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Antarvasna Hindi sex stories

इस बार उन्होने Antarvasna ने मेरी पैंट की ज़िप खुद खोली और मेरी बुर पर हाथ फिराया। बुर पर हाथ लगते ही मैं बेचैन हो गई। वो मेरी फूली हुई बुर को मुट्ठी में लेकर भींच रहे थे। मैने बेबसी से अपना सिर थोड़ा सा ऊपर उठा कर भैया का सुपाड़ा चूमा और उसे मुंह में लेने की कोशिश की परंतु उसकी मोटाई के कारण मैने उसे मुंह में लेना उचित न समझा और उसे जीभ निकालकर चाटने लगी।

मेरी गर्म और खुरदरी जीभ के स्पर्श से भैया बुरी तरह आवेशित हो गये। उन्होने आवेश में भरकर मेरी गीली बुर को टटोलते हुये एक झटके से बुर में उंगली घुसा दी। मैं सिसकी भरकर उनके लंड सहित कमर से लिपट गयी। मेरा दिल कर रहा था कि भैया फ़ौरन अपनी उंगली को निकाल कर मेरी बुर में अपना लंड ठूंस दें।

मेरी ये इच्छा भी जल्द ही पूरी हो गयी। भैया मेरी टांगों में हाथ डालकर अपनी तरफ खींचने लगे थे। मैने उनकी इच्छा को समझ कर अपना सिर उनकी जांघों से उतारा और कम्बल के अंदर ही अंदर घूम गयी। अब मेरी टांगें भैया की तरफ थीं और मेरा सिर बर्थ के दूसरे तरफ था। भैया ने अब अपनी टांगों को मेरे बराबर में फैलाया फिर मेरे कूल्हों को उठा कर अपनी टांगों पर चढ़ा लिया और धीरे धीरे कर के पहले मेरी पैंट खींच कर उतार दी और उसके बाद मेरी पैंटी को भी खींच कर उतार दिया अब मैं कम्बल में पूरी तरह नीचे से नंगी थी। अब शायद मेरी बारी थी मैं ने भी भैया के पैंट और अंडर वियर को बहुत प्यार से उतार दिया। अब भैया ने थोड़ा आगे सरक कर मेरी टांगों को खींच कर अपनी कमर के इर्द गिर्द करके पीछे की ओर लिपटवा दिया।

इस समय मैं पूरी की पूरी उनकी टांगो पर बोझ बनी हुयी थी। मेरा सिर उनके पंजों पर रखा हुआ था। मैने ज़रा सा कम्बल हटा कर आसपास की सवारियों पर नज़र डाली सभी नींद में मस्त थे। किसी का भी ध्यान हमारी तरफ़ नहीं था। फिर मेरी नज़र भैया की तरफ पड़ी उनका चेहरा आवेश के कारण लाल भभूका हो रहा था वो मेरी ओर ही देख रहे थे न जाने क्यों उनकी नज़रों से मुझे बहुत शरम आयी और मैने वापस कम्बल के अंदर अपना मुंह छुपा लिया।

भैया ने फिर मेरी बुर को टटोला। मेरी बुर इस समय पूरी तरह रस से भरी हुई थी फिर भी भैया ने ढेर सारा थूक उस पर लगाया और अपने लंड को मेरी बुर पर रखा उनके गर्म सुपाड़े ने मेरे अंदर आग दहका दी फिर उन्होने टटोल कर मेरी बुर के मुहाने को देखा और अच्छी तरह सुपाड़ा बुर के मुंह पर रखने के बाद मेरी जांघें पकड़ कर हल्का सा धक्का दिया मगर लंड अंदर नहीं गया बल्कि ऊपर की ओर हो गया।

भैया ने इसी तरह एक दो बार और कोशिश किया वो आसपास की सवारियों की वजह से बहुत सावधानी बरत रहे थे। इस तरह जब वो लंड न डाल सके तो खीज कर अपने लंड को मेरी बुर के आस पास मसलने लगे। मैने अब शरम त्याग कर मुंह खोला और उन्हें सवालिया निगाहों से देखा। वो बड़ी बेबस निगाहों से मुझे देख रहे थे। मैने सिर और आंखों के इशारे से पूछा “कया हुआ?”

तब वो थोड़े से नीचे झुक कर धीरे से फुसफुसाये, “आस पास सवारियां मौजूद हैं इसलिये मैं आराम से काम करना चाहता था मगर इस तरह होगा ही नहीं, थोड़ी ताकत लगानी पड़ेगी।”

“तो लगाओ न ताकत भैया” मैं उखड़े स्वर में बोली।

“ताकत तो मैं लगा दूंगा परंतु तुम्हे कष्ट होगा क्या बरदाश्त कर लोगी?”

“आप फ़िक्र न करें कितना ही कष्ट क्यों न हो मैं एक उफ़ तक न करूंगी। आप लंड डालने में चाहे पूरी शक्ति ही क्यों न झोंक दें।”

“तब ठीक है मैं अभी अंदर करता हूं” भैया को इतमिनान हो गया।

और इस बार उन्होने दूसरी ही तरकीब से काम लिया। उन्होने उसी तरह बैठे हुये मुझे अपनी टांगों पर उठा कर बिठाया और दोनो को अच्छी तरह कम्बल से लपेटने के बाद मुझे अपने पेत से चिपका कर थोड़ा सा ऊपर किया और इस बार बिल्कुल छत की दिशा में लंड को रखकर और मेरी बुर को टटोलकर उसे अपने सुपाड़े पर टिका दिया। मैं उनके लंड पर बैठ गयी। अभी मैने अपना भार नीचे नहीं गिराया था। मैने सुविधा के लिये भैया के कंधों पर अपने हाथ रख लिये।
भैया ने मेरे कूल्हों को कस कर पकड़ा और मुझसे बोले, “अब एक दम से नीचे बैठ जाओ”

मैं मुस्कुराई और एक तेज़ झटका अपने बदन को देकर उनके लंड पर चपक से बैठ गयी। उधर भैया ने भी मेरे बदन को नीचे की ओर दबाया। अचानक मुझे लगा जैसे कोई तेज़ धार खंजर मेरी बुर में घुस गया हो। मैं तकलीफ़ से बिलबिला गयी। क्योंकि मेरी और भैया की मिली जुली ताकत के कारण उनका विशाल लंड मेरी बुर के बंड दरवाज़े को तोड़ता हुआ अंदर समा गया और मैं सरकती हुयी भैया की गोद में जाकर रुकी।

मैने तड़प कर उठना चाहा परंतु भैया की गिरफ़्त से मैं आज़ाद न हो सकी। अगर ट्रेन में बैठी सवारियों का ख्याल न होता तो मैं बुरी तरह चीख पड़ती। मैं मचलते हुये वापस भैया के पैरों पर पड़ी तो बुर में लंड तनने के कारण मुझे और पीड़ा का सामना करना पड़ा। मैं उनके पैरों पर पड़ी पड़ी बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगी।

भैया मुझे हाथों से दिलासा देते हुये मेरी चूचियों को सहला रहे थे। करीब १० मिनट बाद मेरा दर्द कुछ हल्का हुआ तो भैया कूल्हों को हल्के हल्के हिला कर अंदर बाहर करने लगे।

फिर दर्द कम होते होते बिल्कुल ही समाप्त हो गया और मैं असीमित सुख के सागर में गोते लगाने लगी।

भैया धीरे से लंड खींच कर अंदर डाल देते थे। उनके लंड के अंदर बाहर करने से मेरी बुर से चपक चपक की अजीब अजीब सी आवाज़ें पैदा हो रही थीं। मैने अपनी कोहनियों को बर्थ पर टेक कर बदन को ऊपर उठा रखा था और खुद थोड़ा सा आगे सरक कर अपनी बुर को वापस उनके लंड पर ढकेल देती थी।

इस तरह से आधे घंटे तक धीरे धीरे से चोदा चादी का खेल चलता रहा और अंत में मैने जो सुख पाया उसे मैं बयान नहीं कर सकती।

भैया ने टोवल निकाल कर पहले मेरी बुर को पोंछा जो खून और हम दोनो के रज और बीज से सनी हुई थी उसके बाद मैने उनके लंड को पोंछा और फिर बारी बारी से बाथरूम में जाकर फ़्रेश हुये और कपड़े पहने।

मेरे पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था। यहींन से हम दोनो भाई बहन न होकर प्रेमी प्रेमिका बन गये। अब जब भी भैया घर आते मुझे बिना चोदे नहीं मानते हैं मुझे भी उनका इंतज़ार रहता है। मगर अभी तक किसी और को मैने अपना बदन नहीं सौंपा है और न कोई इरादा है Antarvasna

अनजान आदमी से फ्रेंड के साथ सेक्स किया हाय फ्रेंड्स मेरा नाम मालविका हैं मेरी उम्र 27 साल हैं और मेरा फिगर 36-34-38 हैं मैं दिल्ली से हूं। मेरे हसबैंड एक बड़े संस्थान में नौकरी करते हैं और मैं भी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रही हूं। ये मेरी रियल सेक्स स्टोरी हैं। यह मेरी और मेरी कोचिंग की क्लासमेट मीनाक्षी की हैं। हम लोग कोचिंग में हमेशा एक साथ बैठते हैं और वापस घर भी एक साथ ही आते हैं मीनाक्षी की उम्र 30 साल है और उसका फिगर 38 34 40 है वह मेरे से थोड़ी मोटी है और उसके बड़े-बड़े बस और बड़ी-बड़ी गांड मेरे से भी ज्यादा बड़े और सेक्सी लगते हैं। वह कोचिंग में हमेशा टाइट कपड़े पहन कर आती है और कोचिंग के टीचर और बाकी स्टूडेंट उसे घूर-घूर कर देखते रहते हैं। कोचिंग के बाद जब हम घर आते हैं तो कई बार वह मेरे साथ मेरे घर आ जाती है क्योंकि वह भी दिल्ली में अकेले रहकर ही तैयारी कर रही है उसकी फैमिली उदयपुर में रहती है और उसका हस्बैंड कोलकाता में नौकरी करता है। वह सेक्स में बहुत इंटरेस्ट लेती है और मेरे से भी मेरे और मेरे हस्बैंड की सेक्स लाइफ के बारे में रोज पूछती रहती है। एक बार हम कोचिंग से घर आए तो मीनाक्षी और में एक साथ बैठकर पोर्न देखने लगे और पॉर्न मूवी देखते देखते हम दोनों गर्म हो गई थी तो मीनाक्षी मुझे किस करने लगी और मैं भी उसे वापस किस करने लगी और हम एक दूसरे के बूब्स दबाने लगे और वह मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर मुझे नंगा कर दिया और खुद भी पूरी नंगी हो गई फिर वह आई और अपना बूब्स मेरे मुंह में दे दिया और बोली कि तुम इसे जोर-जोर से चूस हो और मैं उसके बूब्स को चूसने लगी वह मेरे बस को दबा रही थी और मैं उसके बूब्स को चूस रही थी कुछ देर बाद उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया और मेरी चुत चाटने लगी। वह अपनी जीभ मेरी चुत के अंदर तक डालकर चाट रही थी और मेरे बूब्स को सहला रही थी। फिर उसने मेरे मुंह पर अपनी छूट रखनी और मेरी चुत चाटने लगे हम लोग 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाट रहे थे। कुछ देर बाद हमारी चुत से पानी झड़ गया और हम एक दूसरे से अलग होकर सोफे पर नंगे ही बैठ गए। फिर उसने मुझे कहा कि तुम्हारे पास डिल्डो है क्या तो मैंने कहा नहीं मेरे पास तो नहीं है तो फिर वह बोले कि घर में लंड के जैसा क्या है तो मैंने कहा कि फ्रिज में खीरा रखा है तो वह बोली तो लेकर के आओ फिर मैं किचन में गई और एक लंबा खीरा लेकर आई मीनाक्षी ने मुझे कहा कि तुम्हारे हस्बैंड के कंडोम कहां पड़े हैं तो मैंने कहा कि वह अलमारी के अंदर है तो उसने एक कंडोम लिया और खीरे पर कंडोम चढ़ा लिया। फिर वह सोफे पर टांगे चौड़ी करके बैठ गई और मुझे कहा कि तुम मेरी चुत में खीरे को अंदर बाहर करो मैं उसे लंबे खीरे को अपने हाथ में पकड़ कर मीनाक्षी की चुत में डालने लगी वह बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी इसलिए आहें भर रही थी। 6 7 मिनट तक खीर डालते रहने के बाद उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया था और उसकी चुत में खीरा करने के कारण मैं भी गरम हो गई तो मैं मीनाक्षी से कहा कि साली रंडी तेरा तो पानी छुट गया है अब मुझे कौन शांत करेगा। मीनाक्षी बोली कि तुझे तो रोज रात में तेरे हस्बैंड का लंड मिलता है तुझे खीरे की क्या जरूरत तुम्हें बोली की हस्बैंड तो रात में आकर चोदेगा करीब 5-6 मिनट तक लगातार खीरा डालने के बाद मेरी चुत ने भी पानी छोड़ दिया। फिर हम लोगों ने कपड़े पहने और खाना खाकर मेरे घर पर ही सो गए। कुछ दिनों बाद हमारा सरकारी नौकरी का एग्जाम जयपुर में होने वाला था मेरा और मीनाक्षी का सेंटर जयपुर में आया तो मैं मेरे हस्बैंड से कहा कि आप हमारे साथ चलोगे क्या तो वह बोले कि मैं नहीं चल पाऊंगा मुझे ऑफिस जाना पड़ेगा तुम और मीनाक्षी एक साथ चले जाओ। फिर मैं थर्ड एसी के दो टिकट बनवा ली है और मीनाक्षी के साथ जयपुर जाने की तैयारी कर ली। मीनाक्षी बोली की दिसंबर का महीना है और जयपुर में दिसंबर के महीने में टूरिस्ट बहुत आते हैं तो हम भी एक-दो दिन बाहर रख कर वापस आएंगे तो मैं एग्जाम के दो दिन बाद वापस दिल्ली आने का टिकट बनवाया। संडे को दिन में हमारा एग्जाम था इसलिए हम शनिवार की रात को दिल्ली से ट्रेन में बैठे और सुबह जयपुर पहुंच गए वहां जाकर हम सीधे होटल गए और वहां से तैयार होकर में मेरे एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई और मीनाक्षी अपने एग्जाम सेंटर की तरफ निकल गई। शाम को पांच बजे तक हम दोनों वापस होटल आए थोड़ी देर हम लोगों ने रेस्ट किया और फिर हम लोग जयपुर सिटी घूमने चले गए। मैं और मीनाक्षी ने टाइट जींस और टाइट टी-शर्ट पहने हुए थे और उसके ऊपर स्वेटर पहने हुए थे जिसमें हमारा फिगर बहुत ज्यादा सेक्सी लग रहा था। लोग जयपुर के मार्केट में घूम रहे थे जो जंतर मंतर के पास था वहां पर बहुत सारे टूरिस्ट भी आए हुए थे वहां पर लोग हमें घूर घूर कर देख रहे थे। काफी देर घूमने के बाद हम लोग खाना खाने एक अच्छे होटल में चले गए वहां पर काफी टूरिस्ट भी खाना खा रहे थे वहां पर सारी टेबल बुक थी इसलिए हमने थोड़ी देर में ही खड़े रहकर वेट किया और फिर हमने देखा कि एक काला अफ्रीकन आदमी बैठा है और उसकी टेबल पर और कोई नहीं बैठा है वह अकेला ही वहां बैठा था तो मीनाक्षी ने उससे पूछा कि क्या हम यहां पर बैठ सकते हैं तो उसे फ्री करने कहा कि हां आप यहां बैठ जाइए। फिर हम लोग वहां बैठ गए और हमने ऑर्डर दिया हमें और मीनाक्षी उससे बातें करने लगे वह आदमी जयपुर किसी बिजनेस मीटिंग के लिए आया था और अकेला ही था वह अमेरिका में रहता था उसका नाम जॉर्ज था बातों ही बातों में उसने बताया कि उसकी उम्र 47 साल है और उसकी वाइफ फ्रांस की है और उसकी उम्र 27 साल है। और उन्होंने लव मैरिज की है। मीनाक्षी ने पूछा कि वह तो आपसे बहुत ज्यादा छोटी है तो लव मैरिज कैसे हुई तो उसने बताया कि वह मेरे ऑफिस में काम करती थी और हमें आपस में प्यार हो गया और हम लोगों ने शादी कर ली फिर उसने अपने फोन में अपनी और अपनी वाइफ की फोटो दिखाई जो किसी बीच पर थी। जिसमें वह दोनों किसी बीच के किनारे खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे जिसमें उसकी वाइफ बिकनी पहने हुई थी और जॉर्ज ने केवल अंडरवियर पहना हुआ था। फिर जॉर्ज ने हमें पूछा कि आप लोग कहां रुके हो तुम मीनाक्षी ने बताया कि हम यही एक होटल में रुके हैं फिर जोश ने बताया कि वह भी यही पास ही एक होटल में रुका हुआ हैं। फिर खाना खाने के बाद वह भी थोड़ी देर हमारे साथ घूमने लगा और फिर वह बोला कि आप मेरे रूम पर चलो वहां हम लोग थोड़ी देर बातें करेंगे तो मीनाक्षी बोली की हम लोग आज एग्जाम देकर आए हैं और हमें थोड़ी थकान है इसलिए हम जाकर रेस्ट करेंगे तो वह बोला कि वह हमारी थकान उतार देगा मीनाक्षी बोली कि कैसे उतरोगे तो जॉर्ज ने कहा कि जैसा आप कहोगे वैसे आपकी थकान उतार दूंगा वैसे उसकी वाइफ उसकी बहुत तारीफ करती है क्योंकि वह बहुत अच्छी मसाज करता है और आप कहो तो आपकी भी मसाज कर सकता हूं। मैंने कहा कि मसाज की कोई जरूरत नहीं है हम ऐसे ही चलते हैं। फिर हम लोग जॉर्ज के रूम पर आ गए और वहां पर थोड़ी देर रुके और बातें करने के बाद हम अपने होटल के लिए निकलने लगे तो जॉर्ज ने निकलते समय हम दोनों को गले लगाया और बोला कि कल सुबह में आपका इंतजार करूंगा मीनाक्षी बोली कि कल हम लोग जयपुर घूमने का प्लान कर रहे हैं तो वह बोला कि मैं भी आपके साथ घूमना चाहता हूं तो हमने उसे कह दिया कि ठीक है हम तीनों कल एक साथ जयपुर घूम लेंगे फिर हम लोग अपने होटल आ गए। मैंने मीनाक्षी से कहा कि मीनाक्षी मुझे उसे जॉर्ज का इरादा ठीक नहीं लगता तो मीनाक्षी बोली की वह अफ्रीकन है उसके पास लंबा लंड है और हमारे पास एक अच्छा मौका है बड़े लंड से चुदवाने का इसलिए ज्यादा सोच मत और कल घूमने चलो। फिर दूसरे दिन सुबह मैं और मीनाक्षी वन पीस ड्रेस पहन कर जॉर्ज के होटल पहुंच गए वहां पर वह हमारा इंतजार कर रहा था और जॉर्ज के साथ ही ब्रेकफास्ट करने के बाद हम लोग कर टैक्सी में जयपुर घूमने चले गए उसे दिन हमने उसके साथ आमेर किला नाहरगढ़ फोर्ट हवा महल जंतर मंतर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम और कई जगह घूमी दिन में हमने जॉर्ज के साथ लंच भी किया। दिन में जब हम घूम रहे थे तब जॉर्ज रह रहकर कभी मीनाक्षी तो कभी मेरे साथ चिपकने की कोशिश करता था। शाम को वह हमें अपने साथ अपने होटल लेकर गया और वहां हमने साथ में कॉफी पी। मैं बोली की जोर जब हम लोग अपने होटल जाते हैं तो वह बोला कि खाना यही खाकर जाना तो मैं बोली कि हमें लेट हो जाएगा तो वह बोला कि आज यहीं रुक जाओ तो मीनाक्षी ने कहा कि यहां तो सिर्फ एक बेड है हम तीनों कैसे रख सकते हैं तो जॉर्ज बोला कि हम तीनों एक साथ भी तो सो सकते हैं मीनाक्षी बोली कि तुम्हें कोई तकलीफ तो नहीं होगी जॉर्ज बोला कि तुम दो हसीनाएं अगर मेरे साथ रात में रखेगी तो मुझे क्या तकलीफ होगी। मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा इरादा क्या है बता दो तो जॉर्ज बोला कि अब तुम समझ ही रही हो कि मेरा इरादा क्या है मैं तुम दो हसीनाओं के साथ आज रात एंजॉय करना चाहता हूं क्या तुम तैयार हो तो मीनाक्षी बोली कि हमें क्या फायदा होगा जॉर्ज तुम्हें तो हमारी दो चुत चोदने को मिलेगी हमें क्या मिलेगा तो जॉर्ज बोला कि तुम्हें क्या चाहिए मैं तुम्हें देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली कि तुम क्या दे सकते हो तो जॉर्ज बोला कि तुम जो मांगो में देने को तैयार हूं तो मीनाक्षी बोली की क्या तुम हमें पेमेंट कर दोगे तो जॉर्ज बोला कि तुम जितना कहोगी मैं उतना पेमेंट कर दूंगा बस तुम दोनों आज रात मेरे साथ रुक जाओ फिर मीनाक्षी बोली ठीक हैं। फिर जॉर्ज के साथ हम लोगों ने खाना खाया और वापस उसके रूम में चले गए वहां हम लोग सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे थोड़ी देर बातें करने के बाद जॉर्ज ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और मेरे बूब्स को दबाने लगा उसने मीनाक्षी को भी अपने पास बुला लिया हो मेरे वन पीस सूट के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबा रहा था थोड़ी देर बूब्स दबाने के बाद वह बोला तुम दोनों नंगी हो जाओ फिर वह खड़ा हुआ और उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया हम उसके लंबे लंड को देखते रह गए उसका लंड बहुत ज्यादा कला और 10 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था मैंने मीनाक्षी को कहा कि मीनाक्षी आज तो यह हमें मार ही देगा मीनाक्षी बोली कि ऐसा लंड लेने का मौका हमें बार-बार नहीं मिलेगा इसलिए आज से जी भर के चुदाई करने का मौका है इसलिए हम दोनों मजे से सेक्स का मजा लो। फिर जॉर्ज ने हमें भी नंगा कर दिया हम तीनों नंगे खड़े थे जॉर्ज ने खड़े-खड़े ही मुझे किस करना शुरू कर दिया वह मुझे किस करते हुए मेरी गांड को दबा रहा था वह अपने बड़े-बड़े हाथों से मेरी गांड को बहुत ज्यादा दबा रहा था फिर सोफे पर बैठ गया और मुझे अपने लंड पर बैठा लिया उसका लंड बहुत ज्यादा लंबा था इसलिए मुझे दर्द होने लगा लेकिन उसने कोई परवाह नहीं की और जबरदस्ती मेरी चुत में अपना लंबा काला लंड घुसा दिया उसने मीनाक्षी को पास बुलाया और उसका बूब्स अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। मैं उसके लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी और उसका पूरा लंबा काला लंड मेरी चुत में घुस रहा था मुझे ऐसा लग रहा था कि आज मेरी चुत फट जाएगी क्योंकि जॉर्ज का लंड मेरे हस्बैंड से कई गुना ज्यादा बड़ा था। थोड़ी देर बाद वह उठा और बेड पर लेट गया उसने मीनाक्षी को अपने लैंड पर बैठा लिया और मुझे बोला कि तुम तुम्हारी चुत मेरे मुंह पर रख दो मैं उसके मुंह पर अपनी चुत रख कर बैठ गई और मीनाक्षी उसके लंड पर बैठकर छुड़वाने लगी वह मेरी चुत के बहुत अंदर तक जीभ डालकर चोद रहा था। मीनाक्षी और मैं एक दूसरे के बूब्स दबा रहे थे। जॉर्ज बहुत तेजी से हम दोनों को एक साथ छोड़ने का मजा ले रहा था। थोड़ी देर बाद मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया और जॉर्ज मेरी चुत का सारा पानी पी गया। फिर मैं है कर पास में बैठ गई और मीनाक्षी अभी भी उसके लंड पर ऊपर नीचे होकर सेक्स का मजा ले रही थी कुछ देर बाद जॉर्ज ने मीनाक्षी की चुत में ही अपना स्पर्म गिरा दिया और फिर वह दोनों भी अलग हो गए। दस पन्द्रह मिनट तक हम लोग आपस में बातें करते रहे फिर जॉर्ज का लंड वापस खड़ा हो गया तो वह बोला कि मीनाक्षी तुम बेड पर बैठ जाओ मालविका तुम्हारी चुत चाटेगी और मैं मालविका को डॉगी स्टाइल में पीछे से चोदूंगा फिर मीनाक्षी बेड पर बैठ गई मैंने उसकी टांगों को फैलाया और उसकी चुत चाटने लगी और जॉर्ज ने मुझे डॉगी स्टाइल में किया और पीछे से मेरी चुदाई करने लगा अब उसका लंबा लैंड मेरी चुत के गहराई तक अंदर जा रहा था और वापस बाहर निकाल कर वह बहुत तेज तेज ढके लग रहा था मीनाक्षी अपनी चुत चटवाते हुए मेरे बस को मसल रही थी और मेरा सिर पकड़कर चुत पर दबा रही थी जॉर्ज मेरी गांड पर तेजी से मर भी रहा था इस कारण मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन उसके लंबे लंड के कारण मुझे मजा भी बहुत आ रहा था। जॉर्ज करीब 10 मिनट तक इसी पोजीशन में हमें चोदता रहा मेरी चुत ने दो बार पानी छोड़ दिया था लेकिन जॉर्ज का लैंड अभी भी इतना हुआ था और वह तेजी से छोड़ रहा था। जॉर्ज ने फिर कहा कि अब तुम दोनों अपनी पोजीशन बदल लो अब मैं बेड पर बैठ गई और मीनाक्षी मेरी जगह डॉगी स्टाइल में उससे चुदवाने लगी थोड़ी देर बाद मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुमने मेरी चुत को तो अपने स्पर्म से भर दिया है मालविका की चुत में भी तो अपना स्पर्म गिराओ तो बोला कि कोई बात नहीं इस बार मेरा सर इस पर मालविका की चुत में ही गिरेगा फिर थोड़ी देर बाद उसने मीनाक्षी की चुत से अपना लंड निकाल और बेड पर आकर मिशनरी पोज में वह मुझे चोदने लगा वह बहुत तेज स्पीड से ढके लग रहा था करीब दो-तीन मिनट तक उसने मेरी चुत में बहुत तेज तेज धक्के लगाने लगा और अपना सारा इस पर मेरी चुत में भर दिया फिर उसने अपना लंड बाहर निकल दिया मेरी चुत से उसका स्पर्म बाहर आने लगा तो मैंने उसे टॉवल से साफ किया। फिर मैंने जोर-जोर मीनाक्षी को अपने बैग में से निकाल कर चॉकलेट दी हमने चॉकलेट खाई और थोड़ी देर बातें करते रहे फिर जॉर्ज ने बोला कि तुम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे की चुत चाटा फिर मैं बेड पर लेट गई और मीनाक्षी मेरे मुंह पर अपनी चुत रखकर मेरी चुत चाटने लगी और मैं उसकी चुत चाटने लगी फिर जो आज आया और उसने मीनाक्षी की गांड पर क्रीम लगाई और अपनी एक अंगुली अंदर करने लगा मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज तुम्हारा बहुत बड़ा है तुम धीरे-धीरे करना तो वह धीरे-धीरे अपनी अंगुली अंदर बाहर कर रहा था फिर उसने अपनी दो उंगलियां मीनाक्षी की गांड में डाल दिया और कुछ देर बाद उसने अपने लैंड पर क्रीम लगाई और वह मीनाक्षी की गांड मारने लगा मीनाक्षी को दर्द हो रहा था इसलिए वह आहें भरने लगी। जार्ज पांच छः मिनट तक उसकी गांड मारता रहा फिर उसने मुझे अपने सामने लुटाया और बोला कि अब मैं तुम्हारी गांड में अपना लंड डालूंगा तो मैंने कहा धीरे-धीरे डालना फिर उसने मेरी गांड पर भी क्रीम लगाई और धीरे-धीरे अपना लंड नेघुसने लगा थोड़ी देर बाद उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया और 5 मिनट तक लगातार उसने मेरी गांड मारी फिर उसने मुझे अपने सामने बैठाया और मेरे बस पर अपना स्पर्म गिरा दिया। फिर हम तीनों थक चुके थे तो हम तीनों सो गए। रात में 3:00 बजे जॉर्ज उठा और उसने मीनाक्षी को मिशनरी पोजीशन में चोदना शुरू कर दिया मेरी भी नींद खुल गई थी मैंने देखा कि जॉर्ज बहुत तेज स्पीड से मीनाक्षी की चुत में धक्के लगा रहा था यह देखकर मैं भी गर्म हो गई और मैं भी मीनाक्षी के बूब्स को दबाने लगी और जॉर्ज को किस करने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मुझे सामने से गोद में उठाया और मेरी चुत में अपना लंड डालकर चोदने लगा वह खड़ी-खड़े मुझे बहुत तेज स्पीड से छोड़ रहा था मीनाक्षी बेड पर देखकर यह देख रही थी जॉर्ज करीब छः सात मिनट तक इसी तरह खड़े-खड़े मुझे चोदता रहा फिर मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज मालविका को अकेले ही छोड़ोगे या मुझे भी चोदोगे तो जॉर्ज बुला के तुम भी आ जाओ फिर उसने मीनाक्षी को भी अपनी गोद में उठा लिया और खड़ी-खड़े चोदने लगा। फिर उसने हम दोनों को अपने सामने बैठाया और हम दोनों के मुंह पर अपना स्पर्म गिरा दिया और बोला कि तुम यह स्पर्म चाट लो तो हमने उसका स्पर्म चाट लिया। फिर हम लोग सो गए ।सुबह सात बजे हम लोग उठे तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज अब हम अपने होटल जा रहे हैं तो जॉर्ज बोला कि अभी एक बार और चुदाई करने दो फिर तुम चली जाना मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हमने तो चुदाई करने दी लेकिन तुमने अपना वादा नहीं निभाया तू जॉर्ज बोला कि मुझे मेरा वादा याद है और उसने एक लिफाफा मीनाक्षी को दिया मीनाक्षी ने वह लिफाफा खोलकर देखा तो उसमें एक लाख रुपये थे जार्ज बोला कि तुम खुश हो या और चाहिए तो मीनाक्षी बोली कि जॉर्ज हम खुश हैं फिर जॉर्ज नंगा ही बेड से खड़ा हुआ और बोला कि तुम दोनों मेरा लंड मुंह में लेकर चूसो फिर मैं और मीनाक्षी बारी-बारी से उसका लंड अपने मुंह में ले रहे थे फिर जॉर्ज ने हमें बेड पर लिटा दिया और मुझे मिशनरी पोजीशन में चोदने लगा वह करीब छः सात मिनट तक तेज स्पीड से मुझे चोदता रहा फिर बोला कि मीनाक्षी अब तुम आ जाओ फिर वो पांच छः मिनट तक चोदता रहा फिर उसने मेरे मुंह में अपना पूरा स्पर्म गिरा दिया और बोला कि मालविका तुम इसे पी जाओ फिर मैं उसका पूरा स्पर्म पी गई। फिर उसने मीनाक्षी को डागी स्टाइल में चोदना शुरु कर दिया वो मीनाक्षी को दस मिनट तक तेज स्पीड से चोदता रहा फिर उसने मीनाक्षी को सामने बैठाया और अपना लंड मीनाक्षी के मुंह में डाल दिया और अपना स्पर्म मीनाक्षी के मुंह में गिरा दिया। फिर हम वहां से वापस अपने होटल आ गए। उस दिन हम दिन में जयपुर घूमने गए। मीनाक्षी ने मुझे पचास हजार दिए और बोली कि ये लो जार्ज का गिफ्ट। फिर उस दिन शाम को हम वापस ट्रेन से दिल्ली आ गए। उसके बाद जार्ज कई बार दिल्ली आया मैंने और मीनाक्षी ने उसके साथ चुदाई की। anubabita1@hotmail.com
Antarvasna

मेरा नाम रोशन है। मेरी Antarvasna शादी बड़ौदा में एक साधारण परिवार में हुई थी। मैं स्वयं एक दुबली पतली, दूध जैसी गोरी, और शर्मीले स्वभाव की पुराने संस्कारों वाली लड़की हूँ। घर का काम काज ही मेरे लिये लिये सब कुछ है। पर काम से निपटने के बाद मुझे सजना संवरना अच्छा लगता है। रीति रिवाज के मुताबिक दूसरों के सामने मुझे घूंघट में रहना पड़ता है।

काम से हम लोग स्वर्णकार हैं। मेरे ससुर और पति कुवैत में काम करते हैं। उनकी कमाई वहाँ पर अच्छी है। कुवैत से दोनों मिलकर काफ़ी पैसा हमें भेज देते हैं…उससे यहाँ पर हमने अपना मकान का विस्तार कर लिया है।

मेरे पति के एक मित्र साहिल पास के गांव के हैं वो हमारे घर अक्सर आ जाते हैं और चार पांच दिन यहाँ रह कर अपना काम करके वापस चले जाते हैं। वो भी स्वर्णकार हैं। घर में बस तीन सदस्य ही हैं, मैं, मेरी सास और और मेरी छोटी सी ननद जो मात्र 13 साल की थी। साहिल हमारा हीरो है… वो हमारे यहाँ पर क्या क्या करता था… और हम उसके साथ कैसे मजे करते थे… आईये, मैं आपको आरम्भ से बताती हूँ…

मुझे इस घर में आये हुए लगभग चार माह बीत चुके थे…यानि मेरी शादी हुए चार माह ही बीते थे। आज साहिल भी गांव से आया हुआ था। मैंने उसे पहली बार देखा था। मेरी ही उम्र का था। उसे मेरी सास कमला ने उसे एक कमरा दे रखा था वो वहीं रहता था। कमला ने मेरा परिचय उससे कराया। मैंने घूंघट में से ही उन्हें अभिवादन किया।

उसके आते ही मुझे कमला ने पास ही सब्जी मण्डी से सब्जी लाने भेज दिया। मैं जल्दी से बाहर निकली और थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे अचानक याद आया कि कपड़े भी प्रेस कराने थे…मैं वापस लौट आई।

कमला और साहिल दोनों ही मुझे नजर नहीं आये… साहिल भी कमरे में नहीं था। मैं सीधे कमला के कमरे की तरफ़ चली आई… मुझे वहाँ पर हंसने की आवाज आई… फिर एक सिसकारी की आवाज आई… मैं ठिठक गई।

अचानक हाय… की आवाज कानों से टकराई… मैं तुरंत ही बाहर आ गई मुझे लगा कि मां अन्दर साहिल के कुछ ऐसा वैसा तो नहीं कर रही है।
मैंने बाहर बरामदे में आकर आवाज लगाई…’मां जी…! कपड़े कहाँ रखे हैं?’

कमला तुरन्त अपने कमरे में से निकल आई… साहिल कमरे में ही था। अपने अस्त व्यस्त कपड़े सम्हालती हुई बाहर आ कर कहने लगी- ये बाहर ही तो रखे हैं…’

उनके स्तनों पर से ब्लाऊज की सलवटें बता रही थी कि अभी बोबे दबवा कर आ रही हैं…उनकी आंखें सारा भेद खोल रही थी। आंखो में वासना के गुलाबी डोरे अभी भी खिंचे हुए थे। मुझे सनसनी सी होने लगी… तो क्या कमला… यानी मेरी सास और साहिल मजे करते हैं…?

मैं भी घर में नई थी…मेरा पति भी बाहर था, मैं भी बहुत दिनों से नहीं चुदी थी, मेरा मन भी भारी हो उठा…मन में कसक सी उठने लगी… मां ही भली निकली… पति की दूरी साहिल पूरी कर देता है… और मैं… हाय…

मैं सब्जी लेकर और दूसरे काम निपटा कर वापस आ गई थी। सहिल और कमला दोनों ही खुश नजर आ रहे थे… क्या इन दोनों ने कुछ किया होगा। मेरे मन में एक हूक सी उठने लगी।

मुझे साहिल अब अचानक ही सुन्दर लगने लगा था… सेक्सी लगने लगा था। मैं बार बार उसे नीची और तिरछी नजरों से उसे निहारने लगी। कमला भी उसके आने के बाद सजने संवरने लगी थी। 40 वर्ष की उम्र में भी आज वो 25 साल जैसी लग रही थी। मेरा मन बैचेन हो उठा…भावनायें उमड़ने लगी… मन भी मैला हो उठा।

दिन को सभी आराम कर रहे थे… तभी मुझे कमला की खनकती हंसी सुनाई दी। मैं बिस्तर से उठ बैठी। धीरे से कमरे के बाहर झांका फिर दबे कदमों से कमला के कमरे की तरफ़ बढ़ गई। दरवाजे खिड़कियाँ सभी बन्द थे… पर मुझे साईड वाली खिड़की के पट थोड़े से खुले दिखे।

मैंने साईड वाली खिड़की से झांका तो मेरा दिल धक से रह गया। कमला ने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाऊज पहना था… सहिल बनियान और सफ़ेद पजामा पहना था… कमला अपने पांव फ़ैला कर लेटी थी और साहिल पेटीकोट के ऊपर से ही अपना लण्ड पजामे में से कमला की चूत पर घिस रहा था… कमला सिसकारी भर कर हंस रही थी…

मेरे दिल की धड़कन कानों तक सुनाई देने लगी थी। अब साहिल टांगों के बीच में आकर कमला पर लेटने वाला था… कमला का पेटिकोट ऊपर उठ गया… पजामें में से साहिल का लण्ड बाहर आ गया और अब एक दूसरे को अपने में समाने की कोशिश करने लगे…
अचानक दोनों के मुख से सिसकारी निकल पड़ी… शायद लण्ड चूत में घुस चुका था… बाहर से अब साहिल के चूतड़ो के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। मेरे पांव थरथराने लगे थे।

मैं दबे पांव अपने कमरे में आ गई… मेरा चेहरा पसीने से नहा गया था। दिल की धड़कने अभी भी तेज थी। मैं बिस्तर पर लोट लगाने लगी। मैंने अपने उरोज दोनों हाथो से दबा लिये… चूत पर हाथ रख कर दबाने लगी।

फिर भाग कर मैं बाहर आई और एक लम्बा सा बैंगन उठा लाई। मैंने अपना पेटिकोट उठाया और बैंगन से अपने आपको शांत करने का प्रयत्न करने लगी। कुछ ही देर में मैं झड़ गई।

रात हो चुकी थी। लगता था कि कमला और सहिल में रात का प्रोग्राम तय हो चुका है। दोनों ही हंस बोल रहे थे…बहू होने के कारण मुझे घूंघट में ही रहना था… मैं खाना परोस रही थी… सहिल की चोरी छुपे निगाहें मुझे घूरती हुई नजर आ जाती थी। मैं भी सब्जी, रोटी के बहाने उसके शरीर को छू रही थी… घूंघट में से मेरी बड़ी बड़ी आंखें उसकी आंखों से मिल जाती थी।

मेरी हल्की मुस्कुराहट उसे आकर्षित कर रही थी… मेज़ के नीचे से कमला और साहिल के पांव आपस में टकरा रहे थे… और खेल कर रहे थे… ये देख कर मेरा मन भी भटकने लगा था कि काश…मेरी भी ऐसी किस्मत होती… कोई मुझे भी प्यार से चोद देता और प्यास बुझा देता…

रात को सोने से पहले मैं पेशाब करने बाहर निकली तो साहिल बाहर ही बरामदे में खड़ा था। मैं अलसाई हुई सी सिर्फ़ पेटिकोट और बिना ब्रा की ब्लाऊज पहले निकल आई थी।

साहिल की आंखे मुझे देखते ही चुंधिया गई… दूध सा गोरा रंग… छरहरी काया… ब्लाऊज का एक बटन खुला हुआ… गोरा स्तन अन्दर से झांकता हुआ… बिखरे बाल… वह देखता ही रह गया।

उसे इस तरह से निहारते हुए देख कर मैं शरमा गई… और मेरी नजरें झुक गई…’सहिल जी… क्या देख रहे हैं… आप मुझे ऐसे मत देखिये…’ मैं अपने आप में ही सिमटने लगी।

‘आप तो बला की खूबसूरत हैं…’ उसके मुख से निकल पड़ा।
‘हाय… मैं मर गई…!’ मैं तेजी से मुड़ी और वापस कमरे में घुस गई… मेरी सांसे तेज हो उठी… मैंने अपनी चुन्नी उठाई और सीने पर डाल ली… और सर झुकाये साहिल के पास से निकलती हुई बाथ रूम में घुस गई।

मैं पेशाब करना तो भूल ही गई…अपनी सांसों को…धड़कनो को सम्हालने में लग गई… मेरी छाती उठ बैठ रही थी… मैं बिना पेशाब किये ही निकल आई। साहिल शायद मेरा ही बरामदे में खड़ा लौटने का इन्तज़ार कर रहा था। मैंने उसे सर झुका कर तिरछी नजरों से देखा तो मुझे ही देख रहा था।

‘सुनो रोशन…!’
मेरे कदम रुक गये…जैसे मेरी सांस भी रुक गई… धड़कन थम सी गई…
‘जी…’
‘मुझे पानी पिलायेंगी क्या…?

‘जी…’ मेरे चेहरे पर पसीना छलक उठा… मैं पीछे मुड़ी और रसोई के पास से लोटा भर लाई…मैंने अपने कांपते हाथ साहिल की तरफ़ बढा दिये… उसने जानबूझ कर के मेरा हाथ छू लिया।

और मेरे कांपते हाथों से लोटा छूट गया… मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे ऊपर उठाई और साहिल की तरफ़ देखा…तो वो एक बार फिर मेरी आंखो में गुम सा हो गया… मैं भी एकटक उसे देखती रह गई… मन में चोर था… इसलिये साधारण व्यवहार भी कठिन लग रहा था।
साहिल का हाथ अपने आप ही मेरी ओर बढ़ गया… और उसने मेरे हाथ थाम लिये… मैं साहिल में खोने लगी… मेरे कांपते हाथों को उसने एकबारगी चूम लिया…

अचानक मेरी तन्द्रा टूटी… मैंने अपना हाथ खींच लिया…हाय…कहते हुये कमरे में भाग गई और दरवाज़ा बन्द कर लिया। दरवाजे पर खड़ी आंखें बन्द करके अपने आपको संयत करने लगी… जिन्दगी में ऐसा अहसास कभी नहीं हुआ था… मेरे पांव भी थरथराने लगे थे… मैं बिस्तर पर आकर लेट गई। नींद आंखों से कोसों दूर थी। देर तक जागती रही। समय देखा… रात के बारह बज रहे थे…

उस समय तो मैं पेशाब नहीं कर पाई थी सो मैंने इस बार सावधानी से दरवाजा खोला और इधर उधर देखा… सब शान्त था… मैं बाहर आ कर बाथरूम चली गई। बाहर निकली तो मुझे कमला के कमरे की लाईट जली नजर आई… और मुझे लगा कि साहिल भी वहीं है…
मैं दबे कदमों से उसी खिड़की के पास आई… अन्दर झांका तो साहिल पहली नजर में ही दिख गया। कमला साहिल की गोदी में दोनों पांव उठा कर लण्ड पर बैठी थी…शायद लण्ड चूत में घुसा हुआ था। दोनों मेरी ही बातें कर रहे थे…

‘मां जी… कोई मौका निकाल दो ना… बस रोशन को चोदने को मिल जाये…!’
‘उह… ये थोड़ा सा बाहर निकालो… जड़ तक बैठा हुआ है… रोशन तो बेचारी अब तक ठीक से चुदी भी नहीं है…!’
‘कुछ तो करो ना…’
‘अरे तू खुद ही कोशिश कर ले ना… जवान चूत है… पिघल ही जायेगी… फिर चुदने की उसे भी तो लगी होगी… ऐसा करना कि मुझे सवेरे काम से जाना है दोपहर तक आऊँगी…’
‘तो क्या…!’

‘अरे उसे दबोच लेना और चोद देना…फिर मैं तो हूँ ही…समझा दूंगी… हाय रे अन्दर बाहर तो कर ना…! चल बिस्तर पर आ जा…!’
कमला धीरे से उठी…साहिल का लम्बा सा लण्ड चूत से बाहर निकल आया…

हाय रे इतना मोटा और लम्बा लण्ड… मेरी चूत पनियाने लगी… उनके मुँह से मेरे बारे में बाते सुन कर एक बार फिर मेरी दिल की धड़कन बढ़ गई। दिल को तसल्ली मिली कि शायद कल मैं चुद जाऊँ… सोचने लगी कि जब साहिल मेरे साथ जबरदस्ती करेगा तो मैं चुदवा लूंगी और अपनी प्यास बुझा लूंगी।

पलंग की चरमराहट ने मेरा ध्यान भंग कर दिया, साहिल कमला पर चढ़ चुका था, उसका मोटा लण्ड उसकी चूत पर टिका था…

‘चल अन्दर ठोक ना… लगा दे अब…’ और फिर सिसक उठी, लण्ड चूत के भीतर प्रवेश कर चुका था।

मेरी चूत में से पानी की दो बूंदे टपक पड़ी… मैंने अपने पेटीकोट से अपनी चूत रगड़ कर साफ़ कर ली… मेरा मन पिघल उठा था… हाय रे कोई मुझे भी चोद दे… कोई भारी सा लण्ड से मेरी चूत चोद दे… मेरी प्यास बुझा दे…

अन्दर चुदाई जोरदार चालू हो चुकी थी। दोनों नंगी नंगी गालियो के साथ चुदाई कर रहे थे- हाय कमला… आज तो तेरी भोसड़ी फाड़ डालूंगा… क्या चिकनी चूत है…!’

‘पेल हरामी… ठोक दे अपना लण्ड…चोद दे साले…’ दोनों की मस्त चुदाई चलती रही… एक हल्की चीख के साथ कमला झड़ने लगी… मेरी नजरें उनकी चुदाई पर ही टिकी थी… साहिल भी अब अपना वीर्य कमला की चूत पर छोड़ रहा था।

मैं दबे पांव अपने कमरे में लौट आई… मेरी स्थिति अजीब हो रही थी। क्या सच में कल मैं चुद जाऊँगी…कैसा लगेगा… जम कर चुदवा लूंगी…

सोचते सोचते मेरी आंख जाने कब लग गई और मैं सपनों में खो गई……सपने में भी साहिल मुझे चोद रहा था… मुझ पर वीर्य बरसा रहा था… सब कुछ गीला गीला सा लगने लगा था…मेरी आंख खुल गई… मैं झड़ गई थी… मैंने अपनी चूत पेटीकोट से ही पोंछ डाली। सवेरा हो चुका था…
मैं जल्दी से उठी…और अपना गीला पेटीकोट बदला…और सुस्ताती हुई दरवाजा खोल कर बाहर आ गई… Antarvasna

Antarvasna

दोस्तो, मेरा नाम राजू है मेरी उम्र २५ है आज मैं Antarvasnaआपको एक असली कहानी बताने जा रहा हूं दोस्तो मेरी मामी एक सेक्सी औरत है जो एक सेक्सी शरीर रखती है.

दोस्तो मैं अपनी मामी को ३ साल से बहुत प्यार करता था और उनको चोदना चाहता था पर मेरी हिम्मत उनको कहने की नहीं होती थी मै मामी को धीरे धीरे पटाने लगा मैं जब भी अपने मामी के घर जाता तो पटाने की कोशिश करता था.

जब एक बार रात को मैं अपनी मामी के पास सो रहा था तो मैंने अपनी मामी की चूचियों पर हाथ रख दिया लकिन मेरी मामी ने कोई आपत्ति नहीं की।
मुझे थोड़ा सा यकीन हो गया कि मामी मुझे से प्यार करती है अगले दिन मैने अपनी मामी को हिम्मत करके उनको प्रपोज़ कर दिया मेरी मामी ने मेरा प्रपोज़ स्वीकार कर कर लिया.
मैं उस समय बहुत खुश हुआ क्योंकि अब मामी को चोदना आसान था मैंने एकदम से अपनी मामी को सेक्स के लिए नहीं कहा मैं एक दो दिन बाद मामी को सेक्स के लिए कहा मेरी मामी एकदम से तैयार हो गई फिर हम दोनो अगले दिन का इंतजार करने लगे क्योंकि मेरे मामा सुबह ऑफीस चले जाते हैं और मेरी मामी के दोनो बच्चे स्कूल चले जाते हैं.

अगले दिन हम दोनो अकेले थे मेरी मामी ने जैसे ही दरवाजा बंद किया मैने अपनी मामी को अपनी बाहों में लेकर किस करना शुरू कर दिया मैने अपनी मामी को बेड पर लिटाया और उनकी लिप्स पर किस करना शुरू कर दिया और एक हाथ से उनकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.

मेरी मामी भी मेरा किस करने में बहुत साथ दे रही थी फिर मैने अपनी मामी का सूट और सलवार को उतार दिया अब वो पेंटी और ब्रा में थी वो एकदम मस्त लग रही थी मेरी मामी ने भी मेरे कपड़े उतराने शुरू कर दिए अब मैं बिल्कुल नंगा था

मैने भी अपनी मामी को नंगी कर दिया था मैं अपनी मामी के बड़ी चूचियाँ और गांड को देख कर उतेजना से पागल हो रहा था मैने अपनी मामी को पहले लिप्स करता रहा और मैने अपना एक हाथ चूची पर और एक हाथ उनकी पुसी में देने लगा मेरी मामी भी उत्तेजना से पागल हो रही थी.

अब मेरी मामी ने मेरी चेस्ट को किस और चाटना शुरू कर दिया फिर मेरी मामी ने मेरे लंड को पकड़ कर उसे अपने मुँह में लेकर उसे चाटना शुरू किया मेरा लंड एक दम टाइट हो चुका था और मेरी मामी भी एक दम गरम हो चुकी थी मैने अपनी मामी को बेड पर लेटाया और उनकी दोनो टाँगो को फेलकर अपना लंड उनकी पुसी मे घुसाया ३ झटको में मेरा पूरा ६ इंच का लंड उनकी पुसी मे चला गया.

फिर मेरी मामी ने आआअहह आआ हह ऊऊ की आवाज़ निकलनी शुरू कर दी मैं पूरी तेज़ी से अपना लंड उनकी पुसी मे अंदर बाहर कर रहा था मेरी मामी फ़ुल मस्ती में आ चुकी थी वो भी अपनी गांड को ऊपर उठा कर मेरा साथ दे रही थी और साथ ही साथ मैं उनकी चूचियों को दबा रहा था.

फिर मैने मामी की दूसरी पोज़िशन मे चोदने का सोचा मैं लेट गया और उनको अपने लंड पर बैठाया फिर मैने उसकी पुसी मे अपना लंड डाला इस पोज़िशन में हम दोनो को मज़ा आ रहा था थोड़ी देर बाद मैने अपनी मामी को बेड पर लेटा कर ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मेरा वीर्य बाहर निकलने वाला था मेरी मामी ने कहा की वो भी झड़ने वाली है अब हम दोनो क्लाइमॅक्स मे थे इतने में मामी ने अपना पानी छोड़ दिया और थोड़ी देर बाद मैने भी अपना वीर्य छोड़ दिया.

इसके बाद हम दोनो ने फिर एक दूसरे के पार्ट्स से खेलना शुरू किया एक बार हम दोनो फिर गरम हो गया इस बार हमने काफ़ी देर तक सेक्स किया.
इस बार मैं मामी की गाड़ को डॉगी स्टाइल मे चोदा लेकिन उनकी गांड में मेरा लंड काफ़ी मुश्किल से अंडर गया मेरी मामी दर्द से काफ़ी चीखी और आआ हूऊऊओ करने लगी मैने ६ – ७ झटको मे अपना लंड उनकी गांड मे डाल दिया थोड़ी देर गांड चोदने के बाद मैने अपना लंड उसकी पुसी मैं डालकर तेज़ी से झटके मारने शुरू कर दिया और उनके होंठों को किस करने लगा इतने मे मेरा लंड झड़ गया.

मेरी मामी मेरे से चुद कर बहुत खुश थी क्योंकि उन्हें एक जवान लड़के से चुदने को जो मिला था मेरी मामी उस पूरे दिन खुश थी. Antarvasna

Antarvasna

आज मैं आपको अपनी ज़िन्दगी Antarvasna की वो दास्ताँ सुनाने जा रही हूँ जिसे अगर गलती से भी मेरे पति ने पढ़ लिया तो वो अपने ऑफिस के
हर मर्द को बारी बारी से बुलाकर मेरी मुलायम बिना झांटों वाली गुलाबी बुर को चुदवा चुदवा के भोसड़ी वाला कुआँ बनवा देगा।

मेरा मर्द बहुत बड़ा वाला चुदक्कड़ है। साला चोदता कम और चिल्लाता ज्यादा है।

खैर पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बता दूं। मेरा जन्म एक छोटे कस्बे में हुआ।

हम पांच बहनें हैं। माताजी को पांचवी के जन्म के बाद ही पिताजी ने घर से निकाल दिया। मेरी बड़ी बहन ने बहुत कोशिश की पर

पिताजी नहीं माने।

असल में पिताजी की नजर पड़ोस वाले कस्बे के किसी बनिए की विधवा बहू पर पड़ गई थी। माँ के जाते ही पिताजी उसे घर ले आये।

क्यूंकि पिताजी का रुतबा बहुत था उन दिनों तो किसी ने कोई आवाज़ नहीं उठाई।

खैर मैं इन सब दुनियादारी वाली बातों से अनजान अपने तरीके से बड़ी हो रही थी, क्यूंकि अपनी माँ की वो पांचवी बेटी मैं ही थी, तो

सारी बहने मुझे ही जिम्मेदार समझ कर मुझसे बातचीत नहीं करती थी।

पिताजी पर तो उस छम्मक छल्लो ने ऐसा जादू किया कि पिताजी दिन भर उसके कमरे में ही घुसे रहते।

इस तरह मैं बड़ी हो गई। पिताजी ने मुझे पढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। हम सभी बहनें घर पर रह कर ही पढ़ाई करती रही।
परीक्षा देने स्कूल जाना पड़ता था।

जब दसवीं बोर्ड की परीक्षा आई तो पिताजी ने मुझे पढ़ने के लिए एक मास्टर का इंतजाम कर दिया। वो मास्टर रोज मुझे दिन में दो

बजे पढाने आता था। मास्टर जी की उम्र पैंतालीस थी और वो जोर से बोल नहीं पाते थे शायद किसी बीमारी की वजह से।

तो कहानी कुछ इस तरह है।

एक रात मुझे मेरी बड़ी बहन ने बहुत मारा। मुझे लगा शायद फिर वोही माँ की याद आ रही होगी। मेरी सभी बहनें माँ को याद करती

तो मेरी ही पिटाई करती।

पर उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा। मैं चुपचाप अपने कमरे में आकर रोने लगी। तभी मुझे कुछ अजीब सी आवाज आई। मैंने इधर उधर

देखा तो लगा कि आवाज पिताजी के कमरे से आ रही है। मैं दबे पाँव उनके कमरे की तरफ जाकर खिड़की से झाँकने लगी।

अन्दर का नजारा देख कर मैं दंग रह गई। अन्दर मेरी सौतेली माँ हमारे नौकर श्याम के होंठ चूम रही थी। श्याम का एक हाथ मेरी माँ

की गांड पर था और दूसरे हाथ से वो माँ की चूची मीस रहा था।

नजारा देखकर मेरे दिमाग में करंट सा लगा। तभी मेरी नजर बिस्तर पर पड़ी। मेरा तो सर घूमने लगा।

मैंने देखा मेरे पिताजी पूरे नंगे बिस्तर पर लेट कर अपने लुल्ले को हिला रहे थे।
मुझे थोड़ा धक्का सा लगा। मैंने कभी किसी के लुल्ले को इतना बड़ा नहीं देखा था। मेरी दोनों टांगों के बीच गुदगुदी सी होने लगी।

फिर माँ ने श्याम के होठों से होंठ चिपकाये हुए उसकी धोती खींचनी शुरू कर दी। श्याम भी मेरी माँ के ब्लाउज को जोर से खींचने

लगा।

मेरे पिताजी ने कहा- और जोर से खींच! फाड़ डाल!

इतना सुनते ही श्याम ने मेरी माँ का ब्लाउज बीच से फाड़ दिया। ब्लाउज के फटते ही मेरी माँ की चुचियाँ खुल के बाहर आ गई। श्याम

भूखे कुत्ते की तरह मेरी माँ की चूचियाँ चूसने लगा।

मेरी माँ भी बहुत ही जोर जोर से सिसकरियाँ ले रही थी। पिताजी का लुल्ला किसी डंडे की तरह खड़ा था।

मेरी माँ ने इस बार श्याम की धोती एक झटके में खींच दी। धोती खुलते ही श्याम का लुल्ला भी किसी सांप की तरह फनफनाता हुआ

ऊपर नीचे होने लगा।

मेरे तो होश उड़ गए थे। मेरी माँ ने तभी श्याम के लुल्ले को अपने हाथो से पकड़ लिया और सहलाने लगी। श्याम भी माँ की चुचियों

को हौले हौले दबा रहा था। फिर माँ ने पिताजी की तरफ देखा।

पिताजी ने कहा- चूस ले रांड! आज इस लंड को चूस ले!

तब मुझे पहली बार पता चला कि बड़े वाले लुल्ले को लंड कहते हैं।

फिर माँ श्याम के लंड को अपने मुँह में ले कर आइसक्रीम की तरह उसे चुम्लाते हुए चूसने लगी।

श्याम माँ के मुँह में धक्का लगा रहा था। तभी मैंने देखा कि माँ पिताजी के लंड को अपने हाथों में भींचकर तेजी से आगे पीछे करने

लगी। पिताजी हाय हाय करने लगे।

कुछ ही देर में पिताजी के लंड से एक पिचकारी निकली और पिताजी हाँफते हुए पीछे लुढ़क गए। फिर माँ ने श्याम को अपने ऊपर लेटने

कहा। श्याम माँ के ऊपर लेट गया और जोर जोर से उछलते हुए गाली बकने लगा। माँ उफ़ हाय! चोदो जोर से… कहते हुए नीचे से

धक्के लगा रही थी।

मेरी चड्डी पूरी गीली हो चुकी थी। मैंने देखना जारी रखा। कुछ देर बाद श्याम आया आया… कहते हुए माँ के ऊपर कस के लेट गया।

माँ भी आजा मेरे राजा कहती हुई कस के श्याम से लिपट गई।

तभी मेरी बड़ी बहन की आवाज सुनकर मैं वापस अपने कमरे की ओर भागी और कमरे में आकर रजाई में घुस गई।

मेरी चड्डी पूरी भीग चुकी थी और साँसे गर्म हो गई थी। पूरे बदन में चीटियाँ चल रही थी। मैंने किसी तरह चड्डी बदली और वापस लेट

गई।

पर नींद तो आँखों से बहुत दूर थी। मेरा हाथ अपने आप मेरी बुर में चला गया।

मैं श्याम के लंड के बारे में सोचते हुए अपनी बुर को सहलाने लगी। मेरी साँसे तेज चलने लगी। मेरे बदन में एक अजीब सी गर्मी चढ़

गई थी।

मैं हाय श्याम! हाय श्याम! कहती हुई अपनी बुर में हाथ फिराती रही।
तभी मुझे लगा कि मैं हवा में उड़ रही हूँ।
मैंने अपना हाथ तेजी से अपनी बुर में चलाना चालू किया।
कुछ पलों बाद मेरी बुर से एक पतली धार बहने लगी और मुझे इतना मजा आने लगा कि मैं बता नहीं सकती।

कुछ देर तक मैं वैसे ही पड़ी रही फिर मुझे नींद आ गई। उस रात मैंने पहली बार जाना कि जवानी किसे कहते हैं और फिर मैंने जवानी

के मदमस्त जीवन में कदम रखा।

अब मेरी शादी हो चुकी है पर शादी तक पहुँचने से पहले मैंने कितने प्यासे लोगों को पानी पिलाया यह मैं आपको गुरूजी के माध्यम से

बताती रहूंगी।

क्यों गुरूजी! आप मेरी कहानियाँ सब तक पहुँचाओगे न?

आपकी अंतरा
दोस्तो कैसी लगी मेरी कहानी! Antarvasna

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