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जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरे पति विकास एक एम एन सी में जॉब करते हैं और अक्सर उनके पास हमारे लिए समय नहीं होता है।
हम जमींदारों के खानदान से संबंध रखते हैं और हमारी गांव में काफ़ी जमीन है और हमारा पुश्तैनी मकान भी है।
गांव के लोग विकास को ठाकुर साहब और मुझे ठकुराइन कहते हैं।
लेकिन गांव में कोई रहता नहीं है इसलिए मकान गांव के ही एक लड़के के हवाले रहता है, जिसका नाम राजू है.
वह वहां का केयर टेकर है और वहां की गौशाला में अपना तबेला भी चलाता है।
राजू विकास को भईया और मुझे भौजाई कहता है।
वह एक 28 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है और वो अकेले ही तबेले और हवेली को संभालता है।
एक बार जमीन के सिलसिले में मेरा और मेरे पति का गांव जाना हुआ।
गांव पहुंचकर मैं और मेरे पति उसी पुश्तैनी मकान में रुकने वाले थे।
हमारे आने की खबर पाकर राजू ने पहले ही हवेली की साफ सफाई करवा दी थी और हमारे रुकने की अच्छी व्यवस्था की थी।
खैर आते आते शाम हो गई थी इसलिए रात का खाना पीना करके हम दोनों हवेली में ही सो गए।
राजू हवेली के पीछे बने गौशाला के पास सोता था इसलिए वह भी वहीं सो गया।
कमरे में बहुत गर्मी थी इसलिए मुझे बड़ी मुश्किलों से नींद आई।
अगली सुबह हमें अपने खेतों का मुआयना करने जाना था।
मेरे पति अपनी कुछ जमीन बेचना चाहते थे इसलिए पहले हमारा मुआयना करना जरूरी था।
राजू के साथ हम दोनों खेतों की तरफ गए और जाकर अपनी जमीन का मुआयना किया।
लेखपाल की मौजूदगी में सारी नपाई की गई और फिर खरीददार पार्टी से फोन पर बात हुई, उन्होंने 4 दिन बाद आने की बात कही।
क्योंकि हम गांव एक हफ्ते के लिए आए थे इसलिए हमें कोई दिक्कत नहीं थी।
इसी तरह हमारा दिन निकल गया और फिर रात आई।
क्योंकि हम दोनों ही पूरी हवेली में अकेले थे इसलिए आज मेरा दिल कुछ मस्ती करने का कर रहा था।
मैंने आज अपने पति से कहा- क्यों न आज हम आंगन में सोएं क्योंकि कल रात गर्मी बहुत ज्यादा थी।
मेरे पति ने राजू को आवाज दी।
राजू आया और पूछा- क्या हुआ भैया, आपने मुझे इस वक्त बुलाया?
विकास ने कहा- राजू, आज तुम्हारी भाभी बहुत गर्मी लग रही है, तुम हमारा बिस्तर यहीं जमीन पर लगा दो, कुछ राहत मिलेगी।
राजू ने मुस्कुरा कर मुझे देखा और कहा- अब भौजाई को गर्मी लग रही है तो गर्मी का इलाज तो करना पड़ेगा ना!
उसने मुझे देखकर मुस्कान दी और फिर आंख मारी।
मैं कुछ न बोली और शर्मा कर नजर नीची कर ली।
राजू हमारे कमरे में गया और फिर हमारे गद्दे निकाल कर आंगन में जमीन पर लगा दिए और हमारा बिस्तर तैयार कर दिया।
उसके बाद राजू चला गया।
मैं विकास के साथ लेटी थी और हम सोने की तैयारी कर रहे थे।
आज मेरा मन सेक्स करने का कर रहा था लेकिन विकास कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे।
इसलिए मैंने उन्हें उत्तेजित करने का फैसला किया।
मैंने अपनी साड़ी उतार दी और पेटिकोट ब्लाउज में आ गई।
फिर मैंने धीरे धीरे विकास के सीने को सहलाना शुरू किया।
विकास मेरे इरादे समझ गए और बोले- डार्लिंग, आज मैं बहुत थका हुआ हूं, प्लीज हम कल करें?
मैं नाराज होकर बोली- आपका रोज का यही हाल है, एक तो घर पर नहीं रहते हो ऊपर से तुम्हारी थकावट! अगर मुझसे प्यार नहीं था तो शादी ही क्यों की?
विकास मेरी बात सुनकर हंस पड़े और कहा- अच्छा बाबा सॉरी, मेरी गलती है कि हम अपनी बीवी को खुश नहीं रख पाते हैं।
यह कहकर उन्होंने मेरे होंठो को चूमना शुरू कर दिया ‘उउम्ह उउम्ह्ह’
मैं भी इस काम में उनका बखूबी साथ दे रही थी।
कुछ देर के चुम्बन के सिलसिले के बाद मैंने अपने ब्लाउज के हुक खोल दिए और विकास मेरे स्तनों को चूसने लगे।
मेरे स्तनों को पीने के बाद उन्होनें अपना पजामा उतार दिया और मैंने उनके लिंग को चूसना शुरू कर दिया।
क्योंकि हमारे बीच अक्सर ऐसा होता रहता था इसलिए मेरे लिए उनका लिंग कोई विशेष नहीं था।
कुछ देर तक उसे गीला करने के बाद मैंने अपनी पैंटी उतार दी जिसे मैंने पेटीकोट के नीचे पहना हुआ था।
अब मेरे जिस्म पर पेटीकोट और ब्लाउज थे जिसके हुक खुले हुए थे।
मैं बिस्तर पर लेट गई और विकास ने मेरे पेटिकोट को ऊपर उठा दिया।
मेरी चूत पर थूक लगा कर विकास ने अपना लंड अंदर डाला और उसे आगे पीछे करने लगे।
मेरी आंखे इस अहसास से बंद हो गई और मैं धीरे धीरे आहें भरने लगी- उफ विकास, चोदो मेरी मुनिया को … आह!
इस तरह के अश्लील वाक्य मेरे मुंह से निकलने लगे।
इस दौरान मैं एक बार झड़ गई लेकिन विकास ने ये सब जारी रखा।
काफी देर बाद विकास भी झड़ने की कगार पे आ गए और मेरी चूत में ही झड़ गए।
जब उनका गर्म वीर्य मेरी योनि में भर गया तो मैंने आंख खोली तो छत पर कोई दिखा.
कद काठी से वह राजू लग रहा था।
मैं उसे गौर से देखने का प्रयास करने लगी.
लेकिन हल्की चांदनी की वजह से मुझे उसका चेहरा साफ़ नहीं दिखा लेकिन कद काठी से मैं ये समझ चुकी थी कि वह राजू ही है।
मेरे दिल में शरारत सूझी इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा और पतिदेव को अपने ऊपर लिटा लिया.
उनको भनक भी नहीं लगी कि कोई हमें इस हालत में देख रहा है।
जैसे ही राजू को आभास हुआ कि मैं उसे देख चुकी हूं, वह दबे पांव वहां से निकल गया और अपनी खाट पर लेट गया।
मेरा मन संतुष्ट तो नहीं हुआ था लेकिन मैंने अब विकास को जगाना उचित नहीं समझा और फिर उसी के साथ उसी अवस्था में सो गई।
अगली सुबह हम दोनों मियां बीबी नंगे ही सो रहे थे।
सुबह के 7 बजे थे।
सूरज निकल रहा था और उसकी रोशनी हमारे आंगन में आने लगी थी।
इतने में ही हमारे दरवाजे पर दस्तक हुई तो हमारी आंख खुली।
मैंने झट से अपने कपड़े उठाए और पास बने कमरे में घुस गई।
विकास ने भी अंडरवियर पहनी और जाकर दरवाज़ा खोला तो सामने राजू खड़ा था।
राजू के हाथ में एक जग था, वह हमारे लिए दूध लाया था।
राजू ने अन्दर झांका तो मैं उसे नहीं दिखी।
कल रात में मेरी ठुकाई देखकर जरूर उसका दिल नहीं भरा था।
राजू दूध देकर चला गया और फिर हम दोनों अपने काम काज में लग गए।
फिर हम दोनों कुछ देर के लिए खेतों की तरफ गए।
वहां विकास के पास उसकी कम्पनी का कॉल आया था कि उसे दिल्ली आना होगा क्योंकि अप्रेजल होने वाला था और उसके प्रमोशन के पूरे आसार थे।
विकास ने मुझे बुझे मन से बताया कि उसे कल दिल्ली के लिए निकलना होगा।
हमारी जमीन की डील दो दिन बाद होने वाली थी इसलिए विकास ने मुझे गांव में ही रुकने को कहा।
मैंने हामी भर दी और घर वापस आ गए।
रात को हम दोनों फिर से आंगन में लेटे।
मुझे पता था कि आज भी राजू हम दोनों को देखेगा.
लेकिन मुझे तो मजा आ रहा था इसलिए मैंने आज रात फिर से पतिदेव को गर्म करने का फैसला किया।
क्योंकि कल उन्हें जाना था इसलिए वे भी आज पूरे दिल से मेरी फुद्दी मारना चाहते थे।
मैंने उनको रोका और कहा- 10 बज जाएं तब करिएगा क्योंकि तब तक गांव के लोग सो जाते हैं।
उनको मेरी बात ठीक लगी और रात 10 बजे के करीब हमारी रतिक्रिया शुरू हुई।
छत पर कुछ आहट सुनाई दी तो मैं समझ गई कि अब राजू छत पर आ गया है।
आज रात मैं राजू को पूरी तरह से अपना बेशर्म रंग दिखाना चाहती थी।
मैंने खुद ही अपने सारे कपड़े उतार दिए और जन्मजात नंगी हो गई।
मेरा गोरा बदन चांदी की तरह चमक रहा था।
मैंने विकास का लंड चूसना शुरू किया।
मैं जोर जोर से विकास का लंड चूस रही थी और मुंह से ‘ऊंह ऊऊउम्म’ की आवाजें निकाल रही थी.
आज मेरी आवाज कुछ तेज थी ताकि ऊपर बैठा राजू भी अच्छे से सुन सके।
लंड चूसने के बाद मैंने विकास को नीचे लिटाया और उसके ऊपर आकर 69 पोजीशन में आ गई।
मैं अच्छे से उनके लंड को चूस रही थी और विकास भी अच्छे से मेरी चूत चाटने में लगे थे।
इसके बाद मैं उनके लंड को पकड़ कर अपनी योनि पर सटाया और एक झटके में वो मेरी चूत में घुस गया।
मेरे मुंह से तेजी से आहें निकल रही थीं और मैं जोर जोर से धक्के लगा रही थी।
इस तरह चोदते हुए 10 मिनट हुए थे और विकास स्खलित होने वाले थे.
इसलिए मैंने उनके लंड को चूत से निकाल दिया और उसे चूसने लगी।
विकास का वीर्य मेरे मुंह में ही छूटा और वे हांफने लगे।
मैंने भी खुद को उनके बगल में लिटा दिया और एक हाथ से उनके लंड को सहलाने लगी।
इस दौरान मैंन्र चोर नज़रों से छत पर बैठे राजू को देखा।
वह चारदीवारी की आड़ में छुपा हमारी रतिक्रीड़ा देख रहा था।
फिर जब विकास का लंड तैयार हुआ तो हमने फिर से चुदाई का कार्यक्रम शुरू कर दिया।
पूरी रात हमने 3 बार चुदाई की और सुबह 3 बजे तक हमारी मस्ती चली।
इसके बाद हम दोनों सो गए।
अगले दिन सुबह हम दोनों उठे और मैंने उनके लिए नाश्ता बनाया।
नाश्ता कर के विकास जाने की तैयारी करने लगे।
राजू उनके साथ उन्हें स्टेशन पर छोड़ने जाने वाला था।
उन दोनों को विदा कर के मैं लेट गई और मेरी आंख लग गई।
उठी तो अब तक सुबह के 11 बजे थे।
राजू विकास को छोड़कर वापस लौट आया था और गौशाला के पास बैठा था।
मुझे शरारत सूझी।
मैं राजू को छेड़ना चाहती थी इसलिए मैंने एक प्लान बनाया।
मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार दिया और सिर्फ पेटिकोट से अपना वक्ष स्थल ढक लिया जैसे अक्सर गांव की महिलाएं नहाते वक्त कर लेती हैं। मेरी आधी नंगी चूचियां और आधी नंगी जांघें प्रदर्शित हो रही थी.
मैं अपनी इस हरकत से मन ही मन बहुत उत्तेजित हो रही थी.
मैं वैसे ही राजू के पास पहुंची तो वह मुझे देखकर हैरान रह गया।
मेरा चांदी सा जिस्म उसके सामने था और मेरे पेटीकोट से मेरी वक्षरेखा झलक रही थी।
राजू ने मुझे देखा तो ऊपर से नीचे तक निहारता रहा।
फिर कामुक अंदाज़ में बोला- क्या भौजी, आज खेतों में जाकर नहाने का इरादा है क्या? कहो तो ट्यूबवेल चला दें?
मैं उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दी और कहा- अरे नहीं रे … खेतों में नहीं यहीं घर पर नहाऊंगी.
जब मैं नहाने बैठी तो देखा कि साबुन खत्म हो गया है.
“तुम मेरे लिए नहाने वाला साबुन ला दो।” यह कहकर मैंने राजू के हाथ में 100 का नोट रखा।
राजू ने मुस्कुरा कर कहा- वैसे आप जैसी गोरी गोरी भौजाई को साबुन में मजा नहीं आयेगा, आप कहो तो गाय का कच्चा दूध भिजवा दूं, उसी में नहा लीजिए, आप का गोरा बदन और निखर जाएगा।
मैंने कुछ नहीं कहा और हंसकर राजू की बात को टाल दिया।
मुझे बड़ी उमर की औरतें Hindi Sex Stories बहुत पसंद हैं। अक्सर ऐसी औरतें आसानी से नही मिलतीं। काफ़ी मेहनत से मिलती हैं। यह एक सच्ची घटना है।
मैं पुणे मे पेईंग गेस्ट बनकर एक घर में रहता था। घर के मालिक काफ़ी अच्छे थे लेकिन उनकी पत्नी हमेशा अकेली और उदास रहती थी। उसका नाम राधा था। जैसा नाम वैसे ही रूप। भगवान ने फ़ुर्सत में उसको बनाया था। बला की ख़ूबसूरती थी उसमें। उमर कोई 40-45 होगी। लेकिन चेहरे से मदमस्त मदमाती नशीली लगती थी जो कि रस से भरी हुई हो और उनके अंग-अंग से रस छलकता था।
उसके पति को उनमें कोई रूचि नहीं थी, ऐसा मुझे अक्सर लगता था। एक दिन राधा ने मुझे रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। मैंने अपने व्यस्त होने का नाटक किया लेकिन उसके आग्रह करने पर मैं मान गया। दूसरे दिन शाम को मैं जल्दी ही ऑफिस से आ गया और मौक़े का इंतज़ार करने लगा।
रात के करीब साढ़े आठ बजे राधा ने मुझे खाने के लिए आवाज़ दी। मैंने कहा कि 5 मिनट में आता हूँ।
मैंने राधा के लिए एक प्यारा सा फूलों का गुलद़स्ता खरीदा था जो मैं लेकर उसके पास चल दिया। वहाँ पहुँचते ही मैंने पूछा कि अंकल (मकान मलिक) किधर हैं। इस बात पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं समझ गया कि आज समय मुझ पर मेहरबान है। उन्होंने मुझे डिनर टेबल की तरफ इशारा कर बैठने को कहा और ख़ुद दूसरे कमरे में चली गईं।
डिनर टेबल कई तरह के पकवानों से सज़ा हुआ था। पर दोस्तों मुझे तो कोई और पकवान चाहिए था। थोड़ी देर मे वो एक पारदर्शी नाइट-गाउन पहन कर बाहर आई और मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गई।
उनको देखकर मेरा पप्पू सलामी के लिए अचानक तैयार हो गया। अचानक लण्ड खड़ा होने से मुझे बैठने मे दिक्कत होने लगी। ऐसा देखकर राधा ने पूछा कि क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं !
और फिर वो मुस्कुराने लगी और मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई और मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी, ऐसा करने पर मेरी साँसें तेज हो गईं।
सिर पर हाथ फेरते हुए उसने अचानक मेरे कानों को भी छू लिया। उसी समय मैंने उसके नाज़ुक हाथों को पकड़ लिया और उन हाथों को अपने होंठों से चूम लिया। ऐसा करते ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं, बिना देरी किए मैं कुर्सी से उठा और उसको अपनी बाहों मे भर लिया।
वो भी मुझसे कस कर चिपक गई और फिर मैंने अपने होंठ उनके नर्म होंठों पर रख दिए। उसने मुझे और मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके कबूतरों की तरफ बढ़ गए जो कि सदियों से किसी चाहने वाले के लिए बेताब थे।
मैंने बिना देर किए, उनको आज़ाद किया और मेरे हाथ उनसे खेलने लगे। उसने भी अपने हाथ मेरे पप्पू की तरफ बढ़ाए। मैंने अपने पैंट की ज़िप खोल दी। ऐसा करते ही मेरा पप्पू उसको सलामी देने को तैयार हो गया क्योंकि मैंने अंडरवीयर नहीं पहन रखी थी।
उसने मेरे पप्पू की सलामी ली और उसको नीचे झुक कर अपने मुँह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे वो जन्मों की प्यासी हो। मैं भी उनके कबूतरों को दाना खिलाने लगा। थोड़ी ही देर में उन्होंने मेरी पैंट नीचे खींच दी और मेरे बदन से पैंट को अलग कर दिया।
अब पप्पू पूरी तरह से आज़ाद होकर उन होंठों का गुलाम हो गया। वह धीरे-धीरे मेरे पप्पू के चमड़े को ऊपर नीचे करने लगी। 5 मिनट में मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी ज़न्नत में पहुँच गया हूँ।
मेरा पप्पू उसके मुख का स्वाद ले रहा था, अचानक उसने मुझसे कहा कि बेडरूम में चलो।
मुझे भी यही चाहिए था। वहाँ पहुँचते ही मैंने उसके गाउन को उतार दिया और उसके मख़मली ज़िस्म का दीदार करने लगा।
ऐसा करते देख कर उसने मुझसे कहा कि बुद्धू ऐसे ही देखते रहोगे या मुझे कुछ करोगे भी। आज की रात मैं तुम्हारी हूँ और मुझे प्यासमुक्त करो।
मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बेड पर लिटा दिया और फिर दोनों 69 की पोज़ीशन मे आ कर एक दूसरे के जननांगों को चाटने लगे। मैंने मेरी पूरी जीभ उनकी प्यारी सी पप्पी मे घुसा दी जिससे उनक पूरा बद़न सिहर उठा और उसने मेरे पप्पू को अपने मुख से अलग कर दिया और अजीब क़िस्म की आवाज़ें निकालने लगी। इसके बाद मैं और तेज़ी से उसके पप्पी की पूजा करने लगा।
इसी दौरान वो दो बार झड़ गई और मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर भी रस रिस-रिस कर पप्पी से बाहर आ रहा था। वो मुझे ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ देने लगी और कहने लगी की मुझे तृप्त कर।
अब समय आ गया था कि मैं उसकी पप्पी का मिलन अपने पप्पू से करवा दूँ। पप्पू को मैंने पप्पी के मुख पर रखने से पहले राधा के मुख-चोदन का आनंद लिया और फिर पप्पी के मुख पर रख कर धीरे से एक हल्का धक्का दिया ऐसा करने से पप्पू थोड़ा अंदर गया लेकिन पप्पी टाइट थी, इस वजह से राधा दर्द से चिहुँक उठी।
उसी समय मैंने अपने हाथों से राधा के कबूतरों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया और पप्पू को भी धक्का देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे पप्पू पप्पी में समा गया। पूरी तरह से पप्पी में समाने के बाद राधा ने अपनी चिकनी चूतड़ उपर उठा-उठा कर पप्पी के पप्पू से मिलन की खुशियाँ मनाने लगी।
बीस मिनट तक ऐसा करते रहने के बाद मेरा पप्पू अपनी मलाई निकालने की तैयारी करने लगा तो मैंने राधा को पूछा की वो पप्पू की मलाई पप्पी को खिलाएगी या खुद खाएगी। उसने कहा कि उनको पप्पू की मलाई खानी है, फिर मैंने मेरे पप्पू को पप्पी से जुदा कर राधा के मुख में डाल दिया और सारी मलाई उनके मुख में आ गई और उसने सारी मलाई एक ही झटके मे चट कर ली।
काफ़ी देर तक मैं और राधा नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे और आधे घंटे बाद बाथरूम में जाकर साथ मे नहाया और उस दौरान भी पप्पू-पप्पी एक बार फिर मिल गए। बाद मे साफ हो कर हमने साथ में खाना खाया और फिर साथ में बेडरूम मे चले गये।
उस रात हमने 5 बार रसपान किया और करवाया। जब तक मैं पुणे में रहा उसको अच्छी सेवा देता रहा। आज भी मैं उसे बहुत याद करता हूँ।
आपकी बेबाक टिप्पणी का स्वागत है। ग़लतियों के लिए माफ़ करेंगे। Hindi Sex Stories
ये हिंदी में चुदाई की कहानी उस समय की है.. जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। उस वक्त मेरी उम्र 20 साल की थी जबकि मेरी सौतेली माँ 35 साल की थीं।
मेरी मॉम एक बहुत ही सेक्सी महिला थीं.. उनके जिस्म का एक-एक हिस्सा बिल्कुल तराशा हुआ था और अंग-अंग से मादकता टपकती थी। मैं कई बार उन्हें बाथरूम में सम्पूर्ण नग्नावस्था में देख चुका था। एक बार तो पापा उन्हें पूरा नंगा करके चोद रहे थे, तब भी उनकी मचलती जवानी को देखा था। जिस दिन पापा मॉम को चोद रहे थे, उसी दिन मेरा मन मॉम को चोदने के लिए मचल उठा था।
एक रात पापा शहर से बाहर गए हुए थे, मैं अपने बेडरूम में था। लेकिन मन में उत्तेजना के कारण मुझे नींद नहीं आ रही थी, सो मैंने मॉम की चूचियों को याद करते हुए मुठ मारनी चालू कर दी। कुछ ही देर में मेरी उत्तेजना और अधिक बढ़ गई तो मैंने गोल तकिया को अपनी टांगों में फंसा लिया और उसे ही मॉम समझ कर चोदना शुरू कर दिया।
उसी समय मेरी मॉम ने मेरे बेडरूम का दरवाजा खोला और मेरे कमरे में आ गईं।
दरवाजा खुलने की आवाज़ से मैं घबराकर रुक गया लेकिन मैं तकिए के ऊपर था। फिर मैंने मॉम को देखा तो मैं तकिए के बगल में लेट गया।
मॉम ने पूछा- क्या हुआ.. क्या कर रहे थे?
मैंने कहा- नींद नहीं आ रही है, कुछ बेचैनी सी है।
फिर मैंने मॉम से पूछा- क्या आपको भी नींद नहीं आ रही है?
वो बोलीं- हाँ मुझे भी नींद नहीं आ रही है।
मैंने कहा- आप भी यहीं लेट जाओ न।
फिर वो मेरे पास बैठ गईं।
मैंने फिर कहा- यहीं सो जाओ ना, मेरे पास।
वो सीधी लेट गईं। कुछ देर बाद मैंने पूछा- नींद नहीं आ रही है.. तो कोई कहानी पढ़ लेते हैं।
उन्होंने सर हिला कर हामी भरी तो मैंने पापा की किताब की रेक से एक सेक्सी कहानी की बुक निकाली और कहा- इसको पढ़ते हैं।
मॉम बोलीं- ये कौन सी किताब है?
मैंने कहा- कहानी की किताब है, इसकी कहानी पढ़ने में बहुत मजा आएगा, इसको पढ़ने से बहुत गुदगुदी भी होती है।
फिर मैंने किताब को हम दोनों के बीच में रखकर पढ़ने लगा। ऐसे में मॉम को पढ़ने में जरा दिक्कत हो रही थी तो मैंने कहा- चलो मैं पढ़कर सुनाता हूँ..
मैं उनको सेक्सी कहानी पढ़कर सुनाने लगा। इसमें एक लड़की का दूसरे मर्द के साथ सेक्स का किस्सा था। ये सेक्स स्टोरी बहुत डिटेल में थी।
मॉम बोलीं- ये सब क्या है?
मैंने कहा- अल्मारी में रखी थी।
वो बोलीं- इसमें बड़ों की गन्दी बातें लिखी हैं। तुमको इसे नहीं पढ़ना चाहिए।
मैंने कहा- फिर आपकी और डैड की अल्मारी में क्यों रखी है? एक बार पढ़ते हैं, सुनो ना!
फिर मॉम को भी मज़ा आने लगा। वो भी गरम होने लगीं। मॉम बीच-बीच में अपनी बुर खुजला रही थीं।
मैंने कहा- कहो गुदगुदी हो रही है ना।
मॉम ने स्माइल दे दी।
मैंने अपने लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मेरे भी इसमें और सारे बदन में बहुत गुदगुदी हो रही।
फिर मैंने कहा- अब आप पढ़िए।
अब वो पढ़ने लगीं.. वो बहुत गरम हो गई थीं। तभी मॉम ने किताब बंद करके रख दी और बिस्तर पर अपने पैर पसार कर चित्त लेट गईं।
मैंने पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोलीं- बहुत बेचैनी हो रही है, नीचे बदन में कुछ खुजली भी हो रही है।
मैंने पूछा- शायद पावडर बदन पर लगाने से आराम मिल जाएगा।
वो बोलीं- हाँ ठीक है.. तुम पावडर ही लगा दो।
मैं बगल वाले रूम से पावडर लेकर आया।
मैंने देखा कि मॉम पेट के बल लेट गई थीं।
मॉम बोलीं- कमर में लगा दो।
मैंने देखा उन्होंने अपने ब्लाउज के बटन खोले हुए थे और ब्रा भी खोल दी थी।
मैं पावडर कमर पर लगाते हुए ब्लाउज के अन्दर हाथ डालकर मलने लगा। उनका कोई विरोध नहीं हुआ तो फिर मैं आहिस्ता-आहिस्ता पूरी कमर पर पावडर मलते हुए सीधे ही उनके मम्मों को मसलने लगा। मॉम को मम्मे मिंजवाने में मजा आ रहा था। वे मजा लेने लगीं तो मैंने सीधे ही उनके मम्मों पर पावडर लगाया और मम्मों को मसलने लगा।
अब उनको मजा आ रहा था।
फिर मैंने कहा- मॉम जरा आपकी गर्दन के पास भी पाउडर लगा देता हूँ।
वो घूमीं तो ब्लाउज के बटन खुले हुए थे और बूबस- पूरे नंगे दिखने लगे थे।
मॉम के बड़े-बड़े चूचे बहुत सेक्सी लग रहे थे।
मैंने उनकी गर्दन पर पावडर लगाने लगा। अब तो मैं सामने से मॉम के मम्मों को मसल रहा था और वो कुछ नहीं बोल रही थीं।
फिर मैंने मम्मे मसलते हुए हाथ नीचे पेट पर फिराया और नाभि को मसला। मॉम की आह निकली तो मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ अन्दर डालकर जांघ पर फेरते हुए उनकी बुर पर भी पावडर लगाने लगा।
वो कामुक आवाज में बोलीं- उह.. ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- ठीक से लगा देता हूँ.. फिर नींद भी ठीक से आ जाएगी।
मॉम कुछ नहीं बोलीं तो मैं अपने हाथ को उनके गोल-गोल चूतड़ों पर फेरने लगा। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
मैंने पूछा- मॉम क्या मज़ा आ रहा है.. आराम मिल रहा है?
अब मैं मॉम के चूतड़ों पर हाथ फेरते-फेरते उनके ऊपर चढ़ गया और बोला- इससे आपका बदन भी दब जाएगा।
मॉम भी मेरे मजे लेने लगीं।
मैंने कमर के नीचे से मॉम के चूचे पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा।
अब तो मॉम पूरी तरह से चुदास से तड़फ रही थीं।
मैंने कहा- किताब वाला सीन करते हैं।
मेरे बदन में जोर-जोर से गुदगुदी हो रही है।
फिर अचानक से मॉम को कुछ याद आया और वे बोलीं- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- दरवाजा बंद है, किसी को पता नहीं चलेगा, मैं भी किसी से नहीं कहूँगा, तुम्हारी कसम मॉम आपको मज़ा भी आ जाएगा, प्लीज़ मना मत करो।
मॉम ने कुछ नहीं कहा।
मैंने फिर से उनसे कहा- कहानी की तरह मज़ा करते हैं मॉम।
मैंने अपना पजामा खोल दिया और उनकी जाँघों पर बैठ गया।
अब मॉम ने मेरा लंड पकड़ कर लंड पर हाथ फेरते हुए कहा- मुझसे वादा करो कि तुम किसी से कभी भी नहीं कहोगे।
मैंने कहा- वादा।
और फिर क्या था.. उन्होंने अपने सारे कपड़े बदन से अलग कर दिए।
मैंने कहा- आप जैसे बोलेंगी.. मैं वैसे ही करूँगा।
उन्होंने कहा- हाँ जैसा कहानी में पढ़ा था.. वैसे ही करते रहो। मैंने उनके एक चुचे को चूसना शुरू किया.. दूसरे चूचे को दबा भी रहा था।
फिर वो भी मेरे लंड पर हाथ फेरने लगीं। मैंने भी एक हाथ की उंगली से मॉम की बुर को दबाने लगा और उंगली चुत के अन्दर कर दी।
फिर वो मुँह से ‘शह्ह.. उह्हह..’ आवाज निकालने लगीं।
मैंने उनसे किताब के सीन की तरह उनसे डॉगी स्टाइल में बैठने को कहा। जैसे ही मेरी मॉम कुतिया के जैसे बनीं मैंने अपने लंड को पीछे से उनकी बुर के छेद के पास ले जाकर सुपारे को फेरने लगा। साथ ही मैं दोनों हाथों से मम्मों भी दबा रहा था। सच में बड़ा मज़ा आ रहा था।
अचानक ही लंड फिसला और झटके के साथ बुर में घुस गया, क्योंकि उनकी बुर का छेद चुदवाते चुदवाते कुछ तो बड़ा हो गया था।
उनके मुँह से भी और मेरे मुँह से भी जोर की ‘शह्हह.. आह..’ की आवाज निकलने लगी।
मैंने अब धक्का लगाना शुरू किया, धीरे-धीरे धक्के की स्पीड भी बढ़ा रहा था। सच में क्या मस्त मज़ा आ रहा था।
मॉम भी बोलीं- और जोर से चोद.. और जोर से पेल.. आह मजा आ रहा है।
मैंने मॉम के मम्मों को जोर से दबाकर निप्पलों को खींचा और धक्के लगाने लगा।
‘अह.. उह.. ओह.. सुपरब.. श्शश.. और और जोर से.. क्या बात है और झटका दूँ मॉम?’
‘हाँ पेलता रह..’
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और वो बेड पर सीधी लेट गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके कामुक बदन पर हाथ फेरा, फिर बुर में उंगली घुसेड़ कर भीतर के पॉइंट को सहलाने लगा।
ये उनका जी-स्पॉटस था, वो बहुत जोर से हिल गईं और उनकी जोर से ‘आअ.. आअ.. श्शश.. उह..’ की आवाज निकल गई।
मैंने अब लंड को उनके मम्मों पर फिराना शुरू किया और ऊपर से नीचे की तरफ़ लंड लाने लगा। फिर उन्होंने मेरा मुँह अपने मुँह के पास खींचकर जोर से किस किया। मैं भी जोर-जोर से किस करने लगा और अपनी जीभ भी उनके मुँह पर फेरने लगा। उनकी जीभ को चूसने में मज़ा आ रहा था। वो साथ-साथ मेरे लंड को एक हाथ से जोर-जोर से सहला रही थीं।
मैं भी बोला- बहुत मज़ा दे रही हो।
फिर उन्होंने मेरे को जोर से अपनी तरफ़ खींचकर बांहों में जकड़ लिया। मैंने भी उनको भींच लिया, उनके चूचे मेरी छाती से चिपक कर दब रहे थे।
आह क्या रगड़ सुख मिल रहा था।
फिर उन्होंने अपनी जांघें फैलाईं और कहा- अब जल्दी-जल्दी जोर से यहाँ लंड ले आओ।
मैंने लंड को उनकी बुर में घुसेड़कर धीरे-धीरे हिलने लगा।
फिर वो बोलीं- आअह ऐसे नहीं चलेगा.. जोर-जोर से झटके लगाओ।
मैंने जोर से चोदना शुरू कर दिया।
क्या मस्त चुदाई का आनन्द आ रहा था। मॉम भी चुदाई का मजा ले रही थीं- शह.. शह आ.. क्या बात है आह.. आ.. शह.. अह्हह.. ओह्हह.. और जोर जोर से धक्के लगाओ.. बहुत मज़ा आ रहा है।
मैं भी पूरी ताकत से लंड को भीतर तक ठोकने लगा। चुदाई पूरी स्पीड पर थी और अब मैं झड़ने लगा था। मेरा रस झड़ने लगा और मैं ढीला होकर उनके नंगे बदन से जोर से लिपट गया। मॉम के गुदगुदे बदन पर मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
फिर वो बोलीं- चलो हटो.. बहुत देर हो गई है.. अब सोते हैं।
वो अपने कपड़े पहनने लगीं। फिर बोलीं- ये राज ही रखना, किसी से कभी मत कहना।
मैंने हाँ कहते हुए उनके मम्मों को दबाकर किस कर लिया और बुर को दबाते हुए कहा- फिर कभी गुदगुदी होगी तो..?
वो हंसने लगीं.. मैं भी समझ गया।
मॉम बोलीं- बदमाश हो गए हो, चलो अब सो जाओ।
वो अपने कमरे में सोने चली गईं।
मैं अपनी मॉम के साथ चुदाई की इस कहानी को कभी नहीं लिखना चाहता था.. पर अब मुझे अच्छा लग रहा है।
इस चुदाई की कहानी पर आपके कमेंट्स का इन्तजार है।
हमारे घर के पड़ोस में एक Sex Stories परिवार रहता था। उनकी एक लड़की थी। उसका नाम सोनू था। उसकी उमर लगभग 19 साल की थी।
वो एकदम मस्त चीज़ थी उसके बूब 30-32 साइज़ के थे अपनी बॉडी से वो पूरी जवान लड़की लगती थी।
सोनू बहुत ही सेक्सी थी। मैं उसे चौदना चाहता था वो भी मुझे आते जाते अपने घर की छत पर से देखती थी और मुझे देख कर मुस्कुराती भी थी लेकिन कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।
उनके घर पर एक कंप्यूटर भी था।
यह उस समय की बात है जब सोनू के माता-पिता 5-6 दिन के लिए कहीं चले गये थे। घर पर केवल सोनू ही अकेली थी।
दूसरे दिन सोनू अपने घर के बाहर दरवाजे पर मुझे खड़ी दिखाई दी।
मैंने उसे देखा तो वो मुस्कुराई और मुझे बुलाया।
जब मैं उसके पास गया तो वो बोली- आप को अगर कंप्यूटर ठीक करना आता हो तो प्लीज़ हमारा कंप्यूटर ठीक दो ना प्लीज़!
और मुझे घर में आने का इशारा किया।
मैं स्कूल जा रहा था इसलिए मैं शाम को आने के लिए कह कर स्कूल चला गया।
स्कूल से वापस आने के बाद मैं सोनू के घर 5 बजे शाम को पहुँच गया।
मैंने कॉल बेल बजाई तो सोनू ने दरवाज़ा खोला।
उसने काले रंग की स्कर्ट और पिंक रंग की टी-शर्ट पहन रखी थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहन रखा था। उसकी चूचियों के दोनो निपल्स बाहर से ही महसूस हो रहे थे।
मैं घर के अंदर गया।
वो मुझे कंप्यूटर के पास ले गयी।
मैंने कंप्यूटर को ओन किया और चेक करने लगा।
सोनू चाय बनाने चली गयी।
मैंने एक फोल्डर को खोला जो सोनू ने बनाया था। उस में बहुत सारी अश्लील तस्वीरें थी।
मैं उन तस्वीरों को देखने लगा। उसमें नेट से डाउनलोड की हुई बहुत सारी सेक्सी पिक्चर थी।
थोड़ी देर बाद वो चाय ले कर आ गयी।
उस समय कंप्यूटर स्क्रीन पर जो फोटो थी उसमें एक आदमी एक लड़की को डॉगी स्टाइल में चोद रहा था।
वो मेरे बगल में बैठ गयी और बोली- प्लीज़ ये फाइल्स बंद कर दो। इसे मत देखो।
मैंने कहा- बहुत अच्छी पिक्चर है।
सोनू का चेहरा शरम से लाल हो गया।
मुझे देखने दो।
वो बोली- प्लीज़ जीतू बंद कर दो इसे।
मैंने कहा- मैं कोई ग़लत काम थोड़े ही कर रहा हू। आख़िर तुम भी तो ये पिक्चर देखती होगी। तुम भी जावन हो और मैं भी। तुमने कभी ट्राइ किया है?
वो चुप रही तो मैंने फिर पूछा।
वो बोली- मैं अभी तक कुँवारी हूँ। मैंने कभी किसी से नहीं करवाया है।
मैंने उस से झूठ बोला और कहा- मैंने भी आज तक किसी लड़की के साथ कुछ नहीं किया है। घर पर भी कोई नहीं है। चलो, आज हम दोनों इसे ट्राइ करते हैं।
उसने इनकार कर दिया तो मैंने पूछा- क्यों?
इस बार वो कुछ नहीं बोली और उसने अपना सर दूसरी तरफ घुमा लिया।
मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया तो उसने मेरा हाथ झटक दिया। मैंने फिर पूछा- हम दोनो ही कुंवारे हैं और आज अच्छा मौका है। तुम भी जवान हो और मैं भी। घर पर भी कोई नहीं है। हमें ट्राइ करना चाहिए।’
वो एक दम चुप रही।
मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिरना शुरू कर दिया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
उसने अपनी दोनों जांघों को एक दूसरे पर रख कर ज़ोर से दबा लिया।
मैंने उसकी जांघों को सहलाते हुए अपना हाथ उसकी जांघों के बीच घुसा दिया। मेरा हाथ सीधा उसकी चूत पर लगा। उसने नीचे भी कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत एकदम मुलायम और चिकनी थी।
उसने इस बार मेरा हाथ नहीं हटाया। मैं समझ गया कि मेरा काम बन जाएगा।
मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू कर दिया तो उसकी साँसें बहुत तेज़ चलने लगी और उसका चेहरा एक दम लाल हो गया। वो कुछ नहीं बोली।
थोड़ी देर तक उसकी चूत सहलाने के बाद मैं उठा। मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले जाने लगा तो उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया।
बेडरूम में ले जा कर मैंने उसे बेड पर लिटा दिया।
मैंने उसकी टी-शर्ट और स्कर्ट उतार दी। उसके कपड़े उतारने के बाद मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए।
मुझे नंगा होते देख उसने अपनी आँखें बंद ली लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कुराहट थी।
उसका संगमरमर सा गोरा बदन एक दम नंगा मेरे सामने था। मुझे जोश आने लगा।
मैंने उसके होठों को चूमना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक होठों को चूमने के बाद मैंने धीरे धीरे उसके चुचियों को, पेट को, जांघों को और फिर उसकी चूत को चूमने लगा।
वो एकदम गरम हो गयी और सिसकारियाँ भरने लगी।
मेरा लंड भी खड़ा हो कर जोश से एक दम लोहे जैसा हो गया था और झड़ने वाला था।
मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया और चूसने को कहा।
वो कुछ नहीं बोली।
मैंने उसके मुँह में अपना लंड घुसाने की कोशिश की तो उसने अपना मुँह इधर उधर करना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर ना नुकर करने के बाद आख़िर में उसने अपना मुँह खोल दिया।
मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और वो उसे चूसने लगी।
मैं उसके उपर लेट गया और मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी। दो मिनट बाद ही मैं उसके मुँह में झड़ गया और उसने मेरे लंड का सारा पानी निगल लिया। लंड का सारा पानी निगल जाने के बाद भी उसने मेरा लंड चूसना ज़ारी रखा।
वो भी अब तक बहुत जोश में आ गयी थी और उसकी चूत से भी पानी निकलने लगा।
मैंने भी उसकी चूत का सारा पानी चाट लिया। वो एक दम नमकीन और कुछ कुछ खट्टा था।
दस मिनट में ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया।
मैं भी अभी तक उसकी चूत को चाट रहा था और वो भी अपना चूतड़ उठा उठा कर मज़ा ले रही थी।
हम दोनो बहुत जोश में आ गये थे। मैं उसके उपर से हट गया और उसे डॉगी स्टाइल में होने को कहा। वो कुछ नहीं बोली और चुप-चाप उठ कर डॉगी स्टाइल में हो गयी। उसने अपना सर तकिये पर टिका दिया।
मैं समझ गया कि वो चुदवाने के लिए एकदम बेकाबू हो रही है। मैं उसके पीछे आ गया। मैंने उसकी चूत को फ़ैला कर अपने लंड का सूपाड़ा उसकी चूत के बीच रख दिया। वो कुछ नहीं बोली।
मैंने अपना लंड थोड़ा सा अंदर दबाया। उसकी चूत बहुत टाइट थी और केवल मेरे लंड का सूपाड़ा ही उसकी चूत के अंदर घुस पाया।
मैंने थोड़ा और दबाया तो वो पहली बार बोली- प्लीज़। ज़रा धीरे।
मैं समझ गया कि वो एक दम जोश में आ गयी है। मैंने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो वो सिसकारियाँ भरने लगी।
मेरा लंड उसकी चूत में अब तक 2″ घुस चुका था।
मैंने अपना लंड उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
उसने भी अपना चूतड़ पीछे की तरफ दबाया और सिसकारियाँ भरने लगी, उफ़फ्फ़… जीत… धीरे… प्लीज़। दर्द हो रहाआ है… उईए… म्माआआआ… आआआहह… रुक्कक… जाओ…
मैं रुक गया।
वो बोली- जीतू, मैं पहली बार करवा रही हू। ज़रा आराम से धीरे धीरे करो। बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- तुम घबराओ मत। मैं धीरे धीरे और आराम से ही करूँगा। मैं जानता हूँ कि तुम अभी तक कुँवारी हो और तुम्हारी चूत एक दम टाइट है।
मैंने धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
छः सात मिनट तक चोदने के बाद उसे भी और ज़्यादा मज़ा आने लगा। वो बोली- जीतू, तुम अपना लंड थोड़ा सा और अंदर डाल दो। मैं तैयार हूँ।
मैंने थोड़ा सा और दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 3″ तक घुस गया।
वो फिर बोली- बस, रुक जाओ प्लीज़। दर्द हो रहा है। अभी इतना ही अंदर डाल कर चोदो मुझे।
उसकी सील टूट चुकी थी और वो अब मेरा लंड अपनी चूत में आराम से अंदर ले रही थी।
मैंने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया।
दो तीन मिनट में ही उसका दर्द जब कुछ कम हुआ तो उसे मज़ा आने लगा।
वो बोली- थोड़ा और अंदर डाल कर और तेज़ीसे चोदो… मुझे…
मैंने थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 4″ तक घुस गया।
मैं अपनी स्पीड को बढ़ाते हुए उसे चोदने लगा। वो अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ दे रही थी।
पाँच मिनट तक चोदने के बाद वो बहुत ज्यादा जोश में आ गयी और बोली- जीतू, और अंदर डालो अपना लंड मेरी चूत में। खूब तेज़ चोदो मुझे। अब रुकना नहीं, पूरा लंड अंदर घुसा देना। मैं एक दम बेकाबू हो रही हू और मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
मैंने अपना लंड थोड़ा और अंदर दबाया तो मेरा लंड उसकी चूत में 5″ तक घुस गया। मैंने उसे धीरे धीरे चौदना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर तक चोदने के बाद मैंने एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया।
मेरा लंड उसकी चूत में 6′ तक घुस गया।
वो चिल्ला उठी लेकिन उसने मुझे रुकने के लिए नहीं कहा।
मैंने एक फाइनल शॉट लगा दिया तो वो बहुत तेज़ चिल्लाने लगी।
मेरा पूरा लंड उसकी चूत में एकदम ज़ड़ तक घुस चुका था।
वो बोली- जीतू, तुमने आख़िर मुझे आज एक लड़की से औरत बना ही दिया। मैंने अपनी चूत में तुम्हारा पूरा लंड अंदर ले ही लिया। बहुत दर्द हो रहा है। थोड़ा रुक जाओ, तब चौदना।
मैं रुक गया।
थोड़ी देर बाद जब वो शांत हुई तो उसने मुझसे चोदने के लिए कहा। मैंने सोनू की चुदाई शुरू कर दी। पहले बहुत धीरे धीरे उसके बाद मैंने बहुत तेज़ी के साथ चौदना शुरू कर दिया।
5 मिनट तक उसे चुदवाने में थोड़ा दर्द हुआ लेकिन उसके बाद वो एकदम शांत हो गयी और उसे मज़ा आने लगा, उसने अपना चूतड़ आगे पीछे करते हुए मेरा साथ देना शुरू कर दिया।
2 मिनट बाद ही वो बोली- और तेज़ चोदो, मेरे जीतू राजा। ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाओ।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और बहुत तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा। वो अब अपनी चूत में मेरा पूरा लंड आराम के साथ अंदर ले रही थी।
2 मिनट भी नहीं बीते की वो फिर बोली- जीतू, मुझे कुछ हो रहा है। लगता है मेरी चूत से पानी निकलने वाला है। खूब ज़ोर ज़ोर से धक्का लगाओ।
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है। मैंने बहुत ही तेज़ी के साथ उसकी चुदाई शुरू कर दी।
वो बोली- आआआ!!! मैंऽऽऽ आआऽऽऽ रहीऽऽऽ हूँऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ और तेज़ ऽऽऽ
उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मेरा सारा लंड भीग गया।
मैं भी बिना रुके उसे आँधी की तरह चोदता रहा। लगभग 20 मिनट तक चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस दौरान वो भी 2 बार झड़ चुकी थी। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकल जाने के बाद मैं हट गया।
हम दोनो तक गये थे। कुछ देर आराम करने लगे।
15 मिनट बाद वो बोली- जीतू, प्लीज़। एक बार और करो ना। मुझे बहुत अच्छी लग रही थी यह चुदाई।
उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। दस मिनट में ही मेरा लंड एक दम तैयार हो गया।
मैंने उसे बेड पर लिटा दिया और उसके चूतड़ के नीचे 2 तकिये रख दिए। उसकी चूत एक दम उपर उठ गयी।
मैंने उसकी चूत के बीच जैसे ही अपना लंड रखा तो वो बोली- जीतू, मुझे बहुत मज़ा आया था। इस बार तुम अपना लंड को एक ही धक्के में पूरा अंदर डाल दो।
मैंने अपनी सासें रोक कर अपने को थोड़ा तैयार किया और पूरा ज़ोर लगते हुए एक करारा धक्का मारा। मेरा पूरा लंड सनसंता हुए उसकी चूत में घुस गया। वो बहुत तेज़ चीख पड़ी।
मैंने बिना रुके उसकी चुदाई शुरू कर दी। 2 मिनट में ही वो अपना चूतड़ उठा उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देने लगी। मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। 5 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गयी। उसकी चूत एक दम गीली हो चुकी थी और मेरा लंड भी उसकी चूत के पानी से एक दम गीला हो चुका था।
मैं रुका नहीं, उसको चोदता रहा। कमरे में फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी। इस बार मैंने उसे बिना रुके उसको चौदा और उसकी चूत में ही झड़ गया। लंड का पूरा पानी उसकी चूत में निकाल देने के बाद मैं हट गया और उसके बगल में ही लेट गया।
वो भी थक कर चूर हो गयी थी और एकदम निढाल हो गयी थी। वो बेड पर ही पड़ी रही। Sex Stories
दोस्तो ! मैं सेक्सी कहानियाँ सात महीनों Antarvasna से पढ़ रहा हूँ। मैं २५ साल का शादीशुदा मिडल परिवार का राजस्थान के एक छोटे से कसबे का सेक्सी लडका हूँ। मैं कम्प्यूटर इन्जीनियर हूं। मैं मेरी शादी को दो साल हो गये है।
आपने मेरी कहानी “कुंवारी सलहज को प्रेगनेंट किया” पढ़ी और बस एक मेल ही आया। दोसतो ये कहानी आपको लगता है पसंद नही आई। दोस्तो ! मैने वो पहली बार कहानी लिखी थी।
अब एक बार फिर हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
२००४ के दिसम्बर की छुट्टियों में मेरे मामा की लडकी हमारे घर १०-१५ दिन के लिए आई। वो २४ साल की थी. बहुत सुंदर है, उसका फिगर २८-२४-२८, ऊंचाई ५’३”, वो बहुत सेक्सी है. जब भी मैं उसके बारे मे सोचता तो उसको जमकर चोदने का मन करता लेकिन मैं कुछ नही कर पाता,वो मुझे तिरछी नजर से देखती थी।
बस तो सरदियों के दिन थे। सब लोग {परिवार वाले} रजाई ओढ़ के रात को बातें करते थे। वो मेरी वाली साईड में बैठ गयी। मैने धीरे से उसकी टांग पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। वो मेरी तरफ़ देख के मुस्करायी तो मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया। मैने उसके बुबस दबाने शुरु किये वो मस्त हो रही थी। वो कहने लगी- मुझे कम्प्यूटर सिखाओ !
मैने कहा क्लास लगेगी, वो भी रात के ९ बजे के बाद !
वो कहने लगी ठीक है। मैं डिनर करके आपके कमरे में आ जाऊगी। वो रात को मेरे कमरे में आयी। गांव में सब ८:३० बजे तक सब सो जाते है। हमारा घर बहुत बड़ा था। मैने उसे कम्प्यूटर ओन करके दिया। उसको गाने चलाना, ओफ़ीस ,सीडी चलाना बताने लगा। मैं उसको बताते हुए छू रहा था। उसे अजीब सी मस्ती चढ़ रही थी। उसका ध्यान मेरी ओर हो गया। धीरे से मैं सेक्सी फ़िल्म पर क्लिक करके सोने का नाटक करने लगा। उसने वो फ़िल्म एक दम डर के बंद कर दी और फ़िर कुछ देर तक वो कम्प्यूटर चलाने के बाद सोने को जाने लगी। लेकिन उसका मन उस फ़िल्म को देखने का था तो वो उठ कर मेरी ओर देखा तो मैं सोने का नाटक करने लगा। वो इत्मिनान से फ़िल्म देखने लगी।
फ़िल्म देखने के बाद वो गरम हो गई। वो अपने बूबस को मसलने लगी। मैने धीरे से उसको किस किया तो वो चोंक गयी। मैं उसे अपने बैड पर उठा लाया तो वो बोली- भैईया यह क्या कर रहे हो?
मैने कहा जो तुम्हें चाहिए वो दे रहा हूं। मैं उसके बूबस दबाने लगा वो मस्त होती जा रही थी। और मैं होठ किस भी करने लगा। वो बोली ये नीचे मेरे से एक डंडा सा क्या है इतने में उसने मेरे लंड पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी। मैने धीरे से उसकी सलवार को खोल दिया अब मैं सलवार को पैर से उतारने लगा वो बोली किसी को पता चल गया तो?
मैने कहा तुम बताओगी?
वो बोली- नहीं। मैने उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिये। हम दोनो एकदम नंगे थे। मैं उसे बेसबरी से चूम रहा था। वो भी मुझे ‘चूमते रहो’ कह रही थी, इतने दिन पहले क्यों नहीं मिले। मेरा ९” का लंड एकदम खडा था। वो बेसबरी से उसे देखने लगी ओर बोली- इतना बडा पहली बार देखा है।
वो एकदम नंगी मस्त दिख रही थी उसकी छोटी छोटी चूचियाँ पूरी कसी हुई थी। मैने पहली बार उसे नँगी देखा था। मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो मस्त हो कर तडफ़ रही थी। मैं उसके पूरे शरीर को चूमता हुआ उसकी चूत को चूसने लगा। बाद में हम लोग ६९ पोजीसन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी,मैं उसकी गोरी साफ़ चूत को जीभ से चूस रहा था।
‘चूसो मेरी चूत को……आ.आ..आआया.आआआआआअ..आआआ..उ.ऊउऊ.ऊ.ईई.ऊई..ऊई आह आआह्ह्छ’ वो मस्त हो रही थी। अब मैं झड़ने वाला था वो भी इस दौरान दो बार झड़ गई थी। मैं उसका नमकीन रस पीता रहा। मेरा रस उसके मुँह में झड़ गया। वो सारा रस मस्ती से पी गई।अब मैं फ़िर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो बहुत खुश थी। मैने एक उँगली उसकी चूत में डाली। वो मेरे लँड को फ़िर चूसने लगी और मेरा ९” का लँड खडा हो गया।
अब वो बोली कि मुझे कुछ हो रहा है जल्दी करो, मेरी प्यास बुझाओ।
मैने कहा- इतनी भी जल्दी क्या है? मैने कहा दर्द बहुत होगा ! झेल लोगी?
वो बोली- चाहे मेरी चूत फ़ट जाये, मैं चाहे जितना भी चिल्लाऊँ, छोडना मत, बस अब जल्दी करो, चोद डालो, फ़ाड डालो मेरी चूत, जल्दी करो।
मैने ९” के लंड पर तेल लगाया और थोड़ा सा उसकी चूत पर लगा के, चूत पर लंड रखा और धक्का दिया तो लंड २” अंदर ही गया था कि वो चिल्लाने लगी- छोड दो, बस करो, मर जाऊगी।
मैं रुक गया और फिर वो शाँत हो गयी। मैने एक जोर से झटका मारा और चूत की सील तोड़ते हुए अँदर घुस गया। वो चिल्लाती रही, मैं रुक गया और उसके बूब्स चूसने लगा। वो मस्त हो रही थी। थोड़ी देर में मैंने झटके लगाने शुरु किये। वो भी मेरा साथ देने लगी थी। वो चूतड़ उठा उठा के चुद रही थी। २००-२५० झटके लगाने के बाद मैं झड़ गया, इस दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी।
वो रात ३१ दिसम्बर २००४ की रात थी, मैने उसे नये साल के जश्न में पूरी रात में लगभग १५ बार चोदा। वो अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। उससे उठना ही मुश्किल हो गया था। सुबह के ६ बज चुके थे। वो उठ के अपने कमरे में चली गयी। ये सिलसिला १० दिन तक चलता रहा। वो पूरी पूरी रात मस्त होकर चुदवाती थी। १० दिन बाद वो अपने घर चली गयी। पर जब भी मौका मिलता था वो चुदने को तैयार रहती थी।
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