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Xxx मेड फक कहानी में मैं मुठ मार के गुजरा करता था. हमारी काम वाली आंटी को पता चल गया, उन्होंने मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा. तो मैंने आंटी को ही मदद करने को कहा.
दोस्तो, मेरा नाम जीत है. मैं यूपी का रहने वाला हूं.
मेरी उम्र अभी 25 साल है, हाइट 5 फुट 7 इंच है और मेरा लौड़े का साइज 6 इंच है.
यह Xxx मेड फक कहानी एकदम सच्ची है.
यह बात एक साल पहले की है.
हमारे घर पर एक काम वाली आंटी काम करने आती थीं.
उन आंटी का नाम कोमल था.
उनका रंग सांवला था.
आंटी थोड़ी मोटी भी थीं, लेकिन बहुत ही सेक्सी फिगर की थीं.
एक दिन मैं अपने दोस्तों के साथ घूम रहा था तो हम दोनों हस्तमैथुन की बात करने लगे.
बातचीत के दौरान उसने कहा- मैं तो लंड पर कंडोम पहन कर मुठ मारता हूँ और वैसे ही अपने लौड़े को कंडोम पहनाए हुए ही सो जाता हूँ.
मैंने कहा- इसमें क्या खास बात है?
वह बोला- खास-वास कुछ नहीं है, बस उस वक्त जो नशा चढ़ता है ना तो लगता है कि कौन लंड धोने जाए … बस ऐसे ही पड़े रहो. बिस्तर के कपड़े भी खराब नहीं होते और मजा भी पूरा आआ है. तू कैसे मुठ मारता है?
मैंने कहा- मैं तो मुठ मार कर टिश्यू पेपर से लंड पौंछ लेता हूँ.
वह कुछ नहीं बोला.
फिर उसने कहा- अरे यार, मुझे तो डॉटिड कंडोम में हाथ चलाने में मजा आता है.
उसकी यह बात सुनकर मुझे भी लगा कि एक बार तो कंडोम लगा कर देखना चाहिए कि कैसा लगता है.
कुछ देर बात करने के बाद उस दोस्त ने मुझे अपने पास से एक कंडोम का पैकेट दे दिया और कहा- ट्राई करके देख.
मैंने भी वह कंडोम का पैकेट अपनी जेब में रख लिया.
मैं शाम को अपने घर आया तो मैंने सोचा कि मैं इस कंडोम को यूज कर लेता हूँ.
मेरा कमरा अलग था तो अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया.
मैंने अपने कपड़े उतार दिए और अपने लौड़े पर कंडोम चढ़ाने लगा.
पर लंड तो ढीला था तो मैंने सोचा कि पहले इसको कड़क करता हूँ.
मैंने अपने लौड़े पर थूक लगा कर हिलाना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद मेरा लंड सख्त हो गया.
अब मैंने कंडोम का रैपर फाड़ा और उसे अपने लौड़े पर चढ़ा दिया.
उसके बाद मैंने कुछ देर तक मुठ मारी और झड़ गया.
सच में बड़ा मजा आया.
न साला हाथ धोना पड़ा और ना लंड.
फिर मैं बिना कंडोम निकाले यूं ही ही सो गया.
बड़ी गहरी नींद आई.
सुबह सुबह कोमल आंटी की आवाज आई- जीत बेटा दरवाजा खोलो.
मैं एकदम से हड़बड़ा कर उठा और अपने लंड को देख कर मैंने कहा- हां आंटी, बस अभी आया … आप एक मिनट रुको.
मैंने झट से लंड से कंडोम निकाला और बेड के गद्दे के नीचे घुसा दिया.
फिर मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और दरवाजा खोल दिया.
कोमल आंटी ने कहा- 8 बज रहे हैं … उठना नहीं था क्या?
कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं तो मैंने कहा- आपके ही उठाने का इंतजार कर रहा था.
वे हंसने लगीं.
फिर मैं फ्रेश होने चला गया.
जब मैं अपने कमरे में आया तो देखा कि साला कंडोम तो आधा ही गद्दे के नीचे घुसा हुआ है और कोमल आंटी भी उसी के सामने पौंछा लगा रही हैं.
मैंने जैसे ही कंडोम को अन्दर घुसाने की कोशिश की, आंटी ने मुझे देख लिया.
आंटी मुझसे बोली- यह कंडोम यहां क्या कर रहा है?
जैसा कि मैंने आपको बताया कि कोमल आंटी मुझसे थोड़ा फ्रेंडली थीं.
तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा- कुछ नहीं आंटी, यह गलती से रह गया था.
आंटी ने कहा- इसे तो तुरंत ही फेंक देना चाहिए था ना!
मेरी जगह कोई और होता तो शायद तुरंत उनकी बात को पकड़ लेता कि वे क्या कहना चाहती हैं.
लेकिन मैंने कहा- आंटी यह तो अभी निकाला है, इसलिए मैंने यहीं रख दिया था.
आंटी आश्चर्य से बोलीं- क्या तूने यह अभी यूज़ किया है?
मैंने कहा- नहीं, यूज़ तो रात को किया था … पर इसे लगा कर ही सो गया था. अब निकाल कर रखा था.
वह बोलीं- छी: तेरे कच्छे में तो बास भी भर गई होगी!
मैंने कहा- अरे ऐसे कैसे कच्छे में बास भर गई होगी? चाहे तो आप सूंघ लो.
आंटी हंसने लगीं और बोलीं- किसी को लेकर भी आया था … या अपने हाथ से ही काम चलाया था?
मैंने कहा- ऐसी किस्मत कहां है मेरी, जो कोई मेरे साथ सेक्स करे!
कोमल आंटी ने कहा- दिखने में तो इतने हैंडसम हो, फिर भी तुझे हाथ से काम चलाना पड़ रहा है!
मैंने कहा- क्या करूँ आंटी … आप भी तो मेरे लिए कुछ नहीं सोचतीं.
यह सुनकर आंटी ने मेरे हाथ से एकदम कंडोम छीन लिया और बोलीं- जीत, ज्यादा मत बोला करो … मैं तुम्हारी आंटी हूँ … तुम्हारे पास मेरे लायक लंड भी नहीं होगा.
मैंने उनके मुँह से लंड शब्द सुना तो समझ गया कि आंटी लंड के नीचे आने को राजी हैं.
मैंने कहा- बड़े छोटे से कुछ नहीं होता आंटी … लंबी रेस का घोड़ा होना चाहिए.
तभी आंटी ने कंडोम को सीधा किया और हैरानी से बोलीं- क्या तुम्हारा इतना बड़ा है या तुमने इसे खींच कर लंबा कर दिया?
यह कह कर वे हंसने लगीं.
इतनी सेक्सी बात सुनते सुनते मेरा लंड खड़ा हो गया था.
मैंने आंटी का हाथ अपने लौड़े पर रखा और कहा- खुद ही देख लो आंटी … मेरा हथियार आपकी फटी हुई चुत को मजा दे सकता है!
आंटी ने एकदम से लौड़े से हाथ हटाया और बोलीं- हट बदतमीज, कोई देख लेगा.
अब मुझ पर अपना काबू नहीं रहा.
मैंने आंटी की एक चूची पकड़ कर भींच दी.
आंटी ‘आउच.’ कह कर उचक गईं.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, मुझे अब आपके साथ सब कुछ करना है.
वे बोलीं- कोई आ जाएगा, अभी मुझे जाने दो … मैं जा रही हूं.
आंटी मुझसे छूट कर चली गईं.
मैंने आंटी के जाने के बाद उनकी चूचियों का अहसास करते हुए मुठ मार ली.
मैं समझ गया था कि आंटी को लंड के नीचे लाना कोई बड़ी बात नहीं है. साली चुत चुदवाने के कुछ पैसे ही तो लेगी.
उस दिन आंटी चली गईं.
उसके बाद से जब भी आंटी मेरे कमरे में आतीं, मैं उनके ब्लाउज में सौ का नोट फंसा देता कि आंटी एक बार चूसने दो ना.
आंटी हँसती हुई मुझसे अपने दूध दबवा लेतीं और कभी कभी मैं उनके ब्लाउज को उठा कर निप्पल चूस भी लेता.
हर बार आंटी को सौ का नोट मिलता तो वे और ज्यादा प्यार से चूचे दबवा लेतीं.
कभी कभी मैं उनकी टांगों के बीच में भी हाथ डाल कर उनसे चुत चुदवाने की बात कर लेता तो वे कुछ नहीं कहतीं.
कुछ दिनों तक ऐसे ही चलता रहा.
एक दिन घर के सभी लोग एक फंक्शन में दो दिन के लिए गए हुए थे.
मैं नहीं गया था.
मैंने सोच लिया था कि आज आंटी की लेना ही है.
शाम को आंटी आईं और बोलीं- सभी लोग कहां पर हैं?
मैंने कहा- वे सभी एक-दो दिन के लिए एक रिश्तेदार के यहां गए हैं.
आंटी मुस्कुराने लगीं.
मैंने कहा- यहां पर सिर्फ आप और मैं ही रह गए हैं.
वे बोलीं- तो क्या करूँ?
मैंने लंड सहला कर कहा- आंटी, आज आप कुछ नहीं करोगी. आज मैं आपकी चुत चुदाई करूंगा.
आंटी ने हँसते हुए झाड़ू लगाना शुरू कर दिया.
मैंने उनकी गांड को देखा तो मेरा लंड मचलने लगा था.
पीछे से उनकी गांड मुझे मदहोश कर रही थी.
मैंने एकदम से आंटी को पीछे से पकड़ लिया और उनके मोटे मोटे चूचे दबाने लगा.
कोमल आंटी ने कहा- जीत, यह तुम क्या कर रहे हो … ऐसा मत करो.
मैंने आंटी को बेड पर गिरा लिया और कोमल आंटी की चूची दबाते हुए उनके होंठों चूसने लगा.
आंटी ने भी मेरे लौड़े को अपने मुलायम हाथों से भींच लिया.
कुछ 5 मिनट तक हम ऐसे ही करते रहे.
आंटी ने मेरे कपड़े निकाल दिए.
तो मैंने भी आंटी की साड़ी और ब्लाउज निकाल दिए.
आंटी जितनी मोटी थीं, उतनी ही बिल्कुल टाइट चूचियां थीं.
उनकी ब्रा सफेद रंग की ओर कच्छी नीले रंग की थी.
आंटी मेरे लौड़े को पकड़ कर हिलाती हुई बोलीं- आगे को आ जाओ.
उन्होंने मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.
अब आंटी मेरे लौड़े को चूस रही थीं.
तभी मैंने आंटी की ब्रा उतार दी.
आंटी के निप्पल काले थे.
मैं उनके निप्पल दबाने लगा.
आंटी को मेरा लंड को चूसते चूसते 15 मिनट हो गए थे.
तब आंटी ने कहा- अब तुम मेरी चाटो.
मैं आंटी की किस करते-करते नीचे आ गया.
मैंने आंटी की पैंटी निकाल दी.
आंटी की चूत पर काली झांटें थीं.
मैंने अपनी उंगली से आंटी की चूत खोली और चूत में उंगली डाल दी. फिर जीभ से चाटने लगा.
आंटी ने मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया.
मैं अपनी उंगली जोर-जोर से अन्दर बाहर कर रहा था.
आंटी की चूत पूरी तरह से गीली थी.
वे सिसकारियां भरने लगीं- उई आ अम्म चाट जीत चाट मेरे भोसड़े को.
उनकी झांटें मेरे चेहरे पर लग रही थीं.
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, अपने पैर चौड़े कर लो.
आंटी ने अपने पैर चौड़े कर लिए.
फिर मैंने अपना सख्त लौड़ा उनकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का लगाया तो मेरा लंड अन्दर घुस गया.
आंटी अपनी दोनों आंखें बंद करके अपनी चूची दबाने लगीं.
मैं तेज तेज धक्के मारता हुआ आंटी की चूत चोदने लगा.
मैंने आंटी से कहा- आंटी, आप मेरे लौड़े के ऊपर आ जाओ.
मैं बेड पर लेट गया.
अब आंटी ने मेरे लौड़े को अपनी चूत में डाल लिया और ऊपर नीचे होने लगीं.
आंटी थोड़ी मोटी थीं तो वे कुछ ही देर में थक गईं.
वे बोलीं- मुझसे नहीं हो पा रहा, अब तुम करो.
मैंने आंटी को घोड़ी बना लिया.
आंटी की झांटें बहुत बड़ी थीं इसलिए चूत खोल कर अपना लंड पूरा एक ही बार में डाल दिया.
आंटी- उई आह थोड़ा आराम से करो.
मैंने जैसे ही धक्के देने चालू किए, आंटी के चूतड़ मेरी जांघों पर लगने लगे थे.
Xxx मेड फक करने में मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं झड़ने वाला था तो मैंने लौड़े को गर्म चूत से बाहर निकाला और आंटी की गांड से कमर तक अपने माल की बूंदें गिरा दीं.
फिर हम दोनों शान्त हो गए.
मैं आंटी के ऊपर ऐसे ही लेट गया.
आंटी बोलीं- मैं इतने दिनों से काम कर रही हूं, ये काम तो तुझे पहले ही कर देना चाहिए था!
मैंने कहा- आंटी कोई बात नहीं, अब से तो शुरू हो गया!
उसके बाद मैंने कहा- आज आप यहीं रुक जाओ. रात भर चुदाई का मजा लेंगे.
वे कुछ देर सोचने के बाद राजी हो गईं।
उन्होंने अपने घर फोन कर दिया कि आज रात वे मेरे घर रुकेंगी.
बस फिर क्या था … मैं और आंटी ने सारी रात चुदाई का मजा लिया.
मैंने आंटी की चुत की झांटें साफ कीं और जबरदस्त चुदाई की.
दोस्तो, यह मेरी सच्ची सेक्स कहानी है. आपको कैसी लगी प्लीज बताएं.
मेरी अभी कुछ सेक्स कहानी और भी हैं जो एकदम सच्ची हैं. उनको मैं Xxx मेड फक कहानी पर आपके कमेंट्स पढ़ने के बाद लिखूँगा.
Xxx मौसी की चुदाई हिंदी में पढ़ें इस कहानी में! मेरी मौसी बहुत चंचल बिंदास है, हर वक्त हर किसी से माँ बहन से बोलती है. मैं उसे चोदना चाहता था पर उसकी शादी तय हो गयी.
मेरा नाम विशाल है, मैं एक हट्टा कट्टा नौजवान हूँ और एक कंपनी में काम करता हूँ।
मैं गोरा हूँ, घुंघराले बालों वाला हूँ और क्लीन शेव रहता हूँ।
मेरी काजल मौसी बड़ी खूबसूरत, चंचल और बिंदास है, हंसमुख है, बोल्ड है और हंसी मजाक करने में सबसे तेज है।
उसे गन्दी गन्दी बातें करने से कोई परहेज़ नहीं है।
अपनी बातों के बीच बीच में लण्ड, बुर, चूत भोसड़ा वगैरह खूब खुल्लम खुल्ला बोलती है।
गालियां तो उसके मुंह से अक्सर निकल ही जाती हैं जिन्हें सुनकर सब लोग एन्जॉय करतें हैं।
मैं उसकी गालियां सुनने के लिए घंटों इंतज़ार करता हूँ।
वह जब भोसड़ी वाली, माँ की लौड़ी, बहन चोद बोलती है तो मेरा लण्ड साला खड़ा हो जाता है।
जब भी वह अपनी सहेलियों से बातें करती है तो गालियां जरूर बकती है और मैं वो गालियां सुन सुन कर एन्जॉय करता हूँ।
उसका कद 5′ 4″ है रंग गोरा है और जिस्म एकदम संगमरमर जैसा है।
उसकी बड़ी बड़ी कजरारी आँखें, गोल गोल सुर्ख गाल, गुलाबी होंठ और बड़ी बड़ी मस्तानी चूचियाँ किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं।
वह जब सज धज कर बाहर निकलती है तो लोग उसे देखते ही रह जाते हैं।
उसकी पतली कमर, बड़े बड़े उभरे हुए चूतड़ और उनके बीच की मटकती हुई गांड अपना अलग ही जलवा बिखेरती है।
मैं तो सच में उसके नाम का मुट्ठ मारता हूँ।
मेरा मन करता है कि मैं उसके मुंह में अपना लौड़ा घुसेड़ दूँ, उसकी चूचियों में अपना लौड़ा पेल दूँ और अगर किसी दिन मुझे नंगी मिल जाए तो घपाघप चोद डालूं उसकी फुद्दी!
काजल मौसी मुझसे केवल एक साल बड़ी है।
वह 25 साल की है और मैं 24 साल का!
यह Xxx मौसी की चुदाई हिंदी इसी काजल की है.
एक दिन मैंने कहा- मौसी तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
वह बोली- अच्छा, तो फिर क्या करेगा तू मेरा, अगर मैं तुझको अच्छी लगती हूँ।
मैं- कर तो बहुत कुछ सकता हूँ मौसी जी, पर डरता हूँ।
मौसी- मुझे डरपोक लोग अच्छे नहीं लगते … तुम भोसड़ी के डरपोक हो तो मुझसे दूर रहो।
मुझे उसकी गाली पसंद आ गई मैंने कहा- दूर रह कर कहाँ जाऊंगा? तुम्हारे सामने रहूंगा तो निडर हो जाऊंगा, बेशर्म हो जाऊंगा और गन्दी गन्दी बातें करने लगूंगा।
वह बोली- गन्दी गन्दी बातें करने के लिए कलेजा चाहिए। बड़ों बड़ों की गांड फट जाती है गन्दी गन्दी बातें करने में! आसान नहीं है गन्दी गन्दी बातें करना!
मैं- पर तुम्हारी तो नहीं फटती काजल मौसी?
वह- मेरी तो गांड कभी फटती नहीं, मैं तो दूसरों की फाड़ देती हूँ गांड!
एक दिन मैं सवेरे सवेरे अपने कमरे में लेटा अपना लौड़ा सहला रहा था।
लौड़ा साला एकदम तन कर खड़ा हुआ था। सवेरे का लण्ड बहन चोद बड़ा कड़क होता है। लगता है कि दीवार में भी छेद कर देगा।
लण्ड का टोपा पूरा खुला हुआ था।
मैंने लण्ड हाथ में लिया तो काजल मौसी की तस्वीर मेरे दिमाग में घूमने लगी और मैं लण्ड का धीरे धीरे सड़का मारने लगा।
इतने में किसी ने मेरे हाथ से लण्ड छीन लिया और बोली- अरे यार, यह मेरा काम है भोसड़ी के विशाल!
वह मेरी मौसी ही थी।
मैं उसे देख कर थोड़ा सहम गया, बोला- अरे मौसी सॉरी!
वह बोली- सॉरी की माँ की चूत … मैं हूँ न तेरे लण्ड का सड़का मारने के लिए! यह लड़कियों का काम है।
उसने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे लण्ड को कई बार बड़े प्यार से चूमा।
मौसी ने कहा- तेरा लौड़ा तो बड़ा मस्त है विशाल! मुझे उम्मीद नहीं थी कि तेरा लण्ड इतना जबरदस्त होगा और इतना मोटा तगड़ा होगा। मैं तो बुर चोदी तुम्हें अभी बच्चा ही समझ रही थी।
फिर उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया; खुद एक स्टूल पर बैठ गयी और एक हाथ से मेरे पेल्हड़ थाम दूसरे हाथ से सटासट सड़का मारने लगी।
मैंने कहा- अब मुझे अपने बड़े बड़े मम्मे दिखा दो न काजल मौसी!
उसने अपना ब्लाउज़ तुरंत खोल दिया और दिखा दिये अपने बड़े बड़े दूध।
मैंने कहा- वाओ बड़े रसीले हैं तेरे मम्मे काजल मौसी!
वह जोश में बोली- मौसी की माँ का भोसड़ा … मैं जब किसी का लण्ड पकड़ती हूँ तो उसकी बुरचोदी हरामजादी काजल हो जाती हूँ। मुझे माँ की लौड़ी भोसड़ी वाली काजल कहो!
मैंने कहा- हाय मेरी भोसड़ी वाली काजल, मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लो न प्लीज!
उसने फ़ौरन लौड़ा मुंह में घुसेड़ लिया और मजे से चूसने लगी.
मैं एन्जॉय करने लगा।
वह बार बार लण्ड मुंह में लेती और फिर मुंह से निकाल कर सड़का मारने लगती।
मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।
आज पहली बार मेरे लण्ड का सड़का कोई मस्त जवान लड़की मार रही थी।
मेरे मन में आया कि आज यह मेरे लण्ड का मुट्ठ मार रही है तो कल मुझसे चुदवा भी लेगी.
कितना मज़ा आएगा जब मैं इसकी मस्तानी चूत में अपना लण्ड पेलूँगा.
मैं इसी तरह के ख़याली पुलाव पकाने लगा।
मौसी बड़े मन से अपना मुंह खोले हुए मेरे लण्ड का सड़का मार रही थी और लण्ड से कुछ कह भी रही थी- अरे मेरे भोसड़ी के लण्ड राजा, जल्दी से निकाल दे तू अपना मक्खन! तू बड़ा प्यारा लग रहा है मुझे। तू बड़ा मस्त है, बड़ा ज़ालिम है। मुझे तुझसे प्यार हो गया लण्ड राजा! अब तू निकल आ … डुबो दे मुझे अपने वीर्य से! मैं उसे पीने के लिए तैयार बैठी हूँ।
फिर क्या … लण्ड ने छोड़ दी दनादन 4-5 पिचकारियाँ उसके मुंह में!
वह सच में सारा का सारा वीर्य चट कर गयी।
दूसरे दिन अचानक एक बहुत बड़ा परिवर्तन हो गया।
मौसी की शादी तय हो गयी।
अब वह अपनी शादी के मूड में आ गई। बार बार ब्यूटी पार्लर जाने लगी, शॉपिंग हॉल जाने लगीं, साड़ियां खरीदने लगी।
वह पूरी तरह व्यस्त हो गयी।
उसे मेरा लण्ड पकड़ने का ख्याल भी नहीं आया और न मेरी हिम्मत हुई उसको अपना लण्ड पकड़ाने की।
समय यूं ही बीतता गया.
वह जब दुल्हन बनी बैठी थी तो वास्तव में बड़ी जबरदस्त खूबसूरत लग रही थी।
मैं मन मसोस कर रह गया।
और वह शादी के बाद अपनी ससुराल चली गई।
15 दिन बाद वह अपनी ससुराल से वापस आ गयी।
मैं समझ गया कि काजल मौसी अपनी सुहागरात मना कर आई है; खूब चुद कर आई है; अपने पति का लण्ड खूब पेलवाकर आईं है।
लेकिन वह सच में बड़ी सुन्दर लग रही थी।
उसका रूप रंग सब कुछ बदला हुआ था।
मांग में सिन्दूर, हाथों में कंगन. गले में हार, कानों में झुमके, नाक में नथनी, कमर में करधनी और पावों में पायल!
ये सब मौसी की खूबसूरती बढ़ा रही थी।
वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी; एकदम सेक्स बम लग रही थी।
मेरा मन उसकी चूत देखने का हो गया।
मैं उसको आते जाते बड़े गौर से देखने लगा।
आते ही वह बड़े प्यार से मिली थी मुझसे!
लेकिन दो दिन बाद भी वह मेरे लण्ड से नहीं मिल पाई।
इसका मलाल था मुझे!
मैं उसके हाथ में अपना लण्ड देखना चाहता था।
वह सबसे खुल कर बातें भी कर रही थी, अपनी ससुराल के किस्से भी सुना रही थी सबको!
लेकिन उसकी सुहागरात की बातें किसी को भी नहीं मालूम हुई।
मैं यह जानना चाहता था कि उसके हसबैंड का लण्ड कैसा है?
उसका हसबैंड रिश्ते में अब मेरा मौसा था।
क्या मौसा का लंड मेरे लण्ड से बेहतर है या फिर मेरा लण्ड उसके लण्ड से बेहतर है?
इसका जबाब तो काजल मौसी ही दे सकतीं थीं वह भी एकांत में!
मैं उसी मौके की तलाश में था। मैं उससे अकेले में बात करने की कोशिश करने लगा.
पर वह हमेशा किसी न किसी से घिरी रहती थी।
एक दिन जब मैं बाथरूम जा रहा था तो वह मुस्कराती हुई मेरे कान में बोली- विशाल कैसा है तुम्हारा लण्ड?
मैंने भी उसके कान में ही जवाब दिया- जैसा तुम छोड़ कर गई थी, बस वैसा ही है मेरा लण्ड! लेकिन आजकल तुम्हें पाने के लिए बिचारा तड़प रहा है।
तब तक एक पड़ोसन आ गई मादरचोद।
मौसी उससे बातें करने लगीं।
ख़ैर मैं बाथरूम में नहाने चला गया और सोचने लगा कि चलो कभी न कभी तो मौका मिल ही जाएगा।
कुछ देर बाद किसी ने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया।
मैंने खोला तो मौसी बाथरूम में ही घुस आईं और बोली- चली गयी बुरचोदी पड़ोसन! अब घर में हम दोनों के अलावा कोई और नहीं है। मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया है।
उसने मेरी तौलियां खींच ली तो मैं नंगा हो गया।
फिर उसने भी अपनी ब्रा खोल दी।
उसकी मस्तानी चूचियाँ नंगी हो गईं।
फिर उसने अपना पेटीकोट भी खोल डाला तो उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गयी.
उसकी गांड, उसके चूतड़ सब मेरी आँखों के सामने नंगे हो गए।
मैं बड़ी देर तक उसे नंगी देखता रहा, उसके नंगे जिस्म का मज़ा लेता रहा.
फिर उसकी चूचियाँ दबा कर कहा- तेरे तो मम्मे पहले से बड़े हो गए हैं मौसी!
वह बोली- अब तुम इन्हें मसल मसल कर और बड़ा कर दो विशाल!
मौसी मेरा लण्ड पकड़े पकड़े मस्ती करने लगी, उस पर प्यार से साबुन लगाने लगी और पेल्हड़ पर भी साबुन लगाने लगी।
मैंने भी उसके नंगे बदन पर खूब साबुन लगाया और फिर हम दोनों ने एक दूसरे के नंगे बदन को खूब नहलाया।
मैंने कहा- यार काजल, मैं तुम्हें बहुत याद कर रहा था।
वह बोली- मुझे भी तुम और तुमसे ज्यादा तुम्हारा लण्ड याद आ रहा था।
फिर मैंने पूछ ही लिया- तेरे पति का लण्ड कैसा है?
वह बोली- हां बस काम चलाऊ है यार! तेरा लण्ड उसके लण्ड से ज्यादा बढ़िया है।
यह सुनकर मुझे बड़ी तसल्ली हुई।
मैंने फिर कहा- अगर उसे मालूम हो गया कि तुम मेरा लण्ड पकड़ती हो तो वह बुरा मानेगा न?
वह बोली- उसकी माँ का भोसड़ा। वह क्यों बुरा मानेगा? बुरा मानेगा तो मेरा क्या उखाड़ लेगा? मैं उसके लण्ड के सहारे नहीं रहने वाली। अब तो मैं खुल्लम खुल्ला पराये मर्दों से चुदवाऊंगी। जब तक शादी नहीं हुई थी तब तक छुप छुप कर चुदवाती थी।
मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है। मुझे तो पता नहीं था।
वह बोली- हां यार, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी। मैं एक चुदक्कड़ औरत हूँ। अब मुझे किसी बात का डर नहीं है. अब तो मेरी शादी हो चुकी है। अब मुझे तुम खूब घपाघप चोदो। मैं तुमसे चुदने के लिए एकदम तैयार हूँ।
फिर हम दोनों नहा धो कर बाहर बेड पर आ गए।
उसने मुझे चित लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी.
मौसी ने अपने बालों का जूड़ा बनाया और झुक कर मेरा लण्ड चाटने लगी।
मैं भी उसकी चूत चाटने लगा।
मैंने अनुभव किया कि आज वह जितने बिंदास तरीके से लण्ड चाट रही है इतनी बिंदास तरह से उस दिन लण्ड नहीं चाटा था। उस दिन थोड़ा डर रही थी आज तो वह शेरनी बन कर लण्ड चाट रही है। उसे कोई लण्ड चाटते हुए देख भी ले तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मेरा लण्ड साला बड़े ताव पर था तो मैंने उसे नीचे पटका और चढ़ गया उसके ऊपर! फिर रख दिया अपना लण्ड उसकी चूत पर!
लण्ड भी गीला था और चूत भी गीली … तो मैंने उसे अंदर तक घुसा दिया।
मेरा लण्ड बहनचोद सरसराता हुआ पूरा घुस गया अंदर!
तब मुझे मालूम हुआ कि बड़ी गहरी है ससुरी मौसी की चूत।
मैं लण्ड बार बार निकालने और पेलने लगा, चोदने लगा मौसी की चूत!
Xxx मौसी की चुदाई का मजा लेती हुई बोली- हाय विशाल, तेरा लण्ड भी विशाल है यार. बड़ी दूर तक चोट कर रहा है। मुझे इतना मज़ा तो अपनी सुहागरात में भी नहीं आया था जितना मज़ा आज आ रहा है। आज मैं सही अर्थों में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
मैं धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा रहा था और वह भी कमर हिला हिला कर बराबर मज़ा दे रही थी।
मैंने सोचा अगर मैंने इसे पहले चोदा होता तो शायद इतना मज़ा नहीं आता।
लड़की जब निडर और बेख़ौफ़ होकर चुदवाती है तो चोदने वाले को ज्यादा मज़ा आता है।
वह मस्ती में बोलने लगी- भोसड़ी के विशाल फाड़ डाल मेरी चूत … चीथड़े उड़ा दे मेरी चूत के! ये ससुरी लण्ड की बड़ी प्यासी है। इसकी प्यास बुझा दे यार। तेरा लण्ड साला बड़ा ज़ालिम है। हाय रे … मुझे अपनी बीवी की तरह चोद। समझ ले कि मैं तेरी बीवी हूँ। बड़ा मज़ा आ रहा है। हूँ आ … हो हां हां … और पेल … घुसेड़ दे और ठोक दे पूरा … घुसा दे … चीर डाल मेरी चूत।
मौसी की मस्ती देखने वाली थी।
मैंने कहा- माँ की लौड़ी मादरचोद काजल, अब मैं तुझे पीछे से चोदूंगा। तू बड़ी मस्त चीज है। तू एकदम लड्डू पेड़ा बर्फी है मन करता है तुझे कच्चा चबा जाऊं।
मैं उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोदने लगा।
मेरे दोनों हाथ उसकी कमर पर थे।
वह भी बहन की लौड़ी अपनी गांड आगे पीछे करती हुई चुदवाने लगी।
मुझे यकीन हो गया कि काजल अच्छी तरह चुदी हुई है क्योंकि इसे चुदाने का बहुत बड़ा अनुभव है।
कुछ देर इस तरह चोदने के बाद मैंने लण्ड फिर आगे से उसके मुंह में घुसेड़ दिया, उसका सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा।
मैं वास्तव में चोदने लगा उसका मुंह … मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा।
उसके बाद जब मैं झड़ने लगा तो काजल ने जिस मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटा … उसका वर्णन करना बड़ा कठिन है।
दूसरे दिन शाम को जब मैं मौसी के घर गया तो वह किसी औरत के साथ बैठी हुई बतला रही थी।
मैं उसे देख कर वापस होने लगा।
इतने में मौसी ने आवाज़ लगाई- अरे विशाल यहाँ आ न!
मैं उसके पास पहुँच गया.
तो वह बोली- यार शर्माते क्यों हो? इससे मिलो … ये हैं मेरी जेठानी मिसेज रोली। मैं तुम्हारी ही बातें इससे कर रही थी।
फिर वह रोली की तरफ मुंह करके वोली- बड़ा मस्त लड़का है ये विशाल! इससे ज्यादा मस्त इसका लौड़ा है। मैं जिस लौड़े की बात तुमसे कर रही थी, वह इसी का लौड़ा है.
मैंने कहा- अरे मेरी मजाक उड़ा रही हैं काजल मौसी?
तब तक उसकी जेठानी बोली- तो क्या मैं यह समझूँ कि तेरा लौड़ा वैसा नहीं है जैसा काजल कह रही है?
फिर तो मैं फंस गया।
मैंने कहा- नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं. पर सबसे ऐसा कहना अच्छा नहीं है न!
मौसी की जेठानी बोली- अरे विशाल, मैं तेरी बुरचोदी मौसी की जेठानी हूँ ऐसी वैसी नहीं हूँ। अगर तेरा लौड़ा तारीफ के काबिल है तो उसे बताने में हर्ज़ क्या है? कहो तो मैं खोल कर देख लूँ तेरा लण्ड?
मैंने मन में कहा तो फिर खोल कर देख लो न मेरा लण्ड!
उसकी बातें सुनकर तो मेरा लण्ड साला अंदर ही अंदर उछाल मारने लगा।
रोली भी काजल से कम खूबसूरत नहीं थी।
उसकी भी चूचियाँ बड़ी बड़ी दिख रही थी।
साइज में काजल की चूचियों से बड़ी ही होंगी।
फिर हम तीनों बातें करने लगे और खुल कर करने लगे।
काजल मौसी बोली- विशाल देखो … जैसे मैं पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी हूँ, वैसे ही मेरी जेठानी भी पराये मर्दों के लण्ड की दीवानी है!
उसके बाद सबका खाना पीना हो गया।
मूड सबका रोमांटिक हो गया था।
मैं जल्दी से जल्दी रोली को नंगी देखने के लिए बेताब था … रोली मेरा लण्ड देखने के लिए बेताब थी और काजल अपनी जेठानी के साथ चुदाई का मज़ा लेने के लिए बेताब थी।
सब काम हो जाने के बाद हम तीनों बिस्तर पर आ गए।
इस बार काजल ने बिस्तर जमीन पर लगा रखा था।
काजल ने पहल की और अपने कपड़े एक एक करके उतारने लगी।
उसे देख कर रोली भी अपने कपड़े उतारने लगी।
मुझे मालूम हो गया कि रोली तो काजल से कुछ ज्यादा ही बेशर्म है।
मैंने जब रोली की बड़ी चूचियाँ देखीं तो मेरे होश उड़ गये।
इतनी मस्तानी बड़ी बड़ी सुडौल चूचियां तो मैंने कभी पोर्न में भी नहीं देखी।
मेरा मन हुआ मैं उन्हें कच्चा चबा जाऊं।
फिर रोली मेरे कपड़े खोलने लगी।
आखिर में मैं जब पूरा नंगा हुआ तो मेरा लण्ड पकड़ कर बोली- वाओ … क्या मस्त लौड़ा है भोसड़ी का तेरा विशाल। बड़ा हैंडसम और शानदार है तेरा लौड़ा। हाय रे … आज मुझे आएगा चुदाने का असली मज़ा!
ऐसा बोल कर उसने लण्ड की कई चुम्मियाँ लीं।
मेरे पूरे लगे बदन पर हाथ फिराया, बोली- लड़का तो बड़ा बढ़िया है काजल। बड़ा मस्त माल है यार! इसका हथौड़ा जैसा लौड़ा आज मेरी चूत की ऐसी की तैसी कर देगा।
तब तक काजल भी नंगी नंगी हमारे सामने आ गई।
मैंने तो रोली के मम्मे खूब मसले खूब दबाये और खूब चूमा और चाटा।
फिर जब दोनों जेठानी और देवरानी मिलकर नंगी नंगी मेरा लण्ड चाटने लगीं तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा।
मैं बीच में नंगा लेटा था।
एक तरफ मेरी बाईं जांघ में अपना सर रख कर काजल मेरा लण्ड चाटने लगी। दूसरी तरफ मेरी दाईं जांघ पर अपना सर रख कर रोली मेरा लण्ड चाटने लगी।
काजल रोली के मुंह में लण्ड घुसेड़ती, रोली काजल के मुंह में लण्ड घुसेड़ती।
दोनों बड़े प्यार से मेरा लण्ड चूमने, चाटने और चूसने में जुट गईं।
मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।
मैं सातवें आसमान पर था।
कुछ देर बाद काजल ने कहा- इधर आ मेरी बुरचोदी जेठानी, अब मैं पेलूँगी तेरी चूत में लण्ड … मैं चोदूंगी तेरी फुद्दी!
उसने मेरा लण्ड रोली की चूत में पेल दिया और मेरी पीठ पर चढ़ बैठी।
मेरे साथ वह भी चोदने लगी अपनी जेठानी की चूत।
इसी तरह दोनों ने मिलकर खूब एक दूसरी की चूत मुझसे खूब चुदवाई.
रात भर यह चुदाई होती रही।
रोली रात में न खुद सोई और न किसी को सोने दिया।
आरती मेरे छोटे भाई रौनक की वाइफ़ है। आरती काफ़ी सुंदर महिला Sex stories है। उसका बदन ऊपर वाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है।
मैं सुरेश उसका जेठ हूं। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं।
आरती शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी।
रौनक एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था।
हां बताना तो भूल ही गया आरती का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।
आज से कोई पांच साल पहले की बात है।
हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही आरती प्रेग्नेंट हो गयी, डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी।
रौनक तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। ये तय हुआ था कि आरती की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी।
एक महीने के बाद जब आरती को वापस लाने की बात आयी तो रौनक को छुट्टी नहीं मिली।
आरती को लेने जाने के लिये रौनक ने मुझे कहा।
तो मैं आरती को लेने ट्रेन से निकला। आरती को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली आरती बेपर्दा हो गयी।
हमारी टिकट प्रथम क्लास में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रेन में चढ़ गये।
गरमी के दिन थे, जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी।
मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा- अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।
मैं उसकी बात पर हँस पड़ा- मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।
मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया।
अचानक मेरे मुंह से निकला- अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।
उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी।
आरती ने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी, ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था।
गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया।
तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई है।
उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे।
ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छातियां साफ़ दिख रही थी।
पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था।
मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी।
उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूब को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया।
हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे।
कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था।
हम वापस बात करने लगे।
कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी।
मैंने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथों से अपने ब्रेस्ट को हल्के से दबा रही है।
“कोई प्रोब्लम है क्या?” मैंने पूछा।
“ना… नहीं!”
मैंने उसे असमंजस में देखा।
कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैंने कहा- मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?
वो झिझकती हुई सी खड़ी रही, फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी, कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी।
“मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आंखें आंसुओं से छलक रही हैं।
“क्यों क्या हुआ?” मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं।
मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया।
“जी, वो क्या है म्म … वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं।” वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था।
“म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नजरें नीची करते हुए कहा।
“बाथरूम जाना है?” मैंने पूछा.
“गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली आयी.” उसने कहा- और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?
“फ़िर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा.
“कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको!”
उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली- अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?
“बोलो?”
“आप इन्हें खाली कर दीजिये न!”
“मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।” मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा।
“आप अगर इस दूध को पी लो…” उसने आगे कुछ नहीं कहा।
मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया- लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं?
“जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा- मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो? प्लीज़!
मैं चुपचाप बैठा रहा, समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।
आरती ने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये- प्लीज़!
उसने फ़िर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला।
“जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊँ।” कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गयी- आआहह!
मैंने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये।
फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया।
उसने मेरी तरफ़ देखा।
मैं अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया।
उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया, उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे।
मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया।
मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये।
मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे।
उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया।
उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था।
मैंने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ।
“ऊओफ़्फ़ फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ… प्लीज़ इनका रस चूस लो!” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया।
मैंने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा।
मीठे दूध की एक तेज़ धार से मेरा मुंह भर गया।
मैंने उसकी आंखों में देखा।
उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी।
मैंने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया।
“आआ अहह!” उसने अपने सिर को एक झटका दिया।
मैंने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंठ दूध पिया।
मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा।
“ऊओह हहाआन्न हाआन्नन… जोर से चूसो और जोर से… प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ, काफ़ी खुजली हो रही है।” उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी।
मैंने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।
वो ‘ऊउईईइ…’ कर उठी, वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी।
उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये।
वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी।
फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा।
“क्या कर रही हो?” मैंने उससे पूछा।
“वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ!” उसने कहा
“क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ?” मैंने उसे छेड़ा.
“दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से!”
“काफ़ी मीठा है!”
“धत्त…” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी।
इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया। उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया।
फ़िर वो अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दी।
मैंने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया।
वापस उसके दूध को चूसने लगा।
कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया।
“अब दूसरा!” वो बोली.
मैंने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा।
उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे।
हम दोनों ही उत्तेजित हो गये थे।
उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।
“काफ़ी तन रहा है!” उसने शर्माते हुए कहा।
“तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।”
“म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं?” उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा.
“तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है?”
उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा- देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में?
मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुई- अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती हैं इसे?
“आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।”
“धत्त मुझे नहीं देखना कुछ… आप बड़े वो हो!” उसने शरमा कर कहा लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।
“इसे एक बार किस तो करो!” मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा।
उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये।
अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था।
उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल छूट गया।
मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी।
मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया।
उसने दो तीन बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।
“ऐसे नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है!”
“हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिये!” मैंने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया।
मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके बदन से अलग कर दिया।
अब हम दोनों बिल्कुल नग्न थे।
तभी किसी ने दरवाजे पर नोक किया।
“कौन हो सकता है?” हम दोनों हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिये और आरती बर्थ पर सो गयी।
मैंने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी।
इस बीच दो बार नोक और हुआ।
मैंने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था, उसने अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा- ये दोनों सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं.
और बाहर चला गया।
मैंने दरवाजा बंद किया और आरती के बदन से चादर को हटा दिया।
आरती शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी।
मैंने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा- प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।
मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा।
इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था।
उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गये।
“आह सुरेश जी क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली!” उसके पैर छटपटा रहे थे।
उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी।
मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा।
मेरे हाथों ने उसकी योनि की फ़ांकों को अलग अलग कर रखा था और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी।
वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी।
काफ़ी देर तक इसी तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ खल्लास हो गये, उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था।
उसके मुंह से चू कर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था।
मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी।
हम दोनों एक दम नग्न थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो।
कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।
“अब आ जाओ!” मैंने आरती को कहा।
“जेठजी थोड़ा सम्भाल कर… अभी अंदर नाजुक है, आपका बहुत मोटा है, कहीं कोई जख्म न हो जाये।”
“ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।”
आरती उठकर बर्थ पर चौपाया हो गयी।
मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा, मेरे भाई की बीवी की चूत गीली तो पहले ही हो रही थी, धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस गया।
एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी।
वो दर्द से “आआह्हह” कर उठी।
मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा।
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो आरती ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाये।
“डालो न… रुक क्यों गये।”
“मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिये।”
“इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा।
फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी।
मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा।
हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे।
मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती।
काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को को जोर जोर से झटकना चालू किया।
“आआह शीईव्व अम्मम आआअह तउम्म इतनए दिन कहा थीए। ऊऊ ओह्हह माआ ईईइ माअर्र र्रर जाऊऊं गीइ। मुझए माअर्रर डालओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लओ” और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी।
कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा।
“आअह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुंह खुला हुआ था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी।
मैंने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई और उसे दो घूंठ पानी पिलाया।
उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।
“चोदो सुरेश चोदो… जी भर कर चोदो मुझे।”
मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा।
काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।
“आजा मेरे ऊपर!” मैंने आरती को कहा।
आरती उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गयी।
अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी।
मैंने उसके निप्पल को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी।
मैंने उसके निप्पल को सेट कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी।
अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था।
काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी- सुरेश, मेरे निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।
हम दोनों साथ साथ झड़ गये।
काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसें लेती रही।
फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी।
हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे।
लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया. उसकी बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो रहा था।
पर उसने मुझे आश्वासन दिया- आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है।
उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया। Sex stories
तीन महीने से भी ज्यादा से Antarvasna अन्तर्वासना की कहानियों की नियमित पाठक हूँ मैं! अब जाकर मुझमे भी एक जोश आया है कि अपनी कहानी आप सभी के साथ बाँट सकूँ!
यह कहानी मेरे पहले सेक्स की है जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में थी! मेरे स्कूल में को-एजुकेशन थी यानि की लड़के और लड़कियां साथ में पढ़ते थे! घर से स्कूल लगभग दो किलोमीटर दूर था, कभी पापा स्कूल छोड़ आया करते थे कभी मैं खुद पैदल में चली जाया करती थी!
ओह्ह्ह्ह सॉरी आप बोर हो रहे होंगे, सो मुद्दे पे आती हूँ!
एक दिन मैं साइकिल से स्कूल जा रही थी। उस दिन सुबह से हल्की हल्की बारिश हो रही थी। एक मन था कि स्कूल न जाऊँ पर फिर भी मैं चली गई! रास्ते में कीचड़ था। तभी एक रिक्शे वाले ने जानबूझकर मेरी साइकिल में साइड मार दी, जिससे मैं नीचे गिर पड़ी और मेरे सारे कपड़े कीचड़ से गंदे हो गए! तभी विकास ने उस रिक्शे वाले को भाग कर पकड़ लिया!
विकास मेरी क्लास में था और मेरी अच्छी दोस्ती थी उससे! पर मैंने उस तरफ ध्यान नहीं दिया क्योंकि मेरे सारे कपड़े गंदे हो चुके थे और कोहनी भी थोड़ी छिल गई थी। मेरी आँखों से आंसू टपक पड़े! मुझे अपने आप पर बड़ी कोफ़्त हुई कि इससे तो स्कूल ना में आती तो अच्छा होता!
तब तक विकास रिक्शे वाले को मरता हुआ मेरे पास ले आया। वो लगातार उस रिक्शे वाले को मार रहा था और गन्दी गन्दी गालियां दे रहा था! विकास का घर सामने वाली गली में में था इसलिए वो और रोब झाड़ रहा था!
विकास ने रिक्शे वाले के कॉलर को झटका दिया और बोला- भोसड़ी के! तुझे इतनी बड़ी साइकिल नहीं दिखी, साले गांडू!!!!!
रिक्शा वाला हाथ जोड़ कर बोला- भाईसाब! गलती हो गई माफ़ कर दो!
तब तक काफी भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी।
विकास बोला- साले, मुझसे क्या माफ़ी मांगता है मादरचोद … इन से माफ़ी मांग!
विकास का इशारा मेरी तरफ था.
मुझे गुस्सा तो बहुत आ रही थी पर भीड़ के सामने अच्छा भी नहीं लग रहा था!
तब मैंने विकास को बोला कि रिक्शे वाले को जाने दे!
पर विकास ने दो और थप्पड़ जड़कर ही रिक्शे वाले को जाने दिया!
और विकास मेरे पास आकर बोला- अरे रश्मि, तुम्हारे तो सारे कपड़े गंदे हो गए! अब स्कूल कैसे जाओगी??
“नहीं! अब स्कूल नहीं जाउंगी, वापस घर जाऊँगी!” मैंने जबाब दिया!
इन कपड़ो में वापस घर? नहीं नहीं! चलो, मेरे घर चलो वहां आराम से कपडे साफ़ कर लेना! विकास ने मेरी साइकिल को उठाते हुए कहा!
मैंने कुछ सोच कर कहा- चलो, यही ठीक रहेगा! पर तुम भी तो स्कूल के लिए लेट हो जाओगे?
“अरे! आज स्कूल में क्या घंटा करेंगे जाकर? बारिश में तो मैडम भी नहीं आती पढ़ाने!” वो हँसता हुआ बोला!
और मेरे साथ चल पड़ा मेरी साइकिल लेकर पैदल पैदल!
उसका घर सामने ही था! अपने घर के सामने साइकिल स्टैंड पर लगा कर विकास घर का ताला खोलने लगा!
“विकास, क्या घर पर कोई नहीं है तुम्हारे?” मैंने पूछा.
विकास- नहीं!
“क्यों? अंकल आंटी कहाँ गए हैं?” मैंने फिर सवाल किया!
विकास- अरे मम्मी, पापा तो ऑफिस चले जाते हैं ना! और नेहा दीदी अपने कॉलेज गई हैं!
“ओके!” मैं हल्के से सब बात समझने के अंदाज़ में बोली!
विकास की मम्मी, पापा सरकारी बैंक के कर्मचारी थे! और नेहा उसकी बड़ी बहन थी जो कॉलेज में थी! उस समय घर में मेरे और विकास के अलावा कोई नहीं था! मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि विकास मेरा अच्छा दोस्त था और मेरी में उम्र का था।
विकास सीधे बाथरूम में गया और नल खोल के देखा, नल में पानी नहीं था!
“ओह शिट्! आज भी पानी नहीं आ रहा.” विकास झुंझलाते हुए बोला- रश्मि एक काम करो, मैं हैण्ड पम्प चलाता हूँ और तुम हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहा लो!
मेरा मूड और ख़राब हो गया, पर मरती क्या ना करती! अनमने भाव से बोली- ठीक है! चलो चलाओ हैण्ड पम्प!
और मैं हैण्ड पम्प के नीचे बैठ कर नहाने लगी, मैं सूट सलवार में थी और ऐसे ही नीचे बैठ कर नहाने लगी!
विकास नल चला रहा था अब मैं मसल मसल कर कीचड़ साफ़ कर रही थी। विकास लगातार मुझे घूर रहा था, उसकी आँखों में एक चमक आ गई थी और मैं जानती थी कि वो क्या सोच रहा है! उसकी पैन्ट की चैन वाला भाग बढ़ता जा रहा था और मुझे यह देख कर अच्छा लग रहा था! मैं हलके हलके मुस्कुरा रही थी!
“रश्मि! अरे कमीज़ उतार कर आराम से साफ़ कर लो यार! कीचड़ अन्दर तक लगा है!” अचानक वो बोला!
“तुम पागल हो क्या? भला तुम्हारे सामने नंगी होकर नहाउंगी क्या?” मैं शरमाते हुए बोली!
“अरे तो क्या हुआ? मैं आँखे बंद कर लूँगा.” वो हंसते हुए बोला!
मेरे मन में शरारत समा चुकी थी। आखिर मैं जवानी में कदम रख रही थी, दिल का कीड़ा कुलबुलाने लगा और मन में मन मैं विकास को पसंद भी करती थी। पर आज तक प्यार-व्यार वाली कोई बात नहीं थी! मैंने कुछ करने की मन में मन में ठान ली और कुछ देर सोच कर बोली- अच्छा ठीक है! पर वादा करो कि आँखे बंद रखोगे!
“ठीक है मेरी माँ! अब ज्यादा नाटक ना करो! दिक्कत तुम्हें है, मुझे नहीं!” विकास किलसता हुआ बोला!
“ओके … चलो आँखे बंद करो!” मैं अपना शर्ट उतारते हुए बोली और अच्छे से नहाने लगी.
मुझे शर्म आ रही थी पर अब मैं कुछ और मूड में थी! विकास मुझे देखकर आश्चर्य चकित हो रहा था! उसकी आँखे बंद होने की बजाये और अधिक चौड़ी हो गई थी! वो लगातार नल चला रहा था! वैसे इस सबका एक और तरीका यह भी था कि मैं बाल्टी भर कर बाथरूम में भी नहा सकती थी, पर मैं कुछ और सोचे बैठी थी!
अचानक विकास मेरे पास आ गया, नल चलाना उसने छोड़ दिया और मेरा बायाँ हाथ पकड़ कर मुझे ऊपर उठा लिया और मुझे अपनी बाँहों में लपेटने लगा!
“यह क्या बदतमीजी है विकास! तुम पागल तो नहीं हो गए हो!” मैं बनाबटी गुस्सा दिखाते हुए उसकी गिरफ्त से छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी!
“रश्मि! आई लव यू … आज मुझे अपने से अलग न करो प्लीज! रश्मि तुम इतनी सुन्दर हो कि मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ! आज मुझे मना मत करना!” वो गिड़गिड़ाता सा बोला और मुझे बेतहाशा चूमने लगा!
मैं भी गरम होने लगी थी! पर अभी एकदम हथियार डाल देना सही नहीं था!
“विकास, ये ठीक नहीं है … दूर हटो मुझसे, मैं अंकल आंटी से कह दूंगी!” मैंने थोड़ी और स्यानपती दिखाई!
“रश्मि! प्लीज, पापा से मत कहना! मैं कुछ नहीं करूँगा! बस एक किस ही करूँगा!” वो बोला!
“ठीक है! पर किस से ज्यादा कुछ नहीं! नहीं तो मैं अंकल को बोल दूंगी!” मैंने हथियार डालते हुए कहा!
उसे तो मुँह मांगी मुराद मिल गई! उसने मेरे होंठों को अपने होंठों मैं कैद कर लिया और मज़े से चूसने लगा! मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। मैं भी उसका पूरा साथ देने लगी! उसने मुझे बुरी तरह से बाँहों मैं जकड़ा हुआ था और फिर उसने अपना दायां हाथ मेरे दाहिने स्तन पे रख दिया। मेरी आँखें फटी की फटी रह गई, शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई!
मैं उससे मना करना चाहती थी पर उसने मेरे होंठ अपने होंठों से जोड़ रखे थे! विकास का दूसरा हाथ मेरे हिप पर पहुँच गया और उसने कसके मुझे ऊपर उठा लिया और फिर दाहिना हाथ मेरे स्तन से हटाकर मेरी कमर में डालकर मुझे पूरी तरह से अपनी गोद में उठा लिया!
मैंने भी अपनी बाहें उसके गले मैं डाल दी! इस सब के दौरान हमारे होंठ एक सेकंड को भी जुदा नहीं हुए! वो मुझे उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और बिस्तर पे पटक दिया। मैंने सलवार नहीं उतारी थी जो कि पूरी तरह से गीली थी। बिस्तर भी गीला होने लगा। मैंने उठने की कोशिश की लेकिन विकास ने उठने नहीं दिया और मुझे अपनी बाहों में लिपटाकर मेरे होंठों का रसपान करता रहा। फिर धीरे से मेरी सलवार का नाड़ा खोलने लगा! मैंने विकास के हाथ पकड़ लिया पर वो नाड़ा खोल कर ही माना और सलवार को भी जबरदस्ती उतार दिया!
अब मैं केवल ब्रा और पैंटी मैं थी, मेरी आँखों से आंसू छलक आये!
“अरे यार रोना मत!” वो ये देख कर बोला!
और उसने मुझे छोड़ दिया! मैं तकिये मैं मुँह देकर रोने लगी वो थोड़ी देर खड़ा होकर सोचने लगा। फिर पता नहीं कहाँ से एक तौलिया लेकर मेरे पास आया और बोला- रश्मि! आय ऍम वैरी वैरी सौरी! प्लीज, मुझे माफ़ कर दो और यह लो तौलिया और अपना बदन साफ़ कर लो!
मैं लगातार रोये जा रही थी और उसकी तरफ भी नहीं देखा मैंने मुड़कर! तभी वो मेरी कमर को तौलिया से पोंछने लगा और टांगो को साफ़ करने लगा मैं करवट लेकर लेटी थी और मेरा चेहरा तकिये में धंसा हुआ था। उसका धीरे से मेरा बदन पर स्पर्श अच्छा लग रहा था
फिर मैं उठकर बैठ गई और उसकी आँखों में ना जाने ढूँढने लगी! वो बड़ा प्यारा लग रहा थ मुझे!
फिर मैंने झट से उसका चेहरा अपने हाथो में लेकर होंठ से होंठ भिड़ा दिए! अब उसने भी मुझे भींच लिया और मेरे होंठों को पीने लगा! अब मेरे हाथ उसकी शर्ट के बटनों से खेल रहे थे सारे बटन खुलते ही उसने अपनी शर्ट निकाल फेंकी और अपने हाथ पीछे ले जाकर मेरी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ब्रा को मेरे स्तन से अलग कर दिया! मेरे दूधिया उरोज हिलते हुए अलग हो गए!
विकास एक तक देखता ही रह गया और बोला- रश्मि! तू क्या माल है यार! अब तक कैसे बच गई मेरे हाथ से!
मेरी हंसी छुट गई! और फिर उसने मेरे टेनिस बॉल के आकार के स्तनों को हाथों में ले लिया। फिर दाहिने स्तन के निप्पल को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया!
मैं मस्ती से सराबोर हो उठी और उसका सर अपने हाथों से अपनी छाती पर दबाने लगी! तभी उसने मेरे दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से मसल दिया!
आईईइ… क्या कर रहा है … दर्द हो रहा है! मैं चिल्ला उठी!
वो और जोश में आक़र मेरे स्तन को चूसने लगा! मेरी हालत ख़राब होने लगी, मैं अपने हाथ से अपनी बुर रगड़ने लगी! फिर हाथ ऊपर लाकर उसकी पैन्ट को खोलने लगी। वो बदस्तूर स्तनपान करे जा रहा था जैसे कितने जन्मों का प्यासा हो!
पैन्ट की जिप खुलते ही उसने अपनी पैन्ट जल्दी जल्दी उतार दी पर इस काम के बीच उसके होंठ और एक हाथ मेरे बूब्स पे लगे रहे!
अब उसने मेरी पेंटी भी उतार फेंकी! मेरा हाथ जैसे ही उसके अण्डरवियर से छुआ, मुझे करंट लगा। उसने मौके की नजाकत को समझते हुए अपना अंडरवियर भी उतार फेंका और मेरा हाथ ले जाकर अपने लिंग पे रख दिया! पहले तो मैंने शरमा कर अपना हाथ छिटक दिया! पर उसने दोबारा मेरा हाथ अपने लिंग पर रख दिया और इस बार उसने अपना हाथ भी मेरे हाथ से लगाये रखकर मुठ्ठी भीच दी!
अब विकास का लिंग मेरी मुठ्ठी में था! मुझे लिंग का स्पर्श अच्छा लगा! एकदम लकडी की तरह कड़ा हो चुका था उसका लिंग! मैंने अंदाजा लगाया कि उसका लिंग करीब ५.५” से ६” के लगभग था और २” मोटा रहा होगा!
मैं उसका लिंग सहलाने लगी! तभी विकास ने अप्रत्याशित हरकत कर दी, उसने अपनी ऊँगली से मेरी बुर को छेड़ दिया मैं चिहुंक उठी- आअह्हऽऽ विकास आराम से!
पर वो कहाँ मानने वाला था, उसने फिर अपनी एक ऊँगली मेरी बुर में घुसा दी! मैं उछल के उससे लिपट गई उसने फिर मुझे सीधा लिटा दिया और मेरी टांगें चौड़ी करने लगा! मैंने अपनी बुर को अपने हाथों से ढक लिया, आँखे बंद कर ली और टांगों को आपस में भींचने की कोशिश करने लगी! विकास ने मेरे हाथ को हटा कर एक चुम्बन मेरी बुर पे ले लिया!
‘सीईईई ईइऽऽऽ’ मेरी सीत्कार छुट गई, अपने आप को संभाला मुश्किल हो गया! दांतों से निचला होंठ काटने लगी और दोनों हाथों को ऊपर ले जाकर तकिये को मसलने लगी, मेरा शरीर कांप रहा था!
विकास अपनी जीभ से मेरी बुर चाट रहा था!
जब मैं मज़े के चरम पे पहुंची तो मैंने विकास को अपने ऊपर खींच लिया- जल्दी कुछ करो विकास! मेरी चूत में कुछ कुछ हो रहा है! आह्ह्हऽऽऽ! मैं मर जाऊँगी! प्लीज जल्दी कुछ करो!!!!! मैं पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी, मुझे नहीं पता!
मेरी जान, आज कसम से मज़ा आ जायेगा तुझे! विकास बोला!
और उसने अपने लंड पे थूक लगाया और मेरी चूत तो पहले ही गीली हो चुकी थी! चूत के मुहाने पे टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा! लंड का अग्र भाग चूत में धंस गया।
मैं चिल्ला पड़ी- आईईईई ईईई मम्मी! मैं मरी! तू पागल है विकास! तू कुत्ता है! तू कमीना है! मेरी आँख से आंसू निकल पड़े!
मेरा पहला सेक्स था, इसलिए ज्यादा दर्द हो रहा था और शायद विकास का भी पहला ही था!!
शायद! इसलिए क्यूंकि उसको देखकर लग नहीं रहा था कि वो पहली बार कर रहा है! पर चूँकि उसने बताया था कि मैं ही उसके जीवन मैं पहली लड़की थी जिसके साथ यह सब कर रहा है!
उसने अपना लंड कुछ देर थामे रखा और मेरे उरोज सहलाता रहा। मुझे कुछ शांति मिली। मैंने नीचे से कूल्हे उचकाना शुरू किया तो उसने मेरी कमर को पकड़ कर एक जोरदार धक्का मारा!
हईईईए राम मम्म्य्य्य मैं मरी! आआअह्ह् विकास! पागल है क्या तू! इतना ही चीख पाई कि उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पर कस दिया!
उसका आधा से ज्यादा लंड चूत में घुस चुका था! मेरी जान निकली जा रही थी और आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, साँस लेने में भी दिक्कत हो रही थी! कुल मिलाकर यह लग रहा था कि आज मैं मरने वाली हूँ!
मैंने जबदस्ती उसके होंठों से अपने होंठ छुड़ाये! फिर थोड़ी देर साँस लेकर रोने लगी!
मुझे रोता देख विकास डर गया पर उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला- रश्मि कुछ नहीं होगा! पहली बार ऐसा ही होता है! अभी सब ठीक हो जायेगा!
हाई मम्मी! आईईई रीईई रामा! आआअह्ह्ह! विकास, आई हेट यू! यू आर फूल! कुत्ता! हाई! तू कमीना! हाई! तू! फिर पता नहीं क्या क्या कहा मैंने उसे!
विकास मेरे उरोज सहलाता, फिर कभी हिप को सहलाता, १० मिनट तक ऐसे ही पड़े पड़े मैंने उसे बहुत गालियाँ दी फिर भी वो बेचारा चुपचाप मुझे प्यार से सहलाता रहा!
फिर धीरे धीरे उसने अपना लंड हिलाना शुरू किया, जब मुझे मज़ा आना शुरू हुआ तो उसका वर्णन करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है!
“ऊऊऊओह्ह्ह! येस्स्स् विकास आई लव यू!” परिस्थिति बदल चुकी थी!
विकास मुस्कुरा रहा था- आई लव यू ठु डार्लिंग! तू कमाल है रश्मि! आआअह्ह! वाकई तू कमाल है!
धक्के पे धक्के, रेलमपेल हो रही थी! गपागप तथा फचाफच की मधुर आवाज़ निकल रही थी!
फिर विकास ढीला पड़ता गया, मैंने नीचे से अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी, उसी वक़्त मेरा भी स्खलन हो गया! विकास लम्बी लम्बी साँस लेता हुआ मेरे उपर लेट गया। फिर अपनी आँखें बंद कर ली!
२०-२५ मिनट ऐसे ही पड़े रहे हम दोनों!
फिर विकास को एक तरफ कर मैंने उठने की कोशिश की पर उठा नहीं गया।
मेरी नज़र बेड शीट पर पड़ी तो वो पूरी की पूरी खून से सनी हुई थी, मैं फिर लेट गई!
विकास ५ मिनट बाद उठा फिर बोला- रश्मि! तुम लेटी रहो मैं कुछ करता हूँ!
फिर उसने मेरे कपड़े और वो बेड शीट खुद धोई और फिर किचन में जाकर मेगी बनाकर लाया!
भूख भी लगी थी!
उसके बाद मुझे नींद आने लगी पर विकास नहीं माना और उसने मुझे एक बार फिर चोदा!
शाम को तीन बजे हमें नेहा दीदी ने जगाया! विकास दरवाजा बंद करना भूल गया था! मैं नेहा दीदी की मेक्सी ही पहन कर सोई थी और विकास भी उसी बेड पे सोया था! दीदी सब कुछ समझ गई थीं!
पर विकास ने उनको अलग ले जाकर पता नहीं क्या समझाया, वो मुस्कुरा कर बोली कि विकास मुझे मेरे घर छोड़ आये!!
अब मेरे कपड़े भी सूख चुके थे। मैंने अपने कपड़े पहने और विकास के साथ बाहर आ गई!
फिर उसे कहा कि मैं खुद चली जाऊँगी अब!
विकास ने मेरे माथे पे किस किया और बोला- रश्मि! थेंक यू फॉर आल थिंग्स!
मैंने मुस्कुराकर उसको बाय कहा फिर अपने घर चल दी!
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी पहली चुदाई? Antarvasna
मेरा नाम अजय है, मैं बहुत दिनों से Hindi Porn Stories अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ता हूँ। आज मैं आप लोगों के लिए सच्ची कहानी लिखने जा रहा हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी उमर बीस साल थी और नेहा दीदी बाईस साल की थी। नेहा दीदी मेरे फ़ूफ़ा की लड़की है। फ़ूफ़ा बिज़नेस के सिलसिले में बाहर गए थे, घर में दीदी, फ़ूफ़ी और मैं ही थे।
गर्मी का महीना था, कोलकाता में गर्मी बहुत ज्यादा थी। रात को खाना खाकर हम लोग एक ही पलंग पर सो गए, दीदी बीच में फ़ूफ़ी फिर मै। मैं आप लोगो को बता दूँ कि नेहा दीदी को कभी मैंने ग़लत नजरो से नहीं देखा।
मैं गहरी नींद में सो रहा था और सपना देख रहा था करीना कपूर की चूची दबाने का, कि अचानक मेरे मुँह पर कुछ जोर से गिरा और नींद खुल गई, लाईट बंद थी और अँधेरा था मुझे लगा कि नेहा दीदी के दोनों पैर मेरे मुँह पर है। शायद फ़ूफ़ी को कोई परेशानी थी या गर्मी लग रही थी इसलिए वो नीचे चादर डाल कर सो गई थी।
मैंने अपने दोनों हाथों से दीदी के पैर हटाने चाहे तो पाया कि दीदी की टांगों पर कपड़ा नहीं था दरअसल रात को वो गर्मी के कारण पतली नाइटी पहन कर सोई थी, मैंने धीरे से उसके दोनों पैर अपने ऊपर से हटा कर बिस्तर पर कर दिए, करीना कपूर चूची दबाने का सपना ओर दीदी की नंगी टांगों के छूने से मेरा लंड में कसाव आने लगा और मेरी नीयत दीदी को छूने की होने लगी।
मैंने थोड़ी हिम्मत करके नेहा दीदी की टांगों पर हाथ रखा और धीरे धीरे ऊपर की ओर हाथों को सरकाने लगा। कमर तक पहुँचा तो पाया नाइटी नहीं है पर पैंटी पहनी हुई है। मैंने हिम्मत करके उसके पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को दबाने लगा। हाय क्या नरम मुलायम चीज़ थी और मुझे आनंद का अनुभव हो रहा था। मेरा लंड तो तन कर 8″ का हो गया।
मैं धीरे धीरे हाथ को ऊपर नाभि से लेकर छाती तक गया तो पाया कि नाइटी चूचियों के ऊपर ही है जिससे चूचियाँ ढकी है। मैंने धीरे से उंगलियों से नाइटी को हटाना शुरू किया और दीदी की चूचियाँ बाहर आ गई। मैंने धीरे धीरे सहलाना शुरू किया तो चूचियों के चुचूक कड़े होने लगे। मुझे लगा कि शायद दीदी की जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा है।
मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मन कर रहा था कि मैं दीदी की चूचियाँ पकड़ कर मसल दूं! लेकिन मैंने बड़े प्यार से दीदी के स्तन सहलाये… ओर नोकों को हौले हौले से पकड़ कर मसलते हुये घुमाया, अब मेरे इरादे बदलने लगे थे। मैंने अपनी टांगों से बार बार उसके चूतड़ों को छूना शुरू कर दिया। उसके पूरे के पूरे स्तन देखने को और दबाने को मिल रहे थे। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में ले लिया और धीरे से चूसने लगा।
अचानक मुझे लगा कि दीदी की नींद खुल चुकी है और चुपके से सोने का बहाना कर रही हैं। मेरी हिम्मत बढ़ने लगी। मैं भी अंजान बन कर निप्पल को धीरे से चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैं अपना हाथ उसकी पैंटी पे ले आया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी और दीदी ने हलके से अपने पैरों को थोड़ा फैला दिया। मैंने दीदी की पैन्टी धीरे से नीचे खींच दी और पैन्टी को धीरे धीरे पैरों से अलग कर दिया और उसकी चूत पर हाथ रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा।
दीदी ने हलके से आपने पैरों को थोड़ा ओर फैला दिया। मैं उठ कर बैठा, उसने धीरे से खुद अपनी टांगें ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। उसकी चूत देख कर मैं खुश हो गया । गुलाबी रस भरी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी। उसकी चूत एक दम गुलाबी थी और चूत पर एक भी बाल नहीं था, उसकी चूत एक दम लाल सुर्ख हो गई थी ऐसी इच्छा हो रही थी कि उसकी चूत खा जाऊं।
मेरे मुंह में पानी आ गया। मैं उसकी चूत पर झुक गया। मादक सी गंध आ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसकी चूत पर रख दिये वो तिलमिला उठी मैने अपनी जीभ उसकी चूत के होठों पर रख दी। वो हल्के से सिसक पड़ी। होले होले मैं उसकी चूत की पूरी दरार चाटने लगा। वो तिलमिलाने लगी, तड़फ़ने लगी। मैंने अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेद मे डाली और अन्दर तक ले गया। वो तड़फ़ती रही। मैं जोर जोर से चूत रगड़ने लगा।
उसकी सिसकियां बढ़ने लगी, वो अब बहाना छोड़ कर दोनों हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी। तभी वो काँपने लगी और उसने अपने चूत का पानी छोड़ दिया और मैं उसका सारा पानी पी गया।
मैंने देखा कि वो हांफ रही है और मेरी तरफ़ देख रही है, मैं उसके कान के पास जाकर फुसफुसा के कहा- कैसा लगा तो दीदी?
तो उसने कहा- हटो यहाँ से! तुम्हारा मेरा रिश्ता क्या है? तुम्हें पता है कि तुम क्या कर रहे हो? मैं तुम्हारी दीदी हूँ और यह सब पाप है!
मुझसे रहा नहीं गया मैंने फिर कहा- इतनी देर मेरे साथ मज़ा लेकर अब कह रही हो कि यह सब पाप है! मुझे तुमसे प्यार करना है तुम चाहो या न चाहो!
बोल कर मैंने उसकी बांई चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा और अपनी लुंगी खोल कर दीदी के ऊपर लेट गया, अपना लंड उसके जांघों के बीच रख लिया।
मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ को नेहा के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूँगा। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को अपनी जांघों से बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी।
दीदी ने धीरे से कहा -‘भाई धीरे धीरे से जो करना है करो! तुम तो मान ही नहीं रहे हो! मुझे तो डर है कि कही माँ जाग न जाए!
फिर उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे होंटों को वो बुरी तरह से चूमने लगी। मैं भी जोश में आ गया, उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। उसने मुझे बेड पे लिटा लिया और मेरी दोनो टांगो के बीच बैठ कर मेरा लन्ड चूसने लगी। मैं उसके मुलायम होठों को अच्छी तरह महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं किसी और दुनिया में हूं। मेरे जिस्म में चींटियां रेंगने लगी। उसने अपनी गति बढ़ा दी और जल्दी जल्दी लन्ड को चूसने लगी। थोड़ी देर में लन्ड से धड़ाधड़ पानी निकलने लगा जिसे उसने गड़प से पी लिया।
लन्ड कुछ देर शान्त बना रहा। मैं भी बेड पर निढाल सा पड़ा था।
वो उठ कर बोली- क्यों मर्द?… बस क्या?… या और कुछ करना है?
मैंने कहा- दीदी अभी तो पूरा रात बाकी है… बस एक मिनट… अभी तैयार हो जाता हूं!
वो हंसने लगी। मैं उससे लिपट गया, मैं उससे यूं लिपटा हुआ था जैसे उसके अन्दर ही समा जाउंगा। मैंने उसे बेड पे लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगे ऊपर कर ली, जिससे उसकी चूत खुल गयी। मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी नेहा दीदी को चोदो! दीदी हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी।
मैंने पूछा- दीदी तैयार हो क्या जन्नत की सैर करने के लिए?
तो वो बोली- ‘हाँ मेरे राजा भाई! आज इस चूत की खुजली मिटा दो, साली रात भर सोने नहीं देती हैं।
उसने कहा- प्लीज़ जल्दी से अपना मोटा सा लण्ड मेरी चूत में डाल दो।
फिर अपने लण्ड उसकी चूत पे रख कर उसे रगड़ने लगा। वो तो मानो पागल हो उठी। उसने मेरे बॉल खींच लिए और धीरे से बोली प्लीज़ मुझे और मत तड़पाओ, और जल्दी से अपना लण्ड अंदर कर दो। मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया तो लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पे जा कर अटक गया। और वो दर्द से तड़प कर बोली- आ…ह… उ…ई… बाहर निकालो प्लीज़।
उसकी आँखों में आंसू आ टपके। लेकिन मैं तो पूरे जोश में था। मैंने उसे अपने बाजुओं में कस कर पकड़ा और धीरे से प्रेशर देने लगा। फिर मैं रुक गया क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाइट थी और मुझे भी महसूस हो रहा था। मैं बस उतना सा ही घुसा कर उसके स्तन को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद वो खुद ही अपनी गांड धीरे धीरे उचकाने लगी।
मैं समझ गया कि अब उसका दर्द ख़त्म हो गया है और वो अब पूरा लण्ड अपनी चूत के अंदर चाहती है। मैंने कुछ सोचा और थोड़ा सा लण्ड बाहर निकाल कर ज़ोर से धक्का मारा। फ़च्छ … की आवाज़ के साथ पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया था। और दीदी ने अपने होंटों को दबा कर रोना शुरू कर दिया। मैंने उसके मुँह को अपने एक हाथ से ज़ोर से बंद किया और कहा कि अगर वो ज़ोर से चिल्लाएगी तो फ़ूफ़ी उठ जाएँगी और सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा। उसकी आँखो से आंसू छलक पड़े, लेकिन उसने आवाज़ निकालनी कम कर दी।
मैंने लण्ड को थोड़ा सा बाहर खींचा और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। वो अब मस्ती से कराहने लगी. आ…ह उम्म…ह… हाँ… ऐसे ही ठीक है…
मैं लण्ड की अंदर बाहर करने की स्पीड धीरे धीरे बढ़ाने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो भी अब पूरा साथ दे रही थी अपनी गांड हिला हिला कर। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। १० मिनट के बाद उसका ऑर्गेज़्म हो गया था। मैं उसकी चूत की लहरें महसूस कर सकता था। उसकी चूत का पानी निकल कर पूरी बेड शीट पर फैल गया था। मैंने उसकी टाँगे और फैला ली और लंबे लंबे धक्के लगाने लगा। वो आँखें बंद करके कराह रही थी।
थोड़ी देर बाद मैंने भी उसकी चूत के अंदर ही ढेर सारा वीर्य छोड़ दिया। हम दोनो इसी तरह आधे घंटे तक लेटे रहे। फिर मैंने धीरे से अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला। वो काफ़ी टाइट से अटका था। फक्क की आवाज़ के साथ पूरा लण्ड बाहर आया तो उस पर मेरा वीर्य और थोड़ा खून भी लगा था। फिर दीदी धीरे से चुपचाप उठ कर चादर को लेकर बाथरूम चली गई।
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