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Antarvasna

मैं कॉलेज में आ चुका था। मेरे Antarvasna एक पुराना दोस्त मेरे साथ में मेरे घर में रहता था। हम दोनो पक्के दोस्त थे और एक दूसरे को बहुत चाहते थे। सेक्स के मामले में मैं बहुत झिझकता था। इतनी तो मेरी बड़ी दीदी भी नही शर्माती थी। मैं जब सुबह जागता था तो मेरे लण्ड में पेशाब भरे होने के कारण वो खड़ा हो जाता था। दीदी बस यही देखने के लिये सुबह मेरे कमरे में आ जाती थी और मेरे खड़े लौड़े को देख कर आहें भरती थी। अपनी चूत भी दबा लेती थी।

मेरी नजर जब उस पर पड़ती तो मैं झेंप जाता था, पर दीदी बेशर्मों की तरह मुस्करा कर चली जाती थी। मुझे ये सब देख कर सनसनी आने लगती थी। दीदी के चूतड़ मस्त गोल गोल उभरे हुए थे, मेरे भी वैसे ही थे … पर लड़की होने के कारण उसके चूतड़ ज्यादा सेक्सी लगते थे। उसकी चूंचिया भी भरी भरी गोल गोल मस्त उठान और उभार वाली थी। सीधी तनी हुई, किसी को भी दबाने के लिये निमन्त्रण देती हुई।

मेरा दोस्त ज्यादातर मेरे बिस्तर पर ही सोता था। कितनी बार तो रात को वो मेरे चेहरे को चूम भी लेता था। मुझे लगता था वो मुझे बहुत प्यार करता है। कभी कभी मैं भी उसे चूम लेता था।

इन दिनों उसमें कुछ बदलाव आ रहा था। हम जब कॉलेज साथ साथ जाते तो वो कभी कभी मेरी गाण्ड सहला देता था। मुझे बड़ा अच्छा लगता था। एक बार तो छत पर उसने मेरे पीछे आ कर अपना लण्ड मेरी गाण्ड में लगा दिया था। मुझे एक झुरझुरी सी आई थी। उसके लण्ड का कड़ापन मेरी गाण्ड को करण्ट मार रहा था। मैंने अपनी गाण्ड हटा ली। बात आई गई हो गई।

रात को सोते समय उसने धीरे से मेरा लण्ड पकड़ लिया, मुझे अच्छा लगा। पर शरम के मारे मैंने उसका हाथ हटा दिया।

एक बार रात को सोते समय अनजाने में मेरा हाथ जाने कैसे उसके लण्ड पर चला गया। रवि ने मेरा हाथ अपने लण्ड पर दबा दिया। शायद उसने ही अपने लण्ड पर मेरा हाथ रख दिया होगा। कुछ देर मैं सोने का बहाना करता रहा, उसका हाथ अब मेरे लण्ड पर आ गया … मुझे बहुत मजा आया। मैं शान्त ही रहा। उसने अपना हाथ मेरे पजामे में डाल कर मेरा नंगा लण्ड पकड़ लिया। वो मेरा लण्ड सहलाने लगा।

मैंने मन ही मन आह भरी और जब सहा नहीं गया तो दूसरी तरफ़ करवट ले ली। उसने लण्ड छोड़ दिया। अब मेरा लण्ड तड़प रहा था कुछ करने को … पर क्या करने को … शायद गाण्ड मारने को या मराने को … वो पीछे से मेरे से चिपक गया और अपना लण्ड मेरे चूतड़ो में घुसाने की कोशिश करने लगा। चूतड़ो की दरार के बीच उसका लण्ड फ़ंसा हुआ अपनी साईज़ का अहसास दिला रहा था।

मैंने अचानक जागने का नाटक किया,”अरे यार सो जा ना … “

“तुझे प्यार करने को मन कर रहा है … ” उसने अपनी झेंप मिटाने की कोशिश की।

“ओह हो … ये ले बस … ” मैंने करवट बदल कर उसे पकड़ कर चूम लिया पर उसने मुझे जबरदस्ती होंठ पर चिपका लिया और होंठ चूसने लगा।

मैंने अलग होते हुए कहा,”ऐसे तो लड़किया करती हैं … साले … बस हो गया अब सो जा … “

“अभी आया … ” कह कर वो बाथ रूम गया, शायद अन्दर वो मुठ मार रहा था। कुछ देर में वो आ गया और अब वो शांति से सो रहा था। मुझे भी मुठ मारने की तेज इच्छा होने लगी थी, पर कुछ ही देर मेरा वीर्य बिस्तर पर ही निकल गया। मैंने अपना रूमाल पजामे में घुसा लिया और वीर्य पोन्छ दिया।

हमने सिनेमा देखने का कार्यक्रम बनाया। हॉल लगभग खाली था। बालकनी में बस हम दोनों ही थे। पिक्चर शुरू होते ही रवि ने मेरा हाथ पकड़ लिया … और फिर धीरे से हाथ छोड़ कर उसने मेरी जांघ पर रख दिया। मुझे पता था कि मुझे ये सिनेमा लाया ही इसीलिये है।

आज मैंने सोचा कि ये अधिक परेशान करेगा तो मैं उठ कर चला जाऊंगा।

पर उसके हाथों में जादू था। मेरी जांघ वो सहलाता रहा। मुझमें करण्ट दौड़ने लगा। धीरे से उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगने लगा पर आनन्द भी आया। जैसे ही उसने लण्ड दबाया, मैंने उसका हाथ हटा दिया। उसने मुझे देखा फिर कुछ ही देर के बाद उसने हाथ फिर से मेरी जांघ पर रख दिया। कुछ ही देर के बाद उसने फिर कोशिश की और मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और हल्के से सहलाने लगा।

मेरे मन में एक हूक सी उठी … हाय … कितना मजा आ रहा है … । पर दिल नहीं माना … उसका हाथ मैंने फिर से हटा दिया। उसने भी हिम्मत नही हारी … और कुछ ही देर में उसने फिर मेरे लण्ड पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। पर यहाँ मैंने हिम्मत हार दी और उसे करने दिया।

वो मेरा लण्ड दबाने लगा … और अपनी अंगुलियां से दोनो ओर से लण्ड को दबा कर सहलाने लगा। मुझे कोई विरोध ना करते देख कर वो खुश हो गया। और मेरी पेन्ट की ज़िप खोल दी … अब उसका हाथ मेरे अंडरवीयर को ऊंचा करके नंगे लण्ड तक पहुंच गया था। उसने अपने हाथ में उसे पूरा भर लिया। मुझे आनन्द की एक तरावट सी आ गई। मुझे लगने लगा कि काश मेरा मुठ मार दे और मेरा वीर्य निकाल दे।

“कैसा लगा … बता ना !” उसने मुझसे फ़ुसफ़ुसा कर पूछा।

“बस रवि … अब हाथ हटा ले यार … “

“अरे नहीं … देख बहुत मजा आता है … ” कह कर उसने लण्ड पेन्ट से बाहर निकाल लिया। मेरा मन खुशी से भर गया। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड की तरफ़ बढा दिया और बाहर से उसे पकड़ लिया।

“तुझे भी मजा आया क्या … ” मैंने उससे पूछा और उसके पेन्ट के अन्दर हाथ डाल दिया उसने अन्दर चड्डी नही पहन रखी थी, सीधे लण्ड से हाथ टकरा गया। उसे मसलते हुए मैंने बाहर निकाल लिया। अब वह मेरे लण्ड को हौले हौले घिस रहा था, और मैं उसके लण्ड को घिस रहा था। तभी इन्टरवेल हो गया।

हॉल की लाईटें जल उठी। दोनो के लण्ड बाहर मस्त हो कर लहरा रहे थे। मैंने शरमा कर लण्ड एक दम पेन्ट के अन्दर डाल लिया।

“चल यार … अब चलें … कही आराम से मजे करते हैं … “

“ओके … चल … ।” बाहर आकर मैंने स्टैण्ड से अपनी मोटर साईकल निकाली और नेहरू गार्डन चले आये। रात हो चुकी थी, भीड़ भी कम थी। हम दोनों एक एकान्त की ओर बढ़ गये। एक घने झाड़ के नीचे बैठ गये।

“आ जा अब मस्ती करते हैं !” मुझे तो वही मस्ती आ रही थी, मैंने तुरन्त अपना लण्ड निकाल दिया। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर अब फ़्री स्टाईल में मुठ मारना चालू कर दिया। मैं झूम उठा …

“मजा आ रहा है ना … देख घर पर तबीयत से चुदाना … “

” चुदाना ? मैं क्या लड़की हूँ … साले … आह्ह्ह भोसड़ी के … मस्त मजा आ रहा है … तू भी अपना लौड़ा निकाल ना … ला मसल दूँ … ”

“निकाल तो रखा है यार … तू तो मस्ती में खोया है … ” मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और मसलने लगा। उसने मुझे लिपटा लिया और मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी प्रति-उत्तर में उसे चूमने लगा। हम दोनो मदहोशी में भूल गये कि हम गार्डन में है।

लण्ड मसलने से कुछ ही देर में मेरा वीर्य छुट गया, कुछ ही देर में वो भी झड़ गया। हमें झड़ने के बाद होश आया। देखा तो पूरा गार्डन सूना था … हम उठ खड़े हुये, लण्ड को पेण्ट के भीतर डाला और उठ खड़े हुए।

“थेन्क्स यार … बड़ा मजा आया … ” और हम चल दिये।

घर आ कर मुझे बड़ी घिन आने लगी कि हाय मैं ये क्या कर रहा था? मैंने अलमारी से दारू की बोतल निकाली और दो पेग बना कर पी गया। खाना खा कर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे नशे में फिर से वासना की खुमारी चढ़ने लगी। इतने में दीदी आ गई।

“रवि, आज लगता है कोई खास बात है … ।”

“नहीं दीदी … ऐसा तो कुछ भी नहीं है … “

“अरे बता दे ना … आज कितनी मस्ती मारी है हमने … मजा आ गया !” मैंने नशे में कहा।

“भैया आप ही बता दो ना … !” दीदी ने मुझसे पूछा।

“अरे दीदी, क्या बताऊँ … इस साले ने मेरा लण्ड का मुठ मार कर माल ही निकाल दिया” मैंने हिचकी लेते हुये कहा।

‘दीदी ये तो बहक रहा है … “रवि ने शर्माते हुए कहा।

“अच्छा तो ये बात है … अकेले अकेले मजे कर रहे हो … ” दीदी मुस्कराई।

और मुड़ कर चली गई। मैंने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया … रवि ने भी मौका देखा और लाईट बंद कर दी और वो भी नंगा हो कर लेट गया। कुछ ही देर बाद हम दोनो एक दूसरे का लण्ड मसल रहे थे … मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था। मुझे लग रहा था कि कुछ करना चहिये … पर क्या ?

“गाण्ड मरवाओगे क्या … “

“क्या … क्या मरवाओगे … “

“मेरा मन, तेरी गाण्ड में लण्ड घुसेड़ने को कर रहा है … देख मजा आयेगा राजू … “

“पर यार छेद तो छोटा सा है … ” मुझे पता था कि लण्ड गाण्ड में घुसेड़ कर उसे चोदी जाती है … पर मैं मसूम ही बना रहा।

“लौड़ा घुस जायेगा … देख उल्टा लेट जा … ये तकिया भी नीचे लगा ले … “

मैं नीचे तकिया लगा कर लेट गया, मेरी गाण्ड और ऊंची हो गई। उसने मेरी गाण्ड ने थूक लगाया और वो मेरी पीठ पर चिपक गया और मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ने लगा। उसके लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद में ठोकर मारी। मुझे गुदगुदी सी हुई। मैंने अपनी गाण्ड खोल दी उसने जोर लगा कर लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में घुसेड़ दिया और आगे हाथ बढा कर मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसने जोर मार कर लण्ड अन्दर घुसा मारा …

मेरी गाण्ड नरम थी, जवान थी … पूरा लण्ड निगल गई। अब उसने धक्के मारने शुरू कर दिये … मुझे थोड़ी सी जलन हुई, पर मजा अधिक आया। पहली बार लण्ड से गाण्ड मरा रहा था। वो मुझे चूमने चाटने लगा … मेरा लण्ड तकिये से दबा हुआ सिसक रहा था … और जोर मार रहा था।

रवि तो मस्ती में चूर था … पूरे जोश के साथ मेरी गाण्ड चोद रहा था और कुछ ही देर में वीर्य निकाल दिया। रवि निढाल सा एक तरफ़ लुढ़क गया।

“राजू, तेरी बहन को चोद डाले क्या?” रवि ने गहरी सांस भरते हुए कहा।

“साले मरवायेगा क्या … ?”

“नहीं यार … बड़ी सेक्सी है … चल यार कोशिश करते हैं … अपना लण्ड का माल उसी से निकाल लेना !”

“अच्छा, चल कोशिश करते हैं … देख बात बिगड़े तो सम्हाल लेना !”

रवि ने हामी भर दी। मेरी दीदी की नजर तो मुझ पर थी ही … मुझे लगता था कि काम हो ही जायेगा … । हम दोनों बिस्तर से उठे और तोलिया लपेट लिया और दबे पांव दीदी के कमरे में सामने चले आये। कमरे में बाहर की लाईट का खासा उजाला था … दीदी दोनों पांव चौड़े करके और स्कर्ट ऊंची करके लेटी हुई थी। मैं दीदी के बिस्तर पर उसके पास बैठ गया।

दीदी ने धीरे से आंखे खोली,”राजू … क्या हुआ … ये सिर्फ़ तोलिया लपेटे क्यूँ घूम रहे हो … ?”

मैं थोड़ा नर्वस हो गया। पर रवि बोल उठा,”दीदी … आप लेटी रहो … राजू … चल कर ना … “

मैंने दीदी की चूंचियों की तरफ़ हाथ बढ़ाया। दीदी सब समझ चुकी थी। मुस्करा उठी …

मेरे हाथ उसके बोबे तक आ चुके थे …

“राजू … घबरा मत … पकड़ ले और दबा दे … !”

मेरी हिम्मत खुल गई,” दीदी … थेन्क्स … ” और मैंने धीरे से दीदी के बोबे पकड़ कर दबा दिये।

“अरे, शरमा मत … मसल दे … मजा ले ले दीदी का … और मजा दे दे दीदी को … ” दीदी सिसक उठी, जाने कब से बेचारी चुदासी थी …

उसने मेरा तौलिया उतार दिया और रवि ने मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया …

“बस बस … चढ़े ही जा रहे हो … ” वो उठ कर बैठ गई … और भाग कर अपना दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। रवि ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और उसका एक चूतड़ दबा लिया।

“दीदी, आपकी बाटिया यानी चूतड़ सोलिड हैं … बॉल भी बड़े कसे हुए हैं …! ”

“तू भी तो रवि सोलिड है … भैया की अभी गाण्ड मारी है ना … उसकी बाटिया मेरी जैसी ही तो है … !”

“दीदी … आपने सब देखा है क्या … ” मैं चौंक गया। दीदी मुस्कुरा उठी।

“राजू जवानी लगी है अभी … इसमें सब चलता है … देख मैं भी अभी चूत मरवाऊंगी और इसकी प्यास बुझाउंगी, रवि से गाण्ड मरवाउंगी … साला हरामी मस्त गाण्ड चोदता है !” और खिलखिला कर हंस पड़ी।

रवि से हट कर दीदी मेरे पास आई,”भैया … पहले आपका हक बनता है … देखो प्यार से चोदना … तेरी मस्त चूतड़ो की तो मैं भी दीवानी हूँ !”

“और मैं भी दीदी … तेरी चूतड़ो की गहराई देख कर तो मेरा लण्ड कब से चोदने को बेताब हो रहा था।”

“हाय रे भैया, तो देरी किस बात की है … चोद दे ना … ” और वो मेरे से लिपट पड़ी।

मैंने उसे तुरन्त घोड़ी बनाया और और उसे अपने से चिपका लिया। रवि लपक कर आया और नीचे से मेरा कड़क लौड़ा उसकी चूत के द्वार पर रख दिया।

“मार राजू … चोद दे दीदी को … पर देख प्यार से … दीदी अपनी ही है … ” रवि के स्वर में प्यार झलक रहा था।

मैंने धीरे से लण्ड दीदी की चूत में ठेल दिया।

लण्ड का प्रवेश होते ही उसके मुख से प्यारी सी सिसकारी निकली और उसने प्यार भरी निगाहों से मुझे देखा,”भैया … रहम मत करना … साले लौड़े को जोर से ठोक दे … बहुत महीनों बाद लौड़ा खा रही हूं !”

“हाय दीदी … ये लो … मुझे भी मत रोकना … मेरा तो रोम रोम सुलग रहा है … पहली बार मुझे भी कोई चूत मिली है … !”

मैंने जोर लगा कर लण्ड चूत की जड़ तक बैठा दिया। रवि ने मेरी गाण्ड सहलानी चालू कर दी। उसका लण्ड भी बेकाबू हो रहा था। मैंने दीदी की चूंचिया दबा कर पकड़ ली और मसलते हुए पूरी ताकत से लौड़ा खींच कर दे मारा।

“आह राजू … ये हुई ना बात … अब ढेर सारे जोर की ठोकरे दे मार … साली चूत को मजा आ जाये … “

मैं जैसे ये सुनते ही पगला गया … जोर जोर से उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर चोदने लगा … पर जवानी तो दीदी पर पूरी तरह से छाई हुई थी … उसकी चूत लपक लपक कर लौड़ा ले रही थी। तभी मुझे लगा रवि भी अपना संयम खो बैठा और उसने मेरी गाण्ड में अपना लण्ड घुसेड़ दिया।

“राजू प्लीज … तेरे गोल गोल चूतड़ मारने को कर रहा है … !” रवि ने कहा।

“अरे रुक जा साले … दीदी की गाण्ड और भी मस्त है … ठहर जरा … दीदी, आप दोनो छेद से मजा लो ना … “

दीदी तो वासना की आग में जली जा रही थी …

“हाय आगे से और पीछे से … दोनो तरफ़ से चोदोगे … माँ मेरी … चल पोजिशन ले … आज तो तुम दोनों मुझे मस्त करके ही छोड़ोगे !”

मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया और दीदी ने ऊपर आ कर मेरा लण्ड चूत में डाल लिया और पूरा घुसेड़ कर जड़ तक बैठा लिया … और दोनों पांव से अपने चूतड़ ऊपर उठा लिये। रवि तुरन्त लपक कर बिस्तर पर चढ़ गया और उसकी खुले हुये चूतड़ो के पट में लण्ड रख दिया। दीदी ने रवि को देखा और मुस्कुरा दी और लण्ड गाण्ड में सरक गया।

“हाय रवि … भारी है … पर हां, कस के गाण्ड मारना … ये जवान लड़की की गाण्ड है … खूब लेती है और भरपूर लेती है !”

रवि तो सुनते ही जोश में आ गया और पहले धीरे धीरे और फिर जो जोर पकड़ा तो दीदी को भी मजा आ गया। अपनी गाण्ड उभार कर चुदाने लगी।

“वाकई, राजू … दीदी की गाण्ड तो मस्त है … जबरदस्त चोदने लायक है …! ” मैं नीचे उसके बोबे मसल मसल कर लण्ड उछाल उछाल कर दीदी को चोद रहा था। दीदी दोनों तरफ़ से चुद कर मस्त हो चली थी।

अब मुझे लगा कि मेरी नसें खिंचने लगी हैं … सारा कुछ लण्ड के रास्ते निकलने वाला है … मैं सिसक उठा,”दीदी … प्यारी दीदी … मेरा तो निकला … हाय … “

दीदी मुझसे चिपक गई … “राजू … निकाल दे … मस्त हो जा … रवि है ना, वो चोद देगा … तू झड़ जा … आराम से … हां”

“दीदी … तेरी तो … हाय … भेन की चूत … मैं गया … अरे रे रे रे … ओह्ह्ह्ह्ह्ह हा हाऽऽऽऽऽ।” और मेरा वीर्य छुट पड़ा … दीदी ने मेरा लौड़ा बाहर निकाल दिया … सारा वीर्य उसकी चूत के आस पास निकलता रहा। इतने में रवि ने गाण्ड से लण्ड निकाल कर दीदी की चूत में घुसेड़ दिया।

“आह्ह्ह साला हरामी रवि … मेरी चूत मार रहा है … “

“दीदी, अब आपकी बारी है माल निकालने की … “

“तेरे को कैसे पता … मैया री … अह्ह्ह् … साला … रवि … चोद दे रे … जोर से … मार और मार… भैया “

और मेरे से से जोर से लिपट गई … और दीदी का पानी छुट गया … दीदी मेरे से लिपट कर बल खाती हुई झड़ने लगी।

“दीदी … मेरा लण्ड … गया रे … निकला मेरा भी … ओये रे … चल निकल … हाऽऽऽऽऽऽ … ” और रवि ने लण्ड चूत से बाहर निकाला और दीदी की गाण्ड पर फ़ुहारें छोड़ दी … दीदी मुझे दबाये लेटी रही … रवि उठ कर बैठ गया।

“अब हो गया … सबका माल निकल गया … चलो उठो” रवि ने हांक लगाई।

दीदी ने मेरे ऊपर से सर उठाया और मुझे आंखो से जी भर कर देखा, और मुस्कराने लगी।

मुझे चूमते हुये बोली,”आप बहुत प्यारे हैं भैया … दीदी की प्यास बुझा दी और एक रवि जैसा गाण्ड की प्यास बुझाने वाला दोस्त भी दे दिया … क्यो रवि … है ना !”

“दीदी … आप के तो हम दास है … बस आप तो आदेश दे दे ना … लण्ड हाजिर है … “

दीदी हंस पड़ी और मुझे फिर से चूम लिया। वो मेरे ऊपर से हट गई और रवि को लिपट कर प्यार करने लगी। मैंने बड़ी मुश्किल से दोनों को अलग किया।

“चल साले तौलिया लपेट और निकल यहाँ से … अब तो रोज का प्रोग्राम रहेगा … उतावाला मत हो !”

रवि बड़ी आसक्ति भरी नजरों से दीदी को देखता हुआ कमरे से बाहर आ गया।

हम बिस्तर पर जा कर जैसे लुढ़क पड़े, और नींद की आगोश में चले गये … अचानक मेरी नींद रात को खुल गई … देखा तो रवि पास में नहीं था … मैंने जल्दी से उसे तलाशा … तभी दीदी के कमरे से सिसकियाँ सुनाई दी … अन्दर देखा तो मस्त चुदाई चल रही थी … मैं उनके पास गया”शश्श्श्श्श्श्श … चुप … ।”

“भैया … प्लीज करने दो … रहा नहीं गया ना … “

“चुप … बाहर तक सिसकारी की आवाजें आ रही हैं … चुप से चोदा-चादी करो … शोर नहीं … वरना ऐसा पिटोगे कि सब भूल जाओगे … ” मैंने दरवाजा बाहर से बंद कर किया … अब वो दोनों बिना आहें भरे … चुदाई कर रहे थे … । Antarvasna

मेरा कॉलेज हमें हर साल कॉलेज ट्रिप पर लेकर जाता था.

मैं पहले तीन साल तो कॉलेज ट्रिप पर नहीं गया क्योंकि मैं मेरे पापा के दोस्त की कम्पनी में काम सीख रहा था.

कॉलेज खत्म होते ही एक अच्छी पोस्ट मिलने की लालच में मैं ज्यादा छुट्टियां भी नहीं लेता था.
पर मैंने लास्ट ईयर में कॉलेज ट्रिप जाने की सोची और साथ चलने के लिए सारे कॉलेज फ्रेंड्स को भी मना लिया.

कॉलेज के प्रिंसिपल सर मेरे पड़ोसी हैं और मेरे पापा के अच्छे दोस्त भी हैं.
तो मैंने उन्हें बाली ले जाने का आईडिया दिया और वह मान गए.

अब मैंने प्रिंसिपल सर और कॉलेज मैंनेजर ने बाली जाने का, वहां रहने और घूमने की पूरी तैयारी कर ली.

कॉलेज में अनाउंस भी करवा दिया.

मैं और मेरे सारे दोस्त तो पहले से ही तैयार थे … और भी बहुत से छात्र थे, पर सबके सब फ्रेशर थे.
हमें मिला कर कुछ ही सीनियर थे.

ट्रिप पर जाने से एक दिन पहले मैनेजर सर का एक्सीडेंट हो गया और वे अब हमारे साथ नहीं चल सकते थे.
प्रिंसिपल सर ने ट्रिप कैंसल करने की सोची, पर मेरे बहुत मनाने पर मान गए.

अब इस ट्रिप का नया लीडर और गाइड मैं हो गया था.
मेरे साथ प्रिंसिपल सर ने एक सर और दो मैडम को भी ट्रिप पर भेज दिया, जिनमें से एक का नाम सरोज है.

सरोज मैडम की हाईट 5 फीट है, रंग सांवला और शरीर भी थोड़ा मोटा है उनकी उम्र 50 साल होगी. वे दिखने में भी ठीक ठाक हैं.

हमारी दूसरी मैडम प्रिया कातिल फिगर की मालकिन हैं.
पूरा कॉलेज उन पर मरता है.

मैडम की उम्र 35 साल, रंग गोरा, हाईट 5.5 फीट और फिगर 36-30-38 का.
प्रिया मैडम के फिगर को देख कर ही लगता है कि वे रोज जिम जाती होंगी.

अब हम सब हवाई जहाज में बैठ गए.
मैं विंडो सीट पर बैठा था.
मेरे पास में प्रिया मैडम और उनके पास में सरोज मैडम बैठी थीं.

आज मैंने मौका देख कर प्रिया मैडम के साथ बहुत खुल कर बातचीत की.

वे भी बहुत ही फ्रैंक होकर मुझसे बात कर रही थीं.
हम सभी शाम को अपने रिज़ॉर्ट में पहुंच गए थे.

मैंने लड़कों के रूम्स का अलग और लड़कियों के रूम्स का अलग फ्लोर लिया था.
मेरा रूम लड़कियों के फ्लोर पर था जो मैंने जानबूझ कर प्रिया मैडम के रूम से लगा हुआ लिया था.

अब सब सुबह पूल में पहुंच गए.
पूल भी लेडीज का अलग था.
मैं लेडीज पूल में था.

प्रिया मैडम पूल के किनारे बैठी हुई थीं.
मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके पास स्विमिंग ड्रेस नहीं है.

तो मैंने उनके लिए स्विमिंग कॉस्ट्यूम अरेंज करवा कर दिया.
पर उनकी टी-शर्ट ज्यादा ढीली थी और निक्कर थोड़ी टाइट.

उन्होंने वह ड्रेस ले ली और जैसे ही वह उस ड्रेस को पहन कर आयी तो क्या कातिल लग रही थीं.
वह जैसे ही पूल में उतरीं, उनकी टी-शर्ट उनके बूब्स से चिपक गयी.

आह क्या नजारा था.
चौड़ी गांड, मोटे मोटे बूब्स देख कर तो मेरा लंड ही खड़ा हो गया.

मैडम को स्विमिंग नहीं आती थी तो वे पानी से थोड़ा डर रही थीं.
मैंने उन्हें दिलासा दी कि मैं आपको स्विमिंग सिखा देता हूँ.

थोड़ा समझाने के बाद वह मान गईं.
अब मैं उनको स्विमिंग सिखाने लगा.
मेरा एक हाथ उनके पेट पर और एक हाथ उनके पैरों को पकड़े हुए था.

वे पानी में पैर हिला रही थीं.
बीच बीच में मेरा हाथ उनके बूब्स पर टच हो रहा था पर उन्होंने कुछ नहीं कहा.

अब मैंने धीरे धीरे अपना हाथ पैरों से जांघ पर शिफ्ट कर दिया और बैलेंस बनाने के नाम पर उनकी जांघों को बार बार मसलने लगा.
उन्होंने अब भी कुछ नहीं कहा.

अब मेरा दूसरा हाथ धीरे धीरे उनके बूब्स को टच करने लगा और मेरी उंगलियां उनके बूब्स को मसलने लगीं.

मुझे लगा कि मैडम को भी मजा आ रहा था.

मैं अभी कुछ और कर पाता, पर तभी हमें पूल से निकलना पड़ा क्योंकि हमें घूमने जाना था.
पूरा दिन मैडम मुझे एक हल्की सी शरारत वाली स्माइल दे रही थीं.

शाम को रिज़ॉर्ट में लौट कर सब फिर से पूल में चले गए.
इस बार मैडम ने मुझे खुद से स्विमिंग सिखाने को बोल दिया.

अब मैं वापिस वही हरकतें करने लगा, धीरे धीरे मैं उनके बूब्स दबाने लगा, उनकी जांघों को मसलने लगा और एक दो बार मैंने उनकी गांड भी मसल दी.

कुछ देर बाद मैडम ने मुझे रोक दिया.

सब लोग पूल से निकल कर अपने अपने रूम में चले गए.
मैं बार बार बस मैडम को ही याद कर रहा था.

काफी रात गहरा गई थी.
तभी मेरे रूम की घंटी बजी.
मैंने जैसे ही रूम खोला, सामने प्रिया मैडम थीं.

वे एक टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट में थीं.
मैंने उन्हें अन्दर बुलाया.

हम दोनों इधर उधर की बातें कर रहे थे.
तभी मैडम ने कहा- मेरे कंधे बहुत दुख रहे हैं, क्या तुम थोड़े दबा दोगे?

मैं उनके कंधे दबाने लगा.

इससे मैडम बहुत ही रिलेक्स फील कर रही थीं.

तभी मैडम मुझसे पूछने लगीं कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने मैडम को मना कर दिया.

तो मैडम ने कहा- तुम झूठ बोल रहे हो.
मैंने मैडम से कहा- अभी नहीं है, पर पहले थी.

मैडम ने पूछा- तो उसके साथ सेक्स भी किया होगा?
मैं यह सुन कर दंग रह गया.

मैंने कहा- थोड़ा बहुत किया है.
मैडम ने कहा- ऐसा क्यों?

मैंने मैडम को बताया कि उसे ये सब ज्यादा पसंद नहीं था.
मैडम हंस पड़ीं और बोलीं- सेक्स किसको पसंद नहीं होता!

अब मैंने मौका देखते हुए मैडम से कहा- अगर आपका शरीर ज्यादा थक गया हो, तो मैं आपके पैरों की भी मसाज कर दूँ?
कुछ पल सोचने के बाद वह मान गईं और बोलीं- पर आराम से करना.

मैंने उनके कहने के अंदाज से यही समझा कि ये चुदाई आराम से करने की कह रही हैं.
वे बेड पर उल्टा लेट गईं.

अब मैं उनके पैरों की उंगलियां दबाने लगा.
मैडम को मजा आने लगा.

मैं धीरे धीरे पैर दबाते दबाते उनकी जांघ तक पहुंच गया और जांघों को मसलने लगा.
अब मैडम थोड़ी थोड़ी कामुक आवाज निकालने लगीं.

मैं उनकी जांघ के अन्दरूनी हिस्से को भी मसलने लगा और धीरे धीरे मेरा हाथ उनकी चूत के करीब पहुंच गया, पर मैंने चूत को टच नहीं किया.

मैंने मैडम से कहा- अगर आपको मसाज पसंद आयी हो, तो मैं आपकी पीठ की ऑयल मसाज भी कर सकता हूँ.

मैडम ने थोड़ा झिझक कर हां कह दिया पर कहा कि किसी को बताना मत!

मैंने हामी भरी और बाथरूम से मसाज ऑयल लेकर आ गया.

तब तक वे भी टी-शर्ट उतार कर पीठ के बल बेड पर लेट गईं.
उन्होंने लाल कलर की डिजाइनर ब्रा पहन रखी थी.
उनके बूब्स ब्रा के साइड से बाहर आ रहे थे.

यह देख कर मेरा लंड उफान मारने लगा.

मैंने अपने को काबू किया और उनकी लोवर बैक की मसाज करने लगा.
धीरे धीरे मैं उनकी पूरी की पूरी पीठ को मसलने लगा.

मैडम को भी मजा आने लगा.

वे बहुत ज्यादा कामुक होकर मादक आवाजें निकाल रही थीं.
मुझे ब्रा की स्ट्रेप की वजह से मसाज करने में दिक्कत हो रही थी, तो मैंने मैडम को ब्रा स्ट्रिप को खोलने को कहा.
वे वासना में इतनी ज्यादा डूब चुकी थीं कि उन्होंने ब्रा की स्ट्रिप खोल दी.

अब मुझे उनके गोरे बूब्स साइड से साफ दिख रहे थे.
बिल्कुल दूध से सफेद.

मैं उनकी रगड़ कर मालिश करने लगा और मैडम जोर जोर से आह आह की कामुक आवाजें निकालने लगीं.
मैं हल्के हाथों से उनके बूब्स को साइड से सहलाने लगा.

मैडम और भी ज्यादा प्यार भरी आवाजें निकालने लगीं.

यहां मेरा लंड पैंट में दर्द करने लगा.
मैंने मौका पाकर मैडम से पेट की मालिश के लिए पूछ लिया.

पहले तो मैडम ने मना कर दिया, फिर तुरंत ही हां भी बोल दिया.
पर मुझसे आंखें बंद करके मालिश करने को कहा.

मैं मान गया और मैडम के आदेश को फॉलो करते हुए अपनी आंखें बंद करके उनके पेट पर धीरे से बैठ गया और उनकी मालिश करने लगा.
मेरा हाथ जैसे ही बूब्स के करीब पहुंचा, तो मैडम ने टोक दिया और नीचे नीचे मालिश करने को कहा.

मैंने भी डर के मारे आंखों को बंद रखा और मालिश जारी रखी.
थोड़ी देर में ही मैडम की कामुक आवाज फिर से शुरू हो गयी.

मैंने हिम्मत करके थोड़ी सी आंख खोली तो मैडम आंखें बंद करके मादक आवाजें निकाल रही थीं.
मैं अब आंख खोल कर मालिश करने लगा.

उनके बूब्स ब्रा से ढके हुए थे पर बहुत ही मस्त लग रहे थे.

मैं धीरे धीरे हाथ ऊपर की ओर बढ़ाने लगा तो मैडम अपनी ब्रा धीरे धीरे खिसकाने लगीं.
उन्होंने अपनी ब्रा पूरी तरह से साइड में कर दी.

क्या तो बूब्स थे उनके … मैं तो देखते ही पागल हो गया.

मैं धीरे धीरे उनके बूब्स को नीचे से टच करने लगा.
मैडम ने कुछ नहीं कहा.

मैंने हिम्मत करके उनके बूब्स पर हाथ रख दिया और आंखें बंद करके धीरे धीरे मालिश करने लगा.

मैडम ने अब भी कुछ नहीं कहा.
मैं मैडम के बूब्स मसलने लगा.
मैडम कराहने लगीं.

मैंने मालिश करते हुए अपने होंठ मैडम के होंठों पर रख दिए और उन्हें किस करने लगा.
मैडम भी मेरा पूरा साथ देने लगीं.

हॉट मैम पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थीं और मैं उनके बूब्स दबा रहा था.

कुछ देर बाद मैं उनकी गर्दन को चूमने लगा तो वे मचल उठीं.
पर उनकी आंखें अब भी बंद थीं.

मैं उन्हें चूमते हुए नीचे आया और उनके बूब्स को चूसने लगा.

बूब्स चूसते चूसते मैंने मेरा एक हाथ उनके शॉर्ट के अन्दर डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उनकी चूत मसलने लगा.
उनकी चूत पूरी गीली थी.

मेरी इस हरकत से वह जल बिन मछली की तरह तड़पने लगीं.

अब मैंने उनके शॉर्ट को खोल दिया और पैंटी उतार कर Xxx मैम की चूत को देखने लगा.
बिल्कुल क्लीन शेव, किसी कुंवारी लड़की की चूत की तरह लग रही थी.

मैं उनकी चूत पर टूट पड़ा और उनकी चूत को चाटने लगा.

उन्होंने अपना हाथ मेरे सर पर रख दिया और मेरे सर को चूत की तरफ दबाने लगीं.

साथ ही वे जोर जोर से उह आह आह हो आह की आवाजें निकालने लगीं.
उनकी ये कामुक आवाजें सुन कर मैं और जोर से उनकी चूत चाटने लगा.

कुछ देर बाद उन्होंने छटपटाते हुए सारा पानी निकाल दिया और खुद बेसुध हो कर लेटी रहीं.

मैं उनका सारा पानी पी गया.
क्या स्वाद और क्या खुशबू थी.

अब मैंने फटाफट अपने सारे कपड़े उतारे और उनके बूब्स पर बैठ गया.
मैंने मैडम को आंखें खोलने को कहा. उन्होंने जैसे ही आंखें खोलीं, मेरा बड़ा लंड ठीक उनके मुँह के ऊपर था.

वे मेरा लंड देख कर चौंक गयी और शर्म के मारे आंखें चुराने लगीं.
मैंने एक हाथ से उनकी गर्दन को ऊपर उठाया और लंड उनके मुँह में दे दिया.

वे भी बड़े प्यार से मेरा लंड चूसने लगीं.
लंड चूसने में वे पक्की खिलाड़ी थीं.

कुछ देर लंड चुसवाने के बाद मैंने उन्हें पेट के बल पलंग के किनारे लेटने को कहा और मैं पलंग के किनारे खड़ा हो गया.
मैंने उन्हें फिर से लंड चूसने को कहा, वह मेरा लंड पूरा अन्दर गले तक उतार कर चूसने लगीं.

मेरा लंड उनके मुँह में ठीक से आ भी नहीं रहा था, फिर भी उन्होंने वह पूरा अन्दर तक लेकर चूस लिया.

मैंने उनके बाल पकड़े और उनके मुँह को चोदने लगा.
उनकी सांस फूलने लगी पर वे बराबर अपना मुँह चुदवाने लगीं और मैं अपनी चरम सीमा पर आ गया.

मैंने अपना पूरा सारा वीर्य उनके मुँह में खाली कर दिया और उनके पास में लेट गया.
वे मेरा सारा वीर्य चूस गईं और मेरे पास में लेट कर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगीं, मेरे लंड को सहलाने लगीं.

कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से चार्ज हो गया.
उन्होंने मुझसे कहा- आकाश, चोद दे अब मुझे … मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, कब से बड़े लंड के लिए तरस रही थी.

मैंने भी देर न करते हुए उनके ऊपर चढ़ कर अपना लंड उनकी चूत पर सैट कर दिया और एक जोर का धक्का दे दिया.
मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया.
वे जोर से चीख पड़ीं, मैं रुक गया.

मैंने थोड़ा इंतजार किया और एक और जोर का धक्का दिया.
अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया.
उनकी आंखों से आंसू आ गए.

चूत लंड के हिसाब से थोड़ी टाइट थी.
मैं थोड़ा रुक कर उनके होंठों को चूसने लगा.

वे जैसे ही नॉर्मल हुईं, मैं धीरे धीरे उन्हें चोदने लगा और उनके होंठ चूसने लगा.

कुछ देर बाद वह भी अपनी गांड हिलाने लगीं तो मैंने अपने हाथों को पलंग पर रख कर पकड़ बनाई और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.

वे जोर जोर से चिल्ला रही थीं- आह और जोर से … और तेज आकाश फाड़ दे मेरी चूत … भोसड़ा बना दे इसका.

मैं उन्हें और जोर जोर से चोदने लगा.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर से उठाया और बालकनी में ले आया.

उधर मैंने मैडम से बालकनी की रेलिंग पकड़ कर झुकने को कहा और पीछे से एक जोर का झटका दिया.
इस बार मेरा पूरा लंड एक बार में अन्दर चला गया.

वे जोर से चीखने लगीं.

मैंने Xxx मैम को चोदना जारी रखा और पूरी रफ्तार से चोदने लगा.
वे जोर जोर से चिल्लाती हुई ‘उह आह ओह … यस लाइक दैट …’ कहने लगीं.

कुछ देर बाद मैंने अपना सारा वीर्य उनकी पीठ पर निकाल दिया और हम दोनों जकुजी में जाकर आराम से बैठ गए.
बाद में बाहर आकर मैंने हॉट मैम को काउगर्ल और मिशनरी स्टाइल में चोदा.

उस पूरी रात में मैंने मैडम को चार बार चोदा.
अगली सुबह मैडम जल्दी अपने कमरे में जाकर सो गईं.

अगले पूरे दिन मैडम से ठीक से चला नहीं जा रहा था.

उस दिन के बाद मैडम और मुझे जब भी मौका मिलता, हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.

वैसे हम दोनों को बालकनी में चुदाई करते हुए स्वाति और राधिका ने देख लिया था.

उसी ट्रिप पर मैंने उन दोनों को एक साथ कैसे चोदा, ये मैं अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम दिशा है और मैं कोरबा छत्तीसगढ़ की रहने वाली हूं.
मेरे परिवार में मेरी बड़ी बहन पूजा है. इस साल वह फाइनल ईयर में है.
मेरी बड़ी बहन के अलावा मेरे घर में मेरा एक छोटा भाई और मम्मी पापा भी हैं.
इस तरह से घर में हम पांच लोग रहते हैं.

पापा की नौकरी है और मम्मी हाउसवाइफ हैं.

मैं अभी कॉलेज के दूसरे वर्ष में पढ़ाई कर रही हूं.

दोस्तो, मैं एकदम चुदासी किस्म की लड़की हूं. दिन भर मेरा दिमाग चोदने चुदाने की कहानी में ही खोया रहता है.
जब भी मुझे मोबाइल मिलता है, मैं चुपके से उसमें ब्लू फिल्में देखने लग जाती या हिंदी सेक्सी कहानियां पढ़ने लग जाती हूं.

अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी वाली साइट की मैं नियमित पाठिका हूं.

शुरू में तो मैं ब्लू फिल्म अकेली देखा करती थी लेकिन एक बार मेरी दीदी ने मुझे ब्लू फिल्म देखते पकड़ लिया था.
तब से हम दोनों अब साथ में मिल कर चुदाई की वीडियो देखते हैं.

ये सब देखना रोज का काम हो गया था लेकिन असली वाली चुदाई कभी नहीं देखने को मिली थी.

Xxx लाइव सेक्स शो की बात मेरे फर्स्ट ईयर यानि पिछले साल की है.

मेरी मम्मी भले ही तीन बच्चों की मां हो गई हैं लेकिन वे किसी जवान ताज़ी लड़की की तरह माल लगती हैं.
उनके बड़े बड़े दूध देख कर किसी का भी मन उनको चोदने को करने लगेगा.

हमारा घर तीन कमरों का है.
जिनमें से एक में हम तीनों भाई बहन और एक में मम्मी पापा सोते हैं.

एक कमरे में कुछ सामान रखा हुआ है और वह कमरा मेहमान के लिए है.

मैं कभी कभी मम्मी के साथ सोने की जिद करने लग जाती हूं.
इसलिए मम्मी पापा के साथ मैं उनके वाले कमरे में सो जाया करती थी.

एक रात जब हम तीनों सोए हुए थे तो मैंने सुना कि कुछ आवाजें आ रही थीं.
‘आह थोड़ा इधर … इधर डालो … आह यार उधर नहीं फाड़ोगे क्या … इधर पेलो न … ये है छेद.’

ये आवाजें मेरी मम्मी की थीं.

मैंने चुपके से आंख खोल कर देखा तो मम्मी पापा को बोल रही थी कि वे लंड ठीक से डालें.

पापा हड़बड़ी में गड़बड़ी कर रहे थे.
मम्मी अपनी साड़ी उठा कर चुदाई करवा रही थीं और पापा बेचारे अपनी बेटी के बगल में अपनी बीवी को चोदने में लगे हुए थे.

मुझे ये सब देख और सुन कर मजा आने लगा.
मैं सोने का नाटक करके उनका पूरा चुदाई का कार्यक्रम देखती रही.

पापा लगभग रोज ही मम्मी की चुदाई करते थे.
लेकिन अब मैं उनके पास रोज सोने की कोशिश करने लगी.
पर अधिकतर बार मम्मी मुझे अपने रूम भेज देती थीं.

मैंने इसका भी तोड़ निकाल लिया.
एक रात पूजा और भाई के सोने के बाद मैं मम्मी पापा की चुदाई देखने के लिए खिड़की से झांकने लगी.

मैंने देखा कि पापा ने मम्मी को उल्टा किया हुआ था और उन्हें घोड़ी बना कर पीछे से घपा घप पेल रहे थे.
मम्मी अपनी साड़ी की कमर तक उठा कर बेड के किनारे घोड़ी बनकर पोज बनाई हुई थीं और पापा उनकी कमर को पकड़ कर उन्हें कस कस कर चोदे जा रहे थे.

ये सब देख कर मेरी चूत की नदी बहने लगी.
चूत से रस की धार रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.

मैं अपने रूम में गई और मोबाइल में ही ब्लू फिल्म चालू करके अपने उंगली से चूत में अन्दर बाहर करने लगी.
कुछ देर में मेरी बहन जाग गई और वह भी मेरे साथ अपनी बुर में उंगली करने लगी.

अब मैं और मेरी दीदी दोनों साथ में सेक्स वीडियो देखती हुई अपनी अपनी बुर सहलाने में लगी थीं.
बहुत मजा आने लगा था.
दोनों साथ में चूत सहला रही थीं और गंदी मूवी देख कर आह आह कर रही थीं.
कुछ देर के बाद हम दोनों झड़ गईं और सो गईं.

इसके बाद ये खेल गाहे बगाहे चलने लगा.
अब मेरे साथ मेरी बहन भी पापा मम्मी की चुदाई देखने का मजा लेने लगी थी.

सुबह मैं जब पापा के कमरे की सफाई करने जाती तो वहां पर बेड के नीचे सफेद रस से भरे कंडोम पड़े रहते थे.
उन्हें मैं उठा कर देखा करती.

कभी मम्मी देख लेतीं तो बहुत डांट पड़ती थी.

फिर मम्मी खुद ही कंडोम को कचरे के डिब्बे में डाल कर बाहर सारा कचरा फेंक कर आती थीं.

अब मम्मी और पापा की रोज चुदाई देख कर मुझे भी चुदवाने का मन करने लगा था.
मैं रोज अपने चूत में उंगली डालकर अन्दर बाहर करने लगती थी और चुदाई के लिए लंड की चाहत को बलवती करती रहती थी.

लेकिन लंड मिलेगा कैसे?
यह एक बड़ा सवाल था.

फिर इस सबके लिए एक मौका मिला.

मेरे मामा के यहां कार्यक्रम में सबका जाना हुआ.
वहां मेरी दो बड़ी मामियां और मौसी सभी लोग आई हुई थीं.

मेरी बड़ी मामी की बेटी तनिषा जो मेरी दीदी पूजा जितनी बड़ी थी यानि मेरे से एक या दो साल बड़ी थी, वह भी आई हुई थी.

वह बहुत ही सेक्सी लड़की थी.
मैंने सुना था कि स्कूल के टाइम से ही लड़कों से उसके चक्कर थे और वह कई बार चुदवाती हुई भी पकड़ी गई थी.

यहां भी वह व्हाट्सप्प पर दिन भर किसी न किसी से चैटिंग करती रहती थी.
उसके सब घर वाले यहीं थे, फिर भी वह ढीठ थी.

देखने में वह गोरी चिकनी और भरे हुए बूब्स वाली थी.
उसके चूतड़ अजीब से उभरे हुए थे.
ऐसा लगता था कि वह पीछे से ही ज्यादा ही मरवाती थी.

मैंने सुना था कि लड़कियों की गांड ज्यादा चोदने पर उनके चूतड़ बड़े होने लगते हैं.
मेरे चूतड़ अभी पतले और दबे हुए से हैं.
मेरी दीदी के थोड़े निकले हैं.
मम्मी का पिछवाड़ा तो चलने पर पूरा हिलने लगता है.

इसका मतलब आप खुद समझ जाओ.

कार्यक्रम के बाद सब मेहमान वापस जाने लगे.

बड़ी मामी ने और मेरी बड़ी बहन और मुझे उनके यहां जाने के लिए मम्मी से बात कर ली.

मैं और पूजा बड़ी मामी के यहां चले गए.
उनके गांव में बड़ी मामी बड़े मामा, उनकी बेटी तनिषा और भाई राहुल रहते थे.

राहुल अभी बारहवीं की पढ़ाई कर रहा है.
देखने में वह भी स्मार्ट और हैंडसम है.
उसके हाव भाव से साफ समझ आता था कि इसकी भी कुछ गर्लफ्रेंड होंगी.

उनका घर काफी बड़ा था. पांच बेडरूम, हॉल, किचन सब था.

तनिषा, मैं और पूजा एक कमरे में सोने लगे.
राहुल एक कमरे में सोता था.

बड़ी मामी और मामा एक अलग कमरे में सोते थे.

मामी भी काफी सेक्सी थीं, लगता था कि वह भी रोज चुदाई कराती थीं.

बड़े मामा उनकी आए पीछे दोनों तरफ से जम कर लेते होंगे, ऐसा साफ समझ आ रहा था.

एक रात तनिषा बाथरूम गई हुई थी, उसका मोबाइल चार्ज पर लगा हुआ था.
उसमें व्हाट्सप्प मैसेज आने लगे.
मैंने उसके मोबाईल को खोल कर देख लिया और सारे मैसेज पढ़ लिए.

उसका बॉयफ्रेंड उसको दिन भर मैसेज करता था.
उस वक्त भी वही था और वह रात के टाइम अपने लंड का फोटो भेज रहा था.

उसने लंड की फ़ोटो को भेजा था और लिखा था- चुदाई किए बहुत दिन हो गए जानेमन, जल्दी मिलना है.
ये सब मैंने पूजा दीदी को भी दिखा दिया.

उसके बॉयफ्रेंड के लंड का साइज लंबा और मोटा था.
उसको देख कर हम दोनों बहनों की चूत में अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी.

उसके वापस आने पर हमने उसको सब बता दिया और पूजा दीदी ये बोल कर उसको डराने लगी कि घर में सबको बता देंगी.

वह डरी ही नहीं, उल्टा हमें ही फंसाने की बात बोलने लगी.
वह बोली- तुम लोग ही अपने बॉयफ्रेंड से बात करने के बहाने यहां आई हो, ऐसा बोल कर मैं तुमको फंसा दूंगी. ये बॉयफ्रेंड भी तुम्हारा ही है और तुमने मेरे मोबाईल पर उससे चैट करके उसे लंड की फ़ोटो भेजने की बात कही.

जब उसने ये सब कहा तो हमारी फट गई.
लेकिन उसके बॉयफ्रेंड का लंड बहुत बड़ा था और गुलाबी टोपे वाला था.
उसको अपनी चूत में लेने का लालच हम दोनों बहनों को अन्दर तक घुस गया था.

उसका मूसल लंड देख कर मेरी चूत से तो रस बहने लगा था.
किसी तरह से तनिषा से बात सुलटी.

मैं सोने लगी और अपनी चूत और चूची सहलाने लगी.
पूजा भी अपने दूध मसलने लगी थी.

फिर हम सब सो गए.

सोने के एक मिनट बाद ही तनिषा ने हम दोनों के मम्मों को जोर से दबा दिए और हंसने लगी.

उसकी इस हरकत से हम दोनों बहनों की मुस्कान खिल उठी और हम सब मिलके मस्ती करते हुए हंसने खिलखिलाने लगे.

सुबह मैंने तनिषा को दीदी कहकर प्यार से बुलाया और उससे बात करने लगी.
वह भी अच्छे से बात करने लगी.

फिर मैं उससे उसके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछने लगी.
उसने बताया कि वह उसका पड़ोसी है, उन दोनों का चक्कर बहुत सालों से चल रहा है.

जब घर वाले नहीं रहते, तो वह मिलने घर आ जाता है और जम कर चुदाई करके जाता है.

ये सब सुनकर मैं मन ही मन बहुत खुश होने लगी.

वह बोली- तुम लोगों के बारे में उसको पता है कि तुम आई हुई हो. मम्मी पापा घर पर नहीं रहेंगे तो वह मिलने आएगा. तब मैं तुम लोगों से बात करवा दूंगी. यदि मेरा मन किया तो आगे भी कुछ करवा दूंगी.
यह बोलकर वह हंसने लगी.

मैं बोली- ठीक है दीदी. आपकी राजी में ही हम दोनों राजी हैं.

बड़े मामा दुकान चलाते थे और भाई गांव में ही स्कूल पढ़ने जाता था.
मामा तो सुबह चले जाते थे और सीधे रात में आते थे.
घर में मामी ही अकेली रहती थीं.

तीसरे दिन मामी की तबियत खराब हो गई.
बड़ी मामी को एलर्जी की परेशानी है.

उनको लेकर बड़े मामा डॉक्टर के यहां शहर गए तो घर में कोई नहीं रह गया.
उस दिन तो समझी हमारी लॉटरी ही खुल गई थी.

हमने आज तनिषा दीदी और उसके बॉयफ्रेंड से मिलने मिलाने का प्लान बनाया.
मैंने सोचा कि इनका कुछ देखने को मिल जाएगा, जिससे कुछ सीख लेंगे.

दीदी का हीरो छत से कूद कर मिलने आ गया.
वह आकर सबसे नॉर्मल बात करने लगा.

घर में हम तीनों बहनें और वह अकेला लड़का था.
वह देखने में स्मार्ट, लंबा, हट्टा-कट्टा और हल्की दाढ़ी में गजब दिख रहा था.

उसने मुझसे मेरा नाम पूछा और कितने में पढ़ती हो, कहां पढ़ती हो. ये सब पूछने लगा.
उसने पूजा से भी यही सब पूछा और तनिषा दीदी से बातें करने लगा.

फिर कुछ देर बाद दोनों उठ कर कमरे में जाने लगे. हम दोनों बहनें टीवी रूम में रूक गईं.

उन दोनों का चूमना चाटना शुरू होने लगा और हम दोनों मचलने लगीं.

मैंने पूजा से कहा- चल खिड़की से झांक कर देखती हैं.
वह बोली- हां चल, मजा आएगा.

हमने देखा कि हीरो बेड पर लेट गया और दीदी के ऊपर चढ़ कर उसको चूम रहा है.
वह कभी दीदी के दूध को दबाता, कभी उसकी जांघ के पास मसलता, कभी उसके पेट को चूमता, तो कभी नीचे चूत की तरफ चाटने लगता.

तनिषा दीदी ‘आह आह मेरा हीरो … मेरी जान …’ बोल बोल कर सिसकार रही थी और खिड़की की तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी.

ऐसा लग रहा था कि वे दोनों हमें दिखा दिखा कर चुदाई करने वाले थे.
तभी तो उन्होंने खिड़की खोल रखी थी कि हम दोनों आकर सब देखें और मज़े लें.

यह सब देख कर हम दोनों की चूत गीली होने लगी थी.
हम दोनों खिड़की से ही सारे मज़े लेने लगी थीं.

वह लड़का उठा और अपने कपड़े निकालने लगा.
उसने अपने सारे कपड़े निकाल कर एक तरफ रख दिए.

फिर उसने पैंट की जेब से कंडोम का पैकेट निकाल लिया.

मैंने सोचा कि ये एक पैकेट का क्या करेगा; इसमें तो शायद दस कंडोम होंगे; क्या ये आज दिन भर तनिषा दीदी को चोदेगा.

उसने तनिषा दीदी के कपड़े निकालने शुरू कर दिए.
दीदी लाल ब्रा में थी और उसके पर्पल लेगिंग्स में वह गजब सेक्सी लग रही थी.

उसने तनिषा दीदी की लेगिंग्स को खींच कर निकाल दिया और अब दीदी ब्लू रंग की पैंटी और लाल रंग की ब्रा में थी.

इसके बाद उसने एक एक करके तनिषा दीदी की पैंटी और ब्रा दोनों को निकाल दिया.

फिर दीदी और वह लड़का पूरे नंगे होकर अन्दर थे.

दीदी लपक कर उसका खड़ा लंबा लंड चूसने लगी.
वह बिल्कुल ब्लू फिल्मों की तरह लंड चूस रही थी.

उस लड़के ने अपने लंड का मुँह हमारी तरफ किया और हमें दिखाते हुए तनिषा दीदी से लंड चुसवाने लगा.

उसका लंड चूसने पर और लंबा और कड़ा होता जा रहा था.
तनिषा दीदी जोर जोर से उसका लंड चूसने लगती तो लड़का दीदी के बालों को पकड़ कर और जोर से उसके मुँह को दबाने लगता था.

ये सब देख कर हमारा हाल बेहाल होने लगा.
हमें तो ऐसा लगने लगा था कि कमरे के अन्दर जाकर उस मर्द का लंड अपने मुँह में लेकर चुसाई करने लगें.
हमारा खुद पर कंट्रोल नहीं रहा था.

हम दोनों अपनी चूत व दूध मसलने लगी थीं.
कभी मैं पूजा के दूध दबा देती, कभी वह मेरी चूत मसल देती.

दस मिनट तक लंड चुसाई चलने के बाद उस लड़के ने दीदी को उठाया और बेड पर पटकते हुए सीधा लिटा दिया.
फिर एक कंडोम निकाल कर अपने लंड पर लगाने लगा.

लंड ने पोशाक पहन ली तो वह मर्द का बच्चा दीदी के ऊपर चढ़ गया और उसके एक दूध को जोर जोर से चूसने लगा.
वह उसके दूध को मुँह में लेकर चूसे जा रहा था.

दीदी की कामुक सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी थीं.

चूचियों की चुसाई के साथ साथ वह उसकी चूत को रगड़ रहा था.
Xxx लाइव सेक्स शो देख कर हमारी जान निकली जा रही थी.

फिर उस लड़के ने अपना लंड दबाया और दीदी की चूत में डालने लगा.

लंड अन्दर डालने से पहले वह दीदी को खींच कर बेड के किनारे पर ले आया और नीचे खड़े होकर उसने दीदी की जांघों को पूरा फैला दिया. दीदी की चूत फटा हुआ भोसड़ा सा दिखने लगी थी.
उस लड़के ने जोर लगा कर दीदी की चूत में लंड फंसाया और अन्दर डालने लगा.

दीदी की आह निकलना शुरू हो गई और उसने अपना लंड दीदी की चूत में डाल दिया.
तब दीदी ‘आह मम्मी … मर गई मम्मी.’ करने लगी.

कुछ देर में दर्द खत्म हुआ और चूत में लंड पेलने का मस्ती भरा खेल शुरू हो गया.

धीरे धीरे लड़के ने रफ्तार बढ़ा दी और अब वह ताबड़तोड़ लंड पेले जा रहा था.
कभी वह दीदी की जांघों को दोनों हाथों से पकड़ कर धक्का देता, तो कभी सीधे लंड से ही धक्के लगाते रहता.

उसकी चुदाई के तरीके से लगता था कि वह चोदने के मामले में काफी अनुभवी है.

दीदी ‘आह मेरी जान … और अन्दर और अन्दर …’ कहे जा रही थी.

वह कभी झटके से चोदने लगता, कभी धीरे से … कभी कमर पकड़ कर चूत में धक्का देता, तो कभी उसकी जांघों को अपने कंधों पर रख कर प्यार से चोदने लगता.
कभी वह बेड पर चढ़ कर दीदी को अपनी बांहों में भरके घप घप की आवाजों वाली चुदाई करने लगता था.

इन आवाजों को सुन कर बहुत मजा आ रहा था.

दीदी ऐसा करते करते काफी देर तक चुदी.

आखिर में उनकी चुदाई की रफ्तार अचानक बहुत तेज हो गई और वह लड़का दीदी को जमकर चोदने लगा.

दीदी ने भी उसको अपनी बांहों से कसके जकड़ लिया.
लड़का पेलता रहा और दीदी चुदाती रही.

उन दोनों की चुदाई पूरी होने के बाद वह दोनों नंगे ही कमरे में एक दूसरे के ऊपर कुछ समय तक लेटे रहे.

फिर दीदी लड़के का लंड मुँह में लेकर चाटने लगी.

हम दोनों भी झड़ गई थीं तो अपने कमरे में आ गईं

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lie khaas khaane kee cheejen laaya tha. ab, main unhen khila raha tha. mainne jo joos laaya tha, use unakee choot par daala aur chaata. ek romaantik muthabhed ke baad, aantee ne mujhe phir se jor se chodane ke lie kaha. mainne aantee ko apane oopar baitha liya. main unhen jor se chod raha tha, unakee aankhen chaudee kar raha tha, unake bade stan choos raha tha, unake nippal kaat raha tha. aantee kee cheekhen mujhe paagal kar rahee theen. seksee aantee ko kaee pozishan mein zoradaar tareeke se chodane ke baad, main bistar ke kinaare khada ho gaya. aantee ultee let gaee aur mere paas aakar mere land ko dabaane lagee aur mujhase baaten karane lagee. aantee mere land ko paagalon kee tarah choos rahee thee. jab aantee choos rahee thee, tab main unase baaten kar raha tha. thodee der baad, mainne kutiya ke baal pakade aur usake munh mein jor se choda. beb ko bahut maza aaya. baad mein, mainne usakee garm choot ko phir se choda. “kabeer, kabeer, aahhh aahhhh aahhhh, aahhhh..mujhe aur jor se chodo, aah, aah, aah, aah, aah, aah, aur bhee jor se aur behatar, aise, aise,” chaachee jor se chillaee. chaachee ne mujhe said engal se chodane ke lie kaha. main usakee gardan ko choomate hue aur usake bade stan dabaate hue use chod raha tha. chodate hue, mainne usake kaan kaate. chaachee ne apana sir meree taraph ghumaaya aur apana munh mere munh par rakh diya aur karaahane lagee. jab main use jor se chod raha tha, meree chaachee kee vaasana bahut badh gaee aur usamen aag lag gaee. isalie, usane mere poore shareer ko paagalon kee tarah chooma aur kaata. kuchh der baad, chaachee thak gaee aur apane pair mere kandhon par rakh kar let gaee. mainne chaachee ke pairon ko chooma aur use apane kareeb kheench liya. aantee meree gardan pakade hue thee aur main dheere se chod raha tha. aantee ko yah pojeeshan bahut pasand aaee. aantee ko bahut maza aa raha tha. phir mainne pojeeshan badalee, aantee kee kamar ke neeche takiya rakha aur unhen choda. chodate samay main aantee kee gardan ko choom raha tha aur unake gaalon ko kaat raha tha. aantee ko yah bahut pasand aaya. thodee der baad main thak gaya; ham kuchh minat ke lie so gae. mainne aantee ko apanee taraph ghumaaya aur apana munh aantee ke munh par rakh diya. usee samay, unhonne apane stan pakade aur mainne unake stan chode. phir vo kaugarl pojeeshan mein aa gaee aur neeche se chodate samay uchhalane lagee. aantee kisee shaitaan kee tarah jor se hansee aur mere chehare par jor se mukka maara. vo itanee uttejit thee ki usane mere chehare aur gaalon par mukka maarana shuroo kar diya. jab aantee mujhe itanee jor se mukka maar rahee thee to main bardaasht nahin kar sakata tha, isalie mainne unhen apane paas kheencha, unhen gale lagaaya, unhen chooma aur unhen jor se chodana jaaree rakha. mujhe laga ki aantee paanch aur pojeeshan mein jor se chodane ke baad thak jaengee, lekin aisa nahin hua. chaachee kee vaasana paagalapan se badh gaee. phir, mainne usake chehare par veeryapaat kar diya. main bahut thak gaya tha; mainne kul milaakar 50 alag-alag konon se aantee ko choda. raat ke kareeb 10:30 baj rahe the. mainne aantee ko khaana khilaaya aur khaane ke baad ham donon bistar par baith gae. ham romaans ke baare mein bahut saaree baaten kar rahe the. meree beb aantee ne mujhase kaee saaree baaten keen aur ham 1:00 baje bistar par chale gae. subah hone ke baad, aantee apane ghar chalee gaeen aur main apane raaste par chala gaya. aantee ne mujhe 9000 die. darasal, is aantee ne mujhe paanch din pahale seks ke lie bulaaya tha, lekin aakhiree samay par, kisee kaaran se, vah nahin aaee. ant mein, meree aantee ko chodana ek jangalee savaaree thee. hamane ek-doosare ke dimaag ko kharaab kar diya, aur yah bahut achchha tha. mujhe khushee hai ki ham aakhirakaar chudaee karane mein saphal hue, aur mujhe isake lie paise bhee mile. main kabhee nahin bhooloonga ki usane mera land kaise choosa aur mainne use kaise zor se choda. yah ek ganda aur ghinauna anubhav tha, aur mujhe isaka har pal pasand aaya. ***** meree kahaanee padhane ke baad aapako kaisa laga? mujhe maisej karen aur mujhe pheedabaik den. aantiyon aur ladakiyon, agar aap mein se kisee ne meree kahaanee padhee hai, to main aapako bahut-bahut dhanyavaad dena chaahoonga. agar aap mere saath apanee yaun ichchhaon aur kalpanaon ko poora karana chaahate hain, to mujhe zaroor maisej karen. kabirrison@gmail.com aantiyon aur ladakiyon, aapakee jo bhee kalpanaen hain, main aapako pooree tarah se santusht kar sakata hoon. mujhe maisej karen aur mujhase sampark karane ka prayaas karen.
प्रेषक : मोहित सिंह Sex Stories

मेरा नाम मोहित है। मैं गोरखपुर का रहने Sex Stories वाला हूं। मेरा एक संयुक्त परिवार है, मेरे घर में पापा, मम्मी, चाचा, चाची रहते हैं. मेरी उम्र २७ साल है मुझे शुरू से ही सेक्स का बहुत शौक रहा है. मुझे लड़कियों में उनकी चूची बहुत पसंद है. उनसे खेलना, चूसना मेरी पहली पसंद है. सेक्स करने से पहले मुझे पार्टनर के साथ खेलने और उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित करने में बहुत मज़ा आता है. २ साल घर से दूर हॉस्टल में पढ़ा हूं। उस वक्त मेरे बेड पे मैं और मेरा एक रूम पार्टनर सोते थे.

एक दिन जब हम सो रहे थे तब रात को मुझे लगा कि कोई मेरे लंड के साथ खेल रहा है. मैंने धीरे से एक आंख खोली तो देखा कि मेरा रूम पार्टनर मेरे लंड के साथ खेल रहा है, उससे मस्ती कर रहा है। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं सोने का बहाना कर के बेड पे पड़ा रहा. फिर वो मेरे लंड को चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आने लगा. तब मैंने उठने की सोची और उठते ही अपने रूम पार्टनर पे झूठ का गुस्सा किया। वो मुझे मनाने लगा। मैंने उससे कहा कि ठीक है लेकिन बस इतने में मज़ा नही आयेगा, उसने पूछा- क्या मतलब?

मैंने कहा- मुझे यह सब पसंद नही है और किसी लड़के ने मेरा लंड पहली बार पकड़ा है, तुम उसे चूस रहे थे, उसके अलावा क्या क्या करते हैं?

उसने बताया कि लंड को गांड में डाल का अन्दर बाहर करते हैं जैसे कि लड़कियों के चूत में डाल कर किया जाता है.

मैंने उससे कहा कि तुम मेरा लंड चूस सकते हो, ब़स मुझे गांड मरवाने का शौक नही है.

वो मान गया. उस दिन उसने मेरे लंड की खूब चुसाई की, फिर हम सो गये.

हम जिस स्कूल में पढ़ते थे वो लड़के लड़कियों का स्कूल थ। उस समय मैं कलास 12 में था. स्कूल में ही हमारा हॉस्टल था. लड़कियों से मेरी बहुत बनती थी क्योंकि मैं पढ़ने में बहुत तेज था। मेरी क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम सुधा था. वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. वो अपने जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम रख रही थी. उसके बड़े होते उभार किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थे. मैं उससे बहुत पसंद करता था और रात को उसके साथ ।सेक्स के सपने देखता था.

मैं दिखने में बहुत स्मार्ट नही था लेकिन किसी से कम भी नही था. मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार करने की सोची, लेकिन हिम्मत नहीं हुई. एक बार हम लोग पूरी क्लास के साथ आऊटिंग पे गए हुए थे, ब़स वही मुझे मौका मिल गया और मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया.

पहले तो वो कुछ नही बोली, फिर मेरे गाल पे एक किस देकर बोली कि मैं भी तुम्हे बहुत पसंद करती थी लेकिन बोलने की हिम्मत नही हो रही थी. फिर क्या, धीरे धीरे हम लोग एक दूसरे से बहुत खुल गये और सेक्स करने की प्लानिंग होने लगी. हॉस्टल से केवल रविवार को आऊटिंग की छूट थी तो हम लोगों ने रविवार के मिलने का प्रोग्राम उसकी सहेली के घर पे रखा. यह सब इंतज़ाम उसने किया और बताया कि कोई दिक्कत नहीं है उसकी सहेली तैयार है अपने घर पे बुलाने को. हम लोग रविवार को मिले और हमें एक कमरे में अकेला छोड़ कर उससके सहेली बाहर चली गई.

सुधा ने उस दिन लाल रंग का सूट पहना हुआ था उस पर सफ़ेद दुप्पटा जिसमें वो बहुत की सेक्सी लग रही थी. मैंने उससे तुरन्त अपने बाँहों में ले लिया और उसे किस करने लगा. किस करते करते मेरा एक हाथ उसकी चुचियों को मसल रहा था। अभी छोटी थी लेकिन बहुत हार्ड और मस्त थी. मैंने उससे कपड़े उतारने के लिए कहा तो वो शरमाने लगी.

फिर मैंने उसके ऊपर के कपड़े को उतार दिया और देखा उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई है। गज़ब की क़यामत लग रही थी वो.. फिर सलवार भी उतार दी, उसने नीचे कुछ नहीं पहना था और उसके चूत पे एक बाल भी नही था। फ़िर मैं उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा। वो आ आआ आह ह्ह्ह्ह्ह्अह्ह्ह करके सेक्सी आवाज़ निकलने लगी और मेरी पैन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड को पकड़ने लगी। मैंने अपनी पैन्ट और अंडरवीअर उतार कर लण्ड उसके हाथों में दे दिया. फिर वो मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी.

मैंने उसे मेरे लण्ड को मुंह में लेने के लिए कहा तो वो मना करने लगी और कहा कि मुझे उलटी हो जायेगी. कमरे में एक फ्रीज रखा था, जिसे खोला तो देखा कि उसमें जैम रखा था। मैंने सुधा से जैम लण्ड पे लगाने के लए कहा तो उससे उसने प्यार से लगा दिया। फिर मैंने उससे उसे चाटने के लिए कहा, फिर वो मज़े से उससे चाटने लगी और उससे बहुत मज़ा आने लगा। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. मैंने फिर उसको लिटा कर उसकी चूत चाटनी शुरू की तो वो फिर आवाज़ निकलने लगी. फिर उसने लंड को चूत में डालने के लिए कहा.

चोदने का यह मेरा पहला मौका था लकिन मैं बहुत कांफिडेंट था क्योंकि मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म देखी थी और गरमा गरम कहानियों की किताब भी पढ़ी थी। मैंने उसकी चूत पे लण्ड को रखा लेकिन वो अन्दर जा ही नहीं रहा था, बहुत कड़ी चूत थी. मैंने उसपे तेल लगाया फिर रखा तो वो थोड़ा अन्दर गया वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी और हटने के लिए कहने लगी।

मैंने उसे समझाया, तब वो फिर तैयार हुई। फिर मैंने उसकी चूत पे लण्ड रख कर धक्का मारा तो आधा अन्दर गया। क्या गज़ब टाइट चूत थी, वो चिल्लाने लगी पर मैं कहां मानने वाला था और एक बार मैंने धक्का मारा और लण्ड को पूरा अन्दर घुसा दिया। वो दर्द के मारे रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और उसकी चुचियों को चूसने लगा जिससे उससे मज़ा आने लगा. कुछ देर बाद वो अपनी गांड को उठाने लगी। तब मैंने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और लगभग १५ मिनट बाद झड़ गया. लण्ड को बाहर निकाला तो देखा कि चादर पे खून पड़ा है। जिसे देख कर हम दोनों डर गये.

तभी देखा कि दरवाज़ा धड़ाक से खुल गया और उसकी सहेली कमरे के अन्दर आ गई. शेष आगे की कहानी में. मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताएं। Sex Stories

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