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Antarvasna

प्रिय मित्रो आप सब को मेरा नमस्कार !

मैं राम,

मुझे उम्मीद है मेरी कहानी “बायलोजी की टीचर के साथ Antarvasna सेक्सोलोजी” आप सब को पसंद आई होगी, प्लीज़ आप मुजे अपनी राय भेजना मत भूलिएगा.

यह उन दिनों की बात है जब मैं बारहवी क्लास में पढता था, मैं मेरी मौसी के यहाँ रहता था क्योकि उनका घर शहर से नजदीक भी था और 2 मंजिला था.

मेरी मौसी की दो लड़कियां थी, दोनों ही बड़ी सेक्सी थी. सोनिया जो मुझसे 2 साल बड़ी थी वह कॉलेज में थी और दूसरी सिया वह दसवीं क्लास में थी, हम दोनों एक ही स्कूल में थे.

हर रोज साथ में आना-जाना, खेलना, पढाई में उसकी मदद करना, यह सब मिला के हम दोनों में अच्छी पटती थी, सिया को कभी भी बुरी नजरो से नहीं देखा, सिया मेरी बहुत इज्ज़त करती थी और मैं हमेसा उसको खुश रखता था, वो जो मांगती वो मैं उसे ला देता था तो खुशी से मेरे गले लग जाती या मुझे चूम लेती थी।

एक दिन उसने मुझे कहा भइया आप मुझे मेरी बर्थडे पर क्या गिफ्ट दोंगे ?

मैंने कहा तुझे जो भी चाहिए, हर साल की तरह इस साल भी ला दूंगा. तो उसने कहा इस बार आप मुझे आप की पसंद की गिफ्ट देना,

मैंने कहा- ठीक है जैसी तेरी मर्जी।

अगले दिन जब स्कूल जाने का टाइम हो गया था लेकिन सिया दिख नहीं रही थी, तो मैंने उसे आवाज़ लगाई लेकिन कोई जवाब न मिला तो मैं उसे देखने के लिए उसके कमरे मैं गया, दरवाजा अन्दर से खुला ही था और मैंने नोक भी नहीं किया, सीधा अन्दर ही चला गया, लेकिन जो दृश्य मैंने देखा…मेरी साँस रुक गई.

सिया एकदम बे ख़बर सी बेड के उपर बैठ के उसकी ब्रा का हुक ठीक करने में मशगूल थी, उसके तन का उपरी हिस्सा बिल्कुल नंगा था, हाय का नजारा था, उसके इस रूप को देखा तो मेरे अन्दर का जानवर जग उठा, क्या मस्त बूब्स थे…जैसे मोसंबी को काट के लगा दिए हो, मुंह में पानी आ गया लेकिन क्या करे…

मैंने वहां ठहरना उचित न समझा जैसे जाने के लिए मुडा तो उसका ध्यान मेरी ओर गया, मुझे देख कर वो शर्म से कांप गई…अपने आजाद कबूतरों को हाथों से छिपाने लगी, और मेरी पीठ करके खड़ी हो गई ..पूछा यहाँ क्या कर रहे हो भइया…

मैंने कहा स्कूल के लिए देर हो रही थी…आवाज़ दी लेकिन जवाब नहीं मिला तो तुझे ढूंढते हुए यहाँ आ गया…

उसने कहा ठीक है आप यहाँ से जाओ मैं तैयार हो के 2 मिनट में आती हूं। मैं बाहर तो आ गया लेकिन दिल अन्दर ही छोड़ आया.

ऐसे भी देर हो गई थी…स्कूल बस भी चली गई होगी करके मैंने मौसाजी से उनकी बाइक मांग ली.

सिया को लेकर मैं भी स्कूल की ओर चल दिया..

स्कूल आने तक वो एक शब्द भी नहीं बोली तो मुझे लगा सिया मुझसे नाराज़ हो गई है.

पूरा दिन स्कूल में दिल नहीं लगा…बार-बार सिया के बूब्स दिखाई दे रहे थे…राम को जब घर लौट रहे तो रास्ते में मैंने पूछा तुम मुझसे नाराज़ हो तो उसने कहा नहीं तो…

तब मैंने कहा बोलती क्यों नहीं हो, तो वो कहने लगी शर्मिन्दा हूँ, मैंने कहा किस बात के लिए तो कहने लगी की सुबह वाली बात से…मेरी ही गलती थी मुझे दरवाज़ा अन्दर से बंद करना चाहिए था…

मैंने कहा उसमे कौन सी बड़ी बात है मैंने ही तो देखा है किसी और ने नहीं, और मैं थोड़े ही किसी को बताऊंगा. ऐसा कहने पर उसने मुझे पीछे से जोर से जकड लिया और बोली थेंक यू भइया.

उस रात मैंने मुठ मार के ही काम चला लिया. अब मेरा सिया को देखने का नजरिया ही बदल गया. हर बार उसे बूब्स, गांड, चूत, कोमल होंठ के बारे में सोचने लगा. अब मैं हर मौके का फायदा उठा लेता था, कभी उसे चूतड़ को हाथ लगा देता कभी बस की भीड़ में बूब्स पर भी.

दो हफ़्ते बाद उसका जन्म दिन आया तो मैं उसके लिए अच्छी घड़ी लाया जो उसे बहुत पसंद थी. जब मैं उसके रूम में गिफ्ट देने के लिए गया तो वो स्कूल का बेग रेडी कर रही थी.

मैंने उसे गिफ्ट दिया तो उसने झट से मेरे सामने ही खोला और थेंक यू कहते हुए मु्झसे लिपट गई मैंने भी उसे बाँहों में भर लिया और उसके निप्पल को अपनी छाती पर महसूस करने लगा, तब उसने कहा भइया यह तो मेरी पसंद का है और आपने मुझे आप की पसंद का गिफ्ट देने का वादा किया था, मैं इस मौके को कैसे चूकता, मैंने कहा वो भी दूंगा लेकिन तु्झे पसंद न आया तो? तो वो बोली आप की हर पसंद मेरी पसंद, मैंने कहा वादा करो पसंद न आए तो नाराज नहीं होगी और मेरा गिफ्ट मुझे वापस कर दोगी…उसने कहा ठीक है…

तो मैंने कहा- अपनीआँखे बंद करो. जैसे ही उसने आँखे बंद की मैंने उसे अपने पास खींच लिया और उसके गुलाब की कलि जैसे होठों को चूम लिया. वो एकदम पीछे हट गई और बोली यह क्या कर रहे हो…मैंने कहा यही तो गिफ्ट है…मैंने पूछा पसंद आया…उसने कहा नहीं…तो मैंने कहा ठीक है मुझे वापस कर दो…उसने पूछा कैसे…

मैंने कहा जैसा मैंने दिया…इस बार उसका रिस्पोंस अलग था…झट से मेरे लग गई और बोली भइया आप बड़े वो हो…मुझे पसंद है…मैंने कहा ठीक है और देता हूं कह के अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और धीरे धीरे चूसने लगा

…उसे भी अच्छा लगने लगा इसलिए वो भी मेरे होंठो को चूसने लगी…अब हम दोनों एक दूसरे को जम के किस कर रहे थे…मेरा लंड खड़ा हो गया था और बेकाबू हो रहा था, मैंने एक हाथ से उसको अपने साथ चिपका के रखा था और दूसरा हाथ उसके कड़क बूब्स को सहलाने लगा…उसकी सांसे तेज होने लगी…तभी मैं अपना हाथ उसकी गांड पर रख के हलके से दबाने लगा और उसकी चूत के साथ अपने लंड को उपर से ही रगड़ने लगा…तभी हमने बाहर से मौसी की आवज़ सुनाई दी…हम दोनों ने अपने आप को ठीक किया और स्कूल जाने की तैयारी करने लगे.

राम को जब वापस स्कूल से आए, फ्रेश हुए…खाना खाया…सब साथ बैठ के बातें करने लगे…

करीब 8 बजे मैंने कहा मुझे एक इम्पोर्टेन्टप्रोजेक्ट पे काम करना है जो मुझे 10 दिन में स्कूल में जमा करनाहै. यह कहके उपर चला गया, मेरा कमरा दूसरे फ्लोर पर था जहाँ मेरे अलावा कोई नहीं सोता था।

दो और कमरे थे लेकिन वो गेस्ट रूम थे.

10 बजे सब सो गए, मेरा ध्यान पढ़ाई में कम और सिया के इंतजार में ज्यादा था. 11.30 को सिया कॉफी के दो कप ले के उपर आई. उसने हल्के पिंक कलर की नाइटी पहन रखी थी और कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी. हमने कोफ़ी पी और और चेक कर लिया कोई जाग तो नहीं रहा है.

अब सुबह तक हमें कोई खतरा नहीं था… मैंने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया…
सिया चेयर पर बैठ के कुछ पढ़ने का नाटक कर रही थी, मैंने पीछे से जाके उसको दबोच लिया…
उसने कोई विरोध नहीं किया…मैं उसके दोनों बूब्स को दबाने लगा और उसकी गर्दन और कान को किस करने लगा.

वो गरम हो रही थी, मेरा लंड भी कड़क हो गया था. मैंने उसकी नाइटी उतार दी और उसकी ब्रा भी निकाल दी निकर उसने पहने नहीं थी, मैंने भी सारे कपड़े उतार दिए।

हम दोनो एकदम नंगे हो गये, मैंने धीरे से उसका मुंह अपनी ओर किया और उसके रसीले होंठ चूसने लगा.

वो भी मुझे बराबर का साथ दे रही थी, मैं कोई जल्दबाजी करना नहीं चाहता था.
एक हाथ से में उसके बूब्स को सहलाने लगा और दूसरे से उसकी गांड को दबा रहा था.

अब धीरे धीरे उसके बूब्स को चूसने लगा उसके मुंह से हल्की सी कराहने की आवाज़ आ रही थी, अब मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसके बूब्स को चाटने और चूसने लगा साथ ही एक हाथ उसकी कुंवारी चूत पर रख दिया और हलके से सहलाने लगा, सिया एकदम उत्तेजित हो उठी…पहली बार किसी मर्द ने उसकी चूत को छुआ था.

अब मैं उसे फ्रेंच किस करने लगा और साथ ही उसकी चूत से खेल रहा था…जैसे ही मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली उसने मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन मैं नहीं रुका मैं उसकी चूत में ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा। अब उसको भी मज़ा आने लगा…

उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा साथ ही उसके निपल्स के साथ खेल रहा था.

धीरे धीरे मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में अन्दर डाली उसका वर्जिन ज्यूस पीने कान कुछ और ही मज़ा था, अब मैं जोर से उसकी चूत को चाटने लगा, उसने अपना पानी छोड़ दिया, मुझे उसका पानी चाटने में बहुत मज़ा आया, मेरा भी सब्र का बाँध टूटा जा रहा था। आधा घण्टा बीत चुका था इस चुम्मा चाटी में.

अब मैंने कहा- मेरा लंड चूसोगी?

पहले तो उसने मना किया फ़िर मान गई तो हम 69 पोसिशन में आ गए, मेरे लंड को देखते ही वो घबरा गई, मैंने कहा डरो मत धीरे धीरे जितना हो सके उतना लो और जब मेरा ज्यूस निकले तब उसे पी जाना ताकि चुदाई के वक्त तुझे ज्यादा ताकत मिलेगी…

मैं ज्यादा नहीं टिक सका क्योंकि उसको लंड चूसना नहीं आता था, 5 मिनट में मैं उसके मुंह में झङ गया, वो मेरा सारा पानी पी गई।

…अब मैंने उसकी बुर में अपनी ऊँगली डाल दी और चाटने लगा थोडी देर में मैं तैयार हो गया, मेरा ९” का मूसल सिया की चूत से मिलने को बेकरार था।

वो भी कह रही थी भइया ! डालो ना ! मुझसे रहा नहीं जाता…!

मैं उसके दो पैर के बीच आ गया और उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया, दोनो पैरों को फैला दिया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा…उसकी सिसकारी बढ़ने लगी…

मैंने अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुंह पर सेट किया और एक हलका सा धक्का मारा, मेरा सुपाडा सिया की चूत में घुस गया वो दर्द के मारे चीखने लगी…निकालो.. निकालो… .मर गई…लगी…निकालो…निकालो…मर गई…

मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया…
थोडी देर बाद उसके पैर ढीले होने लगे तो मैं समझ गया कि उसका दर्द कम हो गया है, एक और धक्का मारा तो मेरा लंड उसके सील तक पहुँच गया, मैंने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा, सिया को भी मज़ा आने लगा वो भी नीचे से गांड उठा के साथ देने लगी, और मौका देखते ही उसके मुंह पे अपना मुंह रख दिया और एक जोरदार झटका मारा…

उसकी सील टूट गई…कली से फ़ूल बन गई मेरी सिया…उसके मुह से चीख निकल गई…आँखों से आंसू निकलने लगे…दर्द से छटपटाने लगी, लेकिन मैंने आव देखा ना ताव, तीन चार और झटके मार के रुक गया 6″ से ज्यादा मेरा लंड उसकी बुर में जा चुका था…

थोडी देर बाद उसका दर्द कुछ कम हुआ तो उसने गांड हिलानी चालू कर दी मैं समझ गया कि अब सब ठीक है…मैंने धीरे धीरे अपना लंड उसकी खून भरी चिकनी चूत में पेलना चालू किया

…आअह…आ.आआ.ईई.म्म्म्म्म्म्म्म्म्मर ग..गग..आआईई यस्…ओह…फ़िर मेरी स्पीड बढ़ने लगी…मेरा पिस्टन जोर से अन्दर बाहर हो रहा था…एक और झटका मारा, पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया…

वो भी गांड उठा उठा के मेरा साथ अच्छे से दे रही थी…भइया चोदों मुझे…और जोर से…आह…आह…अआः…आह…ऊईई माँ..फक मी…ओह यस्…वो अब तक तीन बार झङ चुकी थी…उसकी गांड और जांघ वीर्य से पिचपिचा रही थी…पूरे रूम में चुदाई का संगीत बज रहा था
पच..पच..फच…फचक…फचक…ओह…ओह…ओह..आ…आ..आया.इ..इ..इ..ई..ओ..ओ..ओ…मैं अब झड़ने वाला था, रफ्तार तेज हो गई…सिया मैं झड़ने वाला हूं…मैं भी झड़ने वाली हूं…ओह माय…ओह मैं गई और मैं भी…20-25 झटके मार के मैं झड़ गया उसकी चूत में ही।

थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे हम दोनो, पसीने से तर थे…लंड उसकी चूत से निकला तो पूरा खून से रंगा था पूरी चादर खून और वीर्य से भरी थी…सिया ठीक से चल नहीं पा रही थी.बाथरूम ले जा कर हम दोनो ने साफ किया, सिया को पेनकिलर दिया, ताकि दर्द थोड़ा कम हो सके।

फ़िर मैंने उसे पूछा कैसा लगा मेरा गिफ्ट…हमेशा की तरह वो मुझ्से चिपक गई और मेरे होठों को चूमते हुए बोली बेस्ट ऑफ़ द बेस्ट… आई लव यू भइया…और अपने अपने रूम में जा के सो गए… Antarvasna

Sex Stories

सभी दोस्तों को मेरा सादर प्रणाम और प्यारी भाभियों Sex Stories और कुंवारी चूत वालियों को मेरे लंड का प्रणाम!

मैं आपको अपने जीवन की रास लीला सुनाने जा रहा हूँ। दोस्तो, मैं देव इंडिया के दिल मध्य प्रदेश के सागर का रहने वाला हूँ। मेरी उमर 38 साल रंग गोरा मजबूत कद-काठी और 6″4″ लम्बा हूँ। मुझे मजलूम की मदद करने मैं बड़ी राहत मिलती है और नर्म दिल हूँ।

जैसा कि अक्सर कहानियों में होता है कि कहानी का कैरेक्टर के ऑफिस की दोस्त या पड़ोसन या रिश्तेदार वाली कोई बुर (जिसको मैं प्यार से मुनिया कहता हूँ ) मिल जाती है उसे तुरन्त चोदने लगता है, पर हकीकत इससे कहीं अधिक जुदा और कड़वी होती है एक चूत चोदने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है ऐसी एक कोशिश की यह कहानी है।

हमारा शहर सागर प्राकृतिक सुन्दरता और हिल्स से घिरा हुआ है। यह एक बहुत ही सुंदर लेक है और यहाँ के लोग बहुत ही संतुष्ट और सीधे सादे हैं। पर यहाँ की महिलायें बहुत चुदक्कड़ है यह मैंने बहुत बाद में जाना। मैं क्रिकेट और फुटबॉल का नेशनल प्लेयर रहा हूँ इस कारण से अपने एरिया में बहुत मशहूर था और सुंदर कद काठी और रूप रंग गोरा होने के कारण हैंडसम भी दीखता था। लेकिन मुझे अपने लन्ड की प्यास किसी न किसी के बारे मैं सोच कर और अपनी मुट्ठ मार कर या अपना तकिये को चोदकर बुझानी पड़ती थी मैं अपनी हेल्पिंग हब्बिट्स के कारण भी बहुत मशहूर था और सभी मुझे प्यार भी इसीलिए बहुत करते थे।

मेरे घर के सामने ग्राउंड है जहा मैं खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने सभी सपने सन्जोए।

एक दिन हम कुछ दोस्त मोर्निंग एक्सर्साईज करके आ रहे थे तभी सामने से आती हुई 3 लड़कियों पर नज़र पड़ी। उनमे से दो को मैं चेहरे से तो जानता था कि वो मेरे घर के आस पास रहती हैं। तीसरी से बिल्कुल अनजान था और वो कोई ख़ास भी नहीं थी। हम दोस्त अपनी बातों में मस्त दौड़ लगाते हुए जैसे ही उनके पास पहुँचे तो बीच वाली लड़की मेरे को बहुत पसंद आई। मैं सिर्फ़ बनियान और नेकर में था तो मेरे सारे मस्सल्स दिखाई दे रहे थे जिससे शायद वो थोडी इम्प्रेस हुई उसने भी मुझे भरपूर नज़र देखा।

मेरा ध्यान उस लड़की पर लगा होने से मैं नीचे पत्थर नहीं देख पाया और ठोकर खाकर गिर पड़ा वो तीनों लड़कियां बहुत जोरों से हंस पड़ी और भाग गई। मुझे घुटनों और सर में बहुत चोट लगी थी काफ़ी खून बहा था इस कारण मैं कुछ दिन अपनी मोर्निंग एक्सर्साईज के लिए दोस्तों के पास नहीं जा पाया.

ठंड का मौसम चल रहा था, हमारे मोहल्ले में एक शादी थी। मेरी हर किसी से अच्छी पटती थी इसलिए मेरे बहुत सारे दोस्त हुआ करते थे। उस शादी में मैं अपने ऊपर एक जिम्मेदार पड़ोसी की भूमिका निभाते हुए बहुत काम कर रहा था। और मैं ज्यादातर महिलाओं के आस पास मंडराता कि शायद कोई पट जाए या कोई लिंक मिल जाए मुनिया रानी को चोदने या दर्शन करने के। पर किस्मत ख़राब … कोई नहीं मिली।

तभी मुझसे किसी खनकती आवाज ने कहा- सुनिए, आप तो बहुत अच्छे लग रहे हैं आप और बहुत मेहनत भी कर रहे हैं यहाँ!
मैंने जैसे ही मुड़कर देखा तो वो ही बीच वाली लड़की जिसको देखकर मैं गिरा था और जिसके कारण मेरे सर पर अभी भी पट्टी बंधी हुई थी जिसमें 3 टाँके लगे हुए थे और घुटने का भी हाल कुछ अच्छा नहीं था. मैंने देखा वो खड़ी मुस्कुरा रही थी।

मैंने कहा- आ आप … आपने मेरे से कुछ कहा?
“यहाँ ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो मेरे को देख कर रोड पर गिरकर अपना सर फ़ुड़वा बैठे!” वो अपनी सहेलियों से घिरी चहकती हुई बोली।
“आप लोग तो हंस कर भाग गई … मेरे सर और पैर दोनों मैं बहुत चोट लगी थी।” मैंने कहा।

मेरे ही मोहल्ले की एक लड़की कुसुम जिसे मैं पहले पटाने की कोशि्श कर चुका था पर वो पटी नहीं थी बल्कि मेरी उससे लड़ाई हो गई थी.
कुसुम ने मेरे से मुँह चिड़ाते हुए कहा इनको- च्च्च च्च छक … अरे!! अरे!! बेचारा … देव भैया अभी तक कोई मिली नहीं तो अब लड़कियों को देख कर सड़कों पर गिरने लगे!
और खिलखिला कर हंस दी.

मैंने कुसुम के कई सपने देखे मैं कुसुम को अपनी गाड़ी पर बिठाकर कहीं ले जा रहा हूँ उसके दूध मेरी पीठ से छू रहे है वो मेरे लंड को पकड़ कर मोटरसाईकिल पर पीछे बैठी है, उसके बूब्स टच होने से मेरा लंड खड़़ा हो जाता है तो मैं धामोनी रोड के जंगल मैं गाड़ी ले जाता हूँ जहा उसको गाड़ी से उतार कर अपने गले से लिपटा लेता हूँ उसके लिप्स, गर्दन बूब्स पर किस कर रहा हूँ और उसके मम्मे दबा रहा हूँ साथ ही साथ उसकी मुनिया (बुर) को भी मसल रहा हूँ वो पहले तो न नुकर करती है लेकिन जब मैं उसकी मुनिया और बूब्स उसके कपड़ों के ऊपर से किस करता हूँ और उसकी सलवार खोल कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी पेशाब को चाटने लगा कुसुम भी सीई हीई येः क्या कर रहे हो … मैं जल रही हूँ मुझे कुछ हो रहा है … कह रही है और मैं कुसुम को वहीं झाडियों मैं जमीन पर लिटाकर चोदने लगता हूं। पहले कुसुम का पानी छूटता है फिर मेरा। जब ख्वाब पूरा हुआ तो देखा लंड मेरा मेरे हाथ मैं झड़ चुका है और मुट्ठी मारने से लंड लाल हो गया है.

मुझे बहुत बुरा लगा कुसुम के तानों से मेरी बेइज्ज़ती हुई थी वहाँ से मैंने इन दोनों को सबक सिखाने का ठान लिया। मैंने गुलाब जामुन का शीरा उसकी बैठने वाली सीट पर लगा दिया जिससे उसकी सफ़ेद ड्रेस ख़राब हो गई और वो ऐन मौके पर गन्दी ड्रेस पहने यहाँ वहाँ घूमती रही और लोग उसे कुछ न कुछ कहते रहे। पर उसका चेहरा ज्यों का त्यों था। मैंने कुसुम को उसके हाल पर छोड़ कर अपने टारगेट पर कन्स्न्ट्रेट करना उचित समझा.

मैं उससे जान पहचान करना चाहता था जब से उसको देखा था उसके भी नाम की कई मूठ मारी जा चुकी थी और तकिये का कोना चोदा जा चुका था। मेरा तकिये के कोने मेरे स्पर्म्स के कारण कड़क होना शुरू हो गई थे। पर कोई लड़की अभी तक पटी नहीं थी।

इस बार मैंने हिम्मत करके उसका नाम पूछ लिया। जहाँ वो खाना खा रही थी वहीं चला गया और पूछा- आप क्या लेंगी और … कुछ लाऊँ स्वीट्स या स्पेशल आइटम आपके लिए…
भीड़ बहुत थी उस शादी में … वो मेरे पास आ गई और चुपचाप खड़ी होकर खाना खाने लगी।
मैंने उसको पूछा- आप इस ड्रेस मैं बहुत सुंदर लग रही हैं। मेरा नाम देव है आपका नाम जान सकता हूँ?
फिर भी चुप रही वो और एक बार बड़े तीखे नैन करके देखा, हल्के से मुस्कुराते हुए बोली- अभी नहीं, सिर्फ़ हाल चाल जानना था सो जान लिया!

मैंने उसका नाम वहीं उसकी सहेलियों से पता कर लिया और उसका एड्रेस भी पता कर लिया था। उसका नाम मीनू था। वो मेरे घर के ही पास रहती थी। पंजाबी फॅमिली की लड़की थी। सिंपल सोबर छरहरी दिखती थी। उसकी लम्बाई मेरे लायक फिट थी उसके बूब्स थोड़े छोटे 32 के करीब होंगे और पतला छरहरा बदन तीखे नैन-नक्श थे उसके। वो मेरे मन को बहुत भा गई थी। शादी से लौट के मैंने उस रात मीनू के नाम के कई बार मुट्ठ मारी। मैं उसको पटाने का बहुत अवसर खोजा करता था वो मेरे घर के सामने से रोज निकलती थी पर हम बात नहीं कर पाते थे। ऐसा होते होते करीबन 1 साल बीत गया.

एक बार मैं दिल्ली जा रहा था गोंडवाना एक्सप्रेस से। स्टेशन पर गाड़ी आने मैं कुछ देर बाकी थी शादियों का सीज़न चल रहा था काफ़ी भीड़ थी। मेरा रिज़र्वेशन स्लीपर में था। तभी मुझे मीनू दिखी, साथ में उसका भाई और सभी फॅमिली मेम्बर्स भी थे। उसके भाई से मेरी जान पहचान थी सो हम दोनों बात करने लगे।
मैंने पूछा- कहाँ जा रहे हो?
तो बोले- मौसी के यहाँ शादी है दिल्ली में, वहीं जा रहे हैं।
मुझसे पूछा- देव जी आप कहाँ जा रहे हो?
मैंने कहा- दिल्ली जा रहा हूँ, थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी अटेण्ड करनी है.

इतने में ट्रेन आने का अनाउंसमेंट हो चुका था। उनके साथ बहुत सामान था, मेरे साथ सिर्फ़ एक एयर बैग था उन्होंने मेरे से सामान गाड़ी में चढ़ाने की रेकुएस्ट करी गाड़ी प्लेटफोर्म पर आ चुकी थी यात्री इधर उधर अपनी सीट तलाशने के लिए बेतहाशा भाग रहे थे बहुत भीड़ थी।
मीनू के भाई ने बताया कि इसी कोच में चढ़ना है तो हम फटाफट उनका सामान चढ़ाने मैं बीजी हो गए। उनका सामान गाड़ी के अंदर करके उनकी सीट्स पर सामान एडजस्ट करने लगा मैंने अपना बैग भी उन्ही की सीट पर रख दिया था मुझे अपनी सीट पर जाने की कोई हड़बड़ी नहीं थी क्योंकि बीना जंक्शन तक तो गोंडवाना एक्सप्रेस मैं अपनी सीट का रिज़र्वेशन तो भूल जाना ही बेहतर होता है। क्योंकि डेली पैसेन्जर्स भी बहुत ट्रेवल करते है इस ट्रेन से सो मैं उनका सामान एडजस्ट करता रहा।

गाड़ी सागर स्टेशन से रवाना हो चुकी थी। मैं पसीने मैं तरबतर हो गया था। अब तक गाड़ी ने अच्छी खासी स्पीड पकड़ ली थी। मीनू की पूरी फॅमिली सेट हो चुकी थी और उनका सामान भी। गाड़ी बीना 9 बजे रात को पहुचती थी और फिर वहा से दूसरी गोंडवाना में जुड़ कर दिल्ली जाती थी। इसलिए बीना में भीड़ कम हो जाती है। मैं सबका सामान सेट करके थोड़ा चैन की साँस लेने कम्पार्ट्मेन्ट के गेट पर आ गया फिर साथ खड़े एक मुसाफिर से पूछा- यह कौन सा कोच है?
उसने घमंडी सा रिप्लाई करते हुए कहा- एस 4 … तुम्हें कौन सो छाने ( आपको कौन सा कोच चाहिए)”
“अरे गुरु जोई चाने थो … जौन मैं हम ठाडे है … (बुन्देलखंडी) (यही चाहिए था जिसमे हम खड़े है)”

मैंने अपनी टिकट पर सीट नम्बर और कोच देखा तो यही कोच था जिसमे मीनू थी, बस मेरी बर्थ गेट के बगल वाली सबसे ऊपर की बर्थ थी। बीना में मैंने हल्का सा नाश्ता किया और घूमने फिरने लगा। मुझे अपने बैग का बिल्कुल भी ख्याल नहीं था। बिना से गाड़ी चली तो ठण्ड थोडी बढ़ गई थी मुझे अपने बैग का ख्याल आया। मैं उनकी सीट के पास गया तो मैंने “पूछा मेरा बैग कहा रख दिया.”
मीनू की कजिन बोली- आप यहाँ कोई बैग नहीं छोड़ गए आप तो हमारा सामान चढ़वा रहे थे उस समय आपके पास कोई बैग नहीं था.
जबकि मुझे ख्याल था कि मैंने बैग मीनू की सीट पर रखा था।
वो लोग बोली- आपका बैग सागर में ही छूट गया लगता है।

मैंने कहा- कोई बात नहीं।
उन्होंने पूछा- आपकी कौन सी बर्थ है?
मैंने कहा- इसी कोच मैं लास्ट वाली।

मीनू की मम्मी बोली- बेटा अब जो हो गया तो हो गया जाने दो ठण्ड बहुत हो रही है. ऐसा करो मेरे पास एक कम्बल एक्स्ट्रा है वो तुम ले लो!
मैंने कहा- जी कोई बात नहीं मैं मैनेज कर लूँगा!
“ऐसे कैसे मनेज कर लोगे यहाँ कोई मार्केट या घर थोड़े ही किसी का जो तुमको मिल जाएगा ठण्ड बहुत है ले लो!” मीनू की मम्मी ने कहा।

“मुझे नींद वैसे भी नहीं आना है रात तो ऐसे ही आंखों मैं ही कट जायेगी..” मैंने मीनू की ऑर देखते हुए कहा। मीनू बुरा सा मुँह बना के दूसरे तरफ़ देखने लगी.

ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर दौड़ी जा रही थी। मुझे ठण्ड भी लग रही थी तभी मीनू की मम्मी ने कम्बल निकालना शुरू किया तो मीनू ने पहली बार बोला। रुको मम्मी मैं अपना कम्बल दे देती हूँ और मैं वो वाला ओढ लूंगी। मीनू ने अपना कम्बल और बिछा हुआ चादर दोनों दे दी … मुझे बिन मांगे मुराद मिल गई क्योंकि मीनू के शरीर की खुशबू उस कम्बल और चादर मैं समां चुकी थी। मैं फटाफट वो कम्बल लेकर अपनी सीट पर आ गया.

… मुझे नींद तो आने वाली नहीं थी आँखों मैं मीनू की मुनिया और उसका चेहरा घूम रहा था। मैं मीनू के कम्बल और चादर को सूंघ रहा था उसमे से काफी अच्छी सुंगंध आ रही थी। मैं मीनू का बदन अपने शरीर से लिपटा हुआ महसूस करने लगा और उसकी कल्पनों मैं खोने लगा.। मीनू और मैं एक ही कम्बल मैं नंगे लेटे हुए है मैं मीनू के बूब्स चूस रहा हूँ और वो मेरे मस्त लौडे को खिला रही है। मेरा लंड मैं जवानी आने लगी थी जिसको मैं अपने हाथ से सहलाते हुए आँखे बंद किए गोंडवाना एक्सप्रेस की सीट पर लेटा हुआ मीनू के शरीर को महसूस कर रहा था.

जैसे जैसे मेरे लंड मैं उत्तेजना बढती जा रही थी वैसे वैसे मैं मीनू के शरीर को अपने कम्बल मैं अपने साथ महसूस कर रहा था। इधर ट्रेन अपनी पूरी रफ्तार पर थी मैं मीनू के बूब्स प्रेस करते हुए उसके क्लिटोरिस( चूत के दाने) को मसल रहा था और उसके लिप्स और गर्दन पर लिक करता हुआ मीनू के एक-एक निप्प्ल को बारी बारी चूस रहा था.। इधर मीनू भी कह रही थी अह्ह्ह हह सीईई ओम्म्म मम् बहु्त अच्छा लग रहा है मैं बहुत दिन से तुमको चाहती हूँ देव … जबसे तुमको देखा है मैं रोज तुम्हारे नाम से अपनी चूत को ऊँगली या मोमबत्ती से … चोदती हूं…उम् म … आ अ अ अ … तुम्हारा लंड तुम्हारे जैसा मस्त है उम् म म म बिल्कुल लम्बा चोडा देव … उम् म म आ अअ अआ जल्दी से मेरी चूत में अपना लन्ड घुसा दो अब सहन नहीं हो रहा उ मम म आया अ अ अ !

मैं एक झटके में मीनू की बुर मैं लंड पेल कर धक्के मारने लगा ट्रेन की रफ्तार की तरह के धक्के … फटाफट जैसे मीनू झड़ रही हो उम् मम् देव…मेरी बुर र … सी पेशाब … निकलने वाली ही तुम्हारे लंड ने मुझे मूता दिया मेरी पहली चुदाई बड़ी जबरदस्त हुई उम् म आ अ अ जैसे ही मीनू झडी मैं भी झड़ने लगा मैं भूल गया की मैं ट्रेन मैं हूँ और सपने मैं मीनू को चौद्ते हुए मुट्ठ मार रहा हूँ और मैं भी आ आया … हा ह मीनू … ऊऊ मजा आ गया मैं कब से तुमको चोदना चाहता था कहते हुई झड़ने लगा और बहुत सारा पानी अपने रुमाल मैं निकाल कुछ मीनू के चादर मैं भी गिर गया.

जब मैं शांत हुआ तो मेरे होश वापिस आए और मैंने देखा कि मैं तो अकेला ट्रेन मैं सफर कर रहा हूँ.। शुक्र है सभी साथी यात्री अपनी अपनी बेर्थ्स पर कम्बल ओढ कर सो रहे थी। ठण्ड बहुत तेज़ थी उस पर गेट के पास की बर्थ बहुत ठंडी लगती है अब मुझे पेशाब जाने के लिए उठाना था मैं हाफ पेंट में सफर करता हूँ तो मुझे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई.। अब तक रात के 1.30 बज चुके थे मैं जैसे ही नीचे उतरा तो मुझे लगा जैसे मीनू की सीट से किसी ने मुझे रुकने का संकेत किया हो मीनू की सीट के पास कोच के सभी यात्री गहरी नींद मैं सो रहे थे और ट्रेन अभी 1 घंटे कही रुकने वाली नहीं थी। मैंने देखा मीनू हाथ मैं कुछ लिए आ रही है.। मेरे पास आकर बोली “बुधू तुम अपना बैग नहीं देख सके मुझे क्या संभालोगे” ठंड मैं ठिठुरते हो…”

मैंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया उसने क्या मेसेज दे दिया मैं रिप्लाई दिया ” मैं तुम्हारे कम्बल मैं तुम्हारी खुशबू लेकर मस्त हो रहा था” मैं अपने लंड के पानी से भरा रुमाल अपने हाथ मैं लिए था। जिसको देख कर वो बोली “यह क्या है” मैंने कहा ” रुमाल है”।

“यह गीला क्यों है” मीनू ने पूछा ” ऐसे ही … तुम्हारे कारण … कह कर मैंने टाल दिया …

मीनू ने पूछा “मेरे कारण कैसे…” फिर मुझे ध्यान आया कि अभी अभी मीनू ने मुझे कुछ मेसेज दिया है…

मैंने मीनू को गेट के पास सटाया और उसकी आंखों मैं देखते हुए उसको कहा मीनू आई लव यू और उसके लिप्स अपने लिप्स मैं भर लिए उसके मम्मे पर और गांड पर हाथ फेरने लगा। मीनू भी मेरा किस का जवाब दे रही थी …

मैं मीनू के दूधों की दरार मैं चूसने लगा था और बूब्स को दबा रहा था … मेरा लंड जो आधा बैठा था फ़िर से ताकत भरने लगा और उसके पेट से टकराने लगा.। मीनू मेरे से बोली आई लव यू टू.। इधर कोई देख लेगा जल्दी से इंटर कनेक्ट कोच की और इशारा कर के कहने लगी उस कोच के टॉयलेट मैं चलो…

हम दोनों टॉयलेट में घुस गए … टॉयलेट को लाक करते ही मैं उसको अपने से लिपटा लिया और पागलों की भाति चूमने लगा.। मीनू मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुमको दिलो जान से चाहता हूँ…

हाँ! मेरे राजा देव मैं भी तुम्हारे बिना पागल हो रही थी … जानते हो यह प्रोग्राम कैसे बना दिल्ली जाने का…मेरे आने का मैं तुम्हारे घर आई थी मम्मी के साथ तुम्हारी मम्मी और मेरी मम्मी संकट मोचन मन्दिर पर रामायण मंडल की मेंबर है.। तो उन्होंने बताया की देव को परसों दिल्ली जाना ही तो वो नहीं जा सकती उनके साथ। तब मैंने भी मम्मी को प्रोग्राम बनने को कह दिया मैंने कहा यह कहानी छोड़ो अभी तो मजा लो

मैंने उसको कमोड शीट पर बिठा दिया और उसके पैर से लेकर सर तक कपड़ों के ऊपर से ही चूसने चूमने लगा … मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा वो “सी ई ईई आई वहाँ नहीं वहाँ कुछ कुछ होता है जब भी तुमको देखती हु मेरी अंदर से पेशाब निकल जाती है वहाँ नही” ऐसा कहने लगी

मैंने कहा “मुझे विश्वास नहीं होता मुझे दिखाओ ” ऐसा कहकर मैं सलवार के ऊपर से उसकी अंदरूनी जांघ और बूब्स पर हाथ से मालिश करने लगा
” हट बेशरम कभी देखते है लड़कियों की ऐसे वो शादी के बाद होता है ” मीनू बोली

मैंने मीनू के बूब्स को सहलाते हुई और उसकी अंदरूनी जांघ पर चूमते हुए उसकी चूत की तरफ़ बदने लगा और कहा ” ठीक है जैसा तुम कहो पर मैं कपड़े के ऊपर से तो चेक कर लूंगा”” मीनू भी अब गरमाने लगी थी उसकी चूत भी काफ़ी गर्म और गीली होने लगी थी। वो अपने दोनों पैरो को सिकोड़ कर मेरे को चूत तक पहुचने से रोक रही थी … ” प्लीज़ वहाँ नहीं मैं कंट्रोल नहीं कर पाऊँगी अपने आप, को कुछ हो जायेगा … मेरी कजिन के भरोसे आई हूं उसको पटा रखा है मैंने। यदि कोई जाग गया तो उसकी भी मुसीबत हो जायेगी प्लीज़ मुझे जाने दो अब…”

मैंने मीनू के दोनों पैर अपनी ताकत से फैलाये और उसकी सलवार की सिलाई को फाड़कर उसकी पिंक पैंटी जो की उसके चूत के रस मैं सराबोर थी अपने मुँह में ले लिया … उसकी पैंटी से पेशाब की मिलीजुली स्मेल के साथ उसके पानी का भी स्वाद मिल रहा था …

मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को जोरो से चूसना चालू कर दिया।
मीनू कहे जा रही थी- प्लीज़ नो! मुझे जाने दो उई मा … मैं कंट्रोल खो रही हूं उम् मम मम् मुझे जाने दो … और जोर से चाटो मेरी पेशाब में कुछ हो रहा है बहुत अच्छा लग रहा है मेरे पेट में गुदगुदी हो रही है मीनू के निप्पल भी खड़े हो गए थी क्योंकि उसकी कुर्ती मैं हाथ डाल कर उसके मम्मे मसल रहा था मीनू मेरे सर को अपनी चूत पर दबाये जा रही थी … उम्म मैं मीनू की पैन्टी को चूत से साइड में खिसका के उसकी चूत को चूत की लम्बाई में चूस रहा था।

मीनू अपने दोनों पैर टॉयलेट के विण्डो पर टिकाये मुझसे अपनी चूत चटवा रही थी मीनू की बुर बिल्कुल कुंवारी थी मैंने अपनी ऊँगली उसकी बुर मैं घुसेदी बुर बहुत टाइट और गीली थी मीनू हलके हलके से करह रही थी ” उम्म्म आआ मर गई” मैं मीनू की बुर को ऊँगली से चोद रहा था और चूत के दाने को चाट और चूस रहा था.। सलवार पहने होने के कारण चूत चाटने मैं बहुत दिक्कत हो रही थी।

मीनू की चूत झड़ने के कगार पर थी” आ आअ कुछ करो मेरा शरीर अकड़ रहा है पहले ऐसा कभी नहीं हुआ मेरी पेशाब निकलने वाली ही अपना मुँह हटाओ और जोर से चूसो अपनी उंगली और घुसाओ आअ आ। उई माँ आअ अ … उसकी जवानी का पहला झटका खाकर मेरे मुँह को अपने चूत के अमृत से भरने लगी … मीनू के मम्मे बहुत कड़क और फूल कर 32 से 34 होगये मालूम होते थे … इधर मेरी हालत ज्यादा ख़राब थी … मैंने मीनू को बोला प्लीज़ एक बार इसमे डाल लेने दो मीनू ने कहा ‘ अभी नहीं राजा मैं तो ख़ुद तड़प रही हूँ तुम्हारी पेशाब अपनी पेशाब मैं घुसवाने को.। उम्म्म सुना ही बहुत मजा आता है और दर्द भी होता है ”

मैंने कहा “अपन दोनों के पेशाब के और भी नाम है ” “मुझे शर्म आती है वो बोलते हुई” और वो खड़ी होने लगी मैं कमोड शीट पर बैठा और अपनी नेक्कर नीचे खिसका दी मेरा हल्लाबी लंड देखकर उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

“हाय राम … ममम म इतना बड़ा और मोटा… तो मैंने कभी किसी का नहीं देखा.
मैंने पूछा “किसका देखा है तुमने … बताओ ”

मेरे भैया जब भाभी की चुदाई करते है तो मैं अपने कमरे से झाँक कर देखती हूँ.। भाभी भइया के इससे अद्धे से भी कम साइज़ के पेशाब में चिल्लाती है फ़िर इस जैसी पेशाब मैं तो मेरा क्या हाल करेगी … मैं कभी नहीं घुसवाउंगी”

मैंने कहा अछा “मत घुसवाना, पर अभी तो इसको शांत करो”

“मैं कैसे शांत करू” मीनू ने कहा।

मैंने कहा “टाइम बरबाद मत करो, जल्दी से इसे हाथ मैं लो और मेरी मुट्ठ मारो” मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर लगाया और आगे पीछे करवाया। पहले तो मीनू थोड़ा हिचकी फिर बोली ” तुम्हारा लंड बहुत शानदार है मेरी चूत में फ़िर से खुजली होने लगी है…हीई सीइई मैई इ इक्या करू ओम मम म फ्लिच्क कक्क ” एक ही झटके मैं मेरा सुपाडा उसने किसी आइसक्रीम कोण की तरह चूस लिया मैं जैसे स्वर्ग में पहुच गया मैंने उसके मुँह में धक्के मारे मैंने कहा मेरा पानी निकलने वाला है।

” मेरी चूत फ़िर से गरम हो गई है इसका कुछ करो सी ई इ आअ आ अ…” मीनू सिसकारियां भर रही थी मैंने मीनू को फौरन कमोड शीट पर बैठाया और उसकी कुर्ती का कपड़ा उसके मुँह मैं भर दिया … जिससे लंड घुसने पर वो चिल्लाये नहीं मैंने उसको समझाया भी थोड़ा दर्द होगा सहन करना .। मैंने उसकी दोनों टांगें फैली और चूत चाटी दो ऊँगली उसकी चूत मैं भी घुसी उसकी चूत बहुत टाइट थी और बहुत गीली लिसलिसी सी गरम थी। मीनू कसमसा रही थी ” हीई इ सी ई इ इ इ अब जल्दी करो.। मेरे बदन मैं करोड़ों चीटियाँ घूम रही है मेरी बुर को ना जाने क्या हो गया है” मीनू ने कुर्ती मुँह से निकाल कर कहा.

मैंने अपने लन्ड पर बहुत सारा थूक लगाया और कुछ उसकी गीली चूत मैं भी लगाया जिससे उसकी चूत के लिसलिसे रस से मेरा थूक मिलकर और चूत को चिकना कर दे … मैंने लंड हाथ मैं लेकर सुपाडा मीनू की चूत मैं ऊपर नीचे रगडा। मीनू अपनी गांड उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी अब वो बिना लंड डलवाए नहीं रह सकती थी

उसने मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी बुर पर टिकाया मैंने पहले थोड़ा सा सुपाडा अंदर कर उसको अंदर बाहर कर एडजस्ट किया … मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे लण्ड को किसी जलते हुए चमड़े के क्लंप मैं कस दिया हो। इतनी टाइट बुर थी मीनू की मैंने थोडी और लंड अंदर पेला मीनू की मुँह मैं यदि कुर्ती ना घुसाई होती तो पूरे कम्पार्टमेंट के यात्री हमें चुदाई करते हुए पकड़ लेते … मीनू मेरे मोटे लंड के कारन अपना सिर इधर उधर हिलाकर और अपनी आंखों से आंसू निकाल कर बता रही थी की उसको कितना दर्द हो रहा है … मैं थोडी देर रुक कर फाटक से एक गहरा और चूत फाड़ धक्का पेला जिससे मीनू की बुर की झिल्ली फटी और लौड़ा उसकी गहराई तक समां गया मीनू की तो हालत ख़राब हो गई थी.। मैंने थोड़ा रुक कर लंड बाहर खींचा तो उसके साथ खून भी बहर आया और फटा फट धक्के मारने लगा.

मीनू की टाइट चूत के कारण मेरे गेंदों मैं उबाल आना शुरू हो गया था.। मैंने मौके की नजाकत को ताड़ते हुए पहले लंड बाहर निकाला और गहरी साँस लेकर अपनी पोस्शन कंट्रोल करी और मीनू के मुँह से कुर्ती हटी और फिर धीरे धीरे पूरा लंड घुसा कर शुरू मैं हलके धक्के मारे फ़िर ताबड़ तोड़ धक्के लगाए.

मैं अपनी स्पीड गोंडवाना एक्सप्रेस से मिला रहा था…” मीनू की बुर पानी छोड़ने वाली थी क्योंकि उसने अपनी कुर्ती वापिस अपने मुँह में डाल ली थी और मीनू की बुर मेरे लौडे को कसने लगी थे मैं मीनू के 32 से 34 साइज़ हुए मम्मे मसलता हुआ चुदाई कर रहा था.। मीनू बहुत जोरो से झडी तभी मेरे लण्ड ने भी आखिरी सांसे ली तो मैंने मीनू के दोनों मम्मे पूरी ताकत से भीचते हुए अपना लौड़ा मीनू की टाइट बुर मैं आखिरी जड़ तक पेल दिया और मीनू की बूर को मैंने पहला वीर्य का स्वाद दिया मीनू भी बहुत खुश हो गई थी। जब साँस थमी तो मैंने लन्ड मीनू की बुर से बाहर निकाल जिससे मीनू की बुर से मेरे वीर्य के साथ मीनू की बुर से जवानी और कुंवारापन का सबूत भी बहकर बाहर आ रहा था.

मैंने मीनू को हटाया और कमोड में पेशाब करी मीनू बड़े गौर से मेरे लंड से पेशाब निकलते देखते रही और एक बार तो उसने मुँह भी लगा दिया। उसका पूरा मुँह मेरे पेशाब से गीला हो गया कुछ ही उसके मुँह में जा पाया मैंने अपना लंड धोया नहीं उस पर मीनू की बुर का पानी और जवानी की सील लगी रहने दिया और नेक्कर के अंदर किया मीनू की बुर मैं सुजन आ गई थी मैं इंतज़ार कर रहा था की अब मीनू भी अपनी बुर साफ़ करेगी तो नंगी होगी तो उसने मुझे बाहर जाने को बोला। मैं उसकी बात मानकर उसको अपना रुमाल बताकर आ गया। मैंने अपनी घड़ी मैं टाइम देखा तो हम लोगो के सवा घंटा गुजर गया था टॉयलेट में … शुक्र है भगवन का कि ठंड के कारण कोई नहीं जागा था और ट्रेन भी नहीं रुकी थी। थोडी देर बाद मीनू अपनी बुर पर हा्थ फेरती हुई कुछ लड़खड़ाते हुए बाहर आई मैंने पूछा क्या हाल है जानेमन तुम्हारी बुर के ” सुजन आ गई है पर चुदवाने मैं बहुत मजा आया फ़िर से चुदवाने का मन कर रहा है

” ये लो यह रूमाल तुम वहाँ छोड़ आए थे। स फक्स…इसमे यह क्या लगा है लिसलिसा” यह वोही रुमाल था जिसमे मैंने मीनू के नाम की मुट्ठ मारी थी अपनी सीट पर लेते हुए वोही मुझे देने लगी। “इसमे वोही लिसलिसा है तो अभी तुम्हारी मुनिया मैं मेरे लंड ने उडेला है … और तुम क्या लिए हो” मैंने मीनू को कहा … उसने पहले सूंघा फूले कहने लगी ” ये मेरी पैंटी ही … ख़राब हो गई थी तो मैंने निकाल ली.। और तुम्हारा रुमाल मैं ले जा रही हूँ इसे अपने साथ रखूँगी और तुम्हारे पानी का स्वाद लेकर इसे सूंघकर सो जाउंगी.। तुम दिल्ली में कहाँ रुकोगे.। और किस काम से जा रहे हो” मीनू ने मेरे से पूछा। तुम अपनी पैंटी मुझे दो मैंने मीनू से कहा फिर बताउंगा कि मैं कहाँ और क्यों जा रहा हूँ। पहले तो मीनू मुझे घुड़की “तुम क्या करोगे मेरी गन्दी पैंटी का” मैंने कहा ” वोही जो तुम मेरे रुमाल के साथ करोगी और मैं तुम्हारी पैंटी अपने लंड पर लपेट कर मुट्ठ भी मारूंगा” उसने मेरे को चुम्मा देते हुए कहा “पागल” और अपनी पैंटी मुझे दे दी मैंने वहाँ जहाँ उसकी बुर रहती है उसको अपनी नाक से लगाया और जीभ से चाटा तो मीनू शर्मा गई

मैंने मीनू को बताया की मुझे दिल्ली में थोड़ा काम है और एक दोस्त की शादी भी है इतना सुनकर वो कुछ आश्वस्त हुई।
मैंने कहा तुम मेरा सेल नम्बर ले लो मेरे को फ़ोन कर लेना मैं बता दूँगा की कहा पर रुकुंगा और हम कैसे और कब मिलेंगे यह भी बता देंगे।

मीनू मेरा रुमाल लेकर अपनी सीट पर आ गई और मैं अपनी सीट पर। अब मेरा बैग भी आ गया था सो मैंने बैग मैं से एयर पिल्लो निकाल और अपने सिराहने रख कर मीनू को याद करने लगा मेरा मेरा लंड फ़िर से खड़ा होने लगा सो मैंने सीट पर लेटकर मीनू की पैंटी सूंघने लगा उसमे से मीनू की पेशाब और उसके पानी की स्मेल आ रही थी। उस स्मेल ने कमाल ही कर दिया मेरा लंड फंफनाकर बहुत कड़क हो गया मैंने मीनू की पैंटी का वो हिस्सा जो
कि उसकी चूत से चिपका रहता था मैंने फाड़ लिया और बाकी की पैंटी लेटे लेटे ही लंड पर लपेट ली नेक्कर के अंदर मैंने मीनू को सपने में चोदते हुए और उसकी बुर की खुसबू सूंघते हुए उसकी पेशाब भरी पैंटी को चाटते हुए मुठ मारने लगा मैंने अपना सारा पानी मीनू की फटी हुई पैंटी और अपनी चड्डी मैं निकाल दिया 3 बार झड़ने के कारण पता ही नहीं चला की कब मैं सो गया”

सुबह मुझे एहसास हुआ की कोई मुझे जगा रहा है। तो मैंने आँख खोलते हुए पुछा कौन है गाड़ी कौन से स्टेशन पर खड़ी है … मुझे जगाने वाला मेरा साला मीनू का भाई था बोला ” देव जी उठिए निजामुद्दीन पर गाड़ी खड़ी है पिछले 15 मिनट से सभी आपने घर पहुच गए आप अभी तक सोये हुए हूँ” मैं फटाफट उठा और अपना सामान बटोरा वैसे ही हाथ में लिया और प्लेटफोर्म पर उतर आया। वहा सबसे पहले मेरी नज़र मेरी नई चुदैल जानेमन मीनू पर पड़ी वो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी। उसके चेहरे से कतई ऐसा नहीं लग रहा थी कल रात को मैंने इसी ट्रेन मैं मीनू की बुर का अपने हल्लाबी लंड से उदघाटन किया था और उसकी सील तोडी थी

प्लेटफॉर्म पर बहुत ठण्ड थी। सुनहरी धूप खिली थी मैं टीशर्ट और नेक्कर मैं खड़़ा था। मैंने मीनू का कम्बल और चादर तह कर के उनको सौंपे और उनका धन्यवाद दिया मैं अपने एयर पिल्लो की हवा ऐसे निकाल रहा था जैसे मीनू के दूध दबा रहा हूँ और यह मीनू को और उसकी कजिन को दिखा भी रहा था.

मैंने उन लोगों से पूछा कि आप कहाँ जायेंगे?
मीनू का भाई बोला- हमको सरोजिनी नगर जाना है और आपको कहाँ जाना है?
मुझे भी सरोजिनी नगर जाना था, वहाँ पर मेरे दोस्त की शादी है … मैंने उन लोगों को जवाब दिया.
मैंने कहा- मेरे साथ चलिए … मुझे लेने गाड़ी आई होगी बाहर…
वो लोग बोले नहीं नहीं आप चलिए हम बहुत सारे लोग है और इतना सारा समान है, आप क्यों तकलीफ करते है…
मैंने कहा- इसमे तकलीफ जैसे कोई बात नहीं हम आखिर एक ही मोहल्ले के लोग है इसमे तकलीफ क्यों और किसे होने लगी फ़िर गाड़ी में अकेला ही तो जाउंगा यह मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

मीनू की कजिन धीमे से बोली- रात की मेहनत सुबह रंग ला रही है … और मुझे मीनू को देखकर हलके से मुस्कुरा पड़ी।

हम सभी बाहर आए तो देखा कि एक टाटा सूमो पर मेरे नाम की स्लिप लगी हुई थी मैंने मीनू के भाई और मम्मी से कहा की देखिये किस्मत से मेरे दोस्त ने भी बड़ी गाड़ी भेजी है। इसमे हम सब और पूरा सामान भी आ जाएगा.

गाड़ी में सारा सामान लोड कर सभी को बैठा कर गाड़ी रिंग रोड पर निकलते ही मैंने गाड़ी साइड मैं रुकवाई और एक पी सी ओ में घुस गया वहा से अपने दोस्त को फ़ोन किया कि यार मेरे लिए एक रूम का अलग अरेंजमेन्ट हो सकता है क्या … उसने पूछा क्यों … मैंने कहा देखा तेरे लौडे का इन्तेजाम तो कल हो गया तू कल ही चूत मारेगा मैं अपने लिए अपनी चूत का इन्तेजाम सागर से ही कर के लाया हूँ … रात में ट्रेन में मारी थी चूत पर मजा नहीं आया। तसल्ली से मारना चाहता हूँ।

मेरा दोस्त बोला ” देव भाई तुमसे तो कोई लड़की पटती नहीं थी यह एक ही रात में तुमने कैसे तीर मार लिए और तुमने उसे चोद भी डाला!

मैंने कहा बोल तू कर सकता है तो ठीक नहीं तो मैं होटल जा रहा हूं। मुझे मेरे दोस्त ने आश्वस्त करा दिया कि वो ऐसा इन्तेजाम कर देगा.

मैं फ़ोन का बिल देकर गाड़ी मैं बैठा और इंतज़ार कराने के लिए सभी को सॉरी बोला और ड्राईवर को चलने का हुकुम दिया…मैंने पूछा आप लोग सरोजिनी नगर मैं किसके यहाँ जायेंगे…मीनू की मम्मी बोली ” बेटा मेरी बहिन के लड़के की शादी है … कल की मिस्टर कपूर … रोहन कपूर…

“ओह फ़िर तो मजा ही आ गया भाई” मैं उछलता हुआ बोला.। सब मेरे को आश्चर्य भरी निगाहों से देखने लगे सो मैं आगे बोला ” वो.। वो.। क्या है की मुझे भी कपूर साहब के बेटे यानि सुमित की शादी मैं जाना है.।

बातों बातों में कब सुमित का घर आ गया पता ही नहीं चला … पर मैं सुमित से आँख नहीं मिला पा रहा था.। जब सब घर के अंदर चले गए तो मैंने ड्राईवर को रुकने को बोला और अपना बैग गाड़ी मैं छोड़ कर सुमित को बुलाने उसके घर मैं गया … सुमित आकर मेरे से लिपट गया.। बहुत खुश था सुमित पर मैं उससे आँख नहीं मिला पा रहा था मैंने सुमित को एक तरफ़ ले जाकर बोला ” देख यारा बुरा मत मानियो .। तुम्हारे यहाँ मेहमान बहुत है मैं ऐसा करता हूँ कि मैं और सुधीर मेरा एक और दोस्त दोनों होटल मैं रुक जाते है..”

मेरा इतना कहते ही सुमीत के चेहरे के भाव बदल गए.। सुमित ने कहा ” देख भाई देव मैं जानता हूँ की तुम होटल क्यों जा रहे हो यार कोई बात नहीं तुमने सोना(मीनू की कजिन) को चोद दिया तो क्या हुआ.। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.। यदि तुम मीनू को भी चोद देते तो इसमे कोई दिक्कत नहीं थी मैं भी उसको चोदना चाहता था पर मौका नहीं मिला या मेरी हिम्मत नहीं हुई.। इसे दिल पे मत ले यार” मौज कर यारा मैंने तेरे लिए स्पेशल रूम का अरेंजमेन्ट किया है वो भी तुम्हारी डार्लिंग के साथ वाले रूम में।

यह सुनकर मेरी जान में जान आई। मैं सुमित को क्लीयर कर देना चाहता था की मैं सोनानहीं मीनू को चोदना चाहता हूँ.” सो मैंने कहा मैंने मीनू को चोदा है ट्रेन में … और उसको ही तसल्ली से चोदना चाहता हूं.।

सुमित बोला ” सेक्सी तो सोनाथी पर तुमने मीनू को कैसे चोद लिया.। वो बधाई हो माई बोय…तभी मीनू थोड़ा लंगडा के चल रही थी। तुमने तो ऑफिस में अपनी मैडम को भी तगड़ा चोदा था जबकि वो शादी शुदा थी वो तो 2 दिन चल फ़िर भी नहीं सकी थी”

“तुम दोनों दरवाजे पर ही बातें करते रहोगे क्या? सुमित इसे इसके कमरे में पहुंचा दो! कैसे हो देव बेटा” कहते हुए सुमित के पापा आ रहे थे …

मैंने उनके पैर छुए और उनसे थोडी बातें करी। फ़िर सुमीत मेरे को अपने रूम मैं ले गया.। सुमीत के पिता बहुत बड़े बिज़नस मैंन थे। बहुत बड़ा बंगला था उनका सुमीत ने मुझे सेकंड फ़लूर पर जहा सिरफ़ 3 ही कमरे थे और मीनू वगैरह भी वहीं रुके थे रूम फिक्स किए थे.। रूम बहुत शानदार था एक डबल बेड, टी वी, वी सी डी प्लेयर, फ़ोन सब कुछ था।

सुमित बोला ” क्यों देव कैसा लगा मेरा इन्तेजाम तुम्हारी चूत भी तुम्हारे बगल में है और एक खास बात बताऊ मैं- मीनू की बाथरूम तुम्हारी बाथरूम से अटैच्ड है बीच में दरवाजा है आओ मैं तुमको दिखा दू उसने मेरे को वो दूर दिखा दिया और कैसे खुलता है वो भी दिखा दिया मैं वहाँ से मीनू के बाथरूम मैं पहुच सकता था और वहाँ से उसके रूम मे। अच्छा चल तैयार होजा और फटाफट नीचे आजा साथ नाश्ता करेंगे ..

मैं सुमित को बोला ” सुमित तो मीनू की चूत की खुशबू लेना चाहेगा ?”

सुमित ने कहा कैसे मैंने मीनू की पैंटी का वो फटा हिस्सा उसको दिखाया और उसको सूंघने को दे दिया.। मैं और सुमित पहले भी कई लड़कियां साथ मिलकर चोद चुके थे उसको चूत की स्मेल के बारे में पता था बहुत अच्छी है रे देव मीनू की बुर तो मैं तो उसकी बुर के नाम पर मुट्ठ ही मारता रह गया पर तुने मेरे लन्ड का बदला ले लिया.। यह सब बातें बात बाथरूम में ही हो रही थी … सुमित मेरे रूम से चला गया

घर में काफ़ी हो हल्ला हो रहा था सो मैंने रूम लाक करके टीवी ओं कर दिया और नंगा होकर फ्रेश होने और नहाने बाथरूम मैं घुस गया। बढ़िया गर्म पानी से नहाने लगा तभी मुझे दीवार पर कुछ टकराने की आवाज आई। मैंने शोवेर बंद किया तो उस तरफ़ मीनू नहा रही लगता महसूस हो रही थी … मैंने…धीरे से दरवाजा खिसकाया जो की बिना किसी आवाज के सरकता था तो देखा एक बिल्कुल जवान नंगा जिस्म शोवेर में मेरी तरफ़ पीठ किया अपनी बुर मैं साबुन लगा रहा था मैं भी मादरजात नंगा था मेरे लंड को चूत का ठिकाना का एहसास होते ही उछाल भरने लगा मैंने आव देखा ना ताव सीधा जाकर उसके मुँह पर हाथ रखा जिससे वो डरकर ना चिल्ला पाए और उसकी गांड के बीच मैं अपना हल्लाबी लौदा टिकते हुए उसकी पीठ से चिपक गया.

मेरी पकड़ जबरदस्त थी इसलिए वो हिल भी नहीं पाई मैंने शोवेर के नीचे ही उसके कानो में कहा कहो जानेमन अब क्या इरादा है चलो एक बार फिर से चुदाई हो जाए और मैं उसकी चूत पर हा्थ फिरने लगा उसने अपनी बुर मैं साबुन घुसा रखा था वो साबुन से अपनी चूत चोद रही थी मैंने कहा यह जगह साबुन रखने की नहीं लन्ड रखवाने की है और मैं उसके चूत के दाने को मसलने लगा.

पहले तो उसने टाँगे सिकोडी पर दाने को मसलने से वो गरमा गई थी उसने अपनी टाँगे ढीले छोड़ दी मैंने अभी तक उसका मुँह ताकत से बंद कर रखा था मैंने कुछ देर इसकी पोसिशन मैं उसकी बुर का दाना मसला और फ़िर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी बुर के हौले मैं घुसा दी … बहुत गरम और टाइट चूत थी.। मैंने अपनी ऊँगली से उसकी बुर को चोदने लगा था, वो मस्ताने लगी थी थी और उसकी बुर पनियाने लगी वो हिल रही थी अपनी गांड भी जोरो से हिला रही थी।

मैंने अपनी ऊँगली को उसकी बुर मैं तेज़ी से पेलना शुरू कर दिया यानि की स्पीड बड़ा दी इधर मेरा हल्लाबी लौड़ा जो की उसकी मदमाती गांड मैं फसा हुआ था फनफना रहा था उसकी भी बुर गरमा गई थी.। तभी उसने अपने एक हाथ मेरी उस हथेली पर रखा जिससे मैं उसकी बुर को चोद रहा था फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लौडे को छूने के लिए नीचे लगाया वो सिर्फ़ मेरे सुपाडे को ही टच कर पाई वो छटपटा रही थी

बहुत गरम और टाइट चूत थी.। तभी वो अपने दोनों हाथो से मेरा हाथ अपने मुँह से हटाने की नाकाम कोशिश करने लगी। मुझे उसकी यह हरकत ठीक नहीं लगी तो मैं उसे बाथरूम से खीच कर अपने बेडरूम मैं ले आया और उसको उल्टा ही बेड पर पटक दिया जैसे ही वो पलटी मेरे होश फ़ाखता हो गए वो सोनाथी …

मैंने उसको चुप रहने का इशारा किया और अपने टीवी की आवाज थोडी और बढा दी। सोनाका बदन बहुत सेक्सी था उसके कड़क बिल्कुल गोलाकार 36 साइज़ के मम्मे सुराहीदार गर्दन, 2 इंच गहरी नाभि हल्का सा सांवला रंग। सोनाकी चूत डबलरोटी की तरह फूली हुई थी सोनाने अपनी झांटे बड़ी ही कुशलता से सजा रखी थी मैं तो सोनाको नंगी देख कर बेकाबू हो रहा था

सोनाअपनी चूत दोनों हाथों से ढक रही थी और मेरे से कहने लगी प्लीज़ मुझे जाने दो .। मीनू नहाकर आजायेगी तो मुझे दिक्कत हो जायेगी.। मैंने पूछा तुम्हारा रूम अंदर से तो लाक है बा.। बोली हाँ है मैंने कहा तो फ़िर क्या फिकर तुम जैसे सेक्सी लड़की को नहाने मैं टाइम तो लगेगा ही। सोनातुम बहुत सेक्सी और खूबुसूरत और तुम्हारी चूत तो बहुत गजब की है इसमे जबरदस्त रस भरा हुआ है मुझे यह रस पिला दो प्लीज़ और मैं सोनाके ऊपर टूट पड़ा।

सोनाके होंठ बहुत ही रस भरे थे मैंने उसके होंठों को अपने ओठों में कस लिए और उसके लिप्स को चूसने लगा मैं एक हाथ से सोनाकी मस्त जवानी के मम्मे भी मसल रहा था और अपना लौड़ा उसकी बुर के ऊपर टिका कर रगड़ रहा था पहले तो सोनाछटपटाती रही पर जैसे ही मैंने उसके शरीर पर अपने शरीर के हिस्सों का दबाब बढाया तो वो भी कुछ ढीली पड़ने लगी। अब सोनाने अपनी चूत से अपने हाथ हटा लिए थे मैंने सोनाके शरीर को सहलाना शुरू किया मैं उसकी अंदरूनी जांघों और चूत पर ज्यादा ध्यान दे रहा था.

सोनाभी अब जवाब देने लगी थी और सिसियानी लगी थी सोनाका बदन बड़ा ही गुदाज़ बदन था और ऐसे ही फुद्दी वाली उसी बुर थी मैं अब सोनाके निप्प्ल को चूसने के लिए उसके होंठों को चूमते और चाटते हुए नीचे मम्मो की घाटी की ओर चल पड़ा सोनाबहुत जोरो से सिसियाने लगी थी … मैंने जैसे ही उसके मस्त मामो की सहलाना और उनके किनारों से चूसना चालू किया सोनाछटपटाने लगी मैं एक निप्प्ल हाथ से मसल रहा था और दूसरा नीपल की ओर अपनी जीभ ले जा रहा था

सोनाको सोनाको भी अब मजा आने लगा था उसने नीचे हाथ डाल कर मेरा हल्लाब लौड़ा पकड़ लिया और बोली हाय देव मीनू की बुर कितनी खुशनसीब है जिसको तुम्हारे लौडे जैसा चोदु लवर मिला कल रात में ट्रेन में तुमने उसकी बुर के चीथड़े उड़ा दिए मैंने देखा मीनू लंगडाकर चल रही थी मैंने तुम दोनों की चुदाई के सपने देखते हुए 3 बार अपनी चूत ऊँगली से झाड़ डाली। हय राजा! बहुत मस्त लौड़ा है …

मैंने कहा सोनातुम्हारी जवानी में तो आग है तुमहरा बदन बहुत गुदाज और सुंदर सेक्सी है तुम्हारी पाव रोटी जैसे फूली चूत मुझे बहुत अच्छी लगती है और मैं तेजी से उसके निप्प्ल चूसने लगा और एक हाथ से उसकी चूत को नीबू की तरह मसलने लगा सोनाबहुत गरमा गई थी सोनाकहने लगी अब कंट्रोल नहीं होता अपना लौड़ा मेरी बुर में घुसा दो, फाड़ दो मेरी बुर, बहुत खुजली हो रही है, तुम्हारा लन्ड जो भी लड़की एक बार देख लेगी बिना चुदवाए नहीं रह सकती.। और जिसने एक बार चुदवा लिया उसके तो कहने ही क्या वो हमेशा अपनी चूत का दरवाजा तुम्हारे लौडे के लिए खोले रखेगी

मुझे जब मीनू ने तुम्हारे लौडे के पानी वाला रुमाल सुंघाया तो मेरी चूत ने अपने आप पानी छोड़ दिया मैं समझ गई थी कि तुम्हारा लौड़ा तुम्हारे जैसा ही हल्लाबी होगा जो मेरी बुर की जी भर कर चुदाई करेगा और खुजली मिटाएगा पर यह नहीं जानती थी कुछ ही घंटो में मुझे मेरी मुराद पूरी होने का मौका मिल जायेगा…हाय अब सहन नहीं हो रहा जल्दी से अपना लौड़ा मेरी बुर में पेलो …

मैं सोनाके मम्मे जबरदस्त तरीके से चूस रहा था और सोनाका तना चूत का दाना मसल रहा था सोनाकी चूत बहुत पनियाई हुई थी सोनाबहुत चुदासी हो रही थी सोनाकी बुर पर करीने से काटी गई बेल बूटेदार झांटें बहुत सुंदर लग रही थी सोनाकी पाव रोटी पिचक और फूल रही थी ऐसी बुर को मैं पुट्टी वाली बुर कहता हूँ इसको चूसने और चोदने में बहुत मजा आता है। मैं सोनाकी बुर को उसकी लम्बाई मैं कुरेद रहा था और बीच बीच मैं एक ऊँगली उसकी बुर मैं घुसा कर ऊँगली से बुर भी चोद देता सोनाकी बुर मैं लिसलिसा सा पानी था मैंने ऊँगली बाहर निकाल कर सूंघी और चाट ली बहुत ही बढ़िया खुशबू थी और टेस्ट तो पूछो ही मत

मेरी चूत के पानी की प्यासी जीभ सोनाकी बुर को चूसने के लिए तड़प उठी मैंने सोनाके पैर के अंगूठे से चूसना शुरू किया और उसकी अंदरूनी जांघ तक चूसते चूसते पहुच गया मैं सोनाकी काली सावली पाव रोटी जैसी पुट्टी वाली बुर के आस पास अपनी जीभ फिरने लगा वह जो उसका पानी लगा हुआ था उसको चाटने में बहुत मजा आ रहा था सोनासे रहा नहीं जा रहा था.। हाय देव यह क्या हो रहा ही मेरे को ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हाय मेरी बुर को चूसो इसे चबा जाओ इसे खा जाओ सोनाने मेरा सर पकड़ कर अपनी बुर पर लगा दिया उसकी पुत्ती वाली बुर को वो अपनी गांड उठाकर मेरे मुँह पर रगड़ रही थी

मैंने सोनाकी दोनों टांगे फैलाई और उसकी बुर पर किस किया। सी हाई मर गईई आया ऐसा कह रही थी फ़िर मैंने सोनाकी पाव रोटी को उंगलियों से खोला और जीभ से जबरदस्त चाटनी शुरू कर दी ऊऊम्म्म्म हीईई सीईई बहुत अच्छा लग रहा है देव उम्म्म्म और चूसो और चाटो, अपनी जीभ पूरी घुमा दो, पहले किसी ने ऐसा मजा नहीं दिया ओम्म्म मेरी चूत झरने वाली है ई अईई जल्दी से कुछ करो। मैंने अपनी जीभ की रफ़्तार बड़ा दी

सोनाअपनी दोनों टांगो से मेरे सर को दबा लिया मैंने अपनी जीभ सोनाकी गरम और लिसलिसी बुर की गुफा में घुसा कर जैसे ही गोल गोल घुमाया अरे यार यह क्या कर दिया मेरी बुर तो पानी छोड़ रही है, और जोर से चू्सो और पिच पिच कर के उसकी बुर ने तेज़ी से पुचकारी मारना चालु कर दिया मैं तेज़ी से जीभ चलता हुआ उसका पानी पी गया और चूत का दाना फ़िर से अपनी जीभ में भर लिया सोनामेरा लंड को प्यार करना चाहती थी सो उसने मेरे कहा तुम अपना लौड़ा मेरी ओर करो हम दोनों 6९ में हो गए

सोनामेरा लौड़ा बहुत तेज़ी से और अच्छे से चूस रही थी ऐसा लग रहा था की सोनापहली बार नहीं चुदवा रही वो पहले भी चुदवा चुकी थी मैं सोनाकी बुर के दाने को तेज़ी से चूस रहा था सोनामेरे नीचे थी और मेरा लौड़ा चूस रही थी मैं जितना प्रेशर उसकी बुर पर अपनी जीभ से डालता उतनी ही प्रेशर से सोनाभी मेरे लौडे को चूसती मुझे ऐसा लग रहा था की मैंने अपना लंड यदि जल्दी सोनाके मुँह से न निकाला तो यह झड़ जाएगा मैं सोनाके मुँह से लंड निकाल कर सोनाकी बुर को और गहराई से चूसने लगा।

सोनाफ़िर से तैयार थी। हाय मेरे चोदु राजा आज लगता है मेरी बुर की खुजली पूरी तरह से शांत होगी। मेरी पाव रोटी में कई लौडे अपने जान गवा चुके है घुसते ही दम तोड़ देते है। आज तुम मेरी बुर की जान निकल दो मेरे राजा … मैंने सोनाकी गांड के नीचे तकिया लगे उसकी पाव रोटी जैसे पुत्ती वाली बुर जैसे घमंड मैं और फूल गई उस गुदाज पुत्ती वाली बुर से लिसलिसा सा कुछ निकल रहा था मुझे सहन नहीं हुआ तो मैंने फ़िर से अपनी जीभ उसकी बुर से लगा दी.। अरे तुम भी डर रहे हो क्या मेरी पाव रोटी में दम तोड़ने से ? सी हीईई कोई तो मेरी बुर की खुजली शांत कर दे मैंने अपना लौड़ा उसकी बुर पर रखा और थोड़ा उसे क्लिटोरिस से बुर के एंड तक रगडा साथ में मैं उसके माम्मे बुरी तरह से रगड़ मसल रहा था।

सोनाअपनी गांड उठा उठा कर मेरे लन्ड को अपनी बुर मैं घुसाने के लिए तड़प उठी मेरे राजा मत तड़पाओ मैं मीनू नहीं सोनाहूँ मैं चूत की खुजली से मर जाऊँगी मेरी बुर को चोदो … फाड़ो…

उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपनी बुर के छेद पर टिका लिया और थोडी गांड उठाई तो पुक्क की आवाज के साथ सुपाडा उसकी बुर में घुस गया सुपाडा का गुदाज बुर में घुसना और सोनाके मुँह से दर्द की कराह निकलना शुरू हो गई। उई मीनू मेरी बुर में पहली बार किसी ने जलता हुआ लोहा डाला। हाय मेरी बुर चिर गई, फ़ट गई, कोई तो बचा ले मुझे, बहुत मजा आ रहा था मैंने सोनासे कहा सोनाजानेमन पुट्टी वाली गुदाज बुर बहुत कम औरतों को नसीब होती है इनको बड़ी तसल्ली से चुदवाना चाहिए। तुम्हारी चूत की तो मैं आज बैन्ड बजा दूँगा

और मैंने सोनाके दोनों मम्मे अपने हाथ में लिए और अपना होंठ उसके होंट से चिपका दिया और पूरा लन्ड एक ही झटके में पेलने के लिए जोरदार धक्का मारा एक झटके में सोनाकी बुर की दीवारों से रगड़ खाता हुआ मेरा लंड आधी से ज्यादा सोनाकी पाव रोटी वाली बुर मैं धस चुका था

मैं कुछ देर रुका और लन्ड बाहर खीचा सुपाडा को बुर में रहने दिया और फिर से बुर फाड़ धक्का लगाया। इस बार मेरा लन्ड सोनाकी बुर की गहराई में जाकर धस गया मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी गरम मक्खन वाली किसी चीज को मेरे लंड पर बहुत कस कर बाँध दिया हो। उसकी बुर बहुत लिसलिसी और गरम थी मैं सोनाको हलके हलके धक्के देकर चोदने लगा सोनाको अब मजा आ रहा था

वो हाय! सी! राजा औरर मारो, यह बुर तुम्हारे लिए है मेरी बुर को चोदने के इनाम में मैं तुम्हारी मीनू के साथ सुहागरात मनवाऊँगी। बहुत मजा आ रहा है पहले किसी ने ऐसे नहीं चोदा, चोदते रहो, मुझे लगता है कि तुम्हारा लन्ड मेरे पेट से भी आगे तक घुसा हुआ है मेरी चूत की तो आज बैन्ड बज गई। अरे देखो सालो ऐसे चुदवाई और चोदी जाती है चूत उम्म्म मेरे राजा बहुत मजा आ रहा ही उई मा मेरी पेट में खलबली हो रही है यह मैं तो झरने वाली हूँ मैं जाने वाली हूँ सो मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी सोनाने मेरे से कहा देव तुम लेटो मुझे तुम्हारे लौडे की सवारी करने दो

मैं तुंरत लेट गया सोनाने लौड़ा को ठिकाने पर रखा और ठप्प से मेरे लौडे पर बैठ गई और फटाफट उचकने लगी सोनाके 36 साइज़ के मम्मे हवा में उछाल मार रहे थे। सोनाबहुत तेजी से झड़ी पर मैं अभी नहीं झरने वाला था क्योंकि पीछे 6-8 घंटो में 3 बार झर चुका था सो मैंने सोनाको कुतिया बनाया और बहुत बेरहमी से चोदा। सोनाकहने लगी देव बहुत देरी हो जायेगी जल्दी से खाली करो अपना लौड़ा मेरी बुर। मैं फ़िर मैंने और तेज़ी से धक्के मारे और सोनाकी बुर की गहराई में झड़ गया सोनाने मेरा लौड़ा चाट कर साफ़ किया और फ़िर चुदवाने के वादे के साथ विदा हो गई …

मैंने दिल्ली में सुमित के घर पर ही सुमित की सुहाग रात वाले कमरे में मीनू के साथ भी सुहाग रात मनाई और सोनाऔर मीनू दोनों को चोदा पर यह सब बाद में Sex Stories

Sex Stories

हमारे यहाँ एक नौकरानी है गंगू बाई नाम की. उसकी उमर भी 20 साल की Sex Stories है. उसका रंग साँवला है और फ़ेस कटिंग एकदम अमीशा पटेल की तरह है। उसके बूब्स एकदम बड़े है और उसकी गांड है एकदम बाहर है. मैं उसको चोदने का ख्वाब बहुत पहले से देखता हूं.

मेरा ये सपना पूरा हुआ जब मेरी मम्मी औस्ट्रेलिया मेरे पापा के पास गयी।

उस दिन मैं घर में था सुबह गंगू बाई आयी तो मैंने दरवाज़ा खोल दिया.
वो अपना काम करने लगी.

मैं तभी अपने बेडरूम में जा के एकदम नंगा हो गया. उसको चोदने का ख्याल आते ही मेरा लंड एकदम टाइट हो गया. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। मैं रात में ही वियाग्रा की गोली लाया था, मैंने उसको खा लिया।

फिर मैंने गंगू बाई को आवाज़ मारी.
वो जब मेरे बेडरूम में आयी तो हैरान हो गयी. मुझे नंगा देख कर हँस के वो किचन में भाग गयी.

मैं उसके पीछे गया. जैसे ही मैं किचन में गया तो वो मुझसे बोली- तुम्हारा इरादा क्या है?
मैं बोला- गंगू बाई रानी, मुझे तेरी चूत को चोदना है.

यह सुनते ही वो मेरी तरफ़ आयी और बोली- इतना कहने में इतने दिन लगा दिये?
मैं उसको फिर गोद में उठा के बेडरूम में ले गया. वहाँ मैंने उसको नंगा कर दिया. उसके बूब्स एकदम पिंक और रसीले थे. मैं झट से उसके बूब्स अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और एक बूब को अपने हाथ से मसलने लगा.

वो आह्ह उह्ह कर रही थी.

मैंनेदस मिनट तक उसके दोनों बूब्स को चूस के और मसल के लाल कर दिया.
तभी मुझे मेरे लंड पे कुछ गीला लगा. मैंने देखा तो उसकी चूत से पानी निकल रहा था।

मैं झट से उसकी चूत पे मुँह डाल के चाटने लगा उसकी चूत के दाने (क्लिट) को अपनी जीभ से चाटने लगा तो वो जोर जोर से चिल्लाने लगी और तड़पने लगी।

अपनी एक उंगली मैंने उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत एकदम टाइट थी। जैसे ही मैं उंगली अंदर बाहर कर रहा था तभी उसका पानी निकल गया.
मैंने सारा पानी चाट लिया और फिर उठ गया.

उसकी गांड के नीचे मैंने दो तकिये रख दिये और उससे कहा- देख आज़ इस लंड से तेरी चूत को चोदूँगा. तूने कभी ऐसी चुदाई करवाई है?
उसने कहा- नहीं.
तो मैंने कहा- तुझे दर्द होगा, सहन करना, फिर बहुत मज़ा आयेगा.

यह कह के मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत में डालने लगा वो बहुत ही टाइट थी जैसे ही मैंने एक धक्का लगाया वो जोर जोर से रोने लगी।

एक और धक्का लगाया मैंने तो वो चिल्लाने लगी और कहने लगी- छोड़ दो मुझे, मुझे नहीं चुदवाना।

मैंने एक और धक्का लगाया तो मुझे लगा कोई चीज़ मेरे लंड को उसकी चूत में रोक रही है.
मैं समझ गया कि उसकी सील है.

मैंने दोनों हाथों से उसके कंधों को पकड़ा और एक जोरदार धक्का लगाया. मेरा लंड उसकी चूत की सील फाड़ते हुए ४ इंच अंदर चला गया.
उसकी चूत से खून आने लगा और पानी भी.
मैं रुक गया.

वो बहुत ही जोर से चिल्ला रही थी और रो रही थी.
मैंने उसके बूब्स को मसलना चालू किया. दस मिनट के बाद वो शांत हो गयी, मैं फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा।

दस मिनट तक मैं धीरे धीरे धक्के लगा रहा था, जब मुझे लगा उसे मज़ा आ रहा है.
तभी मैंने एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया.

उसकी चूत से पानी निकलने लगा. जैसे ही मैंने थोड़ा लंड को बाहर निकाला उसकी चूत से खून निकलने लगा.

मैं रुक गया. दस मिनट के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरु कर दिये.
मैंने उसे पूछा- अब कैसा लग रहा है?
वो बोली- दर्द तो कम हुआ है पर मज़ा नहीं आ रहा!

यह सुन के मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. थोड़ी देर में उसकी चूत का पानी गिर गया.

मैंने उसे और जोर से चोदना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने वियाग्रा खाया था. तो मुझे मालूम था कि मेरा पानी लेट गिरेगा.

मैं उसको और 30 मिनट तक चोदता रहा.
वो भी बोलती रही- चोद मुझे शान … चोद मुझे … और जोर से आहह उहह शान. हह चोद रे चोद मुझे रंडी बना दे रे चोद मुझे. आह्हह मेरा पानी निकल रहा है आहह उहह!
और उसकी चूत का पानी ४ बार निकल गया।

तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसे उठने को कहा.
वो उठ नहीं पा रही थी.

उसको मैंने अपनी गोद में लिया और दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. उसकी चूत से खून और पानी टपक रहा था. उसके झांट के बाल एकदम गीले हो गये थे.

मैंने उसको खड़ा किया और अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुँह पर रख के उसके पैर अपने हाथ में ले लिये।
अभी वो पूरी तरह से हवा में थी।

दीवार से चिपक के मैंने झट से एक ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया और जोर जोर से चोदने लगा. उसे भी बहुत मज़ा आ रहा था. दस मिनट में ही उसका पानी निकल गया. मेरे हाथ दुख रहे थे तो मैं उसको बेड पे लिटा के आँधी की तरह चोदने लगा.

मैंने उसको आधा घंटा वैसे ही चोदा. मैं पूरा पसीना हो गया था. वो कम से कम 8 बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी.

तभी मुझे लगा कि मेरा पानी निकलने वाला है. मैंने अपने लंड निकाल के उसके मुँह में डाल दिया. वो उसे एकदम लोलीपोप की तरह चूसने लगी. तभी मेरा माल उसके मुँह में निकल गया और उसने उल्टी कर दी.

मैं उसको गोद में उठा के बाथरूम में ले गया और उसके साथ नहाने लगा. मेरा लंड एकदम टाइट था वियाग्रा की वजह से।

उसके बाद मैंने उसको बाथरूम में भी चोदा पर यह अगली बार में। Sex Stories

अब आगे : Antarvasna Sex Stories

अगले दिन दोपहर को मौसा Antarvasna Sex Stories जी घर आ चुके थे। उनके साथ उसके एक पुराने मित्र राजेश भी थे। उनके आते ही रीना और रूपा में कुछ बदलाव सा लगा, दोनों ही कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी। रीना भी पहले से अधिक सेक्सी लगने लगी थी। उसने थोड़ा मेकअप भी किया हुआ था और मौसा जी से वो हंस-हंस के बात कर रही थी। रूपा ने राजेश की खूब आवभगत की और उससे खूब बातें की।

मौसा जी बार-बार रीना की तरफ़ देखते, कभी उसका फ़िगर देखते, कभी उसके सुडौल चूतड़ों को निहारते। आज जाने क्यों रीना बड़ी आकर्षक लग रही थी। मौसा को क्या पता था कि आज रीना ने भरपूर चुदाई करवा कर अपना मन शांत कर लिया था।

पर हां इससे रीना के मन में एक नया जोश और मर्दों के प्रति एक आकर्षण पैदा हो गया था। जैसे अधिकतर मर्द नारी को एक भोग्य वस्तु मानते हैं, वैसे ही उसे पुरुष भी भोगने की वस्तु लगने लगे थे। उसे लगने लगा था कि मर्द तो बस चूत के दीवाने रहते हैं, इन्हें तो जब चाहो तब पटा लो और चुदा लो। बस थोड़ी सी चूची दिखा दो और मर्दों का तम्बू तन जाता है। चुनांचे मौसा जी भी रीना के लिये उसी श्रेणी में आ चुके थे।

रीना दो दिनों में ही मौसा जी के बहुत निकट आ चुकी थी। रीना उन्हें हर तरफ़ से उसे पटाने में लगी थी। उसे आशा थी कि उसे एक नया लण्ड जल्दी ही मिल जायेगा। अभी तो सभी कुछ पर्दे के पीछे था। उधर रूपा भी राजेश से खूब घुल मिल गई थी। शाम को सब मौसा जी के साथ राजेश को घुमाने ले जाते थे। रूपा ने रीना को और रीना ने रूपा को यह बता दिया था कि वो इन मर्दों को पटा रही हैं। दोनों ने अपने पत्ते खोल रखे थे। रीना यदि मौसा के अधिक करीब आ जाती थी तो रूपा जानबूझ कर दूसरी ओर चली जाती थी और मौसा यह समझते थे कि मौका मिल गया। इस दौरान वो हाथ दबा देते थे और कभी कभी चूतड़ पर हाथ भी मार देते थे। बदले में रीना शर्माने का अभिमय कर देती थी।

उधर रूपा ने भी राजेश को पटा लिया था। रूपा जरा तेज थी, सो वो तो चुम्बन तक पहुंच गई थी।

“रीना ! अब तो मुझे चुदने की लग रही है … अपने मौसा जी को कही बाहर ले जा ना !”

“शाम को मौसा जी को मैं घुमाने ले जाती हूँ और आप तबियत का बहाना बना लेना !”

दोनों ने अपनी ओर से सरल सा बहाना बना लिया। योजना के मुताबिक राजेश बाहर निकल गया और रूपा ने पेट दर्द का बहाना किया। मौसा जी तो चाहते ही थे कि उसे सिर्फ़ रीना का साथ मिले। रीना के थोड़े से ही कहने पर मौसा जी मान गये।

रूपा ने भी मंजूरी दे दी। दोनों कार में निकल पड़े और रूपा ने जल्दी से मोबाईल पर फ़ोन करके राजेश को वापस बुला लिया। राजेश तुरंत घर आ गया। राजेश सीधा रूपा के कमरे की तरफ़ बढ़ गया। रूपा उसे देखते ही शरमाती सी खिल गई।

“अब हम तुम इस कमरे में बंद हो तो…”

“धत्त, आप तो मजाक करने लगे…” रूपा ने राजेश को रिझाने का नाटक किया।

“अब तो मत शर्माओ … अब तो एक मैं और एक तू … दोनों मिले किस तरह… बताओ !”

“हाय रे … आप दूर रहें … मुझे कुछ होता है…!” राजेश ने रूपा का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया, रूपा जानबूझ कर उसके ऊपर गिरती हुई बोली,”हाय राम … बैंया तो छोड़ो, मोच आ जायेगी ना…” रूपा फ़िल्मी अदाएँ दिखाते हुये राजेश से लिपट गई। दूसरे ही क्षण रूपा के मद भरे अमृत कलश उसकी हथेलियों में दबे हुये थे।

“मां री ! … मत करो ना … गुदगुदी होती है …! ” रूपा ने आह भरते हुये कहा,”दूर रहो जी… नीचे कुछ गड़ रहा है…”

मेरी मतवाली रूपा यही है वो मस्त चीज़ जो हमे अभी मस्ती देगी … अब बनो मत …”

“ना जी … मत सताओ … इसे दूर ही रखो … मेरा मन डोल रहा है… हाय रे ! क्या कर रहे हो… घुसाये चले जा रहे हो… आह्ह्ह मेरे राजेश…!!”

“मस्ती आ रही है ना… आओ अब अधरों का रसपान करें” राजेश भी भावना में बह कर बोला।

दोनों के होंठो की पत्तियां टकरा गई और एक दूसरे की जीभ से वो भीग गये।

होंठो का कसाव दोनों ने बढ़ा दिया और अधरपान में लीन हो गये। राजेश के मुँह से सीत्कार निकल पड़ी… रूपा ने उसका लण्ड कस कर दबा दिया था।

“अरे रूपा, तुम मुझे मार डालोगी… जरा धीरे से… कहीं निकल गया तो मजा नहीं आयेगा…”

“तो फिर जी, क्या करें … मेरा तो मन डोल रहा है जी…!”

“चलो, पहले प्यास बुझा ले… कपड़े उतारो…”

“प्यास लग रही है तो कपड़े क्यूँ उतारें भला…?” रूपा ने शरमाते हुये कहा।

राजेश ने धीरे से रूपा की साड़ी उतार दी … फिर ब्लाऊज को जबरदस्ती उतार दिया। रूपा की तरफ़ से ब्लाऊज़ उतारने का विरोध तो मात्र एक नाटक था, ब्लाऊज उतरते ही उसने अपनी उभरी हुई जवानी को हाथों से छिपाने का नाकाम प्रयास किया। राजेश ने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार फ़ेंके। अब रूपा के पेटीकोट की बारी थी, बस नाड़ा खींचने की देर थी। पेटीकोट झम से नीचे पांवों पर आ गिरा।

“मैं मर गई राम जी… और कभी अपनी चूत छिपाती तो कभी अपने उभरे हुये स्तनों को ढकने की कोशिश करती। राजेश ने अपने नंगे बदन से रूपा को लिपटा लिया और दोनों फिर बिस्तर पर एक दूसरे को धकेल कर लेट गये। दोनों ही एक दूसरे के शरीर को दबाते हुये लोट लगाने लगे। तभी रूपा सिसक उठी। उसकी चूत में राजेश का कड़क लण्ड बिना किसी पूर्व सूचना के उतर चुका था। रूपा के बदन में तरावट आने लगी। कब से नये लण्ड का इन्तज़ार कर रही थी और नये लण्ड ने उसकी चूत को स्वीकार करते हुये खेल-खेल में प्रवेश कर लिया था।

राजेश रूपा के नीचे दबा हुआ था और रूपा उसके ऊपर लण्ड पर बैठ गई थी। रूपा उसके लण्ड पर अपनी चूत भींचे जा रही थी और राजेश के चूतड़ ऊपर की ओर जोर लगा कर पूरा लण्ड अन्दर तक बैठाने की कोशिश में थे।

रूपा राजेश पर पिघले जा रही थी। उसकी चूत फ़डफ़डा रही थी। राजेश ने रूपा के सुडौल स्तन हिलते हुये देखे और उसके हाथ उन्हें थाम कर ऊपर नीचे करके उसे मसलने लगा। रूपा उस पर झुक गई और चूत को आगे पीछे करके राजेश को चोदने लगी। राजेश का शरीर वासना में जलने लगा। वो अपने चूतड़ ऊपर उछाल कर रूपा को चोदने में सहायता करने लगा।

अब रूपा राजेश के शरीर के ऊपर लेट सी गई और आहें भरते हुये चूत को आगे-पीछे करके लण्ड का आनन्द लेने लगी। राजेश ने अतिउत्तेजना में रूपा को कमर से जकड़ लिया और धीरे से उसे अपने नीचे दबोच लिया।

राजेश अब ऊपर था और लण्ड जो कि इस उल्टा पल्टी में बाहर आ गया था, फिर से चूत में सरक गया। अब रूपा की भरपूर चुदने की बारी थी। राजेश के धक्के और झटके चूत पर चालू हो गये थे। और नीचे दबी रूपा आह्… उह्ह… हाय रे… जैसी सीत्कारें निकाल रही थी।

राजेश अपने लण्ड को अपनी तसल्ली के लिये दबा के धक्के मार रहा था। नीचे दबी चुदैल रूपा को ये धक्के बडे प्यारे लग रहे थे। उसके हर जोरदार धक्के पर रूपा के मुँह से आह निकल जाती थी। तभी रूपा को लगा कि उसकी चूत जवाब देने वाली है, उसने अपनी प्यारी चूत को पूरी तरह से झड़ने के लिये तैयार कर ली और आंखें बंद करके अपनी चूत को ढीली छोड़ दी ताकि अच्छी प्रकार से पानी निकल जाये। उसकी चूत अब रस छोड़ने वाली थी और बार बार अन्दर लहरें उठ रही थी। तभी रूपा ने अपनी चूत ऊपर की ओर दबाई और अपना रस छोड़ने लगी।

उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी। उसने राजेश को अपनी बाहों में दबा लिया और लण्ड को चूत में कस लिया। तभी राजेश का वीर्य भी छलक पड़ा। उसकी पिचकारी चूत में समाने लगी और फिर चूत के बाहर रिसने लगा। दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में समाये हुये यूं ही अपना रस निकालने में लगे रहे। उनकी आंखें आनन्द के मारे बंद थी। काफ़ी देर दोनों यों ही दुनिया से बेखबर पड़े रहे।

फ़िर रूपा कुछ अलसाई सी पता नहीं क्या बोली और अपना मोबाईल पर रीना को मिस कॉल कर दिया। राजेश भी उठा और जल्दी से कपड़े पहन कर रूपा को चूमा और घर से बाहर निकल गया। कुछ ही देर में रीना मौसा जी के साथ घर आ गई।

“अरे, वो राजेश नहीँ आया…?” मौसा ने पूछा।

रूपा मुस्करा उठी,”आप जानें … आपका दोस्त है!”

रूपा रीना के कमरे में आ गई थी। दोनों सहेलियाँ कुछ गुपचुप बाते कर रही थी।

“मै सोने जा रहा हूँ… हम दोनों ने खाना बाहर खा लिया है… रूपा तुम भी खा लेना !”

मौसा जी अपने कमरे में जाकर बत्ती बंद करके लेट गये। रूपा भी मौसा जी के पीछे चली गई। रीना ने भी अपने रात को सोने वाले कपड़े पहन लिये या यूँ कहे कि बस एक सामने से खुला हुआ गाऊन डाल लिया और बिस्तर पर लेट गई।

कहानी का अगला भाग: कलयुग की लैला-3 Antarvasna Sex Stories

मैं एक इन्टरमीडिएट कालेज में अध्यापिका हूं। ये मात्र 12 वीं कक्षा तक का कालेज है। शाम को अक्सर मैं अपनी सहेली के साथ भोपाल ताल के किनारे घूमने निकल जाती हूं।

ऐसे ही एक दिन मैं अपनी सहेली के साथ ताल के किनारे घूम रही रही थी। 12वीं कक्षा की एक छात्रा और एक छात्र मिल गये। ये दोनों मेरी कक्षा में नहीं थे। दूसरे सेक्शन में थे।

मैंने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपने नाम सोनल और किशोर बताए।

सोनल ने मुझे कहा कि उसे बायलोजी विषय में कुछ पूछना है।

मैंने उसे कहा कि कल घर आ जाना, मैं बता दूंगी। किशोर और सोनल दूसरे दिन घर पर आ गये।

मुझे लगा कि इनकी प्रोब्लम कुछ और ही है। मैंने पूछा- ‘सोनल ये किशोर तुम्हारा दोस्त है क्या…?’

‘हाँ मैम… इसे भी आपसे कुछ पूछना था…’ वो कुछ शरमाती सी बोली।

मैं एकदम भांप गई कि मामला प्यार का है।

‘या कुछ और बात है… कह दो…मैं भी तुम्हारी उम्र से गुजरी हूं’ मैंने अंधेरे में तीर छोड़ा। पर सही लगा…

‘हाँ… मैम वो… हम तो आपके पास इसलिए आये थे कि हम दोनों ज्यादा से ज्यादा समय साथ रहे!… प्लीज मैम नाराज मत होना…’ उसके चेहरे से लगा कि वो मुझसे विनती कर रही हैं।

‘पर ये कोई मिलने की जगह है?’
‘मैम वो… निशा मैम ने बताया था कि आप हमें मदद कर देगीं…’

ओह तो ये बात है… निशा भी अपने बोय फ़्रेंड के साथ एक बार चुदवाने आई थी तो मैंने भी उसी से चुदवा लिया था। मेरे मन में भी एक हूक सी उठी… ये दोनों अपनी जिस्म की प्यास बुझाने आये हैं… क्यों ना मैं भी इस बात का फ़ायदा उठाऊँ।

‘तो तुम मिलना चाहते हो… मेरा क्या फ़ायदा होगा इसमें…’ मैंने तिरछी निगाहों से उसे परखा।

‘मैम मुझे मालूम है… निशा जी ने मुझे सब बता दिया है… इसीलिये तो मैंने आपसे सब कह दिया… आपकी सारी शर्तें इसे भी और मुझे भी मन्जूर है…’ उसने अपना सर झुकाये सारी बातें मान ली।

‘तो ध्यान रहे…शर्तें… कल दिन को स्कूल के बाद सीधे ही यहाँ आ जाना…’ मैंने उसे मुस्कुराते हुए कहा।

सोनल खुशी से उछल पड़ी… मैंने सोनल को चूम लिया…

मैंने कहा-‘किशोर तुम भी आओ जरा…’

मैंने किशोर के होंठ पर एक गहरा चुम्मा ले लिया… मेरे बदन में तरावट आने लगी… किशोर ने भी जोश में मुझे किस कर लिया।

दूसरे दिन किशोर और सोनल स्कूल में मेरे चक्कर लगाते रहे… मैं उन्हें मीठी सी मुस्कान दे कर उनका हौंसला बढ़ाती रही… सच तो ये था कि मेरी चूत में भी कुलबुलाहट मचने लग गई थी… सोच सोच कर ही रोमांचित हो रही थी कि 19 साल के जवान लड़के के लन्ड से चुदवाने को मिलेगा।

मैंने स्कूल से आते ही एयर कंडीशन चला दिया। लंच करके मैं आराम करने लगी। मैं जाने कब सो गई।

अचानक मुझे लगा सोनल ने मेरे हाथ पकड़ लिए और किशोर ने मुझे उल्टी लेटा कर मेरी चूतड़ की फ़ांकों को खोल दिया और अपना लन्ड मेरी गान्ड में घुसाने लगा। पर उसका लन्ड छेद में घुस ही नहीं रहा था। वो बहुत जोर लगा रहा था… मेरी गान्ड में इस जोर लगाने से गुदगुदी लगने लगी थी। सोनल चीख उठी… मार दे गान्ड मैम की…छोड़ना मत… उसकी चीख से मैं अचानक उठ बैठी… ओह… मैं सपना देखने लगी थी।

वास्तव में दरवाजे पर बेल बज रही थी…दिन को करीब 3 बजे थे…वो दोनों आ गये थे। मैंने अपना मुख धोया और हम तीनों कमरे में ही बैठ कर थोड़ी देर तक बातें करते रहे। उन दोनों की बैचेनी देखते ही बनती थी…

‘मैम… मुझे किशोर से कुछ बातें करनी है…’

‘हाँ हाँ… जरूर करो… पर बातें कम करना… और…’ मैंने मजाक किया।

और सोनल को बेड रूम में ले गई और सब बता दिया। किशोर को भी मैंने अन्दर आने का इशारा किया। सोनल तो बेड रूम देखते ही खुश हो गई… और बिस्तर पर लोट गई।

इधर किशोर को मैंने बुला कर उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंठो को चूमना चालू कर दिया। उसने भी मेरी कमर मे अपना हाथ कस दिया। उसके लौडे की चुभन मेरे चूत के आस पास होने लगी। मैंने धीरे से उसका लन्ड पकड़ लिया। उसके हाथ मेरे बोबे पर जम गये और उन्हें दबाने लगे। सोनल जल्दी से आई और किशोर को खींचने लगी…

‘किशोर… आओ ना…’ किशोर खिंचता हुआ चला गया…पर मेरे बदन की गर्मी का अह्सास किशोर को मिल गया था। उसने किशोर को अपने से लिपटा लिया।

‘अरे… क्या ऐसे ही करोगे… कपड़े तो उतार दो…चुदाई का मजा नहीं लोगे क्या…’ मैंने उन्हे कहा.

‘नहीं…नहीं… चुदाई नहीं… बस ऐसे ही ऊपर से…’ सोनल ने कहा तो मुझे आश्चर्य हुआ।

‘तब क्या मजा आयेगा… क्यों किशोर…’

किशोर ने मेरा साथ दिया और हम दोनों ने मिल कर सोनल को नंगी कर दिया… किशोर ने भी अपने कपड़े उतार दिये। उन्हें देख कर मैंने भी अपना गाऊन उतार दिया और नंगी हो गई। किशोर का जवान लन्ड देख कर मेरी चूत में पानी उतरने लगा।

सोनल भी जवान लड़की थी… उसके जवान जिस्म को देख कर कोई भी पिघल सकता था। किशोर सोनल से लिपट गया। और उसे बिस्तर पर पटक दिया। उसके ऊपर चढ गया और बेतहाशा चूमने लगा। दोनों का जोश देखते ही बनता था। एक दूसरे मे समाने की पूरी कोशिश कर रहे थे। पर हाँ सोनल अपनी चूत से उसके लन्ड को दूर रख रही थी। किशोर जैसे ही अपना लन्ड उसकी चूत पर दबाता वो चूत को झटका दे कर हटा देती थी।

ये सब देख कर मेरी वासना बढती जा रही थी। मैंने अपनी चूत में दो अंगुलियाँ डाल ली और अपनी चूत चोदने लगी। मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी। अब मैंने सोचा कि पहले इन्हें निपटा दूं। मैं उठी और दोनों को सहलाने लगी। फिर मैंने सोनल के चूत का दाना धीरे धीरे मलना शुरु किया। सोनल को और मस्ती चढने लगी। मैं घिसती रही…मलती रही… इतने में सोनल झड़ने लगी… मैंने हाथ हटा लिया… उसकी चूत में से पानी आ रहा था… इसी दौरान किशोर का लन्ड मैंने सोनल की चूत पर रख दिया। किशोर तो जोश में था ही… उसका लन्ड सोनल की चूत में उतर गया…

सोनल तड़प उठी…’अरे ये क्या… हटो…हटो… उसने जल्दी से उसका उफ़नता हुआ लन्ड चूत से निकाल दिया…

किशोर भी तडप उठा… उसे तो अब चूत चाहिये थी… सोनल अलग हट कर उठ गई।

‘देखो…मैम…मैंने मना किया था…तब भी इसने क्या कर डाला…’

‘कोई बात नहीं सोनल…ला मैं इसे सम्भालती हूं…’ मैंने अपनी बारी सम्हाली और किशोर को दबोच लिया और उसे अपने नीचे दबा लिया… उसके खड़े लन्ड पर मैंने अपनी चूत रख कर दबा दी… आऽऽऽऽऽअह्ह्ह्ह्ह…लन्ड मेरी चिकनी चूत मे धंसता चला गया… किशोर ने भी अपने चूतड़ ऊपर की ओर उठा दिए… और उसका लन्ड पहले झटके में ही जड़ तक बैठ गया। मेरे मुख से आनन्द के मारे सिसकारी निकल पड़ी…

ना जाने कब से मैं इस चुदाई का इन्तजार कर रही थी। मैंने अपने चूतड़ थोड़े से ऊपर उठाये और दूसरा झटका दिया…फ़च की अवाज के साथ लन्ड गहराई तक चोद रहा था। किशोर आनन्द के मारे नीचे से झटके मार रहा था। दोनों ही हर झटके पर आहें भरते थे… सोनल भी हमे देख कर उत्तेजित होने लगी थी… शायद उसने ऐसी चुदाई पहली बार देखी थी। उसने अपनी एक अंगुली मेरी गान्ड में फ़ंसा दी और गोल गोल घुमाने लगी। मैं तो इस डबल चुदाई से मस्त होने लगी। दोनों तरफ़ से मजा आने लगा था।

‘सोनल…मजा आ रहा है…क्या मस्त लन्ड है…’

‘मैम आपकी चूत बड़ी प्यारी है… देखो ना लन्ड सटासट अन्दर बाहर जा रहा है…’

‘चोदे जा मेरे राजा… हाय… मैं तो मर जाऊँगी राम…’

किशोर ने मेरी चूंचियाँ मसल मसल कर बेहाल कर दी थी… अब मैं अति उत्तेजना का शिकार होने लगी… मुझे लगा कि अब मैं झड़ जाऊँगी। मेरे धक्के अब जोर से और अन्दर तक दबा कर जा रहे थे। और अचानक मेरा बदन लहरा उठा… और मेरा रस निकलने लगा। मैंने उसके लन्ड पर अपनी चूत गड़ा दी…और उस पर पूरी झुक गई।

‘सोनल प्लीज… मेरी गान्ड से अंगुली निकाल दे…’ सोनल ने अंगुली बाहर निकाल दी। मैंने किशोर से अपने बोबे जोर लगा कर छुड़ा लिये। पर मुझे वो छोड़ने को तैयार नहीं था…

‘किशोर… देख सोनल तेरा इन्तजार कर रही है… अब छोड़ दे मुझे…’ सोनल के नाम ने उस पर जादू सा असर किया।

उसने सोनल का नाम सुनते ही मुझे छोड़ दिया… और प्यार से वो दोनों एक बार फिर से लिपट गये। पर सोनल ये भूल गई थी कि किशोर की चुदाई पूरी नहीं हुई थी। किशोर ने प्यार से सोनल को चिपका लिया और पलटी मार कर अपने नीचे दबोच लिया… चिड़िया फ़ड़फ़ड़ाती रह गई…

सोनल जब तक कुछ समझती तब तक मैंने किशोर का लन्ड सोनल की चूत के छेद पर रख दिया था। किशोर ने धक्का मारा तो सीधा गहराईयों में उतरता चला गया। दूसरे धक्के में लन्ड जड़ तक बैठ गया था। सोनल के मुख से चीख निकलती उससे पहले मैंने उसके मुख पर तौलिया रख दिया।

उसकी झिल्ली फ़ट चुकी थी। सोनल को मालूम हो गया था कि उसका कौमार्य जाता रहा था। मैंने अब उसके मुँह से तौलिया हटा लिया था। उसके आंखों में आंसू आ गये थे। मैंने तौलिया अब सोनल की चूत के नीचे रख दिया था। खून बाहर आने लगा था। मैं उसे पोंछती जा रही थी।

किशोर इन सभी बातों से बेखबर तेजी से चुदाई कर रहा था… किशोर अब हाँफ़ने भी लगा था… सोनल भी अब सामान्य होने लगी थी। उसे भी अब मजा आने लगा था। मैंने देखा कि अब सोनल के चूतड़ भी धीरे धीरे उछलने लगे थे और चुदाई में साथ दे रहे थे…

मैंने सोनल कि चूंचियाँ मसलनी चालू कर दी… उसके निपल को भी घुमा घुमा कर हल्के से खींच रही थी। सोनल की सिसकरियाँ निकलने लगी थी। उसकी आहें तेज हो गई थी। वो बार बार किशोर को अपनी ओर खींच रही थी। इतने में सोनल चरमसीमा पर पहुंचने लगी। उसके मुख से अस्पष्ट शब्द निकलने लगे थे।’मांऽऽऽऽऽऽरी… मर जाऊँगी… हाय चोद दे… राम रे…’

मैं उसकी चूंचियों को और जोर से मसलने लगी… सोनल के चेहरे का रंग बदलने लगा… अपने होंठ बार बार काट रही थी… अचानक उसका शरीर ने एक ऐठन ली और आहाऽऽऽऽऽ करते हुए वो झड़ने लगी…मैंने उसकी चूंचियाँ छोड़ दी।

किशोर भी अब गया! तब गया! हो रहा था… अचानक उसने भी अपने लन्ड का जोर चूत पर लगा कर पिचकारी छोड़ दी… दोनों ही साथ साथ झड़ रहे थे… किशोर और सोनल दोनों ने आपस मे एक दूसरे को जोरों से जकड़ लिया था। कुछ ही समय बाद दोनों ही निढाल पड़े थे। और हाँफ़ रहे थे। सोनल की चूत में से अब धीरे धीरे वीर्य निकलने लगा था… मैंने तौलिया उसकी चूत के नीचे घुसा दिया… किशोर बिस्तर से नीचे उतर आया और अपने कपड़े पहनने लगा। सोनल थोड़ी गम्भीर लग रही थी।

‘दीदी मेरी तो झिल्ली फ़ट गई ना… अब क्या होगा…’

‘क्यो घबराती है…झिल्ली फ़टने के बहुत से कारण होते हैं…’ मैंने उसे बताया… खेलने से… साईकल चलाने से… किसी एक्सीडेन्ट से झिल्ली फ़ट सकती है…इसलिये डरने की कोई बात नहीं है।

‘और फ़िर तुम्हारी उमर अब चुदाने की हो गई है… तो अब इसे फ़ट जाने दो और जिंदगी का मजा लो…’

‘मैम हम क्या आपके पास रोज़ ट्यूशन पढने आ सकते हैं…?’ सोनल ने घुमा कर प्रश्न पूछा।

‘हा… जरूर अगर पढ़ना हो तो फ़ीस लगेगी एक की 500 रू और अगर आज जैसी पढाई करनी हो तो 250 रू…’

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