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Massage Girl in Manali: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Manali who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Manali that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Manali massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Manali who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Manali massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Manali massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Manali who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Manali employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Manali helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Manali

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Manali at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

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Hindi Porn Stories

हाय मेरा नाम विक्की है, मैं 26 साल Hindi Porn Stories का हूँ और मैं दिल्ली में रहता हूँ।
मैंने इस साईट की सभी कहानियाँ पढ़ी हैं। मैं भी अपना एक अनुभव आपसे बताना चाहता हूँ।

यह बात आज से लगभग दो-ढाई साल पहले की है, हमारे घर में एक किरायेदार रहने आए। उनमें तीन लोग ही थे पति पत्नी और उनका छोटा भाई। मैं उनको भाई भाभी बोलता था। दोनों भाई ऑटो चलाते थे, दिन में बड़ा भाई और रात को छोटा भाई ऑटो चलाते थे।

एक रविवार, मेरी ऑफिस की छुट्टी थी तो मैं अपने दोस्तों से मिलने निकल गया। शाम को जब में घर आया तो देखा कि एक लड़की मेरे घर के आँगन में मेरी मम्मी और बहन के साथ बैठ कर बात कर रही है।
मैंने सोचा कि बहन की कोई फ्रेंड होगी तो मैं सीधा बाथरूम में जाकर अपने हाथ मुँह धोकर आया। मैंने महसूस किया कि वो लड़की मुझे घूर घूर कर देख रही थी। मैं मम्मी की वजह से उसको नहीं देख रहा था। फ़िर वो उठ कर चली गई तो मैंने मम्मी से पूछा कि यह लड़की कौन है?

मम्मी ने बताया कि यह उन भइया की बहन संजू है।

यारों क्या मस्त माल थी वो ! लम्बाई 5.4′ भरा भरा बदन सांवला रंग एक दम ब्लैक ब्यूटी थी वो ! 2-3 दिन ऐसे ही निकल गए मैं कही भी जाता थो वोह मुझे घूर घूर कर देखती। उसकी आँखों में मुझे वासना दिखाई दी।

ऐसे ही एक हफ्ता निकल गया और फ़िर से रविवार आ गया। उस दिन मेरी बहन कुछ चादर पर कुछ फूल पत्ती बना रही थी। मम्मी भी उसका साथ दे रही थी और वो लड़की संजू, वो चारपाई पर बैठी थी और मेरी बहन नीचे जमीन पर, मम्मी भी उसके साथ चारपाई पर ही बैठी थी।

मैं बाहर से घूम कर आया तो देखा कि सब बैठे हैं, मैं भी बैठ गया कुर्सी पर और मैंने अपने पांव चारपाई पर फैला दिए। तो चादर मेरे पांव के नीचे दब गई। मेरी बहन गुस्सा हो कर बोली कि चादर पांव के ऊपर कर ले नहीं तो गन्दी हो जायेगी।

मैंने ऐसा ही किया तो मेरा पाँव अचानक संजू के हाथ पर लगा। मैंने अपना पांव हटा लिया तो वो मेरी तरफ़ देखने लगी जैसे कह रही हो कि क्योँ हटा लिया। मैं मुस्करा दिया और दूसरी तरफ़ देखने लगा कि कहीं किसी का ध्यान मेरी तरफ़ तो नहीं, पर किसी ने नहीं देखा।

मुझे मजा आने लगा, मै धीरे से उसके कमर की साइड में अपनी पांव से सहलाने लगा। चादर पांव के ऊपर होने से किसी को कुछ पता नहीं चला और उसने भी कुछ नहीं कहा। मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं पांव की उँगलियों से उसकी बाजू पर और पेट पर चिकोटी काटने लगा उसने कुछ नहीं कहा।

तभी मेरे पापा आ गए और सब लोग उठ गए। फ़िर तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं जब उसको अकेले देखता तो कभी उसकी चूची दबा देता कभी उसकी गांड में ऊँगली करता और वोह कुछ नहीं कहती।

एक दिन मैं घर पर ही था और वो भी अकेली थी। मेरी मम्मी मार्केट गई थी। मुझे मौका मिल गया। मैं उसके कमरे में गया और उसको पकड़ लिया और जल्दी से उसके कपड़े उतार दिए और अपने भी। वो कुछ नहीं बोली। फ़िर मैंने उसको किस करना चालू कर दिया। वो भी साथ देने लगी, मुझे मजा आने लगा। मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था, मैं तो पागल ही हो गया।

उसकी कठोर चूचियों को देख कर मैंने उनको खूब चूसा और दबाया।

वो बोली- जल्दी करो अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता।

मैं उसकी चूत में ऊँगली डालकर चोदने लगा। उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी, उसको बहुत मजा आ रहा था। उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी और मजा ले रही थी अपनी कमर को उठा उठा कर। तभी जोर से चिल्लाई और झड़ गई। मैंने उसका सारा रस चाट कर साफ़ किया और फ़िर अपना 6′ लंबा और 3.5′ मोटा लंड उसकी चूत में डालने लगा तो वो चिल्लाने लगी। मैंने उसके मुँह पर अपना मुँह रख दिया और उसके होटों को चूसने लगा। फ़िर उसको मजा आने लगा और वो अपनी कमर उठा उठा कर चुदवाने लगी।

मैं समझ गया कि अब उसको मजा आने लगा है। मैंने अपनी धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और उसको तेज तेज चोदने लगा। 10 मिनट बाद वो मुझसे लिपट गई और मुझे नोचने लगी। मैं समझ गया कि इसका पानी निकलने वाला है। मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी और 5 मिनट बाद ही हम दोनों ने अपना रस छोड़ दिया। मैं उसके ऊपर ही लेट गया, उसकी आंखे बंद थी, उसके चहरे से पता लग रहा था कि वो पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी है।

तभी डोरबेल बज उठी। मैं जल्दी से उठा और अपना लोअर पहन कर दरवाजा खोला, तो मम्मी थी। उस दिन तो बच गए। उसके बाद वो अपने गाँव वापस चली गई। फ़िर उसके बाद उसके भाई ने भी घर खाली कर दिया और मेरा उसके साथ कोई लिंक नहीं रहा।

तो दोस्तो, यह था मेरा पहला सेक्स अनुभव. मैं आजकल अकेला हूँ, Hindi Porn Stories

ये कहानी मेरी बुआ की है जब मै 24 इयर्स क्या था मेरी बुआ बहुत ही सुन्दर और स्लिम दूधिया गोरी है बुआ को गरम होने क्या कारण था की उनके पति बहुत शराब पीते थे उस समय बुआ की उम्र 52 होगा, एक बार की बात है जब मेरि बुआ मेरे घर आयी हुयी थी गर्मी की बात है और हम सभी परिवार चाट पे सोने क्या तैयारी कर गप सप कर रहे थे भूया मेरे बगल में ही लेते थे मै थोड़ा से बुआ को टच करते हुए उन्हें गरम हिया तो उन्होंने रिप्लाई में मेरा लुंड पकड़ कर दवाने लगी, तब मै जाना की रिश्ते में लोग सेक्स कर लेता है फिर तो कहना नहीं है आगे बताउगा नेस्ट स्टोरी में कया हुआ
Antarvasna

मैं अमृतसर से मनीष, यह Antarvasna बात तीन महीने पुरानी है जब मैं गर्मी की छुट्टी में अपने नाना नानी के घर गया था वहां मेरे मामा मामी रहते थे.

मेरी मामी मस्त माल थी हमेशा बड़े गले का कुरता पहना करती थी उनको देख कर मेरा मन डगमगाता था ऐसा लगता था जैसे वो मुझे अपनी ओर आकर्षित करती थी मैं बार बार उनके झुकने का इन्तज़ार करता रहता था। मेरी मामी का नाम सोनिया है।

मुझे जब भी लगता था कि वो झुकने वाली है तो मैं सामने जाकर खड़ा हो जाता था और तिरछी नज़र से उनके बड़े बड़े गोरे गोरे और चिकने चिकने बूब्स को देखा करता था मुझे उनके बूब्स बेहद पसन्द थे, मुझे उन्हे छूने का बेहद मन करता था कभी कभी जान बूझ कर मैं उनसे सामने से जाकर टकरा जाता था और बड़ी होशियारी से उनके बूब्स को छू लिया करता था।

लेकिन इतने में मेरा मन नहीं भरता था। मैं उन्हे सहलाना चाहता था वो बहुत गोरी है। उनको देख कर मुझे उनको चोदने का मन करता था।
वो बहुत गदराई हुई बदन की है मैं भी वैसा ही हूं।

एक दिन मेरे मामा को कुछ काम से 6 दिन के लिये दुबई जाना पड़ा।

मैं घर के हाल में बैठा ही था तब मेरी मामी हाल में आयी और उन्होने मुझे एक चिट्ठी दी.

उस चिट्ठी में लिखा था “मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं मुझे तुम्हे देखते ही कुछ कुछ होता है मैं तुम्हारे साथ अकेले में कुछ वक्त गुज़ारना चाहती हूं ये बात मैं ने चिट्ठी में इसलिये कहीं क्योंकि मुझे शरम आ रही थी अगर तुम मुझसे मिलोगे तो आज रात ११.०० बजे मेरे कमरे में आ जाना और तुम्हारी ओर से हां है तो चिट्ठी मुझे वापस लौटा देना मैं तुम्हारा इन्तज़ार करुंगी.”

ये पढ़ कर तो मेरा मन ही उछल पड़ा, मैं ने तुरन्त वो चिट्ठी उनको वापस लौटा दी और ११ बजने का इन्तज़ार करने लगा।

रात हो चुकी है ११ बज रहे है मैं कमरे में चला गया कमरे के अन्दर घुसते ही मैं ने देखा कि मेरी मामी काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी उन्हे देख कर ऐसा लग रहा था कि उन्होने अंदर कुछ भी नहीं पहना है। उनके बड़े बड़े बूब्स मुझे दिख रहे थे।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं शुरुआत कहां से करुं। तभी अचानक मेरी मामी ने मेरा हाथ पकड़ लिया ये उस हसीन रात की शुरुआत थी।
मैने भी मामी की कमर को पकड़ के अपनी ओर खींच लिया और उन्हे चूमने लगा। उनके गालों को चूमते चूमते मैं उनके होंठों तक पहुंच गया।

जब मैने देखा कि मेरी मामी मेरे चुम्मो का आनंद ले रही है तो मैने अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया। मेरे हाथों ने जैसे ही उनकी चूचियों को छुआ वो कांप सी गयी मुझे उनके बूब्स छूने में बहुत मज़ा आ रहा था। वो बहुत नरम थे तभी मैने उनकी नाइटी को उनके कंधे से नीचे उतार दिया उनके चिकने बूब्स अब पुरी तरह से मेरे हाथ में थे मैने अपनी उंगलियों से उनके गुलाबी निप्पल को रगड़ना शुरु किया तो वो काफ़ी उत्सुक हो गयी और मेरे लंड को कस कर पकड़ लिया।

मैं अपना चेहरा उनके बूब्स के पास ले गया और अपने गालो और जीभ से उनके बूब्स को सहलाने लगा। मैने अपने हाथ से उनके बूब को पकड़ लिया और छूने लगा ऐसा करते ही मेरी मामी पागल सी हो गयी उन्होने मेरा लंड और कस कर पकड़ लिया और सहलाने लगी फिर मैने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अनपे छोटु को निकाल के उनके हाथ में दे दिया।

मेरी मामी बहुत अच्छी तरह से मेरे छोटु को सहला रही थी तभी मैने उन्हे पलंग पर बैठा दिया और उनके सामने जाकर खड़ा हो गया। वो समझ गयी कि मैं चाहता था कि वो मेरे लंड को चूसे उन्होने मेरे लंड को कस कर पकड़ा और चूमने लगी।

मैने उन्हे अपने लंड को मुंह में लेने को कहा उन्होने मेरे छोटु के सामने वाले हिस्से को जिसे हम सुपाड़ा कहते हैं उसे मुंह में ले लिया मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था मैं और मज़ा लेना चाहता था मैने अपनी मामी के सिर को पकड़ा और अपना लंड को और अन्दर घुसाता चला गया देखते ही देखते मेरा पूरा का पूरा लंड उनके मुंह के अन्दर था मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था मुझे लगा कि मेरा लस कहीं उनके मुंह में ही न गिर जाये इसलिये मैने अपने छोटु को निकाल लिया।

उसके बाद पता नहीं मामी को क्या हुआ मामी ने फिर से मेरा लंड चूसना शुरु कर दिया मेरा लंड फ़ुलसाइज़ का हो गया था फिर मैं पूरा नंगा हो गया मामी की नाइटी भी पूरी उतार दी.

उनको नंगा देखकर मेरा लौड़ा पूरा सनसना उठा अब मेरे लौड़े को कुछ चाहिये था तो वो थी मामी की चूत मैं ने मामी को बिस्तर में लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड से उनकी चूत को सहलाने लगा फ़िर थोड़ी देर बाद जैसे ही अपना लंड उनकी चूत में डाला तो मेरी मामी के मुंह से आवाज़ निकली “आऊउ छह्हह” ऐसा लगा जैसे मामा ने उन्हे कभी चोदा ही नहीं।

मैंने कन्डोम भी नहीं लगाया था मैं ने अपनी मामी को कस के पकड़ लिया और अपना लंड और अन्दर घुसाता चला गया मेरी मामी दर्द से सिमट सी गयी थी।

थोड़ी देर बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा मैने जब चोदते हुए अपनी मामी के चेहरे की तरफ़ देखा तो वह आंखें बंद कर के मुस्करा रही थी उन्हे काफ़ी आनंद आ रहा था। फिर मैने अपनी मामी को घोड़ी बनने को कहा वो दोनो घुटनो और हाथो के बल अपनी गांड मेरी तरफ़ करके लेट गयी।

मैने अपने हाथो से उनकी गांड को पकड़ कर पहला दिया मुझे उनकी गांड का छेद नजर आ रहा था। मेरा लौड़ा उसमे घुसने को बिल्कुल तैयार था मैने अपना लौड़ा जैसे उनकी गांड में टिकाया तो मेरी मामी ने मना कर दिया कहने लगी कि गांड में घुसाने में बहुत दर्द करता है।

लेकिन लौड़ा है कि मानता नहीं मैं ज़िद करने लगा तो मामी मान गयी और कहा कि धीरे धीरे घुसाना मैं अपना लौड़ा ले कर तैयार हो गया और घुसाने लगा मैं जानता था कि मामी को दर्द हो रहा है लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था उनकी गांड का छेद बहुत छोटा और टाइत था बहुत मुश्किल से अन्दर घुस रहा था मैने भी पूरा ज़ोर लगा दिया।

धीरे धीरे जगह बनती गयी और छेद फैलने लगा मेरा लंड और अन्दर घुसता चला गया। मैं अपने लंड को अन्दर बाहर करता गया मामी की चिकनी चिकनी गांड में मेरा लंड मज़े कर रहा था फिर मैने अपना लंड उनकी गांड से निकाल लिया और मामी को लिटा दिया और उनके पेट पर बैठ गया और अपने लंड को दोनो बूब्स के बीच सहलाने लगा मैने अपनी मामी से कहा कि क्या चिकनी चूची है तो मामी शरमाने लगी।

मैने अपनी मामी से कहा कि मेरे लंड को चूसो न तो मामी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपने गालों से सहलाने लगी और मुझसे पूछा कि कैसा लग रहा है मैने कहा पहले चूसो तो। तब मामी मेरे लंड को अपनी जीभ से चूसने लगी और दातों से काटने लगी मैं तो मज़े में पागल हो रहा था मुझसे सहा नहीं गया और मैने उनके मुंह में ही गिरा दिया मामी मेरे लस को चाटने लगी।

मेरी मामी ने कहा कि ये तूने क्या किया मैं समझ गया कि मामी अभी और चुदवाना चाहती है। मैने कहा कि घबराओ नहीं अभी मैं तुम्हे और चोदुंगा। लेकिन मेरा लंड मुरझा गया था।

मैं अपनी मामी के बूब्स को पकड़ के चूसने लगा और अपनी मामी की चूत को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा मामी में अभी भी बहुत जोश बाकी था। उन्होने भी मेरे लंड को सहलाना शुरु कर दिया।

धीरे धीरे मेरा लंड फिर से तनने लगा था जैसे ही मेरा लंड थोड़ा कड़ा हुआ मेरी मामी ने उसे अपने मुंह में ले लिया और कस कस के चूसने लगी वो मुझसे किसी भी हाल में और चुदवाना चाहती थी मेरे लंड को बार बार अपने मुंह में घुसाती और निकालती।
वो मेरे लंड को इतनी जोर से चूस रही थी कि उनके चूसने की आवाज़ आने लगी मेरा लंड भी अब तैयार हो गया था मैं भी उनके चेहरे को हाथ में लेके अपने लंड को अन्दर ठेलने लगी, क्या मज़ा आ रहा था।

मामी ने कहा कि मुझे और चोदो न तभी मैने अपनी मामी को लिटा दिया और उनकी जांघ को चाटने लगा चाटते चाटते मैं उनकी कमर तक पहुंचा तो देखा कि मेरी मामी मज़े में तिलमिला उठी तभी मैने उनकी १ टांग को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लंड को उनकी चूत में टिका दिया और अन्दर घुसा दिया और फ़िर इतनी रफ़्तार से चोदा उनको मामी बोल रही थी थोड़ा धीरे धीरे करो!

मामी की चूत गीली हो गयी थी चोदने में और मज़ा आ रहा था मेरा लंड चूत में आसानी से फ़िसल रहा था मैं ने मामी की चूत ढीली कर दी थी मुझे डर था कि मामा को पता न चल जाये क्योंकि मामी की चूत बहुत टाइट थी।

और मैंने चोद चोद कर उसे ढीली कर दी थी फिर मैंने मामी को कहा कि चलो कोई और स्टेप करते है.

मामी ने मुझे पलंग में लेटने को कहा और मेरे ऊपर चढ़ गयी वो अपने बूब्स के निप्पल को मेरे होंठों के पास लाने लगी मैं उनके निप्पल काटने लगा फ़िर वो मेरे लंड को पकड़ के मेरे लंड से अपने चूत को सहलाने लगी फ़िर धीरे धीरे अन्दर घुसाने लगी मामी मेरे लंड के ऊपर बैठ गयी और हिलने लगी.

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था जब वो मेरे ऊपर बैठ कर हिल रही थी तब उनके बड़े बड़े बूब्स हिल रहे थे वो नाज़ारा मैं कभी नहीं भूल सकता मामी के गोरे गोरे दूध और गुलाबी गुलाबी निप्पल मामी अपने हाथ से अपने बूब्स को सहला रही थी और अपने निप्पल को दबा रही थी

मैने फ़िर मामी की गांड को कस कर पकड़ा और निकोटने लगा फ़िर मैं ने मामी को नीचे लिटा दिया और मेंढक की तरह चढ़ गया फ़िर मैं मामी को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा मामी अपने दोनो हाथो से मेरी गांड को पकड़ने और मारने लगी मैने चोदना और तेज़ कर दिया मामी की चूत से पानी छूट गया और मैं ने भी अपना लस अन्दर ही गिरा दिया मामी ने कहा कि मुझे ऐसा कभी किसी ने नहीं चोदा है मैं एकदम ही लस्त पड़ गया था कुछ करने की हालत में ही नहीं था।

घड़ी की तरफ़ देखा तो ४ बज रहा था।

ये चुदाई मैं ने पूरे 6 दिन की और जब भी मैं वहां जाता हूं तब तब मामी को किसी न किसी बहाने से होटल ले जा कर चोदता हूं। Antarvasna

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राजस्थान में मैं जयपुर, बीकानेर Antarvasna Sex Stories और उदयपुर में घरों में काम कर चुकी थी। यहाँ उदयपुर में मुझे इस घर में काम करते हुए करीब दो महीने हो गये थे। राज सिन्हा साहब की पत्नी नहीं थी, उनका स्वर्गवास हुए कई वर्ष गुजर चुके थे। वे राजपूत थे, सभी राज साब को बन्ना सा कहते थे। उनके दो लड़कियाँ थी जो अजमेर में कॉलेज में पढ़ती थी। घर में वो अकेले ही रहते थे। राज की उम्र लगभग पचास वर्ष की थी। वो अक्सर मुझे घूरते रहते थे। मैंने उस तरफ़ ज्यादा ध्यान नहीं कभी नहीं दिया।

मेरे पति मजदूरी के काम से आस पास के शहर में चले जाया करते थे। घर पर भी मैं अकेली ही रहती थी। चुदाने आस और प्यास की ललक बढ़ती ही जा रही थी। जवानी का आलम मुझ पर भी चढ़ा हुआ था। जब डाली फ़लों से लद जाती है तो स्वमेव ही झुकने लग जाती है। मेरे भी अंग-अंग में से जवानी छलकती थी। मेरे फ़ल भी लद कर झूल रहे थे। मन करता था कि इन फ़लों का रस कोई चूस ले, कोई मेरे फ़लों को खींचे, मसले और मरोड़ डाले। मेरे चूतड़ों की गोलाईयां मस्त लचकदार थी, दोनों चूतड़ चिकने और अलग अलग खिले हुए थे। दरार तो मानो दूसरों के लण्ड को अन्दर समाने के लिये आमन्त्रित करती थी। मेरे मन की बैचेनी भला कोई क्या जाने ?

इसी प्यास में कभी कभी मेरी नजर उनके पजामे पर भी चली जाती थी और उनके झूलते हुए लण्ड को पजामे के ऊपर से ही महसूस कर लेती थी। जब राज मूड में होता था तब वो सोफ़े पर बैठ कर अखबार पढ़ने का बहाना करता था और अपना खड़ा हुआ लण्ड पजामे में से मुझे दिखाने की कोशिश करता था। अपनी अन्डरवियर जिसमें वीर्य भरा हुआ होता था, मुझे धोने के लिये देता था। उसकी इस हरकत पर मुझे हंसी आती थी। मुझ पर डोरे डालने के तरीके मैं जानती थी। मेरे मन में कसक भी उठती थी कि इस पचास साल के जवान को पकड़ लूँ और उसकी ढलती जवानी को चूस डालूँ। मुझे भी जब वो अपनी हरकतों पर मुस्कुराते देखता तो उसकी हिम्मत बढ़ जाती थी।

पर एक दिन ऐसा समय आ ही गया कि वो चक्कर में आ ही गया। क्यों ना आता, आग जो दोनों तरफ़ बराबर सुलग रही थी। उसका लण्ड मुझे चोदने के लिये बेताब हो रहा था और मेरी चूत उसे देख कर पानी छोड़ रही थी और लार टपका रही थी।

उस दिन मुझे यह भी पता चला कि काम करते समय मेरे ब्लाऊज में से मेरे बोबे को वो झांक-झांक कर देखता था। मेरा ध्यान ज्योंही मेरे ब्लाऊज की तरफ़ गया, मैं शरमा गई। मेरे बैठ के काम करने से मेरे चूतड़ों की गोलाईयां उभर कर दिखती थी, जिन्हें वो बडे शौक से निहारता था। उसकी बैचेनी मैं समझने लगी थी कि बिना औरत के आदमी की इच्छायें कितनी बढ़ जाती हैं। मुझे उन पर दया आने लगती थी। कभी कभी उसकी यह हालत देख कर मेरी चूत भी गरम हो उठती थी, तो गीली हो कर मेरी चड्डी भिगा देती थी। मैं उसकी बैचेनी बढ़ाने के लिये अपने स्तनों के दर्शन उसे रोज़ कराने लगी, उसे उत्तेजित करने लगी। बस इस दया ने मेरी चुदाई करवा दी।

उसका लण्ड खड़ा था और उस पर उनका हाथ कसा हुआ था। बस देखते ही मेरी चूत फ़डक उठी। मेरी वासना भी जाग उठी। इच्छा हुई कि उसका लौड़ा पकड कर मसल डालूँ।

“बाबूजी, नीचे तो देखो… ” राज ने कुछ ओर समझा और झट से लण्ड पर से हाथ हटा लिया,”क्या हुआ…?”

“वो सोफ़े के नीचे से सफ़ाई करना है…” उसकी बौखलाहट पर मैं हंस पडी…

“ओह्ह… मैं कुछ और समझा…”

“मैं बताऊं… आप समझे कि आप रे नीचे…” मैंने मुँह दबा कर हंस दी।

“चल हट… अब अकेला हूं तो मजाक बनाती है !”

” आप अपने आप को अकेला मती समझो जी… मैं भी तो हूँ ना !” मैंने उसके खडे लण्ड को देख कर मसखरी की।

“सच लच्छी… ” उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेरे शरीर में करण्ट दौड़ गया। उसका उतावलापन भड़क उठा।

“साब… हाथ छोड़ दो…” पर मैंने हाथ छुड़ाया नहीं।

वो और आगे बढ़ा और मुझे अपनी तरफ़ खींचा। उसके जिस्म में जैसे ताकत भर गई। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसकी आंखो में वासना की प्यास और दया की भावना दिखी।

“देख लच्छी, तू भी जवान है और मैं भी, देख मुझे खुश कर दे… मैं तुझे पैसे दूंगा !”

मैं लड़खड़ाती हुई उसके सीने से टकरा गई। पैसे का लालच भी आ गया, और चुदाने की इच्छा भी जागृत हो उठी। दबी जुबान से नीचे देखते हुए बोली,”साब पूरे सौ रूपिया लूंगी…फ़ेर तो जो मर्जी हो आपरी !” मेरे इतना कहते ही उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और लण्ड मेरी चूत में दबाने लगा।

“साब अभी नहीं … माने तो सरम आवै…रात ने आ जाऊंगी…!” दिन को चुदने में शरम आती थी सो धीरे से बोली।

“दिन को यहाँ कौन है… !”

मैंने उसके जिस्म को सहलाया। राज ने भी मेरे स्तनों पर हाथ रख कर उन्हें सहलाना आरम्भ कर कर दिया। मेरे जिस्म में बिजलियाँ दौड़ने लगी। मैंने यह तो कभी सोचा ही नहीं था कि बात सीधे ही चुदाई तक आ जायेगी। पर उसका कई दिन का प्यासा लण्ड कुलांचे मारने लगा था। उसकी ऐसी हालत देख कर मुझे दया आ गई और धीरे से उसका लण्ड थाम लिया। उसका लण्ड फ़ड़क उठा और जोर मारने लगा। मेरी चूत भी चुदने के लिये लपलपाने लगी।

“बाबू जी, ये तो घणों मोटो है … माने तो डर लागे…!”सच में उसका लण्ड मोटा था।

“लच्छी, अब कुछ ना बोल, बस मेरे गले से लग जा…!”

राज ने मुझे जोर से भींच लिया। मेरी पीठ पर उसके हाथ खरोंचे मारने लगे। मेरा बदन भी वासना से जल उठा। मैं धीरे धीरे रंगत में आने लगी और मेरी नौकरों वाली भाषा पर आ गई

“बाबू जी, आपरो लौड़ो तो मस्त हो गयो है … अब तो मने चोद ही मारेगो…!” मैं आह भरती हुई बोली।

मेरी भाषा सुन कर उसके शरीर में सनसनी दौड़ गई। उसके जिस्म में जोश भर गया। मेरा ब्लाऊज के बटन खुलने लगे, ब्रा का हुक भी खुल गया। कुछ ही समय में मेरा ऊपर का तन नंगा हो गया। मेरे तने हुए सुन्दर गोल उभार उसके सामने थे। उसके कपड़े मुझे अब नहीं सुहा रहे थे।

“थारी कच्छी भी तो उतार नाक नी… कई सरमाने लागो है !” मैं हंस कर बोली।

“ले मैं तो चड्डी बनियान सभी उतार देता हू… पर तेरा पेटीकोट…” उसने भी नंगी होने की फ़रमाईश कर दी।

“ना रे बाबू जी, मारो भोसड़ो दीस जावेगो…” मैं नंगी होने को उतावली हो रही थी।

“क्या… भोसड़ा…” राज को हंसी आ गई। “साली बड़ी बेशरम है !”

मैंने अपना पेटीकोट उतार दिया। और अपनी चूत राज के सामने उभार दी। राज देखता ही रह गया।

“अब उतारो नी… आपरो लौड़ो रो दर्सन कर लूँ… मोटो और लाम्बो है नी, म्हारो भोसड़ो पसन्द आयो…?” राज को हंसी आ गई, उसने अपने पैन्ट और चड्डी उतार दिये। सच में उसका लण्ड मोटा और लम्बा था। हम दोनों अब पूरे नंगे थे और आपस में लिपटने की कोशिश कर रहे थे। उसका लण्ड मेरी चूत के आस पास ठोकर मार रहा था पर मुख्य द्वार पर से फ़िसल जा रहा था। मैं भी अपनी चूत को लण्ड के निशाने पर ले रही थी कि छेद पर लगते ही भीतर समा लूँ। राज ने मुझे मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे कस लिया। तभी लण्ड छेद से टकरा गया और मेरी चूत खुल गई। दोनों ही निशाने पर थे। मैंने चूत पर जरा सा जोर लगाया और लण्ड ने मेरी चूत चीर कर भीतर झन्डा गाड़ दिया।

“आह, बन्ना सा… घुसेड़ मारियो…यो तो घणों तगड़ो है… कांईं तेल पिला राख्यो है… आह्ह !”

“ले आजा पलंग पर चुदाई करे…”

मैं अपनी चूत हिलाते हुए लण्ड को अन्दर बाहर करने लगी,”बाई रे… भीतर मारो नी… भोसड़ो मार दो बन्ना सा… हाय बाबूजी…”

राज ने मुझे पास ही लण्ड घुसाये ही पलंग पर धीरे से लेटा दिया… और मुझे नीचे दबा डाला,”तू तो बिलकुल नयी लगे है रे… तेरी चूत तो टाईट है…फिर भोसड़ा क्यों कहती है?” उसने वासना भरी नज़र से मुझे देखा।

“इसे कूण चोदे ! साली भुक्खी है लौड़े की… भोसड़ा तो म्हारी भासा है बन्ना सा !” मैं उसके मोटे लण्ड को पाकर निहाल हो गई थी। दीवारों को रगड़ता हुआ लण्ड भीतर समा रहा था। दर्द उठने लगा था। चूत से लण्ड की मोटाई सहन नहीं हो रही थी। राज तो मस्ती में अपना लण्ड अन्दर बाहर करने में लगा था।

“थारा लौड़ा है या लक्कड़… धीरे धीरे चूत मारो जी…”

मेरी भाषा सुनकर वो और जोश में आ गया और मुझे दबा कर लण्ड पूरा जोर लगा कर पेल दिया। मैं चीख उठी… उसने फिर एक और झटका दिया पूरा लण्ड निकाल कर पूरा ही फिर से घुसेड़ मारा…

मैं फिर से चीख उठी… मेरी चीखे शायद उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी, उसने जोर जोर से लण्ड चूत पर पटकना चालू कर दिया… मैं चीखती रही और अब धीरे धीरे मजा आने लगा। मैं सीधी लेट गई और अपनी सांसे ठीक करने लगी। अब मैंने नीचे से हौले हौले कमर हिला कर उसका साथ देना चालू कर दिया। मुझे अब मजा आने लगा था। मोटे लण्ड ने मेरी टाईट चूत को खोल दिया था। अब मैं भी राज से चिपकने लगी थी। मेरे शरीर में रंग भरने लगा था। तबीयत मचल उठी थी। चूत में चिकनाई और खून मिल कर लण्ड को चिकना रास्ता दे रही थी।

“मारो… भोदी ने चोद मारो… हाय रे बन्ना सा… म्हारी तो फ़ाड़ डाली रे…” मैं चिहुंकती हुई सिसकारियाँ भर रही थी। राज के चेहरे पर पसीने की बून्दें छलक आई थी जो मेरे चेहरे पर टपक रही थी। मैं चुदाई से मदहोश होती जा रही थी। ऐसे मस्त और जानदार लण्ड जब जम के चोदे तो समझ लो जन्नत तो दिख ही जायेगी और मजा तो भरपूर आ जायेगा। राज की कमर अब मस्ती से चल रही थी और लण्ड मेरी चूत को भरपूर मजा दे रहा थ। हाय राम कब तक झेलती इस मोटे लौड़े को मेरी जान निकली जा रही थी… और अम्मां रे … मैं तो गई…। मेरा रस छूट गया…

” बन्ना सा, म्हारो तो पाणी निकली गयो रे… थां को पाणी निकाल मारो नी…” मैंने हांफ़ते हुए कहा।

“ये लो मैं तो अब कितनी देर का हूँ मेरी लच्छो रानी… ये ले … मुँह खोल दे रे अपना… मेरा माल चूस ले !” वो लगभग ऐठता हुआ बोला और उसने अपना लण्ड खींच के बाहर निकाल लिया और अपनी मुठ्ठी में भींचता हुआ वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य मेरे चेहरे पर फ़ैल गया। उसका वीर्य निकलता ही रहा… हाय रे इतना ढेर सारा… उसने अपने हाथ से सारा वीर्य मेरे चेहरे पर मल दिया। मुझे पहले तो घिन आ गई पर जब उसने अपनी जीभ से मेरा चेहरा चाटना आरम्भ कर दिया तो मुझे उस पर प्यार उमड़ पड़ा। हम एक दूसरे पर अब निढाल से पड़े थे।

“लच्छी, बहुत सालों से मैंने चुदाई का आनन्द नहीं उठाया था… तूने तो मुझे स्वर्ग का मजा दे दिया रे !”

“हाँ बाबू जी, औरत की कमी तो औरत ही पूर कर सके है… और आपरो लौड़ो तो क्या ही मस्त है !”

“ये लो लच्छी पूरे सौ रुपये और ये सौ रुपये तुम्हें तकलीफ़ हुयी उसके !”

मैं उसकी तरफ़ देखती ही रह गई। सौ की जगह दो सौ रुपये… मैंने राज का एक चुम्मा लिया और शरमा कर मुड़ गई।

“बन्ना सा, सान्झे फ़ेर आंऊगी… थाने फ़ेर खुस कर दूंगी, अबार के रुपया भी को नी लूंगी…” मैंने पीछे मुड़ कर देखा और मुसकरा कर भाग खड़ी हुई।

मेरी चूत उस भारी लण्ड से चुदने के कारण दर्द कर रही थी, शायद सूजन भी आ गई थी। देखा तो चूत लाल हो रही थी। मैंने एन्टीसेप्टिक क्रीम लगा ली। दो सौ रुपये को प्यार से देखा और सम्भाल कर रख दिये। शाम के बर्तन करने मैं ज्योंही पहुंची तो राज ने मुझे मुस्करा कर देखा और बिस्तर पर धकेल दिया।

“ये काम को छोड़, आज मेरी सेवा कर दे… खूब रुपया दूंगा !” यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

“ना बन्ना सा, मारी तो भोसड़ी का कचूमर निकली गयो है, जबरी मत करना जी, अबार को नी चोदो…दर्द करे है जी…फिर पैइसा … ना जी, अब नाहीं !”

“लच्छो रानी… चूत में दर्द है तो गाण्ड मरवा ले… पर ना मत कर…”

“मैंने गाण्ड ज्यादा नहीं मरवाई नहीं है… पर वा जी… आप मार लो म्हारी गाण्ड…”

“चल फिर घोड़ी बन जा…”

मैंने पैसे के लिये तो मना किया था पर मुझे पता था कि वो देगा जरूर…मैं घोड़ी बन गई…और अपना घाघरा ऊँचा कर लिया। मेरी चिकनी गाण्ड की खूबसूरती देख कर उसका लण्ड तन्ना उठा।

“ये नीचे देखो बन्ना सा, मेरी भोसड़ी को तो आपने पकौड़ा बना दिया !” मैंने शिकायत करते हुए कहा। पर गाण्ड के दर्शन होते ही जैसे उसने कुछ नहीं सुना। उसने तेल में अंगुली डाल कर मेरी गाण्ड में घुसा दी और उसे चिकनी करने लगा। फिर लण्ड पर तेल मल कर तैयार हो गया। मेरी गाण्ड चुदने के लिये तैयार थी…

“लच्छो, तैयार हो जा… ये लण्ड गया तेरी गाण्ड में…”

“हाय रे बन्ना सा… धीरे से डालना…”

पर कौन सुनता मेरी, लण्ड का सुपाड़ा अन्दर बैठते ही उसने तो पूर जोर लगा डाला। और तेज धक्का दे कर लण्ड पूरा घुसेड़ मारा।

मेरे मुख से चीख निकल पड़ी…”आईईई …… आप तो मेरी गाण्ड भी फ़ाड़ डालेंगे… राम रे…” मैं लगभग चीख सी उठी।

“चुप बे साली… मुझे तो मजा आ रहा है… बहुत सालों बाद कोई मिली है… मजा तो लेने दे…”

उसका दूसरा बेदर्द धक्का मुझे अन्दर तक हिला गया। हरामजादे का लौड़ा गाण्ड के हिसाब से बहुत ही भारी और मोटा था। उसके दिल में जरा भी रहम नहीं था। तेल की चिकनाई भी ज्यादा काम नहीं कर रही थी। गाण्ड की अन्दर से दीवार शायद, रगड़ से छिल चुकी थी। उसके धक्के बढ़ने लगे। उसके लण्ड पर भी शायद चोट लगने लगी थी। दर्द के मारे आंखों से आंसू निकल पड़े। मैंने होंठ सिल लिये। दर्द बर्दाश्त करने लगी।

लण्ड को पेलते हुए अचानक उसे लगा कि उसने कुछ अधिक क्रूरता दिखा दी है, उसने अपना लण्ड धीरे से बाहर निकाल लिया। मैं निढाल सी एक तरफ़ लुढ़क पड़ी। पर राज का वीर्य तो छूटा ही नहीं था। पर उसका लण्ड बहुत जोर मार रहा था।

मैंने आंखो में आंसू लिये उसे अपने मुख की ओर इशारा किया। उसने अपना लण्ड मेरे मुख में डाल दिया। और धीरे धीरे मेरा मुख चोदने लगा। मैंने भी उसका लण्ड पकड़ कर मुठ मारते हुए चूसना चालू कर दिया।

उसका लण्ड मस्ती में आ गया और फ़ूल उठा। मौका देखते हुए मैंने उसके लण्ड को मुठ्ठी में जोर से कस लिया और उसे घुमा घुमा कर मोड़ने लगी, उसके मुँह में धक्के की रफ़्तार बढ़ गई। मेरे मुख में चोट लगने लगी। उसका लण्ड कभी कभी तो मेरी हलक में भी उतर जाता था। मैं उसका लण्ड दबा दबा कर उसका वीर्य निकालने की भरपूर कोशिश करने लगी। अन्त में उसके लण्ड ने जोर से ऐंठन भरी और मेरी हलक में अपना वीर्य निकाल दिया। मैं कुछ ना कर सकी, वीर्य मेरे गले में उतरता चला गया। उसका लण्ड रह रह कर वीर्य की फ़ुहारे छोड़ता रहा और सारा माल मेरे हलक में सीधे ही उतर गया। राज ने लण्ड मेरे मुख से बाहर निकाल कर झटका और मेरे होठों से बाकी का वीर्य पौंछ डाला। मैंने उसे भी जीभ निकाल कर चाट लिया। अब राज धीरे से मुझ पर लेट गया और प्यार से चूमने लगा। मुझे आत्मा तक ठण्डे प्यार का आभास हुआ। मैंने अपनी आंखें आत्मविभोर हो कर बंद कर ली और अलौकिक आनन्द का मजा लेने लगी। उसके जिस्म का प्यारा सा भार जैसे ही कम हुआ मेरी तन्द्रा टूट गई। मेरी गाण्ड और चूत आज बहुत दर्द कर रही थी। पर जिस्म का आनन्द अपूर्व ही था।

राज ने मुझे पांच सौ रुपये दिये जिसे मैंने मना कर दिया। पर वो नहीं माना… मेरे दिल में इच्छा तो लेने की थी पर जो आनन्द मिला था उसका कोई मोल नहीं था। मैंने चुप से पैसे ले कर रख लिये।

“बन्ना सा, मुझे आपने तो आसमान पर बैठा दिया… पर देखो तो मेरी अगाड़ी और पिछाड़ी का क्या हाल कर दिया है !”

“लच्छी, जाओगी कहां, अब तो आप बन्ना सा री लाडली बन चुकी हो। अब कुछ दिन का आराम… फिर आपकी मरजी हो तो … तन और मन को एक बार नहीं रोज ही स्वर्ग की सैर करायेंगे !”

मैं राज से लिपट गई और उन्हें चूमते हुए बोली,”आप कितने भले हो साब, मैं तो आपकी दासी बन चुकी हूँ… आपरी लाडली को आपणे सीने में छुपा लो, मती छोड़जो मने !”

राज ने मुझे अपने से चिपका लिया और बिस्तर पर सुला कर मुझे प्यार करने लगे… मैं फिर से प्यार में खो गई… और आने वाले दिनों के सपने संजोने लगी… Antarvasna Sex Stories

अलोन गर्ल नंगी कहानी एक ऐसी लड़की की है जो एक अपार्टमेन्ट में अकेली रहती है, सेक्स की शौकीन है, कहानियाँ लिखती है. उसके पड़ोस में 3 लड़कोण पर उसकी नजर है चुदाई के लिए!

दोस्तो, मेरा नाम शनाया उर्फ सन्नो है.

मैं आपको एक ही बिल्डिंग में रहने वाले तीन अलग अलग युवाओं से अपनी चूत गांड की चुदाई की कहानी सुना रही हूँ.

पिछली सेक्स कहानी
अन्तर्वासना की लेखिका चुदी एक लेखक से
में आपने लेखक अनुज के साथ मेरी चुदाई का जायका लिया था.

मेरी अलोन गर्ल नंगी कहानी थोड़ी लंबी है, क्योंकि इसमें एक महीने की पूरी चुदाई की घटनाओं का विस्तार से जिक्र है.

मेरी अनुज से मुलाकात और उसके साथ चुदाई के बाद अब जय की बारी थी.

जय मुझे अच्छा लगता था. मेरी उससे बात होती थी.
वह बातचीत से उतना सीधा-सादा तो नहीं लगता था जितना मैं समझती थी.

अनुज अपने घर गया था, उसको एक हफ्ते बाद वापस आना था.

अनुज के जाने के दो दिन बाद जय के कमरे की लाइट खराब हो गयी थी.
मैंने उस दिन जय को चाय पर बुलाया.

वह आया और बैठ गया.
हम दोनों ने चाय पीते हुए बातें की.
रात होने को थी.

जय कहने लगा- मैं अपने फ्रेंड के यहां चला जाता हूं. कल लाइट ठीक करा लूंगा.
मैंने कहा- जय, यदि चाहो तो तुम यहीं सो सकते हो. मैं तुम्हारे साथ बेड शेयर कर सकती हूं.

उसने झट से हां कर दी.

जैसा कि मैंने बताया था कि जय एक कबड्डी प्लेयर था और काफी मस्त था.
हम लोग खाना खाने लगे.

मैंने उसके खाने में कामशक्ति बढ़ाने वाली गोली मिला दी और उसे खाना खिला दिया.
अब करीब 10 बजने को थे.

हम दोनों बेड पर लेट गए और सोने लगे.
मैं जानबूझकर उसी की तरफ पीठ करके करवट लेकर सो गई थी.

मेरे बदन पर एक मैक्सी थी, जिसे ऊपर करके पूरा बदन देखा जा सकता था.
मैंने पैंटी भी ऐसी पहनी थी कि लंड डालो तो एक तरफ हो जाएगी.

करीब एक घंटा बाद जय को बेचैनी होने लगी थी.
मैं उसको दवाई के असर से तड़पता हुआ महसूस कर रही थी.

मैंने उसके लंड को महसूस किया कि उसके लंड ने मेरी टांगों में दस्तक देनी शुरू कर दी.
मैं बेसुध होने का ड्रामा करती रही.

जय ने मेरी मैक्सी को ऊपर कर दिया.
मैं सोने का नाटक करती रही.

उसने मेरी पैंटी को निकाल दिया.
अब मैं उसका मोटा लंड अपनी टांगों के जोड़ में महसूस करने लगी थी.

तभी उसके थूकने की आवाज आई, मैं समझ गई कि लंड में थूक लगाया जा रहा है.
फिर कुछ ही पल में मेरे चूतड़ों के पास उसके लंड का टोपा महसूस हुआ.

मैंने अपने हाथ को अपने मुँह पर रख लिया और लंड की हरकत को महसूस करने लगी.
जय अपने कड़क लंड को आराम से मेरी गांड में डालने लगा था.

उसका लंड अनुज के लंड बराबर मोटा नहीं था, तब भी काफी कड़क था.

आखिरकार उसने लंड गांड की तरफ से चूत में पेल दिया और मैं अपने मुँह पर हाथ रख कर सोती रही.

मेरा चिल्लाने का मन था लेकिन नहीं चिल्लाई, अपने हाथ से अपनी पूरी आवाज दबा ली.
उसने एक तेज झटके मारा और लंड पेल दिया.
वह किसी वहशी दरिंदे के जैसे मुझे चोदने लगा था.

मैं अब उठने को तैयार हो गई थी.
जब चुदना है ही, तो पूरा मजा लेकर चुदने का सोचा और मैं आआह आआह करके उठ गई.

मैं ड्रामा करती हुई एकदम शॉक्ड आवाज में बोली- जय, ये सब क्या है आआह मम्मी!

जय- शनाया रुको, कुछ नहीं है … मैं बस चैक कर रहा था शनाया.
उसने मुझे अपनी तरफ खींच कर फिर से एक तीव्र झटके के साथ लंड अन्दर डाल दिया.

मैं- आआह जय नहीं … प्लीज यह सब गलत है … आआह जय नहीं आआह.

जय तेज तेज झटके मारते हुए मेरे हाथ पकड़े हुए था और कह रहा था- आह शनाया … बस रुक जाओ थोड़ी देर बस प्लीज शनाया.

मैं- आआह आआह जय आआह जय आआह मम्मी … दर्द हो रहा है आआह.
जय- नहीं शनाया, अब दर्द नहीं होगा बस … थोड़ा रुक जाओ … बस थोड़ी देर और … आह.

यह कह कर वह तेज तेज चोदने लगा.
मैं- आआह जय आई जय ईई जय आराम से करो जय … आराम से करो.

यह सुनकर अब जय ने मेरे हाथ छोड़ दिए और वह मुझे किस करने लगा.

वह मुझे किस करते हुए ही चोद रहा था.
मैं- आआह जय ईईईई आआह.

तभी उसने मेरी चूत से लंड बाहर निकाल लिया.

जय ने अब मेरे कपड़े निकाल दिए और मुझे पूरी नंगी कर दिया.
वह मेरे मम्मों को मसलने लगा और कहने लगा- वाह शनाया क्या माल हो तुम … इतने गोरे गोरे टाइट मम्मे पहली बार देखे हैं.

वह मेरे एक दूध को चूसने लगा और मेरे दोनों पैर फैला कर वापस लंड चूत में डाल दिया.

लंड अन्दर गया और उसके धक्के लगने लगे.
वह तेज रफ्तार में मुझे चोदने लगा था और साथ ही मेरे दोनों दूध बारी बारी से चूसने लगा था.

मैं कराहने लगी थी- आऊच … जय आआह … आऊच जय आआह … इतनी तेज मत चूसो … आह दर्द हो रहा है आईई ईई ऊऊ जय बस करो अब नहीं!

जय मेरी किसी बात को आज मानने वाला नहीं था.
वह तो आज मुझे सड़कछाप रंडी बनाने के मूड में दिख रहा था.

कुछ देर बाद उसने वह उठाया और लंड जबरदस्ती मेरे मुँह में डाल कर बोला- आह लो चूस लो इसको … चूसो न यार!
मैं क्या करती … मुझे तो लंड चाहिए ही था. मैं भी उसका लंड चूसने लगी.

वह अपने लंड को मेरे मम्मों के बीच में फंसा कर मेरे दोनों दूध दबाते हुए मसलने लगा.
यह सब उसने पोर्न वीडियो के जैसे किया था जैसे ब्लू फिल्म में पोर्नस्टार करते हैं.

फिर उसने मुझे खड़ा कर दिया और मेरा एक पैर ऊपर उठाकर लंड को मेरी चूत में लगा कर वापस चोदने लगा.
वह दवा के प्रभाव में था तो जल्दी झड़ने का मतलब ही नहीं था.

कुछ देर चुदाई करने के बाद उसने मुझे बेड पर पटका और ताबड़तोड़ चोदने लगा.
उसने अपनी चुदाई की स्पीड तेज कर दी थी.

मैं भी उत्तेजित हो गई थी और जय को अपनी बांहों में भर कर उससे अपने जिस्म को कुचलवा रही थी.

कराब आधा घंटा तक जबरदस्त चुदाई के बाद मैं समझ गई थी कि अब वह झड़ने वाला है.
वह ‘आह लव यू बेबी.’ कहते कहते झड़ने लगा और पूरा वीर्य झाड़ कर वह मेरे ऊपर ढह गया.

मैं उसकी पीठ को सहलाने लगी.
लेकिन मैं अभी भी झड़ी नहीं थी.

मैं बोली- जय थोड़ी और दम साध कर मुझे चोद दो. मैं भी झड़ना चाहती हूँ.

वह मुझसे कुछ मिनट मांगने लगा लेकिन मैं इतना नहीं रुक सकती थी.

कुछ मिनट बाद मैंने जय को लिटाया और उसके ऊपर आकर उसका लंड चूसने लगी.
लंड चूसने से लंड खड़ा हो गया.

मैं लपक कर लंड पर बैठ गई.
उसका लंड अब मेरी चूत में समा गया था.
मैं उसके लौड़े पर उछलने लगी.

मेरे उछलते समय वह मेरे दोनों दूध पकड़ कर मसलने लगा और अपना सिर ऊपर करके एक एक करके मेरे दोनों दूध चूसने लगा.

मैं करीब दस मिनट उसके लंड पर उछलती रही.
फिर मैं भी टूटने की कगार पर आने लगी.

मेरे मुँह से निकलने लगा था- आह जय मैं आ रही हूँ … आह जय.

वह तेज तेज चुदाई करने लगा.

मैं कट कर उसके सीने पर गिर गई और मेरे शरीर में ऐंठन सी होने लगी थी.
उधर जय नहीं रुका.
वह मुझे अपने सीने से दबा कर चोदता रहा.
फिर वह भी झड़ गया.

ऐसे ही मैं उसके ऊपर चढ़ी हुई सोने लगी.
दस मिनट बाद जय ने मुझे उठाया और बाथरूम में ले जाकर मेरी चूत साफ करने लगा.
वह अपने लंड को भी साफ करने लगा.

मैं बहुत थक चुकी थी.
जय मुझे उठा कर अन्दर लाया और बेड पर लिटा दिया.
मेरे साथ में वह भी लेट गया.

मैं उसकी बांहों में सुकून की नींद सो गई.
सुबह करीब 9 बजे मेरी नींद खुली.

जय का लंड उस वक्त मेरी चूत में था.
मेरा एक दूध उसके मुँह में था और जय सो रहा था.

मैं जैसे ही थोड़ी सी हिली तो मुझे दर्द हुआ.

मैंने जय को जगाया और उससे पूछा- जय ये कब से डाल रखा है तुमने?

जय बोला- अरे यार मेरी सुबह 5 बजे नींद खुली. तुम एसी की ठंडक से कुछ हिल सी रही थीं, तब मैंने तुम्हें चादर उढ़ाई और अपने से सटा लिया. तभी लंड खड़ा हो गया, तो मैंने अन्दर डाल दिया और मैं लिपट कर सो गया. तुमने करवट लेकर फिर से लंड डलवा लिया और मैंने तुम्हारे एक दूध को मुँह में लगा लिया. फिर हम दोनों सो गए थे. तुम नींद में थीं, यह तबकी बात है.

फिर मैंने उसे प्यार से अपने आप से चिपकाया और लेटी रही.
कुछ ही देर में हम दोनों पुनः सो गए.

फिर हम लोग 12 बजे उठे और जय अपने घर चला गया.

मैंने मेल से अपने ऑफिस में आज का अपना ऑफ डाल दिया और कुछ काम करके सो गई.

सारे दिन मैं सोती रही और रात को जब भूख लगी, तब उठी और डिनर ऑर्डर करके खाना मँगवा कर खाया.

अगले दिन मैं ऑफिस गई.

जय के साथ अलोन गर्ल नंगी कहानी इतनी ही है.

अब तक ये दोनों लड़के मेरी मुट्ठी में आ चुके थे.

तब बारी थी सोहन की जो हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ा भी था.
उसे सैट करना मामूली सा काम था.

सोहन शरीर से सबसे अच्छा था. वह एक जिम में ट्रेनर था.
मैंने उसके कहने पर उसकी जिम जॉइन की.
वह मुझे जिम में सिखाने लगा था.

कुल तीन दिन जिम करने के बाद चौथे दिन मेरा पैर फिसल गया.
मैं जिम में गिर पड़ी.

उस दिन सोहन अपनी कार में मुझे घर लाया.
मैं ठीक थी … लेकिन मैं फिर से जिम नहीं जाना चाहती थी क्योंकि मेरे फिगर और मम्मों की वजह से सब मुझे ही देखते थे.

मैंने सोहन से कहा- कमर में दर्द है, मैं अब जिम नहीं जाऊंगी.
सोहन मेरा अच्छा फ्रेंड बन चुका था.

वह बोला- कमर के दर्द को मैं चुटकियों में ठीक कर दूंगा. लेकिन तुम जिम जाना बन्द नहीं करोगी.
मैंने कहा- मैं वहां नहीं जाऊंगी.

उसने कहा- ओके मैं कमर पर मालिश कर दूँगा, फिर तुम घर पर ही एक्सरसाइज करना. मैं तुम्हें यहीं सिखाने आ जाया करूँगा!
इस तरह से वह मेरे घर आने लगा.

मैं सोहन के साथ में मजे लेने की जुगत में थी.
उस दिन मैंने अचानक दर्द होने का नाटक किया तो वह बोला- मालिश करने वाली लड़की तो कल आएगी.

मैंने कहा- और आज मैं दर्द से मरी जा रही हूँ, उसका क्या?
वह बोला- तो मालिश मैं कर देता हूं. मुझे मसाज आयल दो.

मैं कहा- ओके मसाज आयल उधर से ले लो.
सोहन आयल लाकर बोला- शनाया, तुम्हें उल्टा लेटना पड़ेगा और अपने कपड़े भी निकाल दो.

मैं अन्दर बिल्कुल पतली ब्रा और पतली बद्दी की पैंटी पहनी हुई थी.

मैंने कहा- सॉरी सोहन, मैंने अन्दर सही कपड़े नहीं पहने हैं.
वह बोला- ठीक है, तो मसाज बाद में करा लेना.
मैं बोली- अरे यार सोहन, दर्द तो अभी है … तुम मसाज कर दो.

मैंने कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गई.
मेरी डोरी वाली पैंटी में मेरे दोनों चूतड़ पूरे नंगे थे और उसके सामने पूरे पूरे साफ खुले हुए थे.
बस कमर में एक बद्दी सी थी जिससे चूत एक त्रिभुजाकार कपड़े से ढकी हुई थी.

सोहन- शनाया में नहीं कर सकता, मेरी एक कमजोरी है.
मैं बोली- क्या कमजोरी है?

वह बोला- यह सब देखने से मेरा मेन पॉइंट जाग जाता है.
मैं अपनी हंसी दबाती हुई बोली- सोहन, यह सबके साथ होता है यार … मुझे दर्द हो रहा है. तुम मसाज करो यार.

फिर सोहन ने तेल डाला और मालिश करने लगा.
वह पहले कमर पर अपने हाथ फेर रहा था.

मैं आराम से उसका हाथ महसूस कर रही थी और आह आह कर रही थी.
वह बोला- क्या हुआ?

मैंने कहा- तुम्हारे हाथ फेरने से दर्द हो रहा है सोहन.
सोहन मेरे सिर की तरफ आ गया. मैंने देखा कि उसका लंड सच में खड़ा हो चुका था.

अब मैंने जानबूझ कर हाथ आगे रख दिया. वह टेबल से टिका हुआ था.
मैं उसके लंड को महसूस कर रही थी.

सोहन- अरे सॉरी शनाया!
मैं उससे बोली- कोई बात नहीं सोहन … मेरा दर्द अब सच में कम हो गया है.

उसने भी जानबूझ कर अपने लंड को चड्डी से बाहर निकाल दिया.
मैंने जब उसका लंड देखा, तो मुझे उसका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा दिखाई दिया.

उसी समय उसने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
मैं बोली- अरे सोहन यह क्या कर रहे हो?

सोहन ने मेरे मुँह को पकड़ा और मेरे साथ जबरदस्ती करता हुआ मेरे ऊपर चढ़ गया.
उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी और हड़बड़ाहट में अपना लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया.

मैं- आह सोहन नहीं … आआह मम्मी मर गई … आह सोहन नहीं.
वह- आह शनाया आई लव यू … शनाया तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और तुम्हारा यह बदन मुझे बहुत अच्छा लगा है शनाया … प्लीज मना मत करना.

यह कहते हुए उसने अपने मोटे लंड को और अन्दर दबा दिया.
मैं दर्द से भर उठी और नकली गुस्से में चीखी- आह सोहन … इसको बाहर निकालो पहले … आआह मुझे दर्द हो रहा है.

वह मुझे किस करने लगा और उसने मेरी ब्रा को निकाल दिया.
वह दांत पीसते हुए मेरे दूध को मसल कर बोला- शनाया, यदि तुमने हां नहीं किया, तो मुझे जबरदस्ती करनी पड़ेगी.

मैं- आह सोहन छोड़ो मुझे प्लीज … आह सोहन दर्द हो रहा है उम उम्म.
वह नहीं रुका और मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा.

अब मैं भी मन बना चुकी थी कि बहुत हुआ ड्रामा … अब तक उसके लंड से मुझे चैन भी मिलने लगा था.

मैंने उसको पकड़ लिया और किस करने लगी.
मैं- सोहन प्लीज अब जबरदस्ती मत करो न … मैं मना नहीं कर रही हूँ.

सोहन का लंड मोटा था इसलिए उसका मोटा वाला हिस्सा दर्द दे चुका था, अब उसका लंड मजा देने लगा था.

मेरे कहने पर सोहन ने मुझे सीधा लिटा दिया है और नीचे आकर उसने मेरे दोनों पैर फैला दिए.
फिर वह मेरी चूत पर जीभ फेरने लगा और पागलों की तरह चूत के दाने को चूसने लगा.

मेरी कामुक सिसकारियों से कमरे में आवाजें गूँजने लगी थीं.

सोहन- आआह शनाया क्या मस्त चूत है तेरी … मुआह … मुझे चूसने दो मुआह आआह.
मैं- आआह सोहन चूसो … और चूसो सोहन आह.

वह उठ गया और लंड हिलाने लगा.
मैं समझ गई कि वह लंड चुसवाना चाहता है.

तभी वह मेरे चेहरे के पास आया और अपने मूसल लंड को मेरे होंठों पर रख कर होंठों को मसलने लगा.
बड़ी मादक खुशबू आ रही थी. मैंने जीभ निकाल कर लंड के सुपारे को चाट लिया.

उसकी आह निकल गई और मैं उसके लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी.

अब सोहन भी मस्त हो गया था.
वह कहने लगा- आह पूरा मुँह खोलो बेबी … अन्दर तक लेकर चूसो इसको!

उसने मेरे गालों को दबाया और मुँह में लंड अन्दर ढकेल दिया. मैं उसके लंड को चूसने लगी.
वह पूरा लंड अन्दर डालने लगा था और झटके दे रहा था.

मैं दस मिनट तक उसके लंड को चूसती रही.
उसके बाद वह मुझे उठा कर बोला- अब बोलो बेबी, कैसे चुदवाना है?

मैं बोली- तुम्हारी बॉडी इतनी मस्त है, क्या मुझे उठा सकते हो?
सोहन- हां, दिन रात उठाए रह सकता हूँ यार!

मैं- तो हाथों से उठा लो और झूला झुला दो … मुझे ऐसे चुदवाना पसन्द है!
सोहन- आ जाओ रानी … लंड का झूला झुला देता हूँ.

उसने मुझे उठा लिया. मेरे पैरों को अपने हाथों में फंसा कर मेरे पैर ऊपर की ओर कर दिए.
दोस्तो मैं आप सभी को यदि इस पोजीशन को फ़ोटो से दिखाऊंगी, तो आप झट से समझ जाओगे.

वह मुझे टांग कर बोला- बेबी, लंड पकड़ कर अन्दर डालो.
‘मैं नहीं ले पाऊंगी सोहन, तुम ही डाल दो.’

वह बिना पकड़े डालने लगा.
उसका लंड मेरी गांड में जाने लगा.

‘आआह उम्म सोहन … उधर नहीं साले … मादरचोद उधर नहीं … वह गांड का छेद है.’
सोहन- अरे बेबी सॉरी, अब सही रखा लंड!

मैं- हां अब ठीक है सोहन … सॉरी मैंने गुस्से और दर्द में गाली दे दी थी, बुरा मत मानना!
सोहन- नहीं बेबी, ऐसी बात नहीं है.

सोहन ने लंड चूत में पेल दिया और मैं आआह सोहन आआह करने लगी.
वह जोर जोर से झटके देने लगा.

मैं- आआह मां आआह ईई.
वह लगा रहा.
इधर मैं चिल्लाती रही.

Fucking started and I kept swinging his penis for about 10 minutes and kept screaming.

कुछ देर बाद वह लेट गया और मैं उसके ऊपर चढ़ गई.
फिर से चुदाई होने लगी.

सोहन मेरी चुदाई करीब 4 घण्टे तक बार बार करता रहा.
मैं और सोहन दोनों ही पस्त हो गए थे और नंगे ही सो गए.

दोस्तो, अभी आपको जय और सोहन के साथ चुदाई का मजा पढ़ने को मिला है.
असली मजा तो आगे की सेक्स कहानी में आने वाला है.

इस चुदाई के बाद मैंने इन तीनों के साथ एक साथ चुदवाने का मजा लिया था.

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