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मैं 31 वर्ष का 6 फीट लंबा Antarvasna शादीशुदा पुरूष हूँ।मेरी सबसे बड़ी कमजोरी चोदने की मेरी तीव्र इच्छा है।
मेरी पत्नी भी इससे परेशान रहती है क्योंकि शायद ही कोई रात ऐसी होती है जिसमें मैं उसे चोदे बिना सोने देता हूँ।
उसके नहीं रहने पर मैं अपने कमरे में बैठ कर ब्लू फ़िल्म देखते हुए मुठ मार कर अपने 7 इंच मोटे लंड की तड़प शांत करता हूँ।
यह घटना पिछले महीने की है।
मेरी पत्नी मायके गई थी और रात में करीब 10 बजे मैं अपने बिस्तर पर लेटा डीवीडी में एक ब्लू फ़िल्म की सीडी डालकर अपने लंड को सहला रहा था।
फ़िर मैंने बगल में पड़ा मोबाइल उठाया और मेरी पत्नी सुनीता को फोन लगाने लगा।
सामने ब्लू फ़िल्म चल रही थी और उसमें एक मर्द एक औरत की चूत चाटने में लगा हुआ था।
मेरे कानों में उधर से रिंग होने की आवाज आ रही थी फ़िर उधर से आवाज आई- हेल्लो!
मैं मूड में बोलने लगा- सुनीता डार्लिंग! तुम वहां मायके में आराम से हो और यहाँ मेरा लंड तुम्हारे लिए बेकरार है। सामने ब्लू फ़िल्म में मस्त चुदाई का सीन चल रहा है और मैं अपने कड़कते लंड को सहला रहा हूँ। आओ न और अपने चूत में इसे लेकर इसकी तड़प को शांत कर दो।
इतना कहकर मैं सुनीता की आवाज सुनने को रुका.
पर उधर से कोई आवाज नहीं आई और तब मैंने मोबाइल को कान से हटा कर उसके स्क्रीन पर देखा और मेरे होश उड़ गए।
मैं सुनीता के नहीं बल्कि अपने पड़ोस में रहने वाले सुनील जी के घर के फ़ोन पर बातें कर रहा था और वह हेल्लो की आवाज सुनीता की नहीं बल्कि उनकी पत्नी रूबी की होगी जिन्हें मैं भाभी कहता था।
अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ?
मेरे लंड की उत्तेजना जा चुकी थी और मैंने डीवीडी बंद कर दिया।
मैंने फ़िर कुछ विचार करने के बाद पुनः सुनील जी के यहाँ फ़ोन किया, रूबी भाभी ने फ़ोन उठाया तो मैंने कहना शुरू किया- सॉरी भाभी, मैं सुनीता को फ़ोन लगा रहा था पर फ़ोन में सुनील जी और सुनीता का नम्बर आस पास होने के कारण आपका नम्बर लग गया और मैंने बिना ध्यान दिए उल-जुलूल बातें कह दी। प्लीज मुझे माफ़ कर दें!
रूबी भाभी ने कुछ नहीं कहा और फ़ोन रख दिया।
मैं चिंतित सा था और समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ।
खैर मैंने सोने का निर्णय लिया पर नींद नहीं आ रही थी।
लगभग 10 मिनट बाद मेरा मोबाइल बज़ने लगा, वह सुनील जी का नम्बर था।
मैंने रिसीव किया, उधर से रूबी भाभी थी- देखो देवर जी, तुमने गलती तो की है और इसकी सजा भी भुगतनी पड़ेगी, तुम जरा मेरे घर में आओ अभी फ़िर मैं सोचती हूँ कि क्या सजा दूँ!
“अभी आया” मैंने इतना कहा ही था कि रूबी भाभी ने फ़ोन काट लिया था।
मैं गंजी और तौलिया में था सो मैं बिस्तर से बाहर आया और पजामा और टी-शर्ट निकाल कर पहनने लगा।
दोस्तो, अब जरा रूबी भाभी के बारे में बता दूँ।
सुनील जी मेरे पड़ोसी हैं और रूबी भाभी उनकी पत्नी हैं।
रूबी भाभी की उम्र 36-38 वर्ष होगी और वो एक 10 साल के बच्चे की माँ हैं।
उनका बेटा होस्टल में रहकर पढ़ाई करता है और यहाँ सुनील जी और रूबी भाभी रहते हैं।
मैं कभी-कभार उनके घर जाता था।
रूबी भाभी का कद ज्यादा नहीं है वो कुछ 5’3″ के आस पास होंगी पर उनकी चूचियां बहुत बड़ी थी और वो 38 या 40 साइज की ब्रा अवश्य पहनती होंगी।
उनकी फिगर लगभग 38-32-38 होगी।
ठंड के कारण मैंने ऊपर से जैकेट डाला और फ़िर अपने मकान का बाहरी दरवाजा बंद कर रूबी भाभी के मकान की ओर चल पड़ा।
मैंने वहाँ पहुँच कर देखा कि उनका दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था सो मैंने काल बेल न बजाकर धीरे से दरवाजा खटखटाया।
रूबी भाभी कि आवाज आई- आ जाओ!
मैं अन्दर गया।
रूबी भाभी सामने नाईटी के ऊपर शाल लपेटे खड़ी थी।
मैंने पूछा- सुनील जी कहाँ हैं?
तो उन्होंने बताया कि वो काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं और चार दिनों बाद लौटेंगे।
मैंने फ़िर कहा- भाभी! वो मैं सुनीता को फोन लगा रहा था पर गलती से!
रूबी भाभी ने मेरी बात काटते हुए कहा- चलो मान लिया! पर अब जब तुमने मुझसे इस तरह बात की तो इसकी तुम्हे कुछ तो सजा मिलेगी ही, तुम्हें मेरा एक काम करना होगा!
“क्या काम?” मैंने पूछा।
इस पर उन्होंने जबाब दिया- सुनीता ने मुझे बताया है कि तुम बहुत अच्छा मसाज करते हो, मेरा शरीर बहुत दर्द कर रहा है सो मुझे एक मसाज चाहिए!
मैं समझ गया कि रूबी भाभी मेरी बातों को फोन पर सुनकर उत्तेजित हो चुकी हैं और शायद चुदना चाहती हैं।
दरअसल मैं पत्नी के साथ सेक्स के दौरान नई-नई तरकीबें आजमाता रहता हूँ।
मसाज का तरीका भी एक है, बेबी आयल का प्रयोग कर मैं पीठ से मसाज प्रारम्भ कर फोरप्ले की शुरुआत करता हूँ।
मेरा लंड अब रूबी भाभी की चुदाई के बारे में सोच कर खड़ा हो चुका था।
“क्या सोच रहे हो? चलो बेडरूम में!” रूबी भाभी ने कहा और आगे बढ़ गई।
मैं पीछे चल पड़ा।
बेडरूम में पहुंचकर उन्होंने शाल हटा दिया और नाइटी के भीतर बिना ब्रा की बड़ी चूचियों का आभास मुझे हो गया।
मैंने भी जैकेट उतार दिया।
तब मैंने बेबी आयल के बारे में पूछा तो उन्होंने अपने ड्रेसिंग टेबल में से निकाल कर दिया।
कमरे में हीटर होने के कारण ठंड नहीं लग रही थी।
मैंने भाभी को पेट के बल लेटकर नाइटी को ऊपर करने को कहा।
उन्होंने ऐसा ही किया और उनकी चिकनी गोरी पीठ देखकर मेरी उत्तेजना बढ़ गई थी।
नीचे पेटीकोट उनके चूतड़ों को ढके जरूर था, पर उनकी गोलाई और बड़े आकार का स्पष्ट आभास हो रहा था।
खैर मैंने उनकी पीठ पर बेबी आयल डाला और धीरे-धीरे मसाज शुरू किया और कुछ ही मिनटों बाद उनके पेटीकोट के फीते को खोल दिया.
मसाज करते हुए ही पेटीकोट को आधे चूतड़ों तक खिसका दिया और उनके चूतड़ों के ऊपरी हिस्से का मसाज करने लगा।
पुनः अपने हाथों में तेल लेकर उनकी दबी हुई चुचियों के बाहर निकले हिस्से पर हाथ ले गया और रूबी भाभी ने अपने शरीर को हल्के से ऊपर उठा कर मेरे हाथ चूचियों तक पहुँचने दिया।
मैंने पीछे से ही उनकी चूचियों की मालिश शुरू की।
फ़िर नीचे आते हुए उनके पेटीकोट को धीरे से बाहर निकलने लगा तो उन्होंने चूतड़ों को ऊपर उठा कर पेटीकोट निकालने में मदद की।
मैंने भी अपना टी-शर्ट खोल दिया और अब पाजामा और बनियान में था और रूबी भाभी केवल नाइटी में जो ऊपर की ओर सिमटी थी और उनकी पीछे का सारा सेक्सी भाग मेरे सामने था।
अब मैंने उनके चूतड़ों के बीच की घाटी के ऊपरी छोर पर तेल की एक धार डाली और वह उनकी गांड की घाटी में बह चली।
मैंने अपनी दो उँगलियों को उस धार के साथ नीचे सरकाया तो उन्होंने पैरों को फैला कर रास्ता दिया।
मेरी उंगलियाँ तेल के साथ उनकी गांड के छेद को सहलाते हुए चूत की छेद तक पहुँच गई और इससे पहले कि मेरी उंगलियाँ कुछ छेड़-छाड़ करती रूबी भाभी पलट गई और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और हल्के झाँटों वाली चूत मेरे सामने थी।
वो बोली- क्या केवल पीछे ही मसाज करोगे या आगे भी?
मैंने धीरे से उनकी नाइटी खोल दी और अपने बनियान को भी!
तो वह पाजामा खोलने का इशारा करने लगी सो मैंने उसे भी खोल दिया और नीचे कुछ नहीं होने के कारण मैं भी नंगा हो चुका था।
रूबी भाभी ने मेरे लंड को अपने हाथो में जोर से पकड़ कर दबाना शुरू किया और मेरा लंड अत्यन्त कठोर हो चुका था।
मैं उनकी निपल्स को उँगलियों से सहलाने लगा और वो एकदम कड़ी हो चुकी थी।
मैंने थोड़ा सा तेल उनकी चूचियों के बीच डाला और थोड़ा नाभि में और फ़िर एक हाथ से चूचियों का मसाज करना शुरू किया जबकि दूसरे हाथ की उंगली नाभि में डालकर धीरे से घुमा रहा था।
बेबी आयल की चमक से रूबी भाभी का गोरा शरीर दमक रहा था और मेरा मजा भी बढ़ता जा रहा था पर मुझे पता था कि सेक्स में धैर्य चुदाई के मजे को दूना-चौगुना कर देता है।
वह बीच-बीच में सिसकारी भी भर रही थी।
मैंने नाभि से उंगली निकाली और उनके चूत के बालों को सहलाने लगा।
और फ़िर अपने हाथ को और नीचे ले जाने लगा तो रूबी भाभी ने अपने पैरों को घुटने से मोड़ते हुए हल्का सा फैला लिया और उनकी फूली हुई रसदार चूत मेरे सामने थी।
मैंने चूत के बाहरी होठों को अपनी उंगली से रगड़ना शुरू किया और वो चूतड़ उचकाते हुए आह … सी … सी … की आवाज निकाल रही थी।
फ़िर मैं उनकी चूत के सामने बैठ गया और उनकी चूत में अपनी ऊँगली डालकर गोल-गोल घुमाने लगा।
चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
अब मैंने ऊँगली निकाली और बैठे हुए चूत के और करीब आया तथा लंड के सुपारे से रूबी भाभी की शिश्निका को रगड़ने लगा।
वो कह रही थी- आह! चोद दो मेरी चूत को अपने लंड से … प्लीज चूत में लंड डालो न!
मैंने लंड को चूत में डाला और उनकी कमर पकड़ कर अपनी ओर खींचा जिससे मेरा आधा लंड चूत में घुस चुका था और मैंने दोनों हाथों से उनकी चूचियां मसलना शुरू किया।
रूबी भाभी धक्का मरवाना चाहती थी पर मैंने धक्का नहीं दिया और उनकी पीठ के नीचे हाथ डालकर उन्हें सामने खींच कर बिठा दिया पर लंड को चूत में से निकलने नहीं दिया।
अब मैंने उनके निप्पल को चूसना शुरू किया।
एक निप्पल मुँह में और दूसरा मेरी उँगलियों में।
फ़िर अपनी जीभ को उनके मुँह में डाल दिया वो इसे चूसने लगी।
मैंने उनको अपनी बाँहों में भरा और मैंने पीछे की ओर लुढ़क गया नतीजा मैं नीचे था और रूबी भाभी ऊपर।
मैंने नीचे से धीरे धीरे चुदाई शुरू की तो उन्होंने भी ऊपर से अपने कमर को ऊपर नीचे करके साथ देना शुरू कर दिया।
इसी अवस्था में करीब 20-25 धक्कों के बाद मैंने रूबी भाभी को पकड़ा और करवट ले लिया।
अब मेरा लंड उनकी चूत से निकल चुका था और वो मेरे बगल में पड़ी थी।
वो बोली- आह, ये क्या किया चोदो ना!
मैंने कहा- भाभी, तुम बस मजे लेती रहो और मेरा जादू देखो!
और मैंने उठकर उनकी टांगों को घुटने से मोड़ दिया और उनकी चूत के होठों के फैला कर शिश्निका को अपने होठों से चूसने लगा।
वो छटपटाने लगी।
मैंने अपनी जीभ को चूत में घुसा दिया और गोल-गोल घुमाने लगा, वह अपने चूतड़ उचकाने लगी और चोदने के लिए गिड़गिड़ाने लगी।
मैंने उनकी जांघों के इर्द-गिर्द अपने बाजू कस लिए और चूत के बाहरी होठों के जोर जोर से चूसने लगा।
वह आह … आह … ससी. सी… कर रही थी.
चूत रस से लबालब भर चुकी थी चूत का रस चूत से लगातार बह रहा था।
फ़िर मैंने ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और बेड से उतर कर खड़ा हो गया।
रूबी भाभी को धीरे से खींच कर उनके चूतड़ों को बेड के किनारे पर लाया और उनके नीचे एक तकिया लगाया।
अब उनकी चूत मेरे लंड के सामने थी, उनके पैरों को अपने कंधे पर रखते हुए लंड उनकी चूत में अन्दर तक पेल दिया।
और वो एक बार तो चीख पड़ी पर साथ ही अपने गांड को हिलाने लगी तो मैंने धक्के देने शुरू कर दिए।
कमरे में फच फच की आवाज फ़ैल चुकी थी साथ ही भाभी की सीत्कार और आहों से कमरा गूंज रहा था।
थोड़ी ही देर में चुदाई के दौरान उन्होंने अपने पैरों को कंधे से उतार कर मेरी कमर के चारों ओर लपेट लिया और मेरे हाथों को पकड़ने के लिए अपने हाथ बढ़ाये।
मैं समझ गया कि अब वो चरम पर पहुँच चुकी हैं।
मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और उनकी चूत में झड़ने लगा।
मैं झुका और उनकी निप्पल को चूसने लगा, हम दोनों झड़ चुके थे और अब मैं उनके मुख को चूम रहा था।
उन्होंने अपनी आँखें बंद की हुई थी पर हांफ रही थी और मैंने भी पसीने से तर हांफ रहा था।
लगभग दो मिनट बाद मैंने धीरे से लंड को चूत में से निकालना शुरू किया तो उन्होंने अपनी आँखें खोली।
मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला और फ़िर तौलिया लेकर उनकी चूत से बह रहे अपने लंड और उनकी चूत के रसों के मिश्रण को धीरे-धीरे पौंछना शुरू किया तो उन्होंने भी अपने पेटीकोट से मेरे लंड को पौंछने का काम शुरू किया।
अगली बार नए तरीके से चुदाई की घटना!
अपनी राय मुझे अवश्य दें! Antarvasna
मैं राहुल, अन्तर्वासना के पाठक Hindi Sex Stories एवं पठिकाओं यानि लंड वालों और चूत वालियों को नमस्कार करता हूँ! मैं अन्तर्वासना की कहानियाँ अक्सर पढ़ता हूँ! कुछ तो सच्ची लगती हैं, कुछ केवल मनोरंजन के लिए ही हैं!
अब मैं आपको अपनी एक सच्ची घटना बताता हूँ! आशा है आप सब को बहुत पसंद आयेगी! कृपया पढ़ कर अपनी राय लिखें और मेरा उत्साह बढायें!
काफी पुरानी घटना है!
बात उस समय की है जब मेरी उम्र 18 साल की थी! मेरी बड़ी बहन की उम्र 20 साल की थी! मेरे ताऊ जी के लड़के एवं लड़की की उम्र 21 एवं 20 साल की थी! हम चारों एक ही कमरे में सोते थे!
एक बार रात में मेरी आँख खुल गई! मैं चुपचाप पड़ा थोड़ी सी आंखें खोल कर सब देख रहा था! मुझे ताज्जुब भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था!
अब मैं पूरी बात बताता हूँ! मेरे भैया एवं दोनों बहनें एक दम नंगे थे! दोनों बहनों ने भैया का लंड पकड़ रखा था. कभी लंड को ऊपर नीचे करती, कभी मुँह में ले लेती थी और मजा लेकर चूस रही थी!
और भईया उनके बोबे बारी बारी से दबा रहे थे! यह देख कर मेरा लंड भी खड़ा हो गया! लेकिन मैं उस समय कुछ नहीं कर सकता था!
फिर देखा कि भैया एक की चूत चूमने लगे और दूसरी उनका लंड चूसने में लगी हुई थी! तीनों आपस में बहुत मजा ले रहे थे! फिर भैया अपना लंड एक बहन की चूत में घुसा कर चोदने लगे और बहन भी मजे से चुदवा रही थी!
दूसरी ने कहा- मुझे भी चोदो ना जल्दी से!
तो भैया कभी एक की कभी दूसरी की चूत में लंड डाल देते थे! इस प्रकार काफी देर तक चुदाई चलती रही, जब तक एक दम निढाल नहीं हो गए! फिर सब नंगे ही सोने लगे एक दूसरे से चिपक कर!
जब मुझसे नहीं रहा गया तो मैं भी अपने सब कपड़े उतार कर एक दम नंगा हो गया! मेरा लंड भी खड़ा हो गया था! मैं भी उनके बीच में चला गया! पहले तो भईया मुझे डांटने लगे तो मैंने कहा- मैं सब को बता दूंगा! तब जाकर शांत हो गए!
दोनों बहनें एक दम आश्चर्य चकित थी कि क्या करें!
जब मैंने कहा- मैं भी वही करना चाहता हूँ जो तुम लोग कर रहे थे!
तब तीनो कहा- ठीक है पर किसी को भी मत बताना!
मैंने कहा- ठीक है!
इस प्रकार हम लोग एक बार फिर चालू हो गए!
सबसे पहले मैंने कहा- मेरा लंड चूसो!
तो दोनों बहनों ने मिल कर मेरा लंड चूसना चालू कर दिया. पर चूँकि मैं पहले से ही उत्तेजित था इसलिए मेरे लंड ने जल्दी ही पानी छोड़ दिया मुझे बहुत ही मजा आया!
तब उन्होंने कहा- कोई बात नहीं! हम लोग तेरा लंड फिर से खड़ा कर देते हैं!
यह कह कर एक ने मेरा लंड चूसना चालू कर दिया और दूसरी ने अपने बोबे मेरे हाथ में पकड़ा दिए और कहा- इसे चूसो और दबाओ!
फिर मैं वैसे ही करने लगा जिससे मेरा लंड खड़ा हो गया! इधर भैया भी रुके हुए नहीं थे, कभी किसी के बोबे दबाते कभी किसी की चूत में उंगली कर रहे थे!
अब मैंने कहा- अब मैं तुम दोनों को चोदना चाहता हूँ!
तब वो बोली- एक साथ कैसे चोदेगो?
मैंने कहा- मैं दोनों को ही चोदूंगा!
तो उन्होंने कहा- पहले एक को चोद लो फिर दूसरी से कर लेना!
मैंने कहा- ठीक है!
तब एक को मैं चोदने लगा और दूसरी को भैया! मुझे बहुत मजा आ रहा था! इस प्रकार कुछ देर करने के बाद मैंने अपना पानी उनकी चूत में ही छोड़ दिया! मुझे कितना मजा आया मैं बोल नहीं सकता!
फिर मैंने देखा कि भैया ने भी अपना पानी छोड़ दिया! फिर हम सब साफ सफाई करके एक दूसरे को जकड़ कर सोने लगे! रात बहुत हो गई थी पर मुझे चैन कहाँ!
मैंने कहा- मैं फिर से चुदाई करना चाहता हूँ!
कह कर मैंने दूसरी बहन से कहा- मेरा लंड चूसो पहले!
तो उसने कहा- मैं थक गई हूँ! अब कल करेंगे!
मैंने कहा- नहीं एक बार अभी चोदने दो! कल की बात कल करेंगे! भैया ने भी तुम दोनों को चोदा है!
उसके पास और कोई रास्ता नहीं था, कहने लगी- धीरे धीरे करना!
मैंने कहा- ठीक है!
फिर उसने मेरा लंड मुँह में लिया और मजे से चूसने लगी! उधर भैया भी चुप नहीं रह सके! वो भी कभी किसी के साथ कभी किसी के साथ कुछ न कुछ करने लगे! इस प्रकार हम सब उत्तेजित हो गए और चुदाई का काम फिर से चालू हो गया! मैं क्या बताऊँ कितना मजा आ रहा था, मैं वर्णन नहीं कर सकता!
और इसी प्रकार हम लोग मिल कर रोज चुदाई करते रहे जब तक उनकी शादी नहीं हो गई!
अगर यह पढ़ कर अच्छा लगा तो कृपया मेरा होंसला बढ़ाये!
आगे की कई घटनायें हैं जो मैं आप को बाद में बताउँगा! Hindi Sex Stories
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ औरHindi Porn Storiesइसकी तकरीबन सारी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ। आज मेरा भी मन किया अपनी कहानी आप लोगों को बताने का!
मेरा नाम राहुल है और मैं गाँव जुलाना, हरियाणा का रहने वाला हूँ।
बात उस समय की है जब मैं 18 साल का था और बिल्कुल कुंवारा था। मैं एक क्लीनिक पर काम करता था मेरी वहां रात की ड्यूटी थी। मैं रात को वही सोता था। वहां सुबह-सुबह एक लड़की सफाई करने के लिए आती थी। उसके बारे में क्या बताऊँ मामू! क्या लड़की थी!
वैसे वो बहुत चालू थी साली! बहुत लड़कों से चूत मरवा चुकी थी, लेकिन वो बहुत सेक्सी लगती थी। लम्बाई यही कोई 5’3″, फिगर सही-सही तो नहीं बता सकता लेकिन मस्त भरा हुआ जिस्म था उसका। चूची भी देखने में अच्छी थी काफी बड़ी-2! शक्ल सूरत तो ठीक ठाक ही थी, लेकिन उसकी जो एक चीज दिलकश थी वो थी उसकी बाहर को निकली हुई गांड!
जब वो चलती थी ना तो उसके दोनों कूल्हे आपस में ऐसे रगड़ खाते थे कि अगर उसकी गांड में लंड डाल के उस लड़की को चलाया जाए तो लंड पिस जाए साला! वो मुझसे हमेशा सेक्सी सी बातें करती थी, मेरे पास से निकलती तो मुझे छूते हुए, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया क्योंकि मैं तब तक लड़कियों के बारे में ज्यादा नहीं जानता था।
उस समय सर्दी के दिन थे, वो सुबह 5 बजे आती थी सफाई करने। मैं वही सोता था, जब वो आती तो मैं अपने दोस्तों के साथ सैर करने के लिए जा चुका होता था तो …
उस दिन मेरे दोस्त मुझे उठाने के लिए नहीं आए थे, लगता था साले रात में ब्लू फ़िल्म देख के मुठ मार के सो गए थे। तो मैं आराम से सो रहा था। वो आई और मुझे हिला कर उठाने लगी। मैंने सोचा कि मेरे दोस्त उठाने के लिए आए हैं और मेरा उस दिन जाने का मूड़ नहीं था। मैंने उसका हाथ पकड़ा और एक तरफ़ झटका दिया तो वो सीधी मेरे ऊपर ही आ पड़ी। मुझे अपने ऊपर वजन महसूस हुआ तो मैंने उसे उसकी छाती पर हाथ लगा कर उठाने की कोशिश की तो मुझे लगा कि मेरे हाथ में किसी लड़की के चुचे हैं। मैंने आँख खोल कर देखा तो देखा कि मेरे ऊपर तो वही लड़की है। मैंने उससे कुछ भी नही पूछा और चुपचाप उसे अपने नीचे डाल लिया और उसके होठों को चूसना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लगा था।
उस समय मेरा दिमाग सुन्न हो गया था, मुझे नहीं पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्योंकि मेरी जिन्दगी की पहली लड़की मेरी बांहों में थी और मैं उसे चोदने वाला था। ऐसा लग रहा था जैसे जिन्दगी में इससे ज्यादा मजेदार चीज कोई हो ही नहीं सकती।
मैं उसके मुंह के अन्दर अपनी जीभ घुमाने लगा, वो भी मेरे मुंह में जीभ डाल के चाट रही थी। मैं एक हाथ से उसके चुचे दबाये जा रहा था। कुछ देर के बाद मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी सलवार-कमीज उतार के एक तरफ़ फैंक दी। उसके जिस्म पे अब काली ब्रा और पैंटी बाकी थी। ट्यूब लाइट की रोशनी में उसका गोरा जिस्म चमक रहा था।
मैं उसकी गर्दन को अपनी जीभ से चाटने लगा। फ़िर उसके चुचियों के उभारो को चूमना चाटना शुरु कर दिया। वो भी सिसक रही थी मुझे भी मजा आ रहा था। मैंने उसकी ब्रा को उतार फैंका और उसकी चूची चूसने लगा। साली की चूची बड़ी सख्त थी, उसके निप्पल तन के खड़े हो गए थे।
मैं उसके जिस्म के एक एक हिस्से को चूमते हुए नीचे जाने लगा, उसके चिकने पेट को चूमते हुए मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी। मैंने सोचा कि उसकी चूत भी चाट लूँ पर उसकी चूत चाटने को दिल नहीं माना।
उसने चूत की शेविंग करके एक दम चिकना बना रखा था। मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए और उसे अपना लंड चूसने के लिए कहा। उसने बहुत मना किया लेकिन मैंने उसके बाल पकड़ के खींच दिए। उस वक्त मुझे पता नहीं क्या हो गया था वरना आम तौर पर मैं जानवरों जैसा व्यवहार नहीं करता।
हाँ तो मैंने उसके बाल पकड़ के खींच दिए। जैसे ही उसका मुंह खुला, मैंने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और पूरा अन्दर ठेल दिया। उसके मुँह से घूं-घूं की आवाज आ रही थी। मुझे पता चल रहा था कि मेरा लंड उसके गले में जाके फंसा हुआ है, फ़िर मुझे उस पे थोड़ी दया आई और मैंने अपना लंड थोड़ा वापस खींच लिया और धीरे-2 अन्दर बाहर करने लगा। मुझे उस वक्त ऐसा मजा आ रहा था कि दिल कर रहा था कि पूरी जिन्दगी ऐसे ही करता रहूँ। काफी देर के बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसके मुँह से लंड निकाल लिया।
और उसकी टांग उठा के लंड उसकी चूत के अन्दर डाल दिया। लंड एकदम से अन्दर चला गया। मेरा लंड अच्छा खासा मोटा ताजा है लेकिन उसकी साली की चूत ही कुआँ बन चुकी थी। वो एकदम जोर से चिल्लाई हरियाणवी में- आह मेर तो दर्द होव है बाहर काढ ले”
मुझे उस वक्त हँसी भी आई और गुस्सा भी आया कि साली आधे गाँव के लंड खा चुकी है और ऐसे चिल्ला रही है जैसे साली सील मुझसे ही पड़वा रही है।
मैंने उसकी बात सुने बगैर चुपचाप उसे पेलना जारी रखा। वो मुझसे जोर से चिपकी हुई थी उसके निप्पल कड़े होकर मेरी छाती में गड़े हुए थे और नीचे से गांड उठा-2 के धक्के लगा रही थी। धक्के क्या लगा रही थी साली एक कुंवारे लंड की इज्जत लूट रही थी। बेशक मेरा लंड उसकी चूत में था और मैं उसके ऊपर था लेकिन मैं उसे नहीं, वो मुझे चोद रही थी क्योंकि वो इस चुदाई की माहिर थी मैं तो सिखधर ही था अभी।
थोड़ी देर के बाद उसने मुझे जोर से भींच लिया और मेरे कंधे पे दांत गाड़ने लगी। मैं हिल नहीं पा रहा था, ना ही अपना लंड आगे पीछे कर पा रहा था। उसने अपनी चूत को एक बार सिकोड़ना और एक बार ढीला करना शरु कर दिया।
शायद वो टपक रही थी फ़िर उसने मुझे ढीला छोड़ दिया और मैंने जैसे ही धक्के लगाने शुरु किए, मुझसे कहने लगी हरियाणवी में- हाय बाहर काढ ले मेर तो दर्द होण लाग्या इब.
मैंने कहा- साली मेरा स्वाद क्या तेरी माँ निकलावाएगी!
और मैंने उसे जोर से पकड़ के धक्के लगाने शुरु कर दिये तो वो बार-2 निकालने के लिए कहने लगी।
मैंने कहा- गांड में डलवाएगी तो छोड़ दूंगा।
तो वो मान गई। मैंने उसकी चूत से लंड निकाल लिया, वो उसकी चूत के पानी में भीगा हुआ था और टपक रहा था। मैंने उसको मरीजों को लेटाने वाली मेज के पास खड़ा किया और उसकी छाती को मेज पे टिकवा दिया। अब उसके पैर जमीन पे थे और वो मेज पे छाती टिका के झुकी हुई थी। मैंने उसके दोनों हाथों को उसकी पीठ पे एक हाथ से पकड़ा और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ के उसकी गांड पे टिका के एक जोर का धक्का लगाया। मेरा करीब आधा लंड उसकी गांड में चला गया, वो जोर से चिल्लाने लगी और अपने हाथो को छुड़ाने की कोशिश करने लगी।
मैंने एक हाथ उसके मुँह पर रख के जोर से दबा लिया और दूसरे हाथ से उसके दोनों हाथों को जोर से पकड़ लिया। वो छटपटा रही थी और उसकी आंखों से आंसू निकल के मेरे हाथों पे बह रहे थे। शायद उसने अपनी गांड अब तक कुंवारी रखी हुई थी जो आज मैंने फाड़ डाली। यह सोच के मैं बहुत खुश हुआ और मैंने एक जोर का धक्का और लगा के अपना पूरा लंड उसकी गांड में उतार दिया और जोर-2 से धक्के लगाने लगा।
उसके नीचे की मेज भी मेरे धक्कों के साथ-2 आगे पीछे हिलते हुए चरमरा रही थी। करीब 10 मिनट बाद में मेरे वीर्य की पिचकारी उसके अन्दर अन्दर छुटने लगी। मैंने उसके हाथों और मुँह पर से हाथ हटा के दोनों हाथों से उसकी चुचियों को पकड़ लिया और उन्हें जोर-2 से भींचते खींचते हुए उसके अन्दर झड़ने लगा, पूरी टंकी खाली करने के बाद मैं उसके ऊपर ही ढेर हो गया।
करीब 10 मिनट के बाद हम लोग उठे मैंने देखा की मेरा लंड कई जगह से छिला हुआ है। मैंने बाथरूम में जाके अपना लंड साफ किया, उसने अपनी गांड और चूत साफ की और क्लिनिक की सफाई करने लगी। मैं भी थक चुका था।
लड़के ने आज बहुत मेहनत की थी भाई, अपनी जिन्दगी की पहली गांड मारी थी और पहली चुदाई हर आदमी के लिए खास होती है।
मैं उसी चुदाई के बारे में सोचते हुए घर चला गया.
तो कैसी लगी मेरी कहानी?
जिसको मेरी कहानी पसंद आई वो भी और जिसको पसंद नहीं आई वो भी और हरियाणा की सब कुंवारी लड़कियाँ या मेरी सेक्सी भाभी और आंटियां मुझसे इस पते पर ई-मेल करें- Hindi Porn Stories
मेरा नाम सुरेश है और मैं Sex Storiesअहमदाबाद, गुज़रात से हूं। मेरी उम्र 30 साल और कद 5’4′ है।
यह बात अभी की है जब मैं 3 साल के बाद विदेश से वापिस आया।
अहमदाबाद में जो मेरे पुराने साथी थे वे सभी अपने अपने काम में व्यस्त हो गए थे इस लिए अहमदाबाद मेरे लिए एक नया शहर हो गया था और मुझे एक साथी की तलाश थी।
मेरे जो एक दो पुराने दोस्त मिले, उनसे इस बारे में बात कि तो एक ने मुझे एक फ़ोन नम्बर दिया जो वास्तव में एक विधवा का था और उसकी एक सात साल की बच्ची है।
तो मैंने उसको फ़ोन लगाया और बताया कि मैं कौन बोल रहा हूं और किसने मुझे उसका नम्बर दिया है, तो वो मुझसे बात करने लगी।
पहले पहले हम बस सीधी सीधी बातें करने लगे और हमें रोज़ बात करने की आदत सी हो गई।
बातों बातों में मुझे यह भी पता नहीं चला कि वो मुझसे इतनी प्रभावित हो गई कि उसने एक दिन मुझे अपने घर मिलने के लिए बुलाया और मैं चला गया।
जैसे ही मैं उसके घर गया तो उसकी बेटी ने दरवाज़ा खोला जो बहुत प्यारी थी। लेकिन मैंने जैसे ही उसकी मम्मी को देखा तो मेरे होश उड़ गए।
क्यों?
अरे ! वो इतनी खूबसूरत नहीं थी जितना मैंने सोचा था।
हाँ ! वो गोरी जरूर थी लेकिन उसकी सूरत मुझे जरा भी पसन्द नहीं आई।
फ़िर हम इधर उधर की बातें करने लगे। असल में मेरे बात करने के अंदाज़ से और मेरे विदेश में रहने के कारण वो मुझसे बहुत प्रभावित थी।
थोड़ी बातें करने के बाद उसने मुझे कोल्ड-ड्रिंक दिया और अपनी बेटी को कहा- जाओ ! चिराग के घर में जाकर खेलो जो कि उनके ऊपर वाली मंजिल पे रहता था।
असल में मैं उसके घर पर यह सोच कर गया था कि कोई अच्छा साथी मिल जाए जिससे मैं अपने दिल की बातें कर सकूँ।
यहाँ पर मैं आपको बता दूँ कि मैं भी एक शादीशुदा आदमी हूँ, पर जैसा कि आप जानते हैं कि आदमी की कई ऐसी बातें होती हैं जो वो अपनी पत्नी के साथ भी नहीं बाँट सकता।
मेरे विचार में जीवन में ऐसी कितनी ही बातें होती हैं जो आप अपने निकटतम मित्रों से ही बाँट सकते हैं( ऐसे ही एक मित्र की मुझे तलाश थी)। लेकिन यहाँ तो बात कुछ और ही निकली। मेरी जरूरत थी एक खूबसूरत दोस्त जो मुझे दिल से समझ सके (सिर्फ़ सेक्स नहीं)
यहाँ इस भाभी को देखने के बाद मैंने निश्चय किया कि कम से कम इसके साथ तो मैं आगे कोई सम्बंध नहीं रखूँगा।
लेकिन उल्टा यह हो गया कि जैसे मैंने आपको बताया कि भाभी कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गई थी मुझसे।
अब घर में सिर्फ़ हम दोनों थे और मेरे पास कोई बात नहीं थी उससे करने को।
इतने में उसने बोला कि आओ हमारा घर देख लो।
मैं और वो अपने हाथों में गिलास लिए खड़े हुए और पहले उसकी रसोई में गए जो कि अच्छा खासा पैसा खर्च करके बनाई थी, असल में उसके पति अच्छे पैसे वाले थे और उसकी मृत्यु के बाद भाभी ने भी अच्छी नौकरी कर ली थी।
उसने मुझे रसोई के बारे में पूरी जानकारी दी पर पता नहीं मुझे क्यों ऐसा लगा कि वो जो भी बात कर रही थी वो दोहरे अर्थ में ही कर रही थी। मुझे एक और बात महसूस हुई कि जहां कहीं भी उसे मुझे छूने का मौका मिलता वो छोड़ती नहीं थी।
फ़िर वो मुझे बाहर लाई जहां हम पहले बैठे थे और हर बात बड़े विस्तार से बता रही थी। बात करते करते उसका हाथ मेरे हाथ से टकरा गया और मेरा कोल्ड ड्रिंक मेरे शर्ट पर गिर गया। उसने मुझ से माफ़ी मांगी और कहा कि आप जल्दी से शर्ट उतार दीजिए, मैं साफ़ कर देती हूं।
मैंने शर्ट उतार कर उसे दी तो उसकी नज़र मेरे सीने से हट नहीं रही थी क्योंकि मेरा सीना चौड़ा है, कोलेज़ के समय से ही मैं अखाड़े में जाया करता था।
मैंने उसे फ़िर कहा- भाभी जी ! शर्ट !
वो मेरे हाथ से शर्ट लेकर बेडरूम की ओर जाने लगी तो मेरी नज़र उसके पृष्ठ उभारों पर पड़ी जो कि मुझे पांच पांच किलो के नज़र आ रहे थे और ऊपर नीचे हो रहे थे। बेडरूम में जाकर उसने मुझे आवाज़ दी-सुरेश ! यहाँ आओ ! देखो यह मेरा बेडरूम है और बाथरूम भी यहीं पर है। फ़िर उसने कहा- तुम यहीं बेड पर बैठो, मैं आपका शर्ट मशीन में डाल देती हूँ। और वो बाथरूम में चली गई।
वहाँ बैठे बैठे मैं बोर हो रहा था और पता नहीं मुझे ज़रा नींद सी आ गई। मैं सोया नहीं था पर ज़रा आंख बंद हो रही थी। थोड़ी देर में मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे लण्ड पर किसी का हाथ घूम रहा है, पर मेरे मन में ऐसा कोई विचार था ही नहीं इसलिए मेरा लण्ड सामान्य ही था।
मैंने आंखें खोल कर देखा तो वो मेरे पूरे बदन को चूमने लगी तो मैं एकदम उसे रोकने लगा और कहने लगा कि आप यह क्या कर रही हैं। तो उसने कहा कि मैं तुमसे यौन सम्बंध बनाना चाहती हूँ और फ़िर मुझे जोर जोर से चूमने लगी।
दोस्तो ! विश्वास करना कि इतना सब कुछ होने के बाद भी मेरे लण्ड पर कोई असर नहीं हुआ क्योंकि मैं उसे चोदना ही नहीं चाहता था।
मेरी कोई प्रतिक्रिया ना मिलने पर उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम मुझसे कुछ भी करना नहीं चाहते?
मैंने साफ़ मना कर दिया कि नहीं मुझे तुम में कोई रुचि नहीं है, आप अच्छी हैं, आप का स्वभाव भी अच्छा है पर मैं आपके साथ सेक्स नहीं करना चाहता।
तो उसने कहा- तो फ़िर तुम मेरे घर क्यों आए और अब तक मुझसे बातें क्यों करते रहे?
मैंने उसे साफ़ बता दिया कि मैं उसके बुलाने पर ही उसके घर आया हूं और बातें इसलिए करता रहा कि आप अपनी किसी अच्छी सी खूबसूरत सहेली से मेरी दोस्ती करा दोगी, जैसा कि आपने वादा भी किया था।
यह सुन कर वो एकदम निराश हो गई और उसकी आंखों में आँसू आ गए। तभी उसने मुझे उसकी सारी बातें बताई और मुझे एकदम भावुक कर दिया और जोर जोर से रो रो कर मुझसे चिपक गई।
उसकी इतनी सालों की वासना की भूख सुन कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैं उसके सिर पर हाथ फ़िराने लगा।
फ़िर उसने कहा-सुरेश ! मैं तुम्हें अपनी दो तीन अच्छी सहेलियों से मिलाऊँगी और दोस्ती भी करा दूंगी, पर तुम मुझे एक बार अच्छी तरह से संतुष्ट कर दो। जब से मैंने तुम्हारा यह गोरा और चौड़ा सीना देखा है मुझसे रहा नहीं जाता।
यह बात करते करते उसने फ़िर से मेरा लण्ड सहलाना शुरू कर दिया। मैंने सोचा कि यह औरत इतने सालों से भूखी है तो क्यों ना मैं इसकी आग ठण्डी कर दूँ!
मैंने अपनी ज़िप खोल कर अपना 4 इन्च का लण्ड उसके हवाले कर दिया जो कि अभी तक उठा नहीं था।
वो मेरे लन्ड से खिलवाड़ करने लगी जैसे किसी छोटे बच्चे को खिलौना मिल गया हो।
फ़िर उसने मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे आम चूस रही हो। अब यह तो स्वाभाविक ही है कि इतना लण्ड चुसवाने के बाद तो सत्तर साल के बुढ्ढे का भी खड़ा हो जाए, मैं तो सिर्फ़ तीस का था।
वो मेरा 7′ का खड़ा लण्ड देख कर पागल सी हो गई और जोर जोर से चूसने लगी। चूसते चूसते उसने मेरी पैन्ट और अन्डरवीयर निकाल दी थी। लगातार बीस मिनट लण्ड चूसने के बाद उसने मुझे बेड पर लेटने को कहा और उसने खुद अपने सारे कपड़े उतार दिए।
और उसने मुझे बताया कि मुझे पता है कि मेरी सूरत तुमको पसंद नहीं है, पर आज के किए तुम मुझे खुश करो।
तो ना चाहते हुए भी मैंने उसके बड़े बड़े स्तन जो कि एकदम गोरे अड़तीस इन्च के थे, दबाए फ़िर उसने अपने स्तन चुसवाए। मैं करता रहा क्योंकि मैं उसको प्यासी नहीं रखना चाहता था।
थोड़ी देर बाद वो खुद मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने आप ही मेरा लण्ड अपनी चूत पर लगा कर अन्दर डलवाने की कोशिश करने लगी, लेकिन अन्दर नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत बहुत समय से प्रयोग ही नहीं हुई थी।
तो उसने कहा- आप अपने लण्ड को ज़रा पकड़ो, मैंने पकड़ा, फ़िर उसने अच्छी तरह से मेरे लण्ड की टोपी अपनी गीली चूत के मुँह पर जमाई और ज़रा सा जोर लगाया तो सिर्फ़ मेरा टोपा ही अन्दर घुस सका और वो चिल्ला उठी। पर वो हटी नहीं और दर्द होने के बावज़ूद दो तीन झटके लगा कर मेरा पूरा लण्ड अन्दर ले ही लिया और बिना हिले पाँच मिनट तक चुपचाप मेरे ऊपर बैठी रही (शायद दर्द के कारण!)
फ़िर धीरे धीरे हिलना शुरू होकर जो शताब्दी एक्स्प्रेस वाली गति पकड़ी कि रुकने का नाम ही नहीं लिया।
दोस्तो ! वैसे मैं चोदने में माहिर हूं और किसी भी महिला को दुनिया का स्वर्ग दिखा सकता हूं, मैं तीस चालीस मिनट तक चोदने की ताकत रखता हूँ। पर यहाँ मेरी इच्छा के विरुद्ध काम चल रहा था। मुझे उत्तेज़ना नहीं थी, मैं तो सिर्फ़ एक भूखी औरत को संतुष्ट करना चाह रहा था।
वो करीब बीस मिनट लगातार झटके लगाने के बाद आह ऊह की जोरों की आवज़ों के बाद मुझ से चिपक कर ढेर हो गई पर मुझे और मेरे लण्ड को आज़ाद करने से मना कर रही थी।
फ़िर उसने मुझे बोला कि मैं उसे अलग अलग तरीके से चोदूँ, तो मैंने उसे पाँच छः तरीकों से खुश किया और पता नहीं वो कितनी बार झड़ चुकी होगी।
तब उसने कहा कि आज के बाद अगर मैं सात जन्म तक नहीं चुदवाऊंगी तो भी अफ़सोस नहीं होगा। और रही तुम्हारी बात तो मैं तुम्हें अपनी ऐसी ऐसी दोस्तों से मिलवाऊँगी कि मुझे चोदने के बाद तो तुम्हारा नहीं छुटा पर मेरी सहेलियों को देख कर ही तुम्हारा लण्ड पानी छोड़ देगा।
दोस्तो ! विश्वास करो कि मैंने अपना खड़ा लण्ड ऐसे ही वापिस अपनी पैन्ट में समेट लिया और वहाँ से निकल लिया।
करीब दो दिन के बाद मेरे मोबाईल पर उसका फ़ोन आया और…
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