोला- मेरी सपना भी तो दसवीं क्लास में पहुँच गई है, इसे मैथ और साइंस पढ़ा दोगे तो मेरे घर से ही शुरु कर दो, जैसे जैसे समय थोड़ा और निकलेगा तो तुम्हें आस-पास के कुछ और टयूशन मिल जायेंगे।
मैं थोड़ा निश्चिंत हुआ कि चलो कम से कम रहने खाने का इंतजाम हुआ, अब आगे की आगे देखेंगे।
अब मैं सपना के बारे में बता दूँ, सपना देखने में साधारण सी लड़की थी लेकिन पढने में साधारण न ज्यादा तेज न ज्यादा भोंदू, हमारी क्लास ठीक ठाक चल रही थी। मेरे नजर में उसे देख कर कोई गलत विचार कभी नहीं आये, पढ़ने का असर दो महीने में ही दिखने लगा। एग्जाम में उसे पहले से ज्यादा अंक मिले जिससे हर किसी ने मेरी तारीफ की। अब मैं भी उसके घर खुल कर आता जाता, कोई रोक टोक नहीं थी।
एक रोज़ रात को मैं सपना से बायलोजी की किताब लेने गया। शनिवार की बात है। किताब लेकर मैंने कुछ नोट बनाये, कुछ विधार्थियों को देने थे। मैं किताब पढ़ कर नोट बना रहा था कि किताब से मुझे एक खत मिला जिसे पढ़ कर मैं अन्दर तक हिल गया। वो पत्र सपना के बॉयफ्रेंड का था और उसमें दोनों के स्कूल में के बाथ रूम में स्तन दबाने की और लंड चूसने की बातें लिखी हुई थी। सपना का पत्र पढ़ कर उसके वक्ष मेरे सामने घूमने लगे।
मेरा भी मन उसे चोदने को होने लगा, रात में दो बार मैंने मुठ भी मारी क्योंकि वही एक साधन है हम लोगों के पास कि जब चाहो प्रयोग कर लो, वो भी बिना किसी खर्चे के ! वर्ना आप समझ सकते हैं…………..
दूसरे रोज रविवार था, और आमतौर पर गुप्ता जी इतवार को फिल्म देखने जाते हैं, यह रूटीन मुझे पहले से पता था। गुप्ता जी के जाने के बाद मैं सपना को किताब वापिस करने गया तो देखा की सपना कमरे में नहीं थी, फिर मुझे ध्यान आया कि कहीं रसोई में कुछ खाने का इंतजाम कर रही हो। लेकिन वो रसोई में नहीं थी। अब मैंने निराश होकर वापिस आने को कदम बढ़ाया, सोचा था कि सपना के बॉयफ्रेंड के पत्र जरिये ही सपना को डरा कर उसकी चूत-चोदन करूँगा लेकिन सपना मिली ही नहीं तो क्या?
वापिस गैलरी से होकर आ रहा था तो देखा की बाथरूम की बत्ती जल रही है। मेरे कदम वहीं रुक गए, बाथरूम से हल्की सी कुछ आवाज़ भी आ रही थी। मेरे मन को थोड़ी शका हुई, एक बार को सोचा कि छोड़ो यार कुछ भी तो क्या ! फिर ख्याल आया कि सपना बाथरूम में अवश्य कुछ कर रही होगी। यह सोच कर मैं अंदर से रोमांचित हो गया, दिल थाम कर दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ देखा ………….
देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई ………….
अंदर सपना अपने चूत के बाल साफ कर रही थी, वो भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर एक दम नंगी ! आज से पहले मैंने किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, यह देख कर तो मेरा पप्पू एक दम खड़ा हो गया, सपना की नजर मुझसे मिली तो उसके तो होश उड़ गए, हम दोनों की हालत शायद एक जैसी ही थी। सपना चूत एक दम साफ थी, बगल में एक क्रीम की शीशी रखी थी, उसके स्तन उतने बड़े भी नहीं थे लेकिन इतने बड़े जरुर हो गए थे कि उसे आराम से दबाया जा सके, 18-19 साल की लड़कियों का साइज़ उससे बिलकुल मैच करता था। मेरे दिमाग में तुंरत ध्यान आया- बेटा, सही मौका है इसे कैश कर ले वर्ना इंतजार ही करता रह जायेगा।
मैंने आगे बढ़ कर सपना के होठों को चूम लिया, सोचा कि देखूँ इसकी क्या प्रतिक्रिया है।
वो तुंरत अलग हो गई, बोली- मुझे छोड़ दो, वर्ना पापा को बोल दूंगी !
मैं बोला- अगर तुम अपने पापा को बोल दोगी तो मैं तेरा पत्र जो तेरी किताब में था उसे दिखा दूंगा।
थोड़ी देर को सपना सोचने लगी, फिर बोली- आप क्या चाहते हो?
मैं तेरा चूत चोदना चाहता हूँ………..
नहीं……….नहीं…………मैंने आज तक किसी से नहीं किया है………
तू घबरा मत ! तुझे कुछ नहीं होगा और मजा भी आयेगा।
सच सच………..?
हाँ डार्लिंग !
फिर आगे बढ़ कर सपना के होठ चूसने लगा, वो भी ऐसा ही कर रही थी।
फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगाई तो वो तड़प उठी- सर, प्लीज छोड़ दो , अह्ह्ह्ह्……. आह……. आह………….
फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा सात इंच का लंड देख सपना बोली- क्या यह पूरा घुस जायेगा?
डार्लिंग फिकर मत करो लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो और चूत छोटी, लेकिन हर चूत बड़े आराम से लंड को खा जाती है !
सपना को बाथरूम के फर्श पर लिटा कर 69 पोजीशन में उसकी चूत का स्वाद लेने लगा, सपना पहले तो मना कर रही थी लेकिन थोड़ा सा प्रयास करने पर वो मेरा साथ देने लगी, मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। दस मिनट तक मजा लेने के बाद उसे लिटा कर उसके चूत में ढेर सारा थूक लगाया और चूत के मुँह पर लाकर एक धक्का मारा, लेकिन चूत इतनी कसी थी कि मेरा लंड अंदर घुस नहीं पाया, सपना भी अंदर लेने को बेचैन थी।
फिर उसके पैरों को थोड़ा फैलाया जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया, और जोर का धक्का मारा, इस बार मेरे लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत के अंदर चला गया।
छोड़ गया तो केवल- हाय मैं मर गई….. तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……
वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।
दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड सपना की चूत की गहराइयों को नाप गया।
हाय आह………..आह……..
वोह…आह……..वोह………
कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. और सपना भी मेरा साथ देने लगी।
काफ़ी देर तक चुदाई अलग अलग तरह से मैंने किया…….. कभी डौगी तो कभी दीवार पर टिका कर, सपना भी मुझे खूब साथ दे रही थी, फिर उसकी बदन अकड़ने लगा, थोड़ी देर में मैंने भी पस्त होकर उसकी चूत में ही अपना सारा माल छोड़ दिया। फिर हम साथ साथ नहाये, नहाते वक्त भी मैंने उसकी चुदाई की।
चुदाई के बाद भी मुझसे पढ़ने आती रही और हम एक दूसरे का मजा लेते रहे। अब तो उसकी इतनी लंड लेने की आदत हो गयी है उसे जब भी मौका मिलता है कैश कर लेती है।
दोस्तो, यह थी मेरी सपना !
कृपया अपनी राय मुझे जरुर भेजना !दोस्तो, जैसा कि आप सभी जानते हैं मेरा नाम कोमल है और मैं दिल्ली से हूँ। मैंने अपनी पिछली कहानी छवि की चुदाई में बताया था अपने बारे में जो कि वास्तविक कहानी थी। इस बार भी मैं हाज़िर हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर और आशा करता हूँ कि यह भी आप लोगों को पसंद आयेगी, हर बार की तरह आपका प्यार और इमेल मिलते रहेंगे।
बात पॉँच साल पुरानी है और मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी और नौकरी के लिए रोज़ ही प्रयास करता था जिससे कि जल्द से जल्द मेरा काम कहीं सेट हो जाये। इसी प्रयास में चार महीने निकल गए लेकिन कहीं बात नहीं बनी। दिन पर दिन खर्चे होने ही थे लेकिन पैसे थे ही नहीं। मेरे परिस्थिति से मेरा मकान मालिक परिचित था सो किराए का कुछ नहीं बोलता। लेकिन अब तो मुझे भी शर्म आ रही थी, बिना किराए के कितना दिन माकन मालिक के मेहरबानी पर रह सकता था। अंत में हार कर सोचा कि क्यों न ट्यूशन पढ़ाया जाये। यह सोच कर मैंने अपने मकान- मालिक से बोला कि अंकल कोई ट्यूशन पढ़ने वाला हो तो बताना, मैं शाम में ट्यूशन पढ़ा दिया करूँगा।
मेरी बात सुन कर गुप्ता जी (मकान मालिक) बोला- मेरी कोमल भी तो दसवीं क्लास में पहुँच गई है, इसे मैथ और साइंस पढ़ा दोगे तो मेरे घर से ही शुरु कर दो, जैसे जैसे समय थोड़ा और निकलेगा तो तुम्हें आस-पास के कुछ और टयूशन मिल जायेंगे।
मैं थोड़ा निश्चिंत हुआ कि चलो कम से कम रहने खाने का इंतजाम हुआ, अब आगे की आगे देखेंगे।
अब मैं कोमल के बारे में बता दूँ, कोमल देखने में साधारण सी लड़की थी लेकिन पढने में साधारण न ज्यादा तेज न ज्यादा भोंदू, हमारी क्लास ठीक ठाक चल रही थी। मेरे नजर में उसे देख कर कोई गलत विचार कभी नहीं आये, पढ़ने का असर दो महीने में ही दिखने लगा। एग्जाम में उसे पहले से ज्यादा अंक मिले जिससे हर किसी ने मेरी तारीफ की। अब मैं भी उसके घर खुल कर आता जाता, कोई रोक टोक नहीं थी।
एक रोज़ रात को मैं कोमल से बायलोजी की किताब लेने गया। शनिवार की बात है। किताब लेकर मैंने कुछ नोट बनाये, कुछ विधार्थियों को देने थे। मैं किताब पढ़ कर नोट बना रहा था कि किताब से मुझे एक खत मिला जिसे पढ़ कर मैं अन्दर तक हिल गया। वो पत्र कोमल के बॉयफ्रेंड का था और उसमें दोनों के स्कूल में के बाथ रूम में स्तन दबाने की और लंड चूसने की बातें लिखी हुई थी। कोमल का पत्र पढ़ कर उसके वक्ष मेरे सामने घूमने लगे।
मेरा भी मन उसे चोदने को होने लगा, रात में दो बार मैंने मुठ भी मारी क्योंकि वही एक साधन है हम लोगों के पास कि जब चाहो प्रयोग कर लो, वो भी बिना किसी खर्चे के ! वर्ना आप समझ सकते हैं…………..
दूसरे रोज रविवार था, और आमतौर पर गुप्ता जी इतवार को फिल्म देखने जाते हैं, यह रूटीन मुझे पहले से पता था। गुप्ता जी के जाने के बाद मैं कोमल को किताब वापिस करने गया तो देखा की कोमल कमरे में नहीं थी, फिर मुझे ध्यान आया कि कहीं रसोई में कुछ खाने का इंतजाम कर रही हो। लेकिन वो रसोई में नहीं थी। अब मैंने निराश होकर वापिस आने को कदम बढ़ाया, सोचा था कि कोमल के बॉयफ्रेंड के पत्र जरिये ही कोमल को डरा कर उसकी चूत-चोदन करूँगा लेकिन कोमल मिली ही नहीं तो क्या?
वापिस गैलरी से होकर आ रहा था तो देखा की बाथरूम की बत्ती जल रही है। मेरे कदम वहीं रुक गए, बाथरूम से हल्की सी कुछ आवाज़ भी आ रही थी। मेरे मन को थोड़ी शका हुई, एक बार को सोचा कि छोड़ो यार कुछ भी तो क्या ! फिर ख्याल आया कि कोमल बाथरूम में अवश्य कुछ कर रही होगी। यह सोच कर मैं अंदर से रोमांचित हो गया, दिल थाम कर दरवाज़ा खोल कर अंदर की तरफ देखा ………….
देख कर मेरी आंख फटी की फटी रह गई ………….
अंदर कोमल अपने चूत के बाल साफ कर रही थी, वो भी अपने पूरे कपड़े निकाल कर एक दम नंगी ! आज से पहले मैंने किसी भी लड़की या औरत को पूरी तरह से नंगा नहीं देखा था, यह देख कर तो मेरा पप्पू एक दम खड़ा हो गया, कोमल की नजर मुझसे मिली तो उसके तो होश उड़ गए, हम दोनों की हालत शायद एक जैसी ही थी। कोमल चूत एक दम साफ थी, बगल में एक क्रीम की शीशी रखी थी, उसके स्तन उतने बड़े भी नहीं थे लेकिन इतने बड़े जरुर हो गए थे कि उसे आराम से दबाया जा सके, 18-19 साल की लड़कियों का साइज़ उससे बिलकुल मैच करता था। मेरे दिमाग में तुंरत ध्यान आया- बेटा, सही मौका है इसे कैश कर ले वर्ना इंतजार ही करता रह जायेगा।
मैंने आगे बढ़ कर कोमल के होठों को चूम लिया, सोचा कि देखूँ इसकी क्या प्रतिक्रिया है।
वो तुंरत अलग हो गई, बोली- मुझे छोड़ दो, वर्ना पापा को बोल दूंगी !
मैं बोला- अगर तुम अपने पापा को बोल दोगी तो मैं तेरा पत्र जो तेरी किताब में था उसे दिखा दूंगा।
थोड़ी देर को कोमल सोचने लगी, फिर बोली- आप क्या चाहते हो?
मैं तेरा चूत चोदना चाहता हूँ………..
नहीं……….नहीं…………मैंने आज तक किसी से नहीं किया है………
तू घबरा मत ! तुझे कुछ नहीं होगा और मजा भी आयेगा।
सच सच………..?
हाँ डार्लिंग !
फिर आगे बढ़ कर कोमल के होठ चूसने लगा, वो भी ऐसा ही कर रही थी।
फिर मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में लगाई तो वो तड़प उठी- सर, प्लीज छोड़ दो , अह्ह्ह्ह्……. आह……. आह………….
फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, मेरा सात इंच का लंड देख कोमल बोली- क्या यह पूरा घुस जायेगा?
डार्लिंग फिकर मत करो लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो और चूत छोटी, लेकिन हर चूत बड़े आराम से लंड को खा जाती है !
कोमल को बाथरूम के फर्श पर लिटा कर 69 पोजीशन में उसकी चूत का स्वाद लेने लगा, कोमल पहले तो मना कर रही थी लेकिन थोड़ा सा प्रयास करने पर वो मेरा साथ देने लगी, मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। दस मिनट तक मजा लेने के बाद उसे लिटा कर उसके चूत में ढेर सारा थूक लगाया और चूत के मुँह पर लाकर एक धक्का मारा, लेकिन चूत इतनी कसी थी कि मेरा लंड अंदर घुस नहीं पाया, कोमल भी अंदर लेने को बेचैन थी।
फिर उसके पैरों को थोड़ा फैलाया जिससे उसकी चूत का मुँह खुल गया, और जोर का धक्का मारा, इस बार मेरे लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा उसकी चूत के अंदर चला गया।
छोड़ गया तो केवल- हाय मैं मर गई….. तुमने मेरे चूत को फाड़ डाला……
वो दर्द से कराह उठी, मैं समझ गया कि इसकी चूत की आज पहली बार चुदाई हो रही है।
दूसरा धक्का बिना देर किये मैंने मार दिया जिससे मेरा लंड कोमल की चूत की गहराइयों को नाप गया।
हाय आह………..आह……..
वोह…आह……..वोह………
कुछ देर वैसे ही रहने के बाद मैं धीरे धीरे अपने लंड आगे पीछे कर उसे चोदने लगा, थोड़ी देर बाद उसे भी आनंद आने लगा. और कोमल भी मेरा साथ देने लगी।
काफ़ी देर तक चुदाई अलग अलग तरह से मैंने किया…….. कभी डौगी तो कभी दीवार पर टिका कर, कोमल भी मुझे खूब साथ दे रही थी, फिर उसकी बदन अकड़ने लगा, थोड़ी देर में मैंने भी पस्त होकर उसकी चूत में ही अपना सारा माल छोड़ दिया। फिर हम साथ साथ नहाये, नहाते वक्त भी मैंने उसकी चुदाई की।
चुदाई के बाद भी मुझसे पढ़ने आती रही और हम एक दूसरे का मजा लेते रहे। अब तो उसकी इतनी लंड लेने की आदत हो गयी है उसे जब भी मौका मिलता है कैश कर लेती है।
दोस्तो, यह थी मेरी कोमल !
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