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अन्तर्वासना के सभी Antarvasna पाठकों और गुरुजी को मेरी तरफ से यानि कि पम्मी की तरफ से प्रणाम ! यह अन्तर्वासना पर मेरी तीसरी कहानी है। लोगों की चुदाई की कहानियाँ पढ़ पढ़ कर चूत गीली हो जाती है। पहली कहानी में जिस तरह मैंने बताया था कि मेरे पति एक फौजी हैं। और मेरे घर में काम करने वाले एक सीरी ने किस तरह दोपहर में मेरी प्यास बुझाई ! आज मैं वहीं से आगे शुरु करने जा रही हूँ।
मैंने बताया था कि जगह और मौका न मिलने से मैं और मेरा सीरी कितने परेशान और प्यासे थे, आने-बहाने हवेली में जाती थी लेकिन कम समय की वजह से चूमा-चाटी तक ही सीमित था, इससे ज्यादा कुछ सिर्फ इतना था कि मैंने दो बार उसका लंड खड़ा किया लेकिन मुँह में ही डालकर उसकी मुठ मारी और फिर कमरे में जा उसकी मुठ मारने वाले सीन को याद कर उंगली डालती और कभी मूली घुसा कर शांत होती।
तभी एक दिन उसने जुगाड़ लगाया और मुझे ट्यूबवेल पर दोपहर में बुलाया। बहुत गर्मी थी लेकिन चूत की प्यास ने मुझे खींच लिया। उस दिन जेठजी किसी काम से शहर गए हुए थे। उनके इलावा ससुर जी वहां जाते लेकिन उस दिन वो भी शहर से बाहर थे। सीरी अकेला था, मैं चली गई उसे मिलने और हम दोनों अकेले में मिलते ही पागल हो गए और एक दूसरे में समा गए। देखते ही देखते उसने मुझे वहीं निर्वस्त्र करके और खुद को निर्वस्त्र करके मुझ पर टूट पड़ा। कितने दिन के बाद दो प्यासे आशिक मिले, मैंने जी भर कर उसका लंड चूसा और उसने मेरे मम्मे दबा कर लाल कर दिए। दांतों के निशाँ साफ़ हवस की कहानी बता रहे थे। जैसे ही असली चीज़ घुसी मेरी आंखें खुद ही बंद होने लगी मेरी चूत में लंड डाल उसका भी वही हाल था।
हम चुदाई में इतने खोये हुए थे दीन-दुनिया से परे, यही सोचा कि इतनी गर्मी में वहाँ कौन आयेगा। चोदते चोदते उसने मुझे उठाया और ट्यूब वेल के आगे बने हुए चुबच्चे पर ले गया। (जिसको शहर में लोग बाथटब कहते हैं) नंगे जिस्म पर जब पानी डला तो साथ में एक मर्द की मजबूत बाँहों का साथ, उसने मुझे किनारे पर बिठा अपना लंड घुसा दिया और तूफ़ान आया जब दो प्यासे जिस्म शांत हुए तो मेरी नज़र जेठ जी पर पड़ी। मैंने पानी में छलांग लगा दी, पूरी नंगी थी मैं, करती भी क्या !
यह सब क्या हो रहा था? मादरचोद ! नमक हराम ! इतने सालों से तू यहाँ रह रहा है और अब यह सब कर रहा है?
इतने में मैं निकल कर ट्यूबवेल के कमरे में घुस गई, कपड़े पहने और वहाँ से निकल आई।
जेठ जी मुझे घूर रहे थे और उनकी इस घूर में हवस के साथ साथ प्यास थी। मैं थोड़ा डर गई लेकिन फिर ठीक सी हुई, उनकी आंखें पड़ने के बाद मुस्कुरा के वापस घर आई। घर पर लॉक लगा देख मैंने अपने पर्स से दूसरी चाभी निकाली और अदंर आई।
प्यास तो बुझ चुकी थी मगर मन बेचैन था, जेठ जी का वासना भरा चेहरा सामने आते ही शर्मा जाती। अब कुछ न कुछ तो होगा यह तो मुझे मालूम था।
तभी दरवाजे की घण्टी बजी, मैंने दरवाजा खोला- सामने जेठ जी को देख बिना और देखे अपने कमरे में चली आई।
वो माँ को आवाज़ दे रहे थे, मैंने अदंर से ही कह दिया- वो घर में नहीं हैं !
वो अपने कमरे में चले गए, मैं बिस्तर पर लेट गई और अपने कमरे का टी.वी ऑन कर बैठ गई। तभी जेठ जी मेरे कमरे में आये। मुझे हैरानी नहीं हुई, मैं कई बार अपने ही ख्यालों में उनसे चुदाई करवा चुकी थी। मैं सीधी होकर बैठ गई, चुन्नी का पल्लू करके !
तभी जेठ जी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
मैं चुप थी !
वहाँ क्या करवा रही थी? फिर बोले- तेरा भी क्या कसूर है रानी ! तुम हो ही आग !
वो अब बिस्तर पर चढ़ आये, मेरे पास बैठ मेरा चेहरा अपनी ओर घुमाया, मैं शरमा गई, अपने होंठ मेरे होंठों पर रखते हुए मेरी जांघों पर अपनी टांग चढ़ा ली, मेरे होंठ चूसने लगे और एक हाथ मेरी कमर में डाल अपने साथ चिपका लिया, पाँव के अंगूठे से मेरी सलवार को सरका मेरी गोरी टांगों का स्पर्श पाने लगे, हाथ से मेरी चुची दबा दी।
मैं भी आपा खोने लगी और खुद ही उनसे लिपट गई- क्या करती जेठ जी? आपका भाई तो फौजी है, इसमें मेरा क्या कसूर? मैं जवान हूँ ! भरी जवानी है, उसका कोई कसूर नहीं था, मैं खुद उसके पास गई थी।
बोले- मैं जानता हूँ रानी, मुझ से कह देती, मैं तुझे ठंडी कर देता !
उन्होंने मेरा कमीज़ उतार दिया फिर सलवार खोल दी। मैंने भी उनका कुरता उतार दिया और उनकी चौड़ी छाती के घने बालों पर हाथ फेरने लगी। पजामा उन्होंने खुद उतार दिया, खड़ा लंड उनका कच्छा फाड़ने को उछल रहा था। जेठ जी मेरी ब्रा की हुक खोल मेरे मम्मे मसलने लगे- क्या जवानी है तेरे पर ! बहुत देर से तुझे चोदना चाहता था, लेकिन कह नहीं पाता था !
मैं खुद आपकी दीवानी हूँ, मेरा भी आप जैसा हाल था !
जेठ जी मेरी कच्छी को उतारते ही बोले- लगता है आज ही सफाई की है ?
मैं शरमा सी गई, मैंने भी उनके कच्छे को उतार उनका लंड हाथ में पकड़ लिया- जेठ जी, इतना ज़बरदस्त लंड है आपका तो ?
मैंने लण्ड को जड़ तक सहलाया और मुँह में ले लिया।
वाह मेरी जान ! इस सुख से मैं वंचित रहा हूँ, आज जी भर कर चुसवाऊंगा अपना लंड !
फिकर मत करो, मैं खुद लंड चूसने की शौकीन हूँ ! मैंने कुतिया की तरह जुबान निकाल कर चाटा, वो आहें भर-भर मेरा मम्मा दबा रहे थे। उनहत्तर की हालत में लाते हुए मैं अपनी चूत उनके हाथों के पास ले आई वो मेरी चूत से खेल रहे थे दाने को मसल देते तो मैं सिकुड़ सी जाती।
तभी मेरी नज़र खिड़की पर गई, मेरा सीरी सब देख रहा था।
अब फाड़ दो मेरी ! जेठ जी ! रहा नहीं जा रहा अब !मैंने अपनी टाँगें खोल दी और उनको बीच में बिठा लिया और उनका तकड़ा लंड अपनी चूत के अदंर-बाहर करवाने लगी। एक एक रगड़ मेरी आंखें बंद कर देती। चुदवाते हुए मेरी नज़र फिर खिड़की पर गई। मैंने इशारा किया।
बोला- वाह चौधरी जी वाह ! मुझे कितने पाठ पढ़ा रहे थे ! और आते ही वही पाठ भूल कर चढ़ गए इस पर?
जेठ बोले- साले, कुछ तो कहना ही था ना ! तू साले ! हर माल एक साथ बांटते थे, इसको अकेला संभाल बैठा था? वो भी कयामत?
यह सुन मैं हंसने लगी और बोली- तू मुझे चुदवाने दे !
जेठ जी लगे झटके देने !
मैं भी आता हूँ !
मैं जेठ जी के साथ सब भूल मजा लेने लगी।
क्या स्टाइल था उनका चुदाई करने का ! मैं तो उनकी दीवानी होती जा रही थी, सीधा लेटते हुए मुझे अपने लंड पर बिठा उछालने लगे गेंद की तरह ! मैं उनके लंड पर ठप्पे खा रही थी मेरे हिलते मम्मो को देख वो भी जोश के साथ नीचे से मुझे उछालते।
इतने में वो भी खिड़की खोल घुस आया, तब जेठ जी मुझे घोड़ी बना कर चोद रहे थे, वो मेरे सामने आया और लंड निकाला, मुँह में दे दिया। वाह ! एक चूत में ! एक मुँह में ! दो-दो एक साथ !
जेठ जी तूफ़ान की तरह चोदने लगे। उतनी ही तेज़ मैं उसका लुल्ला चूस रही थी।
तभी जेठ जी ने कहा- गांड में डालने वाला हूँ !
मेरे ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड क्रीम उठाई और अपने लंड पर लगाई और कुछ मेरी गांड पर !
जेठ जी सीधे लेट गए, मैंने उनके लण्ड पर अपनी ग़ाण्ड टिका कर बैठना शुरु किया। कुछ पल में मैं उनका पूरा लंड अंदर ले गई। वो भी मेरे मुँह में लगा हुआ था। फिर जेठ जी ने मुझे कहा- मेरी तरफ पीठ करके अदंर ले, ताकि यह भी तेरी चूत में घुसा दे !
मैंने कहा- फट जायेगी !
बोले- हम दोनों ने कई बार एक साथ दोनों छेदों में डाले हुए हैं ! कोई काम वाली हमसे नहीं बची !
तभी सीरी ने आगे से घुसा दिया और दोनों पागलों की तरह मुझे रौंदने लगे।
क्या अलग सा सुख था यह !
जैसे जेठ जी तेज़ हुए, सीरी ने निकाल लिया। जेठ जी औरत को अपने नीचे डाल कर झाड़ते थे, सारा माल मेरी चूत में भर दिया बाकी मुझ से चटवा कर साफ़ करवा लिया। सीरी ने अब मेरी गांड में घुसा दिया और दन-दना-दन चोदने लगा और जल्दी ही सारा माल मेरी कसी हुई गांड में उगल दिया। दोनों मेरे ऊपर लुढ़क गए। मैं नंगी दो मर्दों के सोये लंड पकड़ मजे ले रही थी।
तभी दरवाज़े की घण्टी बजी, हम तीनों की फट गई।
जल्दी से उठकर कपड़े पहने, सीरी किवाड़ से भाग गया, जेठ जी कपड़े उठा अपने कमरे में भाग गए।
मैंने दरवाज़ा खोला- माँ थीं !
सो रही थी क्या बहू?
हांजी, माँ जी ! आंख लग गई थी !
उस रात दोनों ने दारू पी मुझे आधी रात को हवेली में चोदा। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा, तभी मेरी छोटी बहन की शादी तय हो गई और मुझे वहां जाना पड़ रहा था, दिल मेरा भी नहीं था, सासू माँ ने मुझे कहा- छोटी दुल्हन ! चली जा ! बहन की शादी है !
मायके में उनके लंड याद आ रहे थे। एक रोज़ जेठ जी का फ़ोन आया कि वो काम से शहर आये हुए हैं ! मेरे मायके घर के करीब ! बोले- यहाँ मेरे दोस्त का घर है, उसकी बीवी कुछ दिन के लिए मायके गई हुई है, दोपहर में मिलने आ जा !
उसका घर सच में पास था, मैंने कहा- दोपहर में मुश्किल है, रात को बना लो प्रोग्राम !
मैंने इधर माँ से कहा- मुझे एक दिन के लिए सासू माँ के पास जाना है ! उनकी तबियत ठीक नहीं !
माँ बोली- हाँ ! ज़रूर जा ! वो दोनों अकेले होंगे !
मेरे छोटे भाई ने मुझे बस स्टैंड छोड़ दिया और वहीं से जेठ जी के दोस्त अपनी कार पर मुझे अपने घर ले चला, बोला- बहुत सुंदर हो रानी ! उसने मेरी जांघें सहला दी।
वो बहुत हैण्डसम था उसने जानबूझ कर गाड़ी खाली कालोनी की तरफ लम्बे रास्ते डाल ली। जैसे ही उसका हाथ चूत तक गया, मैंने उसका लंड पकड़ लिया।
उसके बाद क्या हुआ, वो अगली बार लिखूंगी ! मैं बहुत चुदासी औरत हूँ, रंडी कह लो, सब चलेगा ! लेकिन मर्द के बिना मैं नहीं रह पाती ! वो भी पराये मर्दों के बिना !!!!!
जवाब लिखो ! Antarvasna
सबसे पहले गुरु जी को मेरा Antarvasna Sex Stories कोटि-कोटि प्रणाम ! गुरु जी का क्या कहना ? क्या वेबसाइट लॉन्च की है,जिसमे लोगों की चुदाई के किस्से पढ़ के चूत गीली हुए बिना नहीं रहती !
मेरा नाम रेखा (काल्पनिक) है ! दोस्तो, मैं २६ बरस की एक जवान औरत हूँ ! वैसे तो मैंने एम. कॉम तक पढ़ाई की हुई है लेकिन मेरे पति देव नहीं चाहते कि मैं जॉब करूँ ! मेरी सुन्दरता को लेकर उनके दिमाग में मेरे प्रति गंदे ख्याल आते हैं ! शादी को तीन साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ ! हाँ, इस वक़्त मैं पेट से हूँ ! शादी से पहले मेरी गिनती चालू गर्ल्स में रही है !
मेरी पहली चुदाई 18 साल की उम्र में हुई थी, जब मैं 12वीं की फाइनल पेपर दे कर अपने नानके गई हुई थी ! वहां मैं एक लड़के से इश्क लड़ा बैठी और उसने मेरा काम तमाम कर दिया ! एक महीने में कई बार चुदी ! फिर तो बस मुझे लड़कों का चस्का लग गया और मेरे न जाने कितने लड़कों से एफेअर चले ! मैंने उनमें से कुछ से शारीरिक सम्बन्ध स्थापित किये ! मेरे फिसलते क़दमों को मेरी माँ ने भांप लिया और एक रिश्ता ढूँढ मेरी भी शादी करवा दी !
पति का अच्छा बिज़नस है लेकिन उनमें वैसी सेक्स पॉवर नहीं है जैसी मुझे चाहिए थी ! कई बार बिना पानी की मछली की तरह बिस्तर पर तड़फती ! पति हफ्ते में सिर्फ तीन बार सेक्स करते जिससे मेरी प्यास बढ़ गई थी ! मैंने कहा कि मुझे जॉब मिल रही है लेकिन मेरे खसम ने ऐसा नहीं होने दिया ! उसको अपनी कमजोरी का डर था ! वो यह भी जानता था कि उसकी बीवी में कितनी आग है !
मेरे जेठ के बड़े लड़के ने बारहवीं कक्षा में कामर्स रखा लेकिन गाँव में कोई टयूशन नहीं पढ़ाता !
जेठानी जी ने मुझे कहा,”छोटी बहू, प्लीज़ इसको एक दो घंटे पढ़ा दिया कर !”
मैंने कहा,”ठीक है !”
अगले ही दिन समीर मेरे पास पढ़ने आने लगा ! उसका ध्यान मेरे मस्त मम्मों पर रहता ! गहरे गले के सूट से तो मेरा यौवन डुल-डुल जाता ! कई बार नोटिस किया कि उसके लौड़े वाला भाग फूला फूला सा रहता !
एक रोज़ सभी रात की शादी पर गए थे ! यहाँ पर भी मेरे पति को मैं सुरक्षित नहीं लगी! मुझसे बोला,”उसके दोस्त की शादी ही है ! “
जब मैंने कहा कि बाकी सब क्यूँ जा रहे हैं ?
तो बोले कि बचपन से उनका परिवार माँ बापू को जानते हैं ! मुझे कहा गया कि तुम रुको और समीर रुक जायेगा !
समीर भी रुक रहा था इसलिए पहले से सेक्सी कपड़े पहन रखे थे ! नाईटी में से मेरा जिस्म साफ़ दिखता ! पैंटी-ब्रा सब कुछ! आज समीर ने मुझे देखा तो देखता रह गया ! मैंने उसको बिठाया और बोली,” चलो पढ़ाई करें !”
“जी ,चाची ………! ”
एक बहुत मुश्किल गणित का सवाल था ! मैंने कहा,” इधर मेरे पास ही बैठ जाओ !”
मैंने उसे अपने पास बिठा लिया और मैं उसे गणित के सवाल का फार्मूला बताने लगी ! उसका ध्यान मेरी छातियों पर था ! मैंने उसकी जांघ पे हाथ फेरते हुए कहा,”अब इन्हें देखना छोड़ो !”
मेरा हाथ फिसलता हुआ उसके लौड़े की तरफ जाने लगा ! मैंने पहल इसलिए की क्योंकि वो डर रहा था ! हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था ! मैं उसके लौडे की तरफ अपना हाथ ले जाकर उसको मसलने लगी ! उसने भी सारा डर फेंक कर मुझे बाँहों में उठाया और सीधा बिस्तर पर ले गया ! देखते ही देखते उसने मुझे एक दम नंगी कर दिया और मेरी जवानी से खेलने लगा !
मैंने कहा,” वाह ! मेरे मुन्ना !!”
मैंने भी अब उसका लौड़ा निकाल लिया ! वाह ! क्या लौड़ा था !!!!!! छोटी उम्र से यह हाल था तो आगे क्या होगा ? मैंने भी उसका लौड़ा मुँह में ले लिया और खूब चूसने लगी ! वो आहें भर भर के कह रहा था,” मेरी रखैल चुदासी चाची, आज तुझे मसल दूंगा !”
“वाह ! पट्ठे ! वाह ! मसल दे मुझे ! रौंद दे मुझे ! फाड़ दे मेरी चूत ! मत छोड़ना इसको !”
“अभी ले ,चाची ! कमीनी, कितना दिखा दिखा के तड़फाया मुझे !”
वो बखूबी खेल रहा था वॉलीबाल के साइज़ के मेरे मम्मे के साथ !
मैंने कहा,” बहन चोद ! मार मेरी !”
“अभी ले, रंडी !” कहते हुए उसने टांगें खोल कर अपना लम्बा मोटा लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया !
“वाह ! और तेज़ ………और तेज़…… और तेज़ मार ……..! ” उसका जोश बढाने के लिए मैं अप-शब्द बोल रही थी !
“मादरचोद, बहनचोद ! तेरे चाचा से मेरी जवानी नहीं संभाली जाती ! मुझे अपनी बना ले !”
मैं झड़ने के करीब थी इस लिए और जोर-जोर से चूतड़ उठा के उसका लौड़ा ले रही थी !
वो बोला,”चाची, मैं झड़ने वाला हूँ !”
“अन्दर डाल दे समीर ! अपना गरम माल ! डाल दो अपना बीज मेरी कोख में !”
देखते ही देखते उसने सारा माल मेरी चूत में भर दिया और लौड़ा निकाल कर मुंह में डाल दिया ! मैंने उसको चाट-चाट कर साफ़ कर दिया !
“वाह ! मेरे राजा ! ” मैंने कहा ! उस रात हम नंगे बिस्तर पे रहे ! तीन बार उसने मुझे अलग अलग मुद्रा में ठोका !
उस रात के बाद चुदने के लिए हमें जगह नहीं मिल रही थी ! उसने मुझे कहा,” चाची, मेरा एक दोस्त अकेला रहता है ! उसका परिवार अमेरिका में है ! वहीं चला करो ! ” मैंने हामी भर दी और उसके साथ वहां गई। ?????????????????
इंतज़ार का फल मीठा होवे …………….!
कहानी कैसी लगी ? बताओ ताकि आगे लिख सकूँ ! बाय ………………………… Antarvasna Sex Stories
मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं पिछले दो साल से दिल्ली में जॉब कर रही हूँ.
मेरे पिताजी फौज में थे और जब मैं अबोध थी, तभी कश्मीर में वो शहीद हो गए थे.
उसके बाद से मुझे मेरी मां ने ही पाला.
मैं एक अच्छे घर से हूं लेकिन मैंने काफी छोटी उम्र से ही अपनी मां की चुदाई देखी है इसलिए चुदाई के नाम से मेरा दिल मचल उठता है.
जैसी चुदक्कड़ मेरी मां है, आज मैं भी वैसी ही चुदक्कड़ हूं.
मैं आज आपको अपने द्वारा देखी पहली सच्ची घटना बता रही हूं.
इसके बाद मैं खुद के साथ घटी घटनाओं को भी लेकर आऊंगी, अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मुझे Xxx डॉक्टर सेक्स कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दीजिएगा.
मैं बिल्कुल नयी हूं, इसलिए लिखने में अगर कोई भूल हो जाए तो उसे नजरअंदाज कर दीजिएगा.
यह बात काफी पुरानी है लेकिन मुझे यह बात आज तक बिल्कुल सही सही याद है.
मैं और मेरी मां, जिनका नाम विमला है.
हम हमारे नये घर में रहते थे. हमारा घर नया था और शहर से थोड़ा बाहर के इलाके में बना था.
हमारे घर के आस-पास उस वक्त केवल 3 घर और थे.
उनमें से एक घर में कोई नहीं रहता था और एक में एक अंकल और आंटी रहते थे.
एक अन्य घर में मेरी सहेली मेघा और उसके पापा, जो पेशे से डॉक्टर थे, वो रहते थे.
उसकी मम्मी नहीं थीं.
मेघा मेरे साथ ही स्कूल में पढ़ती थी और ज्यादा समय मेरे पास ही रहती थी.
मेघा के पापा का नाम सुरेन्द्र था.
वो जब भी अपने क्लिनिक जाते तो मेघा को मेरे घर पर ही छोड़ जाते थे.
सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन उस दिन से मेरी जिंदगी एक अलग मोड़ लेने वाली थी.
मेरी मां की तबियत कुछ दिनों से खराब चल रही थी तो सुरेन्द्र अंकल ने उन्हें अपने क्लिनिक पर चेकअप के लिए बुलाया.
मां ने मुझे कहा- मैं थोड़ी देर में आ जाऊंगी, मेरी तबियत ठीक नहीं है. मैं दवाई लेकर आ जाऊंगी.
यह सुनकर कि वो शहर तरफ जाने वाली हैं, मैं भी उनसे साथ चलने को कहने लगी.
पहले तो मां ने मना कर दिया मगर मैं जिद करने लगी तो बाद में वो मान गईं और मुझे और मेघा को अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर ले गईं.
हम लोग दोपहर के करीब दो बजे सुरेन्द्र अंकल के क्लिनिक पर पहुंचे.
वहां केवल एक मरीज था तो अंकल ने हमें बाहर बैठने को कहा और रेशमा आंटी, जो अंकल की सहयोगी थीं, उनको क्लिनिक बंद करके घर जाने को कहा.
वो क्लिनिक बंद करके पांच मिनट बाद चली गईं.
कुछ देर बाद वो मरीज भी वहां से चला गया और अंकल ने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर दिया.
उसके बाद वो मेरे और मेघा के लिए कुछ चिप्स और बिस्किट लाने चले गए.
थोड़ी देर बाद अंकल खाने की ढेर सारी चीजें लेकर आए और हमें खाने को दे दीं.
फिर मम्मी बोलीं- बेटा, मैं चेकअप करवा कर आती हूं, आप लोग यहीं बैठो.
इतना कहकर मम्मी वहां लगे टीवी में एक कार्टून चैनल लगाकर अन्दर चली गईं.
मैं और मेघा खाने और कार्टून देखने में व्यस्त हो गए.
धीरे धीरे काफी समय बीत गया और मेघा टीवी देखते हुए सो गई.
मैंने कुछ देर टीवी देखा, फिर सोचा कि बहुत देर हो गई, मम्मी अभी तक नहीं निकलीं, एक बार जाकर बुलाती हूं.
यह सोचकर मैं अन्दर चेम्बर के तरफ जाने लगी.
जैसे ही मैं गेट के पास पहुंची, तो मैंने जो देखा, वो मुझे आज तक याद है.
मैंने देखा कि मेरी मां की सलवार और पैंटी नीचे जमीन पर गिरी हुई थी और मेरी मां अपनी टांगें फैलाए कुर्सी पर बैठी हुई थीं.
उनकी चूत में अंकल अपनी उंगली पेल रहे थे.
उस वक्त मैं बहुत छोटी थी. ये सब मेरे समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि चल क्या रहा था.
मैंने वहीं से आवाज लगाई- मम्मी क्या हुआ आपको?
मेरी आवाज सुनकर मेरी मां और अंकल दोनों अकबका गए.
मां ने मेरी तरफ देखा और घबराहट में बोलीं- कुछ नहीं बेटा, अंकल मेरा चेकअप कर रहे हैं और इलाज करेंगे, आप बाहर जाकर बैठो.
मां के इतना कहते ही अंकल झट से उठकर आए और मुझे केबिन से बाहर ले आए.
वहां अंकल ने मुझे कुछ चॉकलेट आदि दिए और समझाने लगे- बेटा, मैं मम्मी का इलाज कर रहा हूँ, इसमें थोड़ा टाइम लगेगा. तब तक आप कार्टून देखो और ये चॉकलेट खाओ.
इतना कहकर अंकल ने मुझे टीवी के सामने बिठा दिया और खुद वापस अन्दर चले गए.
उन्होंने केबिन का दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया.
मैं दुबारा कार्टून देखने में व्यस्त हो गई. मैं इस बात से बिल्कुल अनजान थी कि अन्दर अंकल मेरी मां चोदने वाले हैं.
कुछ देर तक सब कुछ सामान्य रूप से चलता रहा, मगर इधर मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई थी.
मैंने सोचा कि जरा एक बार जाकर देखूं कि मां का इलाज हुआ या नहीं.
जब मैं वहां गई, तो दरवाजा बंद था.
तब मैंने बाहर से आवाज भी लगाई मगर अन्दर से कोई जवाब नहीं आया.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.
तभी मैंने सोचा कि एक बार खिड़की से देखती हूँ कि अन्दर क्या चल रहा है.
यह सोचकर मैं खिड़की के पास गई और देखने कि कोशिश की, मगर खिड़की ऊंची थी.
तब मैंने इधर-उधर देखा तो मुझे मोटी मोटी किताबें एक शेल्फ में रखी दिखाई दीं.
मैंने उनमें से कुछ किताबों को निकालकर एक के ऊपर एक करके सीढ़ी जैसी बनाई और खिड़की से अन्दर देखने लगी.
इस बार का नजारा तो पहले से काफी अलग था. वहां पर मेरी मां पेशेंट वाले बेड बिल्कुल ही नंगी लेटी थीं और अंकल जोर जोर से मेरी मां को चोद रहे थे.
यह सब मेरे सामने पहली बार हो रहा था मगर पता नहीं क्यों, मुझे यह पसंद आ रहा था.
मेरी मां का गोरा जिस्म किसी परी के जैसे मखमली था.
अंकल काफी जोश के साथ मेरी मां को चोदे जा रहे थे.
कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उन्होंने मेरी मां को कस कर पकड़ लिया और उनके जिस्म पर लेट गए.
मां ने अंकल को अपने ऊपर से हटाया और उठ कर खड़ी हो गईं.
अब वो अपने कपड़े पहनने लगीं.
यह देख मैं भी वहां से नीचे उतर गई और सारी किताबों को उनकी जगह पर रखने लगी.
दो किताबें अभी भी मेरे हाथ में ही थीं. तभी अचानक से पीछे से मेरी मां की आवाज आई- क्या कर रही हो बेटा?
उनकी आवाज सुनकर मैं घबराहट में बोली- कुछ नहीं मां, अंकल की बुक देख रही थी. ये किताब भी न कितनी मोटी है, मुझसे गिर गई थी. वापस रख रही हूँ.
मां ने कहा- तुम छोड़ दो, अंकल रख लेंगे.
मैं दौड़कर मां के पास गई और बोली- अब घर चलो.
उनको देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वो अभी अभी चुद कर आ रही थीं.
थोड़ी देर बाद अंकल भी बाहर निकले और बोले- ऐसे ही इलाज कराओगी, तो जल्दी ठीक हो जाओगी.
मैं बोल पड़ी- हां अंकल, आप मम्मी का इलाज अच्छे से कीजिए.
यह सुनकर मां मुस्कुराती हुई बोलीं- आज रात खाना आप हमारे घर पर ही खा लीजिए डॉक्टर साहब!
यह सुनकर अंकल मुस्कुराते हुए बोले- मैं तो मीट खाऊंगा, वो भी लाल लाल!
यह सुनकर मां हंसती हुई बोलीं- आपको जो खाने का मन हो, खा सकते हैं. कोई रोक नहीं है.
यह कह कर मां ने मुझसे चलने का कहा.
मैं और मां वहां से निकल गए.
मेघा वहीं रूक गई.
उस दिन मां बहुत मुस्कुरा रही थीं. मुस्कुराएं भी क्यों न, आखिर चुद कर जो आई थीं.
इसके बाद रास्ते में मुझे बहुत सारी चीजें बिना बोले ही मां ने दिला दीं.
रात के लिए मीट लेकर हम लोग वापस घर आ गए.
उनको भनक तक नहीं लगी थी कि मैंने उनकी चुदाई देख ली थी.
मैं भी चुप रही क्योंकि मेरी समझ में भी उस वक्त कुछ खास नहीं आया था.
रात को ठीक आठ बजे अंकल और मेघा हमारे घर आ गए.
मैं मेघा को लेकर अपने कमरे में चली गई.
उस वक्त मेरी मां बाथरूम में नहा रही थीं.
मैंने मां को आवाज दी कि मां, डॉक्टर अंकल और मेघा आए हैं.
कुछ देर बाद मां ने मुझे और मेघा दोनों को आवाज लगायी कि तुम दोनों बहनें खाना खाने नीचे आ जाओ.
यह सुनकर हम दोनों नीचे हॉल में आ गए.
तब मैंने देखा कि मां किसी परी की तरह सफेद ड्रेस में सजकर तैयार थीं.
उनके पूरे बदन से परफ्यूम की अच्छी खुशबू आ रही थी.
अंकल ने मां की तारीफ की और कहा- आप बहुत सुंदर दिख रही हैं.
हमने साथ बैठकर खाना खाया.
खाने के बाद मैं मेघा के साथ अपने कमरे में, जो ऊपर की तरफ था, वहां चली गयी और उसे अपने खिलौनों से खेलने देने लगी.
कुछ देर खेलते खेलते हम दोनों की आंख लग गई.
बहुत रात को मुझे प्यास लगी तो मेरी नींद खुली.
मैंने देखा कि मेघा मेरे बाजू में सोयी हुई है. मैंने सोचा कि नीचे किचन में जाकर पानी पी लेती हूँ.
यह सोचकर मैं धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरकर हॉल में आई और वहां पानी पिया.
मैं जब पानी पी रही थी, तब मैंने देखा कि मेरी मम्मी के कमरे की लाईट अभी तक जल रही थी, जबकि मम्मी लाइट बंद करके सोती थीं.
तो मैं लाइट्स बंद करने जाने लगी तो वहां मैंने बुदबुदाने की आवाज सुनी.
वो आवाज मेरी मां की थी.
मैंने पर्दे के पीछे से झांक कर देखा, तो मेरे सामने बिल्कुल दोपहर वाला नजारा था.
मां और डॉक्टर अंकल दोनों बेड पर नंगे लेटे हुए थे और मां डॉक्टर अंकल से कह रही थीं कि दोनों बच्चियां जाग जाएं, इससे पहले आप मुझे जी भर के चोद दो.
इतना कहकर मां डॉक्टर अंकल को चूमने लगीं.
वो दिसम्बर का ठंडा महीना था. कमरे में गर्म वाला ब्लोअर चल रहा था, जिससे अन्दर का वातावरण अनुकूल था.
चुदाई की कह कर मेरी मां ने अपनी गोरी टांगों को फैला दिया और उनकी एकदम गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने आ गई थी.
अंकल मां के ऊपर चढ़े और बोले- साली छिनाल, तीन बार चुदवाकर भी मन नहीं भरा तेरा?
इस पर मेरी मां वासना भरे स्वर में बोलीं- मैं बहुत प्यासी हूं … मेरी इस मादरचोद चूत को एक बार और रगड़कर चोद दो.
इतना सुनते ही अंकल ने मेरी मां को अपनी ओर खींचा और दोनों टांगों को कस कर फैला कर चोदना शुरू कर दिया.
मेरी मां के मुँह से निकलने लगा- आ आह आह … और चोदो मेरी जान … ऐसे ही … आह ये चूत तुम्हारी ही है.
उनकी मादक आवाजें निकलने लगीं.
अंकल- अब तुम्हारी जवानी लंड के लिए नहीं तरसेगी विमला रानी.
ये कहकर अंकल मेरी मां को धकापेल चोदे जा रहे थे.
पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा था.
ऐसे ही काफी देर तक और चोदने के बाद अंकल ने मेरी मां की खूबसूरत चूत में अपना सारा रस डाल दिया.
मेरी मां और अंकल दोनों काफी हांफ रहे थे. दोनों एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे.
अंकल मेरी मां से बोले- तुम्हारी चूत बेहद खूबसूरत है विमला, मैं तो इसका दीवाना हो गया. जिंदगी में मैंने पहले कभी इतनी प्यारी चूत नहीं चोदी थी.
यह सुनकर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलने लगीं- क्या आप भी डॉक्टर साहब … मुझे तो शर्म आ रही है.
इस पर शायद अंकल भड़क गए और कड़क आवाज़ में मेरी मां को देखते हुए बोले- साली छिनाल, चार बार चुदवाने में तुझे शर्म नहीं आई … और अब तुझे शर्म आ रही है. साली आज तुझे इतना चोदूंगा कि तू शर्माना भूल जाएगी.
मेरी मां घड़ी की ओर देखती हुई बोलीं- डॉक्टर साहब, साढ़े तीन बजने वाले हैं. बच्चियां जाग गईं, तो दिक्कत हो जाएगी. आप कल या परसों फिर चोद लेना, मैं आज बहुत थक गई हूं. और वैसे भी कौन सा मैं कहीं भागी जा रही हूं.
इस पर अंकल बोले- तुम बच्चियों की चिंता मत करो. सुबह 5 बजने से पहले मैं तुम्हें चोद कर निकल जाऊंगा. तुम चुदने के लिए ही बनी हो, अपनी चूत के साथ अन्याय मत करो. इसे जी भरके चुद लेने दो.
यह बोलते ही अंकल मेरी मां के ऊपर फिर से चढ़ गए.
अब वो अपने लंड को धीरे से मेरी मां की चूत में डालने लगे.
मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- बड़े मादरचोद हो आप डॉक्टर साहब!
अंकल बोले- काश तुम मेरी बीवी होती.
मेरी मां उनको चूमते हुए बोलीं- अभी तो आपकी ही बांहों में हूँ, तो बीवी समझ कर ही मजा लीजिए.
यह कहकर दोनों एक दूसरे को चूमने लगे और Xxx डॉक्टर अंकल ने भी चुदाई तेज कर दी.
मेरी मां फिर से कराहने लगीं- ओह डॉक्टर साहब, बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही चोदो डॉक्टर साहब.
ये बातें सुनकर अंकल ने रफ्तार और बढ़ा दी … और वो मेरी मां को बहुत जोर जोर से चोदने लगे.
मुझे ये सब देखने में बहुत मजा आ रहा था.
अंकल बोलने लगे- कैसा लग रहा है?
मां बोलीं- बस ऐसे ही चोदते रहो डॉक्टर साहब.
दोनों चुदाई में इतने मगन थे कि उन्हें कोई दीन दुनिया का कोई होश ही नहीं था.
जल्द ही फिर से पूरा कमरा फच्च फच्च की आवाजों से गूंज उठा.
चोदते चोदते अंकल कभी मां के चूचों को दबाते, तो कभी उन्हें अपने मुँह में भरकर चाटने लगते.
मां भी उनका पूरा साथ दे रही थीं और किसी रंडी की तरह धकापेल लंड खाए जा रही थीं.
ऐसे ही बहुत देर तक ताबड़तोड़ चुदाई चलती रही.
तभी अंकल ने रफ्तार बहुत तेज कर दी और एक झटके में सारा वीर्य मेरी मां की चूत में टपका दिया.
अब वो निढाल होकर मेरी मां के ऊपर ही लेट गए और मां ने भी उन्हें कसकर जकड़ लिया.
कुछ देर तक दोनों एक दूसरे से चिपके रहे.
फिर अंकल ने धीरे से अपना लंड मेरी मां की चूत से बाहर निकाला और बोलने लगे- विमला, तुम्हें चोदने में बहुत मजा आया.
मां ने समय देखा और बोलीं- चोदते चोदते एक घंटा से ज्यादा हो गया. बच्चियां जाग जाएंगी, अब आपको जाना चाहिए.
अंकल बोले- हां विमला, अब मैं निकलता हूं. लेकिन वादा करो कि दुबारा फिर चोदने दोगी.
इस पर मेरी मां मुस्कुराती हुई बोलीं- मैं कहां भागी जा रही हूं. आपका जब मन करे, तब आप मुझे चोद सकते हैं. मेरी चूत का ख्याल तो अब आपको ही रखना है.
अंकल ने कहा- तुम फिक्र मत करो, तुमसे ज्यादा ख्याल मैं तुम्हारी चूत का रखूंगा.
यह कहकर वो उठ कर अपने कपड़े पहनने लगे.
कपड़े पहनकर वो मां को किस करके बोले- विमला, अब तुम भी अपने कपड़े पहन लो.
मेरी मां बोलीं- मेरा अभी मन नहीं है. बाद में पहन लूँगी.
अंकल बोले- तुम समय निकालकर क्लिनिक आ जाना, मैं तुम्हारी नसबंदी करवा दूँगा. उसके बाद तुम्हें कोई दिक्कत नहीं होगी और उसके बाद हर शनिवार रात मैं तुम्हें ऐसे ही चोदूंगा.
मां ने हां कहकर सिर हिलाया और कंबल के अन्दर नंगी ही लेट गईं.
मैं भागकर मेघा के पास आ गई और सोने का नाटक करने लगी.
मुझे अभी तक समझ नहीं आया था कि आखिर अंकल ने मेरी मां के साथ क्या किया.
थोड़ी देर बाद अंकल मेघा को लेने आए.
जैसे ही वे हमारे पास आए, तो उनके शरीर से वही परफ्यूम की खुशबू आ रही थी जो मेरी मां ने शाम को अपने जिस्म में लगाई थी.
वो मुझे बिना जगाए मेघा को गोद में उठाकर चले गए.
जब वो दोनों चले गए तो मैं भी नीचे उतरकर मां के कमरे की तरफ चली गई.
अब वहां कोई लाइट नहीं जल रही थी और काफी अंधेरा था.
मैं अन्दर गई और एक डंडे से लाईट का बटन चालू किया.
मां सोयी हुई थीं, तो मैं भी धीरे से बेडपर जाकर कंबल में घुसकर उनके बगल में लेट गई.
मेरी मां के जिस्म से मस्त खुशबू आ रही थी.
थोड़ी देर बाद मैंने मां की जांघों पर अपनी टांग को रख दिया और मां से लिपट गई.
मेरे मन में वो सब चल रहा था, जो मैंने देखा था.
मैं जानना चाहती थी कि आखिर हुआ क्या?
यही जानने के चक्कर में मैंने अपना हाथ मां के पेट पर रख दिया और धीरे धीरे हाथ को नीचे की तरफ ले जाने लगी.
कुछ देर में ही मेरे छोटे हाथ मेरी मां की चूत तक पहुंच गए. उनकी चूत बहुत ज्यादा चिपचिपी थी और सारा माल मेरे हाथों में लग गया.
मैंने धीरे से अपने हाथों को मां की झांटों में रगड़कर साफ कर लिया.
अब मैंने सोचा कि ये क्या चीज थी, जो मेरी मां की सुसु में अंकल ने डाल दी.
यह जानने के लिए जैसे ही मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में डालीं, वैसे ही झट से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और उंगली को बाहर कर दिया.
वो घबराहट में बोलीं- हंषु बेटा, तुम यहां क्या कर रही हो?
मैं भी घबराकर बोली- मम्मी मुझे आपके पास रहना है.
यह कहकर मैं अपनी मां से लिपट गई और रोने लगी.
मां मुझसे पूछने लगीं- क्या हुआ बेटा, रो क्यों रही हो?
मैं रोती हुई बोली- मां अंकल ने आपके सुसु में क्या डाला?
यह सुनते ही मां के होश उड़ गए. वो समझ गईं कि मैंने सब कुछ देख लिया था.
वो कुछ देर के लिए बिल्कुल चुप रहीं. शायद उनको समझ नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दूं.
वो सोचने लगीं और तब उन्होंने मुझसे पूछा- तुमने क्या देखा?
मैंने सब कुछ सच सच बता दिया.
मेरी मां समझ गईं कि मैंने उनकी चुदाई देख ली.
अब मां को ये डर था कि कहीं मैं किसी को ये सब न बता दूं.
कुछ देर सोचने के बाद मां बोलीं- बेटी, तुम ये बात किसी से मत बताना.
मैं जिद करने लगी कि पहले आप बताओ, अंकल ने आपके साथ क्या किया?
इस पर वो मुझे समझाती हुई बोलीं- हंषु बेटा, तुमको तो पता हैं कि मां की तबियत कितनी खराब थी. जब आज हम लोग चेकअप के लिए गए, तब अंकल ने मुझे चेक करके बताया कि मुझमें प्रोटीन की कमी है. मेरे पैरों में और पेट में बहुत कम प्रोटीन है, इसलिए मुझे प्रोटीन शेक लेना होगा. तो अंकल मेरा इलाज कर रहे थे और मुझे प्रोटीन दे रहे थे बेटा.
ये सुनकर मुझे लगा कि हां अंकल मेरी मां का इलाज कर रहे होंगे.
मैंने पूछा- मगर वो आपकी सुसु करने वाली जगह से क्यों प्रोटीन दे रहे थे?
मां मुस्कुराती हुई बोलीं- वो इसलिए बेटा, क्योंकि सुसु वाली जगह से मेरा पेट और पैर पास में है न. उधर से वहां तक जल्दी प्रोटीन पहुंच जाएगा और मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी.
मैं खुश होकर बोली- अच्छा तो ये प्रोटीन दवाई है और आप इससे जल्दी ठीक हो जाओगी?
मां ने कहा- हां बेटा, ऐसे ही अंकल मेरा फिर से इलाज करेंगे, तो मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगी. लेकिन तुम ये किसी को मत बताना वर्ना सब तुम्हें ये बोलकर चिढ़ाएंगे कि तुम्हारी मां बीमार है.
मैंने कहा- ठीक है मां, मैं किसी को नहीं बताऊंगी.
यह कहकर मैं अपनी मां की बांहों में लेट गई.
इसके बाद तो लगभग हर बार मैंने अपनी मां को चुदते देखा … और हर बार अंकल मेरी मां को ऐसी ही बेरहमी से चुदाई करते थे.
पिछले बीस सालों से वो मेरी मां को चोद रहे हैं. मेरी मां अब भी दिखने में काफी सेक्सी हैं, तभी तो अंकल अभी भी उन्हें जमकर चोदते हैं.
हमारे यहाँ एक नौकरानी है गंगू बाई नाम की. उसकी उमर भी 20 साल की Sex Stories है. उसका रंग साँवला है और फ़ेस कटिंग एकदम अमीशा पटेल की तरह है। उसके बूब्स एकदम बड़े है और उसकी गांड है एकदम बाहर है. मैं उसको चोदने का ख्वाब बहुत पहले से देखता हूं.
मेरा ये सपना पूरा हुआ जब मेरी मम्मी औस्ट्रेलिया मेरे पापा के पास गयी।
उस दिन मैं घर में था सुबह गंगू बाई आयी तो मैंने दरवाज़ा खोल दिया.
वो अपना काम करने लगी.
मैं तभी अपने बेडरूम में जा के एकदम नंगा हो गया. उसको चोदने का ख्याल आते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं रात में ही वियाग्रा की गोली लाया था, मैंने उसको खा लिया।
फिर मैंने गंगू बाई को आवाज़ मारी.
वो जब मेरे बेडरूम में आयी तो हैरान हो गयी. मुझे नंगा देख कर हँस के वो किचन में भाग गयी.
मैं उसके पीछे गया. जैसे ही मैं किचन में गया तो वो मुझसे बोली- तुम्हारा इरादा क्या है?
मैं बोला- गंगू बाई रानी, मुझे तेरी चूत को चोदना है.
यह सुनते ही वो मेरी तरफ़ आयी और बोली- इतना कहने में इतने दिन लगा दिये?
मैं उसको फिर गोद में उठा के बेडरूम में ले गया. वहाँ मैंने उसको नंगा कर दिया. उसके बूब्स एकदम पिंक और रसीले थे. मैं झट से उसके बूब्स अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक बूब को अपने हाथ से मसलने लगा.
वो आह्ह उह्ह कर रही थी.
मैंनेदस मिनट तक उसके दोनों बूब्स को चूस के और मसल के लाल कर दिया.
तभी मुझे मेरे लंड पे कुछ गीला लगा. मैंने देखा तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था।
मैं झट से उसकी चूत पे मुँह डाल के चाटने लगा उसकी चूत के दाने (क्लिट) को अपनी जीभ से चाटने लगा तो वो जोर जोर से चिल्लाने लगी और तड़पने लगी।
अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत एकदम टाइट थी। जैसे ही मैं उंगली अंदर बाहर कर रहा था तभी उसका पानी निकल गया.
मैंने सारा पानी चाट लिया और फिर उठ गया.
उसकी गांड के नीचे मैंने दो तकिये रख दिये और उससे कहा- देख आज़ इस लंड से तेरी चूत को चोदूँगा. तूने कभी ऐसी चुदाई करवाई है?
उसने कहा- नहीं.
तो मैंने कहा- तुझे दर्द होगा, सहन करना, फिर बहुत मज़ा आयेगा.
यह कह के मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत में डालने लगा वो बहुत ही टाइट थी जैसे ही मैंने एक धक्का लगाया वो जोर जोर से रोने लगी।
एक और धक्का लगाया मैंने तो वो चिल्लाने लगी और कहने लगी- छोड़ दो मुझे, मुझे नहीं चुदवाना।
मैंने एक और धक्का लगाया तो मुझे लगा कोई चीज़ मेरे लंड को उसकी चूत में रोक रही है.
मैं समझ गया कि उसकी सील है.
मैंने दोनों हाथों से उसके कंधों को पकड़ा और एक जोरदार धक्का लगाया. मेरा लंड उसकी चूत की सील फाड़ते हुए ४ इंच अंदर चला गया.
उसकी चूत से खून आने लगा और पानी भी.
मैं रुक गया.
वो बहुत ही जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी.
मैंने उसके बूब्स को मसलना चालू किया. दस मिनट के बाद वो शांत हो गयी, मैं फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।
दस मिनट तक मैं धीरे धीरे धक्के लगा रहा था, जब मुझे लगा उसे मज़ा आ रहा है.
तभी मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया.
उसकी चूत से पानी निकलने लगा. जैसे ही मैंने थोड़ा लंड को बाहर निकाला उसकी चूत से खून निकलने लगा.
मैं रुक गया. दस मिनट के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये.
मैंने उसे पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- दर्द तो कम हुआ है पर मज़ा नहीं आ रहा!
यह सुन के मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. थोड़ी देर में उसकी चूत का पानी गिर गया.
मैंने उसे और जोर से चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने वियाग्रा खाया था. तो मुझे मालूम था कि मेरा पानी लेट गिरेगा.
मैं उसको और 30 मिनट तक चोदता रहा.
वो भी बोलती रही- चोद मुझे शान … चोद मुझे … और जोर से आहह उहह शान. हह चोद रे चोद मुझे रंडी बना दे रे चोद मुझे. आह्हह मेरा पानी निकल रहा है आहह उहह!
और उसकी चूत का पानी ४ बार निकल गया।
तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसे उठने को कहा.
वो उठ नहीं पा रही थी.
उसको मैंने अपनी गोद में लिया और दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. उसकी चूत से खून और पानी टपक रहा था. उसके झांट के बाल एकदम गीले हो गये थे.
मैंने उसको खड़ा किया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुँह पर रख के उसके पैर अपने हाथ में ले लिये।
अभी वो पूरी तरह से हवा में थी।
दीवार से चिपक के मैंने झट से एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा. उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. दस मिनट में ही उसका पानी निकल गया. मेरे हाथ दुख रहे थे तो मैं उसको बेड पे लिटा के आँधी की तरह चोदने लगा.
मैंने उसको आधा घंटा वैसे ही चोदा. मैं पूरा पसीना हो गया था. वो कम से कम 8 बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी.
तभी मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है. मैंने अपने लंड निकाल के उसके मुँह में डाल दिया. वो उसे एकदम लोलीपोप की तरह चूसने लगी. तभी मेरा माल उसके मुँह में निकल गया और उसने उल्टी कर दी.
मैं उसको गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और उसके साथ नहाने लगा. मेरा लंड एकदम टाइट था वियाग्रा की वजह से।
उसके बाद मैंने उसको बाथरूम में भी चोदा पर यह अगली बार में। Sex Stories
मैं एक 25 साल की खूबसूरत सेक्सी औरत हूँ. मेरा Sex Stories मर्द मुझसे पाँच साल बड़ा है और वो एक उद्योगपति है. वो काम में एकदम पागल आदमी है. बिजनेस के सिवाय उसको कुछ नहीं दिखता. उसके व्यस्त होने के कारण हम एक दूसरे के साथ बहुत कम मिल पाते हैं.
हमारा अभी तक कोई भी बच्चा नहीं हुआ है. शुरू के दो तीन साल में हम लोगों की सेक्स लाइफ बहुत ही अच्छी थी. उसके बाद वो काम के चक्कर में बहुत फँस गया और मैंने किट्टी पार्टी और लेडीज़ पार्टी जॉयन कर ली.
इस तरह की किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी में सिर्फ़ शराब व ब्लू फ़िल्म चलती थी. औरतों में चूत चूमना और चूत चाटना खुले रूप में होता था. मुझे भी दिल बहलाने का बहाना मिल गया था. मैं इसमें बहुत खुश थी.
एक बार होली पर मेरा पति अपने काम से बाहर गया हुआ था. मैं लेडीज किट्टी पार्टी में चली गई. उस दिन किट्टी पार्टी में बहुत शराब पी गई और हम लोगों ने ताश भी खेले.
फिर हम औरतों ने एक हिन्दी पोर्न फ़िल्म भी देखी जो बहुत ही गर्म थी. उसके बाद हम औरतों ने चुम्मा चुम्मा खेला और चूत चटाई भी की. यह सब रात के तीन बजे तक चलता रहा. मैंने बहुत शराब पी ली थी और मुझे घर तक मेरी एक सहेली अपनी कार में छोड़ गई.
घर पर मेरे भाई सुरेशने सहारा देकर मुझे मेरे बेडरूम तक पहुँचाया. मैंने इतनी शराब पी रखी थी कि मैं ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी. आज मैं किट्टी पार्टी में गर्म पोर्न मूवी देख कर बहुत ही गर्म हो गई थी.
मेरी चुन्चियाँ बहुत फड़क रही थीं और मेरी चूत से पानी निकल रहा था जिससे मेरी पैंटी तक भीग गई थी. जैसे ही मेरा भाई मुझको सहारा देकर मेरे बेडरूम तक ले आया, मेरा मन उसी से चूत चुदवाने का हो उठा.
मेरा भाई सुरेशएक 20 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है. मैं अपने बेडरूम में आकर एक कुर्सी पर बैठ गई और जानबूझ कर अपना पल्लू गिरा दिया जिससे कि सुरेशमेरी चुंचियों को देख सके. मैंने उस दिन एक बहुत ही छोटा ब्लाउज पहन रखा था और उसका गला बहुत ही लो-कट था.
सुरेशका लंड मेरी चुन्ची देख कर धीरे धीरे खड़ा होने लगा और उसको देख कर मैं और चुदासी हो गयी. मुझे लगा कि मेरा प्लान काम कर रहा है. उसकी पैंट तम्बू के जैसे उठने लगी. मैं धीरे से मुस्कराई और मैंने हाथ से अपने बाल पीछे कर लिये.
मैं जानबूझ कर उसको अपनी चुन्ची की झलक दिखाना चाहती थी. मैं अपने कन्धों को और पीछे ले गई जिससे कि मेरी चुन्ची और ज्यादा बाहर की तरफ़ निकल गई.
उसकी पैंट और अधिक उठने लगी और मैं मन ही मन मुस्करा रही थी. मुझे यकीन था कि मेरा काम बन जाएगा. उसके लंड के उठाव को देख कर लग रहा था कि थोड़ी ही देर में मैं उसकी बाँहों में होऊंगी और उसका लंड मेरी चूत अच्छी तरह से कसकर चोद रहा होगा.
मैंने अपने भाई से कहा- जाओ दो गिलास और एक स्कॉच की बोतल हमारे कमरे से ले आओ!
वो बोतल उठा लाया. एक पैग मैंने अपने लिये बनवा लिया और उसको भी पीने के लिए कहा.
वो भी शायद अपनी बहन की चुदाई का सपना देख रहा था इसलिए मेरा हर कहा मान रहा था.
वो भी मेरे सामने खड़ा होकर शराब पीने लगा और उसका लंड मैं उसकी पैंट में तना हुआ साफ देख पा रही थी.
पूरा गिलास खाली करने के बाद मैंने अपने ब्लाउज के ऊपर से अपनी चुन्चियों को मसलना शुरू किया. सुरेशअभी भी अपने होंठों से गिलास को लगाये हुए था लेकिन उसकी नज़र मेरे हाथों पर थी जो मेरी चुन्चियों को दबाने लगे थे.
ये देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया. मैं भी उसको तड़पा कर मजा ले रही थी. मैं उसकी पैंट की तरफ़ देख रही थी, जो अब तक बहुत ही फूल चुकी थी. मैं समझ गई कि उसका लंड अब बिल्कुल फटने को हो गया है और वो मुझे चोदने के लिए पागल हो चुका है.
फिर मैंने ब्लाउज को खोल दिया और अपने बड़े बड़े स्तनों को उसके सामने आजाद कर दिया. मैं अपने दोनों खरबूजों को सहलाने और मसलने लगी. सुरेशमेरे आधे नंगे जिस्म को बहुत अच्छी तरह से देख रहा था.
मैंने मादक सी आवाज में उससे पूछा- क्या हुआ रमेश, क्या देख रहे हो?
वो कुछ नहीं बोल पा रहा था. उसका चेहरा वासना और आश्चर्य से भरा हुआ था. उसके माथे पर पसीना आ गया था.
फिर मैंने उसके लंड की ओर देखकर कहा- लगता है तुम्हारा खड़ा हो गया है. क्या तुम इसको शांत नहीं करना चाहोगे?
मैंने अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी चूत पर हाथ फिराते हुए कहा.
अपनी ही जुबान से निकल रही इस तरह की गन्दी बातों से मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी. मेरी चूत उसका लंड खाने के लिए फड़फड़ाने लगी. मेरे दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी कि कब सुरेशका लंड मेरी चूत में घुसेगा और मुझे जोर जोर से चोदेगा.
मैं अपने कपड़ों को धीरे धीरे से खोलने लगी और यह देख कर सुरेशकी आँखें फैलने लगीं. मैंने धीरे से अपनी साड़ी उतार दी. मैंने अपना पेटीकोट भी धीरे से उतार फेंका और फिर पैंटी भी उतार डाली.
अब मैं अपने भाई सुरेशके सामने बिल्कुल नंगी हो कर खड़ी हो गयी. सुरेशमुझको फ़टी आँखों से देख रहा था. मेरी बाल सफा, भीगी चूत उसकी आँखों के सामने थी और वो उसके लंड को लीलने के लिए बेताब हो रही थी.
मैंने सुरेशसे धीरे से पूछा- ओह सुरेश… कब तक देखते रहोगे? आओ … मेरे पास आओ, और मुझे चोदो. देख नहीं रहे हो मैं कब से अपनी चूत खोले चुदासी हुई पड़ी हूँ? आओ, पास आओ और अपने मोटे लंड से मेरी चूत को खूब अच्छी तरह से रगड़ कर चोदो!
मेरी इस बात को सुन कर वो हरकत में आ गया. वो मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगा. उसने पहले अपनी शर्ट को उतारा. फिर उसने अपनी चड्डी भी धीरे से उतार फेंकी. चड्डी उतारते ही उसका लंड मेरी आंखों के सामने आ गया.
उसका लंड इस समय बिल्कुल खड़ा था और चोदने को बेताब होकर झूम रहा था. मैं उसके लंड को बड़ी बड़ी आँखों से घूर रही थी. उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था.
मैं उसका लंड देख कर घबरा गयी थी लेकिन मेरी चूत उसके लंड को खाने के लिए फड़फड़ा रही थी. मैं अपनी कुर्सी से उठ कर उसके पास जाने लगी, लेकिन मेरे पैर लड़खड़ा गए. मैं गिरने लगी और सुरेशने आकर मुझको अपने बदने से चिपका कर संभाल लिया.
एक झटके में सुरेशका हाथ मेरी चुन्ची पर था. वो मेरी एक चुन्ची को अपने मुंह के अन्दर लेकर चूसने लगा. मैं बहुत शराब पीने के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी. मैं फर्श पर गिर पड़ी.
सुरेशने मुझको फट से पकड़ लिया और हम दोनों कार्पेट पर गिर गए. सुरेशका हाथ मेरी चुन्ची पर था और सुरेशवैसे ही पड़ा रहा. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.
मैंने धीरे से सुरेशसे कहा- सुरेशमेरी चुन्ची तो दबाओ, खूब जोर से दबाओ, इनको अपने मुंह में लेकर चूसो, इनसे खूब खेलो.
इतना सुनते ही सुरेशमेरे ऊपर टूट पड़ा और मेरी चुंचियों से खिलवाड़ करने लगा. मैंने अपना दाहिनी तरफ का दूध उसके मुंह पर लगा दिया और कहा- आह्ह … लो … इसे अपने मुंह में लेकर खूब जोर से चूसो.
सुरेशमेरे दूध को मुंह में लेकर चूसने लगा. मैं अपनी कामवासना में पागल हो रही थी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था. सुरेशमेरी दोनों चुंचियों को बारी बारी से मसल रहा था और चूस रहा था.
मैं उसकी दूध चुसाई से पागल सी हो गयी और उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर ले गयी. मेरी चूत को छूते ही सुरेशने पहले मेरी चूत के मोटे मोटे उभरे हुए होंठों पर हाथ फिराया और अपनी बीच वाली उंगली को मेरी चूत में घुसा दिया.
मेरा भाई अब मेरी चूत को अपनी उंगली से चोद रहा था. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैंने अपने दोनों हाथों से सुरेशका लंड पकड़ लिया और उसको मसलने लगी.
सुरेशके मुंह से सी … सी … करके सिसकारियां निकलने लगीं. मैंने भाई का लंड पकड़ कर उसका सुपारा निकाल लिया और उस पर एक चुम्मा जड़ दिया. सुरेशअब जोर जोर से मुझे अपनी उंगली से चोद रहा था.
मैं सुरेशका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और वो अपने लंड को मेरे मुंह में जोर जोर से ठेलने लगा. थोड़ी देर के बाद मुझको लगा कि सुरेशअब झड़ जायेगा.
सिसकारते हुए मैं बोली- आह्ह सुरेश… चोद … चोद … अपनी दीदी के मुंह को खूब जोर जोर से चोद और अपना माल अपनी दीदी के मुंह में गिरा दे.
थोड़ी देर के बाद सुरेशसिसकारते हुए बोला- आह्ह … दीदी … मैं झड़ रहा हूँ.
उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में डाल दिया. मैंने उसके लंड का माल पूरा का पूरा पी लिया.
मैंने धीरे से सुरेशसे पूछा- अपनी दीदी को चोदेगा? तेरे जीजा की बहुत याद आ रही है. मेरी चूत बहुत प्यासी हो रही है.
सुरेशने मेरी दोनों चुंचियों को पकड़ कर कहा- दीदी अपनी चूत पिलाओ न? पहले दीदी की चूत चूसूंगा, फिर जी भर कर चोदूंगा.
सुरेशका लंड मैं अपने हाथों में पकड़ कर खेल रही थी.
मैंने कहा- तेरा लंड तो बहुत विशाल है रे!
उसने पूछा- आपको पसंद आया दीदी?
उसका लंड हाथ से सहलाती हुए मैं बोली- यह तो बहुत प्यारा है. किसी भी लड़की को चोद कर मस्त कर देगा.
फिर मैं चित होकर चूतड़ों के बल लेट गयी और अपनी टांगें फैला कर बोली- ले … अपनी दीदी की चूत को प्यार कर. जी भर कर पी ले इसे. पूरी रात पीता रह अपनी दीदी की चूत.
सुरेशमेरी चूत को जीभ से चाटने लगा. वो मेरी चूत को पूरी अंदर तक चाट रहा था. कभी कभी उसकी जीभ मेरी चूत के मटर-दाने पर भी चाटने लगती थी. कभी वो उसको दांतों में लेकर काट देता था और मैं पागल हो जाती थी.
अपनी चूत चटाई करवाते हुए मैं बिल्कुल पागल हो गयी और बड़बड़ाने लगी- आआ … आह्हह … मेरे राजा भैया, बहुत मजा आ रहा है. चूसो, खूब जोर से चूसो … ओह … ऊ … ओईई … ओह … पी जा इसे।
मैं उसका सिर पकड़ कर उसके मुंह में अपनी चूत को चूतड़ उछाल उछाल कर रगड़ रही थी. मैं उसकी चूत चटाई से बिल्कुल पागल हो गयी और सुरेशके मुंह पर ही झड़ गयी.
सुरेशमेरी चूत से निकला पूरा का पूरा पानी पी गया.
मैं फिर से बड़बड़ाने लगी- ओह सुरेश… अब अपनी दीदी को चोद दे. अब नहीं रुका जा रहा … अपने लंड को मेरे चूत में घुसा दे … पेल दे अपने लंड को मेरी चूत में … प्लीज़ राजा … अब चोदो ना!
अब वो मेरी टांगों के बीच में आ गया और अपने लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के मुंह पर रख कर धक्का लगाने लगा. उसका लंड फिसल रहा था.
मैं हंस पड़ी और बोली- साले अनाड़ी … बहनचोद, चोदना आता नहीं, चला है दीदी को चोदने! बहनचोद कहीं का!
मैंने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया और कहा- चल अब देर मत कर और अपनी दीदी को चोद चोदकर उसकी चूत की आग को ठंडा कर.
सुरेशके चूतड़ों को पकड़ कर मैंने अपने हाथ से खूब जोर से दबा दिया और अपने चूतड़ उछाल कर सुरेशका लंड अपनी चूत में ले लिया. सुरेशका लंड पूरा का पूरा मेरी चूत में घुस गया.
मैं मस्ती में आकर चिल्ला पड़ी- आआ … ह्हह … हाय … सुरेश… मजा आ गया … लंड गया … आह्ह … चोद अब साले … पेल दे मेरी चूत को … आईई … चोद जल्दी कुत्ते। आज सालों बाद इतनी हसीन चुदाई हो रही है इस छिनाल चूत-रानी की. साली को लंड लेने का बहुत शौक था. चोद दो इसको … फाड़ दो.
सुरेशअब एक्शन में आ गया और मेरी चूत में लंड को पेलने लगा. मैं मस्त होने लगी. उसका लंड बहुत मोटा था और वो मेरी चूत को दो फांकों में फाड़ रहा था. सुरेशके लंड से चुदवाते हुए मैं बिल्कुल सातवें असमान पर थी.
मैंने अपनी टांगों को उठा कर सुरेशके चूतड़ों पर लॉक कर दिया और उसके कंधों को पकड़ कर उसके लण्ड के धक्कों को अपनी चूत में खाने लगी।
सुरेशअपने धक्कों के साथ साथ मेरी चुन्ची को भी पी रहा था। मेरा पूरा बदन सुरेशकी चुदाई से जल रहा था और मैं अपने चूतड़ उछाल उछाल कर उसका लण्ड अपनी चूत से खा रही थी।
मैं लण्ड खा कर पूरी तरह से मस्ता गई और बोली- रमेश! आज पूरी रात तू इसी तरह मुझे चोदता जा। तू बहुत अच्छी तरह से चोद रहा है। तेरी चुदाई से मैं और मेरी चूत बहुत खुश हैं। मुझे नहीं मालूम था कि तू इतना अच्छा और मस्ती से चोदता है।
सुरेशबोल रहा था- हाय दीदी! मैं आज पूरी रात तुमको इसी तरह चोदूंगा। तुम्हारी चूत बहुत गर्म है, इसमें बहुत मस्ती भरी हुई है। अब यह चूत मेरी है और इसको खूब चोदूंगा।
मैं मस्ती से पागल हो रही थी और मेरी चूत पानी छोड़ने वाली थी। सुरेशअब जोर जोर से मेरी चूत चोद रहा था। वो अब अपना लण्ड मेरी चूत से पूरा निकाल कर फिर से पूरा का पूरा मेरी चूत में जोरों से पेल रहा था।
भाई के मोटे लंड से चुदते हुए मेरी चूत अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी। मैं उसके हर धक्के का आनन्द उठा रही थी। हम दोनों अब तक पसीने से नहा गए थे।
सुरेशअब अपनी पूरी ताकत के साथ मुझे चोद रहा था और मैं सोच रही थी कि काश आज की रात कभी खत्म ना हो। थोड़ी देर बाद सुरेशचिल्लाया- आह्ह … ओह्ह … दीदी … अब मेरा लण्ड पानी छोड़ने वाला है, अब तुम अपनी चूत से मेरे लण्ड को कस कर पकड़ो।
इतना कहने के बाद सुरेशने करीब दस-बारह धक्के और लगाये और वो मेरी चूत के अन्दर झड़ गया और मेरी चुन्चियों पर मुंह रख कर लेट गया।
उसके लण्ड ने बहुत सारा पानी छोड़ा था और अब वो पानी मेरी चूत से बाहर आ रहा था। मैंने सुरेशको कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसका मुंह चूमने लगी. उसको चूमते चूमते और उसके लंड को चूत में महसूस करते करते मेरी चूत ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया।
थोड़ी देर बाद हम दोनों उठकर बाथरूम गए और अपनी चूत और लौड़े को साफ किया। सुरेशका लण्ड अभी तक सख्त था। मैं उसका लण्ड हाथ में ले कर सहलाने लगी और फिर उसके सुपाड़े पर चुम्मा दे दिया। फिर हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर जाकर लेट गए औए एक दूसरे के लण्ड और चूत से खेलते रहे।
कुछ देर खेलने के बाद सुरेशका लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। उसे देख कर मैं भी मस्ती में आ गई। मैंने उसके लण्ड का सुपारा खोल दिया। उस समय लंड का सुपारा बहुत फूला हुआ था और चमक रहा था। मैंने झुक कर उसको अपने मुंह में ले लिया और मस्ती से चूसना शुरू कर दिया।
चूसने के कुछ देर बाद सुरेशबोला- दीदी … अब मेरा लण्ड छोड़ दो, नहीं तो मेरा पानी निकल जायेगा।
मैं उससे एक बार और चुदाना चाहती थी इसलिए मैंने उसका लण्ड अपने मुंह से निकाल दिया और बोली- अब तेरा लण्ड अच्छी तरह से खड़ा हो गया है और मेरी चूत में घुसने को तैयार है। चल … जल्दी से मेरे ऊपर आ और मेरी प्यासी चूत को अच्छी तरह से चोद दे।
यह सुनते ही सुरेशमेरे ऊपर आ गया और अपना पूरा का पूरा लण्ड मेरी चूत में एक झटके में ही पेल दिया। उसने मेरी चूत को दोबारा खूब अच्छी तरह से चोदा और मैं उसकी चुदाई से निहाल हो गई।
उस रात हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। उस दिन के बाद से मैं और सुरेशजब भी घर में अकेले होते हैं तो हम कपड़े नहीं पहनते हैं और नंगे ही रहते हैं. चूसा चुसाई और चोदम चुदाई का खेल चलता है और हम भाई-बहन खूब जम कर चुदाई करते हैं।
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