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मेरा नाम रोहित है. मेरी उम्र अभी 38 साल की है. मैं स्कूल के दिनों से ही चूत चोदने का बड़ा शौकीन रहा हूं. लेकिन कभी मौका नहीं मिला तो मैं हाथों और किताबों से ही काम चला लेता था. बहुत बार लड़कियों को पटाने की कोशिश की, लेकिन सफ़ल नहीं हो पाया. सैंयां की जगह भैया बोल के दिल दुखा देती थीं सालीं.
खैर ऊपर वाले के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं है. मेरी जिंदगी में भी उजाले की किरण फूटी. जब मैं बारहवीं कक्षा में था. मैं विज्ञान का छात्र था. हमारी बायोलोजी की टीचर स्कूल में नई आई थी, उसका नाम सुहानी था. उस समय वो तेईस साल की थी … बहुत ही सुंदर थी. उसका फिगर 36-26-36 का था, ऊंचाई पांच फुट छह इंच थी. वो बहुत सेक्सी थी, सब टीचर उसके आगे पीछे घूमते थे, लेकिन वो किसी को भाव नहीं देती थी.
क्लास में वो हमेशा मेरे काम से खुश रहती थी और कई बार मेरी तारीफ भी करती थी. लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात आती थी कि कब मुझे ऐसी लड़की चोदने को मिलेगी और एक दिन मौका मिल ही गया.
अक्टूबर का महीना था, शाम को स्कूल के छूटने के बाद बायोलोजी की हमारी एक्स्ट्रा क्लास थी. क्लास खत्म होते होते सात बज गए … अँधेरा हो गया था, सब जाने लगे तो एकदम से तेज हवा आने लगी और बारिश भी चालू हो गई. टीचर सुहानी, मैं और चपरासी बारिश रुकने का इंतजार करने लगे.
थोड़ी देर बाद चपरासी ने मुझे कहा- तुम मैडम को घर छोड़ देना, मुझे देर हो रही है इसलिए मैं जा रहा हूं.
मैंने कहा- ठीक है.
बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. इतने में जोर कड़ाके के साथ बिजली चमकी, तो सुहानी मैम डर गई और डर के मारे वो मुझसे लिपट गई. मैंने भी कुछ सोचा नहीं और सुहानी को मेरी बाँहों में भर लिया. वो डर से कांप रही थी. थोड़ी देर तो वो ऐसे ही मुझसे लिपटी रही. सुहानी की मस्त जवानी मेरी बाँहों में थी. मेरे सारे शरीर में बिजली सी दौड़ गई. मेरा मन और शरीर वासनामय होने लगा. लंड भी खड़ा हो गया था.
अचानक वो शरमा के पीछे हट गई और मुझसे माफ़ी मांगने लगी.
मैंने कहा- कोई बात नहीं.
फ़िर उसने कहा- प्लीज़ मुझे घर छोड़ दो, मुझे बिजली से बड़ा डर लगता है.
मैंने हामी भरी और हम दोनों बारिश में ही घर की ओर निकल लिए. बीस मिनट में हम घर पहुंच गए. फ़िर मैम ने मुझे अन्दर आने को कहा तो मैंने कहा- अब नहीं, फ़िर कभी आऊंगा …
अब मैं थोड़ा भाव खा रहा था, लेकिन मन में लड्डू फ़ूट रहे थे और ऐसा मौका हाथ से जाने देना नहीं चाहता था.
फ़िर उसने पूछा- तुम कहीं पास में ही रहते हो?
तो मैंने बताया कि मैं पास के गाँव में रहता हूं और जाने के लिए कोई व्यवस्था कर लूँगा क्योंकि आखरी बस तो सवा सात पर निकल जाती है.
यह सुनकर उसने कहा- पागल तो नहीं हो गए … क्या इतनी बारिश में कहाँ जाओगे, अन्दर आओ मैं तुम्हें तौलिया देती हूँ, अपना गीला बदना पौंछ कर फ्रेश हो जाओ और मैं तुम्हारे लिए चाय बनाती हूं.
मैंने अपने कपड़े सुखाने के लिए रख दिए और तौलिया लपेट के बैठ गया.

थोड़ी देर बाद सुहानी मैम वापस आई तो उसने पीच कलर की नाईट गाउन पहनी हुई थी और हाथ में चाय का कप था. चाय का कप लेते हुए मैंने जानबूझ कर उसके हाथ को छुआ. फ़िर हम दोनों ने चाय पीते-पीते इधर उधर की बातें की, लेकिन मेरा मन तो उसको चोदने में ही था. लंड तना हुआ था और बार-बार मेरी नजर उसके फुदकते मम्मों के ऊपर ही जा रही थी, जो उसके नजर से बाहर नहीं था.
बाहर जोरों की हवा के साथ बारिश अभी भी चालू थी. सुहानी ने कहा- मुझे ऐसे वातावरण में बहुत डर लगता है, क्या आज रात तुम यहीं नहीं रह सकते?
मैंने अपनी ख़ुशी छिपाते हुए कहा- ठीक है.
बाद में उसने खाना बनाया और साथ बैठ के खाया. जब वो किचन में बर्तन साफ कर रही थी तो मैं वहां मदद करने गया और जब-जब मौका मिला, उसको छू लेता था.
करीब ग्यारह बजे हम सोने गए. पन्द्रह बीस मिनट के बाद जोरदार कड़ाके से बादल गरजने लगे, तो वो दौड़ती हुई मेरे कमरे में आई और मुझसे चिपक गई.
मैंने भी मौके की नजाकत को दखते हुए उसको अपनी बाँहों में भर लिया. उसके कड़क बूब्स मेरे सीने के साथ चिपक गए थे. शायद उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी. अब मेरा मन और लंड दोनों बेकाबू हो रहे थे, लेकिन मैं कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था. फ़िर भी मैंने हिम्मत करके उसकी पीठ पर अपना हाथ फेरने लगा, उसने कोई आपत्ति नहीं जताई तो मेरी हिम्मत और बढ़ी. मैं हल्के से उसके बालों को भी सहलाने लगा. तभी मैंने महसूस किया कि उसकी उंगलियां मेरी पीठ पर हल्के से कस रही थी और सांसें तेज हो रही थीं.
मेरा तीर निशाने पर लगा था. अब मेरी हिम्मत और बढ़ी. मैंने अपने होंठों को उसके नाजुक होंठों के पास ले गया और थोड़ा सा टच किया, तो उसकी सांसें और तेज होने लगीं. वो भी धीरे धीरे गरम हो रही थी. अब मैं जान गया कि वो भी मुझसे चुदवाना चाहती है. मैंने अपने गरम होंठ उसके होंठों पे रख दिए और धीरे से किस किया. फ़िर धीरे धीरे उसके रसीले होंठ को चूमने लगा. इस बार उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और चूमने लगी.
अब कोई रूकावट नहीं थी. हम दोनों जोर से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे. फ़िर मैंने अपनी जीभ सुहानी के मुँह में डाल दी. वो उसे बड़ी मस्ती से चूसने लगी. मैंने मेरा हाथ उसके बूब्स पर सरकाया और हल्के से दबाया, उसके बूब्स एकदम कड़क थे. फ़िर गाउन के ऊपर से निप्पल के साथ खेलने लगा तो वो और उत्तेजित हो गई और मुझे पागलों की तरह चूमने लगी. अब मैंने उसका गाउन ऊपर सरका के उसके बूब्स को नंगा कर दिया. मैं उसके बूब्स को बारी बारी से चूमने और चाटने लगा. उसको बहुत मजा आ रहा था, एक हाथ से मैं बूब्स को दबाए जा रहा था … तभी दूसरा हाथ मैंने उसकी चूत की ओर बढ़ाया.
उसकी चड्डी भीग चुकी थी, इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वो कितनी उत्तेजित थी और मजे लूट रही थी. अब मैं उसकी चूत के दाने से खेलने लगा. कुछ ही देर में उसका पूर्ण समर्पण हो गया था. मैंने उसकी पैंटी को भी हटा दिया, अब वो एकदम नंगी थी.
उसने भी मेरा तौलिया हटा दिया और मेरे लंड को हाथ से मसलने लगी. मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर रख दिया, उसकी चूत से एक अजीब सी सुगंध आ रही थी. चूत टेनिस बॉल की तरह फूली हुई चूत थी, जो क्लीन शेव्ड थी. मैं उसकी चूत को चाटने लगा और साथ में उसके बूब्स को भी मसलने लगा.
अब वो खुशी के मारे हल्के से बोल रही थी- रोहित … मुझे बहुत मजा आ रहा है, चूसो मेरी चूत को … आह … आ … आआया … आआअ … आआ … उह … ऊउऊ. ऊ.ईई.ऊई … ऊई आह आआह्ह्छ … रोहित … मुझसे और इंतजार नहीं हो सकता प्लीज़ मुझे चोदो … प्लीज़ फक मी …
मैं भी तैयार था, उसने दोनों पैर मेरे कंधों पर रख दिए. अब मैंने अपना आठ इंच लंबा और साढ़े तीन इंच गोलाई में मोटा लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा.
वो तो समझो कि मेरे रोहितने गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ रोहित मुझे चोदो ना … मत तड़पाओ … जल्दी से पेल दो.
अब मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी रसीली चूत के द्वार पे रख कर एक जोरदार धक्का लगाया.
“मर गई … निकालो … निकालो …”
मैं रुक गया और उसके बूब्स के साथ खेलने लगा, कुछ पल में वो अपनी गांड हिलाने लगी तो मैंने एक और जोरदार धक्का लगाया. उसकी चूत में लगभग छह इंच अन्दर तक मेरा लंड घुस गया. उसकी चूत से खून बहने लगा … सारी दीवारें टूट गईं.
कुछ देर के दर्द के बाद वो जोर जोर से चिल्लाने लगी. मैंने अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिए और एक धक्का मारा. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया. हालांकि वो दर्द के मारे तड़पने लगी थी … लेकिन अब उसे भी मालूम था कि दर्द के बाद मजा आता है.
मैं थोड़ी देर उसके बूब्स को धीरे धीरे दबाता रहा और उसे चूमता रहा. दो मिनट बाद उसने थोड़ी राहत महसूस की तो अपने कूल्हे उठाने लगी. अब मैं धीरे धीरे अपना लंड उस मास्टरनी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. लंड की स्पीड बढ़ाती जा रही थी. करीब दस मिनट बाद उसका शरीर एकदम से अकड़ गया और अगले ही पल वो झड़ गई.
अब पूरा कमरा फचक फचक … फचक की आवाज से गूंज रहा था. इसी के साथ में सुहानी की सिसकारियां ‘आ … आया … या … अहय्य्य … ओह … या … ऊऊउईई आह्ह्ह …’ गूँज रही थीं.
इधर मैंने भी स्पीड बढ़ा दी थी. मेरा लंड सुहानी मैम की चूत में इंजन के पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था. अब मेरी बारी थी, मेरी सांसें एकदम तेज हो गई थीं, हम दोनों पसीने से तर हो रहे थे. हम अपनी मस्ती में सारी दुनिया भूल चुके थे. बस हम और हमारी सिसकारियां ही माहौल में थीं.
आखिरकार 20 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद मैंने अपना सारा पानी मैम की चूत में छोड़ दिया. इस दौरान सुहानी मैम तीन बार पानी छोड़ चुकी थी.
थोड़ी देर हम ऐसे ही एक दूसरे से लिपट कर ही पड़े रहे. उसके बाद उस रात हम दोनों ने दो बार और चुदाई की. फ़िर बाथरूम में जाकर दोनों ने साथ में शावर लिया. जब हम शावर में नहा रहे थे, तब मैंने उसकी गांड मारने की इच्छा जाहिर की … तो उसने कहा- आज नहीं फ़िर कभी!
मैंने जिद की तो वो हंसकर बोली- आज तो तूने मेरी भोस का भोसड़ा कर दिया.
फ़िर रूम में आकर हम दोनों एक दूसरे के आगोश में नंगे ही सो गए.
रात को अचानक मेरी नींद खुल गई. मेरा लंड खड़ा हो गया था. मैंने देखा तो सुहानी मेरा लंड चूस रही थी.
मैंने पूछा- सोई नहीं थी क्या?
तो वो बोली- डार्लिंग सुबह के आठ बज चुके हैं … मैं अभी ही उठी तो देखा तो तुम्हारा लंड तना हुआ था … तो अपने आपको लंड चूसने से रोक नहीं पाई. रात को भी ठीक से चूसने को नहीं मिला था.
मैंने कहा- अब ये तुम्हारा ही है, जब चाहे चूस लो, जब चाहे चुदवा लो.
उस दिन के बाद जब भी मौका मिला हमने बिल्कुल भी नहीं गंवाया.
आज भी वो टीचर उतनी सुंदर और सेक्सी है. अभी भी मौका मिलते ही हम दोनों मिल जाते हैं और लंड चूत की कहानी बन जाती है.
६ महीने बाद निधि कि कक्षा में ही एक Antarvasna नई लड़की ने प्रवेश लिया, उसका नाम प्रिया था। जब मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया। वो निधि से भी ज्यादा ही खूबसूरत थी। उसकी लम्बाई करीब ५’३” और रंग एकदम दूध जैसा था। उसको देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। मैं प्रिया को चोदने की तरकीब लगाने लगा।मेरे मन की मुराद जल्दी ही पूरी हो गई। प्रिया का स्कूल में लेट ऐडमिशन था और उसके पास विज्ञान विषय था, इस कारण उसे पढ़ाई में दिक्कत आ रही थी।
एक दिन वो मेरे पास आई और बोली- सर ! मेरा स्कूल में लेट ऐडमिशन है और मुझे फ़िज़िक्स में काफ़ी दिक्कत आ रही है, क्या आप मुझे ट्यूशन पढ़ा सकते हैं?
मैंने कहा- हां ! क्यों नहीं ! तुम स्कूल खत्म होने के बाद मेरे ओफ़िस में आ कर पढ़ सकती हो।
तो वो बोली- सर, मैं कल से आपसे पढ़ूंगी, क्योंकि आज मैंने घर नहीं बताया है और लेट होने पर मम्मी पापा परेशान होंगे।
मैंने कहा- ठीक है ! कल से पढ़ाई शुरू करेंगे।
उस रात मुझे नींद नहीं आई, बार बार प्रिया का ही ख्याल आता रहा और उसको चोदने का प्लान बनाता रहा, लेकिन कोई तरकीब मेरे दिमाग में नहीं आ रही थी। मैं प्रिया को रोज़ ट्यूशन देने लगा और पढ़ाते समय कभी उसके हाथ को छूता तो कभी उसके कंधे पर हाथ रख देता। कभी कभी उसकी जांघों पर भी हाथ लगाता था।
दो महीनों तक ऐसे ही चलता रहा। उसकू चोदने की तमन्ना मन की मन में रह गई। मार्च में १२वीं की बोर्ड की परीक्षा होनी थी इसलिए फ़रवरी से ही १२वीं कक्षा को परीक्षा की तैयारी के लिए छुट्टियां दे दी गई थी। एक दो दिन के बाद प्रिया स्कूल आई और मुझसे बोली- सर , क्या आप मुझे घर पर पढ़ा सकते हैं?
मैंने कहा- ठीक है, तुम शाम को ६ बजे के बाद मेरे घर आ जाना क्योंकि इससे पहले मैं स्कूल में रहता हूं।
उसने कहा- ठीक है सर ! मैं ६ बजे आपके घर आ जाऊंगी।
मैंने उससे पूछा- तुमने अपने पापा से पूछ लिया है?
तो वो बोली- हां सर ! मैंने पापा को बता दिया है कि मैं सर के घर जाकर ट्यूशन पढ़ूंगी।
वो मेरे घर आकर पढ़ने लगी।
५-७ दिन तक प्रिया को चोदने की कोई तरकीब नहीं मिल पा रही थी।
रविवार को मैं घर पर ही था। उस दिन बारिश हो रही थी और फ़रवरी की ठण्ड वैसे ही थी। मैंने शराब की बोतल निकाली और टीवी देखते देखते पीने लगा।
थोड़ी देर में दरवाज़े पए दस्तक हुई तो मैंने बोतल वगैरह दूसरे कमरे में रख कर दरवाज़ा खोला, सामने प्रिया खड़ी थी।
मैंने उसे अन्दर आने को कहा तो वो अन्दर आ गई और मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया। मैंने उससे पूछा कि इतनी बारिश में कैसे आई तो वो बोली कि पापा मुझे कार से छोड़ कर गए हैं और ट्यूशन खत्म होने पर फ़ोन कर देने को कहा है ताकि वो मुझे लेने आ जाएँ।
मैंने उससे कहा- ठीक है तुम्हें जो कुछ समझना है पूछ लो।
प्रिया ने उस दिन सफ़ेद रंग की पैन्ट और काले रंग की कसी हुई टीशर्ट पहनी थी। उसके उरोज़ों की गोलाईयाँ साफ़ दिख रही थी।
उसको देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया। वो अपनी किताब में से सवाल पूछने लगी। मैं थोड़ी थोड़ी देर में उसे कोई सवाल करने के लिए दे कर दूसरे कमरे में जाकर पीने लगा।
नशा होने पर मैं प्रिया को चोदने के बारे में सोचने लगा।
फ़िर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया और सहलाने लगा। वो इससे कुछ बेचैन सी होने लगी, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
इससे मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया और उसकी पीठ सहलाने लगा तो प्रिया ने कहा- सर ! आप ये क्या कर रहे हैं? अपना हाथ हटाइये।
लेकिन मेरे ऊपर तो चुदाई का भूत सवार था, मैंने कहा- बस हाथ ही तो लगाया है और कुछ थोड़े ही किया है।
प्रिया थोड़े गुस्से में बोली- तो आपका क्या मतलब है कुछ होने के बाद बोलूं?
बात बिगड़ती देख मैंने थोड़े प्यार से कहा- प्लीज़ प्रिया ! बस थोड़ी देर !
उसके बाद प्रिया कुछ नहीं बोली।
इस कारण मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उसकी पीठ से उस्कए उरोज़ों की तरफ़ बढ़ाया और धीरे धीरे उसके उरोज़ों को मसलने लगा।
इससे प्रिया को भी मज़ा आने लगा था क्योंकि वो भी सिसकियाँ भरने लगी थी।
मैंने अपना दूसरा हाथ उसकी चूत पर रख दिय और पैन्ट के ऊपर से ही मसलने लगा। इससे प्रिया गरम होने लगी थी, क्योंकि उसके मुँह से अजीब आवाज़ें आ रही थी, प्लीज़ सरररररर बससस अब छोड़ दीजिए… आऽऽऽआऽऽअ…उ उईऽऽऽ…प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए।
फ़िर मैंने उसकी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अपने हाथ को उसकी पैन्ट में डाल कर उसकी चूत को जोर जोर से दबाने लगा।
फ़िर एक उँगली को उसकी चूत में डाल दिया। उँगली के अन्दर जाते ही प्रिया एकदम चौंक पड़ी और गुस्सा दिखाते हुए मुझे हाथ हटाने के किए बोलने लगी। लेकिन मैं समझ गया कि यह बनावटी गुस्सा है और मन ही मन वो चुदवाना चहती है।
मैं अपनी उँगली को उसकी चूत के अन्दर बाहर करने लगा, जिससे प्रिय को काफ़ी मज़ा आने लगा क्योंकि वो अब सिसकियाँ भरने लगी थी।
थोड़ी देर बाद मैंए उसकी टी-शर्ट खोल दी, अन्दर उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी, जिसमें कैद उसकी गोलाईयाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थी।
मैंने जल्दी ही उसके उरोज़ों को ब्रा की कैद से मुक्त कर दिया।
उसके दूध जैसे उरोज़ों पर हल्के गुलाबी चूचुक बहुत आकर्षक लग रहे थे, मैं एक उरोज़ को मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को हाथ से दबाने लगा।
प्रिया कसमसाने लगी, मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया और उसे सहलाने को कहा।
प्रिया पैन्ट के ऊपर से ही मेरा लण्ड सहलाने लगी। इससे मेरा लण्ड एकदम टाईट हो गया और मुझे बहुत मज़ा आने लगा।
थोड़ी देर तक उसके उरोज़ों को चूसने के बाद मैंने उसे सोफ़े पर बैठा दिया और उसकी पैन्ट खोल दी, उसने सफ़ेद रंग की पैन्टी पहन रखी थी जो कि उसकी सफ़ेद जांघों पर काफ़ी सुन्दर लग रही थी।
मैंने उसकी पैन्टी को भी उतार दिया और उसकी चूत को देखता ही रह गया, एकदम गुलाबी चूत थी, जिस पर हल्के भूरे रंग के छोटे छोटे बाल थे।
प्रिया की चूत निधि की चूत से भी काफ़ी आकर्षक थी।
मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगा दिया और चाटने लगा। अब वो सीत्कार रही थी। मैंने अपनी जीभ उस्की चूत के अन्दर कर दी और उसकी चूत को जीभ से चोदने लगा।
प्रिया बड़बड़ाने लगी- और चूसो ओअओअ और जोर से, हाँ ऐसेएएए ही चूसो बहुतऽऽऽ मज़ाऽऽ आऽऽऽ रहाऽऽ है सर ! मेरा काम होने वालाऽऽऽ है और और जोर से यससस ओ यस ई ई ईऽऽ आ ऽऽऽ।
प्रिया की चूत ने पानी छोड़ दिया जिसे मैं अपनी जीभ से चाटने लगा।
चूत को पूरी तरह से चाट कर मैं खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लण्ड तन कर फ़टने जैसा हो रहा था जिसे मैंने प्रिया के मुँह में डाल दिया और उसे चूसने को बोला, लेकिन लण्ड का आकार बड़ा होने के कारण उसको मुँह में लेने में कठिनाई हो रही थी।
वो अपनी जीभ से मेरे लण्द का सुपाड़ा चाट रही थी।
थोड़ी देर बाद मैंने अपना लण्ड ज़बरन उसके मुँह में पेल दिया और आगे पीछे करते हुए उसके मुँह को चोदने लगा।
उसके मुँह से घुटी घुटी आवाज़ें आ रही थी और उसकी आंखों में आँसू आ गए। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड उसके मुँह से निकाल कर, उसे ज़मीन पर लिटा कर। उसकी टांगें चौड़ी करके उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपाड़ा प्रिया की चूत को फ़ाड़ता हुआ अन्दर चला गया।
लण्ड के अन्दर जाते ही प्रिया के मुँह से चीख निकल गई और चूत से खून टपकने लगा।
वो अपने हाथ पाँव पटकने लगी और मुझे अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन मैंने उसे कस कर पकड़ा था।
वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी- प्लीज़ सर मुझे छोड़ दीजिए, मैं मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है !
मैंने कहा- पहली बार में ऐसा होता है, तुम चिन्ता मत करो, एक बार अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा। फ़िर मैंने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया।
प्रिया तड़पने लगी। मैं उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे प्रिया की तकलीफ़ कुछ कम हुई।
अब मैंने जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड अन्दर कर दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा।
थोड़ी देर में प्रिया भी नीचे से अपनी कमर उचका कर मेरे धक्कों का ज़वाब देने लगी और मज़े में बोलने लगी- सी … सी… और जोररर से सरररऽऽ बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और सर और अन्दर ऽऽ जोर से चोदो फ़ाड़ दो मेरी चूत को, आज मुझे लड़की होने का मज़ा आया है, मेरा काम होने वाला है सररर्॥ और जोर से य यस यससस मैं गईई… !
इसके साथ ही प्रिया ने अपना पानी छोड़ दिया, लेकिन मेरा काम अभी नहीं हुआ था इसलिए मैं जोर जोर से प्रिया की चूत पेलने लगा।
प्रिया रोने लगी और लण्द चूत में से निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन मेरे ऊपर शराब का नशा होने के कारण उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा। करीब १०-१२ मिनट बाद मैंने भी अपना पानी प्रिया की चूत में छोड़ दिया और उसके ऊपर गिर गया।
ऐसे ही पड़े रहने के थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे और अपने कपड़े पहनने लगे।
मैंने प्रिया से पूछा कि कैसा लगा तो वो बोली- सर ! इतना मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया, सचमुच आज से मैं आपकी दीवानी बन गई हूँ, अब आप जब चाहें मुझे चोद सकते हैं।
फ़िर मैंने उसके होठों पर एक जोरदार किस किया और उसे अपने पापा को फ़ोन करने के लिए कहा, क्योंकि ज्यादा देर होने पर उसके पापा को शक हो सकता था। थोड़ी देर में वो अपने पापा के साथ चली गई।
उस दिन मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरे मन की इच्छा पूरी हो गई थी। उसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मैं और प्रिया जम कर चुदाई का खेल खेलते। Antarvasna
आपको मेरी कहानी कैसी लगी ?
मेरा नाम हार्दिक है और मैं 20 साल का थोड़ा सीधा और थोड़ा टेड़ा किस का लड़का हूँ.
मैं उत्तर प्रदेश में रहने वाली एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ.
मेरा रंग हल्का सांवला सा है और मेरी हाइट 5 फीट 11 इंच है. लड़कियों को खास तौर पर बताना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य से बड़ा है.
बनाने वाले का मैं बस इसी चीज़ के लिए शुक्रिया करता हूँ कि उन्होंने मुझे एक अच्छा ख़ासा लंड दिया है.
मैं बी.कॉम. के अंतिम वर्ष का छात्र हूँ. मैं रोजाना जिम जाता हूँ तो मेरी बॉडी भी फिट है और मुझ पर एक दो लड़कियां भी मरती हैं, पर मैं फिर भी सबको यही बताता हूँ कि मैं सिंगल हूँ.
यह टीचर लव की कहानी की घटना उस साल की है जब मैं अपने स्नातक के दूसरे साल में था.
जब मैंने कॉलेज में बी.कॉम. में एड्मिशन लिया था तो उस समय कॉलेज में मेरा एक भी दोस्त नहीं था.
फिर मेरा कॉलेज शुरू हुआ, तो मैं पहले दिन क्लास में गया.
हमारे लेक्चर शुरू हुए.
मेरी क्लास में कुछ स्टूडेंट्स से बात भी हुई. उस दिन अपने आखिरी लेक्चर से मुझे कॉलेज से प्यार सा हो गया.
वो हमारा अकाउंट्स का लेक्चर था और हम सब सोच रहे थे कि पता नहीं अब कौन सा खड़ूस टीचर आएगा.
लेकिन जब लेक्चर शुरू हुआ तो हमारी क्लास में एक सुंदर, गोरी चिट्टी, नैन नक्स … एकदम झकास माल जैसी एक लेडी आईं … या यूं बोलूँ कि लड़की आई.
वे हसीन लड़की हमारी अकाउंट्स की टीचर थीं, जिनको देख कर मैं तो हक्का-बक्का रह गया क्योंकि इतना मस्त माल मैंने शायद ही कभी देखा था.
एक तो वो बिल्कुल दूध सी गोरी चिट्टी, ऊपर से उनके नैन नक्श इतने मस्त कि क्या ही खून.
उनकी उम्र भी 28 साल की थी, जो मुझे बाद में पता लगी थी.
मेम का 34-30-36 का साइज़ एकदम पर्फेक्ट था.
उनके तने हुए दूध और उठी हुई गांड देखते ही बन रही थी.
जब मैम क्लास में चल रही थीं तो उनकी हाई हील के कारण उनके मम्मे और चूतड़ कहर ढा रहे थे.
उस दिन उन्होंने क्रीम कलर की साड़ी एकदम चुस्त सी बांधी हुई थी जिसमें उनके बूब्स की झलक और कमर साफ दिख रही थी.
जब वो क्लास में आईं तो उन्हें देख कर मेरा तो मुँह खुला ही रह गया था.
फिर वो अन्दर आईं और ये नसीब की बात थी कि उनकी पहली नजर मेरे ऊपर ही पड़ी और उन्होंने मेरे खुले हुए मुँह और पथराई हुई आंखों को देख कर एक बहुत ही छिपी हुई कातिलाना मुस्कान दी और सामान्य हो गईं.
मैंने उनको आफ्टरनून विश किया.
उनका नाम पल्लवी था.
उन्होंने लेक्चर लिया और चली गईं, पर मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आया.
मुझे क्या, पूरी क्लास के लड़कों को कुछ समझ नहीं आया.
क्योंकि किसी का ध्यान उनके रूप सौन्दर्य से हटा ही नहीं. सबके लौड़े अकड़े हुए थे.
अब हालत ये हो गई थी कि पल्लवी नामक उस शै का सारी क्लास को इंतजार रहने लगा था.
ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और एक दिन हमारी फ्रेशर पार्टी हुई, जिसमें मुझे कुछ टैलेंट दिखाने या कुछ करने को बोला गया.
मैंने अपनी बॉडी शो की, क्योंकि जिम जाने का भी तो कुछ फायदा उठना चाहिए ना!
मेरे बॉडी शो पर काफ़ी लड़कियों को मैं पसंद आया और मुझे मिस्टर फ्रेशर बना दिया गया.
उस दिन से कॉलेज में लड़कियों के झुंडों में मेरी बातें होने लगीं.
खैर … मेरा दिल तो मैम पर आ गया था या ये कहूँ कि मुझे उनको चोदना था.
मेरी लड़कियों से ज़्यादा टाइम तक नहीं बनती थी क्योंकि मैं उन पर पैसे खर्च नहीं कर सकता था … और मुझे कोई ऐसी मिली नहीं, जो कि मुझे समझे.
फ्रेशर पार्टी के अगले दिन मैम क्लास में आईं और वो लेक्चर लेने लगीं.
उस दिन उनसे मेरी थोड़ी बातें हुईं, कुछ पढ़ाई से संबंधित थीं और थोड़ी सी ऐसे ही मज़ाक वाली.
उन्होंने भी मेरे बॉडी शो को लेकर मुझसे एक दो बातें कहीं.
उन बातों से मैं सीधा सा ये मतलब निकाल सकता था कि उनके दिल ओ दिमाग में मेरी बॉडी बस गई थी.
अब उन्होंने बॉडी के किस पार्ट को ज्यादा तवज्जो दी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी.
ऐसे ही दिन निकलते गए और मेरी मैम से बातें होने लगीं.
मैं रात को अक्सर टीचर लव के कारण उनके नाम की मुट्ठ मार कर सोने लगा था.
एक दिन एक लड़के ने लेक्चर के बाद मैम से उनका नंबर मांगा, पर मैम ने बहाना बना कर कि कॉलेज वाला नंबर तो है तो पर्सनल नंबर का क्या करना, उसे मना कर दिया.
वैसे एक बात बताऊं कि हमारे कॉलेज में जो स्थायी प्रोफेसर्स हैं, उन सभी को एक नंबर दिया गया है, जो वो अपने स्टूडेंट्स को दे देते थे.
लेकिन वे उस पर रेस्पॉन्स बहुत कम करते थे, तो स्टूडेंट्स उन फोन्स पर बात ही नहीं करते थे.
फिर ऐसे ही कुछ दिनों बाद मुझे भी कुछ प्राब्लम थी.
मैंने अपनी समस्या को लेकर पहले भी मैम को काफ़ी बार मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कभी तो रिप्लाई किया, कभी नहीं.
अब मैंने थोड़ी हिम्मत की.
मेम के लेक्चर के बाद जब सब चले गए, उस वक्त मैंने मैम से उनका नंबर मांगा.
उन्होंने कहा कि नंबर है तो तुम्हारे पास!
मैंने कहा- मेम, आप उस नंबर पर रेस्पॉन्स तो बहुत कम करती हैं … इसलिए अगर आप गलत न समझें तो …
तभी उन्होंने मेरी बात काटी और हंस कर कहा- हां तुम्हारी ये बात सही है. लो ये मेरा पर्सनल नंबर.
उन्होंने अपना नंबर मुझे दे दिया और कहा- प्लीज़ किसी और को नंबर मत देना, मुझे पसंद नहीं है कि कोई मुझे बिना मतलब के पर्सनली फोन करे.
मैंने उनको ओके बोला और साथ ही थैंक्स भी कहा और अपने घर आ गया.
मैंने उनको एक दो दिन बाद एक सवाल पूछने के लिए मैसेज किया.
उन्होंने तुरंत जबाव दिया.
उसके बाद से मैम से मेरी लगातार बात होने लगी.
अब तो क्लास में भी मेरी उनसे थोड़ी ज़्यादा बातें होने लगी थीं और वो क्लास में मेरे अलावा किसी ओर से इतनी बातें नहीं करती थीं.
मैं तो उनकी क्लास में अब कभी कभी फोन भी चला लेता था, पर वो मुझे कुछ नहीं बोलती थीं.
ऐसे ही मैंने उनको एक दिन व्हाट्सैप पर कुछ जोक सेंड किए.
तभी उनका मैसेज आया- थोड़ा पढ़ लो हार्दिक … ये नंबर मैंने तुम्हें क्वेस्चन पूछने के लिए दिया था और ये सब क्या है?
मैंने उनको सॉरी लिखा.
उन्होंने रिप्लाई किया- अरे बुद्धू, मज़ाक कर रही हूँ.
अब मेरी उनसे पढ़ाई से अलग भी बातें होने लगीं.
एक दिन उन्होंने मुझे कुछ काम बताया.
मैंने उसी समय उनका वो काम कर दिया.
उनको मुझ पर थोड़ा ज़्यादा ट्रस्ट हो गया था.
कुछ दिनों बाद हमारे एग्जाम आ गए.
इंटर्नल एग्जाम तो हो गए थे, अब फर्स्ट ईयर के फाइनल एग्जाम थे.
वैसे मैं पढ़ाई में एक सामान्य स्टूडेंट वर्ग से ही हूँ, जिनके 65-70% ही नंबर आते हैं.
फिर मेरे एग्जाम खत्म हुए और कॉलेज की भी छुट्टियां हो गईं.
उस वक्त बड़ा कठिन हो गया.
अब मेरा मन घर पर तो लगता नहीं था इसलिए मैं बाहर ही घूमता फिरता रहता या अपने रूम में सोता रहता.
जब तब मैं पल्लवी मैम से भी मैसेज पर बात कर लिया करता.
मैंने अब तक उनसे एक दो बार ही कॉल पर भी बात की थी, वो भी ये बहाना बना कर कि मुझे थोड़ी रिज़ल्ट की टेंशन हो रही है.
उन्होंने मुझे थोड़ा समझाया.
फिर रिज़ल्ट भी आ गया और मेरे 70% नंबर आए.
मेरी फैमिली मुझसे पढ़ाई को लेकर नाराज़ रहती थी कि तू कुछ पढ़ ले और अच्छा आदमी बन जा, जिससे हमारी कंडीशन जैसी है … तेरी तो ना रहे.
मैं भी काफ़ी कोशिश करता लेकिन मेरा मन पढ़ाई में ज़्यादा नहीं लगता था क्योंकि मुझे इंजीनियरिंग करनी थी लेकिन पैसों की वजह से मेरा एड्मिशन नहीं हुआ था तो मैंने बी.कॉम कर ली.
जबकि मुझे अकाउंट्स कुछ ख़ास पसंद नहीं है.
मैं तो बस मैम की वजह से अकाउंट्स के लेक्चर अटेंड करता था.
अब हमारी दोबारा क्लास शुरू हुई और मैंने फिर से कॉलेज जाना शुरू किया.
पल्लवी मैम अब हमारा दूसरा लेक्चर लेती थीं.
अब यह हो गया था कि क्लास में मैं मैम से मज़ाक कर लेता था और वे भी मुझसे मज़ाक कर लिया करती थीं.
वे मुझे कभी भी अपने काम से भेज दिया करती थीं.
एक दिन मैम ने सुबह सुबह मुझे कॉल किया और उन्होंने कहा- हार्दिक अगर तुमको कोई प्राब्लम ना हो, तो तुम मुझे घर से पिक कर सकते हो. वो आज मेरी स्कूटी खराब हो गई है.
मैंने उनको झट से कहा- ओके मैम, मैं आ जाता हूँ.
उन्होंने मुझे घर की लोकेशन भेजी और मैं वहां चला गया.
उनका घर एक बड़ी सोसाइटी में था जहां से रिक्शे मिलने मुश्किल रहते थे और उनकी कार भी काफ़ी दिनों से बंद पड़ी थी.
जब मैं उनके घर पहुंचा, तो देखा कि उनका घर बाहर से काफ़ी अच्छा और सुंदर है. उससे ये पता चल रहा था कि वो काफ़ी धनी हैं.
हों भी क्यों ना यार … आखिर वो एक प्रोफेसर हैं. उनकी सैलरी अच्छी खासी है.
मैंने उनको कॉल की.
वे बाहर आईं.
आज उन्होंने कुर्ती पहनी हुई थी.
वे मेरे पीछे बैठ गईं.
यहां से कॉलेज भी अच्छा ख़ासा दूर था.
तभी मैंने उनसे बातें करनी शुरू कर दीं.
बातों ही बातों में मैंने कहा- मैम आप तो काफ़ी रिच हैं!
वो बोलीं- अच्छा जी … तुमको ऐसा क्यों लगता है?
मैंने कहा- सब दिखता है मेम, आपका इतना बड़ा घर है … और आप प्रोफेसर हो, तो आपकी सेलरी भी अच्छी ख़ासी आती होगी!
उन्होंने कहा- हां, बात तो तुम्हारी सही है.
मैंने पूछा कि मैम आप बुरा ना माने, तो एक बात पूछ सकता हूँ?
वो बोलीं- हां जी बोलिए.
मैंने पूछा कि आपकी सेलरी कितनी है?
उन्होंने पूछा- क्यों, इसका क्या मतलब है?
मैंने कहा- मुझे बिना मतलब की बातें पूछना अच्छा लगता है. मुझे ये जानना है कि प्रोफेसर्स कितना कमाते हैं.
वो बोलीं- ओके मुझे लगभग 2 लाख रूपए महीने मिलते हैं.
मैं सोच में पड़ गया कि वाउ ये कितना ज्यादा कमाती हैं.
मैंने कहा- मगर मैम आप तो बिल्कुल सिंपल रहती हैं.
उन्होंने कहा- हां तो क्या हुआ हार्दिक, मुझे सिंपल रहना पसंद है … और वैसे भी सिंपल रहने में कोई बुराई थोड़े ही है.
मैंने उनसे पूछा- मैम और आपके हज़्बेंड मेरा मतलब सर क्या करते हैं?
वो बोलीं- वे एक कंपनी में जॉब करते हैं और उधर वे काफ़ी अच्छी पोस्ट पर हैं.
मैं बोला- मैम, आपकी लाइफ इतनी अच्छी है. आप इतनी रिच हो.
इस पर उन्होंने कहा कि रिच होना ही सब कुछ नहीं होता … तुम मेरा दुख नहीं समझोगे.
ये कह कर वो थोड़ा दुखी हो गईं.
उनका मूड ऑफ हो गया और उनकी आंखों में पानी आ गया था.
मैं अभी कुछ और बोलता कि तब तक हमारा कॉलेज आ गया और वे चुपचाप बाइक से उतर कर अन्दर चली गईं.
और मैं भी अपनी क्लास में चला गया.
मैं यही सोचता रहा कि मेरी वजह से मैम दुखी हो गईं.
मगर ऐसी क्या बात है, जिससे उन्हें दुख है.
मैं सोचता रहा और कुछ भी न जान सका.
फिर मैंने मैम का लेक्चर अटेंड किया.
उस वक्त वे कुछ ठीक लग रही थीं. उनका मूड भी सही था.
लेक्चर खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुम चले जाना, मैं खुद चली जाऊँगी, मुझको थोड़ा टाइम लगेगा.
मैंने कहा- तो क्या हुआ मेम, मैं वेट कर लूँगा आपका.
वो बोलीं- मुझे आधा घंटा लगेगा!
मैंने कहा- हां कोई दिक्कत नहीं है मेम, मैं बाहर आपका वेट कर रहा हूँ. आप मुझे कॉल कर देना.
उन्होंने हम्म कह कर सर हिला दिया और मैं क्लास के अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया.
मैं पार्किंग एरिया में रुक गया और मेरे दोस्त चले गए.
करीब चालीस मिनट बाद मैम की कॉल आई कि वे बाहर आ रही हैं.
मैंने पार्किंग से बाइक निकाली और उनको पिक किया.
उन्होंने मुझसे कहा- थोड़ा ज्यादा देरी हो गई … सॉरी.
मैंने उनसे कहा- तो क्या हुआ मेम. वैसे तो सॉरी मुझे बोलना चाहिए आपको.
वो बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि मैम आपका सुबह मेरी वजह से मूड ऑफ हो गया था, उसके लिए सॉरी!
वो बोलीं- नहीं कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.
मैं फिर से बोला- अगर आपको बुरा ना लगे, तो आप मुझसे अपनी बात शेयर कर सकती हैं. वैसे आपका मूड एकदम से क्यों ऑफ हो गया था?
उन्होंने मुझे बताया कि तुम सुबह बोल रहे थे ना कि मैं रिच हूँ. चलो तुमको बताती हूँ.
मैं उनकी बात सुनने के लिए कान उनकी तरफ लगाने लगा.
वे बोलीं- केवल रिच होने से कुछ नहीं होता. मैं एक प्रोफेसर हूँ और अभी तो 28 साल की हूँ. अभी तो पूरी लाइफ सामने पड़ी है. सोचो मैं कितने रुपए कमा सकती हूँ. मेरी अभी की सेलरी ही 2 लाख+ है … और साथ ही मैंने काफ़ी सारी इनवेस्टमेंट कर रखी है, जिससे मेरी हर महीने की टोटल इनकम मतलब सेलरी और इनवेस्टमेंट आदि मिला कर 3 लाख से ज़्यादा हो जाती है.
मैम बोली- और तुम सर के बारे में पूछ रहे थे ना. मैंने तुमको बताया था कि वे एक कंपनी में काम करते हैं. वे यहां से काफ़ी दूर रहते हैं … मुंबई में! और उनकी सेलरी ही 7-8 लाख रुपए महीने की है, जिसमें से वो 2 लाख रुपए हर महीने मुझे भेजते हैं. उनको लगता है कि मैं अकेली लाइफ में कुछ नहीं कर सकती हूँ. इसीलिए मैंने उनको नहीं बताया कि मैं प्रोफेसर बन गई हूँ. इसी बात को लेकर हमारी काफ़ी लड़ाई भी हुई क्योंकि उनको मेरा जॉब करना पसंद नहीं आया है. उनको उनकी बॉस मुझसे ज़्यादा पसंद हैं और यह बात मुझे पता लग गई थी. तभी मुझे तुम्हारे कॉलेज से ऑफर आया था तो मैं यहां शिफ्ट हो गई.
वे आगे बोलती रही- अब तुम ही बताओ कि मेरे पास हर महीने 5 लाख रुपए हो जाते हैं … पर मैं उन रुपयों का क्या करूँ! रहती तो अकेली ही हूँ ना, यहां तो कोई नहीं है मेरा … और अब तो मेरा उनके पास जाने का भी मन नहीं करता. पहले सोचा था कि वहीं शिफ्ट हो जाऊँ, पर फिर पता चला कि उनका उनकी बॉस से भी कुछ चक्कर है और उनको हमेशा यही लगता है कि मैं कुछ नहीं कर सकती, तो मैं वहां नहीं गई. मैंने उनको पैसे भेजने को भी मना कर दिया था कि मैं अपना खुद खर्चा उठा सकती हूँ. तभी वो बोले कि मैं सक्षम के लिए (उनका 5 साल का बेटा) के लिए भेज रहा हूँ. इनको रख लो. अब तुम ही बताओ कि इतने पैसों का मैं क्या करूँ … जब खुशी ही ना हो.
ये सब बता कर मैम फिर से अपसैट हो गईं.
मैंने उनसे कहा- सॉरी मैम मुझे ये सब नहीं पता था … लेकिन आप टेंशन मत लो, मैं हूँ ना. आपको कभी भी कुछ भी काम हो, मुझको याद करना, मैं फट से वैसे हाजिर हो जाऊंगा, जैसे चिराग से जिन निकलता है.
वे मेरी इस बात पर हंस पड़ीं.
उसी वक्त मैंने अचानक से बाइक रोकी, जिससे वो मेरी पीठ पर गिर गईं और उनका एक मम्मा मुझे मेरी पीठ पर अच्छे से रगड़ता हुआ सा महसूस हुआ.
मेरे दिल में उसी वक्त मैम के उस दूध को पकड़ कर मींजने का दिल किया मगर ये जल्दबाजी होती.
यह बात आज से 1 साल पुरानी है Sex Stories जब हमारे मकान में एक किरायदार रहने के लिए आए थे। में उन्हें भैया और भाभी कहता था। धीरे धीरे उनसे अच्छे सम्बंध बनते गये और मैं उनके करीब पहुंचता गया।
भाभी का पति तो ज़्यादातर तौर पर बाहर ही रहता था। एक दिन यूँ हुआ कि भाभी के पति गये हुए थे और मेरे घर वाले भी आउट ऑफ मुंबई गये थे और कमरे की चाबी भाभी को दे गये, मुझे घरवालो ने फोन कर के बता दिया था की चाबी भाभी के पास है।
मैं घर पे आया और सीधा भाभी के कमरे की बेल बजाई तो भाभी निकली उस वक़्त उन्होंने क्रीम रंग का गहरे गले सूट पहन रखा था और सिर पे दुपट्टा भी नहीं था। वैसे भाभी का फिगर 36 32 36 होगा, ब्रा इतनी टाइट पहन रखी थी कि मुमे बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे थे।
मैंने कहा- भाभी चाबी चाहिए!
तो भाभी ने कहा- अंदर आ जाओ! मैं चाबी लाती हूं!
इत्तफ़ाक़ से क्या हुआ कि भाभी चाबी रख कर भूल गई. भाभी थोड़ी देर बाद आई और मुझसे कहा कि चाबी तो पता नहीं कहाँ रख कर भूल गई मैं?
मैंने कहा- भाभी, चाबी तो चाहिए… नहीं तो मैं रात को कहाँ पर लेटूंगा?
तो भाभी ने कहा की ठीक है, मैं और अच्छी तरह से एक बार और देख लूँगी। यह कह कर वो सोफे पर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी और फ़्रिज़ में से पेप्सी निकाल कर ले आई। मुझे भाभी ने पेप्सी दी लेकिन खुद नहीं ली।
इस पे मैंने कहा- आप भी लो।
भाभी ने कहा की नहीं मैं नहीं लूँगी मेरे सर में दर्द हो रहा है सुबह से.
तो मैं भाभी के पास उठ कर गया और मैंने कहा कि मैं आपका सर दबा देता हूं भाभी!
वो मना करने लगी कि नहीं तुम तक़लीफ़ मत करो मैं दवाई ले लूँगी तो मैंने कहा- भाभी क्या मुझे इतना भी हक़ नहीं है कि मैं आपका सर दबा सकूं?
मेरे जोर देने पर भाभी मान गई. मैं सोफे पर चढ़ कर भाभी का सर इस अंदाज़ से दबा रहा था कि भाभी की रीड की हड्डी मेरे लंड से छू रही थी।
मेरा लंड भाभी के स्पर्श से ही फ़नफना गया और ऊपर से भाभी के कमीज़ का गला गहरा था जिसके कारण उनकी चूची ऊपर से साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं धीरे धीरे सर दबा रहा था। भाभी मदहोश सी होती जा रही थी।
फिर क्या था मैंने भाभी को अपनी आगोश में ले लिया और वहीं सोफे पर लेट गया तो भाभी ने एकदम से उठ कर कहा कि यह क्या कर रहे हो?
तो मैंने भाभी से कहा कि भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं आपसे बहुत बहुत प्यार करता हूं, तो भाभी ने इतरा कर कहा कि वाह जी वाह! बड़ा आया प्यार करने वाला प्यार करने वाले इतनी देर नहीं लगाते हैं!
मैंने जो देखा तो भाभी की सलवार नीचे खुली पड़ी थी। मुझे ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं लग गया अपने काम पर।
पहले तो मैंने भाभी के होंठों को चूस चूस कर लाल कर दिया फिर उसके बाद मैंने कहा भाभी से कि भाभी! कभी लंड का भी स्वाद चखा है तुमने?
तो कहने लगी- छी! मुझे तो घिन आती है!
मैंने कहा- घिन किस बात की? अरे यह तो बाहर के देशों में खूब जम के होता है वो लोग तो पहले लंड ही चूसाते हैं और अगर बिना लंड चूसाए वो चोदेंगे तो उनका खड़ा ही नहीं होगा।
तो भाभी ने कहा- जैसे भी हो मैं नहीं चूसूंगी!
मैंने कहा- ठीक है आज नहीं तो कल पता चलेगा इसके ज़ायके का!
तो मैं खड़ा हुआ। लंड तो खड़ा ही था, मैंने अपनी पैन्ट खोली, लंड निकाला, मेरा लंड तकरीबन 6 इंच लंबा है और 2.5 इंच मोटा है भाभी मेरा लंड देख कर चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कुराहट ला कर बोली तुम्हारा लंड तो बहुत तगड़ा है!
मैंने कहा- अरे खाते पीते घर का है ऐसे वैसे थोड़ी ना है!
मैं भाभी के पास जा कर खड़ा हो गया और भाभी भी खड़ी थी। मैंने खड़े ही खड़े भाभी की चूत पर हाथ फेरा और भाभी इतनी उतावली थी कि उसने आव देखा ना ताव, फटाफट लंड को अपनी चूत में डालने के लिए कहने लगी।
मैं खड़े खड़े ही उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा था मगर मेरी कोशिश नाकाम हो गई। वहीं एक कुर्सी रखी थी। मैं कुर्सी पर बैठ गया। मैंने कहा भाभी से कि अब आओ मेरे ऊपर, तो भाभी एकदम मेरे पास आ कर मेरे लंड पर बैठ गई और अपनी गांड हिलाने लगी।
थोड़ी देर बाद मेरे झड़ने का टाइम आया तो मुझे याद आया कि भाभी ने कहा था कि अन्दर मत झड़ना दिक्कत हो जाएगी मैंने झट से अपना लंड चूत में से निकाला और दीवार पर पिचकारी छोड़ दी।
उस दिन भाभी और मैंने जम कर 5 बार चुदाई की। यह सिलसिला 4 महीने तक चलता रहा।
जब भी मुझे और भाभी को मौका मिलता हम लोग जम के चुदाई करते थे। मगर 2 महीने पहले भाभी ने अपना घर बदल लिया क्योंकि उनके पति को गाड़ी पार्क करने की दिक्कत थी। उन्होंने ऐसी जगह घर ले लिया जहा पार्किंग का हिसाब ठीक था।
अब 15 20 दिन मे एक-आध बार चुदाई का मौका मिलता है तो हम लोग काम कर लेते है नहीं तो वो अपने घर में अपने घर!
मेरी अपनी राय यह है औरतो के बारे में कि औरत के कभी भी साथ सेक्स करो तो उन्हें पूरी तरह नंगा मत करो क्योंकि नंगी औरत कभी भी अच्छी नहीं लगती एक परदा होना चाहिए जो सेक्स को बढ़ाए!
जैसे मैंने जब भी भाभी की चूत मारी मैंने कभी भी उनके पूरे कपड़े नहीं उतारे कभी उनको ब्रा में चोदा कभी सूट पहने ही पहने सूट को उपर करके उनके चूचियों को चूसा। कभी साड़ी का पेटीकोट उपर करके चूत मारी।
सबसे ज़्यादा मज़ा आता है साड़ी में चूत मारने का! साड़ी को उतारो, पेटीकोट के नीचे से पेंटी को उतारो, पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर खड़े खड़े चूत मारो, गोदी में उठा कर चूत मारो, कितना आनंद आएगा!
यह मेरा एक्सपीरियेन्स है, बाकी किसको कैसे लगा? Sex Stories
दोस्तो, मैं हाज़िर हूँ एक नई Hindi Porn Stories और दिलचस्प कहानी लेकर जो मेरे दोस्त और उसकी गर्लफ्रेंड की है और एक ब्लू सीडी की है जो उन दोनों पर बनाई गई।
बात उन दिनों की है जब मैं भुवनेश्वर में रह कर अपनी पढ़ाई कर रहा था। मेरा एक दोस्त था समीर ! वो देखने में उतना ख़ास नहीं था पर लड़कियाँ पटा कर चोदने में उस्ताद था। वो हर वक्त इसी फिराक में रहता कि कैसे कोई लड़की पटे और उसको नई चूत चोदने के लिए मिल जाए। वो लड़की पटाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।
जब हमारा बी.एस.सी का अन्तिम वर्ष था तब एक नई लड़की हमारी ही क्लास में आई। उसके पिताजी का तबादला हमारे शहर में हो गया था। उसका नाम था श्रीजा। श्रीजा देखने में थी बला की खूबसूरत ! गोरा रंग, उस पर लंबे काले बाल, बाएँ गाल पर डिम्पल और होंठों के दाईं ओर एक छोटा सा तिल। फिगर ऐसा कि कोई मॉडल भी शरमा जाए। वो एक गजब की गायिका भी थी। वो कई सारे एल्बम में गा चुकी थी।
जिस दिन से उसको समीर ने देखा, उसी दिन से उसको चोदने के सपने देखने लगा। कई बार उसने मुझे भी अपने सपनों के बारे में बताया कि कैसे उसने श्रीजा को जमकर चोदा सपने में।
उसके बाद उसने श्रीजा के आगे पीछे घूमना शुरु कर दिया। श्रीजा तो पहले पहले किसी भी लड़के को भाव नहीं देती थी, लेकिन एक दिन अचानक समीर ने कुछ ऐसा किया कि वो उसके जाल में फंसती चली गई।
वो उसके लिए नोट्स ला देता, हमेशा उसकी कुछ ना कुछ मदद करता रहता। एक दिन तो हद ही हो गई- जब श्रीजा ने अपनी स्कूटी से एक बच्चे को ठोक दिया, तभी पास में जा रहा समीर वहाँ आकर श्रीजा का कसूर अपने सर ले गया कि स्कूटी असल में वो ही चला रहा था। उसको एक दिन जेल में बितानी पड़ी, मगर इससे उसको श्रीजा के दिल में एक ख़ास जगह मिल गई।
उसके बाद श्रीजा हफ़्ते में एक दो बार हमारे हॉस्टल में भी आने लगी। क्योंकि मैं समीर का रूममेट था इसलिए जब श्रीजा आने के लिए फ़ोन करती तो वो मुझे किसी बहाने से बाहर भेज देता। कुछ दिन बाद समीर ने श्रीजा को प्रोपोज़ कर दिया और श्रीजा मान भी गई। अब वो दोनों घंटो फ़ोन पर बातें करने लगे। अब तो समीर सिर्फ़ उसको चोदने के लिए मौके के इन्तजार में रहने लगा।
एक दिन जब श्रीजा समीर से मिलने हमारे हॉस्टल आई तो समीर ने मुझे बाहर जाकर बाहर से दरवाजा बंद कर देने को कहा और मैंने वैसा ही किया। मेरे मोबाइल पर दो घंटे बाद समीर का कॉल आया और मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
अगले एक महीने में ऐसा कई बार हुआ। तब मेरे मन में उत्सुकता बढ़ने लगी कि आख़िर ये लोग बंद कमरे में दो दो घंटे तक करते क्या हैं ?
तभी मेरे मन में एक योजना आई। मैंने मेरे एक दोस्त से एक हैन्डीकैम मांग कर अपने पास रख लिया। एक दिन जब समीर श्रीजा से फ़ोन पर बातें कर रहा था तब मुझे पता चला कि श्रीजा आज हॉस्टल आने वाली है। मैंने मौका मिलते ही समीर से छुपाते हुए कैम को सेट कर दिया जिससे कि समीर का बेड पूरा उस पर रिकॉर्ड हो सके। और उसे ऑन करके इन्तजार करने लगा।
कुछ देर बाद श्रीजा आई और पहले की तरह मैं बाहर चला गया और दरवाजा बाहर से बंद कर दिया।
करीब ढाई घंटे बाद समीर का कॉल आया, मैंने दरवाजा खोल दिया और श्रीजा चली गई।
कुछ देर बाद समीर भी उठा और कहीं घूमने चला गया। तब मैंने कैम निकाला और उस पर जो रिकॉर्ड हुआ था उसे देखते ही दंग रह गया।
श्रीजा उस दिन बला की सुंदर लग रही थी, काले रंग के टॉप पर टाइट जींस गजब ढा रहे थे। उसका गोरा बदन जैसे कि कोई सफ़ेद मोती धूप में रखा हो। उसके गुलाबी लब जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ सुबह की ओस में भीगे हुई ! उसके गोरे रंग पर काले घने बाल क़यामत लग रहे थे। उसके कसे टॉप से उसके स्तन झाँक रहे थे जैसे दो पहाड़ियों के बीच में एक खाई हो।
श्रीजा को पहले समीर ने बेड पर बिठाया और कुछ स्नैक्स खाने के लिए दिए। फिर पानी दिया। उसके बाद समीर उसकी पीठ की तरफ़ आ गया और पीछे से ही गले पर चूमने लगा। श्रीजा थोड़ी अंगडाईयाँ लेने लगी। फिर समीर ने उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और उसके लबों पर अपने होंठ सटा लिए। श्रीजा ने अपने आँखें बंद कर ली और जोर-जोर से सांसें लेने लगी। इसी बीच समीर ने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पर रखा जो कि संगमरमर की तरह लग रहा था।
फिर हाथ सरकाते हुए वो उसके वक्ष तक पहुँच गया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही स्तन दबाने लगा। श्रीजा सिसकारियाँ भरने लगी।
फिर समीर ने उसके चेहरे को हर जगह चूमा-चाटा। कुछ देर बाद उसने अपने होंठ उसके गले की तरफ़ सरकाए और धीरे से बोबों के उभारों को चाटने लगा। फिर उसने अपना शर्ट उतार दिया और श्रीजा का भी टॉप ऊपर से खींच कर निकाल दिया। श्रीजा के स्तन ब्रा के बंधन में जकड़े हुए आजाद होने का इन्तजार करते हुए से लग रहे थे। फिर समीर ब्रा के ऊपर से ही उसके वक्ष को मसलता रहा और श्रीजा सिसकारियाँ लेती रही।
कुछ देर बाद समीर ने उसकी पीठ की तरफ़ हाथ लेजाते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
श्रीजा की चूचियाँ आजाद होकर झूम उठी। वो न तो बड़ी, न ही छोटी, सही आकार की और बिल्कुल ही मक्खन की तरह लग रही थी। बीच में गोलाकार चुचूक थे जो कि भूरे रंग के थे। श्रीजा के चुचूक ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनमें से मधु निकल रहा हो और उसे पीने के लिए किसी का भी मन मचल उठे।
फिर समीर ने उन नाजुक बोबों को अपने दोनों हाथों में लिया और मसलने लगा। उसके हाथों की जकड़न से बोबे के आकार कई तरह से बदल रहे थे। श्रीजा इसी बीच जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी। वो समीर के बालों में अपने हाथ फेरते हुए उसके चेहरे को अपने मोमों में दबा रही थी।
तभी समीर ने अपने हाथ नीचे सरकाए और श्रीजा की जींस की चैन खोलने लगा और कुछ ही देर में वो श्रीजा को सिर्फ़ पैंटी में ले आया। श्रीजा का गदराया बदन किसी अप्सरा सा लग रहा था। जी कर रहा थी कि तभी उसको अपनी बाँहों में भर लूँ।
श्रीजा ने समीर का लंड जींस के ऊपर से ही सहलाना चालू कर दिया था। समीर का लंड जींस को फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था।
समीर ने फिर अपनी जींस खोल दी और अंडरवियर भी निकाल फेंका। उसका 6″ का लंड अब पूरे दम से खड़ा था। समीर ने अब श्रीजा की पैंटी भी उतार फेंकी। श्रीजा की चूत एक नन्हे गुलाब सी कोमल और रस से भरी हुई सी लग रही थी। वो दोनों अब एक दूसरे में समाने के लिए पूरी तरह से तयार थे।
तभी समीर नीचे सरक गया और श्रीजा के चूत में एक गहरा चुम्बन लिया। श्रीजा का पूरा बदन झूम उठा। फिर समीर ने अपने उंगली से श्रीजा की चूत को बहुत सहलाया और काफी देर तक दुलारता रहा। श्रीजा तो जैसे इस दुनिया में ना होकर किसी और ही दुनिया में चली गई थी।
समीर श्रीजा के सारे बदन को चूमता जा रहा था और श्रीजा उसके बालों को सहलाती जा रही थी।
श्रीजा जोर जोर से सिसकारियाँ भर रही थी और समीर उसके एक बोबे को चूमता और दूसरे को हाथ से पुचकार रहा था। उसके बाद श्रीजा का धीरज जवाब दे गया और उसने अपनी दोनों टांगों को फ़ैला कर समीर के लिए जन्नत का रास्ता खोल दिया और बोलने लगी- जानू, अब तो मेरे अन्दर समां जाओ जल्दी ! मैं और इन्तजार नहीं कर पाऊंगी !
समीर तब पूरी तरह से श्रीजा के ऊपर आ गया। अपना 7″ का लंड श्रीजा की चूत के ऊपर रखा और धीरे से धक्का दिया तो लंड धीरे धीरे अन्दर जाने लगा। श्रीजा के मुँह से आःह निकल पड़ी। फिर वो अपना लंड धीरे धीरे अन्दर- बाहर करने लगा। बीच-बीच में बोबों को चूम लेता और चूस लेता। कभी कभी लबों को चूम लेता। कुछ देर बाद समीर ने अपनी गति बढ़ाई और जोर जोर से चोदने लगा। श्रीजा अपने कमर को जुम्बिश देती समीर का भरपूर साथ देने लगी। करीब आधे घंटे बाद समीर और तेजी से चोदने लगा फिर अचानक अपना लंड निकाल के श्रीजा के पेट पर सारा माल गिरा दिया। फिर करीब पाँच मिनट तक वो दोनों चूमा-चाटी करते रहे।
फिर समीर उठा और एक कपड़े से श्रीजा के पेट से सारा माल पौंछ डाला। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए।
इस वीडियो को मैंने एक सीडी में उतार लिया और हैंडीकैम अपने दोस्त को लौटा दिया।
तब से हर वक्त श्रीजा का गदराया बदन मेरे सामने नाचता रहता। मैं भी श्रीजा को चोदने के सपने देखने लगा।
इस कहानी का अगला भाग शीघ्र ही अन्तर्वासना डॉट कॉम पर प्रकाशित होगा। Hindi Porn Stories
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