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सभी पाठकों को मेरा प्रणाम !यह कहानी Hindi Sex Stories सच्ची है …मेरी शादी होने के बाद जब मैं ससुराल गया और मेरी साली भैरवी को देखा तो देखते ही रह गया !
क्या बदन था … क़यामत थी … बड़े लम्बे बाल … गोरा रंग .. काली आँखें… बड़े बड़े स्तन …बड़े उभरे हुए नितम्ब …. आऽऽहा … क़यामत थी ….
शुरु में तो वो भाव खा रही थी … मेरी बीवी को बच्चा होने वाला था….मैं भी वहाँ रहता था … रोज काफी मस्ती होती थी। मैं भी उसको छू लेता था तो वो कुछ नहीं बोलती थी …
बाद में उसकी शादी हुई … उसकी उसके पति से नहीं बनी और उसने तलाक ले लिया।
अब वो मेरी साथ काफी बातें करती थी और खूब घुल मिल गई थी … जब भी मौका मिलता, मैं उसके बदन को छू लेता.. वो कुछ नहीं कहती।
एक दिन रात को मैं उसके कमरे में गया …. उसके बालों में हाथ घुमाया … केले जैसी पिन्डलियों पर भी हाथ घुमाया !
उसने कोई विरोध नहीं किया … मेरी हिम्मत बढ़ गई, मैं अपने होठों से उसके होंठ चूमने लगा …
उसको मजा आया, कहने लगी- मुझे तुम पहले से पसन्द थे !
फिर तो देरी किस बात की…
मैंने उसके संतरे जैसे स्तनों को हाथ में पकड़ा और मसलने लगा..
उसको भी मजा आ रहा था, कई दिनों से उसने लंड नहीं लिया था …
मैं तो उसको चाटने लगा। ऊपर का गाउन को हटा दिया, अब मेरे सामने वो सिर्फ पेंटी में थी और मैं उसले सारे बदन को चाटने लगा…
यह मेरी बहुत सालों से इच्छा थी जो आज पूरी हो रही थी….
उसके दोनों बूब्स जो मेरी जान थे, वो आज मेरे हाथों में थे …
वो कराह रही थी … काफी गरम हो रही थी….. उसकी गोरी काया ….. मुझे उत्तेजित कर रही थी… पूरा बदन जैसे किसी ने फ़ुरसत में बनाया हो ऐसा था…
मैं नसीब वाला हूँ… मेरी जीभ नीचे की ओर गई … एक भी बाल नहीं था …. मेरी जीभ ने अपना काम चालू कर दिया ….
वो भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी !
मेरा ७ इन्च का लंड उसके हाथ में था ….
वो उसको अन्दर लेने के लिए बेताब थी ….
मैंने धीरे से उसकी चूत के मुँह पर लंड को रखा और एक ही झटके में आधा अन्दर घुसेड़ दिया…
क्या टाइट चूत थी… जैसे नई ….
वो बोली …ओह …धीरे से ….
दूसरे झटके में पूरा घुसेड़ दिया…
उसकी आँखों में से पानी निकल गया …
फिर भी बोली …. मजा आया .. जल्दी करो…
मैं तो चालू हो गया
झटके पे झटके ….
उसने दोनों पैर ऊपर उठा के मेरे कंधो पे रख दिए ….
झटके लग ही रहे थे कि उसने मुझे बोला … कुछ और स्टाइल करते हैं …
मैंने बोला- कुतिया बन जाओ…
वो घूम गई और झुक गई…..
क्या गांड थी…
मैं तो पागलों की तरह चूमने लगा !
तो वो बोली … अरे ! दीदी जग जायेगी… !
मैं तो उसकी गांड का छेद देखते ही रह गया…..और उस में डालने की सोचने लगा।
लेकिन उसने मेरा पकड़ के अपनी चूत में घुसेड़ लिया…
मैंने फ़िर से झटके लगाना चालू कर दिया …
काफी समय के बाद उसका पानी निकल गया, मेरा निकलने वाला ही था कि उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी …. पूरा पानी पी गई… बोली- अच्छी चुदाई करते हो ! दीदी लकी है ! …. पहले मालूम होता तो पहले ही कर लेती….
मैं भी पूरी रात उसके साथ ही नंगा सोया रहा … पूरी रात में तीन बार उसकी चुदाई की ….. पर उसकी गांड मरने की इच्छा पूरी नहीं हुई …..
यह मेरी सच्ची कहानी है ….. Hindi Sex Stories
मेरा नाम सुरेश है और मैं बहादुरगढ़ Hindi Sex Stories में रहता हूँ। मैंने अब तक की अंतर्वासना की सारी कहानियाँ पढ़ी हैं। आज मैं भी पहली बार आप सब को अपनी एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। हमारे सामने वाले घर में एक परिवार रहता है, पति पत्नी और उनके 3 बच्चे।
सॉरी दोस्तो! मैं अपने बारे में तो बताना भूल ही गया।
मैं 27 साल का 6 फ़ीट लंबा और ठीकठाक दिखने वाला लड़का हूं और मेरा लण्ड 9″ लंबा और 3″ मोटा है।
घर के सामने वाली आंटी का नाम रिया है। वैसे वो ज्यादा उमर की नहीं है, 37 या 38 की है। दिखने में वो थोड़ी मोटी है। उनका फिगर 38-38-40 है। मैं अक्सर उनके घर जाने के बहाने ढूंढता रहता हूं. क्योंकि मैं आंटी को बहुत पसंद करता हूँ।
उन के पति का प्रोपर्टी का काम करते हैं और वो ज्यादातर घर पे लेट आते हैं, हमेशा नशे में रहते हैं और कई बार तो आंटी की पिटाई भी करते हैं। जब वो आंटी को मारते हैं तो मेरा दिल करता है कि मैं उनकी जम के पिटाई करूँ।
एक दिन अंकल ने आंटी की जम के पिटाई की। अगले दिन जब अंकल घर से चले गए तो मैं उन के घर गया। आंटी लेटी हुई थी। वो हमेशा सलवार-कमीज़ पहनती हैं। जब मैं वह पहुँचा तो उनकी आँखे बंद थी और उन का कमीज़ उनके पेट के उपर तक उठा हुआ था। मैं वहाँ खड़ा थोड़ी देर तक उनको देखता रहा। थोड़ी देर बाद जब वो थोड़ा हिली तो मुझे उनकी कमर पर कुछ निशान दिखे। तब तक आंटी ने भी मुझे देख लिया था कि मैं उनको घूर रहा हूँ। उन्होंने झट से अपना कमीज़ नीचे कर लिया और पूछा- तुम कब आए?
मैंने कहा- बस थोडी देर हुई है, आप सो रही थी तो मैंने आप को उठाया नहीं, क्योंकि मैंने कल रात भी आप के घर से झगड़े की आवाजें सुनी थी।
यह बात सुन कर आंटी ने अपना सर नीचे कर लिया। फ़िर मैंने कहा- मैंने अभी आप की पीठ पर कुछ निशान देखे हैं।
तो वो खड़ी हो गई और बोली- कुछ नहीं है, वो तो बचपन से ही हैं।
तो मैंने पूछा- कैसे लगे थे?
तो वो थोड़ा सोचने लगी।
तभी मैं बोला- ये बचपन के नहीं, कल रात के हैं।
उन्होंने फ़िर से कहा- नहीं बचपन के हैं!
मैंने कहा- दिखाओ, मैं देखना चाहता हूँ कि कब के हैं!
तो वो मना करने लगी, मैंने जबरदस्ती उनको पकड़ कर दूसरी तरफ़ घुमा दिया और उनका कमीज़ ऊपर उठाने लगा, वो मना करने लगी पर मैं कहा मानने वाला था बिना देखे!!
जब मैंने देखा तो अंकल ने उन्हें अपनी बैल्ट से मारा था।
मैंने पूछा- ये बैल्ट के हैं?
तो वो रोने लगी और मेरे गले लग गई। मुझे आंटी पर दया आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था कि जिसे मैं इतने दिनों से अपनी बाहों में लेना चाहता था वो आज मेरी बाहों में थी चाहे किसी भी कारण से!
फ़िर मैंने आंटी को सोफे पर बिठाया और पूछा- यह क्यों हुआ?
तो वो और ज्यादा रोने लगी। मैं उनके पास बैठ गया और उनके चेहरे को पकड़ कर पूछने लगा तो वो बोली- क्या बताऊँ, यह तो रोज का काम है!
मैंने पूछा- बात क्या है?
तो वो बोली- मैं यह बात तुम्हें कैसे बताऊँ?
तो मैंने कहा- आप मेरे ऊपर विश्वास कर सकती हो!
तो वो बोली- मैं तुम पे विश्वास करती हूँ पर कैसे बताऊँ! मैंने ज्यादा जोर दिया तो वो बताने के लिए तैयार हो गई। वो कहने लगी- तेरे अंकल हर रोज रात को लेट आते हैं, नशे में होते है और वो रात में मेरी चुदाई करते हैं और जल्दी ही झड़ जाते है। जब मैं उन को यह कहती हूँ कि इतनी जल्दी हो गया तो मेरी पिटाई करते हैं। न तो वो मेरा पूरा करवाते हैं और ऊपर से पिटाई भी करते हैं। अब तुम ही बताओ मैं क्या करूँ?
और वो फ़िर से रोने लगी। मैंने उन को गले से लगा लिया और कहा- आंटी अगर आप गुस्सा न करें तो इस काम में मैं आप की मदद कर सकता हूँ!
वो मेरे सीने से लगी लगी पूछने लगी- किस काम में?
तो मैंने कहा- जो अंकल नहीं कर पाते! फ़िर आप की पिटाई भी नहीं होगी!
आंटी ने मेरे गले से लगे लगे ही कहा- तुम तो मेरे से बहुत छोटे हो!
मैंने कहा- तो क्या हुआ! मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ। आंटी की पकड़ धीरे धीरे टाइट होती जा रही थी। मैंने भी आंटी की कमर पे हाथ घुमाना शुरु कर दिया था, उनको भी मजा आने लगा था, मेरी लाइन साफ़ थी। मैंने आंटी के चेहरे को हाथों में पकड़ लिया, आंटी ने आँखे बंद कर ली थी, मैंने अपने होंठ उनके मुलायम होठों पर रख दिए। आंटी ने मुझे कस के पकड़ लिया और मेरी किस का पूरा जवाब देने लगी।
मैं आंटी के कूल्हों को पकड़ कर दबाने लगा। फ़िर आंटी को सोफे पे लिटा कर उनके ऊपर लेट गया और उनके दोनों स्तनों को दबाने लगा। आंटी पूरी तरह मस्त हो गई थी। मैं आंटी को 20 मिनिट तक किस करता रहा। उसके बाद आंटी ने कहा- मैं दरवाजा बंद करके आती हूँ, कोई आ गया तो?
आंटी दरवाजा बंद कर के जैसे ही वापस आई, मैं एक बार फ़िर से उन पे टूट पड़ा और उनके सारे कपड़े निकाल दिए। उन्होंने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए। आंटी मेरे लण्ड को देख कर एकदम बोली- इतना बड़ा लण्ड!!
मैंने कहा- आंटी! ज्यादा बड़ा थोड़े ही है! सारा का सारा तुम्हारी चूत में आ जाएगा!!
तो वो बोली- आराम से करना! नहीं तो मैं मर जांऊगी, बहुत दर्द होगा।
हम दोनों बेड पर लेट गए और फ़िर से किस करने लगे। आंटी मेरे हथियार से खेल रही थी ओर मैं अपनी ऊँगली से उनको चोद रहा था और एक हाथ से उनकी चूची दबा रहा था और किस कर रहा था। आंटी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। अब मैं उनकी चूची चूस रहा था और वो जोर जोर से मेरा लण्ड हिला रही थी। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरा लण्ड मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था।
5 मिनट लण्ड चूसने के बाद वो बोली- बस अब नहीं रहा जाता, जल्दी से अंदर डाल दो!
तो मैं उन की टांगो के बीच में आ गया और उन के उपर लेट गया और किस करने लगा। तो आंटी ने अपने पैरों से मेरी कमर को जकड़ लिया और मेरा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया। मैंने एक जोर को धक्का दिया और आधे से ज्यादा लण्ड उनकी चूत में घुस गया और उन के मुँह से आह निकल गई।
वो बोली- थोड़ा धीरे!
पर मैं कहा सुनने वाला था, मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लण्ड आंटी की चूत में चला गया। उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया.और कहा कि थोड़ा रुक जाओ।
मैंने उनकी एक न सुनी और धक्के पे धक्के मारने लगा। थोड़ी देर बाद वो भी चुदाई का पूरा आनंद लेने लगी।
थोड़ी देर बाद वो बोली- जल्दी जल्दी करो! मैं झड़ने वाली हूँ!
तो मैंने अपने स्पीड बढ़ा दी और आंटी झड़ गई। वो बहुत खुश लग रही थी। फ़िर मैंने अपना लण्ड निकाल लिया और आंटी को कुतिया वाले स्टाइल में आने को कहा, तो वो बेड के किनारे पे झुक गई कुतिया की तरह।
अब मैं आंटी के पीछे से डाल रहा था और वो भी आगे पीछे हो रही थी। मैंने अपनी ऊँगली उनकी गांड में डाल दी तो वो बोली- यहाँ कुछ नहीं करना!
लगभग 15 मिनट बाद मैंने आंटी की चूत में अंदर तक डाल कर अपना सारा माल उनकी चूत में डाल दिया। उस दौरान आंटी भी दो बार झड़ चुकी थी। मैं आंटी को वैसे ही उलटी लेटा कर उन के उपर लेट गया बिना अपना लण्ड निकाले। मैं 15 मिनट तक आंटी के ऊपर लेटा रहा। फ़िर मुझे लगा कि मेरा हथियार फ़िर से खड़ा हो रहा है।
मैं आंटी के उपर से उठा तो वो मेरे लण्ड को देख के बोली- यह तो फ़िर से तयार हो रहा है! आज के लिए इतना ही बस, बाकी कल!
मैंने कहा- बस एक बार और!
पहले तो आँटी मना करती रही फ़िर वो मान गई। फ़िर हमने मजे किए। मैंने आंटी की गांड भी मारी। बाद में हमने क्या क्या किया यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा। आपको यह कहानी कैसी लगी, जरुर बताना!
मैं कॉल बॉय टाइप लड़का बनाना चाहता हूँ। Hindi Sex Stories
सभी अंतर्वासना पाठकों Sex Stories व गुरु जी को मस्त चूत के साथ नमस्ते!
अंतर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी नहीं है। गुरु जी की दया से मेरी मेहनत पे अंतर्वासना ने कभी पानी नहीं फिरने दिया और मुझे अनन्त प्यार मिला और मिलेगा भी इतने बढ़िया उत्तर मिले इमेल के ज़रिये, चेट के ज़रिये!
दोस्तो! मुझे गैर मर्दों की बाँहों में सुख मिलता है, यह मैं पहले भी बता चुकी हूँ!
पति के पास कनाडा आकर भी मुझे वो सुख नहीं मिल पाया और मुझे यहाँ पर भी गैर मर्द की बाँहों में जाना पड़ा।
मैं यहाँ तो आ गई और पति के पास रहने लगी लेकिन यहाँ मुझे भी काम करना पड़ता था मेरे आने की वजह से पति अपने दोस्तों से अलग रहने लगे। मैंने तो कहा था कुछ दिन उनके साथ रुकते हैं। लेकिन फ़ोन का बिल, गैस का बिल, पानी का बिल, हर महीने घर की किश्त जाती।
मुझे जिस पब में काम मिला था, वहाँ मेरी दोस्ती पीटर से हुई। जल्दी ही यह दोस्ती शारीरिक सबंधों में तबदील हो गई। उसके बाद पीटर ने मुझे खूब चोदा, अपने दोस्त के साथ मिलकर मेरा बाजा बजाया, उसके बाद दोंनो ने मुझे चार हज़ार अमरीकी डॉलर भी दिए। उसके बाद हम नीचे पब में वापिस आ गए और मैं उनको ड्रिंक सर्व करती रही।
जाते हुए अपना मोबाइल नंबर दिया और टिप की तौर पे 500 अमरीकी डॉलर दिए मुझे पैसों की जरूरत थी। इंडिया में मैंने बहुत ऐश की थी और अब मेरे सर पर काम करने का बोझ था इसके बिना यहाँ कोई गुजारा नहीं था सो तभी जब मैंने पीटर को कॉल लगाई और बात की उसने मुझे एक व्यस्क मूवी में काम करने की ऑफर दी। उसके दोस्त ने कहा कि एक इंडियन लड़की की मूवी इंडियन मार्केट में धमाल मचा देगी। उसने मुझे कहा कि फिल्म डबल एक्स होगी और उसकी अच्छी कीमत देने को तैयार है लेकिन मैंने बदनामी के डर से सोचने के लिए कहा। फिर सोचा कि वैसे भी तो मैं करवाती हूँ।
मैंने उनके सामने शर्त रखी कि मेरे चेहरे को इस कदर तरीके से मेक-अप किया जाए, मतलब आँखों पे स्टीकर, गालों पे स्टीकर!
वो मान गया।
मैंने 70,000 डॉलर लेने को बोला।
वो मान गया।
मैंने उसे कहा- यह फिल्म टोरंटो में नहीं, कहीं और बनाओ!
एडबर्ग में फ़िल्म बनाना निश्चित हुआ। नाम था- पेओर इंडियन स्लाट विद इग्लिश मेंस
सी हाउस रेंट लिया गया।
वहाँ पहुंची। पीटर के साथ मुझे बिकनी दी गई और मेरा पहला सीन था सनबाथ!
मैं वहाँ अकेली बीच पे लेट गई। मेरे हाथ में मोबाइल था जिसपर मैं लेटी हुई ब्लू क्लिप्स देखते हुए अपने बूब्स मसलने लगती हूँ और फिर पेंटी में हाथ डाल चूत को!
कैमरे के सामने थोड़ा नर्वस थी।
तभी वहाँ तीन आदमी आये, एक नीग्रो था और दो गोरे!
तीनों आकर जब मुझे चूत, मम्मे मसलते देखते हैं और मुझे कहते हैं- बेबी एनी प्रॉब्लम?
मेरी चूत को देखते हुए थोड़ी स्माइल देते हैं, बिना कुछ कहे मैं भी स्माइल पास करती हूँ! ऐसा करते ही तीनों मुझे वहाँ से गोदी में उठाते हुए सी हाउस में लेकर जाते हैं।
आर यू इंडियन?
येस!
ओके! नीड हेल्प?
यम! मैं फिर से स्माइल देती हूँ, एक गोरा मेरी पेंटी उतार देता है और अपने मुँह को चूत पे रखते हुए चातने लगा मेरे सर पे खड़े दो मर्द! दोनों ने कुछ नहीं पहना था। उनके लौड़े देख देख कर चूत चटवा रही थी मैं!
नीग्रो का लौड़ा मुँह में ले लिया और गोरे का हाथ में!
वो बोला- हे बिच! व्हाट्स योउर एज?
27!
ओह वो इंग्लिश में बोल रहे थे। मैं आपको हिंदी में बताती हूँ!
मैं सताइस साल की हूँ!
पहली बार कब चुदी?
नौ साल पहले!
तुझे हमारे लौड़े कैसे लगे?
यम! बहुत अछे लगे!
बोले- आज तेरे दोनों छेदों को एक साथ चोदेंगे! पसन्द करोगी?
हाँ चोदो मुझे!
और कैमरा मैन ने कंडोम की डिब्बी फेंकी। मैंने उसके लौड़े पे कंडोम चढ़ा दिया और उसने अन्दर डाल दिया।
हाय क्या लौड़ा था!
उसने रफ़्तार पकड़ी। मैंने भी अब एक धन्धे वाली कॉल-गर्ल की तरह अपने आपको बेशर्म कर दिया। लौड़े का तो मुझे पहले से बहुत चस्का था। नीग्रो का लौड़ा देख कर मैं पागल हो गई। इतना बड़ा लौड़ा!
डर भी लगता था!
गोरा रुक गया। नीग्रो ने कंडोम डालते हुए मुझे लौड़े पे बैठने को कहा। इतना बड़ा लौड़ा, लेकिन देखते ही मैंने पूरा अन्दर ले लिया और उसका लौड़ा अन्दर मेरे गर्भाशय से टकराता तो मुझे जन्नत दिखने लगती!
वाह क्या लड़की है!
बिच है!
गोरा पीछे आया और मेरी गांड के छेद को चाट करके उंगली डालते हुए जगह सी बनाई।
एक लौड़ा चूत में था। मुझे उसकी चेस्ट की तरफ नीचे दबाते हुए गोरे ने मेरी गांड को खोलते हुए उस पे लौड़ा रख कर धक्का मारा और उसका आधा लौड़ा गांड में समां गया। दर्द से मैं तड़पने लगी। लेकिन देखते ही दोनों के लौड़े में खुद बोल बोल कर डलवाने लगी। इतना मजा एक लौड़ा मेरे मुँह में दो मेरे अन्दर!
उसने कहा- तू अपनी भाषा में गरम बातें कर! ताकि लोग इसको और खरीदें!
आह चोद मुझे मादरचोद! फाड़ डालो मेरी चूत! बना दो भोंसड़ा! हाय मेरे राजा! चोदो! कमीने तू मुंह में डाले रख!
अब उनमें से एक ने अदला बदली कर ली और जिसका चूस रही थी अब उसने डाल लिया और तेजी से चोदने लगे। करीब पन्द्रह मिनट की चुदाई के बाद तीनों ने एक साथ अपने लौड़िं का सारा पानी मेरे चेहरे, होंठ हर जगह उगल दिया और मैं उनके पानी से तर हो गई। रहता हुआ पानी मैंने चाट के साफ़ कर दिया।
वे बोले- एन्जॉय बेबी?
येस!
दोस्तो, अभी तो फिल्म का पहला सीन वहाँ फ़िल्माया गया। उसके बाद अगला सीन मुझे होटल में करना था जिसमें दोनों बन्दे नीग्रो थे और उनके लौड़े कैसे होंगे यह अनुमान लगाओ और बताओ कैसी लगी मेरी चुदाई?
दोस्तो, हर कोई पूछता है- यह असली है?
हाँ! यह असली है!
कनाडा में मेरी सर्विस के लिए मुझे इ-मेल कर दो अब मेरे पास एक बी.एम.डबल्यू, एक मरसिडीज़ और एक पोश कार है। मैं एक हाई प्रोफाइल कॉल गर्ल बन चुकी हूँ और एक अडल्ट क्लब अपना है।
लेकिन उस फिल्म के अगले सीन के बारे में ज़रूर लिखूंगी। प्लीज़ मेरी चुदाई के हर किस्से को छाप देना गुरु जी!
एक बार फिर से धन्यवाद! Sex Stories
हाय मेरा नाम शिवानी है. मेरी उम्र Sex Stories 18 साल है। मैं लखनऊ के पास के गाँव की रहने वाली हूँ। मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी कहानियाँ पढ़ी और सोचा कि मुझे भी अपनी बात सबको बतानी चाहिए। इसलिए आज मैं आपको एक व्यक्तिगत अनुभव सुनाने वाली हूँ।
हमारे गाँव में बहुत से कच्चे मकानों के बीच हमारा मकान पक्का है जिसमें मेरा, मेरे भाई का, मम्मी पापा का सबका अलग अलग कमरा है।
एक रात की बात है, मैं लगभग 11 बजे बाथरूम जाने के लिए उठी। बाथरूम मम्मी के कमरे को पार करने के बाद पड़ता है। जब मैं उस कमरे के सामने से गुज़री तो मुझे मम्मी के कराहने और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने जैसी आवाज़ें सुनाई पड़ी।
मैं एक बार को तो डर गई, पर मैंने हिम्मत रखते हुए चाबी के छेद से झांका तो मैं दंग रह गई। कमरे में पापा मम्मी बिल्कुल नंगे खड़े थे। पापा मम्मी की चूचियाँ दबा रहे थे और बार बार उनके चूतड़ों पर जोर से चपत सी मारते जा रहे थे।
पहले तो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आया पर फ़िर मैंने ध्यान से देखा कि पापा मम्मी से चिपटे हुए हिल भी रहे थे। तभी वे थोड़ा सा घूमे तो मेरी बुद्धि घूम गई। पापा ने अपना लण्ड शायद मम्मी की चूत में डाल रखा था और वहीं धक्के मार रहे थे।
मेरी समझ में कुछ कुछ आने लगा था। मेरी कोलेज़ की सहेली ने एक बार मुझे अपनी चुदाई की कहानी सुनाई थी। आज़ अचानक वही चुदाई मुझे अपने घर में होती दिखाई दी।
पता नहीं क्यों, पर वो नज़ारा देख कर मेरी चूत में खुज़ली सी होने लगी और मुझे अपनी सांसें कुछ भारी सी लगने लगी। मैं वहाँ पर पूरा कार्यक्रम देखकर बाथरूम जाकर अपने कमरे में तो आ गई पर मुझे फ़िर नींद नहीं आई।
वो दृष्य मेरी आंखों के सामने नाचने लगा। मैंने अपनी सलवार और कच्छी उतार दी और एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबाते हुए अपने पैन को चूत में डाल कर चलाया। फ़िर पैन के बज़ाए दूसरे हाथ की उँगली डाली। थोड़ी देर बाद मेरी चूत में से कुछ सफ़ेद सा निकला और मुझे पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गई।
सुबह मम्मी की आवाज़ ‘ कोलेज़ नहीं जाना है क्या! जल्दी उठ!’ से मेरी आँख खुली, तो जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आई।
मुझे रात की बात अभी भी याद आ रही थी, पर मैं कोलेज़ जाने के लिए तैयार होने लगी। मैं कच्छी और ब्रा पहन कर ही नहाती हूँ पर उस समय मेरी उत्तेज़ना बढ़ गई और मैं पूरी नंगी होकर नहाई और उँगली, साबुन की सहायता से अपनी चूत का पानी निकाला।
तरोताज़ा होकर, नाश्ता कर मैं कोलेज़ के लिए घर से निकल गई। थोड़ी सी दूर सड़क से बस मिल जाती है, वहीं से मैंने बस पकड़ी जो रोज़ की तरह ठसाठस भरी थी। जैसे तैसे गेट से ऊपर चढ़ कर थोड़ा बीच में आ गई। तो वो रोज़ की कहानी चालू। आप तो जानते ही होंगे, जवान लड़की अगर भीड़ में हो तो लोग कैसे फ़ायदा उठाते हैं, और आप उन्हें कुछ कह भी नहीं सकते।
वही मेरे साथ होता है। मेरे पीछे से कोई मेरे चूतड़ दबाने सा लगा, तो एक अन्कल मेरे कन्धे पर बार बार हाथ रख कर खुश होने लगे। एक महाशय सीट पर बैठे थे, भीड़ की वज़ह से मेरी साईड उनके सिर से दबी थी, जो उन्हें भी मज़ा दे रही होगी।
इतने में मेरी ही क्लास का एक लड़का जो बहुत दिन से मेरे पीछे पड़ा था और केवल मेरे लिए ही इस बस से आता-जाता था, अपने गाँव से बस में चढ़ा। लन्बा तगड़ा तो खैर वो है ही, हैण्डसम भी है। पर मैं उसे ज्यादा भाव नहीं देती थी। आज़ तो वो सबको हटाता हुआ ठीक मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया। मैंने उसे देखा पर मैं कोई आपत्ति करने की स्थिति में नहीं थी। कुछ कहा तो बोला- बस में भीड़ ही इतनी है।
मुझे चुप हो जाना पड़ा। मुश्किल से पाँच मिनट बीते होंगे कि अचानक ड्राईवर ने बड़े जोर से ब्रेक लगाए और पता नहीं क्यों ड्राईवर मादरचोद, बहनचोद जैसी माँ बहन की गालियाँ किसी को बकने लगा। शायद कोई बस के आगे आ गया होगा।
लेकिन उसके अचानक ब्रेक मारने से थोड़ सा बैलैंस तो सबका बिगड़ ही गया था। राहुल, मेरा क्लासमेट गिरते गिरते बचा। उसके हाथ में मेरी दाईं चूची आ गई थी, या वो जानबूझ कर उसे पकड़ कर लटका। पर इतना जरूर हुआ कि उसने उसे कायदे से दबा मसल जरूर दिया। मुझे गुस्सा आया, पर मैं कुछ कहती, उससे पहले ही वो वैरी सोरी कहने लगा। तो मुझे भी लगा कि शायद अनायास ही यह हो गया होगा।
वो फ़िर मेरे से सट कर खड़ा हो गया। बस चलने लगी। इतने में मैंने अपने चूतड़ों के बीच अपनी गाण्ड में कुछ चुभता सा दबाव महसूस किया। पहले तो मैंने इस पर खास ध्यान नहीं दिया अप्र मैं समझ गई कि राहुल का लण्ड मेरे चूतड़ों की गरमी खा कर खड़ा हो गया है और वो ही मुझे चुभ रहा है।
यह सोच कर मुझे रात वाला नज़ारा फ़िर याद आ गया और मेरे बदन में झुरझुरी सी दौड़ गई। अब मैं बिल्कुल बिना हिले कपड़ों के ऊपर से ही अपनी गाण्ड का तिया-पाँचा कराने लगी।
कुछ देर बाद ही कोलेज़ जाने वली सड़क पर बस रुकी और कोलेज़ जाने वाले सभी लोग उतरने लगे। मैं और राहुल साथ साथ ही उतरे। उतरने के बाद भी आज़ तो वो मेरे साथ ही चलने लगा। कुछ मिनटों बाद मैंने उससे मुस्कुरा कर कह ही दिया कि आप जो बस में कर रहे थे, वो अच्छी बात नहीं है। इस पर वो नाटक करते हुए बोला कि मैंने तो कुछ नहीं किया और कहते कहते ही मेरे चूतड़ों को भी दबाने लगा। मुझे भी अच्छा सा लगा पर मैंने उससे कुछ नहीं कहा।
अचानक ही हम कोलेज़ जाने वाले मोड़ से कोलेज़ की बजाए जंगल वाली सड़क पर मुड़ गए। शुरू में तो मुझे मज़े मज़े में पता ही नहीं चला पर थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा तो बोला- कोलेज़ में तो रोज़ ही जाते हैं, चलो आज एक नया नज़ारा दिखाता हूँ।
उसकी बात का मतलब समझते हुए भी मैं उसके साथ चलने लगी, सच में तो मुझे रात से लग रहा था कि कोई मेरी चूत को चोद डाले, जैसे पापा मम्मी को चोद कर मज़ा दे रहे थे।
एक जगह बिल्कुल सुनसान थी। दूर दूर तक कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था। तभी हमें गन्ने के खेत के बीच में कुछ खाली हिस्सा नज़र आया। वो मुझे वहीं ले गया और मुझसे लिपट कर जगह जगह मुझे चूमने चाटने लगा। इससे मेरी उत्तेज़ना और बढ़ गई। इसके बाद जब उसने मेरी चूचियों को दबाना-मसलना शुरू किया तो मुझे जैसे ज़न्नत दिखाई देने लगी। वो एक हाथ से मेरी चूचियाँ और दूसरे हाथ से मेरे चूतड़ों को बारी बारी दबा रहा था।
अचानक उसने मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। मैं मना करने की स्थिति में नहीं थी, सो मैंने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो मेरा कुर्ता आराम से उतार सके। उसने मेरी सलवार का नाड़ा भी खींच दिया। सलवार बिना लगाम के घोड़े की तरह झट से नीचे गिर गई। अब मैं उसके सामने केवल ब्रा और पैन्टी में रह गई थी।
मुझे शर्म तो आ रही थी लेकिन उत्तेज़ना शर्म पर हावी हो गई थी। सो मैं चुपचाप तमाशा देखती रही। उसने पहले तो मेरे सीने को फ़िर नाभि को ऐसे चूसना शुरू कर दिया मानो कुछ मीठा उस पर गिरा हो और वो उसे चाट कर साफ़ कर रहा हो।
मैं बुरी तरह उत्तेज़ित हो रही थी कि उसने मेरी कच्छी के ऊपर से एक उँगली मेरी चूत में घुसेड़नी शुरू कर दी। मुझे दर्द का भी अहसास हुआ पर मैं उसे मना ना कर सकी। पता नहीं मुझे क्या हो गया था लेकिन मैं बेशर्म हो कर अपनी चूचियाँ अपने आप दबाने लगी थी।
उसने धीरे धीरे मेरी पैन्टी और ब्रा को भी मेरे शरीर से अलग कर दिया और मुझे मादरजात नंगी कर दिया। मैं तड़प रही थी और उसे मज़ा आ रहा था।
वो अभी तक पूरे कपड़ो में खड़ा था। मुझे गुस्सा आया और मैंने उसे गाली दे देकर कहना शुरू कर दिया कि अपने कपड़े भी तो उतार। वो झटके से मुझसे अलग हुआ और बिजली की रफ्तार से उसने अपने कपड़े उतार दिये। कच्छा उतारते के साथ मेरी हालत खराब हो गयी। उसका लण्ड मेरे पापा के लण्ड से कम से कम दुगुना लग रहा था। उसकी लम्बाई कम से कम 8 इंच और गोलाई कम से कम 3 इंच से तो किसी भी तरह कम नहीं थी।
उसने अपना हथियार मेरे हाथ में देकर मुझसे सहलाने को कहा। मैं उसे हाथ में लेकर आगे पीछे करने लगी तो उससे डर कुछ कम लगने लगा। फिर उसने मुझे नीचे बैठाया और अपना लण्ड मेरे मुँह में देने लगा। मुझे बहुत घिन्न आ रही थी कि इसी से ये मूतता होगा और अपना पेशाब मुझे पिलाने की तैयारी में है और सच में उसने मेरे मुँह में डालते डालते पेशाब की तेज धार मेरे मुँह और सारे चेहरे पर डाल दी और हंसने लगा।
पहले तो मुझे बहुत घिन्न आयी पर पता नहीं क्यों कैसे मुझे अपने ऊपर पड़ती गर्म पेशाब से अचानक नहाने में बड़ी उत्तेजना का अनुभव होने लगा। मैं उसके पेशाब को चाटने भी लगी और अपनी चुचियों पर भी मला। मुझे सच इसमें बहुत मजा आया। इसके बाद लण्ड में बची बूंदो को खराब न जाने देने के इरादे से मैंने उसका मोटा लण्ड अपने मुँह में बिना उसके कहे डाल लिया और चूसने लगी।
मुझे तो खैर उसमें बहुत मजा आ ही रहा था, मैंने महसूस किया कि उसे भी इसमें बहुत मजा आया होगा क्योंकि उसका लण्ड पहले से अधिक सख्त और गर्म महसूस हो रहा था। वो मेरा सिर पकड़ कर आगे पीछे करने लगा। अब मेरी चूत में उत्तेजना बढती जा रही थी। यह बात मैंने पूरी बेशर्मी से उसको बतायी तो वो अपना लण्ड मेरी चूत में डालने को तैयार हो गया। वो मुझे जमीन पर लिटाकर मेरे उपर आ गया।
उसके लण्ड का अगला भाग जिसे शायद सुपाड़ा कहते हैं जैसे ही मेरी चूत से टकराया लगा कि जैसे गर्म सरिया या रॉड सी मेरी चूत पर छुआ दी हो। सच अगर चूत में लण्ड डलवाने की इतनी खुजली न मची होती तो मैं तुरन्त उसे वहाँ से हटा देती, लेकिन मैं अपनी चूत के हाथो मजबूर थी। अब उसने चूत पर लण्ड का दबाब बढ़ाना शुरू किया। मुझे दर्द का एहसास हुआ तो मैंने थूक लगाकर डालने की सलाह दी जिसे उसने तुरन्त मान लिया।
उसने सुपाड़े पर थूक लगाकर जोर का झटका मेरी चूत के छेद पर मारा, पर निशाना मिस हो गया और लण्ड मेरे पेट के निचले हिस्से की खाल को जैसे चीरता हुआ उपर आया। मैंने उसे अपने पर्स में निकालकर अपनी कोल्ड क्रीम की ट्यूब उसे दी और उसके लण्ड पर लगाने को कहा, अबके उसने लण्ड के साथ साथ मेरी चूत को भी क्रीम से भर दिया, उँगली डाल डाल कर क्रीम अन्दर पहुँचा दी। मेरी हालत प्रति क्षण खराब होती जा रही थी।
मैंने उससे कहा कि मैं रास्ता दिखाती हूँ तुम जोर का धक्का मारो।
फिर मैंने उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और दबाया। इशारा समझकर उसने शायद पूरी ताकत से धक्का मार दिया। उस समय ऐसा लगा कि उसने धक्का नहीं मुझे मार दिया। एक झटके में उसका आधे से ज्यादा महालण्ड मेरी चूत में समा गया था। मेरी चूत निश्चित ही फट गयी थी और वह दर्द का अहसास हुआ जो आज तक कभी भी जिन्दगी में नहीं हुआ। मैं सिर पटकने लगी।
सारी उत्तेजना जाने कहाँ हवा हो गयी थी, मैं उससे लण्ड निकालने की रो-रोकर विनती करने लगी, लेकिन उसे तरस न आया, वो तो उल्टा मेरी चुचियों को चूसने और काटने लगा। पर उसने लण्ड को वहीं रोक दिया। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम सा महसूस होने लगा तो मैंने उसे बताया। अब उसने लण्ड को धीरे धीरे गति देनी चालू की। उसने धक्के अब भी मेरी चूत को फाड़े दे रहे थे। भंयकर दर्द हो रहा था लेकिन ये उस जानलेवा दर्द के आसपास भी नहीं था जो पहले झटके में शायद क्रीम के कारण हो गया था।
थोड़ी ही देर में मुझको भी मजा सा आने लगा। उसके धक्के अभी भी दर्द पैदा कर रहे थे पर उस दर्द में भी एक अलग आनन्द की अनुभूति हो रही थी। मेरी चूत में से पता नहीं क्या कुछ निकल कर रिस रहा था। पर उसका चूमना चाटना और बीच बीच में काटना अलग ही था। मैंनें इतना आनन्द अनुभव किया जो जिन्दगी में पहले नहीं किया था। पर बात उससे आगे की भी थी। करीब 20 मिनट बाद उसने अचानक धक्कों की स्पीड बढा दी। मैंने भी सहयोग करने का निश्चय करके नीचे से चूतड़ उछालने लगी।
दोनों अपने वेग में थे कि अचानक मेरी चूत में कुछ संकुचन सा हुआ और मैंनें उसको कस के चिपटा लिया, अपने नाखून उसकी कमर में गाड़ दिये। तभी मैंनें अपनी चूत में कुछ गर्म गर्म लावा सा गिरता हुआ महसूस किया।
कुछ ही मिनटों में हम दोनों शान्त हो गये थे। पर आखिर के वो एक-दो मिनट में जो आनन्द आया उसके सामने शायद जन्नत का सुख भी फीका हो। मैं उसकी मुरीद हो गयी। उसने उसके बाद लण्ड निकाला और मेरे मुँह में डाल दिया, मैंने उसे बड़े प्यार से चाट-चाट कर साफ किया।
फिर जब मैंनें बैठकर अपनी चूत रानी को देखा तो मेरे मुँह से चीख सी निकल गयी। चूत का भोसड़ा तो बन ही गया था साथ ही उसमें से खून भी रिस रहा था। मैं यह देखकर डर गयी थी। पर उसने हिम्मत बंधायी। पता नहीं उसने मुझे वापस लिटाकर मेरी चूत में कपड़े से और क्रीम से क्या क्या किया पर सुकून था कि खून रूक गया था। अब थकान बहुत महसूस हो रही थी। सो थोड़ी देर लेटी रही।
फिर उसके सहारे से उठी और बदन झाड कर कपड़े पहने। कपड़े पहनकर उसकी तरफ मुस्कुराकर देखा तो उसने फिर एक बार मेरे निचले होंठ को चूसना शुरू कर दिया और चुचियों को दबाने लगा। मुझे बहुत आनन्द आया और सच में अगर घर वापिस लौटने में टाइम का ख्याल नहीं होता तो मैं उसे हटने को कभी नहीं कहती।
उसके बाद हमने उस जंगल वाले कालेज की कई क्लासेज अटेण्ड की। पर अब गन्ना कट जाने से हमें बड़ी दिक्कत हो गई है। खैर, भगवान ने चाहा तो उसका इन्तजाम भी हो जायेगा। अच्छा मैं अपनी कहानी यहीं पर बन्द करती हूँ।
सम्पादक महोदय से गुजारिश है कि मेरा नाम भले ही छाप दें पर मेरे गाँव और जिले का नाम साइट पर न दें नहीं तो मेरी पूरे कालेज में बदनामी हो सकती है। मैं जानती हूँ मेरे कालेज कई लड़के लड़कियाँ अर्न्तवासना पर कहानियाँ पढने के शौकीन हैं। Sex Stories
मैं पूना की एक Antarvasna बड़ी कंपनी में इंजिनियर हूँ। मेरी आयु 51 वर्ष, कद 5’10″, रंग गोरा और बॉडी सुडौल है।
मेरी पत्नी का नाम गीता है, वो 50 वर्ष की 5’3″ लम्बी, भरे बदन की है।
हमारे दो बेटे हैं, बड़ा आकाश 25 वर्ष का है और बंगलौर में जॉब करता है, छोटा अम्बर 23 वर्ष का है और बंगलौर में ही एम बी ए कर रहा है।
दोनों भाई इकट्ठे अपने 3 बेडरूम के फ्लैट में रहते हैं, जो मैंने दो वर्ष पहले खरीदा था।
जब तक बेटे हमारे साथ पूना में रहते थे, तब तक मेरी पत्नी का दिन आसानी से कट जाता था।
दोनों बेटों के जाने के बाद उसके लिए दिन काटना भी भारी लगने लगा तो हमने सोचा कोई कि पेइंग-गेस्ट रख लें जिससे कुछ पैसा भी आएगा और गीता का मन भी लगा रहेगा।
जब पेइंग-गेस्ट रखने की बात चली तो मैंने और गीता ने तय किया कि हम लोग सिर्फ दो लड़कियों को रखेंगे क्योंकि लड़कों के साथ तो हम 25 वर्ष से रह ही रहे थे और चूँकि हमारी कोई बेटी नहीं थी इसलिए भी हमें लड़कियाँ रखने में ज्यादा रूचि थी।
खैर जहाँ चाह वहाँ राह!
जल्दी ही दो लड़कियाँ पेइंग-गेस्ट के रूप में हमारे घर में आ गईं।
एक का नाम राधिका और दूसरी का नाम मनमीत था।
राधिका आगरा और मनमीत लखनऊ की रहने वाली थी।
दोनों एम बी ए कर रही थीं लेकिन अलग अलग कॉलेज से। दोनों के कॉलेज आने जाने का समय अलग अलग था पर इससे हमें कोई दिक्कत नहीं थी।
अब गीता को घर में रौनक दिखने लगी थी।
देखते देखते छः महीने कैसे गुज़र गए, पता ही नहीं चला।
कहते हैं कि ऊपरवाले को जो करना होता है, वो वैसे हालात पैदा कर देता है।
हमारे यहाँ सब कुछ सामान्य चल रहा था कि राधिका के कॉलेज में एक महीने की छुट्टियाँ हो गईं और वो अपने घर आगरा चली गई।
इसके दो दिन बाद ही बंगलौर से आकाश का फ़ोन आया कि अम्बर की तबियत खराब है अगर हो सके तो मम्मी को भेज दीजिये ताकि उसकी देखभाल हो सके।
अगले दिन की पहली फ्लाईट से गीता बंगलौर चली गई.
अब घर में रह गए मैं और मनमीत।
हमारे घर के मुख्य द्वार की दो चाबियाँ हैं, एक मैंने अपने पास रखी और एक मनमीत को दे दी। इससे घर वापस आने जाने में कोई दिक्कत रही नहीं।
खाने के लिए मैंने टिफिन सर्विस वाले से कह दिया।
इस तरह गीता के न रहने पर भी मैंने सब व्यवस्था कर ली।
गीता को गए हुए दो दिन बीते थे कि रात को दो बजे मैं पेशाब करने के लिए उठा तो मनमीत के कमरे से बातें करने की आवाज आ रही थी।
चूँकि राधिका यहाँ थी नहीं इसलिए मैंने सोचा देखूं किस से बातें कर रही है।
मनमीत के कमरे के पास जाकर ध्यान से सुना तो पता चला कि अपनी किसी सहेली के साथ मोबाइल पर बात कर रही थी.
बात का सारांश यह था कि मनमीत की सहेली हमारे घर के खालीपन का लाभ उठाकर अपने बॉयफ्रेंड को हमारे घर लाकर चुदवाना चाहती थी, जिसका मनमीत यह कहकर विरोध कर रही थी कि मेरे आंटी-अंकल मुझ पर इतना विश्वास करते हैं कि पूरा घर मेरे हवाले कर देते हैं, मैं उनके साथ धोखा नहीं कर सकती।
यह सब सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन उनकी बातों का सिलसिला अभी खत्म नहीं हुआ था।
मनमीत के उत्तर सुनकर यह अंदाज़ हो जाता था कि उसकी सहेली ने क्या कहा होगा। मनमीत की बातों को ध्यान से पढ़िये आप भी समझ जायेंगे।
“नहीं यार मैंने कह दिया न कि मैं तुम्हें अपने घर नहीं ला सकती!”
…
“हट, मैं क्यूँ चुदवाऊँ तेरे यार से?”
…
“होती है, लेकिन चूत में खुजली होने का मतलब ये तो नहीं कि मैं ऐरे गैरे नत्थू खैरे किसी से भी चुदवा लूँ?”
…
“तुम्हारी सोच गन्दी है तान्या, मैंने आज तक चुदवाना तो दूर किसी को अपनी चूत की झलक भी नहीं दिखाई है!”
…
“अमित अंकल ऐसे आदमी नहीं हैं, वो मुझे अपनी बेटी की तरह मानते हैं!”
…
“अमित अंकल अगर मेरे अंकल नहीं होते तो मैं उनसे शादी जरूर कर लेती।”
…
“वो मुझसे 25 साल बड़े हैं तो क्या हुआ, 50 साल भी बड़े होते तो भी कर लेती, तुम क्या जानो, वो बाहर से जितने सुन्दर हैं अन्दर से उससे भी ज्यादा सुन्दर हैं।”
…
“अरे यार मैंने कह दिया न मैं तुम्हें अपने घर नहीं ला सकती, तू समझती क्यूँ नहीं ?”
…
“तू कहे तो मैं अभी चली जाऊं अंकल के कमरे में, राधिका भी नहीं है और आंटी भी नहीं, बस मैं और अंकल दो ही लोग हैं घर में!”
…
“तू आ जा! अंकल से चुदवा कर देख ले कि वो चोद पाते हैं या नहीं!”
…
“तू फ़ोन रख यार, अपना भी मूड ख़राब कर रही है और मेरा भी, चूत भी पूरी तरह गीली हो गई है, उंगली मांग रही है।”
इतना कहकर मनमीत ने फ़ोन काट दिया और उठकर बाथरूम चली गई।
मैं लौटकर अपने कमरे में आया तो नींद मुझसे कोसों दूर जा चुकी थी, जिस मनमीत को मैं अपनी बेटी जैसी मानता था उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग घूम चुका था और मैं उसे चोदने की योजना बनाने लगा।
मैं सुबह नौ बजे घर छोड़ देता था जबकि मनमीत 11 बजे निकलती थी।
वो उठकर मेरे कमरे में आती, अखबार ले जाती और पढ़कर वापस मेरे कमरे में रख जाती।
आज मैं जानबूझ कर आठ बजे घर से निकल गया जब वो सो रही थी।
मैंने अपने तकिये पर 60 पेज की एक किताब रख दी थी, जिसमें चुदाई की कहानियाँ थीं, मैं मनमीत को यह बताना चाहता था कि मैं उतना सीधा नहीं हूँ जितना वो समझती है।
दोपहर को दो बजे मैं घर आया तो न्यूज़ पेपर और किताब दोनों अपनी अपनी जगह पर रखे हुए थे लेकिन उनकी प्लेसमेंट बदल गई थी।
मनमीत उस किताब को पढ़कर भी शायद यह दिखाना चाहती थी कि उसने वो किताब नहीं देखी है।
शाम को पांच बजे जब वो कॉलेज से लौटी, चाबी से दरवाजा खोलकर अन्दर आई तो मुझे घर में देखकर हैरान होते हुए बोली- आप आज जल्दी आ गए?
फिर उसने मुझसे चाय के लिए पूछा और चाय बनाने लगी।
एक बात मैंने नोटिस की कि वो मुझे बार बार आप कहकर संबोधित कर रही थी, आज उसने एक बार भी अंकल शब्द का प्रयोग नहीं किया था।
चाय पीने के बाद हम लोग टी वी पर क्रिकेट मैच देखने लगे।
मैं सोफे पर बैठा था और वो सोफे की साइड चेयर पर!
उससे मैंने अपने बगल में बैठने को कहा तो वो मेरे बगल में आकर बैठ गई।
मैंने उससे कहा- मनमीत, जब से तुम इस घर में आई हो मैं तुमसे एक बात करना चाहता हूँ लेकिन कभी मौका ही नहीं मिला, अगर तुम कहो तो कह दूं।
मनमीत बोली- कह दीजिये!
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और कहना शुरू किया- यह बात लगभग 25 वर्ष पहले की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था, मेरे साथ एक लड़की पढ़ती थी उसका नाम मनमीत था, वो भी तुम्हारी तरह लम्बी, गोरी और दुबली पतली सरदारनी थी। मैं उसे प्यार से मनु कहता था। हम दोनों घंटों इसी तरह हाथ पकड़ कर बातें करते रहते थे, कभी कभी मैं अपनी बांह इस तरह उसके गले में डालता तो वो अपना सिर इस तरह मेरे सीने से लगा देती थी।
इतना कहते कहते मैंने अपनी बांह उसके गले में डालकर उसका सिर अपने सीने से लगा दिया और फिर बोला- हम लोग थोड़ी बहुत शरारत भी कर लेते थे। मैं उसके स्तन दबाता तो वो उछल जाती थी।
यह कहते कहते मैंने उसका बायाँ स्तन दबा दिया और पूछा- तुम्हें बुरा तो नहीं लगा ना?
उसके उत्तर का इंतज़ार ना करते हुए मैंने उसके सिर पर चुम्बन किया और बोला- उसके सिर से भी मेहँदी की ऐसी ही खुशबू आती थी।
इतना कहकर मैं शांत हो गया जैसे मैं किन्हीं यादों में खो गया हूँ।
कुछ देर बाद वो बोली- फिर क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं! हमारे प्यार का आखिरी दिन आ गया, कॉलेज बस से हम लोग पिकनिक पर जा रहे थे, हमारी बस एक टैंकर से टकरा गई और 6 विद्यार्थी मर गए जिनमें मनमीत भी थी। जब तुम यहाँ आई और अपना नाम मनमीत बताया तो मुझे लगा मेरी मनमीत आ गई! वही नाम, वही रंग, वही रूप, वही सदा मुस्कुराता चेहरा। तुमसे और राधिका से जो पैसा अभी तक मैंने लिया है, उसमें से राधिका का पैसा तो मैंने खर्च कर लिया, तुम्हारे पैसे पहले दिन से यह सोचकर अलग रखता रहा कि जब तुम जाओगी तो तुम्हारे ही पैसों से तुम्हें कोई गिफ्ट ले दूंगा ताकि तुम मुझे याद रख सको।
भावुक होकर बोली- आपने यह कैसे समझ लिया कि एक मनमीत आपकी ज़िन्दगी से चली गई तो दूसरी भी चली जायेगी।
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और चुम्बनों की बौछार कर दी।
शाम के सात बज चुके थे, मैंने मनमीत से कहा- चलो, बाहर खाना खाकर आते हैं।
रात को 9.30 पर खाना खाकर हम वापस आये तो मैंने गीता की अलमारी से उसका वो लाल सूट निकाला जो उसने अपनी शादी के दिन पहना था और अब इसलिए सम्भालकर रखा था कि आकाश की दुल्हन पहनेगी।
मैंने वो लाल सूट मनमीत को देते हुए कहा- मनु यह सूट पहन कर आओ! देखूं कैसी लगती हो!
जब सूट पहन कर मनमीत लौटी तो मुझ पर बिजली गिर गई।
बोली- कैसी लग रही हूँ?
मैंने कहा- बहुत सुन्दर! बस एक कमी है!
उसने पूछा- क्या?
तो मैं उसे पकड़कर घर में बने मंदिर में ले गया और चुटकी भर सिंदूर उसकी मांग में भर दिया और उसे गोद में उठाकर अपने बेडरूम में ले आया और अपने पलंग पर बैठा दिया।
मैंने अपनी टी-शर्ट और पैंट उतार दी, अब मेरे शरीर पर सिर्फ छोटा सा अंडरवियर था, बनियान मैं पहनता ही नहीं।
मनमीत के पास जाकर मैंने उसे खड़ा किया और अपने सीने से लगा लिया।
मेरे नंगे सीने में में वो समा गई, उसके माथे पर एक चुम्बन देकर मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को दबाने लगा, वो मुझसे लिपटती जा रही थी।
उसका लाल रंग का दुपट्टा उतारकर मैंने कुर्सी पर फेंका तो देखा कि उसकी धड़कनों की वजह से उसके मम्मे उछल रहे थे।
धीरे धीरे उसका कुरता उतारा और फिर ब्रा के हुक खोल कर उसके मम्मे आज़ाद कर दिए।
उसके मम्मे जब मेरे सीने से लगे तो ऐसा लगा जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।
अब मैं पलंग पर बैठ गया और मनमीत का एक चुचूक अपने मुंह में ले लिया और उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, जरीदार सलवार अपने आप उतर गई।
अब मनमीत के शरीर पर सिर्फ मैरून रंग की पैंटी थी, वो भी मैंने उतार दी।
मनमीत का नंगा जिस्म मुझमें जवानी का जोश भर रहा था, इतना जोश शायद पहली बार गीता को चोदते समय भी नहीं रहा होगा। मनमीत की चूत के होठों पर अपनी ऊँगली फेरी तो देखा चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी।
मैंने कमरे में आने से आधा घंटा पहले सेक्स की गोली खाई थी जो अपना पूरा असर दिखा रही थी, मेरा लंड तनकर लम्बा और 3 इंच मोटा हो चुका था।
अब ज्यादा देर करना मुनासिब नहीं था इसलिए मैंने मनमीत को पलंग पर लिटाया और तकिये पर एक पुराना टॉवेल बिछाकर तकिया मनमीत की गांड के नीचे रख दिया।
मनमीत की दोनों टांगें घुटनों से मोड़कर मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और अपने लंड का सुपारा मनमीत की चूत के मुंह पर रख दिया।
लंड के सुपारे को थोड़ी देर तक मनमीत की चूत पर रगड़ने के बाद मैंने पूछा- जान, डाल दूं?
मुंह से तो मनमीत कुछ नहीं बोली लेकिन आँखों से इशारा कर दिया कि हाँ डाल दो।
अब क्या हुआ कि पहले झटके में आधा और दूसरे झटके में पूरा लंड मनमीत की चूत के अन्दर हो गया, कल तक जो लंड गीता का था, आज मनमीत का हो चुका था।
लगभग बीस मिनट तक मनमीत की चुदाई करने के बाद मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला, मनमीत की चूत फटने से जो खून निकला था उस से मेरा लंड सराबोर था।
पुराने तौलिए से लंड को पोंछकर उस पर कंडोम चढ़ाया क्योंकि मनमीत की चूत में डिस्चार्ज करना ठीक नहीं था।
लंड पर कंडोम चढ़ाकर मैं फिर से मनमीत पर चढ़ गया।
यकीन मानिए गीता को चोदने में कभी भी ये मज़ा नहीं मिला था।
आधे घंटे की चुदाई के बाद भी डिस्चार्ज नहीं हुआ था, वाह री गोली!
खैर चोदते चोदते धक्के मारते मारते वो पल भी आ गया जब मेरे लंड से पिचकारी छूटी और पूरा कंडोम मेरे वीर्य से भर गया।
उस रात में मैंने मनमीत को चार बार चोदा और हर बार चुदाई का समय बढ़ता गया।
अगले दिन हम दोनों ने छुट्टी की और दिन भर चुदाई का मजा लिया।
इसके बाद मैंने गीता को बंगलौर में बेटों के पास सेटल कर दिया और मनमीत आज मेरी पत्नी की हैसियत से मेरे साथ रह रही है। Antarvasna
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