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मैं साक्षी एक बार फिर से हाजिर हूँ Antarvasna Sex Stories अपनी नई कहानी लेकर! सबसे पहले तो मैं आप सब लोगों का तहे-दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ कि आप लोगों ने मेरी कहानी कली से फूल बनूँ‘ को इतना सराहा और इतने ईमेल भेजे।
अब मैं अपना एक सन्देश उनको देना चाहती हूँ जो पहली बार सेक्स करते हैं।
कृपया सेक्स में जल्दी न मचायें और पहले जी भर के प्यार करें एक दूसरे को और अच्छे से यौन-पूर्व-क्रीड़ा करें फिर आगे बढ़ें!
मैं एक बात और लड़कियों को बताना चाहती हूँ कि आप लोग अगर सेक्स का मौका यह सोच कर छोड़ देती हैं कि आपके पति को शायद पता चल जायेगा!
तो बेफिक्र होकर सेक्स करिए क्योंकि किसी भी हालत में उन्हें नहीं पता चलने वाला!
तो शुरु करते हैं-
उन्हीं दिनों मेरी एक सहेली थी नीतू नाम की। हम दोनों लगभग सारी बातें एक दूसरे को बता देते थे। वो भी मेरी ही उम्र की थी और मेरी जैसी ही सुन्दर और उसका फिगर भी लगभग मेरे जैसा ही था।
एक दिन मैं घर पर अकेली थी और नीतू रात के लगभग 10 बजे मेरे घर पर आई। वो मेरे घर के बाजू वाले घर में ही रहती थी इसलिए रात को कभी कभी आ जाती थी। फिर हम दोनों साथ में टीवी देखती थी।
उसके आने के थोड़ी देर पहले ही मैंने रोहित की दी हुई एक व्यस्क मूवी देखी थी इसलिए थोड़ा उत्तेजित हो रही थी। मुझे रोहित की कमी महसूस हो रही थी। नीतू ने नाईट-सूट पहना था और मैंने ट्रांसपरेंट सी नाईटी पहनी थी जिसमें से मेरी ब्रा और पैंटी भी दिख रही थी।
नीतू- साक्षी आज तो तुम क़यामत लग रही हो।
साक्षी- क्यों ऐसी क्या बात है मेरी जान?
नीतू- तुमने तो गजब की नाईटी पहन रखी है!
फिर मैंने नीतू को अपनी बाँहों में भर लिया और चूम लिया।
नीतू- यह क्या कर रही हो? मैं तुम्हारी बॉय-फ्रेंड नहीं हूँ!
“तो क्या हुआ मेरी जान तुम रोहित से कम भी तो नहीं हो!”
और फिर मैंने नीतू के स्तनों को हल्के से दबाया, नीतू ने थोड़ी प्रतिक्रिया की पर फिर मना नहीं किया। शायद वो भी मूड में थी।
मैं उसको लेकर बिस्तर पर पहुँच गई और हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे की बाँहों में आ गए।
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को कस के चूसने लगे। मैं नीतू के स्तन भी हल्के हल्के दबा रही थी।
फिर मैंने नीतू के नाईट-सूट के टॉप के बटनों को खोला और उसे ऊपर करके उतार दिया। नीतू ने पीले रंग की ब्रा पहनी थी और उसके स्तन उसमें से बाहर आने को बेचैन थे।
नीतू ने भी मेरी नाईटी की गांठ खोल दी और मैंने अपनी नाईटी उतार दी।
फिर मैंने नीतू की लोअर धीरे धीरे उतार दी। अब हम दोनों ही सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। मैंने गुलाबी रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी। हम दोनों एक दूसरे को बाँहों में कस के जकड़ कर प्यार करने लगे और दोनों एक दूसरे से स्तन मसलने लगे।
फिर मैं नीतू के ऊपर आ गई और उसकी ब्रा को ऊपर कर दिया, उसके दोनों बड़े बड़े चुचे उछल कर बाहर आ गए और मैंने दोनों को कस के बारी बारी से चूसा।
आआअह्ह ह्ह्ह सवीईईऽऽ! क्या कर्रऽऽ रही हओ!
कुछ नहीं मेरी जान कब से तुम प्यार करना चाहती थी, आज तो मैं जी भर के तुम्हें प्यार करुंगी।
फिर मैं उसके दोनों स्तन मसलने लगी और चूसने लगी। उसने भी मेरी ब्रा नीचे कर दी तो मेरे दोनों चुचे बाहर आ गए। मैं थोड़ा ऊपर गई और अपने चुचे उसके मुँह के ऊपर ले गई।
उसने भी उछल कर मेरी चुचियों को मुँह में दबाया और कस के चूसने लगी।
फिर थोड़ी देर बाद मैं उसके पेट को चूमते हुए नीचे आई और उसके पैंटी के ऊपर से किस किया। उसकी भी पैंटी गीली हो गई थी। फिर मैं उसकी पैंटी नीचे करने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
नीतू- बस साक्षी इससे ज्यादा ठीक नहीं है!
साक्षी- पगली, मैं ही तो कर रही हूँ, मैं तुम्हें गर्भवती थोड़ा न कर दूंगी! तुम तो बस मजे लेती जाओ!
फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी, उसने अपने हाथों से अपनी चूत को ढक लिया। मैंने उसके हाथ हटाये और फिर उसकी जांघों के आस पास किस करते हुए जैसे ही उसकी गीली चूत को किस किया-
आऽऽह आऽऽ साआअवीईई!
वो पागल हो उठी, शायद उसको इतना मजा कभी नहीं आया था!
फिर मैं उसकी चूत को कस के चूसने लगी
ऊऊओह्ह ह्ह्ह्ह म्म्म्माआह!
नीतू कस के बिस्तर पकड़ कर चिल्ला रही थी।
फिर करीब 15 मिनट तक मैं उसकी चूत को चूसती रही, फिर ऊपर गई और उसके मुँह के पास बैठ गई।
नीतू मेरा इशारा समझ गई, उसने मेरी पैंटी को किनारे किया और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड़ दी।
अब मैं मजे ले रही थी- मैं अपने हाथों से अपनी चुचियों को हल्के हल्के मसल रही थी।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने भी अपनी पैंटी नीतू के सामने बगैर शरमाते हुए उतार दी। हम दोनों एक दूसरे के सामने पूरी नंगी थी। फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया और होठों को चूसने लगे और एक दूसरे की चुचियों को मसलने लगी।
नीतू- यार मेरी हालत तो तुमने ख़राब कर दी है, अब पूरा सेक्स कैसे होगा?
अब कोई हो तो बुलाओ!
शायद नीतू की आवाज रोहित ने सुन ली, मैं दरवाजा अन्दर से बंद करना भूल गई थी और यह भी कि मैंने रोहित को घर 10 बजे बुलाया था।
पर वो 10.30 बजे आया, दरवाजा खुला पा कर वो ड्राइंग रूम से होते हुए सीधे मेरे बेडरूम में आ गया, जहाँ हम दोनों गुथमगुथा थी।
उसकी तो बाछें खिल गई!
हम दोनों ही मना करने लायक हालत में नहीं थी और बिस्तर में एक दूसरे की बाँहों में सिमटे हुई थी।
पहले तो नीतू ने ही रोहित को देखा और वो ऊपर से नीचे तक कांप गई।
मैं तो उसकी चुचियों को नीचे जाकर चूस रही थी और उसकी चूत में अपनी ऊँगली डाल के उसकी चूत को फैला रही थी।
उसने मुझे झझकोरा, मैंने रोहित के तरफ देखा और कहा- अरे रोहित तुम कब आये?
अब सब अकबका रहे थे।
फिर रोहित ने अन्दर से दरवाजा बंद कर लिया और हमारे सामने ही अपनी टी शर्ट उतारी और फिर जीन्स भी उतार दी।
उसका लंड एक साथ दो दो नंगी लड़कियों को देख कर पागल हुआ जा रहा था। उसके अंडरवियर से ही उसका लंड फनफना रहा था। फिर उसको अपना अंडरवियर भी उतारना पड़ा क्योंकि उसका लंड उसमें से बाहर आने को मचल रहा था।
मैंने रोहित को पहले नीतू की जवानी तारने के लिए इशारा किया क्योंकि वो मुझसे ज्यादा तड़प रही थी।
फिर मैं नीतू से अलग हो गई और रोहित ने नीतू को अपनी बाँहों में भर लिया, नीतू भी रोहित से चिपक गई और रोहित नीतू के स्तन दबाते हुए उसको रसीले होठों को चूसने लगा।
मैं रोहित को देख रही थी और मेरी हालत और ख़राब होती जा रही थी। रोहित जी भर के नया स्वाद चख रहा था।
फिर रोहित नीचे आ कर नीतू की चुचियों को मुँह में ले कर चूसने लगा और कस के मसलने लगा।
नीतू ये सब पहले ही करवा चुकी थी इसलिए उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था, वो बहुत जोर से तड़प रही थी।
फिर रोहित ने नीतू की चुचियों को अच्छे से चूसा और दबाया, फिर उसका पेट और नाभि चूमते हुए वो नीचे आने लगा। नीतू की चूत तो जबरदस्त गीली थी क्योंकि मैं भी उसे कस के चूस चुकी थी।
फिर रोहित ने नीतू की चूत को फैला कर अपनी जीभ अन्दर डाल दी और उसकी दोनों चुचियों को दबाते हुए उसकी चूत को चूसने लगा।
15 मिनट तक रोहित ने नीतू की चूत को कस के चूसा और फिर वो ऊपर आया और अपना लंड नीतू के मुँह के ऊपर रख दिया, नीतू की आँख बंद थी इसलिए जैसे ही उसने आँख खोली रोहित का लंड अपने मुँह के ऊपर देख कर वो एकदम से घबरा गई।
उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको रोहित का लंड मुँह में लेने का इशारा किया।
फिर वो रोहित का मोटा और लम्बा लंड मुँह में ले कर चूसने लगी।
रोहित आहें भर रहे था।
मैं रोहित के पास आ कर बैठ गई तो रोहित मेरी चुचियों को मसलने लगा।
नीतू रोहित का लंड इतने जोर जोर से चूस रही थी कि रोहित नीतू के मुँह में ही स्खलित हो गया।
नीतू ने भी उसका वीर्य पूरा पी लिया और तब तक लंड मुँह में ले कर रखा जब तक वो दोबारा खड़ा नहीं हो गया।
फिर रोहित ने अपना लंड नीतू के मुँह से निकाला और फिर उसके ऊपर लेट गया।
रोहित ने अपना लंड नीतू के चूत में रखा और कस के धक्का मारा।
“आऽऽऽह आऽऽ म्म्म म्मर गईइऽऽऽ!” नीतू गला फाड़ कर चिल्लाई।
मैंने एकदम से नीतू के मुँह में अपना हाथ रख दिया और अपनी चूत को नीतू के मुँह में लाकर उसके ऊपर बैठ गई।
नीतू ने अपनी जीभ मेरी चूत में डाल दी और उधर रोहित पूरी ताकत से नीतू के चूत में अपना लंड घुसाने लगा।
मैंने रोहित को बोला- आराम से डालना जानू! नहीं तो कुंवारी लड़की मर जायेगी।
पर रोहित कहाँ रुकने वाला था, उसने तो बस पूरी ताकत से अपना लंड नीतू की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुसेड़ दिया।
नीतू इतना जोर का धक्का बर्दाश्त नहीं कर पाई और बेहोश हो गई।
रोहित ने पास पड़ा तौलिया उठाया और नीतू की चूत से निकल रहे खून के आस पास तौलिया लगा दिया।
मैं उठी और फिर पानी लाकर नीतू के चहेरे में एक दो बूँद पानी के छींटे मारे।
नीतू होश में आई तो रोने लगी। फिर मैंने उसे समझाया कि पहली बार तो ऐसा होता ही है क्योंकि मेरे साथ भी हुआ था।
अब तक नीतू भी कुछ सामान्य हो गई तो रोहित उसे धीरे धीरे चोदने लगा।
शुरु शुरु में कुछ धक्कों तक तो नीतू चिल्लाती रही फिर धीरे धीरे उसकी चीखें उसकी आहों में बदल गई- आआह्हह साआआवीईईई…
नीतू ने कहा- ये तुम्हारा प्रेमी तो बिल्कुल एक्सपर्ट है चुदाई का!
यह सुनकर रोहित फुला नहीं समाया और फिर वो नीतू को जोर जोर से चोदने लगा, पूरा कमरा नीतू के आहों से गूंजने लगा- आहऽऽअ ऊओह्ह ह्ह्ह!
रोहित नीतू को थोड़ी देर तक जोर जोर से चोदता रहा फिर पता नहीं उसको मेरे पर भी तरस आ गया। उसने अपना लंड नीतू की चूत से निकाला और पूरा नीतू की चूत का रस लगा गीला लंड मेरे मुँह में दे दिया।
मैंने उसका लंड अपने मुँह में पूरा अन्दर ले लिया और उसके मोटे और लम्बे लंड को जोर जोर से चूसने लगी।
नीतू की चूत का रस मुझे बहुत भा रहा था।
नीतू अपनी चूत में ऊँगली डाल के ऊँगली अपने मुँह में डाल रही थी।
फिर रोहित ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाला और मुझे अपने गोद में बिठा लिया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
फिर मेरी गांड को ऊपर उठा के मुझे चोदने लगा और मेरी चुचियों को अपने मुँह में भर के चूसने और दबाने लगा।
क्या रात थी वो!
और रोहित की तो जैसे किस्मत खुल गई थी! दो दो लड़कियों के मजे ले रहा था वो!
थोड़ी देर बाद उसने मुझे कुतिया स्टाइल में किया और पीछे से चोदने लगा।
मैंने नीतू की चूत को अपने मुँह के पास किया और उसकी चूत को चाटने और चूसने लगी।
फिर करीब 2 घंटे तक वो हम दोनों को बारी बारी से चोदता रहा और हम दोनों लड़कियों की रात उसके पहलू में गुजरी।
मैं बता और लिख नहीं सकती की क्या क़यामत की रात थी वो!
सवेरे जब मैं जागी तो रोहित जा चुका था, नीतू मेरी बाँहों में कस के जकड़ के सो रही थी।
मैंने नीतू को अलग करने की कोशिश करी तो वो ऊँघते हुए उठी।
मैंने नीतू की तरफ देखा तो नीतू थोड़ा शरमा सी रही थी। मैंने पूछा- क्या हुआ मेरी जान?
तो नीतू ने कहा- मैंने बहुत अच्छा सपना देखा कि मैं तुम और तुम्हारा प्रेमी रोहित एक साथ हैं और वो सब मेरे साथ भी हो गया जो कुछ दिन पहले तुम्हारे साथ हुआ था।
मैंने नीतू के तरफ मुस्कुरा के देखा।
नीतू ने फिर अपने आप को देखा और उसकी नज़र जैसे ही चूत पर पड़ी वो समझ गई कि कल रात को उसने सपना नहीं देखा बल्कि वो सब कुछ सचमुच हो गया।
उसने बिस्तर पर लगा हुआ उसकी चूत से निकला हुआ खून भी देखा। उसकी चूत मेरे से भी ज्यादा बुरी हालत में थी और बहुत फटी हुई थी।
फिर वो मुझसे लिपट गई और बोली- क्या ये सब ठीक हुआ?
मैंने उसको ढांढस बंधाया कि सब भूल जाये और इसे एक खुशनुमा सपना समझ कर कभी कभी याद कर ले।
फिर हम दोनों साथ साथ नहाई और वो अपने घर चली गई।
तो दोस्तो, कैसी लगी यह नई कहानी! मैं जल्द ही अगली कहानी लेकर फिर से हाज़िर होऊँगी।
आज के लिए विदा दोस्तो! Antarvasna Sex Stories
मेरी यह कहानी Hindi Sex काल्पनिक है। इस कहानी का आधार एक औरत पर है जिससे मैंने एक चैट-साइट पर कई बार बात की। उसके साथ कई बार चैट-रुम में चुदाई भी की। मैं उसको माँ बुलाता हूँ और वह मुझको बेटा।। हम दोनों अलग अलग शहर में रहते है और कभी भी मिले नहीं हैं। मेरा नाम दीपक है और मैं 26 साल का हूँ । मेरे लन्ड का आकार 8 इंच है।
उसका नाम रीमा है। उसने जो मुझको बताया उसके अनुसार वह एक तलाकशुदा औरत है। उसकी उमर 48 साल की है और उसकी फ़िगर 38 डी 30 42 है और वह दिल्ली में रहती है। रीमा को कम उमर के लड़कों से चुदाने में बड़ा मजा आता है। उसकी एक नौकरानी भी है जो 20 साल की है। वह सेक्स में उसका साथ देती है। उसको जवान लौन्डों की कोई कमी नहीं है।
वह जिस ऑफ़िस में काम करती है उसके बॉस के साथ उसके संबन्ध हैं। उसका बॉस शादीशुदा है और कोई 26 साल की उमर का है। वह अपने बॉस के साथ बहुत टूर पर जाती रहती और टूर पर वह अपने बॉस और कलाईन्ट के साथ चुदाई के मजे लेती है।
चैट-साईट पर हम लोगों में चुदाई की बातें होने लगी। मैंने उसको बताया कि मुझे बड़ी उमर की औरतें बहुत पसन्द हैं। उसने मेरे से पूछा कि मैं किस बड़ी उमर की औरत के बारे में सोच कर हस्तमैथुन करता हूँ ।
मैने कहा- अपनी माँ के बारे में !
उसने पूछा कि मेरी माँ का नाम क्या है और वह कैसी दिखती है तो मैंने बताया कि मेरी माँ का नाम निर्मला है और उसका रंग गोरा है, उसके नयन-नक्श बहुत ही तीखे हैं, उसकी फिगर 36 सी 30 40 है।
फिर हमने इस बारे में बहुत सारी बातें की जो आपको आगे पता चलेंगी। वो मुझसे चैट करके बहुत मजा लेती थी। मुझे भी उसके साथ बड़ा मजा आता था।
एक दिन उसने मुझसे कहा कि वह सचमुच में मुझसे चुदाना चाहती है। पर मैं मुम्बई में रहता हूँ और उसका बॉस का मुम्बई में कोई टूर नहीं होता, जिसकी वजह से हम लोग कभी भी मिल नहीं पाये थे। पर हम दोनों ने अपने फोन नम्बर और घर का पता एक दूसरे को बता दिया था और एक दूसरे को कार्ड भी भेजते थे और हम चैट-रुम में ही चुदाई का मजा लेते थे।
फिर एक दिन जब हम चैट कर रहे थे तो वह बोली कि उसका बॉस मुम्बई में एक नई शाखा खोलने की सोच रहा है और इसके लिये वे टूर पर मुम्बई आ रहे हैं। और उसने अपने बॉस से बात की कि वह टूर समाप्त होने के बाद चार दिन के लिये मुम्बई में अकेले रुकना चाहती है होटल में, कम्पनी के खर्चे पर। उसका बॉस इस बात के लिये राजी हो गया है।
मैं तो यह खबर सुन कर बहुत खुश हुआ क्योंकि अब हम वह सब कर सकते थे जो कि हमने करने की चैट-रूम में बात की थी। उसने कहा कि वह ताज होटल में रुकने वाली है और उसका कमरा नम्बर वह बाद में मुझको फोन पर बतायेगी। उसने कहा कि वह 4 फरवरी को मुम्बई आ रही है और 8 फरवरी को मुझको फोन करेगी।
पर 4 तारीख को उसका फोन आया कि वह मुम्बई पहुँच गई है और बाद में मुझ को फोन करेगी।
मैंने उसको कहा- मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूँगा।
पर 8 तारीख को उसका फोन नहीं आया। मैंने सोचा कि शायद काम पूरा नहीं हुआ होगा। लेकिन फिर 9 और 10 तारीख को भी उसका फोन नहीं आया अब तो मैं बहुत ही उतावला हो रहा था । सोचने लगा कि कहीं वह मजाक तो नहीं कर रही थी। पर मैं कर भी क्या सकता था उसके फोन के इंतजार के अलावा।
फिर अगले दिन बुधवार था दोपहर को करीब एक बजे रीमा का फोन आया उसकी अवाज सुनते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने पूछा- तुमने फोन क्यों नहीं किया ? मैं तो सोच रहा था कि तुम फोन ही नहीं करोगी।
रीमा ने कहा कि ब्रान्च खोलने के बात पक्की हो गई है इसलिये वह, उसका बॉस और यहाँ का मैनेजर मिल कर दो दिन से मौज कर रहे थे। दोनों ने मिल कर उसको दो दिन तक बहुत जम कर चोदा था। इसलिये दो दिन वह फोन नहीं कर पाई आज सुबह ही उसका बॉस वापस दिल्ली गया है और वह सुबह से आराम कर रही थी जिससे कि मेरे साथ पूरी तरह से मजा ले सके। लेकिन उसको पहले से ही पता था कि वह मुझको 11 तारीख से पहले फोन नहीं कर पायेगी।
मैने पूछा- फिर तुमने बताया क्यों नहीं?
रीमा बोली- मैं तुमको कुछ देर तड़पाना चाहती थी। मुझको जवान लड़कों को तड़पाने में बड़ा मजा आता है।
मैंने पूछा- अब तो बताओ कि तुम्हारा रूम नम्बर क्या है।
रीमा बोली- मुझ से मिलने के लिये तड़प रहे हो?
मैंने कहा- हाँ !
ठीक है, बता देती हूँ तुमको ! तुम भी क्या याद करोगे। मेरा रूम नंम्बर 514 है।
मैंने कहा- ठीक है, मैं अभी वहाँ पहुँच रहा हूँ।
रीमा ने कहा कि वह भी बड़ी बेसबरी से मेरा इंतजार कर रही है और जैसे हो, वैसे ही चले आओ क्योंकि वैसे भी इन चार दिनों में मैं तुमको कोई कपड़े तो पहनने दूंगी नहीं। बस अब चले आओ दौड़ कर अपनी माँ के पास।
मैंने कहा- ठीक है माँ, आता हूँ अभी।
रीमा बोली- मैंने अपने कमरे के बाहर “डू नॉट डिस्टर्ब” का साईन लगा दिया है जिससे कि जब घंटी बजेगी तो मैं समझ जाऊँगी कि तुम हो।
मैंने कहा- ठीक है।
फिर मैंने फोन रख दिया और अपने बॉस के पास गया। मैंने छुट्टी के लिये पहले से ही बोल रखा था इसलिये कोई परेशानी नहीं हुई। नहीं तो जिस तरह की मेरी बॉस थी छुट्टी मिलना बिल्कुल ही नामुमकिन था।
फिर जल्दी से मैं टैक्सी पकड़ कर होटल पहुँच गया। मेरा दिल धक धक कर रहा था। मैं आज तक कुवाँरा था आज मेरे इस कुंवारे लंड को चुदाई-चुसाई का मजा मिलने वाला था। फिर मैं लिफ़्ट से पाँचवे माले पर गया जहाँ पर रीमा का कमरा था। जैसे ही मैं गलियारे से निकल कर रीमा के कमरे की तरफ़ जा रहा था तो दीवार पर लगे साईन को देख कर मैं समझ गया कि उसका कमर होटल के आलीशान रूम में से एक था।
थोड़ी देर में मैं कमरे तक पहुँच गया, मैंने धड़कते हुये दिल से घण्टी बजाई।
अन्दर से रीमा की आवाज आई- आ रही हूँ दीपक बेटा।
कुछ पल बाद कमरे का दरवाजा खुला। और मेरे सामने रीमा खड़ी थी।
मैं अभी उसे ठीक से देख भी नहीं पाया था कि उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अन्दर खींच लिया। और एक झटके के साथ दरवाजा बन्द कर दिया। मैं उसकी इस हरकत से एक दम सकपका गया।
रीमा ने कहा- अगर मैं तुमको इस तरह से अन्दर नहीं खींचती तो तुम बाहर खड़े खड़े ही मुझ देखते रहते जो कि मैं नहीं चाहती थी। तुमको मुझको देखना हे तो लो मैं तुम्हारे सामने खड़ी हो जाती हूँ, जी भर के देख लो।
ऐसा कह कर वह मेरे सामने अपने दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ी हो गई। खड़ी होने से पहले उसने अपनी साड़ी का पल्लू उतार कर अपनी कमर से नीचे गिरा दिया। यह सब इतनी ज्लदी में हुआ था कि मुझे उसको देखने का मौका भी नहीं मिला था। अब वह मेरे सामने थी और मैं जी भर कर उसको देख सकता था।
फिर मैंने अपनी नजर उस पर गड़ा दी। उसका रंग गोरा था। उसने अपनी उमर मुझको 48 साल बताई थी पर वो अपनी उमर से करीब दस साल छोटी दिखती थी। उसकी आँखे बड़ी-बड़ी थी जिनमें वासना भरी हुई थी। उसके होंठ बड़े-बड़े थे। जैसे कि अभिनेत्री सुमन रंगनाथन के हैं। मुझे इस तरह के होंठ बहुत ही पसन्द हैं। उस पर उसने गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगा रखी थी। जो उसकी सुन्दरता को और बढ़ा रही थी।
उसके चेहरे पर एक आमत्रंण का भाव था, जैसे कह रही हो- आओ और चूम लो मेरे होठों को।
फिर मेरी नजर उसके बदन पर गई, बड़ा ही भरपूर बदन था उसका। उसका गदराया बदन देख कर मेरा लंड पैन्ट के अन्दर ही उछलने लगा था।
उसने हल्के गुलाबी रंग की साड़ी पहन रखी थी। उसका ब्लाऊज़ स्लीवलेस था। और उसमें काफ़ी गहरा कट था जिसकी वजह से उसके बड़े बड़े मम्मे आधे से ज्यादा ब्लाउज़ से बाहर झाँक रहे थे। रीमा ने शायद बहुत ही टाईट ब्लाउज़ पहन रखा था क्योंकि उसके मम्मों की दोनों बड़ी बड़ी गोलाईयाँ आपस में चिपक गई थी। और एक गहरा कट बना रही थी। जो कि बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।
इस नजारे को देख कर मैं उत्तेजना से पागल हो रहा था। मेरे लंड का उभार मेरी पैन्ट से साफ़ दिखाई दे रहा था।
फिर मेरी नजर उसके पेट पर गई। उसने साड़ी अपनी नाभि के काफ़ी नीचे पहनी थी। जिससे उसकी गहरी नाभि साफ़ दिखाई दे रही थी। उसकी नाभि की गहराई देख कर मेरा मन उसको चूम लेने का हुआ। फिर मैं थोड़ी देर तक उसको ऐसे ही निहारता रहा।
कुछ देर बाद रीमा ने कहा- क्या हुआ बेटे? कैसी लगी तुमको अपनी माँ?
मैंने कहा- बहुत ही अच्छी।
रीमा ने कहा- वो तो तुम्हारे पैन्ट में उभरते तुम्हारे लंड को देख कर पता चल रहा है।
मैं उसको देख कर इतना गर्म हो गया था कि मेरा गला सूखने लगा और मुझ को प्यास लगने लगी।
रीमा मेरे को देख कर शायद समझ गई कि मेरे को प्यास लगी है, बोली- पानी चाहिये बेटा?
मैंने कहा- हाँ।
” ठीक है अभी लाती हूँ ” कह कर उसने अपनी साड़ी का आँचल उठा कर पेटीकोट में ठूंस लिया और पलट कर पानी लेने चल दी।
जैसे ही वह पलटी, सबसे पहले मेरी नजर उसके भारी भरकम चूतड़ों पर गई। औरत के चूतड़ मेरा सबसे पसन्दीदा अंग है। और रीमा के चूतड़ तो बहुत ही बड़े थे। उसने ऊँची ऐड़ी की सैंडल पहन रखी थी, जिसकी वजह से जब वह चल रही थी तो उसके चूतड़ बहुत ही मस्ताने ठंग से मटक रहे थे जैसे किसी फैशन शो में मॉडल अपने चूतड़ों को मटका के चलती है वैसे ही।
एक तो उसको आगे से देख कर ही मेरा बुरा हाल था, अब तो मैंने उसको पीछे से भी देख लिया था, मेरा लंड तो बिल्कुल ही आपे से बाहर हो गया। वो भी शायद जानती थी कि उसके चूतड़ों का मुझ पर क्या असर होगा क्योंकि मैं उसको बता चुका था कि भारी चूतड़ मुझ को कितने पसन्द हैं। इसलिये मेज तक जाने में, जहाँ पर पानी का जग रखा था, उसने बहुत देर लगाई जिससे मैं जी भर कर उसके चूतड़ और उनका मटकना देख सकूं।
फिर उसने जग उठाया और मेरी तरफ़ देखते हुये उसने गिलास में पानी भरना शुरू किया। वह मुझ को देख कर मस्ती भरी नजरों से मुस्कुरा रही थी। पानी भरकर वह मेरी तरफ़ चल दी। उसके मस्त बदन ने मेरे उपर ऐसा असर किया था कि मैं अभी तक दरवाजे पर ही खड़ा था। उसने ऊँची ऐड़ी के सैंडल पहन रखे थे और जिस तरह से वह चूतड़ मटका के चल रही थी उसकी वजह से उसके बड़े बड़े मम्मे उसके कसे ब्लाउज़ में फंसे हुए जोर जोर से उछल रहे थे।
उसने पूरी तरह से मुझको अपने अधेड़ उम्र के हुस्न के जाल में फंसा लिया था।
लो ! पानी पी लो ! कह कर उसने गिलास मेरे हाथ में थमा दिया। मैं पानी पीने लगा और पानी पी कर मैंने गिलास उसको दे दिया।
“जो देखा पसन्द आया?”
मैं मुस्कुरा कर बोला- हाँ ! बहुत पसन्द आया।
“फिर यहाँ क्यों खड़े हो ? चलो अन्दर बैठते हैं।”
फिर मैं उसके साथ चल दिया, अन्दर आकर मैं सोफ़े पर बैठ गया। अन्दर आने से पहले मैंने अपने जूते बाहर ही उतार दिये। रीमा भी मेरे पास आ कर बैठ गई।
मैंने उसका हाथ अपने हाथों में लिया और बोला- माँ ! तुम बहुत सुन्दर हो। जैसा तुमने बताया था तो मैने सोचा था कि तुम सेक्सी हो पर तुम तो महा-सेक्सी हो माँ। मेरा लंड तो तुमको देखते ही खड़ा हो गया था माँ और अभी तक पूरी तरह टनटनाया हुआ है, देखो ! कैसे पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को तैयार है।
” फिर तुमने इसको पैन्ट के अन्दर रखा ही क्यों है पैन्ट उतार कर अपने प्यारे लंड को मुझको दिखाओ। लाओ मैं तुम्हारे कपड़े उतरने में तुम्हारी मदद करती हूँ।”
मैंने कहा- नहीं माँ ! मैं खुद ही उतार देता हूँ।
तो वह बोली- हर माँ बचपन में अपने बेटे के कपड़े उतारती और पहनाती है। माँ ही होती है जो बेटे को कपड़े पहनना और उतारना सिखाती है। मुझे तो वो मौका आज ही मिला है तुम इस तरह से मुझसे यह मौका नहीं छीन सकते।
रीमा की बात सुन कर मैं बोला- ठीक है माँ, तुम ठीक कह रही हो ! मैं इस तरह से तुम्हारा हक नहीं छीन सकता। मैं तैयार हूँ उतार दो मेरे कपड़े। आज से जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ और जब भी हम मिलेंगे, मेरे कपड़े तुम ही उतारोगी और तुम ही पहनओगी।
यह सुन कर वह बहुत खुश हो गई और मेरे माथे पर चूम लिया जैसे एक माँ अपने बेटे को करती है।
फिर वह मेरी कमीज के बटन खोलने लगी। उसके भरी पूरी गोरी बाँहे मुझको बहुत अच्छी लग रही थी। फिर उसने सारे बटन खोल दिये और बोली- बेटा खड़े हो जाओ जिससे मैं तुम्हारी कमीज उतार सकूँ।
मैं खड़ा हो गया, रीमा भी मेरे साथ खड़ी हो गई और पीछे कर के मेरी कमीज उतार दी। मैंने नीचे बनियान पहन रखी थी। मेरी कमीज उतार कर रीमा मेरी छाती पर हाथ फेरने लगी और बोली- तुम्हारी छाती कितनी चौड़ी है। तुम भी कोई कम हैडसम नहीं हो। तुम इतने सालों अपनी माँ से दूर रहे हो जिसकी वजह से तुम्हारी ये माँ तुमको कुछ प्यार भी नहीं कर पाई। चिन्ता मत करो अब तुम मेरे पास आ गये हो, अब मैं तुमको अपना सारा प्यार दूंगी।
ऐसा कहते वक्त उसके आँखो में वासना भरी थी। ऐसा कह कर उसने मेरी बनियान भी उतार दी।
बनियान उतरते वक्त उसने अपने हाथ ऊपर किये। उसने स्लीवलैस ब्लाउस पहन रखा था जिसकी वजह से उसकी काँख मुझको दिखाई दी। उसकी काँख के बाल काले और घने थे। मुझे काँख के बाल बहुत पसन्द हैं। उसकी काँख देखकर मेरी मस्ती और बढ़ गई। बनियान उतार कर उसने कमरे के एक कोने मै फेंक दी। अब मेरी छाती पूरी नंगी हो गई और वो अपने गोरे गोरे हाथ मेरी छाती पर धीरे धीरे फिराने लगी। जिसकी वजह से मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी और मेरे चुचूक कड़े हो गये।
फिर रीमा ने अपनी एक उँगली को अपने थूक से गीला करके मेरे बायें चुचूक पर फिरने लगी और उसका दूसरा हाथ मेरी छाती पर धीरे धीरे चल रहा था। वो अच्छी तरह से जानती थी कि किस तरह मर्द को मस्त किया जाता है।
थोड़ी देर इसी तरह से मेरी छाती पर हाथ फेरने के बाद उसने अपना मुँह मेरे चुचूक पर रख दिया और उसे अपने होंठों के बीच लेकर चूसने लगी। उसके ऐसा करने से मेरे मुँह से एकदम से एक आह निकल गई। इसका सीधा असर मेरे लंड पर हुआ, वो मस्ती में एक दम कड़ा हो गया। अब उसका मेरी पैन्ट में रहना बड़ा ही मुश्किल था !
क्रमशः…………………. Hindi Sex
सबसे पहले मैं Antarvasna हिमांशु, हेल्लो कहूँगा लड़कियों, आंटियों, भाभियों को जो अपना समय निकाल कर अन्तर्वासना डॉट कॉम पर कहानियाँ पढ़ती हैं !
अब मैं शुरू करूँगा अपनी कहानी जिसने मुझे दिल्ली का एक मशहूर मालिश बॉय बना दिया।
बात पिछले साल की है जब मैं अपने मित्र सुरेश के यहाँ उसकी माँ से पढ़ने जाया करता था। सुरेश( नाम बदला हुआ है) ग्रेटर कैलाश में एक पोश सोसाइटी में रहता है! मैं और मेरा परिवार कालका जी में रहते हैं। सुरेश और मेरी दोस्ती स्कूल में हुई और अब हम कॉलेज में एक साथ पढ़ते हैं। सुरेश की माँ सुदेशना( नाम बदला हुआ है) की उम्र लगभग 40 साल की होगी। वह बहुत सुन्दर है और उसकी काया सिक्खनी औरत की तरह है भरी हुई ! जब भी मैं उनसे पढ़ने जाता था तो अपने आप को कभी उनकी तरफ ललचाई नज़रों से देखने को रोक नहीं पाता था। मैं अपने दोस्त की वजह से कुछ भी नहीं कह पाता था। पर मुझे ऐसा लगता था कि जैसे आंटी ने मुझे उन्हें देखते हुए देख लिया था।
बात उस दिन की है जब मैं घर में किसी काम के कारण कॉलेज नहीं जा पाया और उस दिन मैंने आंटी को उनके मोबाइल पर फ़ोन करके पूछा कि आज मैं छुट्टी पर हूँ, क्या मैं अभी पढ़ने आ सकता हूँ ?
आंटी ने मुझे बताया की वो बाज़ार में हैं और अभी शॉपिंग कर रही हैं। मैंने फ़ोन रख दिया। पाँच मिनट बाद मुझे मेरे मोबाइल पर फ़ोन आया कि मैं 30 मिनट में उनके घर पहुंचूँ ! मुझे कुछ अजीब लगा, आंटी ने कहा कि वो अभी अभी मार्केट पहुँची हैं और शॉपिंग कर रही हैं, और उन्होंने अपनी खरीदारी रद्द करके मुझे पढ़ना जरूरी समझा।
यह सब कुछ सोचता हुआ मैं उनके घर पहुंचा तो देखा कि आंटी दरवाज़े पर खड़ी हैं।
हेल्लो आंटी !
हेल्लो बेटा ! क्या बात है आज कॉलेज नहीं गए क्या ? सुरेश तो गया हुआ है।
आज घर पर कुछ काम था। क्या आप अभी मुझे पढ़ा पाएंगी?
हाँ हाँ ! अन्दर आओ !
आंटी ने पीले रंग की पारभासक साड़ी पहन रखी थी और उनका बदन चमक रहा था। यह सब देख कर मेरा मन कह उठा कि किसी तरह आज आंटी को छूने का मौका मिल जाए ! लेकिन मुझे क्या पता था कि छूना तो एक शुरुआत होगी एक बड़े काम की !
मुझे अन्दर बैठा कर आंटी रसोई में चाय और खाने का सामान लाने गई ! थोड़ी देर में रसोई से किसी के ज़मीन पर गिरने की आवाज़ आई तो मैं रसोई में पहुंचा तो देखा कि आंटी फर्श पर गिरी हुई हैं। आंटी दर्द से कराह रही थी और कह रही थी- कुछ करो बेटा ! मुझे दर्द हो रहा है !
मैं भाग कर डॉक्टर को फ़ोन करने लगा तो आंटी ने आवाज़ लगाई- मुझे उठा तो लो ज़मीन से !
फिर मैं आंटी को उठा कर उनके बेडरूम में ले गया और फिर डॉक्टर को फोन करने जाने लगा तो आंटी बोली- डॉक्टर की ज़रूरत नहीं है ! मैं दवाई ले लूंगी, तुम स्टोर से ला दो !
मैं स्टोर से दवाई ले कर आया तो आंटी दर्द से कराह रही थी और कह रही थी- बेटा मेरे पैर दबा दो ! दर्द हो रहा है !
मैंने पैर दबाने शुरू किये तो कहने लगी- दर्द इससे नहीं जायेगा, तुम एक काम करो, तेल ले आओ और लगा दो !
मैं स्टोर से तेल ले कर आया तो देखा कि आंटी ने अपना पेटीकाट और साड़ी ऊपर कर रखी है और दर्द से आ ऽऽऽ ह !!!! कराह रही हैं।
वो बोली- ले आए हो तो लगा भी दो अब तेल !
मैंने पैर पर तेल लगाना शुरू किया तो आंटी अहाहहा करने लगी। धीरे धीरे मैंने देखा कि आंटी गरम हो रही हैं मैंने अपना हाथ पैरों से उनकी जांघ पर लगा दिया तो वो एक दम से कराही- आआह्ह्ह्ह!!
उनकी इस कराहट में दर्द नहीं ख़ुशी थी। मैं अपना काम करता रहा। धीरे-धीरे मैं मौका देख कर उनकी पैंटी को छू लेता। उनकी तरफ से कुछ आपत्ति न होने पर मैंने लगातार उनकी पैन्टी पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उनका चेहरा लाल हो गया, उनकी आंखें बंद और मेरा लण्ड मेरी पैंट फाड़ कर बाहर आना चाहता था। मैं जानता था कि बस थोड़ा और इंतज़ार करना होगा मुझे और मंजिल करीब है !
अब मैंने उनकी पैन्टी के अन्दर हाथ डालना शुरू ही किया कि वो पलट गई और बोली- उतार दे इसे ! फ़ाड़ डाल ! बहुत दिनों की प्यासी हूँ मैं ! मसल डाल मुझे !
यह सुन कर मैं पहले तो थोड़ा घबरा गया फिर अपने आप तो सँभालते हुआ उनकी पैन्टी उतार कर उनकी योनि की मालिश करने लगा ! वो कराह रही थी- आआह्ह्ह्ह!!! उंहऽऽ आ !
उनका ब्लाऊज़ निकाल कर उनके वक्ष पर मालिश करना शुरू किया तो वो पागल हो गई कहने लगी- तेरी उँगलियों में तो जादू है रे !
मेरा एक हाथ उनका चुचूक मसल रहा था और दूसरा उनकी चूत में !
अब मैंने अपना लण्ड उनके हाथ में दिया और उससे देख वो पागल सी हो गई, बार-बार उसे जोर जोर से आगे पीछे करने लगी। उसका आकार देखकर कहने लगी- ऐसा तो मैंने फिल्मों में या पत्रिका में ही देखा है !
और यह कह कर लण्ड को अपने मुँह में ले लिया !
मेरे लण्ड की मालिश कर वो बोली- अब इस लौड़े से मेरी चूत फ़ाड़ दो !
मैं लण्ड डालने लगा तो चिल्लाई- रुको, पहले कण्डोम पहन लो !
मुझे कण्डोम पहनकर डालने के लिए जोर देने लगी !
अब मैं कंडोम पहन कर खड़ा हो गया और वो कुतिया की अवस्था में हो गई और बोली- डालो ! फ़ाड़ डालो आज इसे !
मैंने जैसे ही पहली बार अन्दर डाला तो वो चिल्ला पड़ी और बोली- थोड़ी धीरे धीरे ! इतना बड़ा और भारी लण्ड मैंने कभी अन्दर नहीं लिया !
आगे पीछे और ऊपर-नीचे होकर मैंने उन्हें मैंने दो बार चोदा। फिर सुरेश के आने का समय हो गया और मैं कपड़े पहन कर जाने की तैयारी करने ही लगा था कि वोह मेरे हाथ में दो हज़ार रुपए पकड़ा कर बोली- ये लो ! आज तुमने मुझे खुश कर दिया !
तो मैंने कहा- आंटी, नहीं ! ये पैसे में नहीं ले सकता क्योंकि मैंने भी उतना ही आनन्द लिया जितना आपने !
उनके बहुत जोर देने पर मुझे पैसे रखने पड़ गए। आंटी ने मुझे होटों पर चूमा, मेरे लण्ड को बाहर से चूमते हुए मुझे गुड-बाय कहा !
एक वह दिन था और आज का दिन है। उस दिन के बाद मैंने आंटी तो कई बार चोदा, और यही नहीं उन्होंने मुझे अपनी कई सहेलियों से मिलवाया किटी पार्टी में और कभी होटल में !
और आज उस एक मालिश ने मुझे दिल्ली का एक मशहूर मालिश वाला बना दिया है। सबका यही कहना है कि तुम्हारी उँगलियों में तो जादू है, हाथ लगते ही ये किसी और दुनिया में ले जाती हैं ! Antarvasna
मैं अन्तर्वासना का Sex Stories नियमित पाठक हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी सेक्स अनुभव के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के बार-बार मुठ मारने लगेंगे और लड़कियाँ, भाभियाँ और आन्टियाँ लण्ड की तलाश करने लग जाएँगी।
दोस्तो, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। और सबको मेल भी किया वो सारी कहानियाँ बनावटी हैं। कोई भी आदमी इतनी आसानी से सेक्स के लिये औरतो को तैयार नहीं कर सकता, और किसी भी औरत को इतनी भूखी नहीं होती जितना वो अपनी कहानी में आपको बताते हैं। अगर है तो वो सब मेल का जवाब जरुर देती।
यह सब छोड़ो! हम आते हैं अपनी बात पर! हम कहानी पर आते हैं।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं 24 साल का हूँ, कद 5″7′ है और मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं वाराणसी (चौक) से हूँ।
बात करीब दो साल पहले की है, मेरे भैया की शादी थी, सारे रिश्तेदार, नातेदार सब आए हुए थे, उन सबमें मेरे गांव के चाचा की लड़कियाँ भी आई थी। उनमें से एक थी साधना। उसकी फ़िगर दोस्तो समझ लीजिये कयामत थी। स्वर्ग से उतरी अप्सरा जैसी तो नहीं थी, पर उससे कम भी नहीं थी।
मेरे खानदान में सब मेरी बहुत इज्जत करते हैं। वो लड़की भी मेरी बहुत इज्जत करती थी। शादी में दो दिन रह गये थे। मैं तो उसे देखकर पागल तो हो ही रहा था, सो मैंने उसे प्यार का इजहार करने का सोचा, मेरी गांड तो बहुत फट रही थी, लेकिन मैंने आखिर में हिम्मत जुटा ही ली। उस वक्त घर में कोई नहीं था, तो मैंने उससे चाय बनाने के लिये बोल दिया। थोड़ी देर में वो चाय बना कर लाई तो मैंने उससे उसकी चाय के बारे में पूछा तो उसने कहा कि मैंने अपनी चाय नहीं बनाई है।
तो मैंने उसे जबर्दस्ती कप मंगाकर चाय दी और उसे अपने पास बैठने को कहा। चाय पीते पीते मैंने उससे अचानक पूछा कि क्या मैं उसे अच्छा लगता हूँ?
तो उसने हाँ में जवाब दिया।
बस मैंने तपाक से अपने दिल कि बात कह डाली और अपनी आंखें बन्द कर ली।
उसने मुझसे कहा,”जान यह सुनने के लिये मैं कब से बेकरार थी, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
बस फ़िर क्या! मैंने अपना होंठ उसके होठों पर चिपका दिए और उसके गुलाबी होठों का रसपान करने लगा, वो भी मेरे होठों को पीने लगी जैसे कई जन्मों की प्यासी हो। मैं उसके कभी ऊपर के होठों को चूसता तो कभी नीचे के होठों को। करीब-2 दस मिनट तक मैं उसके होठों में चिपका रहा। जैसे ही मैं उसके होठों से दूर हुआ, वो रोने लगी। मैंने उसे बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा …
फ़िर धीरे-धीरे वो भी गर्म होने लगी, उसको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर मैंने उसके गले में किस करना शुरू कर दिया।
इस पर उसने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ मत कहो, बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ.
वो शरमा गई … और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपा लिया। मैंने मौका देखा और … और … धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, नाड़ा खोलते ही उसकी सलवार उसकी कमर से अलग हो गई। अब मैंने उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख दिया। उसकी पैन्टी के भीतर मेरा हाथ चूत की तरफ़ सरकने लगा। उसके बदन की झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। मेरा हाथ उसकी झांटों तक पहुंच गया था। उसने झट से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया।
“कमल … ना … ना … कर … मैं मर जाऊंगी … ” उसकी वासना भरी आंखे मुझे बुला रही थी … पर शरम उसका रास्ता रोक रही थी।
“साधना … प्लीज़ … मत रोको … तुम्हारा जिस्म आग है … मुझे जल जाने दो।”
“हाय कमल … नहीं … यह पाप है.”
“नहीं … यह तो मर्द और औरत की जरुरत है … इसे देखो तो … यह क्या मांग रहा है … ”
मैंने जान करके अपने पेंट की ज़िप खोल कर अपना बेकरार तन्नाया हुआ लण्ड बाहर निकाल कर उसे दिखाया।
“हाय रे … ऐसे नहीं करो … ना … इसे सम्हालो … ” उसने हाथ बढ़ा कर उसे प्यार से पकड़ लिया.
“इसे इसका साथी चाहिये … साधना … प्लीज़ … मिला दो ना …”
“कमलऽऽऽ हाय … मत करो न …” उसने मुझे अपने हाथों खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया.
“होंठों पर ना है … पर दिल में हां है … तुम्हारा जिस्म आग हो रहा है … कपड़े जल जायेंगे … हटा दो इनको … ”
मैंने फिर से उठ कर उसका पैन्टी नीचे खींच लिया। उसकी गदराई जवानी निखर आई। उसकी चूत के आसपास की झांटे उसकी चूत को सजा रही थी … चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पानी से पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी पैन्ट और अन्डरवीयर उतार दी। अब मैंने उसकी समीज को भी उतार दिया। उसके दोनों बोबे छलक उठे … एकदम गोरे और भारी से … भूरे रंग के कड़े चूचक …
मैंने बिना किसी संकोच के उसके दोनों बोबे अपने हाथो में भर लिये।
“कमल … हाय रे …” वो तड़प उठी।
उसने मेरा लण्ड खींच के अपने हाथ से मेरे लन्ड का हस्त मैथुन करने लगी। मैं उत्तेजित हो उठा और साधना के हाथ को ही धक्के मार मार कर चोदने लगा। मेरा सुपाड़ा वो कस कस कर हिला रही थी। सुपाड़ा भी और फूल कर चिकना हो कर चमक उठा था।
इतने में साधना ने मेरा लण्ड छोड़ा और मुझे कहा,” कमल … देख आज मेरी चूत कितना तड़प रही है … मेरी चूत चोद दे …”
मैं उसकी चूत को अपने हाथों से सहलाने लगा और अपनी दो उन्गली झट से उसकी चिकनी चूत में सरका दी, वो मचल गई और स्स्स्स्स की आवाजें निकालने लगी।
मुझसे भी ज्यादा इन्तजार नहीं हो रहा था, मैने उसे अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। मैं उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा। उसके बाद हम फिर एक बार एक दूसरे के होठों में खो गये।
करीब 15 मिनट के बाद मैं उसके होठों से अलग हुआ और उसे नीचे लिटाकर मैंने उसकी टान्गें फैला दी, और उसकी चूत को अपने हाथों से फैला कर निरीक्षण करने लगा, मैं अपनी किस्मत पर बहुत खुश हो रहा था, मैंने अब देरी नहीं की और अपना 7.5″ लम्बा और 2.5″ चौडे लन्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर टिका दिया और अन्दर सरका दिया।
साधना तो चीख पड़ी और बोली,”बस कमल अब निकालो इसे, नहीं तो मैं मर जाउंगी।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने कस कर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया। साधना दर्द के मारे तड़प रही थी, मैंने उसका दर्द कम करने के लिये थोड़ी देर उसकी चूत में ही लन्ड को छोड़ दिया, जब उसने चिल्लाना बन्द किया तो मैंने अपना लन्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।
क्या मजा आ रहा था, आ…ह आआआआ… हुम्म हुम्म्म्म, फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च,
अब उसे भी मजा आने लगा था, और गान्ड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
आखिर वो घड़ी आ ही गई, मेरा पूरा शरीर एक अद्भुत आनन्द में खो गया, और मैं शाट पे शाट दिये जा रहा था, फिर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो और मेरे लन्ड में से कुछ निकलता हुआ महसूस हुआ, जो उसकी चूत में गिर रहा था। थोड़ी देर बाद मैं निढाल हो कर उसके ऊपर गिर गया, जैसे शरीर में जान ही खत्म हो गई हो।
थोड़ी देर में हम लोगों को होश आया तो हम लोग उठे और अपने अपने कपड़े पहने।
फिर उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा और मुझे चूम लिया और बाथरूम में चली गई, जब वो आई तो मैंने उसे एक बार फिर चोदा, और इससे पहले कि कोई आ जाये, हम लोग अलग अलग कमरे में जा कर लेट गये।
उस रात मैं सोया नहीं और रात भर अपनी चुदाई के बारे में सोचता रहा। खैर उसके बाद भैया की शादी हो गई, और साधना भी अपने घर चली गई। उसके बाद हम कभी मिल नहीं पाये। और आज साधना की शादी हो चुकी है।
खैर आप लोगों को ये मेरी सच्ची घटना कैसी लगी, कमेंट्स में जरूर बताइयेगा। Sex Stories
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