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रेखा मेहता ने झांसी से मुझे मेल के Sex Stories द्वारा अपनी कहानी का एक स्वरूप बना कर भेजा था, उसे कहानी के रूप में ढाल कर आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ।
मेरे पति कपिल का दोस्त राहुल, जिसकी यह कहानी है, मेरे घर पर लगभग रोज ही आता था। जब राहुल पहली बार जब घर में आया था उसकी नजर मुझ पर पड़ी। वो मुझे देखता ही रह गया। मेरी नई नई शादी हुई थी, मेरी उमर भी बीस वर्ष की थी। भरपूर जवानी के दौर में थी। अभी तक मुझ पर से कॉलेज का नशा नहीं उतरा था। मैं कभी जीन्स, या काप्री और टॉप पहनती थी। कॉलेज के समय से ही अपने फ़िगर को दूसरों के सामने उभार कर दिखाना हम लड़कियों का सबसे फ़ेवरेट शौक था। राहुल के सामने भी मैं लगभग उसी अन्दाज़ में आती थी। राहुल की वासना भरी निगाहें मुझ पर पड़ चुकी थी। उसके ऐसे घूरने से मैं भी रोमांचित हो उठती थी। उसे उत्तेजित करने में मुझे मजा भी आता था। शायद मैं उससे चुदना भी चाहती थी। राहुल एक पच्चीस साल का जवान था। सुन्दर था और स्टाईल में रहता था। वो और मेरे पति कपिल रेलवे में काम करते थे। राहुल बुकिन्ग क्लर्क था और मेरे पति ट्रेन टिकट एक्जामिनर थे। राहुल का घर हमारे पास ही था। कपिल को कही मुझ पर शक ना हो इसलिये मैं राहुल को भैया कहती थी।
वो जब भी मुझे घूरता था तो मुझे भी लगता था कि मैं भी उसे देख कर मुस्कराऊँ और उसे आगे बढ़ने की हिम्मत बढ़ाऊँ। पर शरम के मारे मैं ऐसा नहीं कर सकती थी। पता नहीं वो मुझे ऐसे क्यूँ देखता था, शायद उसके दिल में भी मेरे लिये भावनाएँ थी। मेरे पति सुबह ही ड्युटी पर निकल गये थे। राहुल आज करीब नौ बजे मुझ पर लाईन मारने घर आया था। उसके पास बात करने को कुछ भी नहीं था। बस उसने कपिल के बारे में पूछा, जिसके बारे में वो पहले से जानता था कि वो इस समय घर पर नहीं होगा।
मैंने कहा – वो तो नहीं है, काम पर गये हैं।”
मैं दरवाजे पर खड़ी हुई उसे निहार रही थी। वो मुझे देख कर हमेशा की तरह मुस्कराया। मेरी नजरें झुक गई और मैं जमीन की ओर देखने लगी।
“आप अकेली हैं, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ?” उसने मुस्करा कर पूछा।
“ओह, सॉरी, अन्दर आईये ना भैया, हां अभी मैं अकेली हूँ, आपको तो पता है, मैं इस समय अकेली रहती हूँ।” मैंने शर्माते हुये जवाब दिया। वो अन्दर आ गया।
“भाभी जी, आप अभी भी पढ़ाई करती हैं?” उसका बेतुका सा प्रश्न था जिसका उत्तर वो जानता था, पर मुझे पता चल गया था कि वो मुझ पर लाईन मारने आया था।
अब मैं सोच रही थी कि कैसे उसे रिझाऊं कि वो मुझे अकेली पा कर कुछ सेक्सी हरकत करे। सो बस मैंने एक मतलब भरी तिरछी नजर उस पर डाली और मुस्करा दी। ये तो उसके लिये जरूरत से ज्यादा ही हो गया।
“चाय लेंगे आप ? कोई खास काम से आये थे आप ?” मेरी तिरछी नजरें अब भी उसे न्योता दे रही थी। बस समझने वाला चाहिये था। शायद वो समझदार था।
“चाय तो पी लूंगा, पर हाँ आया तो खास काम से ही था।” मैं चाय बनाने चली गई, राहुल भी उठ कर वहीं आ गया और शायद नजरों इशारा पा कर उसने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया और बोला,”शालू, तुम बहुत सुन्दर लगती हो !”
उसके हाथ लगाते ही मेरे शरीर में चीटियां सी रेंगने लगी, मुझे तेज झुरझुरी आ गई। उसकी वासना भरी आवाज में लड़खड़ाहट थी। मुझे लगा कि उसने बहुत अधिक हिम्मत कर ली थी। मेरा मन अन्दर से खुशी से कांप उठा। पर मुझे तो अपने आप को पतिव्रता बताना था ना।
“भैया, आप वहा बैठे प्लीज !” मैंने चाय निकाली तो लगा मेरे हाथ कांप रहे थे। मैं ज्योंही पलटी, राहुल बिलकुल सामने था। मेरे हाथ से चाय गिरते गिरते बची।
“शालू, प्लीज बस एक बार मुझे किस दे दो !” उसकी सांसे तेज थी।
“क्…क्… क्या ?” मैं बुरी तरह से चौंक गई, और थर थर कांपने लगी। मुझे लगा मैं एक्टिन्ग ठीक ठाक कर लेती हूँ। पर सच में मुझे इस तरह बहुत शर्म आ रही थी। ऐसा कभी किया नहीं था ना। एकदम से मेरी हिम्मत नहीं हुई कुछ पहल करने की।
“राहुल जी, नहीं नहीं, ये क्या कह रहे हैं आप !” मेरी निगाहें नीचे झुक गई। चाय मैंने वहीं वापस रख दी। मैं चुप से पास में से निकल कर बैठक में आ गई और दीवार से लग कर खड़ी हो गई।
“प्लीज, शालू सिर्फ़ एक बार, मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा।” उसकी विनती जारी थी। उसकी सांसों के साथ उसकी धड़कन की आवाज तक मुझ तक आ रही थी। उसने शायद ये कहने में अपनी पूरी शक्ति लगा थी। मैं घबरा गई हालांकि वो मुझे अच्छा लगता था, पर एकदम से जैसे मुझ पर हमला हुआ हो, मैं कुछ तय नहीं कर पाई। मुझे लगा कि वो एक किस ले लेगा तो मेरा क्या जायेगा। मान जाऊं क्या ? पर कहीं और आगे बढ़ गया तो, क्या फिर मुझे ये चोदेगा। ये सोच कर मुझे वासना का तेज भी चढ़ने लगा और घबराहट सी भी होने लगी। पर ये सोच कर एक बार मेरी चूत में भी फ़ड़फ़ड़ाहट हो गई। इसी कशमकश के बीच राहुल मेरे करीब आ चुका था। मेरी नजरे जमीन में गड़ी जा रही थी। मेरे चेहरे पर शर्म की लालिमा आ गई थी। मैं बार बार नजरे उठा कर उसकी ओर देखने लगी।
“शालू प्लीज, मान जाओ ना !” उसके हाथ एकबारगी मेरी तरफ़ बढ़ चले थे।
“नही, भैया नहीं, ये पाप है, मुझे छूना नही, प्लीज !” दिल में इच्छा होते हुए भी मुझे जाने क्यों मर्यादा तोड़ना अच्छा नहीं लग रहा था।
“सिर्फ़ एक बार, आपका क्या जायेगा, मेरी दिल की इच्छा पूरी हो जायेगी।” लगभग वो हांफ़ उठा था।
“मैं मर जाऊंगी, राहुल, बस आप जाईये यहाँ से !” मैं पसीना पसीना हो उठी, मेरा दिल धड़क उठा, किसी अन्जाने सुख की तलाश में मेरा मन भटक चला।
राहुल ने मेरे चेहरे को उठाया और कहा,”सच में चला जाऊगा, ठीक है !! बस एक किस के बाद !” और उसने गजब ही हिम्मत दिखाते हुए अपने होंठ मेरे कांपते होंठ पर जबरदस्ती रख दिये। मेरे दोनों हाथ उसने कस कर पकड़ लिये। मैंने जाने किस नशे में अपनी आंखे बन्द कर ली। मेरा मन खिल उठा। मैं उसे कुछ नहीं कह पाई। शायद कहना भी नहीं चाहती थी। वो मेरे होंठ पीने लगा। अब उसने मेरे हाथ छोड़ दिये थे और अब उसके प्यार भरे हाथ मेरे बालों को संवार रहे थे। एक हाथ मेरे पीठ को सहला रहा था। मैं लम्बाई में छोटी थी, उसके पांवो पर चढ़ गई और अब अपने हाथ उसके गले में हार की तरह डाल दिये। मेरा सीना उसके सीने से दब गया, और जोर से अपने उरोज उसकी छाती से रगड़ने लगी। मेरे मन में आनन्द की लहरें उठने लगी। उसने जोश में मेरे चूतड़ों की गोलाईयाँ सहला डाली। वासना का आनन्द मुझ पर चढ़ने लगा। अचानक मेरे वक्षस्थलों पर उसका हाथ जम गया और उसे सहलाने लगा।
मेरे निपल कड़े होने लगे। मेरे स्तन उसके हाथों में मचल उठे। तन में मीठी सी आग जल उठी। मैं मदहोश होने लगी। हाय राम… मुझे ये क्या हो गया…इसे मैं भाई कहती हूँ… पर मुझे ये कैसा आनन्द आ रहा है… क्या ये आनन्द सही है या रिश्ता… पर रिश्ता तोड़ा तो राहुल ने ही है ना… कौन सा मेरा सगा भाई है … हाय मसल दे मुझे…। उसी समय राहुल ने मुझे धीरे से अपने पांवों पर से मुझे उतार दिया। जैसे नशा टूट गया…
“शालू, देखो किसी को मत कहना, आपका ये अहसान जिन्दगी भर मेरे दिल में रहेगा, मुझे असीम आनन्द आया, थंक्स शालू !” उसकी सांसे अब भी उखड़ी हुई थी। अचानक उसका मुझे यूँ छोड़ देना मुझे नहीं भाया, मेरी नजरें झुक गई और पैर के नाखून से जमीन कुरेदने लगी।
“राहुल जी, आप भी मत कहना, अब आप जाईये।” मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे उठा कर राहुल की ओर देखा।
“क्या मैं कल भी आऊ?” उसकी शरारत भरी मुस्कान मेरे दिल को चीर गई।
“आपकी मरजी, आपका घर है !” घायल सी मैं बोली। राहुल खुश हो गया और जल्दी से दरवाजा खोल कर बाहर निकल गया।
उसके जाने के बाद मेरा दिल अब कही नहीं लग रहा था। मैं निढाल सी बिस्तर आ गिरी और राहुल के बारे में सोचने लगी। पहले तो मुझे अपने ऊपर शर्म आने लगी कि मैंने ये क्या कर डाला। फिर शनै: शनै: मुझे सब कुछ मोहक लगने लगा। अपनी छातियों पर दबाव, निपल को खींचना, नरम होंठो का किस, मेरे नरम नरम चूतड़ को सहलाना, मेरे बदन में आग भरने लगी। काश मैं उसका लण्ड पकड़ कर दबाती, उसका सुपाड़ा बाहर निकाल कर मलती। एक बार अपनी चूत में उसे ले कर तड़पती, तो मुझे शान्ति मिलती। शाम को कपिल थका हुआ सा घर आया और आते ही उसने राहुल को बुला लिया। राहुल ने मुझे जान कर देखा तक नही, बस आकर दोनों ने ड्रिंक ली और कपिल खाना कर सोने चला गया। राहुल कुछ देर तक बैठा रहा, शायद मुझसे कुछ कहना चाहता था।
“शालू, सुबह के लिये एक बार फिर थेंक्स !” उसने मेरी तरफ़ बड़ी आशा भरी निगाहों से देखा, मुझे समझ में आ गया कि वो चाहता है कि मैं उसे सुबह बुलाऊँ। वैसे सुबह ही बात हो चुकी थी, पर शायद वो उसे सुनिश्चित करना चाह रहा था। पर फिर से कैसे कहूँ ? मैं शरमा गई और धीरे से बोली,”भैया, बार बार कह कर शर्मिन्दा मत करो।”
“कल सुबह आप फ़्री है ना, यही पूछ रहा था?” मेरी नजरें फिर से झुक गई। मैंने नजरें नीची करके ही बस हां में सिर हिला दिया। वो उठा और जल्दी से बाहर चला गया।
रात भर मैं फिर से राहुल के ख्यालों में उलझ सी गई। मुझे वो सेक्सी लगने लगा। मुझे अब लगा कि सुबह वो क्या क्या करेगा, जरूर वो मुझे चोदेगा, मेरी इच्छा जरूर पूरी करेगा। मेरे बोबे भी मसलेगा और्… और्… लण्ड को मेरी चूत में… हाय राम, मैं तो मर जाऊंगी।
मेरी आंख खुली तो कपिल मुझे देख कर मुस्करा रहा था। मुझे जागते देख कर पूछा,”रात को तुम कोई सेक्सी सपना देख रही थी क्या” उसके कहते ही मैं उछल पड़ी।
“हाय राम, आपको क्या पता ?” फिर मैं ही शरमा गई। शायद मैं सोच सोच कर रात को झड़ गई थी।
“हाय कपिल, तुम तो बस सो जाते हो, मेरा तो कुछ सोचते ही नहीं !” मैंने पकड़ा जाने पर शिकायत कर दी।
“डार्लिन्ग, अभी नहीं, मुझे अभी जुकाम और हल्का बुखार है, ठीक होने दो।”
मुझे लगा कि कहीं ये आज की छुट्टी ना ले लें। पर नहीं, उसका छुट्टी लेने का जरा भी मन नहीं था। मैं तुरंत उठी और नित्य कर्म से निपट कर कपिल के लिये नाश्ता और टिफ़िन बनाने लगी। कुछ ही देर में वो ऑफ़िस के लिये निकल गया। मैंने अपना सफ़ेद टाईट पजामा पहना, पर पेन्टी नहीं पहनी। ढीला सा ऊंचा सा टॉप बिना ब्रा के पहन लिया। मुझे लगा कि सच में मुझे ब्रा की आवश्यकता ही नहीं थी। मेरे स्तन तो वैसे ही सीधे तने हुए खड़े थे। मुझे ये सब अपने मजे के लिये तो करना ही था। मेरा दुबले बदन की सारी गहराईयां अधिक लचीली नजर आने लगी। पजामा चूतड़ों की दरार में घुस कर उसकी गहराई नाप रहा था, शायद राहुल को ये सब सेक्सी लगेगा। यदि अब वो मेरे स्तनो पर हाथ डाले तो सीधे बोबे ही उसके हाथ में आये। लण्ड तैयार हो तो अन्दर जाने में कठिनाई ना हो। पर मुझसे यह सब कैसे होगा।
राहुल भी अपने समय से आ गया। उसे देखते ही मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मुझे पता था आज वो फिर किस करेगा और फिर्…
“शालू, मुझे कल कितना मजा आया कि मैं बता नहीं सकता।” उसने कल की बात याद दिलाई। मैं शरमा गई और झुकी निगाह से कह उठी। बात सीधे ही बिन्दु पर लाने का ये सबसे अच्छा तरीका था।
“राहुल, पर ये सब ठीक नहीं है, अगर पता चल गया तो मैं तो मर ही जाऊंगी।” मैंने अपनी शंका व्यक्त की। राहुल उठा और मेरे पास आ गया।
“मेरे ऊपर भरोसा रखो, जवानी है तो मजे लूटो और जिस्म की प्यास खुद भी बुझाओ और मुझे भी बुझाने दो।”
“राहुल, हाय रे ऐसे ना कहो, मुझे कुछ होता है” मैंने अपनी तड़प उसे दर्शाई।
“शालू, तुम्हारा जिस्म लाजवाब है, तुम्हारा क्या मस्त फ़िगर है, इसका मजा उठा लो।”
“नहीं जी… वो… वो … कैसे… हाय रे मैं मर जाऊंगी।” मैं कांप उठी।
“सच में , ये बदन इतना सेक्सी है कि इसे एक मर्द मसलने को चाहिये” उसके हाथ मेरी कमर पर आ गये और मेरे स्तन की और बढ़ने लगे। मैं अपने कांपते हाथो से उसका हाथ रोकने की कोशिश करने लगी, पर नाकाम रही, ताकत के साथ मेरे हाथ को हटाते हुए वो मेरे चूंचियो के ऊपर आ गये। मेरी सिसकारी निकल पड़ी। मेरे चूंचियां दब गई… एक मीठी सी कसक उठी।
“ना कर्… हाय, लाज आती है।” मैं सिमट उठी। पर मन में लगा कि मेरी चूंचियाँ वो बेरहमी से मसल डाले। मेरी मन की कसक शांत कर दे। उसका हाथ मेरी चूंची को सहलाने लगे। तभी उसका दूसरा हाथ मेरे पेट को दबाते हुए टाईट पजामे में घुस कर चूत की ओर बढ़ गया।
“बस ना… ये नहीं करो…मैं मर जाऊंगी राम रे !” पर तब तक उसका हाथ मेरी नरम नरम झांटो को सहलाते हुए चूत तक पहुंच गया था और मेरी चूत को प्यार से सहला रहा था। मेरी चूत गीली हो चुकी थी, उसका चिकनापन उसकी अंगुलियों में लग गया। मैं तड़प उठी। मुझे मीठी मीठी सी सेक्सी गुदगुदी का अहसास होने लगा था। मैंने उसे धन्यवाद की नजरों से निहारा। मेरा मन उसका लण्ड पकड़ने को तरस उठा। मेरी चूत लपलपा उठी। मैंने अब शरम छोड़ दी और मेरे मुख से एक हाय निकल पड़ी। मैंने शर्म के साथ अपना पांव और जिस्म फ़ैला कर उसके हवाले कर दिया। उसके हाथ मेरे जिस्म पर फ़िसलने लगे, मुझे नशीली तरंगों का अह्सास होने लगा। मेरी चूंचियों को वो मसलने लगा, चूत के अन्दर उसकी दो दो उंगलियां उसकी गहराईया नापने लगी। मेरा बदन उसकी बाहों में बल खाने लगा, तड़प उठा।
उसने मुझे उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। उसने अपनी कमीज और पैन्ट उतार दिया और अपना बलिष्ठ लण्ड मेरे सामने लहरा दिया। उसका लण्ड तन्ना कर सीधा खड़ा था। मैंने धीरे से उसका लण्ड थाम लिया और हाथों में कस लिया। उसके मुँह से हाय निकल पड़ी। मेरा पजामा उसने नीचे खींच लिया और मेरा टॉप भी उतार कर पास में रख दिया। मैंने उसके लण्ड को कस कर थाम कर मुठ मारना आरम्भ कर दिया। आह भरते हुए उसने मेरी तारीफ़ करने लगा।
“सुन्दर, शालू, तुम्हारा जिस्म कितना सुन्दर है !” वो कुछ करता उसके पहले ही मुझसे नहीं रहा गया और उसके लण्ड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। उसने तो मुँह में ही धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मुझे बहुत ही आनन्द आने लगा।
उसने अपना हाथ पीछे करके मेरी चूत को सहलाते हुए मेरी योनि-कलिका को हल्के से मल दिया। दाना मलते ही एक तीखा मजा आया। फिर उसकी अंगुली मेरी चूत में उतरती चली गई। मैं मस्ती में चिहुंक गई। अब उसने मेरे मुख से लण्ड निकाल लिया और मेरे ऊपर लेट गया और मेरे मुख से मुख मिला दिया और मेरे होंठ और जीभ को चूसने सा लगा। उसका जिस्म का दबाव मेरे ऊपर बढ़ता ही चला गया और उसके भटकते राही ने अपनी राह ढूंढ ही ली। लण्ड अपना रास्ता खोज कर आगे बढ़ चला और गहराईयों का लुफ़्त लेने लगा। मेरे शरीर में लण्ड के अन्दर उतरते ही, एक तेज मिठास जिस्म में भर गई। योनिद्वार से मस्ती का पानी चू पड़ा। उसका मुख मेरे मुख को रगड़े जा रहा था और लण्ड की मस्ती भरी चाल मेरी योनि को असीम सुख दे रही थी। मेरी टांगें ऊपर की ओर उठ चुकी थी और कमर खुल कर चल रही थी। मेरी आंखे मस्ती में बंद थी। मेरी कस कर चुदाई चल रही थी। सच में राहुल एक अच्छी चोदने की कला जानता था। मेरा पूरा जिस्म वो इस तरह से मसल रहा था कि मेरा कोई भी अंग अछूता नहीं रहा।
अचानक मुझे लगा कि मैं अब नहीं सह पाउंगी और झड़ जाऊंगी। मेरे शरीर में अतिवासना भर उठी। पूरा जिस्म वासना की तीव्र मिठास से भर उठा और मैंने राहुल को जकड़ लिया। राहुल समझ चुका था, उसने और तेजी दिखाई और मैं छूट पड़ी। चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं झड़ने लगी। पर राहुल में दम था, उसका कड़क लण्ड बाहर आ गया। मेरी उठी हुई टांगों का फ़ायदा उठाते हुए उसने अपना लण्ड मेरे दूसरे छेद में सटा दिया। मैं एकदम से घबरा उठी, क्योंकी मेरे गाण्ड का द्वार अभी तक अछूता था और खुला हुआ भी नहीं था। मुझे पता था कि मेरी गाण्ड में यदि उसका लण्ड घुस पड़ा तो मेरी फ़ट भी सकती है।
“राहुल प्लीज ये नहीं करना…उईऽऽऽऽ… मत घुसाओ ना…हाऽऽऽय रेऽऽऽ…मार दी रे मेरी…” मैं विरोध करते हुए चीख सी उठी, पर जब तक लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था। मैं दर्द से तड़प गई। पर मेरी गाण्ड अभी नरम थी, स्किन भी नरम थी सो फ़टने से बच गई।
“बस हो गया शालू… इसे भी कब तक छुपा कर रखती…थोड़ा सा दर्द होगा, पर असली मजा तो यही है।”
उसका दूसरा धक्का लगा, मुझे लगा की जैसे गाण्ड में आग लग गई हो। मैंने अपना मुख कस कर बंद कर लिया। मेरी आंखो से आंसू निकल पड़े। मेरी गाण्ड में जलन होने लगी। उसने धीरे धीरे लण्ड अन्दर बाहर करना आरम्भ कर दिया। धीरे धीरे आग जैसी जलन कम होने लगी। वो मेरी गाण्ड के छेद में थूक लगाता जाता और लण्ड पेलता गया। उसकी आहें भी तेज हो उठी, और मेरी चीखें क्रमश: कम होती गई। पर गाण्ड का छेद टाईट होने से उसका वीर्य छूट पड़ा और मेरी गाण्ड के अन्दर ही भरने लगा। उसका चिकना चिकना वीर्य मेरे दर्द को भी राहत दे रहा था और मेरी गाण्ड की पूरी ग्रीसिन्ग भी होने लगी थी। उसका लण्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया। उसने मेरा टॉप लेकर मेरी गाण्ड साफ़ कर दी।
“राहुल, देख खून तो नहीं निकला ना?”
“नहीं जरा सा भी नहीं, रोज ग़ाण्ड भी मराना तो फिर तुम्हें पूरा मजा आयेगा, और छेद भी खुल जायेगा !”
“नही, पीछे तो लगती है, आगे ही ठीक है !” मैंने अपनी बात कही।
“ईश्वर ने जितने छेद दिये हैं उसका पूरा फ़ायदा उठाओ, चुदाई कराओ तो पूरी कराओ, पूरा मजा लो, सारे छेद मुझसे खुलवा लेना फिर भरपूर मजा उठाना चुदाई का !” राहुल ने मुझे समझाया।
“धत्त, अब बस भी करो, चलो जल्दी से कपड़े पहन लो, कहीं कोई आ गया तो … मजा तो हमने ले ही लिया है ना !” मैं हंस पड़ी।
“बस अपन दोनों को मजा आ गया, चुदाई सफ़ल हो गई” राहुल ने भी कमेन्ट्स किये। हम दोनों ने जल्दी से कपड़े पहन लिये और दरवाजा शरीफ़ लोगों की तरह खोल दिया। मैं चाय बना कर ले आई और अब हम दोनों अच्छे पड़ोसी की तरह व्यवहार कर रहे थे। प्यार की बातें होने लगी थी। हम दोनों को अब लगने लगा था कि कही हमें प्यार तो नहीं हो गया है… Sex Stories
हैलो फ्रेंड्स, मैं फिर से आपके समक्ष प्रस्तुत हूँ. मेरी ये वाली Hindi sex stories और भी अधिक कामुक और उत्तेजना से भरी हुई है.
मेरी एक गर्ल फ्रेंड थी, उसका नाम तिशा था. हम दोनों एक ही इंस्टीट्यूट से कम्पूटर कोर्स कर रहे थे. वो हद से ज्यादा शर्मीली सी थी. हमेशा मुझसे पता नहीं किस बात से डरती रहती थी.
एक दिन मैं उसके घर गया, वो उस वक्त अपने घर में अकेली थी, उसके मम्मी पापा आदि सब बाहर गए हुए थे.
उसने मुझे घर पर आया हुआ देखा तो वो पहले तो जरा सकुचाई. फिर मैंने उससे कहा कि अन्दर आने के लिए नहीं कहोगी?
तो उसने मुझे अन्दर बुला कर बिठाया और फिर मुझसे पूछा क्या पियोगे.. सॉफ्ट ड्रिंक या कुछ गरम?
मैंने कहा- मुझे तो हॉट ही पसंद आता है.. तुम मुझे कॉफ़ी ही पिला दो.
वो कॉफ़ी बनाने चली गई. मैंने टीवी ऑन कर लिया और देखने लगा. तभी टीवी के साथ एक डीवीडी प्लेयर लगा देखा तो तो मैंने सोचा कि डीवीडी प्लेयर को ऑन करता हूँ. प्लेयर ऑन किया तो उसमें पहले से ही एक डिस्क लगी हुई थी. मैंने उसे प्ले कर दिया. तो मैं फिल्म देख कर चकित रह गया क्योंकि उसमें तो ब्लू फिल्म चलने लगी थी.
मैंने उसे जल्दी से बंद कर दिया. दो मिनट बाद तिशा आ गई और मैंने उसके साथ बैठ कर कॉफ़ी पी और जिस काम से उसके पास आया था उस विषय में उससे बात की और अपने घर चला आया.
मैंने सोचा कि तिशा तो मुझसे डरती है. वो सेक्स के नाम से ही मुझसे बात नहीं करना पसंद करती है, तो फिर ये सब क्या है? क्या मैं उसके बारे में गलत था.
यों ही सोचते हुए मैं उसके बारे में और अधिक जानने की फिराक में रहने लगा.
कुछ दिन बाद इंस्टीट्यूट पर उसने मुझे घर आने को कहा. मैं उसके घर गया, उस दिन भी वहां पर कोई नहीं था बस वो अकेली थी.
मैंने उससे कॉफ़ी बनाने को कहा. वो अन्दर चली गई.
मैं भी उसके पीछे चला गया और पीछे से जाकर उसके चिपक गया. मैंने अपना खड़ा लंड उसकी गांड की दरार से चिपका दिया. वो घबराने लगी और आगे को होने लगी.
मैं फिर से उसे अपने लंड से चिपकाने लगा. वो कहने लगी- छोड़ो मुझे.. तुम ये क्या कर रहे हो?
मैंने उसको पकड़ लिया और उसके होंठों पे किस करने लगा.
उसने मुझे धक्का दे दिया और कहा- ये क्या है विक्की.. तुम ये क्या कर रहे हो?
उसने मुझसे बाहर जाकर बैठने को कहा. मैं बाहर आ गया और कुछ देर बाद उसने कॉफ़ी लाकर दी तो मैं उसे देखते हुए कॉफ़ी पीने लगा.
मैंने उससे पूछा कि तुम मुझसे इतना क्यों डरती हो.. जबकि तुम तो ब्लू फिल्म की डीवीडी भी देखती हो?
वो कहने लगी- कौन सी डीवीडी?
मैंने कहा- कहा तो है कि ब्लू फिल्म की डीवीडी?
वो बोली- ये कौन सी डीवीडी होती है?
मैंने कहा कि कभी देखी नहीं क्या?
तो बोली- नहीं.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है.
कॉफ़ी पीने लगा.
कुछ देर बाद वो बोली- तुमने कभी देखी है ब्लू फिल्म?
मैंने कहा- हां देखी है.
तो बोली- क्या होता है उसमें?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. जैसे दूसरी मूवी होती है, वैसी ही ये भी होती है.
वो मुझसे पूछने लगी- क्या होता है बताओ ना?
वो बहुत जिद करने लगी.
मैंने कहा- एक शर्त है.
वो बोली- क्या?
तो मैंने कहा- मैं तुम्हें ब्लू फिल्म कैसी होती है, वो करके बताऊंगा कि क्या होता है ब्लू फिल्म में.
तो उसकी आँखें एकदम से नशीली सी हो गईं, वो कहने लगी- ओके करो.
मैं समझ गया कि ये भी मुझसे लंड लेना चाहती है.
फिर मैं धीरे धीरे उसके पास आने लगा और फिर उसका हाथ पकड़ लिया.
उसने मुझसे कुछ नहीं कहा.
धीरे धीरे मैं उसके मम्मों को दबाने लगा. उसके चूचे काफी बड़े और सख्त थे. मुझे भी उसके चूचों को मसलने में काफी मजा आ रहा था.. और उसे भी अपने मम्मों को मुझसे दबवाने में मजा आ रहा था.. इसलिए आज वो भी मुझसे खुल कर मजा ले रही थी.
फिर मैं उसके होंठों पे किस करने लगा.. उसमें जोश आ गया था. वो मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, लेकिन उससे उत्तेजनावश बटन नहीं खुल रहे थे.
तो उसने मेरी शर्ट को फ़ाड़ दिया.
मैं भी पूरे जोश में आ गया था. मैंने भी उसका कुरता खींचते हुए उतारा. वो अपने मम्मों को छिपाने लगी.
मैंने धीरे से उसकी सलवार खोल दी. फिर उसके हाथ हटाते हुए उसकी ब्रा को भी खोल दिया. ब्रा हटते ही उसके मस्त चूचे एकदम से खुली हवा में उछलने लगे.
मैं उसके मम्मों को दबाने और चूसने लगा. वो मस्त हो चली थी और उसके कंठ से ‘आआआ.. उह्ह्ह ओह्हह आआआअ.. की आवाज निकलने लगी.
कुछ देर बाद मैंने उसे लिटा कर उसकी पेंटी भी उतार दी.
वो कहने लगी- इतनी देर में पेंटी खोल पाए.. चलो अब मैं तुम्हारी पेंट खोल देती हूँ.
उसकी चुदास सामने दिखने लगी थी. आज मुझे हैरानी हो रही थी कि इसकी शर्म किधर चली गई साली आज तो रांड जैसे बिहेव कर रही है.
उसने मेरी पेंट का बटन खोला और फिर ज़िप को खोलने लगी. मेरा लंड खड़ा हुआ था. वो मेरे लंड को सहलाने लगी और फिर मेरी आशा के विपरीत उसने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
मैं समझ गया कि इसको ब्लू-फिल्म का रंग चढ़ गया है. उसके लंड चूसने से मुझे काफी मज़ा आ रहा था.
कुछ देर बाद वो अपनी चुत खोल कर लेट गई और कहने लगी- अब डालो भी.. और कितना लंड चुसवाओगे?
मैंने लंड उसकी चुत में डाला मगर उसकी चुत इतनी कसी हुई थी कि मेरा लंड अन्दर ही नहीं जा रहा था.
वो बोली- एक काम करो, तुम अपनी एक उंगली को मेरी चुत में डालो.
मैंने वही किया, अपनी उंगली को उसकी चुत में डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ देर बाद बोली- अब अपना लंड घुसेड़ दो.
मैंने लंड हाथ में पकड़ कर चुत की फांकों में घिसा और एकदम से पेल दिया. मगर मेरा लंड अब भी चूत में नहीं जा रहा था.
मैंने दो बार कोशिश की और तीसरी बार में जैसे तैसे अपना लंड उसकी चुत में डाल दिया. इस बार चूंकि झटका जोर से लगा था और उसको लग रहा था कि अबकी बार भी लंड नहीं घुस सकेगा तो वो मुझ पर हंसे जा रही थी. लेकिन जब लंड घुस गया तो वो जोर से चिल्ला उठी- आआआहह… उह्ह्ह्ह.. मर गई मम्मी रे.. फट गई.
मैं उसकी तेज चीख से डर गया. मैंने कहा- चिल्ला क्यों रही हो.. ऐसा तो होगा ही ना?
तो बोली- नहीं विक्की मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. आह.. धीरे धीरे डालो.
मैंने कहा- वही कर रहा हूँ.
फिर मैंने लंड डाला और जोर जोर से शॉट मारने लगा.
वो चिल्लाने लगी- आआहह… ह्हह्ह स्सस्स ओह्हह्ह..
मैं फिर उसके होंठों पे किस करने लगा ताकि उसकी आवाज़ ना निकले.
मैं उसे चूमते हुए जोर जोर से झटके देने लगा. दस बारह मिनट तक शॉट मारने के बाद मेरा माल बाहर निकल गया और मैं उससे चिपक कर ढेर हो गया.
वो मुझे सहलाते हुए कहने लगी- विक्की, क्या ऐसा होता है ब्लू फिल्म में?
तो मैंने कहा- हां जान, ऐसा ही होता है.
वो बोली- मुझे बहुत मजा आया.. अब हम ये रोज करेंगे.
मैंने उससे कहा कि जब भी तेरे घर पर कोई नहीं हुआ करे, तू मुझे बुला लिया करो.
वो कहने लगी- ठीक है.. लेकिन तुम ये किसी को नहीं बताना कि हमने क्या किया.
मैंने कहा- नहीं बताऊंगा.
कुछ देर की मस्ती के बाद मैं अपने घर चला आया. फिर हमारा ये सिलसिला चलता रहा.
अब उसकी शादी हो गई है और वो मुझसे जुदा हो गई.
दोस्तो, आपको मेरी Hindi sex stories कैसे लगी
दोस्तो, मेरा नाम निखिल है और मैं पुणे का रहने वाला हूँ। वैसे मैं अभी 20 साल का हूँ और अमेरिका में पत्रकारिता की स्टडी करने आया हूँ।
वैसे मैं औसत कदकाठी वाला लड़का हूँ.. पर मेरा लंड करीब 8 इंच का है और 2.5 इंच मोटा है।
यह मेरी पहली कहानी है जो मैं आपके सामने रख रहा हूँ।
बात उन दिनों की है.. जब मैं अमेरिका में नया था और हमारे हॉस्टल में काफी लड़कियाँ थीं। मैं उनको देख हैरान था.. उनकी चूचियाँ बहुत बड़ी-बड़ी थीं। मैं कई बार उनकी बारे में सोच कर मुठ्ठ मार लेता था।
जब हमें पत्रकारिता के लिए सब्जेक्ट मिले तो मैंने एक पोर्न स्टार का सब्जेक्ट चुना। तो अब मुझे रायलेनी नामक पोर्न स्टार से मुलाकात करनी थी।
वैसे मैंने उसकी बहुत सी सेक्स मूवीज देखी थीं तो जब मुझे उसका अपॉइंटमेंट मिला.. तो मैं बहुत खुश था।
मुझे उनके ऑफिस से कॉल आया और टाइम दिया गया। मुझे रात दस बजे का टाइम दिया था.. तो मैं तैयार होकर निकला।
उसके ऑफिस पहुँचा.. तो उसकी सेक्रेटरी ने कहा- मैडम बिजी है- आप बैठो..
मैं वहाँ बैठ कर वेट करने लगा और ऐसे ही 11 बज गए। फिर उस सेक्रेटरी को अन्दर से कॉल आया और मुझे अन्दर बुलाया गया।
दोस्तों क्या बताऊँ.. अन्दर जाते ही मेरा लंड इतनी जोर से उछला.. कि मैं अन्दर सब देखता ही रह गया। सभी दीवारों पर रायलेनी की नंगी तस्वीरें लगी हुई थीं। मेरा लंड मेरे पैन्ट की अन्दर ही तम्बू हो गया था। जब मैंने उसकी तस्वीरें देखीं तभी मेरे होश उड़ गए थे।
तभी रायलेनी शायद बाथरूम से बाहर आ गई और अपनी सेक्रेटरी को फ़ोन किया और बोली- तुम अब घर जाओ।
जब मैंने उसे देखा तो देखते ही रह गया.. उसने लो कट वाला टॉप पहना था। उसमें से उसके मम्मे बड़े ही साफ दिख रहे थे।
मेरा यहाँ बहुत बुरा हाल ही रहा था और हम बातें करने लगे।
मैं- हाय
रायलेनी- हैलो..
मैं- मुझे आपके बारे में कुछ जानकारी चाहिए थी..
रायलेनी- हाँ क्यों नहीं.. प्लीज़ पूछिए..
मैं- आपने इस काम की शुरुआत कब की?
रायलेनी- जब मैं 21 साल की हुई..
इसी तरह काफी देर तक उसने मेरे सवालों के उत्तर दिए जिससे मेरा काम बन गया अब सिर्फ कुछ फोटो लेने बाकी थे।
मैं- क्या मैं आप की फोटो ले सकता हूँ?
रायलेनी- क्यों नहीं… ले लो..
मैं जब फोटो लेने के लिए उठा.. तो उसका ध्यान मेरे पैंट पर गया और उसने पूछा- तुम ठीक हो?
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वो अपनी कुर्सी से उठ कर मेरे पास आई।
वैसे ही मेरा बुरा हाल था.. जैसे ही वो मेरे पास आई मेरे तो पसीने छूटने लगे।
उसने मेरे हाथ पर हाथ रखा और कहने लगी- तुम्हारा लंड काफी बड़ा लगता है।
वो मेरे तरफ देख मुस्कुराने लगी और अपना हाथ मेरी पैंट पर रख दिया और मुझे किस किया।
मुझे बहुत डर लगा और मैं वहाँ से हट गया।
तो उसने कहा- डरो मत.. यहाँ हम दोनों के सिवा और कोई नहीं है।
उसने मेरा हाथ लिया और अपने मम्मों पर रख दिया.. तो मेरा डर भी कम हुआ और मैं धीरे-धीरे उसके मम्मों को दबाने लगा।
वो टेबल पर बैठी थी और मुझे जोर-जोर से किस किए जा रही थी। अब मैं भी उसके मम्मों को जोर-जोर से दबा रहा था और कस कर उसे किस कर रहा था।
मेरा एक हाथ उसके मम्मों पर और दूसरा उसकी चूत को सहला रहा था। वो अब बहुत गर्म हो चुकी थी और उसकी चूत से पानी निकल रहा था। वो अब नीचे आ गई और मेरे पैंट से मेरा लण्ड निकालने लगी। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए.. अब मैं भी पूरे जोश में था।
वो मेरे लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और मैं भी उसकी मुँह की चुदाई करने लगा।
वो इतना जोर-जोर से मेरा लंड अन्दर-बाहर कर रही थी कि दस मिनट में ही मेरा पानी उसके मुँह में निकल गया और वो पूरा पानी पी गई।
थोड़ी देर के बाद मेरे लंड फिर से खड़ा हो गया और रायलेनी ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए।
उसने अपने कूल्हों गाण्ड पर मस्त टैटू बनाया था। मैंने जैसे ही उसे नंगी देखा.. मैं उस पर टूट पड़ा, मैंने उसको टेबल पर लिटाया और उसका पूरा शरीर पागलों की तरह चाटने लगा।
उसकी चूत से बहुत मादक खुशबू आ रही थी। मैं भी बड़े मजे से उसकी चूत चाट रहा था और वो अपने मुँह से आवाज निकाल रही थी ‘ऊऊओह्ह ह्हह्हह ऊओया आअ.. ऊऊऊ ऊऊ ऊऊईई ईईइ..मा..’
वो बोल रही थी- फ़क मी हार्ड..
अब मैंने जरा सा थूक अपने लण्ड पर लगाया और उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया। मेरे पूरा लौड़ा एक ही बार में अन्दर चला गया। अब मैं बड़े ही मस्त तरीके से उसे चोद रहा था और वो भी काफी कामुक आवाजें निकाल रही थी ‘फक मी हार्ड.. ओह्ह.. यू आर ग्रेट फकर.. योर टूल इस सो लॉन्ग.. फक मी हार्ड..’
अब मैंने अपनी पोजीशन बदली और उसकी कुर्सी पर बैठ गया और उसे अपने लंड पर बैठने को कहा।
वो जैसे ही लंड पर बैठी.. उसके मम्मे मेरे मुँह के सामने आ गए और मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। मैं चूचियाँ चूसते-चूसते बीच में ही हल्के से काट भी लेता.. तो वो मेरे सर को अपने मम्मों के बीच दबा लेती।
उसकी काफ़ी लम्बी चुदाई के बाद वो थक गई और मेरे ऊपर से हट गई।
मैंने उससे कहा- मुझे तुम्हारी गदराई गाण्ड मारनी है।
तो वो अपनी अलमारी से एक तेल लाई और टेबल पर लेट गई। उसने वो तेल मेरे लण्ड पर और अपनी गाण्ड में लगाया और मेरे लंड अपनी गाण्ड में डालने लगी। थोड़ी दिक्कत के बाद मेरा पूरा लण्ड आराम से उसकी गाण्ड में चला गया। अब वो सीधे मेरे लंड पर बैठ गई और चुदने लगी।
थोड़ी देर बाद मेरा लंड गाण्ड से निकाल कर फिर से अपनी चूत में डाल लिया और अपनी उंगलियों से अपनी चूत सहलाने लगी और आवाजें निकालने लगी।
‘आआहह.. आआअ ऊऊहह..’
अचानक उसकी चीख निकल पड़ी और उसने अपना सारा पानी छोड़ दिया।
इधर मैं भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था.. तो मैंने उसे उठाकर टेबल पर बैठा दिया और अपना पूरा लावा उसके मम्मों और मुँह पर छोड़ दिया।
उसने मेरा लंड चाट कर साफ़ किया और खुद भी बाथरूम से साफ़ होकर आ गई।
फिर हमने कपड़े पहने।
जाते वक़्त उसने मुझे अपना कार्ड दिया और फ़ोन करने को कहा।
जाते-जाते उसने फिर एक लम्बा चुम्बन किया और चली गई।
फिर अमरीका से वापिस के बाद अब मैं पुणे में ही हूँ।
हाय मेरा नाम करण है. मैं कोटा राजस्थान Sex Stories का निवासी हूँ.
मैं आपके लिए एक नयी स्टोरी लेकर आया हूँ तो चलिए ज्यादा समय न ख़राब करते हुए कहानी पर आ जाते हैं.
यह मेरी सच्ची कहानी है.
कुछ दिनों पहले में एक महिला से मिला. उसका नाम जानवी था.
वह हमारे ऑफिस की की नयी बॉस थी और मैं उस ऑफिस में छोटा सा क्लर्क था.
जानवी काफी सुंदर नारी थी उसकी उम्र यही कोई 26 साल के लगभग होगी. उसका रंग दूध की तरह सफ़ेद था सही मायने में वह एक सुंदर हुस्न की मालकिन थी.
शुरू से ही वह मेरे काम से काफी इम्प्रेस थी और सारे ऑफिस के सामने मेरी काफी तारीफ की.
तो मैं मन ही मन सोचने लगा कि वह मुझे चाहने लगी है.
और मैं घर लौटा तो मेरी माँ की तबियत बेहद ख़राब थी.
तो मैंने ऑफिस से चार दिन की छुट्टी करने की सोच ली.
पर मैंने ऑफिस में छुट्टी की भी सूचना नहीं दी यह सोचा की जानवी मुझे कुछ नहीं बोलेगी और मुझ पर हमदर्दी जताएगी.
पर चार दिन बाद जब मैं ऑफिस पंहुचा तो मैं बस छूट जाने के कारण लेट हो गया था.
जब मैं ऑफिस पंहुचा तो ऑफिस का चपरासी मुझसे बोला- मैडम ने आपको उनके रूम में बुलाया है.
मैं टाई ठीक करता हुआ पंहुचा.
तो वह मुझे देख कर चिल्लाने लगी- रूल्स भी कुछ चीज होती है न!
मैंने माँ की तबियत ख़राब होने का एक्स्क्युज दिया तो वह बोली- तुम्हें एक ऍप्लिकेशन तो देनी चाहिए थी.
और वह मुझसे बोली कि अगली बार ऐसा नहीं होना चाहिए.
तो मैं सॉरी मैडम कह कर यह बोला- मैडम, अगली बार ऐसा नहीं होगा.
जब शाम को मैं घर जाने के लिए जब बस में बैठा और उससे बोला भी नहीं.
तभी मेरा ध्यान गया कि वह आज अपने स्टाप पर उतरी नहीं.
वह आज मेरे स्टाप पर उतरी और मुझसे आज ऑफिस में जो हुआ उसके लिए माफ़ी मांगने लगी.
और कहने लगी- अगर मैं तुम्हें नहीं डांटती तो ऑफिस के सभी लोगों को मुझ पर शक हो जाता.
तो यह सुनकर मैंने उसे माफ़ कर दिया.
फिर वो मेरे साथ चल पड़ी.
तभी उसने एक केले वाले से केले लिए और मेरे साथ वापस चल पड़ी.
मैंने उससे पूछा- यहाँ पर तुम्हारा भी कोई मिलने वाला रहता है क्या?
वो बोली- हाँ एक पागल सा लेकिन बड़ा प्यारा लड़का है. उसकी माँ की तबियत खराब है.
मैं उससे बातें कर रहा था, तभी मेरा घर आ गया तो मैं बोला- यह मुझ गरीब की कुटिया है. तुम्हें आगे जाना है क्या? यह गली काफी लम्बी है. मैं तुम्हें उस घर तक छोड़ आता हूँ जहाँ तुम्हें जाना है.
वह बोली- अरे बुद्धू … इतना भी नहीं समझे कि मैं तुम्हारे घर ही आई हूँ तुम्हारी माँ की तबियत पूछने!
मेरी माँ और बहन ने उसे बड़े सत्कार के साथ घर में बुलाया और उसे चाय और बिस्किट खिलाये.
फिर वो मेरी माँ से बात करते हुए बोली- मां जी, आज करण को काम से बाहर जाना पड़ेगा.
तो मेरी आई बोली- ठीक है बेटी, इस काम के वजह से तो मेरा घर चलता है.
वो साथ ही यह भी बोली- करण की कल ऑफिस से छुट्टी रहेगी.
तभी मैं सोचने लगा कि ऐसा कौन सा काम है जिसका जिक्र मैडम ने ऑफिस में नहीं किया.
तभी वह मुझसे उसके साथ चलने को बोली.
वह अचानक मुझे अपने घर ले गयी- तुम्हें कहीं काम से बाहर नहीं जाना है तुम्हें केवल आज रात मुझे खुश करना है.
यह सुनकर मैं मन ही मन बहुत खुश हुआ और अंदर जाते ही मैं उसे चूमने लगा.
तो वह बोली- इतनी जल्दी भी क्या है कुछ देर रुको!
और वो दौड़ कर दूसरे कमरे में चली गयी.
तभी उसके कमरे में रखा मोबाइल बजा.
मैंने फ़ोन उठाया तो एक धीरे से आवाज आयीं- क्या कर रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं.
मैंने पूछा- आप कौन हैं?
तो वह बोली- मैं तुम्हारी मैडम जानवी हूँ. मैं अंदर के फ़ोन से बोल रही हूँ.
और वह कहने लगी- अब हम कुछ देर ऐसे ही बात करेंगे.
मैंने कह दिया- ठीक है.
तो वह अचानक मुझे बोली- तुम अपने कपड़े उतारो और मैं भी उतारती हूँ.
मैंने अपने कपड़े उतारे और बोला- अब बोलो? मैंने कपड़े उतार दिए हैं.
वह बोली- कि सामने ड्रोर में एक स्प्रे पड़ा है उसे अपने लंड पर लगा लो.
मैंने जैसे ही उसे अपने लंड पर लगाया, मुझे अपने लंड पर ठंडक का अहसास हुआ और मेरा लंड लोहे कि तरह कड़क हो गया.
फिर वह फ़ोन पर मुझसे बोली- अब उस अलमारी में जो तुम्हारे पीछे है उसमें एक पट्टा पड़ा है, उसे गले में बांध लो.
मैं बोला- क्यूँ?
तो वो बोली- सवाल मत करो. मैं जैसा बोलती हूँ वैसा करो.
और मैंने वह पट्टा अपने गले में बांध लिया.
वह बोली- अब तुम मेरे पास आओ और मेरे साथ सेक्स करो.
मैं जैसे ही उसके पास जाने के लिए उठा तो वह बोली- ऐसे नहीं … जैसे कि एक कुत्ता चलता है, वैसे अपने हाथ और पैरों पर चलकर आओ.
मैं जैसे ही कमरे में घुसा तो मैं देख कर दंग रह गया.
मैडम बिलकुल निर्वस्त्र थी और उनके साथ चार और आदमी थे … वो भी बिना कपड़ों के … और सबने मेरी तरह गले में पट्टे पहन रखे थे.
और मैडम ने भी एक पट्टा पहन रखा था.
मैडम के पट्टे में हीरे लगे हुए थे. मैंने पहुँचते ही देखा कि मैडम चार लोगों के साथ सेक्स का मजा ले रही थी. एक उन्हें लंड चुसा रहा था, दूसरा उनके स्तनों से स्तनपान कर रहा था. तीसरा उनकी गांड और चौथा उनकी चूत में लंड डाले हुए था.
मैं देखकर दंग रह गया.
वो मुझे देख कर मुख से लंड निकालते हुए बोली- आओ करण, ये मेरी कुत्ता गैंग है. मैं इस गैंग की प्रधान और सेक्सी कुतिया हूँ. आज से तुम भी इस गैंग के भी सदस्य हो. कल से तुम पांचो मुझे सेक्स का मजा एक साथ देना.
फिर वह उन चारों आदमियों से कु कु कु कु करके बाहर जाने को कहने लगी.
और वो भी इसका जवाब भों भों भों भों करके बाहर चले गए.
फिर वह मुझसे बोली- तुम भी कल से कुत्तों की तरह बात करना.
इतना कह कर उसने मेरा लंड मुह में डाला और चूसने लगी.
फिर मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर रख दिया और मैं उसकी चूत चाट रहा था.
तो वह कूं कूं कूं कूं की आवाज के साथ मेरा साथ देने लगी.
उसके बाद मेरे सामने कुतिया की तरह खड़ी होकर बोली- जैसे एक कुत्ता कुतिया को चोदता है, वैसे ही तुम मुझे चोदो.
फिर मैंने कुत्ते की तरह ही उसे रात भर में चार बार चोदा.
अगले दिन से हम सब कुत्ता गैंग के सदस्य उस प्रधान कुतिया (मेरी बॉस) की रोज चुदाई करते हैं.
अब मुझे इस तरह की चुदाई में बहुत मजा आता है.
कुछ दिनों बाद मेरी शादी है और मैं मेरी पत्नी की भी एक कुतिया की तरह चुदाई करूँगा. Sex Stories
रात के ११ बज़ रहे Sex Stories थे। मौसी के कमरे में ए. सी. चल रहा था मैं और मोनी वहां एक नेकर पहन कर बैठ गई। मौसी आई और वहां लेट गई और हमें अगल बगल में चिपका कर लिटा मेरे चूतड़ों पर हाथ लगा कर बोली,”अब चुदने को तैयार हो जा !”
मौसी ने फ़ोन उठाया और बोली,”मोंटी साहब कैसे हो ? कब आ रहे हो? नई रंडी आई है इसकी चूत का उदघाटन करवाना है। मोनी कुतिया भी तुम्हारा लौड़ा खाने को बेताब हो रही है !”
कुछ देर बात हुई फिर मौसी ने फ़ोन रख दिया और बोली,”मोंटी साहब आधे घंटे में आ रहे हैं, चोद चोद कर तुझे मस्त कर देंगे। चल ! तब तक तू मेरी चूत में यह मोटा केला कर और मोनी मेरी चूचियाँ सहलाएगी !”
मौसी ने मेरे हाथ में एक १० इंच लम्बा और ४ इंच मोटा केला पकड़ा दिया। मौसी की चूत भोंसड़ा हो रही थी। उनकी चूत में केला बिलकुल फिट बैठ रहा था। मैंने मौसी की चूत में केला आगे पीछे करना शुरू कर दिया। मोनी उनकी चूचियाँ दबा रही थी। मौसी हल्की हल्की सिस्कारियाँ लेने लगी थी।
मौसी के कमरे में कुछ हल्ले की आवाज़ सी सुनाई दी। मौसी ने राजू को बुलाया और पूछा,”क्या बात है? हल्ला क्यों हो रहा है?”
राजू बोला,”ये सीमा है, साली बिकी तो १००० में है, ग्राहक गांड मारना चाह रहा है तो लड़ रही है।”
मौसी बोली,”कुतिया, एक तो सही रेट पर बिक नहीं रही, ऊपर से आज साली के रेट ठीक लगे हैं तो कोठे का माहौल ख़राब करती है। तू ऐसा कर पहले ग्राहक को बुला, फिर कुतिया को नंगी करके भेज और सामने सीमा बाई के कोठे से हब्शी को बुला ले। आज साली की गांड हब्शी से फड़वाती हूँ !”
राजू ने ग्राहक को अंदर भेज दिया। मैं और मोनी मौसी की चूत में केला कर रहे थे। सामने मौसी चूत चोड़ी कर के लेटी हुई थीं ग्राहक को देख कर मैं रूक गई। मौसी बोली,,”कुतिया रुक क्यों गई अपना काम जारी रख।”
मौसी ग्राहक से बोली,”अरे साहब क्यों नाराज हो रहे हो ? मेरे कोठे पर चुदाई का मज़ा न मिले ऐसा हो ही नहीं सकता। टॉप की रंडी दूँगी, बिलकुल फ्री। दोनों छेद फाड़ दियो कुतिया के।”
मौसी ने राजू से पूछा,”कोई लोंडिया खाली हुई या नहीं?”
राजू बोला,”शोभा खाली है इस समय !”
मौसी ने कहा,”शोभा को इसे सौंप और उससे कहना कि मौसी के स्पेशल ग्राहक हैं, पूरे मजे देना है, जैसे ये चाहें। चल राजा जा मजे कर और राजू तू सीमा को नंगी कर के मेरे पास भेज इस को मजा मैं चखाती हूँ।”
राजू और पिंटू सीमा को ले आया। सीमा पूरी नंगी थी। मौसी ने हम दोनों को हटाया। मौसी उठी और उन्होंने सीमा के गाल पर तीन चार थप्पड़ जड़ दिए और उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया उसके चूतड़ों पर ४-५ लातें मारी। मौसी चिल्ला रही थी,”हरामिन रंडी है तू, सारे छेदों में लंड खाना पड़ेगा तुझे कुतिया ! गांड मरवाने में नखरे करती है। आज तेरी इतनी गांड फड़वाती हूँ कि तू जिन्दगी भर याद रखेगी !”
सीमा रो रही थी। मौसी मेरी और मोनी की तरफ देखकर बोली,”तुम दोनों राजू और पिंटू के लौड़े चूस कर खड़े करो इस की गांड में घुसवाउंगी। साली हिरोइन बनती है !”
मौसी लकड़ी के डंडे से सीमा को पीट रही थी। मौसी ने उसके बाल खींचे और बोली,”चल घोड़ी बन। तेरी गांड में लंड डलवाती हूँ !”
सीमा डर के घोड़ी बन गई। मौसी ने उसकी गांड पर ढेर सारा थूक डाल दिया। मौसी के भयानक रूप से मैं भी डरी हुई थी और राजू का डर कर लपालप लौड़ा चूसे जा रही थी। मौसी ने राजू को इशारा किया और बोली इसकी गांड का छेद चोड़ा कर फिर हब्शी आ रहा है उससे फड़वाती हूँ। राजू ने मेरे मुँह से लौड़ा निकला और घोड़ी बनी हुई सीमा की गांड पर लगा दिया और उसकी गांड में अपना मोटा नंगा लंड लगाकर जोर से झटका दिया। आधा लंड गांड में घुस गया। सीमा जोर से चिल्ला उठी,”मर गई ! उई मर गई ! छोड़ कुत्ते छोड़ ! मुझे मत चोद !” लेकिन राजू ने जोर से लंड उसमें पूरा ठोंक दिया और अपने लंड को तेजी से उसकी गांड में आगे पीछे करने लग रहा था।
थोड़ा चिल्लाने के बाद सीमा सिसकारी लेती हुई गांड मरवाने लगी । सीमा की सिस्कारियाँ निकल रही थीं। मौसी ने राजू से कहा तू अब लंड निकाल और इसकी गांड वाला लंड इसके मुँह में डाल। सीमा के मुँह पर ले जाकर राजू ने अपना लंड रख दिया लेकिन सीमा मुँह नहीं खोल रही थी। मौसी ने पिंटू के मुँह से सिगरेट ले कर सीमा की गांड में छुला दी बोली,”कुतिया तेरी जैसे हजारों मैंने रंडी बना दीं और तू हिरोइन बन रही? चुपचाप लंड चूस ! वरना तेजाब से मुँह और जला दूँगी !”
सीमा के चीखने की आवाज़ नीचे गली तक गई होगी। उसने मुँह खोल के राजू का लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। इस बीच मौसी ने पिंटू को सीमा की गांड मारने का आदेश दे दिया। पिंटू एक वफादर कुत्ते की तरह सीमा की गांड मारने लगा।
सीमा की गांड का ठुकना जारी था तभी एक अफ्रीकन हब्शी कमरे में आया। मौसी ने हब्शी को अपनी बाँहों में ले लिया और बोली,” राजा मेरे कोबरा ! आज तू इस कुतिया सीमा को बजा ! साली रंडी मेरा कहना नहीं मानती।”
मेरी तरफ देखकर मौसी मुझसे बोली,” कुतिया, जरा मेरे कोबरा का लौड़ा चूस !”
हब्शी का नाम कोबरा था। उसने अपनी पैन्ट उतार दी। नीचे कुछ पहन नहीं रखा था। उसका ठंडा लौड़ा भी ६ इंच लम्बा होगा पूरा काला लंड था। मैं मौसी का भयानक रूप देखकर बहुत डरी हुई थी। मैंने झुककर कोबरा का लौड़ा अपने मुँह में डाल लिया और उसे आगे पीछे मुँह कर के चूसने लगी। थोड़ी देर में ही लंड ने बड़ा विकराल रूप ले लिया वो बहुत लम्बा हो गया था और ४ इंच से जयादा मोटा हो रहा था। मेरा मुँह लंड से बुरी तरह भर गया था। लंड १० इंच से ऊपर लम्बा हो रहा था। पूरा मेरे मुँह में नहीं आ रहा था। कोबरा मेरे चूतड़ दबा रहा था। मुझसे बोला- ऊपर ऊपर चूस तू कुतिया बहुत चिकनी है, तेरा माल बिलकुल ताजा है। कोबरा का लंड ११ इंच लम्बा और ५ इंच मोटा होगा। मैं यह सोच कर काँप रही थी कि अगर इस हब्शी का लंड मेरी चूत में घुस गया तो मैं तो मर ही जाउंगी ।
मौसी ने कोबरा को बुला लिया और बोली इस सीमा की चूत और गांड बजा ! साली को बताती हूँ रंडी क्या होती है। मौसी ने पिंटू को हटा दिया और सीमा को सीधा खड़ा कर दिया। सीमा की आँखों के आगे हब्शी का प्रचंड लंड लहरा रहा था।
मौसी मुस्कराते हुए बोली,”घुसवाने के लिए तैयार हो जा ! पूरे २० दिन में तूने २०००० भी कमा के नहीं दिए। सोच रही होगी २-३ दिन में दूसरे कोठे पर भाग जायेगी। कुतिया मौसी के कोठे पर धंधा न करने और ग्राहकों को तंग करने का मज़ा चखाती हूँ।”
सीमा मौसी के पैरों पर गिर गई,” मौसी मुझे माफ़ करो, मुझे छोड़ दो ! जैसा तुम कहोगी वैसा करूंगी।”
मौसी कुटिलता से मुस्करा रही थी। हब्शी ने पीछे आकर सीमा की चूत में लौड़ा लगा दिया और एक झटके में लौड़ा ३-४ इंच घुसा दिया। सीमा जोर से चिल्ला उठी- उई मर गई… मर गई… मर गई।
लेकिन हब्शी और मौसी मुस्करा रहे थे। हब्शी ने जोर से झटका मारा और लंड ८-९ इंच अंदर पेल दिया सीमा के चीखने की आवाजें तेज हो गई, वो चिल्ला रही थी,” मर गई, मर गई, उई मत चोदो राजा ! लौड़ा निकालो ! फट गई फट गई उई उई !!!! बहुत दर्द हो रहा है छोड़ो ! मुझे छोड़ो! मुझे मत चोदो मर गई मर गई बहुत दर्द हो रहा है।”
मौसी ने मेरे चूतड़ों पर हाथ मारा और बोली,”साली की जब गांड फटेगी तब देखियो कैसे रोती है अभी तो चुद रही है तब इतना चिल्ला रही है !”
हब्शी ने कस कर सीमा की कमर पकड़ रखी थी और उसको बुरी तरह से ठोंके जा रहा था। मौसी बोली,”कोबरा, कुतिया की गांड़ मार ! आज इस हरामिन की चूत और गांड दोनों का भोंसड़ा करवा के ही छोडूंगी।”
हब्शी ने लंड बाहर खींच लिया और उसकी गांड पर लंड रख दिया सीमा चिल्ला उठी- नहीं मौसी ! मुझे छोड़ दो नहीं… नहीं। लेकिन रंडी कब तक खैर मनाएगी और आज साली का दिन ख़राब था। हब्शी ने ३ इंच लंड उसकी गांड में घुसा दिया और उसकी चूचियाँ कस कस कर मसल दीं। कोबरा पूरा गरम हो रहा था उसने गांड पर कस कर झटका मारा और अपना लंड और अंदर उसकी गांड में घुसा दिया। सीमा चिल्ला रही थी, अभी कोबरा अपना आधा लंड अंदर डाल कर ही सीमा की गांड मार रहा था। सीमा की दर्द भरी आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मुझे पता चल गया था कि औरत के लिए रंडी सबसे बड़ी गाली क्यों होती है.. मुझे सीमा पर दया आ रही थी लेकिन डर के मारे मैं कुछ नहीं कह पा रही थी।
कुछ देर बाद मौसी ने हब्शी से कहा,”अब इसे छोड़ दे ! अब ये कभी ग्राहक से बद्तमीजी नहीं करेगी।”
सीमा दर्द से जमीन पर लेट गई। मौसी पिंटू से बोली,”साली को बाहर खटिया पर डाल दे और हकीम को बुलाकर इसकी गांड पर लेप लगवा दियो ! कुतिया साली हिरोइन बन रही थी।”
हब्शी का लंड लोहे की रॉड की तरह ११ इंच लम्बा खड़ा हुआ था। मौसी हब्शी से बोली- थोड़ा हमारी इस नई कुतिया की चूत और गांड पर अपना लंड फिरा दे। मैं डर गई मैं बोली,”नहीं मौसी नहीं ! मेरी चूत में इस राक्षस का लंड मत डलवाओ ! मैं मर जाउंगी !”
मौसी मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरती हुई बोली,”तुझे मरने थोड़ी दूँगी ! तू तो दूध देने वाली गाय है, अभी तो तुझे चुदने के लिए भी बैठाना है ! चल जरा झुक तो, बड़ा मजा आएगा !”
मैं डर के मारे झुक नहीं पा रही थी। मौसी ने वहां पड़ी एक लकड़ी उठाई और जोरों से मेरे चुत्तड़ों पर मारी और गुर्राकर बोली,”कुतिया घोड़ी बनती है या नहीं?”
हब्शी मुस्करा रहा था। मैं मौसी के डर से झुक गई। मेरा बदन पूरा पसीने पसीने हो रहा था। हब्शी ने पीछे से आकर मेरी चूचियाँ अपने हाथों मैं पकड़ लीं और धीरे धीरे मसलने लगा। उसका मोटा लंड मेरी चूत पर फिर रहा था। उसने आधा इंच लंड का सुपाड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। मेरी आँखों के आगे तारे घूम गए। मैं जोर से चिल्ला उठी,”उई उई…. उई मर गई…. मर गई…..”
मौसी ने हब्शी को उठा दिया और बोली- साली की फट गई तो रेट अच्छे नहीं मिलेंगे ! तू ऐसा कर, इसकी गांड पर लंड फिरा। हब्शी अपने हाथ से लंड पकड़ कर मेरी गांड में फिराने लगा अचानक से मेरी गांड में कुछ घुसा, मैं जोर से चिल्ला उठी- उई मेरी फट गई। सब लोग जोरों से हंस पड़े, मौसी बोली,”कुतिया चल उठ !”
मैंने उठकर देखा तो मौसी एक पतली मोमबत्ती लिए खड़ी थीं जिसे उन्होंने मेरी गांड में डाल दिया था। मौसी बोली,”अब असली धंधे के लिए तैयार हो जा रंडी। तुझे मैं खास ग्राहकों से चुदवाऊँगी ! अगर नखरे किये तो हब्शी का लंड सीमा की तरह तेरी गांड और चूत में घुसेगा !”
मैं समझ गई कि मौसी ने यह नाटक इसलिए किया था ताकि मैं अब चुदते समय नखरे न करुँ।
मौसी बोली- कोबरा मेरे राजा ! थोड़ा मुझे चोद दे ! अब तो बस तेरे लौड़े से ही चुदवाने में मजा आता है। मौसी पलंग पर लेट गई और अपनी दोनों टाँगें फ़ैला दीं। मौसी की चूत अंदर तक खुली दिख रही थी। हब्शी ने आगे बढ़कर अपना लौड़ा मौसी की चूत में पेल दिया और मौसी को चोदना शरू कर दिया। कोबरा का लंड इतना तगड़ा था कि मौसी भी हलके हलके सिसकारी ले रही थीं और चिल्ला रही थी,” राजा मजा आ गया ! और चोद जोरों से चोद मेरे शेर ! तेरे से ही चुदने में मजा आता है अब ! चोद ! मादर चोद चोद ! बहुत मजा आ रहा है।”
मैं और मोनी मौसी की साइड में लेटकर मौसी के बूब्स दबा रहे थे। कोबरा १५ मिनट तक मौसी की चूत चोदता रहा। मौसी बोली,”राजा, अपने लंड का रस मेरे मुँह में पिलायियो ! क्या मस्त लौड़ा है तेरा कुत्ते !”
हब्शी मौसी को जोर जोर से धक्के मार रहा था कुछ देर बाद हब्शी ने अपना लौड़ा निकाल लिया और मौसी के मुँह पर जाकर दो झटके मारे, मौसी ने पूरा मुँह खोल दिया, हब्शी के गाढ़े वीर्य ने मौसी के मुँह को पूरा भर दिया। मौसी ने इशारे से कोबरा को मेरे और मोनी के मुँह में भी लंड रस डालने को कहा।
हम दोनों मौसी की कुतिया थी ही। मैंने और मोनी ने अपने मुँह खोल दिए। कोबरा ने मेरे और मोनी के मुँह भी अपने वीर्य से भर दिए। मौसी लपालप उसका पूरा रस पी गई। मैंने और मोनी ने लंड रस मिल्क शेक की तरह मुँह में ले लिया। मुझे हब्शी के लौड़े का रस बहुत स्वादिष्ट लगा। इसके बाद मौसी ने अपने चेहरे पर गिरा हुआ रस भी हम दोनों से चटवाया।
मौसी उठी और हब्शी को गले से लगा कर बोली- राजा तूने मस्त कर दिया ! और उन्होंने अपने पलंग के नीचे से निकाल कर १००० रु हब्शी को पकड़ा दिए और बोली- ले राजा तेरा इनाम !
हब्शी बोला- मौसी गांड तो नहीं मरवानी?
तो मौसी बोली,”कुत्ते, मौसी से मजाक मत करा कर ! वर्ना साले चरस जेब में डाले घूमता रहता है, अभी जेल में डलवा दूँगी !”
कोबरा मौसी के पैरों में गिर पड़ा और बोला,”मौसी मुझे माफ़ करना, तू तो मेरी माँ जैसी है।”
मौसी कुटिल मुस्कराहट से बोली,”मादरचोद ! अब तू चुपचाप यहाँ से चला जा !”
थोड़ी देर बाद राजू अंदर आया और बोला- मौसी मोंटी साहब आ गए हैं, ऊपर कमरे में बैठे हैं।
मौसी बोली,”चल अब चुदने को तैयार हो जा ! अभी १२ बजने को हैं अब पूरी रात चुदवाईयो। बहुत अच्छी चूत बजाते हैं मोंटी साहब।”
मौसी ने एक ट्यूब निकल कर मेरी चूत में डालकर पिचका दी और बोली,”चल उलटी हो एक तेरी गांड में पिचका देती हूँ, चुदने में दर्द कम होगा।”
मौसी ने मुझे उल्टा किया और दूसरी ट्यूब मेरी गांड के अंदर डालकर पिचका दी और अपनी उँगलियों से मेरे दोनों छेदों की मालिश कर दी। मुझे और मोनी को एक एक पतली मैक्सी पहना दीं और बोली,”चलो अब अपने सेठों के पास जैसा मैंने बताया है वैसा करोगी तो मज़े करोगी नहीं तो दोनों के चूतड़ मार मार कर लाल कर दूँगी और हब्शी का लंड तुम दोनों की गांड और चूत में डलवाऊँगी !”
साथियों ! मौसी ने मुझे कोठे की रंडी बना दिया। अब इस सीरीज़ की आखरी कहानी,” चुद गई कुतिया कोठे पर” में शीघ्र ही पढ़िये कि आपकी प्यारी कुतिया की कैसे मौसी ने चूत और गांड फ़डवा कर भोसड़ी बना दी।
हालांकि यह कहानी काल्पनिक है पर मुझे यकीन है आपको जरुर पसंद आई होगी। आपको यह कहानी कैसी लगी मेल करें।
आपकी उषा मस्तानी Sex Stories
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