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न्यू वाइफ की छोटी चूत मेरे अब्बू ने कैसे फाड़ी, यह मैंने देखा उनकी पहली रात की वीडियो में! मेरे अब्बू कमसिन नई दुल्हन ब्याह के लाये तो मैंने उनकी चुदाई देखनी चाही.
मेरा नाम शरीफ़ कुरैशी है. मेरी अभी उम्र 25 साल की है.
मैं अब्बू के दूसरी बीवी की औलाद हूं.
मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है. मेरा रंग सांवला है लेकिन मैं अच्छा दिखता हूं.
मेरा घर यूपी के आजमनगर में है.
अब मैं अपनी कहानी सुनाता हूं.
बात तब की है जब मैं इंटर कॉलेज का छात्र था और तब मैं करीब 19 साल का था.
हमारी बहुत बड़ी फैमिली है. मेरे अब्बू बहुत पैसे वाले हैं और हमारे बड़े-बड़े 4 – 5 घर हैं.
फार्म हाउस के साथ ही हमारे पास 7 – 8 कार भी हैं.
हमें पैसों की भी कोई कमी नहीं है.
मेरे अब्बू का नाम मोहम्मद अली कुरैशी है.
अब्बू की उम्र 62 साल है.
उन्होंने तीन निकाह किए हैं.
मेरे बड़ी अम्मी सलमा 56 साल की हैं.
बड़ी अम्मी की 5 औलाद हैं, जिनमें दो बेटों के साथ तीन बेटियां हैं.
पहले बेटे का नाम सोहेल (38 साल) है और उनकी पत्नी जोया (35 साल), दूसरे का नाम सलीम (37 साल) उनकी पत्नी नूरजहां (33 साल) है.
तीसरी बेटी मराह (35 साल), चौथी बेटी का नाम मजिदा (34साल), पांचवीं का नाम मरीया (32 साल) है.
तीनों लड़कियों का निकाह हो चुका है.
अब्बू की दूसरी पत्नी अयासा (42) जो मेरी अम्मी हैं.
उनकी चार औलाद थीं लेकिन अब सिर्फ तीन हैं. एक की मौत बचपन में हो चुकी है.
मेरे बड़े भाई शाहिद (23 साल), जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है, उनकी पत्नी का नाम शाहनाज (21 साल) है और मेरी छोटी बहन का नाम मलिका कुरैशी है, जो 10वीं की छात्रा है.
अब्बू की तीसरी पत्नी का नाम फातिमा बीवी (20) है जिससे अब्बू की नई-नई शादी हुई है.
हम सब अलग-अलग बंगले में रहते हैं.
बड़ी अम्मी और उनकी 2 औलाद एक बंगले में, मेरी अम्मी और हम तीन भाई-बहन एक साथ अलग बंगले में रहते हैं.
अब्बू की अभी नई-नई शादी हुई थी इसलिए अब्बू और छोटी अम्मी नए वाले बंगले में रहने वाले थे.
जब अब्बू ने शादी की तब उस समय घर में किसी को यह बात पता नहीं थी.
मैं भी कॉलेज में था.
जब घर आया तो मुझे पता चला कि अब्बू ने तीसरी शादी की है.
उन पर सब नाराज़ थे लेकिन मैं नई नवेली दुल्हन को देखना चाहता था.
जब दुल्हन सामने आई तो मैं उसे देखकर हैरान रह गया.
क्या दुल्हन थी यार … मल्ला कसम … मस्त फिगर वाली गोरे बदन, लम्बे बाल, लाल-लाल होंठ, पतली कमर छोटे-छोटे बूब्स जैसे ताज़ा-ताज़ा फूल खिला हो.
छोटी अम्मी का फिगर साइज 32 – 24 – 32 होगा.
मैं तो यह सोचकर परेशान हो रहा था कि इस बुड्ढे यानि मेरे अब्बू को ऐसी माल कहाँ से मिल गई.
अब्बू के ड्राइवर से पूछा तो पता चला कि यह एक गरीब किसान की बेटी थी. अब्बू ने उनके अब्बू को पैसे देकर निकाह की बात की तो वे मना नहीं कर सके.
अब अब्बू अपनी सुहागरात के लिए अपने नए घर को सजाने के लिए मुझे कहा.
मैं घर में सबसे छोटा लड़का था.
तो अब्बू ने कहा- नए घर के बेडरूम को सज़ा-संवार दो.
जब मैं बेडरूम को सज़ा रहा था तो मन में एक ही ख्याल आ रहा था कि काश फातिमा के साथ आज मेरी सुहागरात होती!
तो इस बेड पर मैं अब्बू की न्यू वाइफ की छोटी चूत को खूब पेलता.
और यह सोच कर मेरा लौड़ा खड़ा हो रहा था.
इस बात को सोचकर मैं उसी बेड पर मुठ मारने लगा और कुछ देर बाद मेरा लौड़ा झड़ गया.
फिर मैने सोचा कि आज तो फातिमा बीवी को पूरा नंगी देखना है.
इसके लिए मैंने अपना फोन को ऑन करके छुपा दिया और अपने पुराने घर आ गया.
रात के 10 बज चुके थे, अब्बू और फातिमा बीवी नए घर में सुहागरात के लिए चले गए.
अब सब सो गए थे लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी.
सारी रात फातिमा के बारे मे सोचता रहा और फातिमा की यादों में कब सुबह हो गई मुझे पता ही नहीं चला.
अब मैं अपना फोन लेने नए वाले घर गया.
लेकिन दरवाज़ा बंद था.
मैंने टाइम देखा तो सुबह के 5 बजे थे और सुहागरात के बाद कौन इतनी जल्दी उठता है.
यह सोचकर मैं वापस घर आ गया.
अब तो समय जैसे थम सा गया था.
मैं सिर्फ घड़ी को देख रहा था 5 से 6, 6 से 7, 7 से 8, 10 से 11 बज चुके थे और अब्बू अभी तक सोए हुए थे.
अब मेरा दिमाग खराब होने लगा था.
फिर अब्बू 12:30 बजे में बाहर आए लेकिन छोटी अम्मी (फातिमा) नहीं आईं.
अब फोन वापस कैसे लूं … यह सोच ही रहा था कि अब्बू ने कहा- बेटा शरीफ़, जाकर देख ना छोटी अम्मी को कुछ चाहिए तो हेल्प कर देना. अभी वह नई है न इसलिए!
अब्बू की बात सुनकर जब मैं छोटी अम्मी के रूम में गया तो देखा वे बैड पर बैठी हैं और उनकी आंखें लाल थीं.
वे काफी थकी- थकी सी लग रही थीं.
देखकर लग रहा था कि अब्बू ने न्यू वाइफ की छोटी चूत को खूब पेला होगा.
फिर मैंने कहा- छोटी अम्मी, आपको कुछ चाहिए तो बोलिए. अब्बू ने मुझे भेजा है.
छोटी अम्मी- नहीं, कुछ नहीं चाहिए. ये बताइए कि आप उनके बेटे हैं. क्या नाम है आपका?
मैं- हां, आपके शौहर मेरे अब्बू हैं और मेरा नाम है शरीफ़!
छोटी अम्मी- वह तो दिख रहा है आप कितने शरीफ़ हैं.
यह बोलकर छोटी अम्मी हंसने लगीं.
मैं- छोटी अम्मी, आप हंस क्यूं रही हैं, मैं कुछ समझा नहीं?
छोटी अम्मी- यह बात फिर कभी बोलूंगी, पहले आप मुझे अम्मी न कहिए. मैं आपसे थोड़ी ही बड़ी हूं तो मुझे आप फातिमा ही कहें.
मैंने कहा- आप तो मेरे रिश्ते में अम्मी ही हुईं ना और घर वाले भी क्या कहेंगे.
छोटी अम्मी- ठीक है, आप सबके सामने मुझे छोटी अम्मी बोलिएगा और जब कोई नहीं हो, तो फातिमा … ठीक है?
मैं- ठीक है. पर आप भी मुझे तुम ही कहिएगा या फिर शरीफ़ कह कर बुलाइयेगा.
छोटी अम्मी- ठीक है. अच्छा शरीफ़, बाथरूम कहां है बताओगे? मुझे नहाना है.
मैं- आगे से दाएं के बाद वाला.
फिर छोटी अम्मी नहाने चली गईं.
मौका देखकर मैंने अपना फोन निकाला और चालू किया.
लेकिन मेरा फोन चालू नहीं हुआ.
शायद फोन की बैटरी खत्म हो गई थी.
मैं अपने कमरे में आया और फोन चार्ज में लगाकर उसे ऑन करने वाला ही था कि इतने में मेरी अम्मी आईं और बोली- बेटा, हमें रहमान भाईजान के घर चलना है.
मैंने अम्मी से कहा- मेरा फोन अभी चार्ज नहीं है और मैं वहां बोर हो जाऊंगा. वहां अभी रुखसाना भी नहीं है, वह अभी दिल्ली में है.
अम्मी- बेटा चल ना … जल्दी आ जाऊंगी. फोन को चार्ज में लगा दे.
मैं अम्मी को लेकर रहमान चाचू के घर चला गया.
रहमान चाचू और मेरी अम्मी की बातें तो मानो जैसे खत्म ही नहीं हो रही थी.
रात 9 बजे हम उनके घर से खाना खाने के बाद अपने घर आए.
मैंने देखा कि बड़ी अम्मी घर आई हुई थीं.
फिर अम्मी और बड़ी अम्मी बातें करने लगीं.
तो मैंने अम्मी से कहा- अम्मी, मैं सोने जा रहा हूं.
यह बोलकर मैं अपने कमरे में गया और दरवाज़े को बंद कर दिया.
मैंने बिना देर किए हुए फोन को ऑन करके वीडियो को चालू किया.
मैंने देखा कि बेड पर छोटी अम्मी बैठी हुई हैं लेकिन उनका चेहरा नहीं दिख रहा है.
उन्होंने साड़ी से चेहरे को छुपा रखा है.
फिर अब्बू आए और दरवाज़े को बंद कर दिया.
इसके बाद अब्बू बैड के पास आए और छोटी अम्मी से बातें करने लगे.
अब वहां क्या बातें हो रही थीं, मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा था क्योंकि फोन बहुत दूर था.
मैंने वीडियो देखते हुए कहा कि अबे बुड्ढे, इतनी खूबसूरत लड़की के साथ क्या बात कर रहा है. लड़की सामने है और तू बात करके टाइम पास कर रहा है.
इसके बाद मैंने वीडियो को थोड़ा आगे किया.
अब अब्बू छोटी अम्मी के चेहरे से साड़ी हटाते हैं और छोटी अम्मी को चूमते हैं और फिर जल्दी-जल्दी से सारे कपड़े उतार देते हैं और फिर उन्हें बेड पर लेटाकर ऊपर चढ़कर घपाघप करना शुरू कर देते हैं.
ये सब कुछ देखने में मुझे मजा नहीं आ रहा था.
शायद मैंने फोन को काफी दूर पर रख दिया था इसलिए साफ-साफ छोटी अम्मी का कोई भी सामान नहीं दिख रहा था.
छोटी अम्मी अब्बू को धीरे-धीरे करने को कह रही थीं लेकिन अब्बू तो उन पर भूखे शेर की तरह टूट पड़े थे.
अब्बू अपनी गांड आगे-पीछे, आगे-पीछे कर करके चोद रहे थे. मानो कि छोटी अम्मी की चूत को जैसे आज फाड़ ही देंगे.
मेरा फोन इतना दूर होने के बाद भी छोटी अम्मी की आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी.
छोटी अम्मी जोर-जोर से आ उफ़ उफ़ आह की आवाज़ें निकाल रही थीं
मेरे अब्बू बहुत मोटे हैं उनका वजन करीब 125-130 किलो होगा.
तो वहीं छोटी अम्मी यही 50 -55 किलो की होंगी.
लेकिन अब्बू इस छोटी सी कली को मसले जा रहे थे.
अब अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स दबाने लगे और मुंह से छोटी अम्मी के बूब्स चूसने लगे.
अब्बू बूब्स को इतना जोर-जोर से दबा और चूस रहे थे जैसे बूब्स को वे खा ही जाएंगे.
अब्बू ने छोटी अम्मी के बूब्स को दांत से काट लिया जिस पर छोटी अम्मी जोर से चिल्लाई- याल्ला आह मर गई.
छोटी अम्मी- क्या कर रहे हैं … धीरे-धीरे से करिए ना …बहुत दर्द हो रहा है.
अब्बू- चुप साली, तेरे बाप को पैसे तेरा मुंह देखने के लिए नहीं दिया है. तुझसे शादी की है सिर्फ तुझे चोदने के लिए.
इसके बाद अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स को और जोर-जोर से दबाने लगते हैं.
छोटी अम्मी- आ आह ओह … अम्मी मर गई … आ उफ्फ उफ आह ओह याल्ला रहम करें मुझे पर … आ आआआ आऊऊ ऊऊऊ ऊफ आ आह!
वे दर्द से सिसक रही थी.
छोटी अम्मी- खुदा के लिए मुझे अब छोड़ दें बहुत दर्द हो रहा है.
अब्बू- नई चूत में पहली बार लौड़ा घुसने पर दर्द होता है फातिमा!
छोटी अम्मी- जी चूत में नहीं जा रहा है. आप का वजन बहुत है मेरे शरीर में दर्द हो रहा है.
अब्बू- रंडी चुपचाप चोदने दे!
इसके बाद अब्बू अपना लौड़ा न्यू वाइफ की छोटी चूत में रगड़ने लगते हैं.
इसके बाद अपने मुंह से थूक लगा कर चूत मे डालकर छोटी अम्मी के ऊपर चढ़कर चोदने लगते हैं.
छोटी अम्मी- आ नहीं आ … उफ उफ उफ … आह ओह उफ़ उफ़!
नए घर में सिर्फ अब्बू और छोटी अम्मी ही थी इसलिए अब्बू छोटी अम्मी को जवानों की तरह चोद रहे थे, दोनों की आवाज़ अब पूरे कमरे में गूंज रही थी.
अब्बू के हांफने की आवाज़ और छोटी अम्मी की आ उफ उफ आह ओह की आवाज़ के साथ-साथ एक आवाज़ और थी जो फच फच फच की थी.
छोटी अम्मी- अब हमें छोड़ दें. मेरा बदन बहुत दर्द कर रहा है.
अब अब्बू दो तीन शॉट लगाने के बाद रुके.
छोटी अम्मी को लगा कि अब अब्बू का हो गया है. जिस पर उन्होंने थोड़ी सांस ली.
लेकिन अब्बू कहा रुकने वाले थे … अब्बू ने छोटी अम्मी की चूत में अपनी उंगली डालकर जोर-जोर से आगे-पीछे आगे-पीछे करके चोदना शुरू कर दिया.
शायद अब्बू का लौड़ा काम नहीं कर रहा था तो अब्बू उंगली से ही काम चला रहे थे.
छोटी अम्मी- आ आह उफ़ … आह आह … ओह ओह मर गई! नहीं नहीं … आआ आआ ईईई … आआआ ईईई ऊयाल्ला मदद आ … उफ आ आ आह ओह ओह माई.
छोटी अम्मी अपना सिर दाएं और बाएं कर रही थीं.
शायद उन्हें बहुत दर्द हो रहा था.
लेकिन अब्बू रुके नहीं, वे उंगली डाले जा रहे थे.
अब अब्बू, छोटी अम्मी को उलटा लेटाकर उनके ऊपर चढ़कर चोदने लगे.
छोटी अम्मी की आवाज और तेज हो गई.
अब्बू ने छोटी अम्मी के मुंह को अपने हाथों से दबा दिया और चोदने लगे.
वे दो-तीन शॉट मारने के बाद रुके और अब छोटी अम्मी को घोड़ी बनाया और घापाघप शुरू कर दिया.
अभी घोड़ी बनाकर शुरू ही किया था कि वे अचानक रुक गए और छोटी अम्मी की गांड को चाटने लगे.
अपनी जीभ से कभी चूत तो कभी गांड को चाटने के बाद फिर उंगली डालकर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.
मैं समझ गया कि अब अब्बू के लौड़े में दम नहीं रहा.
छोटी अम्मी- आआ आआआ उफ आ … ओह ओह … आह आह आआऊऊ ऊऊऊ!
उन्होंने अपना मुंह तकिए से दबा लिया और घोड़ी वाली पोज में गांड को रखा.
अब्बू भी उंगली करते रहे.
थोड़ी देर के बाद अब्बू रुके.
वे इतने पर ही नहीं रुके … उन्होंने छोटी अम्मी को अपना लौड़ा चुसवाया.
एक यही पोज था जिसमें अब्बू के साथ छोटी अम्मी भी मजे ले रही थीं.
छोटी अम्मी तो लौड़ा ऐसे चूस रही थीं जैसे किसी छोटी बच्ची को लॉलीपॉप मिल गया हो. वे उह लच पूच लप लप चप लप कर लौड़ा चूसे जा रही थीं.
अब्बू का लौड़ा बार-बार झड़ कर गिर जाता था.
लेकिन छोटी अम्मी उसे बार-बार खड़ा करके और चूस रही थीं.
दो बार झड़ने के बाद अब्बू ने छोटी अम्मी को रोका और धक्का लगा कर बेड पर गिरा दिया और ऊपर चढ़ गए.
छोटी अम्मी को लगा कि अब्बू फिर चोदेंगे. वे गिड़गिड़ाई- नहीं, अब और नहीं खुदा के वास्ते अब रहने दें.
अब्बू ने इस बार रहम करते हुए छोटी अम्मी के बूब्स को दबाना और चूसना शुरू कर दिया.
वीडियो में दिख रहा था कि अब्बू छोटी अम्मी के बूब्स को बहुत जोर-जोर से दबा रहे थे.
छोटी अम्मी- आ आह ओह … माई उफ उफ … आआआ आई ईऊ उफ आआ आह… याल्ला आह ओह ओह!
कुछ देर के बाद अब छोटी अम्मी की आवाजें धीरे-धीरे कम होने लगीं.
फिर छोटी अम्मी ने अब्बू को अपने से नीचे गिराया.
शायद अब्बू थककर सो गए थे.
छोटी अम्मी ने उठकर एक कपड़े से अपनी चूत को साफ किया.
वे बेड से उतरीं.
लेकिन जैसे ही छोटी अम्मी का वह हिस्सा दिखने वाला था कि वीडियो बंद हो गया.
शायद यहीं पर फोन की बैटरी खत्म हो गई थी.
मेरा सारा मूड खराब हो गया.
मैं छोटी अम्मी का नंगे बदन को देखना चाहता था लेकिन मैं देख नहीं पाया.
लेकिन अब्बू और छोटी अम्मी की चुदाई वाले वीडियो को देखकर मेरे अंदर का शैतान जाग गया.
चुदाई तो मैंने पहले भी बहुत देखी थी.
आपको बता दूं कि जब मैंने पहली बार सेक्स किया था तो करते हुए अम्मी ने मुझे देख लिया था.
फिर क्या था … मेरी पिटाई भी बहुत हुई थी.
उस पिटाई के बाद मैंने फिर कभी चुदाई के बारे में नहीं सोचा.
लेकिन आज मेरा लौड़ा सिर्फ चूत के बारे में ही सोच रहा है और यही सोच रहा था कि किसको चोदूं.
छोटी अम्मी को सोचते-सोचते मैं कब सो गया, पता ही नहीं चला.
आंख खुली तो कोई दरवाजा खटखटा रहा था.
मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि मेरी भाभी थीं.
शाहिद भाई जान की बीवी … वही मेरा शाहिद भाई जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है.
उनकी बीवी शहनाज.
भाभी घर को साफ करने आई थीं.
मैं वापस बैड पर आकर बैठ गया और भाभी घर साफ करने लगीं.
न जाने क्यों आज भाभी को देखकर मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा.
जबकि आज से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था.
मेरे भाईजान की शादी के 3 साल हो गए थे.
लेकिन आज भाभी के बदन को देखकर मेरी आंखें एक-एक इंच नाप रही थीं.
भाभी के बड़े-बड़े मम्मे दिख रहे थे जब वे झुक कर घर साफ़ कर रही थीं.
मैंने भी सोच लिया कि इस शहनाज का नाजायज पति तो बन कर ही रहूंगा.
मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।
मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.
वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।
मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।
ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।
मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।
मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।
शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!
मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।
मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.
लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।
उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।
वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।
बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।
तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।
बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।
मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.
फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।
जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!
मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।
मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।
मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।
मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।
मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।
मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।
एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।
अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।
मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।
वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!
फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।
फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।
मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।
मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।
मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।
मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।
इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।
मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.
वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।
उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।
दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!
मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।
आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।
अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।
इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।
फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।
उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.
फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।
मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।
मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.
मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।
उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।
वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।
वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!
वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।
फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।
मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।
मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।
उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।
वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।
मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।
फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।
मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।
सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।
मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!
तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।
मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।
मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.
मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।
बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।
मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।
मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।
उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।
मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।
मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!
वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।
अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।
सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।
मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।
इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।
सुबह उठ कर वे चले गये।
उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
यह मेरी पहली कहानी है, अन्तर्वासना की Antarvasna हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ कर मेरी भी इच्छा हुई कि मेरी कई आप बीती में से एक रात का रोचक वर्णन करूँ। चूंकि यह मेरी पहली कहानी है, मेरी भाषा और अन्दाज वास्तविक है।
मेरे दिल में हलचल मचने एक बड़ा कारण यह है कि मेरे घर में आज कल मेरी छोटी मौसी और मौसा जी आये हुए हैं। मैं रात को रोज़ उनकी चुदाई देखती हूँ, और मजा लेती हूँ। पर हाँ, उसके एवज में मुझे हाथ से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है। मेरा घर पुराना और साधारण सा है, अब्बा एक परचूनी की दुकान चलाते हैं, भाई जान उनकी मदद करते हैं।
मेरे घर पर कमरों के बीच में दरवाजा नहीं है, बस एक परदा रहता है। रात अधिक बीत जाने के बाद यह निश्चित हो जाने के बाद कि सभी सो गये होंगे तभी चुदाई का कार्यक्रम चालू किया जाता था। अभी तो मौसा और मौसी रात को छत पर चले जाते थे, और वहाँ पर चुदाई किया करते थे।
मेरे लिये भी यह और सरल था कि मैं चुपके से ऊपर जा कर मजे देखती। मुझे ऊपर आकर उन्हें झांक कर देखना पड़ता था। यही मुझसे बस गलती हो गई। मेरे पड़ोस के लड़के शफ़ीक ने मुझे देखते हुए पकड़ लिया और मौके का पूरा फ़ायदा उठा कर मुझे उसने चोद दिया।
वैसे यह कोई नई बात नहीं थी मेरे लिये। मेरे साथ ऐसा कितनी ही बार हो चुका था और मैं कई बार चुद भी चुकी हूँ, पर अधिकतर मेरी गाण्ड ही मारी है। शायद यहा गाण्ड मारना सभी को अच्छा लगता है। मुझे ठीक से तो याद नहीं पर चुदी तो मैं दस बारह बार ही हूँ, पर मेरी गाण्ड तो लोगों ने पता नहीं कितनी बार बजाई है।
अब आप ये तो नहीं सोच रहे हैं कि कोई तवायफ़ या वेश्या हूँ, जी नहीं, बिल्कुल नहीं, मैं एक साधारण सी लड़की हूँ, सुन्दर भी हूँ और सबकी चहेती भी हूँ। किसी का भी लण्ड खड़ा होता है तो एक बार तो वो मुझ पर ट्राई करने तो जरूर ही आता है।
यहाँ कानपुर में हमारी घनी बस्ती में सारे घर आपस में जुड़े हुए हैं और यह तो यहा आम बात है, बस जिसका सिक्का चला वही मजे कर जाता है, सबसे बड़ी बात- कुंवारी को चोद जाओ, कोई कुछ नहीं कहेगा पर शादीशुदा को कोई चोद जाये तो हंगामा हो जाता है।
पर हाँ, मैं अपना चुनाव खुद करती थी।
यहाँ हर बात में गाली देना तो आम बात थी, यानि यही हमारी बोलचाल की भाषा थी, बिना गाली के तो बात पूरी होती ही नहीं थी। मैं भी इससे अछूती नहीं थी, साधारण सी बातों में भी खूब गालियाँ देने की मेरी भी आदत थी, बात बात पर गन्दी गालियाँ देती थी और गालियाँ देने की इतनी अभ्यस्त हो गई थी कि मुझे लगता ही नहीं था कि मेरे बोल गालियों से भरे हुये हैं।
शफ़ीक ने मुझे हाथ हिलाया। मैंने उसे ऊपर की ओर देखा।
‘दीदी, शीऽऽऽ , इधर आओ!’ शफ़ीक ने फ़ुसफ़ुसा कर कहा।
‘हाय, मैं मर गई, तुम…?’ मैं धीरे से दीवार कूद कर उसके पास आ गई।
‘आओ जल्दी आओ, मामला चल रहा है।’
मुझे ले कर वो दूसरी मन्जिल की छत पर आ गया। ऊपर दीवार के पास से चांदनी रात में सब कुछ ठीक से दिख रहा था।
‘दीदी, यहा से देखो, मौसा जी लगता है पोंद के शौकीन है’ उसने बताया।
देख कर मैं शरमा गई। काफ़ी दिनों से शफ़ीक मेरे पीछे था, मुझे पता था कि अब यह भी मुझे नहीं छोड़ेगा।
‘तू रोज़ देखता है क्या?’
‘हाँ, और आपको भी देखता हूँ। भेन-चोद बड़ा मजा आता है ना, वो देखो तो सही!’ मौसा जी, अब गाण्ड मार रहे थे। मौसी के बड़े बड़े चूतड़ नजर आ रहे थे। शफ़ीक ने मुझे इशारों से दिखाया।
पर मेरा ध्यान तो शफ़ीक पर था कि भेनचोद ये मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा, शायद मुझे चोदने की सोच रहा होगा। इतना कुछ हो जाये तो और मेरी जैसी लड़की को कोई छोड़ दे तो मुझे वो चूतिया ही लगेगा।
इतना सब देखने से मेरा मन भी मचल उठा था और मैं ऊपर उसके पास आई ही चुदने के लिये थी। मौसा जी कुत्ते की तरह मौसी की गाण्ड चोद रहे थे। मेरी चूत भी गीली हो उठी।
इतने में शफ़ीक ने उत्तेजित हो कर मेरी गाण्ड की गोलाई पर हाथ फ़ेर दिया, मेरे तन में झुरझुरी छूट गई। मैंने उसे सीधे देखा, शायद कोई इशारा करे, वो चूतिया तो नहीं था, उसने मेरी तरफ़ देखा और और एक गोलाई में धीरे से हाथ मार दिया।
मुझे यकीन हो गया कि अब ये मेरी मारेगा जरूर।
मैंने हंस कर कहा- धीरे मार, चपटी हो जायेगी, भेनचोद तू भी मजा ले रहा है?’
‘हाँ आपा, कितना मजा आ रहा है ना!’ शफ़ीक अब बार बार मेरे चूतड़ों का जायजा ले रहा था। मुझे मजा आने लगा था। मुझे उसका लण्ड भी खड़ा हुआ नजर आने लगा था। यानि कि मैं चुदूंगी तो जरूर ही अब, लौड़ा भी उफ़ान पर आ रहा था।
मैंने उसे और बढ़ावा देने के लिये उससे चिपक सी गई, और अपनी बड़ी बड़ी आंखे उठा कर उसे देखा और कहा- देख किसी को कहना नहीं कि अपन ने ये सब देखा है।’ मैंने उसे धीरे से कहा।
‘अरे ये कोई कहता है क्या? तेरे पोन्द तो मस्त है री!’ मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।
‘और सुन तू जो कर रहा है वो भी मत बताना!’ मैंने झिझकते हुए कहा।
उसने यह सुनते ही मेरी गाण्ड दबा डाली और मसलने लगा। मुझे मस्ती आने लगी।
‘बानो, अपन भी ऐसा करें?’ मौसा मौसी को चोदते देख कर उसने मेरे शरीर पर लौड़ा दबाते हुए कहा।
‘क्या करें…?’ मैंने जान कर उसके मुख से कहलवाया।
‘तुम पोन्द मराओगी?’ मेरे चूंचक जोर से दबा दिये।
‘पर बताना नहीं किसी को कि मैंने पोन्द मराई है।’ मेरी चुदवाने की इच्छा बलवती होने लगी। आखिर इतने दिनों से मौसा मौसी की चुदाई देख रही थी और बहुत दिनों से मुझे किसी ने चोदा भी नहीं था।
मैंने अपने आप को उसके हवाले कर दिया। मेरा अंग अंग वासना से भर रहा था। फिर उसका कड़क और मोटा लण्ड, लम्बा तो नहीं था, हाँ, मुझे लगा कि साढ़े पांच इन्च का मूसल तो होगा ही। मुझे कड़क लण्ड से चुदाई की बहुत इच्छा हो रही थी। चूत में से पानी चू पड़ा था। मौसा जी का कार्यक्रम समाप्त हो चुका था, पर हमारा कार्यक्रम परवान चढ़ रहा था।
मैंने शफ़ीक का लण्ड पकड़ लिया। हाय, एकदम कड़क, और प्यासा लग रहा था। बस उसे घुसा ही डालूँ चूत में!
पर वो तो मेरी पोन्द मारने पर तुला था। पोन्द यानि कि चूतड़!
‘बानो, तेरे चूचे बड़े प्यारे हैं, जरा कुर्ता तो ऊपर कर दे, थोड़ा मचका दूँ इन भेन चोदों को!’
‘चूचे मचकाना तुझे अच्छा लगता है क्या?’ मैंने कुर्ता उतारते हुए कहा।
मेरी चूचियाँ बाहर निकलते ही उछल पड़ी। मेरे चूचुक कड़े हो उठे।
उसने मेरी चूचियों को पकड़ कर दबा दिया।
‘पीठ मेरी तरफ़ कर ले, तेरी गाण्ड का मजा लूँ!’ उसने मुझे घुमा दिया और लौड़ा मेरी पोंद के बीच दबाने लगा।
‘मादर चोद! क्या मेरी फ़ाड़ डालेगा… धीरे दबा ना!’
‘शम्मो जान, पजामा उतार दे अब,… अब रहा नहीं जाता है, तेरी पोंद मरवा ले अब!’
मेरा पजामा उसने ही उतार दिया। चांदनी रात में मेरी गोल गोल गाण्ड चमक उठी। उसका उफ़नता हुआ लण्ड और भूरे रंग का सुपाड़ा चमक उठा, उसके लण्ड की खलड़ी कटी हुई थी, फ़ुफ़कार भरते हुए मेरी पोंद की दरारों के घुस पड़ा। छेद पर लण्ड को ऊपर नीचे रगड़ा, फिर अपनी अंगुली में थूक लगा कर मेरी गाण्ड के छेद पर मल दिया और लौड़े को छेद पर रख कर अन्दर घुसेड़ दिया, थोड़ा सा रगड़ खाता हुआ अन्दर घुस पड़ा।
गाण्ड मराने की मैं अभ्यस्त थी, गाण्ड का छेद भी गाण्ड मरवा कर बड़ा हो चुका था, सो मुझे तो मजा आ गया।
उसने लण्ड बाहर निकाला तो गाण्ड का छेद खुला ही रह गया। अन्दर मुझे हवा की ठण्डक सी लगी, लेकिन जल्दी ही लण्ड वापिस उसमें समा गया।
‘हाय, भाई जान, मोटा लौड़ा है, मजा आ गया!’ मैंने अपनी गाण्ड में मूसल जैसा लण्ड फ़न्सा हुआ महसूस किया।
‘शम्मो जान, ये तो रगड़ी हुई है, लगता है खूब लौड़े खाये है?’ उसके मूसल जैसे लण्ड की धचक अन्दर तक छा गई।
‘और क्या? माजिद चाचा तो जम के मेरी पोंद मारता है, हरामी हर दो तीन दिनों में लण्ड ठोक जाता है, पर मजा तो खूब दे जाता है!’ मैं उसके लण्ड का भरपूर मजा ले रही थी।
‘साला लण्ड तो यूं जा रहा है जैसे चिकनी चूत में जाता है, गाण्ड का छेद है या कोई आम रास्ता!!’ उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी। गाण्ड को रगड़ता हुआ लौड़ा फ़काफ़क अन्दर बाहर आ जा रहा था।
‘तो चूत ही मार दे ना, इस गाण्ड में क्या रखा है, सारा सुख तो इसी भोसड़े में है।’ मुझे चुदने की आस लगी थी।
‘अरे हम कनपुरिया हैं! गाण्ड देख कर ही मन डोलता है, वरना ये मादरचोद लौड़ा खड़ा ही नहीं होता है।’ मेरी गाण्ड में मीठा मीठा मजा आ रहा था। पर मुझे अब चूत का असली मजा चाहिये था।
मेरी गाण्ड खुली हवा में चुद रही थी। ठण्डी हवा बदन को सहला रही थी और बड़ा मीठा सा अहसास हो रहा था। मेरे चूचों को मल मल कर उसने लाल कर दिये थे। वो हरामी लण्ड पेले ही जा रहा था।
मैंने सहूलियत के लिये अपनी टांगे और चौड़ी कर दी ताकि लण्ड की चाल तूफ़ानी हो सके। अचानक उसने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया और आह भरते हुए वीर्य छोड़ दिया।
‘भेनचोद सारा माल गाण्ड पर निकाल दिया, अब चल साफ़ कर अपनी बनियान से!’ मेरी चूत वासना से बेकाबू हो रही थी और इस मादरचोद साला हरामी ने अपना तो माल ही निकाल दिया। मैंने उससे कहा- अब चूतिये, मेरी चूत क्या तेरा भाई चोदेगा, रख दिया ना मेरी चूत को कुंवारी, देख कैसी चू रही है, साला हरामी!’
‘अरे तू क्या समझ रही है, मैं तुझे छोड़ दूंगा क्या, देख तेरे भोसड़े को कैसे मस्त करता हूँ चोद चोद कर!’ उसने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और सीढ़ियों के पास ही पत्थर की एक बैठने की बैन्च बना रखी थी, जिस पर बिस्तर बिछा कर शफ़ीक रात को सोता था, पर लेटा दिया। उसने अपना लण्ड मेरे मुँह में घुसेड़ दिया।
मुझे चुदाना था सो उसका लौड़ा चूस चूस कर उसे फिर से खड़ा कर दिया। लण्ड खड़ा होते ही उसने बिस्तर पर से खींच कर किनारे कर लिया और प्यार से मेरी चिकनी चूत में लण्ड घिसने लगा।
मैंने उसकी बनियान से ही अपनी चूत का रस पोंछ लिया और अपनी चूत की कलियों को दोनों हाथों से पूरी खोल दी। उसने अपना कड़क लण्ड हाथ से पकड़ा और मेरी चूत में घुसा डाला, मेरे मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
चिकनाहट मैंने पोंछ दी थी सो लण्ड मेरी चूत को रगड़ता हुआ अन्दर चला गया, सूखी चूत में मजा आ गया। क्या मस्त रगड़ लगी कि मैं स्वर्ग में पहुंच गई।
‘अब चोद दे भाई जान, लगा दे पूरा जोर लौड़े का!’
उसने धक्के लगाने शुरू कर दिये। मैं मस्त हो उठी और अपनी पोंद नीचे से उछालने लगी। धच्च धच्च करके लौड़ा पूरी ताकत से अन्दर तक उतर रहा था। फिर वो मेरे चूचे को भी मल मल कर मुझे मस्त किये दे रहा था, मेरे चूचक को घुमा घुमा कर मसल रहा था।
चूत एक बार फिर लसलसा उठी, पानी छोड़ने लगी थी, अब चूत के पानी के साथ फ़च फ़च की आवाजें आने लगी थी।
‘मस्त चूत है बानो जान, मलाई है ये तो, हाय रे मेरी छिनाल, मेरी रंडी, ले ले मेरा पूरा लौड़ा घुसेड़ ले!’
‘पेल दे भेनचोद, मार दे मेरी चूत को, दे… दे… मार लण्ड को, फ़ाड़ दे हरामी को!’ मैं तो चुद कर मदहोश हुई जा रही थी। मेरे दिल की भड़ास भी निकली जा रही थी। मेरी चूत उसके लण्ड को अन्दर से लपेट रही थी। मेरी चूत के अन्दर की चमड़ी उसके लण्ड को जैसे चूस रही थी। मेरी चूत अब कसने लगी थी।
पानी निकालने ही वाला थी, उसे भी तेज मजा आने लगा था। उसके मुँह से एक से एक नई नई गालियाँ निकल रही थी। मेरी जबान तो गन्दी थी ही सो खूब गालियाँ दे देकर चूतड़ों की रफ़्तार बढ़ा दी। उसने अब मेरी चूत पर पूरा दबाव डाल दिया और लण्ड को जड़ तक दबा डाला।
‘माई री, भाई जान, गई मैं तो, मेरा तो निकला रे, हाय रे… आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊईऽऽऽऽऽ’ कहते हुए मेरी चूत में लहरें उठ पड़ी और पानी छूट गया। मैं झड़ने लगी।
अचानक उसका भी वीर्य निकल पड़ा और चूत के अन्दर ही भरने लगा। हम दोनों एक दूसरे को चूमते जा रहे थे और झड़ते जा रहे थे। कुछ ही देर हम सामान्य हो गये और उसी बिस्तर पर बैठ गये।
‘मां की लौड़ी, मस्त है रे तू, देख मेरा लौड़ा आज तो मस्त हो गया, कल भी चुदायेगी ना?’
‘अपनी मां को चोदना भोसड़ी के, अब कल किसी और का नम्बर है, अलग अलग लौड़े का मजा लेने में ही सुकून मिलता है, तू भी अलग अलग चूत और गाण्ड ट्राई किया कर!’
‘साली रण्डी, तेरी भोसड़ी मारूँ, मुझे चिढ़ाती है, अभी रुक तेरी गाण्ड एक बार फ़ाड़नी पड़ेगी।’ और वो मेरे पर लपक उठा।
मैं जल्दी से उठी और उसे अपना हाथ का लण्ड बना कर उसे चिढ़ाया और हंसती हुई भाग खड़ी हुई।
‘ले ले… मेरी भोसड़ी ले ले… अब कर अपने हाथ से… मुठ मार ले…!’ हंसी करते हुए छलांगें मारती हुई सीढ़ियाँ उतर कर मैंने अपनी दीवार फ़ांद ली। वो ऊपर छत से हंसते हुए हाथ हिला रहा था।
पाठकगण, मेरी भाषा मर्यादा से बाहर है, कृपया मुझे माफ़ करें। Antarvasna
मैं नागपुर से ३८ साल का Sex Stories सुन्दर और स्मार्ट पुरुष हूँ। मैं आज आपको अपने जीवन की एक पुरानी लेकिन गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
मेरे पड़ोस में पायल रहती थी जो मुझसे करीब आठ साल छोटी थी। हमारे और पायल के परिवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। रुपा सुन्दर और जवान होती जा रही थी और साथ ही मेरी रुचि उसमें बढ़ती जा रही थी। वो जब चलती थी तो मेरी आँखें उसके कूल्हों पर ही अटक जाती थी। उसकी लहराती हुई चाल देखकर मैं तो जैसे पागल ही हो जाता था। वो मुझे चाचा कहती थी।
पायल अब कॉलेज़ में पढ़ने लगी थी। उसके उभार बढ़ने लगे थे और साथ ही उसकी मादकता भी बढ़ने लगी थी। उसका कद लगभग ५’२”हो गया था, उसका बदन भरा भरा सा दिखने लगा था। मैं रात को अक्सर उसे याद करके मुठ मारने लगा था। हमारा रिश्ता ऐसा बन गया था कि मैं एकदम से उसे कुछ नहीं कह पाता था। जब भी मुझे मौका मिलता मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छू लेता था।
एक दिन दोपहर में मैं उसके घर गया तो वह अपनी दादी और माँ के साथ बैठी थी। उसके पैरों में दर्द हो रहा था। मैंने उससे कहा- लाओ, मैं तुम्हारा एक्यू-प्रेशर कर देता हूँ। वह मेरे करीब आकर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे उसके पंजों पर एक्यू-प्रेशर करना शुरू किया। मुझे एक्यू-प्रेशर के काफी सारे दबाव-बिंदु मालूम हैं। मैं समझ गया कि उसका पैर ऊपर से लॉक हो गया है।
पायल इस समय स्कर्ट और टी-शर्ट पहने हुए थी। धीरे धीरे मैं उसके घुटनों तक प्रेशर देने के बहाने अपने हाथ फिराने लगा। थोड़ी देर में मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया। जांघों को सहलाते हुए दो बार मैंने उसकी योनि भी सहला दी। पायल शरमाने लगी। उसकी माँ और दादी भी बैठी थी, अधिक कुछ हो नहीं सकता था।
समय बीतता गया, पायल पर और ज्यादा जवानी चढ़ने लगी। मैं एक्यू-प्रेशर करने के बहाने उस के पूरे बदन को छूने लगा, जिससे वो हमेशा शरमा जाती थी। मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में भी ऐसा कुछ हो रहा है क्या।
कुछ दिनों में पायल ने अपनी स्नातिकी पूरी कर ली। अब वो पूरी तरह से निखर चुकी थी। उसका कद ५’४” छाती ३३” कमर २८” और कुल्हे ३२” के लगभग हो गए थे। उसे देख कर मेरी जांघों के बीच जबरदस्त तनाव आ जाता था।
इस बीच मेरी शादी हो गई। मै अक्सर अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय पायल को याद करके ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं पायल के साथ ही सेक्स कर रहा हूँ।
कुछ दिनों बाद पायल का रिश्ता आ गया और उसकी शादी मुम्बई हो गई। उसका पति दिखने में ज्यादा ठीक नहीं था। मुझे वो कहावत याद आ गई कि हूर के साथ लंगूर ही मजे करते हैं।
मुझे अपनी किस्मत पर बड़ा पछतावा होता था कि ऐसा करारा माल मेरी जगह इस लंगूर को मिल रहा है। उसकी शादी के बाद जब वो पहली बार मायके वापस आई तो उसको देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। थोड़े दिनों कि चुदाई के बाद तो उसका बदन जैसे क़यामत हो गया। उसके बात करने का तरीका भी बदल गया। थोड़े दिनों बाद वो मुंबई आने को कहकर चली गई और मैं इंतजार करने लगा कि कब मुंबई जाने का मौका मिले।
फ़िर कई महीनों मुझे मंत्रालय के काम से मुंबई जाने का मौका लगा। अब तक उसकी शादी को ७ महीने हो चुके थे। मुझे स्टेशन पर लेने के लिए उसके पति आये थे। हम लोग घर पहुंचे तो दरवाजे पर ही मेरे इंतजार कर रही थी। मैंने उसे दरवाजे पर ही अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर एक पप्पी दी।
थोड़ी देर में मैं तैयार होने बाथरूम में गया तो देखा पायल की अंडरवियर और ब्रा सूख रही थी। मैंने उसे उठा कर सूंघा, क्या मदहोश सुगंध थी ! मेरा लण्ड खडा हो गया। मैंने उसकी पैंटी को अपने लण्ड पर रख मूठ मारना शुरू कर दिया और अचानक मेरा पानी बह निकला। मैं फटाफट तैयार हुआ और मैं और उसके पति नाश्ता करके साथ में ही निकल गए।
मैं मंत्रालय चला गया और उसके पति अपने ऑफिस। करीब ४.०० बजे मेरा काम ख़त्म हुआ, मुझे वहां और ४ दिन रुकना पड़ रहा था। मैं करीब ६.०० बजे उसके घर वापस आया तो उसके पति पहले ही घर पर थे और उन्होंने मुझे बताया कि ऑफिस के काम से उन्हें ५ दिनों के लिए गोवा जाना पढ़ रहा है।
मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। वो अफ़सोस जता रहे थे कि मैं पहली बार आया और उन्हें जाना पड़ रहा है। मैंने शांत स्वर में कहा- भाई ऑफिस का काम है तो जाना ही पड़ेगा !
फिर रात १०.०० बजे की गाड़ी से वो गोवा चले गए। हमने उन्हें घर से ही ९.०० बजे विदाई दे दी थी।
उनके जाने पर हमने खाना खाया। पायल ने रसोई का काम ख़त्म किया फिर हम दोनों बैठकर घर -परिवार की बातें करने लगे। अगले दिन मुझे दोपहर बाद ही बाहर जाना था इसलिए हम दोनों को सुबह जल्दी उठाने की कोई चिंता नहीं थी। पायल ने अपनी नाईटी पहनी थी क्योंकि मुझसे ऐसी कोई शर्म तो थी नहीं। मैंने भी अपना नाईट-सूट पहन रखा था और आदत के मुताबिक मैंने अपना अंडरवियर नहीं पहना था।
थोड़ी देर बातें करते करते मैंने उससे कहा- चलो, बेड पर लेट कर ही बातें करते हैं, पीठ को थोड़ा आराम मिल जायेगा।
हम दोनों उनके बेड-रूम में आ गए। मैं लेट गया और वो पास में बैठ कर बातें करने लगी।
मैं उसका हाथ अपने हाथों में ले कर सहलाने लगा। फिर उसको खींच कर अपने बाजू में लिटा लिया। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी गर्दन के नीचे से निकालकर उसका सर अपने कन्धों पर रख लिया। हम बातें करते जा रहे थे। धीरे धीरे मैंने उसके हाथ जो उसकी छाती पर रखे थे, सहलाना चालू किया। कमरे में ए सी चालू था। हल्की-हल्की ठण्ड का हमें अहसास होने लगा। उसने एक चादर खींच कर हम दोनों के ऊपर डाल ली ऐसा करते वक़्त मेरा हाथ उसके भारी उरोजों को छू गया। उसे छूते ही मेरा खम्बा अकड़ कर खड़ा होने लगा।
अब मैंने उससे शादीशुदा जिन्दगी के बारे में पूछना शुरू किया। मेरा हाथ उसके हाथों को सहलाते सहलाते उसके उरोजों को भी सहलाने लगा था। शायद अब उसे मेरे इरादे भी समझ में आने लगे थे, उसने कहा- रात बहुत हो गई है, सो जाते हैं।
मैंने कहा- अभी तो बहुत सी बातें करनी हैं, सुबह भी जल्दी उठने की चिंता नहीं है, और बातें करते हैं।
मैंने उससे पूछा कि सेक्स लाइफ कैसी चल रही है तो वो शरमाने लगी, कहने लगी- चाचा ! ये आपके पूछने की बात थोड़े ही है !
मैंने कहा- अब तुम इतनी बड़ी हो गई हो, शादीशुदा हो, अब तो हम एक दोस्त की तरह बातें कर ही सकते हैं।
पायल ने कहा- मुझे शर्म आती है !
मैंने कहा- चलो, मैं अपनी पहले बताता हूँ। देखो मुझे शादी के ४ साल होने पर भी रोज सेक्स किये बिना नींद नहीं आती। मैं पहले तुम्हारी चाची की अच्छे से मालिश करता हूँ और फिर करीब १ घंटा हम सेक्स करते हैं। इतने में तुम्हारी चाची ३ से ४ बार झडती है।
और जब चाची नहीं होती तब? -उसने पूछा।
तब मैं उसका या किसी के भी नाम से स्वयं संतुष्टि कर लेता हूँ, कभी कभी तो उसमें तुम्हारा भी नाम होता है।
वो सकपका गई। उसे मेरे इरादे खुलते नजर आने लगे। उसने कहा- ये तो लगभग रोज देर रात तक लौटते हैं और सुबह जल्दी चले जाते हैं। हम लोग शनिवार रात को ही ये सब कर पाते हैं। या फिर किसी दिन छुट्टी होती है तो बोनस हो जाता है।
अब मैं उसके मम्मों को सीधे सहलाने लग गया। उसने कहा- ये क्या करते हो चाचा?
मैंने कहा- पगली अभी तो हम दोस्त हैं चाचा-भतीजी नहीं ! देखो तुम भी जवान हो और मैं भी। तुम्हारी भी शादी हो चुकी है और मेरी भी। तुम ये भी जानती हो एक बार करने से कुछ हो नहीं जाने वाला है।
उसने बताया कि वे लोग अभी बच्चा नहीं चाहते इस लिए कंडोम इस्तेमाल करते हैं।
मैंने कहा फिक्र न करो। हम भी वही इस्तेमाल कर लेंगे।
अब मैंने उसके अधरों पर अपने होंट रख दिए, वो थोड़ा कसमसाई और कुछ बोलने के लिए मुंह खोलने लगी तो मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी। उसपर इसका असर होने लगा। उसकी सांसे भरी होने लगी। लेटे लेटे ही मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया, वो हाथ हटाने लगी पर मैंने उसका हाथ जोर से पकड़ कर रखा था। फिर वो धीरे से मेरे लण्ड को सहलाने लगी।
आज मुझे अपनी बरसों की तपस्या का फल मिलने वाला था। मैंने उसके उरोजों को अब खुलकर दबाना चालू कर दिया। वो मेरी छाती में अपना मुंह छिपाने लगी। मैंने अपना हाथ उसके पेट और कमर पर से सरकाते हुए उसके मादक कूल्हों पर रख कर उन्हें दबाने लगा। मुझे जैसे स्वर्ग का आनंद मिलने लगा। अब पायल भी खुलने लगी।
आज गुरूवार था यानि उसकी पिछली चुदाई हुए लगभग ५ दिन बीत चुके थे।
अब मैं उसके पैरों के पास बैठा था। मैंने धीरे से उसका ग़ाऊन टांगों पर से उठाना शुरू किया। जैसे जैसे उसका ग़ाऊन ऊपर हो रहा था, उसकी सुडौल मरमरी टाँगें बाहर आने लगी। मेरा सुलेमान अब एकदम टाईट हो गया था। उसकी पिंडलियाँ देख मैं अपने आप को रोक नहीं सका और उन्हें चूमने लगा। मैं ग़ाऊन को इंच-इंच ऊपर कर रहा था और उसकी सेक्सी चिकनी टांगों को चूमता जा रहा था।
पायल भी मस्त होने लगी। उसने एकदम से मेरा पायजामा खींच दिया। अब मैं उसके सामने सिर्फ शर्ट में था। उसने मेरे फौलादी को हाथ में लेकर मसलना-सहलाना चालू कर दिया। मैंने उसके ग़ाऊन को जांघों पर से सरकाते हुए उसके हुस्न के दर्शन के लिए नाभि तक ऊपर उठा दिया। अन्दर वो भड़कीले लाल रंग की पैंटी पहने हुए थी। उसकी कली के आस पास की जगह गीली होने से कत्थई नजर आ रही थी। मैंने उसकी नाभि को चूम लिया और ग़ाऊन ऊपर उठाते हुए पूरा निकाल दिया।
अब मेरे सामने मेरी बरसों की तमन्ना सिर्फ ब्रा और पैंटी में मदहोश पड़ी थी। मैंने उसको उठा के गले से लगा लिया और बेतहाशा चूमने लगा। वो भी मुझे सब जगह चूमने लगी। उसने खींच कर मेरा शर्ट भी उतार दिया।
मैंने पीछे हाथ डालकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, उसके तने हुए उरोज बंधन से एक झटके में आजाद हो गए, मैंने जल्दी से ब्रा अलग कर उसके चुचुकों को चूसना चालू कर दिया। वो मेरी छाती और लण्ड को सहलाने लगी। उसके मुंह से अब सऽऽसऽऽसऽऽऽ सिस्कारियां छूटना चालू हो गई।
अब मैं ६९ की पोजीशन बनाते हुए उसकी पैंटी से उसकी जवानी को आजाद करने लगा। मेरा लण्ड अब उसके होटों को छूने लगा। मेरे लण्ड पर एक बूंद प्री-कम की उभर आई, जो मोती की तरह चमक रही थी। उसने अपनी जीभ निकालकर उस मोती को अपने मुंह में ले लिया। उसका स्वाद शायद उसे बहुत पसंद आया क्योंकि अब वो मेरे ६.५ इंच का लण्ड अपने मुंह में लेने लगी। इस काम के लिए वो बार बार अपना सर ऊपर उठा कर मेरा लण्ड अपने हलक तक लेने लगी।
मैंने उसकी पैंटी उतार दी, अन्दर से पाव रोटी की तरह बाल-रहित एकदम गुलाबी सी उसकी चूत नजर आने लगी। उसकी चूत देखते ही मैं पागल हो गया। मैंने ६९ पोजीशन में ही अपने को नीचे और उसको अपने ऊपर कर लिया। यह पोजीशन हम दोनों के मुख -मैथुन करने में सहायक हो रही थी।
मैंने उसकी चूत की पलकों को अपनी अँगुलियों से अलग किया और अपनी जीभ उसमें घुसा दी। जीभ का खुरदरापन उसके योनि-कलिका पर महसूस करते ही वो जोश में आ गई, वो भी मेरे लण्ड को पूरा निगलने की कोशिश करने लगी।
लण्ड-चूत हमारे मुंह में होने के कारण मुंह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसने मेरा और मैंने उसका पानी पी लिया। क्या पानी था, क्या स्वाद था। उसकी चूत की सुगंध मुझे मदहोश बना रही थी। ऐसा लग रहा था मानो ३ पैग विस्की पी ली हो !
अब मैं घूम कर उसके मुंह के करीब आ गया और उसे बाँहों में भर लिया। उसका चेहरा चमकने लगा था। अब उसकी आँखों में देख कर मेरे साण्ड ने फिर हरकत करनी शुरू कर दी। मैं उसके स्तनों और गाण्ड को सहलाने लगा। मेरा तना हुआ लण्ड उसकी नंगी जांघों से टकराने लगा।
उसके अन्दर भी फिर से तूफ़ान तैयार होने लगा। अब मुझ से सहन नहीं हो रहा था। मैंने उसके कमर के नीचे अपना हाथ डाला और अपने लण्ड को उसकी चूत के दरवाजे पर लगा कर एक जोरदार झटका मारा।
लण्ड अन्दर जाते ही वो जोर से चिल्लाई- मर गई ! इ इ इ ई ईई ईई ! थोड़ा धीरे डालो।
लेकिन अब सुनाने का समय नहीं था, मैं पूरी गति से झटके लगाने लगा, वो नीचे से चूतड उठाने लगी। १० मिनट के घमासान के बाद मैंने उसे जोर से अपने बदन से चिपका लिया, वो अब तक तीन बार झड़ गई थी, मेरे चिपकाते ही वो ४ थी बार साथ में झड़ने लगी। हम दोनों बाँहों में बाहें डालकर अपनी साँसे दुरुस्त करने लगे।
उसकी आँखों में गज़ब की संतुष्टि नज़र आ रही थी।
उसने मुझे अब खुलकर बताना चालू किया कि वो भी मुझे बहुत पहले से चाहती है पर कभी बोल नहीं पाई। उसका पति उसे कभी कभी ही संतुष्ट कर पाता है।
हमें याद आया कि जल्दबाजी में हमने तो कंडोम लगाया ही नहीं। मैंने उसे तुंरत पेशाब करके आने को कहा। आते वक़्त वो दूध ले आई। उस रात मैंने उसे ४ बार चोदा। एक बार घोड़ी बनाकर, एक बार सोफे पर। एक बार कंधे पर लेकर और एक बार बाथरूम में !
अगले दिन क्या हुआ?
यह बाद में बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी।
यदि आपको यह कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे जरूर बताएं।
अलविदा ! Sex Stories
बात उन दिनों की है जब Oral Sex मुंबई में दंगे चल रहे थे। पुणे में भी कुछ दिनों के लिए बस सर्विस बंद थी।
मैं उन दिनों पुणे के लिए एक बस में चली। बस में मेरी बगल में सपना नाम की आंटी बैठी थीं। सपना आंटी से मेरी अच्छी जान पहचान हो गई।
बस बड़ी धीरे सफर कर रही थी। शाम के 2 बजे बस ख़राब हो गई। बस वाले ने कहा अब बस नहीं चलेगी। पुणे 40 किमी दूर था। बस में मैं और आंटी ही अकेली औरतें थीं। मैं घबरा रही थी बस में कुछ गुण्डे टाइप लोग भी थे जो रास्ते भर हमें गंदे गंदे इशारे कर रहे थे।
आंटी मुझसे बोली- मैंने टैक्सी बुलाई है, तुम पुणे तक साथ चल सकती हो लेकिन उसके आगे रास्ते बंद हैं। मैं खुश हो गयी, मैंने कहा- आंटी मैं आपके साथ रुक जाऊँगी।
आंटी बोली ठीक है लेकिन मैं तुम्हें कुछ बताना चाहती हूँ। आंटी ने कहा- बेटी, मैं एक कोठे की मालकिन हूँ मेरा कोठा बुधवार पेठ में है वहाँ पर 50 -60 लड़कियाँधंधा करती हैं। पूरे दिन रात उनकी चुदाई होती है। पर यह मेरा वादा है कि अगर तुम मेरे साथ चलोगी तो तुम्हारी मर्जी के बिना मैं तुम्हारी चुदाई तो नहीं होने दूंगी लेकिन तुम्हारी चूची और चूतड़ दब सकते हैं, मतलब तुम्हारी जवानी लुटेगी तो नहीं लेकिन मेरे गुंडे मस्ती करने से बाज़ नहीं आयेंगे। बाकी अगर कहीं और रूकती हो तो जवानी लुट भी जायेगी और ब्लू फ़िल्म अलग से बन जायेगी, मुझे पुणे का सब पता है, वैसे तुम शादीशुदा हो कोठे पे छेड़छाड़ से मजा ही आएगा।
आंटी की बात सुन मैं डर गई लेकिन मेरी चूत में खुजली सी भी मची कि कोठे की मस्ती में मजा तो बहुत आएगा।
मैंने- कहा आंटी, यहाँ चूत तो चुदेगी ही, जान का भी खतरा है। यह बस के ही लोग मुझे चौद डालेंगे, सब गुण्डे टाइप लग रहे हैं। आप ले चलो, कोठे पे ही सही।
थोड़ी देर में आंटी की टैक्सी आ गई। हम उसमें बैठ गए। आंटी ने पुणे से 5-6 किलोमीटर पहले ही मुझे बुरका पहना दिया और ख़ुद भी बुरका पहन लिया।
शाम 4 बजे हम बुधवार पेठ में आंटी के कोठे पे थे। कोठे पे हमारे घुसते ही एक मुस्टंडे ने मेरे चूतड़ पीछे से दबा दिए और बोला- मौसी माल तो बड़ा तगड़ा लायी हो, आज्ञा हो तो नंगा कर दूँ कुतिया को।
मौसी ने कहा- हरामी हाथ मत लगाइयो, मेहमान है, चल बेटी अंदर चलें।
अंदर रंडियाँ अर्द्धनग्न खड़ी थी कुछ पेटीकोट और आधे से ज्यादा खुले ब्लाऊज़ पहने थी.
मौसी मुझे चौंकते देख कर बोली- अरे चौंक क्यों रही है यह कोठा है, रात को दिखाऊँगी कैसे यह रंडियाँ 6-6 लंड खाती हैं. आ चल थोड़ा फ्री हो लें। तुझे भी तो थोड़ी रंडीबाजी सिखा दूँगी, ताकि तुझे याद तो रहे की कभी कोठे की सैर भी की थी। घबरा मत तेरी चूत तभी चुदेगी जब तू चाहेगी लेकिन मर्दों के लंड तो पकड़ ही सकती है और चूची चूतड़ तो दबवा ही सकती है। रोज रोज एस मस्ती तो नहीं मिलेगी। परमानेंट रंडी बनने में तो प्रॉब्लम हैं लेकिन एक दिन रंडीबाजी करने में तो मजा ही मजा है।
मौसी की बात मुझे कुछ सही लगी। मैं और आंटी अब आंटी के कमरे में आ गई थी। कमरा फाइव स्टार जैसा था। आंटी ने अपनी साड़ी ब्लाउज उतार दिया। आंटी की चूचियाँपपीते जैसे लटक रहीं थी, आंटी सिर्फ़ पेटीकोट पहने थीं। आंटी ने घंटी बजाई, एक मुस्टंडा अंदर आया, आंटी बोली- कालू जरा पानी-वाणी पिला!
आंटी मुझे देखकर मुस्करा कर बोली- शरमा रही है, अभी तुझे नंगा कराती हूँ, कोठे की मस्ती तो चख ले।
मैंने कहा- नहीं मौसी, मुझे नंगा नहीं होना!
मौसी मुस्कराईं, बोली- हमारा वादा केवल तेरी चुदाई न होने तक का है।
कालू पानी लेकर आ गया। हम दोनों को बड़े प्यार से उसने पानी पिलाया.
मौसी बोली- अबे कालू तेरी मौसी नंगी खड़ी हैं और साली यह हरामन कपड़े पहने हुए है, चल जरा इसे नंगा तो कर।
कालू ने एक झटके में मेरी साड़ी खींच दी और मेरा ब्लाउज हाथ से खींच कर फाड़ दिया। मेरी ब्रा आधी लटक गई जिसे उसने एक झटके में उतार दिया। अब मैं पेटीकोट में थी, यह सब कुछ सेकंड में ही हो गया मैं विरोध भी नहीं कर पाई। कालू पेटीकोट भी फाड़ने वाला था लेकिन मौसी ने इशारे से उसे बाहर भेज दिया।
मेरी संतरे जैसी चुचियों पर मौसी ने हाथ फिराकर कहा- माल तो बड़ा तगड़ा हैं तेरा! एक रात के दस हज़ार तो आराम से लगेंगे, बोल चुदना है क्या पूरे दस तेरे! मेरी चूत में हलचल हो रही थी।
मौसी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और ख़ुद भी बगल में लेट गयीं, कहा- तुझे मैं कोठे की मस्ती करवाती हूँ, करके देख, कैसे रंडियाँलोड़े से खेलती हैं, मर्दों की मुठ कैसे मारती हैं, लंड चूसती हैं तुझे सिखाती हूँ। चुदने का मन हो तो बताना चुदाई भी करवा दूँगी गांड और चूत दोनों की। फुल मस्ती कर आज रात जिन्दगी भर याद रहेगी।
मौसी की बातों से मुझे मस्ती आने लगी। मेरा मन मुस्टंडौं के सामने नंगी होने का करने लगा, मेरी चूत से भी पानी रिसने लगा था।
मौसी बोली- अब तू मेरे कोठे की रांड है, तेरी चूत और गांड तेरी मर्ज़ी पर छोड़ती हूँ, बाकी तेरे को आज की रात के लिये रंडी बनाती हूँ, समझी! रंडीबाजी का मतलब होता है नग्न अदायें दिखाना, नंगी चूचियाँकर के कस्टमर से दबवानी, लंड चूसना, लोड़ों को हाथों से मसलना और लंड की मुठ मारनी, पूरी नंगी होकर चूत चुसवानी, बाकी बची चूत और गांड की चुदाई तो वह सब से आख़िर में आती है।
5 बज रहे थे, मौसी ने एक चुन्नी मेरे नग्न दूधों पे डाल दी और बोली- चल तेरा रंडियों जैसा सिंगार करवाती हूँ। मौसी मुझे सिंगार रूम में ले जाने लगीं रास्ते में मौसी के गुंडे घूम रहे थे। मेरी नग्न चूचियाँसब घूर घूर कर देख रहे थे।
सिंगार रूम का सीन बड़ा आकर्षक था। चार -पाँच रंडियाँ शीशे के सामने मेक अप कर रहीं थी, सभी टोपलेस थीं, कुछ नंगी होकर चूत में क्रीम लगा रहीं थीं। कुछ गुंडे टाइप लोग कमरे में घूम रहे थे। एक दो गुंडे रांडो की चूचियाँमसल रहे थे। सीन बड़ा ही सेक्सी था।
मौसी मुझे देखकर मुस्कराईं बोली- चल तू भी नंगी हो! तेरा माल भी तो देखें जरा हम!
मौसी ने कहा- चल पेटीकोट उतार! शरमा नहीं! रंडी बन जा आज रात के लिए! अगर मस्ती के साथ करोगी तो बहुत मजा आएगा, देख सब राँडे नंगी मस्ता रहीं हैं।
मेरी चुचियाँ तो नग्न थी हीं, मैंने शरमाते हुये अपना पेटीकोट भी उतार दिया। अब मैं सिर्फ़ चड्डी में थी। चड्डी उतारने में मुझे शर्म आ रही थी। मौसी ने सीटी बजा कर कालू को इशारा किया। कालू ने पीछे से आकर मेरी चूचियाँकस कर मसल दी। इस बीच राजू मुस्टंडे ने आगे से मेरी चड्डी उतार दी, अब मैं पूरी नंगी थी।
मौसी ने मेरी झांटो वाली चूत की तरफ़ देख कर कहा- अरे तुम साली औरतें पति को भी मस्ती ठीक से नहीं देती क्या काला जंगल उगा रखा है! मौसी ने एक रंडी को इशारा कर कहा- जरा झांटे साफ़ करने वाली क्रीम तो ला!
मौसी ने मेरी चूत पर क्रीम लगा दी और मुझे एक गद्दे पे बठने को कहा और बोली- पाँच मिनट में तेरी झांटे साफ़ हो जाएँगी।
अब मैं नंगी बैठी कोठे के नज़ारे देख रही थी, शर्म आ रही थी, गुंडे बार बार गंदे इशारे कर रहे थे। पाँच मिनट बाद मोनी नाम की रांड ने मेरी चूत गीले कपड़े और पानी से साफ़ कर दी, अब मेरी चिकनी चूत चमचमा रही थी। मेरी शर्म भी धीरे धीरे कम हो रही थी।
मौसी ने कहा- 6 बज गए हैं, धंधे का टाइम हो रहा है, मैं जरा धंधे को देखती हूँ, तू जरा कोठे पे घूम और रंडियों की तरह मस्ता! तेरे साथ मोनी नाम की रंडी की ड्यूटी लगा देती हूँ। 8 बजे तेरे ऊपर भी एक-दो कस्टमर चढ़वाती हूँ।
मौसी की बातों और कोठे के नजारों से मेरी चुदने की इच्छा बढती जा रही थी। मोनी ने मुझे बताया- तू मेहमान है इसलिए मौसी इतने प्यार से बात कर रहीं हैं वरना जिस रंडी से गुस्सा हो जाती हैं, पूरी रात उसकी गांड और चूत अपने मुस्टंडों से चुदवाती हैं और पीटती अलग हैं सब मुस्टंडों के लंड बहुत मोटे और लंबे हैं। सारे मुस्टंडे कुत्ते की तरह मौसी के आगे दुम हिलाते हैं, मौसी के एक इशारे पे यह जेल पहुँच जाते हैं इतनी तगड़ी पहुँच है मौसी की। चल तुझे कोठे की सैर कराती हूँ, धंधा भी शुरू हो चुका है। पेटीकोट और ब्लाऊज़ डाल ले!
मैंने साइड में पड़ा हुआ एक पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन लिये। ब्लाऊज़ में एक ही हूक था, चुचियाँ आधी से जयादा खुली थी, थोड़ा हिलने पे निप्पल भी दिखने लगते थे, पेटीकोट नाभि के काफ़ी नीचे बंधा थे। मोनी भी एक मिनी स्कर्ट और मेरी तरह ब्लाऊज़ पहने थी।
मैं बिल्कुल धंधे वालियों जैसे लग रही थी। मौसी ने मेरी चूत पे जो क्रीम लगायी थी उससे मेरी चूत में लंड खाने की इच्छा भी बढ़ रही थी. मैंने जब मोनी को यह बताया तो मोनी मुस्कराई, बोली- मौसी तुझे चुदवा कर ही जाने देंगी! बड़ी गुरु हैं मौसी!
मोनी मुझे पहले डांस रूम में ले आई। यहीं से कस्टमर अंदर आते थे। डांस रूम काफी बड़ा था। मौसी वहाँ गद्दी पर बैठी हुईं थीं, मुस्टंडे चारों तरफ़ टहल रहे थे। 5-6 लड़कियाँ अर्धनंगी होकर डांस कर रहीं थी। साइड में मेरी जैसे ड्रेस पहने 10-10, 20-20 के झुंड में रंडियाँबैठी हुईं थी. नाचने वाली लड़कियाँ डांस कम रंडीबाजी ज्यादा कर रहीं थी वो अपना लहंगा बार बार उठा रहीं थी और बार बार अपनी चूत दिखा रहीं थी।
कंडोम का प्रयोग करें : एड्स से बचें
मुस्टंडों से बीच बीच में कुछ सेकंड्स के लिए अपनी चूचियाँ मसलवा रही थीं। बीच बीच में एक दो गु्ण्डे आकर रंडियों की ब्लाऊज़ और टॉप उठाकर उनकी चुंचियाँ खोल देते थे, जिसे वो दुबारा ढक लेती थीं।
करीब 10-20 ग्राहक वहाँ डांस देख रहे थे और वो बीच बीच में नोट भी फेंक देते थे। मोनी ने मुझे बताया- यहाँ तीन रेट में लड़कियाँ बिकती हैं, वो जो घटिया सी दिख रहीं हैं आंटी टाइप उनके रेट 100 से 300 रुपए एक तक घंटे हैं, दूसरी साइड वालियों के 500 से 1000 रूपए तक एक घंटे का हैं। मौसी के पास जो बैठीं हैं उनके रेट मौसी बताती हैं, सब 1000 से ऊपर वाली हैं।
मौसी हर कस्टमर का पूरा ध्यान रखती हैं, रंडी अगर मस्ती नहीं देती तो उसकी खाट खड़ी कर देती हैं। मौसी का कहना है- चूचियाँमसलवाने के लिए और चूत चुदवाने के लिए है, कस्टमर को जम कर मजा दो उसका लंड चाटो और चूसो एक घंटे मैं अपना दीवाना बना दो गांड भी मरवाओ उससे!
अगर किसी भी रांड की शिकायत आती है कि उसने चूत चुदवाने में नखरे करे हैं तो उसकी खाल तो जलाती ही हैं साथ ही साथ 10-10 गुंडों से गांड और चूत भी चुदवाती हैं।
मौसी ने एक से एक नखरे वाली रंडियों को ठीक कर दिया है। वो जो जली हुई दिख रही है न उसने एक सफ़ेद दाग वाले नेताजी का लंड चूसने से मना कर दिया था, मौसी ने उसे जला दिया, अब सब करवाती है।
मौसी बड़ी खतरनाक हैं, लेकिन अगर कोई दारू में टुन्न आता है या अकड़ दिखाता है तो उसके नोट भी रख लेती हैं और लंड झड़वा के धक्के दे कर भगा देती हैं।
मोनी ने बताया उसके रेट 3000-4000 के बीच लगते हैं और वो सब करवाती है केवल गांड छोड़कर, गांड मौसी के ही कहने पे चुदवाती हूँ अब तक 4-5 बार ही कुछ बड़े लोगो से गांड मरवाई है। मुझे धंधा करते हुए 6 माह हो गए। मेरा प्रेमी बेच कर गया था मुझे, चल आ मौसी के पास बैठते है देख कैसे रंडियाँबिकती हैं!!!!! Oral Sex
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