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Antarvasna

मेरा नाम राहुल है, उम्र ५१ साल, Antarvasna कद ५ फीट ९ इंच, रंग गोरा और बदन कसरती है। मेरी पत्नी का नाम कोमल है, उम्र ४८ साल, रंग गोरा और बदन दुबला पतला है। हमारे दो बेटे हैं, दोनों पुणे में इंजीनयरिंग पढ़ रहे हैं। मैं भी पेशे से इंजीनीयर हूँ।

बात लगभग दो साल पहले की है, जब मेरा ट्रान्सफर आगरा हुआ।

आगरा में जो मकान हमने किराये पर लिया, वह एक होमेओपथिक डॉक्टर का था। डॉक्टर साहब दक्षिण भारतीय हैं। उनका नाम के रामचंद्रन है, उम्र लगभग ५८ साल, कद ५ फीट ६ इंच, रंग सांवला और बदन दुबला पतला है। पहली नज़र में ही लगता है कि शरीफ आदमी हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी रागिनी है। उम्र लगभग ५२ साल, कद ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और बदन भरा पूरा है। नैन-नक्श तीखे होने के कारण इस उम्र में भी अच्छी खासी सेक्सी दिखती हैं। इन दोनों के अलावा इनके परिवार में इनकी तीन बेटियाँ हैं, जिनके नाम नंदिनी, कमलिनी और कुमुदिनी हैं। इनकी उम्र क्रमशः २४, २२ और २० साल है। तीनों का कद लगभग ५ फीट ४ इंच, रंग सांवला और नैन नक्श अपनी माँ की तरह तीखे हैं। सबसे बड़ी नंदिनी अपनी माँ की तरह भरे बदन की तथा कमलिनी और कुमुदिनी अपने पापा की तरह दुबली पतली हैं। तीनों एक ही कॉलेज में पढ़ती हैं।

मुझे इस मकान में रहते हुए तीन महीने हो चुके थे और डॉक्टर साहब व हमारे परिवार के सम्बन्ध घरेलू जैसे हो चुके थे। एक दिन रात को खाना खाने के बाद मैं कंप्यूटर पर अपना काम कर रहा था और मेरी पत्नी अपने कमरे में सोने जा चुकी थी, मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे मुख्य द्वार के पास कोई खड़ा है और किसी से बात कर रहा है। मैंने घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े बारह बज रहे थे।

मैं चुपके से उठा, दरवाजे के पास जाकर ध्यान दिया तो पता चला कि डॉक्टर साहेब की मंझली लड़की कमलिनी मोबाइल पर किसी से धीरे धीरे बात कर रही थी। मैंने बातचीत पर ध्यान दिया तो अंदाजा हो गया कि अपने बॉयफ्रेंड विक्की से बात कर रही थी। उसकी बात सुनकर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। वह विक्की से कह रही थी कि तीन दिन ऊपर हो गए हैं और मुझे महीना नहीं हुआ है, बहुत डर लग रहा है।

उसकी बातें सुनकर बहुत अजीब सा लगा कि मैं जिसे सीधी-सादी समझता था, खूब छुपी रुस्तम निकली। एक बात और यह हुई कि उसकी बातें सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। पिछले तीन साल से मैंने अपनी पत्नी को नहीं चोदा था, क्यूंकि वह ठंडी हो चुकी थी और चुदाई के समय साथ नहीं देती थी। उसको चोदने की अपेक्षा मैं कंप्यूटर पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मारना ज्यादा पसंद करता था।

खैर, कमलिनी और विक्की की मोबाइल पर बातचीत जारी थी और मेरा लंड भी जोर मारने लगा था।

मैंने कुछ सोचा और धीरे से दरवाजा खोला। मुझे देखते ही कमलिनी सकपका गई और फ़ोन काट दिया। मैंने अपने होठों पर ऊँगली रखकर उसे चुप रहने का इशारा किया और उसका हाथ पकड़ कर अन्दर कमरे में खींच लिया। वह रोने की हालत में थी। मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा, उसे अपने सीने से लगाकर सांत्वना दी तो वो कुछ सामान्य हुई।

मेरे पूछने पर उसने बताया कि विक्की उसकी क्लास में पढ़ता है, दोनों अच्छे दोस्त हैं। १५ दिन पहले जब मैं विक्की के घर गई तो वह अकेला था और प्यार करते करते सब हो गया।

मैंने उसे कहा- कोई बात नहीं, गलती किससे नहीं होती ? और कौन सी ऐसी समस्या है जिसका समाधान नहीं है ? अगर मुझ पर विश्वास करो तो तुम्हारा महीना १२ घंटे में हो जाएगा। लगभग रोते रोते उसने पूछा- बताइए अंकल क्या करुँ ?

मैंने कहा- पहली बात ! मैं तुम्हारा दोस्त हूँ, मुझे अंकल नहीं, राहुल कहो। दूसरी बात, तुम्हें कुछ नहीं करना है, जो करना है, मैं करूंगा, तुम शान्ति से देखती जाओ।

मैं उसे दीवान पर लाया और उसका हाथ अपने लंड पर रखकर कहा- तुम्हारा इलाज ये ही करेगा।

उसे अपने सीने से लगाकर उसके होठों पर अपने होंठ रखकर मैंने उसका गाउन धीरे धीरे ऊपर उठाया और चिकनी टांगों पर हाथ फेरते फेरते उसकी पैंटी पर पहुँच गया। धीरे से उसकी पैंटी उतारी, अपना लोअर नीचे खिसकाया, उसे दीवान पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच आ गया। उसकी चूत पर बाल थे, शायद उसने कभी अपनी झांटें साफ़ नहीं की थीं। झांटें हटाकर उसकी चूत फैलाई तो मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। एक तो मैं तीन साल बाद चूत देख रहा था, दूसरे उसकी चूत क्या गज़ब की थी।

उसकी चूत के गुलाबी होठों पर मैंने जब अपनी जीभ फेरी तो उसे भी करंट लगा। अब मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और दो तीन बार में पूरा लंड उसकी चूत के अन्दर कर दिया और उसका गाउन ऊपर खिसका कर, ब्रा हटाकर उसके मम्मे अपने हाथ में लेकर चूसने लगा। लगभग आधा घंटा चोदने के बाद जब मेरा लंड पानी छोड़ने को हुआ तो मैंने

अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और ६९ की पोजीशन में आकर उसके मुंह में डाल दिया और उसकी चूत चाटने लगा। वह मेरा लंड चूस रही थी। जब लंड ने पानी छोड़ा तो

वह घबरा गई और लंड अपने मुंह से बाहर निकाल दिया जिससे सारा वीर्य उसके गाउन पर गिर गया।

हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए। ढाई बज चुके थे, मैंने उसे अपने सीने से लगाकर किस किया और डोंट वरी ! कह कर विदा कर दिया और वहीं दीवान पर सो गया।

करीब ३ बजे मेरे मोबाइल पर घंटी बजी, देखा तो कमलिनी का नम्बर था। मैंने धीरे से बोला- हेल्लो !

तो उधर से काफ़ी खुश लहजे में बोली- थैंक्यू ! अभी अभी मेरा महीना हो गया।

मैंने उससे कहा- विक्की जैसे छोकरों से सावधान रहना ! अब सो जाओ। शुभ रात्रि !

बाकी कहानी अगली बार लिखूंगा, इंतज़ार करिए..। Antarvasna

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार! Antarvasna

मैं राजेश लुधियाना से Antarvasna आपको अपनी कहानी नहीं बल्कि हकीक़त बताने जा रहा हूँ जो मेरे साथ हुआ।

भैया की नई नई शादी हुई थी, हम सब बहुत खुश थे क्योंकि भाभी बहुत ही खुश मिजाज हैं। शादी के कुछ महीनों बाद हमारे माता पिता को किसी काम से आठ दस दिन के लिए कहीं जाना पड़ा, सो घर में हम तीनों ही रह गए। उस पर भैया को एक दिन ऑफिस के काम से जाना पड़ा।

उस दिन घर में हम दोनों अकेले थे, सो भाभी से कहा- भाभी, कहाँ अकेले मेरे लिए खाना बनाओगी! चलो कहीं बाहर घूम आते हैं, आपका दिल भी बहल जायेगा और बाहर से खाना भी खा आयेंगे।

तो भाभी झट से मान गई। हाँ! मेरी भाभी की उम्र 26 साल कद 5’3′ रंग गोरा और फिगर 36/28/34 है। उसने जींस और टॉप पहना और हम मूवी देखने गए। हमने मूवी देखी। मूवी थोड़ी रोमांटिक थी सो मुझे कुछ अलग महसूस हो रहा था।

हम ने खाना पैक करवाया और सोचा घर जाकर खायेंगे। खाना पैक करवा के घर आ गए और मैं भाभी से बोला- आप कपड़े बदल लो, फिर खाना खाते हैं।

भाभी ने अपनी नाईट ड्रेस पहन ली। ड्रेस पारदर्शक थी, उसमें से उसके शरीर का एक एक कट नज़र आ रहा था कि कहाँ से उसकी चूचियाँ शुरू होती हैं, कहाँ पर ब्रा है और कहाँ से कमर और कहाँ पर उसकी पेंटी है।

उसको ऐसे देख कर मेरे शोर्ट्स में मेरा लंड स्टील रॉड की तरह हो गया। मेरा बैठना मुश्किल हो गया, बड़ी मुश्किल से अपने लंड को नज़र छुपाकर कुछ ठीक किया।

उसके बाद हमने खाना खाना शुरू किया तो मैंने भाभी से कहा- तुम रोज सर्व करती हो, लाओ, आज मैं करता हूँ!

और मैं जैसे ही दाल भाभी की प्लेट में डालने लगा तो मेरा ध्यान हट गया और दाल भाभी की ड्रेस के ऊपर गिर गई। मेरी तो जान ही निकल गई कि अब भाभी मुझे डांटेगी। मैंने झट से पास पड़े कपड़े से उनकी ड्रेस साफ़ करनी शुरू कर दी। पहले तो मैं ड्रेस ही साफ़ कर रहा था पर अचानक मेरा ध्यान गया कि दाल उनकी चुचियों पर गिरी है और उनकी आँखें बंद हैं। शायद मेरे दाल साफ़ करने पर वो गरम हो रही थी तो मैंने दाल साफ़ करने के बहाने उनकी चुचियों को सहलाना चालू रखा।

उनकी चुचियाँ कड़ी हो रही थी और इधर शोर्ट्स मेरा लंड भी फड़क रहा था। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी तो मैंने दूसरे हाथ से उनकी दूसरी चूची को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में दबा भी रहा था। जब भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गया कि वो भी गरम है। तो मैंने उसकी चुचियों को जोर से दबाना शुरू कर दिया तो उनके मुँह से आह्ह् अह्ह् उफ्फ्फ निकलने लगा। मैंने लोहा गरम जान कर उनकी नाइटी का फ़ीता खोल दिया। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी। उनकी आँखें अभी भी बंद थी।

अब मैं उनकी चुचियाँ ब्रा के ऊपर से सहला रहा था। वाह, क्या सफ़ेद चुचियाँ थी! पहली बार इतनी पास से देख रहा था! दिल कर रहा था खा जाऊँ! उनको सहलाते सहलाते हाथ कभी पेट तक ले जाता और कभी नाभि तक! तो वोह सिसक पड़ती- आ आआ आह्ह्ह ह हम्म म्म्म्म!

एक हाथ से सहलाते हुए हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा खोल दी और उनकी ब्रा में टाइट हो रही चुचियों को आज़ाद कर दिया। भाभी की आँखें अभी भी बंद थी। मुझे लगा शायद वो आँखें खोलकर मेरे साथ नज़र मिलाना नहीं चाहती थी।

उनके चुचूक बिल्कुल छोटे थे पर एक दम सख्त थे और हल्के रंग के थे। उसके चुचूक देख कर लंड अब बाहर आने को बेताब था, लगता था कि अगर एक दो मिनट में नहीं निकला तो अंडरवियर को फाड़ देगा।

भाभी की आँखें बंद थी तो मुझसे रहा नहीं गया, मैंने झट से भाभी के चुचूक को मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। भाभी ने एकदम से मुझे पकड़ लिया और मेरे सिर को जोर से दबाना शुरू कर दिया और कहने लगी- आह्ह्ह्ह हाँ! ऐसे ही करो और जोर से आआआआह्ह्ह ह्ह्ह आज इनको नहीं छोड़ना! बहुत प्यासी है यह! इनको खूब अच्छे से चूसो! आ आह!

अब तो मैं दोनों चुचियों पर टूट पड़ा, मैं पागल हो रहा था भाभी की मस्त चुचियाँ देख कर! उनको मसल रहा था, चूस रहा था जैसे बच्चे चूसते हैं। कभी कभी काट भी लेता था तो वो चिल्ला उठती। पर मेरे सिर को दबाये जा रही थी। मैंने 8-10 मिनट तक भाभी की चुचियों को खूब चूसा, चूस चूस के लाल कर दी, कहीं कहीं तो दांतों के निशान पड़ गए थे।

अब मैंने भाभी को ऐसे ही अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में ले गया, जाकर भाभी को बिस्तर पर गिरा दिया, मैं उन पर गिर पड़ा और भाभी को चूमना शुरू कर दिया। भाभी सिर्फ पेंटी में थी पर पेंटी पर निशान से पता लग रहा था कि भाभी स्खलित हो चुकी है।

मैंने भाभी को हर जगह चूमा, हर चुम्बन पर वह सिसक पड़ती। उसमें से आ रही मदमस्त खुशबू मुझे और पागल कर रही थी। अब वह भी मुझे पागलों की चूम रही थी। जब मैंने भैया का पूछा तो कहती- उनके पास समय नहीं है ऐसे प्यार करने का! उनको तो बस दो मिनट का सेक्स पसंद है, चूत में डाला और हो गया! उनको यह सब पूर्व-क्रीड़ा पसंद नहीं है। इसलिए आज सच में मजा आ रहा है! पहली बार किसी ने मुझे सेक्स से पहले वो मजा दिया जिसके लिए मैं तड़पती रही हूँ।

इतनी देर में मैंने भाभी की पेंटी भी उतार दी थी, वाह क्या मस्त चूत थी! आज तक ऐसी चूत तो मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखी थी, एक दम सफ़ाचट थी, चूत के होंठ गुलाबी थे और बिल्कुल छोटा सा चीरा था ऐसे लग रहा था जैसे अभी कुँवारी है। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उसको चूसना शुरू कर दिया तो वह एक दम से उछल पड़ी। मैंने झट से उसकी चूत में जीभ डाल दी और उसका रस चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही स्वादिष्ट थी उसकी चूत! उसकी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दिया मैंने!

वो बड़ी जोर से मेरा सिर दबा रही थी और कह रही थी- आऽऽ आह्ह उफ्फ्फ आअह्ह्ह ह्ह्हू ऊऊउल् मैं मर गई!

अब तक उसका हाथ मेरे लंड तक पहुँच गया था, वो उसको सहला रही थी निकर के ऊपर से! मैंने झट से अपनी निकर उतार दी। अब हम बिल्कुल नंगे थे। वह मेरा लंड देख कर हैरान रह गई, कहती- इतना बड़ा?

अब मैंने फिर से भाभी के चुचूक चूसना शुरू कर दिया और उनको जोर से मसल रहा था, तो कहती- हाँ राजेश! और जोर से कर! आआह्ह बहुत मजा आ रहा है!

फिर कोई 5 मिनट की चुसाई के बाद हम 69 पोज़ में आ गए। भाभी ने कहा- ला राजेश, अब मुझे भी मजा लेने दे! तेरे भैया तो चूसने ही नहीं देते! ना चूसते हैं, ना ही चुसवाते हैं!

भाभी ने झट से मेरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी। पर लौड़ा इतना बड़ा हो गया था कि उनके मुँह में नहीं आ रहा था। पर जितना आ रहा था, वो उतना बड़ी मस्ती से चूस रही थी। मेरी भी जान निकल रही थी, लगता था जैसे कहीं स्वर्ग में आ गया हूँ और मैं भाभी की चूत को बड़ी मस्ती से चूस रहा था। कभी उसके दाने को चूसता तो कभी होंठों से खींचता तो उछल पड़ती। कभी उसकी चूत में उंगली करता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता। पूरी चूत की मस्ती से चुदाई कर रहा था जीभ से!

इस दौरान वो कम से कम तीन बार झड़ चुकी थी। अब मैं भी झड़ने के करीब था तो मैंने भाभी का सिर पकड़ लिया और जोर से उनके मुँह की चुदाई शुरू कर दी। वो ग्गू गुउउऊ कर रही थी उसकी आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने बालों से पकड़ कर पूरा लंड मुँह में डाल दिया तो लगता जैसे उसकी सांस रुक गई। वो मिचका रही थी पर मैंने पूरे जोश से उसके मुँह की चुदाई चालू रखी और 5-7 मिनट बाद उसके मुँह में ही झड़ गया। उसने भी सारा रस पी लिया, एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी।

मैं झटके लेकर झड़ता रहा, लग रहा था कि जैसे आज वीर्य निकलना बंद नहीं होगा।

हम दोनों थक गए थे और ऐसे ही नंगे एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।

उसके बाद अगले दिन क्या हुआ, वो आपके जवाब देने पर बताऊँगा। Antarvasna

नमस्कार ! Hindi Porn Stories

आपकी अंतरा का सभी Hindi Porn Stories अन्तर्वासना के पाठकों को ढेर सारा धन्यवाद ! सबसे ज्यादा आभार तो गुरूजी का कि मेरी कहानी हवा में उड़ रही हूँ आप सब तक पहुंचाई!

तो दोस्तो, आप सब सोच रहे होंगे कि मैंने उस रात किसी तरह अपनी बुर मसलकर खुद को संभाल लिया पर मैं आगे की सोच रही थी।

उस रात के बाद से मैं जब भी मौका मिलता अपनी रांड माँ की नंगी रंगरेलियाँ जरूर देखती थी। मेरी बुर अब पानी छोड़ छोड़ कर प्यासी होती जा रही थी।

तो दोस्तो, मैंने अपना पहला शिकार अपने मास्टरजी को बनाया या शायद खुद ही बन गई !

मास्टरजी की उम्र ४०-४५ के आसपास थी लेकिन वो मस्त दीखते थे। जब से मैंने जवानी का खेल देखा था मेरा पढ़ाई में मन कम लगता था….

एक दिन मेरी सभी बहने माँ के साथ हमारे रिश्ते की मौसी के घर गई हुई थी। मुझे घर सँभालने के लिए छोड़ दिया था। मैं गुस्से में थी, पर क्या करती, मनहूस जो थी। पिताजी शहर गए थे जोकि वो रोज सुबह जाने लगे थे।

ठीक दो बजे मास्टरजी आ गए।

मैंने बेमन से किताबे निकाली और मुँह फुला के मास्टरजी के सामने बैठ गई।

मास्टरजी ने पूछा- क्या बात है?

मैंने कहा- सब मुझे छोड़ के चले गए !

मास्टरजी- कोई बात नहीं, घर में रहना भी जरूरी है।

मैंने चिढ़कर कहा – मेरा रहना ही हर बार क्यूँ जरूरी है?

मास्टरजी- क्यूंकि तुम बाकी सब बहनों से ज्यादा सुन्दर हो ! सब डरते होंगे कि कहीं कोई तुम्हें चुरा के न ले जाये !

मैंने इस जवाब की उम्मीद नहीं की थी पर अच्छा लगा !

मैंने उनसे पूछा- आपको मैं सुन्दर लगती हूँ? मेरे पास तो कोई क्रीम- पाउडर नहीं है !

मास्टरजी- अरे पगली क्रीम तो वो लगाती हैं जो सुन्दर नहीं होती ! तू तो हूर है !

मैंने पूछा- ये हूर क्या होता है?

हूर परी को कहते हैं ! मास्टरजी ऐसा कह कर मेरी तरफ लालची नजरों से देखने लगे।

तभी मुझे ध्यान आया कि जल्दी में मैं अपने घर के कपड़ो में आ गई थी जोकि मेरे स्कूल की पुरानी शर्ट और स्कर्ट था। मेरे शर्ट की ऊपर की बटन टूट गई थी और मेरे पास कोई ब्रा नहीं थी। मतलब यह कि मास्टरजी ने मेरे जोबन का उभार देख लिया था। मैंने शरमा के नजरें नीची कर ली, मुझे बुर में गुदगुदी लगी।

मास्टरजी ने भी मौके को पहचान लिया था कि लौड़ी गरम है।

मास्टरजी ने मुझसे पूछा- घर में कोई नौकर हो तो पानी मंगवाओ !

मैंने कहा- कोई नहीं है, मैं ले आती हूँ !

मास्टरजी ने कहा- ठीक है !

मैं किचन में चली गई, मास्टरजी मेरे पीछे आ गए। जैसे ही मैं किचन में घुसी मुझे अपनी पीठ पर गर्म हाथ का स्पर्श मिला। मैंने मुड के देखा तो मास्टरजी मेरी पीठ सहला के बोले मन छोटा न कर, तेरा दिन भी आयेगा।

मैं कसमसाते हुए बोली- कभी नहीं आयेगा !

फिर मास्टरजी ने कहा- चाय बना दे !

मैं चाय बनाने लगी, मास्टरजी मेरी पीठ सहलाते जा रहे थे मुझे गुदगुदी लग रही थी और अच्छा भी।

मास्टरजी ने पीठ सहलाते हुए अपना हाथ मेरी गर्दन से लेके मेरी छातियों की और कर दिया आप मेरी शर्ट के ऊपर से उनका हाथ मेरी गोलाइयों को नाप रहा था। मैं कसमसाई पर न चाहते हुए भी मेरे चेहरे पे मुस्कान आ गई जिसे उन्होंने पढ़ लिया। अब उन्होंने मेरे कंधे पे दोनों हाथ रख के मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मेरे चेहरे पे दोनों हाथ फिराने लगे। मुझे अजीब लगा क्यूंकि रामू या पिताजी ने माँ के साथ ऐसा कभी नहीं किया था।

मुझे अच्छा लगा तो मैं मास्टरजी से लिपट गई। मास्टरजी फिर से मेरी चूचियों को सहलाने लगे। फिर उन्होंने मुझे गोद में उठा लिया और पूछा- तुम्हारा बिस्तर कहाँ है?

मैंने उन्हें बताया और हम बेडरूम में आ गए।

मैंने कहा- आपकी चाय !

उन्होंने कहा- रहने दो ! जाओ, गैस बंद करके आ जाओ !

मैं गैस बंद करके आ गई और बेडरूम में मास्टरजी के सामने बैठ गई। मास्टरजी ने मुझे खींच के गले लगाया और मेरे गले में एक चुम्मा दिया। मैं गरम हो रही थी। फिर वो मेरे गाल चूमने लगे। मैं उनकी पीठ पर हाथ फिराने लगी। फिर उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी। मेरी छातियाँ नंगी उनके सामने थिरक रही थी। अब मुझे लगा कुछ गड़बड़ हो सकती है पर तब तक उनके हाथ मेरे चुचूक मसलने लगे थे। मैं समझ ही नहीं पाई कि मास्टरजी मेरी दायीं चूची को चूसने लगे। मैं पिघल रही थी, मुझे ख़ुशी भी हो रही थी कि आज मुझे लंड मिलेगा। घर पर कोई नहीं था तो मैं भी मस्त थी।

मास्टरजी ने मेरी चूचियों को चूसने के बाद मसलना चालू किया तो मैं सिसकने लगी। वो मेरी चूचियों को खींच के बाहर निकालना चाह रहे थे, मुझे दर्द हो रहा था पर मजा भी लाजवाब आ रहा था। मेरा हाथ मेरी बुर में पहुँच गया। मास्टरजी मेरी चूचियों से खेल रहे थे और मैं सिसकती हुई अपनी बुर को सहला रही थी।

मास्टरजी ने फिर अपने कपड़े भी उतार दिए और बेडरूम का दरवाजा बंद कर दिया।

मैंने मास्टरजी का लंड देखा वो तना हुआ था शायद ६ इंच का होगा। उसके ऊपर की चमड़ी सुपाडे को आधा ढक रही थी और गुलाबी सुपाडा बड़ा सुन्दर लग रहा था। मैं अपनी बुर छोड़ के मास्टरजी के लंड को मुठी में भर के दबाने लगी। क्या गरम था उनका लंड। मैं तो मस्त हो गई थी। पता नहीं कैसे मेरी शर्म कहाँ गायब हो गई। मैं मास्टरजी के लंड को चूम रही थी। उसकी खुशबू मुझे बहुत मस्त लग रही थी। मैं तो अपनी जीभ भी लंड पर फिरा देती थी तो मास्टरजी के मुंह से उन्ह निकल जाती थी।

मास्टरजी ने कहा- इसे चूस के तो देख चमेली !

चमेली सुन के मुझे और मजा आया। मैंने सुपाड़े को मुंह में ले लिया। हाय क्या मस्त नरम लगा। मुँह में जाते थोड़ा कसेला सा स्वाद आया पर वासना की मस्ती में मुझे वोह भी मस्त लगा। मैं उनके लंड को पूरा मुंह में लेके अपनी थूक से उसे गीला करने लगी। उनकी लटकती गोलियों से तो मेरी उंगलियाँ हट ही नहीं रही थी। फिर मैं उनके लंड के सुपाड़े को अपने होठों में दबा के अपनी जीभ उसके छेद में रगड़ने लगी। मास्टरजी हाय हाय करते हुए झुक गए और कस कस के मेरी चूचियां मसलने लगे। उनसे खड़ा रहना नहीं हो पाया और वो बिस्तर पर पैर लटका के लेट गए। मैं घुटनों के बल उनकी जाँघों के बीच बैठ गई और एक हाथ से अपनी बुर में ऊँगली करती हुई अपनी जीभ उनके लंड पे रगड़ती रही।

अचानक मास्टरजी ने मेरे बाल पकड़ के अपने लंड पर मेरा सर दबा दिया। मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले ही मास्टरजी के लंड से कुछ पिचकारी जैसा मेरे मुंह में आने लगा। लस लस सा नमकीन स्वाद वाला पानी मैंने पहली बार चखा था। मुझे घिन सी आई तो मैंने उस पानी को बाहर थूक दिया। गाढ़ा होने के कारण मेरे मुंह से एक धार निकल के मेरी चूचियों पर गिरी जिसे मास्टरजी ने मेरी चूचियों पे घिस दिया।

फिर मास्टरजी ने मुझे बिस्तर पे सुला दिया और मेरी स्कर्ट खोल के मुझे नंगा कर दिया। मेरी बुर पूरी तरह से भीग गई थी। मास्टरजी ने जैसे ही एक ऊँगली बुर के मुंह में रखी वो फिसल के अन्दर घुस गई। मास्टरजी के ऐसा करते ही मेरे मुंह से आह निकल गई और मैं एक बार फिर मस्त हो गई। मास्टरजी ने अपने लंड को जो थोड़ा सुस्त हो गया था, मेरी चूत के मुंह पर लगाया और मेरे दाने से रगड़ने लगे। मास्टरजी ने अपने होंठ मेरे होंठ से चिपका लिया इस तरह उनका लंड फिर से खड़ा हो गया फिर मास्टरजी मेरे ऊपर लेट गए और मुझे कस के भीच लिया।

मास्टरजी ने अपना लंड मेरी बुर के मुंह पर रखा और धीरे धीरे सरकते हुए अपना सुपाड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ पर अगले ही पल एक झटके में उनका चाकू मेरी चूत को चीर चुका था। मेरी सांस गले में ही अटक गई, मैं तड़प गई। मास्टरजी ने अपने होंठ मेरे होंठ से सिल दिए और मेरी निप्पल मसलने लगे। दो चार धक्कों के बाद मुझे मजा आने लगा, मैंने अपनी गांड ऊपर उठा के मास्टरजी के लंड को पूरा ले लिया और मास्टरजी की गांड पकड़ के खींचने लगी।

मास्टरजी ने भी मौका समझ के चुदाई की स्पीड बढ़ा दी अब मेरी बुर फचक फच्च की आवाज के साथ लंड अपने अन्दर ले रही थी और मैं जन्नत की सैर कर रही थी। मास्टरजी …….। आह मास्टरजी……..। मजा आ रहा है……..। हाय क्या कर ……..दिया…….। हाय मजा…….। आह………..। मास्टर……..। पेलो ……। पेल….। पेलो……। न…….। आह……। सी सी स……..स्स्स्स…..। हाय………।

मास्टरजी अपने लंड को मेरी चूत में रख कर कमर को घुमाने लगे ….। हाय क्या मजा था……। मैं बके जा रही थी….। हाय रहने दो न इसे आज अन्दर ही…….। मत निकालो……। पेलो न पेलो न………..। हाय……

मास्टरजी को चोदने की आदत थी और वो एक खिलाडी की तरह रुक रुक के धक्के लगा रहे थे। .। पर मैं तो एक बार में ही पूरा खा जाना चाहती थी… मैं मास्टरजी से चिपक गई और अपनी गांड हिलाते हुए लंड को लेने लगी…।

मास्टरजी ने मुझे पटक के मेरी गर्दन दबाई और बोले ….रुक रुक के कर रांड … कहीं मेरा निकल गया तो मेरी गोलियों को खींचने लगेगी ।

मैं कहाँ मानने वाली थी.। मैंने गांड उछालना जारी रखा…

मस्ती सातवें आस्मां में थी…. अचानक मुझे कुछ होने लगा… मास्टरजी भी आँखे बंद कर के आह आह करने लगे….

तभी झटके के साथ मैं झड़ने लगी। हाय क्या बताऊँ क्या पल था…। लंड की गर्मी, फौलाद जैसा कड़ापन। और मेरा झड़ना। तभी मास्टरजी के लंड ने भी पिचकारी छोड़ दी। मेरी बूर में डबल गर्मी..। क्या बताऊँ मजा ही आ गया…..। मास्टरजी मेरे ऊपर लुढ़क गए और मैंने भी उन्हें कस के पकड़ लिया… दो मिनट तक हम झड़ने का सुख लेते रहे…।

फिर मास्टरजी ने उठ कर कपड़े पहने, पर मुझसे उठा नहीं जा रहा था। मास्टरजी ने मुझे सहारा दे कर बाथरूम तक पहुँचाया और मेरी बूर की सफाई की। मुझे कपड़े पहना के वो बोले- क्यों चमेली कैसा लगा…?

मैं शरमा के मुस्कुराने लगी..

दर्द की हरी गोली ले लेना…। ऐसा कह के मास्टरजी चले गए।

ऐसे गए कि फिर नहीं आये। पता नहीं क्यूँ । पिताजी ने नौकर भेजा तो पता चला कि उन्होंने शहर छोड़ दिया। मैं मन मसोस के रह गई। उसके बाद मैंने कई लंड जुगाड़े पर वो स्पर्श नहीं भूल पाई।

खैर मास्टरजी न सही गुरूजी ही सही…..! क्यूँ गुरूजी.. क्या ख्याल है….?

आप सब पाठकों के पत्रों और सेक्सी सामग्रियों का धन्यवाद।

मैं आप सबको चाहती हूँ। Hindi Porn Stories

Antarvasna

मैंने आप की सारी कहानी पढ़ी है Antarvasna और यह एक अच्छा जरिया है सबको अपना अनुभव कहने का।

मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं और मेरी उम्र ३० साल है। मैं शादी।शुदा हूं और मेरे दो लड़के भी हैं।

मैं बचपन से ही सेक्स का शोकीन हूं। मेरे बड़े भाई मुझे अक्सर कहा करते हैं कि जब मैं छोटा था १ साल का, तब से लड़कियां मुझसे ज्यादा ही इंटरेक्ट करती थी। मुझे तो वो सब याद नही है लेकिन शादी से पहले मैंने ६४ लड़कियों से प्यार किया है ३६ लड़कियो से सेक्स किया है।

लेकिन अभी ६ महीने पहले की एक कहानी बताता हूं !

मैंने एक इंग्लिश क्लास किया था। उसमें एक लड़की से मेरी दोस्ती हो गई। मैंने उसे बताया कि मैं शादीशुदा हूं तो उसे मेरी उस बात से कोई एतराज नही था।हम लोगों के बीच इस रिश्ते को ३-४ दिन ही हुए थे, मैंने उसे होटल में ले जाने के लिए कहा तो वो पहले मना करने लगी फ़िर वो मान गई।

हम लोग हमारे पास के होटल में गए। मैंने जाते ही उसे पकड़ के किस कर ली और उसके बूब्श को मसलने लगा।

उसने शलवार कमीज पहना था। वो भी मुझ से चिपक गई। मैंने उसके कमीज़ की पीछे से चेन खोल दी और उसका कमीज़ ऊपर से निकाल दिया। उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी। मैंने उसे बेड पर लिटा दिया। वो अपने बुब्श को अपने दोनों हाथो से छुपाने की नाकामयाब कोशिश कर रही थी। मैंने उस पर लेट के उसको होटों पे किस करना चालू किया। फ़िर मैंने धीरे से उस की ब्रा खोल दी। उसके बूब्स जैसे बाहर आने के लिए कब से बेचैन थे। उसको छूके मुझे एसा लगा कि आज तक किसी का भी हाथ उस पे नही पड़ा था। उसकी निपल को मुंह में लेके मैं चूसने लगा, जैसे उसको कुछ होने लगा।

वो मस्त हो के उछलने लगी। मैंने उसकी निपल को अपने दोनों दांतो के बीच दबा के जोर से चूसना चालू कर दिया और दूसरे हाथ से उसके दूसरे स्तन को जोर से दबाने लगा।

वो मेरे कपड़े निकालने लगी और मेरे लण्ड को पकड़ लिया। वो हाथ में लेते ही बोली- ये तो बहुत बड़ा है मैं तो मर ही जाऊंगी, आप इसे अंदर मत डालना।

मैंने कहा- ठीक है। बोल के उसका पायजामा भी निकालने लगा।

उसने कहा- ये क्या कर रहे हो?

अब मैंने कहा- मैं सिर्फ़ इसे देखना चाहता हूं और इस से खेलना चाहता हूं। उसकी पेंटी निकाली तो वो पूरी तरह भीग चुकी थी। मैंने उसमें हाथ घुमाना चालू किया वो अपने आप से बाहर हो गई थी। मैंने उसकी चूत पे अपना मुंह रख के उसमें अपनी जीभ रख दी तो वो मचल उठी और चिल्ला पड़ी- मर गई मेरे राजा।

मैंने अपना लंड उसके मुंह पर रख दिया और उसे कहा कि इसे मुंह में ले।

उसने पहले मना किया फ़िर वो अपने आप ही जैसे लोलीपोप चूस रही हो ऐसे चूसने लगी।

उसकी चूत से रस बाहर आने लगा। वो जैसे होश ही खो बैठी थी। मैंने मौका देखते ही अपना लण्ड उसके मुंह से निकाल के उसकी चूत के आगे रगडा और फ़िर मैंने धीरे से उसकी कलीशी चूत में अपने लण्ड का टोप धीरे से अन्दर रखा और जोर से धक्का दिया तो मेरा लण्ड आधा चला गया और वो चिल्ला के बोली- मारोगे ! मुझे तो मार ही डाला ! मेरी चूत को चीर डाला! निकाल दो प्लीज़ ! आप छोड़ दो भगवान के लिए।

मैं दूसरा धक्का मारने का छोड़ उसके सर को सहलाने लगा और उसे किस करने लगा और दोनों हाथों से उसके बूब्स को मसलने लगा। वो तो बहुत ही रो रही थी और तड़प रही थी, जैसे कि बिना पानी की मछली तड़पती है। मैंने थोड़ा सही मौका देखा और मेरा पूरा जोर लगा के पूरा ही अंदर डाल दिया। वो चिल्ला उठी- मर गई माँ !

फ़िर उसका दर्द कम ही होते ही वो मुझे सुपोर्ट करने लगी और मैंने भी धीमे धीमे आगे पीछे होना शुरु कर दिया। फिर तो उसे भी बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी। ऐसे तो बहुतों को चोदा है सबको मुझसे संतुष्टी मिली है, लेकिन ये तो बहुत ही खुश हो के दे रही थी। वो दो बार अपना पानी निकाल चुकी थी। वो बोली- आपका कब होगा मेरे राजा! सब कुछ आज ही खत्म करोगे मेरा थोडा तो कुछ रहने दो। बस क्या कहना था हमने हमारे मशीन की स्पीड बढा दी और हमारा भी पानी उसकी चूत में निकल दिया और वो बहुत खुश हो गई।

फ़िर तो वो ५ दिन में एक बार मुझसे चुदवाने लगी। आज भी जब उसका मन होता है तो हम मिलते है और काम करके अलग होते हैं।

हा सच बताएं हमें सेक्स बहुत ही पसन्द है और नए नए तरकीब से करना अच्छा लगता है और हां कोई घरेलू मिल जाए तो क्या कहना

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Antarvasna

हाय दोस्तों

उमीद है आप भी मज़े में होंगे और स्टोरीज़ का मज़ा लेते हुये ज़िंदगी का आनन्द Antarvasna उठा रहे होंगे।

तो दोस्तों बात उस दिन कि है जब बारिश हो रही थी और मैं भीगता हुआ अपने घर की तरफ़ अपनी बाइक पे जा रहा था। शाम के करीब ५:३० का समय था। अचानक मैने देखा कि मेरी तरफ़ कोई लिफ़्ट के लिये कोई हाथ हिला रहा था, गौर से देखा तो वो २५-३० साल की एक युवती थी। मैने बाइक रोकी। वो मेरे पास आके पूछने लगी कि आप कहां जा रहे हो? मैने कहा-आपको कहां जाना है?

वो रेलवे स्टेशन जाना चाहती थी। मैने कहा कि मैं भी वहीं जा रहा हूं (जबकि मैं अपने घर जा रहा था)। वो मेरे पीछे बैठ गयि। मैं बाइक को रफ़्तार से दौड़ाने लगा। उसके मोम्मे मेरी पीठ से सटे हुये थे। मैं गरम हो रहा था। बातों बातों में पता चला कि वो शिमला में जोब करती है, उस का पति दिल्ली में कोई प्राइवेट जोब करता था और वो अपनी बेटी को लेने के लिये जा रही थी जो आज़ ट्रैन से आने वाली थी।

हम रेलवे स्टेशन पहुँच गये थे, ट्रैन आने में अभी थोड़ा टाइम था, हम कैंटीन में चाय पीने चले गये। कैंटीन में उस ने जैसे ही उस ने अपना रैन कोट उतारा तो मुझे उस की जवानी के दर्शन हुये। गज़ब की खूबसूरति थी उस की। व्हाइट कलर के टोप में उस की ब्रा भी चमक रही थी सो उस के मोम्मो के साइज़ का अंदाज़ा लगाना कोई मुश्किल नहीं था। एक दम गोरी चिट्टी थी वो। चाय पीते हुये मैने उस के हुस्न का नज़ारा लिया और खूब बातें भी की। सर्दी के मौसम में उस की गरम जवानी ने मेरे रोम रोम में गरमी भर दी थी और मेरा लंड अपने आपे से बाहर हो रहा था।

तभी ट्रैन भी आ गयी। हमने उस की ५ साल की बेटी को साथ लिया और फ़िर मैने उसे कहा-मैं आपके घर तक छोड़ देता हूं, उस ने मना किया लेकिन मैं जानना चाहता था कि वो कहां रहती है क्योंकि वो मुझे बता चुकी थी कि वो अकेली ही रहती है। मैने दोनो को बाइक पे बैठाया और उस के घर की तरफ़ चल दिया। उस का घर आते ही बारिश भी तेज़ हो गयी। उस ने मुझे बारिश रुकने तक रुकने के लिये कहा और मैं भी तो यहि चाहता था। मैं पूरी तरह भीग चुका था। उसने कोफ़ी बनायी और चेंज कर के जब वो मेरे सामने आयी तो ब्लैक सिल्की नाइटी में वो कोफ़ी से भी ज़्यादा गरम लग रही थी। दिल कर रहा था कि अभी चोद डालु साली को।

सफ़र की वजह से उसकी बेटी आते ही सो गयी थी, बारिश रुकने का नाम नही ले रही थी। तभी लाइट भी चली गयी। वो केंडिल लेने के लिये उठी, मैं भी उसकी मदद करने लगा लेकिन केंडिल नहीं मिली। अंधेरे में वो मुझपर गिर गयी। वाह क्या गरमी थी। उसने उठने की कोशिश की लेकिन मैने उसको अपनी बाहों में भर लिया और छोड़ा ही नहीं, पहले उस ने विरोध किया लेकिन वो भी शायद कैइ दिनो की प्यासी थी तो उस ने भी ज़्यादा कोशिश नहीं की।

मैने उसके मोम्मे दबाने शुरु कर दिये, वो गरम हो रही थी। मैने धीरे धीरे अपना एक हाथ उसकी नाइटी उठाते हुये उसकी पैंटी में डाल दिया। वो सिहर उठी। मैने अपना मुँह उस की चुत के पास लाके उस की पैंटी को अलग कर दिया। उस की बालों वाली चूत एकदम सेक्सी थी। मैने उसे चाटना शुरु कर दिया। वो आआअह कर रही थी। मैं अपनी जीभ उस की चूत में डाल चुका था। मस्ती उफ़ान पे थी। मेरे दोनो हाथ उस के मोम्मो पे और जीभ उसकी चूत पे थी। वो आंखें बंद करके मेरा साथ दे रही थी। जब उस से रहा नहीं गया तो उसने कहा प्लीज़ अब चोद भी दो, मैं बहुत दिन से प्यासी हूं।

मैने अपनी पैंट उतार दी। मेरा लंड देखते ही वो खुश हो गयी। मैने उसकी दोनो टांगों को खोला और फ़िर अपना अंडरवियर।

अपना लंड एक ही झटके में उस की चूत में डाल दिया। वो ऊऊउह की आवाज़ में मज़ा ले रही थी। अब कमरे में उस की आहें और फ़चाक फ़चाक की आवाज़ें गूंज रही थी।

वो बोली-और ज़ोर से चोदो मुझे, फ़ाड़ डालो मेरी चूत को। यो साली बड़े दिन से लंड की भूखी है।

आज इस की भूख और मेरी प्यास बुझा दो। चोदो चोदो और ज़ोर से चोदो मुझे। उसके बोलने के साथ ही मेरी स्पीड भी बढ़ रही थी। ये सिलसिला करीब २५ मिनट चला फ़िर हम दोनो शांत होकर एक दूसरे से लिपट के लेटे रहे। १० मिनट बाद वो उठी और मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया। उसने बड़े प्यार से मेरे लंड को कहा-यू आर सो स्वीट और अपने मुँह में डाल लिया। वो लंड को ऐसे चूस रही थी कि मानो लोलीपोप चूस रही हो। मेरा लंड दोबारा से चुदाई के लिये तैयार हो गया था। १५ मिनट के बाद मैने उसे घोड़ी बनाया और फ़िर पीछे से उसकी गांड में अपना लंड डाल दिया। वो चुद रही थी, मैं चोद रहा था। ये चुदायी सारी रात में ६ बार हुयी। बारिश भी तभी रुकी जब सुबह हुई और उसकी प्यास मैने बुझा दी।

उसके बाद जब भी वो या मैं चाहते तो मिलकर ये चुदाई का खेल खेलते हैं। Antarvasna

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