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Massage Girl in Valsad: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Valsad who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Valsad that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Valsad massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Valsad who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Valsad massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Valsad massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Valsad who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Valsad employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Valsad helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Valsad

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Valsad at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

मैं मुम्बई में रहता हूँ। Sex Stories

मैं अपनी एक Sex Stories वास्तविक कहानी लिख रहा हूँ, अगर आपको पसन्द आए तो मुझे उत्तर लिखें।

बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था…

मेरी अन्तिम परीक्षाएँ समाप्त हो चुकी थीं और मैं उदयपुर से अपने पैतृक नगर सूरत ट्रेन से जाने वाला था। शाम के चार बजे थे, मैं सही समय पर स्टेशन पहुँच गया था, मेरी सीट किनारे और नीचे वाली थी। मैं ट्रेन में बैठा हुआ सोच रहा था कि आगे क्या करना है। वैसे ट्रेन में कोई अधिक भीड़ नहीं थी। जैसे ही ट्रेन चलने लगी, मैंने देखा कि एक औरत जो लगभग तीस-बत्तीस साल की थी, आई। उसने मुझसे पूछा- आपकी सीट कौन सी है?

मैंने उसे बताया – “सीट नम्बर ग्यारह”

उसने अपनी टिकट देखी उसकी सीट की संख्या बारह थी, यानि ऊपर वाली सीट। उसके साथ उसका तीन साल का लड़का भी था। वह खिड़की पर आकर बैठ गया।

उस महिला ने मुझसे पूछा,”क्या सामान रखने में आप मेरी थोड़ी सी सहायता कर सकते हैं?”

मैंने उसकी सहायता की और सारा सामान सही-सही सीट के नीचे रख दिया। वह ऊपर जाकर बैठ गई। उसका लड़का नीचे ही बैठा था और मेरे साथ खेल रहा था।

ट्रेन चलती गई, एक घंटे के बाद पहला स्टेशन आया, तो वह नीचे उतर आई और चाय वाले को आवाज़ देकर चाय लेकर पीने लगी। मैंने भी चाय ली। जब वह पैसे देने लगी, तो मैंने कहा कि मैं दे देता हूँ, और मैंने दोनों की चाय के पैसे दे दिए। थोड़ी देर बाद हम बातें करने लगे। वह नीचे की सीट पर ही बैठी थी।

“मेरा बच्चा परेशान तो नहीं कर रहा है?”

“नहीं… बिल्कुल नहीं” मैंने उत्तर दिया।

“आप कहाँ जा रही हैं?” चाय पीते-पीते ही मैंने उससे पूछा।

“मुम्बई !” उसने बताया।

“आपके पति नहीं जा रहे हैं?”

उसने बताया कि उसका तलाक़ हो चुका है और वह अपने भाई के घर जा रही है। कुछ देर की चुप्पी के बाद हमारी बातें दुबारा शुरु हो गईं।

उसने मुझसे पूछा,”आप क्या करते हैं?”

“मैंने अभी-अभी कॉलेज की पढ़ाई खत्म की है और मैं घर जा रहा हूँ।”

थोड़ी देर बाद मैंने अपने बैग में से मिक्सचर नमकीन निकाले और उसे ऑफर किया तो वो भी मेरे साथ खाने लगी। अब मैं उसके बिल्कुल पास बैठा था और मैंने मिक्सचर वाला हाथ उसकी गोद में रख दिया तो मेरा हाथ उसकी जाँघ को छूने लगा। ट्रेन के हिलने से मेरा हाथ उसकी जाँघ से रगड़ रहा था, शायद उसे भी अच्छा लग रहा था।

फिर हम दोनों के बीच काफी बातें हुईं। उसने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?

तो मैंने कहा- नहीं !

उसने कहा- ऐसा हो ही नहीं सकता।

तो मैंने कहा- कोई पसन्द ही नहीं आई।

थोड़ी देर बाद शाम के सात बज गए और बाहर अन्धेरा हो गया। ट्रेन क़रीब-क़रीब खाली थी। हम लोगों को कोई भी देखता तो यही समझता था कि पति-पत्नी होंगे क्योंकि हम काफी आराम से बातें कर रहे थे।

कुछ देर के बाद मैं पैर फैलाने को हुआ तो वह सरक गई। मैंने भी उससे कहा- आप थक गईं होंगी, आप भी पैर फैला लीजिए।

वह भी अधलेटी सी हो गई। अब उसके पाँव मेरी ओर और मेरे पाँव उसकी ओर थे। उस समय थोड़ी-थोड़ी ठंड लग रही थी, तो मैंने शॉल ओढ़ ली। मेरा एक पाँव उसकी गाँड से और उसका एक पाँव मेरी गाँड से छू रहा था।

थोड़ी देर में मुझे अच्छा लगने लगा और वह भी उत्तेजित हो गई। मेरा लंड खड़ा हो गया। फिर मैंने थोड़ी और आज़ादी से अपने पैरों को उससे छुआया तो वह कुछ भी नहीं बोली। मैं भी समझ चुका था कि वह तैयार है। अब वह भी मुझे ठीक से छूने लगी थी। मैंने खुज़ली करने के बहाने उसके पैरों को छुआ तो उसने कहा- ठीक से पैर फैला लो।

मैंने कहा- ठीक है, फिर मैं थोड़ा और लेट गया। थोड़ी देर बाद हमने खाना खा लिया।

ट्रेन में सभी शायद यही समझ रहे होंगे कि हम पति-पत्नी हैं। कुछ देर के बाद उसका बच्चा सो गया। वह नीचे ही सो रहा था। हमने ऊपर में किनारे बैग रखकर उसे ऊपर की बर्थ पर सुला दिया। अब ट्रेन में बत्ती धीरे-धीरे बुझ चुकी थी। सिर्फ दो-तीन केबिन में ही नाईट-बल्बें जल रही थीं। इत्तेफाक़ से हमारी जगह पर बत्ती लगी ही नहीं थी।

हम फिर शॉल ओढ़ कर फिर से वैसे ही अधलेटे रहे। उसने फिर से गर्लफ्रेण्ड की बात छेड़ दी, तो मैंने कहा,”गर्लफ्रेण्ड तो नहीं है, पर…”

“पर क्या…?”

“कुछ नहीं…?”

उसके बार-बार पूछने पर मैंने कहा,”आप बुरा मान जाएँगी”

“नहीं मानूँगी।”

“…हाँ, पर मैंने मस्ती बहुत की है…”

“और वो…?”

अब वह भी उत्तेजित लग रही थी और पूरी लेट गई थी और मैं भी…, अब मेरे लंड उसकी गाँड के पास छू रहा था। मेरा ८ इंच का लण्ड खड़ा हो गया। मैंने लंड को सम्भालने के लिए हाथ बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। अब मैं समझ गया कि वह पूरी तरह से तैयार है।

अब मैं उसका पेट नीचे से सहला रहा था फिर उसके पेटीकोट में नीचे से हाथ डालकर उसकी जाँघों तक भी सहलाना शुरु किया। वह पूरी तरह से गरम हो चुकी थी। मैंने उससे कहा कि मेरे किनारे में आ जाए तो वो आ गई। अब हम एक ही किनारे में लेटे हुए थे। हमने कम्बल ओढ़ ली थी, क्योंकि एक तो ठंड वैसे भी थी और ऊपर से एसी कोच होने के कारण ठंड का असर अधिक ही था। मैंने सामने का परदा डाल दिया और पाया कि ठंड की वजह से सारे लोग सो रहे थे। परदा डाल कर मैं वापस आया।

मैंने उसे चूमा और उसकी चूचियों को ब्लाऊज़ के ऊपर से ही दबाने लगा। उसने मेरा लंड पकड़ लिया था। मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा था और वह पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड को दबा रही थी। धीरे-धीरे मैं आगे बढ़ा और उसके ब्लाऊज़ में हाथ डालकर उसकी चूचियों को दबाने लगा।

मैंने उसकी ब्लाऊज़ के हुक खोल दिए, उसकी मलाई जैसी चूचियाँ मुझे दिख रही थीं। मैंने उसकी चूचियाँ अपने मुँह में ले लीं और कभी बाईं तो कभी दाईं चूची को चूसने लगा। मैं अब उसे चोदना ही चाहता था, मैंने उससे कहा- तुम टॉयलेट में आ जाओ। मैं पहले जाता हूँ, तुम दो मिनट के बाद आ जाना।

मैंने टॉयलेट में जाते समय अटेण्डर को दो सौ रुपये दिए और कहा कि बच्चे का ख्याल रखना, तो वह समझ गया।

मैं टॉयलेट में जाकर प्रतीक्षा करने लगा। दो मिनट को बाद वह उसने धीरे से दरवाज़ा खोला, मैंने उसे झट से अन्दर खींच लिया और दरवाज़ा लॉक कर लिया। मैंने उसकी ब्लाऊज़ खोल दी और साड़ी भी अलग कर उसकी चूचियों को चूसने लगा। वह फिर से उत्तेजित हो रही थी। मैंने उसकी पेटीकोट खोल कर उसे पूरी नंगी ही कर दिया। मैंने देखा, उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। उसकी क्लीन-शेव चूत को देखकर मैं उसकी चूत रगड़ने लगा।

अब उसने मेरी पैन्ट की ज़िप खोली और मेरे लंड को हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद वह झुकी और लंड को गप्प से अपने मुँह में डाल लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मैं तो सातवें आसमान पर था। मैंने मेरी पैन्ट और टी-शर्ट पूरी उतार दी। मैं उसकी चूत पर हाथ रख रगड़ रहा था, जिससे उसकी चूत ने रस छोड़ना शुरु कर दिया। मैं नीचे झुका और उसकी चूत चाटने लगा। वह और भी उत्तेजना से भर गई। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। मैं भी मज़े ले-लेकर उसकी चूत को चाट रहा था और दाहिने हाथ से उसकी चूचियों को बारी-बारी से दबा भी रहा था।

इतना सब होने के बाद अब उससे रहा नहीं जा रहा था… उसने मुझसे कहा- अब मत तड़पाओ…

उसके ऐसा कहने पर मैंने उसका एक पाँव टॉयलेट के कमोड पर रखा तो उसकी चूत फैल गई, और मैंने अपना लंड एक ही बार में पूरा-का-पूरा उसकी चूत में डाल दिया। वह चिल्ला पड़ी, मैंने तुरन्त उसे फ्रेंच किस दिया और धीरे-धीरे अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा।

वह सिसकियाँ ले रही थी। अब वह छूटने वाली थी और उत्तेजना के मारे बड़बड़ा रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से…

मैं अब लम्बे-लम्बे झटके देने लगा और दो मिनट के बाद हम दोनों एक ही साथ झड़ गए।

हम बाहर आए और अपनी सीट पर बैठ गए और एक-दूसरे को चूमने लगे। वह धीरे-धीरे मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी चूचियाँ भी दबा रहा था। थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से कड़क हो गया तो मैंने चुदाई का कार्यक्रम बर्थ पर भी शुरु कर दिया। हमारा यही कार्यक्रम पूरी रात चला। मैंने उसे रात भर में तीन बार और चोदा।

सुबह हमने एक-दूसरे को चूमा और अलविदा कह चल पड़े।

तो यह था मेरा रेलगाड़ी का अनुभव

कृपया अपनी टिप्पणी मुझे अवश्य मेल करें। Sex Stories

Udaipur jaise tourist city me call girls ke options ko lekar jo interest hota hai, uski detail yahan di gayi hai.

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मेरे प्यारे दोस्तो!इस कहानी को पढ़ने वाली लड़कियों, भाभियों Hindi Porn Stories और आंटियों को मेरा प्यार!मेरे बचपन के दोस्त राहुल की शादी को तीन महीने ही हुए थे। उसकी पत्नी का नाम पूनम है। उसकी शादि चूंकि पूनम के परिवार वालों ने हमारे शहर में आकर की थी तो उनकी देखरेख का काम मैंने ही किया था। इसी कारण पूनम भी मुझे पहचानने लगी थी। जब मैंने उसे पहली बार देखा तो मैं मन ही मन सोचने लगा कि बेटा राहुल तेरी तो किस्मत ही खुल गई क्योंकि पूनम बहुत सुन्दर है, 5’4″, लम्बे बाल, गुलाबी होंट, आंखें बड़ी बड़ी और नशीली और आवाज कोयल की तरह है। पूनम और राहुलदोनों एम एस सी पढ़े हैं।

अब मैं राहुल के घर कम ही जाने लगा और राहुल इस बात की शिकायत भी करता कि मैं उसके घर नहीं आता। तो मैंने एक दिन कहा कि मैं आने लगूंगा तो भाभी मन ही मन कहेंगी कि अमन जब देखो यहीं पड़ा रहता है। यह बात सुन कर वो नाराज़ हो गया और कहने लगा कि अमन तू ऐसी बात करता है और पूनम कहती है कि अमन जी आते ही नहीं हैं, क्या अमन जी मुझसे नाराज़ हैं। यह बात सुनकर मुझे कुछ अजीब सा लगा पर मैंने राहुलसे कल आने का वायदा किया, वैसे तो हमारे घर पास पास ही हैं।

अगले दिन मैं उसके घर गया तो मुझे पूनम भाभी मिली, वो रसोई में नाश्ता बना रही थी। मैंने भाभी को हेलो बोला और राहुलके बारे में पूछा।

पूनम मुझे देख कर काफ़ी प्रसन्न हुई और बोली- अमन जी! आज आप कैसे सुबह सुबह आ गए! चलो आए हो तो अपने दोस्त से ही मिलने आए होंगे।

मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं, बस काफ़ी दिनों से कुछ ज्यादा काम आ गया था, इसलिए नहीं आया।

पूनम बोली- राहुलबाज़ार गए हैं, आज शाम को उन्हें ओफ़िस के काम से इन्दौर जाना है, इसलिए घर का सामान लेने गए हैं। आप बैठिए, मैं नाश्ता लाती हूँ।

मैंने कहा- नहीं भाभी, मैं नाश्ता नहीं करूंगा।
तो पूनम बोली- अमन जी! एक बार नाश्ता कर के देखें कि मैं कैसा नाश्ता बनाती हूँ।
तो मैं पूनम भाभी को मना नहीं कर पाया। फ़िर भाभी ने पूछा- आप चाय लेंगे या जूस?
तो मैंने कहा- भाभी, मैं तो सुबह चाय ही लेता हूँ।

भाभी दो कप चाय ले आई और हम साथ साथ ही नाश्ता करने लगे। मैंने पूनम की ओर देखा, वो काले रंग के गाऊन में थी। पूनम के दूध के समान गोरे रंग पर काला गाऊन काफ़ी जच रहा था। शायद पूनम ने ब्रा नहीं पहनी थी फ़िर भी उसकी छाती काफ़ी आगे को उभरी हुई थी। उसे देख कर मेरे मन में अजीब सी हरकत होने लगी लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जो पूनम को बुरा लगे।

थोड़ी देर बाद राहुलभी आ गया और मुझे देख कर बहुत प्रसन्न हुआ, बोला- अच्छा हुआ अमन तुम मुझे यहाँ पर ही मिल गए।

मैंने पूछा- कुछ काम था क्या?

राहुलबोला कि मैं एक सप्ताह के लिए इंदौर जा रहा हूँ और तुम्हारी भाभी को बाज़ार से कुछ सामान की आवश्यकता थी इसलिए तुम और पूनम बाज़ार से सामान ले आना।
मैंने कहा- तुम चिन्ता मत करो।

फ़िर अगले दिन पूनम का फ़ोन आ गया कि अमन जी आज हम बाज़ार चलें अगर आप को कोई और काम ना हो तो।

मैंने पूनम को शाम पांच बजे का समय दिया और शाम को जब मैं भाभी के घर गया तो वो बाज़ार जाने के लिए तैयार थी। आज भाभी ने सफ़ेद कमीज़ और काले रंग की जींस पहन रखी थी और आज भी काफ़ी सुन्दर दिख रही थी। मैंने भाभी को बताया कि मैं कार ले कर आया हूँ तो भाभी ने कहा कि बाज़ार में कार बहुत तंग करती है इसलिए आओ अपनी बाईक ले लो। फ़िर मैं बाइक ले आया और वो बाईक पर लड़कों की तरह बैठी। ब्रेक लगने पर भाभी की चूची मेरी कमर से लग जाती। मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि कम से कम भाभी और मैं आपस में स्पर्श तो हुए।

खरीदारी के बाद मैंने भाभी से पूछा कि आप क्या खाएंगी तो वो बोली कि कुछ भी जो आप खाएं। हमने एक होटल में जाकर कुछ खाया पिया और घर की ओर चल दिए। शाम के साढ़े सात से ज्यादा बज गए थे तो भाभी को घर छोड़ कर मैं बोला- भाभी मैं चलता हूँ।

भाभी बोली-मैं चाय ला रही हूँ, काफ़ी थक चुके हैं! फ़िर मैंने और भाभी ने चाय पी और थोड़ी देर बाद मैं अपने घर आ गया।

आज भाभी के साथ रहने से हम दोनों काफ़ी खुल गए थे और मजाक भी कर लेते थे। अगले दिन रविवार होने के कारण मैं पूनम के घर गया तो भाभी एक किताब पढ़ रही थी। मुझे देख कर बोली- अच्छा हुआ अमन जी आप आ गए, मैं बहुत बोर हो रही हूं। अगर आप कहें तो कोई मूवी देखने चलें?

मैंने हाँ कर दी तो भाभी बोली- मैं तैयार हो कर आती हूँ।

जब भाभी आई तो मैं देखता ही रह गया क्योंकि भाभी लाल रंग की साड़ी और ब्लाऊज़ में थी। मैं भाभी को देखता ही रहा तो वो बोली- अमन जी क्या हुआ! कहाँ खो गए?

मैंने तुरन्त कहा- भाभी जी! आपको देख कर खो गया हूँ, आप बहुत सुन्दर लग रही हैं। तो भाभी हंसने लगी। फ़िर हम दोनों माल आ गए और मूवी देखने लगे। अच्छी मूवी थी। जैसे ही हम माल से बाहर निकले तो मेरे एक अच्छे मित्र ने मुझे देखा और पुकारा- अमन!

मैंने देखा तो वो रमण था। मैं रुका और रमण और उसकी पत्नी से मिला और पूनम से मिलवाते हुए कहा- यह पूनम है…

मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि रमण बोल पड़ा- भाभी जी नमस्ते! और मुझसे बोला- यार! शादी भी कर ली और बताया भी नहीं!

मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं…!

लेकिन मेरी बात काट कर रमण बोला- भाभी चलो, हमारे घर चलते हैं, तो मैंने मना किया और कहा कि बाद में आऊँगा। पर रमण ने कहा कि नहीं आज ही!

तो हम रमण के घर चल दिए। घर आकर रमण ने कहा- यार! शादी में क्यों नहीं बुलाया? इससे पहले कि मैं कुछ कहता। पूनम बोल पड़ी- रमण जी! हमारी लव मैरिज़ है और अचानक ही हो गई, इसी कारण किसी को भी नहीं बुला पाए। रमन और उसकी बीवी ने हमें खाना खाने के बाद ही आने दिया। अब रात भी हो चुकी थी। हम घर के लिए निकले और मैंने कहा- भाभी जी! आपने ऐसा क्यों कहा?

तो भाभी बोली- आपको बुरा लगा क्या?
मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं!
तो वो बोली- फ़िर क्या बात है?
मैंने कहा- भाभी! हमारी ऐसी किस्मत कहाँ कि आप हमारी पत्नी बनें!
भाभी बोली- पत्नी नहीं पर भाभी तो हूं!
मैंने कहा- हाँ! यह तो है!

फ़िर हम घर आ गए और मैंने कहा कि भाभी रात के ग्यारह बज गए, मैं चलता हूँ।

भाभी ने कहा- रुको! ज़रा मैं कपड़े बदल लूँ! और भाभी काले रंग का गाऊन पहन कर मेरे पास बैठ गई और बोली- अमन जी, शादी कब करोगे?

मैंने कहा- जब आप जैसी कोई मिल जाएगी तो कर लूंगा, आज मिले तो आज ही कर लूंगा।
पूनम ने कहा- अगर मैं ही मिल जाऊँ तो?
भाभी की इस बात को सुन कर मैं दंग रह गया और कुछ बोल नहीं पाया।

भाभी बोली- अमन जी! क्या हुआ, सांप सूंघ गया क्या?
मैंने कहा- नहीं भाभी पर मैं समझ नहीं पाया कि आपने क्या कहा।
तो पूनम ने कहा- मैं आप से प्यार करती हूँ।
मैंने कहा- सिद्धार्थ?

भाभी ने कहा- राहुलको कुछ पता नहीं चलेगा। इतना कह कर भाभी मेरे पास लेट गई और मुझे किस किया। मैंए भी उसे पसन्द करता था इसलिए मैं भी विरोध ना कर सका।

फ़िर भाभी बोली- अमन, अगर आपको मैं पसन्द नहीं तो रहने दो।
मैंने कहा- नहीं भाभी! ऐसी कोई बात नहीं, आप मुझे अच्छी लगती हो।
पूनम ने कहा- तो मुझे पूनम नाम से पुकारो!

मैंने कहा- पूनम! मैं तुमसे प्यार करता हूँ और मैंने पूनम को उसके लाल रंग के होटों पर किस किया और फ़िर तो मैं और पूनम एक दूसरे के मुँह में जीभ देने लगे। आधे घण्टे इस तरह एक दूसरे के साथ चिपके रहे। तब पूनम ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैंने भी पूनम के कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

पूनम बोली- अमन, आज तुम्हारी मेरे साथ पहली सुहागरात है, अभी रुको, आज हम सुहागरात मनाएंगे, मैं तैयार होती हूँ।, तुम एक अच्छी सी नग्न फ़िल्म लगाओ।

मैंने एक ब्लू फ़िल्म लगा दी और देखता रहा। काफ़ी देर बाद पूनम आई तो उन्हीं कपड़ों में थी जो उसने अपनी शादी के दिन पहने थे और काफ़ी सुन्दर दिख रही थी। आते ही मैंने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और किस करने लगा। मैं कुछ जल्दी कर रहा था तो पूनम ने कहा- जल्दी ना करो, पूरी रात बाकी है।

मैं पूनम की चूची जोर जोर से दबाने लगा तो पूनम गर्म हो गई। मैंने एक एक कर के पूनम के सारे गहनें उतार दिए और फ़िर उसका ब्लाउज़ भी उतार दिया। फ़िर जब लहंगा भी उतार दिया तो पूनम के शरीर पर केवल ब्रा और पेंटी ही बची थी। उसकी आंखें बंद थी और वो गर्म सांसें छोड़ रही थी। मैं पूनम के शरीर के सब हिस्सों पर किस करने लगा और फ़िर मैंने उसकी ब्रा को भी फ़ाड़ के उसके शरीर से अलग कर दिया। जैसे ही मैंने उसकी पेंटी को हाथ लगाया तो वो गीली थी।

मैंने पूनम से कहा- पूनम! तुम तो झड़ चुकी हो।
उसने कहा- हाँ!

लेकिन मैं तो अब भी पागल हो रहा था, शायद मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह सच है। मैंने पूनम के शरीर से पेंटी अलग कर दी और उसकी पेंटी अपने लण्ड से रगड़ने लगा तो पूनम ने कहा- इसे छोड़ो, मैं हूँ ना!

उसके बाद पूनम ने मेरे लण्ड को पहला स्पर्श किया तो लण्ड पहले से भी ज्यादा गर्म और कड़क हो गया। वो मेरे लण्ड को आगे पीछे कर रही थी और मैं उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। पूनम के मुँह से सी सी की आवाज़ें आने लगी और वो अपने चूतड़ ऊपर करने लगी।

फ़िर पूनम ने मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो ऐसा लगा कि मैं उसके मुँह में झड़ जाऊँगा।

मैंने पूनम से पूछा- पूनम, तुमने राहुलसे पहले किसी के साथ यह काम किया है?
तो उसने कहा- पहले मुझे पता ही नहीं था कि इसमें इतना मजा आता है।
मैंने कहा- तुम्हें राहुलके साथ मजा नहीं आता क्या?

तो पूनम ने कहा- आता है! लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम्हारे ही बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ। अगर मैं तुमसे प्यार ना करती तो क्या मैं ऐसे सुहागरात मनाती।

यह सुन कर मुझे अच्छा लगा और मैंने पूनम के मुंह में अपनी जीभ दे दी। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे पास कन्डोम होगा? तो पूनम ने कहा- कंडोम की जरूरत नहीं है।

फ़िर मैंने पूनम की चूत पर अपना लण्ड रख कर अन्दर किया तो आधा उसकी चूत में चला गया। एक और झटके में मैंने पूरा का पूरा लण्ड पूनम की चूत में डाल दियाऔर जोर जोर से झटके मारने लगा तो पूनम को भी मजा आने लगा। दस बारह झटकों में मैं झड़ गया और पूनम भी झड़ गयी और उसकी चूत में अपना वीर्य डाल दिया।

पूनम ने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया तो मेरा लण्ड पाँच मिनट में ही पहले की तरह खड़ा हो गया। फ़िर मैंने पूनम को घोड़ी बना कर चोदा। इस प्रकार हम सुबह के चार बजे तक चुदाई करते रहे और हमें कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।

सुबह साढ़े पाँच बजे घर पर बैल बजी तो पूनम ने अपना गाऊन पहना और गेट पर जाकर आई तो मैंने पूछा कि कौन था?

उसने कहा- दूध वाला था। अमन! तुम चाय लोगे?

तो मैंने हाँ कर दी। पूनम चाय ले कर आई तो मैं नंगा ही लेटा था। मैंने पूनम को अपने पास खींच लिया तो उसने कहा कि अब भी कोई कमी रह गई है क्या!

मैंने कहा- हाँ! और उस कमी को पूरा करना है।

तो पूनम ने कहा- सुबह हो चुकी है, अमन अब रहने दो!

लेकिन मेरे लण्ड को तो गर्मी चढ़ी थी। पूनम मना करती रही और मैं पूनम को खींचता रहा। ऐसा करने से पूनम का गाऊन फ़ट गया और पूनम मुझ से लिपट गई। फ़िर हमने तीन बार काम किया और एक बार पूनम के मुँह में झाड़ा। पूनम काफ़ी खुश थी।

पूनम ने कहा- अब जब तक राहुलनहीं आ जाता, आप ही मेरे पति की तरह यहाँ पर रहोगे। इस प्रकार हम एक दूसरे को मजा दिलाते रहे।

और अब जब भी राहुलबाहर जाता है तो हम खूब चुदाई करते हैं। Hindi Porn Stories

प्रेषक – राजेश सिंह Antarvasna

मेरा नाम राजेश है। सबसे Antarvasna पहले मैं सभी लंडों और प्यारी चूतों को सलाम कहता हूँ।

यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ता था। मेरी कक्षा की एक लड़की जिसका नाम किरण था, दिखने में बहुत सुन्दर थी। उसे देखकर किसी भी लड़के का लण्ड खड़ा हो सकता था।

हम दोनों में अच्छी दोस्ती थी। हम लोग कक्षा में आगे-पीछे ही बैठते थे। हम दोनों एक-दूसरे को खूब चिढ़ाते थे। मैंने कभी भी उसे उस नज़र से नहीं देखा था, पर एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि…

हुआ यह कि उसकी तबीयत ख़राब हो गई थी। डॉक्टर ने उसे २ हफ्ते तक आराम करने की सलाह दी थी। इसी कारण उसका स्कूल का काम छूट गया था। लगभग २ हफ्तों के बाद जब वह स्कूल आई तो उसने मुझसे कहा कि मेरा काम अधूरा है और उसे मेरी मदद चाहिए, क्योंकि मैं अपनी कक्षा का सर्वश्रेष्ठ पढ़ाकू भी था, साथ ही उसका घर मेरे घर के समीप भी था। मैंने भी उससे कह दिया कि आज स्कूल के बाद साथ में ही चलेंगे मेरे घर, वहीं तुम काम कर लेना।

छुट्टी के बाद हम दोनों घर जा रहे थे। चूँकि वह जुलाई का महीना था, अचानक बारिश शुरु हो गई। उसके सारे कपड़े गीले हो गए, जिससे उसकी चूचियाँ साफ दिख रहीं थीं।

ज़्यादा भीग जाने के कारण मैंने उससे कहा- जाओ अपने घर जाकर कपड़े बदल लो।

पर उसने कहा- मेरे घर पर आज कोई नहीं होगा और ताला लगा होगा।

मैंने कहा, ठीक है, चलो फिर मेरे घर।

मैं पहले बता दूँ कि मैं लगभग रात के ८ बजे तक अकेले रहता हूँ, क्योंकि मेरे मम्मी, पापा और दीदी तीनों ही नौकरी पर चले जाते हैं।

घर पहुँच मैंने उसे अपनी बहन के कपड़े दे दिए। चूँकि दोनों लगभग बराबर ही थीं उसे मेरी बहन के कपड़े ठीक-ठाक आ गए। उसने मुझसे कहा कि अपना मोबाईल दे दो, मैं अपनी मम्मी को बता दूँ कि मैं तुम्हारे घर पर हूँ। मैंने उसे मोबाईल दे दिया और ख़ुद कपड़े बदलने चला गया।

मैं जब १५ मिनटों के बाद आया तो मैंने देखा कि वह मेरे मोबाईल में ब्लू-फिल्म की क्लिप देख रही है। मैं डर गया कि कहीं वह गुस्सा ना हो जाए।

मुझे देखकर उसने जल्दी से वीडियो बन्द कर दी। मैंने उससे पूछा कि क्या देख रही थी, तो वह शरमा गई।

मैंने हिम्मत से काम लेते हुए उससे कहा- इसमें शरम की क्या बात। ब्लू-फिल्म देखकने में कोई बुराई नहीं।

मैं उससे पूछा – “मज़ा आया?”

तो उसने धीरे से हाँ कहा।

मैंने कहा- चलो साथ में देखते हैं। मोबाईल पे तो छोटी है, चलो कम्प्यूटर पर दिखाता हूँ।

मैंने कम्प्यूटर चालू करके उसपर एक ब्लू-फिल्म चालू कर दी। हम लोग साथ में लेट कर ब्लू-फिल्म देखने लगे।

वह गरम होने लगी। उसकी चूचियाँ एकदम कड़ी हो गईं थीं, मैं ग़ौर कर रहा था। मैंने धीरे से उसके पैरों पर हाथ रख दिया और वह कुछ ना बोली।

यह देख मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसकी चूचियाँ दबा दीं, और उसके होठों पर चुम्बन ले लिया। मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी, वह उसे ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। इधर साथ में मैं उसकी चूचियाँ दबा रहा था। मेरा लण्ड उसकी चूत पर टकरा कर एक रॉड की तरह कड़क हो गया था और जीन्स फाड़ कर बाहर आना चाह रहा था।

मैंने उसकी टॉप उतार दी। उसने ब्रा नहीं पहनी थी, उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ देखकर मैं पागल हो गया। मैं उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। उसके मुँह से सिसकियाँ निकल रहीं थीं। मैंने अपना हाथ जब उसकी स्कर्ट में डाला तो जाना कि उसकी पैन्टी पूरी गीली थी। वह शायद झड़ चुकी थी। मैंने उसकी स्कर्ट और पैन्टी उतार दी और उसकी चूत चाटने लगा। उसकी चूत एकदम गुलाबी और बिना बालों की थी।

उसे बहुत मज़ा आ रहा था, वह कहे जा रही थी, “और ज़ोर से चूस… और ज़ोर से…”

मैंने चूसना बन्द कर दिया। वह गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज़ चूसो…

मैंने कहा कि उसके लिए तुम्हे मेरा लंड चूसना पड़ेगा तो उसने हमी भर दी। मैंने उससे कहा कि मेरा लण्ड निकाल लो। उसने मेरी जीन्स और अण्डरवियार निकाल दी और मेरे लण्ड को चूसने लगी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम 69 की मुद्रा में आ गए।

जब मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ, तो मैंने उसके मुँह को चोदना शुरु कर दिया। इतने में वह झड़ गई। मैं भी झड़ गया, उसका पूरा मुँह मेरे जूस से भर गया।

थोड़ी देरे में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने उसे लिटा दिया और उसके पैर फैला दिए। मेरा लण्ड हल्का सा ही घुसा था कि वह चिल्लाने लगी कि छोड़ दो, मुझे बहुत दर्द हो रहा है और वह रोने लगी। पर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर के बाद उसे भी मज़ा आने लगा था और वह कह रही थी – “फक मी राजेश… फक मी… फक मी हार्डर…”

थोड़ी देर में हम दोनों साथ में झड़ गए।

मैंने उसेक बाद उसे खूब चूमा, और फिर से उसकी चूत मारी।

मैंने उसकी गाँड भी मारी

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Antarvasna

दोस्तों मैं अजनबी दहिया Antarvasna आपके सामने अपनी पहली कहानी रिया की चुदाई पेश करने जा रहा हूँ। सबसे पहले मैं गुरूजी का धन्यवाद करता हूँ जिन्होंने मेरी कहानी को समझा और आप लोगो तक पहुँचाया, और उन फड़कती हुई चूतों को भी मेरा सलाम, जो हमेशा किसी लण्ड की तलाश में रहती हैं। चूतें हमेशा चुदने के लिए ही होती हैं !

रिया मेरी एक रिश्तेदार है। वह मेरे बड़े भाई की साली है। रिया और मेरा चक्कर बहुत पहले से चल रहा था।

एक दिन मैं उसके शहर में गया, मैंने वहां होटल में कमरा लिया और दो दिन तक रुका। मैंने रिया को फ़ोन कर शाम को कमरे पे बुला लिया। वो मेरी पसंद की काली साड़ी में शाम को पाँच बजे वहां आ गई। उसके आते ही मैंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वो बला की खूबसूरत लग रही थी।

मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और चूमने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने उसे उठाया और बिस्तर पे लिटा दिया।

मैंने उसके होठों को जी भर के चूसा। फिर मैंने उसकी काली साड़ी को निकाल फेंका. फिर मैं उसके स्तनों को ब्लाऊज़ के ऊपर से ही मसलने लगा। वो भी मुझे कस के बाहों में लिए हुए थी और बहुत ही खुश थी। उसका पति उसे समय नहीं दे पाता था। वो मेरे द्वारा माँ बनना चाहती थी। मैंने उसके ब्लाऊज़ और पेटीकोट को उतार दिया। अब वो ब्रा और पेंटी में थी और बड़ी ही सेक्सी लग रही थी।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और उसे चूमने लगा और एक हाथ से उसके छोटे-२ स्तनों को सहला रहा था। फिर मैंने उसकी पेंटी में हाथ डाला तो वो गीली हो चुकी थी, उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था। मैं उसकी चूत में ऊँगली घुमाने लगा।

अब मैंने उसकी ब्रा को भी निकाल फेंका। अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे। मैं उसके दोनों स्तन बारी-२ से सहला रहा था और उसके रस-भरे होठों को चूम रहा था। अब रिया ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। अब हम दोनों ६९ पोजीशन में आ गए। वो मेरे लण्ड को लॉलीपोप की तरह बड़े ही मजे से चूस रही थी और में उसकी चूत को चाट रहा था। करीब पन्द्रह मिनट बाद हम अलग हुए, वो दो बार झड़ चुकी थी। अब उसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था। उसने मुझसे कहा- अब जल्दी से ऊपर आ जाओ !

मैंने अपने लण्ड को निशाने पे लगाया और उसकी बूर पे रखकर एक जोरदार झटका मारा, वो दर्द के मारे कराहने लगी। मैं उसके स्तन मसलने लगा।

जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने एक और जोरदार शोट मारा और पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत की गहराई में समां गया। वो एक बार फिर दर्द से चिल्ला उठी और आ आआ आ आह्ह्ह्ह्ह् ईईइह्ह्ह्ह्ह ऊऊ ऊ ऊ ऊह्ह्ह्ह्ह् की आवाजें करने लगी। मैंने उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए। जब उसका दर्द कम हो गया तो वो कहने लगी- जोर से चोदो मेरे राजा ! आज इस चूत का भोंसड़ा बना दो ! और जोर से … और जोर से ! आज मुझे छोड़ना नहीं मेरे रज्जा !……. मुझे आज पेल दो आज …… !

मैं जोर-२ से ध्क्के लगाने लगा, रिया भी मेरा पूरा साथ दे रही थी और नीचे से गांड उठा-२ कर झटके मार रही थी। करीब पन्द्रह मिनट बाद मैंने कहा- अब मैं झड़ने वाला हूँ !

इससे पहले वो दो बार झड़ चुकी थी, तो उसने कहा- स्पीड बढ़ा दो !

मैं तेज-२ झटके लगाने लगा और १०-१५ झटकों के बाद मेरा लावा उसकी चूत में समां गया। वो आज बहुत ही खुश हुई।

फिर मैंने उसे अगले दिन कुतिया बना के भी चोदा। इस तरह आज वो माँ बनने वाली है और आज भी मुझसे बहुत प्यार करती है।

दोस्तों आशा करता हूँ मेरी यह कहानी आपको बहुत पसंद आएगी। इसी विश्वास के साथ यहीं ख़त्म कर रहा हूँ। पर मेल भेजना न भूलिएगा।

आपके मेल का इंतजार रहेगा। आप सभी को ढेर सारा प्यार। Antarvasna

Sex Stories

अगल बगल में सभी लड़कियाँ Sex Stories अपने हाथों में लंड पकड़े हुए थीं और उनको मसल रही थीं। मोनी को एक मोटे से सेठ ने अपनी गोद में बठा रखा था। सेठ ने १००० रूपये पिंटू की तरफ बढ़ा दिए। पिंटू ने मोनी को आंख मार कर लौड़ा चूसने का इशारा किया। मोनी जमीन पर बैठ गई और उसने सेठ का ४ इंच लम्बा लौड़ा मुँह में ले लिया और उसे लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

नेताजी मेरी चूत में अपनी उँगलियाँ आगे पीछे कर रहे थे तभी एक एक ग्राहक मेरी तरफ आया और १०-१० के नोट मेरे ऊपर फेंकने लगा। पिंटू पीछे से आकर मेरी चुचियों की घुन्डियाँ गोल गोल घुमाने लगा और नेताजी ने मुझे अपनी दोनों टांगों पर बिठा लिया और मेरी चूत के होंठ सहलाने लगे। उनका लंड मेरी चूत से छू रहा था। मेरी चूत की खुजली बहुत बढ़ गई थी और मन कर रहा था कि चूत में लंड घुसे और मैं चुदाई का मस्त मज़ा लूं। नेताजी मेरी चूत की मसलाई जोरों से कर रहे थे। ग्राहक ने पूरी १० के नोट की गड्डी मुझ पर लुटा दी। उसके बाद एक मुस्टंडे ने उसे वहां से हटा दिया।

१० मिनट वाली घंटी बज गई। नेताजी को मिलाकर पांच लोगों ने १००० रु. बढ़ा दिए। अब वो लोंडी को १० मिनट और मसल सकते थे। २ रंडियों के ग्राहक झड़ चुके थे वो दोनों उठ गई और फिर काउंटर पर जाकर खड़ी हो गई। ७ में से ३ लडकियाँ लौड़ा चूस रही थीं। नेताजी ने अपनी जेब से १००० की गड्डी निकाली और एक नोट पिंटू की तरफ बढ़ा दिया। पिंटू ने मेरा एक संतरा जोरों से मसलते हुआ कहा चल अब जरा साहब का लौड़ा चूस।

मैं मरती क्या न करती। मुझे अब नेताजी के पैरों में बैठकर उनका लौड़ा मुँह में लेना पड़ा। लौड़ा पूरा वीर्य से गीला हो रहा था। मुँह में लौड़ा घुसते ही एक कसेला सा स्वाद मुझे लगा। दो तीन बार लौड़ा चूसने से मुझे मस्ती आने लगी और मैं मस्त होकर नेताजी का लौड़ा चूसने लगी। नेताजी मेरे चूतड़ों को कस कस कर दबा रहे थे और कह रहे थे,”रंडी तू तो बड़ा मस्त लौड़ा चूसती है चल जरा मेरा सुपाड़ा चाट ! अगर मुझे खुश कर देगी तो कुतिया, मैं तुझे हिरोइन बनवा दूंगा !”

अब मैंने नेताजी का सुपाड़ा चाटना और चूसना शुरू कर दिया था। नेताजी ने मेरे ऊपर दो-तीन १०००-१००० के नोट लुटा दिए। तभी वहां मौसी के साथ ४-५ पुलिस वाले आ गए। सभी सादी वर्दी में थे मौसी बोली- कोई घबराए नहीं, सब कुछ २-३ मिनट के लिए है।

एक पुलिस वाले ने मेरे बाल खींचे और मुझे धक्का दिया और बोला,”साली रंडी हट इधर से हट !”

मैं पीठ के बल गिरी और एक पुलिस वाले ने नेताजी को १०-१२ थप्पड़ मार दिए। फिर बोला,”कलुआ ! साले हमें धोखा देता है साला बैंक लूटता है… हरामी कहीं के ! तुझे अभी थाने में चलकर बताता हूँ कि पुलिस को परेशान करने का मतलब क्या होता है ?”

पुलिस नेताजी को धक्के मार कर ले गई। उनका इंसपेक्टर मौसी से बोला,”मौसी, आपकी मदद से हम इसे पकड़ने में सफल रहे, धन्यवाद।”

मौसी कुटिल मुस्कराहट से बोली,”हजूर हम तो आपके सेवक हैं !”

उनके जाने के बाद मौसी बोली,”भाई, सभी मस्ती करो, डरने की बात कोई नहीं। कुते के पास जो नोटों की गड्डियाँ थी उस पर जिस बैंक की मोहर थी वो कल ही लूटी गई थी। मैं समझ गई थी कि साले बैंक लूट कर आये हैं। यह साला कलुआ बदमाश था २०,००० का इनाम है इस पर हरामी पर। नेता बनता है साला भडुआ !”

हम सभी रंडियों के ग्राहक हमें छोड़कर भाग गए थे। हम सभी रंडियाँ एक बार फिर साइड में जाकर खड़ी हो गईं। रोकी ने हमें पतले कपड़े की चड्डियाँ पहना दी थी और हमारे गले में मालाएं डाल दी थीं। नाचने वाली लड़कियों की चड्डियाँ मुस्टंडों ने उतार दी थीं। वो अब वो फर्श पर लेटकर अपनी चूत कभी फैला रही थीं कभी छुपा रही थीं। ग्राहकों की भीड़ दुबारा बढ़ गई थी हम लोगों की बोली दुबारा लग गई थी। इस बार मेरे हिस्से में एक मरियल सा ५५ साल का बुड्ढा आया था जिसने मुझे मसलने के लिए १५०० रुपए लगाए थे।

बुड्ढे ने मेरी माला के फूल मसल दिए और अपने दोनों हाथों में मेरे स्तनों को पकड़ कर उन्हें धीरे धीरे दबाने लगा। मैंने बुड्ढे के पैंट के बटन खोल दिए और उसकी चड्डी नीचे कर दी। बुड्ढे का पतला लंड खड़ा हुआ था जो मुश्किल से ४ इंच का होगा। मुझे उसे पकड़ने में ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई बड़ी मूंगफली अपने हाथों में दबी है । धीरे धीर मैं बुड्ढे की मूंगफली मसलने लगी। बुड्ढा मेरी चूचियाँ मसले जा रहा था। मेरी तरफ देखकर खी-खी करते हुआ बुड्ढा बोला,”तेरी चूचियाँ बिलकुल मेरी बहू की तरह चिकनी हैं !”

मैं हैरान थी मैं बोली,”क्यों ? तू अपनी बहू को भी चोदता है क्या?”

बुड्ढा खी-खी करते हुआ बोला,”चोदी तो नहीं है, लेकिन जब भी मुन्ने को दूध पिलाती है तो उसकी चूचियाँ छुपकर देखता हूँ ! बिल्कुल तेरी जैसी चिकनी हैं !”

मैं हैरान थी कि ऐसे भी लोग होते हैं। मैंने उसके लौड़े को मसलते हुआ पूछा,”और ताऊ क्या देखा है?”

बुढ़ऊ फुसफुसाया,”बाथरूम में २-३ बार नंगे नहाते हुए भी देखा है, एक बार जब मेरा लड़का १०-१२ दिन के लिए बाहर गया हुआ था तो बाथरूम में उसे चूत में मोमबत्ती डालते हुए भी देखा था। साली को चोदने का मन तो करता है लेकिन शराफत भी तो कोई चीज़ है।”

मौसी उधर से निकली और बुड्ढे की तरफ देखती हुई बोली।”चचा दूध ही मसलते रहोगे या कुछ और भी करोगे? थोड़ा इसकी सुरंग में ऊँगली करो, मज़ा आ जायेगा।”

ताऊ की उँगलियाँ अब मेरा चूत के होटों पर फिसल रही थीं। एक मिनट बाद ही ताऊ ने अपना पानी छोड़ दिया जिसकी धार मेरे हाथ और पेट पर जाकर गिरी। ताऊ के १० मिनट पूरे होने वाले थे। पिंटू बोला,”ताऊ टाइम हो गया है, और देर तक कुतिया को मसलना है तो १००० रु निकालो !”

ताउ मुझे हटा कर अपनी पैन्ट ऊपर चढ़ाते हुए बोला,”और पैसे नहीं हैं, वो राजू की अम्मा बटुआ भूल गई थी, उसमें से २००० रूपये निकाल लाया था ! सिर्फ २०० रु बचे हैं। साली कुतिया बहुत मजा दे रही है। तू मौसी से बोल २०० रूपये में लौड़ा चुसवाने दे बाकी बाद में दे दूंगा !”

पिंटू बोला,”नो पैसा, नो मजा ! अब जाओ फिर बाद में आना लाइन में और लगे हैं !”

रंडियों की मसलाई जोरों पर थी। दो रंडियों की चूत में लौड़ा भी घुसा हुआ था उनके कस्टमर उनको सबके सामने चोद रहे थे। मोनी के सेठ ने एक ५० की गड्डी पिंटू की तरफ बढ़ा दी और बोला,”साली की चूत चोदनी है !”

पिंटू ने एक कंडोम का पैकेट उसकी तरफ बढ़ा दिया और बोला,”ले सेठ १५ मिनट में कुतिया को निपटा दियो, वरना ५००० और देने पड़ेंगे !”

सेठ ने अपना लौड़ा मोनी की चूत में फिट कर दिया और उसकी चुदाई शुरू कर दी। मोनी सहित तीन रंडियाँ डांस हाल में चुद रही थीं। ३ की मसलाई सोफों पर हो रही थी। मैं काउंटर पर नंगी खड़ी थी। इतनी देर तक हाल में नंगी खड़ी होने से मेरी शर्म बिलकुल ख़त्म हो गई थी। मैं अपने को रंडी मान चुकी थी मेरा मन लौड़ा खाने को कर रहा था। पिंटू ने मेरे मेरे चून्चों पर एक जोर का हाथ मारा और बोला,”अभी २० मिनट और हैं, एक ग्राहक को और निपटाना है !”

मौसी वहीं घूम रही थीं। उन्होंने आकर एक केला मुझे पकड़ा दिया और बोली,”हल्के-हल्के अपनी चूत पर फिरा और अपने मुँह से इशारे कर ! इस बार तेरा दाम २००० रु से ऊपर लगना चाहिए, समझी ! वरना एक और कुत्ता तेरे ऊपर चढ़वाना पड़ेगा !”

तभी आशा नाम की एक और रंडी काउंटर पर आकर खड़ी हो गई थी। हम दोनों केला अपनी चूत पर फिराने लगी और ग्राहकों की तरफ देखकर चुम्मी फेंकने लगी। मैं अब अपने को मौसी की लोंडी मान चुकी थी। मेरे अन्दर उनकी बात टालने की हिम्मत नहीं थी। सामने लड़कियों की चूत में लौड़े घुसे हुए थे। मेरी चूत बहुत जोरों से खुजिया रही थी, मन कर रहा था कि अबकी बार मैं भी चुदूं। नाचने वाली लडकियाँ बार बार अपनी चूत में मोमबत्ती डाल रही थी। मौसी मुस्करा रही थी और रोकी से कह रही थीं,”सभी रंडियाँ बिक चुकी हैं १-२ को छोड़कर। भोंसड़ी वालियों के भी रेट आज ५०० से उपर लग रहे हैं !”

तभी दो ग्राहक हमारी तरफ आए। मौसी उन्हें लेकर आई थी। मौसी मुझसे बोली,”यह छोटा खलील और उसके चेले हैं, पूरे पूना का अन्डरवर्ड देखते हैं। तुम दोनों की चुदाई और मसलाई दोनों करेंगे। १२ हज़ार दे चुके है। चूत चुदवा और जम के मज़ा ले। ऐसा मज़ा दुबारा नहीं मिलेगा।”

मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए पिंटू बोला,”तेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है न ? जा अभी यह मिटा देंगे। कुतिया चल जा चुद और मस्तिया !”

छोटा खलील और उसके साथी के साथ हम दोनों सोफों की तरफ बढ़ गईं। दो सोफे पास पास खाली नहीं थे। पिंटू ने एक ग्राहक को उठाकर दूसरी साइड में बिठा दिया। खलील और उसका साथी पहले भी कोठे पर आ चुके थे। दोनों ने पैन्ट खोल कर अपने लौड़े हम दोनों के हाथ में पकड़ा दिए। थोड़ा मसलने पर खलील का लौड़ा ८ इंच लम्बा हो गया। खलील का लंड अच्छा मोटा था। खलील और उसके चेले ने अच्छे पैसे दिए थे इसलिए उन पर कोई रोक नहीं थी। वो हमारी चूत भी बजा सकते थे। खलील मेरी चूत रगड़ते हुआ बोला,”हम पी कम्पनी के गुंडे हैं अब तक ५६ आदमियों को निपटा चुके हैं। कुतिया तू नई आई लगती है तेरी चूत तो बड़ी माल है बिलकुल घरेलू नई बहू की तरह है। मेरी बीबी भी जब नई थी तो उसकी भी ऐसी ही मस्त थी, साली के अब तो ६ बच्चे हो गए हैं, घुसाने में मजा ही नहीं आता। आज मुझे कुछ काम है इसलिए आज तो तेरी चूत का स्वाद चख लेता हूँ कल आकर पूरी रात बजाता हूँ। इतनी हसीं चूत तो बॉम्बे की फाइव स्टार कॉल गर्ल्स की भी नहीं होती है। ऐसी चूत रोज़ रोज़ थोड़े ही मिलती है तुझे चोदने में तो रंडी मज़ा आ जायेगा।”

खलील में काफी ताकत थी वो जोर जोर से मेरे दूध और निप्पल्स मसल रहा था और चूत में ऊँगली कर रहा था उसका लौड़ा बिलकुल लोहे की रोड की तरह तन गया था। मुझे लौड़ा उमेठने में मज़ा आ रहा था और खलील के लंड से मस्तिया रही थी। मैंने खलील के होटों पर अपने होठ रख दिए और चूसने लगी थी। उसने मेरी गांड पर चुटकी काटी और बोला,”ले जरा लंड राज को चूस !”

मैं घोड़ी बन कर खलील का लंड चूसने लगी। उसने अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में डाल दी और आगे पीछे करने लगा। साथ ही साथ बुदबुदा रहा था,”कुतिया तेरी गांड तो लगता है अभी तक मारी ही नहीं गई, बिलकुल ताजा माल है।”

थोड़ी देर बाद उसने मुझे हटा दिया और सोफे से मुझे गोद में उठाया और फिर सोफे पर पटक दिया और मेरी दोनों टांगें चौड़ी कर मेरे चूत के मुँह पर अपना लंड रख दिया और मेरी दोनों चूचियाँ कस कस के मसलते हुए अपना लंड एक झटके में मेरी चूत में डाल दिया। मैं जोर से चिल्ला उठी उई…,”मर गई … मर गई मर गई … छोड़ साले कुत्ते ! चूत फट गई, बाहर निकाल ! बहुत दर्द हो रहा है !”

शायद उसे इसमें मज़ा आया। उसने मेरी चूत और जोर जोर से फाड़नी जारी रखी। मेरी बगल में आशा भी चुद रही थी। हाल में २० -२५ बाहर के लोग शो देख रहे थे। वो रंडियों का ब्लू डांस कम हमारी चुदाई देखने का आनंद ज्यादा ले रहे थे। ३-४ धक्कों के बाद मुझे चुदने का मज़ा आने लगा। अभी खलील ने १०-१२ धक्के ही मारे थे कि आवाज़ आई,”मैं हूँ डॉन… मैं हूँ डॉन…”

खलील का फ़ोन बजा था। वो एकदम से घबरा उठा और फ़ोन उठा कर घिघयाते हुए बोला,”जी साहब जी साहब अभी आता हूँ साहब …”

उसने और उसके चेल ने अपने लंड बाहर खींच लिए बोला,”गुरु क्या बात है?

खलील बोला,”पी साहब का फ़ोन था अभी चलना है एक को निपटाना है !”

खलील का लंड बिल्कुल डाउन हो गया था, शायद पी साहब का डर बोल रहा था। वो दोनों तेजी से बाहर निकल गए मेरी चूत में वो एक आग लगा गया था।

खलील और उसके चेले चले गए थे शो ख़त्म हो गया था। उनके जाने के बाद एक मुस्टंडा परदे के पीछे से आया और हमें मौसी के कमरे में ले गया। मौसी दारू पी रही थी, मौसी बोली,”अरे बड़ी जल्दी बाहर आ गईं? क्या हुआ चुदी नहीं क्या?”

सीमा बोली,”साले लंड छुला कर भाग गए, उनके साहब का फ़ोन आ गया था !”

मौसी बोली,”तुम दोनों नंगी बहुत सुंदर लग रही हो ! थोड़ा ऊपर वाले हाल में मटक लो। २-४ रंडियाँ बच रही हैं वो भी उठ जाएँगी। यह लो पतली लाल साड़ी पहन ले, इसमें से जब तेरी चूचियाँ चमकेंगी तो ढेर नोट गिरेंगे तेरे ऊपर !”

मौसी एक मुस्टंडे की तरफ इशारा कर के फिर बोली,”अरे कालू, जरा इन दोनों को ऊपर नचा !”

मेरी गांड पर चुटकी काटते हुऐ मौसी बोली,”जा ! जरा मस्त होकर मटक। बड़ा मज़ा आएगा !”

कालू मुस्टंडा हम दोनों को ऊपर ले गया। आशा बोली,”डर नहीं, जैसे मैं करुँ वैसे कर ! कमर और स्तन मटका। बड़ा मज़ा आएगा और रुकियो नहीं, वर्ना साले मुस्टंडे गांड के अंदर सिगरेट बुझा देते हैं।”

मैं सोच चुकी थी कि अब रंडी बनने में ही भलाई है। तीन चार रंडियाँ वहां पर पहले से ही मटक रही थीं। धीर धीरे मैं भी अपने चूतड़ और चूचियाँ हिलाने लगी कभी नीचे झुककर कभी साड़ी का पल्लू गिरा कर मैं ग्राहकों को अपने दूधों के दर्शन करा रही थी। मेरे ऊपर कुछ नोट १०-१० के गिरे। मैं अब जोर जोर से अपने चूतड़ हिला रही थी। मेरा पल्लू नीचे गिर गया था मेरी नंगी चूचियाँ अब जोरों से हिल रही थीं। वहां खड़े सभी ग्राहक मेरे पर नोट फ़ेंक रहे थे। एक मुस्टंडे ने पीछे से आकर मेरी चूचियाँ मसली और गोद में उठाकर जाँघों तक मेरी साड़ी उठा दी और ग्राहकों के मुँह के सामने मेरी चूत खोल के रख दी। मेरी चूत का दीदार अब सामने खड़े ५- ६ ग्राहक कर रहे थे। उन्होंने मेरे ऊपर १०-१२ नोट फेंक दिए। थोड़ी देर में गाने चलने बंद हो गए। सभी रंडियाँ धंधे पर लग चुकी थीं। नाचने वाली ३-४ रंडियाँ कोने में जाकर बैठ गईं। मुझे पता चल गया था कि यहाँ सब लड़कियाँ मौसी की कुतिया हैं इस से ज्यादा कुछ नहीं। मौसी हाल में आयीं और बोली,”पिंटू, मोनी और इसे मेरे कमरे में पहुंचा ! बाकी बची हुई नाचने वालियों को धंधे पर लगा दे !”

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