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Massage Girl in Kachchh: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Kachchh who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Kachchh that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Kachchh massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Kachchh who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Kachchh massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Kachchh massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Kachchh who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Kachchh employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Kachchh helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Kachchh

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Kachchh at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

हाय दोस्तो! कैसे हो! Sex Stories

आप लोगों ने याद किया और मैं Sex Stories हाज़िर हो गया आप लोगों के लिए फिर से एक नया अनुभव लेकर!

दोस्तो, फिर एक नया अहसास, सेक्स से भरा, मज़े से भरा और साथ ही ढेर सारी मस्ती, जो मैंने महसूस की वही मस्ती लेकार आया हूँ आप सभी के लिए!

कसम खुदा की क्या वो हसीं सूरत थी,

चढ़ती उसके हुस्न पे जवानी की मस्ती थी,

छलक गया यौवन उसकी नज़र से वो कातिल,

कि जिसमें डूब गई मेरी जवानी की कश्ती थी!

दोस्तो, अबकी बार मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ राजस्थान घूमने गया था।
जाते वक़्त हम भरतपुर से होकर गुजरे थे तो सभी ने योजना बनाई कि भरतपुर पक्षी अभयारण्य देख कर ही आगे जायेंगे।
इसलिए हम लोगों ने टिकेट लिए और अंदर चले गए।

अभयारण्य का दायरा कई किलोमीटर में फैला हुआ था।
चलते चलते हमारा ग्रुप बिखर गया और मोबाइल से हम एक दूसरे के संपर्क में रहे।

मज़े की बात, मैं अपने ग्रुप से अकेला अलग हो गया। काफी दूर चलकर एक परिवार के कुछ लोग वहां से निकले, वो अलग साइकलों पर थे।
वहां घूमने के लिए साईकलें मिलती हैं। उन लोगों में से एक लड़की पीछे रह गई।

मैंने देखा उसकी साईकल के पैडल फ्री हो गए थे। वो थोड़ी आगे तक बढ़ी और रुक कर चेन को देखने लगी।
इतने में उसका फॅमिली परिवार आगे निकल गया।

मैं पास से गुजरा तो उसने कहा- अगर आप को बुरा न लगे तो कृपया मेरी साईकल की चेन लगा दोगे?

मैंने उसे एक नज़र भर देखा तो देखता ही रह गया! हुस्न इतना कातिल कि किसी को फनाह करने के लिए किसी और चीज़ कि जरूरत ही न पड़े!

नीली जींस उस पर लाल टॉप!

माशा अल्लाह! शरीर का हर एक अंग अलग अलग दिखाई दे रहा था। टॉप के ऊपर के खुले बटन मानो उसकी छुपती खूबसूरती को बेशर्मी से जग-जाहिर कर रहे थे। गोरे से चेहरे पर ऊपर से ढलते हुए सुनहले बाल उसके हुस्न की बिजली को मेरे अंग अंग पे गिरा रहे थे। कमर इतनी नाजुक कि अगर जोर से पकड़ लूँ तो लचक जाये, बिलकुल हल्की फुल्की! लेकिन एक उत्तम बदन की मलिका!

खैर मैंने अपनी हसरतों को काबू किया और बिना कुछ बोले उसकी चेन लगा दी हाथ चेन पर और नज़र उस हुस्न की परी पे!

और इसी गुस्ताखी में दब गई मेरी ऊँगली चेन में। ऊँगली में मामूली सी चोट लगी थी, थोड़ा सा खून निकल आया, मैंने सोचा अब फ़िल्मी स्टाइल में ये दुपट्टा फाड़ेगी और मेरी ऊँगली पर बांधेगी, लेकिन यहाँ तो सीन ही उल्टा हो गया, उंगली से खून बहता देख कर वो तो गश खाकर बेहोश हो गई। वो गिरने लगी तो मैंने सीधे ही उसे अपनी बाँहों में ले लिया।

हमने तो खुदा से माँगा कि

उसके हाथों का छूना नसीब हो जाये,

हम देख लें उसे नज़र भर के,

तेरी हम पर इतनी रहामत हो जाये,

के वो बेखौफ आ गए बाँहों में मेरी,

के न अब उनसे दूर रहा जाये!

न उनको खुद से दूर किया जाये!

वो मेरी बाँहों में बेहोश थी और मैं सर से लेकर पाँव तक उसे देखे जा रहा था। दिल में डर था कि वो होश में आते ही मुझसे दूर हो जायेगी।

लेकिन मैंने उसके गालों को छुआ और उसके चेहरे को हिला कर उसे बेहोशी से जगाया। उसने आँख खोली और मेरी बाँहों में लेटी हुई एक टक मुझे देख रही थी। उसके चेहरे पर सर्दी में भी पसीना छलक आया। मैंने अपने रूमाल से उसका चेहरा साफ़ किया। उसके गोरे गालों को छूकर मेरी उँगलियाँ मदमस्त हो रही थी।

खैर वो मेरी बाँहों से अब दूर हो गई और उसने सॉरी कहा।
उसने कहा- मेरी वजह से आप को चोट लग गई!

मैंने भी बिना सोचे समझे कह दिया- अगर मुझे चोट ना लगती तो आप को बाँहों में लेने का मौका कहाँ मिलता!

वो इस बात पर नाराज़ भी हो सकती थी लेकिन वो शरमा गई और मेरी हिम्मत बढ़ गई।

तभी उसकी मम्मी का फ़ोन आ गया, उसने अपने बेहोश होने की बात छोड़ कर बाकी सब अपनी मम्मी को बता दिया।
उसने मुझसे कहा- मेरे घर वाले आगे मेरा इंतज़ार कर रहे हैं और वो आपसे भी मिलना चाहते हैं।

मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम मधु बताया।
उसने मेरा नाम पूछा, मैंने भी अपना नाम बता दिया।

उसने कहा- अपनी उंगली दिखाओ!
मैंने कहा- रहने दो तुम बेहोश हो जाओगी।
तो उसने कहा- कोई बात नहीं तुम मुझे थाम लेना!

चलते चलते हम बात करते रहे और एक दूसरे को अपने नंबर दे दिए।

कुछ दूरी पर उसके परिवार वाले मिल गए।
उसके घर वाले बिल्कुल आजाद विचारों वाले थे। उनसे बात करके मैं अपने दोस्तों के पास जाने लगा।

जाते जाते मधु ने अपना रूमाल मेरी उंगली पे लपेट दिया।
वो रूमाल मैंने अपने दोस्तों से छुपाया, कह दिया- यार मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं यही बैठता हूँ, तुम घूम आओ!

वो लोग चले गए।
मैंने मधु को फ़ोन किया और काफी देर तक उससे बात की। वो लोग भरतपुर में ही होटल पार्क में ठहरे थे।

मैंने शाम को अपने दोस्तों से कहा- यार! मेरी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए मैं आज यहीं रुकना चाहता हूँ, तुम लोग जयपुर पहुँचो, मैं कल आकर तुमको मिलूँगा।

वो लोग वहाँ से निकल गए।

अब मैंने भी जाकर होटल पार्क रेज़िडेन्सी में एक कमरा बुक कराया।
मधु और उसका परिवार पहली मंज़िल पर थे और मैं दूसरी मंज़िल पर!

मैंने मधु को इसके बारे में बताया कि मैंने भी तुम्हारे होटल में ही कमरा ले लिया है, तो यह सुन कर मधु कुछ उत्साहित सी हो गई।
मुझे लगा शायद मधु भी यही चाहती थी।

एक बार फिर हमारी मुलाकात डिनर के समय पर हुई।
अब की बार मधु ने एक जामुनी रंग की साड़ी पहनी हुई थी। कसम से क्या कयामत थी वो उस वक्त!
और उस पर बैक-लैस ब्लाऊज़ उस कयामत को और भी भड़का रहा था।

भोजन के बाद उसके घर वालों ने मुझे फ़िर अपने साथ बुला लिया और हम सभी पार्क में टहलने लगे।

अब मैंने मौका देख कर टहलते टहलते मधु की नंगी कमर पर हाथ रख दिया।

चलते चलते मधु ठहर सी गई लेकिन कुछ ही पलों में मैं मधु से दूर हो गया।
फ़िर हम लोग अपने अपने कमरों में चले गए।

मैं बिस्तर पर था लेकिन कमबख्त नींद किस की सगी थी जो आ जाती।
मैं सोने की कोशिश कर रहा था लेकिन मधु की जवानी के परदे एक-एक करके मेरी आँखों पर पड़ते जा रहे थे जिन्होंने नींद को मेरी आँखों से दूर कर दिया।

रात के लगभग 11 बजे होंगे, मैंने मधु को फ़ोन किया, एक दो बार रिंग बज़ते ही उसने फ़ोन उठा लिया, ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे फ़ोन का इन्तज़ार कर रही थी।

दिन में ज्यादा घूमने के कारण उसके घर वाले थक कर सो रहे थे।
मैंने उसे अपने कमरे में बुला लिया।

मधु ने आने में जरा भी देर नहीं की।

दो तीन मिनट में वो कयामत उसी लिबास में मेरे कमरे में आ गई।
कसम से, मानो, किसी दुल्हन की तरह शरमाई सी वो बेड के पास खड़ी हो गई।

मैंने भी पहले उसका अंग अंग जी भर कर देखा फ़िर धीरे से बाहों में भर लिया। मानो कोई फ़ूल मेरी बाहों में सिमट आया हो।

मैंने उसे बिस्तर पर बैठा लिया और उसके चेहरे को साड़ी के पल्लू से ढक दिया।
उसने भी पल्लू को दुल्हन की तरह थामे रखा फिर धीरे से मैंने उस चाँद से घूँघट के बादलों को हटाया और उसके मदमाते होटों पर एक किस कर दिया तो वो एकदम ही मुझसे लिपट गई।

मैंने उसकी सांसों की गर्मी को अपने सीने पर महसूस किया।

वो बिलकुल तैयार थी, मैंने अपना हाथ धीरे धीरे उसकी साड़ी में डालना शुरू किया, वो नीचे की तरफ झुकती सी चली गई।
मैंने एक हाथ उसकी मदमस्त कर देने वाली चूचियों पे रख दिया और उन्हें दबाने लगा।

वो टूट कर अब मेरी बाँहों में बिखरने लगी थी, उसने अपनी आँखें बंद कर ली और अपना नरम नाज़ुक शरीर मुझे सौंप दिया।

मेरा एक हाथ अब उसकी नरम, गरम और गुलाबी चूत पर पहुँच कर उसके साथ शरारत कर रहा था।
शायद वो अब सहन नहीं कर पा रही थी।

मैंने एक एक करके उसके शरीर से सारे कपडे अलग कर दिए।
अब वो गुलाब की गुलाबी कली मेरे सामने अपनी सारी पंखुडियों से बाहर आ चुकी थी।

उसके पूरे नंगे बदन को देख कर तो कोई भी अपना आप खो दे!

मैंने अपने कपड़े उतार दिए। हम दोनों एक दूसरे की बाँहों की गिरफ्त में जाने के लिए बेताब थे।

मैंने बिस्तर पर जाकर मधु को कस के अपनी बाँहों में ले लिया।
उसके जिस्म का अंग अंग सेक्स की आग में जल रहा था।
अब इस सावन को मधु के जिस्म पर बरस कर उसके जिस्म की प्यास को बुझाना था।

मैंने मधु की खामोशी तोड़ी और उससे पूछा कि क्या कभी पहले सेक्स किया है तो उसने चेहरे को हाथों से ढक लिया और इन्कार में सर हिला दिया।
यानि कि मधु बिल्कुल अनछुई थी।

अब मुझे उसके साथ थोड़ी ऐहतियात बरतनी थी क्योंकि उसकी चूत बिल्कुल कोमल थी।

मैंने ऊँगली से उसकी चूत को धीरे धीरे से सहलाया तो मधु कि सिसकियाँ सी छूटने लगी।

उस कमरे का माहौल आऽऽ आहऽहऽहऽ ऊऽउऽ उफ़ऽफ अऽअऽ आ स ओऽऽऊहऽ नऽऽनाऽ सावन करोऽ हम्मऽ … ऊऽऽऊफ ओ ओह येसऽस स से और भी सेक्सी हो गया।

मैंने उसके शरीर पर हर जगह चूमा, उस कली को हर तरफ से चूमा।

अब मैंने उसकी हालत को समझते हुए धीरे से अपना लण्ड उसकी चिकनी और मुलायम चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उसके अंदर लण्ड को डालने लगा।
मधु अपने पैरों को भींचने लगी और कहा- दर्द हो रहा है!
मैंने उस से कहा- अगर टांगें भींचोगी तो दर्द होगा!

अब उसने अपने पैर खोल लिए।
मैंने एक झटके से जोर से लण्ड चूत के अंदर डाला तो मधु की चीख निकल गई और लण्ड चूत के अंदर था।

मधु बेहाल सी हो गई, मैंने उसे थोड़ा शांत किया, उसका चेहरा पसीने से भीग गया।
अब मैंने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाला तो लण्ड पर खून लगा था, उसे देख कर मधु बोली- कुछ होगा तो नहीं?

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा!

मैंने धीरे धीरे लण्ड को हिलाना शुरू किया तो मधु सिसकियाँ अब सेक्स की आवाजों में बदलने लगी थी और उसका चेहरे का डर एक चमक में बदल गया था।

फिर तो उल्टा मधु सेक्स करने में मेरा साथ देने लगी।
मैंने उसे धीरे से चोदा, अपने लण्ड को उसकी गहराइयों तक उतारा, जितना गहरा लण्ड चूत में जाता, उतनी ही मधु मुझसे चिपक जाती और उतनी ही जोर से उसकी सिसकी आती थी।

उसके बाद तो पता नहीं हम दोनों इतना समय खींच गए कि इतने गरम होने के बावजूद हम लगभग 25 मिनट तक सेक्स करते रहे।
काफी देर बाद मैं मधु के ऊपर निढाल सा हो गया और साथ ही साथ मधु ने भी खुद को मुझसे जकड़ लिया।

अरे! यानि कि यारो उसका भी सेक्स पूरा हो गया था।

अब हम दोनों काफी देर एक दूजे पर निढाल लेटे रहे और आधे घंटे बाद दोबारा से एक बार फिर एक दूजे में समां गए।

और फिर मधु अपनी साड़ी पहन कर थके से कदमों से वहां से अपने कमरे में चली गई। खैर एक दूजे की कुछ मिठास दिल में लिए नींद के आगोश में समां गए।

अगली सुबह जब हम उठे और नाश्ते के लिए नीचे आए तो मैंने मधु की आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर एक मुस्कान देखी।

सुबह 11 बजे तक मुझे होटल से चेक आउट करना था।
मैंने मधु को यह बताया तो वो बोलने लगी- हम शाम 4 बजे यहाँ से चेक आउट करेंगे!

सुबह मधु के घर वाले भरतपुर घुमने के लिए निकलने लगे तो मधु ने उनसे बहाना कर दिया कि उसके सर में बहुत दर्द है।
मधु की मम्मी उसके पास रुकने लगी लेकिन मधु ने कहा कि मैं थोड़ा सोना चाहती हूँ, फिर आप मेरे पास अकेली बैठी बोर हो जाओगी, इसलिए आप भी थोड़ी देर घूम आइये!

उसकी मम्मी मान गई।

अब मधु अकेली ही कमरे में थी।
कुछ देर बाद मैं मधु के कमरे में गया।

मेरे वहां जाते ही मधु भागकर मुझसे लिपट गई और नज़रें नीचे करके कहने लगी- सावन! क्या रात वाला अहसास तुम मुझे अभी करा सकते हो?
उसने मेरे दिल की बात कह दी।

फिर क्या था हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतार दिए और बेड पर बैठ गए।
मैंने मधु के तन के हर हिस्से को किस किया। जैसे मैं उसे किस करता तो मधु उतनी ही उत्तेजित होती जाती।

फिर हमने आधे घंटे तक एक दूसरे को वो अहसास कराया, जिस अहसास को आप मेरे इस अनुभव को पढ़ने के बाद करना और पाना चाहते हो।

उसके बाद मैंने मधु को कपड़े पहनाये और उसके नरम नाज़ुक होटों पे एक प्यारा सा “गुड बाय किस” किया और मैं होटल से चेक आउट कर गया।

दोस्तो, ये थे मधु के साथ बिताये कुछ हसीं पल!

आपको मेरा ये अनुभव कैसा लगा?
मुझे मेल कर के जरूर बताना! Sex Stories

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मेरा नाम विनोद है। मैं गुडगाँव में रहता Sex Stories हूं। ये मेरी पहली स्टोरी है। ये कहानी ४ साल पहले की है, जब मेरी ज़िंदगी में एक १८ साल की लड़की आई। वो १० वीं क्लास में पढ़ती थी। मेरा दोस्त अपने लिए एक हाउस की कन्स्ट्रशन करवा रहा था तो में वहाँ अक्सर जाता रहता था। उसी घर के पास में एक लड़की रहती थी उसका नामसोना था। वो मुझे स्कूल से आते हुए दिखाई देती थी। वहाँ पर मेरे और दोस्त भी होते थे हम सभी उसको देखते थे। उसका रंग सांवला था लेकिन फिर भी वो सेक्सी दिखती थी। उसके बूब्स अनार की तरह गोल और एक दम तने हुए थे, वो अपनी गंड को मटका-२ के चलती थी, उसको देखते ही हम सब दोस्तों का दिल उसको छेड़ने का करता था।

एक दिन वो स्कूल से आ रही थी तो मैने उसको प्रपोज़ किया लेकिन वो बिना कुछ कहे चली गयी, ३ -४ दिन के बाद उसने मेरे से दोस्ती कर ली। धीरे-२ हमारी मुलाक़ातों का सिलसिला शुरू हो गया। एक दिन मैने उसको सेक्स करने के लिए मना लिया और जब वो स्कूल जा रही थी तो मैने उसकी छुट्टी करवाकर अपने साथ एक रूम पे ले गया। कमरे में जाते ही मैने उसको अपनी बाहों में भर कर बिस्तर पे लेटा लिया और उसके होठों का रूस चूसने लगा काफ़ी देर तक उसको होठों के चूसने के बाद मैने उसके टॉप में हाथ डाल कर उसके सेक्सी बूब्स को दबाने लगा अब वो धीरे धीरे गरम हो रही थी, मैने उसका टॉप उतर दिया ओर उसकी ब्रा में हाथ डाल कर उसके बूब्स दबाए फिर मैने उसकी ब्रा भी उतर दी।

उसके बूब्स एकदम टाइट थे मैने इतने टाइट बूब्स किसी लड़की के देखे ही नही थे। उसके बूब्स इतने सेक्सी थे कि शब्दों में बताना ही सम्भव नही है।सोना भी अब गरम हो गयी थी उसने मुझे कस कर अपनी बाहों में भर रखा था। मैने उसकी जीन्स ओर पेंटी भी उतार दी अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। उसकी चूत पर बाल भी नही थे। मैने अपना लंड निकाल कर उसके हाथ में दे दिया वो धीरे-२ मेरे लंड को सहलाने लगी, मेरा लंड खड़ा होकर लोहे की रोड की तरह हो गया था, लंड की ओर देखकरसोना बोली कि ये मेरी चूत में जाएगा तो मुझे बहुत दर्द होगा, मैने उसको समझाया कि जान दर्द तो सिर्फ़ एक बार होगा उसके बाद तो ज़िंदगी भर मज़ा ही मज़ा है।

अब वो चुदवाने के लिए तैयार हो गयी, मैने अपना लंड उसकी चूत पे रखकर धीरे से झटका मारा लेकिन मेरा लंड उसकी चूत के अंदर नहीं गया क्योंकि उसकी चूत बहुत टाइट थी। फिर मैने अपने लंड पर थूक लगाकर एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा लंड आधा उसकी चूत में घूस गया वो दर्द से बुरी तरह से चिल्लाने लगी आअहह्ह्ह, उहह्ह्हह्ह्ह्ह, वो बोली लंड बाहर निकालो नही तो मैं मर जाउंगी, उसकी चूत से ख़ून आ रहा था।

मैने चुदाई रोक कर उसके होठों को चूसने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा तो वो ख़ुद ही नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर नीचे से धीरे-२ झटके मारने लगी, मैने अचानक एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया वो ओर ज़ोर से चिल्लाने लगी, उसको दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था। उसके मुंह से अजीब अजीब से आवाजें निकल रही थी, मैने अब अपनी स्पीड बढ़ा दी, थोड़ी देर में हम दोनो डिस्चार्ज हो कर अलग हो गये। १५ मिनट के बाद मेरा लंड फिर सेसोना को चोदने के लिए तैयार हो गया अबकी बार मैने उसको अलग-२ स्टाइल में चोदा, कभी उसकी टांगें अपने कंधो के ऊपर रखकर, कभी डोगी स्टायल में…Sex Stories

सप्तम भाग से आगे : Antarvasna

ओह.. तो Antarvasna यह बात है… रश्मि। यही तो मैं सोच रहा था कि तुम्हारे जैसी बला की खूबसूरत लड़की इतनी आसानी से कैसे तैयार हो गई।
खैर मैंने रश्मि से कहा- चलो, आज मैं तुम्हारी अतृप्त वासना की इच्छा पूरी करता हूँ।

यह सब कहते हुये उसने मेरा लंड छोड़ा नहीं था बल्कि और भी जोर से पकड़ लिया था। मेरा लंड लोहे की छड़ की तरह सख्त हो चुका था। अंदर से मैं बहुत उत्तेजित हो चुका था।
उसने पूछा- आपको मुझमें क्या अच्छा लगता है सर…?
मैंने कहा- तुम्हारे होंठ, तुम्हारे गाल … !
उसने कहा- और..?

वह कुछ और ही सुनना चाहती थी …
मैंने जारी रखा- तुम्हारे बड़े-बड़े स्तन … तुम्हारे चूतड़ … मैं इन्हें सहलाना चाहता हूँ … इनमें डूब जाना चाहता हूँ..!
उसने सिसकारती आवाज़ में कहा- आपको रोका किसने है सर … मैं तो कितने दिनों से यही चाह रही थी …

उसका इतना कहना था कि मैंने अपने होंठ उसके नर्म मुलायम होंठों पर रख दिये और दोनों हाथों से उसके स्तनों को मसलने लगा.
उसके भरे-भरे कठोर और बड़े स्तन थे, घुटने के बल आकर उसने मेरे सुपारे को लॉलीपॉप की तरह फिर से चूसना शुरू कर दिया।

मैं सिसकारियाँ लेने लगा और जोर-जोर से उसके स्तन मसलने लगा … थोड़ी देर बाद मेरे लंड के टिप पे लसलसा सा प्रि-कम आ गया था जो उसने मजे से चाट लिया।

अचानक वो खड़ी हुई … मैं भी खड़ा हो गया। उसने मेरा एक हाथ अपने वक्ष से हटाया और अपने दोनों टाँगों के बीच वहाँ रख दिया जहाँ दहकता लावा था …पहले तो मैं सहलाता रहा … नापता रहा दोनों पंखुड़ियाँ … उनके बीच की दरार … जहाँ हल्की-हल्की रिसावट हो रही थी … मैंने उसकी चूत के दरार पे उंगली फ़िराई …उसने सिसकारियाँ भरना शुरु कर दिया और अपने गुदाज नितंबों को आगे-पीछे करने लगी…

मैंने अपनी एक उंगली धीरे से अंदर प्रविष्ट कर दी… वो चिहुँक उठी … .और अपना वस्ति-दोलन और तेज़ कर दिया … उसने अपनी आँखें बन्द कर रखी थीं … मैंने उंगली को आगे पीछे करना शुरु कर दिया …

वो मेरे लंड को एक हाथ में लेकर उसके चमड़े को आगे-पीछे करने लगी … मेरा सुपाड़ा और मोटा होता जा रहा था… उसकी चूत गीली होती जा रही थी … वो और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी … उसके मुँह से गूँ-गूँ की आवाज़ निकल रही थी।

और मैं उसकी दोनों टांगो के बीच फ़ँसी उस दरार को निहारने लगा जिसके पीछे ऋषि-मुनियों की तपस्या भंग हो गई थी ! मैं तो सिर्फ मानव हूं।

फिर वो पीछे घूम गई … अब मेरा लंड उसके उन्न्त नितम्बों के बीच की खाई में झटके मार रहा था … ..मैंने उसके दोनों स्तन पकड़े और पीछे सट गया … वो अपने चूतड़ मेरे मुन्ने पर रगड़ने लगी। आह … स्वर्गीय आनंद था … कामुकता … वासना … अपनी चरम सीमा पर थी। मैंने उसके गर्दन पर एक चुम्बन दिया …

उसने कराहती सी वासना में लिप्त आवाज़ में कहा- उँह्ह्ह्ह्ह …

मैंने अपना एक हाथ उसके उरोज से हटाया और चूत पर फेरने लगा … एक छोटी सी … मटर के दाने जितनी घुंडी का अहसास हुआ … जाने क्यों मैं उस घुंडी को रगड़ने लगा और वो बेसाख़्ता सिसकारियाँ भरने लगी …और मेरे लंड को अपने गोल-गोल नितम्बो के बीच फ़ँसाकर ऊपर-नीचे रगड़ने लगी …

लग रहा था किसी लावा में रगड़ा जा रहा है … मैं अपने आपको संयत कर पाता कि अचानक वो अपने दोनों हाथ सोफे के बैक पर रखकर झुक गई और जन्नत का दरवाजा मेरे सामने था। साँसें घुटती हुई सी लग रही थीं … धड़कनें थमी सी महसूस हो रही थीं …

सीटी बजाने के आकार में सुकड़ा हुआ भूरा सा गुदाद्वार किसी खिले हुए चमेली फूल सा लग रहा था …

उसके कुछ आधे इंच नीचे भूरे-भूरे रेशमी झाँटों की एक बारीख लाइन दिखाई दे रही थी … वो ऐसे लग रही थी जैसे रश्मि के सेक्सी होंठों को किसी ने वर्टिकल कर दिया हो … थोड़ा गुलाबी … थोड़ा बादामी … ऐसा कुछ रंग था उन होंठों के बीच …मेरे हाथ-पाँव भारी से होते जा रहे थे … मैं अपने घुटनों पर आ गया और जाने किस अनजान शक्ति ने मेरा मुँह उस खुशबूदार … तीन इंची दरार में टिका दिया … मेरी जीभ बाहर निकल आई और मैं कुत्ते की तरह उसकी बुर को चाटने लगा … कुछ नमकीन-कसैला सा स्वाद था …

अब वो कुछ अंड-बंड बकने लगी और अपने चूतड़ को आगे-पीछे करने लगी … मैंने अपने जीभ के आगे का हिस्सा नुकीला करके उसके योनिद्वार में घुसा दिया … उसकी सिसकारियाँ रुकने का नाम नहीं ले रही थीं …

मैंने जीभ को मटर के दाने जितनी घुंडी पर गोल-गोल घुमाना शुरु कर दिया … उसकी दरारों से और ज़्यादा नमकीन पानी रिसने लगा …

लंड का तनाव काबू से बाहर होता जा रहा था …जो आम तौर पर आठ इंच का दिखता था … आज नौ इंच का दिख रहा था … सुपारा अंगारा हो गया था … उतना ही गरम … उतना ही लाल … !

अपना दहकता अंगार मैंने रश्मि के सुलगते लावा में रख दिया … जिसे मैंने चाट-चाट के लाल कर दिया था …

उफ़ क्या गरमी थी … क्या नरमी थी …

अपने गरम सुपारे को उसकी चूत के दोनों होठों के बीच रगड़ने लगा … … जहाँ लसलसे पदार्थ का झरना सा बह रहा था …
रश्मि अपना नियंत्रण खोती जा रही थी … उसके तन-मन में मादकता छा गई थी … उसने अपनी कमर को उछालना शुरू कर दिया …
मैंने धीरे से सुपाड़ा अंदर घुसेड़ने की कोशिश की …

कोशिश इसलिये कह रहा हूँ कि सुपारा बार-बार फ़िसल जाता था … अंदर जा ही नहीं रहा था। इतनी चिकनाई होने के बावजूद उस चूत के छेद के लिये 4-5 इंच घेरे वाला लंड काफ़ी बड़ा साबित हो रहा था …।

मैंने एक हाथ से उसके नितंब को थामा … दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़ा … उसे जन्नत के दरवाजे पर टिकाया और हाथ से पकड़े-पकड़े अपने चूतड़ों को एक जुम्बिश दी … सुपारा अन्दर समा गया … अभी भी आठ इंच का फ़ड़कता हुआ रॉड बुर के बाहर था … ऑफिस का एसी चलने चलने के बावज़ूद मैं पसीने-पसीने हो रहा था …।

अब मैंने लंड को छोड़ा … अपने आपको सीधा किया … गहरी साँस ली … दोनों हाथों से उसके गोल-गोल सुडौल नितंबों को थामा …नज़रें चमेली के फूल पर टिकाई और अपने चूतड़ों को जबरदस्त झटका दिया …

अब मेरा लौड़ा तकरीबन 4-5 इंच अंदर था, अंदर तो भट्टी दहक रही थी, सब कुछ गरम-गरम महसूस हो रहा था.

रश्मि कराह रही थी … थोड़ी देर तक हम दोनो ऐसे ही निश्चल रहे … लंड आधा ही अंदर था … मेरा लंड अंदर के कसाव के बावजूद फड़क रहा था …रश्मि चुपचाप मेरे लंड का फड़कन महसूस कर रही थी। … मैं भी उसके चूत की मांसपेशियों का फैलना और सुकड़ना को महसूस कर रहा था।

करीब एक मिनट तक ऐसे ही रहने के बाद उसने अपने आपको आगे पीछे हिलाना शुरू किया …

भी लंड का आधा हिस्सा बाहर ही था … मुझे याद नहीं आ रहा है जाने कब मैं कुत्ते वाली स्टाइल में उसके ऊपर झुक गया था … उसके दोनों स्तन मेरे हाथ में थे और मैं पीछे से उसका चूतमर्दन कर रहा था।

मैं रफ़्तार पकड़ चुका था … और रश्मि भी अपने कूल्हों को हिला-हिला कर पूरा साथ निभा रही थी। उसकी सेक्सी आवाज़ मुझे और उत्तेजित कर रही थी … वो बड़बड़ा रही थी- पुश इट् हार्ड … पुश दैट मोर इनसाइड … ऊह्ह्ह्ह … ओ गॉड … आह..ऊँहु्ह्ह्ह … और जाने क्या-क्या …
अचानक उसका पूरा शरीर बुरी तरह काँपने लगा … ऐसा लग रहा था कि उसके हाथ पैर उसका बोझ नहीं सम्हाल पा रहे हैं …
उसके नितंबों में अजीब सी थरथराहट हो रही थी … और मैं था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अचानक रश्मि भरभराकर कोहनियों के बल सोफे की सीट पर आ गई … उसका पेट और स्तन सीट पर टिके थे पर नितम्बों वाला हिस्सा ऊपर उठा हुआ था …

मैंने अपना लंड एक इंच पीछे खींचा … उसकी कमर दोनों हाथों से पकड़ा और दोनों कूल्हों के बीच निहारा … उसके फ़ाँकों के बीच फ़ंसे अपने खुद के अंग को देखकर मैं इतना उत्तेजित हो गया कि पूरी ताकत के साथ लंड को वापिस पेल दिया …
रश्मि बोली- ओ गॉड … यह तो यूटेरस में टकरा रहा है …

इतना कहते ही उसके बुर से तेज धार सी निकली और मेरे झाँटों की भिगोती चली गई … मैं दुगनी रफ़्तार से भिड़ गया …
कोई 20-25 मिनट के बाद मेरे लंड में अजीब सी ऐंठन हुई और पता नहीं कितना वीर्य उसके बच्चेदानी के छेद पे न्यौछावर हो गया …
बस इतना पता है कि उसने कहा- ओह गॉड … .इतना सारा …?

मैं उसके खुशबूदार शरीर से चिपट गया … उसके स्तनों को मसलने लगा … मेरा लंड उसकी चूत में फैलने-सुकड़ने लगा … उसने पता नहीं क्या किया … ऐसा लगा जैसे मेरे लंड का पूरा रस अपने बुर को टाइट करके निचोड़ रही हो। मैं उसकी सुराहीदार गर्दन को चूमता जा रहा था … हम दोनों तरबतर हो चुके थे !

इसके बाद हम लोग हांफते हुए सोफे पर कटे हुए पेड़ की तरह गिर पड़े।

उस दिन मैंने रश्मि को पाँच बजे तक चार बार चोदा।

आखिर में रश्मि ने कह ही दिया… सर आज से पहले इतनी खुशी नहीं मिली।

हम लोग ऑफिस बन्द कर के अपने अपने घर चले गये।
समाप्त Antarvasna

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निशु जब बाहर आई तब Hindi Porn Stories कमर के नीचे का हिस्सा पानी से भीगा हुआ था, जिसे देख सुनित आगे बढ़ा और निशु के टॉप से उसके बदन को सुखाने लगा।

निशु की लम्बी लम्बी झाँटों को देख बोला- कितने दिन से नहीं काटा इनको, निशु?

निशु भी बोली- आज तक सिर्फ़ एक बार कैंची से काटी थी, 15 साल की थी, जब नौवीं क्लास में थी। मम्मी ने बहुत डांटा था बाद में! उसके बाद फ़िर नहीं काटी।

मैंने तब पूछा- तुम मामी को बताया था क्या कि तुमने झाँट साफ़ की है?

वो बोली-नहीं, पर मम्मी सुबह झाड़ू लगाते समय मेरे कमरे में बड़े-बड़े बाल देख समझ गई और मुझसे पूछा कि ये सब बाल कैसे हैं तो मैंने इशारे से बताया।

फ़िर तो वो बहुत गुस्सा हुई और मेरा सलवार खुलवा कर देखा। मुझे तब बहुत शर्म आई, पर वो मेरे चूत को देख काफ़ी गुस्साई और कहा कि अगर ऐसे करने में कोई कट-छिल गया तो कितनी परेशानी होगी, कैसे डाक्टर के पास जा कर ऐसे दिखाओगी?

तब से फ़िर हिम्मत नहीं हुई ऐसा कुछ करने की!

सुमित बोला- तभी तुम यहाँ हम लोग से खूब मजे से चुदवा रही हो, अब तुम्हारी मम्मी अगर तुमको नंगा करके तुम्हारी चुदी हुई बुर देखेगी तब क्या होगा?

निशु अब अपने रंग में आने लगी थी, बोली- होगा क्या, चिल्लाएगी खूब! उन्होंने मुझे कितना दबा कर रखा है, सिर्फ़ मैं ही जानती हूँ। मम्मी का ये न करो, वो न करो भी तब से शुरु हुआ और आज तक चल रहा है। मुझे याद है, एक बार वो अपने खिड़की से सड़क पर एक कुत्ते के जोड़े को देख रही थी। एक कुत्ता कुतिया के उपर चढ़ कर खूब तेजी से उसको चोद रहा था। मम्मी को पता नहीं चला कि मैं पीछे खड़ी हूँ और उनको कुत्ते-कुतिया को मस्ती करते देख रही हूँ।

फ़िर जब पास के एक लड़के ने एक पत्थर उनकी तरफ़ फ़ेंका तब कुत्ता पलट गया और उसका लण्ड कुतिया की भीतर था, और जैसे ही कुत्ता पत्थर से डर कर इधर-उधर जाने लगा, कुतिया भी साथ साथ खिंची जा रही थी। मुझे तब यह देख हँसी आ गई और मम्मी ने तब देखा कि मैं भी वहीं साथ ही सब देख रही हूँ। वो बहुत गुस्साई और मुझे 3-4 थप्पड़ लगा दिए।

जब मैंने कहा कि क्या हो गया अगर मैंने देखा, आप भी तो देख रही थी।

तब गुस्से में वो बहुत बोली।

तभी मैंने सोच लिया कि जब मौका मिलेगा, तब वो सब करुँगी जो मम्मी नहीं करने देती। इसीलिए उस दिन जब आप लोग ताश खेलने को बोले तो मैं तैयार हो गई कि अब मुझे वो सब कर लेना है, जो मम्मी के साथ रहते नहीं कर सकती।

मुझे मामी के मिजाज के बारे में पता था। पर यह सब सुन सुमित बोला- ठीक है, फ़िर आज देखो कैसे तुमको मजा देते हैं। आज तुम्हें एक रन्डी मान के पूरा पैसा वसूल चुदाई करुँगा।

और फ़िर उसने निशु को अपने गोद में खींच लिया। दोनों ने एक दूसरे के साथ चुम्मा चाटी शुरु दी। सुमित धीरे-धीरे निशु के होंठ से शुरु करके उसकी चूचियों पर ध्यान दे रहा था और निशु उसके लण्ड को सहला रही थी।

सुमित का लण्ड अब कड़ा हो गया था। उसने निशु को बेड पर सीधा लिटा दिया और टाँगें खोल कर उसकी चूत के बाहर के होंठ फ़ैला कर जीभ से चूत की चटाई शुरु कर दी। निशु अब गीली होने लगी थी। उसने सिसकी निकालनी शुरु कर दी। तब सुमित उसके चूत की चमड़ी को और फ़ैला कर उसकी टीट(भगनासा) को चूसने लगा।

फ़िर उसने निशु को अपने मुँह से भी पूरा बेचैन करने के बाद अपना लण्ड एक धक्के में ही निशु की चूत में पेल दिया अर जोरदार चुदाई शुरु कर दी। निशु के पूरे जिस्म में जैसे आग लगी थी और वो खूब जम कर सुमित के धक्के से धक्का मिला कर चुदवा रही थी।

आह आह की आवाज से मेरे और अनवर का लण्ड ठनक गया था। निशु का बदन थरथरा कर थोड़ा ढीला हुआ, वैसे ही सुमित ने अपना लण्ड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया, फ़िर उसको पलटने को कहा। निशु अभी और चुदाना चाहती थी पर मैं समझ गया कि अब निशु की गांड मारी जानी है।

सुमित ने उसको फ़िर कहा- पलट और गाण्ड मरवाने को तैयार हो जा!

निशु अब समझ गई कि आज की असल चुदाई तो अब शुरु होगी।

वो चुदाने के लिए बेचैन थी, बोली-‘ठीक है, आज यह भी हो जाए! जब चुदवाना ही है तो पूरी रन्डी बना दीजिए मुझे।

वो मुझे देख के बोली- आज भैया मुझे आप दोनों भी चोदिए, मेरे बदन का पूरा मजा लूटिए!

सुमित को देर बर्दाश्त हो नहीं रही थी, वो खीज कर बोला- चल इधर साली कुतिया, पहले मेरे से गाण्ड मरवा फ़िर अपने भाई से चुदाना!

वो बेशर्म की तरह बोली- ओह साले कुत्ते हो क्या तुम सुमित भैया! कि इस कुतिया को चोदने के लिए तड़प रहे हो?

और उसने पलट कर अपनी गाण्ड उभार दी। सुमित भी मजा लेने के लिए अपने दाँए हाथ के अँगूठे को भीतर घुसा उसकी गाण्ड खोलने लगा, साथ ही बोला- हाँ रे निशु बहना, जब तुम्हारे जैसी रन्डी सामने कुतिया बन के गाण्ड खोल दे तब मुझे कुत्ता बनने में कोइ परेशानी नहीं है, अपने बाकी दोनों भाइयों से पूछ लो, वो बहनचोद बनेंगे या कुत्ते?

वो जब तक हम लोगों से कुछ कहे, सुमित उसकी गाण्ड में लण्ड पेलना शुरु कर दिया। एक इन्च लौड़ा भीतर गया होगा कि निशु के चेहरे पे शिकन दिखने लगी और जब करीब तीन इन्च भीतर घुसा तो उसने परेशानी महसूस करके ना ना करना शुरु किया।

सुमित ने उसको पुचकारा और फ़िर हल्के से दबा दिया। वो अब बिस्तर के करीब हो गई थी और थोड़ा शांत थी। तभी सुमित ने अपने दोनों हाथों से उसकी कमर को पकड़ थोड़ा ऊपर उठाया और अपना सबसे जोरदार धक्का लगाया।

निशु जोर से चीखी पर सुमित का लण्ड पूरा सात इन्च का उसकी गाण्ड के भीतर चला गया। वो दर्द से परेशान थी पर बोले जा रही थी- चोदो, गाण्ड मारो मेरी, रुको मत! पेलो पूरा! आज तुम्हारी कुतिया हूँ मैं।

सुमित चुपचाप उसकी गाण्ड मारे जा रहा था और थोड़ी देर में ही निशु भी उसका साथ देने लगी।

अनवर से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वो अपने कपड़े खोलने लगा, तो निशु ने मुझे भी आने को कहा। फ़िर उसने हम दोनों के लण्ड को बारी बारी से चूसना शुरु किया। तभी सुमित उसकी गाण्ड में ही झड़ गया।

निशु की गाण्ड से उसका माल बह रहा था। वो अभी नहीं झड़ी थी और बिना सुमित की चिन्ता किए वो हम दोनों के लण्ड मजा दे रही थी। फ़िर उसने मुझे कहा कि मैं अब उसकी चूत में पेल कर चोदूँ।

मैंने तुरन्त पीछे जा उसकी बूर की चुदाई शुरु कर दी।

वो बोली- आप मेरे मुँह में झाड़िएगा।

मैंने तेजी से उसकी चूत चोदी। उसकी चुदाई और गाण्ड मराई देखकर वैसे भी मैं आधा मजा पा चुका था, इसलिए जल्दी ही मैं झड़ने की स्थिति में आ गया और लण्ड उसकी चूत से निकाल सामने की तरफ़ चला गया।

निशु अब बिस्तर पर सीधा लेट गई, अनवर अब ऊपर से उस पर चढ़ गया और उसको चोदने लगा।

मैंने उसके मुँह में अपना माल निकाल दिया, तभी अनवर भी उसकी चूत में झड़ गया।
निशु मेरा माल खा गई और बोली- वाह, मजा आ गया, भाई लोगो! आज मेरे तीनों छेदों में लण्ड का माल गिरा!

हम सब अब थक गये थे। निशु अपनी चूत से अनवर का माल अपने उँगली से निकाल निकाल कर चाट रही थी, सुमित से बोली- सॉरी भैया, आपका बाद में कभी खा लूंगी, गाण्ड में से निकाल कर मैं नहीं खा सकती!

सुमित खुश हो कर बोला- ओए जी, कोइ गल नई!

हम सब हंसने लगे। तभी निशु बोली- अब मम्मी को फोन करती हूँ, कई दिन हो गये बात किए!

मैं थोड़ा अचकचाया- क्या बात करोगी अभी निशु?

वो मुस्कुरा कर बोली- कहूँगी कि उनकी लाडली बेटी को उनके प्यारे भांजे ने एक दम रण्डी बना दिया और अपने दोस्तों के साथ मिल कर रोज दो घन्टा चोदता है!

मेरी घिग्गी बंध गई पर तभी वो हँस दी। हम सब उसकी बदमाशी समझ गए और हमारी जान में जान आई। वो मोबाईल पर बात करने लगी। सुमित और अनवर कपड़े पहनने लगे।

वो नंगी ही थी और मैं देख रहा था कि वो अपने माँ से कितने भोलेपन के साथ बात कर रही थी। बीच बीच में अपने बुर में उँगली डाल कर उसको चाट भी रही थी।

सच आज उसको देख लग रहा था कि 4-5 महीने में ही कैसे वो एक छुई-मुई सी लड़की से कैसी चुदक्क्ड़ लौन्डिया बन गई थी- एकदम बेशर्म और बिंदास। Hindi Porn Stories

प्रेषक : विजय पण्डित Antarvasna

मैं अपनी फ़र्स्ट इयर की पढ़ाई कर Antarvasna रहा था। मुझे याद है उस समय बरसात का मौसम था…. पापा ने मुझे बताया कि दीदी के साथ उदयपुर जाना है। दीदी की उम्र करीब 27 वर्ष की थी। जयपुर में भी एक दिन रुकना है। मुझे घूमने का वैसे ही बहुत शौक था। मैंने तो तुरन्त हां कह दी। फिर दीदी मुझे कई चीजें भी देती थी। पापा ने हमारा बस में रिजर्वशन करवा दिया था।

दिन की बस थी सो हमने खाना वगैरह खा कर बस में बैठ गये…. दीदी खिड़की वाली सीट पर थी। बस के चलने के बाद थोड़ी ही देर में बरसात शुरु हो गई थी। रास्ते भर दीदी पर खिड़की से छींटे आते रहे और बार बार वो रुमाल से अपने हाथों को और बोबे को पोंछती जाती थी। मैंने भी उनकी मदद की और एक दो बार मैंने भी दीदी बोबे को अपने रूमाल से साफ़ कर दिया। उन्होने मुझे घूर कर देखा भी…. हाथ लगाते ही दीदी के उभार लिये हुए चिकने और नरम बोबे मेरे दिल में बस गये।

बस के हिचकोले से वो बार बार मुझ पर गिर सी जाती थी। एक बार तो उनका हाथ मेरे लण्ड पर भी पड़ गया। मुझे लगा कि दीदी जान कर के मुझे उकसा रही है। मैं भी जवान था, मेरे दिल में भी हलचल मच गई। शाम होते होते हम जयपुर पहुंच चुके थे। टूसीटर ले कर हम सामने ही होटल में रुक गये और वहीं से दूसरे दिन का उदयपुर स्लीपर का रिजर्वशन करवा लिया। दीदी काऊंटर पर गई और कमरा बुक करवा लिया। मैंने सारा सामान एक साईड में रख दिया।

हमने खाना जल्दी ही खा लिया और होटल के बाहर टहलने लगे। दीदी मुझे कभी आईसक्रीम तो कभी कोल्ड ड्रिंक पिला कर मुझे खुश कर रही थी। मुझे लगा मुझे भी दीदी के बदन को हाथ लगा कर खुश कर देना चाहिये। सो मैंने टहलते हुए मजाक में दीदी के चूतड़ पर हाथ मार दिया। उस हाथ मारने में मुझे उनके गाण्ड का नक्शा भी महसूस हो गया। दीदी की गाण्ड पर मेरा हाथ लगते ही वो चिहुंक गई….मुझे फिर से उसने मुस्करा कर देखा, मुझे इस से ओर बढ़ावा मिला। मुझे भी बहुत आनन्द आ रहा था इस सेक्सी खेल में।

“शैतान….मारने को यही जगह मिली थी क्या….?” मतलब भरी निगाहों से मुझे देखते हुए उसने कहा।

“दीदी….मजा आया ना….! नरम गद्देदार है….!” मैंने उसे छेड़ा।

“चल हट…. ” कह कर दीदी ने भी मेरी चूतड़ पर एक चपत लगा दी।

“दीदी एक और चपत लगाओ ना….” मैंने शरारत से कहा।

“क्यो तुझे भी मजा आया क्या ?” दीदी मुस्कराने लगी।

“हां….लगता है खूब मारो और बल्कि दबा ही दो !” मैं भी थोड़ा खुल गया।

“जानता है मुन्ना….मेरी भी हनीमून मनाने की इच्छा होती है !”

ये सुनते एकाएक मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने अन्जान बनते हुए कहा,”ये कहां मनाते हैं? कैसे करते हैं?”

“होटल में और कहां….!” दीदी ने मेरी ओर देखते हुए कहा।

“होटल में….चलो ज्यादा से ज्यादा कुछ खर्चा हो जायेगा….पर तुम्हारी इच्छा तो पूरी हो जायेगी ना….”

“बुद्धू …. नहीं मालूम है क्या….?”

“दीदी….कोई बताये तो मालूम हो ना…. हाँ एक फ़िल्म आई थी….मैंने नहीं देखी थी !”

“पागल है तू तो …. तुझे सब सिखाना पड़ेगा…. बोल सीखेगा?” मुझे मालूम हो गया कि दीदी मुझसे चुदना चाहती है।

“हनीमून सीखने वाली बात है क्या?”

दीदी मेरी पीठ पर घूंसे मारने लगी।

रात के 9 बजने को थे। हम फिर से होटल के कमरे में आ गये और सोने की तैयारी करने लगे। अचानक मेरी नजर बिस्तर पर गई। एक ही सिंगल बिस्तर था। मुझे लगा दीदी ने जान बूझ कर के सिंगल बेड लिया है, मैंने अपना पजामा पहन लिया और अंडरवियर मैंने नहीं पहनी। मैं दीदी को अपना फ़ड़फ़ड़ाता लण्ड दिखाना चाहता था। मैंने झुक कर देखा तो पजामे में से मेरा झूलता हुआ लण्ड बाहर से ही नजर आ रहा था।

दीदी मेरी सब बातों को नोट कर रही थी और मुस्करा रही थी। मेरे झूलते हुए लण्ड को तिरछी नजरों से देख भी रही थी। मुझे भी अब शरीर में सनसनी होने लगी थी। लण्ड भी अब खड़ा होने लगा था। दीदी ने भी अपना नाईट गाऊन पहन लिया पर मेरी तेज निगाहों ने भांप लिया था कि अन्दर वो कुछ नहीं पहने थी। मुझे लगा कि दीदी आज सेक्सी मूड में हैं, और शायद हीट में भी हैं….दीदी ने अपने हाथों को उठा कर और अपनी चूंचियों को उभार कर एक भरपूर अंगड़ाई ली ….मुझे लगा कि मेरे दिल के सारे टांके टूट जायेंगे। मुझे महसूस हुआ कि मैं इसका फ़ायदा ले सकता हूँ। शायद मेरी किस्मत खुल जाये। दीदी बिस्तर पर लेट गई और बोली…”अरे मुन्ना….यहीं आजा तू भी….”

सुनते ही मेरा लण्ड कड़क गया। मैं भी लाईट बन्द करके दीदी की बगल में लेट गया। बिस्तर बहुत ही संकरा था। हम दोनों का बदन छू रहा था। मेरा हाथ उनके बदन पर यहाँ वहाँ लग जाता था पर वो कुछ नहीं कह रही थी। कुछ ही देर में वो सो गई। पर मेरे दिल में हलचल थी। लण्ड भी कड़ा हो रहा था।

अचानक दीदी ने नींद में अपना हाथ मेरे लण्ड पर रख दिया….मेरे जिस्म में झुरझुरी आ गई पर उसने किया कुछ नहीं। मैंने लण्ड को थोड़ा सा और कड़ा कर दिया और हिला दिया। पर दीदी ने कुछ नहीं किया। वो नींद में मेरे से और चिपक गई। उनका हाथ मेरे पेट पर से होता हुआ लण्ड पर था। मुझे दीदी के जवान जिस्म की अब महक आने लगी थी। मैंने भी अपनी हथेली उनकी चूचियों के ऊपर जमा दी और उनके सांस लेते समय उनकी उठती और गिरती छातियों को हल्के से दबा कर मजे ले रहा था।

शायद दीदी की नींद खुल गई थी या वो नाटक कर रही थी। उन्होने चुपके से मेरी तरफ़ देखा, और मेरी नजरें उनसे मिल ही गई। हम दोनों आपस में एक दूसरे को निहारने लगे। उसकी आंखों में निमंत्रण था, भरपूर वासना थी। मेरे हाथ उसने नहीं हटाये और ना ही मेरे लण्ड पर से उसका हाथ हटा। हम दोनों ने एक दूसरे की मौन स्वीकृति पा कर मैंने उसकी चूंची पर दबाव बढ़ा दिया और नीचे मेरे लण्ड पर उसके हाथ का कसाव बढ़ गया। दोनों के मुख से एक साथ सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी।

मेरा लण्ड मसलते हुए बोल पड़ी,”मुन्ना क्या कर रहा है….छोड़ दे ना….”

“दीदी…. हाय….आप कितनी अच्छी है…!.” मैंने गाऊन के अन्दर हाथ डाल दिया और चूंचियों का जायका लेने लगा, और मसलने लगा।

“मुन्ना….हाय कितना शैतान है रे तू….मेरे तो बोबे ही मसल डाले रे….!” दीदी ने मेरा पजामा का नाड़ा खींच दिया और अन्दर हाथ डाल कर मेरा लण्ड पकड़ लिया।

“दीदी….जरा जोर से मसलो ना…. दबाओ और दबाओ….बहुत मजा आ रहा है….!”

“तू भी मेरे बोबे खींच खींच कर दबा डाल….हाय रे….तू अब तक कहां था रे….!” मैंने दीदी की चूंची निकाल कर मुख में भर ली और मैं दूध पीने लगा। मेरा दूसरा हाथ उनकी चूत पर पहुंच गया। मैंने उनकी चूत दबा दी।

वो तड़प उठी….”अरे छोड़ दे जालिम मेरी चूत….”

“दीदी….तू भी मेरा लण्ड छोड़ दे….हाय रे….!”

“मुन्ना….चल अपन दोनों हनीमून मना लें….!”

“कैसे….?”

मेरा गाऊन ऊपर करके मेरे से चिपक जा….हनीमून अपने आप हो जायेगा। “

“सच दीदी….” मुझे तो अब चोदने की लग रही थी। लण्ड बेकाबू होता जा रहा था। मैंने गाऊन ऊंचा करके लण्ड उसकी चूत पर गड़ा दिया। दीदी ने अपनी चूत का मुँह खोल कर मेरे लण्ड का चिकना सुपाड़ा अपनी गीली चूत में फ़ंसा लिया और जोर लगा कर लण्ड अपनी चूत में अन्दर सरकाने लगी।

“ये लो मुन्ना….बन गया हनीमून…. अ….अ….आह्….स्सीऽऽऽऽऽऽऽ ….अह्ह्ह्ह्ह्….” लण्ड गहराई में धंसता चला गया। मेरे लण्ड के सुपाड़े में मिठास आने लगी। मैंने भी अपने चूतड़ का जोर लगा कर पूरा अन्दर तक घुसा डाला। दीदी तो चुद्दकड़ निकली….इतनी गहराई तक लण्ड लेने के बाद तो उसे और मस्ती चढ़ गई…. वो मेरे से चिपकती गई। मैंने उसे अपने नीचे दबा लिया और उसके ऊपर चढ़ गया। और उसकी नरम नरम चूत को चोदने लगा…. वो नीचे दबी सिसकती रही…. मैं आनन्द के सागर में डूब चला था। दीदी के कड़कती चूचियों को मसलता जा रहा था।

दीदी जैसे चुदाते समय भी तड़प रही थी, जैसे उसकी सारी इच्छायें पूरी हो रही हों…. कुछ ही देर में उसकी शरीर में जैसे ताकत भर गई हो….मुझे उसने बुरी तरह से भींच लिया….और सिसकी लेती हुई झड़ने लगी। मुझे भी लगा कि जैसे सारा संसार मेरे में सिमट रहा हो…. मेरे जिस्म ने ऐठन के साथ ही लण्ड से सारा वीर्य निकाल दिया। सारा वीर्य उसकी चूत में भरने लगा….मेरा लण्ड बार बार रुक रुक कर वीर्य छोड़ रहा था….जैसे सारा जिस्म निचोड़ लिया हो। मैं निढाल हो कर एक तरफ़ चित लेट गया। हम दोनों ही जाने कब सो गये।

सवेरे उठते ही नहा धो कर हमने नाश्ता किया। और घूमने निकल पड़े…. दिन भर में सारा काम निपटाया और रात की बस में बैठ गये। बस लगभग खाली थी। ठीक साढ़े नौ बजे बस रवाना हो गई। बस के चलने के बाद बस की लाईटें बन्द हो गई। अभी हम नीचे सीट पर ही बैठे थे जिसे हमें अजमेर में खाली करके स्लीपर में जाना था। सीट के साथ लगे पर्दे मैंने खींच दिये।

अंधेरे का फ़ायदा मैंने उठाते हुए दीदी के बोबे मसलने चालू कर दिये, दीदी ने भी मेरा लण्ड बाहर निकाल कर झुक कर चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे सुपाड़े के रिंग को खास तरह से चूस रही थी। मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो गया था। साथ में मैं सावधानी से इधर उधर भी देख लेता था कि कोई हमें देख तो नहीं रहा है….पर सब अलसाये हुए से आंखे बन्द किये पड़े थे। मैंने अब दीदी का सर अपने लण्ड पर जोर से दबा दिया और लण्ड से उसका मुँह चोदने लगा। मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हू, तो मैंने लण्ड दीदी के मुँह से लण्ड निकालने की कोशिश की पर दीदी लण्ड छोड़ने को तैयार नहीं थी…. मेरा वीर्य उसके मुँह में ही छूट पड़ा…. मै उसके सर को पकड़ कर उस पर दोहरा हो गया। मेरा सारा रस वो पी चुकी थी। मेरा एक दम साफ़ सुथरा लण्ड उसके मुह से बाहर निकला। मैंने जल्दी से अपनी पेन्ट की ज़िप चढ़ा दी। दीदी भी ठीक से बैठ गई। उसकी आंखे अभी भी शराबी लग रही थी।

अजमेर के बस स्टेण्ड पर बस आ गई थी….समय किस तेजी से निकला पता ही नहीं चला। यात्री बस में चढ़ रहे थे कुछ उतर रहे थे। हम भी कोल्ड ड्रिंक लेने के लिये उतर गये। हम दोनढ़ एक दूसरे से नजर मिला कर देखे जा रहे थे। आंखो ही आंखो में बातें हो रही थी।

तभी कंडक्टर ने कर तन्द्रा भंग की,”साहब जी….चलो या यहीं रहना है….?”

हम दोनों मुस्करा पड़े और बस की तरफ़ चल दिये। बस पूरी भर चुकी थी। हम दोनों आगे की डबल स्लीपर पर चढ़ गये…. हमने अपना सारा हिसाब जमाया और लेट गये…. पर्दा अच्छी तरह से खींच दिया। बस चल पड़ी। कुछ ही देर में बस की लाईट बंद हो गई और हमारे दिल में शैतान एक बार फिर से जाग उठा। बाहर अब हल्की सी बरसात होने लगी थी। ठण्डक बढ़ गई थी। हमने एक चादर ओढ़ ली।

कुछ ही देर में चादर के अन्दर कयामत टूट पड़ी। दीदी ने अपना कुर्ता ऊपर कर लिया और सलवार नीचे खींच ली। मैंने भी अपनी पैन्ट नीचे खींच ली। हम दोनों के लण्ड और चूत नीचे से खुले हुए थे। मैंने दीदी के चूतड़ों की दरार में अपना लण्ड दबा दिया। उसके गोल गोल मांसल चूतड़ की फ़ांके लण्ड के दबाव से खुलने लगी। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के छेद से टकरा गया।

“भैया आज तो गाण्ड भी हनीमून मनायेगी….!”

“चुप रह दीदी…. तेरी गाण्ड फ़ाड़ने को मन कर रहा है….!”

“फ़ाड़ दे मेरे मुन्ना….”

उसकी गाण्ड के छेद पर लण्ड ने अपना पूरा दबाव डाल दिया। मेरे लण्ड का रिंग उस छेद में अन्दर जा कर फ़ंस गया। अब मैंने और दीदी ने आराम की पोजीशन बना ली दोनो एक दूसरे से सट गये। दीदी ने भी अपनी गाण्ड पीछे उभार कर ढीली छोड़ दी। मैंने दीदी के बोबे पकड़ लिये और लण्ड अन्दर सरकाने लगा। मेरा लण्ड फिर मिठास से भरने लगा। मैंने अब धीरे धीरे लण्ड को अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया। मुझे मजा आने लग गया। बस के झटके और सहायता कर रहे थे।

काफ़ी देर तक तक मैं उसकी गाण्ड मारने का मजा लेता रहा ….फिर मुझे लगा कि दीदी तो बेचारी अब तक प्यासी ही है। ये सोचते हुये मैंने अपना लण्ड गाण्ड से निकाल कर पीछे से ही उसकी चूत में घुसेड़ दिया। आनन्द की तेज सिसकारी दीदी के मुँह से निकल पडी…. मैंने तुरन्त उसके मुँह को दबा दिया….दीदी की नरम नरम चूत एक बार फिर मेरे लण्ड में उत्तेजना भरने लगी। चूत में अन्दर बाहर करने से दीदी और मुझे असीम आनन्द आने लगा। मैंने अब धक्के जमा कर जोर से मारने शुरू कर दिये। दीदी का जिस्म मसकने लगा…. बल खाने लगा….उसे जबरदस्त मस्ती चढ़ने लगी….जिस्म थरथराने लगा….

‘मुन्ना….मुझे जकड़ ले बोबे मसल दे…. राम रे….!” और दोहरी होते हुए झड़ने लगी…. अचानक मेरे लण्ड ने भी जोर से पिचकारी छोड़ दी। हम दोनों लगभग साथ ही झड़ने लगे थे…. एक दूसरे को हमने भींच रखा था……..। हम शान्त होने लगे थे। दीदी की चूत के पास वीर्य फ़ैल रहा था। मैंने तुरन्त चादर खींच ली और साफ़ करने लगा। पर उसकी चूत से रह रह कर वीर्य आता ही जा रहा था। मैंने अपना साफ़ रूमाल निकाला और उसे दीदी की चूत के अन्दर थोड़ा सा डाल कर रख दिया। दीदी ने अपना सलवार कुर्ता ठीक कर लिया। मैं भी पैन्ट पहन कर लेट गया। सवेरे बस उदयपुर पहुंच चुकी थी…. हमने टूसीटर वाले से किसी होटल में ले जाने को कहा….अब हम होटल में चाय नाश्ता कर रहे थे….

“मुन्ना ….अपना तो ये हनीमून का सफ़र हो गया….”

“दीदी बहुत मजा आता है ना…. होटल में….बस में…. कितना चोदा….मजा आ गया….” हम दोनों आगे प्लान बनाने लगे….काम का कम और हनीमून का अधिक …. उदयपुर बहुत सुन्दर जगह थी इसलिये हमने अपना प्रोग्राम दो दिन और बढ़ा लिया था….साथ में हनीमून के दिन भी बढ़ गये….

दोस्तो यह मेरी पहली कहानी है….कृपया अपने विचार भेजें….धन्यवाद। Antarvasna

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