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अन्तर्वासना पर यह मेरी Antarvasna जिन्दगी से जुड़ी पहली घटना है जिसे मैं आप लोगों से बताना चाहता हूँ, खासकर उन आंटी और शादीशुदा महिलाओं को जो अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं हैं।
मेरा नाम श्याम है उस समय मेरी उम्र 23 साल थी जब मेरे छोटे चाचा की शादी हुई थी। मैं घर कम ही जाता था क्योंकि उस समय मैं इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था, पर उन दिनों मेरे घर में दो शादियाँ थी एक मेरे चाचा जी की और दूसरी मेरे बुआ के लड़के की। इसलिए न चाहते हुए भी मुझे घर जाना पड़ा। पर मुझे क्या पता था कि वक़्त मेरी जवानी को नया रंग दिखलाना चाहता है।
मेरी घर में बहुत इज्जत है क्योंकि मैं पढाई में बहुत तेज हूँ और छोटे चाचा 8 क्लास के बाद नहीं पढ़े। जब मैं शादी में गया तो चाची को देखता ही रह गया। वो बहुत मस्त थी, उस समय उनका फिगर 32-28-34 था। चाचा और चाची की जोड़ी बिल्कुल नहीं जम रही थी, जैसे लंगूर के हाथ में अंगूर या हूर!
मन तो कर रहा था कि ये अंगूर मुझे खाने को मिल जाये!
घर में शादी के बाद एक रिवाज़ की वजह से पहली रात चाची को अलग सोना था। घर पर मेहमान काफी थे इसलिए मैं पहले से जा कर चाची के कमरे में सो गया। चाचा को बाहर ही सोना था।
रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि चाची मेरे बगल में सोयी हैं, शायद शादी की वजह से उन्हें थकान बहुत थी इसलिए वो बेधड़क सो रही थी। उनका पल्लू सीने से हट गया था। उनकी काले रंग की ब्रा देख कर मेरा 7 इंच का लंड बेकाबू हो गया।
मैंने धीरे -2 उनके ब्लोउज के बटन खोल दिए। उनकी गोरी-2 चूचियाँ देख कर मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था। मैंने हौले से उनकी ब्रा की पट्टी कन्धों से किनारे हटा दी और एक हाथ से चूची को हलके-2 दबाने लगा, दूसरी चूची को अपने मुँह में भर के चूसने लगा।
मुझे लगा चाची जाग गयी हैं पर सोने का बहाना कर रही हैं तो मैं धीरे से उनकी साड़ी को उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। थोड़ी देर में मुझे पैंटी में गीलापन महसूस हुआ। मुझे लगा चाची को मजा आ रहा है तो मैंने धीरे से उन्हें आवाज दी- चाची…!
उन्होंने कहा- कुछ मत बोलो बस करते रहो…!
यह सुनते ही मैं उनके उपर आ गया और उनके रसीले होटों को चूमने लगा..
अब चाची मेरा पूरा साथ दे रही थी…
उन्होंने मेरे पायजामे में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसकी सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथो से उनकी गोल-2 चूचियाँ दबा रहा था। उनके मुँह से सेक्सी आवाजें आ रही थी- चोदो मुझे मेरे राजा… आज मेरी सुहागरात है… 18 साल से ये अनचुदी है आज इसकी प्यास बुझा दो मेरे राजा…
मैं भी गरम हो रहा था, मैंने उनकी पैंटी को उतार फेंका…और उनकी चूत में मुह लगा दिया। वो शायद एक बार झड़ चुकी थी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैं सब पी गया। मैंने दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।
उन्हें मजा आने लगा…
उन्होंने भी मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी…
मैं उनके मुँह में ही झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गयीं। उन्होंने चूस-2 कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया…
वो बोली- जान अब और न तड़पाओ! अपनी रानी को चोद दो! मुझे मेरी प्यास बुझा दो…
मैं तो तैयार था, उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो!
मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…
अबकी बार मैंने धीरे-2 धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया…
वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो! बाहर करो! मैं नहीं सह पाऊँगी!
पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसे कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया…
वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो… और जोर से… आह… आह… मेरे राजा… मुझे जन्नत की सैर कराओ… और अंदर डालो… आह… सी…सी…
आह… मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले… पूरा मेरा खा जा… ले… ले… पूरा ले…
आह… राजा… मैं गई… सी… थाम लो…मुझे… आह…
मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…10-15 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये…
मैंने अपनी सारी गर्मी उसकी चूत में भर दी…
मैंने उठ कर देखा- खून से उसकी साड़ी लाल हो गई थी…
मुझे गम न था आज एक कुंवारी चूत का रसपान जो किया था…
उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा… वो शायद सबसे हसीं रात थी…
आपको अपने जीवन की कुछ और घटनाओ से अगली कहानी में वाकिफ करूँगा।
तब तक आप मुझे जरूर बताएं कि ये मेरी पहली घटना कैसी लगी!
मुझे मेल करें सभी शादीशुदा और कुंवारी लड़कियाँ… Antarvasna
हाय दोस्तो, मेरा नाम विजय Antarvasna कुमार है और मैं एक काल बॉय हूँ। मैंने अन्तर्वासना की बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी, मेरा मन भी करा कि मैं भी एक कहानी लिखूं जो कि काल्पनिक नहीं हकीकत है!
मेरा रंग साफ, कद 5 फीट 8 इंच, एकदम स्लिम हूँ। मैं दिल्ली में रहता हूँ।
दोस्तो अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ!
बात उन दिनों की है जब मैं नया नया दिल्ली आया था, पर कहीं पर नौकरी मिल नहीं पा रही थी।
मैं बहुत परेशान हो गया और मैं अपने एक दोस्त सुरेश के पास गया तो उसने मुझे कहा कि आप नौकरी के लिए परेशान क्यों होते हो, मैं आपको एक नम्बर देता हूँ, आप मेरे बताये पते पर जाना और पैसे भी बहुत ज्यादा मिलेगें।
मैं सुरेश की बात से सहमत हो गया।
उसके अगले दिन मैंने उस नम्बर पर फोन किया तो उस नम्बर पर मुझे एक महिला की आवाज सुनाई दी जिसे मैं सुनकर घबरा गया और मैंने फोन रख दिया।
फिर शाम को मैं अपने दोस्त से मिलने के लिए उसके घर गया तो उसने मुझे समझाया कि तुम्हार पास कोई नौकरी तो है नहीं तो फिर क्या करेगा भीख मांगेगा क्या। आप कल फोन करके उसके उसके बताये पते पर चला जाना और उनको कहना कि सुरेश ने आपका नम्बर दिया है, और पूछना कि मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ।
फिर अगले दिन मैंने 12.30 पर मैंने फोन किया तो उसी महिला ने फोन उठाया, तो मैंने कहा कि मुझको सुरेश ने आपका फोन नम्बर दिया है।
तो उसने कहा- आपका नाम क्या है?
मैंने कहा- मेरा नाम विजय जे है।
उसने मेरी उम्र पूछी तो मैंने कहा कि मेरी उम्र 22 साल है। तब उसने मुझे अपना नाम शिवानी बताया और पता जी. के. फेस-2 में रहती हूँ आप मुझसे शाम को 9.00 बजे मिलना।
मैं शाम को 9.00 बजे उसके घर जी. के.फेस-2 पर पहुँचा और उसके घर की बैल बजाई, तो उसके घर पर उसकी नौकरानी ने दरवाजा खोला।
मैंने कहा- मुझे शिवानी मैडम से मिलना है!
उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने अपना नाम विजय जे बताया। उसने कहा- मैं मैडम से पूछ कर आती हूँ आप तब तक यहीं ठहरो।
मुझे बहुत ज्यादा डर रहा था और दिल धक धक कर रहा था। उसकी नौकरानी दो मिनट बाद आई और मुझे अन्दर आने को कहा।
मैं अन्दर जाकर उसके घर को देख कर और भी ज्यादा धबरा गया क्योंकि उसका घर बहुत ज्यादा ही आलीशान था।
नौकरानी ने मुझे पानी पिलाया और कहा कि मैडम अभी आती है, आप थोड़ी देर तक आराम से बैठो और उनका आने का इन्तजार करों।
10 मिनट बाद मैडम शिवानी आई तो मैं तो उसे देखकर घबरा ही गया क्योकि वह तो बहुत ही खूबसूरत थी, हूर की परी।
उसकी फिगर तो बस बहुत ही कमाल की थी उसकी लम्बाई 5 फीट 3 इंच, कमर 28, हिप्स 34 और चेस्ट 32 और रंग दूध जैसा सफेद।
वो क्रीम रंग का कुर्ता और काले रंग का शलवार पहने हुए थी।
मैडम ने आते ही कहा- हाय विजय! क्या हाल है?
मैंने कहा- ठीक है मैडम।
मैडम ने पूछा कि आपको मेरा फोन नम्बर कहाँ से मिला तो मैंने सुरेश का नाम बाताया और कहा कि वो मेरा दोस्त है।
फिर हम दोनों बैठकर बात करने लगे फिर उसने नौकरानी को चाय लाने का कहा तो नौकरानी 5 मिनट बाद चाय लेकर आई और हम दोनों ने साथ बैठकर चाय पी।
मैडम शिवानी ने मुझे देखकर कहा- आप घबरा क्यों रहे हो?
मैंने कहा- आज मैं पहली बार किसी मैडम से मिला हूँ!
तो वो मेरी बात सुनकर हँसने लगी और कहने लगी- आपको घबराने की जरूरत नहीं है।
उसके बाद उसने अपनी नौकरानी को घर जाने के लिए कह दिया कि सेवेरे आ जाना। नौकरानी अपने घर चली गई।
शिवानी मैडम मुझको अपने ड्रांईग रूम में ले गई वहाँ पर उसने एक वाईन की बोतल, सोडा, पानी, दो गिलास और कुछ नमकीन निकाली और मुझको उसने कुर्सी पर बैठने के लिए कहा और फिर उसने दो पैग वाईन के बनाये तो मैंने कहा कि मैं तो ड्रिंक नहीं करता तो उसने कहा कि आप हमारा साथ तो दो आप कम से कम लेना।
उसने मुझको बहुत ही लाईट ड्रिक्स के दो पैग दिये मैंने पहले कभी पी तो नहीं थी, मुझको हल्का सा नशा होने लगा।
मैडम ने कहा- चलो बैडरूम में चलते हैं।
मैं मैडम के साथ उसके बैडरूम में चला गया। मैडम ने कहा- पहले आपने किसी के साथ सम्भोग किया है?
मैंने कहा- हाँ! एक दो बार अपनी गर्लफ्रैड के साथ किया है।
मैडम ने कहा- आपको मेरे साथ सम्भोग करना है।
मैं उसकी बात सुनकर घबरा गया और कहने लगा- नहीं मैडम! मैं नहीं कर सकता!
मैडम ने कहा- फिर आप मेरे पास क्यों आये हो!
मैंने कहा- मैं तो आपके पास नौकरी के लिए आया हूँ।
उसने कहा- आपको सुरेश ने नहीं बताया कि आपको क्या करना है?
मैंने कहा- नहीं! उसने तो यही कहा था कि आप मैडम से मिल लेना।
मैडम गुस्से से लाल-पीली होने लगी और सुरेश को गाली देने लगी, कहने लगी- पता नहीं किस को भेज दिया।
यह सुनकर मैं तो बहुत ही ज्यादा घबरा गया, मैंने कहा- मैडम आप नाराज मत हो, आप जो भी कहोगी, मैं वही करने को तैयार हूँ।
तो मैडम ने कहा- ठीक है!
मेरी जान में जान आई और मैडम ने हँसकर कहा- ठीक है चलो बैड पर बैठो।
मैं बैठ गया। उसने कहा- मैं चेंज करके आती हूँ, आप यहीं पर बैठो।
मैडम शिवानी थोड़ी देर बाद आई तो उसको देखकर मैं तो हैरान रह गया। वह केवल बहुत हल्की नाईटी पहने हुए थी और उसके अन्दर सब कुछ दिखाई दे रहा था।
वो मुझको देखकर मुस्कराई और कहने लगी- आपने पहले किसी औरत को ऐसे नहीं देखा क्या?
मैंने कहा- मैडम! नहीं! देखा तो है, पर आप जैसी अप्सरा को नहीं देखा, आप तो परियों से भी सुन्दर दिखती हो।
मेरी बात सुनकर वह खिलखिला के हँसने लगी।
अब मेरी भी जान में जान आ गई, उसने मुझे कहा- आप मुझे मैडम मत कहो, मुझे सिर्फ शिवानी कहो।
मैंने कहा- जी अच्छा।
शिवानी अपनी दोनों टांगों को ऐसे करके बैड पर मेरे सामने बैठ गई कि उसकी मुझे पैंटी दिखाई देने लगी और मैं उसकी टांगों के बीच में से उसकी पैंटी को देखने लगा।
मेरा लण्ड जो की साईज में 8 इंच लम्बा और 2.5 इंज मोटा था पैंट के अन्दर दहाड़ मारने लगा।
शिवानी ने कहा- विजय तुम क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
वो हँस कर बोली- विजय! जब तुम कुछ नहीं देख रहे हो तो तुम्हारी पैंट क्यों उपर की तरफ उठ रही है। चलो, अपनी पैंट उतार कर दिखाओ कि इसमें क्या सामान है जो कि बार बार पैंट फाड़ने के लिए तत्पर है।
मैंने सोचा कि कही मैडम गुस्सा ना करने लगे तो मैंने पैंट उतार दी।
मैडम ने कहा- आप अपने सारे कपड़े भी उतारो!
मैंने शर्ट और बनियान भी उतार दिया अब मेरे शरीर पर सिर्फ अन्डरवीयर था।
तो शिवानी के चेहरे पर अजीब सी मुस्कुराहट दिखाई देने लगी और मेरा शर्म के मारे मेरा बुरा हाल हो रहा था क्योंकि मैंने पहले कभी भी किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे थे।
शिवानी ने कहा- विजय! अब अपना अन्डरवियर भी उतारो!
मैंने कहा- शिवानी जी! आपने मेरे तो सारे कपड़े उतरवा दिये हैं, पर आपने अपने कपड़े तो पहने हुए है आप भी तो अपने कपड़े उतारो शिवानी जी। शिवानी ने कहा- आप ही उतार दो ना!
पहले मैंने उसकी नाईटी उतार दी, नाईटी उतारते ही उसके बदन को देखकर मैं तो चकित ही रह गया कि उसका बदन तो संगमरमर की तरह से बिल्कुल चमकीला और सफेद था।
और उसके फिगर तो किसी भी परी से कम नहीं थी उसकी फिगर को देखकर मैं तो पागल ही हो गया और सोचने लगा कि यह शादीशुदा होने के बाबूजूद अपने शरीर की आग किसी और से बुझवाती है?
शिवानी ने कहा- विजय आप सोचते बहुत ज्यादा हैं, काम कुछ कम करते हो!
मैंने कहा- नहीं मैडम, ऐसा कुछ भी तो नहीं!
शिवानी ने मझे अपनी बाँहो में भर लिया और कहने लगी- आप मुझे ऐसे मजा दो कि हम दोनों सब कुछ भूल जाएँ!
मैंने कहा- शिवानी जी! आप जो कह रही हैं, वह ठीक है।
और मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और शिवानी के होठों को चूसने लगा। तो शिवानी ने अपनी जीभ में मुँह के अन्दर डाल दी।
मैं भी उसकी जीभ को चूसने लगा।
अब वो मस्त होती जा रही थी, कहने लगी- विजय, तुम मेरे अन्दर समा जाओ! आप जैसा जवान मर्द मुझे अभी तक मिला नहीं!
मैंने कहा- शिवानी जी! आप तो शादीशुदा हो, तो फिर क्या आपके पति आपको सन्तुष्ट नहीं कर पाते हैं?
शिवानी ने कहा- मेरी शादी को 6 साल हो गये और मुझे आज तक कभी भी वो शारिरिक सुख नहीं दे पाए हैं, बस उसके पास तो पैसा ही पैसा है और उसी के पीछे लगा रहता है, हफ्ते दस दिन में ही आता है, मैं अकेली ही रहती हूँ और जब भी आता है बस उसको काम ही काम नजर आता है। कभी मैं उनको कहती भी हूँ तो वो इस काबिल ही नहीं हैं कि वह कुछ कर पायें! मैं चाहे कुछ भी कहीं भी करूँ उसको तो इस बात से भी एतराज नहीं है। मैं बस अपनी प्यास ऐसे ही आज आपसे बुझवा रही हूँ। विजय आप भी अपने बारे में बताओ कि इस लाईन में तुम कैसे आये?
मैंने कहा- मैं नौकरी की तलाश में भटक रहा था तो सुरेश ने इस काम के बारे में मुझे बताया और आज मेरी पहली कॉल है।
तो वो यह सुनकर और भी ज्यादा खुश हो गई और मेरे से लिपट गई।
मैं एक हाथ उसकी ब्रा के ऊपर ले गया और धीरे-2 हाथ उसकी चूचियों पर फेरने लगा।
अब वो मस्त होने लगी और मैंने उसकी ब्रॉ के हुक खोल दिये, शिवानी के मम्मे आजाद हो गये।
उनको देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि वो 28 साल की होगी।
उसकी चूची 16 साल की लड़की की तरह सिर्फ 32 साइज की थी और बिल्कुल कसी हुई जो कि आराम से हाथ में आ जाये।
मैं अपने को बहुत ही खुशनसीब मानने लगा कि पहली ही कॉल पर ऐसा माल मिल गया जिसके लिए मैं क्या कोई भी कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाये।
मैं उनको धीरे-धीरे सहलाने लगा और वो सिसकने लगी। फिर मैंने अपने होठों को उसके होंठ से हटाकर उसकी चूची को चूसने लगा जो कि एकदम से टाईट हो चुकी थी और उसके निप्पल तो एक दम से तन चुके थे।
मैं एक हाथ से उसकी बाँई चूची को सहलाने लगा और दाँई चूची को मुँह से चूसने लगा। वो बुरी तरह से सिसकने लगी। मैं बुरी तरह से, पागलों की तरह उसकी चूची को चूसे और मसले जा रहा था।
वो बुरी तरह से तड़पने लगी, उसने मेरे अन्डरवीयर में हाथ डाल दिया और मेरे लण्ड को बाहर निकाल कर उसको पागलों की तरह से मसलने लगी।
मैं तो दीवानों की तरह उसकी चूचियों को मसल व चूस रहा था और वो बुरी तरह से मदहोश होकर मेरे लण्ड से खेलने लगी।
हम दोनों 5-6 मिनट तक ऐसे ही करते रहे।
फिर एक ही झटके में उसने मेरे अन्डरवियर को निकाल फेंका और मुझसे अपने आप को छुड़ाकर वो मेरे लण्ड को चूसने लगी।
मैं बुरी तरह से हाँफने लगा और उसके मुँह में ही अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगा।
थोड़ी देर के बाद मैंने अपने लण्ड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया और उसकी पैंटी को निकाल दिया। वाह क्या चूत थी उसकी! बिल्कुल गुलाबी! मानो गुलाब की पँखुड़ियों से बनी हुई और उसमें से निकलता हुआ उसकी टाईट चूत का पानी जो कि उसकी बिल्कुल सफेद टांगों के बीच में ऐसे लग रही थी कि बरसों से आज ही जागी हो, और उसका गुलाबी दाना!
मैंने उसकी चूत को मैंने ऊपर से ही चूमना शुरू किया और मुँह को चारों तरफ घुमाने लगा उसकी चूत से मीठी मीठी गंध आ रही थी जिसको मैं सूंघकर मदहोश होता जा रहा था। उसकी गीली चूत फूल गई थी।
अब मैंने उसकी टांगों को चौड़ा किया और उसकी चूत एकदम खुलकर मेरे सामने थी, मैं उसकी चूत की गहराई देख रहा था। अब मैंने दोनों हाथ से उसकी चूत को फैलाकर उसके अन्दर अपनी जीभ घुसा दी।
वो बुरी तरह से सी सी सी करने लगी और मैं अब उसकी चूत के अन्दर बाहर अपनी जीभ को करने लगा और उसकी गोले गोल गांड को बुरी तरह से सहलाने लगा।
वो बुरी तरह से तड़पने लगी और मेरे लण्ड को सहलाने लगी। मैं तो उसकी चूत को चाट चाट कर मदहोश होता जा रहा था, अचानक उसने अपने हाथों से मेरे मुँह को पकड़ लिया और कहने लगी- विजय! और ज्यादा ना तड़फाओ, मेरे से रूका नहीं जा रहा है, बस अब अपने लण्ड को मेरी चूत में घुसा दो! दो ना विजय!
और अपने ऊपर से मुझको धकेलने लगी। मैं भी उसकी चूत से हटकर उसके ऊपर 69 की पोजीशन में आ गया।
अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था और शिवानी मेरे लण्ड को मुँह में लेकर चाटने और हाथ से मसलने लगी और 6-7 मिनट के बाद शिवानी का शरीर बुरी तरह से अकड़ गया और उसने मुझको कस के पकड़ लिया और बुरी तरह से तड़पने लगी और कहने लगी- जोर जोर से! ऐसे चूसो! जीभ को पूरी अन्दर डाल दो! विजय वैरी वैरी फास्ट! तेजी से मैं मर जाउँगी! आ आ ई ई!
और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया, सारा पानी मैं अपने मुँह के अन्दर ले गया। उसने मेरे लण्ड को कस के पकड़ लिया और बुरी तरह से मसलने लगी और कहने लगी- विजय बस अब तो अपना लण्ड मेरी चूत में डालो जल्दी से! जल्दी डालो! नहीं मैं तो मर जाउँगी!
मैंने उसको छोड़कर अपनी पैंट की जेब से कन्डोम का पैकेट निकाला और कन्डोम को निकाल कर अपने लण्ड के ऊपर चढ़ाने लगा तो शिवानी ने कहा- नहीं! कन्डोम के बगैर करो!
मैंने कहा- नहीं शिवानी जी! मैं ऐसा नहीं कर सकता।
शिवानी नाराज हो कर कहने लगी- मेरी शादी को 6 साल हो गये हैं और मेरी आज तक एक भी औलाद नहीं है, इसलिए ही तो मेरे पति ने मुझे इतनी छूट दे रखी है और आज पहली बार किसी पराये मर्द से चुद रही हूँ, प्लीज कन्डोम नहीं! मेरी सहेली ने मुझको सुरेश का नम्बर दिया था, इसलिए ही तो आपको बुलाया है, और आप भी कन्डोम लगाकर करेंगे? नहीं नहीं! विजय।
इतना कह कर उसने मुझको बाँहो में भर लिया और कहने लगी- बस मुझे एक बच्चा ही तो चाहिए और क्या! मुझको अपनी प्यास नहीं बुझानी! बस एक बार मेरी कोख भर दो विजय! मुझे बस एक बच्चा चाहिए।
वो रोने लगी, मैंने उसको बाँहों में भर लिया, उसके सर को सहलाने लगा और धीरे धीरे उसकी कमर पर हाथ फेरने लगा। वो भी मेरे लण्ड को सहलाने लगी और तड़पने लगी, कहने लगी- विजय मेरी चूत में अपना लण्ड जल्दी से डालो! मुझसे रूका नहीं जा रहा है, मैं तो मर ही जाउँगी!
फिर मैंने उसको बैड पर लिटाया, उसकी टांगों को ऊपर उठाकर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के उपर रखा और एक जोर से धक्का मारा, वो बुरी तरह से तडफने लगी और जोर से चीखी- विजय आपका लण्ड तो बहुत मोटा है! आप धीरे से अन्दर करो, नहीं तो मैं तो मर ही जाउँगी!
मैंने कहा- ठीक है!
फिर मैंने उसकी चूत पर खूब सा थूक लगाया और उसने मेरे लण्ड पर थूक लगाया, मैंने उसकी चूत पर अपना लण्ड टिका कर धीरे धीरे दबाव लगाना शुरू किया तो शिवानी बोली- विजय, धीरे धीरे से अन्दर करते रहो!
मैं भी धीरे धीरे लण्ड को अन्दर करने लगा लेकिन जैसे से मेरा लण्ड उसकी चूत में 3 इंच गया तो वो कहने लगी- विजय, और अन्दर मत डालो, मेरा तो बुरा हाल हो रहा है, मैं ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाउँगी!
मैं धीरे-धीरे अपने लण्ड को ऐसे से अन्दर बाहर करने लगा तो कुछ ही देर बाद उसको मजा आने लगा और कहने लगी- थोड़ा और अन्दर डालो!
मैंने फिर एक जोर का धक्का मारा, मेरा लण्ड 6 इंच तक उसकी चूत में घुस गया, वो दर्द से बुरी तरह हाँफने लगी और कहने लगी- रूको, थोड़ी देर के लिए!
मैं रूक गया और उसकी चूचियों को दबाने लगा और उसके होठों को चूसने लगा।
थोड़ी देर के बाद मैं अपने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा, उसका भी दर्द कम होने लगा और उसको मजा आने लगा।
उसने कहा- विजय अब अपने लण्ड को थोड़ा और अन्दर करो!मैंने एक जोर का धक्का मारा, मेरा लण्ड उसकी चूत में जड़ तक उसके अन्दर घुस गया, शिवानी बुरी तरह से तड़पने लगी और कहने लगी- विजय बाहर निकालो, नहीं तो मैं तो मर ही जाउँगी!
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और उसकी चूचियों को बुरी तरह से मसलने लगा।
कुछ ही देर में उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और अब मैं अपने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।
शिवानी का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। 3-4 मिनट बाद शिवानी ने कहा- विजय धक्कों की स्पीड बढ़ाओ!
मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी। अब शिवानी को मजा आने लगा और अपनी गाँड को उपर नीचे करने लगी। धक्कों की धप धप की आवाज आने लगी। शिवानी के मुँह से आआआअ ऊऊऊऊ इइइइइ आआआऽऽ अआआआ ऊऊऊऽऽ ईईईईर्ई सीसीसीसी की आवाजों के साथ मुँह से सिसकारी निकलने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी- मार दे मुझे! आऽऽआ आह सी सी सीऽऽऽइ इ इऽऽइ!
और कुछ ही देर में उसने मुझको जोर से जकड़ लिया और उसका पानी छूट गया जोकि मेरे लण्ड पर और उसकी जाँघों पर फैलने लगा।
उसके बाद मैंने उसको कुतिया की तरह पैरों और हाथों के बल खड़ा किया, पीछे से अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया और दनादन धक्के पे धक्के मारने लगा।
वो मजे में बड़बड़ाने लगी- विजय! ओ विजय! खूब तेजी से करो! मेरी चूत को फाड़ डालो! आज तक आप जैसा मर्द मुझे नहीं मिला! काश आप मेरे पति होते मुझको जन्नत की रोज सैर करा देते! नहीं! फाड़ दो मेरी चूत को विजय! वेरी फास्ट! जल्दी जल्दी विजय! तेजी से!
मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड दुगनी कर दी। मैं बड़ी बेरहमी से चूचियाँ पकड़ के उसको मसलने लगा और धक्कों की भी स्पीड और भी ज्यादा कर दी। कुछ ही देर में मेरा छूटने का आ गया और मेरे मुँह से आ आहा आ हा सी सी ई ई ई आई की आवाज आने लगी।
शिवानी कहने लगी- विजय लण्ड को बाहर मत निकालना! अपना पानी अन्दर ही छोड़ना! अन्दर ही छोड़ना! मैं आपके ही बच्चे की माँ बनूंगी विजय!
मैंने अपना लण्ड शिवानी की चूत से बाहर निकाल लिया और उसको लेटने के लिए कहा, वो सीधा लेट गई और फिर मैंने उसकी टांगों को ऊपर उठाकर अपना लण्ड शिवानी की चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा अन्दर उतार दिया। वो थोड़ा करहाई।
फिर मैंने अपना लण्ड पूरा बाहर खींचा, जबरदस्त धक्के पे धक्के मारने लगा और 2-3 मिनट के ही बाद मेरे लण्ड ने अपना पानी उसकी चूत के अन्दर छोड़ दिया और मैं अपना लण्ड उसकी चूत के ही अन्दर डाल कर उसके ऊपर लेट गया। दो तीन मिनट तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे।
मैंने शिवानी से पूछा- बाथरूम कहाँ पर है?
तो शिवानी मुझको बाथरूम में छोड़ कर आई।
मैंने बाथरूम में जाकर अपना लण्ड पानी से साफ किया और फिर मैं नहाने लगा तो कुछ ही देर में बाथरूम के दरवाजे पर ठक ठक की आवाज हुई और साथ में शिवानी की आवाज आई- विजय मैं आपके लिए तौलिया लेकर आई हूँ, प्लीज दरवाजा खोलो!
मैंने दरवाजा खोला तो शिवानी नंगी ही तौलिया लेकर दीवार के सहारे खड़ी हुई थी।
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसने शर्म से सिर झुका लिया और अन्दर आ गई, कहने लगी- विजय अकेले ही अकेले नहा रहे हो? क्या मैं भी आपके साथ नहाउँ?
मैंने कहा- हाँ हाँ क्यों नहीं!
और हम दोनों साथ साथ नहाने लगे। एक दूसरे के अंगों से छेड़छाड़ करने लगे, कुछ ही देर में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया तो शिवानी ने कहा- विजय तुम्हारा औजार तो बहुत शानदार है, बहुत ज्यादा लम्बा और मोटा! मेरे पति का तो आपसे दो इंच छोटा है! कह कर शिवानी पीछे की तरफ को घूम गई।
मैंने शिवानी को पीछे से बाँहो में भर लिया और उसकी गोले गोल गांड को देखकर सोचने लगा क्यों ना लगे हाथ साली की गांड भी आज ही मार लूँ!
मैं शिवानी की चूचियों को पीछे से पकड़ के धीरे धीरे दबाने लगा और वो फिर से गर्म होने लगी। शिवानी ने मरे लण्ड को हाथ पीछे करके पकड़ लिया और लण्ड को धीरे धीरे सहलाने लगी।
मेरा लण्ड लोहे की रॉड की तरह से खड़ा हो गया।
शिवानी कहने लगी- बाप रे बाप! आपका लण्ड तो रॉड की तरह से अकड़ गया और बहुत ही ज्यादा सख्त हो गया है विजय!
तो मैं उसकी चूचियों का छोड़ कर उसकी गांड पर हाथ फेरने लगा, मैंने शिवानी से कहा- शिवानी! आप की फिगर तो बहुत ही शानदार है, पर आप की गांड तो उससे भी सुन्दर है, क्या मैं आपकी गांड की भी भूख मिटा दूँ?
नहीं! नहीं विजय! शिवानी ने कहा- जब तुम्हारे लण्ड से मेरी चूत की यह हालत हो गई तो मेरी गांड की क्या हालत होगी। नहीं नहीं माँ रे! विजय आज तो आप मेरी चूत की ही प्यास बुझाओ, आओ, जल्दी से मेरी प्यास एक बार और बुझा दो ना, बुझाओ ना! विजय आपने जो मजा मुझे दिया है आज तक मेरा पति कभी भी नहीं दे पाया है और ना ही दे पायेगा। मैं तो आज आपकी गुलाम हो गई। ये देखो मेरी चूत से अभी भी खून निकल रहा है। विजय मुझे तो आपसे चुदने पर ऐसा लगा कि जैसा आज ही पहली बार चुद रही हूँ, ओ विजय, एक बार बस प्यास बुझा दो ना विजय!
मैंने शिवानी का बाँहो में भर लिया और उसको चूमने लगा। कभी मैं उसके होटों को चूसता तो कभी उसकी गर्दन को चूमता!
और पागलों की तरह से शिवानी मदहोश होने लगी। फिर मैं उसकी चूची को एक हाथ से पकड़ के मसलने लगा और दूसरी चूची को चूसने लगा। कुछ ही देर में शिवानी कहने लगी- विजय! अपना लण्ड मेरी चूत में डालो ना जल्दी से!
मैं उसकी चूचियों को छोड़कर, नीचे झुक कर, उसकी एक टांग को ऊपर उठाकर उसकी चूत को चाटने लगा, जिसमें से पहले ही मेरे लण्ड और उसकी चूता का पानी निकल रहा था। मैंने उसको चाट-चाट के साफ किया।
लेकिन थोड़ी ही देर में शिवानी ने तड़प कर कहा- विजय ज्यादा मत तड़फाओ! बस जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ो ना विजय!
मैंने उसकी एक टांग को थोड़ा और ऊपर किया और अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रखा ही था कि शिवानी ने शावर चला दिया। ऊपर से पानी की बारिश होने लगी।
एक ही धक्के में मैंने अपना लण्ड शिवानी की चूत में आधे से ज्यादा अन्दर कर दिया और वो दर्द के कारण जोर से करहाई।
फिर मैंने एक और धक्का जोर से मारा, मेरे पूरा का पूरा लण्ड शिवानी की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और शिवानी बुरी तरह से तड़फने और चिल्लाने लगी- मार ही डालोगे क्या? आराम से नहीं कर सकते क्या?
मैंने अपना लण्ड आधा बाहर निकाला और फिर धीरे धीरे से अन्दर बाहर करने लगा और उसकी चूचियों को मसलने लगा और उसके होंठों अपने होंट से बन्द कर दिया।
कुछ ही देर में उसको मजा आने लगा, शिवानी कहने लगी- विजय धीर धीरे अन्दर बाहर करो अपने लण्ड को! मुझे मजा आ रहा है विजय!
मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये और कुछ ही देर में अपनी स्पीड फुल कर दी।
सात आठ मिनट के ही बाद शिवानी की चूत ने पानी छोड़ दिया।
अब मैंने उसको नीचे झुकने के लिए कहा, वो झुक गई तो मैंने अपना लण्ड पीछे से उसकी चूत में अन्दर घुसा दिया और थोड़ा सा करहाई और फिर उसको मजा आने लगा।
मैं फिर दनादान धक्के पे धक्के मारने लगा और दस बरह मिनट में मेरे भी लण्ड ने पानी उसकी चूत में ही अन्दर छोड़ दिया। शिवानी इस दौरान दो बार झड़ी।
फिर मैंने शावर के पानी से उसकी चूत को साफ किया और उसने मेरे लण्ड को साबुन लगा कर अच्छी तरह से साफ किया। नहा कर हम दोनों नंगे ही वापस शिवानी के बेडरूम में आ गये, हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और मैंने शिवानी से जाने की इजाजत माँगी तो शिवानी ने मुझसे कहा- विजय! जब भी मैं आपको फोन करूँ तो आपको जरूर आना पड़ेगा!
मैंने शिवानी से कहा- मेरे पास तो फोन ही नहीं है।
तो शिवानी कहा- कोई बात नहीं फोन हम आपको दे देते हैं!
और शिवानी ने मेरी फ़ीस के मुझे आठ हजार रूपये दिये और चार हजार रूपये फोन के लिए दिए। मैंने शिवानी का धन्यवाद किया और मैं अपने घर चला आया।
उसके बाद शिवानी मुझे हफ्ते में कम से कम एक बार बुलाती और उसके दो महीने ही बाद ही शिवानी गर्भवती हो गई। अब शिवानी के दो बच्चे है। वो मेरा बड़ा ही अहसान मानती है और बहुत ही ज्यादा इज्जत करती है। अब महीने में कम से कम एक बार जरूर बुलाती है।
शिवानी ने मुझे अपने परिवार के हर सदस्य से मिलाया है और तो और उसने अपने पति से भी।
शिवानी का पति मेरी बहुत इज्जत करता है और उसने मुझे नौकरी भी अपनी कम्पनी में दिलाई।
अब शिवानी और उसका परिवार बहुत खुश है, खुश भी क्यों ना हो भरा-पूरा परिवार है, किसी भी चीज की कमी नहीं है, मैं भी उनकी बहुत ही इज्जत करता हूँ क्योंकि वो मेरे जरूरत के दिनों में काम आई।
मेरे और शिवानी के बीच जो भी हुआ, और है, एक राज है और राज ही रहेगा।
मैं विजय, जो ना चाहते हुए भी यह कहानी लिख रहा हूँ जो कि एक हकीकत है, आप लोग मानो या ना मानो, सिर्फ नाम बदल रहा हूँ। Antarvasna
सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म का होना या नहीं होना व्यक्ति की व्यक्तिगत अनुभव, स्वास्थ्य, और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, और यह नॉर्मल हो सकता है।
कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म अनुभव करने में सामान्य होते हैं, जबकि दूसरे यह अनुभव नहीं कर सकते हैं। यह निर्भर करता है कि किस प्रकार की स्टिमुलेशन और सेक्स के प्रारंभ में किस प्रकार की मनोबल की आवश्यकता होती है, जिससे एक व्यक्ति ऑर्गैज्म कर सकता है।

कुछ लोग सेक्स के दौरान ऑर्गैज्म के प्राप्ति में समय लगा सकते हैं, जबकि दूसरे लोग इसे तेजी से प्राप्त कर सकते हैं। यह भी निर्भर करता है कि कितनी सारी सेक्स के प्रारंभ में स्टिमुलेशन और आनंद की दर्जीकरण हो रही है।
ऑर्गैज्म की अभाव किसी भी व्यक्ति के लिए एक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है, खासकर अगर यह बार-बार हो रहा है और यह व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ डाल रहा है। इस स्थिति में बेहतर होता है कि व्यक्ति एक सेक्स थेरपिस्ट या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें, जो उनकी समस्या को समझने और समाधान करने में मदद कर सकते हैं।
सार्वजनिक रूप से यह जरूरी है कि सेक्स को सुरक्षित और सहमति आधारित तरीके से किया जाए, और जब भी सेक्स के बारे में समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, तो सहायता और सलाह ली जानी चाहिए।
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