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Antarvasna Sex Stories

मैं पेशे से एक Antarvasna Sex Stories फ़ोटोग्राफ़र हूँ, मुम्बई में रहता हूँ। मेरा अकसर शूटिंग के लिये बाहर जाना होता रहता है। ऐसे ही एक शूटिंग के लिये मैं एक बार गोवा गया था। मेरे लिये यह एक बहुत ही मजेदार अनुभव था। अपनी शूटिंग के बाद कुछ दिन के लिये मैं अकेला गोवा में रूक गया था। मैंने रेलगाड़ी से आने का फ़ैसला किया। मैंने ए सी कम्पार्टमेंट में अपने लिये एक सीट रिजर्व कराया। यह गोवा का ऑफ़ सीजन था इसलिए रेलगाड़ी में बिलकुल भी भीड़ नहीं थी। मुझे बहुत आसानी से रेलगाड़ी का टिकट मिल गया। शाम को 6 बजे मेरी रेलगाड़ी मडगाँव स्टेशन से छूटी। मेरे कम्पार्टमेंट में मुझे सिर्फ़ दो लोग दिखे लेकिन उनकी भी सीट डिब्बे के दूसरे कोने में थी। रेलगाड़ी वहाँ से चली और कुछ देर में ही कोई स्टेशन आया। जहाँ पर एक लड़की जो कि बहुत ही मॉर्डन कपड़ो में थी मेरे कम्पार्टमेंट में आई और मेरे भाग्य से उसकी सीट मेरे सीट की बगल में थी। उसने मेरे केबिन में प्रवेश किया। वह मुस्कराई और उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया।

हाय ! मैं आलीन !

मैं भी मुस्कराया मन ही मन मुझे खुशी हो रही थी चलो अब मेरा रास्ता कम बोरिंग होगा। हम दोनों का वार्तालाप शुरू हुआ। वह काफ़ी बोल्ड किस्म की लड़की थी। उसका सेक्सी फ़िगर मुझे उसकी तरफ़ लगातार आकर्षित कर रहा था। बातों बातों में हम एक दूसरे के बारे में काफ़ी कुछ जान गये थे। वह मॉडलिंग के लिये मुम्बई आ रही थी। इसके पहले उसने एक दो विज्ञापन में काम किया था। मेरे बारे में जानने के बाद उसने मेरे में ज्यादा रुचि लेनी शुरु कर दी। मेरे केबिन की हलकी नीली लाइट जल रही थी। उसने केबिन का पर्दा खींच लिया जिससे हमें बाहर से कोई अवरोध न मिले। वह मेरे सीट पर बैठी थी हम दोनों कॉफ़ी पी रहे थे। हम दोनों की बातें और आगे बढ़ी और फिर फ़िल्म इण्डस्ट्री और उसके आकर्षक लाइफ़ के बारे में होने लगी।

रात काफ़ी हो चुकी थी। हमारे डिब्बे में जो भी दो चार लोग थे अपने केबिन में सो चुके थे। क्योंकि कहीं से कोई आवाज नहीं आ रही थी। हम दोनों अभी भी अपनी बातों में मशगूल थे। वह मेरे से काफ़ी सटकर बैठी थी जिससे हम रेलगाड़ी के झटकों से कभी कभी हलके से छू जाते थे। अचानक मैंने उसके हाथ को अपने हाथ पर पाया। मैंने उसकी तरफ़ देखा वह मुस्कराई, बस मुझे हरी झण्डी मिल गई।

मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और चूम लिया। उसके कंधों पर अपना हाथ रखकर उसे अपनी ओर खींच लिया। वह आसानी से मेरे ऊपर आ गिरी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये। उसके होंठ बहुत ही मुलायम और गुदाज थे। उसकी सांसे काफ़ी गर्म थी। मैं उसके निचले होंठों को अपने दोनों होंठों के बीच रखकर उन्हें चूसने लगा। उसके हाथो की उंगलियाँ मेरे बालों में उलझी हुई थी। उसने मेरी जीभ को अपने मुँह में लिया और बहुत ही मजेदार ढंग से चूसने लगी। मेरा प्राइवेट अंग पैंट के भीतर उफ़ान मार रहा था।

मेरा हाथ उसकी पीठ पर घूमते हुये उसकी कमर के नीचे तक पहुँच गया। मैंने अपना हाथ उसकी टाइट टी-शर्ट में डाल दिया। धीमे धीमे मेरा हाथ उसकी दोनों गोलाइयों के नजदीक तक पहुँच गया। मेरे हाथ उसकी ब्रा को महसूस करने लगे। मैं उसकी दोनों गोलाइयों को अपने हाथों में लेने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे इतनी बड़ी थी कि मेरे हाथो में नहीं आ रही थी। इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना जारी रखा। उसकी हरकतें मुझे बहुत ही ज्यादा उत्साहित कर रही थी।

अचानक मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरी पैंट पर पड़ा था। मेरा प्राइवेट अंग मेरे पैंट को फ़ाड़कर बाहर आने को तैयार था। वह मेरे सख्त हो चुके अंग को मेरे पैंट के ऊपर से रगड़ रही थी। उसने मेरी पैंट की जिप खोल दी और अपना हाथ मेरे पैंट के अन्दर डाल दिया और मेरे लण्ड को अण्डरवीअर के ऊपर से पकड़ लिया। मेरी हालत बहुत बुरी हो रही थी। उसने मेरी पैंट खोल दी और अण्डरवीअर को नीचे की तरफ़ सरकाकर मेरे जनानाँग को पकड़ लिया। मैं अपनी सीट पर ही बैठा था। वह अपनी जगह से उठी और मेरे लण्ड को उसने अपने मुँह में ले लिया। वह बहुत हॉट थी उसका यह सब करना मुझे और उत्तेजित कर रहा था। मुझे लगा कि अगर मैंने उसे अपने लण्ड से और खेलने दिया तो मेरा वीर्य बाहर आ जायेगा।

मैंने उसे उठाया और अपनी सीट पर वापस बैठाया। मैंने उसके टी-शर्ट को ऊपर करके उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। उसकी दोनों बड़ी बड़ी खूबसूरत गोलाइयाँ मेरे समाने बिलकुल आज़ाद होकर झूलने लगी। उसकी गोलाइयाँ एकदम टाइट थी। मैं उन्हें अपने हाथ में लेकर दबाने लगा। उसके चेहरे पर मैं बैचेनी का आलम देख रहा था। मैंने उसके एक निप्पल को अपनी उंगलियों में लेकर उसे धीमे से मसाला। उसके मुँह से एक आआआह्ह्ह्ह्ह की ध्वनि निकाल गई। मैं झुककर उसके दूसरे निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और उसे अपनी जीभ से सहलाने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था कि उसके स्तन अब और बड़े हो गये थे।

अब मेरे हाथ उसकी जांघों से होते हुए उसके गुप्ताँग पर पहुँच गये। उसने शर्ट-पैंट पहन रखा था। मैंने कैसे भी उन्हें खोला और उसके पैंटी को नीचे किया। उसके गुप्ताँग पर एक भी बाल नहीं थे। मेरी उंगलियां उसके गुप्ताँग में समा गई। मैं अपनी उंगली को उसके गुप्ताँग में अन्दर बाहर करने लगा। मैं उठकर नीचे बैठ गया और उसके गुप्ताँग पर अपनी जीभ रख दी। उसकी मादकता बढ़ती जा रही थी। उसने मेरे बालों को पकड़कर मेरे सर को अपनी जांघों में फ़ंसा लिया। जैसे जैसे मेरी जीभ अपना काम कर रही थी, वह और भी उत्तेजित होती जा रही थी। मैंने अपने आपको उसकी मजबूत पकड़ से मुक्त किया और उसके कपड़ो को निकाल कर उसके पैरो को फ़ैलाया। उसकी सेक्सी चूत मेरे समाने थी जो कि मुझे आमंत्रित कर रही थी। मैंने एक पल की भी देरी किये बिना अपने लण्ड को उसके चूत पर रखा और उसके अन्दर प्रवेश कर गया।

और फिर एक दूसरे को धक्के देने का सिलसिला चालू हो गया। हम दोनों की स्पीड बढ़ती जा रही थी। उसके पैर हवा में खुले हुई थे जिससे मुझे उसके अन्दर तक समाने में आसानी हो रही थी। मेरा लण्ड तेजी से उसके अन्दर बाहर हो रहा था। मेरा लण्ड उसकी चूत की दीवारों पर एक जबरदस्त घर्षण उत्पन्न कर रहा था। हम दोनों आनन्द की एक दूसरी दुनिया में तैर रहे थे। उसकी चूत से गर्म पानी निकलने लगा जो कि लुब्रीकैंट का काम करने लगा। हम दोनों अपनी चरम सीमा के नजदीक पहुँच रहे थे। हमारे जननांगों से फच्च फच्च की आवाज आने लगी थी। आलीन ने मुझे कसकर पकड़ रखा था। हमारे अन्दर एक जबरदस्त तूफ़ान उबाल मार रहा था। मेरी स्पीड बढ़ती जा रही थी और थोड़ी देर में ही हम दोनों अपने चरम सीमा पर पहुँच गये। हम दोनों के अन्दर एक लावा था जो कि फूट पड़ा।

हम दोनों के शरीर शांत हो गये। हम थोड़ी देर तक एक दूसरे की बाहों में पड़े रहे। यह मस्ती का दौर रात में फिर चला। यह मेरी सबसे यादगार रेल यात्रा थी। Antarvasna Sex Stories

हेलो दोस्तो, Sex Stories

मुझे संजू कहते हैं। मैं 25 Sex Stories साल का हूँ, मुंबई में रहता हूँ। मेरी 6′ की हाईट है।

आप लोग बोर हो रहे होंगे मेरी बातें सुन कर। चलिए मैं आपको अपनी कहानी की ओर ले चलता हूँ।

यह घटना अब से 5 महीने पहले हुई जब हमारी कॉलोनी में एक भाभी रहने को आई थी।
भाभी तो पूछो मत … मादकता उनके बदन में कूट-कूट के भरी थी।

चूची उनकी थी 38डी, कमर 32 और गांड तो क़यामत थी उनकी 40 साइज़ की।
चलती तो क़यामत लगती थी।

उनके आने के कुछ दिनों में उनकी दोस्ती हमारे परिवार से हो गई।

भाभी बहुत चंचल स्वभाव की थी। उमर यही कोई 30 साल के आस पास थी।

धीरे धीरे वो हमसे भी खूब बातें करने लगी थी क्यूंकि उनके कंप्यूटर को मैं ठीक कर देता था सो वो मुझसे काफी करीब थी।

एक बार उनके कंप्यूटर में कुछ खराबी आ गई थी।
वो मम्मी से बोली कि संजू से कह के मेरा कंप्यूटर ठीक करवा दो।

तो मैं दोपहर को उनके घर गया।

वो बड़ी सेक्सी नाईट गाउन पहन के घर पर थी और वो मुझे अपने कंप्यूटर के पास ले गई।

मैं उनके कंप्यूटर को ठीक करने लगा। उसको फॉर्मेट करना था।

सो मैंने भाभी जी से कहा भाभी जी आपका कोई महत्वपूर्ण फाइल हो तो बैक-अप ले लो, सिस्टम फॉर्मेट करना पड़ेगा.

तो वो बोली- कुछ पर्सनल फाइल हैं तुम हटो तो मैं बैक-अप ले लूँ।

मैं कुर्सी से हट के खड़ा हो गया और वो अपनी व्यक्तिगत फाइलों का बैक-अप लेने लगी थी।
उसमें बहुत सारी सेक्स कहानियाँ और पॉर्न तस्वीरें थी जो गलती से खुल गई।

मैंने उनसे कहा- भाभी, अगर ऐसी फाइल्स है तो आप बैकअप रहने दो! मैं आपको ढेर सारी दे दूँगा।
वो बोली- ठीक है!
और कंप्यूटर से हट गई।

तभी मैंने पूछा- भाभी! भइया कहाँ हैं?
तो वो बोली- ना जाने कहाँ गए हैं। उनके होने और ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। तुम कंप्यूटर ठीक करो!

मैंने कंप्यूटर को फॉर्मेट कर के लोडिंग पर लगा दिया और भाभी से बोला- मैं अभी घर से आपके लिए कुछ फाइल्स ले कर आता हूँ!
तो वो बोली- अरे इतनी क्या जल्दी है? बाद में दे देना।

मैंने कहा- अरे भाभी! आप देखो! मुझे अच्छा लगेगा कि कम से कम मेरा कल्लेक्शन किसी के काम तो आएगा!

यह कह के मैं घर से अपने डीवीडी का बॉक्स ले आया और उन्हें दे दिया कि आप देखो। जब देख लें तो मैं और दे दूंगा।
वो बोली- ठीक है! और उसे आलमारी में रख दिया।

मैंने उनका कंप्यूटर ठीक कर दिया और चला आया।

अगले दिन वो मेरे घर आई और मेरे से बोली- उसमें कुछ फाइल खुल नहीं रही हैं।
मैं समझ गया कि उसमें कुछ मोबाइल वाली फाइल थी जो अलग मीडिया प्लेयर पर खुलती थी।

सो मैं मीडिया प्लेयर लेकर उनके घर गया और इंस्टाल कर के जाने लगा तो वो बोली- इसे ओपरेट कैसे करते हैं?

मैंने कहा- भाभी, सेक्स क्लिप है! मैं आपके सामने कैसे ओपरेट कर पाऊंगा?

इस पर वो बोली- तुम करो, कोई बात नहीं। अब हम दोस्त है और अब तुम मुझे अलका कह के बुलाओ। भाभी लोगों के सामने बोला करो।
मैंने कहा- ठीक है!

और मैंने वो फाइल रन कर दी और भाभी मेरे साथ बैठ के वो फाइल देखने लगी और फाइल देखते देखते मैं भी उत्तेजित हो गया था।
वैसे मैं तो भाभी को देख के हमेशा उत्तेजित रहता हूँ, पर उनके साथ मूवी देखने में तो मेरी हालत ख़राब हो गई थी।

भाभी मेरी तड़प देख के मुस्कुरा रही थी और बोली- कोई मस्त लड़के की मूवी दिखाओ।
मैंने पूछा- भाभी कैसे लड़के की?
तो वो बोली- अपनी उम्र के लड़के की मूवी दिखाओ।

मैंने एक मूवी ढूंढ निकाली और प्ले कर दी।
अलका भाभी बोली- संजू, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने कहा- नहीं।

तो वो बोली- यह मूवी तुम देखते हो?
मैंने कहा- हाँ।

उसने फिर पूछा- उसके बाद तुम्हारा मन नहीं करता कुछ करने को?
मैंने कहा- करता तो बहुत है पर कर भी क्या सकता हूँ?
इस पर वो बोली- फिर तुम क्या करते हो?

मैंने शर्म के मारे अपना सर झुका लिया तो वो बोली- शरमाओ नहीं, क्या हाथ से हिलाते हो?
मैंने कहा- हाँ।

उसने कहा- ये बुरी बात है। इससे तुम में कमजोरी आ जायेगी और शादी के बाद तुम्हारी बीवी की हालत मेरे जैसे हो जायेगी।
मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं!

तो बोली- मेरे पति भी मेरे साथ कुछ कर नहीं पाते। हाथ से हिला हिला कर उन्होंने अपना सामान ख़राब कर लिया है और अब वो खड़ा भी नहीं होता है और मुझे बैंगन या मूली से काम चलाना पड़ता है। अगर तुम्हें जरूरत हो तो मेरे पास आ जाना, मैं तुम्हारी मदद कर दूँगी। वैसे भी अब हम दोस्त हैं।

इतना कह के वो रसोईघर से पानी लेने अपनी गांड मटकाती हुई चली गई जिसे मैं देख के पागल हो रहा था।
वो रसोईघर से दो गिलास शर्बत लेकर आई और एक मुझे दिया, दूसरा खुद पीने लगी।

तब मैंने पूछा- भाभी, आप मेरी कैसे हेल्प कर सकती हो?
वो बोली- कैसी हेल्प चाहते हो?
मैंने कहा- भाभी आप बुरा मान जाओगी।
तो बोली- नहीं।

मैंने कहा- भाभी, मैंने आज तक किसी भी औरत या लड़की को असल में नंगी नहीं देखा है। क्या मैं आपको देख सकता हूँ?
उसने कहा- जरूर!
और खड़ी हो गई, बोली- लो, तुम खुद देख लो जैसे देखना हो।

मैंने जल्दी से गिलास खाली किया और उनके पास खड़ा हो गया।

उन्होंने खुद ही मेरा हाथ पकड़ के अपनी चूची पर रख दिया और बोली- यह पसंद है? लो दबाओ और मज़ा लो।
मैं उनकी चूचियों को दबाने लगा।
बड़ी टाइट और मस्त चूचियाँ थी उनकी।
मजा आ गया था।

फिर मैंने उनकी नाइटी उठाई और उनकी चिकनी टांगों को सहलाने लगा.
तो वो मेरे करीब आ गई और जींस के ऊपर से मेरे लंड को सहलाने लगी, बोली- तुम्हारा लंड कितना बड़ा है?
मैंने कहा- 6″ का!

तो बोली- क्या मैं देख सकती हूँ?
मैं बोला- भाभी पहले मैं आपको देखूंगा, फिर आप मुझे देख लेना।
बोली- ठीक है।

और यह कहकर उन्होंने अपना गाउन उतार दिया और काले रंग के लेसयुक्त ब्रा पैंटी में खड़ी हो गई।
वो बला की खूबसूरत लग रही थी।

मैं उनको पैर से लेके सर तक चूमता रहा और वो सीई ईईई आह्ह ह अह्ह हह्ह्ह कर रही थी।

फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी।
पूरे बदन में एक भी दाग नहीं था और चूचियाँ जैसे हिमालय पर्वत की तरह सर उठाये खड़ी थी।

मैं उन्हें देख कर पागल हो गया था।
उन्हें उनके बेडरूम में ले गया और उनको चूमने और चाटने लगा।

मैं उनकी चूत के पास आया और उनकी चूत को चाटने लगा तो उन्होंने मुझे अपने पैरो से दबा लिया, बोलने लगी- खूब चाटो मेरे राजा मेरी चूत को, मैं बहुत प्यासी हूँ मेरी प्यास बुझा दो!
और मैं उनकी चूत को चाटने लगा।
5 मिनट में वो मेरे मुँह में झड़ गई और मैं उनके चूत के अमृत को चाट के पी गया।

फिर उसने उठ के मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लंड को मुँह में लेकर चाटने लगी, डाबर हनी की बोतल निकाल लाई और मेरे लंड पर डाल कर खूब चाटने लगी।

तभी कुछ देर बाद मैंने कहा- अलका भाभी, मेरा होने वाला है!
तो उन्होंने कहा- मेरे मुँह में झड़ो! मैं तुम्हारा अमृत पीना चाहती हूँ!

और वो मेरे लंड को तब तक चूसती रही जब तक मैं उनके मुँह में झड़ नहीं गया।

वो मेरा लंड लगातार चूस रही थी, जब तक मेरा लंड दोबारा खड़ा नहीं हो गया।

उसके बाद वो बेड पर लेट गई और मुझे अपने ऊपर ले लिया और मेरे लंड को अपनी चूत में रगड़ने लगी।
मैंने पूछा- भाभी! क्या मैं आपको चोद सकता हूँ?
वो बोली- और नहीं तो क्या तेरा लौड़ा मैं अपनी चूत पर इसीलिए तो घिस रही हूँ। बहनचोद चोद मुझे!

मैंने कहा- भाभी क्या आपको पसंद है गन्दी बात करना?
तो वो बोली- इसी में तो मजा है असली चुदाई का। खूब गालियाँ देके मुझे चोद और अपनी रखैल बना ले मुझे।

फिर मैंने उनकी टाँगे फैलाई और अपना लौड़ा उनकी चूत में डालने लगा तो वो चिल्लाने लगी- अरे भोसड़ी के! फ्री की चूत समझ के फाड़ने लग गया। अरे मादरचोद! आराम से चोद, मैं कोई भागे थोड़ी जा रही हूँ। मेरी चूत फट रही है निकाल ले अपना लौड़ा, मुझे नहीं चुदवाना तेरे से!

पर मैंने उनकी एक न सुनी और धीरे धीरे अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया और उनकी चूची के रस को पीने लगा।

थोड़ी देर में उनका दर्द कम हो गया तो वो गांड उछालने लगी और मुझे बोली- खाली डाले पड़ा रहेगा या फिर चोदेगा भी मुझे?

तो मैंने अपना लंड निकाला और एक बार में पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया और उन्हें जम के चोदने लगा और वो भी बहुत बड़ी चुद्दकड़ थी। खूब गांड उछाल के चुदवा रही थी और साथ में गालियाँ दे रही थी, और जोर से चोदने को कह रही थी।

मैंने उन्हें 10 मिनट तक खूब जम के चोदा और वो लगातार अह्ह ह्ह्ह अह्ह्ह ह्ह्ह अह और पेलो, फाड़ दो मेरी चूत को, चिथड़े उड़ा दो आज इस निगोड़ी के! इसने मुझे बड़ा दुःख दिया है। आज, संजू, इससे मत छोड़ना। इसे फाड़ देना अह्ह।

अब मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- अलका मैं झड़ने वाला हूँ।
वो बोली- मेरी चूत में झड़ो, मुझे तुमसे बच्चा पैदा करना है, तुम्हारे भैया को मैं संभाल लूंगी, फिलहाल तुम मुझे चोदो और मेरी बुर को सींच दो अपने पानी से।

मैं उन्हें चोदते चोदते उनकी चूत में झड़ गया और उन्हीं के ऊपर लेट के उनको किस करने लगा।
मैंने भाभी से कहा- भाभी, मुझे आपकी गांड बड़ी प्यारी लगती है क्या मैं आपकी गांड मार सकता हूँ?

इस पर बोली- अरे मादरचोद! आज चूत दी तो गांड के पीछे पड़ गया? चल कल मेरी गांड भी मार लेना। अब ये जिस्म तेरा हैं, तू जैसे चाहे मुझे चोद सकता है।

दोस्तो, उसके बाद मुझे जब भी मौका मिलता है, मैं अलका भाभी को चोदता हूँ.
और अब वो मेरे बच्चे की माँ भी बनने वाली है।
वो अब मुझसे काफी खुश है और मुझे ही अपना सब कुछ मानती है.

आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, मुझे कमेंट्स करके जरूर बतायें। Sex Stories

फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा मैंने 19 साल की उम्र में कॉलेज के लड़के के साथ लिया. गाँव से निकल कर शहर के कॉलेज में प्रवेश लिया और जल्दी ही एक दोस्त बना लिया.

सभी को नमस्कार, मेरा नाम अनुक्ति है मुझे घर पर सभी अनु नाम से ही बुलाते हैं.
मैं मध्य प्रदेश से हूँ.

मेरे घर पर मैं, पापा और मम्मी हैं.
पापा और मम्मी दोनों सरकारी नौकरी करते हैं.

दोस्तो, इस वेबसाइट की सेक्स कहानियां मैं 2011 से पढ़ती आ रही हूँ पर आज पहली बार अपनी सेक्स कहानी लिख रही हूँ.

यह 2013 की बात है.
मैं स्कूल की पढ़ाई गांव से पूरी कर चुकी थी. मैं कॉलेज में पढ़ने के लिए शहर में आई थी.

शहर आते वक्त मेरे साथ स्कूल की दोस्त छवि ही थी जिसने मेरे कॉलेज में दाखिला लिया था.
बाकी सभी सहेलियां शहर में तो थीं पर अलग कॉलेज और कोर्स में थीं.

इधर कॉलेज के हॉस्टल में हम दोनों साथ में ही रहती थी.

कॉलेज में हमारे नए दोस्त बन गए थे.
क्लास में मेरी बहुत लड़कों से अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मेरी क्लास में ही ऋषि भी था.
वह देखने में लंबा, तगड़ा और मिलनसार लड़का था.
मेरी दोस्ती ऋषि से थी.
हम बहुत कम समय में एक दूसरे से बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे.

ऋषि और मैं फोन पर एक दूसरे को मैसेज भेज कर बातें करते थे.
हमारे बीच कभी कभी नॉनवेज बातें भी हो जाती थीं.

छवि भी इस बात को जानती थी.
उसने तो 3 महीनों में ही अपना एक ब्वॉयफ्रेंड भी बना लिया था.

इसी तरह से कॉलेज का एक सेमेस्टर निकल चुका था.
हर लड़की चाहती है कि उसे हर लड़का देखे.

मैं ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहन कर कॉलेज जाया करती थी. मैं जानबूझ कर थोड़ा गहरे गले वाला कुर्ता पहनती थी ताकि जरा सा ही झुकने पर मेरा क्लीवेज दिख जाए.

ऋषि देखने में अच्छा लड़का था.
उसके पापा एक फैक्ट्री के मलिक थे.
उसकी एक छोटी बहन थी जो 12 वीं में थी.
उसकी मम्मी भी पापा के बिज़नेस में हाथ बंटाती थीं.

उसके पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, यह बात हमें भी कुछ दिनों पहले ही पता चली थी जब हम सभी फ्रेंड्स ऋषि के बर्थडे पर उसके घर गए थे.

ऋषि के घर का वैभव देख कर साफ पता चलता था कि उसके पापा रईस आदमी हैं.
पर ऋषि ने कभी भी अपने धन का घमंड नहीं किया था.
वह दिल का साफ और अच्छा इंसान था.

ऋषि और मैं अक्सर क्लास बंक करके गार्डन में बातें करते रहते थे.
धीरे धीरे हमारे बीच नजदीकियां बढ़ती गईं.

वह मेरे करीब आने की कोशिश करता, मुझे छूने की कोशिश भी करता.
मैं भी उसे मना नहीं करती थी.

उसने वैलेंटाइन पर मुझे प्रपोज किया.
मैंने भी कुछ ज्यादा सोचा नहीं और हां कर दी.
ऐसे ही समय गुजरता रहा.

कभी कभी वो मुझे मौका पाकर छेड़ता, मेरी गांड को मसल दिया करता था.

उसका ये स्पर्श अब मुझे भी अच्छा लगने लगा था.

हम दोनों मौका मिलते ही एक दूसरे को किस भी कर लिया करते थे.

वह मेरे मम्मे दबाने का मौका भी कभी नहीं छोड़ता था.

फिर धीरे धीरे अब बात किस से बढ़कर बूब्स दबाने और चूसने तक आ चुकी थी.
मुझे कोई ऐतराज नहीं था. असल में मैंने ही फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स का मजा ले लेना चाहती थी.

ऋषि चाहता था कि मैं लंड चूसूं … पर मैंने मना कर दिया, मैंने उसका लंड कभी नहीं चूसा था.

बस इसी तरह चल रहा था.

ऋषि सेक्स के लिए आतुर हुआ जा रहा था.
पर मैं एक अनजाने डर की वजह से उसे मना करके टाल दिया करती थी.

कुछ दिन बाद ऋषि ने कहा- आज रविवार है. पास में ही कहीं घूमने चलते हैं.

मैं भी फटाफट तैयार हो गयी.
वह मुझे लेने के लिए आया और हम दोनों बाइक पर घूमने के लिए निकल गए.

मैं छवि को बोल कर आई थी कि ऋषि के साथ में बाहर घूमने जा रही हूँ.

मैंने ऋषि से पूछा- कहां चलना है?
तो उसने बताया- शहर से पास में ही बहुत बड़ा तालाब है. वहां चारों ओर जंगल हैं, घने पेड़ हैं, प्रकृति का नज़ारा है. मजा आएगा, वहीं चलते हैं.
मैं राजी हो गई.

वहां जाकर देखा तो कुछ ही लोग थे.
उनमें भी ज़्यादातर कपल दिख रहे थे.

तालाब के दूसरी ओर पानी बह रहा था तो वहां कुछ लोग नहा भी रहे थे.
हम भी वहीं चले गए.

ऋषि ने कहा- क्या विचार है?
मैंने कहा- मैं नहीं आती.

वह मुझे ज़बरदस्ती खींच कर पानी में ले गया.
और हम दोनों पानी में मस्ती करने लगे.

वह मुझ पर पानी उड़ाता और गीला करने की कोशिश करता.

थोड़ी देर बाद हम दोनों थक कर वहीं पेड़ के नीचे बैठ गए और बातें करने लगे.

भीड़ कम होती गयी.

ऋषि ने कहा- अनुक्ति, चलो थोड़ा आगे आस-पास घूम कर आते हैं.
मैंने कहा- यहां क्या ही घूमेंगे?

पर वो नहीं माना और हम दोनों पैदल ही आगे बढ़ गए.
वहां कोई नहीं दिख रहा था.

थोड़ा और आगे गए तो एक बड़ी चट्टान के पीछे झाड़ियों में पेड़ के नीचे हमने एक कपल को देखा.
वो दोनों कपड़े पहन रहे थे.
उन्होंने हमें नहीं देखा.

फिर ऋषि ने कहा- चलो अनु, उनके निकलते ही वहीं चलते हैं.

मैं समझ गयी थी कि वहां पर जाने के बाद क्या होना है.
पर बिना कुछ कहे मैं भी चल दी.

वहां जाने के बाद ऋषि मेरे करीब आया और कहा- अनु यहां अच्छा मौका है.
मैंने कहा- यहां खुले में किसी ने देख लिया तो … नहीं बिल्कुल नहीं!
उसने कहा- ठीक है, पर किस तो कर ही सकते हैं.

इतने में उसने मेरे होंठों में अपने होंठों को डाल दिया.
उसके दोनों हाथ मेरे गर्दन को पकड़े थे और मेरे हाथ उसकी कमर को.

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर तक डाल दी और मैंने भी.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरी उम्र उस समय 19 साल से थोड़ी ज़्यादा ही थी.
मेरी हाइट 5 फुट 7 इंच की थी और 32-27-34 का मेरा फिगर था.

मैं काले रंग का टॉप पहने थी. वह बटरफ्लाई आस्तीन वाला था और उसके साथ मैंने जींस पहनी थी.

ऋषि की हाइट 5 फुट 10 इंच की थी.
वह जिम करता था तो बॉडी भी अच्छी थी.

उसकी उम्र भी 20 के आस पास ही थी.
उसकी छाती पर हल्के बाल थे पर वह छाती को क्लीन नहीं करता था.

उसके लंड का साइज़ सच बोलूं तो 5.5 इंच का ही था.
बाकी सेक्स स्टोरी की तरह 8 या 10 इंच का नहीं था.

वह मुझे चूमने लगा.

करीब 5 मिनट के बाद उसने कहा- यहां जगह साफ़ है, आराम से बैठ जाओ.
मैंने कहा- नहीं, कपड़े खराब हो गए तो प्राब्लम हो जाएगी. हॉस्टल भी जाना है.
उसने कहा- ठीक है.

तब उसने मुझे किस किया और मेरे मम्मे दबाने लगा.
फिर उसने कहा- अनुक्ति आज तो लंड चूस लो प्लीज़.

उसके बहुत कहने पर मैंने कहा- ठीक है … पर तुम मुँह में नहीं झड़ोगे!
उसने कहा- ठीक है.

उसने अपनी जींस और अंडरवियर घुटनों तक उतार दी.
वह वहीं पेड़ के नीचे पत्थर पर टेक लेकर बैठ गया और उसने मुझे लंड चूसने के लिए इशारा किया.

मैंने अपने हाथ से उसके 5.5 इंच और 2.5 इंच मोटे लंड को पकड़ा.
तो ऋषि बोला- तुमने सेक्स क्लिप्स पॉर्न में देखा ही है.

मैंने हां में इशारा करते हुए मुँह में लंड को लिया और चूसने लगी. मुझे स्वाद कुछ अच्छा नहीं लगा.
फिर भी धीरे धीरे करके मैं मुँह से लंड चूसने लगी.

वह जैसे दूसरी दुनिया में चला गया हो, आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगा.

मैं भी उसके लंड को मुँह में पूरा ले लेती और बाहर करती तो जीभ से उसके टोपे को चाट लेती.
उसका रंग हल्का गुलाबी सा हो गया था.

फिर कुछ देर में उसने मेरे सर को धक्का देकर अलग किया और अपना सारा माल बाहर निकाल दिया.

उसने मुझसे कहा- टेस्ट करना चाहोगी?
मैंने कहा- नहीं.

उसने कहा- प्लीज एक बार देख लो, अच्छा लगे तो ठीक … नहीं तो कोई बात नहीं.

मैंने जीभ से थोड़ा चखा तो गर्म और नमकीन सा स्वाद आया.

अच्छा या बुरा कुछ समझ में नहीं आया.

ऋषि ने कहा- डार्लिंग लंड को थोड़ा सा चाट कर साफ कर दो प्लीज.

मैंने अपने मुँह से उसके लंड को चाट कर साफ कर दिया.
मुझे स्वाद ठीक लगा.

उसने अपने कपड़े पहन लिए.
तो मैंने कहा- अब चलते हैं.

उसने कहा- अनु अभी कहां, रुको तुमने आज तक अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए हैं.
मैंने कहा- पर यहां खुले में नहीं बिल्कुल भी नहीं.

उसने मुझे खींच कर अपने करीब किया और मुझे किस करके कहा- अनुक्ति, प्लीज आज अपने मम्मे और चूत के दर्शन करा दो, यहां कोई नहीं है.
मैंने कहा- देखो कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी.
उसने कहा- कुछ नहीं होगा, मैं हूँ … सब संभाल लूंगा.

उसने मेरी जींस खोल दी और मेरे टॉप के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा.
वह उसमें ऊपर से हाथ डालने लगा.

मैंने कहा- ऐसे तो तुम टॉप फाड़ दोगे.
तब मैंने जींस को नीचे किया ही था कि उसने झटके से मेरी पैंटी को घुटनों तक नीचे खिसका दिया.

फिर उसने कहा- मम्मे चूसना है.
मैंने टॉप को ऊपर किया और साथ ही ब्रा को भी, जिससे बिना उतारे मेरे बूब्स वो चूस सके.

पहली बार उसने मेरे बूब्स को पूरी तरह ढंग से देखा था और चूत को भी.
चूत में हल्के हल्के बाल थे.

वह मेरे बूब्स को एक बच्चे की तरह पीने की कोशिश करने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.

मेरे दोनों बूब्स को चूसने के बाद उसने उन्ह हटाया ही था कि मैंने टॉप और ब्रा ठीक कर ली.

उसने कहा- अनु अब तुझे जींस उतारनी पड़ेगी.
मैं भी उतावली हो रही थी तो जींस उतार दी.

उसने कहा- अनु एक टांग पत्थर पर रखो.
वह मेरे नीचे आकर बैठ कर मेरी चूत को चाटने लगा.

उसकी खुरदुरी जीभ मेरे अन्दर आग लगा रही थी.
वह अपनी उंगली से मेरी चूत को अन्दर बाहर कर रहा था.

इसी तरह मेरी चूत ने पानी निकाल दिया और ऋषि ने उसे चाट कर चूत को साफ़ कर दिया.

फिर फटाफट कपड़े पहन कर हम दोनों वहां से निकल आए.

अब वासना की भूख दोनों को लग चुकी थी तो वापस हॉस्टल की ओर जाते समय ऋषि ने कहा- अनु, मुझे तुम्हारे साथ सेक्स करना है.
मैंने भी हामी भरी लेकिन फर्स्ट लव वर्जिन सेक्स के लिए कोई सेफ जगह चाहिए थी.
होटल के लिए मैंने मना कर दिया था.

ऋषि अपने दोस्त के फ्लैट के लिए जुगाड़ करने लग गया.
बस फिर जुगाड़ हो गया.

मैंने ऋषि से कहा- मैं बिना प्रोटेक्शन के नहीं करूंगी.
उसने कहा- ठीक है अनु.

उस दिन पहले रास्ते में रुक कर हम दोनों ने खाना खा लिया और उसने मेडिकल से प्रोटेक्शन के लिए कंडोम ले लिया.
फिर हम दोनों फ्लैट पर पहुंच गए.

दोस्त ने चाभी दी और कहा- फ्री हो जाओ तो कॉल कर देना.
वह किसी काम से बाहर चला गया.

ऋषि ने अन्दर से दरवाजा लॉक किया और मुझसे लिपट गया.
पहले उसने मेरे टॉप को निकाल दिया और मेरी नाभि को चूमा. ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा.

ब्रा को खोलने से पहले उसे ऊपर की ओर खिसका कर बूब्स को चूमने लगा और फिर खड़े खड़े ही मुझे दीवार पर टिकाते हुए पलटा दिया.
मेरी ब्रा को पीछे से खोल कर वहीं फेंक दी.

उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिए.
उसका लंड खड़ा होने लगा था.

वह मुझे उठा कर अन्दर ले गया और पलंग पर आते ही मेरी जींस उतार दी.

फिर वह मेरे दूध अपने दोनों हाथों से मसलने लगा और उनका रसपान करते हुए निप्पल को काट देता, जिससे मुझे दर्द के साथ साथ उत्तेजना भी बढ़ जाती.

वह मेरे कान गले गर्दन गालों को भी चूमता जिससे मैं और उत्तेजित हो जाती.

मेरी नाभि को चूमते हुए उसने मेरी पैंटी को भी उतार दिया और मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
वह पूरी बॉडी पर किस करने लगा.

मेरे मुँह से हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं.

उसने कहा- अनु अब 69 करते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.

वह मेरी चूत चाटता और अपनी उंगली रगड़ने लगता.
इससे मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, जैसे मेरे शरीर में करंट का झटका लग रहा हो.

मैं भी उसके लंड को चूस रही थी.
मेरी चूत गीली हो चुकी थी.

वह फिर उठा और जींस से कंडोम का पैकेट निकाल कर मुझे दे दिया.

मैंने पैकेट से कंडोम निकाल और ऋषि के लंड को पहना दिया.

बस उसने मुझे सीधा लेटाया और दोनों पैरों को अपने कंधे पर ले लिया, लंड को मेरी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा.
जिससे मैं पागल सी हो गयी.

फिर उसने चूत को थोड़ा सा अपने हाथ से खोला और अपना लंड मेरी चूत पर सैट कर दिया.

मेरा दिल धक धक करने लग गया था क्योंकि वो कभी भी झटके से लंड अन्दर डालने वाला था.

उसने कहा- अनु रेडी!
मैंने इशारे में कहा- हम्म्म.

उसने झटके से लंड अन्दर किया.
वो अभी लगभग आधा ही गया था कि मेरी एकदम से जोरदार चीख निकली.

उसने लंड को झट से बाहर किया और अन्दर पूरी ताकत के साथ डाला.
इस बार शायद लगभग पूरा चला गया था.

उसने फिर से एक बार लंड निकाल कर अन्दर डाला और मुझे चूमा.
मेरी आंखों में आंसू आ गए थे.

उसने कहा- पहली बार में होता है अनु!

फिर वह लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.
अब दर्द धीरे धीरे कम हो रहा था और मजा आने लगा था.

वह स्पीड में मुझे चोदता जा रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

वह मेरे मम्मे दबाता हुआ लंड को स्पीड से अन्दर बाहर कर रहा.
कुछ देर मैं पहले झड़ गयी और वो मेरे बाद.

वह मेरे ऊपर ऐसे ही लंड अन्दर डाल कर पड़ा रहा और मुझे किस करता रहा.

कुछ देर में उसका लंड छोटा सा हो गया और वह उसे बाहर निकाल कर बाथरूम में चला गया.

मैं बैठी और उंगली चूत की तरफ़ बढ़ाई तो उंगली पर लाल लाल खून सा था.
मेरी चूत फट चुकी थी.

तभी ऋषि आया और मेरी उंगली में लाल खून देखकर बोला- अब तुम वर्जिन नहीं रही.

मैं बाथरूम में गयी.
जब मैं वापिस आई तो मैंने देखा ऋषि मेरी ब्रा पैंटी अपने हाथ में लिए देख रहा था.
मैंने कहा- लाओ दो इधर.

उसने कहा- नहीं, ये मैं ले जाऊंगा. पहली निशानी है. इसमें तुम्हारी चूत की खुशबू है और ब्रा में भी.
मैंने कहा- फिर मैं!
उसने कहा- मैं तुम्हें दूसरी गिफ्ट कर दूंगा.

मैंने अपने कपड़े पहन लिए.
ऋषि बोला- अनु मजा आया?

मैंने कहा- आया तो सही, पर दर्द अब भी महसूस हो रहा है.
उसने कहा- ठीक हो जाओगी.

मैंने पूछा- मैं वर्जिन थी, तुम?
ऋषि ने कहा- मेरा भी पहला सेक्स था … बस मुठ मार लिया करता था.

मैं कुछ नहीं बोली.

उसने कहा- मैं तुम्हें फैशनेबल ब्रा पैंटी दूँ?
तो मैंने कहा- क्यों?

उसने कहा- थोड़ा सेक्सी पहनो.
मैंने कहा- घर?

उसने कहा- घर जाओ तो घर के हिसाब से … और यहां रहो तो यहां के हिसाब से.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर उसने मुझे हॉस्टल छोड़ा और मेरी चाल देखकर छवि मुस्करा दी.

उसने कहा- अनु, आज तो चाल ही बदल गयी.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड थीं, एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाती थीं.
उसे मैंने बताया कि आज मेरी पहली चुदाई कैसे हुई.

वह खुश हुई और बोली- आगे अब तो चुदाई में मजे ही आने हैं.
क्योंकि वह चुद चुकी थी उसके ब्वॉयफ्रेंड से … तो उसे सब मालूम था.

Antarvasna

हाय दोस्तो.. मैं सोहन.. अहमदनगर, महाराष्ट्र से Antarvasna हूँ. आज मैं आपको एक वास्तविक सेक्स बताने जा रहा हूँ.

आज से लगभग 2 वर्ष पहले जब मेरी उम्र लगभग 22 वर्ष की थी.

तब एक दिन मेरे घर मेरे मामा और मामी आए. वो पुणे में रहते थे लेकिन कुछ कारणों से उन्होनें अपना शहर छोड़ दिया और वो हमारे घर आ गए. मेरी माँ के दूर के रिश्ते में वह भाई लगते थे.

मेरी माँ ने उन्हें यहाँ रहने के लिए कह दिया. मेरी मामी गोरी-चिट्टी … बलखाती कमर और भरे हुए बदन की थीं. जब मैंने उन्हें पहली बार देखा तो देखता ही रह गया और उन्हें कैसे चोदूँ यह सोचने लगा.

मेरे मामा को काम की तलाश थी … तो मेरी माँ ने मुझसे कहा- तुम मामा के लिए कोई नौकरी की तलाश करो.
मैंने मामा के लिए एक अच्छी नौकरी की तलाश कर ली.. और मामा नौकरी पर जाने लगे.

इधर मामी घर में रहती थीं और मैं भी घर में अकेला रहता था. उसी बीच हम दोनों लोग बहुत घुल-मिल गए, मैं मामी से मजाक भी कर लेता था.

एक दिन वह घर में कपड़े धो रही थीं.. अचानक मेरी नजर उनके मम्मों पर पड़ गई. गोरे-गोरे मम्मों को देखकर मैं उत्तेजित होने लगा.

तभी मामी की नजर मुझ पर गई.. लेकिन मुझे पता नहीं चला और उन्होंने कुछ नहीं कहा.. वो बराबर अपना काम करती रहीं लेकिन शायद उन्होंने मेरा इरादा भांप लिया था.
इधर मेरी उनसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी. मैं मन ही मन में उन्हें चाहने लगा था और रात को ख्वाबों में उन्हीं को चोदने लगा.

तभी एक दिन मामी ने कहा- तुम मेरी भी नौकरी कहीं लगवा दो.
तो मैंने कुछ दिनों में उनकी भी नौकरी एक स्कूल में टीचर की जगह लगवा दी.

दूसरे दिन से मामी भी स्कूल जाने लगीं लेकिन अब मैं घर में अकेला रहता था, मुझे मामी की कमी महसूस होती थी.
मैं कुछ कर नहीं पा रहा था और चुप-चुप रहने लगा, मामी शायद यह समझ रही थीं.

एक दिन बिजली नहीं आ रही थी और हम सब लोग ऊपर छत पर आ गए तभी मामी भी आ गईं.
मैं उन्हें देखकर दूसरी छत पर चला गया जहाँ पर कोई नहीं था.
मामी भी वहीं पर आ गईं.

मामी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा- मैं तुमसे एक बात कहना चाहती हूँ.
मैंने कहा- क्या?
वो बोलीं- मैं तुमसे दोस्ती करना चाहती हूँ.

यह सुनकर मैं एकदम से चौंक गया और उनकी तरफ देखने लगा. मैंने उनसे पूछा- सिर्फ दोस्ती या और कुछ?
वह शरमा गईं और बोलीं- सच तो यह है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ..
तो मैंने पूछा- इस प्यार की सीमा क्या होगी?
वह बोलीं- तुम्हें वो सारे अधिकार होंगे जो तुम्हारे मामा के हैं.. लेकिन सिर्फ एक अधिकार नहीं होगा.

मैंने पूछा- कौन सा?
तो वो बोलीं- तुम सब जानते हो.
इस पर मैंने कहा- वही तो मेन अधिकार है.
वह शरमा कर चली गईं.

अब हम दोनों एक-दूसरे को किस कर लेते थे.. कभी छिप कर एक-दूसरे के अंगों को छू लेते थे.

मैं भी उनके मम्मों पर हाथ से सहला लेता था.. लेकिन उन्हें चोदने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और कुछ चोदने का समय भी नहीं मिल रहा था.

उनकी जांघ पर भी मैं हाथ से सहला देता था. कई बार मैंने उनको नहाते हुए भी पूरा नंगा देख लिया था और उन्हें भी पता था कि ये मुझे देख रहा है.. लेकिन फिर भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई … बस मुस्करा कर शरमा जाती थीं. जैसे एक पत्नी अपने पति से शरमा कर नशीली निगाहों से मना करती है.. वैसे ही वह मुझसे करती थीं.

एक दिन मेरे घर में सभी लोग कुछ दिन के लिए बाहर गए हुए थे.. लेकिन मैं नहीं गया था. मम्मी ने भी ज्यादा फोर्स नहीं किया.. क्योंकि वह जानती थीं कि घर में मामी हैं.. खाने-पीने की कोई परेशानी नहीं होगी, वह मुझे अकेले छोड़ने के लिए तैयार हो गईं, मामा और मामी से उन्होंने कह दिया- राज का ख्याल रखना.

दो दिन गुजर गए.. कोई मौका नहीं मिला.
एक दिन मामा ने बताया- उनकी चार दिन रात को ड्यूटी लगेगी..
तो मैं मन ही मन में खुश हुआ कि अब तो मैं मामी को चोद कर ही रहूँगा.

उस दिन मामा रात को 9.00 बजे चले गए और उन्होंने मामी से कहा- तुम रात को जिम्मेदारी से सारे ताले आदि लगाकर सोना.
मामी ने रात को सारे ताले आदि लगा दिए.
मैं अपने कमरे में जाकर सोने का नाटक करने लगा.

घर के सारे काम खत्म करके मामी 11.00 बजे मेरे कमरे में आईं और बोलीं- सो गए हो क्या?
मैंने कहा- नहीं..
वो मेरे पास आकर बैठ गईं.. मैंने मामी से कहा- क्या आपको नींद नहीं आ रही है?
तो उन्होंने कहा- अभी नहीं आ रही है..

वे मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरने लगीं. उन्होंने प्यार से मुझे देखा.. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें पकड़ कर बिस्तर पर लिटा लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.
करीब आधा घण्टे तक हम एक-दूसरे को प्यार करते रहे, इसी बीच मामी भी बहुत उत्तेजित हो गई थीं.

मैंने मामी से कहा- मैं तुम्हारी जांघों को चूमना चाहता हूँ..
वो राजी हो गईं.. मैंने उनकी साड़ी उनकी जाँघों से ऊपर कर उनकी जाँघें बहुत गोरी और चिकनी थीं.
जांघों को चूमते-चूमते मैं और ऊपर की ओर आने लगा.. तो बोलीं- सोहन क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं.. अपनी इच्छा को पूरा कर रहा हूँ.

और मैंने एकदम से अपने होंठ उनकी चूत पर रख दिए और अपनी जीभ से उनकी चूत को सहलाने लगा.. उन्हें एकदम ऐसा झटका लगा जैसे किसी ने ठहरे हुए पानी में कंकड़ मार दिया हो.
मामी कराहने लगीं- ओह.. राज ये तुम क्या कर रहे हो!?

मैं दूसरे हाथ से उनके मम्मों सहलाने लगा.

मामी को इतना मजा शायद कभी भी नहीं आया होगा. उन्होंने दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं और मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से सहलाने लगा.
उनकी चूत गोरी और लाल थी.. यह बहुत ही नरम थी और उसमें से गरम-गरम भाप निकल रही थी.

वे अपने दोनों हाथों से मेरे सर के बालों को ऊँगलियों से सहला रही थीं और कह रही थीं- सोहन मैं पागल हो जाऊँगी.. बहुत मजा आ रहा है..
मैं भी उनके चूत के दाने को अपनी जीभ से सहला रहा था.. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद वह बोलीं- खुद ही सब कुछ करोगे.. कि मुझे भी कुछ करने दोगे..

यह कहकर वे मुझे खींचने लगीं.. मैं अभी अपना पैंट उतार ही रहा था.. कि तभी एकदम से उन्होंने मेरा कच्छा उतार दिया और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं और बोलीं- तुम्हारा लण्ड तो काफी बड़ा है..

अब मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिल्कुल नंगा लिटा दिया और वो मेरी पास बैठकर मेरे लण्ड को चूस रही थीं.. साथ ही मेरे लण्ड की गोटियों से खेल रही थीं.
मैं उनकी चूत में उंगली डालकर आगे-पीछे कर रहा था, इस प्रकार उन्हें भी मजा आ रहा था.

उनकी गोरी-गोरी जांघें जिन पर एक भी बाल नहीं था.. उन्हें देखकर ही मैं इतना उत्तेजित हो चुका था कि मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
उधर मामी भी अब ये चाहती थीं कि मेरा लण्ड उनकी चूत में घुस जाए और मैं उन्हें चोदूँ.
कुछ देर बाद वह बोलीं- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा सोहन.. जल्दी करो.. मैं चुदने को बेकरार हूँ.

मैंने भी मामी को लिटाया और उनकी चूत में अपना लण्ड डालने लगा.. पहले तो वह अन्दर ही नहीं जा रहा था.. फिर मैंने एक जोर से धक्का मारा.. और वह जैसे ही अन्दर घुसा.. मामी की एकदम चीख निकल गई.

वो कराह कर बोलीं- धीरे-धीरे करो न..

मैं धीरे-धीरे करने लगा और मामी के गोरे-गोरे मम्मों को अपने मुँह में लेकर जीभ से सहलाने लगा. मामी मेरी बाँहों में सिमटी जा रही थीं और मेरे शरीर पर प्यार से हाथ सहला रही थीं.

वे कह रही थीं- ओह सोहन बहुत मजा आ रहा है.. ऐसे ही करो..
धकापेल चुदाई चल रही थी और पता नहीं कब धक्के लगाने की स्पीड बढ़ गई.
अब मेरे मुँह से भी आवाज निकल रही थी- ओह मामी.. पूरा अन्दर लो न..

और उधर मामी सिसकार कर बोल रही थीं- आह.. पूरा डाल दो.. मेरी चूत को फाड़ दो.. आह जल्दी करो..

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था तो मैंने कहा- मामी मैं झड़ने वाला हूँ..
तो उन्होंने कहा- लण्ड निकाल कर मेरे मुँह में डाल दो..

मैंने लण्ड निकाल कर उनके मुँह में डाल दिया. वो लण्ड को चूसने लगीं और मेरा पानी भी मुँह में ले लिया.

उस रात मैंने मामी को तीन बार चोदा और हम दोनों पूरी रात नंगे ही लेटे रहे. कभी वो मेरे लण्ड से खेलतीं.. तो कभी मैं उनकी चूत और मम्मों से मजा लेता.

उसके बाद मैं रोजाना मामी को चोदता रहा.. करीब दो वर्ष तक मामी मेरे ही पास रहीं, ऐसा लगता था कि हम दोनों पति-पत्नी हैं.

लेकिन दोस्तो, आज मामी मेरे पास नहीं रहती हैं.. वह अब ग्वालियर रहती हैं..
लेकिन उन पलों को मैं आज तक नहीं भूला.. जो खूबसूरत पल उन्होंने मेरे साथ बिताए, उन पलों को याद करके मैं आज भी उन्हें याद कर लेता हूँ. Antarvasna

आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी. मुझे ई-मेल जरूर करें.

Hindi Sex Stories

यह उन दिनों Hindi Sex Stories की बात है जब मुंबई में बार-डांस जोरों से चल रहा था। मेरी बीवी मायके गई हुई थी। ऑफिस से आने के बाद घर पर करने को कुछ नहीं होता था। मेरे कुछ दोस्तों को डांस बार जाने की आदत थी। कई बार उन्होंने मुझे साथ आने को कहा पर मेरी हिम्मत नहीं होती थी। हाँ इच्छा जरूर होती थी।

एक दिन घर आकर जब मैं टीवी देख रहा था, तभी एक भड़कीला गाना आने लगा, सीन डांस बार का था। बस फिर क्या था- मैंने अपने दोस्तों को फ़ोन किया और पूछा कि वे कहाँ हैं। पता चला कि वो वाशी के सन्डे-बार में बैठे हैं। बस मैंने गाड़ी उठाई और वहाँ पहुँच गया। भीतर गया तो वहाँ का नजारा देख दंग रह गया। चारों ओर थिरकती लड़कियाँ रंग-बिरंगी रोशनी में वे बहुत सेक्सी लग रही थी। मैं अपने दोस्तों के पास बैठ गया और ड्रिंक्स आर्डर करके डांस देखने लगा।

थोड़ी देर बाद ५०० रुपये का छुट्टा मंगवा के कोने में खडी एक लम्बी सांवरी लड़की को इशारा किया मेरे सामने डांस करने के लिए। जैसे ही उसने डांस करना शुरू किया तो बाकी सब लड़कियां खुद डांस करना बंद करके उसे ही देखने लगी।

क्या लाजवाब डांस कर रही थी !

मुझ पर जैसे अजीब सा नशा छा रहा था। मैं पैग पर पैग पिए जा रहा था और उसके सेक्सी बदन को मन ही मन निर्वस्त्र करता जा रहा था।

न जाने कब उसने अपना नाम पायल बता दिया। एक एक करके मेरे दोस्त घर जाने लगे, पर मैं था कि उठने का नाम ही नहीं ले रहा था।

बार बंद होने को आया तो उसने कहा कि क्या मैं उसको उसके घर पर छोड़ सकता हूँ?

मैं तो नशे में था और पता ही नहीं चला कि कब मैंने उसके घर के सामने गाड़ी खड़ी कर दी। उसने मुझे अन्दर आने को कहा और मैं उसके पीछे चल पड़ा।

मुझे सोफ़े पर बैठा कर वो अन्दर फ्रेश होने चली गई। मैं इतने नशे में था कि कब मेरी आँख लगी मुझे पता ही नहीं चला, पर मुझे हल्का सा एहसास होने लगा कि कोई मेरे करीब आकर बैठ गया है।

धीरे धीरे मुझे अपने बदन से कपड़े निकलने का एहसास होने लगा। नरम नरम होंठ मेरे बदन को चूमने लगे। वे होंठ मेरी आंखें, मेरे होंठ, मेरे निप्पल्स, मेरी नाभि को चूमते हुए मेरे लण्ड की ओर बढ़ने लगे।

अब मुझे हल्का हल्का होश आने लगा। फिर उन होठों ने मेरे लंड को सहलाना शुरू किया। अहिस्ते अहिस्ते वो मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी। नशे के बावजूद मेरा लंड में बहुत ज्यादा तनाव आ गया। उसने मेरे हाथ लेकर अपनी कड़क चुचियों पर रख दिया और मैं उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा। उसके चूचुक तन गए। फिर वो मुझे उल्टा लेटा कर अपने वक्ष से मेरे बदन के हर हिस्से की मालिश करने लगी।

ऐसा लग रहा था कि मैं किसी जन्नत में आ गया हूँ। फिर वो मुझे पीठ के बल लेटा कर वापस मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी। इसके बाद उसने अपनी चूत को मेरे लंड पर रख दिया और धीरे धीरे उसे अपने अन्दर लेने लगी। मैंने तड़प कर जब अपने कुल्हे उठाने चाहे तो उसने मुझे ऐसे करने से रोक दिया।

मैं बेहाल होता जा रहा था पर उसे कोई हड़बड़ी नहीं थी, वो धीरे धीरे मुझे चोदने लगी। जैसे ही उसे एहसास होता कि मेरा झड़ने वाला है तो वो रुक जाती। ऐसा उसने कई बार किया।

फिर उसने मेरे मुँह में अपनी चूची डाल दी और जोर से चूसने को कहा। मेरे ऐसा करते ही वो मुझे जोर जोर से चोदने लगी, उसकी चूत टाइट होने लगी। इतनी टाइट की ब़स मजा आने लगा। २० २५ जोरदार झटके के बाद वो पागलों जैसे हो गई और और ऐसे लगने लगा कि वो मुझे पूरा का पूरा अपने चूत के अन्दर समां लेना चाहती है।

मेरा भी सब्र चरम पर पहुँच गया। फिर अचानक उसकी चूत एकदम से गीली हो गई और वो झड़ने लगी, मैंने भी अपना पानी छोड़ दिया। कसम से इससे ज्यादा पानी पहले कभी नहीं निकला था।

थकान के मारे मेरी आँखें बंद होने लगी। वो मेरे ऊपर से उतर कर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर प्यार से उसे साफ़ करने लगी। ऐसा आनंद आने लगा कि कब नींद लगी पता ही नहीं चला। जब आँख खुली तो अपने आपको अपनी गाड़ी के अन्दर पाया। गाड़ी उसी बार के नीचे खड़ी थी। सुबह हो चुकी थी, खिड़की पर एक भिखारी आवाज लगा रहा था।

बहुत कोशिश के बाद भी कुछ याद नहीं आ रहा था कि मैंने किस घर में हसीं रात बिताई थी। बस हल्का सा पायल का चेहरा याद आ रहा था।

अगले दिन शाम को फिर दोस्तों के साथ उसी बार में पायल से मिलने गया तो पता चला कि वो किसी और बार में चली गई, पता नहीं कहाँ। Hindi Sex Stories

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