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उस दिन जब हम बिग Sex Stories बाज़ार में थे तो अचानक मेरी पत्नी की नज़र एक सुंदर सी औरत पर पड़ी और उसने आवाज़ लगाई- रागिनी!
सुन कर उस औरत ने पीछे मुड़ कर देखा और मेरी बीवी को देख कर जोर से चिल्लाई- हाय संगीता.. कितने दिनों के बाद मिली तू!
दोनों सहेलियाँ एक दूसरे से बात करती रही और मैं रागिनी को देख रहा था.. मैं तो अपनी पलक झपकाना ही भूल गया था.. इतनी खूबसूरत.. क्या फिगर है..
ऐसा लगा जैसे सब कुछ एकदम सांचे में तराश कर लगाया हो! उसकी नोकदार चूचियाँ.. पतली कमर और उभरे हुए नितम्ब.. उफ़ एक तो मैं वैसे ही बहुत सेक्सी हूँ और ऐसे फिगर वाली सुंदर औरतें मेरी कमजोरी है।
उसने काले रंग का सलवार सूट पहना था, जिसमें से उसके बदन का हर कटाव एक दम साफ़ नज़र आ रहा था। उसके गोरे रंग पर काला ड्रेस मानो उसके बदन की रेखाओं को उजागर कर रहा था, उसकी गोलाई और उभार से मेरी नज़र हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
तभी मेरी बीवी ने पलट कर मेरी तरफ़ देखा और कहा- यह रागिनी है मेरी कॉलेज की दोस्त!
मैंने हेलो कहा, उसने मुस्कुरा कर जवाब दिया।
अब मैंने उसने होंठो को देखा.. एकदम रस भरे गुलाबी होंठ. मानो कह रहे हो- आओ मेरा रस चूस लो!
इस पहली मुलाकात में ही रागिनी ने मेरे लंड को मानो चोदने की दावत दे दी थी। यह सोच मुझे परेशान करने लगी कि इसे कैसे चोदा जाए! एक तरफ़ मैं सोच रहा था कि ये मेरी बीवी की ख़ास सहेली है.. कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए इसे चोदने के चक्कर में।
सच तो यह था कि मेरी बीवी भी काफी सेक्सी है लेकिन रागिनी उससे भी ज्यादा सेक्सी और सुंदर थी। उसे मेरे बिस्तर में ले कर नंगी करके चोदना ही मेरा सपना बन गया उस पहली मुलाकात के बाद।
उस दिन तो दोनों ने मिलकर ही शौपिंग की लेकिन उसके बाद भी अक्सर दोनों साथ साथ ही घूमने जाती।
रागिनी को नंगी करके चोदने का सपना सपना ही रहेगा, ऐसा मुझे लगने लगा था क्योंकि वो बहुत ही नपे तुले स्टाइल में बात करती थी, कभी कोई वाहियात बात या कोई गन्दा मजाक नहीं करती थी। उसकी बातों से पता चलता था कि वो अपने पति को भी बहुत प्यार करती है और उसके साथ खुश भी है।
कभी कभी रात में अपनी बीवी को चोदते हुए मैं कल्पना करता था कि मेरी बांहों में रागिनी है और मैं उसे चोद रहा हूँ। रागिनी की बातों से लगता था कि वो थोड़ी पुराने ख्यालात की है और बहुत ही शर्मीली भारतीय गृहिणी है।
उसके बाल बहुत लंबे थे जो मुझे ज्यादा पसंद हैं। शरीर मानो अजंता की कोई मूर्ति हो। उसकी चूचियाँ, उसके चूतड़ और उसकी गदराई जांघें जो उसकी सलवार से महसूस होती थी। उसका चेहरा अंडाकृति था, गोरा और भरा हुआ।
सबसे बड़ी बात जो मुझे बाद में पता चली कि उसके दो बच्चे हैं। उसके शरीर की बनावट से वो 25 साल की युवती लगती थी जबकि उसकी उमर थी 35 साल। मुझे उसके पतली कमर के साथ डोलते हुए चूतड़ बहुत विचलित करते थे, मैं सोचता था कि उसे नंगी करने के बाद उसके गोरे गदराये चूतड़ कितने प्यारे लगेंगे.. उन्हें सहलाने में और दबाने में कितना मजा आएगा!
और कमर से ऊपर नज़र जाते ही.. उफ़ उसकी भरी हुई छातियाँ.. उसके स्तन एकदम कसे हुए थे.. दो बच्चों की माँ लेकिन स्तन जैसे बीस साल की कुंवारी लड़की के.. 36 साइज़ होगा उनका.. दोनों उसके ब्लाऊज़ या कुरते के अन्दर एक दूसरे से चिपके हुए रहते थे.. जिसके कारण उसके बीच की घाटी बहुत ही उत्तेजक दिखाई देती थी। सब कुछ मिला कर मेरे जैसे कामी पुरूष के लिए वो एक विस्फोटक औरत थी…
ऐसे ही दिन गुजर रहे थे। अचानक मेरी बीवी के पिताजी की तबियत ख़राब होने का समाचार आया, उसने मेरे बेटे को साथ लिया और दूसरे दिन सुबह की बस से चली गई।
इस बात को करीब एक हफ्ता हो गया। मैं घर में अकेला ही था। मेरे ऑफिस में भी मार्च के महीने के लिए बहुत काम था, मुझे छुट्टी भी नहीं मिली थी इसलिए सुबह जल्दी ही ऑफिस जाना पड़ता था।
एक दिन सुबह प्रात: कालीन विधि व स्नान करने के बाद मैं काफी की चुस्की ले रहा था कि दरवाजे की घण्टी बजी। मैंने हाथ में लिया हुआ पेपर रखा, मैं सोच रहा था कि इतने सुबह कौन आ गया। दरवाजे पर जाकर पहले खिड़की से बाहर देखा.. वहाँ और कोई नहीं, मेरे सपनों की मलिका रागिनी खड़ी थी।
मैंने दरवाजा खोला, मैं सोच रहा था कि इतनी सुबह वो मेरी बीवी से मिलने क्यों आई है जबकि उसे मालूम था कि मेरी बीवी पिछले हफ्ते अपने पिता के यहाँ गई हुई है और अभी वहीं रहेगी।
मैंने दरवाजा खोला और कहा- गुड मोर्निंग रागिनी!’
वो वहीं चुपचाप खड़ी रही..
मैंने कहा- वहीं खड़ी रहोगी क्या? हेल्लो भी नहीं कहोगी?’
‘हाय’ उसने कहा।
वो मुस्कुराई- संगीता कहाँ है? रागिनी ने पूछा।
‘तुम्हें संगीता ने पिछले हफ्ते फोन करके बताया था ना कि वो अपने पिता के यहाँ जा रही है, उसके पिताजी की तबियत ठीक नहीं थी। खैर तुम इतनी सुबह सुबह कैसे आई?’ उससे बात करते हुए मेरी नज़रें उसकी उभरी हुई चूचियों पर बार बार जा रही थी और नीचे मेरे लंड में तनाव आ रहा था। वो मेरे शोर्ट में टेंट न बना ले इसलिए मैं एक हाथ से उसे दबाने की कोशिश में लगा था और हल्के से मसल भी रहा था।
वो अन्दर आई, मैंने उसे सोफे पर बैठने को कहा। फ़िर अन्दर जाकर उसके लिए एक कप काफ़ी ले कर आया और उसे दिया। फ़िर उसके सामने बैठते हुए मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाते हुए कहा- इतनी सुबह सुबह भी तुम काफी खूबसूरत लग रही हो! और मजाक में कहा- शायद मुझे कुछ हो जाए तुम्हें देख कर!’
रागिनी मेरे इस दुस्साहस पर कुछ बोली नहीं, इसलिए मुझे भी आश्चर्य हुआ। मेरी हिम्मत और बढ़ी, उसने काफ़ी ख़त्म की और कहा- मैं चलती हूँ।’
मैंने कहा- तो आप यहाँ सिर्फ़ अपनी सहेली से मिलने आई थी? वो नहीं है तो एक बुढ्ढे को अकेला छोड़ कर जा रही हो?’
‘ओह, आप बुढ्ढे हो?’ और वो मुस्कुराई।
मैंने उसे मुस्कुराते देखा, उसकी यह मुस्कराहट कुछ अलग थी।
‘क्या यही मौका है.. जिसका मैं इंतज़ार कर रहा था.. क्या मेरा सपना सच होने वाला है?’ मैंने सोचा।
वो उठी और कमरे में घूम कर देखा. मैंने अब बाहर का दरवाजा बंद कर दिया। यह पहला मौका था कि हम दोनों एक बंद कमरे में अकेले थे। मैं सोफे पर उसके साथ बैठ गया। हम अपनी घर की बातें करने लगे।
कुछ इधर उधर की बात करने के बाद बात मेरी बीवी के बारे में होने लगी। हमारी शादी को 15 साल हो चुके थे। मैंने बताया कि अब वो अपने बच्चे में ज्यादा ख्याल देती है, मेरी जरुरत को इनता महत्व नहीं देती और सेक्स के प्रति भी बहुत उदासीन हो चुकी है। अब हमारे बीच में कुछ नया नहीं है जिसके लिए हम ज्यादा परेशान हों या व्याकुल रहें।
रागिनी ने कहा- फ़िर भी आप अपनी बीवी और बच्चे का बहुत ख्याल रखते हो और संगीता भी खुश है।
मैं उसकी इस बात पर खुश हुआ और उसे धन्यवाद दिया। फ़िर मैंने उससे पूछा- रागिनी अब तुम अपने परिवार के बारे में बताओ, तुम्हारे पति भी तुम लोगों का बहुत ख्याल रखते हैं, तुम्हें खुश रखते हैं! है ना?’ मैंने कहा।
मैंने रागिनी के चेहरे पर उदासी देखी।
एक गहरी साँस लेकर उसने कहा- सभी यही सोचते हैं कि हम लोग खुश हैं।
‘रागिनी क्या बात है? तुम दुःखी लग रही हो, तुम्हारे चेहरे से लग रहा है कि तुम खुश नहीं हो?’
‘नहीं.. नहीं.. ऐसी बात नहीं है.. सब कुछ ठीक ही है।’ उसने कहा।
‘नहीं रागिनी.. तुम कुछ छुपा रही हो! क्या तुम मुझे बताना नहीं चाहोगी?’
‘मेरी समस्या यह है कि मेरी बीवी अब मुझमें रुचि नहीं लेती। तुम समझ रही हो न कि मैं क्या कहना चाहता हूँ? उसे मेरी फिकर करनी चाहिए लेकिन फ़िर भी हम दोनों के बीच कोई तनाव नहीं है, हालाँकि हमारे बीच प्यार और सेक्स वाली बात अब इतनी ज्यादा नहीं है, मैं उससे दूर जाना चाहता हूँ, लेकिन जा नहीं पाता। मुझे लगता है कि शायद वो फ़िर से मुझे समझ ले!’
रागिनी मेरी बात बहुत ध्यान से सुन रही थी, उसने कहा- मैं सब समझ रही हूँ!
कुछ देर में हमारी बातें बहुत गंभीर होने लगी, भावुकता आने लगी बातचीत में! मैं थोड़ा भावुक होने लगा। तब रागिनी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रखा और मुझे समझाने की कोशिश करने लगी। उसके हाथ का स्पर्श पाते ही मेरे शरीर में गर्मी सी आने लगी और मेरा लंड खड़ा होने लगा।
अब मैंने उसका हाथ कस कर पकड़ लिया और कहा- रागिनी, मैं यह कहना नहीं चाहता था लेकिन अब बिना कहे रहा नहीं जाता, जिस दिन पहली बार मैंने तुम्हें देखा था, उसी दिन से मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, और यही सच है!’
यह सुनते ही उसने मेरी तरफ़ देखा उसकी नज़रों में थोड़ा आश्चर्य था, उसने कहा- तुम बहुत बदमाश हो! अच्छा हुआ कि यहाँ तुम्हारी बीवी नहीं है और उसने यह सुना नहीं! अगर वो यह सुन लेती तो मुझसे बात करना बंद कर देती और मुझे ग़लत समझती!’
‘क्या तुम उसे यह बताने वाली हो?’ मैंने उससे मजाक में पूछा।
‘मैं नहीं कहूँगी लेकिन…’ उसने अपना वाक्य पूरा नहीं किया।
‘रागिनी क्या मैं तुमसे कुछ रिक्वेस्ट कर सकता हूँ? तुम उसे मानोगी?’
‘यह तो आपके रिक्वेस्ट पर निर्भर करता है!’
‘अगर मैं तुमसे कुछ मांगू तो?’
‘क्या?’
‘क्या तुम मुझे एक चुम्बन दोगी? अगर मैं मांगू तो?’
‘यह आप क्या कह रहे हैं? मैंने आपके लिए ऐसा कभी सोचा भी नहीं!’ उसने गुस्से से नहीं लेकिन बहुत धीमे से और मेरी बात पर चौंकते हुए कहा।
‘प्लीज़ रागिनी सिर्फ़ एक.. तुम्हारे इन रस भरे होंठो का एक चुम्बन ही तो मांग रहा हूँ मैं! समझो मैं भीख मांग रहा हूँ।’
‘भीख मांगने से कोई फायदा नहीं है, मैं इसके लिए आपको मना करने वाली नहीं!’ और वो मुस्कुरा दी।
उसके सफ़ेद दांत उसके सुंदर चेहरे पर और चार चाँद लगते हुए दिखे- ठीक है! लेकिन सिर्फ़ एक ही दूंगी.. और इस बात का पता न तो आपकी बीवी को और ना मेरे पति को चले! आप वादा करो कि किसी से यह बात नहीं कहोगे!’ उसने कहा।
मेरी हिम्मत बढ़ी मैं उठा और उसके बाजू में जा कर बैठ गया, उसके एकदम करीब। मैंने देखा मेरी इस हरकत से वो थोड़ी सी सिमट गई। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसने नज़रें झुका ली और अपने दोनों हाथ मसलने लगी।
मैंने अपना चेहरा बढ़ाया और उसके गालों पर से बालों को एक ऊँगली से हटाया, वो सिहर उठी।
मैंने तभी अपने होंठ उसके फूले हुए गालों पर रख दिए और ‘पुच्च’ से एक चुम्बन लिया।
वो कसमसाई और तिरछी नज़र से सिर्फ़ मेरी तरफ़ देखा उसने किसी प्रकार का विरोध या सहमति नहीं दिखाई। मैं जब उसके और करीब खिसका तो उसने कहा- बस!’
मैंने कहा- यह चुम्बन नहीं था, यह तो सिर्फ़ तुम्हें छू कर देखा मैंने होंठों से!
अब मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, मैं उसके दाहिने तरफ़ बैठा था, मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा। वो शायद इसके लिए तैयार नहीं थी, वो मेरी गोद में गिरने लगी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ लिए। अब वो मुझे आगे बढ़ने से रोकने का हल्का प्रयास कर रही थी।
मैंने कहा- तुम्हें तो मालूम है कि असली चुम्बन कैसे और कहाँ लिया जाता है.. और तुम ख़ुद यह करने के लिए तैयार हुई हो..
कहते हुए मैं उसकी बांहों को अपनी ऊँगली से हल्के हल्के नीचे से ऊपर और ऊपर से नीचे सहलाने लगा। उसके कंधे पर दबाव बढ़ाते हुए फ़िर से उसके गालों पर कान के ठीक पास में चूमा और जीभ से उसके कान को सहलाया..
उसकी सांसे बिखरने लगी, वो मेरी तरफ़ शरमाई नज़र से देख रही थी..
उसके मुँह से एक भी शब्द नहीं निकला। अब मैंने उसके चेहरे की तरफ़ अपना चेहरा किया और उसके थरथराते लाल रसीले लरज़ते होंठो पर अपने होंठ रख दिए। मैंने बहुत हल्के से उसके होंठों पर ‘चु..ऊ..क.- करके चुम्बन कर दिया।
मैं उसकी बांहों को सहला रहा था.. और उन्हें सहलाते हुए मैंने उसका आँचल धीरे से कंधे से हटा दिया। उसके दोनों हाथ मैंने पकड़ रखे थे इसलिए वो अपना आँचल संवार नहीं पाई और मेरे सामने उसके पीन पयोधर आमंत्रण देते हुए महसूस हुए! वैसे मैं उसकी बांहों की सहलाते हुए उसकी चूचियों को बाजू से स्पर्श कर रहा था.
मैंने उसके गालों को हल्के हल्के ‘पुच्च.. पुच्च.. ‘ करते हुए चूमना जारी रखा था… फ़िर मैंने अपने होंठ उसके कानों की तरफ़ बढाये.. और उसके कान में फ़ुसफुसाकर कहा.. ‘रागिनी तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें पाने के लिए मैं बहुत बेताब हूँ!’
कहते हुए उसके कान के लैब अपने होंठो में लिए.. उसके मुँह से सी.आह्ह.. की आवाज़ निकली। मैं उसकी गर्दन और कंधे मसल रहा था। वो थोड़ा सा कसमसाई।
अब मैंने उसकी साड़ी को उसके वक्ष से पूरी तरह हटा दिया। वो हल्का विरोध कर रही थी.. ‘नहीं..संजय.. प्लीज़ ऐसा मत करो.. किसी को पता चल गया तो!’
मैंने उसकी बात नहीं सुनी.. मैंने अपना हाथ उसकी बांई चूची पर ब्लाउज के ऊपर से रख दिया और गोलाई को सहलाया.. उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और दबा लिया.. मैंने पंजे में चूची पकड़ी और हल्के से दबाया तो उसके मुँह से आ…आ..आह.. निकल पड़ी…
मेरे हाथ को पकड़ते हुए उसने कहा- बस संजय.. इसके आगे नहीं..! इसके आगे जाने से हम दोनों बदनाम हो सकते हैं…!’
मैंने उसकी बात नहीं सुनी.. मेरे हाथ तो उसके ब्लाउज के बटन खोल रहे थे। उसका हाथ मेरे हाथ पर था। लेकिन कोई हरकत नहीं थी..
ब्लाउज के दोनों पल्ले खोल कर मैंने देखा अन्दर काले रंग की ब्रा है, मैंने जल्दी से उसके स्तनों पर मेरे होंठ रखे और उसके उरोजों की गर्मी महसूस की… आह्ह..
उसके गोरे बदन पर मस्तानी चूचियों पर काले रंग का ब्रा..
मैंने जल्दी से ब्रा को बिना खोले ऊपर की तरफ़ उठा दिया, वो सोफे पर पीछे झुक गई जिससे उसके फूले हुए गदराये स्तन और उभर आए थे। मैंने उसकी चूची पर चूमा और उसके मुँह सेसी. .सी.. स्..स्.. स्. आह.. ऐसी कराहें निकलने लगी..
उसकी लाजवाब चूचियाँ मेरे सामने थी जिनके मैं सपने देखा करता था..
मैंने उसके गालों पर फ़िर से चूमते हुए उसके कान में कहा- रागिनी मैं तुम्हें प्यार करता हूँ.. मुझे आज मत रोकना प्लीज़!’
उसने कुछ कहा नहीं.. वो सोफे पर और पीछे झुक गई.. उसने अपने स्तन और ऊपर कर दिए.. उसके स्तन अभी भी सख्त थे.. किसी रबर की गेंद की तरह. उसके स्तन का साइज़ 36 डी होगा, यह मैंने उन्हें हाथ में ले कर जाना..
अब मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसके ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा के खुलते ही उसने अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढकना चाहा लेकिन मैंने उसके हाथ पकड़ लिए।
मैं उसके नायाब खजाने को देखना चाह रहा था.. उसका गोरा बदन.. एकदम चिकना.. हाथ रखते ही हाथ फिसल जाता.. इतना चिकना बदन किसी का हो सकता है .. यह सोच कर ही मेरी मस्ती सातवें आसमान पर पहुँचने लगी.. ये नरम गदराया जिस्म मेरे सामने है .. इसकी चूत कितनी नरम होगी.. कितनी मजेदार नज़ारा होगा.. उफ़.. ये ख्याल इंच दर इंच मेरे लंड की लम्बाई और मोटाई को और बढ़ा रहे थे।
मैंने कहा- रागिनी, मुझे इन्हें जी भर के देखने और प्यार करने दो..
कहते हुए मैंने उसके गुलाबी चुचूक को हाथ लगाया, मसला.. वो अब कड़क होने लगे थे.. उसके मुँह से आउच.. की आवाज़ निकली..
मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचा.. वो सीधे मेरे कंधे पर सर टिका कर मेरे गालों को चूमने लगी… मेरे हाथ की उँगलियाँ उसकी चूचियों पर भ्रमण कर रही थी. .. उसकी साँस बहुत तेज़ हो रही थी.. उसकी साड़ी का आँचल अब ज़मीन पर पड़ा था।
‘संजय अभी अगर कोई आ जाए और हमें इस तरह देख ले तो? क्या होगा? बोलो!
‘फिकर मत करो इतनी सुबह कोई नहीं आयेगा! और फ़िर मैंने बाहर का दरवाज़ा अच्छे से बंद कर दिया है इसलिए अगर कोई आयेगा तो उसे वैसे ही दरवाजे से वापस जाना होगा।’ कहते हुए अब मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठों पर एक लंबा चुम्बन लिया..
उसने भी अब मेरा साथ दिया.. उसकी साँस फूलने से उसने मुझे धकेला और बहुत ही सेक्सी नज़र से देखा..
आह क्या दिख रही थी वो.. गोल गोल गोरे गोरे उरोज.. एकदम तने हुए और गुलाबी चुचूक…
मैंने अपनी बनियान निकाल दी। मेरे बालों से भरे सीने में उसके गुलाबी स्तनाग्र रगड़ने खाने लगे…
उसने मेरी तरफ़ देखा और कहा- तुम बहुत बदमाश हो! एक दम गंदे!’ और फ़िर मेरे सीने से लग गई..
वो अपनी चूचियों को मेरे नज़रों से छुपाने की कोशिश कर रही थी, मैंने उसे थोड़ा परे किया और अब मैंने अपना चेहरा उसकी चूचियों पर रखा और उसके निपल मुँह में लिया. दुसरे को उँगलियों से मसल रहा था..
उसने मेरा सर जोर से अपनी छाती पर दबाया.. और ‘आह्ह.. बस.. उफ़.. संजय..’ करने लगी..
लेकिन मुझे तो नशा हो रहा था.. उसके मदमस्त स्तन.. चूसने में मुझे किसी शहद या मिठाई से ज्यादा मीठापन महसूस हो रहा था.. मैं अब जोर से चूसने लगा.. मैंने हल्के से उसके बाएँ निपल में काट लिया ..ऊईई… उफ्फ्फ्फ़… बस संजय.. रुक जाओ.. अब और नहीं..’ कहते हुए वो उठने लगी।
मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा- नहीं रागिनी मुझे मत रोको प्लीज़.. मुझे आज मेरे सपनो की रानी को जी भर कर प्यार करने दो!’
और मैं फ़िर से उसके निपल मुँह में लेकर एक एक कर चूसने लगा।
‘आआआ आआह्ह्ह.. हाँ.. संजय.. जोर से… उफ़. बहुत अच्छा लग रहा है..’ कहते हुए मेरे सर को अपने सीने पर दबाने लगी।
मैंने अब उसकी साड़ी को निकालना शुरू किया.. वो उठने लगी..मैंने साड़ी निकाल कर फेंक दी.. अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी… कमर पर थोड़ा गदरायापन था. उसकी नाभि बहुत गहरी थी. मैंने उसकी नाभि पर हाथ फेरा… वो मचल उठी..
मैंने फ़िर से उसके गालों को चूमा.. फ़िर उसके कान पर गीली जीभ फेरी.. वो उछल पड़ी.. मैं चाहता था कि उसके उछलने से उसकी चूचियाँ भी उछलें .. लेकिन नही.. वो तो जैसे उसके सीने पर चिपकी हुई थी.. जैसे किसी मूर्ति के स्तन हो! एकदम सख्त..!
दोस्तो, आप सोच सकते हो मेरी क्या हालत हो रही थी उसके इस रूप को देख कर…
उसके निपल मानो स्ट्राबेरी हों इस तरह गुलाबी से लाल हो रहे थे… मेरे चूसने से और कड़क हो गए थे.. मैंने उसके एक स्तन को पंजे से पकड़ा और ज्यादा से ज्यादा मुँह के अन्दर लेकर चूसने लगा…
‘आह..आह.. ओह्ह.. संजय.. उफ़.. तुम बहुत बदमाश हो.. आह.. उफ़.. मुझे क्या हो रहा..इश.. इश्ह.. कहते हुए वो अपनी दोनों जांघों को रगड़ने लगी.. संजय.. क्या कर रहे हो.. आ..आह्ह..बस.. हाँ दबाओ.. चूसो..’
और उसने एक हाथ से अपनी चूची पकड़ी और मेरे मुँह में डालने लगी… उसके पैर उसी तरह हिल रहे थे.. वो अपने चूतड़ ऊपर कर रही थी.. और अचानक उसने मुझे जोर से भींच लिया.. और आह्ह..आह्ह.. आह… करते हुए अपने पैरों को पूरा लंबा कर दिया..
मैं समझ गया कि वो झड़ गई है..
अब उसको मैंने फ़िर से होंठो से चूमना शुरू किया.. और चूमते हुए मैंने उसके हाथों को ऊपर उठाया और अपना मुँह उसकी बगल में घुसाया.. ओह्ह.. उसके बगल की वो मादक खुशबू.. पसीने और पाऊडर की मिली-जुली खुशबू.. मैंने उसे सूंघा और फ़िर जीभ फेरते हुए चाटने लगा।
उसे गुदगुदी होने लगी..
मैंने दोनों बगलों को करीब दस मिनट तक चाटा.. वो मचलती रही..
फ़िर मैं दुबारा उसके स्तनों पर आ गया.. इस बार मैं पूरे स्तन को हथेली में लेता और निपल समेत जितना मुँह में ले सकता, उतना मुँह में लेता और चूसता.. दोनों चूचियाँ अब लाल हो चुकी थी, दबाने से नीले निशान दिख रहे थे.. मैंने जहाँ जहाँ दांत लगाये, वहाँ पर दांतों के निशान भी पड़ गए थे…
रागिनी सिर्फ़ आह.. ओह्ह.. कर रही थी.. मैं उसकी पतली कमर को सहलाता.. पेट पर हाथ फेरता.. अब मैं नीचे पेट की तरफ़ आया.. जैसे ही गोरे पेट पर चूमा.. वो थोड़ी उछल पड़ी..
मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ के नीचे डाल दिए। उसके चूतड़ किसी कुंवारी लड़की जैसे सख्त थे.. लेकिन उस सख्ती में एक मुलामियत का अहसास था… मैंने उन्हें दबाते हुए मेरी जीभ उसकी नाभि पर गोलाई में घुमाना शुरू किया.. अब वो फ़िर से बेचैन होने लगी थी.. ओह्ह संजय.. बहुत बदमाश हो तुम.. उफ़ नहीं.. बस.. मैं.. मर जाऊँगी. इ.इ.इ.इ.’ और वो थोड़ा उठ कर बैठ गई..
मैंने जल्दी से उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूमने लगा.. अब वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी… मैंने अपनी जीभ उसके मुँह के अन्दर डाल दी.. फ़िर उसकी जीभ मुँह में लेकर चूसने लगा.. मुझे मालूम था कि अब रागिनी भी गरम हो चुकी है फ़िर से..
मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ा.. उसकी चूचियों को देखते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर चिपका दिए.. और जोरों से चूसने लगा.. उसके मुँह से उम् ऽऽ उम् आह की आवाज़ निकलने लगी.. मेरे हाथ स्तनों पर थे.. मैंने मेरे होंठ फ़िर से उसके निपल पर रखे ..उसका हाथ मेरे बालों में घूम रहा था..
इस पोज़ में मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी. मैंने उसे सोफे के किनारे पर पैर लटका कर बिठाया और मैं नीचे ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गया.. इस तरह बैठने से उसकी चूंचिया ठीक मेरे होंठो के सामने आ गई। मैंने दोनों चूचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया और उसके निपल मुँह में लिए.. कभी कभी मैं उसकी कमर को भी सहला देता था..
मैंने नीचे सर झुकाया तो मैंने देखा उसका पेटीकोट सामने से गीला हो रहा है.. मैं अपना मुँह नीचे की तरफ़ लाया उसके पेट पर से होते हुए उसके दोनों जांघों के बीच में मैंने सर रखा और नाभि का चुम्बन लेते हुए उसकी जांघों को हाथों से फैलाया.. पेटीकोट का कपड़ा पूरा फ़ैल गया।
मेरे होंठ उसकी जांघों पर पहुंचे पेटीकोट के ऊपर से ही.. पैर फैला देने से मुझे उसकी उभरी हुई चूत का आभास मिल रहा था. मैंने बहुत हलके से उस उभार पर होंठ रखे और ‘पुच्च..पुच्च.’ किया.. वो सिहर उठी.. अपनी जांघ सिकोड़ने लगी।
अब मैंने उसका पेटीकोट निकलने का निश्चय किया और उसकी डोरी पर हाथ रखा। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया- नहीं संजय.. ये मत करो.. प्लीज़, अपनी बीवी और मेरे पति के बारे में सोचो.. यह ग़लत है.. हम उनसे दगाबाजी कर रहे हैं .. रुक जाओ संजय!’
उसने मुझे रोकने का एक असफल प्रयत्न किया और उठ कर खड़ी होने लगी।
‘रागिनी, अब बहुत देर हो चुकी है.. तुम भी जानती हो कि अब हम दोनों के लिए रुकना नामुमकिन है.. अब इस मौके का फायदा उठाओ और मजा लो.. इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया..
पेटीकोट नीचे खिसका..
शेष कहानी अगले भाग में! Sex Stories
यह कहानी मुझे श्री Antarvasna Stories मुकेश श्रीवास्तव ने भेजी है जिसे उन्होंने मुझे कहानी के रूप में लिखने की विनती की है। जरा सुने तो कि श्रीवास्तव जी क्या कह रहे हैं!
भाभी, भैया और मैं मुम्बई में रहते थे। मैं उस समय पढ़ता था। भैया अपने बिजनेस में मस्त रहते थे और खूब कमाते थे। मुझे तब जवानी चढ़ी ही थी, मुझ तो सारी दुनिया ही रंगीली नजर आती थी। जरा जरा सी बात पर लण्ड खड़ा हो जाता था। छुप छुप कर इन्टरनेट पर नंगी तस्वीरे देखता था और अश्लील पुस्तकें पढ़ कर मुठ मारता था। घर में बस भाभी ही थी, जिन्हें आजकल मैं बड़ी वासना भरी नजर से देखता था। उनके शरीर को अपनी गंदी नजर से निहारता था, भले ही वो मेरी भाभी क्यो ना हो, साली लगती तो एक नम्बर की चुद्दक्कड़ थी।
क्या मस्त जवान थी, बड़ी-बड़ी हिलती हुई चूंचियाँ! मुझे लगता था जैसे मेरे लिये ही हिल रही हों। उसके मटकते हुये सुन्दर कसे हुये गोल चूतड़ मेरा लण्ड एक पल में खड़ा कर देते थे।
जी हाँ… ये सब मन की बातें हैं… वैसे दिल से मैं बहुत बडा गाण्डू हूँ… भाभी सामने हों तो मेरी नजरें भी नहीं उठती हैं। बस उन्हें देख कर चूतियों की तरह लण्ड पकड़ कर मुठ मार लेता था। ना… चूतिया तो नहीं पर शायद इसे शर्म या बड़ों की इज्जत करना भी कहते हों।
एक रात को मैं इन्टर्नेट पर लड़कियों की नंगी तस्वीरें देख कर लेटा हुआ लण्ड को दबा रहा था। मुझे इसी में आनन्द आ रहा था। मुझे अचानक लगा कि दरवाजे से कोई झांक रहा है… मैं तुरन्त उठ बैठा, मैंने चैन की सांस ली।
भाभी थी…
‘भैया, चाय पियेगा क्या…’ भाभी ने दरवाजे से ही पूछा।
‘अभी रात को दस बजे…?’
‘तेरे भैया के लिये बना रही हूँ… अभी आये हैं ना…’
‘अच्छा बना दो…!’
भाभी मुस्कराई और चली गई। मुझे अब शक हो गया कि कहीं भाभी ने देख तो नहीं लिया। फिर सोचा कि मुस्करा कर गई है तो फिर ठीक है… कोई सीरियस बात नहीं है।
कुछ ही देर में भाभी चाय लेकर आ गई और सामने बैठ गईं।
‘इन्टरनेट देख लिया… मजा आया…?’ भाभी ने कुरेदा।
मैं उछल पड़ा, तो भाभी को सब पता है, तो फिर मुठ मारने भी पता होगा।
‘हाँ अ… अह्ह्ह हाँ भाभी, पर आप…?’
‘बस चुप हो जा… चाय पी…’ मैं बेचैन सा हो गया था कि अब क्या करूँ । सच पूछो तो मेरी गाण्ड फ़टने लगी थी, कहीं भैया को ना कह दें।
‘भाभी, भैया को ना कहना कुछ भी…!’
‘क्या नहीं कहना… वो बिस्तर वाली बात… चल चाय तो खत्म कर, तेरे भैया मेरी राह देख रहे होंगे!’
खिलखिला कर हंसते हुए उन्होंने अपने हाथ उठा अंगड़ाई ली तो मेरे दिल में कई तीर एक साथ चल गये।
‘साला डरपोक… बुद्धू…! ‘ उसने मुझे ताना मारा… तो मैं और उलझ गया। वो चाय का प्याला ले कर चली गई। दरवाजा बंद करते हुये बोली- अब फिर इन्टर्नेट चालू कर लो… गुड नाईट…!’
मेरे चेहरे पर पसीना छलक आया… यह तो पक्का है कि भाभी कुछ जानती हैं।
दूसरे दिन मैं दिन को कॉलेज से आया और खाना खा कर बिस्तर पर लेट गया। आज भाभी के तेवर ठीक नहीं लग रहे थे। बिना ब्रा का ब्लाऊज, शायद पैंटी भी नहीं पहनी थी। कपड़े भी अस्त-व्यस्त से पहन रखे थे। खाना परोसते समय उनके झूलते हुये स्तन कयामत ढा रहे थे। पेटीकोट से भी उनके अन्दर के चूतड़ और दूसरे अंग झलक रहे थे। यही सोच सोच कर मेरा लण्ड तना रहा था और मैं उसे दबा दबा कर नीचे बैठा रहा था। पर जितना दबाता था वो उतना ही फ़ुफ़कार उठता था। मैंने सिर्फ़ एक ढीली सी, छोटी सी चड्डी पहन रखी थी। मेरी इसी हालत में भाभी ने कमरे में प्रवेश किया, मैं हड़बड़ा उठा। वो मुस्कराते हुये सीधे मेरे बिस्तर के पास आ गई और मेरे पास में बैठ गई। और मेरा हाथ लण्ड से हटा दिया।
उस बेचारे क्या कसूर… कड़क तो था ही, हाथ हटते ही वो तो तन्ना कर खड़ा हो गया।
‘साला, मादरचोद तू तो हरामी है एक नम्बर का…’ भाभी ने मुझे गालियाँ दी।
‘भाभी… ये गाली क्यूँ दी मुझे…?’ मैं गालियाँ सुनते ही चौंक गया।
‘भोसड़ा के! इतना कड़क, और मोटा लण्ड लिये हुये मुठ मारता है?’ उसने मेरा सात इन्च लम्बा लण्ड हाथ में भर लिया।
‘भाभी ये क्या कर रही आप…!’ मैंने उनक हाथ हटाने की भरकस कोशिश की। पर भाभी के हाथों में ताकत थी। मेरा कड़क लण्ड को उन्होंने मसल डाला, फिर मेरा लण्ड छोड़ दिया और मेरी बांहों को जकड़ लिया। मुझे लगा भाभी में बहुत ताकत है। मैंने थोड़ी सी बेचैनी दर्शाई। पर भाभी मेरे ऊपर चढ़ बैठी।
‘भेन की चूत… ले भाभी की चूत… साला अकेला मुठ मार सकता है… भाभी तो साली चूतिया है… जो देखती ही रहेगी… भाभी की भोसड़ी नजर नहीं आई…?’ भाभी वासना में कांप रही थी। मेरा लण्ड मेरी ढीली चड्डी की एक साईड से निकाल लिया। अचानक भाभी ने भी अपना पेटिकोट ऊँचा कर लिया। और मेरा लण्ड अपनी चूत में लगा दिया।
‘चल मादरचोद… घुसा दे अपना लण्ड… बोल मेरी चूत मारेगा ना…?’ भाभी की छाती धौंकनी की तरह चलने लगी। इतनी देर में मेरे लण्ड में मिठास भर उठी। मेरी घबराहट अब कुछ कम हो गई थी। मैंने भाभी की चूंचियाँ दबाते हुये कहा- रुको तो सही… मेरा जबरन चोदन करोगी क्या, भैया को मालूम होगा तो वो कितने नाराज होंगे!’
भाभी नरम होते हुए बोली- उनके रुपयों को मैं क्या चूत में घुसेड़ूगी… हरामी साले का खड़ा ही नहीं होता है, पहले तो खूब चोदता था अब मुझे देखते ही मादरचोद करवट बदल कर सो जाता है… मेरी चूत क्या उसका बाप चोदेगा… अब ना तो वो मेरी गाण्ड मारता है और ना ही मेरी चूत मारता है… हरामी साला… मुझे देख कर चोदू का लण्ड ही खड़ा नहीं होता है!’
‘भाभी इतनी गालियाँ तो मत निकालो… मैं हूँ ना आपकी चूत और गाण्ड चोदने के लिये। आओ मेरे लण्ड को चूस लो!’
भाभी एक दम सामान्य नजर आने लग गई थी अब, उनके मन की भड़ास निकल चुकी थी। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर वो भूखी शेरनी की तरह लपक ली। उसका चूसना ही क्या कमाल का था। मेरा लण्ड फ़ूल उठा। उसका मुख बहुत कसावट के साथ मेरे लौड़े को चूस रहा था। मेरे लण्ड को कोई लड़की पहली बार चूस रही थी। वो लण्ड को काट भी लेती थी। कुछ ही समय में मेरा शरीर अकड़ गया और मैंने कहा- भाभी, मत चूसो! मेरा माल निकलने वाला है…!’
‘उगल दे मुँह में भोंसड़ी के…!’ उसका कहना भी पूरा नहीं हुआ था कि मेरा लण्ड से वीर्य निकल पड़ा।
‘आह मां की लौड़ी… ये ले… आह… पी ले मेरा रस… भेन दी फ़ुद्दी…!’ मेरा वीर्य उसके मुह में भरता चला गया। भाभी ने बड़े ही स्वाद लेकर उसे पूरा पी लिया।
भाभी बेशर्मी से अब बिस्तर पर लेट गई और अपनी चूत उघाड़ दी। उसकी भूरी-भूरी सी, गुलाबी सी चूत खिल उठी।
‘चल रे भाभी चोद… चूस ले मेरी फ़ुद्दी… देख कमीनी कैसे तर हो रही है!’ तड़पती हुई सी बोली।
मुझे थोड़ा अजीब सा तो लगा पर यह मेरा पहला अनुभव था सो करना ही था। जैसे ही मुख उसकी चूत के पास लाया, एक विचित्र सी शायद चूत की या उसके स्त्राव की भीनी सी महक आई। जीभ लगाते ही पहले तो उसकी चूत में लगा लसलसापन, चिकना सा लगा, जो मुझे अच्छा नहीं लगा। पर अभी अभी भाभी ने भी मेरा वीर्य पिया था… सो हिम्मत करके एक बार जीभ से चाट लिया। भाभी जैसे उछल पड़ी।
‘आह, भैया… मजा आ गया… जरा और कस कर चाट…!’
मुझे लगा कि जैसे भाभी तो मजे की खान हैं… साली को और रगड़ो… मैंने उसे कस-कस कर चाटना आरम्भ कर दिया। भाभी ने मेरे सर के बाल पकड़ कर मेरा मुख अपने दाने पर रख दिया।
‘साले यह है रस की खान… इसे चाट और हिला… मेरी माँ चुद जायेगी राम…!’ दाने को चाटते ही जैसे भाभी कांप गई।
‘मर गई रे! हाय मां की…! चोद दे हाय चोद दे…! साला लण्ड घुसेड़ दे!… मां चोद दे… हाय रे!’ और भाभी ने अपनी चूत पर पांव दोहरे कर लिये और अपना पानी छोड़ दिया। ये सब देख कर मेरा मन डोल उठा था। मेरा लण्ड एक बार फिर से भड़क उठा।
भाभी ने ज्योंही मेरा खड़ा लण्ड देखा- साला हरामी… एक तो वो है… जो खड़ा ही नहीं होता है… और एक ये है… फिर से जोर मार रहा है…’
‘भाभी, मैंने यह सब पहली बार किया है ना…! मुझे बार-बार आपको चोदने की इच्छा हो रही है!’
‘चल रे भोसड़ी के… ये अपना लण्ड देख…साला पूरा छिला हुआ है… और कहता है पहली बार किया है!’
‘भाभी ये तो मुठ मारने से हुआ है… उस दो रजाई के बीच लण्ड घुसेड़ने से हुआ है… सच…! ‘
‘आये हाये… मेरे भेन के लौड़े… मुझे तो तुझ पर प्यार आ रहा है सच… साले लण्ड को टिका मेरे गाण्ड के गुलाब पर… मेरे चिकने लौण्डे!’ भाभी ने एक बार फिर से मुझे कठोरता से जकड़ लिया और घोड़ी बन गई। अपनी भूखी प्यासी गाण्ड को मेरे लौड़े पर कस दिया।
‘चल हरामी… लगा जोर… घुसेड़ दे…तेरी मां की… चल घुसा ना…!’ मेरे हर तरफ़ से जोर लगाने पर भी लण्ड अन्दर नहीं जा रहा था।
‘भोसड़ी के… थूक लगा के चोद…नहीं तो तेल लगा के चोद… वाकई यार नया खिलाड़ी है!’ और भाभी ने अपने कसे हुये सुन्दर से गोल गोल चूतड़ मेरे चेहरे के सामने कर दिये। मैंने थूक निकाल कर जीभ को उसकी गाण्ड पर लगा दी और उसे जीभ से फ़ैलाने लगा। भाभी को जोरदार गुदगुदी हुई।
‘भड़वे… और कर… जीभ गाण्ड में घुसा दे… हाय हाय हाय रे… और जीभ घुमा… आह्ह्ह रे… गाण्ड में घुसा दे…बड़ा नमकीन है रे तू तो!’ उसकी सिसकारियाँ मुझे मस्त किये दे रही थी।
‘भाभी… ये नमकीन क्या?’ मैंने पूछा तो वो जोर से हंस दी।
‘तेरे लौड़े की कसम भैया जी… जीभ से गाण्ड मार दे राम…’ मैंने भी अपनी जीभ को उसकी गाण्ड में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा। मैंने अपनी अपनी एक अंगुली उसकी चूत में भी घुसा दी। भाभी तड़प सी उठी।
‘आह मार दे गाण्ड रे… उठा लौड़ा… मार दे अब…भोसड़ी के ‘
मैंने तुरंत अपनी पोजिशन बदली और और उसकी गाण्ड के पीछे चिपक गया और तन्नाया हुआ लण्ड उसकी गाण्ड की छेद पर रख दिया और जोर लगाते ही फ़क से अन्दर उतर गया।
‘मदरचोद पेल दे… चोद दे गाण्ड… साली को… मरी भूखी प्यासी तड़प रही थी… चोद दे इस कमीनी को…’
मेरी कमर अब उसे चोदते हुये हिलने लगी थी। मेरा लण्ड तेजी से चलने लगा था। उसकी गाण्ड का छेद अब बन्द नहीं हो रहा था। जैसे ही मैं लण्ड बाहर निकालता, वो खुला का खुला रह जाता। तभी मैं जल्दी से फिर अपना लण्ड घुसेड़ देता… हाँ एक थूक का लौन्दा जरूर उसमें टपका देता था। फिर वापस से दनादन चोदने लगता था। बीच बीच में वो आनन्द के मारे चीख उठती थी। घोड़ी बनी भाभी की चूत भी अब चूने लग गई थी। उसमें से रति-रस बूंद बूंद करके टपकने लगा था। मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल कर उसकी चूत में घुसेड़ दिया।
‘भोसड़ी के…धीरे से… मेरी चूत तो अभी तो साल भर से चुदी भी नहीं है… धीरे कर!’
‘ना भाभी… मत रोको… चलने दो लौड़ा…’
‘हाय तो रुक जा… नीचे लेट जा… मुझे चोदने दे अब…’
‘बात एक ही ना भाभी… चुदना तो चूत को ही है…’
‘अरे चल यार… मुझे मेरे हिसाब से चुदने दे…भोसड़ी तो मेरी है ना…’ उसके स्वर में व्याकुलता थी।
मेरे नीचे लेटते ही वो मुझ पर उछल कर चढ़ गई और खड़े लण्ड पर चूत के पट खोलकर उस पर बैठ गई। चिकनी चूत में लण्ड गुदगुदी करता हुया पूरा अन्दर तक बैठ गया। उसके मुख से एक आह निकल पड़ी। अब उसने मेरा लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर जोर लगा कर और भी गहराई में उतारने लगी। हर बार मुझे लण्ड पर एक जोर की मिठास आ जाती थी।
उसके मुँह से एक प्रकार की गुर्राहट सी निकल रही थी जैसे कि कोई भूखी शेरनी हो और एक बार में ही पुरा चुद जाना चाहती हो। अब तो अपनी चूत मेरे लण्ड पर पटकने लगी… मेरा लण्ड मिठास की कसक से भर उठा। उसके धक्के बढ़ते गये और मेरी हालत पतली होती गई… मुझे लगा कि मैं बस अब गया… तब गया… पर तभी भाभी ने अपने दांत भींच लिये और मेरे लण्ड को जोर से भीतर रगड़ दिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। चूत की रगड़ खाते ही मेरी जान निकल गई और मेरे लण्ड ने चूत में ही अपना यौवन रस छोड़ दिया…
उसकी चूत में जैसे बाढ़ आ गई हो। मेरा तो वीर्य निकले ही जा रहा था… और शायद भाभी की चूत ने भी चुदाई के बाद अपना रस जोर से छोड़ दिया था। वो ऊपर चढ़ी अपना रस निकाल रही थी और फिर मेरे ऊपर लेट गई। सब कुछ फिर से एक बार सामान्य हो गया…
‘भाभी आपकी चुदाई तो…’
भाभी ने मेरे मुख पर हाथ रख दिया- अब नहीं… गालियाँ तो चुदाई में ही भली लगती है…अब अगली चुदाई में प्यारी-प्यारी गालियाँ देंगे!’
‘सॉरी, भाभी… हाँ मैं यह पूछ रहा था कि जब आप को मेरे बारे में पता था तब आपने पहल क्यों नहीं की?’
‘पता तो तुझे भी था… मैं इशारे करती तो तू समझता ही नहीं था… फिर जब मुझे पक्का पता चल गया कि तेरे मन में मुझे चोदने की है और तू मेरे नाम की मुठ मारता है तो फिर मेरे से रहा नहीं गया और तुझ पर चढ़ बैठी और मस्ती से चुदवा लिया।’
‘भाभी धन्यवाद आपको… मतलब अब कब चुदाई करेंगें…?’
‘तेरी मां की चूत… आज करे सो अब… चल भोसड़ी के चोद दे मुझे…! ‘ और भाभी फिर से मुझे नोचने खसोटने के लिये मुझ पर चढ़ बैठी और मुझे नीचे दबा लिया और मुझे गाल पर काटने लगी। मैं सिसक उठा और वो एक बार फिर से मुझ पर छा गई…
मेरा लण्ड तन्ना उठा… मेरा चेहरा उसने थूक से गीला कर दिया और मेरे गालों को काटने लगी… मेरा लण्ड उसकी चूत में फिर से घुस पड़ा… Antarvasna Stories
इंडियन भाभी की गांड में लंड गया तो भाभी की गांड फट गयी, उसमें से खून निकलने लगा क्योंकि भाभी ने उतना मोटा लंड पहले कभी गांड में नहीं लिया था.
दोस्तो, मैं अंकिता राठौर एक बार फिर से आपकी सेवा में हाजिर हूं.
मेरी पिछली कहानी
विधवा सहेली की चूत चुदवा कर मजा दिलाया
को आप लोगों ने बहुत प्यार दिया है.
उसके लिए आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया!
आज मैं फिर एक नई कहानी लेकर आई हूं.
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो उसे पहले पढ़ लें वरना ये आपको समझ नहीं आयेगी.
तो जैसा आपने मेरी पिछली कहानी में पढ़ा था कि शोभा का बेटा आर्यन मुझको चोद चुका था और मैंने प्लान बना के शोभा को भी आर्यन से चुदवा दिया था।
अब आगे इंडियन भाभी की गांड में लंड:
ऐसे एक दिन मैं घर में फ्री आराम कर रही थी तो सोचा क्यों न आर्यन से बात करूं क्योंकि मेरी भी चूत में बहुत खुजली हो रही थी, काफी दिनों से लौड़ा अंदर नहीं लिया था मैंने भी!
मैंने आपको पिछली कहानी में बताया था कि आर्यन मेरी सबसे अच्छी सहेली शोभा का बेटा है जिसकी उम्र 24 साल है.
तो मैंने झट से फोन उठाया और आर्यन का नंबर डायल किया.
उसने फोन उठाया और बोला- कैसी हो मेरी जान?
मैंने कहा- अपनी जान को भूल गये या मन भर गया है क्या जो अब मिलने नहीं आते?
तो उसने बताया कि उसके एग्जाम थे तो वह व्यस्त था.
मैंने कहा- अच्छा ठीक है. फिर बताओ कब मिल रहे हो?
तो उसने बताया- मम्मी कल परसों में दिल्ली जाने वाली हैं ऑफिस के काम से! तो घर खाली रहेगा. तो फिर हमारे मजे ही मजे हैं मेरी रण्डी!
उसके मुंह से रण्डी सुन कर मेरी चूत में खुजली होने लगी.
मैंने कहा- यार बेटा, बहुत मन कर रहा है. जल्दी मिलो!
उसने बोला कि फोन करेगा वो!
उस दिन मैं चूत में उंगली कर के सो गई।
फिर एक दिन सुबह आर्यन का फोन आया- मम्मी अभी थोड़ी में निकल रही हैं. तो घर आ जाना!
मैंने कहा- ठीक है.
तब मैंने अपने पति को बोल दिया- मुझको मेकअप का ऑर्डर मिला है. एक लड़की का मेकओवर करना है. तो मैं बाहर जा रही हूं.
तो पति ने कहा- ठीक है … लेकिन आराम से जाना!
आप सबको तो पता ही है कि मैं एक ब्यूटी पार्लर चलाती हूं.
फिर आर्यन का फोन आया बोला- कहाँ हो जानेमन? आओ ना … घर में मैं बिल्कुल अकेला हूं!
मैं बोली- बस आ रही हूं यार!
करीब बारह बजे मैं आर्यन के घर पहुंच गई.
उसने दरवाजा खोला, मैं अंदर जाकर सोफे पे टांगें ऊपर कर फैका कर बैठ गई.
आर्यन ने मुझको देखा.
मैं बोली- क्या हुआ?
उसने बोला- कुछ नहीं … आज बहुत खूबसूरत लग रही हो!
मैंने उस दिन काली साड़ी और ब्लैकलेस ब्लाउज पहना था. अंदर ब्रा पहनी नहीं थी. हाँ पैंटी पहनी थी नीले रंग की!
आर्यन मेरे पास बैठ कर मेरी चिकनी टांगें सहलाने लगा.
थोड़ी देर में मैं गर्म हो गई थी.
काफी देर मेरी चूचियों और जांघें सहलाने के बाद आर्यन बोला- यार, एक बात बोलूं … मेरा एक फ्रेंड है. मैंने उसे बताया कि मैंने एक भाभी के साथ मजे लिए. तो वो भी बोलने लगा करने से लिए!
मैंने पूछा- कौन है वो?
तो आर्यन बोला- बबलू!
मैंने पूछा- कौन बबलू?
तो उसने बताया- अरे यार, वो जिसकी चौराहे पे पान शॉप है वही!
तब मुझे पता चला वो बबलू!
दरअसल बबलू की हमारे चौराहे पर शराब के ठेके के पास पान सिगरेट की दुकान है. वहाँ हमेशा भीड़ ही लगी रहती है.
मैंने आर्यन से पूछा- तुमने ऐसे लोगों से दोस्ती कर रखी है?
तो उसने बताया- यार, एक दिन मैं नशे में था बहुत ज्यादा … तो उसी की दुकान पे खड़ा होकर सिगरेट पी रहा था. तो मैंने ऐसे नशे में इसको हमारी बात बता दी.
मैंने उसे कहा- यार, यह क्या कर दिया तुमने? उसने हमारे बारे में सबको बता दिया तो?
आर्यन बोला- वह अब मुझसे बोल रहा था कि सिर्फ एक बार … बस एक बार दिला दो यार! अब तुम बताओ मैं क्या करूं?
उसने मुझसे पूछा तो मैं बोली- अब सबको बता देगा बबलू!
तो आर्यन बोला- ऐसा नहीं है. तुम एक बार बस उसके साथ कर लो ना … फिर ऐसा कुछ नहीं होगा, नहीं बताएगा वह किसी को!
मैं आर्यन से बोली- ऐसे कैसे यार कर लूं उसके साथ?
तो आर्यन बोला- यार और कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है!
फिर मैंने काफी देर सोचने के बाद आर्यन से कहा- बोल तो तुम सही रहे हो! लेकिन तुम भी साथ में रहना!
आर्यन बोला- ठीक है. बताओ अभी बुला लूं बबलू भैया को?
मैंने कहा- अभी?
तो आर्यन बोला- हाँ, वह 5 मिनट में दुकान बंद कर के आ जाएगा.
मैंने कहा- ठीक है, बुला लो!
फिर आर्यन ने बबलू को फोन किया और बोला- भैया, मेरे घर आ जाओ. आपका काम हो गया है.
करीब आधे घंटे बाद घण्टी बजी.
आर्यन मुझसे बोला- तुम अंदर रहना. जब मैं बोलूं तब आना!
मैं अंदर कमरे में चली गई.
आर्यन दरवाजा खोलने चला गया.
मैंने दोनों की आवाज सुनी.
बबलू बोल रहा था- कहाँ हैं भाभी जी?
तो आर्यन बोला- बैठो, अभी बुलाता हूं.
आर्यन ने मुझ को आवाज दी.
मैं बाहर वाले कमरे में गई.
बबलू और आर्यन दोनों बैठे थे.
बबलू ऐसे नजरें फाड़ कर देख रहा था मुझे!
मैंने टेबल पर देखा तो एक बोतल शराब की रखी हुई थी और दो पैकेट सिगरेट थे.
आर्यन बोला- तुम दोनों बैठो, मैं ग्लास लेकर आता हू.
वह अंदर ग्लास लेने चला गया.
तो बबलू मेरे पास आकर बैठ गया और बोला- भाभी, आपको कोई दिक्कत तो नहीं है न? बता दो?
मैं बोली- अगर मैं मना करूंगी तो क्या तुम मान जाओगे?
तो बबलू बोला- भाभी, आप मुझे बहुत मस्त लगती हो. मैं हमेशा आपके पार्लर की तरफ से निकलता हूँ आपको देखने के लिए! यहाँ तक कि कभी कभी राज से भी पूछ लेता था कि ‘मम्मी पापा कैसे हैं’ जब वो मेरी दुकान पे आता था.
आप सबको बता दूँ कि राज मेरे बेटे का नाम है.
मैंने पूछा- वह तुम्हारे वहाँ क्या करने आता है?
तो बबलू बोला- अरे भाभी, अब मेरी जिस चीज की दुकान है, वही सामान लेने आता है … सिगरेट!
अब मुझे पता चला कि मेरा बेटा भी सिगरेट पीता है.
तब तक आर्यन ग्लास लेकर आ चुका था और हमारी बातें सुन रहा था.
आर्यन बोला- चलो, मैं पीछे कमरे में हूँ. आप लोग एंजॉय करो.
तो बबलू बोला- अरे तू कहाँ जा रहा … रुक यहीं … दो पेग ले यार!
आर्यन बोला- अरे रहने दो, आपको डिस्टर्ब होगा.
तो बबलू बोला- नहीं होगा मेरे भाई!
तभी बबलू बोला- अंकिता भाभी, एक काम करो … आप बनाओगे हमारा पेग!
मैंने पहले कभी पेग नहीं बनाया था.
तो मैंने उसको बताया- मैंने पहले कभी बनाया है.
बबलू बोला- अरे बस बोतल से थोड़ी थोड़ी शराब ग्लास में डालनी है. इसमें क्या दिक्कत है?
उसने बोतल का ढक्कन खोल कर मुझे दी और मैंने दोनों ग्लास में थोड़ी थोड़ी शराब डाली.
लेकिन दोनों में ज्यादा हो गई.
तो आर्यन बोला- अरे, ये तो पटियाला पेग बना दिया यार!
बबलू बोला- अरे अब भाभी जी ने बना दिया है तो पी लेंगे!
वे दोनों आराम से पीने लगे.
फिर बबलू ने सिगरेट जलाई, आर्यन और बबलू दोनों सिगरेट पीने लगे और मुझे घूर घूर के देखने लगे.
तब बबलू उठा और मेरे पास आकर बैठ गया और मेरी जांघें सहलाने लगा आर्यन के सामने!
आर्यन बोला- चलो बबलू भैया, मैं अंदर जाता हूं.
बबलू बोला- नहीं बे … यहीं रुक … दोनों साथ में मजे लेंगे.
आज तो वैसे अंदर से आग मेरे भी लगी थी.
लेकिन दो लंड एक साथ कभी नहीं लिए मैंने!
फिर बबलू बोला- भाभी, एक पेग ऐसा ही और बनाओ.
मैं फिर पेग बनाने लगी झुक कर!
तो पीछे से बबलू ने मेरे चूतड़ों पर हाथ फेर दिया और दबाने लगा.
फिर आकर उसने पेग खतम किया और मेरी साड़ी उतारने लगा.
मैं अब सिर्फ पेटिकोट ब्लाउज में थी.
आर्यन सब कुछ बैठ कर देख रहा था और अपना लंड सहला रहा रहा था.
मैं देख रही थी कि उसका लंड बिल्कुल खड़ा हो गया था.
बबलू ने अब अपने कपड़े उतार दिए पूरे बस चड्डी में था।
फिर धीरे से बबलू ने मेरा ब्लाउज उतार दिया और मेरे स्तन के साथ खेलने लगा.
बार बार मेरी दोनों चूचियों को काटता तो कहीं दबाता.
मैं बहुत गर्म हो गई थी.
तब तक आर्यन ने मेरा पेटीकोट उतार दिया.
अब मैं सिर्फ पैंटी में थी … दो जवान मर्दों के बीच मैं अबला!
आर्यन मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर जीभ लगा के चाटने लगा.
मैं पैंटी में ही झड़ गई और मेरी चूत का पानी बह कर टांगों से होते हुए बहने लगा.
फिर बबलू उठा, मेरी पैंटी उतारी और बोला- अरे भाभी, अभी तो हमने कुछ किया भी नहीं और आप इतना गर्म गई!
मेरी पैंटी उतार कर वह सारा माल चाटने लगा जिससे मैं और झड़ने लगी और मैंने बबलू के मुंह पर ही मूत दिया.
मेरे मूत की धार सीधे बबलू के मुंह में जा रही थी जिसे बबलू बड़े मजे से पी रहा था.
फिर बबलू बोला- भाभी, अब आप बेड पे लेट जाओ.
मैं अब आराम से अपनी टांगें फैलाकर बेड पे लेट गई.
अब बबलू मेरी चूत को चाटने लगा और आर्यन मेरे मुंह में लंड देने लगा.
आर्यन का लंड भी बहुत मोटा और बड़ा है लेकिन बबलू का लंड लम्बा बहुत है आर्यन से ज्यादा … लेकिन मोटा नहीं है.
थोड़ी देर में बबलू मेरे ऊपर आकर मेरे मुंह में लंड देने लगा जिसे मैं बड़े मजे से चाटने लगी.
आर्यन अब मेरी चूत चाट रहा रहा था.
मैं दोबारा गर्म हो गई थी.
मैंने बबलू से बोला- अब जल्दी से डाल दो यार!
फिर बबलू ने अपने लंड को मेरे मुंह से बाहर निकाला और बोला- भाभी, पलट जाओ!
मैंने पूछा- क्यों?
तो बबलू बोला- मुझे आपकी गांड का छेद चाटना है.
उसके कहने से मैं पलट कर लेट गई.
मैब बेड पर लेटी थी और मेरा मुंह बेड से नीचे लटक रहा था.
अब बबलू मेरी गांड का छेद चाट रहा था और आर्यन मेरे मुंह में अपना लंड डालकर अंदर बाहर कर रहा था.
मैं भी बड़े मजे से उसका लंड चूस रही थी और अपनी गांड चटवा रही थी.
फिर बबलू बोला- भाभी, आप की गांड बहुत गोरी है यार!
बबलू ने दो तीन चांटे मेरी गांड पे लगा दिए जिससे मेरी गांड बिल्कुल लाल टमाटर हो गई थी.
आर्यन बोला- आंटी, अब मैं झड़ने वाला हूँ.
ऐसा बोलते ही वह मेरे मुंह में ही झड़ गया. उसका सारा माल मेरे मुंह से टपक टपक के बेड के नीचे बिछी हुई कार्पेट पर टपकने लगा.
बबलू बोला- भाभी, अब सीधी लेट जाओ मेरे जान!
मैं जैसे ही सीधी लेटी, बबलू ने मेरी चूत पर अपने लंड का टोपा रगड़ कर रखा और बड़े प्यार से हल्का हल्का अंदर डालने लगा.
मुझे और उसको इतना मजा रहा था कि मैं आपको शब्दों में जाहिर भी नहीं कर सकती.
मेरी दोनों टांगें बबलू की गांड पर थी और हाथ बबलू की बांहों में थे.
वह मेरे वक्ष से चिपका हुआ था और मुझे प्यार से चोद रहा था.
काफी देर चोदने के बाद बबलू ने मुझे कुत्ती बनने को बोला.
मैं दोनों टांगें मोड कर कुतिया बन गई.
बबलू ने अब मेरी गांड के गुलाबी छेद पर अपने लंड का टोपा टिकाया और एक झटके में पूरा लंड अंदर कर दिया जिससे मुझे बहुत दर्द हुआ और मैं बेड पर नीचे गिर गई.
उसका लंड बहुत लंबा था.
मेरी गांड से लहू निकलने लगा और मैं रोने लगी और बब्लू काल्न्द निकलवाकर बैठ गयी.
आर्यन ने मुझे चुप कराया और बोला- आंटी मत रोओ! इसने थूक लगाए बिना डाल दिया!
तब आर्यन ने हमको कुछ देर अपने जिस्म से चिपका के रखा.
बबलू भी बोला- भाभी सॉरी! मैंने बिना बताए गांड में डाल दिया. माफ कर दो!
और वह बोला- बस थोड़ी देर बर्दाश्त कर लो, मेरा निकलने वाला है.
उसके बहुत कहने के बाद मैं फिर से बेड पर कुतिया बन गई.
इस बार बबलू ने अपने लंड पे थूक लगाया, मेरी गांड का सारा लहू साफ करने से बाद उस पर भी थूक लगाया और लंड डाल के अंदर बाहर करने लगा.
आर्यन सब कुछ बैठ कर देख रहा था और अपना लौड़ा हिला रहा था.
मैं भी अब बड़े मजे से अपनी गांड मरवा रही थी.
इस टाइम मुझे जन्नत वाली फील आ रही थी.
मेरी गांड अब पूरी खुल गई थी. इंडियन भाभी की गांड में लंड सही से जा आ रहा था.
थोड़ी देर गांड मारने के बाद बबलू ने मुझे बोला- अब मेरे लंड पे बैठ!
मैं उसके लंड पे बैठ गई और मौज से उछलने लगी.
बबलू बार बार मेरी गांड पर तमाचे लगाता जिससे मुझे और भी जोश चढ़ जाता.
मैं फिर से झड़ चुकी थी और मेरा माल निकलने की वजह से मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी और चिकनी भी … जिससे लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था.
बबलू बोला- भाभी, मेरा निकलने वाला है.
और इतना बोलते ही उसका माल मेरी चूत में ही अंदर निकल गया जिसे मैंने अपने अंदर गर्म गर्म महसूस किया.
फिर मैं आराम से लंड से उठी जिससे बबलू का लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया और उसका सारा माल जो मेरी चूत के अंदर निकल गया था, वो बहने लगा.
जैसे मैं खड़ी हुई, मेरी चूत से उसका माल गिरने लगा जो कुछ बबलू के सीने पर और कुछ बूंदें उसके चेहरे, होठों पे गिर गया.
मेरी चूत से माल अभी भी निकल रहा था.
मैं नीचे बबलू के बगल में बैठ कर उसके ऊपर गिरा हुआ सारा माल अपनी जीभ से चाटने लगी और धीरे धीरे करके सारा माल चाट गई.
और फिर आर्यन ने मेरी चूत चाटकर सारा माल साफ किया.
फिर हम तीनों ने एक साथ किस किया और जो भी माल चाटा था, उसे बार बार एक दूसरे के मुंह में दिया, चाटा फिर दिया, फिर चाटा.
बहुत मजा आया.
तो इस तरह मेरी चुदाई एक नए लंड से हुई.
दोस्तो, आपको मेरी यह इंडियन भाभी की गांड में लंड कहानी कैसी लगी?
मेल करके बताना जरूर!
पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ.
मेरा नाम हार्दिक है और मैं 20 साल का थोड़ा सीधा और थोड़ा टेड़ा किस का लड़का हूँ.
मैं उत्तर प्रदेश में रहने वाली एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ.
मेरा रंग हल्का सांवला सा है और मेरी हाइट 5 फीट 11 इंच है. लड़कियों को खास तौर पर बताना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य से बड़ा है.
बनाने वाले का मैं बस इसी चीज़ के लिए शुक्रिया करता हूँ कि उन्होंने मुझे एक अच्छा ख़ासा लंड दिया है.
मैं बी.कॉम. के अंतिम वर्ष का छात्र हूँ. मैं रोजाना जिम जाता हूँ तो मेरी बॉडी भी फिट है और मुझ पर एक दो लड़कियां भी मरती हैं, पर मैं फिर भी सबको यही बताता हूँ कि मैं सिंगल हूँ.
यह टीचर लव की कहानी की घटना उस साल की है जब मैं अपने स्नातक के दूसरे साल में था.
जब मैंने कॉलेज में बी.कॉम. में एड्मिशन लिया था तो उस समय कॉलेज में मेरा एक भी दोस्त नहीं था.
फिर मेरा कॉलेज शुरू हुआ, तो मैं पहले दिन क्लास में गया.
हमारे लेक्चर शुरू हुए.
मेरी क्लास में कुछ स्टूडेंट्स से बात भी हुई. उस दिन अपने आखिरी लेक्चर से मुझे कॉलेज से प्यार सा हो गया.
वो हमारा अकाउंट्स का लेक्चर था और हम सब सोच रहे थे कि पता नहीं अब कौन सा खड़ूस टीचर आएगा.
लेकिन जब लेक्चर शुरू हुआ तो हमारी क्लास में एक सुंदर, गोरी चिट्टी, नैन नक्स … एकदम झकास माल जैसी एक लेडी आईं … या यूं बोलूँ कि लड़की आई.
वे हसीन लड़की हमारी अकाउंट्स की टीचर थीं, जिनको देख कर मैं तो हक्का-बक्का रह गया क्योंकि इतना मस्त माल मैंने शायद ही कभी देखा था.
एक तो वो बिल्कुल दूध सी गोरी चिट्टी, ऊपर से उनके नैन नक्श इतने मस्त कि क्या ही खून.
उनकी उम्र भी 28 साल की थी, जो मुझे बाद में पता लगी थी.
मेम का 34-30-36 का साइज़ एकदम पर्फेक्ट था.
उनके तने हुए दूध और उठी हुई गांड देखते ही बन रही थी.
जब मैम क्लास में चल रही थीं तो उनकी हाई हील के कारण उनके मम्मे और चूतड़ कहर ढा रहे थे.
उस दिन उन्होंने क्रीम कलर की साड़ी एकदम चुस्त सी बांधी हुई थी जिसमें उनके बूब्स की झलक और कमर साफ दिख रही थी.
जब वो क्लास में आईं तो उन्हें देख कर मेरा तो मुँह खुला ही रह गया था.
फिर वो अन्दर आईं और ये नसीब की बात थी कि उनकी पहली नजर मेरे ऊपर ही पड़ी और उन्होंने मेरे खुले हुए मुँह और पथराई हुई आंखों को देख कर एक बहुत ही छिपी हुई कातिलाना मुस्कान दी और सामान्य हो गईं.
मैंने उनको आफ्टरनून विश किया.
उनका नाम पल्लवी था.
उन्होंने लेक्चर लिया और चली गईं, पर मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आया.
मुझे क्या, पूरी क्लास के लड़कों को कुछ समझ नहीं आया.
क्योंकि किसी का ध्यान उनके रूप सौन्दर्य से हटा ही नहीं. सबके लौड़े अकड़े हुए थे.
अब हालत ये हो गई थी कि पल्लवी नामक उस शै का सारी क्लास को इंतजार रहने लगा था.
ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और एक दिन हमारी फ्रेशर पार्टी हुई, जिसमें मुझे कुछ टैलेंट दिखाने या कुछ करने को बोला गया.
मैंने अपनी बॉडी शो की, क्योंकि जिम जाने का भी तो कुछ फायदा उठना चाहिए ना!
मेरे बॉडी शो पर काफ़ी लड़कियों को मैं पसंद आया और मुझे मिस्टर फ्रेशर बना दिया गया.
उस दिन से कॉलेज में लड़कियों के झुंडों में मेरी बातें होने लगीं.
खैर … मेरा दिल तो मैम पर आ गया था या ये कहूँ कि मुझे उनको चोदना था.
मेरी लड़कियों से ज़्यादा टाइम तक नहीं बनती थी क्योंकि मैं उन पर पैसे खर्च नहीं कर सकता था … और मुझे कोई ऐसी मिली नहीं, जो कि मुझे समझे.
फ्रेशर पार्टी के अगले दिन मैम क्लास में आईं और वो लेक्चर लेने लगीं.
उस दिन उनसे मेरी थोड़ी बातें हुईं, कुछ पढ़ाई से संबंधित थीं और थोड़ी सी ऐसे ही मज़ाक वाली.
उन्होंने भी मेरे बॉडी शो को लेकर मुझसे एक दो बातें कहीं.
उन बातों से मैं सीधा सा ये मतलब निकाल सकता था कि उनके दिल ओ दिमाग में मेरी बॉडी बस गई थी.
अब उन्होंने बॉडी के किस पार्ट को ज्यादा तवज्जो दी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी.
ऐसे ही दिन निकलते गए और मेरी मैम से बातें होने लगीं.
मैं रात को अक्सर टीचर लव के कारण उनके नाम की मुट्ठ मार कर सोने लगा था.
एक दिन एक लड़के ने लेक्चर के बाद मैम से उनका नंबर मांगा, पर मैम ने बहाना बना कर कि कॉलेज वाला नंबर तो है तो पर्सनल नंबर का क्या करना, उसे मना कर दिया.
वैसे एक बात बताऊं कि हमारे कॉलेज में जो स्थायी प्रोफेसर्स हैं, उन सभी को एक नंबर दिया गया है, जो वो अपने स्टूडेंट्स को दे देते थे.
लेकिन वे उस पर रेस्पॉन्स बहुत कम करते थे, तो स्टूडेंट्स उन फोन्स पर बात ही नहीं करते थे.
फिर ऐसे ही कुछ दिनों बाद मुझे भी कुछ प्राब्लम थी.
मैंने अपनी समस्या को लेकर पहले भी मैम को काफ़ी बार मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कभी तो रिप्लाई किया, कभी नहीं.
अब मैंने थोड़ी हिम्मत की.
मेम के लेक्चर के बाद जब सब चले गए, उस वक्त मैंने मैम से उनका नंबर मांगा.
उन्होंने कहा कि नंबर है तो तुम्हारे पास!
मैंने कहा- मेम, आप उस नंबर पर रेस्पॉन्स तो बहुत कम करती हैं … इसलिए अगर आप गलत न समझें तो …
तभी उन्होंने मेरी बात काटी और हंस कर कहा- हां तुम्हारी ये बात सही है. लो ये मेरा पर्सनल नंबर.
उन्होंने अपना नंबर मुझे दे दिया और कहा- प्लीज़ किसी और को नंबर मत देना, मुझे पसंद नहीं है कि कोई मुझे बिना मतलब के पर्सनली फोन करे.
मैंने उनको ओके बोला और साथ ही थैंक्स भी कहा और अपने घर आ गया.
मैंने उनको एक दो दिन बाद एक सवाल पूछने के लिए मैसेज किया.
उन्होंने तुरंत जबाव दिया.
उसके बाद से मैम से मेरी लगातार बात होने लगी.
अब तो क्लास में भी मेरी उनसे थोड़ी ज़्यादा बातें होने लगी थीं और वो क्लास में मेरे अलावा किसी ओर से इतनी बातें नहीं करती थीं.
मैं तो उनकी क्लास में अब कभी कभी फोन भी चला लेता था, पर वो मुझे कुछ नहीं बोलती थीं.
ऐसे ही मैंने उनको एक दिन व्हाट्सैप पर कुछ जोक सेंड किए.
तभी उनका मैसेज आया- थोड़ा पढ़ लो हार्दिक … ये नंबर मैंने तुम्हें क्वेस्चन पूछने के लिए दिया था और ये सब क्या है?
मैंने उनको सॉरी लिखा.
उन्होंने रिप्लाई किया- अरे बुद्धू, मज़ाक कर रही हूँ.
अब मेरी उनसे पढ़ाई से अलग भी बातें होने लगीं.
एक दिन उन्होंने मुझे कुछ काम बताया.
मैंने उसी समय उनका वो काम कर दिया.
उनको मुझ पर थोड़ा ज़्यादा ट्रस्ट हो गया था.
कुछ दिनों बाद हमारे एग्जाम आ गए.
इंटर्नल एग्जाम तो हो गए थे, अब फर्स्ट ईयर के फाइनल एग्जाम थे.
वैसे मैं पढ़ाई में एक सामान्य स्टूडेंट वर्ग से ही हूँ, जिनके 65-70% ही नंबर आते हैं.
फिर मेरे एग्जाम खत्म हुए और कॉलेज की भी छुट्टियां हो गईं.
उस वक्त बड़ा कठिन हो गया.
अब मेरा मन घर पर तो लगता नहीं था इसलिए मैं बाहर ही घूमता फिरता रहता या अपने रूम में सोता रहता.
जब तब मैं पल्लवी मैम से भी मैसेज पर बात कर लिया करता.
मैंने अब तक उनसे एक दो बार ही कॉल पर भी बात की थी, वो भी ये बहाना बना कर कि मुझे थोड़ी रिज़ल्ट की टेंशन हो रही है.
उन्होंने मुझे थोड़ा समझाया.
फिर रिज़ल्ट भी आ गया और मेरे 70% नंबर आए.
मेरी फैमिली मुझसे पढ़ाई को लेकर नाराज़ रहती थी कि तू कुछ पढ़ ले और अच्छा आदमी बन जा, जिससे हमारी कंडीशन जैसी है … तेरी तो ना रहे.
मैं भी काफ़ी कोशिश करता लेकिन मेरा मन पढ़ाई में ज़्यादा नहीं लगता था क्योंकि मुझे इंजीनियरिंग करनी थी लेकिन पैसों की वजह से मेरा एड्मिशन नहीं हुआ था तो मैंने बी.कॉम कर ली.
जबकि मुझे अकाउंट्स कुछ ख़ास पसंद नहीं है.
मैं तो बस मैम की वजह से अकाउंट्स के लेक्चर अटेंड करता था.
अब हमारी दोबारा क्लास शुरू हुई और मैंने फिर से कॉलेज जाना शुरू किया.
पल्लवी मैम अब हमारा दूसरा लेक्चर लेती थीं.
अब यह हो गया था कि क्लास में मैं मैम से मज़ाक कर लेता था और वे भी मुझसे मज़ाक कर लिया करती थीं.
वे मुझे कभी भी अपने काम से भेज दिया करती थीं.
एक दिन मैम ने सुबह सुबह मुझे कॉल किया और उन्होंने कहा- हार्दिक अगर तुमको कोई प्राब्लम ना हो, तो तुम मुझे घर से पिक कर सकते हो. वो आज मेरी स्कूटी खराब हो गई है.
मैंने उनको झट से कहा- ओके मैम, मैं आ जाता हूँ.
उन्होंने मुझे घर की लोकेशन भेजी और मैं वहां चला गया.
उनका घर एक बड़ी सोसाइटी में था जहां से रिक्शे मिलने मुश्किल रहते थे और उनकी कार भी काफ़ी दिनों से बंद पड़ी थी.
जब मैं उनके घर पहुंचा, तो देखा कि उनका घर बाहर से काफ़ी अच्छा और सुंदर है. उससे ये पता चल रहा था कि वो काफ़ी धनी हैं.
हों भी क्यों ना यार … आखिर वो एक प्रोफेसर हैं. उनकी सैलरी अच्छी खासी है.
मैंने उनको कॉल की.
वे बाहर आईं.
आज उन्होंने कुर्ती पहनी हुई थी.
वे मेरे पीछे बैठ गईं.
यहां से कॉलेज भी अच्छा ख़ासा दूर था.
तभी मैंने उनसे बातें करनी शुरू कर दीं.
बातों ही बातों में मैंने कहा- मैम आप तो काफ़ी रिच हैं!
वो बोलीं- अच्छा जी … तुमको ऐसा क्यों लगता है?
मैंने कहा- सब दिखता है मेम, आपका इतना बड़ा घर है … और आप प्रोफेसर हो, तो आपकी सेलरी भी अच्छी ख़ासी आती होगी!
उन्होंने कहा- हां, बात तो तुम्हारी सही है.
मैंने पूछा कि मैम आप बुरा ना माने, तो एक बात पूछ सकता हूँ?
वो बोलीं- हां जी बोलिए.
मैंने पूछा कि आपकी सेलरी कितनी है?
उन्होंने पूछा- क्यों, इसका क्या मतलब है?
मैंने कहा- मुझे बिना मतलब की बातें पूछना अच्छा लगता है. मुझे ये जानना है कि प्रोफेसर्स कितना कमाते हैं.
वो बोलीं- ओके मुझे लगभग 2 लाख रूपए महीने मिलते हैं.
मैं सोच में पड़ गया कि वाउ ये कितना ज्यादा कमाती हैं.
मैंने कहा- मगर मैम आप तो बिल्कुल सिंपल रहती हैं.
उन्होंने कहा- हां तो क्या हुआ हार्दिक, मुझे सिंपल रहना पसंद है … और वैसे भी सिंपल रहने में कोई बुराई थोड़े ही है.
मैंने उनसे पूछा- मैम और आपके हज़्बेंड मेरा मतलब सर क्या करते हैं?
वो बोलीं- वे एक कंपनी में जॉब करते हैं और उधर वे काफ़ी अच्छी पोस्ट पर हैं.
मैं बोला- मैम, आपकी लाइफ इतनी अच्छी है. आप इतनी रिच हो.
इस पर उन्होंने कहा कि रिच होना ही सब कुछ नहीं होता … तुम मेरा दुख नहीं समझोगे.
ये कह कर वो थोड़ा दुखी हो गईं.
उनका मूड ऑफ हो गया और उनकी आंखों में पानी आ गया था.
मैं अभी कुछ और बोलता कि तब तक हमारा कॉलेज आ गया और वे चुपचाप बाइक से उतर कर अन्दर चली गईं.
और मैं भी अपनी क्लास में चला गया.
मैं यही सोचता रहा कि मेरी वजह से मैम दुखी हो गईं.
मगर ऐसी क्या बात है, जिससे उन्हें दुख है.
मैं सोचता रहा और कुछ भी न जान सका.
फिर मैंने मैम का लेक्चर अटेंड किया.
उस वक्त वे कुछ ठीक लग रही थीं. उनका मूड भी सही था.
लेक्चर खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुम चले जाना, मैं खुद चली जाऊँगी, मुझको थोड़ा टाइम लगेगा.
मैंने कहा- तो क्या हुआ मेम, मैं वेट कर लूँगा आपका.
वो बोलीं- मुझे आधा घंटा लगेगा!
मैंने कहा- हां कोई दिक्कत नहीं है मेम, मैं बाहर आपका वेट कर रहा हूँ. आप मुझे कॉल कर देना.
उन्होंने हम्म कह कर सर हिला दिया और मैं क्लास के अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया.
मैं पार्किंग एरिया में रुक गया और मेरे दोस्त चले गए.
करीब चालीस मिनट बाद मैम की कॉल आई कि वे बाहर आ रही हैं.
मैंने पार्किंग से बाइक निकाली और उनको पिक किया.
उन्होंने मुझसे कहा- थोड़ा ज्यादा देरी हो गई … सॉरी.
मैंने उनसे कहा- तो क्या हुआ मेम. वैसे तो सॉरी मुझे बोलना चाहिए आपको.
वो बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि मैम आपका सुबह मेरी वजह से मूड ऑफ हो गया था, उसके लिए सॉरी!
वो बोलीं- नहीं कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.
मैं फिर से बोला- अगर आपको बुरा ना लगे, तो आप मुझसे अपनी बात शेयर कर सकती हैं. वैसे आपका मूड एकदम से क्यों ऑफ हो गया था?
उन्होंने मुझे बताया कि तुम सुबह बोल रहे थे ना कि मैं रिच हूँ. चलो तुमको बताती हूँ.
मैं उनकी बात सुनने के लिए कान उनकी तरफ लगाने लगा.
वे बोलीं- केवल रिच होने से कुछ नहीं होता. मैं एक प्रोफेसर हूँ और अभी तो 28 साल की हूँ. अभी तो पूरी लाइफ सामने पड़ी है. सोचो मैं कितने रुपए कमा सकती हूँ. मेरी अभी की सेलरी ही 2 लाख+ है … और साथ ही मैंने काफ़ी सारी इनवेस्टमेंट कर रखी है, जिससे मेरी हर महीने की टोटल इनकम मतलब सेलरी और इनवेस्टमेंट आदि मिला कर 3 लाख से ज़्यादा हो जाती है.
मैम बोली- और तुम सर के बारे में पूछ रहे थे ना. मैंने तुमको बताया था कि वे एक कंपनी में काम करते हैं. वे यहां से काफ़ी दूर रहते हैं … मुंबई में! और उनकी सेलरी ही 7-8 लाख रुपए महीने की है, जिसमें से वो 2 लाख रुपए हर महीने मुझे भेजते हैं. उनको लगता है कि मैं अकेली लाइफ में कुछ नहीं कर सकती हूँ. इसीलिए मैंने उनको नहीं बताया कि मैं प्रोफेसर बन गई हूँ. इसी बात को लेकर हमारी काफ़ी लड़ाई भी हुई क्योंकि उनको मेरा जॉब करना पसंद नहीं आया है. उनको उनकी बॉस मुझसे ज़्यादा पसंद हैं और यह बात मुझे पता लग गई थी. तभी मुझे तुम्हारे कॉलेज से ऑफर आया था तो मैं यहां शिफ्ट हो गई.
वे आगे बोलती रही- अब तुम ही बताओ कि मेरे पास हर महीने 5 लाख रुपए हो जाते हैं … पर मैं उन रुपयों का क्या करूँ! रहती तो अकेली ही हूँ ना, यहां तो कोई नहीं है मेरा … और अब तो मेरा उनके पास जाने का भी मन नहीं करता. पहले सोचा था कि वहीं शिफ्ट हो जाऊँ, पर फिर पता चला कि उनका उनकी बॉस से भी कुछ चक्कर है और उनको हमेशा यही लगता है कि मैं कुछ नहीं कर सकती, तो मैं वहां नहीं गई. मैंने उनको पैसे भेजने को भी मना कर दिया था कि मैं अपना खुद खर्चा उठा सकती हूँ. तभी वो बोले कि मैं सक्षम के लिए (उनका 5 साल का बेटा) के लिए भेज रहा हूँ. इनको रख लो. अब तुम ही बताओ कि इतने पैसों का मैं क्या करूँ … जब खुशी ही ना हो.
ये सब बता कर मैम फिर से अपसैट हो गईं.
मैंने उनसे कहा- सॉरी मैम मुझे ये सब नहीं पता था … लेकिन आप टेंशन मत लो, मैं हूँ ना. आपको कभी भी कुछ भी काम हो, मुझको याद करना, मैं फट से वैसे हाजिर हो जाऊंगा, जैसे चिराग से जिन निकलता है.
वे मेरी इस बात पर हंस पड़ीं.
उसी वक्त मैंने अचानक से बाइक रोकी, जिससे वो मेरी पीठ पर गिर गईं और उनका एक मम्मा मुझे मेरी पीठ पर अच्छे से रगड़ता हुआ सा महसूस हुआ.
मेरे दिल में उसी वक्त मैम के उस दूध को पकड़ कर मींजने का दिल किया मगर ये जल्दबाजी होती.
सबसे पहले मैं दोनों हाथों का समागम Hindi Sex Stories करते हुए गुरूजी का धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने मेरी कहानी ‘बुलबुल के साथ सेक्स’ प्रकाशित की और उन तमाम लड़के-लड़कियों, दोस्तों का भी धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मुझे ई-मेल किए।
तो दोस्तो पेश है मेरी नई कहानी !
सुनीता !
उसके रूप के बारे में बस इतना ही कहूँगा कि लगता है भगवान ने गलती से उसे नीचे भेज दिया। वो तो वो मेनका है कि अगर एक बार जिसे देख ले बेहोश हो जाए ! एक अट्ठारह साल की लड़की जो बला की खूबसूरत हो, आपको तो पता ही है उसके चाहने वाले कितने होंगे।
तो दोस्तो बात तब की है जब मै दसवीं मे पढ़ता था और वो जब वो स्कूल में आती थी तो ऐसा लगता था कि मानो बहार आ गई हो ! मैं उसे दिल ही दिल में प्यार करता था पर क्या कहूँ यार हम सब की यही परेशानी है कि हम कहने से डरते हैं !
एक बार मैने उसे पत्र लिखा और उसे कैसे दूँ, यही सोच रहा था कि तब तक वो मेरे पास आ गई, और मैंने झट से पत्र को अपनी किताब में रख लिया। फिर मुझ से बात करके वो चली गई, मै उस पत्र की बात भूल गया। फिर वो मुझसे वही पुस्तक मांगने आई। मुझे याद न रहने की वजह से मैंने वो किताब उसे दे दी।
थोड़ी देर बाद उसने मुझे जब किताब वापस की तो मुझे याद आया- यार ! उसमें तो मेरा पत्र था !
मैंने जब किताब को खोला तो देखा कि वो पत्र वैसे ही है जैसे था, पर मुझे डर सा लगने लगा कि कुछ गड़बड़ ना हो जाए।
अगले दिन मैं स्कूल नहीं गया। मुझे शक था कि उसने मेरा पत्र पढ़ लिया है।
वो मेरे घर आई मेरी बहन से मिलने के लिए !
मुझे थोड़ा बुखार था, मैं सो रहा था। वो आई और मुझसे पूछा- पूनम कहाँ है?
मैंने बोला- अंदर है !
वो बोली- आज स्कूल क्यूँ नहीं आए?
मैंने कहा- यार, देखने से भी नहीं पता चल रहा क्या?
तो बोली- बुखार सच का है या झूठ मूठ का बहाना बना रखा है !
तब तक मेरी बहन आ गई और फिर दोनों अंदर चली गई। जब थोड़ी देर बाद वो जाने लगी तो मेरे पास आकर बैठ गई।
मेरी बहन भी बोली- आज मनीष बहुत बीमार है, इसीलिए स्कूल नहीं गया।
फिर उसने अपना हाथ मेरे सर पे रखा और बोली- बुखार तो अभी तक है ! दवाई ली या नहीं? कल फिर स्कूल नहीं जाना !
यार मुझे बहुत जोर से गुस्सा आ रहा था। मैंने मन ही मन सोचा- साली डाँट तो ऐसे रही है जैसे मेरी घरवाली हो !
फिर जब वो दोनों आपस में बातें करने लगे। तो मैं कंबल के नीचे से उसका हाथ दबाने लगा। उसने मेरी तरफ देखा और इशारे करने लगी कि पूनम यहीं है।
पर मैं कहाँ मानने वाला था। मैंने उसका हाथ कंबल के अंदर करके दबाने लगा तो वो भी अपना हाथ टाईट कर के मेरा साथ देने लगी मेरी तो मानो मैं तो यही सोच रहा था कि मुझे यूँ ही कुछ दिनों तक बुखार रहे और मैं उसके हाथ के साथ खेलता रहूँ, पर कुछ देर बाद वो चली गई और मै बिस्तर पे पड़ा रहा।
उसके जाने के बाद मैं बिस्तर से उठा और थोड़ा टहलने लगा। फिर सुबह मैं ठीक हुआ तो स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगा कि इतने में मेरे मामा जी आए और बोले कि चलो आज सब बाहर चलते हैं !
मेरा भी मूड हो रहा था बाहर जाने का पर मैने मना कर दिया।
यार कैसे-कैसे तो पटी है और ये मौका अगर हाथ से गया तब तो मैं लण्ड पकड़े ही रह जाऊँगा और कोई नहीं मिलेगा चोदने को !
तो दोस्तो, मैं उस दिन, जब घर वाले बाहर चले गए, तो मैं स्कूल के लिए तैयार हो के निकलने लगा और घर में ताला लगाने लगा, तो मैंने देखा- सुनीता इधर ही आ रही है।
आते ही बोली- आज तुम्हारे घर वाले कहाँ गए?
मैंने कहा- यार ! वो आज घूमने गए हैं !
उसने कहा- तुम नहीं गए?
मैंने कहा- तुम्हारे बगैर क्या फायदा जाने का कहीं !
तो हंसने लगी और बोली- अच्छा चलो, मुझे पानी पीना है ! पिलाओगे?
मैने कहा- बस पानी?
तो वो हंसने लगी। मेरी तो नियत खराब हो रही थी और वो हंस रही थी। मैने सोचा- बेटा, आज मौका अच्छा है ! लग जा काम पे।
मैने उसे बिठाया और किचन में पानी लाने चला गया। मैं जब अंदर आया तो वो भी साथ आने लगी। मैंने कहा- मैं लाता हूँ न यार !
तो बोली- नहीं ! तुम कुछ मिला के पिला दोगे तो?
मैंने कहा- अरे नहीं यार ! तुम्हें पिला के नहीं बिना पिलाए सब कुछ करने का इरादा है !
तो बोली- क्या-क्या ?
मैने कहा- कुछ नही !
नहीं ! आपने कुछ बोला था !
मैंने कहा- तुम पानी पियो ! कुछ खाओगी ?
तो बोली- क्या खिलाओगे?
मैंने कहा- कहाँ से खाओगी?
तो बोली- कहाँ से खिलाओगे?
मैं बोला- जहाँ से तुम खाना चाहो !
तो बोली- ठीक है ! तो फिर चले?
मैने कहा- कहाँ?
तो बोली- खाने !
यार, मैं तो बस बातों से मजा ले रहा था, पर यह तो सच में मजा देने आई थी !
फिर कहती- आज सिर्फ चूमना!
मैने कहा- क्यो जी? आज व्रत है क्या?
तो बोली- नहीं तो !
मैंने कहा- तो क्या बात है?
बोली- कौन्डम है? तो अभी करते हैं ! नहीं तो कल !
तो मैंने कहा- इस कल कल में पता चले कि तुम्हारी शादी हो जाए और तुम चली जाओ यहाँ से !
फिर बोली- है क्या?
मैने कहा- क्या?
तो बोली- कौन्डम !
मैने बोला- है न !
तो बोली- तुम कौन्डम रखते हो? छि-छि !!
मैने कहा- अरे यार, ये मेरा नहीं, मेरे भाई का है ! उन्होंने भाभी के लिए लिया था पर मेरे हाथ लग गया।
तो दोस्तो ! मैंने उसे अपने बेड पे चलने के लिए कहा, तो बोली- मेरे पांव में दर्द है !
मैं उसे गोद में उठा के अपनी बिस्तर पे ले जाने लगा तो उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए।
वाह-वाह-वाह क्या बताऊँ यार ! क्या चूसती है होठ ! मुझे पता नहीं था यार जब कोई लड़की आप के होंठ को चूसे तो इतना आनंन्द आता है।
फिर मैंने आराम से उसे बिस्तर पे रखा और उसका साथ देने लगा और उसके मस्त-मस्त मोम्मे को मसलने लगा। यार दिल तो ऐसा कर रहा था इनको काट के रख लेता हूँ रात को अकेले में दबाऊँगा ! पर क्या करूँ साली काटने थोड़े ही देगी।
दोस्तो वो तो पूरी वासना में डूबी हुई थी और साथ में मेरी हालत तो जैसे मुझे कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी उतारने लगी और बोली- मनीष ! क्या तुम वो करोगे जो मैं करूँगी?
मैंने कहा- आपका औरडर सर आंखों पर मैडम !
तो वो मेरा लन्ड अपने मुँह में लेके चूसने लगी।
वाह ! क्या बताऊँ यार, दिल तो कर रहा था कि इसके मुँह में ही सारा का सारा डाल दूँ पर क्या करूँ यार! वो जो कर रही थी बहुत मजा आ रहा था। मेरा तो एकबार उसके मुंह में ही हो गया।
फिर मैंने कहा- अब मेरी बारी !
मैं उसकी चूत को चाटने लगा और वो क्या आवाज निकाल रही थी यार ! पूरे कमरे में मानो अजीब सी आवाज गूंज रही हो आऽऽ इइइइइ आउ उउउउउउउउउउउ आउउउउउउ आााााा
क्या कहूँ यार! क्या आवाजें थी ! मजा आ रहा था ! यार उसकी आवाज को सुन के !
फिर अचानक वो जोर-जोर से चूत को उछालने लगी, मैं और जल्दी-जल्दी चाटने लगा। फिर उसकी चूत से सफेद पानी निकला और वो शान्त हो गई। फिर मेरे ऊपर आके लेट गई। मैं नीचे से ही अपना लन्ड निकाल के उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा और वो आहहह आहहहहहह करने लगी। फिर उसने मेरा लन्ड अपने हाथ में लेकर चूत के मुँह पे लगा लिया और हिलाने लगी और फिर उस के ऊपर बैठ गई। एक ही झटके में ऐसा लगा मानो मैं स्वर्ग में आ गया। फिर मैं नीचे से उसे पूरा सहयोग देने लगा और वो ऊपर से जोर-जोर से हिलने लगी और आहहहहआहहहहह आहहहहह एएएएएएएहहहहहह करने लगी।
कुछ देर बाद मैं उसके ऊपर आ गया और फिर जोर-जोर से धक्का लगाने लगा। कुछ देर बाद हम दोनों अपनी चरम-सीमा पर पहुँच चुके थे। उस दिन हमने ४ बार काम किया और फिर वो अपने घर चली गई आज की क्लास ले के।
दोस्तो, आप को मेरी कहानी कैसी लगी?
मुझे अवश्य लिखिएगा और अपने सुझाव हमें जरूर बताईएगा। Hindi Sex Stories
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