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हैलो फ्रेंड्स, सेक्स स्टोरी की इस दुनिया में मेरा आप सभी को नमस्कार। मेरा नाम समीरा है, मुझे लाइफ एन्जॉय करना पसंद है। मैं बॉलीवुड हीरोइन बनना चाहती हूँ.. मैं दिखने में ईशा गुप्ता जैसी हूँ और उसी की स्टाइल कॉपी करती हूँ।

कभी-कभी घर में तो सिर्फ़ बिकिनी पहने रहती हूँ.. वैसे भी मैं बाहर भी शॉर्टस और टॉप पहने घूमती हूँ। मेरे इस उन्मुक्त रवैये के कारण सभी लौंडे मुझे घूर-घूर कर देखते रहते हैं। मुझे भी अपनी बॉडी एक्सपोज़ करने में मजा आता है।

चलो सेक्स स्टोरी पर आती हूँ।
जैसे कि मैंने बताया कि मुझे हीरोइन बनना है पर मैं बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के किसी भी इंसान को नहीं जानती थी।

इसके लिए मैंने एक लड़के को पटाया जो मीडिया से जुड़ा हुआ है और उसके साथ पार्टीज और बाकी फंक्शन में जाना शुरू किया। वैसे तो सभी मुझे देखते थे पर कोई बात नहीं करता था। सो मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे कुछ लोगों से इंट्रोड्यूस किया, जिनमें से कुछ डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स थे।

एक दिन ऐसे ही एक पार्टी में एक मध्यम सा आदमी मेरी तारीफ़ करता हुआ बोला- तुम्हारा फिगर काफी अच्छा है.. फिगर का साइज़ क्या है?
मैंने नॉटी सी स्माइल देते हुए कहा- साइज़ 36-26-38 का है।
वो- वाह क्या मस्त फिगर है.. तुम हमारी बॉलीवुड में ट्राय क्यों नहीं करती हो?
मैं- करना तो चाहती हूँ, पर..
वो- पर क्या..! एक काम करो कल मेरे ऑफिस आ जाना.. वहीं स्टूडियो में तुम्हारा ऑडिशन ले लेंगे।
मैं- ओह्ह थैंक यू सर.. थैंक्स अ लॉट.. आय विल कम टुमारो।
वो- यू वेलकम और हाँ मेरा नाम दिनेश कपूर है.. सो कॉल मी दिनेश।
मैं- ओके..

फिर उन्होंने मुझे अपना नंबर और ऑफिस का एड्रेस दिया और वो चले गए।
दूसरे दिन मैं ऑफिस के एड्रेस पर पहुँच गई, रेसिप्शन पर नाम बोला और थोड़ी देर में एक लड़का आया, वो बोला- मैडम आपको सर ने बुलाया है।
मैं अन्दर गई तो उन्होंने मुझे वेलकम किया और कुर्सी देकर कहा- देखो तुम एक सुंदर चेहरा हो और हमारी फिल्म इंडस्ट्री में तुम्हारी जरूरत है.. पर तुम्हें एक्टिंग भी आनी जरूरी है।
मैं- यस सर..
दिनेश- तो ऑडिशन रूम में चलें??
मैं- यस सर..
और हम दोनों एक रूम में चले गए।

वहां बहुत लोग थे शायद किसी हीरो के रोल का ऑडिशन चल रहा था.. दिनेश ने मुझे अपने बाकी टीम से इंट्रो करवाया और एक एक्टर को बुलाकर उसे एक सीन दिया। वो सीन मुझे उस लड़के के साथ करना था।

सीन था कि प्रेमी अपने प्रेमिका को छोड़ कर जा रहा है और प्रेमिका को उसे रोकना है।
सीन शुरू हुआ।
मैं पहले 4 बार चूक गई.. सभी लोग अपसेट हो गए क्योंकि कुछ भी रोमांटिक और मसालेदार नहीं था।

अब दिनेश ने मुझसे कहा- ये तुम्हारा लास्ट चांस है।
मैंने सोचा इस बार सब भूल जाती हूँ और उसके साथ दमदार शॉट देती हूँ।

दिनेश सर ने एक्शन बोला…
मैं- रुक जाओ अभी.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।
अभी- नहीं अगर तुम मुझसे प्यार करती तो मुझे अपने से दूर नहीं करती।
मैं- मैंने कभी तुम्हें अपने से दूर नहीं किया।
अभी- तुम झूठ बोल रही हो और अब मैं एक पल के लिए भी नहीं रुकना चाहता।
तभी मैं उस एक्टर को अपने ओर खींच कर किस करने लगती हूं और अपनी शर्ट के बटन खोल के उसके सर को अपने उभार पर दबाने लगती हूँ।

तभी दिनेश सर कट बोलते हैं और खड़े होकर ताली बजाने लगते है।

दिनेश- वाह… तुमने तो सीन में गर्मी और जान दोनों डाल दी समीरा.. वाह.. चलो कम विद मी।

ऑडियो सेक्स स्टोरी- नेहा की बस में मस्ती सेक्सी लड़की की आवाज में सेक्सी कहानी का मजा लें!

मैं बड़ी खुश थी। हम दोनों वापस उनके ऑफिस में आ गए।

दिनेश मेरे साथ सोफे पे बैठ गए और उन्होंने अपने सेक्रेटरी को बुलाया और कहा- देखो मैं मैडम के साथ डिस्कशन में हूँ.. स्क्रिप्ट और रोल फायनालाइज करना है.. सो डोन्ट डिस्टर्ब अस।
सेक्रेटरी ‘हाँ’ कह कर वहाँ से चला गया।

अब दिनेश मेरे पास आए और कहा- तुम्हारे एक्टिंग में दम तो है.. पर मेरे पास इस रोल के लिए कई सारी हिरोइनों के फ़ोन आ चुके हैं.. तो तुम इस रोल के लिए और क्या कर सकती हो??
ये कहते हुए दिनेश मेरे चेहेरे पे से हाथ फेरते हुए मेरे उभारों पर ले गए।
मैंने झट से उनके होंठों पे किस किया। मेरी इस प्रतिक्रिया से वो एकदम से खुश हो गए और कहा- गुड.. तुम काफी समझदार हो.. तरक्की करोगी।
मैं- थैंक यू सर।
‘ओके कैरी ऑन..’

मैंने अपने कपड़े उतारे तो वो मेरी बॉडी को देख कर एकदम पागल हो गए। अब दिनेश मेरी बॉडी को किस करते हुए मेरे शरीर से खेलने लगे।
मैंने उनकी पैंट के ऊपर से ही उनके लंड को मसल दिया।

अगले कुछ पलों में हम दोनों पूरी तरह सेक्स में डूब गए थे। दिनेश सर ने भी अपने कपड़े उतार दिए और मुझे लंड चूसने बोला.. मैंने वैसा ही किया।

अब उन्होंने मुझे चोदना शुरू किया.. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई.. क्योंकि मैं पहले भी कई बार चुद चुकी थी। उन्होंने मेरी चूत में लंड डाला और अन्दर-बाहर करने लगे। मैं भी कामुक सिसकारियां भरने लगी और चुत चुदाई के मजे लेने लगे।

हम दोनों बिल्कुल नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे.. वो मुझे चूम रहे थे और साथ में धकापेल चोदे जा रहे थे।
‘आह्ह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… सर अह्ह्ह लव यू.. आह्ह्ह..’ मैं सिसकारियां भर रही थी और दिनेश सर अपने लंड का सारा पानी मेरी चुत के अन्दर छोड़ कर मेरे ही ऊपर निढाल हो गए।

दिनेश सर मेरे ऊपर पड़े-पड़े मुझे किस करने लगे। 2 घंटे में उन्होंने मुझे 3 बार चोदा।

इसके बाद हम दोनों ने कपड़े पहन लिए थे। तभी बेल बजी और उनका सेक्रेटरी आकर बोला- मैडम सैट पर पहुँच गई हैं.. शूट शुरू करना है।
दिनेश- हाँ मैं आता हूँ।
मैंने दिनेश की ओर देखा तो उसने स्माइल दी और बोला- क्या करूँ तुम्हें देखा तो चोदने का मन हुआ.. इसी लिए ये सब नाटक किया.. सॉरी।
दिनेश ने मेरे हाथ में 50000 रुपये दिए और सैट पर चला गया।

मेरी चुत की चुदाई की कीमत मुझे अब समझ आ रही थी।

Sex Stories

हाय! अन्तर्वासना के पाठकों को Sex Stories नमस्कार! अपनी पिछली कहानी “पापा के दोस्तों ने चोदा- 1” में आपने पढ़ा कि किस प्रकार पापा के दो दोस्तों ने सीमा हमारे घर में ही चोदा। वो अलग बात है कि इसके लिये उन्हें कोई विशेष कोशिश नहीं करनी पड़ी। सीमा तो वैसे ही चुदने के लिये मरी जा रही थी। उसी कड़ी में पेश आगे की कहानी …

यह कहानी भी मैं सीमा की ओर से ही पेश कर रहा हूं …

उस रात गुरुबचन अंकल और अकील अंकल ने जो कमरतोड़ चुदाई की उसका असर दूसरे दिन तक रहा। तीसरे दिन अकील का फोन आया, मैं घर में अकेली थी …

हैलो …

हाय रानी!!! कैसी है … ?

कौन बोल रहा है … मैं चौंक गई।

आय! हाय! दो दिन में ही लन्ड पच गया …

ओह! अकील अंकल … … मैं आवाज पहचानते ही बोली। अनायास ही मेरा हाथ चूत पर पहुँच गया।

अब अंकल तो मत कह रानी … क्या कर रही थी … अकेली ही है ना?

हाँ … क्यों … क्या करना है … मैं शोखी से बोली।

चोदना है तेरी प्यारी चूत को …

ना बाबा ना … अब तक नहीं सम्भल पाई हूँ … …

अरे जान … वो तो मौका प्रोपर नहीं था … वर्ना एक हफ़्ते तक बिस्तर से नहीं उठती …

तभी तो कह रही हूं … मुझे मरना नहीं है …

अच्छा! देख शनिवार को तेरे पापा टूर पे जा रहे हैं और गुरु की वाइफ़ भी बाहर है तो उस दिन गुरू के घर पे प्रोग्राम रखेंगे …

और फ़िर शनिवार का इन्तजार होने लगा।

पापा सुबह 5 बजे की बस से चले गये। मैं एक बार फ़िर चूत चिकनी की और फ़िर तैयार होके 11 बजे गुरू के घर पहुंच गई। मेरे पहुंचते ही उन्होंने मेरा दिल खोलकर स्वागत किया और सीधे बैडरूम में ले गये जहाँ एक शानदार बैड था। पूरा कमरा इत्र की खुशबू से महक रहा था … मैं रोमांचित हो रही थी … … गुरू ने नाश्ते का इन्तजाम किया हुआ था। नाश्ते के दौरान हम खूब गन्दी गन्दी बातें कर रहे थे मैं भी पूरी तरह खुल चुकी थी।

इस सब में एक घंटा गुजर गया तो …

अकील बोला … चल अब शुरू करें …

और हम नंगे हो गये। अकील सोफ़े पर बैठ गया। मैंने जमीन पर कुतिया बनके उसके लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। गुरू मेरे पीछे आया और चूत चाटने लगा। जब अकील का लंड पूरी तरह तैयार हो गया तो मैं गुरू की ओर मुड़ी। गुरू घुटने के बल खड़ा हो गया तो मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया और इधर अकील चूत चाटने लगा।

फ़िर अकील ने अपना लंड पीछे से ही चूत के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा तो गुरू का लंड मेरे गले तक घुस गया मेरी सांस रुकने लगी पर वे रुके नहीं और मैं दोनों तरफ़ से चुदने लगी …

ले मादर चोद आज देख हमारे लंड का कमाल … … अकील दनादन ठोकते हुए बोला तो गुरू ने भी मेरे बाल पकड़ कर मुँह में ही अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। मुँह बन्द होने के बावजूद भी मैं कराह रही थी पर बहुत मजा आ रहा था। फ़िर उन्होंने साइट बदली और चालू हो गये। लगभग आधा घंटे की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद उन्होंने मुझे जमीन पर सीधा लिटाया और एक साथ अपने लंड मुँह डाल दिये, मैं लपालप चूसती रही। थोड़ी ही देर में वे मेरे मुँह में झड़ गये। उनके लंड से निकले गरम गरम वीर्य ने मेरा मुँह भर दिया। मेरी चूत भी झड़ चुकी थी। हम तीनों निढाल हो कर पड़ गये।

दूसरा राउंड 2 बजे शुरू हुआ और ये पहले से भी भारी था। मेरा रोम रोम दर्द करने लगा। ये मेरी जिन्दगी की सबसे यादगार चुदाई थी। Sex Stories

गरम चूत में ओल्ड लंड ने खूब मजा दिया. मेरे पहचान के एक अंकल मुझे मुंबई बीच पर मिल गए. मैंने उन्हें अपने घर ले आई. अंकल की नजर मेरे जिस्म पर थी. तो बात बन गयी.

मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।

मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.

वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।

मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।

ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।

मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।

मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।

शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!

मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।

मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.

लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।

उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।

वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।

बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।

तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।

बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।

मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.

फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।

जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!

मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।

मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।

मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।

मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।

मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।

मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।

एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।

अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।

मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।

वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!

फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।

फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।

मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।

मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।

मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।

मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।

इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।

मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.

वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।

उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।

दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!

मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।

आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।

अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।

इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।

फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।

उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.

फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।

मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।

मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.

मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।

उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।

वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।

वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!

वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!

उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।

फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।

मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।

मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।

उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।

वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।

मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।

फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।

मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।

सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।

मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!

तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।

मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.

मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।

बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।

मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।

मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।

उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।

मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।

मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!

वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।

अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।

सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।

मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।

इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।

सुबह उठ कर वे चले गये।

उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।


मेरा नाम साजिद है और मैं राजस्थान के चुरू जिले का रहने वाला हूँ.
मैं थोड़ा सांवला हूँ.

ये वैरी हॉट गर्ल सेक्स कहानी मेरी भतीजी की है. उसका नाम रुखसार है और उसको हम सभी प्यार से गुड्डू बुलाते हैं.

कुछ साल पहले जून 2018 की बात है. मैं सीढ़ियों से गिर गया था तो मुझे स्लिप डिस्क की प्रॉब्लम हो गई थी.

डॉक्टर के कहने पर मैंने बहुत किस्म की दवाइयां लीं पर कुछ आराम नहीं मिला.

इस बात की जानकारी मेरे सभी निकट सबंधियों को हो गई थी.
मेरे मौसी के लड़के यानि मेरे मौसेरे भईया ने मुझे अपने पास श्रीगंगानगर में बुला लिया.

वहां पर भईया का एक दोस्त डॉक्टर था, उन्होंने मेरा इलाज उससे करवाने के लिए कहा था.
मैं उनके पास चला गया और उनके मित्र डॉक्टर को अपनी समस्या दिखाई.

उन्होंने इलाज भी किया. उनके इलाज से एक दो हफ्ता तो ठीक लगा और मैं उस डॉक्टर के इलाज पर भरोसा करने लगा.

श्रीगंगानगर में भाभी और भईया और उनका बेटा यानि मेरा भतीजा, मेरा खूब ख्याल रखते थे.
उनके घर पर भईया भाभी की एक लड़की भी थी, जो मेरी भतीजी भी थी.

उसकी शादी 10 फरवरी 2018 को हो चुकी थी.
वह अपनी ससुराल में थी.

मेरे श्रीगंगानगर जाने के दो हफ्ते के बाद वह ससुराल से आई और अपने शौहर के साथ रात को बाहर वाले कमरे में रुक गई.
उस रात वे दोनों शौहर पत्नी बाहर वाले रूम में सो रहे थे और हम सभी अन्दर सो रहे थे.

रात को तकरीबन एक बजे मुझे पेशाब लगी तो मैं उठा और पेशाब करके वापिस लौटने लगा.
उसी वक्त मुझे भतीजी के कमरे से आवाजें आती सुनाई देने लगी थीं.

पता नहीं, मुझे क्या होने लगा और मैं उनके दरवाजे के पास को आ गया.
मैं दरवाजे से झांक कर देखने की कोशिश करने लगा.
पर काफी कोशिशों के बाद भी मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया.

बस उन दोनों की सेक्स की आवाजें आ रही थीं.

पांच मिनट बाद वे आवाजें भी आना बंद हो गईं.
शायद वे दोनों झड़ कर शांत हो गए थे.
मैं लंड सहला कर वापस अपने कमरे में गया और सो गया.

अब दूसरे दिन मैंने भतीजी वाले रूम के दरवाजे में एक छेद खोज लिया.
अब बस मुझे रात होने का इंतजार था.

रात को सभी के सोने के बाद मैं उनके दरवाजे के पास आ गया और अन्दर झांक कर देखने लगा.
अन्दर वह बिल्कुल नंगी थी और अपने शौहर का औजार हिला रही थी.

मैं यह सोच भी नहीं सकता था कि मैं ये सब देख रहा हूँ. मेरी भतीजी की नंगी चूचियां मेरा हाल बुरा कर रही थीं.
उसका गदराया और गोरा बदन मुझे उत्तेजित करने लगा और उस दृश्य ने मेरे हाथ को लौड़े पर ले जाने पर विवश कर दिया.

मुझे पता ही नहीं चला कि रुखसार का फिगर साफ नजर आ रहा था.
उसकी चूचियां 34 की, कमर 32 की और उसके 36 इंच के चूतड़ मुझे बेकाबू कर रहे थे.

रुखसार अपने शौहर का औजार अपने मुँह में ले रही थी.
उसे लंड चूसते देख कर ऐसा लग रहा था मानो उसके शौहर को जन्नत मिल रही हो.

वह अपनी टांगों के बीच में रुखसार का सर दबाए हुए था और उसकी हल्के स्वर में आह आह की आवाजें उसकी कामुकता को साफ दर्शा रही थीं.

उस वक्त मुझे अपनी भतीजी रुखसार भी इतनी सेक्सी लग रही थी मानो वह कोई आसमानी परी हो.
कुछ देर बाद उन दोनों ने पोजीशन बदल ली.
वह फिर से लंड पर झुक गई थी.

इस बार उसकी गांड मेरी तरफ थी.
कमरे की तेज रोशनी में उसकी गांड और चूत साफ दिख रही थी.

वैरी हॉट गर्ल की टांगों में से उसकी चूत की फांकें ऐसी दिख रही थीं मानो कोई खिला हुआ गुलाब हो.

कुछ देर तक मुख मैथुन के बाद उसके शौहर ने चुदाई की स्थिति बनाई और रुखसार की चूत में अपना लंड पेल दिया.
रुखसार चिल्लाने लगी.

उसका शौहर जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ मिनट बाद उसका शौहर उससे अलग हो गया और लेट गया.

रुखसार उसके ऊपर बैठ गई.
जब वह अपने शौहर के लंड के ऊपर बैठी, तो उसका चेहरा मेरी तरफ था.

वह जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी और वासना की हवस उसके चेहरे पर साफ दिख रही थी.

उसके दोनों चूचे कसी हुई गेंदों के जैसे उछल रहे थे.
यह सब देख कर मैं भी अपना लंड हिलाने लगा था.

पता ही नहीं चला कि कब उसके शौहर की जगह मैं खुद को महसूस करने लगा.
उस समय मैं एक अलग आनन्द की दुनिया में जा चुका था.

गुड्डू की सिसकारियां मेरे कानों में एक अलग ही रस की अनुभूति कर रही थीं.
तकरीबन दस मिनट के बाद उन दोनों का पानी निकल गया.

उसने गुड्डू की चूत में ही सारा पानी डाल दिया और वह दोनों ऐसे ही लेट गए.
फिर मैं भी बाथरूम में जाकर उसकी पैंटी को सूंघ कर लंड हिलाने लगा.

मैंने अपना सारा माल उसकी पैंटी पर ही छोड़ दिया और आकर सो गया.

अगले तीन दिन तक मैं अपनी भतीजी की चुदाई लीला को देखता रहा और इस बात से वाकिफ़ हो गया था कि गुड्डू को रोज रात में सेक्स चाहिए ही होता है. बिना चुदे वह सो नहीं पाती है.

क्योंकि कल रात को जब गुड्डू के शौहर ने उसे बिना चोदे ही अपनी टांगें पसार ली थीं और वह सोने लगा था तब गुड्डू ने उसे हिला कर जगाया और कहने लगी- तुम मुझे बिना चोदे कैसे सो सकते हो?
उसने जिस तरह से अपने खाविंद को जगाया था, वह तरीका देख कर तो मेरे होश फाख्ता हो गए थे.

गुड्डू ने पहले अपने शौहर को आवाज देकर उठाने की कोशिश की पर जब वह नहीं उठा तो उसने अपनी कुर्ती उतारी और ब्रा भी निकाल कर फेंक दी.
फिर वह अपने दोनों बड़े बड़े मम्मों के निप्पलों को हाथ में पकड़ कर अपने शौहर के दोनों नथुनों में घुसाने लगी.

इससे उसके लंबे अंगूर के जैसे कड़क निप्पलों ने टीट सी बना कर नाक के नथुनों को बंद कर दिया. इससे गुड्डू के शौहर को सांस आना बंद हो गई और वह हड़बड़ा कर उठ गया.

उसके उठते ही गुड्डू ने अपने एक निप्पल को अपने शौहर के मुँह में दे दिया और कहने लगी- लो अंगूर चूसो मियां.
उसके शौहर ने भी गुड्डू के निप्पल को अपने होंठों में दबा लिया और वह उसके दोनों निप्पलों को बारी बारी से खींचते हुए चूसने लगा.

जल्द ही गुड्डू एक सांडनी सी गर्म हो गई और उसने अपने शौहर के सारे कपड़े उतार दिए.
उसको नंगा करने के बाद वह भी अपनी सलवार और चड्डी को उतार कर मादर्जात नंगी हो गई.

गुड्डू की चूत एकदम चिकनी थी और उस पर झांट के एक बाल भी वजूद नहीं था.

गुड्डू ने 69 का पोज लेते हुए अपने आपको अपने शौहर के ऊपर सैट कर लिया और उसके मुँह पर अपनी चूत रख दी.
उसके शौहर ने चूत में जीभ फिरानी शुरू कर दी.

दूसरी तरफ गुड्डू ने अपने मियां का लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे सहलाती हुई चूसने लगी.

जल्द ही गुड्डू के शौहर का लंड एकदम टाइट हो गया और वह गुड्डू की चूत को चोदने के लिए तैयार हो गया.
गुड्डू झट से अपने शौहर के ऊपर से उठी और खुद बिस्तर पर चित लेट कर अपने शौहर को अपने ऊपर आने का इशारा करने लगी.

शौहर ने अपनी बीवी यानि मेरी भतीजी गुड्डू की चूत के छेद पर लौड़े का सुपारा सैट किया और एक झटका देते हुए लंड को अन्दर पेवस्त कर दिया.
गुड्डू की एक मीठी आह निकली और वह चूत चुदवाने लगी.

दो ही मिनट बाद दूल्हे मियां ने लंड चूत से निकाला और वह उसे इशारे से कुतिया बनने की कहने लगा.
जैसे ही गुड्डू कुतिया बनी, उसके शौहर ने अपना लंड गुड्डू की गांड में रगड़ दिया.

गुड्डू ने कहा- आह साले … वह गलत जगह है.
उसके शौहर ने चूत में लंड पेला और गुड्डू के ऊपर चढ़ कर उसकी चूचियां दबोच कर चुदाई करने लगा.

कुछ ही झटकों के बाद उन दोनों की चुदाई मस्त चलने लगी.
गुड्डू के शौहर ने कहा- बेगम, आज छोटी लाइन पर गाड़ी चलाने का मन कर रहा है.

गुड्डू समझ गई कि उसका शौहर उसकी गांड मारने की बात कर रहा है.
उसने कहा- उस तरफ भूल कर भी नजर मत डालना मियां … वरना मामला काजी साहब की अदालत में पहुँच जाएगा.

गुड्डू के शौहर ने गुड्डू की दोनों चूचियां मसलते हुए कहा- मां की चूत काजी की. वह तो साला खुद तेरे साथ हलाला के चक्कर में है.
गुड्डू हंसने लगी और बोली- यार मियां तुम समझते क्यों नहीं हो. उधर से तुम्हारा लंड लेना बड़ा मुश्किल का काम है. तुम गांड की चुदाई को कोई आसान सा काम समझ रहे हो?

शौहर ने कहा- मुझे मालूम है कि दिक्कत और दर्द दोनों ही होते हैं. पर कोशिश करो तो सब आसान हो जाता है.
गुड्डू ने कहा- वो सब अपने घर चल कर ट्राई करेंगे … इधर अब्बू के घर नहीं.

उसके शौहर ने कुछ नहीं कहा और वह तेज तेज झटके देते हुए गुड्डू की चूत चुदाई को अपने चरम तक ले जाने की कोशिश करने लगा.
करीब पांच मिनट बाद वे दोनों झड़ कर लेट गए और लंबी लंबी सांसें लेने लगे.

मैं भी समझ गया कि अब काम खत्म हो गया है और यदि इन दोनों के बीच वापस चुदाई होगी भी तो अभी आधा घंटा कुछ नहीं होगा.
मैं अपने कमरे में आ गया और अपने लंड को हिला कर झाड़ कर ढीला हुआ और सो गया.

अगले दिन गुड्डू का शौहर अपना सूटकेस लेकर जाने लगा था. गुड्डू अभी कुछ दिन यहीं रहने वाली थी.
अपनी भतीजी की रोजाना चुदाई की आदत को याद करके मेरे मन में भी एक बार को आया कि शायद मेरा चांस बन सकता है.

उस रात को मैं पेशाब करने के लिए गया तो गुड्डू के कमरे की खिड़की में झांक कर देखा.
अन्दर मेरी भतीजी गुड्डू पूरी नंगी थी और अपने शौहर के साथ वीडियो चैट करती हुई फोन सेक्स का मजा ले रही थी.

मैं उधर ही खड़ा रह कर लंड हिलाने लगा और कुछ समय बाद अपने कमरे में आकर सो गया.
मुझे इस बात का अहसास ही नहीं था कि मेरी मौजूदगी की खबर गुड्डू को हो गई थी.

अगले ही दिन मेरे बड़े भाई जान को अपने काम के सिलसिले में दिल्ली जाना था और वे मुझसे घर की देखभाल की कह कर चले गए.

रात हुई तो रोज की तरह मैं बाथरूम में गया और बिना कुछ देखे अपना लोअर नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल कर मूतने लगा.
लंड से पेशाब निकल जाने के बाद मैंने लंड को हाथ से मुठियाते हुए बुदबुदाना शुरू कर दिया- आह गुड्डू … किसी दिन मुझे भी मौका देकर देख जालिम … तेरी चूत के परखच्चे न उड़ा दूँ तो कहना.

यही सब कहते हुए मैंने लोअर ऊपर किया और बाथरूम से बाहर कदम रखा ही था कि वैरी हॉट गर्ल गुड्डू की आवाज आई- आज आपको मौका दिया जा सकता है चचाजान!

बस इतना कह कर वह तेजी से बाथरूम से बाहर निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गई.
मुझे काटो तो खून नहीं.
एक पल को तो मैं सकपका गया था.
फिर गुड्डू ने अपने कमरे की देहरी से मुझे आने का इशारा दिया और मुस्कुरा दी.

Sex Stories

यह पत्र गीता वर्मा ने Sex Stories पूनम सक्सेना को लिखा दोनों की एक सहेली सोनू की समस्या के बारे में :

प्रिय पूनम,

मैं गीता वर्मा हूँ, सोनू की रूम-मेट, मैं उसी के कॉलेज से बीएससी बायलोजी कर रही हूँ।

आज काफ़ी सुबह से उठकर सोनू नेट पर बैठी थी, मैंने उससे पूछा कि कोई परेशानी है क्या तुझे?

तो फिर उसने सब बताया और आपके बारे में भी बताया।

सोनू गांव की सीधी सादी एक लड़की है जो इन्दौर आई है पढ़ने के लिये, वो देखने में भी काफ़ी अच्छी है। उसकी फ़िगर ३२ २४ ३४ होगा करीबन। यहां इन्टरनेट पर बैठ कर उसकी जवानी मचल उठी है, जिसकी वजह से उसे परेशानियाँ हो रही हैं।

अब जवान लड़की की चूत है, आग तो लगेगी ही उसमें, उसका तो कोई क्या कर सकता है !

मैं उसके साथ ही सोती हूँ और मैंने उसे कई बार तड़पते हुए महसूस किया है, वो यह समझती है कि मैं सो रही हूँ।

वो अकसर करवट बदल बदल कर अपनी योनि पर सलवार के ऊपर से हाथ फ़ेरती है, रज़ाई डाल लेती है ऊपर से, और कम से कम रात में ६ या ७ बार बाथ रूम जाती है।

आप समझ सकती है कि क्या करने पर उसकी बेचैनी दूर होगी पर उसे पता ही नहीं कुछ और प्यासी ही लौट आती है शायद।

ऐसे में मेरी चूत में भी खुजली होने लगती है, पर मैं कंट्रोल कर लेती हूँ। मै भी अपनी योनि में उँगली करती हूँ कभी कभी !

अकसर नहाने से पहले या सुबह पहले पेशाब करने के बाद, मेरी झिल्ली अभी फ़टी नहीं है पर मैं इतना अन्दर कर लेती हूँ कि मजा आए और शान्ति मिल जाये, पर सोनू इतना नहीं कर पाती।

ना जाने क्यूँ अब यह तो उसकी चूत देखकर ही पता चलेगा कि क्या प्रोबलम है, पर आज उसने मुझे मना कर दिया चूत दिखाने को, पता नहीं क्यूँ, वो बोली कि नहीं मैं पहले पूनम जी से बात करूंगी।

और फिर मैने डाक्टर का कहा तो उसने मना कर दिया बोली कि नहीं, मैं डाक्टर के सामने नंगी नहीं होना चाहती हूँ !

अब आप तो समझ ही सकती है कि कोई लड़की कितना भी कर ले, लण्ड का मजा तो लण्ड से ही मिलता है, और वो हमको शादी से पहले नहीं मिलेगा।

वैसे मैं तो बायो की स्टूडेन्ट होने के कारण ये बोल सकती हूँ कि जब तक चूत की झिल्ली नहीं फ़टेगी तब तक पूरा पूरा सेटिस्फ़ेक्शन कभी नहीं होगा क्यूँकि योनि में जो आग लगती है जवानी में, वो अन्दर झिल्ली के पीछे लगती है। जब तक झिल्ली के पीछे तक उंगली य लण्ड नहीं जाता तब तक चूत प्यासी ही रहती है चाहे कोई ऊपर से कितना भी फ़िन्गर कर ले।

झिल्ली यानी हायमन एक पर्दा होता है, चमड़ी या स्किन कह लो, जिसमे बहुत छोटे छोटे छेद होते हैं या एक थोड़ा बड़ा भी हो सकता है,

इन छेदों से ही मासिक-धर्म का खून और चूत का पानी आता है, पर झिल्ली इसके बीच में एक रुकावट का काम करती है।

एक बार झिल्ली फ़ट जाये तो फ़िर सब खुल कर फ़्लो होता है, नहीं तो रुक रुक कर आता है।

मैने सोनू की चूत अभी देखी तो नहीं है पर ९०% लड़कियों की झिल्ली तो वैसे ही फ़ट जाती है, कभी खेलकूद में या स्कूटी वगैरह की किक लगाने में।

सोनू की चूत देखकर ही कहा जा सकता है कि उसकी झिल्ली फ़टी है या नहीं।

क्युंकि कभी कभी झिल्ली तो खुली होती है पर बस उसे एक हल्के से झटके की जरूरत होती है रास्ता साफ़ करने के लिये।

मैंने यही सोच कर सोनू को कहा था कि अपनी योनि दिखा !

हाँ, वैसे हमारे कॉलेज में टायलेट की दिक्कत है थोड़ी,

क्यूंकि इतनी उमर की लड़कियों में शरम लगती है, और सोनू तो बहुत शर्मीली है,

वो जीन्स भी नहीं पहनती कॉलेज में टायलेट के डर से कि पीछे से खुला दिखता है पेशाब करते वक्त।

मैंने उसको कई बार समझाया कि गर्ल्स टायलेट में गर्ल्स ही आती हैं तो इसमें शर्माना क्या?

तू अपना सू सू किया कर और आ जाया कर, या तो फिर वहाँ पर मत जाया कर,

यहाँ कमरे पर आकर कर लिया कर,

पर वो कहती है कि मुझे ज्यादा बार जाने की इच्छा होती है और रोक नहीं पाती एक घन्टे से ज्यादा।

खैर लड़कियों का ब्लेडर छोटा होता है पर मैं रोक लेती हू तीन घन्टे तक।

और वैसे भी मुझे शरम नहीं आती है वहां पर, मैं तो आराम से करके आ जाती हूँ,

भले ही मेरा मासिक हो रहा हो।

सोनू को पता नहीं क्या प्रोबलम है, बोलती है कि उठने बाद भी सू सू गिरता है पेन्टी पर।

और यहां कमरे के बाथ रूम में भी पूरे कपड़े उतार के नीचे बैठती है।

वैसे ये प्रोबलम ज्यादा सेक्स की इच्छा के कारण होती है, मुझे भी कभी कभी जब सेक्स की इच्छा होती है

तो ऐसा लगता है कि बाथ रूम जा कर आऊं और थोड़ा सा पेशाब आ भी जाता है।

सोनू के साथ यही हो रहा है शायद, इसलिये १०-१५ बार जाती है पेशाब के लिये।

और ऊपर से, पहले नीचे से नंगी होती है और फिर वापस कपड़े पहनती है।

वैसे अगर हम कल डाक्टर के पास गये तो भी डाक्टर इसका यही इलाज बतायेगी कि झिल्ली फ़ाड़ लो या किसी से सेक्स करा लो।

वैसे मैं तो जाऊंगी ही, मुझे तो मासिक भी ठीक से नहीं आ रहा है।

सोनू का पता नहीं कि वो जायेगी या नहीं

आप उस से बोल दें कि वो मुझे एक बार उसकी चूत देखने दे, शायद मैं उसकी समस्या हल कर सकूं।

और अगर वो किसी से चुदवाना चाहती हो तो एक रास्ता और है मेरे पास,

एक लड़के का भी इन्तज़ाम हो जायेगा, और अगर सिर्फ़ उसकी झिल्ली फ़ाड़नी हो तो भी एक रास्ता है मेरे पास,

अब जैसा आप सही समझें मुझे बता देना कि सोनू का क्या करना है

और हां मेरे दोनों प्लान अभी आपको नहीं बताये है कि मैं कैसे लाऊंगी लड़का या कैसे उसकी झिल्ली फाड़ूंगी

पूनम आप मुझे मेल करना मैं आपको प्लान बता दूंगी पर आप उसे मत बताना

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गीता

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