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हाय ! मैं दीपक, आपने मेरी Antarvasna कहानी स्कूल में मस्ती का पहला भाग पढ़ा और मुझे मेल भेजे!
शुक्रिया !
अब अगला भाग :-
मै फ़िर से निधि को चोदने का अवसर ढूंढने लगा. स्कूल में नए साल की पार्टी थी.
कार्यक्रम ७.३० शाम को था. सभी लड़के, लड़कियां ७ बजे से आने शुरू हो गए थे.
मैं बेसब्री से निधि का इंतजार कर रहा था. वो ८ बजे अपनी सहेली के साथ आई, उसने नीले रंग की जींस और लाल रंग की टी शर्ट पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी.
मैं देखता ही रह गया. उसकी तनी हुई चूचियां देख मेरा लंड पैंट के अंदर ही नाग की तरह फुफकारने लगा.
पार्टी देर तक चलने वाली थी तो मैं बाहर जाकर ड्रिंक कर आया. आते ही निधि को ढूंढने लगा. वो अपनी सहेलियों के साथ डांस कर रही थी.
मैंने इशारे से उसे अपने पास बुलाया. थोडी देर में वो मेरे पास आई तो मैंने उसे कहा कि आज मैं तुम्हे फ़िर चोदूंगा.
वो बोली- सर यहाँ इतने लोग हैं, कैसे हो पाएगा?
मैंने उसे बताया कि बस इंतजाम कर दिया है, तुम स्कूल के पीछे वाले टॉयलेट में पहुँचो.
मैं सीधा वहां गया, वहां दिन में भी कम लोग आते थे, रात को तो किसी के आने का सवाल ही नहीं था. निधि आई तो मैं उसे लेकर अन्दर घुस गया और दरवाज़ा बंद कर लिया.
फ़िर मैंने निधि को बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा. शराब की गंध उसके नाक में चढ़ गई.
उसने कहा- सर आपने शराब पी रखी है.
मैंने कहा- जानेमन ! पीकर चोदने में जितना मज़ा आता है उतना कभी नहीं आता, आज देखना मैं तुम्हे कितना मज़ा देता हूँ.
इतना कह कर मैंने उसकी टी-शर्ट खोल दी और ब्रा के ऊपर से ही चूचियां दबाने लगा.
निधि ने मेरी जिप खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और सहलाने लगी.
मैंने उसकी जींस खोल कर जाँघों से नीचे सरका दी और पैंटी में हाथ डाल कर चूत सहलाने लगा.
बीच बीच में एक ऊँगली अंदर बाहर करने लगा. वो जोर जोर से सिस्कारियां भरने लगी.
फ़िर मैंने निधि को लंड चूसने को कहा. वो मेरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.
मैं उसके सर को पकड़ कर उसके मुंह में अंदर बाहर करके चोदने लगा.
फ़िर मैं उसको फर्श पर लिटा कर उसकी चूत चाटने लगा. वो जोर जोर से आहें भरने लगी.
फ़िर मैंने उसकी टाँगें उठा के अपना लंड उसकी चूत से भिड़ा दिया और एक जोरदार धक्के से उसको निधि की चूत में घुसा दिया. उसकी आह निकल गई.
वो भी अपनी कमर उठा उठा कर धक्कों में मेरा साथ देने लगी और बड़बड़ाने लगी- ओ यस और जोर से सररर फाड़ दो मेरीई ई ई चुत्त्त जोर से सररर !
मैंने रफ्तार बढ़ा दी.
निधि भी नीचे से मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी. थोडी देर में उसने पानी छोड़ दिया पर मेरा काम नहीं हुआ था क्योंकि मैंने शराब पी रखी थी.
इसलिए मैं धक्के मारता रहा.
निधि गिडगिडाने लगी- सर निकाल लीजिए अपना लंड चूत से मुझे बुरा लग रहा है, दर्द हो रहा है.
मैंने कहा मेरा काम अभी नहीं हुआ है और मैं अपना मज़ा अधूरा नहीं छोड़ सकता.
प्लीज़ सर ! आप कुछ भी कर लीजिए पर लंड चूत से निकाल लीजिए, अब मैं सहन नहीं कर सकती.
मुझे यही चाहिए था क्योंकि मै उसकी गांड मारना चाहता था. मैंने थोड़ा सोचने का नाटक किया और कहा – तुम सब करने को तैयार हो जो मै चाहूँ?
तो उसने कहा – हाँ सर आप जो कहेंगे मैं करने को तैयार हूँ, लेकिन आप पहले लंड बाहर निकालो.
मैंने लंड बाहर खींच लिया और निधि को घुटनों के बल कर दिया और उसकी गाण्ड पर थूक लगा कर एक उंगली अंदर बाहर करने लगा.
मेरा ऐसा करने पर निधि बोली- सर ! आप यह क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा – अब मै तेरी गांड मारूंगा.
तो वो कुछ नहीं बोली. शायद उसे पता नहीं था कि गाण्ड मरवाने से उसका क्या हाल होगा।
फ़िर मैंने अपने लंड का अग्र भाग उसकी गाण्ड के छेद पर रखा और जोर से धकेलने लगा.
जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उसकी गांड में घुसा, वो जोर जोर से चीखने लगी. वो रोने लगी थी और छोड़ देने को कह रही थी, पर मैंने अपना काम जारी रखा और उसे समझाया कि बस थोड़ा और दर्द होगा जैसे पहली बार चूत की चुदाई में हुआ था, फ़िर बहुत मज़ा आएगा।
बाहर संगीत की आवाज़ तेज़ होने के कारण उसकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी. मैं और जोर लगा कर उसकी गांड में लंड घुसाने लगा.
जैसे जैसे मेरा लंड निधि की गांड में जा रहा था वैसे वैसे उसकी चीखें तेज़ होने लगी, लेकिन मैं पूरा लंड घुसा कर ही रुका.
फ़िर मैं लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. अब निधि की चीखें कुछ कम हो गई और वो भी धक्कों में मेरा साथ देने लगी.
१५-२० मिनट चोदने के बाद अपना पानी उसकी गांड में छोड़ मै उसके ऊपर ही ढह गया.
फ़िर मैंने अपना लंड निकाल लिया और उठ कर कपडे पहन लिए.
मैंने उसे भी कपड़े पहनने के लिए कहा. उसने उठने की कोशिश की पर उसकी गांड में काफी दर्द होने के कारण उससे उठा नहीं गया.
मैंने उसे सहारा दे कर उठाया और कपड़े पहनाए.
निधि को चलने में परेशानी हो रही थी, उसे इस हालत में पार्टी में ले जाना उचित ना होता, इसलिए मैं उसे चुपके से गाड़ी में बिठा कर उसके घर के पास छोड़ आया.
इसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मै निधि को चोदता. Antarvasna
हाय ! मेरा नाम राज है, मैं अपनी Hindi Porn Stories कहानी लिखने जा रहा हूँ। वैसे मैं आगरा से हूँ। मेरा कद ५’८.३” है, दिखने में भी ठीक हूँ।
एक दिन मैं नेट पर संवाद कर रहा था तो मुझे एक लड़की मिली जिसका नाम था श्रुति (बदला हुआ नाम), हम दोनों रोज बात किया करते थे। करीब एक साल बात करी हम दोनों ने !
एक दिन वो आगरा आई अपना पेपर देने ! तब उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया। मैं गया मिलने तो उसे देखा। वो सलवार और सूट में थी। मैंने सोचा- अगर यह लड़की मेरी गर्ल-फ़्रेन्ड बन जाए तो कैसा रहेगा। तब मैं उसे मन ही मन में जीन्स और टॉप पहने हुए सोचने लगा। मुझे सोच कर अच्छा लगा। मैंने उससे करीब १० मिनट ही बात की और वो चली गई। मैं भी घर आ गया और उसे मोबाइल पर ही प्रोपोज़ कर दिया।
शाम तक वो मान गई। ऐसे करते करते काफ़ी समय निकल गया और वो मुझ पर विश्वास करने लगी। तब एक दिन मैंने उसे सेक्स के लिए कहा।
पहले उसने कहा- यह संभव नहीं है।
मेरे मनाने पर वो मान गई।
हाँ ! मैं उसक बारे में बताना ही भूल गया। उसका बदन की क्या कहूँ, एक दम मस्त ३४ २९ ३२ ! तो मैंने एक दिन अपने दोस्त का कमरा ले लिया और उसकी चुदाई का प्रोग्राम बनाया। जब हम कमरे में गये तो मैंने जाते ही उसे चूमना शुरू कर दिया। करीब २० मिनट तक किस करता रहा मैं ! उसकी सांसें तेज होने लगी और मेरा हाथ उसकी चूत तक पहुंच गया।
वो गर्म होती जा रही थी। तब मैंने उसकी जींस और फिर टॉप उतार दिया। माँ कसम, क्या कयामत लग रही थी ! अगर मुर्दा उसे देख ले तो फिर से जिन्दा हो जाये ! चुम्मा-चाटी के बाद मैंने उसकी चूत पर चूसना शुरू किया।
वो बोली- राज ! प्लीज़ मत करो ! कुछ हो रहा है !
मैंने कहा- अभी बहुत कुछ होना है डार्लिंग !
मैं नहीं हटा और चूसता रहा। इतने में वो झड़ गई लेकिन मैं अभी तो शुरू ही हुआ था। मैंने अपना लण्ड निकाला।
उसने देखते ही कहा- इसे मत डालना ! मैं मर जाउँगी !
वैसे मेरा लण्ड ज्यादा बड़ा नहीं है, बस ७ इंच का है और ३.४ मोटा है।
मैं कहाँ मानने वाला था ! मैंने उसकी चूत में लण्ड को रखा और थोड़ा अंदर किया। वो बोली- बस रुको यहीं पर !
मैं थोड़ा सा रुका लेकिन माना नहीं और एक दम झटके से लण्ड घुसा दिया।
वो चिल्ला उठी- मर गईईईऽऽऽ माआआआआआ फट गई मेरीऽऽऽ !
मैंने उसके होंटों पर अपने होंट रख दिए और तब मैं बहुत धीरे-धीरे कर रहा था जिससे उसे और दर्द ना हो !
फिर वो बोली- तेज करो राज !
मैं तेज तेज करने लगा। करीब २५ मिनट में दो बार झड़ गई। कुछ देर के बाद मैं भी उसकी चूत में झड़ गया और कुछ देर तक ऐसे ही गिरे पड़े रहे।
जब हम उठे, मैंने कहा- एक बार और डार्लिंग !
उसने कहा- ओके !
लेकिन उसे नहीं पता कि इस बार उसकी गांड की बारी है !
मैंने उसे कहा- घोड़ी बन जाओ !
वो बन गई और बोली- प्लीज़, इस बार धीरे करना !
मैंने कहा- ओके !
लेकिन मुझे कहाँ मानना था। मैंने सीधे उसकी गांड की बारी लगा दी। सिर्फ ३ झटकों में मेरा पूरा अन्दर चला गया।
वो बोली- राआआआआआआज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज !
और मैं रुक गया। कुछ देर बाद जब उसका दर्द बंद हुआ तो बोली- तेज तेज करो !
मैं करता गया, करता गया और इस बार मैं ४५ मिनट तक चोदता रहा। हम दोनों एकदम पसीने में नहा गये थे। ४५ मिनट बाद मेरा पूरा पानी उसकी गांड में था और मैं वैसे ही उसके ऊपर गिर गया और हमारी आंख लग गई। दो घण्टे बाद हम दोनों उठे और नहाये, एक दूसरे को किस किया और होटल में जाकर डिनर किया।
लेकिन श्रुति से चला नहीं जा रहा था।
वो दिन हम दोनों को आज तक याद है ! उसके बाद भी हमने बहुत बार चुदाई की, लेकिन पहली चुदाई तो पहली ही होती है ना !
आप सबको मेरी कहनी कैसी लगी?
अगर कोई गलती हो तो माफ़ करना और अपने विचार मुझे मेल करियेगा। Hindi Porn Stories
लेस्बियन वाइफ देसी कहानी में पढ़ें कि मेरी शादी हुई तो मेरी दुल्हन को चुदाई में ज़रा भी रूचि नहीं थी. वह मेरे सामने लेट जाती, मैं उसे चोद देता. तो मैंने अपनी एक दोस्त की मदद ली.
मेरे एक दोस्त संतोष ने अपने जीवन की यह कहानी मुझे बताई।
उसकी अनुमति से मैं यह कहानी अन्तर्वासना पर प्रकाशित करवा रहा हूँ पात्रों के नाम बदलकर!
लेस्बियन वाइफ देसी कहानी संतोष के शब्दों में:
मैं संतोष … जब से जवान हुआ बहुत सेक्सी था।
मेरे छोटे शहर में अच्छा कॉलेज नहीं था तो मैंने पुणे में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की.
22 वर्ष की उम्र में मुझे पुणे में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिली।
23 साल की उम्र में मैंने तय किया मैं शादी करूँगा.
मेरी कोई प्रेमिका नहीं थी।
शादी के लिए लड़की ढूँढने ले लिए घर वालों को कैसे बोलूं, समझ नहीं आ रहा था।
तब मुझे अपने बचपन की दोस्त मोना का ख्याल आया.
मोना मेरे शहर की थी, बचपन में उसके साथ खेल कर बड़ा हुआ।
बाद में मैं पुणे चला गया।
मोना की शादी हो गयी थी, आजकल मोना अपने पति के साथ पुणे में रहती है.
मैं अक्सर उसके घर जाता हूँ, उसके पति से भी मेरी बनती है।
मैंने मोना का अपनी समस्या बताई तो मोना ने मेरे घर वालों को मेरी शादी के लिए मना लिया।
तब मैंने घर वालों की मदद से कुछ लड़कियां देखी।
मुझे रति पसन्द आयी, मेरी शादी हो गयी।
रति पढ़ी लिखी, सुन्दर, भरे बदन की थी।
हमारी शादी हमारे पुश्तैनी शहर में हुई.
अपने दोस्तों से मैंने उनकी सुहागरात की रोमांटिक कहानी सुनी हुई थी.
मेरे दोस्तों ने मुझे सलाह दी थी कि पत्नी से जबरदस्ती मत करना। पहले थोड़ी बात चीत करना, फिर धीरे धीरे चुम्बन से शुरु करना और आगे बढ़ना.
सुहागरात को रति घागरा चोली में सजकर पलंग पर बैठी थी.
मैंने उसका घूंघट उठाकर उसकी सुंदरता की तारीफ की, उसे उपहार दिया।
उसे मैंने अपने बारे में, मेरे कॉलेज, काम और परिवार के बारे में बताया।
मेरी बीवी रति ने भी उसके बारे में बताया।
जब मुझे लगा हमारा सही समय आ गया है आगे बढ़ने का तो मैंने रति के गाल और मस्तक चूमे।
रति ने विरोध नहीं किया.
मैं रति के होंठ चूमने लगा.
रति मुट्ठी भींचकर बैठी थी, मुझे लगा शर्मा रही है
मैंने रति को लिटा दिया, उसके चूचे चोली के ऊपर से दबाने लगा.
मैं बहुत उत्तेजित हो गया।
मैंने चोली उतारने की जल्दबाजी में चोली के कुछ हुक तोड़ दिए, चोली सामने से हटाकर ब्रा के ऊपर चूचे दबाने लगा, साथ ही मैं घागरे में हाथ डालकर रति की जाँघों पर हाथ फेरने लगा।
रति बिना विरोध किये लेटी थी.
जब मैंने घागरा उतारने की कोशिश की तो रति ने घागरा अपनी कमर तक ऊँचा करके कहा- पूरे कपड़े मत उतारिये. मैं थक गयी हूँ, आप ऐसे ही कर लीजिये, आपका हक़ बनता है।
मैंने रति की पैंटी उतार दी.
उसकी चूत पर हाथ फेरकर महसूस किया तो चूत एकदम सूखी थी।
लेकिन मैंने पढ़ा था और दोस्तों से सुना थाकि जब स्त्री गर्म हो जाती है तो उसकी चूत से रस निकलता है, गीली हो जाती है.
पर मेरी दुल्हन रति की चूत सूखी थी.
मैंने अपना पजामा उतारा और खड़ा लंड चूत में डालने की कोशिश की.
लंड चूत में नहीं जा रहा था.
रति मुट्ठी भींचकर मुँह साइड में करकर चित लेटी थी, जैसे झेल रही हो.
इसी कोशिश में मैं झड़ गया, मेरा वीर्य रति की जाँघों पर गिरा।
मैंने रूमाल से वीर्य साफ़ किया, रति ने घागरा अपने पैरों की तरफ किया, चोली पहनी और करवट लेकर सो गयी।
तब मैंने अपना पजामा पहना और निराश सा सो गया.
सुबह मैंने अपने शादीशुदा दोस्त से सब कहा।
दोस्त बोला- पहली बार ऐसा बहुतों के साथ होता है। संतोष, तू आज रात बीवी के पास जाने से पहले हस्तमैथुन करके जाना. इससे तुझे जोश देरी से आएगा और तू जल्दी नहीं झड़ेगा. और डालने से पहले लंड पर नारियल का तेल लगा लेना.
रात को जब मैं बैडरूम में गया तो रति ने नाइटी पहनी थी।
मैं रति को चित लिटाकर उसके होंठ चूमने लगा.
सिर्फ मैं ही चूम रहा था, रति नहीं!
उसने अपना मुँह बंद कर रखा था, मैं उसके होंठ अच्छे से चूस नहीं सका।
रति की नाइटी सामने से खुलती थी, मैंने नाइटी खोल दी, उसका पूरा बदन ब्रा पैंटी में दिख था, सिर्फ कंधों पर और पीछे नाइटी थी.
मेरी देसी वाइफ ने नाइटी पूरी नहीं उतारने दी.
मैं ब्रा के ऊपर चूचे दबाने लगा.
फिर मैंने उसकी पैंटी उतार दी.
मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और चूत में डालने की कोशिश की.
परन्तु मुझे चूत का छेद नहीं मिल रहा था.
तब रति ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत की छेद पर रखा.
मैंने झटके से लंड चूत में डाल दिया।
रति आ आ करने लगी, उसकी आंखों में आंसू आ गए।
मैंने कहा- ज्यादा दर्द हो रहा है तो थोड़ा रुकता हूँ।
रति बोली- मेरी फ़िक्र मत करिये, आप कर लीजिये, पति का हक़ बनता है।
मैं चुदाई करने लगा.
रति मुर्दे की तरह लेटी रही, ना मना किया न सम्भोग में उत्साह दिखाया।
मैं थोड़ी देर में चूत में झड़ गया.
कुछ पल बाद मैं रति के ऊपर से उतर गया.
चादर में रति की सील टूटने से खून लगा था।
रति ने चादर बदली, बाथरूम से आकर कपड़े पहनकर सो गयी।
मुझे अपनी दुल्हन की पहली चुदाई में उतना मजा नहीं आया जिसकी मैंने कल्पना की थी।
मैं और रति पुणे चले गए, जंहा मैं नौकरी करता था।
मेरे बचपन की दोस्त मोना और उसके पति ने मेरे फ्लैट को सजा रखा था, उन्होंने हमारा स्वागत किया।
मैंने शादी के समय रति की मुलाकात मोना से कराई थी।
मोना ने छोटी सी पार्टी का इंतजाम किया था, पार्टी के बाद दोनों चले गए.
रति ने फ्लैट सलीके से सजाया, वह अच्छा खाना बनाती।
रात को रति सामने से खुलने वाला नाइटी पहनती थी पर सम्भोग के समय वह नाइटी सामने से खोलकर कहती- जल्दी कर लीजिये।
रति मोना ब्रा भी नहीं उतारती, नाइटी भी पूरी नहीं उतारती.
मैं उसकी पैंटी उतारकर बेमन से सम्भोग करता।
रति की चूत से कभी रस नहीं निकलता, हर बार मुझे लंड पर तेल लगाना पड़ता.
ऐसे ही एक महीना बीत गया.
मैंने रति के सेक्स में ठंडी होने की समस्या की बात मोना को बताने का निर्णय किया यह सोच कर कि शायद मोना कोई हल निकाल सके।
मेरे और मोना के बीच कोई पर्दा नहीं था।
मैं और मोना बचपन में डॉक्टर डॉक्टर खेलते थे। कभी मैं डॉक्टर बन जाता और मोना के जनन अंगों ( चूत, चूची ) की जाँच करता, कभी मोना डॉक्टर बनकर मेरे लुल्ली की जाँच करती।
थोड़ा बड़ा होने पर जब मेरा लंड खड़ा होने लगा, मोना सोये लंड को सहलाकर कहती- जादू से बड़ा हो जा!
लंड बड़ा होने पर वह खुश होती।
मोना के चूचे जब बड़े होने लगे, वह मुझे दिखाती।
हम इससे आगे नहीं बढ़े.
बाद में मैं कॉलेज में पढ़ने पुणे चला गया.
एक दिन मैंने मोना को फ़ोन किया, कहा कि मैंने उससे अकेले में मिलना है।
मैं ऑफिस से जल्दी छुट्टी लेकर मोना के घर गया।
वहां उसे मैंने रति के सेक्स में ठंडी होने की बात विस्तार से बताई।
जब मोना ने सुना कि रति की चूत कभी गीली नहीं होती, कामरस नहीं निकलता तो मोना बोली- शायद रति को किसी कारण उत्तेजना नहीं आती, मैं रति से निकटता बढ़ाकर कारण जानने की कोशिश करुँगी। यदि इससे बात नहीं बनी तो डॉक्टर से सलाह करना।
मोना ने पूछा- संतोष क्या मोना ने हॉस्टल में रहकर पढाई की?
मैंने कहा- हाँ, रति कॉलेज हॉस्टल में रहती थी. पर इसे मोना के ठंडी होने का क्या सम्बंध?
मोना बोली- ऐसे ही पूछ लिया!
अगले दिन से जब मैं ऑफिस में होता मोना रोज रति से मिलने आने लगी.
कभी रति मोना के घर जाती, दोनों मिलकर बाजार जाती, नए नए खाने बनाती, घूमती, मूवी देखती।
यह सब मुझे रति ने बताया।
एक हफ्ते बाद रति कुछ ज्यादा ही खुश दिखने लगी.
ऐसे ही दो सप्ताह बीत गए.
मोना ने मुझे अकेले मिलने बुलाया।
मिलने पर मोना बोली- संतोष, तुम अपनी पत्नी रति को बिस्तर पर गर्म करने के लिए उसकी चूत चूमा करो, चूत में जीभ डालकर चूसा करो, भगनासा पर उंगली फिराओ।
मैंने कहा- मुझे चूत चूसनी नहीं आती।
मोना बोली- सीख जाओगे, मुझे विश्वास है रति तुम्हें सिखा देगी।
मैंने पूछा- मोना तुमको कैसे मालूम हुआ?
मोना बोली- यह नहीं पूछो, जैसा कहा वैसा करो!
रात को मैंने रति को चूमना शुरू किया.
उसने नाइटी सामने से खोल दी, मुट्ठी भींचकर अकड़ कर चित लेट गयी।
मैंने रति की पैंटी उतारी और उसकी चूत चूमने लगा.
रति ने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया, पैर और फैला दिए।
मैं चूत में जीभ डालकर चूत चूसने लगा, भगनासा पर उंगली फेरने लगा।
रति सी सी सीत्कारी लेने लगी, मेरे सर को चूत की तरफ दबाने लगी, मचलने लगी।
उसकी चूत से पहली बार कामरस की धार बहने लगी।
रति ने अपनी ब्रा उतार दी, वह अपने चूचे दबाने लगी.
रति बुदबुदा कर बोली- अब रहा नहीं जा रहा, जल्दी से डाल दो!
उसने पहली बार नाइटी पूरी उतार दी।
मैंने लंड बिना तेल लगाए डाला, चूत गीली होने से आसानी से लंड चूत में चला गया।
मैं धीरे धीरे चोदने लगा, चूचे दबाने लगा, चूचे चूसने लगा।
रति कमर उछालकर साथ देने लगी।
वह बोली- और जोर से!
मैंने चोदने की गति बढ़ा दी.
करीब 15 मिनट बाद रति की चूत से रस का फव्वारा निकला.
इसके बाद वह निढाल लेट गयी.
मैंने अपनी पत्नी की चुदाई जारी रखी, थोड़ी देर में मैं रति की चूत में झड़ गया।
रति लेटे लेटे मुस्कुरा रही थी, उसके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।
मुझे पहली बार सम्भोग में इतना आनंद आया.
रति बाथरूम से होकर आयी और नंगी ही लेट गयी.
मैं बाथरूम से लंड धोकर आया।
रति के पास लेटकर मैंने उसके ओठों पर चुम्बन लेकर कहा- कैसा रहा?
उसने मेरी छाती में मुँह छिपा लिया, मेरे बालों पर हाथ फेरने लगी.
मैं रति की पीठ पर हाथ फेरने लगा।
मुझे लगा कि रति की एक बार फिर सम्भोग की इच्छा हो रही है.
मैंने रति के कान में कहा- मेरा चूसोगी?
रति ने हाँ में सर हिलाया.
हम 69 पोजीशन में आ गए, मैं रति की चूत चूस रहा रहा था, रति मेरा लंड।
रति की चूत फिर से गीली हो गयी।
वह बोली- अब मेरी बारी है.
उसने मुझे चित लेटने को कहा, मेरा लंड चूत में लेकर रति उछलने लगी।
उसके भरे चूचे उछल रहे थे, मैं चूचे दबाने लगा।
थोड़ी देर बाद रति मेरे ऊपर से उतरकर बोली थक गयी।
मैंने रति को घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ी किया, फर्श पर खड़े होकर उसकी चूत में लंड डाला, उसकी कमर पकड़कर घमासान चुदाई की।
करीब आधा घंटे बाद हम दोनों झड़ गए और थककर नंगे ही सो गए.
दूसरे दिन मैंने ऑफिस से मोना को फ़ोन करकर कहा- मोना धन्यवाद! तुम्हारा बताया तरीका काम आया।
मोना बोली- दोस्ती में धन्यवाद नहीं! ऐश करो।
छुट्टी के दिन मैंने मोना और उसके पति को खाने पर बुलाया.
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रति आनंद से मचल रही थी, उसकी चूत से रस निकलने लगा.
वह बोली- अब शुरू करो।
मैंने रति की घमासान चुदाई की.
फिर रति के हाथ खोलकर उसे घोड़ी के समान खड़ा किया।
मैं पीछे से उसकी चुदाई कर रहा था और उसके कूल्हों पर चांटे मार रहा था।
हर चांटे के बाद रति को और जोश आता, वह कमर हिलाकर लंड और अंदर लेने की कोशिश करती.
कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए.
सुबह नाश्ते के बाद रति बोली- सन्तोष, तुम कपड़े उतारकर घोड़ा बन जाओ।
मैं घोड़ा बनकर पलंग पर खड़ा हो गया।
रति ने अपनी चुन्नी मेरे पीठ पर बाँधी, नंगी होकर मेरे पीठ पर चुन्नी को लगाम के समान पकड़कर बैठ गयी, उसके हाथ में लकड़ी का स्केल था।
उसने कहा- आइने में देखो।
मैंने देखा कि रति स्केल को तलवार के समान पकड़कर मेरे पीठ पर बैठी है, उसके चूचे तने थे, बहुत सुन्दर सेक्सी दिख रही थी।
रति ने स्केल मेरे कूल्हे पर मारकर कहा- चल मेरे लौड़े … ओह सॉरी घोड़े!
मैं चलने लगा.
हम दोनों हंस रहे थे.
थोड़ी देर बाद मैंने कहा- घोड़ा थक गया है.
रति उतर गयी।
उसने मुझे चित लिटाकर मेरे हाथ पलंग पर बांध दिये, काला चश्मा पहना दिया.
मुझे कुछ दिख नहीं रहा था।
रति मेरा लंड चूसने लगी.
मेरा लंड उछलने लगा।
रति ने चूत मेरे मुँह पर रखकर कहा- चूसो!
मैं पत्नी की चूत चूसने लगा.
उसका कामरस मेरे मुँह के अंदर जा रहा था।
कुछ देर बाद रति मेरे लंड को चूत में लेकर मेरी सवारी करने लगी.
काफी देर बाद वह झड़कर मेरे ऊपर लेट गयी।
मेरा लंड अभी भी खड़ा था।
रति ने लंड तब तक चूसा जब तक मैं नहीं झड़ा, उसने मेरा वीर्य पी लिया।
मैंने फ़ोन करके मोना को बताया- BDSM का वीडियो रति को बहुत पसन्द आया, हमने करा भी!
मैं- मोना, तेरी सलाह से मेरी जिंदगी बदल गयी. मैं तुझे उपहार देना चाहता हूँ, क्या चाहिए? और एक बात, तुझे कैसे मालूम पड़ा कि रति को सेक्स में क्या पसंद है?
मोना बोली- मैंने उपहार ले लिया है। संतोष, तूने बताया था कि हॉस्टल में तूने अपने रूम पार्टनर के साथ गे सम्भोग का मजा लिया. ठीक उसी तरह लड़कियां भी लेस्बियन सेक्स का आनंद हॉस्टल में लेती हैं. मैंने इसीलिए पूछा था रति ने क्या हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की? मैं भी हॉस्टल में रहती थी। मैंने रति से दोस्ती की, तेरी वाइफ लेस्बियन थी. मैंने उसके साथ लेस्बियन सेक्स का आनंद लिया, यही मेरा उपहार है। रति को क्या अच्छा लगता है, यह मालूम हो गया, मैंने तुझे बता दिया। इस बात की चर्चा रति से मत करना। रति यदि लेस्बियन नहीं होती तो भी मालूम हो जाता! पर समय लगता, हम औरतें अपने से जीवन की बातें एक दूसरी को बताती हैं.
मेरी ठंडी बीवी अब सेक्सी बीवी हो गयी है.
तब से अक्सर हम BDSM का खेल खेलते हैं.
हम खूब मजे करते हैं.
मैं ऍम बी ए का स्टुडेंट हूँ। मैं जिस कॉलेज Antarvasna में हूँ, वो इस शहर का सबसे मशहूर कॉलेज है। हमारे कॉलेज के बगल में ही हमारे कॉलेज ग्रुप का ही इंजीनियरिंग का भी कॉलेज है। मैंने आपको अपना नाम नहीं बताया मेरा नाम है राज। इंजीनियरिंग की एक मैडम है जिनका नाम अन्नु है, जो कि बहुत ही खूबसूरत है। जब से मैंने यहाँ प्रवेश लिया है और उनको देखा है हमेशा उनको कहीं न कहीं देखता रहता हूँ, कभी कभी वो भी देखती है तो मेरी आँखे उनसे टकराती हैं तो वो मुस्कुरा देती हैं, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ जाती है। उनका फिगर 36-28-34 है जो कि बहुत ही सेक्सी है। वो गोरी तो है ही।
मैं हमेशा उनके लंच टाइम पर कैंटीन पहुच जाता और उनको देखने लगता। मुझे ऐसा लगने लगा था कि वो भी मुझे समझ रही है कि मैं उन्हें पसंद करने लगा हूँ, उनकी उम्र भी तो मेरे बराबर ही थी, वो अभी 24 की है, बी.ई ख़त्म करके ही पढ़ाना शुरू कर दिया है। हमेशा वो बहुत कसा हुआ ड्रेस पहनती है जिससे उनके पूरे उभार दीखते हैं। जिन्हें देख कर कैंटीन में ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। अब मैं हमेशा उनके पास जाने की सोचने लगा, मुझे जल्दी ही उनके पास जाने का मौका मिल गया।
एक दिन कॉलेज छूटने के बाद मैं अपनी बस में बैठ गया। आज बहुत भीड़ थी बस में। मैं डबल सीट पे बैठा था, मेरे साथ मेरा एक जूनियर बैठा था। तभी मुझे अन्नु मैडम दिखी वो आकर खड़ी हो गई। जगह नहीं थी तो मैंने अपने जूनियर को उठाया और बोला- मैडम यहाँ बैठ जाइये!
तो वो तुंरत आकर बैठ गई और बोली- थैंक यू!
मैं सिर्फ़ मुस्कुरा दिया।
हम लोग बीच में थे और चारो तरफ़ स्टुडेंट खड़े भी थे, सो हम लोग दिखाई नहीं दे रहे थे। पर वो बाहर साइड थी तो उन प्रॉब्लम हो रही थी। बार बार उन्हें किसी से धक्का लगता तो उन्होंने बोला- प्लीज़ आप बाहर साइड आ जाइये, मुझे प्रॉब्लम हो रही है।
तो मैंने बोला- ठीक है आप अन्दर आ जाइये।
फिर वो अन्दर होके बैठ गई। बस जब भी मुड़ती तो मैं उनके ऊपर या वो मेरे ऊपर आती और हम लोग सॉरी बोलते।
अब मैंने अपना एक हाथ ऐसे कर लिया कि जब भी बस मुड़ती तो मेरी 2-4 ऊँगलियाँ उनकी चुचियों से टकरा जाती तो मैं उनको देखता वो मुस्कुरा देती। मैं समझ गया लाइन साफ़ है, बस मौका ढूंढो और चोदो। अब मैंने अपना एक हाथ उनकी जांघों पर रखा और थोड़ा सहलाया तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ के दबा दिया और मुझे रोक लिया, तभी बस रुकी उनका स्टाप आ गया तो उन्होंने बोला- उठो मुझे जाना है।
मैंने बोला- मुझे भी तो उतरना है।
फिर दोनों उतर गए तो वो मुझसे बोली- तुम क्यों उतरे? वैसे तुम्हारा नाम क्या है?
मैंने बोला- मेरा नाम राज है और मुझे आज तो आपसे कुछ लेना है सो मैं भी उतर गया।
तो वो गहरी मुस्कराहट से हुए बोली- क्या लेना है?
मैंने बोला- आपका नम्बर चाहिए, मुझे आपसे बात करनी है, बहुत जरूरी है, अब तो रहा ही नहीं जाता।
वो बोली- तो बोलो क्या बात है, अभी बोल दो।
मैं बोला- नहीं आप नम्बर दीजिये मैं आपको फ़ोन करूँगा।
तो उन्होंने अपना नम्बर दे दिया। मैंने उसी रात उन्हें कॉल किया और रात के 11 से लेकर 1 बजे तक बात करता रहा। उस रात मैंने उन्हें प्रोपोज़ भी कर दिया और दोस्तों मेरी तो किस्मत चमक गई उन्होंने स्वीकार भी कर लिया।
अब तो मैं रात दिन सिर्फ़ उन्हें चोदने के बारे में सोचने लगा। वैसे बस में अब डेली मैं उन्हें कहीं न कहीं जरूर हाथ लगाता तो वो भी बुरा नहीं मानती, जिससे मेरी हिम्मत बढ़ती।
एक दिन तो मैंने अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया जिससे वो झन्ना गई और तेज़ी से सांस लेने लगी पर कुछ बोली नहीं, इसी तरह दिन निकलते रहे। मैं मौका ही तलाशता रहा।
किस्मत ने भी जल्दी ही मेरा साथ दिया और वो एक दिन मुझे स्टाप पर खड़ी हुई मिल गई उस टाइम बहुत तेज़ बरसात हो रही थी और वो कॉलेज से आई थी। वो पूरी तरह से भीग चुकी थी। मैंने उनसे बोला- मेरा रूम पास में ही है, चलिए, आप यहाँ कब तक खड़ी रहेंगी, पानी भी बंद नहीं होने वाला, पहले तो वो मना करती रही फिर मान गई। मैंने उन्हें अपनी बाईक पे बैठाया और चल दिया। फिर मेरे रूम पहुंचे।
मेरा एक सिंगल रूम है और मैं अकेला ही रहता हूँ, ये उनको भी मालूम था, मैंने उन्हें बैठाया और बोला- आप कपड़े चेंज कर लीजिये। जब तक मैं नीचे से आता हूँ।
फिर मैं उन्हें एक तौलिया देकर चला गया। मैंने दूध लिया फिर अचानक मैं मेडिकल में गया और वहाँ से कंडोम ले लिया सोचा-आज तो मौका नहीं जाने दूंगा चोद के ही रहूँगा।
मैं रूम में पंहुचा तो देखा कि वो अपने बालों को पौंछ रही है, क्या सेक्सी लग रही है। मैं उन्हें पलंग पर बैठा कर दरवाजा बंद करके चाय बनने लगा और वो मुझे ही देख रही थी। मैं चाय बनाकर लाया और पलंग पर बैठ गया। पलंग ज्यादा बड़ा नहीं है सो अच्छे से नहीं बैठ सकते थे।
उन्हें अच्छे से बैठना था तो मैंने बोला- आप आराम से पैरों को फैला कर बैठ जाइए।
तो वो बैठ गई, चाय पीने लगे, मैं उनकी आँखों में देखने लगा तो वो बोली- क्या देख रहे हो?
मैं बोला- देख रहा हूँ आप कितनी खूबसूरत हैं और आज कितनी सेक्सी लग रही है, प्लीज़ आज मुझे कुछ करने दीजिये!
अन्नु बोली- तुम्हारा मतलब क्या है?
मैं बोला- वही जो आप समझ रही हैं, मैं कब से ऐसे मौके की तलाश में था जब आप मेरे साथ अकेली हो और फिर मैं आपको अच्छे से प्यार कर सकूं, आप भी आज मुझे प्यार करिए।
इतना बोलकर मैं उनके गालो को सहलाने लगा तो उन्होंने मुझे रोका तो नहीं पर बोली- नहीं ये ठीक नहीं है।
मैंने बोला- जिसमे आपको और मुझे मजा आए वही ठीक है।
फिर मैं अपने होंठ उनके होंठों के पास ले गया और पास और फिर मेरे और उनके होंठ जो चिपके की चिपकते गए,बहुत ही जोरदार किस्सिंग चालू हो गई, जबान से जबान टकराने लगी, मैं उनकी पूरी जीभ को चबा जाना चाहता था। वो भी मेरी पूरी हेल्प कर रही थी, मैंने उन्हें किस करते करते ऊपर से नंगी कर दिया, चूँकि उन्होंने मेरा रात का सूट पहन लिया था सो ब्रा तो थी नहीं। सो चुचियाँ तुंरत नंगी हो गई, जिन्हें देखकर मैं पगला गया और पागलों की तरह चुचियों को मसलने लगा, जिससे वो भी जल्दी ही उत्तेजित होने लगी।
फिर मैं रुका और उनसे बोला- आज पूरा दिन मैं और आप मिलकर चुदम-चुदाई का खेल खेलते हैं।
अन्नु बोली- अब तुमने मुझे गर्म कर दिया है तो पूरी प्यास तो बुझा ही देना!
मैंने पहले उसे और ख़ुद को पूरी तरह से नंगा कर दिया। उसके दूध जैसे गोरे बदन को देखकर मेरा लंड तुंरत फ़नफ़नाने लगा। मैंने उसकी चूत को देखा जो बालों से ढकी थी।
मैंने एक हाथ से उसके होंठो और एक हाथ से उसकी चूत को मसलना शुरू किया जिससे अन्नु स्स्स्स्स् स्स्स्स स्स्सस्श्ह्ह्ह् आआअ ह्हह्ह्ह्ह् की आवाजे निकलने लगी। उसे अब मजा आने लगा। वो मेरे अंगूठे को चूसने लगी। नीचे मेरा हाथ चिपचिपाने लगा, यानि की वो पूरी तरह से गर्म हो गई, तो बोली–राज प्लीज़ अब मुझसे नहीं रहा जाता, अपना लंड मेरी चूत में डालो वैसे ही बहुत खुजली हो रही है।
उसके इतना बोलते ही मैंने अपना लंड लिया और उसकी चूत का अन्नुना लगाया और जोर से धक्का मारा, वो आआअह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह करके चिल्ला उठी, लंड भी फिसल गया, उसकी चूत बहुत तंग थी, वो पहली बार चुदवा रही थी। मैंने फिर से अन्नुना लगाया और जोर से धक्का मारा इस बार लंड बुर में फस गया वो फिर चिल्ला उठी, अब तो मैंने जोर जोर से धक्के मार मार कर उसके अन्दर पहुंचने लगा, वो चिल्लाती रही, अब तो उनके मुँह से केवल आआ आअह्ह्ह्ह ऊऊह्ह म्म्म्ममा आआअर्र ग्ग्ग्गाआ आऐईईइ ,राज मुझे बहुत दर्द हो रहा है, प्लिज्जज्ज बहार निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।
मैंने बोला- अन्नु कुछ नहीं होगा बस थोड़ा सा और दर्द फिर मजा ही मजा आएगा।
फिर से मैं धक्के मारने लगा और साथ ही उसके होंठो को अपने होंठो से चूसने लगा जिससे वो ज्यादा चिल्ला न पाए। अब मेरे लंड का सबसे मोटा हिस्सा घुसना शुरू हुआ तो वो मेरे होंठो को बहुत जोर से चबाने लगी। अब लंड पूरी तरह से उसकी चूत की जड़ो में घुस गया तो अन्नु बोली-पूरा घुस गया?
मैं बोला- हाँ पूरा घुसेड दिया मैंने। अब शुरू करूँ?
अन्नु बोली- हाँ अब मारो धक्के!
फिर मैंने उसे लगातार धक्के मारना शुरू किया। वो फिर से चिल्लाने लगी- आआह्ह्ह्ह ह्ह्ह आआह्ह्ह
इतने में वो एक बार झड़ गई, जिससे उसकी चूत गीली हो गई और लंड थोड़ा अच्छे से अन्दर बाहर होने लगा। अब मेरे छोटे से रूम में केवल खचाखच फचफच आह्ह्ह्ह्छ ऊउउह्ह्छ की आवाजें आने लगी।
अब अन्नु भी पूरे जोश में आ गई। अपनी गांड उछाल उछाल के चुदवाने लगी, बोली- और जोर से डाल राज, आज मेरी चूत को पूरे बी ई का मजा दे दे, मैंने पूरे बी.ई. में नहीं चुदाया, मुझे नहीं मालूम था इतना मजा आता है। अब तो मैं डेली तुमसे चुदवाऊँगी और जोर से आआअह्ह ह्ह्ह्ह्ह!
उसकी बातों से मैं और जोश में आ गया और जोर से धक्के मारने लगा। करीब 50-55 धक्के मारने के बाद मैं उसके ऊपर गिर गया, मेरा पूरा वीर्य कंडोम में गिर गया, उसकी पूरी चूत खून से लाल हो गई। हम लोग थोड़ी देर ऐसे ही रहे। एक घंटे बाद मैं फिर तैयार हो गया और उसे चोदना शुरू किया।
मैंने उसकी गांड भी मारी, लेकिन वो कहानी बाद में, उस दिन मैं 5 कंडोम लेकर आया था और सभी मैं उपयोग में लाया, जमकर चुदाई की। Antarvasna
फ़रदीन भाई जान ने Antarvasna Stories मुझसे कहा कि आज मैं भी आप जैसा लिखूंगा, मैंने भी तो आपको चोदा है, मैं कहानी का स्वरूप लिखूंगा, बस आप उसे दिलचस्प बना देना। मेरे साथ फ़रदीन ने कैसे अपनी रंगीनियाँ बिखेरी, यह उसकी दस्तान है। वो इस तरह से अपनी आप बीती लिखते हैं…
मैं कानपुर में रहता था और अब्बू के साथ दुकान पर काम करता था। मेरे ही घर के आंगन में एक अखाड़ा भी था जहा उस्ताद उस्मान चाचा अपने पठ्ठों को पहलवानी का अभ्यास कराया करते थे। मैं तो बचपन से ही अखाड़े में बड़ा हुआ था अतः मेरा शरीर एक दम चिकना और इकहरा था। जवान होते होते तो मेरा रंग रूप और भी निखर आया था। पर उसमान चाचा हमें लड़कियों से दूर रखते थे। मेरे शरीर पर एक भी बाल नहीं था सिवाय मेरे लण्ड के आसपास नरम सी झांटों के, हां कुछ बाल मेरी बगल में भी थे। शमीम बानो के अब्बू मेरे अब्बू के बहुत पुराने दोस्त थे, उनकी दुकान पर काम करने वाला दो महीनों की छुट्टी पर चला गया था सो उन्होंने मुझे बुला लिया था। मैं वाराणसी पहुंच गया था। बानो मुझे लेने स्टेशन पर आई थी।
बानो के पति भी अपनी दुकान चलाया करते थे। उनके अब्बू ने उन्हें छत के ऊपर वाला भाग दे दिया था। उनके पति हैदराबाद से थे। मुझे भी ऊपर ही गैलरी के दूसरी तरफ़ का कमरा रहने को दे दिया था। मैं शाम को ही दुकान से फ़्री हो पाता था। फ़ारूख भाई जान और शमीम आपा शाम को रोज दारू पीते थे और पीते क्या थे, पी कर बिलकुल टुन्न हो जाते थे। कभी कभी तो वो खूब प्यार करते थे और कभी कभी तो खूब झगड़ते थे। प्यार करें या झगड़ा, उनमें गाली-गलौज का व्यव्हार बहुत होता था। यूँ तो मेरे लिये यह माहौल नया नहीं था, मेरे घर पर भी यही सब कुछ होता था। धीरे धीरे अब्दुल, फ़िरोज, अनवर आदि आपा के सभी दोस्तों से मेरा मिलना हो चुका था। तभी मुझे पता चला कि शमीम आपा तो बहुत ही रंगीन मिजाज की है, उनके दोस्तों का उनसे रिश्ता मुझे मालूम हो चुका था।
मैं आजकल काम से फ़ारिग हो कर शाम को नहा धो कर गैलरी के पास की खिड़की से शमीम आपा और उसके पति की मस्तियों को देखा करता था। आज भी मैंने उनके लिये भुना हुआ गोश्त और सलाद रख दिया था। वो भी नहा धो कर दारू पीने बैठ गये थे। पीते पीते कुछ ही देर में उन पर दारू का नशा चढ़ने लगा था और दोनों ही अश्लीलता पर उतर आये थे। फ़ारूख ने बानो को अपने ही पास सोफ़े पर बैठा लिया था और उसकी चूचियों से खेलने लगे थे।
“बानो, तेरी चूचियाँ अभी तक कड़क कैसे है, भोसड़ी की कैसी तन कर खड़ी हो जाती हैं !”
“तेरे लण्ड के लिये मैंने कुछ कहा है क्या कि इतना मस्त कैसे है, भेनचोद, कैसा इठला इठला कर मेरा दिल जीत लेता है साला !”
कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को नोचने खसोटने लगे। कमरे में आहें गूंजने लगी। उन्हें देख कर मेरा दिल भी पिघलने लगा। मेरा लण्ड फ़ूल कर फ़ड़क उठा। मैं कुंवारा, बेचारा यह सब देख कर मन मसोस कर रह गया। मेरा गोरा लण्ड बार बार कुलांचे मारने लगा। बानो आपा की गाण्ड को देख कर और फिर गाण्ड की चुदाई देख कर मेरा वीर्य उछल कर लण्ड से बाहर आ गया। मेरा पजामा गीला हो गया। हाय रे, बानो की मां की भोसड़ी… भेनचोद को मन करता है कि चोद डालूँ ! रात भर उनकी चुदाई को सोच सोच कर मेरा लण्ड पानी छोड़ता रहता था। आखिर कितनी बार मुठ मारूँ … यह तो उनकी रोज की बात थी।
दुकान का सामान लेने फ़ारूख भाई को दिल्ली जाना था। वो शाम की गाड़ी से दिल्ली चले गये थे।
रोज की तरह मैं रात को भुना हुआ गोश्त बानो के कमरे में रख आया था। दारू की बोतल भी बैठक में सजा दी थी। तभी बानो नहा धो कर सिर्फ़ पेटीकोट और एक बिना ब्रा के ब्लाऊज में बाहर आई। ओह ! मैं उसे देखता ही रह गया। वो तो सच में रूप की देवी थी, उसका भरा बदन, उसके उरोज, उसके मद भरे चूतड़ों के उभार, इतने पास से पहली बार देख रहा था। खिड़की से तो उस बड़े कमरे में दूर से तो उसका मद भरा हुस्न इतना कुछ नहीं नजर आता था। मुझे यूँ घूरता देख कर बानो ने सब कुछ भांप लिया। वो जानबूझ कर के मेरे बिल्कुल पास आ गई। उसके शरीर की खुशबू मेरे नथनों में समा गई। हाय! उसके शराबी गोल गोल स्तनों के उभार मेरे दिल को घायल कर रहे थे। मेरे शरीर में एक विचित्र सी सनसनी फ़ैलने लगी।
“यहाँ गिलास रख दे … और भेन चोद यूँ आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर क्या देख रहा है?”
“ह… हाँ … वो कुछ नहीं… मैं चलता हूँ !”
“अरे चलता हूँ …तेरी तो … यहीं बैठ भोसड़ी के …मेरे साथ दारू कौन पियेगा … तेरा बाप ?”
“पर मैं तो नहीं पीता हूँ आपा … आप लीजिये…”
“अच्छा मत पीना, बैठ तो सही, मेरे लिये पेग बनाना … और ये बोटी तो खायेगा ना !”
मैं उसके कहने के अन्दाज से चौंक गया। उसका इशारा तो उरोज की तरफ़ था, पर बात वो गोश्त की कर रही थी। मैं झेंप गया और एक टुकड़ा उठा कर खा लिया। उसका दारू का दौर शुरू हो गया। साथ में उसका गाली-गलौज और अश्लील हरकतें भी।
“ऐ फ़रदीन, तूने कभी कोई लौंडिया चोदी है…?”
“कैसी बातें करती हो आपा… ?”
“अरे बता ना … तेरी उम्र में तो मेरे कितने ही दोस्त थे… साले सब हारामी थे … मैंने तो खूब चुदाया।”
“क्या बताऊँ, उस्ताद ने कहा है कि किसी लड़की की तरफ़ देखा भी तो वो हमारी गाण्ड मार देगा।”
“अरे वो तो लड़की के लिये बोला था ना, मैं लड़की थोड़े ही हूँ, मैं तो औरत हूँ 27 साल की !”
“ओह हाँ, आपा … फिर आप तो मेरी आपा हैं ना, कोई लड़की तो हो नहीं … पर आपा…?”
“ओये होये, मेरे भाई जान, ले पास आ जा, अब तो ठीक है ना, मेरी बोटी चूसेगा?”
उसने अपना, एक चूचा पकड़ कर मुझे देख कर हिलाया और फिर दबा दिया। मैं तो अन्दर तक हिल गया। ये क्या कह रही है बानो ! मेरा मन तो पहले ही उस पर लट्टू था। मैं शरमा गया। वो मेरे पास सरक आई और उसने अपने ब्लाऊज का बटन खोल कर उसे ढीला कर लिया। उसने अपना एक चूचा बाहर निकाल लिया।
“ले तो, समझ ले अम्मी का बोबा चूस रहा है…!”
“आपा, यह क्या कह रही हैं आप…?”
उसने कुछ नशे की झोंक में, कुछ वासना के नशे में मेरे गले में हाथ डाल कर मेरा मुख अपने बोबे पर दबा दिया। हाय रे मेरी अम्मी जान ! यह क्या… मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे होंठ अनायास खुल गये और उसकी चूची पर जम गये।
“अल्लाह रे, मजा आ गया … तू तो भोसड़ी का बड़ा नमकीन है रे !”
मैं बिना पिये ही मदहोशी में था। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, पजामे में से उभर कर मेरी शोभा बढ़ा रहा था। बानो आपा, लण्ड के आकार को देख कर ही लालायित हो उठी थी। उनके हाथ लण्ड की तरफ़ बढ़ चले थे। मेरे कड़क लण्ड को पहले तो उसने अपनी अंगुली से हिला कर देखा, वो तो टनटनाता हुआ झूल कर फिर से सीधा खड़ा हो गया। मेरे तन बदन में जैसे बिजली तड़क गई।
“आपा, मुझे क्या हो रहा है…” मेरे तन में सनसनी सी होने लगी।
“मादरचोद, तेरा लण्ड मजबूत है … कितना कड़क है…!” बानो पर नशा असर कर रहा था। मैं धीरे धीरे अपना होश खोता जा रहा था। बानो भी पेग पर पेग पिये जा रही थी। इसी बीच मुझे भी उसने एक पेग पिला दिया था। गोश्त हम दोनों ने जल्दी ही साफ़ कर दिया था। मैंने बानो को धक्का दे कर सोफ़े पर लिटाने की कोशिश की और उसके होंठों को चूसने लगा।
“अरे उठ गाण्डू, साला चढ़ा ही जा रहा है… हट जा !”
मैं जैसे होश में आ गया।
“जा वो दूसरी प्लेट गोश्त की ले आ … सारा तो खुद ही खा गया। ऐसा कर पूरा ही ले आ !”
मेरे पजामे का बटन खुल गया था और उसमें से लण्ड बाहर निकल आया था। मेरा गोरा और मोटा मस्त लण्ड देख कर बानो तो चकित रह गई। मैं गोश्त की पूरी डेगची ही उठा लाया।
“ऐ, फ़रदीन अपना पजामा उतार तो … इसकी तो मुठ मारूँ, भेन के लौड़े की !”
मेरा मन तो पहले ही विचलित हो चुका था। उसकी फ़रमाईश पर जैसे मेरा मन बाग बाग हो गया। मैंने तो पजामे के साथ साथ अपनी बनियान भी उतार दी।
“साला, हरामी… तू इतना मस्त है… पहले क्यों नहीं मिला रे… आ पास तो आ… जरा इसे देखूँ तो !”
उसने मेरा लण्ड अपनी आंखों के पास लाकर देखा। उसे सूंघा … और सर ऊंचा करके मन में उसकी सुगन्ध ली और अहसास लिया। मेरा खतना किया हुआ लौड़ा पूरा खुला हुआ था। बीच में पेशाब की नलिका को उसने हाथ से ठपकारा … मेरे लण्ड में एक मीठी सी जलन हुई। मेरा डन्डा पकड़ कर उसने जोर जोर से हिलाया और अपने मुख के ऊपर मार लिया। बानो की हालत एक मदहोश, वासना भरी, नशे में धुत्त औरत जैसी हो रही थी। मैंने भी धीरे से हाथ बढ़ा कर उसके ब्लाऊज को सामने से पूरा खोल दिया। मैंने भी उसके चुचूक को मसल कर अपना जवाब दिया। शायद उसे होश ही नहीं था। मेरा लण्ड उसके मुख में बड़ी मुश्किल से समा पाया था। उसने मेरे पोन्द को दबाया और लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी। मेरे सुपारे को जीभ से रगड़ने लगी। उसका एक हाथ अब मेरे लण्ड के डण्डे के पिछले सिरे पर आ गया और … और … वो उसे मसलने लगी, मुठ मारने लगी।
“आपा, बस करो … मैं मर जाऊंगा … निकालो बाहर !”
पर उसने एक ना सुनी … उसकी तेजी बढ़ती गई। मैं सिहर उठा, मेरी सहन शक्ति जवाब देने लगी।
“तेरी माँ को चोदू, गण्डमरी, छिनाल साली छोड़ मुझे, अरे … अरे… आह … मेरी तो चुद गई… “
उसे भला कहाँ होश था। वो तो जोंक की तरह मुझसे चिपट गई थी। उसने मेरा लण्ड जैसे निचोड़ डाला। मैं तड़प उठा … तभी मेरे लण्ड से ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा।
“आह … साली हरामी … मैं तो मर गया … रण्डी, मेरी तो चोद दी ना साली … अब तुझे क्या खाक चोदूँगा ?”
उसके मुख से थोड़ा सा वीर्य बाहर उबल पड़ा। थोड़ा तो वो पी गई और थोड़ा उसने बाहर निकाल दिया। मेरा लण्ड मुरझाने लगा। मैं निराश हो गया कि … साली चुदने से बच गई। मैं नंगा ही बिस्तर पर जाकर बैठ गया। बानो ने वहीं प्लेट पर अपना हाथ धोया और अपना पेटीकोट उतार कर नंगी हो गई।
वो धीरे धीरे मेरे पास आई और मुस्कुरा कर बोली,”मजा तो धीरे धीरे ही आता है ना…!”
फिर उसने मुझे एक ही झटके में बिस्तर गिरा दिया और मुझे अपने नीचे दबा लिया।
“चल मेरे राजा, अभी तो मैंने नल का पानी पिया है अब तुझे ट्यूब वेल का पानी पिलाती हूँ !” उसकी हंसी कमरे में गूंज उठी। उसकी चूत मेरे मुख से चिपक गई।
“ले … ट्यूब वेल को खोल और पानी पी …”
मुझे लगा कि खेल तो अब आरम्भ होने वाला है।
शेष दूसरे भाग में ! Antarvasna Stories
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