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Sex Stories

ये कहानी आज से करीब ४ साल पुरानी Sex Stories है। ये स्टोरी मेरे अंकल की है, जो कि मेरे घर के पास ही रहते थे। मेरी उमर २३ और अंकल की उमर ३३ है। वो मेरे रियल अंकल नहीं थे सिर्फ़ मेरी फ़ैमिली को जानते थे इसलिये मैं उन्हे अंकल कहता था। हम एक दोस्त की तरह थे। हम एक साथ बी ऍफ़ देखते थे। उनका घर और हमारा घर एक ही दीवार से बना हुआ था। मेरा रूम, अंकल के रूम के ठीक बगल वाला था। उनके और मेरे रूम के बीच एक खिड़की थी। अंकल एक गर्ल्स स्कूल टीचर थे। उनके पास कई गर्ल्स टूशन के लिये आती थी। उनके पास ७-९ लड़कियां आती थी, उनमे से एक लड़की, नेहा थी। जो कि बहुत दूर से टूशन के लिये आती थी। एक दिन तेज बारिश हो रही थी सब लड़कियां अपने-अपने घर चली गईं। नेहा भी उनके साथ घर जाने के लिये निकली, पर बारिश बहुत हो रही थी इस लिये वो बापस घर में आ गई उसके कपड़े पूरी तरह भीग गये थे। उसे देख कर अंकल ने कहा कि बारिश रुकने के बाद चली जाना। उसने कहा ठीक है।

फिर अंकल ने उससे कहा कि तुम कपड़े चेंज कर लो। पर अंकल के पास उसके साइज़ के लड़कियों के कपड़े नहीं थे। तो अंकल ने उसे अपनी लुंगी दी और कहा कि “लुंगी को लपेट लो और मैं चाय बना लाता हूं। और अंकल किचन में चले गये। नेहा कमरे में टीवी देख रही थी। उसने लुंगी के नीचे कुछ नही पहना था। वो एकदम नंगी थी। उसके छोटे-छोटे ‘दूध’ लुंगी के ऊपेर से साफ़ दिख रहे थे। टीवी पर ‘ऐड्स ‘ के बारे में जानकारी आ रही थी। नेहा ने ये सब पहले नहीं देखा था वो ये सब ध्यान से देखने लगी थी और उसे जोश आने लगा था वो अपने दूधों को हाथ से सहलाने लगी। इतने में अंकल चाय लेके आ गये।

उन्होने नेहा को देखा तो उनका ९” लम्बा लंड तनकर लोहे की रोड की तरह कड़ा हो गया। और लुंगी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा तो अंकल ने लुंगी के अंदर से ही अपनी चड्ढी उतार दी तो उनका लंड से उनकी लुंगी टेंट की तरह तन गई वो चाय लेके नेहा की तरफ़ गये तो नेहा ने पूछा सर आपकी लुंगी को क्या हो गया है। तो अंकल ने कहा कुछ नहीं। किसी को कम कपड़े में देखने पर ऐसा हो जाता है। ये कहते हुए अंकल ने उसकी लुंगी खींच दी और वो पूरी नंगी हो गई उसने कहा ये क्या कर रहे हो सर। कुछ नहीं वही जो तुम अभी कर रही थी। और अगर किसी से कहा तो एकज़ाम में फ़ैल कर दूंगा। तो वो डर गई और चुप हो गई।

अंकल उसके दूध दबाने लगे अब उसे थोड़ा-२ कुछ हो रहा था। वो सिसकारियां लेने लगी थी और अंकल का लंड अपने हाथ से पकड़ के सहला रही थी। अंकल उसकी चूत पे हाथ घुमा रहे थे। फिर उसकी चूत चाटने लगे उसके मुंह से आह्हह्हह्हह्हह्हह्ह इस्सस्सस्सस्सस्सस म्माज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ाआअ आआयययस जैसी अजीब सी आवाजें आ रही थी। अब अंकल ने उससे कहा कि वो उनका लंड अपने मुंह में लेके चूसे तो वो मना करने लगी। तब अंकल ने उसके बाल पकड़े और उसे नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके मुंह मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को धीरे से झटका देने लगे। और अपना ९” लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो अंकल के लंड को चाटने लगी। अब दोनो ६९ की पोजिशन में हो गये। अब नेहा को मजा आने लगा था और वो लंड को जोर जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। अंकल उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर हिला रहे थे। १५ मिनट बाद अंकल ने अपना पानी उसके मुंह में निकाल दिया। तो नेहा ने उल्टी कर दी। और कहा कि आपने अपना लंड, मेरी चूत में तो डाला ही नहीं। अब मुझे मज़ा कैसे आयेगा। क्योंकि अब अंकल का लंड खड़ा नहीं हो रहा था। तो अंकल ने कहा तू परेशान मत हो मैं अभी आया। कह कर वो कपड़े पहन के मेरे पास आये। और मुझे सब कुछ बता दिया।

मैं चलने के लिये तैयार हो गया। मैं उनके घर पहुंचा। तो मैने नेहा को नंगा देखा तो मेरा लंड तुरन्त लोहे की तरह हो गया मैने अपने कपड़े उतार दिये और अपना ७” का लंड उसके मुंह में देने लगा तो वो कहने लगी कि तुम भी सर की तरह अपना पानी मेरे मुंह में तो नहीं निकालोगे? मैने कहा नहीं निकालूँगा तो वो मेरा लंड चाटने लगी मेरे लंड की टोपी एकदम लाल हो गई मैने अपना लंड उसके मुंह से निकाला और उसे बेड पर पटक दिया। उसकी दोनो टांगों को फ़ैला कर उसके पैरों के बीच में आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारने लगा पर लंड चूत में अंदर नहीं जा रहा था।

मैने अंकल से कहा थोड़ा तेल लेकर आओ। वो तेल लेके आये तो मैने अपना पूरा लंड तेल से तर कर लिया और उसकी चूत को भी नहला दिया। मैं अपना लंड चूत पर रख के रगड़ने लगा तभी अंकल ने पीछे से जोरदार धक्का दिया तो मेरा पूरा ७” का लंड एक ही बार में नेहा की कुंवारी चूत में घुस गया। नेहा बहुत जोर से चिल्लाई आऐइएएएईस्सस्स तो मैने लंड बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा और दोबारा पूरा लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। नेहा भी नीचे से उछल-२ कर चुदवा रही थी। उसकी चूत खून से तर हो गई थी। वो उस दिन ८ बार झड़ी थी Sex Stories

Indian Sex Stories

मेरे मामा Indian Sex Stories जी की पत्नी यानि मेरी मामी का अकस्मात निधन हो गया था। मामाजी अट्ठाईस साल के खूबसूरत वयक्तित्व वाले हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी सुंदर औरत थी। निधन के समाचार से मेरी मम्मी और परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुःख हुआ था। मामाजी की एक दो साल की लड़की थी।

थोड़ा अपने बारे में बता दूँ!
मेरी उम्र 18 से कुछ ज्यादा है, बला की खूबसूरत हूँ मैं! मुझे देखते ही आदमी की आह निकल जाती है। बी.कॉम की परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मम्मी ने मामाजी की लड़की जॉली को सम्हालने के लिए मुझे इस वर्ष अकेले ही भेज दिया।

मामाजी के यहाँ पूरा परिवार छोटे मामाजी, नानी जी, नानाजी सभी जॉली को बहुत अच्छे से रखते हैं। मामाजी बिलकुल उदास और गमगीन रहते थे। वो अकसर कामकाज के सिलसिले में बाहर जाते थे, रात को देर सवेर घर पर आते थे।

एक रोज रात को मामाजी करीब साढ़े गयारह बजे घर पर आये। मैं जॉली को सुला रही थी, सोते वक्त जोली रोने लगी, मुझे बहुत दया आई और अपनी शर्ट को खोलकर जॉली को अपना चुचूक चुसाने लगी। चुसाते-पिलाते कब जाने नींद लग गई।

जब मेरी नींद उड़ी तो देखा मामाजी के हाथ मेरे स्तनों को धीमे धीमे सहला रहे थे, नींद उड़ते ही एकदम से मैं सन्नाटे में आ गई। पर सोचा कि आज चार माह हो गए मामीजी को मरे हुए, रोजाना सेक्स करने वालों की क्या हालत होती होगी। फिर सबसे बड़ी बात मेर गुलाबी चुचूकों पर मामाजी का हल्का स्पर्श पाकर मैं खुद रोमांचित हो गई। मैं नींद का बहाना करके सोई रही।

मामाजी ने धीरे धीरे शर्ट के चार बटन खोल दिए ब्रा को थोड़ा और ऊपर खिसका कर एक स्तन पर अपने होंठ रगड़ने लगे, दूसरे पर हल्का हल्का हाथ चला रहे थे। मेरे पूरे बदन में चिंगारियाँ फूटने लगी। वक्ष पर मामाजी की चलती हुई जबान से मेरी चूत कुलबुलाने लगी।

इधर मामाजी के पजामे के सामने ऐसा लगा जैसे टेंट खड़ा हो गया हो। धीरे से मामाजी का हाथ मेरी कमर से रेंगते हुए जींस तक पहुँच गया परन्तु तंग जींस होने से हाथ चूत तक नहीं पहुँच सका। फिर मामाजी जो भी हरकत कर रहे थे, बहुत डरते डरते से कर रहे थे। मैं आँख बंद कर आनंद ले रही थी पर डर मुझे भी लग रहा था। थोड़ी देर बाद मामाजी ने चुचूक चूसते चूसते पजामे में से अपना आठ-नौ इंच लम्बा लंड निकाल कर हाथ में ले लिया। वासना के वशीभूत हो के हाथ से लंड को जोर जोर से हिलाने लगे, दूसरे से मेरे स्तन दबाते रहे और मुँह में निप्पल लेकर लॉलीपॉप सरीखे चूसते रहे।

इच्छा तो मेरी भी बहुत हुई पर आंखे मींचे शर्म के मारे लेटी रही। थोड़ी देर बाद मामाजी के लंड ने पिचकारी मारी, जैसे होली पर रंग निकला हो, ढेर सारा वीर्य निकल कर बेडशीट पर जा गिरा। मामाजी जोर जोर से हांफ़ने लगे। सांसों को ठीक कर धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन लगाने लगे। सब कुछ सामान्य हो गया सिवा मेरे बदन के, आग लग गई उसमें!

एक घंटे बाद जब लगा कि मामाजी सो गए, मैं धीरे से उठकर अपने कमरे में चली गई। सीधे बाथरूम में जाकर पूरी नंगी होकर नहाई, नहाते हुए जमकर चूत में ऊँगली डाली, तब जाकर राहत मिली और सो गई।

अगले रोज मामाजी से मैं बराबर निगाह नहीं मिला पा रही थी, पर ऐसा जाहिर किया जैसे रात जो कुछ हुआ उसकी मुझे जानकारी न हो। परन्तु सारे दिन रात के वाकयात मेरी निगाहों से न निकले, रह रह कर रात वाली बात याद आती और कुदरन सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इससे पहले हल्का फुल्का वक्ष को स्पर्श करवाना, बन-ठन कर रहना, लड़कों को कुत्ते की तरह पीछे दौड़वाने तक का खेल मैंने किया था पर सेक्स के मामले में विगत रात अब तक का मेरा उच्च स्कोर थी।

जैसे-तैसे दिन कटा, रात होते ही खुद-ब-खुद मेरे कदम मामाजी के कमरे की तरफ बढ़ने लगे, परन्तु आज बहाना न रहा! जॉली नानीजी के पास जो सो गई थी। मन मार कर मैं अपने कमरे में सो रही थी।
नौ बजे के करीब मामाजी आये, उनकी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था। नानीजी ने मुझे आवाज लगाई- बेटी निशा, मामाजी के कमर पर जरा तेल लगा देना!

मुझे जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गई हो। आज मैंने नाईट-सूट पहन रखा था, वो भी बिना ब्रा और पेंटी के! मामाजी चादर ओढ़ कर लेटे थे। मैंने पूछा- मामाजी, कहाँ दर्द हो रहा है?

मामाजी ने कमर की बगल में इशारा किया वहाँ तेल लगाने के लिए मामाजी को पजामा खोलना पड़ता। उन्होंने पजामा और चड्डी खोलकर नग्न होकर चादर डाल ली। मैं चादर के अंदर हाथ डालकर आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करती गई। दस मिनट बाद मुझे कंपकपी छूटने लगी। वासना से मेरा बदन जलने लगा।

एकाएक मामाजी जो बगल में होकर लेटे हुए थे, थोड़ा सीधा हो गए। सीधा होते से ही सांप की फुफकारता उनका लंड मेरे हाथ से टकराया। रिश्ते-नाते, उम्र सब भूलकर मैंने लंड को हाथ में पकड़ लिया। मामाजी भी सिसकारियाँ भरने लगे। मुझसे और बर्दाश्त न हुआ, लंड को मुँह में ले लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मामाजी मेरी ब्रा विहीन चूचियों को कस के दबाने लगे, चूसने लगे। बेतहाशा लिपट गए, चिपट गए!

इसके आगे क्या हुआ?
बाकी की कहानियों में आप लोग रोजाना पढ़ते ही हो!
मतलब मामा ने चोदा अपनी भानजी को
मेरी सच्ची कहानी अच्छी लगी हो तो मेल करें! Indian Sex Stories

वैसे मैं पुणे से हूँ.
मैं दिल्ली यूपीएससी की तैयारी करने गया था.

वहां गए हुए मुझे एक ही महीना हुआ था कि मैं बीमार पड़ गया था.
मुझे वहां का खाना हजम नहीं हो रहा था और बार बार पेट खराब हो रहा था.

जब डॉक्टर से चेकअप करवाया तो पता चला पेट में इन्फेक्शन हुआ है.
इसलिए मैं वापस घर चला गया.

जैसे ही घर वापस आया तो घरवालों ने कहा- अगर ऐसी तबीयत खराब करनी है तो पढ़ाई मत करो.

मेरा शरीर इतना दुबला हो गया था कि लग रहा था कि मुझे कोरोना होकर गया हो.
मैंने पापा से कहा- पापा, मुझे वहां का खाना बिल्कुल पसंद नहीं आया. खाना पच ही नहीं रहा.

वैसे बता दूँ कि हमारा परिवार संयुक्त परिवार है.
हमारा एक घर पुणे में है और एक पुणे के पास गांव में है.

मेरे चाचा-चाची, दादाजी और दादीजी गांव वाले घर में रहते हैं और पुणे वाले फ्लैट में मम्मी-पापा, भाई, मेरा चचेरा भाई और चचेरी बहन रहते हैं.

मेरे भाई और बहन पुणे में रह कर अपनी कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई करते हैं.

मैंने पापा से जब यह कहा कि वहां का खाना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा.
तब पापा ने कहा- ठीक ही और उधर किसी दूसरी जगह रह कर ट्राई करके देख ले, अगर पसंद आया तो ठीक … वरना वापस आ जाना और यहां से पढ़ाई कर लेना.

मैं जब वापस गया तब मैंने एक हफ्ते में 5 जगह जाकर उनकी मेस को ट्राई किया.
पर मुझे कोई पसंद नहीं आया.

मेरी पढ़ाई भी अच्छी तो नहीं कहूँगा, हां पर ठीक हो रही थी … तो वापस जाने का बिल्कुल मन नहीं था.

मेरे दादाजी ने पापा से कहा- अगर उसकी पढ़ाई उधर से ठीक हो रही है, तो उसकी चाची को उसके पास भेज देना. इससे उसका खाना भी अच्छा हो जाएगा और तबीयत भी ठीक रहेगी. यहां मेरा खाना उसकी दादी बना लेगी. इधर दो ही लोगों का खाना तो लगेगा.

जब ये बात पापा ने मुझे बताई, तब मैंने हामी भर दी क्योंकि वहां पढ़ाई का बहुत सही माहौल था.

मैंने एक फ्लैट देख लिया और जो जो जरूरी सामान लगने वाला था, वह सब चाँदनी चौक से खरीद लिया.
इसलिए सब कुछ बहुत सस्ते में निपट गया.

लगभग 15 दिन बाद मेरी चाची दिल्ली आ गयी थीं और दस ही दिन में हमारा सब कुछ सैट हो गया था.

मैं सुबह नाश्ता करके 9 बजे लाइब्रेरी चला जाता था.
दोपहर में एक बजे खाना खाने आता था और रात का खाना लगभग साढ़े सात बजे होता था.

अच्छे से दिन गुजर रहे थे. कभी कभार मोमोज वगैरह खाने चाची के साथ चला जाता था.
हमारे फ्लैट में मैंने वाईफ़ाई लगवाया था, तो कभी कभार रूम पर ही पढ़ाई कर लेता था.

बीच बीच में मेरा हस्तमैथुन भी हो जाता था. सब कुछ बहुत सही चल रहा था. तीन महीने तक मेरे किसी भी विचार में चाची नहीं आई थीं.

एक बार की बात है, जब मैं लंड हिला रहा था तो चाची ने मुझे देख लिया था.
मुझे तब पता नहीं लगा था, बाद में चाची ने बताया था.

एक बार ऐसे ही गूगल पर सर्फिंग करते समय मुझे अन्तर्वासना का पता चला था.

वहां एक सेक्स कहानी में मैंने मामी की चुदाई पढ़ी थी.
तब ऐसा खास कुछ ध्यान नहीं गया था पर मेरी नज़र चाची के मम्मों को देखने लगी थी.

अब मैंने ध्यान दिया था कि चाची के बूब्स बहुत बड़े है. हमारी बातें सामान्य ही होती रहती थीं.

अन्तर्वासना की कहानियों में मेरी रुचि बढ़ने लगी थी और साथ ही चाची की चूचियों को देखने का लगाव, सब इतनी तेज़ी से हुआ कि क्या बताऊं.

अब चाची को देखने का मेरा नज़रिया पूरी तरह से बदल गया था.
उसी चक्कर में मैं ज़्यादा समय फ्लैट पर बिताने लगा था.

एक बार चाची ने कहा कि मुझको कुछ कपड़े लेने हैं तो बाजार चलते हैं.
मैंने कहा- ठीक है, सरोजिनी मार्केट चलते हैं.

दो दिन बाद हम दोनों बाजार चले गए.
हम दोनों मेट्रो से गए थे.

वहां चाची ने कुछ कपड़े ले लिए.
उनको अपने लिए कुछ अन्दर पहनने वाले कपड़े खरीदने थे पर वे मेरी वजह से थोड़ा झिझक रही थीं.

मुझे समझ में आ गया क्योंकि वे बार बार मेरी तरफ देख रही थीं.

मैं- चाची आपको कुछ और लेना है क्या?
चाची ने झिझकते हुए कहा- नहीं … अभी और कुछ … नहीं लेना … बस जरा …

मैंने पहले ही फ्लैट पर देखा था कि चाची की ब्रा एक साइड से थोड़ी फट सी गयी थी.
पर मैं भी बात करने में थोड़ा डर रहा था.

लेकिन इतनी दूर आ गए थे और थोड़ी समझदारी भी आ चुकी थी, तो हिम्मत करके मैंने बात को आगे बढ़ाई- चाची, आप देख लीजिए. यहां और भी बहुत कुछ मिलता है … और बहुत सस्ता मिलता है.
चाची- नहीं राज … मुझे और कुछ नहीं लेना!
वे अभी भी थोड़ा अटक अटक कर बात कर रही थीं.

मैं- अरे कपड़ों से याद आया, मुझे अंडरवियर और बनियान लेना है. वह सब और ले लेते हैं, फिर वापस चलते हैं.
चाची- ठीक है.

जब मैंने मेरी अंडरवियर और बनियान ले लिए.
तो ऐसे ही मैंने चाची से थोड़ा खुल कर बात करने की कोशिश की और कामयाब भी हो गया- अरे चाची आपको भी अगर इनरवियर्स लेने हो, तो आप भी ले सकती हैं. यहां सब मिलता है.

चाची पहले तो एकदम से हक्की बक्की होकर देखने लगीं पर कुछ समय बाद वे भी बोलने लगीं- अरे हां, वह भी लेना है.
मैं- ठीक है, आप लेकर आओ. मैं यहीं हूँ शायद आपको मेरा वहां आना सही ना लगे.

चाची- ऐसा कुछ नहीं, तुम भी चलो. इनसे मोलभव कौन करेगा?
जब हम वहां गए तो चाची ने उस दुकानदार से कहा कि उन्हें 30 की ब्रा चाहिए.
तो दुकानदार चाची के चूचे देखता हुआ बोला- जी आपको 30 नहीं 32 साइज़ आएगा!

तभी पता नहीं मुझे क्या हो गया, मैंने बोल दिया- हां, तभी तो पहले वाली ब्रा फट गई है!
पर ये सब मैंने बहुत धीरे बोला, सिर्फ़ चाची को सुनाई दिया था.

यह सुनकर वे भी एकदम से मेरी तरफ देखने लगी थीं.
मुझे लगा अब वे गुस्सा करेंगी.

पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और 32 की ब्रा ले लीं.
चाची ने 3 पीस ले लिए थे.

फिर अब हम दोनों वापस आने लगे.
मेट्रो स्टेशन से थोड़ा पैदल चलना पड़ता है तो मैंने एक ई-रिक्शे को रोक लिया और हम दोनों उस पर बैठ गए.

जब हम दोनों रिक्शे में थे तो उधर का रास्ता थोड़ा खराब था.
रिक्शा अपना संतुलन खो रहा था और वह पूरी तरह से एक तरफ को झुकने लगा था.

चाची ने खुद को संभालने के लिए मेरी जांघ पर हाथ रखा और जोर से पकड़ लिया.

जब रिक्शा ठीक हुआ, तब मुझे लगा कि अब चाची हाथ उठा लेंगी.
पर उन्होंने अपना हाथ वहीं लगाए रखा.

मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि वे अपना हाथ धीमे धीमे वहीं पर सरका रही थीं.
उनका लक्ष्य शायद मेरा लंड था.

यह सोच कर ही मेरे अन्दर तो एकदम से झटका सा लगा और अन्दर तक सनसनी सी फैल गई.
मेरा लंड खड़ा होने लगा.

धीरे धीरे उनका हाथ भी लंड के बहुत करीब आने लगा था.

अब तो उनका हाथ सिर्फ़ नाम के लिए जांघ पर था, बाकी तो मेरे लौड़े से टच होने लगा था.
शायद उनको भी लंड की तपिश महसूस हुई होगी और उसकी हलचल का भी अहसास हो गया था.

उन्होंने मुझे देखा और एकदम अलग सा भाव दिया.
उनके चेहरे पर थोड़ी अलग सी मुस्कान स्माइल आ गई थी.

पर उसके बाद चाची ने अपना हाथ हटा लिया था.
हम दोनों मेट्रो से सफर करने के बाद कुछ ही देर बाद अपने फ्लैट पर पहुंच गए.

मैंने चाची से कहा- चाची दुकान पर जो हुआ, उसके लिए सॉरी!
चाची- क्या हुआ? किस बारे में बोल रहे हो तुम?

मैं- अरे चाची, वह आपकी ब्रा फट गई है, मैंने उस बारे में बोल दिया था न!
चाची- अरे राज उसमें क्या है. सच पूछो तो मैं खास उसी की वजह से शॉपिंग के लिए गयी थी. आज पर तुम्हारे सामने कैसे कहूँ, इस वजह से मुझे शर्म आ रही थी.

मैं- अरे उसमें क्या है यार, हम दोनों इतनी बातें तो कर ही सकते हैं. वैसे भी हम लोग एक ऐसे शहर में हैं, जहां यह सब एक साधारण सी बात है. हम लोग इतनी बातें तो कर ही सकते हैं.
चाची- हां सही है राज!

ऐसे ही कुछ दिन बीत गए.
अब हम दोनों आपस में थोड़ा खुल कर बातें कर लेते थे.

एक दिन चाची बाहर सब्जी लेने गयी, तो मुझे लगा कि उनको आने में अभी वक्त लगेगा.
मेरा भी हिलाने का बहुत मूड था.

मैंने अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ना चालू किया और कहानी पढ़ कर एकदम से मूड बन गया.
मेरा नहाना भी रह गया था तो मैं कच्छे में ही हो गया था.

मैं अपने बेडरूम में बैठ कर अपने लंड को सहला रहा था.
मैंने अपने 6.5 इंच के लंड को बाहर निकाला और धीरे धीरे हिलाने लगा.

मुझे पता ही नहीं चला कि चाची कब अन्दर आ गई थीं.

मेरा ध्यान जैसे ही उन पर गया, मैं एकदम से बौखला गया.
चाची ने यंग बॉय मास्टरबेशन का नजारा देख लिया था.

उस वक्त मुझे कुछ नहीं सूझा और मैं तुरंत बाथरूम में भाग गया.
मैं बहुत ज्यादा डर सा गया था.

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कैसे उनको मुँह दिखाऊं.
उस वक्त हुआ यह था कि चाची पैसे लेकर जाना भूल गयी थीं, इसलिए वे वापस आ गयी थीं.

मैं नहा कर तुरंत लाइब्रेरी चला गया और उनको मैसेज कर दिया कि दोपहर का मेरा खाना मत बनाना चाची, मैं दोस्त के साथ खाना खाने बाहर जा रहा हूँ.

उन्होंने मेरा मैसेज बस देखा और बिना कुछ कहे रह गईं.
अब मेरी और ज्यादा फटी.

रात को जब मैं फ्लैट पर गया तब चाची मोबाइल चला रही थीं.
मैं जाकर चुपचाप अपने बेड पर बैठ गया.

चाची ने मेरी तरफ देखा तो मुझे लगा कि अब वे बहुत गुस्सा करेंगी.

चाची- क्या हुआ राज … सुबह के गए अब आ रहे हो?
मैं चुप रहा.

चाची- बोलो कुछ!
मैं- सॉरी चाची.

चाची- अरे यार वह तो सब नॉर्मल है … तुम इतना क्यों टेंशन ले रहे हो.
मैं- मैं बहुत डर गया था इसलिए दोपहर में भी नहीं आया.

चाची- पागल हो यार तुम … इतना डरने की क्या बात है इसमें! तुम्हीं ने तो कहा था कि हम दिल्ली में रह रहे हैं, यहां ये सब नॉर्मल है. तुम लोगों को हफ्ते में 2 से 3 बार तो हिलाना ही चाहिए. उसी वजह से तुम्हारा मूड भी फ्रेश हो जाता है और पढ़ाई में भी कोई ग़लत असर नहीं पड़ता.
ये सब बातें सुनकर तो मेरे कान बजने लगे थे और मैं एकदम से किसी और दुनिया में खो गया था.

चाची मेरे कंधे को हिलाती हुई बोलीं- राज तुम किसी भी फालतू चीज़ का टेंशन मत लो … तुम बेवजह टेंशन ले रहे हो!
मैं- फिर से सॉरी चाची!

चाची- हां चल ठीक है … कोई बात नहीं, वैसे तुम पर अगर गुस्सा करना होता तो तभी कर देती जब तुम रात को अपने चादर के अन्दर हिला रहे थे, मैं तब भी जागी हुई थी.
मैं- अरे यार मतलब आप पहले ही मुझे पकड़ चुकी हैं?

हम दोनों थोड़ा सहज होकर हल्का हल्का सा हंसने लगे.
चाची मेरे साथ थोड़ा और खुल कर बातें करने लगीं.

Sex Stories

सब लोगों को मंगू जी का Sex Stories प्रणाम ! मैं अपनी कहानी बता रहा हूँ। मैंने अपनी अड़तालीस साल की उम्र में ऐसा अनुभव नहीं किया था।

मैं अपने काम के सिलसिले में अहमदाबाद गया था और वहाँ से लौटते वक्त की बात है, ट्रेन में बहुत भीड़ थी और मुझे ऊपर वाली सीट पर बैठने की जगह मिली। गुजरात छूटने पर ट्रेन में भीड़ कम हुई और मैं ऊपर ही लेट गया। न जाने कब वसई आया और ट्रेन में कुछ लोग चढ़े ! एक यू पी वाले भाई ऊपर आकर मेरे बाजू में बैठ गए। तब तक ठीक था। मैं निद्रा की अवस्था में था और उस व्यक्ति ने अपना हाथ का पंजा मेरी जांघ पर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता मेरे लौड़े की तरफ बढ़ाया। रात का समय था, लोग पूरी तरह सो चुके थे और भीड़ भी कम हुई थी। मैं थोड़ा सा सिकुड़ गया तो उसने हाथ से इशारा किया कि कोई बात नहीं, पड़े रहो !

मैंने वैसा ही किया तो उसने सहलाना और तेज कर दिया। मैंने अपनी 48 साल की उम्र में ऐसा अनुभव नहीं किया था, क्या बताऊँ, अच्छा भी लग रहा था और थोड़ी हिचकिचाहट भी हुई। वह समझ गया कि क्या करना है। उसने मुस्कुराते हुए देखा और इशारे से कहा- पड़े रहो ! मज़ा आएगा !

और सही कहूँ तो वो था तो अच्छा अनुभव ! एक पुरुष मेरे लौड़े से इस तरह खेले, यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। मैं मन ही मन में मचलने लगा और सोचा कि कब वह मेरा लौड़ा मुँह में ले ले ! वह व्यक्ति बड़ा समझदार था, उसने मेरी पैंट की चेन खोल दी और देख कर दंग ही रह गया, कहा- अबे गांडू ! ऐसा लौड़ा क्यों हमसे छुपाते हो ? कैसा धनुष की तरह है (दोस्तों मेरा लौड़ा थोड़ा टेढ़ा है !) मुझे आज सही मज़ा आएगा ! कहते हुए धीरे से मुँह में लिया और लॉलीपॉप की तरह बड़े मजे से चाटता रहा और मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी।

मैंने पूरे मज़े लेना चाहा और उसके कानो में कहा- अरे, कोई सुनसान डिब्बा देख कर आओ !

और उसने बड़ी समझदारी दिखाई और थोड़ी ही देर में आकर कहा- चलो व्यवस्था हो गई है।

हकीकत में उसने टी टी को पटाया था और हम लोग फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बंद कमरे में पहुँच गए। मै बड़ा खुश हुआ, सोचा, आज तक किसी ने मेरी गांड नहीं मारी थी और आज यह भी सपना पूरा होगा। मेरे हाथ-पैर गर्म हो गए। मैं चाहता था कि वो मुझे पूरे सफ़र में चाटता रहे। उसने मुझे सही तरीके से लेटने के लिए कहा और मैंने पूरी तैयारी के साथ वैसा ही किया। उसने मेरे पूरे कपड़े एक ही झटके में निकाल दिए और मेरा पूरा बदन औरतों के जैसे चाटने लगा। क्या कहूँ लिखते वक्त भी रोम रोम मचलता है।

सच कहूँ, ऐसा रोज़ हो ! क्या करूँ, कोई सामने से प्रस्ताव तो रखे, मैं तैयार हूँ !

ओ के !

तो उसके मुझे चाट लेने के बाद मैं चाहता था कि जल्दी से वह नंगा हो जाए और मुझे भी उसका लौड़ा भी चूसने दे पर वह बड़ा चालाक था, उसे मुझसे पहले मज़ा करना था, मैंने भी फिर थोड़ी सी नाराजगी के साथ कहा- बस आप मुझे कुछ नहीं दोगे तो मैं चला अपनी सीट पर !

फिर क्या था, उसने भी एक ही झटके में कपड़े उतार दिए और कहा- लो हम तुम्हारे हवाले हो रहे हैं मेरे लंड मास्टर !

उसका लौड़ा नुकीली पेंसिल की तरह था। फिर हम 69 की पोजीशन में हो गए। मैं उसका और वह मेरा लौड़ा चूसने लगे। दस मिनट के बाद उसने कहा- चलो, अब गांड मारने की शुरुआत करें !

मैं तैयार था, उसने तुरंत मुँह फेरा और कहा- पहले तुम मेरी गांड मारो !

मैंने कहा- नहीं पहले मेरी मारो !

तब उसने कहा- नहीं, शुरुआत मैंने की है तो मेरा पहला नंबर !

फिर क्या करता ? गांड मारने के पहले मैंने उसके निपल दबा दिए तो वह ख़ुशी से झूम उठा, कहा- अरे यार तुम तो गांड मारने के मास्टर बनोगे ! यह सब कहाँ से सीखा ?

मैंने कहा- बस यूं ही दिल हुआ !

तो उसने तेजी से मुँह पलट कर मेरे निपल मुँह में लिए और औरतों के निपल की तरह मेरे निपल से खेलने लगा और मेरे निपल एकदम कड़क हो गए। मैं और रोमांचित हुआ और लगा बस यह सिलसिला यूँ ही चलता रहे। उसने झटके से मुँह पलटा- अरे यार गांड तड़प रही है, जल्दी से गांड में अपना लौड़ा डाल दो ! मेरी गांड में अब सहन नहीं होती यह दूरी !

उसने मुझे क्रीम दी और कहा- अपने लौड़े पर लगाओ और उंगली से मेरी गांड के अंदर भी लगाओ !

मैंने क्रीम लगा दी और उसे घोड़े की मुद्रा में करके जीवन का पहला अनुभव लेते हुए उसकी गांड में लौड़ा एक ही पल में घुसेड़ दिया। वह कराह उठा, कहा- यार, गांड मारनी भी नहीं आती ?

क्योंकि गांड मारने का अनुभव जो नहीं था।

उसने कहा- तेरा लौड़ा कितना कमनसीब है, चल अब डाल आहिस्ता से !

मैंने वैसे ही किया। थोड़ी देर मशक्कत करने के बाद मुझे समझ में आया कि कैसे गांड मारनी है। मैंने ऐसी मस्त गांड मारी कि वह बहुत खुश हुआ, कहा- यार, तू भी सीख गया है ना?

मैंने खुशी से हाँ कहा। न जाने मैं क्यों उतावला हो रहा था अपनी गांड मरवाने के लिए ! अपने जीवन में बहुत बार लोगों को गांड मारने वाली गाली देते हुए सुना था और आज सचमुच में ऐसा मस्त पेंसिल की नोक वाला लौड़ा मेरी गांड मारेगा, मैं बहुत उतावला हो रहा था।

वो बड़ी देर मेरे लौड़े से खेला और उसे देख कर बोला- यार ऐसा लौड़ा नसीब वालों को मिलता है।

यह कहकर दोबारा मुँह में डाल दिया और बड़ी इज्जत से गोलियों को चूसने लगा। फिर उसने कहा- अब मैं तुझे नहीं तड़फ़ाऊंगा।

उसने मुझे पलटने को कहा। मैंने घोड़े का पोज़ लिया, वह बड़ा खुश हुआ, मेरा मुँह डिब्बे की खिड़की की तरफ था और मैं तैयार था उसको चढ़वाने के लिए, यू पी वाला तो बस मेरी गांड मारने के लिए बेताब था।

उसने बिना क्रीम लगाये गांड में लौड़ा घुसेड़ना चालू किया। मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था।

उसने कहा- नए लोगो को क्रीम लगाए बिना गांड मरवानी चाहिए ! इससे गांड को आदत हो जाती है मरवाने के लिए !

और उसने पूरा लौड़ा घुसेड़ दिया और चालू कर दी उसने अपने लौड़े की रेलगाड़ी। बड़ा मज़ा आने लगा। वह गांडू इस कदर मेरी गांड मार रहा था जैसे कितने साल से भूखा था, मगर उसका पानी नहीं छुट रहा था। करीब बीस मिनट से मैं उससे चुद रहा था और फिर उसने मेरी गांड में पूरा पानी छोड़ दिया।

तभी दरवाज़ा खुला, मैं और वो एकदम चौंक गए क्योंकि दरवाज़े पर एक मस्त औरत खड़ी थी और हमारा खेल देख रही थी।

उसने कहा- यह क्या चल रहा है?

आगे की कहानी दूसरे भाग में पढ़िए। Sex Stories

प्रेषक : राहुल Hindi Sex Stories

आइये, आपको एक बार Hindi Sex Stories और मैं प्यार की रूहानी दुनिया में कुछ समय के लिये ले चलता हूँ, यहाँ आपको प्यारा नरम सा सेक्स भी मिलेगा, उत्तेजना भी मिलेगी, आपका लण्ड भी खड़ा होगा और आपसी रिश्तो की उल्झन भी नजर आयेगी …

मैं पन्जिम से मडगांव की तरफ़ आ रहा था। शाम ढल चुकी थी। बादलों के कारण मौसम में ठण्डक आ गई थी। अचानक रास्ते में मुझे एक लड़की नजर आई। वो पंजों के बल उछल उछल कर मुझे रुकने का इशारा कर रही थी। बरसात होने वाली थी। काले बादल सर पर आ चुके थे। ऊंचा सा स्कर्ट पहने और गहरे गले का टॉप पहने कोई मॉडर्न गर्ल थी। मैंने उसके पास ही गाड़ी रोकी … कार का दरवाजा खोल कर मैंने अन्दर आने का इशारा किया। वो लपक कर सामने बगल वाली सीट पर आ गई।

“थेन्क्स जो … नाईस ऑफ़ यू … “

“आप मुझे जानती हैं … आप का परिचय … ?”

“मैं शैली … यहीं पास में होटल में काम करती हूँ … आप कल शाम को यहाँ रुके थे ना … “

“ओह हाँ … मैंने 50 रुपये टिप में दिये थे … ऐसे मौसम में बाहर नहीं निकलना चाहिये … “

” रात भर मैं यहाँ क्या करती … सोचा बाहर आ कर कोशिश करूँ … देखा, आप मिल गये ना … यहाँ पास में मन्दिर में रुकना … मुझे कुछ काम है।” उसने सामने मन्दिर की तरफ़ इशारा किया। बरसात चढ़ी हुई थी, मेरा मन रुकने को नहीं था, बस 50 किलोमीटर ही दूर था मडगांव। फिर भी मैंने मन्दिर की तरफ़ गाड़ी मोड़ ली। बूंदा बांदी शुरू हो गई थी। बादलो की गड़गड़ाहट और तेज बिजलियाँ कौंध रही थी। गाड़ी मन्दिर परिसर में खड़ी करके हम दोनों मन्दिर के अन्दर चले आये।

“जल्दी करना शैली … “

“बस दो मिनट … “

इतने में अन्दर से एक लड़का भागता हुआ आया … उसके हाथ में छाता था और शायद वो घर जा रहा था।

“मन्दिर में कोई नहीं है … चलो … ” लड़के ने भागते हुए कहा “बारिश जोर की आयेगी … ”

“अरे मुझे पण्डित जी से काम है … ” शैली ने जोर से चीख कर कहा।

” वो नहीं है … चाबी वहीं हैं … आप इन्तज़ार कर लो … ” वो तेजी से सीढ़ियां उतर कर चला गया।

“मुझे पता है … आओ जो … ” वो मुझे देख कर मुस्कराई …

इतने में बरसात तेज हो गई। हवा में शैली का छोटा सा स्कर्ट बार बार कमर के ऊपर उड़ कर आ रहा था। उसकी छोटी सी पेन्टी में से उसके उभरे हुए चूतड़ साफ़ दिखने लगे थे। मैंने अपना दिल थाम लिया … साली चुदने लायक है … मैंने लण्ड को दबा कर समझाने का प्रयास किया। फिर मैंने निराशा से बाहर देखा और रुकने में ही भलाई समझी। मन्दिर के साथ ही पुजारी का कमरा था,हमने पुजारी का कमरा खोला … और अन्दर आ गये।

आते ही शैली बिस्तर पर लेट गई, लेटते ही उसकी स्कर्ट फिर से ऊपर हो गई। उसकी चिकनी सलोनी गोरी मांसल जांघें चमक उठी। मेरी पैन्ट के ऊपर से लण्ड का उभार देख कर वो भी इतराने लगी और जान करके अपनी टांगें फ़ैला ली। चूत के स्थान पर एक गीला धब्बा उभर आया था।

“शैली , स्कर्ट नीचे कर लो … सब दिख रहा है।” मैंने झिझकते हुए कहा।

“अच्छा … तो देखो ना … कैसी हूँ नीचे से … ” उसने मुझे निमंत्रण देते हुए कहा, अपनी चूत को हाथ से दबाते हुई बोली … गीला धब्बा और फ़ैल गया … चूत का रस निकल रहा था।

“तराशी हुई चिकनी जांघे, गोरी सुन्दर् … छोटी सी पेन्टी … और उभरी और गीली हुई … “

“हाय … ” उसने जल्दी से स्कर्ट ऊपर डाल लिया … “आप तो मेरे अन्दर ही घुसे जा रहे हैं … “

“आपने पूछा था ना … कोई दूसरा होता तो … वो जाने क्या कर डालता … ये गीली … “

“और आप कुछ भी नहीं करते क्या … और गीली क्या … ” खुला न्योता दे रही थी … अगर मैंने कुछ नहीं किया तो वो समझेगी कि मेरे में कुछ कमी है।

“क्यों नहीं करता … । जैसे ये आपके बड़े बड़े सेक्सी चूंचे … और ये गीली चूत … ” मैंने उसके पास जाकर उसके चूंचे दबा दिये।

“रुको … 5000 रुपये लूंगी … ” मुझे भड़का कर उसने कमाई की दर बता दी।

“मंजूर है … पर फिर मैं जो चाहूँगा वो करूंगा … चाहे पिछाड़ी ही मार दूँ !”

“और सुनो … उसके अलावा, मैं जो चाहूँ वो भी करोगे ना … आ जाओ ना … समय कीमती है … शुरू हो जाओ … और निकाल दो मेरी हसरतें … आपकी हसरतें … ” वो बड़े ही प्रोफ़ेशनल अन्दाज में बोली।

“चलो कपड़े उतारें … शैली” बाहर बरसात पूरा जोर पकड़ चुकी थी।

मैंने अपने कपड़े उतार दिये … उसके तो कपड़े वैसे ही ना के बराबर थे। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर उसके मुख से अनायास ही निकल पड़ा …

“माई गॉड … … ये लण्ड है या मूसल … इसका तो पूरा मजा लूंगी मैं तो … ” मुझे समझ में नहीं आया, मेरा लण्ड तो साधारण था, हां खड़े होने के बाद आठ या साढ़े आठ इन्च का हो जाता होगा।

उसकी नंगी चूत गीली थी, हाथ लगाया तो लसलसी सी, चिकनाई से भरी हुई थी … मेरा हाथ उसने झटक डाला।

“यहाँ खड़े हो जाओ जो … ” खुद एक कुर्सी पर नंगी बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसके ठण्डे और नरम हाथों ने मेरे लण्ड को और कड़क कर दिया। मेरे लण्ड को वो हल्के हल्के मलने लगी। मुझे मीठा मीठा सा मजा आने लगा। मैंने उसके बाल पकड़ लिये और दूसरे हाथ से उसकी चूची सहलाने लगा। वो कभी कभी मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूस भी लेती थी। मेरा सुपाड़ा उसके थूक से भीग जाता था।

“साला … चूत में घुसेगा तो मुझे मस्त ही कर डालेगा … और गाण्ड को तो मजे आ जायेंगे … “

“शैली, अब जरा मुठ मार के मजा दे यार … “

“ये लो … क्या कड़क लौड़ा है … चूसने में भी मजा आ रहा है … ” और उसने अपने हाथ में लण्ड को ठीक से बांध लिया और जोर से दबा लिया … ।

“तैयार हो जो … तेरा लण्ड अब तो गया … ” उसके हाथों ने कस कर हाथ जड़ तक रगड़ा और फिर बाहर तक दबा कर रगड़ मारी … मुझे लगा कि माल निकाला …

“हां शैली अब लगा कि मुठ मारा है … चल जल्दी जल्दी कर … फिर चुदाई भी तो करनी है …

“जल्दी क्या है जो … ये भयंकर बरसात है, सुबह तक तो चलेगी … तब तक क्या करोगे … “

और उसका भारी हाथ मेरे लौड़े को रगड़ मारते हुये मुठ मारने लगा। मुझे मस्ती चढ़ने लगी। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसके हाथों में इतनी ताकत कहां से आ गई। मेरा जिस्म वासना से भर कर तन गया। लण्ड को मैंने और उभार लिया। शैली जम कर मुठ मार रही थी।

“बस कर शैली … देख मेरा माल निकल जायेगा … “

“जो … निकाल दे माल … निकाल दे … मजा आ जायेगा … ” उसने अपने हाथों को और तेज कर दिया। मेरा लण्ड उफ़ान पर आ गया।

“शैली … रुक जा रे … देख निकल जायेगा … “

उसने हाथ रोक दिया और लण्ड को मुँह में ले लिया … और एक विशेष तरह से लण्ड को मोड़ कर मुठ मारा … तीन चार स्ट्रोक में मेरी हालत खराब हो गई।

“मा … दी फ़ुद्दी … मां चुद गई मेरी तो … हाय रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह” और मेरे लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया, वीर्य उसके हलक में सीधा उतर गया और वो गट से पी गई। अब वो मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी, मानो लण्ड की सफ़ाई कर रही हो … ।

मैं बिस्तर पर लम्बी सांसें भरता हुआ लेट गया। मेरे लेटते ही वो मेरे ऊपर आ गई। और मुझे लिपटा कर चूमने लगी।

“जो मजा आया ना … तेरा लण्ड मस्त है रे … मुठ मारने में बहुत मजा आया … ।”

शैली अपनी चूत मेरे लण्ड पर घिसने लगी … उसकी शेव की हुई चूत के कड़े बाल मेरे लण्ड पर चुभ रहे थे और खरोंचें मार रहे थे। बड़ा मजा आ रहा था।

“शैली तुमने कहां से सीखी ये सब मस्ती वाली हरकतें …? “

“यह तो मैं अस्सी नब्बे सालों से कर रही हूँ … ।” और हंस दी … “तुम्हें जब सौ साल का अनुभव हो जायेगा ना, तो तुम भी एक्स्पर्ट हो जाओगे … “

“हां जैसे सत्तर साल का तो हूँ ही … !” और हम दोनों हंस पड़े।

“सच कहती हूँ रे … साला मजाक समझ रहा है … ” वो हंस के अजीब से स्वर में बोली।

“सच है … चूत 20 साल की, बोबे 15 साल के … जवानी 25 साल की … गाण्ड 20 साल की … और नशीली आंखें … जोशीला बदन … माल निकाल देने वाली अदायें … 20 साल और जोड़ लो हो गया 100 का आंकड़ा।”

“हाय तुमने तो ये बोल कर मेरे बदन में आग लगा दी। आह्ह्ह्ह्ह्ह, साला लौड़ा चूत में घुस ही गया ना”

मेरा लौड़ा जाने कब कड़ा हो गया और शैली ने जोर लगा कर अपनी चूत में घुसेड़ लिया था। मुझे भी चूत का गरम गरम अहसास होने लगा। उसने अपनी चूंचियां उठा कर मेरे मुँह में घुसेड़ दी और मैं उसकी चूची एक एक करके दोनों चूसने लगा। अचानक उसके चूचियों में से दूध आने लगा। मीठा मीठा सा … स्वाद भरा … मैं दूध पीने लगा … उसने अपनी चूत का धक्का जोर से मारा और मेरा पूरा लण्ड चूत ने समा लिया।

“कैसा लगा मेरे जो … दूध का मजा … चूत का मजा … ?”

“इतना सारा दूध निकल रहा है … मजा आ रहा है … पी जाऊँ क्या … तुम्हारा कोई बच्चा है ना … ?”

“कुछ भी मत कहो … तुम ही हो मेरे सब कुछ … बस पी लो … ” और चूत उछाल उछाल कर लण्ड पर मारने लगी। उसकी छाती में से दूध भी बहने लगा। मेरा लण्ड मस्ती में भर गया थ। मेरा पेट दूध पी कर भर चुका था। जाने कितना दूध था उसकी छातियों में …

“जो … राजा तुम्हारा पेट भर गया क्या …? “

“क्या ?? शैली तुम भी ना गजब की हो … ” मैंने भी अपना लण्ड ऊपर चूत पर मारते कहा।

उसका दूध निकलना बन्द हो गया था और अब वो रुक गई थी …

“जो लण्ड निकालो तो … मुझे सू सू आ रही है … ” मेरे लण्ड निकालते ही वो मुझसे लिपट गई और थोड़ा सा जोर लगाया तो पेशाब होने लगा। जाने कैसे मेरे लण्ड में भी तरावट आ गई और मेरे लण्ड से भी पेशाब निकल पड़ा। पेशाब निकलते ही मुझे बड़ा आराम सा लगा। हम दोनों ही पेशाब करने लगे। मुझे लगा कि साथ ही मैं झड़ भी गया हूँ … वीर्य भी साथ निकल गया है … एक अजीबो गरीब अहसास … जो मुझे कभी नहीं हुआ था।

“शैली यह क्या हुआ … मेरा तो माल ही निकल गया … “

“मेरे दूध का असर था … मैं भी झड़ गई हूँ … तुमने मुझे आज पूरा सन्तुष्ट कर दिया है … अब तुम सो जाओ।”

“आअह्ह्ह्ह्ह्ह, ये क्या … मुझे गहरी नींद आ रही है … ।”

“मेरे प्यारे जो, तुम्हारे पापा, मेरे मित्र थे … अपनी मां से पूछना … मुझे तुम्हारे नाना ने मार डाला था … पर मैं तुमसे, तुम्हारे पापा से प्यार करती थी … तुम्हारे अन्दर मुझे डेविड हन्टर नजर आते है … तुमसे चुद कर यूँ लगता है जैसे डेविड ही हो … मुझे तुम्हारा हमेशा इन्तज़ार रहेगा।” जैसे मुझे कोई दूर से बोल रहा हो … मेरी पलकें बंद होती जा रही थी … मैं सोना नहीं चाह रहा था। शैली मेरे ऊपर लेटी हुई मुझे चूमे जा रही थी … । उसके प्यार की गर्मी से मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।

सुबह पन्डित मुझे जगा रहे थे … मेरा सर भारी था, पन्डित जी ने मुझे कॉफ़ी पिलाई … मेरा सर थोड़ा हल्का हुआ। अचानक मुझे रात वाली घटना याद हो आई … मैंने तुरन्त बिस्तर की ओर देखा … वो एक दम साफ़ सुथरा था … कोई पेशाब का दाग नहीं था।

“अब आप जाईये जो साहब … भाभी को मेरा प्रणाम कहना … !”

मैंने उन्हें धन्यवाद कहा।

मैं बाहर निकल आया … मौसम साफ़ था … मैंने कार स्टार्ट की और मडगांव की ओर चल पड़ा।

घर आ कर मैंने मां से शैली के बारे में पूछा तो उन्होने बताया कि शैली एक बहुत अच्छी लड़की थी, सुन्दर थी, पर मेरी शादी पापा से होने वाली थी। मेरे पापा को पता चला कि उनका किसी शैली नाम की बार गर्ल से प्यार था और शारीरिक सम्बन्ध भी था। तो वे भड़क उठे। एक बार पापा ने उन्हें आपत्ति जनक हालत में पकड़ लिया, शैली की तो डर मारे पेशाब निकल गई थी, उसके पेट में बच्चा भी था , पर तुम्हारे नाना बड़े बेरहम निकले और शैली की वहीं हत्या कर दी। उसे वो समुद्र में फ़ेंक आये … तुम्हारें पापा को दादा ने बहुत मारा था … … ।

मां बोलती रही … मैं वहाँ से दुखी मन से उठ कर बाहर आ गया … और मजबूर शैली के बारे में सोचने लगा … क्या प्यार करना गुनाह है ??? मैंने सोचा कि शैली से उस रात ही माफ़ी मांग लूंगा, पर उसकी सेक्स की इच्छा, पापा का प्यार जो उसे मुझमें नजर आता है, बच्चे को दूध पिलाने की चाह, पापा जैसा शरीर की चाह … ये तो उसकी ही इच्छा थी … फिर क्या कहूँ उससे … मैं उलझता ही जा रहा था … Hindi Sex Stories

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