हाय! मैं हूँ मोहित, मैं धरन, नेपाल में Antarvasna रहता हूँ। ये मेरी अंतरवासना के लिये दूसरी कहानी है। ये कहानी यहां से शुरु होती है …
सबसे पहले मैं अपनी बॉस का धन्यवाद करना चाहूंगा जिसकी बदौलत मैं आज मस्ती के उस मुकाम पर पहुंचा हूं जहां मेरी वासना का ज्वार हर लहर के साथ टूट कर नहीं बिखरता। हर एक लहर अगली लहर को तब तक बढाती है जब तक कि आखिरी मंजिल पर पहुंच कर एक जबरदस्त उफान के साथ मेरे प्यार का लावा असीम आनन्द देता हुआ मेरे साथी को अपने साथ बहा ले जाता है। बात उस समय की है जब मैं एक सॉफ्टवेयर कम्पनी में काम कर रहा था। मिस सोनम मेरी बॉस थी। उम्र रही होगी करीब २८ साल की। लम्बी करीब ५’८” और सारी गोलाईयां एकदम परफेक्ट। अफवाह थी कि वो मिस इन्डिया में भी भाग ले चुकी थी। पर गजब की सख्ती बरतती थी वो हम सब के साथ। किसी की भी हिम्मत नहीं होती थी कि उनके बारे में सपने में भी गलत बात सोचें। वो हम सब से दूरी बना कर रखती थी।
मैं नया नया आया था। इसलिए एकाध बार उनके साथ गरम जोशी से बात बढाने की गुस्ताखी कर चुका था। पर उनकी तरफ से आती बर्फीली हवाओं में मेरा सारा जोश काफूर हो गया। अब मुझे मालूम हुआ कि मेरे साथियों ने उनका नाम मिस आईस मैडेन क्यों रखा है। पर मुझे क्या पता था कि ऊपर वाले दया ऊपर वाली की मर्जी क्या है। एक दिन हमारे आफिस का नेटवर्क गडबडा गया। कभी ऑन होता तो कभी ऑफ। उसदिन शनिवार था। मैं दिन भर उसी में उलझा रहा पर उस गुत्थी को सुलझा नहीं पाया। आखिर थक कर मैंने मैडम को कहा कि अगले दिन यानि रविवार को सुबह नौ बजे आकर इस को ठीक करने की कोशिश करूंगा। मैंने उनसे आफिस की चाभियां ले लीं।
अगले दिन जब मैं नौ बजे ऑफिस पहुंचा तो देखा कि सोनम मैडम मेन गेट के सामने खडी हैं। मैंने उन्हें विश किया और पूछा “आप यहां क्या कर रही हैं”। वो बोलीं “बस ऐसे ही घर में बोर हो रही थी तो सोचा कि यहां आकर तुम्हारी मदद करूं”। हम दरवाजा खोलकर अन्दर गए। मैडम ने कहा कि आज इतवार होने की वजह से कोई नहीं आएगा। इसलिए सुरक्षा के खयाल से दरवाजा अन्दर से बन्द कर लो। मैंने उनके कहे अनुसार दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। अब पूरे आफिस में हम दोनों अकेले थे और हमें कोई डिस्टर्ब भी नहीं कर सकता था। मुझे सोनम मैडम की नीयत ठीक नहीं लग रही थी। दाल में जरूर कुछ काला था। नहीं तो भला आज छुट्टी के दिन एक छोटी सी समस्या के लिए उन को दफ्तर आने की क्या जरूरत।
मैडम घूम कर कम्प्यूटर लैब की तरफ चल दी और मैं भी मन्त्रमुग्ध सा उनके पीछे पीछे चल दिया। पूरे माहौल में उनके जिस्म की खुशबू थी। जब हम कॉरीडोर में थे तो मैंने उनकी पिछाडी पर गौर किया। हाय क्या फिगर था। हालांकि मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं पर यह दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर सोनम मैडम किसी ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले तो अच्छे अच्छों की छुट्टी कर दें और देखने वाले अपने लन्ड संभालते रह जाएं। उनकी मस्तानी चाल को देख कर यूं लग रहा था मानो फैशन शो की रैम्प पर कैट वॉक कर रही हो। उनके चूतड पेन्डुलम की तरह दोनों तरफ झूल रहे थे। उन्होंने गहरे नीले रंग का डीप गले का चोलीनुमा ब्लाउज मैचिंग पारदर्शी साडी के साथ पहना था। उनकी पीठ तो मानो पूरी नंगी थी सिवाय एक पतली सी पट्टी के जो उनके ब्लाउज को पीछे से संभाले हुई थी। उन्होंने साडी भी काफी नीची बांधी हुई थी जहां से उनके चूतडों की घाटी शुरू होती है। बस यह समझ लो कि कल्पना के लिए बहुत कम बचा था। सारे पत्ते खुले हुए थे।
अगर मुझमें जरा भी हिम्मत होती तो साली को वहीं पर पटक कर चोद देता। पर मैडम के कडक स्वभाव से मैं वाकिफ था और बिना किसी गलत हरकत के मन ही मन उनके नंगे जिस्म की कल्पना करते हुए चुप चाप उनके पीछे पीछे चलता रहा। मैडम ने कल्पना के लिए बहुत ही कम छोडा था। साडी भी कस कर लपेटे हुई थी जिससे कि उनके मादक चूतड और उभर कर नजर आ रहे थे और दोनों चूतडों की थिरकन साफ साफ देखी जा सकती थी। मैंने गौर किया कि चलते वक्त उनके चूतड अलग अलग दिशाओं में चल रहे थे। पहले एक दूसरे से दूर होते फिर एक दूसरे के पास आते। मानो उनकी गान्ड खुल बन्द हो रही हो। जब दोनों चूतड पास आते तो उनकी साडी गान्ड की दरार में फंस जाती थी। यह सीन मुझे बहुत ही उत्तेजित कर रहा था और मन कर रहा था कि साडी के साथ साथ अपने लन्ड को भी उनकी गान्ड की दरार में डाल दूं। बडा ही गुदाज बदन था सोनम मैडम का।
लैब तक पहुंचते पहुंचते मेरी हालत खराब हो गई थी और मुझे लगने लगा कि अब और नहीं रूका जाएगा। लैब के दरवाजे पर पहुंच कर मैडम एकाएक रूक कर पलटी और मुझसे ऊपर की सेल्फ के केबल कनेक्शन जांचने को कहा। उनकी इस अचानक हरकत से मैं संभल नहीं पाया और अपने आप को संभालने के लिए अपने हाथ उनकी कमर पर रख दिए। मैडम ने एक दबी मुस्कराहट के साथ कहा “कोई शैतानी नहीं” और मेरे हाथ अपनी कमर से हटा दिए। मैंने झेंपते हुए उनसे माफी मांगी और लैब में ऊपर की सेल्फ से कम्प्यूटर हटाने लगा। मैडम भी उसी सेल्फ के पास झुककर नीचे के केबल देखने लगी। उनकी साडी का पल्लू सरक गया जिससे कि उनकी चूचियों का नजारा मेरे सामने आ गया। हाय क्या कमाल की चूचियां थीं।
एक पल को तो लगा कि दो चांद उनकी चोली में से झांक रहे हों। वो ब्रा नहीं पहने थी जिससे कि चूची दर्शन में कोई रूकावट नहीं थी। और काम करना मेरे बस में नहीं था। मैं खडे खडे उस खूबसूरत नजारे को देखने लगा। चोली के ऊपर से पूरी की पूरी चूचियां नजर आ रही थीं। यहां तक कि उनके खडे गुलाबी निप्पल भी साफ मालूम दे रहे थे। शायद उन्हें मालूम था कि मैं ऊपर से फ्री शो देख रहा हूं। इसीलिए मुझे छेडने के लिए वो और आगे को झुक गई जिससे उनकी पूरी की पूरी चूचियां नजर आने लगीं। हाय क्या नजारा था। मैं खुशी खुशी चूचियों की घाटी में डूबने को तैयार था। ऐस लगता था मानो दो बडे बडे कश्मीरी सेव साथ साथ झूल रहो हों। एकाएक मैडम ने अपना सर ऊपर उठाया और मुझे अपनी चूचियों को घूरते हुए पकड लिया। जब हमारी नजर मिली तो अपने निचले होठ को दांतों में दबा कर मुस्कराते हुए बोली “ऐ क्या देखता है”। मैं सकपका गया और कुछ भी नहीं बोल पाया। मैडम ने मेरे चूतडों पर हल्की सी चपता जमा कर कहा ” शैतान कहीं के। फ्री शो देख रहा है”।
मेरा चेहरा लाल हो गया उनके मुस्कराने के अन्दाज से मैं और भी उत्तेजित हो गया और मेरा लौंडा जीन्स के अन्दर ही तन कर बाहर निकलने को बेचैन होने लगा। मैंने अपनी जीन्स को हिला कर लन्ड को ठीक करने की कोशिश की पर मुझे इसमें कामयाबी नहीं मिली। लन्ड इतना कडा हो गया था कि पूछो मत। बस ऊपर ही ऊपर होता जा रहा था और मेरी जीन्स उठती ही जा रही थी। मैडम ने मेरी परेशानी भांप ली और शरारती मुस्कराहट के साथ बोली “ये तुमने पैन्ट में क्या छुपाया है जरा देखूं तो मैं भी” जब तक मैं कुछ बोलूं उन्होंने खडे होकर मेरे लन्ड को पकड लिया और पैन्ट के ऊपर ही से कस कर दबा दिया। “हाय बडा तगडा लगता है तुम्हारा तो। बडा बेताब भी है। बस ऐसा ही लन्ड तो मुझे पसन्द है”।
मैं तो हक्का बक्का रह गया। मैडम सोनम मेरे साथ फ्लर्ट कर रही हैं। मिस आइस मैडेन का यह गरम रूख देख कर मेरी तो बोलती ही बन्द हो गई और मैं उनकी हरकतें देखता रह गया। चूंकि मैं टेबल के ऊपर खडा था इस लिए मेरा लन्ड उनके मुंह की ठीक सीध में था। वो अपने चेहरे को और पास लाईं और पैन्ट के ऊपर ही से मेरे लन्ड को चूमते हुए बोली “इसे जरा और पास से देखूं तो क्यों इतना अकड रहा है” ऐसा कहते हुए मैडम सोनम ने मेरी जीन्स की जिप खोल दी। मैं आम तौर पर अन्डरवियर नहीं पहनता हूं। लिहाजा जिप खुलते ही मेरा लन्ड आजाद हो गया और उछलकर उनके चेहरे से जा टकराया।
“हूं ये तो बडा शैतान है। इसे तो सजा मिलनी चाहिए” मैडम ने अपने सेक्सी मुंह को खोला और मेरे सुपाडे को अपने रसीले होठों में दबा लिया। मैं तो मूक दर्शक बन कर सातवें आसमान में पहुंच गया था। जिस मैडम सोनम के पीछे सारा आफिस दीवाना था और जिनके बारे में सोच सोच कर मैंने भी औरों की तरह कई कई बार मुठ मारी थी यहां एक रंडी की तरह मेरा लौंडा चूस रही थी। मैंने मैडम का सर पकड कर अपने लौंडे पर दबाया और साथ ही साथ अपने चूतडों को आगे धक्का दिया। एक ही झटके में मेरा पूरा लन्ड मैडम के मुंह में कंठ तक घुस गया। उनका दम घुटने लगा और उन्होंने अपना सिर थोडा पीछे किया। मुझे लगा कि अब मैडम मुझे मेरे उतावलेपन के लिए डांटेगीं।
मैं बोला “सोरी मैडम मैं अपने पर काबू नहीं रख पाया”। उन्होंने बोलने से पहले मेरा लन्ड अपने मुंह से निकाला और मुस्कुराई “धत पगले। मैं तुम्हारी हालत का अन्दाजा लगा सकती हूं। लेकिन ये मैडम मैडम क्या लगा रखी है। तुम मुझे सोनम कह कर बुलाओ ठीक है ना। अब मुझे अपना काम करने दो”। ऐसा कह कर मैडम ने एक हाथ में मेरा लन्ड पकडा और शुरू हो गई उसका मजा लेने में। वो लन्ड को पूरा का पूरा बाहर निकाल कर फिर दोबारा अन्दर कर लेती। मैं भी धीरे धीरे कमर हिला हिला कर उनका मुंह चोदने लगा। कुछ देर बाद वो बोली “बस इसी तरह खडे खडे कमर हिलाने में क्या मजा आएगा। थोडा आगे बढो”।
मैंने उनका इशारा भांप लिया और पहले उनके गालों को सहलाया। फिर धीरे धीरे हाथो को नीचे खिसकाते हुए उनकी गर्दन तक पहुंचा और उनकी चोली का स्ट्रैप खोल दिया। दोनों मस्त चूचियां उछल कर बाहर आ गई। मैडम ने भी मेरी जीन्स खोल दी और बिना लन्ड मुंह से बाहर किए नीचे उतार दी। फिर लन्ड चूसते हुए वो अपनी चूचियों को मेरी जांघों पर रगडने लगी। मैंने थोडा झुक कर उनकी चूचियों को पकडा और कस कस कर मसलने लगा। जल्द ही हम दोनों काफी उत्तेजित हो गए और हमारी सांसें तेज हो गई। मैं बोला “मैडम मैं पूरी तरह से आपको मजा नहीं दे पा रहा हूं। अगर इजाजत हो तो मैं भी नीचे आ जाऊं।” मैडम ने मुझे गुस्से से देखा और हौले से सुपाडे को काट लिया। वो बोली “तुम मेरी बात नहीं मान रहे हो। अगर मैं बोलती हूं कि मुझे सोनम कह कर पुकारो तो तुम मुझे सोनम ही कहोगे मैडम नहीं।”
मैं बोला “सॉरी सोनम अब तो मुझे नीचे आने दो।” सोनम ने मेरा हाथ पकड कर नीचे उतरने में मदद की। नीचे आते ही मैंने उनके चूतडों को पकडा और अपने पास खींच कर होठों को चूमने लगा। अब मैं उनके होठों को चूसते हुए एक हाथ से चूतड सहला रहा था जबकि मेरा दूसरा हाथ उनकी चूचियों से खेल रहा था। सोनम मेरे लन्ड को हाथ में पकड कर सॉफ्ट टॉय की तरह मरोड रही थी। मैंने सोनम की साडी पकड कर खींच दी और पेटीकोट का भी नाडा खोल कर उतार दिया। सोनम ने भी मेरी टी शर्ट उतार दी और हम दोनों ही पूरी तरह नंगे हो गए। एक दूसरे को पागलों की तरह चूमते हुए हम वहीं जमीन पर लेट गए। चूत की खुशबू पा कर मेरा लन्ड फनफनाने लगा। सोनम भी गर्म हो गई थी और अपनी चूत मेरे लन्ड पर रगड रही थी। हम दोनों एक दूसरे को कस कर जकडे हुए किस करते हुए कमरे के कालीन पर लोट पोट हो रहे थे। कभी मैं सोनम के ऊपर हो जाता तो कभी सोनम मेरे ऊपर। काफी देर तक यूं मजे लेने के बाद हम दोनो बैठ कर अपनी फूली हुई सांसों को काबू में करने की कोशिश करने लगे।
सोनम ने अपने बाल खोल दिए। मैं बालों को हटा कर उनकी गर्दन को चूमने लगा। फिर दोबारा उनके प्यारे प्यारे होठों को चूमते हुए उनकी चूचियों से खेलने लगा। सोनम मेरा सिर पकड कर अपनी रसीली चूचियों पर ले गई और अपने हाथ से पकड कर एक चूची मेरे मुंह में डाल दी। मैं प्यार से उनकी चूचियों को बारी बारी से चूमने लगा। वो काफी गरम हो गई थी और मुझे अपने ऊपर ६९ की पोजिशन में कर लिया। मैं उनकी रसीली चूत का अमृत पीने लगा। सोनम अपनी जीभ लपलपा कर मेरे लौंडे को चूसे जा रही थी। जब भी हम में से कोई भी झडने वाला होता तो दूसरा रूक कर उसको संभलने का मौका देता। कई बार हम दोनों ही किनारे तक पहुंच कर वापस आ गए। हमारी वासना का ज्वार बढता ही जा रहा था और बस अब एक दूसरे में समा जाने की ही बेकरारी थी।
सोनम ने मुझे अपने ऊपर से उठाया और खुद चित्त हो कर लेट गई। अपने दोनों पैर उठा कर अपने हाथों से पकड लिए और मुझे मोर्चे पर आने को कहा।मैंने भी सोनम के दोनों पैरों को अपने कन्धों पर टिकाया और लन्ड को उसकी चूत के मुंह पर रख कर धक्का लगाया। मेरा लोहे जैसा सख्त लौंडा एक ही झटके में आधा धंस गया। सोनम के मुंह से उफ की आवाज निकली पर अपने होठों को भींच कर नीचे से जवाबी धक्का दिया और मेरा लन्ड जड तक उसकी चूत में समा गया। फिर मेरी कमर पर हाथ रख कर मुझे थोडा रूकने का इशारा किया और बोली “तुम्हारा लन्ड तो बडा ही जानदार है। एक झटके में मेरी जान निकाल दी। अब थोडी देर धीरे धीरे अन्दर बाहर कर के मजा लो।”
सोनम के कहे मुताबिक मैं धीरे धीरे उसकी चूत में लन्ड अन्दर बाहर करने लगा। चूत काफी गीली हो चुकी थी इसलिए मेरे लन्ड को ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही थी। मैं धीरे धीरे चूत चोदते हुए सोनम की मस्त चूचियों को भी मसल रहा था। बडी ही गजब की चूचियां थी उसकी। एक हाथ में नहीं समा सकती थी। पर इतनी कडी मानो कन्धारी अनार। वो चित्त लेटी हुई थी पर चूचियों में जरा भी ढलकाव नहीं था और हिमालय की चोटियों की तरह तन कर ऊपर को खडी थी। उत्तेजना की वजह से उसके डेढ इन्च के निप्पल भी तने हुए थे और मुझे चूसने का आमन्त्रण दे रहे थे।
मै दोनों निप्पलों को चुटकी में भर कर कस कस कर मसल रहा था। सोनम भी सिसकारी भर भर कर मुझे बढावा दे रही थी। आखिर मुझसे नहीं रहा गया और उसके पैरों को कन्धे से उतार कर जमीन पर सीधा किया और उसके ऊपर पूरा लम्बा होकर लेट गया। सोनम ने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को पकड कर पास पास कर लिया और मैं दोनों निप्पलों को एक साथ चूसने लगा। ऐसा लग रहा था कि सारी दुनिया का अमृत उन चूचियों में ही भरा हो। मैं दोनों हाथों से चूचियों को मसल रहा था। चूचियों की मसलाई और चुसाई में मैं अपनी कमर हिलाना ही भूल गया। तब सोनम अपने हाथ नीचे करके मेरे चूतडों पर ले गई और उन्हें फैला कर एक उंगली मेरी गान्ड में पेल दी। मैं चिहुंक गया एक जोरदार धक्का सोनम की चूत में लगा दिया। सोनम खिलखिला कर हंस पडी और बोली “क्यों राज्जा मजा आया। अब चलो वापस अपनी ड्यूटी पर।”
सोनम का इशारा समझ कर मैं वापस कमर हिला हिला कर उसकी चूत चोदने लगा। सोनम भी नीचे से कमर उठाने लगी और धीरे धीरे हम दोनों पूरे जोश के साथ चुदाई करने लगे। मैं पूरा लन्ड बाहर खींच कर तेजी से उसकी चूत में पेल देता। सोनम भी मेरे हर शॉट का जवाब साथ साथ देती। पूरे कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। जैसे जैसे जोश बढता गया हमारी रफ्तार भी तेज होती गई। आखिर उसकी चूचियों को छोड मैंने उसकी कमर को पकड कर तूफानी रफ्तार से चुदाई शुरू कर दी। सोनम भी कहां पीछे रहने वाली थी। वो भी मेरी गर्दन में हाथ डाल कर पूरे जोश से कमर उछाल रही थी। अब ऐसा लगने लगा था कि हम दोनों ही अपनी अपनी मंजिल पर पहुंच जाएंगे पर सोनम तो एक्सपर्ट चुदक्कड थी और अभी झडने के मूड में नहीं थी। उसने अपनी कमर को मेरी कमर की दिशा में ही हिलाना शुरू दिया। इससे लन्ड अन्दर बाहर होने के बजाए चूत के अन्दर ही रह गया। मेरी पीठ पर थपकी दे कर उन्होंने रफ्तार कम करने को कहा और बोली “थोडा सांस ले ले फिर शुरू होना। इतनी जल्दी झडने से मजा पूरा नहीं आएगा।”
मैंने किसी तरह अपने को संभाल कर रफ्तार कम की। मैं अब उसके रसीले होठों को चूसते हुए हौले हौले चोदने लगा। जब हम दोनों की हालत संभली तो दोबारा सोनम ने फुल स्पीड चुदाई का इशारा किया और फिर से मैं पहले की तरह चोदने लगा। रूक रूक कर चुदाई करने में मुझे भी मजा आ रहा था। हमारी इस चुदाई का दौर आधा घन्टे से भी ज्यादा चला। कई बार मेरे लन्ड में और उसकी चूत में उफान आने को हुआ और हर बार हमने रफ्तार कम करके उसे रोक लिया। हाालांकि कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनो पसीने से नहा गए। आखिर सोनम ने मुझे झडने की इजाजत दी। मैं तूफान मेल की तरह उसकी चूत में धक्के लगाने लगा। वो भी कमर उछाल उछाल कर मेरी हर चोट का जवाब देने लगी। चरम सीमा पर पहुंच कर मैं जोर से चिल्लाया “सोनमआआआआ आआआआ मेरी जान। मैं आया” और उसकी चूत में जड तक लन्ड घुसा कर अपना सारा उफान उसके अन्दर डाल दिया। सोनम ने भी मेरी पीठ पर अपने पैर बांध कर मुझे कस कर चिपका लिया और चीखती हुई झड गई। Antarvasna
दोस्तो, सब कैसे हो !उम्मीद है Sex Stories सब ठीक ठाक होंगे। सभी पाठकों और सबसे पहले आदरणीय गुरूजी को प्रणाम !
आप सबका धन्यवाद जो आप सबने मेरी कहानी ( कैसे बन गया मैं एक चुद्दकड़ गांडू ) को पसंद किया। उसके बाद भी मैंने कुछ कहानिया भेजीं हैं। उम्मीद है कि आपको पंसद आई होंगी।
यह जो कहानी आज लिखने जा रहा हूँ यह आज से ठीक दो महीने पहले की बात है, पापा जी ने घर ऊपर वाला हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया और एयरफोर्स में काम करने वाले मद्रास के रहने वाले एक युगल को दिया। बीवी एयरफोर्स स्कूल में टीचर है। बीवी पर तो नहीं मियां पर मेरी नज़र थी, ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ अन्दर से ही निकलतीं थीं।
जैसे कि आप सब तो जानते ही हैं कि मुझे लौड़ों से कितनी चाहत है !
एक दिन दोपहर की बात है, मैं कॉलेज से घर आया। बहुत गर्मी थी, मैं बाथरूम में नहाने के लिए जाने लगा, दिमाग में आया कि तौलिया तो ऊपर तार पर ही सूख रहा होगा। मैं ऊपर गया, उनका कमरा बंद था, अन्दर से बहसने की आवाजें आ रही थी।
वो बोला- साली ना तेरे में गर्मी है, न सुन्दर ! ऊपर से नखरे हज़ार ! चल मुँह में लेकर इसको चूस !
वो नहीं मानी। मैं चला आया। शाम को ऊपर किसी काम से गया तो अंकल नहा रहे थे, पानी से उनका अंडरवियर चिपका हुआ था और फूले हुए भाग से मालूम हुआ कि लौड़ा मस्त है। मेरी नज़र वहाँ पड़ती देख अंकल ने अन्दर हाथ डाल साबुन लगाने के बहाने साइड से लौड़ा दिखा ही दिया।
क्या मस्त लौड़ा था !
आजकल उनकी रात की शिफ्ट थी, वो नहा कर तैयार होकर चले गए। सुबह वो आठ बजे आते थे और आंटी नौ बजे जातीं थी। घर में कोई नहीं था, मैं अकेला था, कॉलेज ११ बजे जाना था। आंटी चाभी देकर चली गई। अंकल आज लेट थे।
जैसे ही वो आये, झट से कपड़े उतार बाथरूम में घुस गए। उन्होंने आवाज़ दी- मैं नहा रहा हूँ, आया !
मैं भी सिर्फ अंडरवियर पहन बाहर आया। उनकी नज़र मेरे चिकने और लड़की जैसे जिस्म पर थी- वाह बेटा ! चिकने हो ! देखूँ छाती ! कोमल !
बोले- अकेला है ?
जी हाँ ! अकेला ही हूँ !
ऊपर आजा ! मैं भी अकेला हूँ, मिलकर नहाते हैं !
मैं उनके पास गया और एक हाथ से चाबी देते हुए नीचे से लौड़े को मसलते हुए कहा- आप नीचे क्यूँ नहीं आ जाते ! ए.सी में मजा भी आयेगा !
हाय मेरी जान अभी आया !
मेन गेट बंद करते हुए आना !
सोचा- अबे ओ सनी ! तेरी गांड को तो मौज लग जायेगी ! वो भी घर में ही !
मैं शावर के नीचे नहाने लगा, अंकल भी आ गए। मैं उनसे चिपक गया, वो मेरे होंठ चूसने लगे। मैं हाथ में लौड़ा लेकर सहलाने लगा। पानी में और भी आनंद मिलने लगा।वाह मेरे गांडू !
वो मेरे चूतडों को पकड़ कर मसलने लगे। बेटा ! कितनी गांड मरवाता है कितने मस्त चूतड़ हैं !
मार के देख लेना जान ! कितने मस्त हैं ! आपका लौड़ा रात को जबसे देखा है चूसने को दिल कर रहा है।
हाँ हाँ चूस न !
मुझे पता है आंटी नहीं चूसती !
भोसड़ी की बहुत हरामी है !
ऐसे ही है अंकल ! मैंने उनका कच्छा उतार दिया और नीचे झुक कर मुँह में डाल लिया। मुँह में जाते ही उनका खड़ा होने लगा, देखते ही तन कर खड़ा हो गया।
आह मेरे लाल ! चूसता जा !
६९ में होकर मेरी गांड चाटने लगे, साबुन गांड पर लगा ऊँगली डालते हुए मुझे पूरा मजा देने लगे।
आह अह अह ! अंकल आई लव योउर लौड़ा !
चूस बेटा ! अच्छा लगा, बहुत अच्छा !
आह आह ! बिस्तर में चले अंकल?
ज़रूर !
तौलिए से पोंछ कर उठा मेरे ही कमरे में मेरे ही बिस्तर पर डाल दिया। अंकल ने दिल खोल कर चुसवाया, मैंने भी दिल से चूसा ऐसा लौड़ा।
मुझे घोड़ी बना पीछे से लौड़ा गांड पर रख दिया, मैंने पकड़ ठिकाने पर लगा दिया। पहले धक्के से थोड़ा सा घुसा, दो चार धक्कों से पूरा अन्दर घुस गया।
आह अंकल ! अब गांड मारो !
आह ओह !मेरे बेटा ! बहुत मस्त निकला ! तेरी गांड रोज़ मारूँगा ! क्या माल है ! ऐसा मजा तो मेरी औरत ने नहीं दिया !
आह अंकल ! फाड़ डालो मेरी गांड !
उनका लौड़ा ज़बरदस्त तरीके से मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा था।
चल ऊपर बैठ जा ! देखूँ कैसे उछल उछल कर इस पर बैठेगा ! तुझे भी मजा आ जायेगा ! वैसे भी तेरी पोली पोली गांड जब जांघों से घिसेगी तो मजे का आलम छा जायेगा मेरी जान !
लो अंकल आ गया ऊपर !
चल इस पे बैठता जा साले, नाटक मत कर, बहनचोद, सब जाने तू !
संभालो अंकल ! मैं अपने तरीके से आराम से पूरा लौड़ा निगल गया।
औ अह मेरी जान ! उछल ! अह ओह अह ओह ! बेटा मजेदार माल है ! फाड़ दूंगा तेरी ! आज से तू मेरी औरत ! क्या मुझे रोज़ मरवाया करेगा?
ज़रूर अंकल ! बाहर मुँह मारने से अच्छा है यहीं मरवाया करूँगा बिना किसी डर से !
अंकल ने एकदम मुझे पलटा और मेरे ऊपर आ गए दोनों टांगें कन्धों पर रखवा कर बीच से मोर्चा फतह किया। अब वो झड़ने वाले थे, वो फाड़ देने पर उतर आये थे। यह अंदाज़ मुझे स्वर्ग दिखा रहा था।
ओह बेटा !
वह जोर जोर से झटके लगाने लगे। कुछ मुझे दर्द भी हुआ, लेकिन सब भूल कर मैं चुदवाता रहा। फ़िर अंकल एकदम मुझ पर गिर गए और सारा माल अन्दर डाल दिया।
दोस्तो, मेरी तो गांड को मौज लग गई। वो ड्यूटी से आते और मुझे चोदने के बाद ही कॉलेज जाने देते। वह पूरे मजे लूट रहे हैं।
अब तो आंटी का पेट बाहर आने लगा है, उनका भाई कुछ दिनों में उनको लेने आने वाला है ताकि बच्चे की और माँ की देख रेख किसी घर की सयानी की देख रेख में हो।
मैं और अंकल बहुत खुश हैं। बोलते हैं- अब से तू मेरी पत्नी है ! तू घबरा मत, तुझे मैं नए लौड़े दिलवाता रहूँगा। किसी दिन हम उसके एक दोस्त के घर जाकर चुदाई करेंगे, उसके बारे में जल्दी लिखूंगा। Sex Stories
सीपी मेरा दोस्त है उसका नाम Hindi Sex Stories श्याम है. वो औरतों के कपड़े बनाता है, उसका काम औरतों के कपडे सीने का काम है. सीपी एक अच्छा लड़का है. वो सिर्फ अपने काम से मतलब रखता है. उसने बहुत सारी औरतों और लड़कियों के कपडे बनाये. सीपी कभी गलत नहीं सोचता है. सीपी कभी किसी औरत या लड़की के घर कपड़ों का नाप लेने नहीं जाता है, सभी उसकी दुकान पर आती हैं.
मैं कभी कभी सीपी की दुकान में जाता और जब सीपी औरतों के नाप लेता तो मेरी नजर औरतों के वक्ष पर जाती है. सीपी फिर मुझे डाँटता है और बोलता है- आदमी को अपने काम में गलत विचार नहीं लाना चहिए, नहीं तो वो कभी भी काम नहीं कर सकता है.
कुछ दिन पहले की बात है, मैं और पवन और सीपी साथ में बैठ कर चाय पी रहे थे और सीपी कुछ भी नहीं बोल पा रहा था. हमने पूछा- सीपी, क्या हुआ? आजकल तुम परेशान दिख रहे हो और ज्यादा मन लगाकर काम भी नहीं कर रहो हो?
सीपी कुछ नहीं बोला और उसकी आँख से आँसू आने लगे.
फिर मैंने पूछा- सीपी, तुझे अपनी दोस्ती की कसम है, जल्दी बोल, क्या हुआ?
फिर सीपी खामोश रहा और फिर थोड़ी देर बाद बोला- यार! मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है और अब मैं यह काम भी नहीं कर सकता हूँ.
मैंने बोला- मुझे साफ-साफ बता कि क्या हुआ!
सीपी ने सारी बात बताई.
कुछ 10-15 दिन पहले एक लड़की, उसका नाम रानी है, आई और बोली- मुझे मेरे माप के कपड़े बना के दो!
वो लड़की इतनी सुन्दर थी कि पहले मैंने ऐसी लड़की पहले नहीं देखी थी क्योँकि मेरे यहाँ ज्यादातर औरतें आती हैं. वो अपने पापा के साथ आई थी. उसके पापा बैठ गये और फोन से बात करने लगे. मैं उसका माप ले रहा था, मैंने उसे छुआ तो वो लडकी मचल चुकी थी, वो बोली- पहली बार मुझे किसी लड़के ने छुआ है. पहले मेरे कपड़े औरतें ही बनाती थी.
और फिर और माप लिया और उसके स्तनों को छुआ तो वो लड़की कुछ अलग महसूस कर रही थी. फिर उसके नीचे का माप लिया तो वो लड़की कुछ अगल नजर से देख रही थी. फिर वो उसके पापा के साथ चली गई. मुझे वो लड़की अच्छी लगी थी पर मैं अपनी पत्नी से ही प्यार करता हूँ.
दो तीन दिन बाद रानी का फोन आया- मुझे शादी में जाना है, कृपा करके आप मेरे घर पर आकर मेरा माप ले लें!
पता नहीं क्या हुआ, मैं कभी किसी के घर पर माप लेने नहीं जाता हूँ पर मैं उसके घर गया.
उसने मुझे ठंडा पिलाया और मेरा पूरा शरीर ठंडा हो गया. फिर उसके पापा किसी काम के सिलसिले में बाहर चले गये.
अब वो घर पर अकेली थी. मैं उसका माप ले रहा था. पहले उसकी ब्रा का माप लिया तो उसने मुझे पकड़ लिया.
मैं बोला- ये गलत है!
फिर मैंने उसके नीचे का माप लिया तो वो बोली- पहले का साइज ठीक नहीं था, अच्छे से लो!
फिर उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिये. उसका शरीर गोरा था, मैं उसके स्तनों को दबाने लगा.
वो बोली- क्या कर रहो हो? माप लो!
मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं उसकी चूचियाँ मुँह से खा रहा था.
वो बोली- मत करो, छोड़ दो मुझे!
अब नहीं छोड़ सकता हूँ!
मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह रखा और चाटने लगा.
फिर उसने अपना हाथ मेरी पैन्ट के अन्दर डाल दिया और बोली- क्या मैं आपका लण्ड मुँह में ले लूँ?
मैंने लण्ड उसके मुँह में डाल दिया और वो चूसने लगी. अब हम दोनों पागल हो चुके थे.
फिर उसने बोला- लण्ड को मेरी चूत में डालो ना!
मेरे लण्ड की प्यास बढ़ गई और मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला.
उसके मुँह से आऽऽआ आ की आवाजें आने लगी और बोली- हाय! डालो! और जोर जोर से डालो राजा!
फिर मैंने अपना पानी उसके बूब्स पर गिरा दिया. फिर मैंने अपना मुँह धोया और अपनी दुकान पर चला गया.
अब मुझे बस यही लगता है कि मैंने ऐसी गलती क्यों की और अब मैं यह काम नहीं कर सकता!
तो दोस्तो, यह सीपी (श्याम) की देसी कहानी थी. Hindi Sex Stories
मेरी पिछली आपबीती कहानी ‘मेरे Antarvasna दोस्त की बहनों ने मुझे चोदा’ का अगला भाग लेकर आया हूँ मैं !
आप लोगों के मेल मुझे मिले, कुछ लोगों ने बहुत प्यार दिया और कुछ लोगों ने गालियों से सत्कार किया।
तो दोस्तों मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ : चौथी की हवस का शिकार बना मैं
अपने दोस्त की तीन बहनों को तो मैं चोद चुका था पर एक बच गई थी जिसका नाम सोनू था। सोनू सबसे बड़ी थी, उसकी उम्र करीब 25-26 साल की थी और उसकी कुछ महीनों बाद शादी भी होने वाली थी और वो हर वक़्त अपनी शादी की सुहागरात के बारे में सोचती रहती थी।
जब मैं तीनों लड़कियों को चोद रहा था तब वो सोनू हमें खिड़की से देख रही थी। जब मैं तीनो को पूरी तरह से चोद चुका था तब मुझे बहुत शांति मिली। पर मुझे क्या पता था कि एक और हैं चोदने के लिए, वो सबसे बड़ी थी इसलिए मैंने उसके साथ सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा था। पर सोनू के मन में तो बस सेक्स ही घूम रहा था। वो कमरे में आई जिसमें हम चारों बैठे थे, मेरा हाथ पकड़ा, मैं डर गया। उसने मेरा हाथ पकड़ा और एक दूसरे कमरे में ले गई, कमरे की कुण्डी लगा दी। उसकी आँखों में जैसे खून उतर आया था, उसे देख कर मेरी गांड और फट गई। फिर सोनू ने मुझे बेड पर धक्का दे कर लिटा दिया उसकी तीनों बहनें खिड़की से सब कुछ देख रही थी। सोनू ने सीडी प्लेयर पर ‘आशिक बनाया आपने’ का गाना लगा दिया और वो मेरी तरफ देखने लगी। मैंने अपनी आंखे नीचे कर ली क्योंकि वो मुझसे उम्र में बहुत बड़ी थी। अब वो धीरे धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगी।
मैं अपने मन में यही सोच रहा था कि यार जो काम मुझे करना चाहिए था, वो तो यह कर कही है, और डरना इसे चाहिए था, तो डर मैं रहा हूँ। फिर मैंने भी यह फैसला कर लिया कि सोनू जो करना चाहती है, करने देता हूँ। मैं भी तो देखूँ कि एक लड़की में कितना सेक्स होता है। बस फिर क्या था, मैं चुपचाप लेटा रहा, सोनू धीरे धीरे मेरे पैरों को चूमती चूमती ऊपर की ओर आने लगी। पर मुझे कुछ भी नहीं हो रहा था क्योंकि मैं पहले ही तीन लडकियों को अच्छी तरह चोद चुका था।
वो धीरे धीरे मेरे सीने पर आ गई और मेरे सीने को चूमने लगी, फिर गले को चूमने लगी। कुछ देर में सोनू मेरे होंटों को आम की तरह चूसने लगी। दो तीन बार तो सोनू ने मेरे होंटों को काटा भी, पर फिर भी मैं लेटा ही रहा। बहुत देर तक सोनू मेरे होंटों को चूसती रही और एक ही गाना बार बार चलता रहा। सोनू अपना एक हाथ धीरे धीरे नीचे की ओर ले गई और मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया। लंड तो गहरी नींद में सो रहा था पर फिर भी सोनू मेरे लंड को नींद से जगाने में लगी हुई थी। सोनू ने मेरी पैंट की जिप खोली और मेरा लंड हाथ में ले लिया।
उसके गरम हाथों ने जैसे ही मेरा लंड पकड़ा, मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई और मैंने सोनू को जोर से अपनी बाहों में भर लिया, इतनी जोर से पकड़ा कि सोनू चिल्ला पड़ी। खिड़की से सोनू की तीनों बहनें सब देख रही थी। मैंने सोनू से बोला- सोनू जी, पहले आप यह खिड़की बंद कर दो। नहीं तो तुम चारों बहनें मुझे मेरे घर नहीं जाने दोगी और मेरे अन्दर इतनी ताकत नहीं है कि एक के बाद एक की चुदाई कर सकूँ !
सोनू ने खिड़की बंद कर दी और फिर से वो मेरे ऊपर आ गई। अब सोनू धीरे धीरे ऊपर से नीचे की ओर चूमते हुए आने लगी और मेरे ठंडे लंड को अपने मुँह की गर्मी देने लगी। कुछ देर तक सोनू मेरे लंड को चूसती रही। सोनू ने मेरे लंड को चूसते-चूसते खड़ा कर दिया। फिर क्या था- लोहा गरम था, बस चोट मारना बाकी था। मैंने सोनू को कुतिया की तरह झुकने को कहा पर उसके मन में तो कुछ और ही चल रहा था।
सोनू बोली- अभी रूको मेरी जान ! जल्दी क्या है, अभी तो खेल बहुत देर तक चलेगा ! अभी से चोक्के-छक्के लगाओगे तो जल्दी आउट हो जाओगे !
बस इतना बोला और सोनू ने अपनी चूत मेरे मुँह पर सटा दी और बोली- मैं ही सब करुँगी या तू भी कुछ करेगा ? चाट मेरी चूत को !
और हम 69 की पोजीशन में आ गए। सोनू मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत ! बहुत देर तक यही चुसमचासी होती रही।
मैं उसकी चूत चूसते-चूसते थक गया था तो मैंने अपनी दो उंगलियाँ उसकी चूत में डाल दी। वो शायद पहले भी किसी से चुद चुकी थी, दो उंगलियों से साली को कुछ भी नहीं हुआ पर फिर भी मैं दो उंगलियाँ अन्दर बाहर करता रहा। धीरे धीरे दो से तीन उंगलियाँ अन्दर कर दी। जैसे ही मैंने तीन उंगलियाँ अन्दर की, सोनू तो उछल गई और बोली- हाय, यह क्या किया तूने ! कितना मज़ा आ रहा था चूसने और चुसवाने में ! अब तूने मेरी चूत में खुजली कर दी ! अब तो बस तू मेरी चूत फाड़ ही डाल ! अब नहीं रुका जायेगा ! अब तू मुझे कुतिया बना या घोड़ी, बस चोद दे मुझे तू !
फिर क्या था, सोनू को मैंने बेड पर पीठ के बल लिटा दिया, उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखी और अपने एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर सोनू की चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। लंड की रगड़ से सोनू और पागल हो गई और मुझे गाली दे कर बोली- कुत्ते ! अब अपने लंड को चूत में तो डाल !
पर मैं कहाँ सुनने वाला था, मैं तो बस उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ता रहा, बहुत देर तक सोनू मुझे गन्दी गन्दी गलिया देती रही और मैं रगड़ता रहा। अब सोनू की चूत से चिकना सा पानी निकलने लगा, सोनू बोली- कुत्ते, डाल दे चूत में ! मैं झड़ने वाली हूँ !
मैंने सोनू के चिकने पानी को अपने लंड पर लगाया और जोर का धक्का मारा, सोनू एक दम से चीख पड़ी- आआआआआआआआआआअ कुत्ते मार डाला !
मैंने सोनू की चूत में जैसे ही अपना लंड डाला वो झड़ गई, मेरा पूरा लंड उसकी चूत के पानी से नहा गया और वो शांत पड़ गई। पर मैं नहीं झड़ा था, मैं सोनू की चूत चोदता रहा पर सोनू की चूत मारने में मज़ा नहीं आ रहा था क्योंकि वो पहले भी किसी से चुद चुकी थी। फिर मैंने सोनू से बोला- सोनू, तेरी चूत मारने में मज़ा नहीं आ रहा ! मैं तो तेरी गांड मारुँगा !
पर सोनू ने मना कर दिया पर मैं भी बहुत जिद्दी था, मैंने सोनू की चूत एक कपड़े से साफ की और चूत के दाने को अपनी जीभ से सहलाने लगा। धीरे धीरे सोनू को फिर से जोश चढ़ने लगा। सोनू कुछ ही देर में फिर से पागलों की तरह मेरे सर को पकड़ के अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं समझ गया कि सोनू अब पूरी तरह जोश में है।
सोनू मुझसे बोली- फाड़ दे मेरी चूत को !
पर मुझे तो गांड मारनी थी, बस मैं खड़ा हो गया और अपने घर जाने लगा। सोनू सेक्स में पूरी तरह तड़प रही थी। सोनू बोली- कहाँ जा रहे हो तुम?
मैंने बोला- अपने घर जा रहा हूँ !
फिर सोनू बोली- मुझे तड़पता हुआ छोड़ कर क्यों जा रहे हो ?
मैंने बोला- तेरी चूत मारने में मुझे बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा है, तेरी चूत मारने से तो अच्छा है कि मैं मुठ ही मार लूँ !
सोनू तड़पती हुई बोली- प्लीज़ ! राहुल, मुझे ऐसे छोड़ कर मत जाओ !
मैंने बोला- मैं एक ही शर्त पर तुझे चोदूँगा !
वो बोली- क्या?
मैंने कहा- मुझे तेरी गांड मारनी है, अगर तुझे गांड मरवानी हैं तो बोल, नहीं तो मैं चला !
सोनू बोली- नहीं राहुल ! गांड मरवाने से मुझे बहुत दर्द होता है, मैं वो दर्द सहेन नहीं कर पाती !
मैंने उसे भरोसा दिलाया कि दर्द नहीं होने दूंगा। फिर सोनू अपनी गांड मरवाने के लिए तैयार हो गई। मैंने पास पड़ी बोरोप्लस की क्रीम अपनी बड़ी उंगली से सोनू की गांड पर लगाई और वो उंगली सोनू की गांड में डाल दी सोनू ने थोड़ी सी सिसकी भरी, मैं उंगली को सोनू की गांड में अन्दर बाहर करने लगा और जैसे जैसे मैं अपनी उंगली की स्पीड तेज करता, वैसे वैसे सोनू की सिसकियाँ भी तेज हो जाती।
सोनू बस यही बोल रही थी- नहीं राहुल ! नहीं राहुल ! आआआआआआईईईईईईईऊऊऊऊऊ !
उसकी चीखें धीरे धीरे कामुक स्वर में बदलती जा रही थी और कसी गांड धीरे धीरे नरम होती जा रही थी। मैंने भी अपनी एक उंगली की जगह दो उंगलियाँ सोनू की गांड में डाल दी और फिर अब सोनू की गांड मेरे लंड के लिए तैयार थी।मैंने एक बार फिर से बोरोप्लस क्रीम सोनू की गांड पर लगाई और अपने लंड को धीरे धीरे सोनू की गांड में डालना शुरू किया। अभी बस अग्र भाग ही अन्दर गया था कि सोनू चिल्ला पड़ी। मैंने सोनू को थोड़ा प्यार किया और उसे घुटनों और हाथों के बल झुका दिया। उसकी टाँगों और जांघों के बीच में दो तकिये लगा दिये जिससे सोनू की गांड ठीक मेरे लंड पे आ गई। अब उसकी गांड भी सही तरह से खुल गई और मेरे लंड के निशाने पर भी आ गई। मैंने एक बार फिर से सोनू की गांड में अपना लंड डालना शुरू किया। धीरे धीरे मेरा लंड सोनू की गांड की गहराई में समा गया। पहले तो मैंने धीरे धीरे अपना लंड सोनू की गांड में अन्दर-बाहर किया और फिर धीरे धीरे मेरे लंड की स्पीड तेज होने लगी। सोनू की सिसकियाँ चीखों में बदलने लगी आआआआआईईईईईईइ माम्म्म्मम्म मैं मार गईईईईईईई राहुल नहींईईईईईइ !
पर मैं तो अपने ही जोश में था, मैंने उसकी एक नहीं सुनी और जोर जोर के धक्के मारने लगा। धीरे धीरे सोनू का दर्द भी कम होने लगा और उसे मज़ा आने लगा। कुछ देर में सोनू खुद ही अपनी गांड उठा उठा कर मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी गांड में ले जाती और बोली- और जोर से ! मज़ा आ रहा हैं राहुल ! और चोदो मुझे !
पर अब मैं कुछ ही देर का मेहमान था, 5-6 धक्कों के साथ मैं उसकी गांड में ही झड़ गया पर सोनू अभी भी नहीं झड़ी थी। मैंने उसकी चूत के दाने को चूसना शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में सोनू भी झड़ गई और हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर कुछ देर तक लेटे रहे और किस करते रहे।
फिर मैं अपने घर जा कर सो गया।
उस दिन के बाद मैं उनके पास बहुत कम जाने लगा पर जब भी जाता तो बस अपनी गर्लफ्रेंड रीतू को ही चोदता था और किसी को नहीं !
फिर कुछ ही महीनों बाद दो लड़कियों की एक साथ शादी हो गई और कुछ साल बाद दो और लड़कियों की शादी हो गई।
मेरा यह सफ़र यहीं खत्म होता है, मेरी अगली कहानी में आप पढ़ेंगे कि किस तरह मैंने एक लड़के को चोदा जिसे चुदने का बहुत शौक था।
दोस्तो, मेरी कहानी आप को कैसे लगी, मुझे जरूर बतायें ! आपके मेल से हम लोगों का होंसला बढ़ता है।
धन्यवाद ! Antarvasna
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