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Sexy story
Antarvasna

मैं एक बार लिफ्ट लेने के Antarvasna लिए खड़ा था, मैंने कई लोगों से लिफ्ट माँगी, पर मिली नहीं। तो मैं एक गाना गुनगुनाते हुए आगे बढ़ चला, तभी थोड़ी देर में एक स्कूटी से एक बेहद स्मार्ट लड़के ने मुझे लिफ्ट दी। मैं बैठ गया, दोनों में बातें होने लगीं।

उसने पूछा कहाँ जाना है, मैंने कहा कि मुझे किसी शराब की दुकान तक जाना है, उसने पूछा कि आप कौन सी ब्राँड पीते हैं? और फिर ब्राँड को लेकर हमारे बीच बातें होने लगीं। तभी मैंने देखा कि वो एक हाथ से स्कूटी चला रहा है, मैंने सोचा, कि उसका एक हाथ किधर है?

कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि उसका दूसरा हाथ मेरे लण्ड को पकड़ने की कोशिश कर रहा था, जब वो छू नहीं पाया तो वो बोला- ठंड लग रही है, थोड़ा और आगे हो जाओ। मैं उसके इरादे समझ चुका था, मैं उसके बेहद नज़दीक सटकर बैठ गया, तभी वो मेरे पैन्ट की चेन खोलने की कोशिश करने लगा, थोड़ी ही देर में वह कामयाब भी हो गया। उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया और उत्तेजित करने वाली बातें करने लगा।

उसने पूछा- तुमने कभी किसी को चोदा है या नहीं।

मैंने उत्तर दिया- अभी तक तो नहीं किया।
‘क्या तुम चोदना चाहोगे?’
‘क्यों नहीं!’
‘मेरी गाण्ड मारना पसन्द करोगे?’ उसने प्रश्न किया।

‘आज तक तो नहीं मारी!’ मैंने उत्तर दिया।

‘कोई बात नहीं!’ कहकर उसने मेरा लौड़ा पकड़ लिया

मैंने कहा- यहाँ बहुत से लोग आ-जा रहे हैं, कहीं दूर चलते हैं!

तो उसने एक सुनसान इलाके में ले जाकर गाड़ी रोकी, मैंने कहा- मैं पेशाब करूँगा!
और मैं गाड़ी से उतरकर ज्यों ही पेशाब करने लगा, तब तक वो भी आ गया और मेरा लौड़ा देखकर वो बोला- कितना लम्बा है!
मैं आपको बताना भूल गया कि मेरा लण्ड 9 इन्च लंबा और 3 इन्च मोटा है।

तभी उसने पूछा- क्या तुम अकेले रहते हो?
मैंने उत्तर दिया- हाँ!
‘अगर तुम चाहो तो हम वहीं चलें?’ उसने योजना बताई।
‘अच्छा विचार है!’ मैंने भी हामी भर दी.

हम दोनों दारू लेकर कमरे में चले आए, और दारू पीने लगे। उसने दारू पीते-पीते ही मेरी पैन्ट की ज़िप खोल दी और लण्ड पकड़ लिया और दारू पीना छोड़कर मेरा लौड़ा चूसने लगा।
थोड़ी देर में मैं भी जोश में आ गया। मेरे मन की बात समझते हुए उसने अपनी पैन्ट उतार दी।
उसकी गाण्ड देखकर मेरा लण्ड उसकी गाण्ड में जाने के लिए बेक़रार हो गया।
मैं उसे किस करते हुए, उसकी गाण्ड में ऊँगली करने लगा। उसके बाद मैं उसकी गाण्ड मारने लगा। मैंने 20-25 मिनट तक उसकी गाण्ड मारी।

जब मैं उसकी गाण्ड मार रहा था तो वह बहुत आवाज़ें कर रहा था और आआहहहह सीसीसस्स्स्सी की आवाज़ें उसके मुँह से आ रहीं थीं। उस दिन बहुत मज़ा आया।
मैंने पूछा कि ‘चूत का इन्तज़ाम नहीं कर सकते हो?’ तो उसने कहा कि ‘इन्तज़ाम हो सकता है। मेरी बीवी है जो मुझसे खुश नहीं रहती है, मैं उसे खुश नहीं रख सकता हूँ। तुम दोनों का काम कर सकते हो। मेरी गाण्ड और बीवी की चूत चोदते रहना।’

उस दिन के बाद कई बार उसके घर गया, पहले उसे खुश करता था, तब वो मुझे उसकी बीवी के पास जाने देता था। मैंने उसकी बीवी को कई बार चोदा, उसका भी दिल खुश हो गया। तो बाद में वह भी बहुतों बार मेरे कमरे पर आई और मैंने उसकी जमकर ठुकाई की।

कुछ महीनों के बाद मैं भोपाल चला गया, वो दोनों भी कहीं चले गए, वैसे मैं कई बार पहले सेक्स कर चुका हूँ, पर गाण्ड मारने में मुझे बहुत मज़ा आता है। Antarvasna

हाय मित्रो!Antarvasna

आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। Antarvasna हमारे पड़ोस में रूपा आंटी रहने आई थी। वैसे तो वो हमारी दूर की रिश्तेदार थी इसलिए जान-पहचान बनाने की जरूरत नहीं थी।
उनकी लड़की थी गुड्डी, बड़े बड़े स्तनों वाली, जांघें भी गोरी गोरी और थोड़ी कामुक थी लेकिन सीधी होने का दिखावा करती थी। मैं थोड़ा इश्कबाज़ लड़का हूँ इसलिए मेरी उससे जमती थी।

एक बार गुड्डी मुझे सब्जी मण्डी में मिल गई, बोली- बिपिन मेरे पास बहुत वज़न है, मुझे अपनी मोटरसाईकिल पर बिठा लो!
मैंने कहा- चलो!

वो मेरे पीछे बैठ गई। बाज़ार में भीड़ के कारण मोटरसाईकिल चलाते समय मैंने बहुत बार ब्रेक लगाए तो वो मेरे ऊपर गिरती थी। दो तीन बार थोड़ा शरमाई पर बाद में वो सेट हो गई और बोली- एक बार तुम्हारे घर पर मिलते हैं।

दस दिन बाद वो दिन आ ही गया। मेरे घर पे कोई नहीं था। मैंने उसको सुबह ही इशारा कर दिया था। फ़िर गुड्डी सबह नौ बजे आई, बोली- स्कूल जाने के बहाने नज़र छुपा के निकली हूँ।
मैंने कहा- अन्दर आ जा! और उसे बेडरूम में छुपा दिया।

मैंने सारे दरवाज़े बंद कर लिए और बेडरूम में गया तो मेरे से रहा नहीं गया। मैंने उसको जोर से अपनी बाहों में ले लिया।
मैंने कहा- सलवार उतारो!
वो बोली- ऐसे नहीं!

इतना बोल कर वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड सहलाने लगी, फिर मुंह में ले लिया खूब रगड़ा उसने अपने मुंह से। और धीरे धीरे मेरे हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पे ले आई। मेरे से रहा नहीं गया। मैंने अपनी पैन्ट और टी-शर्ट उतार दी, मैं पूरी तरह नंगा हो गया और उसको भी नंगा कर दिया।
फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसे बहुत मजा आ रहा था ‘अह्ह्ह…अहह हह…अह हह…अह ह’ करने लगी और उसके नंगे बदन पे मेरे हाथ फिरने लगे।

फिर 69 पोसिशन में सेक्स करते रहे तो वो बोली- सोफे पर बैठ जाओ।
मैं बैठ गया तो वो फ़्रेंच स्टाईल में मेरा लण्ड चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लौड़ा लोहे जैसा हो गया।
फ़िर वो धीरे से मेरे कान में बोली-मुझे उठा कर बिस्तर पर पटक दे!

मैंने वैसा ही किया, उसके दोनों पैर मैंने फ़ैला लिए और चोदने लगा।
मेरे हर एक धक्के पर वो सिसकती थी।

फ़िर अचानक गुड्डी बोली- उतर जाओ!
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं!
और मैं उतर गया।

मेरे उतरने के बाद उसने अपनी गाण्ड मेरे लण्ड के सामने रख दी। मैं समझ गया और धीरे से उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पिरो दिया।

शुरू में डालते हुए उसको दर्द हुआ और चिल्ला उठी- ओ… माँ .. ओह… धीरे यार!
बाद में पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में घुसा दिया और वो चिल्लाती हुई बोलती जा रही थी- बिपिन! फ़ाड़ दे मेरी गाण्ड को यार! बहुत मजा आ रहा है य्यार!

यह सारा कार्यक्रम दो बार चला। फिर मैंने घड़ी में देखा तो दोपहर के 2 बजने वाले थे, मैंने कहा कुछ खा लिया जाए. मैं रसोई में गया, गुड्डी भी मेरे पीछे पीछे आ गई फिर उसने बहुत सारा मक्खन, जैम और टोमाटो सॉस अपनी चूत और बूब्स पे लगाया वो सारा मैंने चाट लिया और जो मक्खन, जैम और टोमाटो सॉस मैंने अपने लण्ड पे लगाया वो उसने पूरा चूस लिया। फिर चद्दर बिछाके मैंने उसको रसोई में चोदा और चोदते समय बोली तू मुझे चोदते चोदते बिस्तर तक लेजा और मैंने वही किया मेरे लण्ड को उसकी चूत से अलग किए बिना चोदते चोदते बिस्तर तक ले गया और खूब चोदा।

तभी घर की घंटी बजी। मैंने देखा तो रूपा आंटी दरवाजे पे खड़ी थी।
मैंने जल्दी से गुड्डी को कपड़े रखने वाली अलमारी में छुपा दिया। दरवाजा खोला तो आंटी सामने खड़ी थी, बोली- बेटा! तेरी मम्मी कहाँ है?
मैंने कहा- सब जयपुर गए हुए हैं, मैं अकेला ही हूँ।
बोली- कल मैंने तुम्हारी मम्मी के कमरे में दो साड़ियाँ रखी थी, वो लेने आई हूँ।
मैंने कहा- ले लो!

रूपा आंटी बहुत ही हट्टी कट्टी थी जबकि अंकल दुबले और पतले से थे। मैं अपने कमरे में गया और गुड्डी को कहा- मैं अपना कमरा बाहर से बंद कर देता हूँ और आंटी जब जायेगी तब खोलूँगा।
गुड्डी बोली- ठीक है!

और मैं मेरी मम्मी के कमरे में गया जहाँ रूपा आंटी साड़ियाँ ढूंढ रही थी। साड़ियाँ मिलने पर आंटी मुझे कहने लगी- इनमें से मुझ पर कौन सी अच्छी लगेगी?
मैं तो इश्कबाज था ही, मैंने कहा- आंटी आप तो अप्सरा हैं, आप पर तो कोई भी साड़ी अच्छी लगेगी।
वो भी मेरे इशारे समझ गई, बोली- ठीक है मैं एक एक पहन के दिखाती हूँ! तू बता देना कौन सी अच्छी लगती है।
मैंने कहा- आंटी आज फ्री हो क्या?
हाँ, गुड्डी सुबह से स्कूल गई है और तुम्हारे अंकल ऑफिस के ऑडिट में हैं देर से आयेंगे! कहते हुए वो साड़ी बदलने गई। जैसे ही वो साड़ी बदल के बाहर निकली उसका पल्लू गिर गया और बड़े बड़े स्तन दिखने लगे। मेरा लण्ड खड़ा हो गया और नाईट सूट में से लण्ड बाहर उभर कर दिखने लगा।

आंटी समझ गई और वो शीशे के सामने खड़ी हो गई। मैंने पीछे से आंटी की कमर पकड़ी। वो कुछ नहीं बोली। बस इतना बोली- दरवाजा ठीक से बंद किया है न?
और मुझे लगा ग्रीन सिग्नल मिल गया है, मैं टूट पड़ा आंटी के ऊपर। बोली- धीरे धीरे चोद मुझे!

मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए। मैंने उनकी चूत में लण्ड डालना चाहा, वो बोली- रुक जा यार! और मेरा लण्ड पकड़ के मुंह में ले लिया खूब जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। थोड़ी देर में बोली- मेरे से रहा नहीं जाता, प्लीज़, मुझे पलंग में पटक कर चोद!प्लीज़ चोद! बिपिन प्लीज़ चोद! यार चूत में बहुत खुजली हो रही है!

मैंने कहा- आंटी मैं भी सीधा लण्ड आपकी चूत में नहीं डालूँगा!
तो बोली- क्या करेगा?
मैंने कहा- आप पलंग के कोने पे पैर फैला के रखो, मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है!
वो खुश हो गई- यार! पहली बार कोई मेरी चूत चाटेगा! चाट ले…जल्दी से चाट ….चाट!

करीब आधे घंटे तक मैंने उसकी चूत और उसने मेरा लण्ड चाटा। फ़िर बोली- तुम सामने सोफे पे बैठ जाओ। मैं सोफे पे बैठ गया और वो मेरे ऊपर इंग्लिश स्टाइल में बैठ गई और मेरा लण्ड अपनी चूत में डालकर पागलों की तरह गोद में कूद रही थी। मेरा ध्यान सामने लण्ड शेप में पड़ी हुई मोमबत्ती पर था और मेरी उंगली आंटी की गाण्ड में।
मुझे मोमबत्ती देखते हुए देख के बोली- जो तू सोच रहा है, वो कर दे!
और मैंने मोमबत्ती लेकर आंटी की गांड में घुसेड दी। आधे घंटे तक वो मेरे ऊपर सोफे में रही और मोमबत्ती उनकी गांड में।
फिर बोली- चलो बिस्तर पे चलते हैं!

और वो उसकी गांड मेरे लण्ड के सामने रख कर लेट गई। मैंने भी उनकी चूत में से हाथ डालकर चिकनाई को अपने लण्ड पे लगाया और उनकी गांड में घुसेड़ दिया। अब वो बहुत चिल्लाई- ओह माँ…ओह माँ…ओह…ओह…खूब मजा आ रहा है!
मेरा हाथ उसकी चूत में था और लण्ड उसकी गांड में!
तब वो बोली- मोमबत्ती कहाँ है?

मैं समझ गया, मैंने मोमबत्ती लेकर उनकी चूत में डाल दी और जोर से उनके बूब्स खींचने लगा। 2 घंटे तक उसको मैंने प्यार से चोदा।
बाद में बोली- अब मैं थक गई हूँ, तू अपना वीर्य मेरे मुंह में डाल दे!
और फिर मैंने लण्ड को आंटी के मुंह में डाल दिया लेकिन झड़ने का नम नहीं ले रहा था। मैंने आंटी से कहा- अपने बूब्स मेरे हाथ में दो, दूध निकलना है!
तो वो हंस के बोली- दूध निकलना तेरा काम नहीं!

हमने शर्त लगाई कि पहले मेरा वीर्य निकलता है या आंटी के बूब्स में से दूध (पानी)
फिर मैंने शुरू किया उनके स्तनों को मथना! 20 मिनट हुए और अ आ आ अआः…आ अ आ आह…अह हह ह्ह्छ मैं झड़ गया और साथ में ही आंटी के बूब्स में से पानी निकल गया। मैंने पूरा वीर्य आंटी के मुंह में डाल दिया।
अब वो भी थक गई और मैं भी थक गया।
आंटी बहुत खुश होते हुए मेरे लौड़े पे हाथ रखके बोली- कभी भी मेरी याद आए तो मुझे बुला लेना! मैं तुम्हारे साथ किया हुआ सेक्स कभी नहीं भूलूंगी।

वो अपने घर चली गई और मैं दरवाजा बंद करके अपने कमरे मैं आया तो देखा गुड्डी तो सो गई है, खर्राटे लेने लगी है। मैं रसोई में गया, 2 ग्लास दूध पीकर वापस आया। गुड्डी के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था और वो पैर फैलाये बिस्तर पे पड़ी थी।
मैं भी उसकी चूत को चाटने लगा और गुड्डी गरम हो गई। आधी नींद में ही कहने लगी- तुम कहाँ चले गए थे यार मुझे अकेली छोड़ कर!
मैं ये नहीं कह सका कि मैं तेरी माँ को चोद रहा था।

फिर वो पुराने रंग में आ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। बाद में बिस्तर पर लेट के दोनों पैर खोल दिए और मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया और बहुत चोदा।
फिर मैंने पूछा कि तेरे बूब्स में से दूध निकलेगा?
तो वो बोली- नहीं! अभी तो पानी निकलेगा!
और मैंने उसके बूब्स खींचना शुरू किया, वो मेरा लण्ड मुंह में ले रही थी। 20 मिनट तक ये चलता रहा और एक जोर से झटके ने मेरा सारा वीर्य गुड्डी के मुंह में डाल दिया और गुड्डी के स्तन से पानी निकल गया।

शाम के 6 बज चुके थे। गुड्डी ने मुझे किस करके कहा- आज का दिन मुझे पूरी जिन्दगी याद रहेगा।
मैंने हंसके गुड्डी से कहा- तुझे याद रहे न रहे पर मुझे आज का दिन सात जन्मों तक याद रहेगा!
पाठकों को मेरा ढेर सारा प्यार!
यह मेरी पहली असली कहानी है पसंद आई या नहीं, जवाब देना! Antarvasna

Antarvasna stories

मेरा नाम अलीना है और मेरा ताल्लुक Antarvasna पाकिस्तान के खूबसूरत शहर लाहौर से है। ये वाक्या जो मैं आप लोगों को सुनाने जा रही हूं

मेरी ज़िंदगी का सब से हसीन और एहम वाक्या है जो आज से तकरीबन एक साल पहले पेश आया।

पहले मैं आप को अपनी और अपनी फ़ैमिली के बारे में बता देती हूं। हम तीन बहन भाई हैं बड़े भाई की उमर २४ है और छोटे की उमर २२ है दोनो एक छोटी सी वर्क शॉप चलाते हैं और हमारे अब्बु दुबई में रहते हैं किसी शेख के घर ड्राइवर हैं.

और हमारी अम्मी हमारे साथ रहती हैं। मेरी उमर १९ साल है रंग सांवला और फ़ीगर ३६ डी २८ ३७ है मेरा जिस्म काफ़ी भरा भरा है और मैने ऍफ़.ए किया है

मुझको घर के काम काज करने और हर वक्त बन संवेर कर रहने का बहुत शौक है मैं टाइट शलवार कमीज़ जो जिस्म से चिपकी होती है पहनती हूं और हाथों में चूड़ियां पांव में पायल और नाक में हमेशा एक लोंग पहनती हूं जो मेरे सांवले तीखे चेहरे पर बहुत सजता है ये।

मेरी ज़िंदगी के ये हसीन वाक्या तब हुआ जब हमारी अम्मी की तरफ़ के एक दूर के रिलेटिव की डेथ हो गई और अम्मी को मुल्तान जाना पड़ा. हम बहन भाई नहीं गये क्यों कि भाई अपने बिजिनेस में मसरूफ़ थे. और मैं गरमी की वजह से घर से बाहर जाना पसंद नहीं करती।
तो अम्मी ने कहा के भाईयों के आराम और खाने का ख्याल रखना और चली गई।

उस दिन बहुत गरमी थी मैने घर की सफ़ाई की खाना तैयार किया और फिर अपना रेड कलर का सूती सूट निकाला और नहा कर पहन लिया.
शलवार कमीज़ से मेरा भरा भरा सांवल बदन बाहर निकला जा रहा था और कमीज़ का गला खुला था जिस में से मेरे मम्मो की लाइन नज़र आ रही थी और मैं ने नीचे ब्रा और पैंटी नही पहनी थी.

मैं घर में हूं तू ब्रा पैंटी पहनती और न ही दुपट्टा औढ़ती हूं. हालांकि अम्मा कहती हैं के जवान भाई हैं घर में उनके सामने एस तरह न जाया करो. लेकिन मै नही मानती. लेकिन फिर भी अम्मी की वजह से कभी कभी दुपट्टा ले लेती हूं.

लेकिन आज तो अम्मी नहीं थीं मैंने हल्का सा मेक अप किया नाक में लोंग डाला और हाथों में चूड़ियां पहनी और पांव में पायल और बैठ कर टी वी देखने लगी

शाम को दोनो भाई घर आये तो मैं ने दरवाज़ा खोला तो महसूस किया के उन दोनो की नज़र मेरी मम्मो पर थी जो कमीज़ से बाहर हुये जा रहे थे और निप्पल खड़े हो गये थे।

दोनो अंदर आ गये छोटा भाई अंदर आते समय अपना कंधा मेरे बूब्स के साथ रगड़ दिया तो मेरे जिस्म में एक करंट दौड़ गयी लेकिन मैं ने इजी ज़ाहिर किया जैसे मैने महसूस नहीं किया।

फिर वो दोनो नहा कर खाने के लिये आये उन दोनो ने गरमी की वजह से सिर्फ़ बनियान और धोती पहनी हुई थी.

मैने खाना उनके आगे रखा तो मेरे मम्मो की क्लीवेज साफ़ नज़र आ रही थी मैने देखा के उन दोनो का लंड खड़े हो गये हैं मैं भी उनके साथ खाना खाने बैठ गयी वो खाना कम खा रहे थे और मुझ को ज़्यादा देख रहे थे और बातें भी कर रहे थे इधर उधर की।

फिर खाने के बाद मैने बरतन समेटे और उनको धोने के लिये किचन में ले आयी.

में बरतन धो रही थी कि बड़े भाई किचन में आये और मेरे पीछे आकर खड़े हो गये और अपने लंड को मेरी गांड पर लगा कर बोले- बरतन धो कर आओ मूवी देखेंगे.

मैं उनके लंड को अपनी गांड पर महसूस कर रही थी और मुझको मज़ा आ रहा था मैने गांड को ज़रा पीछे किया ताकि उनका लंड और मेरी गांड से दब जाये और कहा के आप जायें मैं चाय लेकर आती हूं.

अब उनके लंड का सिर मेरी गांड में था और मेरी चूत गीली हो रही थी और पसीना बहने लगा था।

भाई मेरी रज़ामंदी समझ गये थे उन्होने ने मुझ को पीछे से मुझ को अपनी बाहों में ले लिया और मेरे दोनो मम्मो पकड़ लिये और मेरी गांड में लंड को ज़ोर से घुसा दिया.

मैं लज़्ज़त और शरम से बेहाल हो रही थी. मैने भाई की तरफ़ देख कर मुसकराते हुए गुस्से से कहा- जो ये कर रहे हैं छोटे भाई ने देख लिया तो?

उन्होने मेरे मम्मे दबाते हुए कहा कि वो भी तेरा देवाना है मेरी शुम्मी।
फिर उन्होने मुझको अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले गये.

वहां छोटा भाई फ़िल्म देख रहा था.
भाई ने अंदर आते ही उसको कहा के यार आज हम दोनो की तमन्ना पूरी हो गई है.

मैं हैरान रह गई के वो दोनो मुझ पेर पहले से नज़र रखते थे.

उन्होने मुझको बताया को वो मेरे बारे में अकसर बातें करते थे और मेरे नाम की मुठ मारते रहते थे.

भाई ने मुझ को बेड पेर बिठा दिया और वो दोनो मेरे बगल में बैठ गये.
बड़े भाई ने एक हाथ मेरे बायें बूब पर रखा और दूसरे हाथ से मेरी गांड में हाथ फेरने लगे जब के छोटा भाई मेरे राइट बूब को दबा रहा था और साथ दूसरे हाथ से मेरी चूत को शलवार के ऊपर से सहला रहा था.

मैं लज़त के सातवें आसमान पर थी फिर बड़े भाई ने मेरी कमीज़ उतार दी और मेरी ३६ डी मम्मे आज़ाद हो गये

वो दोनो भूके बच्चों की तरह मेरे बूब्स को लगे मेरे मुंह से मज़े से ऊओहह्ह ह्हह्ह आह्हह हह्हह की आवज़ निकल रही थी.
और मैं उनके सिर अपने मम्मो में दबा रही थी.

फिर उन दोनो ने अपने कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगे हो गये उनके लंड तकरीबन ९” लम्बे और ३” मोटे थे.

छोटा भाई ने मेरी शलवार उतार दी और मैं बिल्कुल नंगी हो गयी.

उन दोनो ने अपने लंड मेरे हाथों में दिये और मैं उनको प्यार से सहलाने लगी.

फिर बड़े भाई ने लंड मेरे मुंह में दे दिया मुझको थोड़ा अजीब लगा. लेकिन फिर मुझको उसे चूसने में मज़ा आने लगा.

छोटा भाई बेड पर मेरी टांगों के बीच में आकर उल्टा लेट गया और मेरी चूत और क्लिटोरिस पर ज़बान फेरने लगा.
मेरी लज़त से जान निकली जा रही थी और मैं ऊऊऊ ऊऊ ऊओह्ह ह्हह आआह्ह हह्ह और ज़ोर से चूसो की आवाज़ निकाल रही थी.

वो एक उंगली मेरी गांड में भी अंदर बाहर कर रहा था. फिर मैं बरदाश्त न कर सकी और छूट गया.
मेरी चूत का रस कुछ छोटे भाई के मुंह में गया और कुछ बाहर निकल आया उसी टाइम बड़े भाई भी मेरे मुंह में छूट गया और मैने उस की मन्नी पी ली

फिर छोटा भाई बेड पर लेट गया और बड़े भाई ने मुझको डौगी स्टाइल में खड़ा कर दिया.

मैं छोते भाई का लंड चूस रही थी और बड़ा भाई मेरी गांड के पीछे बैठ कर मेरी गांड के होल को ज़बान से चाटने लगा.

मेरे मुंह से सिसकारी निकल गयी. वो अपनी ज़बान से मेरी अस फक्क कर रहा था.

उसने मुझ को बताया कि वो मेरी गांड के दिवाना है और जब भी मैं टाइट कपड़ों में मटक मटक कर चलती थी वो लंड थाम कर रह जाता था. आज उसका बरसों का ख्वाब पूरा हुआ है.

फिर छोटा भाई छूटने लगा तो उसने मुझ को सीधा लिटा दिया और अपना लंड मेरे मम्मो पर रगड़ने लगा.

और फिर उसने अपनी मुन्नी मेरे मम्मो से हटा दिया.

फिर उसने मेरे मम्मो और पेट की मालिश की फिर वो मेरे मम्मो को चूसने लगा और मैं उसके लंड को सहलाने लगी.
बड़ा भाई मेरी गीली चूत पर ज़बान फेर रहा था और मैं अपने चूतड उठा उठा कर उसकि ज़बान को अपनी चूत में लेगा रही थी.

फिर उसने मेरी नाभि को सक्क किया.
छोटे भाई का लंड फिर अकड़ गया था. उसने मेरे बूब्स से मुंह हटाया और मुझ को अपने ऊपर लिटा दिया और अपने लंड को मेरी चूत में पुश किया.

मुझको थोड़ा सा दर्द हुआ और मेरे मुंह से आह्हह की आवाज़ निकली. लेकिन उसने अपने लब मेरे लबों से जोर दिये और मेरी आह्हह्ह उसके प्यार में गुम हो गई.
फिर वो आहिस्ता आहिस्ता लंड को धक्के मारने लगा और मुझ को मज़ा आ रहा था.

फिर बड़े भाई ने मेरी गांड के सुराख पर थूक लगाई और अपना लंड आहिस्ता से अंदर किया.

मुझको बहुत दर्द हुआ तो वो रुक गया. फिर एक झटका दिया तो उसका लंड पूरा मेरी गांड में घुस गया.

मेरे मुंह से सिसकारी निकल गयी लकिन छोटा भाई मुझको किस्सिंग कर रहा था.

अब बड़ा भाई मेरी गांड मार रहा था और छोटा भाई मेरी चूत में लंड दे रहा था.
मैं लज़त की इंतेहाई बुलंदी पर थी.

फिर छोटा भाई मेरी चूत में छूट गया और मुझ को अपनी चूत के अंदर गहराई में गरम लावा सा गिरता महसूस हुआ और लज़त की शिद्दत से मैं भी छूट गई. Antarvasna
और दो तीन झटकों के बाद बड़े भाई ने अपना लावा मेरी गांड में छोड़ा जो बहुत ज़्यादा था इसलिये गांड से बाहर बहने लगा।

हेलो मित्रो ! Sex Stories

मैं लुधियाना से 33 साल की Sex Stories पायल, फ़ीगर, 36-32-40 एक बार फ़िर एक नई कथा आपके लिए ले कर अन्तर्वासना पर आई हूँ।

छेदी राम पंजाब में ईंटों के भट्टे पर काम करता था। दुबला पतला सा, बिहार के छपरा से आकर वो समाना शहर के पास एक भट्टे पर काम पे लग गया। जब वो कमाने लगा तो घर वालों ने बिहार में ही उसका रिश्ता तय कर दिया। जब छेदी राम गाँव गया तो उसकी शादी गुलाबी से कर दी गई।

शादी करके छेदी बहुत खुश था क्योंकि गुलाबी के रूप में उसे एक भरे बदन की गोरी चिट्टी बीवी मिल गई पर शादी से गुलाबी को कोई ख़ुशी ना मिली। 3 इंच की लुल्ली वाला छेदी उसकी प्यास नहीं बुझा पाता था, ना छेदी की लुल्ली में मोटाई थी, ना लम्बाई और ना कड़कपन। पर गुलाबी ने इसे ही अपना भाग्य मन लिया और चुप करके दिन काटने लगी।

शादी के कुछ दिन बाद छेदी काम के लिए वापिस पंजाब आ गया और अपने साथ अपनी पत्नी गुलाबी को भी ले आया। छेदी ने सोचा कि अगर दो हाथ कमाने वाले होंगे तो गुज़ारा अच्छा हो जायेगा इसलिए उसने भट्टे के ठेकेदार से बात करके गुलाबी को भी काम पे रखवा दिया।

एक दिन जब ठेकेदार भट्टे का मुआयना कर रहा था तो उसने गुलाबी को ईंटें उठा कर ले जाते देखा और अपने मुंशी से पूछा,’अरे बनवारी, ये औरत कौन है?’

बनवारी ठेकेदार की रग रग से वाकिफ था, बोला,’ सरकार ! अपने छेदी की जोरू है, कहो तो बुलाऊं?’

‘अरे नहीं, अभी नहीं, पर साली है जोरदार ! देखो कोई जुगाड़ बिठाओ, देखें तो साली मीठी है या नमकीन !’

इस पर दोनों हंस दिए और आगे बढ़ गए।

कुछ दिनों बाद छेदी के गाँव से कुछ पैसों की ज़रुरत आ गई तो छेदी ने अपनी बीवी से बात की। पर दोनों के पैसे जोड़ कर भी घर भेजने के लिए पैसे पूरे ना पड़े। छेदी ने अगले दिन पे बात टाल दी। अगले दिन जब सुबह छेदी सो कर उठा तो उसका बदन तो बुखार से तपा पड़ा था सो वो काम पे ना जा सका और गुलाबी को अकेले ही काम पे जाना पड़ा।

काम पे गुलाबी ने अपनी एक सहेली चंदा से बात की तो उसने कहा,’ तो क्या हुआ, ठेकेदार से उधर मांग ले और अपनी पगार से कटवाते रहना।’

यह सोच कर कि चलो आसानी से काम बन गया, भोली-भाली गुलाबी ठेकेदार के पास गई।
जब ठेकेदार ने गुलाबी को आते देखा तो मुंशी से बोला- बनवारी, ये इधर किधर आ रही है?

तो बनवारी बोला- सरकार ! लगता है आपकी तो निकल पड़ी, आएगी तो…
इस पे दोनों जोर से हंस दिए। जब गुलाबी ठेकेदार के सामने आ कर खड़ी हुई तो बातों बातों में ठेकेदार ने उसके जिस्म का पूरा जायज़ा ले लिया, गोरा रंग, भरा बदन, दो गोल गोल बड़ी सी छातियाँ, सपाट पेट, मोटा कुल्हा, भारी भारी चूतड़, सच में गुलाबी एक सेक्स बम्ब लगी और गुलाबी का जिस्म देखते देखते ही ठेकेदार का लण्ड खड़ा हो गया।

ठेकेदार अपनी धोती में से ही अपने लण्ड को हिला रहा था जिसे गुलाबी भी देख रही थी। ठेकेदार ने बिना ज्यादा बात किये गुलाबी को पैसे दे दिए। जब गुलाबी पैसे ले कर जाने लगी तो ठेकेदार ने उसे आँख मार दी, जिस पर गुलाबी सिर्फ मुस्कुरा कर चली गई। उसके मुड़ते ही ठेकेदार बोला,’ बनवारी लाल ये तो …..’

‘टाँगें उठा उठा कर देगी सरकार !’ मुंशी ने बात पूरी की।

उन्होंने जानबूझ कर इतनी ऊंची आवाज़ में कहा कि गुलाबी सुन ले, और गुलाबी भी सुन कर चुपचाप चली गई। ना जाने क्यों उसे ठेकेदार का आँख मारना अच्छा लगा।

2-3 दिन बाद जब सारा भट्टा भर गया तो उसे बस फूस डाल कर आग लगानी बाकी थी। तो पहले से बनाये कार्यक्रम के अनुसार मुंशी ने गुलाबी को कहा,’ ए गुलाबी ! जा अन्दर जाकर देख, अगर सारा फूस लग गया हो तो मैं ठेकेदार से पूछ कर आग लगवाऊं !’

जब गुलाबी भट्टे के अन्दर चली गई तो मुंशी गेट के बाहर अपना मेज़ लगा कर बैठ गया ताकि कोई अन्दर ना जा सके।

गुलाबी जब बिल्कुल अन्दर पहुंची तो देखा कि वहां ठेकेदार पहले से ही खड़ा था,’ अरे गुलाबी, तू कैसे आई?’ ठेकेदार बोला।

‘जी मैं तो ये देखने आई थी कि ..’

‘कि मैं अन्दर क्या कर रहा हूँ, जानेमन मैं तो तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था आ जाओ !’ कह कर ठेकेदार ने आगे बढ़ कर गुलाबी अपनी बाँहों में ले लिया।

गुलाबी एकदम डर गई- नहीं ठेकेदार साब, मुझे छोड़ दो !

तो ठेकेदार बोला- देख गुलाबी, सच कहता हूँ जब से तुम्हें देखा है, मेरे मन पे काबू नहीं रहा, अब तुम्हारे बिना रहा नहीं जाता, अब ना मत कहना, मैं तेरे लिए तड़प रहा हूँ !
कहते हुए ठेकेदार ने गुलाबी को चूमना चाटना शुरू कर दिया। चूमने चाटने से गुलाबी को भी मज़ा आया और ठेकेदार का लण्ड खडा हो गया। वो भी अपना लण्ड गुलाबी की चूत से टकराने लगा।

अब तो गुलाबी के भी बस से बात बाहर होने लगी और उसने ठेकेदार को कस कर बाँहों में भर लिया।

ठेकेदार ने बिना वक्त गंवाए अपने और गुलाबी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए और 1 मिनट बाद ही दोनों बिल्कुल नंगे थे। गुलाबी आज पहली बार इतना लम्बा, मोटा और तना हुआ लण्ड देख रही थी। ठेकेदार ने उसे अपना लण्ड पकड़ाया और गुलाबी की छातियाँ चूसने लगा और चूसते चूसते उसके पेट और जांघों को भी चूमता रहा। गुलाबी की चूत से पानी चू कर उसकी टांगों से बहने लगा।

ठेकेदार ने गुलाबी को बाँहों में उठाया और फूस के ढेर पे लिटा दिया और उसके ऊपर लेट गया। उसके लेटने के बाद गुलाबी ने खुद अपनी टाँगें चौड़ी की और ठेकेदार की टांगों से अपनी टाँगें लिपटा दी।

ठेकेदार ने गुलाबी के गाल चूसते हुए कहा- गुलाबी इसे पकड़ कर अपनी चूत पे रख !

जब गुलाबी ने ठेकेदार का लण्ड हाथ में पकड़ा तो वो उसके लण्ड का कड़कपन देख कर हैरान रह गई पर बोली कुछ नहीं। उसने चुपचाप लण्ड को अपनी चूत पे रखा तो ठेकेदार ने एक झटके में अपना आधा लण्ड गुलाबी की चूत में डाल दिया जिससे गुलाबी के मुंह से एक हल्की सी चीख निकल गई और इस हल्की सी चीख ने ठेकेदार का मज़ा 10 गुणा कर दिया।

वो जोर लगा कर लण्ड अन्दर ठेलता रहा और गुलाबी दर्द से ‘हाय-हाय’ करती रही पर उसने एक बार भी ठेकेदार को रुकने के लिए नहीं कहा क्योंकि इस दर्द के लिए वो कब से इंतज़ार कर रही थी।

खैर हौले हौले ठेकेदार का सारा लण्ड गुलाबी की चूत में घुस गया और ठेकेदार ने बड़े प्यार से चूस चूस कर गुलाबी की चुदाई शुरू की।
चुदाई के दौरान ठेकेदार ने गुलाबी को जी भर के मसला। गुलाबी की बड़ी बड़ी छातियाँ मसल मसल के उसने लाल कर दी, गाल चूस चूस कर गुलाबी कर दिए, घस्से मार मार के चूत को भी सुर्ख कर दिया पर गुलाबी को इस सब में दर्द कम और मज़ा ज्यादा आया।

यह वो आनंद था जो छेदी उसे कभी नहीं दे पाया था। ठेकेदार की एक चुदाई में गुलाबी दो बार पानी छोड़ गई। ठेकेदार ने भी अपने माल से गुलाबी की चूत को ऊपर तक भर दिया और थक कर गुलाबी के ऊपर ही लेट गया।

10-15 मिनट आराम करने के बाद ठेकेदार ने गुलाबी को दोबारा जम कर चोदा और इस बार गुलाबी ने भी सारी लाज-शर्म त्याग कर ठेकेदार का भरपूर साथ दिया और अपनी कमर उठा उठा कर ठेकेदार से चुदी।

जब चुदाई के बाद गुलाबी भट्टे से बाहर निकली तो वहां मुंशी ने उसे पकड़ लिया और उसके मम्मे दबाये तो ऊपर से ठेकेदार आ गया और बोला- मुंशी, नहीं इसको मैं निज़ी माल बना कर रखूंगा, इसको हाथ मत लगा, गुलाबी तू जा और सुन, मिलती रहा कर !

और गुलाबी अपने घर को चल दी। आज गुलाबी बहुत खुश थी क्योंकि उसकी बरसों की प्यास आज शांत हो गई थी। उसे लग रहा था कि आज उसकी सुहागरात या सुहागदिन था। आज वो एक लड़की से पूरी औरत बन गई थी।

यह एक काल्पनिक कथा है और सच्चाई से इसका कोई लेना देना नहीं है। आप सिर्फ इसे पढ़ो और मज़े लो।

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