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Massage Girl in Chennai: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Chennai who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Chennai that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Chennai massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Chennai who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Chennai massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Chennai massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Chennai who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Chennai employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Chennai helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Chennai

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Chennai at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi sex stories

हैलो रीडर्स, आई एम सुमित बैक वंस अगैन Hindi sex stories आई एम २४ इयर्स ओल्ड एंड विद ए गुड फिज़िक & गुड मशीन साइज़। बात तब की है जब मैं कॉलेज में था एमए फ़ाइनल कर रहा था और कॉलेज में फेस्ट चल रहा था। निधि मेरी बहुत अच्छी दोस्त थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहता भी बहुत था लेकिन कभी कहने की हिम्मत नहीं होती थी। हम दोनों खूब साथ कॉलेज में रहते थे बात चीत करते थे लेकिन इससे ज़्यादा न कभी मैंने न कभी उसने ही कोई पहल करी। फेस्ट में हम दोनों एक्टर ऐक्ट्रेस का रोल कर रहे थे। नाटक शाम को ५ बजे होना था और हम १ बजे से ही रिहर्सल कर रहे थे। लगभग २ घंटा पहले मेक अप करके हम दोनों को थोड़ी देर डाइरेक्टर ने हमें एक ही कमरे में छोड़ दिया और डाइलोग बोल कर देखने को कहा। उसने एक आदिवासी की साड़ी पहनी थी और मैंने एक धोती और एक फटा हुआ बनियान पहना हुआ था क्योंकि मैं नाटक में एक मजदूर और वो मेरी बीवी का रोल कर रही थी।

नाटक की प्रक्टिस में हम दोनों को एक सीन में डांस करना था मैंने उसकी कमर में हाथ डाला और उसने मेरी कमर में हाथ डाला और हमने डांस करना शुरू किया। उसके बाद एक बेंच से टकरा कर वो थोडी सी लड़खड़ायी और उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। अचानक मेरी नज़र उसके बूब्स पर चली गई जो ब्लाउज़ का गला गहरा होने की वजह से साफ साफ दिखाई पड़ रहे थे। उसका रंग इतना गोरा था कि मानो दूध से भी सफ़ेद। साइज़ तो बस एक दम परफेक्ट। इतना परफेक्ट कि कोई भी देखे तो बस देखता ही रह जाए। शायद ३६-२६-३४ होगा। मेरी निगाह उसकी छाती से ही अटकी रह गई। तभी मैंने देख कि निधि अपने साड़ी का पल्लू उठाने की बजाय मेरी तरफ़ ही देखे जा रही है। मुझे लगा कि शायद ग्रीन सिग्नल मिल रहा है मैंने चेहरा ऊपर उठा कर उसके लिप्स पर किस करना शुरू कर दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया। मैं किस और ज़्यादा डीप करता गया और फ़िर अपनी जीभ उसके मुंह मी दे दी और फ़िर उसके जीभ मेरे मुंह में भी आ गई। वो भी बहुत एन्जॉय कर रही थी।

मैंने मौका देखते हुए उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और ब्लाउस के ऊपर से ही पूरा मज़ा लेने के बाद मैंने ब्लाउज़ के अन्दर हाथ डालने की बजाय उसे पीछे से बांहों में भर कर उसकी गांड दबाने लगा। मैंने वो भी मुझे बिल्कुल मना करने की बजाय मेरा साथ दे रही थी मैंने अब देर न करते हुए उसकी साड़ी को उठाया और उसकी गोरी गोरी टांगो को देख कर मेरी आँख जैसे खुली की खुली ही रह गई। मैं उसकी टांगों को नीचे से चूमता हुआ ऊपर तक गया और उसकी काले रंग की पैंटी को किस किया और फ़िर देर न करते हुए उसकी पैंटी को उतार कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो और ज़्यादा गरम होती जा रही थी।

मैंने अब देर न करते हुए अपनी धोती खोल कर अपने लंड को आज़ाद किया जिसका कच्छे में बुरा हाल हो रहा था। ८ इंच लंबा और ३ इंच मोटा लंड देखते ही उसके होश उड़ गए और वो कहने लगी कि नहीं सुमित प्लीज़ मेरे साथ वो मत करना मुझे बहुत दर्द होगा। मैंने कहा डरो मत मेरी जान मैं बिल्कुल दर्द नहीं करूँगा मगर वो मान ही नहीं रही थी। तो मैंने उसको कहा कि क्या तुम मेरे इस हथियार को अपने मुंह में ले सकती हो? उसने पहले तो मना किया पर फ़िर मेरे बार बार प्लीज़ कहने पर वो मान गई अब वो मेरे लंड को चूस रही थी और मैं मानो जन्नत में था। उससे खूबसूरत लड़की को मैंने अपनी ज़िंदगी में नहीं देखा था और वो मेरा लंड चूस रही थी।

थोड़ी देर के बाद वो पूरे मज़े के साथ चुसाई का काम करने लगी और उसे भी खूब मज़ा आ रहा था। अब मैंने उसको कहा कि जानू एक बार असली खेल भी खेल लेते हैं फ़िर बहुत मज़ा आएगा। वो फ़िर भी घबरा रही थी लेकिन अब की बार थोड़ा सा ही समझाने पर वो तुरंत मान गई और मैंने मुंह से ढेर सारा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर लगाया और अपना काम धीरे धीरे शुरू किया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। मगर अब वो कुछ बोल भी नहीं सकती थी क्योंकि अगर वो थोड़ी से भी आवाज़ बाहर निकालती तो बाहर से कोई भी आ सकता था। ऐसे में मैंने अपने होठ उसके होठों पे रख दिए और चुदाई कार्यक्रम शुरू कर दिया। थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और फ़िर लगभग १५ मिनट की मजेदार चुदाई के बाद हम दोनों ने अपना अपना पानी छोड़ दिया। उसके बाद तो मैंने लगभग हर हफ्ते उसे उसके घर पर जाकर चोदा।

वैसे वो आज भी मेरी बेस्ट फ्रेंड है पर अब उसकी शादी हो गई है। Hindi sex storie हालांकि शादी को २ महीने ही हुए हैं पर हो सकता है कि मेरा प्रोग्राम अभी भी चलता रहे।

Antarvasna

इस भाग में आप पढ़ें कि कैसे मैंने Antarvasna अपनी सगी बुआ को चोदा! या बुआ ने मुझे चोदा! जब हम शादी में से वापस आए तो मैंने सोचा कि अब मैंने बुआ के साथ ऊपर का मजा ले लिया। फ़िर मुझे लगा कि यार ये सब ग़लत हो रहा है। रानी मेरी बहन लगती है उसके साथ किया। गौरी मेरी बहन लगती है उसको भी चोदा। और ये भी मेरी बुआ लगती है इसको भी ऊपर से चोद दिया। इसीलिए मैंने सोचा के अब मैं रानी, गौरी और बुआ के साथ नहीं करूँगा। और मैंने इनके बारे में ग़लत सोचना छोड़ दिया।

लेकिन, कुछ दिनों के बाद बुआ का फोन मम्मी के पास आया। मम्मी ने मुझे बताया के मुझको रात में बुआ के घर जाना है क्योंकि फूफा जी और उनका लड़का एक शादी में गये हैं। मैं फिर बुआ के घर चला गया।

मैं जब बुआ के घर में घुसा तो बुआ सामने ही बैठी थी। उस ‍‍दिन उसने काली साड़ी और काला ब्लाउज पहन रखा था। मैं सामान्य था क्योंकि बुआ, गौरी और रानी का ख्याल मन से निकाल चुका था। बुआ उठी और मेरे लिए खाना लेकर आई। हम खाना खाने बैठ गये। खाना खाते वक्त बुआ ने अपनी साड़ी को उपर किया और बुआ इस तरह से बैठ गई कि मुझे उसकी चूत दिखाई दे। पर मैंने ध्यान नहीं दिया।

ख़ाने के बाद बुआ बोली- रात के दस बज गये हैं, अब सो जाते हैं।

मैं बेड पर लेट गया और बुआ भी मेरे बराबर में आकर लेट गई। मैं सोने की कोशिश कर रहा था। उस कमरे के बाहर की लाइट जल रही थी। जिससे कमरे में बहुत रोशनी हो रही थी कि सब साफ दिख रहा था। मैं आज चुपचाप लेटा हुआ था। मेरी आँख थोड़ी खुली थी थोड़ी बंद थी। एक दम मुझको झटका लगा। जब बुआ ने अपना पैर मेरे पैर से छुआ। पर मैंने सोचा कि बुआ सो चुकी है। और मैंने अपना पैर अलग कर लिया।

फिर थोड़ी देर बाद बुआ खड़ी हुई और उसने अपनी साड़ी उतार दी। और वो पेटिकोट और ब्लाउज में लेट गई। उसने सोचा कि मैं सो चुका हूँ। मुझको दोबारा झटका जब लगा जब उसने अपनी गांड को मेरे लंड पर छुआ दिया। पर मैं चुप अपने मन पर काबू करके पड़ा रहा।

बुआ इस हरकत से मुझको जगाना चाहती थी। पर मैंने कोई हरकत नहीं की। बुआ को बुरा लगा और बैठ गई और बोली आज ‘बुआ चोद’ सो रहा है। जब मेरा मन आज चुदने का कर रहा हैं तो आज ‘बुआ का लंड’ सो रहा है और उस दिन मेरे मना करने पर भी खुद ही कर रहा था।

और फिर, बुआ ने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए। आज बुआ ने कॉटन की काली ब्रा पहन रखी थी। फिर बुआ मेरी तरफ मुंह करके लेट गयी। और अपना एक हाथ मेरे अंडरवियर के उपर से मेरे लंड पर रख दिया। मुझको फिर झटका लगा और मैंने उसका हाथ अपने हाथ से हटा दिया।

फिर बुआ बोली- मुझको आज तुझको चोदना पड़ेगा।
मैं तो उसकी बोली सुनकर दंग रह गया कि बुआ ऐसी बोली बोल रही है।

फिर उसने अपने एक हाथ से मेरे अंडरवियर से मेरा लंड निकाल लिया। अबकी बार मैंने बुआ को कुछ नहीं कहा और बस सोचता रहा कि क्या करूँ? बुआ ने मेरे लंड को अपने कोमल हाथ से सहलाना शूरु कर दिया। मैंने अपनी आँख खोली तो बुआ बोली आज तेरा मन नहीं कर रहा है क्या?

तो मैंने कहा- तुम मेरी बुआ लगती हो।
तो उसने कहा- उस दिन तो तू मुझको रंडी समझ रहा था।

और वो बोलते बोलते मेरे लंड की मूठ मार रही थी। मेरा लंड भी अब खड़ा होने लगा था। मैं भी एक मर्द हूँ। कब तक मैं मन पर काबू रखता। फिर भी मैंने बुआ का हाथ पकड़ कर अपने लंड से अलग कर दिया।

फिर बुआ बोली- मुझको आज तुझसे हर हाल में चुदना है। क्योंकि आज मैंने तेरे लिये ब्लू फिल्म देखी है।
मैंने उससे कहा- तुम मेरी बुआ हो उस दिन जो हुआ वो ग़लत था। और जब तुमको सब पता था तो तुमने मुझको रोका क्यों नहीं?

बुआ ने कहा- मैं तेरे लंड को देख कर गरम हो गई थी। और तेरे लंड की दीवानी भी। क्योंकि आज तक मुझको इतना मोटा और लम्बा लंड कभी भी नहीं मिला हैं। क्योंकि तेरे फूफा के सिवाय मैं आज तक किसी और से नहीं चुदी हूँ। और उसका लंड तो बहुत छोटा और पतला हैं। और वो बस मुझको चोदता हैं और सो जाता है चाहे मैं झड़ूं या ना झड़ूं। उसका लंड ठीक से अन्दर नहीं जाता है जिससे मुझको सही मजा नहीं आता है और मैं हमेशा तड़पती रहती हूँ। और कभी उंगली से तो कभी लम्बे बैंगन से अपनी प्यास बुझाती हूँ। तूने भी उस दिन खुद तो मजा ले लिया और अपनी बुआ को तड़पते हुए छोड़ दिया। पर आज सुबह जब तेरा फूफा मुझको चोद कर खुद ही झड़ कर चला गया और मुझे बिना झड़े छोड़ गया तो मैं ब्लू फिल्म देखने लगी तो मुझको तेरा ख्याल आया कि तू भी तो मुझको चोदना चाहता हैं।

फिर उसने अपनी ब्रा उपर की और मेरे मुंह में अपनी चूची का दाना देने लगी। फिर मैंने अपना मुंह बंद कर लिया।

उसने कहा- तू मुझको मत चोद पर जो मैं कर रही हूँ वो तो करने दे। वरना मैं तेरी उस हरकत के बारे में सब को बता दूँगी।

और मैं डर गया। और मैंने कहा जो करना है कर लो। और मैं चुपचाप पड़ा रहा। पर मैं आज सच्ची में बुआ के साथ नहीं करना चाहता था।

फिर बुआ ने मेरा अंडरवियर उतारा और मेरे लंड की खाल को आगे पीछे करने लगी। यानी वो मेरी मूठ मार रही थी। और अपने एक हाथ से अपनी चूत में उंगली कर रही थी। फिर बुआ ने मेरे लंड को अपनी चूची के बीच में फंसाया और अपनी चूची को मेरे लंड से चोदना शुरू कर दिया।

अब मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था। फिर मैंने बुआ को अलग कर दिया। पर आज तो बुआ मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझाना चाहती थी। फिर बुआ उठी और उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसे उतार दिया। बुआ ने नीचे मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी। क्योंकि बुआ नर्स हैं। ‍इसी कारण वो अपने घर पर पेटीकोट के नीचे स्कर्ट पहनती है। और बुआ अपने घर पर ‍अधि‍कतर स्कर्ट और ब्रा में ही रहती हैं ताकी जब भी क्लीनिक पर जाना हो तो बस नर्स वाला गाऊन पहना और चल दी। जो उसने अपने घर के बाहर के कमरे में खोल रखा हैं।

बुआ ने अपनी स्कर्ट उठाई और मेरे लंड बैठने लगी तो मैंने उसको धक्का दिया और जाने लगा। पर बुआ तो आज एक मर्द की तरह हो रही थी। और उसने मुझको अपनी तरफ खींचा और मेरे लंड के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी। अब मैं अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करता रहा।

तो बुआ ने मुझे दो थप्पड़ मारे और बोली- चोद अपनी बुआ को।

फिर उसने अपने हाथ से मेरे हाथ पीछे किए और अपनी साड़ी से बेड से बाँध दिए। फिर उसने अपनी स्कर्ट ऊपर की और मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ने लगी। उसकी चूत से चिकना और गरम पानी निकल रहा था।

करीब दस मिनट बाद मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया। अब उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर सीधा खड़ा किया और अपनी चूत को मेरे लंड पर रख कर बैठ गयी। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकाबट के अंदर चला गया।

फिर बुआ हँसी और बोली- बोल! बुआ लंड! आ रहा है मज़ा।

मैं चुप पड़ा रहा।

फिर वो बोली- मैं तुझको बहुत मजा दूँगी। जब भी तेरा मन चूत मारने का करे तो तू बता देना तेरी ये रंडी आ जायेगी। फिर बुआ मेरे लंड पर धक्के लगाने लगी। बुआ ने अपनी ब्रा से एक चूची को निकाली और मेरे मुंह में दे दी और बोली- आज तू इस रंडी का दूध भी पी!

मैं उसकी चूची पी नहीं रहा था, तो बोली- बुआ चोद! पी इसे!

मैं डरकर उसे पीने लगा। बुआ की चूची एकदम सख़्त हो गई थी। अब बुआ को मजा आने लगा था। फिर वो उठी और उसने अपनी चूत को पौंछा। मैंने सोचा कि वो झड़ चुकी है पर पता ही नहीं था कि वो अभी भी झड़ी नहीं है।

फिर उसने मेरे लंड को अपनी ब्लाउज से पौंछा और बोली- अब मैं अपनी चूत को सुखा लूं।

उसने अपनी चूत को एक दम सुखा लिया। वो बोली- ले अब सुखी चूत मार, अपनी बुआ की सूखी चूत मारने में तुझको बहुत मजा आएगा।
और वो मेरे खड़े लंड पर बैठ गई, उसने एक बार में ही पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया और वो ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगी।

करीब दस मिनट बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ।

तो बुआ रुक गई। फिर उसने पाँच मिनट बाद धक्के मारने शुरू किये। अब की बार बुआ पूरा लंड बाहर निकालकर जड़ तक लंड को पूरा अंदर कर रही थी। और धक्के भी ज़ोर से मार रही थी। बुआ की स्पीड बढ गई और वो मुझसे चिपक गई। मैं भी बुआ से अपने आप चिपक गया। हम दोनों एक साथ झड़ चुके थे।
बुआ मेरे कान में बोली- आया अपनी इस रंडी बुआ को चोदने में मज़ा?

उस रात बुआ ने मुझे तीन बार चोदा और हम तीनों बार एक साथ ही झड़े। बुआ ने मेरा सारा पानी अपनी चूत में ही छुड़वाया था। फिर सुबह को बुआ नहाकर चाय बनाकर लाई और बोली- रात कैसी रही? तीन बार अपनी बुआ को चोदा तूने!

मैं बोला- बुआ मैं तो अपने मन से तुम्हारा ख्याल निकाल चुका हूँ, मैं बहुत शर्म महसूस कर रहा हूँ।
फिर बुआ बोली- ठीक है। अब ऐसा दोबारा नहीं होगा। उस दिन तूने बुआ को चोदा और आज मैंने तुझको चोद दिया। हिसाब बराबर तुझको शर्म आती है तो ठीक है।
और बुआ वहाँ से अपने क्लीनिक पर जाने के लिये तैयार होने के लिये चली गई।
पर फिर मैंने दिन में बुआ की गांड भी मार ली। ये अगली कहानी में।

मैंने अपनी बुआ को चोदा… आपको यह कहानी कैसी लगी? Antarvasna

(Delhi Ki Aunty Ki Chudai Ki Kahani)
-चुदाई की कहानी

हैलो फ्रेंड्स, आज मैं आपको जो चुदाई की कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो मेरी एक पाठिका और मेरी चुदाई की कहानी है. पहले मैं आपको मेरा परिचय दे देता हूँ. मैं दिल्ली से हूँ मेरी हाईट 5 फुट 9 इंच है.

मेरी सेक्स स्टोरी पढ़ कर एक दिन मेरे पास एक ईमेल आया, जिसमें लिखा था मुझे आपकी कहानी बहुत अच्छी लगी. मैं आपसे सम्पर्क करना चाहती हूँ.

उसने मुझे अपना कांटेक्ट नम्बर दे दिया. मैंने उस कांटेक्ट नम्बर पे कांटेक्ट किया तो कुछ इस तरह से बात हुई.

विशाल- हैलो
पाठिका- हाय आप कौन बोल रहे हैं?
विशाल- मैं विशाल बोल रहा हूँ क्या आपने मुझे ईमेल किया था?
पाठिका- ओह यस आप विशाल बोल रहे हैं, मुझे आपकी स्टोरी बहुत अच्छी लगी. मैं आपसे मिलना चाहती हूँ. मैं 38 साल की हूँ और मेरा नाम वनिता है.
विशाल- अच्छा तो मुझे आपका एड्रेस और टाइम दे दो.

बाद में उसने मुझे अपना एड्रेस दिया वो भी दिल्ली से ही थी. उसने मुझे डेट और टाइम दे दिया.

मैं उसके बताई हुई डेट, टाइम और एड्रेस पर पहुँच गया. मैंने डोरबेल बजाई तो दरवाजा खुला और सामने 38 साल की खूबसूरत आंटी खड़ी थी. उसे मालूम था कि मैं आने वाला था इसलिए उसने नई साड़ी पहनी थी और मेकअप भी किया था. उसके बदन से खुशबू आ रही थी शायद उसने परफ्यूम लगाया था. उसके मम्मे बहुत बड़े और तने हुए थे. उसके होंठ बहुत गुलाबी थे. उसके मस्त रूप को मैं थोड़ी देर तक यूं ही एकटक देखता रह गया.

फिर उसने मुझे अन्दर आने को कहा तो मैं उसके घर के अन्दर चला गया. अन्दर कोई नहीं था. वनिता ने मुझे पानी दिया, मैंने गिलास लेते वक्त उसकी उंगली को छू लिया. वो मुस्कुराई फ़िर मेरे पास सोफ़े पर बैठ गई. मेरा लंड तो पहले से ही टाईट हो गया था.

वनिता ने मुझसे कहा- मैं तो समझ रही थी कि आप बड़ी उम्र के होंगे लेकिन आप तो बहुत हैंडसम हैं.
मैंने पूछा- आपके घर में कौन कौन रहता है?
वनिता ने कहा- मैं और मेरे पति, लेकिन अभी वो बाहर गए हुए हैं. तुम तब तक मेरे साथ जो चाहे कर सकते हो.

मैं उसके थोड़ा करीब हो गया और उसके हाथों को पकड़ लिया.. वो चुपचाप थी.

धीरे धीरे मैंने उसके हाथों को मसलना शुरू किया. फिर धीरे धीरे मैं ऊपर को बढ़ रहा था, मेरा हाथ उसके पेट पर फिरने लगा और ब्लाउज के ऊपर से उसके मम्मों पर हाथ फ़िराया. उसने नशे से आँखें भर कर मेरी तरफ देखा तो मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. उसकी साँसें जोर से चल रही थीं और आँखें मस्ती से बंद हो गई थीं.

मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोलना शुरू किए और ब्लाउज को निकाल दिया. अब मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके तने हुए मम्मों को मसल रहा था.

फिर उसकी साड़ी निकाल दी और उसका पेटीकोट ऊपर उठाकर उसकी जांघ पर हाथ फिराया. इसके बाद उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चुत पर हाथ फ़िराने लगा. अब उसके मुँह से आवाज आने लगी थी.

‘अह्हह्हह उहहह्हह..’

मैंने उसका पेटीकोट निकाल दिया, अब वो सिर्फ पेंटी और ब्रा में ही थी.

कुछ पल बाद उसने मेरी शर्ट निकाल दी और मेरी चौड़ी छाती पर हाथ फ़िराने लगी.

उसने कहा- तुम्हारी बॉडी तो बहुत स्ट्रोंग है.

मैंने उसके होंठों को चूम लिया. फ़िर उसने मेरी पेंट भी उतार दी. मेरा लंड तो निक्कर फाड़ कर बाहर आने की कोशिश कर रहा था. निक्कर टेंट की तरह फूल गया था. उसने मेरा लंड निक्कर में से निकाला तो उसकी आँखें फ़ट गई. पूरा 8” इंच का खड़ा लंड था, शायद इतना बड़ा लंड उसने पहली बार देखा था. अब वो मेरे लंड को चूसने लगी.

इसी समय मैंने भी उसकी ब्रा निकाल दी और उसके बड़े बड़े मम्मों को चूसने लगा. उसके निप्पल बहुत कड़क थे.

कुछ ही देर में मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैंने उसकी पेंटी उतार दी. उसकी चुत एकदम चिकनी थी. मुझे बड़ी मस्त चुत लग रही थी.

मैंने अपना 8” इंच का लंड उसकी चुत की फांकों में लगा दिया. मैं लंड डालने की पोजीशन में आ गया था.

वो बोली- धीरे पेलना.. मेरी चुत फ़ट जाएगी. मैंने लंड को उसकी चुत में धीरे धीरे पेलना शुरू कर दिया. कुछ ही पलों में मैं पूरे जोश में आ गया था. मैं उसे जोर जोर से धक्के देने लगा.

वो भी कुछ देर की पीड़ा के बाद मेरा साथ देने लगी.

करीब आधे घंटे की चुदाई में वो दो बार झड़ चुकी थी. अब मेरी स्पीड बहुत तेज हो गई थी, थोड़ी देर बाद मेरे लंड से भी सफ़ेद दही निकल गया.

थोड़ी देर बाद जब हम दोनों शांत हो गए तो मैंने उससे कहा- हम जब तक साथ हैं. हम कपड़े नहीं पहनेंगे, पूरे नंगे ही रहेंगे.
वो बोली- जो तुम कहो मैं वैसा ही करूँगी. एक दिन के लिए मैं तुम्हारी बीवी हूँ.. तुम जो चाहे करो.

हम शाम तक एक दूसरे की बांहों में नंगे पड़े रहे और एक दूसरे के बदन से खेलते रहे.

करीब 8 बजे वो खड़ी हुई और खाना बनाने चली गई. इस वक्त मुझे उसकी गांड बहुत मस्त लग रही थी. उसकी गांड चलते वक्त ऊपर नीचे हो रही थी. वो बिल्कुल नंगी खाना बना रही थी.

इधर मैं नंगा पड़ा टीवी देख रहा था. मैं बार बार उसकी तरफ़ भी हसरत भरी निगाहों से देख रहा था. उसके गोरे कूल्हे बहुत खूबसूरत लग रहे थे. जैसे ही वो कुछ लेने आगे बढ़ती उसके कूल्हे और चूचे ऊपर नीचे डोलने लगते थे.

मेरा लंड फ़िर से एकदम टाईट हो गया. मैं खड़ा हुआ और उसके पीछे जाकर उसकी गांड में अपना लंड रगड़ने लगा. साथ ही उसे अपनी बांहों में भर लिया.

वो मुस्कुराने लगी. वो रोटी बना रही थी और मैं उसके मम्मों को पीछे से मसल रहा था.

क्या सॉफ्ट चूचे थे.

फ़िर मैंने उसके मम्मों पर तेल लगाया और उसकी चूचियों की मसाज करने लगा. उसके चूचे चमकने लगे थे.

फ़िर मैंने उसकी गांड पर तेल लगाया. कुछ देर तक मैं उसकी गांड के छेद में तेल लगाता रहा और उसे मसलता जा रहा था. फ़िर उसकी पीठ पर, उसकी जाँघों पर.. व उसके पूरे बदन पर तेल लगा दिया.

अब वो भी पूरी कामुक हो उठी थी. उसने गैस को बंद किया और पलटकर मुझे बांहों में लेकर मेरे होंठों को चूसने लगी. उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. शायद हम दोनों 10 मिनट तक दूसरे के होंठों को चूसते रहे. फ़िर उसने मेरे लंड पर तेल लगाना शुरू किया. वो मेरे पूरे बदन पर तेल लगाने लगी और मसाज करने लगी. हम दोनों का बदन पूरा चिकना हो गया था.

अब मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसको उठाकर बाथरूम में ले गया. मेरा लंड तो पहले से ही पूरा तना हुआ था.

वनिता लंड हिलाते हुए बोली- इसको अभी तो खाना खिलाया था, फ़िर से भूखा हो गया.
मैंने कहा- इसकी भूख तो एक दिन के बाद ही मिटेगी.

वो मेरी गोदी में बैठ गई. मैं उसके मम्मों पर पीछे से साबुन लगा रहा था और मेरा लंड उसकी गांड के छेद को छू रहा था

कुछ देर बाद वो खड़ी हो गई और उसने मेरे लंड को हाथ में ले लिया. मेरे लंड का का सुपारा बाहर निकाल कर उस पर साबुन लगाने लगी और उसको आगे पीछे करने लगी.

मैं उसके गोरे गोरे मम्मों पर साबुन लगा रहा था और उन्हें मसल रहा था.

फिर मैं उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा. उसके मुँह से आवाज निकालने लगी- उह्हह्ह.. अह्हह्ह.. चूसो मेरे राजा पूरा चूस लो.

मैं उसके निप्पल पर अपनी जीभ रगड़ रहा था. अब उसने मेरे पूरे बदन पर साबुन लगाया. मैंने भी उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और फोम के गुच्छे से रगड़ा ताकि झाग ज्यादा हो जाए.

इसके बाद मैंने उसको बाथरूम में लेटा दिया. बाथरूम काफी बड़ा था.

मैंने अपना लंड उसके मम्मों पे रगड़ने लगा. वो मादक आवाज निकाल रही थी- उईईईमा.. अब मुझसे नहीं रहा जाता.. डाल दे पूरा लंड मेरी चुत में..

मैंने अपना खड़ा लंड उसकी चुत पर रख दिया. लंड में साबुन लगा हुआ था इसलिए फ़टाक से चुत के अन्दर चला गया.

साबुन लगाकर चुत चुदाई करने का मजा ही कुछ और होता है.

मैं उसको धकापेल धक्के दे रहा था और वनिता आँखें बंद करके लंड का पूरा मजा ले रही थी.

करीब एक घंटे तक चुदाई चलती रही.

फ़िर वो झड़ गई और बोली- बहुत मज़ा आया..

उसने मेरे गाल पर चुम्मी ले ली.

रात का डिनर भी हम दोनों ने नंगे ही किया. वो मेरी गोद में नंगी बैठी थी और मैं भी नंगा ही डाइनिंग टेबल पर बैठा था. हम दोनों एक दूसरे को खिला रहे थे.

मेरा लंड इस वक्त ढीला था.. लंड ने दो बार जो मजा ले लिया था.

खाना खाने के बाद उसने बरतन भी नंगे हो कर ही धोये. मैं ये सब देख रहा था. अब मेरा लंड धीरे धीरे फ़िर टाईट हो रहा था. वो बरतन धोकर मेरे पास बेड पर आई और लेट कर टीवी देखने लगी.

अचानक वो खड़ी हुई और अल्मारी में से सीडी निकाली और सीडी प्लेयर में लगा दी. वो नंगी पिक्चर की सीडी थी.

अब हम वैसा ही करने लगे जैसे उस ब्लू फिल्म में आ रहा था.

मैंने वनिता की चुत में उंगली डाली और अन्दर बाहर करने लगा. इसके साथ साथ मैं उसकी चुत को चाट भी रहा था. वनिता को बहुत मजा आ रहा था.

फिर उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और टीवी में जैसा आ रहा था, वैसे ही उसने अपना थूक मेरे लंड पे लगाया और अन्दर बाहर करने लगी.

फ़िर मैं सीधा हो गया और वो मेरे ऊपर घुटनों के बल चढ़ गई और मेरा लंड अपनी चुत में डाल लिया. वो ऊपर नीचे होने लगी.. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैं उसके थिरकते हुए मम्मों को दबा रहा था.

करीब 15 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा फ़िर वो कुतिया की तरह हो गई और मैं पीछे से उसकी चुदाई करने लगा. पहले मैंने उसकी चुत में लंड पेला और बाद में उसकी गांड में डाल दिया.

वो चिल्ला पड़ी- उईईमा मेरी गांड फट गई अह्हह्हह.. उह्हह्ह..

जैसे पिक्चर में आवाज़ आ रही थी, वो भी वैसे ही आवाज निकाल रही थी.

अब मैं जोर जोर से उसकी गांड की चुदाई करने लगा. वो भी मज़े में आ गई थी. करीब एक घंटे बाद चरम आ गया और मैं झड़ गया.

फ़िर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे को बांहों में लेकर सो गए.

दूसरे दिन हम करीब 10 बजे उठे, दोनों ने एक साथ स्नान किया और वो नंगी ही नाश्ता लाने चली गई.

उसने कहा- आज करीब 3 बजे मेरा पति आ जाएगा, तुम 12 बजे चले जाना.
मैंने कहा- ठीक है..

नाश्ता में ब्रेड और बटर था. अब वो मेरी गोद में आकर बैठ गई. मैंने चाकू में मक्खन लिया और उसके मम्मों पर लगाने लगा, उसके निप्पल पर लगाया. अब वो घूम गई और मेरी गोद में मेरे सामने मुँह करके बैठ गई. मैंने उसके निप्पल से और मम्मों से मक्खन चूसना शुरू किया. वो पूरी मदहोश हो रही थी.

फ़िर उसने भी मेरी छाती पर मक्खन लगाया, मेरे निप्पल पे मक्खन लगाया और निप्पल चूसने लगी.

इसके बाद उसने मेरे लंड पे मक्खन लगाकर पूरा लंड अपने मुँह में डाल दिया और चूसने लगी.

मैं उसकी चुत को चाटने लगा. अब उसकी चुत पूरी मुलायम हो गई थी. उसने बैठे बैठे ही मेरा लंड अपनी चुत में डाल दिया. मक्खन लगा होने से उसकी चुत चिकनी हो गई थी. मेरा लंड झट से अन्दर घुस गया. वो धक्के देने लगी.. मैं उसके होंठों को चूसने लगा. फिर उसने मेरे लंड को बाहर निकाला और लंड का सुपारा मुँह में डाल लिया.

मैंने प्लेट से केला लिया और उसकी चुत पर रगड़ने लगा. फ़िर केले को उसके मुँह पर रखा तो वो केले को लंड जैसे चूसने लगी.. उसको मजा आ रहा था तो वो ऊपर से नीचे की तरफ़ पूरे केले को चूसने लगी.

केला काफी बड़ा था करीब 9 इंच का होगा. मैंने केले को कंडोम पहनाया और उसकी चुत में डाल दिया.

उसके मुँह से आवाज निकल गई- उईईईईईएमा…

उसकी आँखें फटने को हो गईं.

मैं केले को चुत में अन्दर बाहर करने लगा. उसने कहा- इसमें मजा नहीं आ रहा है.. मुझे तो तुम्हारा केला पसंद है.

मैंने अपना पूरा लंड उसकी चुत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा. करीब एक घंटे बाद वो झड़ गई.

फ़िर मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया.. वो मेरे लंड को चूसने लगी. मैंने पूरा लंड मुँह में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.

थोड़ी देर बाद मेरे सफ़ेद दही निकल गया वो सारा दही पी गई.

कुछ देर बाद हम दोनों ने कपड़े पहन लिए. उसने मुझसे कहा- तुमने मुझे जन्नत के मजे करा दिए.. मुझे ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया. अब हम कभी एक दूसरे को कांटेक्ट करने की भी कोशिश नहीं करेंगे. हम दोनों एक दूसरे को भूल जाएंगे.
मैंने कहा- ठीक है, मैं तुम्हें कभी कांटेक्ट नहीं करूँगा.

वो जोर से मेरे गले लग गई और हम दोनों ने लिप किस किया. एक दूसरे के होंठों को मुँह में भर लिया और जीभ को चाटने लगे.

फ़िर मैं वहाँ से चला आया. इसके बाद मैंने कभी उससे कांटेक्ट करने की कोशिश नहीं की. मैंने उसका मोबाइल नम्बर भी मेरे मोबाइल से डिलीट कर दिया.

प्रिय साथियो, आपको मेरी चुदाई की कहानी कैसी लगी

Hindi Sex Stories

बात कुछ साल पुरानी है पर है बिल्कुल Hindi Sex Stories सच्ची। उस समय मैं सेक्स के बारे में बिल्कुल अंजान था। मैंने कभी मुठ भी नहीं मारी थी। गर्मियों की छुट्टियों में मुझे अपनी दीदी की ससुराल में जाने का मौका मिला। दो माह की छुट्टियाँ बिताने मैं और मेरा छोटा भाई दीदी की ससुराल में पहुंचे। उनका घर काफी बड़ा था लगभग १०-१२ कमरे का। कुछ कमरे तो उपयोग में ही नहीं आते थे। उनके घर में दीदी और जीजाजी के साथ ही उनके चाचा-चाची तथा बड़े भाई और उनका परिवार रहता था। जीजाजी के बड़े भाई को हम बड़े जीजाजी कहकर बुलाते थे, वह फॉरेस्ट रेंजर थे तथा एक सप्ताह में दो तीन दिनों तक बाहर जंगल में रहते थे। उनके दो बच्चे थे उनका बड़ा बेटा मुझसे छोटा था।

बड़े जीजाजी बड़े कामुक प्रवृति के इन्सान थे हालाँकि मैं उस समय इस शब्द के बारे में नहीं जानता था। जब भी वे मुझे अकेला पाते, मेरे गाल पर चिकोटी काट देते। कुछ दिनों बाद वे मेरे गालों और ओंठों को चूमने लगे।

एक दिन जब मैं छत पर अकेला खड़ा उड़ती हुई पतंगों को देख रहा था तो वो भी छत पर आ पहुंचे। उन्होंने मुझे पकड़ कर मेरे कूल्हों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मुझे काफी अटपटा लगा। जैसे तैसे मैं हाथ छुड़ा कर भाग आया। अब मुझे उनके सामने जाने में भी डर लगने लगा, पर वे मौका ताड़ कर मुझसे छेड़-छाड़ करते रहते। अभी तक वह मेरे कूल्हे कपडों के ऊपर से सहलाते थे एक दिन उन्होंने मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डालकर कूल्हे सहलाये। मुझे अच्छा तो लगा पर डर भी लगा। मैं उनके इरादों को कुछ कुछ समझने लगा। पर वो क्या करने वाले हैं यह मैं अब भी पूरी तरह नहीं समझ पाया था। मैं उनसे बच कर रहने लगा और उनके सामने ना आने का प्रयास करता।

एक दिन दोपहर को वह अपने कमरे में लेटे कोई किताब पढ़ रहे थे कि दीदी ने मुझे उनको पानी दे आने को कहा। मैं डरते हुए उनके कमरे में गया। उन्होंने पानी लेकर मुझे अपने पास जबरन बिठा लिया तथा मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगे। फिर झटके से मुझे बगल में लिटा कर अपनी टांगों के बीच में दबोच लिया। थोड़ी देर तक शांत रहने के बाद वह मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डाल कर मेरी जांघ को दबाते हुए मेरे कूल्हे भी दबाने लगे। उन्होंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर अपना लंड मेरी शोर्ट्स के अन्दर जांघ पर रख दिया। मैं सिहर उठा। मेरी सांसे तेज तेज चलने लगी। उन्होंने तभी एक झटका देकर मुझे थोड़ा तिरछा कर दिया। अब मेरी पीठ उनकी और थी। उन्होंने मेरी शोर्ट्स को थोड़ा ऊपर कर मेरे कूल्हे जोर जोर से मसलने शुरू कर दिए तथा अपना लंड मेरे कूल्हों की फ़ांकों में टिका दिया। मैं कसमसा रहा था पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। तभी बाहर कुछ शोर सा हुआ, वह थोड़ा अचकचाए और मैं उनकी पकड़ से भाग निकला। उनको बहुत गुस्सा आया तथा वह अगला मौका तलाशने लगे।

उन्हें अगला मौका शीघ्र ही मिल गया। पड़ोस में एक शादी थी जिसकी बारात इलाहाबाद जानी थी। वह मुझे भी जिद करके अपने साथ बारात में ले गए। सबको उन्होंने मुझे इलाहाबाद घुमाने के बहाने राजी कर लिया था। मैं किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था। मुझे उनके साथ जाना पड़ा। बारात एक होटल में रुकी थी। उन्होंने सबसे अलग एक कमरा ले लिया। बारात लगने के तुंरत बाद ही वह मुझे लेकर होटल के कमरे में आ गए।

उस समय रात के १२ बजे थे। मुझे लेटते ही नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि जीजाजी ने मेरी पैंट और चड्डी उतार दी है तथा वह मेरे लंड से खेल रहे हैं। मै अनजान बना लेटा रहा। उन्होंने मुझे तिरछा कर दिया तथा मेरे कूल्हे दबाने लगे। फिर उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी गांड में डाल दी। मुझे दर्द हुआ पर मैं चुपचाप लेटा रहा। अब जीजाजी ने अपना लंड निकल कर मेरे चूतड़ों से रगड़ना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक वह ऐसा ही करते रहे। फिर उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड के छेद में घुसाने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहे। मेरी गांड का छेद काफी टाइट था। दोबारा कोशिश में भी वह अपना लंड छेद में नहीं घुसा सके।

अब उन्होंने मुझे पकड़ कर उल्टा कर दिया तथा वह मेरी टांगों को फैला कर बीच में बैठ गए। उन्होंने मेरे चूतडों की दोनों फांको को पकड़ कर फैलाया और अपना लंड एक जोर का झटका देते हुए मेरी गांड में पेल दिया। मैं दर्द से बिलबिला गया पर डर के कारण मेरी चीख भी नहीं निकली। अब उनका पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर था और वह धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे। शुरू में तो मुझे काफी दर्द हुआ पर बाद में मजा आने लगा। १५ -२० मिनट के बाद उन्होंने पिचकारी मेरी गांड में ही छोड़ दी और वह मेरे ऊपर से उठ कर बगल में लेट गए। मेरी गांड में लंड पेलने के कारण पेट में काफी गैस बनने लगी थी तथा मुझे लगा कि खून भी मेरी गांड से निकल रहा है, यह अहसास भी मुझे हुआ। पर में बिल्कुल अंजान बना लेटा रहा।

थोड़ी देर में जीजाजी उठे और उन्होंने रुमाल में पानी लगाकर मेरी गांड पोंछी तथा मेरे चूतड सहलाये। मुझे राहत महसूस हुई। जीजाजी का लंड शायद फिर से खड़ा हो गया था। वह फिर से मेरी टांगों के बीच में बैठ गए लेकिन इस बार उन्होंने मुझे कमर में हाथ डाल कर घोड़े जैसी की अवस्था में कर लिया।

अब मेरी गांड का छेद ज्यादा खुल गया था। उन्होंने मेरे दोनों चूतड पकड़ कर फैला दिए तथा अपना लंड एक बार फिर से मेरी गांड में पेल दिया। इस बार मैंने भी अपनी गांड मराई का मजा लिया तथा कूल्हे हिला हिला कर जीजाजी का पूरा लंड गांड के भीतर जाने दिया। जीजाजी ने पूरे जोश से मेरी गांड मारी। उस रात सुबह होने से पहले जीजाजी ने तीसरी बार मेरी गांड मारी। इस बार उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगा कर मेरी गांड पिलाई की।

दोस्तों यह कहानी बिल्कुल सच्ची है। जीजाजी से गांड मराने के बाद कई दिनों तक मैं उनके सामने आने में शरमाता रहा पर वह अब भी मौका मिलते ही मुझसे छेड़-छाड़ अवश्य करते रहते थे। लेकिन उन्हें दोबारा मेरी गांड मरने का मौका घर में नहीं मिल सका। पर वह चूकने वालो में से नहीं थे।

उन्हें अगला मौका कब और कैसे मिला, पढिये अगली कहानी Hindi Sex Stories

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मैं आज अपने मायके आ Hindi Sex Stories गई, सोचा कि कुछ समय अपने भाई और माता पिता के साथ गुजार लूँ। मेरी माँ और पिता एक सरकरी विभाग में काम करते हैं, भैया कॉलेज में पढ़ता है। आप जानते हैं ना चुदाई एक ऐसी चीज़ है जिसके बिना हम लड़कियाँ तो बिल्कुल नहीं रह पाती। यहां मायके में भी यही हाल हुआ। ये चूत है कि लण्ड मांगे मोर…। बोबे भी फ़ड़क उठते हैं… गांड भी लण्ड दिखते ही लचकदार होकर अदाएँ दिखाने लगती है… चाल ही बदल जाती है। देखने वाला भी समझ जाता है कि अब ये लण्ड की भूखी है। बाहर से हम चाहे जितनी भी गम्भीर लगें, सोबर लगें पर हमारी नजरें तो पैन्ट के अन्दर लण्ड तक उतर जाती हैं। लड़कों का खड़ा लण्ड नजर आने लगता है।

मैं खिड़की पर खड़ी सब्जी काट रही थी की भैया आया और बिना इधर उधर देखे बाहर ही दीवार पर अपना लण्ड निकाल कर पेशाब करने लगा। मेरा दिल धक से रह गया। इतना बड़ा और मोटा लण्ड… भैया ने पेशाब किया और लण्ड को झटका और पेण्ट में घुसा लिया। मैं तुरन्त एक तरफ़ हो गयी। भैया अन्दर आ गया और मुझे रसोई में देख कर थोड़ा विचलित हो गया … उसे लगा को शायद मैने उसे पेशाब करते हुये देख लिया है।

“ये खिड़की क्या खुली हुई थी…”

“हां क्यो, क्या बात है…”

“नहीं यू ही बस …।”

“हां… तुम वहा पेशाब कर रहे थे न…” मैं मुस्कराई और उसकी पेन्ट की तरफ़ देखा

भैया शर्मा गया।

“धत्त , तुझे शरम नही मुझे देखते हुये”

“शरम कैसी… ये तो सबके होता है ना, बस तेरा थोड़ा सा बड़ा है…”

“दीदी…” वो शरमा कर बाहर चला गया। मुझे हंसी आ गयी। हां, मेरा दिल जरूर मचल गया हा। पर भैया भी चालू निकला, वो जब भी खिड़की खुली देखता तो वहा पेशाब करने खड़ा हो जाता था… और मुझे अब वो जान करके अपना लण्ड दिखाता था। मेरा मन विचलित होता गया। एक बार मैने उससे कह ही दिया…

“बबलू… तू रोज़ ही वहा पेशाब क्यो करता है रे…”

“मुझे अच्छा लगता है वहां”

“… या मुझे दिखाता है…अपना वो…”

“दीदी, आप भी तो देखती हो ना… फिर ये तो सबका एक सा होता है ना…”

” जा रे… तू दिखायेगा तो मैं देखूंगी ही ना… फिर…” मैं शर्मा सी उठी

“दीदी… तेरी तो शादी हो गई है…तुझे क्या…”

“अच्छा छोड़, मैं स्टूल पर चढ कर वो समान उतारती हू, तू मेरा ध्यान रखना…मैं कही गिर ना जाऊ”

मैं स्टूल पर चढी, और कहा “बबलू… मेरी कमर थाम ले…और ध्यान रखना…”

समान उतार कर मैं ज्योही स्टूल पर से उतरी बबलू ने मुझे उतरते हुये अपनी तरफ़ खींच लिया।

“धीरे धीरे दीदी…”और उसने मुझे ऐसे उतारना चालू किया कि मेरे बोबे तक दबा डाले धीरे धीरे सरकते हुए वो मुझे नीचे उतारने लगा और मेरे चूतड़ उससे चिपकते हुए उसके लण्ड तक पहुंच गये। अब हाल ये था की मेरे दोनो बोबे उसके कब्जे में थे और उसका लण्ड मेरे पटीकोट को दबाते हुए गाण्ड में घुस गया था। उसके मोटे लण्ड का स्पर्श मैं अपने दोनो चुतड़ो के बीच महसूस कर रही थी। मैने उसे देखा तो उसकी आंखे बंद थी… और मुझे वो कस कर जकड़ा था। शायद उसे मजा आ रहा था। मुझे बहुत ही मजा आने लगा था। पर शराफ़त का तकाजा था कि एक बार तो कह ही दू…”अरे छोड़ ना…क्या कर रहा है…”

“ओह दीदी… मुझे ना क्या हो गया था… सॉरी…”

“बड़े प्यार से सॉरी कह दिया… “मैने उसकी हिम्मत बढाई।

“दीदी क्या करू बस आपको देख कर प्यार उमड़ पड़ता है…”

“और वो जो खड़ा हो जाता है… उसका क्या”

“दीदी… वो तो पता नही , बस हो गया था” और मुस्कराता हुआ बाहर चला गया।

रात को सब सो गये तब मन में वासना जाग उठी। भैया के अन्दर का शैतान जाग उठा और मेरी अन्तर्वासना जाग उठी। जवान जिस्मो को अब खेल चाहिये था। दोनो के तन बदन में आग लगी हुई थी। कैसे शैतान ने काम किया कि हम दोनो को एक दूसरे की जरुरत महसूस होने लगी । हम दोनो लेटे हुये एक दूसरे को देख रहे थे… आंखो ही आंखो में वासना भरे इशारे हो रहे थे। भैया ने तो अपना लण्ड ही दबाना शुरू कर दिया, मैने भी उसे देख कर अपने होंठ दांतो से काट लिये। मैने उसे अपने बोबे अपना ब्लाऊज नीचे खींच कर दिखा दिये और दबा भी दिये। अब मैने चादर के अन्दर ही अपनी पेण्टी उतार दी और ब्रा खींच कर खोल दी। पेटीकोट को ऊपर उठा लिया… और अपनी चूत सहलाने लगी। ऊपर साफ़ दिख रहा था मेरा चूत का मसलना…

“दीदी, आप यही क्यो नही आ जाती , अपन बाते करेंगे”

“क्या बात करेंगे… मुझे पता है… तुझे भी पता है…आजा मेरे भैया…”

हम दोनो बिस्तर से उतर कर खड़े हो गये। धीरे धीरे एक दूसरे के समीप आ गये और फिर हम दोनो आपस में लिपट पड़े। मेरा अस्त व्यस्त ब्लाऊज और पेटीकोट धीले हो कर जाने कब नीचे खिसक गये, उसका पजामा भी नीचे उतर गया। हम नंगे खड़े थे। हम दोनो अब एक दूसरे को चूमने लगे। उसका लण्ड मेरी नगी चूत पर ठोकरे मारने लगा।

मैं भी निशाना लगा कर लण्ड को लपकने की कोशिश करने लगी कि उसे अन्दर ले लूं। हम दोनो के नगे और चिकने जिस्म रगड़ खाने लगे। जाने हम दोनो के होंठ कब एक दूसरे से चिपक गये। बबलू ने खुद को नीचे करते हुए मेरी गीली चूत में लण्ड घुसाने कोशिश करने लगा। उसका लण्ड मुझे यहा वहा रगड़ खा कर मस्ती दे रहा था। मेरी चूत अब लप लप करने लगी थी। तभी लगा की लण्ड ने चूत में प्रवेश कर लिया है। मैने अपनी एक टांग कुर्सी पर रख ली और चूत का द्वार और खोल दिया। लण्ड अन्दर घुस पड़ा। मीठा मीठा सा मजा आने लगा … मैने भी अपनी चूत उसके लण्ड पर दबा दी , उसका लण्ड पूरा अन्दर तक उतर गया।

अब मैने अपनी टांग नीचे कर ली। और भैया को जकड़ लिया। हम एक दूसरे से चिपके हुये कमर को हौले हौले चलाने लग गये। गीली और चिकनी चूत में लण्ड अन्दर बाहर फ़िसलने लगा। मुझे चुदाई का नशा सा आने लगा। बबलू का मोटा लण्ड मुझे भरपूर मजा दे रहा था। हम काफ़ी देर तक यू ही वासना की कसक भरी मस्ती लेते रहे। वो धीरे धीरे मुझे चोदता रहा… अब मुझे लगा कि कही मैं झड़ ना जाऊ… पर देर हो चुकी थी…मेरी चूत में पानी उतरने लगा था, सब्र टूट रहा था… मेरी सांसे जोर से चलने लगी और मेरा पानी छूट पड़ा। पर मैं उससे चिपकी रही। भैया मुझे हौले हौले चोदता ही रहा। धीरे धीरे मुझे फिर से चुदने का मजा आने लगा। मैं फिर से उसे पकड़ कर चिपट गयी। वो मेरे बोबे दबाता रहा और चोदता रहा, उसमें दम था…

“दीदी … अब उल्टी हो जाओ दूसरा मजा भी लू क्या ?”

“मेरे प्यारे भैया … हाय रे गान्ड चोदेगा क्या…” उसने हां में सर हिलाया। मैं उसकी तरफ़ पीठ करके खड़ी हो गयी। उसने मुझे घोड़ी जैसा झुकाया और झुक कर देखा, पास में पड़ी शीशी से क्रीम निकाली और गाण्ड में भर दी।

“क्रीम मत लगा, मेरी गाण्ड तो वैसे ही खुली हुई है… खूब लण्ड खा लेती है…” मैने उसे बताया पर तब तक उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में घुस चुका था। लण्ड गाण्ड में कसता हुआ जा रहा था पर दर्द नही हुआ। बस एक मीठी सी सुरसुरी होने लगी। उसका लौड़ा मेरी गाण्ड में पूरा अन्दर तक बैठ गया था।

मैने फ़्री स्टाईल में कमर हिलानी शुरू कर दी पर भैया को मजा चाहिये था, सो उसने मुझे सीधा खड़ा कर दिया और और मेरी पीठ अपने से चिपका ली । मेरे बड़े बड़े बोबे थाम कर उसे मसलना चालू कर दिया और लण्ड को हौले हौले गाण्ड में चलाने लगा। लण्ड का पूरा मजा आ रहा था। उसका साईज़ मेरे चूतड़ो तक को महसूस हो रहा था मुझे अब थोड़ी सी इस पोज में तकलीफ़ होने लगी थी सो मैं अब झुकने लगी और घोड़ी बनने लगी चुदते चुदते ही मैने अपने अपने हाथ कुर्सी पर टिका दिये और अपने पांव खोल दिये। उसका लण्ड अब अच्छी तरह से तेज चलने लगा। मैने भी चूतड़ो कि ताल में हिला कर गाण्ड मरवाने लगी। अब मुझे भी मस्ती आने लगी थी। भैया गाण्ड मारने में माहिर था। अब तो मेरी चूत भी फिर से तैयार थी, भैया ने मेरा इशारा समझा और लण्ड को गाण्ड में से निकाल कर फिर से चूत में पिरो दिया। मेरी चूत में मजे की तरावट आ गयी। खूब गुदगुदी भरी मिठास उठने लगी।

मैने भी चूत को गाण्ड के साथ नचाना शुरू कर दिया और मजा तेजआने लगा। चूत के पानी का चिकनापन से चोदते समय फ़च फ़च की आवाज आने लगी थी। सारी दुनिया मेरी चूत में सिमट कर रह गई थी। मस्ती सर पर चढ चुकी थी। चुदाई जोरो पर थी। भैया तूफ़ानी गति से कस कर धक्के मार रहा था। मेरी चूत बेहाल हो उठी थी। अब लग रहा था कि मेरा माल निकलने वाला है… उत्तेजना चरम दौर पर थी… चूत पर लण्ड की चोट मुझे मस्त किये दे रही थी। अचानक भैया ने लण्ड मेरी चूत में दबा दिया और मेरी कमर कस कर भींच दी ।

“दीदी… दीदी… हाय… आह्ह्ह … मेरा लण्ड गया… दीदी… मेरा निकला…ऊईईईईई…ऐह्ह्ह्ह्ह्ह्…”

तभी मेरी भी सारी नसे जैसे खिंच उठी और मैं तड़प उठी। मेरा भी पानी जैसे अन्दर से उबल पड़ा और मैं झड़ने लगी। तभी भैया के लण्ड ने भी पिचकारी छोड़ दी। लण्ड बाहर निकाल कर सारा वीर्य छोड़ दिया। उसका लण्ड रह रह कर रस बरसा रहा था। मेरी गाण्ड पूरी वीर्य से तर हो चुकी थी। वो लगता था थक गया था। उसने पास पड़े कपड़े से मेरे चूतड़ साफ़ कर दिये और अपना लण्ड भी पोंछ डाला। हम दोनो फिर से आपस में लिपट गये और प्यार करने लगे।

अब हम एक ही बिस्तर में लेटे थे और एक दूसरे के साथ खेल खेलने लगे थे। मुझे तो उसे फिर से उत्तेजित करना था। मेरा तो रात भर का कार्यक्रम था… कुछ देर में भैया फिर से तैयार था … उसका लण्ड कड़क हो चुका था… मैं भी चुदने को तैयार थी… उसने मेरे ऊपर चढ कर मुझे दबा डाला… और उसका लण्ड एक बार फिर से मेरी चूत में घुसता चला गया… मेरी सिसकारिया मुख से फ़ूट उठी… लण्ड और चूत का घमासान युद्ध होने लगा… Hindi Sex Stories

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