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मेरा नाम सुरेश है और मैं बहादुरगढ़ Hindi Sex Stories में रहता हूँ। मैंने अब तक की अंतर्वासना की सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। आज मैं भी पहली बार आप सब को अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। हमारे सामने वाले घर में एक परिवार रहता है, पति पत्नी और उनके 3 बच्चे।
सॉरी दोस्तो! मैं अपने बारे में तो बताना भूल ही गया।
मैं 27 साल का 6 फ़ीट लंबा और ठीकठाक दिखने वाला लड़का हूं और मेरा लण्ड 9″ लंबा और 3″ मोटा है।
घर के सामने वाली आंटी का नाम रिया है। वैसे वो ज्यादा उमर की नहीं है, 37 या 38 की है। दिखने में वो थोड़ी मोटी है। उनका फिगर 38-38-40 है। मैं अक्सर उनके घर जाने के बहाने ढूंढता रहता हूं. क्योंकि मैं आंटी को बहुत पसंद करता हूँ।
उन के पति का प्रोपर्टी का काम करते हैं और वो ज्यादातर घर पे लेट आते हैं, हमेशा नशे में रहते हैं और कई बार तो आंटी की पिटाई भी करते हैं। जब वो आंटी को मारते हैं तो मेरा दिल करता है कि मैं उनकी जम के पिटाई करूँ।
एक दिन अंकल ने आंटी की जम के पिटाई की। अगले दिन जब अंकल घर से चले गए तो मैं उन के घर गया। आंटी लेटी हुई थी। वो हमेशा सलवार-कमीज़ पहनती हैं। जब मैं वह पहुँचा तो उनकी आँखे बंद थी और उन का कमीज़ उनके पेट के उपर तक उठा हुआ था। मैं वहाँ खड़ा थोड़ी देर तक उनको देखता रहा। थोड़ी देर बाद जब वो थोड़ा हिली तो मुझे उनकी कमर पर कुछ निशान दिखे। तब तक आंटी ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उनको घूर रहा हूँ। उन्होंने झट से अपना कमीज़ नीचे कर लिया और पूछा- तुम कब आए?
मैंने कहा- बस थोडी देर हुई है, आप सो रही थी तो मैंने आप को उठाया नहीं, क्योंकि मैंने कल रात भी आप के घर से झगड़े की आवाजें सुनी थी।
यह बात सुन कर आंटी ने अपना सर नीचे कर लिया। फ़िर मैंने कहा- मैंने अभी आप की पीठ पर कुछ निशान देखे हैं।
तो वो खड़ी हो गई और बोली- कुछ नहीं है, वो तो बचपन से ही हैं।
तो मैंने पूछा- कैसे लगे थे?
तो वो थोड़ा सोचने लगी।
तभी मैं बोला- ये बचपन के नहीं, कल रात के हैं।
उन्होंने फ़िर से कहा- नहीं बचपन के हैं!
मैंने कहा- दिखाओ, मैं देखना चाहता हूँ कि कब के हैं!
तो वो मना करने लगी, मैंने जबरदस्ती उनको पकड़ कर दूसरी तरफ़ घुमा दिया और उनका कमीज़ ऊपर उठाने लगा, वो मना करने लगी पर मैं कहा मानने वाला था बिना देखे!!
जब मैंने देखा तो अंकल ने उन्हें अपनी बैल्ट से मारा था।
मैंने पूछा- ये बैल्ट के हैं?
तो वो रोने लगी और मेरे गले लग गई। मुझे आंटी पर दया आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था कि जिसे मैं इतने दिनों से अपनी बाहों में लेना चाहता था वो आज मेरी बाहों में थी चाहे किसी भी कारण से!
फ़िर मैंने आंटी को सोफे पर बिठाया और पूछा- यह क्यों हुआ?
तो वो और ज्यादा रोने लगी। मैं उनके पास बैठ गया और उनके चेहरे को पकड़ कर पूछने लगा तो वो बोली- क्या बताऊँ, यह तो रोज का काम है!
मैंने पूछा- बात क्या है?
तो वो बोली- मैं यह बात तुम्हें कैसे बताऊँ?
तो मैंने कहा- आप मेरे ऊपर विश्वास कर सकती हो!
तो वो बोली- मैं तुम पे विश्वास करती हूँ पर कैसे बताऊँ! मैंने ज्यादा जोर दिया तो वो बताने के लिए तैयार हो गई। वो कहने लगी- तेरे अंकल हर रोज रात को लेट आते हैं, नशे में होते है और वो रात में मेरी चुदाई करते हैं और जल्दी ही झड़ जाते है। जब मैं उन को यह कहती हूँ कि इतनी जल्दी हो गया तो मेरी पिटाई करते हैं। न तो वो मेरा पूरा करवाते हैं और ऊपर से पिटाई भी करते हैं। अब तुम ही बताओ मैं क्या करूँ?
और वो फ़िर से रोने लगी। मैंने उन को गले से लगा लिया और कहा- आंटी अगर आप गुस्सा न करें तो इस काम में मैं आप की मदद कर सकता हूँ!
वो मेरे सीने से लगी लगी पूछने लगी- किस काम में?
तो मैंने कहा- जो अंकल नहीं कर पाते! फ़िर आप की पिटाई भी नहीं होगी!
आंटी ने मेरे गले से लगे लगे ही कहा- तुम तो मेरे से बहुत छोटे हो!
मैंने कहा- तो क्या हुआ! मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। आंटी की पकड़ धीरे धीरे टाइट होती जा रही थी। मैंने भी आंटी की कमर पे हाथ घुमाना शुरु कर दिया था, उनको भी मजा आने लगा था, मेरी लाइन साफ़ थी। मैंने आंटी के चेहरे को हाथों में पकड़ लिया, आंटी ने आँखे बंद कर ली थी, मैंने अपने होंठ उनके मुलायम होठों पर रख दिए। आंटी ने मुझे कस के पकड़ लिया और मेरी किस का पूरा जवाब देने लगी।
मैं आंटी के कूल्हों को पकड़ कर दबाने लगा। फ़िर आंटी को सोफे पे लिटा कर उनके ऊपर लेट गया और उनके दोनों स्तनों को दबाने लगा। आंटी पूरी तरह मस्त हो गई थी। मैं आंटी को 20 मिनिट तक किस करता रहा। उसके बाद आंटी ने कहा- मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ, कोई आ गया तो?
आंटी दरवाजा बंद कर के जैसे ही वापस आई, मैं एक बार फ़िर से उन पे टूट पड़ा और उनके सारे कपड़े निकाल दिए। उन्होंने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए। आंटी मेरे लण्ड को देख कर एकदम बोली- इतना बड़ा लण्ड!!
मैंने कहा- आंटी! ज्यादा बड़ा थोड़े ही है! सारा का सारा तुम्हारी चूत में आ जाएगा!!
तो वो बोली- आराम से करना! नहीं तो मैं मर जांऊगी, बहुत दर्द होगा।
हम दोनों बेड पर लेट गए और फ़िर से किस करने लगे। आंटी मेरे हथियार से खेल रही थी ओर मैं अपनी ऊँगली से उनको चोद रहा था और एक हाथ से उनकी चूची दबा रहा था और किस कर रहा था। आंटी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। अब मैं उनकी चूची चूस रहा था और वो जोर जोर से मेरा लण्ड हिला रही थी। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
5 मिनट लण्ड चूसने के बाद वो बोली- बस अब नहीं रहा जाता, जल्दी से अंदर डाल दो!
तो मैं उन की टांगो के बीच में आ गया और उन के उपर लेट गया और किस करने लगा। तो आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया। मैंने एक जोर को धक्का दिया और आधे से ज्यादा लण्ड उनकी चूत में घुस गया और उन के मुँह से आह निकल गई।
वो बोली- थोड़ा धीरे!
पर मैं कहा सुनने वाला था, मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लण्ड आंटी की चूत में चला गया। उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया.और कहा कि थोड़ा रुक जाओ।
मैंने उनकी एक न सुनी और धक्के पे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी चुदाई का पूरा आनंद लेने लगी।
थोड़ी देर बाद वो बोली- जल्दी जल्दी करो! मैं झड़ने वाली हूँ!
तो मैंने अपने स्पीड बढ़ा दी और आंटी झड़ गई। वो बहुत खुश लग रही थी। फ़िर मैंने अपना लण्ड निकाल लिया और आंटी को कुतिया वाले स्टाइल में आने को कहा, तो वो बेड के किनारे पे झुक गई कुतिया की तरह।
अब मैं आंटी के पीछे से डाल रहा था और वो भी आगे पीछे हो रही थी। मैंने अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाल दी तो वो बोली- यहाँ कुछ नहीं करना!
लगभग 15 मिनट बाद मैंने आंटी की चूत में अंदर तक डाल कर अपना सारा माल उनकी चूत में डाल दिया। उस दौरान आंटी भी दो बार झड़ चुकी थी। मैं आंटी को वैसे ही उलटी लेटा कर उन के उपर लेट गया बिना अपना लण्ड निकाले। मैं 15 मिनट तक आंटी के ऊपर लेटा रहा। फ़िर मुझे लगा कि मेरा हथियार फ़िर से खड़ा हो रहा है।
मैं आंटी के उपर से उठा तो वो मेरे लण्ड को देख के बोली- यह तो फ़िर से तयार हो रहा है! आज के लिए इतना ही बस, बाकी कल!
मैंने कहा- बस एक बार और!
पहले तो आँटी मना करती रही फ़िर वो मान गई। फ़िर हमने मजे किए। मैंने आंटी की गांड भी मारी। बाद में हमने क्या क्या किया यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा। आपको यह कहानी कैसी लगी, जरुर बताना!
मैं कॉल बॉय टाइप लड़का बनाना चाहता हूँ। Hindi Sex Stories
वह मेरे दूसरे चुचूक Hindi Sex को अपने हाथ के नाखून से जोर जोर से कुरेद रही थी। एक तो चुचूक चूसे जाने की मस्ती दूसरा चुचूक कुरेदे जाने की वजह से होता दर्द ! इससे मैं तो स्वर्ग में पहुँच गया था। इस बेइंताह मस्ती के कारण मेरे मुँह से आह ओह की आवाज निकल रही थी। मैंने अपने हाथ उसकी पीठ और एक बाँह पर रख रखा था। एक हाथ से उसकी बाँह मसल रहा था और दूसरा हाथ उसकी पीठ और कमर पर फेर रहा था।
वो करीब 3-4 मिनट तक ऐसे ही करती रही। फिर रीमा बायाँ चुचूक छोड़ कर दायाँ चुचूक चूसने लगी और बाएँ चुचूक को नाखून से कुरेदने लगी।
दूसरे चुचूक को अच्छी तरह से चूसने के बाद ही उसने मेरे को छोड़ा। फिर मेरी ओर देख कर आँखो में आँखे डाल कर पूछा- कैसा लगा बेटा माँ का तुम्हारा चुचूक चूसना?
मैं बोला- क्या बताँऊ माँ ! बस इतना कह सकता हूँ कि तुम्हारे इस बेटे को तुमसे बहुत कुछ सीखना है। सीखाओगी ना माँ अपने इस अनाड़ी बेटे को?
रीमा बोली- जरूर बेटा, आखिर माँ होती किस लिये है। माँ का तो यह कर्तव्य है कि उसके बेटे की शादी से पहले उसे सेक्स की पूरी शिक्षा दे, प्रेक्टिकल के साथ जिससे कि उसकी पत्नी सुहागरात को यह ना कह सके कि उसकी माँ ने उसको कुछ भी नहीं सिखाया।
उसके मुँह से यह बात सुन कर मैं बोला- माँ, तुम्हारे विचार कितने उत्तम हैं। अगर तुम जैसी सबकी माँ हो तो किसी भी बेटे को रंडी के पास जाने की जरूरत ही नहीं।
सुन कर उसने मेरे होंठों को चूम लिया और बोली- तुम बिल्कुल मेरे बेटे कहलाने के लायक हो। चलो मैं अब तुम्हारा लंड पैन्ट से बाहर निकाल देती हूँ। यह भी मुझको गाली दे रहा होगा कि बात तो लंड को बाहर निकालने की कर रही थी और चुचूक को मजा देने लगी। कह रहा होगा कितनी निर्दयी है तुम्हारी माँ।
नहीं माँ, मेरा लंड तो बहुत खुश है कि मेरी माँ तुम हो। वह तो कह रहा है कि जिस तरह से तुम मेरी माँ हो, तुम्हारी चूत उसकी माँ हुई और जब तुम इतनी मस्त हो तो उसकी माँ और भी मस्त होगी । वो भी अपनी माँ से मिलने और उसकी बाँहों में जाने के लिये बेचैन है।
रीमा बोली- उसके लिये तो उसको थोडा इंतजार करना पड़ेगा। पहले मैं अपने बेटे को और उसके लंड को तो जी भर के प्यार कर लूँ और अपने बेटे से अपने आप को और लंड की माँ को प्यार करा लूँ, तब कहीं जाकर वो अपनी माँ से मिल सकता है ! समझे?
मैंने कहा- हाँ माँ, तुम ठीक कह रही हो।
इतना कह कर रीमा ने मेरी पैन्ट खोलनी शुरु कर दी। जब रीम मेरी पैन्ट खोल रही थी तो उसकी नजर मेरी तरफ थी। वह मेरी तरफ देख कर मन्द मन्द मुस्कुरा रही थी। सबसे पहले उसने मेरी बेल्ट को निकाल कर फेंक दिया, फ़िर मेरी पैन्ट का बटन खोलने लगी। बटन ओर चैन खोल कर उसने कमर से पकड़ कर एक ही झटके में मेरी पैन्ट नीचे कर दी और साथ में खुद भी नीचे बैठ गई। मैंने भी अपने पैर उठा कर पैन्ट निकालने में उसकी मदद की।
उसने पैन्ट निकाल कर उसको भी एक कोने में फेंक दिया। मैंने अन्डरवीयर पहन रखा था। रीमा का मुँह बिल्कुल मेरे लंड के सामने था। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था जो कि मेरे अन्डरवीयर के उभार से पता चल रहा था। उसने मेरी तरफ़ देखा और अपनी जीभ बाहर निकाल कर अपने होठों पर फिराने लगी जैसे कोई बहुत ही स्वादिष्ठ चीज देख ली हो।
और फिर एक दम से आगे बढ़ कर मेरे लंड को अन्डरवीयर के ऊपर से चूमने लगी। अन्डरवीयर की इलास्टिक से लेकर नीचे जाँघो के जोड़ तक।
फिर रीमा ने मेरे अन्डरवीयर की को कमर से पकड़ कर एक ही झटके में खींच कर उतार दिया।
मेरा लंड उत्तेजना के कारण मस्त होकर बुरी तरह से खड़ा हो गया था। जैसे ही रीमा ने मेरा अन्डरवीयर उतारा, मेरा लंड उसके मुँह के सामने एक लम्बे साँप की तरह फुँफ़कार मारते हुए नाचने लगा। मेरा लंड देख कर रीमा बोली- हाय रे ! इतना बडा लंड है मेरे बेटे का ?
फिर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। जैसे ही उसने मेरे लंड को अपने कोमल हाथो में पकड़ा, मुझे ऐसा लगा 440 वोल्ट का करंट लगा हो। मेरे लंड का यह हाल तब था जबकि उसने अभी तक एक भी कपड़ा अपने बदन से नहीं उतारा था।
मैं सोचने लगा कि जब मैं उसको नंगा देखूंगा तो मेरा क्या हाल होगा।
रीमा मेरे लंड को अपनी एक हथेली में रख कर दूसरे हाथ से उसको सहला रही थी जैसे किसी बच्चे को प्यार से पुचकारते हैं। थोड़ी देर तक इसी तरह मेरे लंड को पुचकारने के बाद रीमा उठ कर खड़ी हो गई और बोली- लो निकाल दिया मैंने तुम्हारे लंड को बाहर। अब हम चल कर बैठते हैं और थोड़ी प्यार भरी बातें करते हैं।
फिर मैं सोफे पर बैठ गया और रीमा से बोला- आओ माँ, मेरी गोदी में बैठ जाओ।
हम लोग जब चैट किया करते थे तब भी सबसे पहले मैं रीमा को अपनी गोदी में बिठा लेता था। रीमा थोड़ी सी मुस्कुराई और आकर मेरी गोदी में बैठ गई।
रीमा इस तरह से मेरी गोदी में बैठी थी कि मेरा लंड उसकी गाँड की दरार में फंसा था, जैसा कि मुझको मेरे लंड पर महसूस हो रहा था। उसने अपनी पीठ मेरे कंधे से लगा ली थी और अपनी गोरी दाईं बाँह मेरे गले के पीछे से निकाल कर दूसरे हाथ से पकड़ ली और मैंने पीछे से अपने हाथ उसके कमर में डाल कर उसके नंगे पेट को पकड़ लिया। उसके इस तरह से बैठने के कारण उसकी भारी भरकम चूचियाँ मेरे मुँह के सामने आ गई। साथ ही साथ उसके मस्ताने चूतड़ों का दवाब मेरे लंड पर पड़ रहा था। मैं अपने आपको बडा ही खुशकिस्मत समझ रहा था कि इतनी मस्तानी औरत मेरी गोद में बैठी थी।
मेरी नजर उसकी बड़ी-बड़ी गोलाइयों की तरफ़ थी। चूचियों के बीच की दरार ऐसी थी जैसे कि निमंत्रण दे रही हो कि आओ और घुसा दो अपना मुँह इस खाई के अन्दर।
फिर रीमा ने पूछा- अब बताओ बेटा, कैसी लगी तुमको अपनी यह बेशर्म माँ?
मैंने कहा- बहुत ही मस्तानी, सेक्सी, महा-चुदक्कड़ चुदासी और रस से भरपूर !
इस पर रीमा मुस्कुरा दी और बोली- ऐसे शब्द कोई भी औरत किसी मर्द से अपने बारे में सुने तो बस निहाल हो जाये और तुमने तो ये सब मेरे लिये कहा, अपनी माँ के लिये, सुनकर मेरा दिल गदगद हो गया। इसका मतलब है की मैं तुमको रिझाने में सफ़ल रही।
तुमने मुझको बताया था कि तुम्हारी उम्र 48 साल है पर देखने से तुम उससे दस साल छोटी दिखती हो।
यह तो तुम्हारी मुझे देखने की नजर है बेटा ! नहीं तो उम्र तो मेरी 48 ही है। लेकिन तुम्हारे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बड़ा अच्छा लगा।
फिर मैं बोला- माँ, तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ।
रीमा बोली- पूछो !
मैं जब से आया हूँ, मैंने गौर किया है कि तुम्हारा ब्लाउज़ काफी तंग है, जिसकी वजह से तुम्हारी चूचियाँ ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को तैयार हैं। लगता है कि एक हफ़्ते मुम्बई में रह कर चूचियाँ मसलवाने से बड़ी हो गई हैं जिसकी वजह से तुम्हारा ब्लाउज़ छोटा हो गया है।
मेरी बात सुनकर रीमा खिलखिला कर हँस पड़ी और बोली- नहीं बेटा ! ब्लाउज़ तो मेरा एक दम नया है। मुम्बई आने से पहले सिलवाया है। मैंने जानबूझ कर एक इन्च छोटा बनवाया था जिससे मैं इसे तुमको रिझाने के लिये इस्तमाल कर सकूँ। जिससे मेरी चूचियाँ और भी बड़ी-बड़ी लगें। मुझे पता है कि तुमको ब्लाउज़ में से झाँकती चूचियाँ कितनी पंसन्द हैं। इसीलिये गले का कट भी थोड़ा ज्यादा रखा है। इस ब्लाउज़ को पहन कर मैं बाहर तो जा ही नहीं सकती, नहीं तो लोग मेरा सड़क पर ही देह शोषण कर देंगे। यह तो खास ब्लाउज़ है जो मैंने अपने बेटे के मस्ती बढ़ाने के लिये बनवाया है।
ओह माँ ! तुम अपने बेटे का कितना ख्याल रखती हो !
रीमा ने कहा- अगर माँ अपने बेटे का ख्याल नही रखेगी तो कौन रखेगा।
फिर मैंने कहा- कि तुम ठीक कह रही हो माँ। मैंने तुम्हारे काँख के बाल भी देखे, ऐसा लग रहा है कि जैसा तुम एक महीने पहले छोटे कराने को कह रही थी पर तुमने छोटे किये नहीं।
रीमा बोली- बेटा, मैं छोटे करना तो चाहती थी पर 2-3 दिन मेरे बॉस के कुछ कलाइन्ट आ रहे थे, तो मुझे उनको खुश करना था। इसलिये काट नहीं पाई, फिर मेरे बॉस ने बोला कि मुम्बई जाने का प्रोगाम बन सकता है, तो मैंने सोचा कि फिर तुमसे भी मिलना हो सकता है तो क्यों ना और बढ़ा लूँ। वैसे भी तुमको मेरे काँख के बाल बहुत पसन्द हैं और इतने बड़े बाल देख कर तो तुम बहुत खुश होगे।
हाँ माँ ! मैं बहुत ही खुश हूँ कि तुमने बाल नहीं काटे। माँ तुम्हारे होंठ भी बडे सुन्दर हैं, तुमने कभी बताया नहीं कि तुम्हारे होंठ बड़े-बड़े और इतने उभारदार हैं। मुझको इस तरह के होंठ बहुत पसन्द हैं। रीमा बोली- मैं सोचती थी कि सब मर्दों को पतले होंठ पसन्द होते हैं। अगर मैं तुम को बता दूंगी तो शायद तुम मुझसे बात करना पंसन्द करो या नहीं। तुम जैसे बेटे कहाँ मिलते हैं। मैं तुमको खोना नहीं चाहती थी इसलिये नहीं बताया।
मैंने पूछा- यह भी तो हो सकता था कि मैं यहाँ आकर तुम्हारे होंठ पसन्द नहीं करता और चला जाता।
रीमा ने कहा- मुझे उसका थोड़ा सा डर था इसलिये ही मैंने तुमको लुभाने के लिये कसा हुआ ब्लाउज़ बनवाया था। तुमको बुरा लगा क्या बेटा ? आई एम सॉरी बेटा।
ऐसा कह कर उसने अपनी आँखे नीची कर ली और उसका चेहरा उदास हो गया।
मैंने कहा- माँ, इसमें इतना उदास होने की बात क्या है। तुमको तो खुश होना चाहिये कि मुझे तुम्हारे होंठ पसन्द आये।
उसने मेरी तरफ़ देखा और मुस्कुरा दी और मुझको गले से लगा लिया और बोली- बेटा, तुम्हारी माँ अपनी असली जिन्दगी में चाहे जितनी भी बड़ी रंडी हो, पर तुमको बहुत प्यार करती है। मेरे अपना तो कोई बेटा है नहीं, लेकिन मैंने तुमको ही अपना बेटा माना है। अपनी माँ से कभी भी नफ़रत मत करना बेटा।
नहीं माँ ! कभी नहीं !
कह कर मैंने भी रीमा को अपनी बाँहो में जकड़ लिया और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।
अब तक मैं यही सोच रहा था कि हम दोनों के बीच सिर्फ वासना का रिश्ता पनप रहा है। लेकिन मुझे आज पता चला कि चाहे हम दोनों एक दूसरे के पास वासना कि वजह से आये हों पर रीमा सच में मुझे एक बेटे की तरह प्यार करने लगी थी और असली जिन्दगी में वह बहुत ही अकेली थी। अकेली होने की वजह से ही शायद इस समाज से लड़ने के लिये वो अपने बॉस की रंडी बनी हुई थी। मैंने भी सोच लिया था कि इन चार दिन में उसको इतना प्यार दूंगा कि वो इन दिनों को कभी भी नहीं भूल पायेगी।
फिर रीमा पहले की तरह बैठ गई और बोली- मैं भी क्या बात ले कर बैठ गई ! तुमको मेरे होंठ पसन्द आये, मैं बहुत खुश हूँ। और बताओ मेरे शरीर में और क्या क्या तुमको अच्छा लगता है।
मैंने कहा- माँ, मुझे तुम ऊपर बालों से लेकर पैरों तक पूरी की पूरी अच्छी लगती हो।
रीमा बोली- तो फिर बताओ हर अंग के बारे में ! तुम्हारे मुँह से मुझको अपनी तारीफ अच्छी लग रही है।
तुम्हारी ये गोरी गोरी माँसल बाँहे मुझे अच्छी लगती हैं ! इतना कह कर मैंने उसकी बाँहो हो कोहनी के ऊपर से चूम लिया। ऐसा ही मैंने दूसरी बाँह के साथ भी किया।
मुझे तुम्हारी ये बड़ी-बड़ी आँखें अच्छी लगती है, कितनी गहरी हैं और इन आँखो में मेरे लिये प्यार और वासना झलकती है। माँ के प्यार के साथ छुपी हुई एक अधेड़ उम्र की औरत की वासना इनको और भी रहस्यमयी बना देती है और मेरा मन करता है कि इनको प्यार करूँ।
रीमा ने कहा- तो कर लो प्यार ! कौन मना कर रहा है।
यह कह उसने अपनी आँखें बंद कर ली। फिर मैंने पहले दाईं आँख पर चूमा फिर बाईं आँख पर।
और फिर रीमा ने अपनी आँखें खोली और मेरे गाल पर चूम लिया और बोली- तुम बहुत ही प्यार बेटे हो।
फिर मैंने कहा- मुझे तुम्हारा यह नंगा पेट भी अच्छा लगा क्योंकि तुमने साड़ी नाभि के नीचे पहनी है और तुम्हारी बड़ी गहरी नाभि दिखाई दे रही है जो मेरी मस्ती को और भी बढ़ा रही है और मेरा लंड तुम्हारी गाँड के बीच में फंसा तड़प रहा है जैसे मछली पानी के बाहर तड़पती है।
इस पर रीमा ने कहा- ओह मेरे प्यारे बेटे, मैं तुम्हारे लंड को इस तरह से तड़पाना तो नहीं चाहती पर क्या करूँ अभी उसके मजा लेने का वक्त आया नहीं है। उसे तो अभी तड़पना होगा मेरे लिये क्योंकि मेरे को तो अभी अभी ही थोड़ा-थोड़ा मजा आना शुरू हुआ है। लेकिन अगर तुम कहोगे तो मैं तुम्हारे लंड को तड़पाउँगी नहीं। लेकिन अगर तुम मेरे कहे अनुसार चलोगे तो मैं तुमसे वादा करती हूँ कि तुमको बहुत मजा आयेगा।
मैंने कहा- माँ तुमको वादा करने की जरुरत ही नहीं है, मुझको पता है कि तुम मुझको बहुत मजा दोगी और मुझे उस में कोई शक नहीं है।
मेरी बात सुनकर वो बहुत खुश हुई और बोली- मुझे खुशी है कि तुम इस बात को समझते हो कि जल्दबाजी से ज्यादा मजा देर तक धीरे धीरे प्यार करने में आता है। चलो शुरू हो जाओ फिर से।
मैं धीरे से मुस्कुराया और बोला- मुझे तुम्हारा इस तरह बेशर्मी से गंदी गंदी बातें करना भी अच्छा लगता है।
इस पर रीमा ने कहा- मेरे बेटे, ये बातें गंदी कहाँ हैं, ये तो दुनिया की सबसे अच्छी बातें हैं। अगर दुनिया में सब लोग सबकुछ भूल कर सिर्फ सेक्स की बात करें तो यह दुनिया कितनी सुखी हो जाये।
पर बेटा तुम चिन्ता मत करो, तुम्हारी यह माँ तुमको बेशर्म बनना सिखा देगी। तब तुम भी ऐसी ही गंदी गंदी बातें कर सकते हो।
माँ, मुझे चुदाई करते वक्त गलियाँ देना और सुनना पंसन्द है।
रीमा बोली- बेटा, यह तो बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि गालियाँ तो मस्ती में हम उसी को देते हैं जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। जितनी बड़ी और गंदी गाली, उतना ही ज्यादा प्यार झलकता है। समझ गया रंडी की औलाद?
उसके मुँह से गाली सुन कर मेरे लंड को एक झटका सा लगा जोकि उसकी चूतड़ों की दरार के बीच फंसा हुआ था।
क्रमशः… Hindi Sex
मेरा भाई पांच दिन के Antarvasna लिए आया था, मेरे पति को दो दिन के बाद फिर टूअर पर जाना पड़ा था.
हम तीनों अब काफी बोल्ड हो गए थे, घर के अन्दर किसी भी तरह के कपड़े पहनना या न पहनना या यूँ कहिये कपड़े का तो कोई महत्त्व ही नहीं गया था.
मेरे पति जब दो दिन के बाद घर से विदा होने लगे तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- डार्लिंग अब तुम तो हमारे बिना प्यासी नहीं रहोगी, लेकिन हम प्यासे मर जायेंगे.
रास्ते में तलाश कर लेना कोई…! मैंने अपनी बाईं आँख दबाते हुए हंस कर कहा.
चलो इस बार यह भी कोशिश करते हैं! यह कह कर उन्होंने मेरे ब्रा में कैद स्तनों पर दो चुंबन और एक चुंबन मेरे अधरों पर रख कर मेरे भाई को गुड लक कह कर विदा ली.
जब वे गए थे तब सुबह के नौ बजे थे. मैं नहाई भी नहीं थी और न ही मेरा भाई नहाया था, क्योंकि सुबह जल्दी उठ कर ही हम लोगों को मेरे पति के सफ़र के लिये आवश्यक पैकिंग व रास्ते के लिये कुछ खाना बनाना था.
भई मैं तो नहाने जा रही हूँ! तुम्हें नहाना है तो साथ ही चलो…! मैंने दरवाजे को लाक करके अपने भाई से कहा था.
ठीक है मैं भी चल रहा हूँ…! वह बोला और मेरे साथ ही बाथरूम की तरफ चल पड़ा.
हम दोनों बाथरूम में पहुँच गए, बाथरूम का द्वार खुले रहने से या बंद रहने से कोई फर्क नहीं पड़ना था अतः मैंने द्वार की ओर ध्यान दिए बिना ही शावर के नीचे खडे हो कर शावर खोल दिया. मैंने ब्रा और पेटीकोट पहना हुआ था.
जरा हुक खोलना ब्रा का! मैंने अपने सिर पर हाथों से पानी फेरते हुए कहा.
उसने मेरे पीछे खड़े होकर मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को मेरे शरीर से निकाल दिया. मेरे गुलाबी सुपुष्ट स्तन नग्न हो गए, वह मेरे पीछे सट कर अपने हाथों को बगलों से निकाल कर मेरे स्तनों पर नाभि पर और गले आदि पर साबुन लगाने लगा. मैंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी, मैं उसके स्पर्श का आनन्द ले रही थी.
उसने आहिस्ते से मेरी पेटीकोट को भी खोल कर नीचे सरका दिया था, वह अब नीचे बैठ कर मेरी जाँघों और नितंबों पर भी साबुन मलने लगा.
मैं सुलगने लगी थी!
कैसी प्यास होती है यौवन की जो कभी बुझती ही नहीं!
मैं उत्तेजना में कामुक सिसकारियाँ छोड़ने लगी थी.
वह अब मेरे आगे की ओर आ गया था. उसनें मेरे नितंबों से मेरी पेंटी पहले ही नीचे सरका कर उसे मेरी टांगों से भी अलग कर दिया था. मेरी नर्म रोयों वाली योनि पर उसने पहले साबुन लगाया फिर हेंड शावर की धार योनि पर मारने लगा.
मैंने उत्तेजना के वशीभूत होकर अपनी अँगुलियों से योनि को जरा खोल दिया तो गुनगुने पानी की तेज़ धार मेरी योनि के मुहाने पर पड़ने लगी.
मैं सिसक उठी- बस… बस…
यह कह कर मैंने अपने दोनों हाथों से उसका सिर पकड़ कर योनि पर झुका दिया तो वह योनि को चाटने लगा.
तभी काल बेल बजी!
हम दोनों ही चौंक पड़े!
दोनों की कामुकता भंग हो गई, मैंने उसकी आँखों में देखा उसने मेरी आँखों में देखा.
तुम नहाओ… मैं जाकर देखती हूँ कौन है! मैंने टावल अपने शरीर पर लपेटते हुए कहा.
वह प्यासे भंवरे की भांति मुझे बाथरूम से निकलते देखता रह गया.
मैंने जल्दी जल्दी अंतर्वस्त्र पहने, पेटीकोट और ब्लाउज पहने और साड़ी को लपेटते हुए दरवाजे की ओर चली गई.
दरवाजा खोला तो सामने अपनी ननद को मुस्कुराते पाया- क्या भाभी…? कितनी देर से खड़ी हूँ!
उसने अन्दर आते हुए कहा.
मैंने दरवाजा फिर बन्द कर दिया.
“मैं नहा कर कपड़े बदल रही थी, इसलिए देर हो गई!” मैंने साड़ी के पल्लू को कंधे पर डाल कर कहा.
“तभी मैं कहूँ कि इतनी सुहानी खुशबू कहाँ से आ रही है! अब पता चला भाभी के गीले बाल खुले हुए हैं, वैसे यह बात तो पक्की है न भाभी कि भईया इस समय यहाँ नहीं हैं!” मेरी ननद सोफे पर पसर कर बोली.
हाँ! लेकिन इस बात से तुम्हारा क्या मतलब है? मैं उसके पास बैठ कर बोली.
“मतलब यह है कि अगर वे यहाँ होते तो मुझे दरवाजे पर आधे घंटे तक खड़े रहना पड़ता! कोई दरवाजा खोलने नहीं आता!” मेरी ननद ने अपने स्वर में संशय का पुट देते हुए कहा.
वो क्यों? मैंने उलझन पूर्ण स्वर में पूछा.
“वो इसलिए कि तुम्हारे धुले धुले यौवन से उठती महक भईया को पागल बना डालती और वे तुम्हारे साथ किसी और काम में आधे एक घंटे के लिए व्यस्त हो जाते!” मेरी ननद ने अपनी बाईं आँख दबा कर कहा, मेरी जांघ में शरारत पूर्ण ढंग से चिकोटी काटी.
“अच्छा! कुछ ज्यादा ही हवा लग गई है तुम्हें जवानी की!””
“क्यों…? जवानी में जवानी की हवा नहीं लगनी चाहिए? अब तो अठारहवीं सीढ़ी पर पहुँचने का समय आ गया है…” मेरी ननद ने गर्व पूर्ण स्वर में कहा.
“वो तो देख ही रही हूँ! ये गहरे गले के टाप में कसमसाते दो गुंबज जिनकी गोलाई सहज ही दिख रही है और घुटनों तक की स्कर्ट की चुस्ती से बाहर को उभरते नितंब और पतली कमर! जरूर दो चार को बेहोश करके आ रही हो! अच्छा यह बताओ कि क्या पियोगी?” मैंने विषय बदलते हुए कहा.
“अब वह तो मुझे पीने को मिल नहीं सकता जो आप पीती हो! इसलिए कुछ और ही पिया जा सकता है!” उसने फिर एक अशलील मजाक किया.
“मैं क्या पीती हूँ?” मैंने नादान बनते हुए पूछा.
“तुम मेरे ही मुँह से सुनना चाहती हो! समझ तो गई हो! फिर भी मैं बताती हूँ! तुम पीती हो लिंग रस!” उसने इतना कहा और हंस पड़ी.
“हटो बदमाश… कितनी मुंह फट हो गई हो! चलो रसोई में चलते हैं!” मैंने उठते हुए कहा.
वह मेरे साथ खड़ी हो गई, उसने अपना हैंड बैग सोफे पर ही छोड़ दिया, वह मुझे आज पूरे रंगीन मूड में लग रही थी, इससे पूर्व भी मैंने उसके मजाक तो सुने थे लेकिन ऐसे हाव-भाव नहीं देखे थे.
रसोई में पहुंचते पहुंचते उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे कपोलों को चूम कर बोली- काश भाभी… मैं आपकी ननद नहीं बल्कि देवर होती… तुम्हारे यौवन की कसम! इन दोनों कठोर
पहाड़ों को पीस डालती और तुम्हारी जाँघों के भीतर अपने लिंग को तुम्हारी पसलियों तक पहुंचा कर ही दम लेती! मेरी ननद के इन शब्दों को सुन कर मेरे दिमाग ने एक योजना को जन्म दे डाला.
मैंने गैस पर चाय का पानी चढ़ाते हुए कहा- इन पहाड़ों को तो तुम अब भी पीस रही हो! वैसे एक बात बताओ! क्या तुम्हारा कोई बॉय फ्रैंड नहीं है?
मेरी ननद अपने भाई की ही भांति ही जरूरत से ज्यादा कामुक हो रही थी इस समय, शायद इसलिए और ज्यादा क्योंकि उसे ये भ्रम था कि सिर्फ मैं और वो ही हैं,
“नहीं… कई लड़के कोशिश करते हैं लेकिन मैं ही उन्हें लिफ्ट नहीं देती हूँ…” मेरी ननद ने मेरी ब्लाउज के दो तीन बटन खोल कर कहा.
“यह क्या कर रही हो तुम?” मैंने उसकी क्रिया को देख कर प्रश्न किया.
“करने दो ना भाभी…! मुझे बहुत मजा आता है स्तन पान में..! मैं एक सहेली के साथ ऐसा करती हूँ… हम दोनों लेस्बियन लवर हैं…! अब आपके ऐसे भरे भरे यौवन को देख कर मेरा जी मचल उठा है… यह ही सोच लो कि भैया हैं मेरी जगह…!” उसने कुनकुनाते स्वर में कहा और मेरे ब्लाउज में हाथ डाल कर मेरी ब्रा को सहलाने लगी, उसका दूसरा हाथ मेरे सपाट पेट पर रेंग रहा था.
क्या तुमने अभी तक किसी लिंग को नहीं देखा… मैंने उसकी क्रिया से आनन्दित हो कर पूछा.
मैंने चाय छानने के लिए तीन कप उतार लिये थे, मुझे बाथरूम के दरवाजे के बंद होने की हल्की सी आवाज सुनाई दे गई थी, मैं समझ चुकी थी कि मेरा छोटा भाई नहा चुका है और अब इधर ही आयेगा क्योंकि उसे भी जिज्ञासा होगी यह जानने की कि कौन आया है.
“कहाँ देखा है भाभी… कभी कभी इत्तेफाक से उस पहलवान की एक आध झलक देखने को मिलती है लेकिन उस झलक का क्या फायदा…” वह मेरे ब्लाउज का एक बटन और खोल कर बोली.
मैंने तीन कपों में चाय डाल दी.
“चलो आज दिखा देंगे…” मैंने कहा.
“तुम दिखा दोगी…? वो कैसे…?” उसने चौंक कर मेरी आँखों में देखा.
उसकी दृष्टि उन तीन कपों पर पड़ी जिनमें मैं चाय डाल चुकी थी.
“हैं!!!… यह तीसरा कप किसके लिए है…?” उसने हैरत जताई.
“यह तीसरा कप मेरे लिए है…” मेरे भाई ने रसोई में प्रवेश करते हुए कहा.
मेरी ननद उसे देखते ही मुझसे दूर छिटक गई, उसकी आँखों में असमंजस के भाव आ गये.
“यह मेरा छोटा भाई है…” मैंने अपनी ननद से कहा, फिर अपने भाई से बोली- यह मेरी ननद है… यह ही आई थी… जब हम बाथरूम में थे!
मेरे भाई ने मेरे ब्लाउज के खुले तीन चार बटन देखे तो मुस्कुरा कर बोला- यह भी अपने भाई की तरह आपके स्तनों की प्यासी हैं?
“जी?” मेरी ननद सकपकाई.
मेरी ननद का नाम शिल्पा है, मैंने स्थिति संभाली- डोंट वरी शिल्पा… आज तुम्हारी हसरत पूरी हो जायेगी… मेरे भाई से मैं ही कोई पर्दा नहीं करती… तुम्हारे भईया भी पर्दा नहीं करवाते हैं. बल्कि उन्होंने हम दोनों के साथ मिल कर काम सुख प्राप्त किया है… ना मैं इस चीज को बुरा मानती हूँ और ना तुम्हारे भईया! क्योंकि हैं तो हम स्त्री-पुरुष ही बाकी रिश्ते-विश्ते तो लोगों ने अपने फायदे के लिए बनाये हुए हैं… मुझे तो इतना आनन्द आया है अपने भाई के साथ कि मत पूछो, जब तुम आई थी तो हम दोनों साथ ही तो नहा रहे थे.
शिल्पा धीरे धीरे सामान्य होने लगी, मैंने एक चाय का कप उसकी ओर बढ़ा दिया, दूसरा कप अपने भाई की ओर बढ़ा दिया, उसने अपना कप ले लिया, मैंने अपना कप लिया फिर हम तीनों रसोई से बैडरूम में आ गये. मेरे भाई ने मात्र अंडरवीयर पहन रखा था, जिसमें से उसके सख्त होते लिंग का आभास सहज ही हो रहा था.
हम तीनों बेड पर बैठ गये, शिल्पा बार बार मेरे भाई के शरीर के आकर्षण में बंध रही थी, उसकी नजर बार बार मेरे भाई की पुष्ट जाँघों के जोड़ पर जाकर ठहरती थी.
मैं उसकी स्कर्ट को उसकी फैली टांगों से जरा ऊपर सरका कर उसकी जांघ पर चिकोटी काट कर बोली- तुम्हारे लिए आज का दिन बहुत अच्छा है… अगर यहाँ तुम्हारे भईया होते तब तो और भी ज्यादा मजा रहता, फिर भी मेरा भाई तुम्हें संतुष्ट करने में सक्षम है… .हमने इसे पूरी तरह ट्रेंड कर दिया है!
मैंने अपने भाई के अंडरवीयर की झिरी में से उसके लिंग को बाहर निकाल कर शिल्पा के हाथ में थमा कर कहा- इसे धीरे धीरे सहलाओ! तब देखना यह कैसा कठोर और लंबा हो जाता है!…भभकने लगेगा यह!
मैंने चाय का खाली कप बेड की पुश्त पर रखा और अपने हाथों से शिल्पा के टॉप की जिप खोलने लगी.
मेरे भाई ने भी चाय का खाली कप तिपाई पर रख कर मेरे ब्लाउज को मेरी बाजूओं से निकाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल कर उसके जालीदार कप को स्तनों से नीचे सरका कर मेरे स्तनों को सहलाना और चूसना शुरु कर दिया था, मैं उत्तेजित होने लगी थी, उत्तेजना में मेरा शरीर बेड पर फैलने लगा था.
“भाभी पहले मैं आपके स्तन को चूसूंगी.” शिल्पा ने मेरे भाई के लिंग को छोड़ कर मेरे स्तनों पर आते हुए कहा.
“ठीक है…” मैंने उससे कहा और फिर अपने भाई से कहा- तुम शिल्पा के स्तनों को चूसो… मगर आहिस्ता आहिस्ता… और इसकी स्कर्ट भी निकाल दो!
इतना कह कर मैं उसके लिंग को सहलाने लगी.
शिल्पा ने मेरे स्तनों को चूसना शुरू कर दिया, मेरे भाई ने शिल्पा के टॉप के नीचे की शमीज उसके गोरे गुदाज स्तनों से ऊपर कर उसके निप्पल चूसने शुरू कर दिये. हम तीनों ही की साँसें तीव्र हो उठी थी, बैडरूम का दृश्य उन्मुक्त यौवन के रस में डूबता जा रहा था.
शिल्पा द्बारा निरंतर होते स्तनपान ने मुझे उत्तेजित कर डाला था, अब मैं चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ चली थी, मुझे मालूम था कि मेरा भाई लगातार दो बार स्खलित हो सकता है, इसलिए मैंने पहले शिल्पा को उसके द्बारा आनन्द दिलवाना ठीक समझा और यही सोच कर अपने भाई से कहा- तुम शिल्पा की योनि में लिंग प्रवेश करो… .लेकिन पहले कुछ थूक या क्रीम लगा लेना… लो तेल ही लगा लो… मैंने बेड की पुश्त पर रखी तेल की कटोरी उसकी ओर बढ़ाई.
वह शिल्पा की स्कर्ट को खोल चुका था और उसके नितंबों को व चिकनी जाँघों को सहला रहा था. उसने अपने तपते लिंग के मोटे से मुंड पर तेल चुपड़ा फिर जरा सा तेल शिल्पा की अनछुई नर्म रोयों से सज्जित योनि पर लगाया और अपने लिंग को उसके टाइट मुख में फंसा कर उसकी जांघ को हाथ से ऊपर उठा कर जोर का धक्का मारा, लिंग मुंड शिल्पा की योनि में उतर गया.
शिल्पा जोरों से चीखी, उसका यह पहला अनुभव था, मैंने उसकी पीठ को सहलाया और उसके होंठ अपने होंठ से बंद कर दिये, उसकी गर्म साँसे मेरी गर्म साँसों से उलझने लगी थी, उसके हाथों को मैंने अपनी साड़ी के नीचे प्रवेश दे दिया था, वह उत्तेजना और दर्द के चक्रवात में फंसती जा रही थी, उसके हाथ मेरी चिकनी जाँघों को सहलाने मसलने लगे थे, मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी.
मेरे भाई ने शिल्पा की जाँघों को पकड़ कर एक और धक्का मारा तो शिल्पा तड़पते हुए कह उठी- तुम्हारे भाई तो मुझसे कोई दुश्मनी निकाल रहे हैं… उफ… आह… कितना दर्द हो रहा है उफ… इनसे कहो जो करे आराम से करें उफ…
वह और कुछ कहती उससे पहले ही मैंने उसके मुँह में अपने एक स्तन का निप्पल दे दिया, वह उसे चूसने लगी, मेरे भाई ने थोड़ा पीछे होकर और जोर का धक्का मारा, इस बार उसका सात आठ इंच का लिंग जड़ तक शिल्पा की योनि में समां गया, शिल्पा की बड़ी तेज़ चीख निकली, मेरे भाई ने लिंग फ़ौरन बाहर खींचा तो शिल्पा ने ठंडी सांस ली और तड़पती हुई बोली- उफ… भाभी तुमने तो कुछ ज्यादा ही ट्रेंड कर दिया है इन्हें… उफ कैसे स्पेशल शॉट खेलते हैं उफ… आप रुक क्यों गए महाशय… इसे आगे पीछे करते रहो… अभी तो मजा आना शुरू हुआ है उफ…
शिल्पा ने मेरे भाई से इतना कहा और मेरे स्तन का निप्पल मुंह में ले लिया, वह निप्पल को किसी भूखे की भांति चूसने लगी.
मेरा भाई उसकी योनि में अपने लिंग से घर्षण करने लगा था और मैं अपने हाथों से शिल्पा के हाथों को पकड़ कर उनसे अपनी पेंटी का वह हिस्सा रगड़ने लगी थी जिसके नीचे मेरी योनि थी, मेरा भाई मुद्रा बदल बदल कर शिल्पा को आनन्द दे रहा था, शिल्पा का शरीर उत्तेजना से काँपने लगा था, वह कराह भी रही थी और मेरे भाई का सहयोग भी कर रही थी.
अंततः थोड़ी ही देर में दोनों एक साथ चरम पर पहुँच कर स्खलित हो गये, फिर मेरे भाई ने मेरी भी प्यास बुझाई.
शिल्पा ने मेरे स्तनों को जिस तरह चूस चूस कर मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल कर दिया था वैसे ही मैंने भी उसके स्तनों को चूस चूस कर उसे कंपकंपा डाला था.
हम तीनों की काम-क्रीड़ा तब तक चलती रही जब तक हम थक न गये.
कहानी आगे भी है! Antarvasna
पहली बार सम्भोग Antarvasna यानि सेक्स करते वक़्त डर लगना स्वाभाविक है। आखिर उन खूबसूरत पलों को कौन यादगार नहीं बनाना चाहता।
लेकिन अगर ज़रा सी भी चूक हो जाए तो ये खूबसूरत लम्हे ज़िन्दगी के सबसे डरावने अनुभवों में से एक बन जाते हैं। लेकिन अगर कुछ बातों का ख्याल रखा जाए, तो फर्स्ट टाइम सेक्स को बेहद खुशगवार यादगार बना सकते हैं।
सबसे पहले सुरक्षा- ज़्यादातर लोग अपने पहले सम्भोग को लेकर काफी भावुक और अधीर होते हैं। अधीर होना जायज़ भी है। लेकिन दो पल की खुशी के लिए सुरक्षा से समझौता न करें।
यौन सम्बन्धी रोगों और अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉन्डम का इस्तेमाल ज़रूर करें। अपने लिए एक भरोसेमंद साथी चुनें जो आपकी कद्र करता हो। मस्ती के लिए सेक्स करने से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ज़्यादा उम्मीदें न रखें- हर कोई सोचता है कि उनका पहली बार एक जादुई और यादगार अनुभव हो। लेकिन ऐसा होगा ही, यह ज़रूरी नहीं है। अच्छे से सेक्स करना एक कला है, जो वक़्त के साथ आती है। ज़्यादा उम्मीदें रखने से आपको ही निराशा होगी।
फोरप्ले यानि सेक्स पूर्व क्रीड़ा करना न भूलें- चाहे कितने ही उत्सुक और उत्तेजित क्यों न हों- सीधा वहाँ’ पहुँचने से बचें। समय लें और अपने साथी को भी मुख्य कार्य के लिए गर्म होने, तैयार होने का वक़्त दें। पहली बार में आप जितना ज़्यादा फोरप्ले करेंगे उतना ही अच्छा रहेगा।
सम्भोग से पहले पूरी तरह उत्तेजित हों- इंटरकोर्स तक पहुँचने से पहले सुनिश्चित कर लें कि आप पूरी तरह उत्तेजित हैं। वरना पहली बार सेक्स में आपको काफी दर्द होगा। लड़की की झिल्ली फ़टने पर और लड़के के लिंग के तन्तु कटने पर दर्द अवश्यभावी है।
यह न सोचें कि वो अनुभवी है- अधिकतर मामलों में, पुरुषों को यह दिखावा करने में बहुत मज़ा आता है कि वे सेक्स के एक्सपर्ट हैं। ऐसा शायद इसलिए कि वह अपनी साथी के सामने अपना भय और अनुभवहीनता व्यक्त करने से डरते हैं। इसलिए, कभी भी यह मान कर न चलें कि वो इसके एक्सपर्ट हैं। अपनी अन्तर्वासना यानि सेक्ष की इच्छा को भी अपने साथी के सामने रखें और कोशिश करें कि हमेशा वो ही लीडिंग न हों।
झूठ न बोलें- कई लोग सिर्फ इसलिए कह देते हैं कि वो संतुष्ट हैं ताकि उनके सहभागी को बुरा न लगे। ऐसा करने से आप असंतुष्ट ही रह जाएँगे और आपका रिश्ता खतरे में पड़ सकता है, इसलिए सच बोलें। और पहली बार सेक्स करने जा रहे लोग तो कतई झूठ का सहारा न लें।
चरमोत्कर्ष परम आनन्द चरमसीमा पर पहुँचने की आशा न रखें- हालांकि चरमोत्कर्ष से काफी सुख मिलता है, लेकिन बिना उसके भी आप सेक्स को इंजॉय कर सकते हैं। पहली बार इसकी आशा न रखें। अगर होता है तो बहुत अच्छा और नहीं होता तो कोई बात नहीं। बस अपने अनुभव का आनंद लें।
दर्द ज़्यादा देने का मतलब प्यार नहीं? जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पहली बार सेक्स करने में थोड़ा ज़्यादा दर्द ज़रूर होता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप अच्छे प्रेमी नहीं हैं। लेकिन अगर आपको दर्द हो तो उसे ज़रूर बताएँ। अगर आपका साथी संवेदनशील हैं तो वह इसे ज़रूर समझेगा और इस बात का ख़्याल रखेगा। Antarvasna
दोस्तो, आज जो कहानी मैं आप लोगो को सुनाने जा Sex Stories रहा हूं उससे उम्मीद है की चुदक्कर लड़कियों के चूत की प्यास और ज्यादा बढ़ जाएगी।
मैं आज से तीन साल पहले कोलकाता में पढ़ाई कर रहा था. मेरे घर के सामने ही एक लड़की रहती थी जिसका नाम था जानवी। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर अक्सर मेरा लण्ड पैन्ट में अकड़ने लगते था और मैं सोचता था कि कब चोदूंगा इसकी चूत?
भगवान ने मौका दे ही दिया उसकी चुदाई का !
मैं कॉलेज से आ रहा था। अँधेरा हो गया था। अचानक पीछे से किसी के बुलाने की आवाज़ आई तो मैंने मुड़ के देखा, मेरे पीछे जानवी डार्लिंग खड़ी थी।
वो मेरे पास आई और बोली कि राहुल मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ।
मैंने कहा- हाँ बोलो !
तो उसने कहा- आइ लव यू !
मैं तो पागल हो गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे जोर से अपने सीने से लगा कर उसके होठों को चूस लिया, उसकी चुचियाँ मेरे सीने में घुसी जा रही थी। मगर मुझे डर लग रहा था कि कोई हमें इस तरह देख न ले। तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर झाड़ी की तरफ़ ख़ींचा और झाड़ी में जाते ही मैंने उसके होठों को फ़िर से अपने होठो में दबा कर चूसना शुरू कर दिया।
अब वो भी गरम हो रही थी, जानवी मेरे बदन से जोर से लिपट गई और मेरे लंड उसकी चूत को ऊपर से ही चोदने के लिए फड़फ़ड़ाने लगा।
मैंने अपना एक हाथ जानवी की कुर्ती में डाला और उसके चुचियों को पकड़ना चाहा, मगर मैं पकड़ नही सका, क्योंकि उनका आकार बहुत बड़ा था। फ़िर भी मैंने उसे थोड़ा पीछे किया और दोनों हाथों से चुचियों को पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा।
जानवी आह… ऊऊह करने लगी तो मैं समझ गया कि अब यह बुर की चुदाई के लिए तैयार हो चुकी हैं। मैंने उसे वहीं झाड़ियों पर लिटा दिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर नीचे उतार दी।
हे भगवान ! उसने पैंटी नही पहनी थी और उसकी चूत से माल निकल रहा था। फ़िर मैंने उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया, अपने भी कपड़े खोल दिए। मेरा 8” का लंबा लंड जब बाहर आया तो काफी फूल गया था और वो पहले से ज्यादा लंबा लग और मोटा लग रहा था। जानवी अब डर के कारण कहने लगी- मुझे लेट हो रहा है, प्लीज़, मुझे जाने दो।
मगर मैं कहाँ छोड़ने वाला था। मैंने उसके हाथ में लंड पकड़ा दिया और वो उसे ऊपर नीचे करने लगी। उसके सहलाने से मेरे सुपाडा और लाल हो गया। फ़िर मैंने उसे थोड़ा उठाया और अपना लंड उसके मुहँ में डाल दिया, वो बड़े प्यार से उसे चूसने लगी। ऐसा लग रहा था कि वो कोई लोलीपोप चूस रही थी।
लगभग १५ मिनट तक वो मेरे लंड को चूसती रही। फ़िर मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसे धक्का दे कर नीचे पटक दिया और फ़िर मैं उसकी चुचियां मसलने लगा।
उसके बाद मैंने एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। साली बहुत सेक्सी लड़की थी, अपनी जांघो को ख़ुद ही सहला रही थी। मैंने उसकी चूत को फैला दिया और थोड़ा सा थूक निकाल कर अपने लंड और उसकी चूत पर मसल दिया जिससे उसकी चूत गीली हो गई। मैंने अपना लंड जानवी के हाथ में पकड़ा दिया और उसने लंड को चूत के मुंह पर टिका दिया।
मैंने पूछा- तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- हाँ मेरे राजा आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नही देती हैं।
इतना सुनते ही मैंने उसकी कमर जोर से पकड़ ली और अपनी कमर पीछे ख़ींच के एक जोरदार धक्का मार दिया जानवी के चूत पर, मेरा लंड सुपाडा सहित ३’ अन्दर घुस गया।
जानवी चिल्ला पड़ी- ऊह मा …मर गई… आह्ह्ह्ह्छ… वोह…!
मैंने लंड संभाल के एक बार फ़िर धक्का मार दिया। अबकी लंड चूत फाड़ के गहरे में घुस गया और ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड है ही नहीं क्योंकि वो चूत में पूरा समां गया था।
जानवी तो चिल्लाये जा रही थी- आह… आह… आह… ओह… ओउच…
थोडी देर बाद जब वो सामान्य हो गई तो मैंने धक्के लगाने शुरू किए। तक़रीबन १२० धक्के लगाने के बाद मैंने अपना लंड ख़ींच लिया और उसे पीछे कुत्ते की तरह घुमा कर झुका दिया और लंड उसकी गांड पर रख पर पेल दिया। मैंने काफी देर तक उसकी गांड मारी, वो तो बस आह… ऊह…आः… कर रही थी।
फ़िर मैंने उसे आगे पटक दिया और फिर से उसकी चूत की चुदाई करने लगा।
तक़रीबन आधे घंटे के बाद हम दोनों का माल निकल गया तो हम कपड़े पहन कर वापस घर की तरफ़ जाने लगे. Sex Stories
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