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दिन में बंगाली भाभी के साथ लेस्बियन सेक्स करने के बाद मुझमें सेक्स की भूख कुछ ज्यादा ही बढ़ गई लगती थी।
मगर मैं क्या करती, सुनील को तो डांटकर भगा चुकी थी।
उसका रोता हुआ चेहरा देख कर मुझे हंसी सी आ रही थी।
लेकिन मैं बिल्कुल ही निष्ठुर हो चुकी थी।
मेरे मन में ग्लानि भी थी कि मैंने अपने पति को धोखा दिया है।
लेकिन अब तो इस बारे में कुछ किया नहीं जा सकता था क्योंकि मैं तो सुनील से अपनी चुदाई करवा चुकी थी।
यही सोचते हुए शाम हो गई।
अब मेरे पति के आने का समय हो गया था।
मेरी बेटी जाग गई तो मैंने उसे दूध पिलाया।
इतने में ही मेरे पति आ गए।
शाम से ही मैंने अपने पति को सेक्स के लिए उकसाना शुरू कर दिया था, एक बार तो मैंने उनको तगड़ा वाला स्मूच कर दिया।
फिर एक बार मैं उनकी गोदी में बैठ कर अपनी गांड उनके लन्ड पर रगड़ने भी लगी।
मेरे पति भी मेरा साथ देने लगे, मेरे चूचे दबाने लगे तो कभी मेरी गांड में उंगली भी करने लगे।
अभी रात होने में देर थी, गुड़िया भी जगी हुई थी।
इसलिए मैंने खाना बना कर पहले गुड़िया को दूध पिलाया।
फिर हम दोनों ने खाना खाया।
मैं खाना खाकर गुड़िया को सुलाने लगी और मेरे पति मुझे बार बार देख कर मुस्करा रहे थे।
जैसे सोच रहे हों कि आज तो मैंने उनका कत्ल कर देना है।
करीब 9 बजे गुड़िया सो गई तो मैं धीरे से उठी.
और फिर मैंने अंगड़ाई ली और धीरे-धीरे अपनी गांड मटकाते हुए कपड़े खोलने लगी।
बस मैं पैंटी में आ गई क्योंकि चूचों में दूध इतना आता है कि चूचे बहुत भारी हो गए हैं। उनका दूध मुझे मेरे पतिदेव को पिलाना पड़ता है।
मुझे देख कर मेरे साहब भी कपड़े खोलकर सिर्फ अंडरवियर में आ गए।
मैं उनके पास चिपक कर उनके कंधे पर सिर रखते हुए एक पैर उनके ऊपर रखकर लेट गयी।
मेरा घुटना उनके लन्ड को छू रहा था और मैं एक हाथ से उनके लन्ड को सहला रही थी।
आखिरकार जो डर था वही हुआ।
वे पूछ बैठे- आज इतनी मस्ती क्यों आ रही है ये बता?
एक बार तो मैं हड़बड़ा गई लेकिन सम्भल कर बोली- आज मुझे मेरी सुहागरात याद आ गई थी। जबकि उनको पता ही नहीं कि मैं एक दिन पहले सुनील के साथ सुहागदिन मना चुकी थी।
बस इतना सुनते ही मेरे पति मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह टूट पड़े।
वे मेरे होंठों को, मेरे गालों को, और मेरी चूची को दबाकर दूध की धार खुद के मुंह में लेने लगे, जोर से मुझे मसलने लगे।
मैं सिर्फ आह … ही कर पा रही थी।
सच में मेरी जिंदगी की वो सबसे हसीन रात थी।
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तभी वो मेरे पैरों को चाटते हुए मेरी चूत तक आ गए।
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चाटने की वजह से मेरे निप्पल तन गए थे, मेरे अंदर कामरस बहने लगा था।
बस मुझे लगने लगा कि अब तो चोद ही दे ये।
पतिदेव भी समझ गए, उन्होंने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा दिया जो कि हमेशा लगाते हैं।
इससे चूत ऊपर हो जाती है और टांगें चौड़ी करने से लन्ड अंदर बच्चेदानी तक पहुंच जाता है।
मेरे पति अपना लन्ड मेरी चूत में रगड़ने लगे।
इससे मैं और ज्यादा तरस गई और उनसे बोली- यार अब चोद दो! अब नहीं रहा जाता बस!
तभी एक झटका लगा और उनका आधा लन्ड मेरी चूत के अंदर घुस गया।
मेरे मुंह से आह्ह निकल गई और मैं बोली- आराम से करो यार, हमेशा ही क्यों हवसी बने रहते हो!
लेकिन उन्होंने जैसे सुना नहीं …बस दूसरा झटका लगा और लन्ड सीधा मेरी बच्चेदानी के मुंह से टकराया।
थोड़ा दर्द हुआ लेकिन मजा भी आ गया।
फिर पति धक्के पर धक्के लगाने लगे और मैं चूतड़ उचका कर लंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
ये तो राजधानी मेल की तरह शुरू हुए और लगातार 10 मिनट तक मुझे ठोकते रहे।
फिर उन्होंने मेरी टांगें पकड़ कर उठा लीं और खुद घुटनों के बल बैठकर चोदने लगे।
मेरे मुंह से आह … आह … निकलती जा रही थी और चुदाई की मस्ती में चूर हो चुकी थी।
फिर ये पूछने लगे- माल चूचियों पर निकालूं या चूत में?
मैं बोली- चूत में!
इतना कहते ही मेरी चूत का पानी भी छूटने लगा और साथ में पतिदेव भी झड़ गए।
हम दोनों पस्त होकर करीब 15 मिनट ऐसे ही पड़े रहे।
फिर मैंने उनको हटने को बोला।
तौलिया लेकर मैंने अपनी चूत साफ की; उनके लन्ड को पौंछा, एक बार किस किया और सो गई।
अगली सुबह उठी तो मैं संतुष्ट थी।
लेकिन पता नहीं क्यों मुझे सुनील का लंड रह रहकर याद आ रहा था।
अब खुद ही मेरी इच्छा उससे चुदवाने की हो रही थी।
सुनील रोज मेरे घर के सामने से निकलने लगा और उसको लालच रहता था कि वह मुझसे फिर बात करना शुरू करे।
वह इतना तो समझ ही गया था कि मैंने उसकी बात को राज रखा हुआ है क्योंकि मेरे पति उससे नॉर्मल तरीके से ही मिल रहे थे।
अब मेरे मन में वापस उससे चुदवाने की इच्छा होने लगी थी।
लेकिन एक डर भी लग रहा था कि किसी को पता चल गया तो क्या होगा!
मेरे पति की शिफ्ट शाम 4 बजे से रात 12 बजे की थी।
अचानक 2 बजे सुनील अपने स्कूल की छुट्टी करके घर आ गया।
वह मेरे पति से बात करने लगा.
तभी मेरे मन में ये ख्याल आया कि चलो इसको फिर से बुला ही लेते हैं।
तो मैंने कहा- आपको बेटी रोज शाम को याद करती है और आप उसे घुमाने भी नहीं ले जाते।
इतना सुनते ही उसकी जैसे आत्मा प्रसन्न हो गई और बोला- हां भाभी, थोड़ा बिजी था … आज लेकर जाऊंगा।
वह ठीक 6 बजे घर आ गया और बेटी को घुमाने ले गया।
करीब आधे घण्टे बाद वह वापिस आया और कमरे में बैठ गया।
मैंने चाय बनाई और हम साथ में पीने लगे।
फिर सीधे ही उसने बोला- भाभी, चूत की खुजली बर्दाश्त नहीं हुई न? मैं तो जानता हूं कि जो एक बार मुझसे चुदवा ले, दोबारा भी चुदवाती जरूर है। बताओ कितने बजे आऊं?
मैं बोली- रात 9.30 के बाद आना, तब तक मैं गुड़िया को भी सुला दूंगी।
उसके बाद मैंने रात की तैयारी करनी शुरू कर दी।
खाना तो 3 बजे बन ही गया था क्योंकि 4 बजे उनको भी टिफिन देना होता है।
उसके बाद मैंने अपनी चूत के बाल साफ किए।
गर्मी के दिन थे तो शाम को दुबारा नहा भी ली और गुड़िया को जल्दी सुलाने की कोशिश करने लगी।
गेट मैंने खुला ही छोड़ दिया था और गुड़िया को लेकर बेड पर लेटा कर सुलाने लगी।
करीब 9 बजे तक गुड़िया सो भी गई।
फिर धीरे से मुझे भी नींद आ गई।
मुझे पता भी नहीं लगा कि कब सुनील मेरे घर में दाखिल हो गया।
वह फिर मेरे मम्में सहलाने लगा और मेरे गाल पर प्यार करने लगा।
ऐसा करने से मेरी आँख अचानक खुल गई तो वो दूर हो गया और बोला- भाभी, दूसरे बिस्तर पर बैठते हैं।
फिर हम दोनों उठकर दूसरे बिस्तर पर आ गए।
गुड़िया के पास मैंने तकिया लगा दिया जिससे कि वह बीच में न जगे।
फिर हम दोनों ऐसे चिपक गए जैसे कि बरसों बाद मिले हों।
मेरी और उसकी जीभ एक दूसरे के साथ खिलवाड़ कर रही थी।
वह कुर्ते के ऊपर से मेरे मम्में दबा रहा था, सहला रहा था।
कभी मेरी गांड पकड़ कर दबा रहा था और मैं भी उससे बेल की तरह लिपटी हुई थी।
उसको बस जितना मैं भींच सकती थी उतना मैंने भींच रखा था।
दोनों की लार एक हो रही थी।
करीब 15 मिनट तक यही स्थिति रही हम दोनों की।
उसके बाद हमने एक दूसरे की तरफ देखा और जैसे कहा हो कि कहां थे यार इतने दिनों तक हम दोनों।
तभी उसने मुझे खड़े खड़े पलट दिया।
अब वह मेरी पीठ और गर्दन को पीछे से चूमने लगा, साथ-साथ मेरे चूचे भी दबाने लगा।
मेरा दूध मेरे कुर्ते को गीला कर रहा था।
उसने मेरा कुर्ता उतार दिया; मैंने हाथ उठा कर उसका साथ दिया।
अब मेरे मम्मे आजाद थे क्योंकि मैंने ब्रा नहीं पहनी थी।
तभी उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खोल दिया।
अब चूंकि पैंटी नहीं थी तो मैं एकदम नंगी खड़ी थी।
फिर मैंने बोला कि वो भी उतारे कपड़े।
तो वह सब कुछ उतार कर मेरे पास आ गया और मेरे ऊपर लेट गया।
उसका मोटा लन्ड मेरी चूत को छू रहा था और मैं आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।
वह मेरे दूध की अमृत धार का पान कर रहा था और मैं उसकी पीठ सहला रही थी।
तभी वो उठकर मेरे पैर के अंगूठे को चूसने लगा।
फिर बोला- भाभी, मैं आज से आपका गुलाम हूं।
वह चाटते हुए मेरी जांघों तक आ गया।
फिर वह मेरी नाभि को चाटने लगा।
अब मैं मचल पड़ी थी।
इतना मजा आ रहा था कि मैं लिख नहीं सकती।
बस मैं आह … आह कर रही थी और पैर हल्के से पटक रही थी।
ऐसा लग रहा था कि बस ये मादरचोद मुझे चोद दे।
पर सुनील ऐसा नहीं कर रहा था।
तभी वह अपना मुंह मेरी चूत पर ले गया और हाथों से मेरी चूचियों की घुंडियों को उमेठने लगा।
बस कुछ बयां नहीं कर सकती कि मैं कितने आनन्द के सागर में गोते लगा रही थी।
उसने धीरे-धीरे मेरे भगनासा को चाटना शुरू किया; फिर मेरी चूत में अपनी जीभ घुसाने लगा।
यह मेरे लिए अलग अनुभव था।
बस मैंने उसका सिर पकड़ कर अपनी चूत में दबा दिया।
मेरे मुंह से बस आह-आह निकल रही थी।
तभी मेरा कामरस छूट गया और उसने अपना मुंह हटा लिया।
मेरी सांसें लम्बी-लम्बी चल रही थीं।
मुझे लग रहा था कि मैं स्वर्ग में हूं।
इतना मजा मुझे आज तक नहीं मिला था।
फिर मैंने सुनील से कहा- अब ऊपर आ जाओ।
वह मेरे पास आ गया और ऊपर लेट गया।
उसका लन्ड चुभता हुआ मुझे मेरी चूत में महसूस हो रहा था।
तभी वह उठा और उसने मेरी गांड के नीचे तकिया लगा दिया।
मैंने उसको बोला कि वो छोटा तौलिया इसके ऊपर रख ले क्योंकि जो तकिया मेरी गांड के नीचे लगा था, वो मेरे पति का था।
उसने ऐसा ही किया और मेरी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर अपना लन्ड मेरी चूत के मुंह पर लगा दिया।
मैं अपनी गांड उचका कर उसका लन्ड लेने की कोशिश करने लगी।
लेकिन वह ऐसे ही रहा, मानो मुझे और तड़पाना चाह रहा।
तभी मुझे गुस्सा आ गया और कहा- मादरचोद, चोद ले अब तो!
तभी सुनील मुस्कराया और उसने अपना 2 इंच मोटा लन्ड मेरी चूत में एक झटके में आधा डाल दिया।
मेरी चूत गीली थी; फिर भी मुझे लगा कि मेरी चूत की दीवालों को किसी ने छील दिया हो।
मैंने कहा- कुत्ते धीरे कर!
लेकिन अब वह कहां सुनने वाला था … अगले ही पल एक करारा शॉट पड़ा और उसका लन्ड मेरी बच्चेदानी तक पहुंच गया।
बस मेरे लिए बहुत था।
मैंने बोला- मादरचोद … अब रुका तो फिर कुछ नहीं करने दूंगी।
फिर चल पड़ा वो राजधानी मेल की तरह।
लंड कब अंदर हो रहा था और कब आधा बाहर हो रहा था, मुझे पता नहीं लग रहा था।
वह बड़े ही खतरनाक तरीके से चोद रहा था।
मैं तो सिर्फ आह-आह कर जोर से आवाज निकाल रही थी।
पर मैं कोशिश कर रही थी कि आवाज ज्यादा तेज न हो।
करीब 10 मिनट में मेरा शरीर अकड़ने लगा और मेरा पानी छूट गया।
मैंने उसे रुकने को बोला और लम्बी सांसें लेने लगी।
तभी सुनील बोला- भाभी घोड़ी बन जाओ, अब पीछे से चोदने दो।
मैं मेरे घुटनों और मेरी कुहनियों पर आ गई जिससे मेरी चूत पीछे से खुल गई क्योंकि मुझे पता था कि लन्ड मोटा है, दर्द करेगा।
बस इस बार चूत गीली थी और एक शॉट में लन्ड अंदर चला गया।
फिर सुनील शुरू हो गया, मेरी धक्कापेल चुदाई शुरू हुई।
मेरे चूतड़ों पर पड़ने वाली थाप और थप्पड़ अलग ही मजा दे रहे थे।
करीब 5 मिनट बाद सुनील बोला- भाभी मेरा आने वाला है, कहां निकालूं?
मैंने कहा- अंदर मत निकालना!
तभी उसने अपना लन्ड बाहर निकाल कर सारा माल मेरी गांड पर निकाल दिया।
वह फिर साइड में पस्त होकर पड़ गया।
मैं भी पेट के बल लेट गयी।
सच में बहुत मजा आया।
थोड़ी देर बाद मैंने उसके लन्ड को तौलिया से पौंछा।
उसने मेरी पीठ को पौंछा।
हमने कपड़े पहने, एक जोरदार हग किया।
उसके बाद उसने किस किया और वह चला गया।
मॅाम फक कहानी में मैंने ट्रेन में अपने पापा की दूसरी बीवी को चोदा, कई बार चोदा. फर्स्ट क्लास के केबिन में 4 लोग थे, दूसरा कपल भी चुदाई में लगा था.
दोस्तो,
मेरा नाम विकी है. हम लोग पुराने पैसे वाले रईस हैं.
पापा स्कूल में प्रिंसिपल हैं.
मेरे पापा ने दो शादियाँ की थी. दोनों पत्नियों को एक साथ ही रखा हुआ था.
कुछ साल पहले मेरी जन्मदात्री इस दुनिया से चली गयी थी.
अब मेरी दूसरी माँ ही है.
मैं अपनी सौतेली मां के बारे में बता दूं.
मां का नाम निर्मला है. वह पेशे से हाउसवाइफ हैं और घर में ही रहती हैं.
यह मॅाम फक कहानी तब की है जब हम शहर से हमारे गांव भागलपुर के पास जा रहे थे.
हमारी फर्स्ट एसी की टिकटें थीं और एक ही कंपार्टमेंट में थीं जहां एक रूम होता है और 4 सीटें होती हैं.
मां की नीचे वाली सीट थी और मेरी उनके सामने वाली ऊपर की सीट थी.
करीब दो घंटा बाद हमारे कम्पार्टमेंट में एक कपल आया.
शायद उनकी नई नई शादी हुई थी.
पूछने पर पता चला वह बीवी को मायके से लेने आया था.
अब वे दोनों अपने घर जा रहे थे.
अब दोनों की सेक्सी हरकतें चालू हो चुकी थीं.
उनका एक दूसरे से सेक्सी बातें करना और बात बात में एक दूसरे को टच करना चल रहा था.
मां यह सब देखकर शर्मा रही थीं.
शायद उनको अपने दिनों की याद आ रही थी.
मैंने मां को होंठ चबाते हुए देखा और जब किसी की नजर नहीं थी, तो मां ने साड़ी सैट करने के बहाने अपनी चूत भी खुजाई थी.
उस वक्त मैं उन्हें देख रहा था.
जैसे ही उन्होंने मेरी तरफ़ देखा, मैं यहां वहां देखने लगा.
अब मुझे उनकी हरकतें मां के ऊपर लगे हुए शीशे में साफ दिख रही थीं.
तभी मुझे उस सामने वाली औरत के पति ने देख लिया कि मैं उन दोनों को प्यार की हरकतें करता देख रहा हूँ.
उस आदमी ने मुझे इशारा कर बाहर आने को कहा.
मैं आ गया और वह भी पीछे आ गया.
उसने कहा- भाई, मेरी नई नई शादी हुई है. तुम लोग ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा?
मैंने सॉरी कहा.
तो उसने कहा- कोई बात नहीं. अरे मुझसे कंट्रोल ही नहीं हो रहा है. तुम्हारा भी क्या दोष है … और सामने जो औरत बैठी है, मेरी पत्नी उसे समझा रही है. तू समझ गया तो मेरा एक काम करेगा. तू उनके साथ बैठ जा. उनको कंपनी दे दे. हम यहां लाइट बंद करके आते हैं. मेरा स्टेशन आने को अभी 5-6 घंटे हैं. उसके बाद मुझे घर पर ऐसा मौका 4-5 दिन नहीं मिलेगा. भाई मान जा. क्या पता अगर उस आंटी ने तुझे चांस दे दिया, तो कुछ भी हो सकता है. मजे ले ले!
मैंने उससे कहा- ठीक है.
कुछ देर बाद हम अन्दर आए तो मैं ऊपर न जाकर मां के बगल में ही बैठ गया.
मां ने कहा- उनको प्राईवेसी चाहिए, तू यहीं मेरे साथ बैठ जा.
फिर उन्होंने पूछा कि लाइट बंद कर दें?
मैंने कहा- हां कर दो.
उसके बाद अंधेरे में मैं और मां एक दूसरे से सट कर बैठे थे.
अब हमें कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था पर उनकी हरकतों की आवाजें आ रही थी.
उनकी चूमने की आवाज और उस लड़की का मादक भाव से सिसकना सुनकर मेरा लंड तन गया था.
मेरा हाथ मां की तरफ था.
मुझे लग रहा था कि मां अपने मम्मों से मेरी कोहनी पर दबाव डाल रही हैं.
इतने में मां का फोन आया तो लाइट जली.
हम दोनों ने देखा कि वह औरत ऊपर से नंगी हो चुकी थी और वह आदमी उसकी गोदी में बैठा, उसके मम्मे चूस रहा था.
मां ने हड़बड़ा कर फोन कट किया और फोन ब्लाउज में डाल लिया.
जैसे ही हाथ नीचे किया, तो मेरी जांघों पर लंड के करीब हाथ रख दिया.
मैं कुछ नहीं बोला.
फिर ना जाने क्यों … मां ने हाथ सरका कर लंड पर रखा और मेरे खड़े हुए लंड को महसूस करने लगीं.
मां मेरे लंड को भांप रही थीं.
उन्होंने लंड को पकड़ने की कोशिश की.
शायद उन्हें पता चला होगा कि यह मेरा लंड है, तो उन्होंने झट से हाथ हटा लिया.
अब मेरा पारा चढ़ गया था, मैंने हाथ पीछे लेकर मां की कमर पर रखा और वहां से हाथ निकाल कर मां के पेट को मसलने लगा.
मां फुसफुसा कर बोलीं- बेटा यह क्या कर रहा है!
मैंने पूछा- क्या?
मां कुछ नहीं बोलीं.
अंधेरे में मां ने वापस मेरे लौड़े पर हाथ रखा.
इस बार उन्होंने उठाया नहीं.
मुझे ऐसा लगा जैसे वे इशारा दे रही थीं कि चलो हम भी कुछ करते हैं.
मैंने अपना एक हाथ मां के मम्मों पर रखा और मसलने लगा.
मां मेरे कान में धीरे से बोलीं- बेटा, यह गलत है.
मैंने मां के कान में कहा- छोड़ो ना मां … किसे पता चलेगा. प्लीज मां करने दो ना! बस एक बार, मैं इसके बाद ना मांगूंगा और ना किसी से कुछ कहूंगा.
मैं ऐसे कहते कहते मां के कान और उनकी गर्दन को चूमने लगा.
उनकी सांसें धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थीं.
माहौल में गर्मी बढ़ रही थी.
मैं मां का ब्लाउज खोलने लगा.
मां ने मेरा हाथ पकड़ा मगर मैंने ब्लाउज के सारे हुक एक एक करके खोल दिए.
मां का ब्लाउज खुल चुका था और मां का हाथ अभी भी मेरे हाथ पर ही था.
मैं समझ गया था कि मां गर्म है और यही मौका है उनकी चूत पर लौड़ा मारने का.
अब मैं मां की साड़ी को ऊपर खींचने लगा.
मां ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया लेकिन इस बार उन्होंने रोका नहीं.
मैंने साड़ी ऊपर की और मां की जांघों पर हाथ फेरने लगा.
मां की सांसें तेज़ चल रही थीं.
‘हम्मम हम्म सों सों …’ की आवाजें आ रही थीं.
मैं चूत पर गया और चड्डी के ऊपर हाथ फेरने लगा.
चड्डी गीली सी लगी इसलिए मैंने अन्दर हाथ डाला.
शायद मां ने 2-3 दिन पहले ही चूत साफ की थी. उनके छोटे छोटे बाल आए हुए थे.
उनकी चूत पर हाथ फेरने का क्या मीठा अहसास था.
मुझे उनकी चूत के होंठ समझ नहीं आ रहे थे.
यह मेरा पहली बार था, जब मैं किसी की चूत को टच कर रहा था.
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर घुसाया और मेरी उंगली पकड़ कर चूत के छेद के अन्दर डाल दी.
फिर गांड उठा कर इशारा दिया कि अन्दर बाहर करो.
मैंने चूत से हाथ निकाला और खुद से दो उंगलियां डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
तब तक सामने वाली सीट पर चुदाई चालू हो चुकी थी.
पच फच धक्कों की आवाजें आ रही थीं.
मैं उठा और अपनी पैंट निकाल कर नंगा हो गया.
फिर मां के पास बैठ कर उनकी चड्डी निकालने के लिए हाथ लगाने लगा.
पर मां पहले ही चड्डी निकाल टांगें फैला लेटी हुई थीं.
मैं मां के ऊपर लेट गया.
मां ने मेरा लंड पकड़ चूत पर सैट किया और धक्का देने को बोलीं- पेल दे!
जैसे ही मेरा हैवी लंड चूत के अन्दर गया, मां की चीख निकल गई- उई मर गई आह आराम से कर ना!
मेरे कुछ ही धक्कों में मां सामान्य हो गईं.
मेरा लंड आसानी से अन्दर आ जा रहा था.
अब हम भी फच फच की आवाज़ें करने लगे.
मां गांड उठा उठा कर चुदवा रही थीं.
अब मैंने मां के मम्मे चूसने को हाथ ऊपर किए, तो वे नंगे थे.
मां ने ब्रा पहले से ही ऊपर कर ली थी.
मैं बुरी तरह से मम्मे चूसने लगा और काट भी रहा था.
मां कह रही थीं- आह काट मत बेटा … बस चूस कर मजा ले और ऐसे ही धक्के देता रह … बड़ा अच्छा लग रहा है.
मैं धक्के देते देते हुए ही मां की चूत के अन्दर झड़ गया.
मां भी झड़ गई थीं.
उन्होंने मुझे कसके पकड़ लिया और अपनी झड़ी हुई चूत को रगड़ने लगीं.
हम दोनों ने अपने आपको संभाला.
मैंने मां की चड्डी अपनी जेब में छुपा ली.
थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे के साथ लेटे रहे.
फिर एक स्टेशन आया तो खिड़कियां खटखटाई जाने लगीं- चाय चाय.
सामने की सीट वाले उस आदमी ने बाहर जाकर चाय ली.
मेरी मम्मी ने भी मुझसे चाय मँगवा ली.
वह आदमी मुझे देख कर हंस रहा था. उसने मुझे इशारा किया.
हम दोनों पानी लेने के बहाने बाहर गए.
बाहर आकर वह मुझसे बोला- भाई सही खेल गया तू तो … क्या गजब माल बजाया है. वैसे एक बात बोलूं यह मेरी बीवी नहीं है, मेरी बहन है.
मैं शॉक्ड हो गया.
मैंने कहा- चल झूठे … ऐसा भी कहीं होता है?
“क्यों नहीं होता. आज तूने क्या किया. तुझे क्या लगा कि मुझे पता नहीं चलेगा कि जिसको तूने चोदा है, वह तेरी कौन है? मैंने बाहर लगे चार्ट पर तुम्हारे नाम पढ़े थे! तू मॅाम फक कर रहा था.”
अब मेरी बोलती बंद हो गई.
मैं उदास हो गया और सोचने लगा कि यह मुझसे क्या हो गया!
वह बोला- भाई टैंशन क्यों लेता है, साले मजे ले इतना बड़ा कांड किया है तूने! हर फैमिली में ऐसे ही होता है, बस कोई बताता नहीं है. अब मुझे ही देख ले अपनी बहन को बीवी की तरह चोदता हूँ.
कुछ रुक कर वह फिर से बोला- हमारे पास तो अभी मौका है. हम लोग तो यहां से जाने से पहले एक और शॉट मारने वाले हैं. अब तक मेरी बहन ने तेरी मां का दिमाग सैट कर दिया होगा. अब तुझे जब चाहे चूत मिलेगी, नहीं भी मिली तो अब भी मौका है. जो चाहे वह कर ले.
अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गए.
मेरी मां और उस लड़की की बातों से लग नहीं रहा था कि उनका कोई डिस्कशन हुआ था.
उन दोनों में हंसी मजाक चल रहा था.
फिर टीसी टिकट चैक करने आया.
अब उस आदमी ने बोला- लाइट बंद कर दूँ … कोई दिक्कत तो नहीं है आपको!
मैं हंस कर बोला- हां जी जरूर जरूर.
मैं ऊपर वाली बर्थ पर जाने लगा तो मां बोलीं- बेटा कहां जा रहा है, यहीं मेरी बगल में सो जा!
अब मैं बाहर की तरफ सो रहा था और मां अन्दर की तरफ सीट पर.
जगह कम पड़ रही थी, इसलिए हम दोनों चिपक कर सो रहे थे.
वे दोनों पुनः शुरू हो चुके थे.
उसकी बहन की चूड़ियों की आवाज गूंज रही थी व उसकी खिलखिलाने की आवाज आ रही थी.
मैं सोच रहा था कि अब क्या होगा.
क्या मैं आगे फिर से कुछ करूँ.
तभी मां की हरकतें शुरू हो गईं.
मां अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ने लगीं.
मैं फिर से सेक्स नहीं करना चाहता था लेकिन इस बार मां सामने से मौका दे रही थीं.
मेरा हाथ पकड़ मां ने अपने पेट पर घुमाते हुए नीचे को किया और अपनी चूत पर रख लिया.
मां ने अपनी साड़ी ऊपर कर ली थी और एक हाथ से मेरी पैंट नीचे करने की कोशिश कर रही थीं.
मैंने उठकर अपनी पैंट उतारी और मां ने मेरा लंड पकड़ लिया.
वे लंड हिला हिला कर उसे टाइट कर रही थीं.
मां मूड में आ गई थीं.
अब मां मेरी तरफ मुँह कर मेरे ऊपर आना चाह रही थीं.
मैंने मां को अपने ऊपर खींच लिया.
मां ने अपना ब्लाउज के बटन खोल दिए; ब्रा तो पहले ही ढीली थी.
ऊपर से मां नंगी हो गई थीं और अपने दूध मेरे मुँह में दे रही थीं.
कुछ देर बाद मां ने मेरी भी शर्ट के बटन खोल दिए.
मैंने भी जोश मैं मां की साड़ी उतार दी.
मैं मां के नीचे था और वे मेरे ऊपर थीं.
मां मुझे अपने दूध चुसवा रही थीं और मेरे लंड को मां अपनी चूत में लेकर खुद ऊपर नीचे करने लगी थीं.
मैं नीचे से धक्के दे रहा था.
ऐसे ही चुदाई होती रही.
काफी देर बाद हम दोनों झड़ गए.
मां मेरे ऊपर नंगी ही सोई रहीं.
हमें जो कंबल मिला था, उसमें ही हम दोनों सोए रहे.
सुबह अचानक उन दोनों ने हमें जगाया.
उनका स्टेशन आ गया था.
हमने उन्हें विदा करके कुंडी लगाई.
अब हम दोनों ऐसे ही नंगे बैठे थे.
मैंने पहली बार मां का नंगा गोरा बदन देखा था.
मां मुझसे चिपक कर सोई थीं.
हम एक दूसरे को देख रहे थे.
मां ने मुझसे कहा- विकी बेटा देख, जो ट्रेन में हुआ, वह किसी को पता नहीं चलना चाहिए … और यह सब यहीं पर खत्म हुआ मान लेना. ट्रेन से उतरने के बाद गलती से भी नहीं होगा. ना ही मेरी तरफ से, ना ही तेरी तरफ से … ओके!
मैंने मां से ओके कहा और उनके दूध चूसने लगा.
मां मेरे बालों में हाथ डाल सहलाने लगीं मेरी एक जांघ मां की जांघों के बीच गई तो मुझे चूत की गर्मी महसूस हुई.
मैं मां की चूत में लौड़ा घिसने लगा.
मां कुछ नहीं बोलीं.
मैंने मां से कहा- मां, अभी ट्रेन से उतरने में दो घंटा बाकी हैं. क्यों ना एक आखिरी बार और हो जाए.
मां हंस दीं और बोलीं- बदमाश मुझे पता था कि तू इतने में नहीं मानेगा.
अब हम दोनों ने किस करना चालू किया.
मैं मां को चूमे जा रहा था और चूसे जा रहा था.
यह मॅाम फक का आखिरी मौका था.
मां मेरा लंड हिला रही थीं.
मैंने मां से लंड चूसने को कहा.
मां खड़ी हुईं और मेरा लंड चूसने लगीं.
आह बड़ा मजा आ रहा था.
मैंने मां को सीट पर बिठाया और उनके पैर फैला कर चूत चाटने लगा.
अब मैं मां को अपनी गोद में बिठा कर चोद रहा था.
फिर मैं मां को खिड़की के पास डॉगी स्टाइल में चोदने लगा.
मां खिड़की की सलाखों को पकड़ कर गांड उछाल उछाल कर लंड अन्दर ले रही थीं.
मस्त माहौल था.
मां का ऐसा जंगली रूप रात को भी नहीं था.
मैं मां को खड़ा करके और झुका कर पीछे से चोद रहा था.
मैंने मां को नीचे बिठाया और उन पर अपने माल की बरसात कर दी और मां का सारा बदन अपने माल से भर दिया.
हम दोनों हांफते हांफते एक दूसरे के ऊपर सो गए.
अब मुझे मां को और चोदना था लेकिन मां जुबान की पक्की थी.
वे मुझे ट्रेन के बाहर कभी चोदने नहीं देतीं.
तो कैसे मैंने मां को पटाया और अगली चुदाई कब की.
यह सब मैं अगली कहानी में लिखूँगा.
मेरा नाम Indian Sex Storiesसुनील है और मैं हरियाणा के कुरूक्षेत्र का रहने वाला हूँ।
मैं अपनी कहानी पर आता हूँ!
सपना जिसकी उम्र १९ साल है उसके सेक्सी होंठ, कातिल जवानी, भरी हुई गांड और मोटे मोटे चुचे किसी भी लंड को खड़ा कर दें। सपना हमारे ही पड़ोस में ही रहती है और उसका हमारे घर आना जाना है।
एक दिन मैं घर में अकेला था और टी वी पर सेक्सी मूवी देख रहा था। तभी बेल बजी, मैंने जल्दी-जल्दी टीवी बंद किया और दरवाजा खोला तो सपना थी।
वो बोली- मेरे कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है, तुम ठीक कर दो!
तो मैं उसके साथ उसके घर चला गया। उसके घर पर कोई नहीं था। मैंने कंप्यूटर स्टार्ट किया तो देखा कि उसमें वाइरस की वजह से कुछ प्रॉब्लम थी। इतने में सपना मेरे लिए पानी लेकर आई।
मेरी नजर तो उसके चुचों पर थी। क्या बड़े बड़े चुचे थे ! देख कर किसी के भी मुँह में पानी आ जाये ! मैंने घर से विन्डोज़ की सी डी लाकर इन्सटाल करना शुरू कर दिया और उससे बातें करने लगा। मेरा ध्यान तो उसके चुचों और होठों पर था। थोड़ी देर बाद विन्डोज़ हो गई तो मैंने कंप्यूटर रिस्टार्ट किया और उसके कंप्यूटर पर फ़ाईलें चेक करने लगा तो मैंने देखा कि एक फोल्डर में कुछ हिडेन फ़ाइलें थी। जब मैंने उनको खोला तो देखा कि उसमें सेक्सी फिल्में और वाल-पेपर थे।
तभी सपना वहाँ आ गई।
कंप्यूटर पर चुदाई का सीन चल रहा था। तीन अंग्रेज एक लड़की तो चोद रहे थे। सपना कंप्यूटर बंद करने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और वहीं पर बिठा लिया अपने गोद में, उसके चुचे पकड़ लिए और मसलने लगा। कंप्यूटर पर चुदाई का सीन चल रहा था। पहले तो उसने विरोध किया पर बाद में वो भी गरम होने लगी और उसे भी मजा आने लगा। मैंने उसे पास में सोफे पर गिरा दिया और उसके होठों पर होंठ रख दिए। उसकी कमीज ऊपर कर दी और उसके फिर उसकी ब्रा भी खींच दी। उसके बड़े बड़े चूचों को आजाद कर दिया और मुँह में भर कर उसके तने हुए निप्पलों को चूसने लगा। उसके मुँह से आहें निकलने लगी।
मेरा लंड भी तन कर पैंट से बाहर आने को बेताब था और उसकी टांगों में चुभ रहा था। सपना पूरी तरह से तड़प उठी और उसने हाथ डाल कर मेरे लंड बाहर निकाल लिया।
६ इंच लम्बा लंड देख कर सपना बोली- हाय राम ! कितना बड़ा और मोटा है !
मैंने भी उसकी सलवार और पैन्टी उतार दी और उसको उठा कर बेड पर ले गया और उसकी फुदी को सहलाने लगा। उसकी फुदी पर हल्के हल्के बाल थे। क्या कसी चूत थी ! देख कर मुँह में पानी आ गया।
अब मैं उसके टांगों के बीच आ गया और मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। वो सीत्कार कर उठी। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और चुदने के लिए तैयार थी, पर मैं चाहता था कि वो तड़पे ! मैं उसकी चूत तो चाटने लगा तो उसके बदन में तो जैसे आग ही लग रही थी।
फिर मैंने उसके बाल पकड़े और अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया। पहले तो वो मना करने लगी पर बाद में उसे भी मजा आने लगा।
१५ मिनट के बाद मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में छोड़ दिया जिसे वो पी गई।
थोड़ी देर बाद फ़िर मैंने उसे 69 की पोजिशन में लिटा दिया और उसकी चूत चाटने लगा और सपना मेरा लौड़ा मुँह में भर कर फिर से चाटने लगी। थोड़ी देर बाद लंड फिर से खड़ा हो गया।
मैंने उसकी दोनों टाँगे उठा कर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोर दार धक्का मारा। मेरा लंड उसकी चूत में फंस गया और वो चिल्लाने लगी। मैंने उसकी परवाह न करते हुए एक और जोर का धक्का मारा तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया और वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी और उसकी चूत से खून भी आने लगा।
उसकी चूत की झिल्ली फट चुकी थी और वो कलि से फ़ूल बन गई थी। मैंने एक जोर का धक्का और मारा तो सारा लंड उसकी चूत में चला गया। मैं उसको किस करने लगा और उसके चुचे रगड़ने लगा। कुछ देर में जब वो शांत हो गई तो मैंने फिर से धक्के मारने चालू कर दिया। अब उसका दर्द काफी कम हो गया था। उसे भी मजा आने लगा और वो नीचे से चूतड़ उठा उठा कर मजे लेने लगी।
मैंने भी जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। उसे बहुत मजा आ रहा था। १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए और मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसकी चूत खून से लाल हो चुकी थी। उसे काफी दर्द भी हो रहा था और उससे चला भी नहीं जा रहा था तो मैं उसे बाँहों में उठा कर बाथरूम में ले गया।
शॉवर चालू कर दिया मैंने और उसकी चूत पर साबुन लगा कर साफ़ कर दिया और फ़िर हम शॉवर का मजा लेने लगे।
वो फिर से गर्म हो गई और मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। लंड खड़ा हो गया !
मैंने उसे डौगी स्टाइल में कर दिया, एक ही बार में अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और मैंने उसे जोर से चोदना शुरू कर दिया। 15 मिनट बाद उसने पानी छोड़ दिया पर मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
मैंने कहा- अब मैं तुम्हारी गांड मारूंगा !
क्या मस्त गांड थी उसकी! पर वो मना कर रही थी। पर मैंने उसे मना लिया और उसकी गांड में काफी सारा तेल लगाया और अपना लंड उसकी गांड पर रख कर एक जोर कर धक्का मारा और मेरा आधा लंड उसकी गांड में चला गया। वो चिल्लाने लगी!
मैंने कुछ देर रुक कर एक ही झटके में सारा लंड उसकी गांड में घुसेड़ दिया और 20 मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद सारा वीर्य उसके मुँह और स्तनों पर डाल दिया।
इसके बाद तो मैंने उसे जब भी मौका मिला मैंने उसे और उसकी कई सहेलियों को भी चोदा।
पर वो सब अगली बार !
उम्मीद है कि आप लोगों को मेरी कहानी पसंद आई होगी।
मुझे मेल कर सकते हैं ! Indian Sex Stories
दोस्तों यह कहानी नहीं, एक सच्चाई Hindi Sex Stories है। यह कहानी खासकर लड़कियों और महिलाओं को ज्यादा पसन्द आयेगी।
मेरी उम्र २६ साल है। कई साल पहले की बात है तब मेरी एक सगी बुआ की लड़की रेखा उस समय १९ साल की थी। वह अक्सर मुझे अपने घर ले जाया करती थी। मेरे घरवाले सब इसलिए अनुमति दे देते थे क्योंकि उसके कोई भाई नहीं था।
मैं उसे बहन की तरह ही प्यार करता था। लेकिन उसके दिल में कुछ छिपा था। एक दिन मैं साइकिल चला रहा था कि अचानक मेरे आँड दब गये। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। बुआजी और २ बहनें एक शादी में गई थीं। जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैंने रेखा दीदी को बताया। दीदी ने मेरी पैन्ट व अन्डरवीयर खोलने को कहा।
पहले तो मैं शरमाया परन्तु फिर मैंने खोल दिया। दीदी ने आयोडेक्स मेरी गोलियों पर लगाना शुरू किया और कभी कभी मेरे लन्ड को भी छू देती थी मुझे चिढ़ाने के लिए। दीदी का हाथ लगते ही वह अपने पूरे आकार में आ गया आखिर दीदी ने बोल ही दिया- बाप रे ! कितना बड़ा है।
उसके तीन दिन बाद एक दिन मैंने दीदी को झाँट साफ करते देख लिया। वे रेजर से साफ कर रहीं थी। मैं शरमाकर पीछे हट रहा था लेकिन दीदी ने कहा कि इधर आ। मुझे तेरा सामान देखकर शर्म नहीं आई थी, तू क्यों शरमा रहा है?
और उन्होंने रेजर मुझे दे दिया। फिर मैंने दीदी की बगलें तथा झाँटे साफ की। दीदी की गोरी गाण्ड व गुलाबी चूत देखकर अचानक मेरे लण्ड से भी कुछ रिसने लगा।
जब मैं रेजर चला रहा था दीदी बार बार मेरी पैन्ट में टाइट लण्ड को निहार रही थी। मैंने कुछ करना चाहा। तभी दीदी ने मन में कुछ सोच कर कहा- रात को।
उसी दिन से दीदी रात को अपने साथ सुलाने लगी थीं। एक दिन रात को उन्होने अपना एक हाथ मेरे सिर के नीचे डाल लिया और फिर करवट बदलकर मुझे अपने ऊपर कर लिया। मैं सोने का नाटक करता रहा।
फिर उन्होने मेरी पैन्ट नीचे खींच दी तथा हाथ से मेरा लन्ड पकड़कर अपनी टाइट चूत में डाल लिया। और मेरी पीठ दबाकर उपर नीचे करने लगीं। इस सिलसिले में कई बार मेरा लण्ड दीदी की चूत से बाहर आ जाता था। मेरा मन करता था कि स्वयं हाथ से पकड़ कर चूत में घुसा दूं, परन्तु मुझे करने की जरूरत नहीं थी, दीदी खुद डाल लेती थी और थोड़ी देर बाद मैं झड़ गया। ये मेरा पहला सेक्स था।
सुबह उठकर दीदी ने कहा- किसी से कहना नहीं, ये खेल रोज खेला करेंगे, जब तक सर्दी की छुटटी खत्म हों।
३-४ दिन के बाद एक दिन मैंने खुद जब दीदी सो रहीं थीं। उनकी सलवार के पीछे से गाण्ड की दरार में लगा दिया। दीदी जग गईं और उन्होंने सलवार का नाड़ा खोलकर पहली बार गाण्ड भी मरवाई।
दोस्तों ! आज जब दीदी के २ बच्चे हैं और मेरी भी शादी हो गई है। जब भी हम अकेले में मिलते हैं, मैं उनसे पूछता हूँ कि आपके पति कैसे हैं सैक्स में?
हम अभी भी मौका मिलने पर एक दूसरे के अंगों को चूसते हैं। दीदी की गाण्ड अभी और मोटी हो गई है। वे कहती हैं गांड मारने के तो वे भी शौकीन हैं लेकिन लन्ड तुझसे छोटा है। और हाँ झाँट मैं उनसे ही साफ कराती हूँ।
कुँवारी देवियों और आन्टियों व भाभियों ! सिर्फ एक बार गाण्ड मरवाकर देखना कि कितना असीम आनन्द मिलता है। ये बातें मेरी दीदी व बीवी दोनों मान चुकी हैं।
मेरी बीबी मुझे सिर्फ सप्ताह में एक ही बार देती है उसे सैक्स में कम रूचि है। Hindi Sex Stories
में आपने पढ़ा कि मैं ललित, मेरे पड़ोस में रहने वाली मालविका को बचपन से प्यार करता था और कहता था मैं मालविका से शादी करूँगा। हमारी शादी नहीं हो सकी क्योंकि मालविका मुझसे 3 महीने बड़ी थी। मालविका की शादी उससे 15 साल बड़े आदमी से हुई। उसका तलाक हो गया।
मैंने घर वालों को मनाकर मालविका से शादी कर ली।
सुहागरात को मुझे पता चला मालविका अभी तक कुंवारी थी।
बहुत पूछने पर मालविका ने बताया कि उसके पहले पति का लंड खड़ा नहीं होता था। मालविका के तलाकशुदा होने पर भी मैंने उससे शादी की इसलिए मालविका बार बार कहती कि वह मेरी गुलाम बनाकर रहेगी.
अब आगे पेनफुल सेक्स ऐनल कहानी:
मालविका ने कई बार कहा कि वह मेरी गुलाम बनकर रहेगी.
तो मैंने सोचा कि आज रात गुलाम का खेल खेला जाये।
बैडरूम में मैं नंगा होकर चित लेट गया और मालविका को कहा- अपने कपड़े उतारकर, घुटनों पर मेरे बाजू में बैठकर लंड चूसो, तुम्हारे कूल्हों पर मेरे हाथ पहुंचने चाहिए।
मालविका ने गुलाम की तरह मेरी बात मानी।
वह मेरा लंड चूसने लगी.
मैंने उसके कूल्हों पर चांटे मारकर कहा- पूरा लंड गले तक लेकर चूसो।
मालविका पूरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
उसके गेहुंये कूल्हे चांटों से लाल हो गए.
मैं उसके मुँह में झड़ गया.
उसने वीर्य पी लिया, लंड चाट कर साफ किया.
मैं- मालविका, मुँह धोकर आओ और पलंग पर लेट जाओ।
थोड़ी देर बाद मैं मालविका के लब चूसने लगा, चूचे दबाने लगा.
मालविका की चूत गीली हो गयी।
मैंने मालविका को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा किया, फर्श पर खड़ा होकर मैं उसकी चूत पीछे से चोदने लगा.
साथ ही मैं मालविका के कूल्हों पर चांटे मारने लगा.
हर चांटे के बाद मालविका को और जोश आता, उसकी सिसकारी तेज हो जाती, वह कमर हिलाकर लंड और अंदर लेने लगती।
मालविका की चूत से दो बार कामरस का फव्वारा निकला.
वह थक गयी थी पर उसने मुझे रुकने नहीं कहा।
मैं थोड़ी देर पहले झड़ा था, चोदते समय मैं बहुत देर टिका.
उसके बाद से हम दोनों साथ में सेक्स वीडियो देखते, खासकर BDSM, गुलाम वाली … फिर वैसा ही करते।
मैं मालविका से प्यार करता हूँ, मैंने कभी उसे इतनी जोर से नहीं मारा कि चोट लगे।
मैंने मालविका को कहा- तुम लंड, चूत, गांड शब्दों को यौन क्रीड़ा के समय बोला करो, सेक्स में खुलकर भाग लो!
उसने वैसा ही किया.
इससे मजा और बढ़ गया।
मैं मालविका के साथ इंटरनेट पर और शॉपिंग माल में टंगे सेक्सी कपड़े देखता, जो कपड़े अच्छे लगते उनकी फोटो ले लेता।
दुकान में वे कपड़े महंगे थे, मेरी नयी नौकरी थी, तनखाह ज्यादा नहीं थी।
मालविका के पास सिलाई मशीन थी, वह वैसे कपड़े घर में सिलती।
उसने मिनी स्कर्ट, जालीदार ब्रा पैंटी, बिना बांह का बैकलेस ब्लाउज आदि सिला।
वह उन कपड़ो में सेक्सी लगती।
हमने खिड़कियों पर मोटे परदे लगा दिए ताकि बाहर से कोई हमने देख ना सके.
एक बार हमने गुलाम के गले में पट्टा डालकर, उसमें चेन लगाकर गुलाम को कुत्ते की तरह घुमाने का वीडियो देखा।
मैंने कहा- ऐसा हो जाये?
मालविका बोली- कल ही मैं गले का गुलाबी पट्टा बनाती हूँ, घर में रस्सी है ही!
मैं घुटनों की कैप ले आया, जिससे मालविका के घुटने कुत्ते की तरह फर्श पर चलने से न दुखें।
हम अक्सर यह खेल खेलते, मालविका को कुतिया की तरह चलाते समय मैं धीरे से उसके कूल्हों पर बेल्ट से मारकर उसे रुकने / चलने को कहता.
मेरी इच्छा थी मालविका की गांड भी मारने की।
मैंने नेट में पढ़ा कि बिना ज्यादा दर्द दिए गांड मारने के लिए गांड को तैयार करना पड़ता है, गांड के छेद को थोड़ा ढीला करना पड़ता है.
इसके लिए Ass Plug उत्तम उपाय है।
मैंने छोटा और मध्यम साइज का पूंछ लगा आस प्लग ऑन लाइन खरीदा।
तब मैंने मालविका को पूँछ लगा आस प्लग दिखाकर कहा- इसे पीछे लगाने से जब तुम कुत्ते की तरह चलोगी तो असली कुतिया लगोगी।
मालविका राजी हो गयी,
मैंने मालविका को पेट के बल लिटाकर कहा- गांड ढीली करो.
उंगली में तेल लगाकर मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाली, फिर दो उंगलियां डाली।
मालविका को थोड़ा दर्द हुआ, वह सह गयी।
मैंने छोटा पूँछ लगा आस प्लग गांड में डालकर कहा- अब कुतिया की तरह चलो।
चलने से आस प्लग के गांड में घर्षण से मालविका को मजा आ रहा था।
कुछ दिन बाद मैंने मध्यम साइज का आस प्लग लगाकर घुमाया.
छुट्टी के दिन मैंने लड़की की गांड मारने का वीडियो लगाया।
तब मालविका को कहा- एक बार इसको करके देखते हैं.
मालविका बोली- मेरी सहेली ने बताया था कि पीछे बहुत दर्द होता है. फिर भी यदि तुम्हारी इच्छा है तो पेनफुल सेक्स ऐनल करके देखते हैं।
मैंने कहा- आस प्लग से तुम्हारी गांड थोड़ी ढीली हो गयी है, ज्यादा दर्द नहीं होगा। आस प्लग लगाकर चलने में तुम्हें मजा आता है. सोचो लंड जब गांड में जायेगा कितना मजा आएगा, तुम गांड ढीली छोड़ना और सम्भोग से पहले गांड अंदर से साफ़ करना होगा.
मैंने बाथरूम में मालविका की गांड में पिचकारी से करीब आधा गिलास पानी भरकर कहा- अब कमोड में बैठकर पानी बाहर निकाल दो!
दो तीन बार ऐसा करने के बाद मालविका को बहुत फ्रेश लगा।
मालविका ने वीडियो के समान पलंग पर पेट बल लेटकर पांव फैला दिए, अपने कूल्हे हाथ से पकड़कर गांड की छेद से दूर कर दिए तो छेद दिखने लगा।
मैंने उंगली से तेल मालविका की गांड में अंदर तक लगा दिया.
फिर मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और धीरे धीरे लंड गांड में डालने लगा।
मालविका ने अपना हाथ कूल्हों से हटाकर तकिये को कस कर पकड़ लिया।
मैंने पूछा- दर्द ज्यादा हो रहा है क्या?
मालविका बोली- ज्यादा नहीं, पहली बार तो चूत में डलवाने में भी दर्द हुआ था।
मैं धीरे धीरे गांड मारने लगा.
मालविका ने तकिया छोड़ दिया.
मैंने मालविका के ऊपर से उतरकर कहा- अब मिशनरी पोजीशन में करते हैं।
मालविका ने चित होकर अपने पैर छाती की तरफ करके पकड़ लिए.
मैंने उसकी कमर के नीचे तकिया लगाया और गांड मारने लगा।
मैंने पूछा- मजा आ रहा है?
मालविका- हाँ अलग तरह का मजा आ रहा है!
करीब 15 मिनट बाद मैं झड़ गया, मैंने लंड बाहर निकाला, मालविका की गांड से वीर्य टपकने लगा।
हम बाथरूम गए, मैंने अपना लंड साबुन से धोया.
गांड में कीटाणु हो सकते हैं तो साबुन से धोना जरूरी है.
मालविका ने अपनी गांड धोयी.
उसके बाद से जब भी हम सम्भोग करते, मैं पहले मालविका की चूत मारता, जब लगता मैं थोड़ी देर में झड़ जाऊंगा तो मैं लंड बाहर निकालकर लंड की जड़ उंगलियों से कसकर पकड़ लेता, साँस रोकता या लम्बी साँस लेता, ध्यान दूसरी तरफ लगाता, झड़ना टल जाता।
मैं लंड पर तेल लगाकर गांड मारने लगता।
मैंने कभी गांड मारने के बाद चूत नहीं मारी क्योंकि लंड में लगे गांड के कीटाणु चूत में जाकर इन्फेक्शन कर सकते हैं.
हम बी डी एस एम का खेल भी खेलते।
मैं मालविका के कपड़े उतारकर उसके हाथ पलंग से सिरहाने रस्सी से बांध देता, उसकी आंख पर पट्टी बांध देता, उसके पैर छाती की तरफ करके पैरों को पलंग के सिरहाने रस्सी से बांध देता।
कमर में नीचे तकिया लगाता, कूल्हों पर चांटे मारता, निप्पल मरोड़ता, चूत सहलाता।
इससे मालविका की चूत से पानी निकलने लगता।
मालविका बोलती- अब और इन्तजार मत करवाओ।
उसके बाद चूत और गांड की घमासान चुदाई होती!
जब ठंडी ज्यादा नहीं होती तो मेरे घर आने के बाद मालविका छोटा स्कर्ट और सेक्सी बिन बाहों का ब्लाउज बिना ब्रा पैंटी के पहनती।
टी वी देख़ते समय मैं उसकी मांसल चिकनी जांघों पर हाथ फेरता, ब्लाउज में हाथ डालकर चूचे दबाता.
वह मेरे लंड पर हाथ फेरती.
कई बार हमने ड्राइंगरूम में सम्भोग किया।
अक्सर कई बार जब मालविका खाना बनाती तो मैं उसका स्कर्ट उठाकर उसके कूल्हों पर हाथ फेरता.
वह किचन टेबल पकड़कर झुक जाती, मैं पीछे से चुदाई करता.
हम दोनों छुट्टी के दिन एक दूसरे की मालिश करते, साथ नहाते।
मेरी इच्छा थी मालविका का मूत्र पीने की … पर मैं उसे बोल नहीं पाया।
एक दिन जब मैं मालविका की मालिश कर रहा था तो वह बोली- थोड़ा रुको, मैं शु शु करके आती हूँ!
मैंने मालविका को थोड़ी देर और रोका.
मालविका बाथरूम जाने लगी तो मैं उससे पहले बाथरूम में घुस गया।
मैंने मालविका को पकड़कर उसके कंधे दीवार से लगा दिए, मैं छोटा स्टूल लेकर उसकी चूत पर मुँह लगाकर बैठ गया।
तब मैंने मालविका की कमर पकड़ ली और कहा- पांव फैलाकर मूतो … मैं पीना चाहता हूँ।
मालविका की मना कर रही थी.
पर वह अपना मूत रोक नहीं पायी, वह पांव फैलाकर मूतने लगी, मैं मूत पीने लगा.
मुझे मजा आया.
मैंने कहा- मजा आ गया।
मालविका स्टूल पर बैठकर मुँह खोलकर बोली- मुझे भी पीकर देखना है।
मैं मालविका के खुले मुँह में मूतने लगा.
वह कुछ मूत पी रही थी, बाकी उसके शरीर पर गिर रहा था।
मालविका को भी मजा आया।
तब से हम लोग साथ नहाते समय एक दूसरे का मूत्र पीते, एक दूसरे को मूत्र स्नान कराते।
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