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Antarvasna

मेरा नाम रोशन है। मेरी Antarvasna शादी बड़ौदा में एक साधारण परिवार में हुई थी। मैं स्वयं एक दुबली पतली, दूध जैसी गोरी, और शर्मीले स्वभाव की पुराने संस्कारों वाली लड़की हूँ। घर का काम काज ही मेरे लिये लिये सब कुछ है। पर काम से निपटने के बाद मुझे सजना संवरना अच्छा लगता है। रीति रिवाज के मुताबिक दूसरों के सामने मुझे घूंघट में रहना पड़ता है।

काम से हम लोग स्वर्णकार हैं। मेरे ससुर और पति कुवैत में काम करते हैं। उनकी कमाई वहाँ पर अच्छी है। कुवैत से दोनों मिलकर काफ़ी पैसा हमें भेज देते हैं…उससे यहाँ पर हमने अपना मकान का विस्तार कर लिया है।

मेरे पति के एक मित्र साहिल पास के गांव के हैं वो हमारे घर अक्सर आ जाते हैं और चार पांच दिन यहाँ रह कर अपना काम करके वापस चले जाते हैं। वो भी स्वर्णकार हैं। घर में बस तीन सदस्य ही हैं, मैं, मेरी सास और और मेरी छोटी सी ननद जो मात्र 13 साल की थी। साहिल हमारा हीरो है… वो हमारे यहाँ पर क्या क्या करता था… और हम उसके साथ कैसे मजे करते थे… आईये, मैं आपको आरम्भ से बताती हूँ…

मुझे इस घर में आये हुए लगभग चार माह बीत चुके थे…यानि मेरी शादी हुए चार माह ही बीते थे। आज साहिल भी गांव से आया हुआ था। मैंने उसे पहली बार देखा था। मेरी ही उम्र का था। उसे मेरी सास कमला ने उसे एक कमरा दे रखा था वो वहीं रहता था। कमला ने मेरा परिचय उससे कराया। मैंने घूंघट में से ही उन्हें अभिवादन किया।

उसके आते ही मुझे कमला ने पास ही सब्जी मण्डी से सब्जी लाने भेज दिया। मैं जल्दी से बाहर निकली और थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे अचानक याद आया कि कपड़े भी प्रेस कराने थे…मैं वापस लौट आई।

कमला और साहिल दोनों ही मुझे नजर नहीं आये… साहिल भी कमरे में नहीं था। मैं सीधे कमला के कमरे की तरफ़ चली आई… मुझे वहाँ पर हंसने की आवाज आई… फिर एक सिसकारी की आवाज आई… मैं ठिठक गई।

अचानक हाय… की आवाज कानों से टकराई… मैं तुरंत ही बाहर आ गई मुझे लगा कि मां अन्दर साहिल के कुछ ऐसा वैसा तो नहीं कर रही है।
मैंने बाहर बरामदे में आकर आवाज लगाई…’मां जी…! कपड़े कहाँ रखे हैं?’

कमला तुरन्त अपने कमरे में से निकल आई… साहिल कमरे में ही था। अपने अस्त व्यस्त कपड़े सम्हालती हुई बाहर आ कर कहने लगी- ये बाहर ही तो रखे हैं…’

उनके स्तनों पर से ब्लाऊज की सलवटें बता रही थी कि अभी बोबे दबवा कर आ रही हैं…उनकी आंखें सारा भेद खोल रही थी। आंखो में वासना के गुलाबी डोरे अभी भी खिंचे हुए थे। मुझे सनसनी सी होने लगी… तो क्या कमला… यानी मेरी सास और साहिल मजे करते हैं…?

मैं भी घर में नई थी…मेरा पति भी बाहर था, मैं भी बहुत दिनों से नहीं चुदी थी, मेरा मन भी भारी हो उठा…मन में कसक सी उठने लगी… मां ही भली निकली… पति की दूरी साहिल पूरी कर देता है… और मैं… हाय…

मैं सब्जी लेकर और दूसरे काम निपटा कर वापस आ गई थी। सहिल और कमला दोनों ही खुश नजर आ रहे थे… क्या इन दोनों ने कुछ किया होगा। मेरे मन में एक हूक सी उठने लगी।

मुझे साहिल अब अचानक ही सुन्दर लगने लगा था… सेक्सी लगने लगा था। मैं बार बार उसे नीची और तिरछी नजरों से उसे निहारने लगी। कमला भी उसके आने के बाद सजने संवरने लगी थी। 40 वर्ष की उम्र में भी आज वो 25 साल जैसी लग रही थी। मेरा मन बैचेन हो उठा…भावनायें उमड़ने लगी… मन भी मैला हो उठा।

दिन को सभी आराम कर रहे थे… तभी मुझे कमला की खनकती हंसी सुनाई दी। मैं बिस्तर से उठ बैठी। धीरे से कमरे के बाहर झांका फिर दबे कदमों से कमला के कमरे की तरफ़ बढ़ गई। दरवाजे खिड़कियाँ सभी बन्द थे… पर मुझे साईड वाली खिड़की के पट थोड़े से खुले दिखे।

मैंने साईड वाली खिड़की से झांका तो मेरा दिल धक से रह गया। कमला ने सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाऊज पहना था… सहिल बनियान और सफ़ेद पजामा पहना था… कमला अपने पांव फ़ैला कर लेटी थी और साहिल पेटीकोट के ऊपर से ही अपना लण्ड पजामे में से कमला की चूत पर घिस रहा था… कमला सिसकारी भर कर हंस रही थी…

मेरे दिल की धड़कन कानों तक सुनाई देने लगी थी। अब साहिल टांगों के बीच में आकर कमला पर लेटने वाला था… कमला का पेटिकोट ऊपर उठ गया… पजामें में से साहिल का लण्ड बाहर आ गया और अब एक दूसरे को अपने में समाने की कोशिश करने लगे…
अचानक दोनों के मुख से सिसकारी निकल पड़ी… शायद लण्ड चूत में घुस चुका था… बाहर से अब साहिल के चूतड़ो के अलावा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। मेरे पांव थरथराने लगे थे।

मैं दबे पांव अपने कमरे में आ गई… मेरा चेहरा पसीने से नहा गया था। दिल की धड़कने अभी भी तेज थी। मैं बिस्तर पर लोट लगाने लगी। मैंने अपने उरोज दोनों हाथो से दबा लिये… चूत पर हाथ रख कर दबाने लगी।

फिर भाग कर मैं बाहर आई और एक लम्बा सा बैंगन उठा लाई। मैंने अपना पेटिकोट उठाया और बैंगन से अपने आपको शांत करने का प्रयत्न करने लगी। कुछ ही देर में मैं झड़ गई।

रात हो चुकी थी। लगता था कि कमला और सहिल में रात का प्रोग्राम तय हो चुका है। दोनों ही हंस बोल रहे थे…बहू होने के कारण मुझे घूंघट में ही रहना था… मैं खाना परोस रही थी… सहिल की चोरी छुपे निगाहें मुझे घूरती हुई नजर आ जाती थी। मैं भी सब्जी, रोटी के बहाने उसके शरीर को छू रही थी… घूंघट में से मेरी बड़ी बड़ी आंखें उसकी आंखों से मिल जाती थी।

मेरी हल्की मुस्कुराहट उसे आकर्षित कर रही थी… मेज़ के नीचे से कमला और साहिल के पांव आपस में टकरा रहे थे… और खेल कर रहे थे… ये देख कर मेरा मन भी भटकने लगा था कि काश…मेरी भी ऐसी किस्मत होती… कोई मुझे भी प्यार से चोद देता और प्यास बुझा देता…

रात को सोने से पहले मैं पेशाब करने बाहर निकली तो साहिल बाहर ही बरामदे में खड़ा था। मैं अलसाई हुई सी सिर्फ़ पेटिकोट और बिना ब्रा की ब्लाऊज पहले निकल आई थी।

साहिल की आंखे मुझे देखते ही चुंधिया गई… दूध सा गोरा रंग… छरहरी काया… ब्लाऊज का एक बटन खुला हुआ… गोरा स्तन अन्दर से झांकता हुआ… बिखरे बाल… वह देखता ही रह गया।

उसे इस तरह से निहारते हुए देख कर मैं शरमा गई… और मेरी नजरें झुक गई…’सहिल जी… क्या देख रहे हैं… आप मुझे ऐसे मत देखिये…’ मैं अपने आप में ही सिमटने लगी।

‘आप तो बला की खूबसूरत हैं…’ उसके मुख से निकल पड़ा।
‘हाय… मैं मर गई…!’ मैं तेजी से मुड़ी और वापस कमरे में घुस गई… मेरी सांसे तेज हो उठी… मैंने अपनी चुन्नी उठाई और सीने पर डाल ली… और सर झुकाये साहिल के पास से निकलती हुई बाथ रूम में घुस गई।

मैं पेशाब करना तो भूल ही गई…अपनी सांसों को…धड़कनो को सम्हालने में लग गई… मेरी छाती उठ बैठ रही थी… मैं बिना पेशाब किये ही निकल आई। साहिल शायद मेरा ही बरामदे में खड़ा लौटने का इन्तज़ार कर रहा था। मैंने उसे सर झुका कर तिरछी नजरों से देखा तो मुझे ही देख रहा था।

‘सुनो रोशन…!’
मेरे कदम रुक गये…जैसे मेरी सांस भी रुक गई… धड़कन थम सी गई…
‘जी…’
‘मुझे पानी पिलायेंगी क्या…?

‘जी…’ मेरे चेहरे पर पसीना छलक उठा… मैं पीछे मुड़ी और रसोई के पास से लोटा भर लाई…मैंने अपने कांपते हाथ साहिल की तरफ़ बढा दिये… उसने जानबूझ कर के मेरा हाथ छू लिया।

और मेरे कांपते हाथों से लोटा छूट गया… मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे ऊपर उठाई और साहिल की तरफ़ देखा…तो वो एक बार फिर मेरी आंखो में गुम सा हो गया… मैं भी एकटक उसे देखती रह गई… मन में चोर था… इसलिये साधारण व्यवहार भी कठिन लग रहा था।
साहिल का हाथ अपने आप ही मेरी ओर बढ़ गया… और उसने मेरे हाथ थाम लिये… मैं साहिल में खोने लगी… मेरे कांपते हाथों को उसने एकबारगी चूम लिया…

अचानक मेरी तन्द्रा टूटी… मैंने अपना हाथ खींच लिया…हाय…कहते हुये कमरे में भाग गई और दरवाज़ा बन्द कर लिया। दरवाजे पर खड़ी आंखें बन्द करके अपने आपको संयत करने लगी… जिन्दगी में ऐसा अहसास कभी नहीं हुआ था… मेरे पांव भी थरथराने लगे थे… मैं बिस्तर पर आकर लेट गई। नींद आंखों से कोसों दूर थी। देर तक जागती रही। समय देखा… रात के बारह बज रहे थे…

उस समय तो मैं पेशाब नहीं कर पाई थी सो मैंने इस बार सावधानी से दरवाजा खोला और इधर उधर देखा… सब शान्त था… मैं बाहर आ कर बाथरूम चली गई। बाहर निकली तो मुझे कमला के कमरे की लाईट जली नजर आई… और मुझे लगा कि साहिल भी वहीं है…
मैं दबे कदमों से उसी खिड़की के पास आई… अन्दर झांका तो साहिल पहली नजर में ही दिख गया। कमला साहिल की गोदी में दोनों पांव उठा कर लण्ड पर बैठी थी…शायद लण्ड चूत में घुसा हुआ था। दोनों मेरी ही बातें कर रहे थे…

‘मां जी… कोई मौका निकाल दो ना… बस रोशन को चोदने को मिल जाये…!’
‘उह… ये थोड़ा सा बाहर निकालो… जड़ तक बैठा हुआ है… रोशन तो बेचारी अब तक ठीक से चुदी भी नहीं है…!’
‘कुछ तो करो ना…’
‘अरे तू खुद ही कोशिश कर ले ना… जवान चूत है… पिघल ही जायेगी… फिर चुदने की उसे भी तो लगी होगी… ऐसा करना कि मुझे सवेरे काम से जाना है दोपहर तक आऊँगी…’
‘तो क्या…!’

‘अरे उसे दबोच लेना और चोद देना…फिर मैं तो हूँ ही…समझा दूंगी… हाय रे अन्दर बाहर तो कर ना…! चल बिस्तर पर आ जा…!’
कमला धीरे से उठी…साहिल का लम्बा सा लण्ड चूत से बाहर निकल आया…

हाय रे इतना मोटा और लम्बा लण्ड… मेरी चूत पनियाने लगी… उनके मुँह से मेरे बारे में बाते सुन कर एक बार फिर मेरी दिल की धड़कन बढ़ गई। दिल को तसल्ली मिली कि शायद कल मैं चुद जाऊँ… सोचने लगी कि जब साहिल मेरे साथ जबरदस्ती करेगा तो मैं चुदवा लूंगी और अपनी प्यास बुझा लूंगी।

पलंग की चरमराहट ने मेरा ध्यान भंग कर दिया, साहिल कमला पर चढ़ चुका था, उसका मोटा लण्ड उसकी चूत पर टिका था…

‘चल अन्दर ठोक ना… लगा दे अब…’ और फिर सिसक उठी, लण्ड चूत के भीतर प्रवेश कर चुका था।

मेरी चूत में से पानी की दो बूंदे टपक पड़ी… मैंने अपने पेटीकोट से अपनी चूत रगड़ कर साफ़ कर ली… मेरा मन पिघल उठा था… हाय रे कोई मुझे भी चोद दे… कोई भारी सा लण्ड से मेरी चूत चोद दे… मेरी प्यास बुझा दे…

अन्दर चुदाई जोरदार चालू हो चुकी थी। दोनों नंगी नंगी गालियो के साथ चुदाई कर रहे थे- हाय कमला… आज तो तेरी भोसड़ी फाड़ डालूंगा… क्या चिकनी चूत है…!’

‘पेल हरामी… ठोक दे अपना लण्ड…चोद दे साले…’ दोनों की मस्त चुदाई चलती रही… एक हल्की चीख के साथ कमला झड़ने लगी… मेरी नजरें उनकी चुदाई पर ही टिकी थी… साहिल भी अब अपना वीर्य कमला की चूत पर छोड़ रहा था।

मैं दबे पांव अपने कमरे में लौट आई… मेरी स्थिति अजीब हो रही थी। क्या सच में कल मैं चुद जाऊँगी…कैसा लगेगा… जम कर चुदवा लूंगी…

सोचते सोचते मेरी आंख जाने कब लग गई और मैं सपनों में खो गई……सपने में भी साहिल मुझे चोद रहा था… मुझ पर वीर्य बरसा रहा था… सब कुछ गीला गीला सा लगने लगा था…मेरी आंख खुल गई… मैं झड़ गई थी… मैंने अपनी चूत पेटीकोट से ही पोंछ डाली। सवेरा हो चुका था…
मैं जल्दी से उठी…और अपना गीला पेटीकोट बदला…और सुस्ताती हुई दरवाजा खोल कर बाहर आ गई… Antarvasna

Antarvasna

जब से मेरी बीवी को पीएसी Antarvasna के जवानों और उसके जीजा ने पेला था उसकी चुदवाने की भूख और बढ़ गई थी। इसी दौरान मेरी बदली प्रतापगढ़ हो गई थी। नीलू की बुर की आग एकदम चरम पर थी। अब चुदवाते वक़्त वो खुल के गालियों का प्रयोग करती। वो अब पूरी रंडी हो चुकी थी। उस रंडी की चुदाई जितनी भी हो, कम ही थी

मेरी ड्यूटी एक प्राइवेट कंपनी में थी। एक दिन मुझे कुछ काम से पटना जाना था। हम दोनों की ट्रेन रात के साढ़े ग्यारह बजे थी। खाना खाकर हम ऑटो से स्टेशन पर पहुंचे। स्टेशन पर बिल्कुल सन्नाटा था। बहुत कम लोग या यूँ कहें कि इक्का दुक्का लोग दिखाई दे रहे थे। ट्रेन थोड़ी लेट थी। हम वहीं बैठ कर बातें कर रहे थे।

तभी न जाने कहाँ से कुछ पुलिस वाले आ गए। वो हमसे पूछताछ करने लगे। मैंने उन्हें अपना कार्ड दिखाया पर वो नहीं माने और हमें एक केस में फरार पति-पत्नी साबित करने लगे। मैं उनको समझाता रहा पर वो नहीं माने।

दरोगा बोला- साले, मादरचोद ! हमें समझाओगे? पहले तो अपने माँ-बाप का खून करते हो और भागने की प्लानिंग करते हो ! ले चलो इनको थाने फिर बात करते हैं !

इतना कहकर वो सब हम दोनों को ले जाने लगे। एक सिपाही नीलू से बोला- साली चल अपना सामान उठा ! तुझसे तो लगता है साहब ही बात करेंगे ! साली की जवानी तो देखो ! अगर साहब बोल दें तो यहीं पटक कर चोद दूं !

नीलू बोली- क्या बदतमीजी कर रहे हो? एक औरत से इस तरह बात करते हैं?

दूसरा सिपाही बोला- तब कैसे बात करते हैं बुरचोदी रंडी? ज्यादा बोल मत ! नहीं अभी तेरे मर्द के सामने साहब त्तुम्हें अपने लंड पर नचवाएंगे ! समझी?

यह सब सुनकर नीलू चुप हो गई पर उन सब की बुरी नज़र उस पर पड़ चुकी थी। वो सब हमें लेकर ड्यूटी-रूम में गए। वहाँ पर उस दरोगा ने पता नहीं किसे फ़ोन लगाया। बात करने के बाद वो मुस्कुराने लगा। उसने अपने तीनों सिपाहियों से कुछ बात की और उसके बाद वो सब हमें गाडी में स्टेशन के दूसरी ओर ले जाने लगे। तो मैंने पूछा- हमें कहाँ ले जा रहे हैं?

तो बोला- अभी पता चल जायेगा !

थोड़ी देर बाद हम एक मकाननुमा ऑफिस में पहुंचे। उन्होंने हमें उतारा और अन्दर ले गए। वहां कोई नहीं था। दरअसल यह वीआईपी गेस्ट-रूम था। वहां पहुँच कर दरोगा बोला- अब बोल साले ! छुटना चाहता है या दफा ३०२ लगवाना चाहता है? अब हम चाहें तो तुम्हें छोड़ भी सकते हैं पर इसके लिए तुझे कुछ देना होगा ! देगा?

मैं बोला- क्या?

वो बड़ी बेशर्मी से बोला- तेरी माल ! यानि तेरी बीवी !

मैं गुस्से में उससे बोला- जबान सम्हाल कर बात कर साले ! तू मुझे नहीं जानता, मैं तुम्हें जेल भिजवा सकता हूँ !

वो बोला- भिजवा दे ! पर वो तो तू तब करेगा जब तू यहाँ से बच कर जायेगा?

इतना कहकर उसने नीलू को दबोच लिया। बाकी के सिपाहियों ने मुझे दबोच कर मेरे मुँह में कपड़ा ठूंस कर मेरा मुँह बंद कर दिया और फिर मुझे रस्सी से खूब मजबूती से बांध कर एक कमरे में छोड़ दिया।

अब आगे की कहानी नीलू के शब्दों में-

उस दरोगा ने पीछे से मुझे कसकर पकड़ लिया, फिर बोला- रानी, आज तो तुझे हमारे लौड़ों पर नाचना होगा !

मैंने चिल्लाते हुए कहा- छोड़ो मुझे ! मैं तुम लोगो की बात नहीं मानूंगी किसी भी कीमत पर !

तब दरोगा बोला- फिर ठीक है, हम तेरे पति का एनकाउंटर कर देंगे, उसके बाद तुझे भी चोद कर रंडीखाने भेज देंगे। जहाँ तेरी जवानी का भुरता बन जायेगा। मान जाओ !

मैं बोली- ठीक है ! मुझे सोचने दो !

मैंने सोचा कि अगर मैं इन सब की बात मान लेती हूँ तो ज्यादा से ज्यादा ये मेरी चुदाई ही करेंगे और अगर नहीं मानी तो ये मेरे पति को जान से तो मारेंगे ही साथ में मुझे भी बर्बाद कर देंगे। यह सोचकर मैंने कहा- ठीक है, मुझे मंजूर है ! पर सुबह तुम लोगों को हमें इज्जत के साथ वापस छोड़ना होगा !

दरोगा बोला- जो तुम बोलो रानी, सब मंजूर !

अब मेरा दिमाग चुदाई की बात सोचते ही धुकधुकाने लगा।

एक सिपाही बोला- साहब क्या मस्त प्लान बनाया है, कई दिनों से किसी की मारी नहीं थी, आज सारी कसर निकालूँगा !

दूसरा बोला- अबे अब इस हरामजादी को चुदाई वाले कमरे में तो ले के चल !

यह कह कर उसने मेरी गांड सहला दिया। वो सब अब मुझे ऊपर लेकर जाने लगे। रास्ते में कोई मेरी चुचियों को सहलाता, कोई गांड पर, तो कोई गाल पर !

हाय ! मैं तो इतने लोगों से चुदने की बात सुनकर ही मस्त हो गई थी। आज फिर मुझे अपने पीएसी वाले जीजा की टक्कर का लौड़ा जो मिलने वाला था।

अन्दर पहुंचते ही दरोगा बोला- चल री मादरचोद, अपने कपड़े उतार ! कसम से साली एकदम कंटीली है ! आज तो तुझे जमकर चोदूंगा ! खोल बुरचोदी ! आज तुझे पुलिस का डंडा दिखाऊंगा। अरे तुम लोग देख क्या रहे हो? गरम करो रंडी को ! आज इसे दिखायेंगे कि पुलिस का लौड़ा जब घुसता है तो क्या होता है ! साली का गांड भी पेलूँगा !

हाय …….. आह! ऐसे मत करो ! छोड़ो मेरी चुचियों को ! आह सी… दर्द हो रहा है ! कभी चूचियां नहीं दबाई क्या? जब मैं चुदने को तैयार हूँ तब मेरे साथ जबरदस्ती क्यों कर रहे हो?

साली रंडी ! तू ऐसी माल है कि बिना ऐसे किए चोदने का मज़ा ही नहीं आएगा ! खोल स्साली पहले अपना जलवा तो दिखा ! यह कहकर दरोगा ने साड़ी के ऊपर से ही मेरी बुर को मींज़ दिया।

हाय, क्या कर रहे हो। छोड़ो ना! मैं बोली।

तब उसने मुझे कपड़े उतारने का इशारा किया। अब मेरी समझ में आ गया था कि चाहे मेरी चूची हो या बुर या गांड सबकी बैंड बजेगी। मैं अन्दर ही अन्दर खुश भी थी। काफी दिनों के बाद मेरी जवानी की बैंड फिर से बजने वाली थी। हाय जीजू ! क्या बना दिया तूने मुझे ?

अब मैंने एक-एक करके अपने कपड़े उतार के एक तरफ रख दिए क्योंकि मैं जानती थी कि ये सब मेरी मां-बहन सब चोद सकते हैं तो मैं अपने कपड़े क्यों ख़राब करूँ !

उन सबने भी अपने कपड़े मुझसे पहले ही उतार दिए। उनके लौड़ों को दख कर तो मन किया कि उनका मुँह चूम लूँ ! सब एक से बढ़ कर एक ! दरोगा का सबसे मस्त ! मेरी बुर तो पानी देने लगी, साली कुछ देर का इन्तज़ार भी नहीं करवा सकती।

दरोगा ने पीछे से मुझे पकड़ लिया और लण्ड मेरी गांड से सटाते हुए बोले- रानी तैयार हो ना ! अगर नहीं तो तेरे पति को तैयार करूँ !

मैं तो मस्त थी पर कुछ नहीं बोली। सब मेरे ऊपर टूट पड़े, मेरे दोनों 32 साइज़ की चुचियों को दबा-दबा कर लाल कर दिया।. दरोगा मेरे होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। एक मेरी बाईं और एक मेरी दांई चूची के चुचूक चूसने लगे। एक मेरे गांड के दरारों को अपने जीभ से चाटने लगा। सब तरफ से मैं फँसी थी। मेरी बुर तो रिसने लगी। करीब ५ मिनट तक ऐसा करने के बाद एक उंगली मेरी बुर को सहलाते-सहलाते अन्दर घुस गई। हाय मेरा तो बुरा हाल था।

वो उंगली दरोगा की थी। वो चीखा- सालों ! इस रंडी मादरचोद को भी मज़ा आ रहा है ! यह देखो इसकी बुर का रस !

कहकर वो अपनी उंगली चाटने लगा। सब मेरे ऊपर हंसने लगे और एक बोला- हरामजादी, तुझे तो सारी पुलिस-फ़ोर्स भी चोदे तब भी आग न बुझे !

मैं भी बेशर्मी से बोली- साले रंडी हूँ रंडी की तरह चोदोगे तभी मज़ा दूंगी ! मेरी बुर सस्ती रंडी वाली बुर नहीं है ! समझे ? पीएसी के लौड़ों पर दौड़ चुकी हूँ। देखती हूँ तुम्हारे में कितने दम है !

दरोगा ने मेरे कान के लौ को चूसते हुए धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- रानी, सही कहूँ तो एकदम मस्त माल हो ! ये सब तो परम पेलू हैं पर सही में अगर तुम मज़ा लेकर यहाँ से जाना चाहती हो तब हम जैसा कहें वैसा करना होगा !

मैं भी नशीली आवाज में बोली- मेरे राजा, आज बुर का दरवाज़ा खोल तो अपने डंडे से ! मैं तो बिल्कुल तैयार हूँ ! जैसे चाहो वैसे पेलो ! तुम लोगो की रंडी हूँ ना, सब तरफ से फाड़ डालो मेरी ! मेरी बुर तुम्हारे लौड़े का स्वागत ही करेगी, इतना जीभर के पेलवाउंगी कि तुम भी क्या याद करोगे।

दरोगा बोला- क्या नाम है तुम्हारा रानी?

मैं बोली- नीलू !

हाय बड़ा मस्त और रंगीन नाम है। चल रानी अब हमारे लौड़ों को अपने बुर के लिए तैयार कर ! दरोगा बोला।

मैं अब उनके मस्त खड़े लौड़ों को चाटने लगी। एक बोला,” साली मस्त है ! सब आता है इसे ! लगता है इसका पति इसे सब सिखा कर रखता है। लंड को चाट रंडी साली ! ले पी मादरचोद !

उधर मैं उनके लौड़े चूसने में मस्त थी, इधर दरोगा ने मेरी प्यारी सी चोट्टी बुर पर हाथ लगाया और फिर मुँह भी लगा दिया। फिर तो एक ने मेरी गांड में उंगली कर दी। मैं और मेरी जवानी पूरी उफ़ान पर आ चुके थे और थोड़ी देर में मेरी जवानी के रस का फव्वारा निकल गया। दरोगा पूरा का पूरा माल चाट गया और बोला- रानी तेरी बुर भी तेरी मुंह की तरह नमकीन है ! मज़ा आ गया, अब तो तुम्हारी असली तीसरी डिग्री शुरु होगी।

इतना कहकर उसने मुझे कुतिया की तरह उल्टा कर दिया। उसके बाद थूक लगा लगा कर जो उनके 9-9 इंच के लौड़ों ने मेरी पेलाई की पूरे आधे घंटे तक बिना रुके !

पेल-पेल के उन्होंने मेरी बुर में ही अपना सारा का सारा माल डाल दिया। मेरी बुर से उनका पानी टपकते हुए नीचे फर्श पर गिर रहा था। हाय मैं तो पूरी तरह मस्त हो गई थी, सभी मुझको एक-एक बार चोद चुके थे।

अब मैं दरोगा की गोद में थी। वो मेरी चुचियों से खेल रहा था। उसने मुझसे पूछा- रानी मज़ा आया?

मैं उसके लंड को सहलाते हुए बोली- पूरा राजा ! तुम लोगों ने तो मेरी बुर को एकदम मस्त कर दिया ! इस समय तो दो चार लंड और भी होते तो मैं आराम से चुदवा लेती। कसम से पहली बार पीएसी ने और इस बार पुलिस ने पेल-पेल कर मुझे पूरा रंडी बना दिया। हाय ! अगला राउंड कब शुरू करोगे राजा?

दरोगा ने पीएसी वाली चुदाई के बारे में पूछा तो मैंने सारा किस्सा बता दिया शोर्ट में। उसने मेरे जीजा का नाम पूछा तो मैंने बता दिया। जीजा का नाम सुनते ही वो हंसने लगा। दरअसल मेरे उस जीजा की ड्यूटी वहीं प्रतापगढ़ में ही लगी थी। उसने मुझसे पूछा- तू कहे तो तेरे जिज्जू को यहीं बुला दूं?

मैंने कुछ नहीं कहा। तब उसने अपने सेलफोन पर बात करके मेरे जीजा को आने को कहा- यार आओ यहाँ एक मस्त रंडी तुम्हारा इन्तज़ार कर रही है।

मैं तो जीजा के आने की बात सोच कर सिहर गई। अब उन लोगों के लंड फिर से मेरी कहानी सुनकर तैयार हो गए थे।

एक बार फिर मेरे बुर में लौड़े घुसने लगे। अबकी बार एक सिपाही ने मेरी गांड को निशाना बनाया और मेरी दोनों तरफ से जबरदस्त कुटाई हुई। मैं तो पूरा निहाल हो गई ! मेरी गांड लंड ले-ले के पूरी लाल हो गई। चारों ने जगह बदल-बदल के मुझे चोदा। हाय मेरा रंडीपन मेरे ऊपर हावी हो गया था। मैं तो मदहोश हो गई थी। याद भी न रहा कि मेरे पतिदेव बगल वाले कमरे में बंद हैं। सबने मुझे चोद-चोद कर मेरी बुर को एकदम खोल दिया। इस बार सबने एक साथ मेरे मुंह में अपना पानी दिया। मुझे न चाहते हुए भी उसे पीना पड़ा।

तभी नीचे गाड़ी रुकने की आवाज़ आई, मैं समझ गई कि जिज्जू आ गया है ! मेरी बुर जो आठ-दस बार झड़ चुकी थी, एक बार फिर पानी देने लगी।

तभी दरवाज़े पे जीजा आया, वो मुझे देखकर सन्न हो गया। मैं दौड़ कर उससे लिपट गई। वो सब समझ गया। तुंरत उसने अपने कपरे उताड़े और दरोगा से बोला- अरे यार ! इस हरामजादी रंडी को कहाँ से पकड़ लिया।

अरे नीलू रानी कैसे यहाँ?

तब मैंने उसे सारी बात बताई तो वो हंसने लगा और बोला- साली कोई मर्डर नहीं हुआ है शहर में ! ये तो तू इनको भा गई होगी और ये तेरे को फंसा के यहाँ अपने लौड़ों पर नचवा रहे हैं ! चलो ठीक भी है ! तेरी जैसी मादरचोद रंडी की इसी तरह गांड मारी जानी चाहिए। अरे यार ! नीचे मेरा अर्दली होगा, उसे भी बुला ले, वो भी इसे देखेगा तो मस्त हो जायेगा। चल साली, पहले मेरा लौड़ा तो चाट !

कसम से मैं इस समय खुद को एक रंडी ही समझ रही थी और खुल कर अपनी खुजली शांत करना चाहती थी। मैं भी खुल के उनके लौड़े चाटने लगी। जीजा का अर्दली भी मुझे देख कर मस्त हो गया।

अब कमरे में केवल मैं जीजा, दरोगा और वो अर्दली थे। तीनों मुझे फिर से नोचने लगे और गन्दी गन्दी गालियां देने लगे। मुझे भी मज़ा आ रहा था।

उन तीनों के लंड चूसने के बाद मैं बोली- जीजा, राजा, मेरा मन कर रहा है कि एक साथ तुम सब के लौड़े मेरे तीनों छेद को भर दें ! कसम से पिछला चोदन याद दिला दो !

जीजा बोला- अरे हरामजादी, तू चिंता मत कर ! सुबह तक तू अपने पैरों पर नहीं जा सकेगी ! साली मैं तो तेरा गांड मरूँगा !

दरोगा बोला- मैं तो इसके मुंह को चोदूँगा !

अर्दली बोला- साहब लोग थैंक्यू ! इस साली की बुर तो एकदम ताजी लौंडिया की तरह फूली है ! मैं तो इसी में अपना डंडा डालूँगा ! आज इसे मालूम होगा कि पुलिस और पीएसी जब मिल के मारते हैं तो क्या होता है।

फिर क्या, उनके मूसल मेरी गांड, बूर और मुँह में घुस कर उधम मचाने लगे। मैं तो एकदम से मस्ता गई। हाय, क्या चुदाई थी !

जगह बदल बदल कर तीनों ने सारी रात मेरी पति की जमानत का पूरा इस्तेमाल किया। हाय रे जीजा का काला लंड ! उफ्फ ये दरोगा मुआ तो सारी रात मुझे पेलता ही रहा, कभी मुंह में, कभी बुर में तो कभी गांड में ! सारी रात सब मेरी जवानी को रौंदते रहे और मै रंडियों की तरह चुदती रही। हाय रे जवानी- उफ्फ्फ ये उफनती जवानी केवल दस इंच के लौड़ों से ही मस्त रहती है, वैसे तो मेरे पति का भी नौ इंच का है, पर वो जब भी पेलते हैं तो अकेले ! हाय, यहाँ तो कई सारे मिल के मेरी बच्चेदानी को फाड़ डालते हैं।

किसी तरह पेलवाते- पेलवाते सुबह हुई। रात भर मैं आह,उच्च, आउक्च,उफ्फ, आई, हाय,सीईईईई. उई मां और न जाने कौन सी मस्ती वाली सिस्कारें मारती रही।

मैंने अपने पूरे कपड़े पहने। जीजा जल्दी चला गया, दरोगा ने मेरे पति को सख्त ताकीद देकर कहा- अगर किसी से कहा तो जान से तो जाओगे ! तेरी बीवी की बुर में डंडा भी पेलेंगे ! Antarvasna

रोशन गिल Antarvasna

दोस्तों मेरा Antarvasna यानि की रोशन गिल का अन्तर्वासना के सभी पाठकों को प्रणाम !मैं भी अन्तर्वासना की बहुत बड़ी प्रशंसिका हूँ, हर रोज़ लोग-इन करते ही सबसे पहले अन्तर्वासना की साईट खोल के नई कहानियों को मजा ले ले कर पढ़ने के बाद मुझे ऊँगली भी करनी पड़ती है।

मैं एक बहुत बड़े बिजनेस-मैन की बेटी हूँ, जब मेरी मध्यम-वर्गीय लड़कियों से दोस्ती हुई। जब उनके घर में कोई नहीं होता था तो उनके साथ फिल्में देखती थी। कच्ची उमर में ही मुझे चुदवाई का चस्का लग गया, 18 साल की थी जब मैंने चुदाई का मजा लिया, उसके बाद मैं एक बिगड़ी हुई अमीर लड़की के लेबल से जानी जाने लगी।

मैं कई लड़कों के साथ मैं हमबिस्तर हुई हूँ। पापा बिजनस-टूअर पे ही रहते, मॉम किट्टी पार्टियों में लगी रहती और मैं लड़कों में !

मुझे संगीत का बहुत शौक है क्यूंकि मुझे संगीत वाले सर बहुत पसंद थे, जो चीज़ रोशन को अच्छी लगे, रोशन उसको पाने के बाद ही दम लेती है।

कॉलेज में पहुँच कर मैंने संगीत को एक विषय के रूप में ले लिया। सर की उम्र 34-35 साल होगी, लेकिन उनका व्यक्तित्व देख सभी लड़कियाँ उन पे फ़िदा थी।

संगीत की क्लास कॉलेज लगने से एक घंटा पहले सुबह लगती थी। सर जल्दी आ जाते थे। 6 फ़ुट लंबे, मजबूत शरीर, चौड़ी छाती देख मैं पागल हुई पड़ी थी। मैं जानबूझ कर उनके सामने झुक जाती, उनको अपने अनारों के दर्शन करवाती। धीरे धीरे वो मेरी तमन्ना समझने लगे। मैंने क्लास से आधा घंटा पहले आना शुरू कर दिया।

एक रोज़ मैं कॉलेज पहुँची, सर की कार नीचे खड़ी थी, सर कमरे में नहीं थे, मैं उनको देखने नीचे गई, दुबारा कमरे में आ गई। सोचा था आज सर को सब कह दूंगी क्यूंकि आज कॉलेज में छुट्टी थी, सिर्फ़ संगीत की क्लास के लिए ही सर ने बुलाया था।

आज ड्रेस में नहीं आना था इसलिए में कसा हुआ लाल रंग का टॉप जो लगभग मेरे बदन से चिपका हुआ था वो भी सिर्फ़ नेवेल तक जिस से पेट साफ़ दिख रहा था मैंने जींस भी नीचे बांधी थी, उनकी नज़र सुरों में कम मेरे चिकने पेट पे ज्यादा थीं , कसी जीन से चूतड साफ़ दिख रहे थे।
मैंने देखा- सर बार बार मेरी ब्रेस्ट को देखते। सर पता नहीं किस ख्याल में खोये हुए थे। मैंने कुछ पू्छना था, मैंने अपना हाथ उनकी जाँघ पे रखते हुए कहा- किन ख्याल में खो गए सर?

वो बोले- कुछ नहीं ! तुम करो !
मैंने हाथ ऊपर सरकाते हुए उनके लण्ड वाली जगह पे फेरते हुए कहा- बता दो न !
जवान लड़की, वो भी ऐसे लिबास में अकेली, कोई मर्द भी डोल जाये !
मैंने उनके लण्ड को मसल दिया उन्होंने मेरी कमर में हाथ डालते हुए मेरे पेट को सहला दिया।
कमरे में सिर्फ़ शांति थी। ना वो बोले, न मैं !

वो मुझे बाँहों में समेटे हुए मेरे होंठ चूसने लगे। साथ में मेरी टॉप में हाथ डाल मम्मों को दबाने लगे। मेरी सिसकियाँ पूरे कमरे में गूंज उठी।
सर बोले- इसी लिए तुम्हें अकेली को बुलाया था।
मैंने उनकी शर्ट के बटन खोल कर उनकी चौड़ी छाती पे होंठ रगड़ते हुए कहा- सर, मैं आपको बहुत चाहती हूँ !

उन्होंने मेरा टॉप उतार दिया, ब्रा खोल कर मेरे दोनों मम्मे चूसने लगे। मैं आहें भरने लगी। मैंने भी अपनी बेल्ट खोल फ़िर जीन खोल उतार डाली ख़ुद ही। अब मैं सिर्फ़ पैंटी में थी।

सर मुझ पर छाने लगे। मैंने उनके कच्छे में से लण्ड निकाल कर सहलाया, कितना बड़ा था ! सांवला, मोटा, ताज़ा लण्ड देख मेरे मुहं में पानी आ गया। मैंने झट से उस पर जुबान फेरते हुए मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैंने बहुत लण्ड चूसे थे लेकिन इसको चूसने में दिक्कत आने लगी क्योंकि यह तो बहुत मोटा था। फ़िर भी मैंने 69 में होकर लण्ड चूसना जारी रखा, सर मेरी चिकनी चूत चाटने लगे, मेरे दाने को मसलने लगे।

मैंने कहा- सर, अब चोद डालो मुझे !

वो मेरी नंगी टांगों के बीच में आकर आसन लगा कर लण्ड को चूत पे रख कर रगड़ने लगे। फ़िर एक धक्का मारा और उनका आधा लण्ड मेरी गीली चूत में घुस गया, थोड़ा दर्द हुआ लेकिन सह लिया।

सर बोले- तुम पहले से ही चुदी हुई हो?
मैंने कहा- जी !

उन्होंने एक और धक्का लगाकर अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। लण्ड काफी बड़ा था, इसीलिए बहुत कसा हुआ अन्दर जा रहा था। सर धक्के मारने लगे।

उईईईइऽऽऽ सीईईईऽऽ चोदो सर ! मुझे दबा दबा के चोदो !
मैं ज़न्नत की सैर करने लगी, मैंने सब कुछ बक डाला- हाय ! ऐसा मजा अभी तक मेरे 5 बॉय-फ़्रेन्ड्स ने भी कभी नहीं दिया ! सर चोदो ! फाड़ डालो इस कमीनी को ! ऐसा ही लण्ड चाहती थी मैं ! भोंसड़ा बना डालो इसका !

तभी उन्होंने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाल लिया और सीधे लेटते हुए मुझे ऊपर आने को बोले। मैं उनके लण्ड पर बैठ गई, पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी चूत की गहराइयों में उतर गया। मैं उछलने लगी, मेरे बड़े बड़े मम्मे हिलने लगे। सर बोले- अभी +1 में हो और इतने बड़े करवा लिए ! तू सच में रंडी है ! ले खा मेरा लण्ड !

सर नीचे से उठ उठ के चोदने लगे मुझे।

हाय सर ! मेरा बस चलता तो पहले दिन ही आपके नीचे लेट जाती ! पहले मिले होते तो किसी और का लण्ड न खाती ! आपकी पत्नी धन्य है उसको यह निराला लण्ड मिला !

मैं एक बार स्खलित हो चुकी थी, लेकिन क्या ताकत थी सर में ! वो फ़िर मुझे पलट नीचे डाल बोले- टांगों को मेरी कमर से लपेट दे !

मेरी गाण्ड के नीचे गद्दी लगा मेरे ऊपर लेट के मुझे चोदते हुए बोले- साली ! औरत को नीचे लिटा के ही असली चुदाई मिलती है !

सर ने मेरे मम्मे खूब दबाये, चूसे।

जब सर झड़ने वाले थे तो मेरी चुदाई और तेज़ हो गई, लण्ड मेरे अन्दर थोड़ा चुभने लगा लेकिन मैं चुप रही और उसका साथ देती रही।

तभी तेज़ी से गरम गरम माल मेरी बच्चेदानी के आस पास निकलना शुरू हुआ, मैं फ़िर झड़ गई।

हम दोनों नंगे एक दूसरे से लिपटे रहे। मैंने दिल में कहा- रोशन, आज फ़िर तू जीत गई ! जो चाहा, आज पा के ही दम लिया।

उसके बाद हर शनिवार वो मुझे कॉलेज बुलाते। एक रोज़ हम चुदाई में मशगूल थे, पूरी दुनिया से बेखबर, हमें खेल-शिक्षक ने पकड़ लिया। वो जानता था कि मैं बहुत अमीर घर से हूँ। धमकी वो दे नहीं सकता था, इसी बीच सर वहां से रफ़ूचक्कर हो गए, मानो सब पहले से तय हुआ हो, मैं खेली खाई थी। खेल-शिक्षक उससे भी हट्टे-कट्टे थे, उनकी आयु 49-50 साल होगी, फ़िर भी वो बोले- रोशन ! एक बार मेरे नीचे लेट जा ! याद किया करेगी कि कभी किसी ने चोदा था !

वो पास आए और मुझे बाँहों में ले लिया। उसकी लड़की मेरी हम-उमर थी और उसी कॉलेज में पढ़ती थी। मैं बिल्कुल नंगी थी इसलिए क्या कहती !
ऊपर से जब उसने लण्ड निकाल के दिखाया तो मैं रोक नहीं पाई- 10 इंच का लण्ड था !!!
कैसी लगी चुदाई की दास्ताँ !

उसके बाद उसने मुझे कैसे कहाँ चोदा फ़िर बताऊंगी आपके जवाब पढ़ने के बाद !!
इंतजार करो !
अगर अन्तर्वासना ने मेरी कहानी नहीं छापी तो मैं वेबसाइट देखना छोड़ दूंगी। Antarvasna

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अन्तर्वासना के सभी hindi Sex Stories पाठकों को मेरा नमस्कार ! मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ और मैं भी सभी को अपनी जिन्दगी की वो बातें बताना चाहता हूँ जिनको पढ़ कर सभी को मज़ा आए !

दोस्तों यह वो घटना है जिसने पहली बार मेरा परिचय एक लड़की के जिस्म से करवाया ! सच बताऊँ तो इससे पहले मैंने सिर्फ इसके बारे में सुना था पर देखा नहीं था! मन करता था कि कब मुझे असली चूत के दर्शन होगे! यही सोच सोच कर मैं सिर्फ मुठ मार कर अपनी प्यास बुझा लेता था! यह सिलसिला बहुत समय तक चला!

बात उस समय की है जब मैं पढ़ता था! एक दिन मैंने अपनी क्लास की एक लड़की की एक कॉपी में एक चित्र देखा जो किसी ने पेन्सिल से बनाया था! उस में एक लड़का मूत रहा था और एक लड़की नीचे बैठ कर उसको पी रही थी! मैं घबरा गया और मैंने जल्दी से वो कॉपी बंद कर दी, पर मेरा मन बार बार उसी चित्र पर जा रहा था और सोच रहा था कि काश मुझको भी ऐसा मौका मिलता! यही सोचते सोचते मैं घर आ गया! फिर खाना खा कर शाम को अपना होमवर्क करने लगा पर मेरा मन नहीं लग रहा था।

उस समय घर पर कोई नहीं था! तभी हमारे पड़ोस में रहने वाली एक लड़की जिसका नाम मोना था, वो हमारे घर आई। हम लोग हम-उम्र थे और साथ साथ खेलते थे! वो जब मेरे पास आई और मुझसे खालेने के लिए कहने लगी पर मैंने मना कर दिया!

उसने पूछा- क्या बात है?

मेरा मन कर रहा था कि यह बात मैं किसी को बताऊँ पर उससे मुझको शर्म भी आ रही थी और डर भी लग रहा था कि कहीं उसने किसी से मेरी शिकायत कर दी तो?

पर उसने बार बार मुझसे पूछा तो मैंने उसको अपनी कसम दे कर कहा- तुम यह बात किसी को नहीं बताओगी !

उसने कहा- ठीक है !

फिर मैंने उससे वो बताया कि मैंने आज क्या देखा तो वो शरमा गई! शर्म तो मुझको भी आ रही थी पर अब तो बात खुल चुकी थी, तो मैंने उसको कहा- यह बात किसी को मत बताना !

उसने कहा- ठीक है, पर मैं भी तुमको एक बात बताऊँ?

मैंने कहा- बताओ !

वो बोली- मैं और मेरा चचेरा भाई कई बार मम्मी पापा का खेल खेलते हैं!

मैंने पूछा- कैसे?

तो उसने बोला- हम लोग स्टोर में अकेले में अपने कपड़े उतार कर सेक्स करते हैं।

मैं एक दम चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा। वो बोलती रही और मैं सुनता रहा। फिर उसने मुझको देखा पर मुझे उसका देखना कुछ अलग लगा। वो आज मुझको कुछ अलग लगने लगी थी। कहीं आज मेरी इच्छा तो पूरी नहीं होने वाली थी !

मैंने सोचा कि जब हम लोगों में इतनी खुल कर बातें हो गयी हैं तो एक बार कोशिश करने में क्या है ! हो सकता है आज मुझको कुछ मिल जाए !

तो मैंने हिम्मत करके उसको कहा- मेरा भी बहुत मन करता है यह सब करने का ! और अगर तुम बुरा न मानो तो हम लोग यह मज़ा ले सकते है !

उसने तुंरत बोला- किसी को पता चल गया तो क्या होगा?

मैं समझ गया कि यह तैयार तो है पर डर रही है, मैंने तुंरत उसको अपनी बाहों में लिया और उसके होठों पर चूम कर कहा- मेरी जान, पता तो तब चले न जब कोई बताएगा ! और वैसे भी हम लोग अकेले में करेगे !

तो उसने कुछ नहीं कहा!

मैंने उसको पकड़ कर भी दो चार चुम्बन जड़ दिए तो उसने भी मुझको जवाब दिया! मैं मन ही मन खुश हो रहा था कि जिस चीज़ को मैं बाहर देख रहा था वो तो मेरे पास ही थी! हम लोग बहुत देर तक एक दूसरे को चूमते रहे! उसको देख कर पता चल रहा था कि उसको इस बात अच्छा अनुभव है!

धीरे धीरे उसने मेरे सारे जिस्म को चूमना शुरु कर दिया तो मैं समझ गया कि वो गरम हो गई है! मेरा हाथ भी उसके टॉप में जा चुका था और मैं उसके छोटे छोटे स्तनों को सहला रहा था! मैं बता नहीं सकता कि उस वक़्त मुझको कैसा लग रहा था! पहली बार किसी लड़की के स्तन दबाने का मज़ा तो आप लोगों को पता ही होगा! फिर मैंने जल्दी से उसको टॉप उतार कर फेंक दिया! मेरे सामने रोज़ मेरे साथ खेलने वाली लड़की सिर्फ स्कर्ट और ब्रा में खड़ी थी और उसकी सफेद ब्रा में उसके छोटे वक्ष साफ़ दिख रहे थे! अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था और मैंने उसकी ब्रा अलग कर दी और उसके स्तन को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा! वो भी जोर जोर से आहें भरने लगी!

मैंने उससे पूछा- मज़ा आ रहा है?

तो वो बोली- जरा जल्दी जल्दी करो!

उसका हाथ मेरे लण्ड तक पहुँच गया! वो उसको सहलाने लगी और जल्दी से मुझको अलग करके नीचे बैठ गई और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी! मेरी सालों की इच्छा पूरी हो रही थी! वो बहुत देर तक यही करती रही और मैं मज़े लेता रहा!

फिर मैंने उसका स्कर्ट और पैंटी उतार दी और उसकी चूत को अपने मुँह में ले के चूसने लगा! उसकी चूत पर थोड़े भूरे-भूरे बाल थे पर मुझको बहुत मज़ा रहा था! वो जोर जोर से सिसकारियाँ ले रही थी! नीचे मेरा लण्ड भी टाइट हो गया था, उसने कहा- अब इंतजार नहीं होता ! आज मुझको चौद डालो!

यह सुनकर मैंने उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया!

यह मेरा पहला अनुभव था तो मुझको पता नहीं था कि लण्ड कहाँ डालते हैं! फिर भी कोशिश करके मैंने उसकी चूत के छेद पे अपना लण्ड लगा ही दिया और जोर लगाने लगा!

पर मेरा लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था। तो उसने अपनी टाँगे फ़ैला ली और बोली- अब करो!

मुझको थोड़ा जोर लगाना पड़ा और दर्द भी हो रहा था पर थोड़ी सी कोशिश से मेरा लण्ड उसकी चूत में अंदर गया!

उसको भी दर्द हो रहा था तो मैंने कहा- मैं अपना लण्ड निकालूँ?

तो वो बोली- नहीं साले ! और अंदर डाल !

मैंने पूरा जोर लगाया और मेरा पूरा लण्ड अंदर चला गया ! फिर मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और अब हम दोनों को बहुत मज़ा आने लगा था!

दस पन्दरह मिनट में ही हम दोनों झड़ गए! फिर हम एक दूसरे से चिपके रहे! थोड़ी देर बाद हम लोगों को फिर जोश आया और हम लोगो ने एक और ट्रिप ली! फिर हम लोगों ने कपड़े पहने और एक दूसरे को चूमने लगे!

उस दिन के बाद हम लोगों को जब भी मौका मिलता, हम सेक्स के मज़े लेते! अब हम लोग साथ तो नहीं हैं।

तो यह थी मेरी कहानी !

आप लोगो को कैसी लगी, कृपया मुझे मेल करके बतायें। hindi Sex Stories

हैलो दोस्तों, Hindi Porn Stories

मेरा नाम सूरज है, मैं Hindi Porn Stories देहरादून का रहनेवाला हूँ, ये बात तब की है जब मैं १२वीं में पढ़ता था। सेक्स के बारे में मेरी जानकारी बहुत थोड़ी थी, और मैं ख्वाबों की दुनिया में ज़्यादा रहता था। मैं पढ़ने में तेज़ था इस वज़ह से काफी लड़कियाँ मुझे पसन्द करती थीं, लेकिन मैं अपने आप में ही मग्न था। फिर एक दिन एक घटना ने मेरी ज़िन्दगी बदल दी।

मैं जहाँ ट्यूशन पढ़ता था, वहीं पर एक लड़की जो मेरी सीनियर थी, वो भी पढ़ने आती थी। धीरे-धीरे हम दोनों आपस में बातें करने लगे, फिर एक दिन उसने मुझे बहाने से अपने कमरे में बुला लिया जो कि पास में ही था, वहाँ पर थोड़ी देर बैठने के बाद उसने मुझे कहा कि वो मुझे बहुत पसन्द करती है। मैं डर गया क्योंकि वो अपनी बाँहें फैला कर मेरी ओर देख रही थी। मैंने कहा कि प्लीज़ ऐसा मत करो।

उसने कहा, “बेवक़ूफ, केवल गले मिलने को ही कह रही हूँ और उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया, थोड़ी देर में मुझे अच्छा लगने लगा, फिर वो मुझे किस करने लगी और मुझमें अजीब सी हलचल होने लगी, मेरा बदन तपने लगा और मेरा लंड खड़ा होकर फनफनाने लगा। उसने ये देखा और मुस्कुराने लगी। मैं शरमा गया, क्योंकि किसी लड़की के साथ यह मेरा पहला अनुभव था।

उसने मुझसे पूछा कि क्या यह पहली बार है? मैंने हाँ में सिर हिला दिया, यह सुनकर वह बहुत खुश हो गई और मुझे ज़ोर से किस करने लग गई। अब मैं भी थोड़ा सामान्य हो गया था और उसके चु्म्बन का उत्तर देने लगा था, मेरी उसपर पकड़ भी कसी होने लगी और मैं उसकी चूचियों, जो कि नाशपातियों की तरह तनी हुईं और सुडौल थीं, को मसलने लगा। अब मुझे भी मज़ा आ रहा था और उसकी सिसकारियाँ तेज़ होने लगी थीं। फिर उसने अपने हाथ से मेरे लंड को मसला और मेरा हाल और भी बुरा हो गया। अब उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

थोड़ी देर मैं उसके सामने नंगा खड़ा था, मेरे कसरती बदन और मोटे ८ इंच के लंड को देखकर वो पागल होने लगी और वो भी जल्दी से कपड़े उतार कर नंगी होने लगी। मैं जीवन में पहली बार किसी लड़की के इतना समीप था और उसका बदन तो क़यामत था। शानदार उभरी हुई गोल चूचियाँ, पतली कमर और क्लास गांड। मेरा लंड तो फनफनाने लगा था

उससे पहले कि मैं कुछ करता, उसने मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। मैं पागल हो उठा, नियंत्रण करना मुश्किल हो गया, कई सारी नये अनुभवों को एक साथ सँभाल नहीं पाया और मैंने सारा रस उसके मुँह में उड़ेल दिया। वो सारा-का-सारा पी गई और बोली, “क्या स्वाद है, मज़ा आ गया।”

मेरा लंड अब भी डंडे की तरह कठोर था और उसकी चूत से रस टपक रहा था, अब वो बोली, कम ऑन जान, चाटो मुझे। मैंने अपनी गरम जीभ झट से उसकी चूत में घुसेड़ दी, वह सिपटपिटा सी गई और सिसकारी के साथ बोली- चाट और ज़ोर से।

अंधा क्या चाहे, दो आँखें। मैं उसे चाटने लगा और वह पागल हो रही थी, अपनी गांड को उठा-उठा कर मेरे मुँह में दबा रही थी। इसी बीच वह ज़ोर से चिल्लाते हुए झड़ गई।

अब उसने कहा कि आ, तुझे पहली चुदाई सिखाती हूँ और यह कहते हुए वह लेटकर अपनी दोनों टाँगें खोलकर मुझे बुलाने लगी। मैं भी तैयार था और ज़ल्दी से अपने मोटे लंड को उसकी चूत के मुहाने पर टेक दिया और इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती, मैंने एक ज़ोरदार झटके में लंड को चूत में पूरा जड़ तक गाड़ दिया।

वो चिल्ला पड़ी और बोली- धीरे अक्की धीरे, एक ही बार में फाड़ना है क्या? सँभल के ये बहुत काम आने वाली है ! पर मैं तो पागल था, उसके मुँह पर हाथ रखा और पेलने लगा अपने लंड को उसकी चिकनी चूत में। अब मैंने रफ़्तार बढ़ाई और उसकी चीत्कार भी बढ़ी।

धचक-धचक और फचक-फचक की आवाज़ से कमरा गूँज रहा था, वो अपनी गांड उठा-उठा कर मरवा रही थी और मैं पूरे जोश में उसे पेल रहा था, उसकी लाल चूत में मेरा काला लौड़ा रेल की तरह चल रहा था। अब रफ़्तार और बढ़ी और हम दोनों में एक ज़ोरदार धक्के के साथ छूट पड़े और खतम हो गए। मैंने अपना सारा लावा उसकी लाल चूत में उड़ेल दिया, फिर हमने फटाफट कपड़े पहने और मैं घर आ गया।

आगे फिर अगली कहानी में Hindi Porn Stories

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