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में बता रही थी जिसमें पड़ोस के बाप-बेटे पर मेरा दिल आ गया। मैंने अंकल को आंटी की चुदाई करते देख लिया और फिर उनसे बात करके खुद भी चुदने की सोचने लगी।
अंकल ने छत पर मुझे अपना लंड दिखाया और मैंने मुठ मारकर उनके लंड का पानी निकलवा दिया।
फिर मैं नीचे आ गई।
मेरी चूत में खुजली मची थी और लंड लेने का बहुत मन कर रहा था।
अब आगे हॉट भाभी Xxx स्टोरी:
लंड छूने के बाद चूत में आग लगी हुई थी।
लेकिन मेरे पति बाहर थे इसलिए मुझे चूत में उंगली देकर ही अपनी प्यास को शांत करना पड़ा।
कुछ दिन ऐसे ही निकल गए, मुझे और अंकल को दोबारा मौका नहीं मिल पा रहा था।
एक दिन की बात है कि मेरे सास-ससुर चेकअप के लिए डॉक्टर के पास चले गए।
घर में मैं अकेली थी।
मैं सोच रही था कि काश आज अंकल घर आ जाते और मुझे यहीं चोद जाते।
मानो मेरे मन की बात सच हो गई।
कुछ देर बाद ही घर की बेल बजी और गेट खोला तो अंकल सामने थे।
वो अंदर आ गए और मैंने दरवाजा बंद कर दिया।
अंकल बोले- तुम्हारे ससुर जी हैं क्या?
मैंने कहा- नहीं अंकल, वो दोनों तो बाहर गए हैं। मैं ही हूं घर पर, बिल्कुल अकेली!
ये सुनते ही अंकल की आंखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इससे पहले कि मुझे कुछ करने की जरूरत पड़ती, अंकल ने मेरा हाथ पकड़ा और जल्दी से मुझे अंदर खींच ले गए।
वो बोले- मैंने उन दोनों को बाहर जाते देख लिया था, मैं तो बस अपनी तसल्ली के लिए पूछ रहा था। यही मौका तो ढूंढ रहा था मैं कई दिन से!
मैं भी मन ही मन खुश हो रही थी और कह रही थी कि आज तो जमकर चुदूंगी इनसे! अच्छा हुआ ये खुद ही घर चले आये।
फिर भी मैंने थोड़ा नाटक किया और कहा- नहीं अंकल, ये गलत है, किसी ने देख लिया तो मुसीबत हो जाएगी।
वो बोले- कोई नहीं आने वाला रोमा डार्लिंग, अब मुझसे दूर मत रहो, जल्दी आ जाओ मेरी बांहों में!
मैंने कहा- लेकिन पहले तो आप बेटा कहकर बुलाते थे, अब एकदम से डार्लिंग बुला रहे हो, मुझे बहुत डर लग रहा है अंकल!
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और बांहों में जकड़ते हुए बोले- तुम बातें बहुत करती हो रोमा, मौके का फायदा उठाओ, आज मुझसे सब्र नहीं हो रहा है!
यह कहकर अंकल मुझ पर टूट पड़े और और जोर-जोर से किस करने लगे।
मेरे दोनों होंठ उनके होंठों के अन्दर थे। मेरे अन्दर भी सेक्स की आग लग चुकी थी तो जल्द ही मैं भी उनका साथ देने लगी।
अंकल ने मेरी साड़ी उतार दी, फिर धीरे से मेरा ब्लाउज भी उतार दिया।
फिर मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींचा तो पेटीकोट नीचे गिर गया।
अब मैं उनके सामने सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी।
अंकल कहने लगे- रोमा, तुम तो बहुत सेक्सी हो! क्या जवानी है तुम्हारी!
फिर उन्होंने मेरी ब्रा-पैंटी भी उतार दी और मुझे नंगी करके मुझे धक्का देते हुए मुझे वहीं सोफे पर लेटाकर वो मेरे पूरे शरीर को किस करने लगे।
वो मेरे मम्मों को जोर-जोर से मसलने लगे। उन्हें भी बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी।
अंकल ने कहा- रोमा, तेरे बूब्स तो काफी बड़े हैं … तूने ऐसा क्या किया कि तेरे बूब्स इतने बड़े-बड़े हो गए?
मैंने कहा- करना क्या था … आह्ह … रोज अपने पति से इनको खूब दबवाती हूँ… तब जाकर ये इतने बड़े हुए हैं!
अंकल ने कहा- आज से मैं भी इनको दबाऊंगा और इससे भी और ज्यादा बड़े कर दूँगा।
मैंने कहा- ठीक है दबा लेना, मगर अभी तो आप मुझे जल्दी से चोद दो।
अंकल मुझे और जोर-जोर से किस करने लगे, मैं भी पागल हो गई बिल्कुल!
फिर अंकल ने मेरी टांगें चौड़ी कीं और मेरी चूत को चूसने लगे।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।
फिर अंकल ने अपने कपड़े उतारे और अपना लंड निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया और कहा- रोमा इसे चूसो!
मैं भी लंड लेने के लिए तरस रही थी।
इसलिए मैंने भी बिना देर किए अंकल के लंड को मुँह में लिए हुए चूसना शुरू कर दिया।
अंकल का लंड मेरे पति के लंड से थोड़ा ज्यादा लंबा और मोटा था। अंकल ने मेरे सिर को पकड़ा और जोर-जोर से अपने लंड से मेरे मुँह की चुदाई करने लगे।
कभी-कभी वो अपना लंड मेरे गले तक उतार देते, जिससे मुझे ठसका लग जाता मगर वो अपने काम में लगे रहते।
थोड़ी देर बाद अंकल ने कहा- रोमा, मेरे लंड का रस निकलने वाला है!
इतना बोलते ही उनके लंड का रस मेरे मुँह में ही निकल गया और मैं उनके लंड का सारा रस पी गई।
बहुत दिन बाद मुझे किसी नए लंड का रस मिला था और मुझे माल पीना बहुत अच्छा लग रहा था।
मैंने फिर अंकल से कहा- चलो रूम में चलते हैं।
मैं उन्हें अपने रूम में ले गई।
रूम में जा कर हम दोनों फिर से एक दूसरे से लिपट गए और चुम्मा-चाटी करने लगे।
कुछ देर किस करने के बाद मैंने फिर से अंकल के लंड को चूसना शुरू कर दिया.
कुछ ही देर में अंकल का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया।
अंकल ने कहा- रोमा, मुझे तेरी चूत की चुदाई करनी है।
मैंने कहा- हाँ अंकल, मैं भी अपनी चूत की चुदाई चाहती हूँ। चोद दो मेरी चूत को!
इतना सुनते ही अंकल ने मुझे बिस्तर पर पटका और मेरे ऊपर चढ़ गए और बोले- आज तो रोमा तेरी चूत की ऐसी चुदाई करूँगा कि तू जिंदगी भर याद करेगी!
अंकल ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया, मैं पागल सी होने लगी।
तभी अंकल ने एक झटके में मेरी चूत में अपने लंड को उतार दिया और मेरे मुँह से आह्ह … निकल गई।
अंकल मेरे होंठों को किस करने लगे।
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मुझे बहुत अच्छा लग रहा था कि मेरी चूत में किसी पराये मर्द का लंड घुसा हुआ था।
अंकल मेरी चूत की जोर-जोर से चुदाई करने लगे और मैं मदहोश होने लगी।
मैंने अंकल से कहा- अंकल और तेज़ … और तेज़ चोदो मुझे … मेरी चूत का रस निकलने वाला है … अह्ह … उम्म्ह … अहह … हय … याह … ओह्ह्ह।
अंकल ने कहा- हाँ मेरी जान … ये ले मेरे लंड का पूरा मजा!
ये कह कर वो और जोर-जोर से मेरी चूत में धक्के लगाने लगे।
थोड़ी देर में ही मेरी चूत का रस निकलने लगा और मैं जोर से चीखी।
तभी अंकल ने मेरा मुँह दबा दिया।
वो फिर मुंह दबाये हुए अपने धक्के लगाते रहे और दस मिनट बाद उनका भी निकलने को हो गया।
तभी एकदम से उन्होंने लंड को चूत से बाहर निकाल दिया और मेरे मुंह में लंड को पेल दिया।
एक दो धक्का ही लगाया था कि उनके मुंह से आह्ह … आह्ह … करके सिसकारियां निकलने लगीं और मेरे मुंह में उनका वीर्य गिरने लगा।
अंकल ने सारा रस मेरे मुंह में ही छोड़ दिया, जिसे मैं पी गई।
फिर हम थक कर लेट गए।
थोड़ी ही देर बाद दोनों फिर से लिपटने लगे और गर्म हो गए।
अंकल ने मुझे एक बार फिर से चोदकर मुझे माल पिला दिया।
एक घंटे में हमने दो बार चुदाई कर ली थी।
उसके आधे घंटे बाद तीसरा राउंड भी अंकल ने खेल दिया।
मेरी चूत अब चुद चुदकर सूज गई थी।
मैं थक गई और अब सास-ससुर के आ जाने का डर भी सताने लगा।
इसलिए मैंने अंकल को जाने के लिए कहा।
वो पहले तो मना करने लगे लेकिन फिर बड़ी मुश्किल से मैंने दोबारा चूत मरवाने का आश्वासन देकर उनको घर भेजा।
उसके बाद कई बार जरा सा भी मौका मिलते ही अंकल मेरी चूत में लंड उतार देते थे और हम जल्दी से चुदाई का मजा ले लेते थे।
अंकल अब तक 4-5 बार मुझे चोद चुके थे।
उसके बाद कई महीने तक हमें मौका नहीं मिल पाया।
मेरे पति भी वापस आ चुके थे. अब पति भी मेरी चुदाई कर रहे थे।
फिर एक बार की बात है कि आंटी की तबियत खराब हो गई।
उनको अस्पताल लेकर गए।
मुझे भी उनके बारे में पता लगा तो मैं भी आंटी से मिलने के लिए गई।
जाकर मैंने उनसे बात की।
अंकल ने उनको दवाई दे दी।
कुछ देर मैं आंटी के पास बैठी रही और हम लोग बातें करते रहे।
फिर मैं उठकर जाने लगी।
जब मैं बाहर निकलने को थी तो अंकल ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया, मेरी चूचियों को भींचते हुए उन्होंने मेरी गांड पर लंड लगा दिया।
मैं एकदम से घबरा गई और छुड़ाते हुए बोली- क्या कर रहे हो अंकल! कोई देख लेगा!
वो फिर से मुझे जकड़ते हुए बोले- रोमा, दो महीने से तुम्हारे लिए तड़प रहा हूं। बहुत मन कर रहा है। रुक जाओ थोड़ी देर, आज तो मौका मिला है, इतने दिनों के बाद!
कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पक़ड़ कर लंड पर टिका दिया।
उनका लंड एकदम से तना हुआ था।
वो बोले- देखो, कैसे तड़प रहा है तुम्हारी चूत के लिए।
मैं बोली- लेकिन ऐसे कोई आ जाएगा!
वो बोले- कोई नहीं है घर में। बेटा ऑफिस गया है। तुम्हारी आंटी अब 2 घंटे से पहले नहीं उठने वाली है। मैंने उसको दवाई देकर सुलाया है।
ये बोलकर अंकल ने मुझे बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया।
वो मेरी गर्दन को चूमने लगे।
मेरी चूचियों में मुंह देते हुए उन्होंन मुझे सोफे पर गिरा दिया।
फिर उन्होंने मेरे ब्लाउज और ब्रा को ऊपर उठा कर मेरे बूब्स को बाहर निकाल कर चूसना शुरू कर दिया।
मेरे ऊपर भी अंकल के चुम्बनों और चूचियों की चुसाई की मदहोशी छाने लगी।
मेरा हाथ उनके लंड को टटोलने लगा और मैंने उनका लंड बाहर निकाल कर उसके हाथ से हिलाना शुरू कर दिया।
कुछ देर बाद वो उठकर खड़े हो गए।
मैं सोफे पर बैठी थी और उनका लंड ठीक मेरे मुंह के सामने था।
मैंने उनकी पैंट का हुक खोला और चड्डी समेत से नीचे खींचते हुए एकदम से लंड को मुंह में भर लिया।
मैं बहुत मस्ती में अंकल के लंड चूसने लगी जैसे कि मुझे बहुत दिनों के बाद आइसक्रीम नसीब हुई हो।
अंकल के मुंह से आहें निकलने लगीं।
दो-तीन मिनट तक अंकल ने लंड चुसवाया और फिर मेरे मुंह से बाहर खींच लिया।
उन्होंने मेरी साड़ी ऊपर की और पैंटी को नीचे खींच दिया।
मेरी टांगें चौड़ी कर उन्होंने चूत में मुंह लगा दिया और मेरी चूत को चूसने लगे।
मैं पगला गई।
मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं जिनको रोक पाना मेरे लिए बहुत मुश्किल हो रहा था।
फिर भी मैंने किसी तरह अपनी चुदास भरी आवाजों को कंट्रोल में किया।
बस मैं धीमी आवाज में सिसकार रही थी- आह्ह … उम्म .. ओह्ह … ऊईई … अह्ह्ह्ह … उम्म्ह … अहह … हय … याह … ओह्ह्ह … अंकल!
अंकल अपनी जीभ को पूरी की पूरी चूत में घुसा कर जोर जोर से चूत चाट रहे थे।
मेरी चूत से पानी निकलने लगा था।
इतने में ही डोरबेल बजी तो में घबरा गई।
मैंने जल्दी से अपनी साड़ी नीचे की, ब्रा और ब्लाउज को भी ठीक किया और अपने आप को नॉर्मल किया।
अंकल ने भी अपनी चड्डी और पैंट पहन ली।
नॉर्मल होकर उन्होंने दरवाजा खोला तो उनका बेटा दरवाजे पर था।
उसने दरवाजे पर ही अंकल से पूछा- मम्मी की तबियत कैसी है?
फिर उसकी नजर मेरे ऊपर गई।
उसने मुझे भी हैलो कहा।
अंकल बोले- तबियत ठीक है अब, उनको दवाई दे दी है और वो सो रही है।
मैं भी उठकर दरवाजे के पास आ गई और बोली- ठीक है अंकल, मैं आंटी से मिलने से फिर से आऊंगी।
फिर मैं अपने घर आ गई।
घर आकर मुझे पता चला कि मैंने अपनी पैंटी नहीं पहनी है।
मुझे याद आया कि घबराहट में मैनें अपनी पैंटी नहीं पहनी और वहीं भूल आई हूँ।
तो मैंने जल्दी से अंकल को फोन लगाया।
मैंने उनको सारी बात बताई।
वो बोले- ठीक है, मैं देखता हूं।
कुछ देर बाद उनका फिर से कॉल आया।
वो बोले- पैंटी नहीं मिली मुझे तुम्हारी!
मैं बोली- ऐसा कैसे हो सकता है, अच्छे से देखिये।
वो बोले- मैं सब जगह देख चुका हूं। मुझे कहीं नजर नहीं आई। जरा याद करो, शायद तुम पहनकर ही न आई हो?
यह सुनकर मैं भी सोच में पड़ गई, मैंने सोचा कि शायद अंकल ठीक कह रहे हों, मैंने पैंटी पहनी ही न हो, क्योंकि मैं साड़ी के नीचे पैंटी नहीं पहना करती थी।
फिर उसके अगले दिन मैं अंकल के घर गई।
वो दोपहर का टाइम था और गर्मियों के दिन थे।
मैंने डोरबेल बजाई तो अंकल ने ही दरवाजा खोला।
मुझे देख कर वो खुश हो गये थे।
उन्होंने मुझे अंदर आने के लिए कहा और बताया कि आंटी तो अभी दवाई खा कर सोई हैं।
ये बता कर उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया और मुझे चूमने लगे।
मैंने कहा- एक बार देख तो लीजिये, आंटी सोई भी है या नहीं?
वो बोले- खुद ही चलकर देख लो।
मैं आंटी के रूम में गई तो वो सचमुच सो रही थी।
फिर हम दोनों बाहर आए तो अंकल ने मुझे दबोच लिया और चूमने लगे।
फिर वो मुझे गोद में उठाकर दूसरे रूम में ले गए।
ये कमरा उनके बेटे का था।
वो मुझे बेट पर लिटाकर मुझ पर टूट पड़े।
मैं भी जोश में आकर उनका साथ देने लगी।
अंकल ने जल्दी से मेरा ब्लाउज उतार दिया और ब्रा उतार कर मेरे बूब्स को चूसने लगे।
कुछ देर बूब्स चूस कर अंकल ने मेरी साड़ी, पेटीकोट और पैंटी एक साथ उतार दिए।
फिर अंकल कुछ देर के लिए रुके और मेरी चूत को देखते हुए बोले– क्या माल है तू, मेरे हाथ तो हीरा लग गया है!
उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए।
अपने कपड़े उतार कर अंकल ने मेरी टाँगें उठा लीं और लंड को सीधा मेरी चूत पर टिका दिया।
मेरी कोमल सी चूत अंकल के लंड का स्पर्श पाकर गीली हो गई।
मेरी चूत अंकल के 3 इंच मोटे लंड को लेने के लिए रेडी थी।
अंकल ने लंड को कुछ देर मेरी चूत पर रगड़ा तो मैं मदहोश होने लगी।
फिर उन्होने लंड को मेरी चूत के छेद पर रोक दिया।
मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और फिर अंकल का लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुसने लग गया।
मेरी तो चीख निकल गई और मैं अंकल की पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी।
उन्होंने अपने हाथ को मेरे मुंह पर रख कर दबा दिया।
मैं पूरा ज़ोर लगा कर भी सांड जैसे अंकल को हिला नहीं पाई।
उन्होंने लंड को और अंदर घुसा दिया और फिर रुक गए।
फिर वो मुझे चोदने लगे।
मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन अंकल मुझे बुरी तरह से चोदे जा रहे थे।
उनके लगातार चोदने से मेरा दर्द कम होने लग गया, और फिर धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा।
अब अंकल का लंड भी आराम से चूत मे अंदर बाहर होने लगा।
चुदाई के मजे में मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … अह्ह … हये … उफ्फ … उम्म्म … अंकल … आह्ह … अंकल … आह्ह।
मेरी ऐसी आवाजें सुनकर अंकल और ज्यादा जोश में आ गए।
अब वो बेदर्दी से मेरी चूत को खोदने लगे।
मेरी चूत में दर्द होने लगा।
उनका मोटा लंड अब चूत को अंदर तक चोट पहुंचा रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे मेरे पेट में कोई रॉड घुसा रहा हो।
वो मुझे जैसे चोद चोदकर बेहोश कर देने पर उतारू थे।
फिर एकदम से उन्होंने लंड को बाहर खींचा और मेरे ऊपर गिर कर होंठों चूसने लगे।
मुझे अपने पेट पर वीर्य की गर्म-गर्म पिचकारियां महसूस होने लगीं।
अंकल ने सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिया।
कुछ देर हम पड़े रहे।
फिर सांसें नॉर्मल हुई तो अंकल उठ गए।
वो बोले- चलो, चलकर नहा लेते हैं। बहुत गर्मी हो गई है।
हम बाथरूम में गए।
मैंने शावर चालू कर लिया और उसके नीचे खड़ी हो गई।
एकाएक मेरी नजर सिंक पर पड़ी पैंटी पर गई। ये वही पैंटी थी जो मैंने कल पहनी हुई थी।
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी।
तो दोस्तो, इस तरह से अंकल से मैं उनके बेटे के रूम में चुदी।
Hindi sex stories....
पिछली रात तेरी यादों की झड़ी थी
मन भीग रहा था
जैसे-जैसे रात बढ़ती थी
चाँद से और जागा नहीं जा रहा था…
बेचारी नींद!!!
आँखों से यूँ ओझल थी
जैसे कि कुछ खो गया हो उसका
जब आँखों में नींद ही नहीं थी
तो क्या करता…?
तुम में मुझमें जो कुछ था
उसे तलाशता रहा सारी रात
सारी कहानी उधेड़कर फिर से बुनी मैंने
तुमने कहाँ से शुरु किया था
कुछ ठीक से याद नहीं आ रहा था
नोचता रहा सारी रात अपने ज़ख़्मों को
ज़ख़्म ही कहना ठीक होगा
दर्द-सा हो रहा था
साँस बदन में थम-थम के आ रही थी
कभी आँसू कभी ख़लिश
तुमने ग़लत किया – या मुझसे ग़लत हुआ
कोई तो रिश्ता था
जिसमें साँस आने लगी थी
मगर किसी की नज़र लग गयी शायद…
साँस तो आ चुकी थी मगर
रिश्ता वो अभी नाज़ुक़ था
अगर मैं कुछ कहता तो तुम कुछ न सुनती
न कुछ मैं समझने के मन से था
वक़्त बीतता रहा
जो तुम कर सकती थी – तुमने किया
जो मैं कर सकता था – मैं कर रहा हूँ
फिर भी तुम्हारी आँखों का सूखा नमक
यादों की गर्द के साथ उड़ता हुआ
मेरे ताज़ा ज़ख़्मों को गला रहा है
जाने किसका कसूर है
जिसको तुम भुगत रही हो
जिसको मैं भुगत रहा हूँ
एक दोस्ती से ज़्यादा तो मैंने कुछ नहीं चाहा
तुमको जितना दिया
तुमसे जितना चाहा…
सब दोस्ती की इस लक़ीर के इस जानिब था
वो कैसा सैलाब था?
जिसमें तुम उस किनारे जा लगे
मैं इस किनारे रह गया
और हमेशा यही सोचता रहा
कि तुम मिलो तो तुम्हें ये एहसास कराऊँ
कि तुमने क्या खोया
मैं सचमुच नहीं जानता कि
तुम किस बात से नाराज़ हो,
तुम्हारे ख़फ़ा होने की वजह क्या है?
मगर ये एहसास-सा है मुझको
कि तुम किसी बात के लिए कसूरवार नहीं हो
अगर मैं ये समझता हूँ
तुम इसे सोचती हो
तो दरम्याँ यह जो एक रास्ता है
तुम्हें दिखायी क्यों नहीं देता
पहले अगर तुमने पिछली दफ़ा बात की थी
तो इस दफ़ा क्यों नहीं करती
क्या वो दोस्ती फिर साँस नहीं ले सकती
क्या इन ज़ख़्मों का कोई मरहम नहीं
क्यों वो मुझे इस तरह से देखती है
जैसे कि तुम उससे कहती हो
“ज़रा देखकर बताना तो! क्या वो इधर देखता है?”
अगर मेरे पिछले दो ख़ाब सच हुए हैं
तो ज़रूर मेरे ऐसा लगने में
कुछ तो सच ज़रूर छिपा होगा
मैंने कई बार महसूस किया है
तुमको मेरी आवाज़ बेकस कर देती है
तुम थम जाती हो, ठहर जाती हो
कोशिश करते-करते रह जाती हो
कि न देखो मुझको-
मगर वो बेकसी कि तुम देख ही लेती हो
मैं कल भी वही था
मैं आज भी वही हूँ
मुझे लगता है कि तुम भी नहीं बदली
फिर क्यों फर्क़ आ गया है
तुम्हारे नज़रिए में-
मैं जानता हूँ ये नज़रिया बनावटी है, झूठा है
आइने की तरह तस्वीर उलट के दिखाता है
कभी-कभी ख़ुद को समझ पाना
कितना मुश्किल होता है
ऐसे में दूसरों का सच परखना सचमुच मुश्किल है
मैं यहाँ आकर आधी राह पर
सिर्फ़ तुम्हारे लिए ठहर गया हूँ
आधा चलकर मैं आ गया हूँ
बाक़ी फ़ासला तुम्हें कम करना है
मेरी आँखों में पढ़ लो सच-
ये अजनबी तो नहीं
कभी तो तुम भी इनसे आशना रह चुकी हो
सारी बात झुकी हुई आँखों में है
अपनी होटों से कह दो-
‘मैं और तुम कभी आशना थे!’
हैलो सभी अन्तरवासना के पाठकों को सीमा का खुली हुई टांगों से Hindi Sex Stories नमस्कार। मैने कुछ ही दिन पहले अन्तरवासना के बारे में सुना फ़िर मैने साइट खोली और मस्त हो गई। गरम हो गई। स्टोरीज़ पढ़ के कामुक हसीना बन गई। चलो छोड़ो काम की बात करते हैं।
मेरा नाम सीमा है मेरी उमर १८ साल की है। स्कूल में मेरी दोस्ती उन लड़कियों से हुई जो अमीरज़ादियां थीं मैं मिडिल क्लास से थी। मेरी पोकेट मनी कम ही थी। मैने एक अमीरज़ादे को अपना आशिक बना लिया मैं बेहद खूबसूरत हूं अपनी दोस्त के मुकाबले बहुत सेक्सी हूं मेरी सभी सहेलियां चुदासियां हैं अमीरज़ादे ने ज़्यादा टाइम वेस्ट न करते हुए अफ़ेयर के १० दिन बाद ही मेरी सील तोड़ डाली और मुझे भी सेक्स समुन्दर में धकेल दिया। वो बहुत शोपिंग करवाता मंहगे कपड़े मोबाइल, गोल्ड की चैन हमारा अफ़ेयर ३ महीने चला कि उसका एक्सिडेंट हो गया उसकी एक टांग टूट गई। मैं उससे मिलने गई और कहा जल्दी ठीक हो जाओगे।
सो अब मुद्दे पे आते हैं। एक रात की बात है रात के ९ बजे हुए थे मेरे पापा के २ दोस्त आये सभी ने उनका स्वागत किया वो ३ दिन के लिये आये थे। मम्मी नानी के यहाँ गई हुई थी। मैने और छोटी बहन ने उनकी खूब सेवा की डिनर दारु वगैरह पापा ने पिलायी। मैं उनको रूम दिखाने गई और वापिस आ गई जब मैं पानी का जग वहाँ रखने गई तो एक अंकल तो फ़्रेश होने बाथरूम में थे दूसरा अंकल चेंज कर रहा था उसने बनियान पहन लिया था पैजामा पहनने वाला था मैं जग लेकर गई मेरी नज़र सीधी न चाहते हुए भी उसके फ़ूले हुए कसे पेट ही, कई दिनों से चुदी नहीं थी, उसका माँसल शरीर छाती के बाल और फ़ूला हुआ लंड।
मैं वापस आ गई दीदी सो चुकी थी मेरी नज़र में बार बार उसका फ़ूला लंड आने लगा दरवाज़ा थोड़ा बंद किया परदा आगे किया और बेड पे बैठ गई नींद नहीं आई थी मैने अपना पैजामा नीचे किया और अपनी झांघों पे हाथ फ़ेरा और अपनी चूत सहलाने लगी उंगली डाल के मस्त होने लगी डैड भी ऊपर वाले रूम में सो चुके थे थोड़ी ही पी थी। परदे में अंकल चोरी सब कुछ देख रहे थे बोले नहीं। मैं इतनी गरम हो गई पानी ले गई जब मैं किचन से पानी लेने गई पीछे से मज़बूत बाहें मेरी पतली कमर पे डाल दीं। मुझे हैरानी हुई। मुझे यकीन था कि अंकल ने मुझे नोटिस किया था मैं एक दम मुड़ी और उनसे चिपक गई वो पागलों की तरह किचन की शेल्फ़ पे ही लिटा कर मेरे होंठ चूसने लगे और एक हाथ अंदर डाल मेरा मोम्मे दबाने लगे एक हाथ मेरी पैंटी में डाल चूत मसलने लगे।
मैं सिर्फ़ आहें भर रही थी कि तभी दूसरे अंकल अ गये दोनो मुझे पे टूट पड़े दोनो की उमर ४० से ऊपर ही थी। मुझे गोदी में उठा लिया बेडरूम में जा मुझे बेड पे फ़ेंका। दरवाज़ा बंद कर मुझे नंगी कर दिया मुझे अपने कच्छा उतारने को बोले मैं घुटनो के बल हो कच्छा उतारा और अंकल का लंड मुँह में भर लिया दूसरे की मुठ मारने लगी बारी बारी रंडी बन दोनो के लंड चूस रही थी अंकल ने मुझे सीधा लिटा अपना हथियार मेरी टांगे चौड़ी कर रखा और पुश किया थोड़ी परेशानी, तकलीफ़ हुई लकिन मैने डलवा लिया उनका लंड इतना मोटा लम्बा नहीं था महज़ ६ इंच होगा दूसरा बहुत मोटा लम्बा था ८ इंच का काला लंड वो अंकल है भी मद्रासी था अंकल मेरी चूत मार रहे था मैं लंड चूस नीचे से चूतड़ हिला रही थी।
उमर की भी फ़रक पड़ता है महज़ ६-७ मिनट में अंकल झड़ गये अब दूसरा मेरे ऊपर आया और मुझे कहा चूतड़ के नीचे तकिया रख लंड पेल दिया बहुत तकलीफ़ हुई लेकिन मैं कई बार चुदी हुई थी तब दूसरा अंकल आया मुझे पेग पिला दिया और खुद भी और फ़िर डाल दिया मुँह में दूसरे ने मुझे घोड़ी बना लिया और चोदने लगा मैं मजे में सीईईइ यस अंकल हरामी फ़ाद्दद्दद्दद्दद्द डाल्लल्लल्लल्लल मेरी चूत झड़ने वाली हूं कम चोद भोसड़ी के अंकल स्लेपिंग माई एस चीक्स बोले रंडी सारी रात फाडूंगा फ़िकर मत कर हलवा बना देंगे आज। कमीने मेरे बाप की उमर का है बुड्ढा ठरकी कुंवारी चूत मार्रर्रर्रर्रर्रर्रर दबाआ करते करते अंकल ने सीधा किया फ़िर डाल दिया ज़ोर ज़ोर से चुदने लगि तभी उसका लंड मेरी चूत एक साथ ही बह गये। गरम माल जब चूत को मिला तृप्त हो गई।
अब दूसरा तैयार था उसने इस बार मेरी गांड मारी Hindi Sex Stories
दोस्तो! मैं मोहित आगरा से। एक सच्ची कहानी Sex Stories बताने जा रहा हूं।
10 साल पहले जब मैं 19 साल का था, मेरे दूर के रिश्ते में चाचा चाची बरेली में रहते थे।
एक दिन पता चला कि वो हमेशा के लिये आगरा में आ गये हैं।
मैं और घर के सभी लोग उनसे मिलने गये।
लगभग 1 साल पहले उनकी लव मैरिज हुई थी पर कोइ बच्चा नहीं हुआ।
चाची की उमर 30 साल होगी।
मैंने चाची को देखा तो देखता ही रह गया।
लम्बी, गोरी चिटटी चाची का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे।
मेरे मन में उनको नंगी देखने और चोदने का ख्याल आने लगा।
मेरे चाचा अपना व्यापार करने की सोच रहे थे।
मैं अक्सर उनके घर आया जाया करता था। मैं चाची से खूब घुल मिल गया था और वो भी मेरा काफ़ी ख्याल रखती थी।
एक दिन चाचा को बाहर जाना था तो चाची बोली कि उन्हें रात को अकेले में डर लगेगा।
चाचा ने मेरी मां से बात की तो मां ने मुझे कहा- तुम रात को चाची के पास सो जाया करो।
मैं रात को 9 बजे चाची के पास पहुंच गया।
चाची बोली- मोहित, तुम्हारे लिए अलग बिस्तर लगायें या तुम मेरे साथ ही सो जाओगे?
मैंने कहा- जैसा आप ठीक समझें। मैं तो कहीं भी सो जाऊंगा।
चाची बोली- तो तुम इसी बिस्तर पर सो जाना।
फ़िर चाची अपने काम में लग गयी।
रात को 10 बजे चाची कमरे में आयी और साड़ी उतारते हुए बोली- मोहित, तुम अखबार पढ रहे हो, मैं सो रही हूं, जब तुम्हें नीन्द आये तुम सो जाना।
थोड़ी देर में मैंने लाईट बंद की और लेट गया।
मुझे नींद नहीं आ रही थी।
काफ़ी देर बाद चाची उठकर लाईट जला कर बाथरूम गयी और वापिस आकर लेट गयी।
मैं जाग रहा था लेकिन आंखें बंद करके लेटा था।
कुछ देर बाद चाची बोली- मोहित तुम सो रहे हो?
मैंने अचानक जगने का बहाना किया और बोला- क्या हुआ चाची?
चाची एकदम मुझ से लिपट गयी और बोली मुझे डर लग रहा है।
मैंने कहा- डर कैसा?
पर मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छती से छुये।
उनकी एक टांग मेरे ऊपर थी।
मैंने भी उनकी टांग पर एक पैर रख दिया और उनकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- सो जाओ चाची।
चाची धीरे धीरे मेरी बांहों में सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था।
धीरे से मैंने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा।
चाची को मजा आ रहा था।
फ़िर चाची सीधी लेट गयी और मेरा हाथ अपने पेट पर रखते हुए कहा- तुम मुझ से चिपट कर सोना, मुझे डर लग रहा है।
अब मैं भी उनसे चिपट गया और उनके बूब्स पर सिर रख लिया।
मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था।
मैं धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।
तभी चाची ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है।
अब उनके निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे।
मैंने बूब्स पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा।
अब मेरी हिम्मत बढ चुकी थी। मैंने उनके बूब्स को ब्लाऊज से निकाल कर मुंह मे ले लिया और दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से ऊपर करना शुरु कर दिया।
वह बोली- क्या कर रहे हो?
मैंने जोश में कहा- चाची आज मत रोको मुझे!
उनकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मैं एक दम जोश मे आ चुका था। उनकी चूत नशीली लग रही थी।
मैंने उनकी चूत को चाटना शुरु कर दिया।
मैं पागल हो चुका था।
मैंने अपने पैर चाची के सिर की तरफ़ कर लिये थे।
चाची ने भी मेरी नेकर को नीचे कर लिया और मेरा लन्ड निकाल कर चूसने लगी।
वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी।
कुछ देर बाद चाची मेरे ऊपर आ गयी और मैं नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा।
चाची की चूत पानी छोड़ गयी।
अब मैं और नहीं रह सकता था, मैं उठा और चाची को लिटा कर, उनकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और चाची कराहने लगी।
मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा।
चाची ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- मोहित एसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मैं तुम्हारी हो गयी, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चाहिये. एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा।
कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और चाची भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी।
उस रात मैंने तीन बार अलग अलग ऐन्गल से चाची को चोदा।
चाची ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया।
तब से जब भी चाचा बाहर जाते तो हम दोनो रात को खूब मजे करते।
हमारा यह रिश्ता दो-तीन साल तक चला।
इसी बीच चाची ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया।
चाची ये दोनो मेरे ही बच्चे बताती हैं और यह बात कोइ और नहीं जानता।
कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी? Sex Stories
राज और साहिल मेरे अच्छे दोस्तों में थे। हम Hindi Sex Stories तीनों अक्सर शाम को झील के किनारे घूमने जाते थे. मुझे राज ज्यादा अच्छा लगता था. उसमे सेक्स अपील ज्यादा थी. उसमें मर्दों जैसी बात थी.
पर साहिल साधारण था…बातें भी कम करता था.
हम तीनो हम उमर थे. मैं राज के बदन को मन में नंगा करने की कोशिश करती थी और सोचती थी की उसका लंड कैसा होगा. जब खड़ा होता होगा तो कैसा लगता होगा. कैसी चुदाई करता होगा. कुछ दिनों से मैंने महसूस किया कि राज भी मुझ में खास दिलचस्पी लेने लगा है। साहिल की नज़रें तो मैं पहचान ही गई थी। साहिल तो मन ही मन में शायद मुझे प्यार करता था. पर बोलता कुछ नहीं था.
जब मेरे घर वाले ५ -६ दिनों के लिए दिल्ली गए तब एक दिन मैंने कुछ सोच कर दोनों को घर पर बुलाया. मैंने सोचा की दोस्ती तो बहुत हो गयी, अब दोस्ती को भुना लेना चाहिए. राज को जाल में फंसा लेना चाहिए. लगता था वो चक्कर में आ भी जाएगा.
साहिल और राज दोनों ही दिन को ११ बजे मेरे घर पर आ गए. राज और साहिल एक साथ ही कार में आए थे. मैंने उनके लिए अच्छा लंच तैयार किया था. मैंने उस दिन जान बूझ कर उत्तेजक कपड़े पहने थे. मेरा कसा हुआ तंग पजामा उन्हें अच्छा भी लग रहा था. उन दोनों की नजरें बार बार मेरे चूतडों पर जा रही थी. मेरी चुन्चियों के उभर भी उनकी नजरों में समां रहे थे. राज बार बार मेरे पास आकर मुझे छूने की कोशिश भी कर रहा था.
मुझे लगा कि ये तो आराम से काबू में आ जायेंगे. मेरा टॉप मेरी चूतडों से ऊपर था इसलिए मेरी दोनों गोलाइयां उन तंग पजामे में ऊपर से खूबसूरत लग रही थी. पजामा तंग था, इसलिए वो मेरी चूतड की दरारों में भी घुसा था. मेरे चलने पर, झुकने पर मेरे सरे कटाव उभर लंड को खड़ा करने के लिए काफी थे. उन दोनों का निहारना मुझे रोमांचित करने लगा. राज तो अब बार बार मेरे चूतडों को भी स्पर्श कर रहा था. मुझे लगा कि राज को कब्जे में कर लेना चाहिए. मैंने साहिल को हटाने के लिए उसे बाहर भेज दिया.
“साहिल…प्लीज़ मेरी मदद कर दो … पास की दुकान से ये समान लाना है …”
“हाँ ..हाँ … बताओ…” मैंने उसे एक लिस्ट बना कर दे दी. साहिल पैदल हे सामान लेन चला गया.
उसके जाते ही मैंने दरवाजा बंद कर दिया. राज मुझे देखने लगा. वो मुस्करा कर बोला …”नेहा. … दरवाजा क्यों बंद कर दिया …”
मैं मुस्कुराई… “बस यूँ ही …”
राज मेरे पास आया और उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ लिया. मैंने घबराने का नाटक किया.
“राज …ये क्या कर रहा है … छोड़ दे मेरा हाथ …” मैंने कुछ घबराते हुए और शरमाते हुए कहा. पर हाथ नहीं छुडाया.
राज ने कहा – “नेहा …प्लीज़ …एक रेकुएस्ट… सिर्फ़ एक किस …”
“अरे कोई देख लेगा …”
उसने कहा – ” अच्छा कौन देखेगा…” और उसने मुझे धीरे से अपनी तरफ़ खींच लिया.
“बस ..एक ही …प्रोमिस ना…” मुझे पता था कि खेल आरम्भ हो चुका है. राज मेरे ऊपर झुक गया.
मेरे नरम होंट उसके होटों से चिपक गए. उसने मेरे चूतड दबा कर पकड़ लिए. मैं सिसक उठी. उसके शरीर का स्पर्श मुझे बहुत ही सुकून दे रहा था. मैंने आँखें बंद कर ली. वो मुझे बेतहाशा चूमता रहा था. मैं चूमने में उसका पूरा साथ दे रही थी. अचानक लगा कि साहिल आ गया है. मैंने जोर से धक्का दे कर उसे दूर करने की कोशिश की पर तब तक देर हो चुकी थी. साहिल एकटक हमें देख रहा था. मैं वास्तव में घबरा गयी.
राज बोला- थैंक्स नेहा … साहिल ! मेरी फरमाइश तो नेहा पूरी कर दी…अब तुम भी फरमाइश कर दो …”
साहिल हडबडा गया -“ने … नेहा… मैं .. मतलब …मुझे भी … किस करोगी…”
मेरी सांसे शांत होने लगी. मैंने उसे तिरछी नजरों से देखा,”तो दूर क्यों खड़े हो … आ जाओ…”
वो शर्माता हुआ सा पास आ गया. मैंने उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंट से होंट मिला दिए. राज ने इतने में मेरे चूतडों को दबा दिया. और चूतडों को पकड़ कर मसलने लगा. मैं मस्त होने लगी.
मुझसे रहा नहीं गया. मैंने साहिल का लंड पकड़ लिया. उसका लंड खड़ा था. मैंने उसे मसल दिया. वो एकदम से सहम गया. राज मेरे पीछे चिपक गया. और उसका लंड मेरे चूतडों की दरार में जोर लगाने लगा. एक साथ दो दो लड़कों का लंड मुझे मिलेगा ये मैंने कल्पना भी नहीं की थी. मेरा मन तो दोनों से चुदने की बात सोच कर ही झूम उठा था. राज की तरफ़ मैंने मुड कर देखा. उसकी आंखों में सेक्स भरा था. मैंने अब मन को सँभालते हुए कहा -“राज… साहिल …मेरी बात सुनो …”
“हाँ .. हाँ … कहो …”
“तुम्हारे मन में क्या है… बताओ …तो …”
साहिल ने अपना सर झुका लिया. पर राज बोला -“तुम्हारी इच्छा हो तो … एक मौका मुझे दो… मुझसे अब रहा नहीं जाता है ..”
“साहिल ..तुम भी कुछ कहो…”
“नेहा …तुम हमारी दोस्त हो… तुम्हारी मर्ज़ी है… मना भी कर सकती हो …पर दोस्ती नहीं तोड़ना …”
“अब तुम दोनों की यही इच्छा है तो … फिर मेरी सूरत क्या देख रहे हो .. अब हो जाओ शुरू…”
राज ने तुंरत मेरा तंग पजामा उतार दिया. साहिल ने मेरा टॉप खींच लिया. मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया. पहले तो मैं शर्म से झुक गयी. पर झुक के भी क्या करती. झुकते ही साहिल ने मेरे चूतड मसल दिए. सीधी हुयी तो राज ने मेरी चुंचियां दबा दी. मैंने बेशरम होते हुए अपनी दोनों टाँगें चौडी कर दी और हाथों को ऊपर उठा कर सर पर रख लिया. दोनों के मुंह से आह निकल गयी. मेरा रोम रोम काम की आग से सुलग उठा था. मैंने अपने आपको पूरी तरह उनके हवाले कर दिया. दोनों ने अपने कपड़े उतार दिए थे. राज बलिष्ठ दिख रहा था, जबकि साहिल का बदन साधारण था. साहिल नीचे बैठ कर मेरी चूत का रस चूसने लगा …और राज ने मेरे स्तनों को अपने कब्जे में कर के मसलना चालू कर दिया.
मेरा तो अंग अंग रोमांच से भर गया था. ऐसे मजे की बात तो मैंने सोची भी नहीं थी. मेरे मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी थी. राज पीछे से बार बार अपना लंड मेरे चूतडों की दरार में घुसाने की कोशिश कर रहा था। साहिल और राज ने मुझे बाँहों में उठा कर बिस्तर पर लेटा दिया. राज ने मेरी चूत चाटनी चालू कर दी और साहिल मेरे मुंह के पास आ गया. उसने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. मैं आनंद के मारे मदहोश हो रही थी. मैंने देखा साहिल की आँखें आनंद से बंद हो गयी थी.
तभी राज ने साहिल को इशारा किया. साहिल ने लंड मुंह से निकाल लिया और हट गया. साहिल अब बिस्तर पर लेट गया. मुझे पता चल गया की अब मुझे क्या करना है. मैं उसके खड़े लंड पर धीरे से बैठ गयी और चूत के लबों को खोल कर उसकी सुपारी पर रख दिया. थोड़े से जोर लगाने पर साहिल का लंड मेरी चूत में सरकता चला गया. मैं साहिल को चोदने लगी… पर हाँ … चुद तो मैं ही रही थी.
इतने में राज ने मेरी चूतडों की गोलाइयों को पकड़ कर खोल दिया और मेरी गांड पर अपना लंड रख दिया. मेरी गांड तो वैसे भी चिकनी थी. छेद भी नरम था. लन्ड की सुपारी छेद में उतर गयी. मेरी पोसिशन ऐसी हो गयी थी कि धक्के नहीं लगा पा रही थी और ना ही साहिल चोद पा रहा था. मैं बीच में दब सी गयी.
उन दोनों ने अपने आप को इधर उधर करके… आराम की पोसिशन में ले आए. अब मैं भी फ्री महसूस कर रही थी और साहिल भी. मैं अपने हाथों पर आ गयी अब दोनों ही ने धक्के मारने चालू कर दिए थे. मुझे लगा कि स्वर्ग है तो बस इन दोनों के बीच में है. मैं आनंद से सराबोर होने लगी. दोनों के धक्के चल रहे थे. राज का ताक़तवर लंड मेरी गांड को जम कर चोद रहा था. नीचे से साहिल के लंड झटके पर झटके मर कर चोद रहा था. मैं आनंद से निहाल हो रही थी. जोर जोर से सिस्कारियां भर रही थी. “हाय रे… मजा आ गया… चोदो …और चोदो…”
चूत में मीठी मीठी सी गुदगुदी तेज होने लगी. राज का लंड मेरी गांड की भूख मिटा रहा था… और साहिल मेरी चूत की खुजली मिटा रहा था. मुझे लग रहा था कि आज दोनों मिलकर मुझे चुदाई की भूख शांत कर देंगे.
“राज… हाय … मेरी गांड चुद गयी… सी …सी …”
साहिल … और तेज करो … और तेज… हाय ..डबल मजा … आगे से भी…और पीछे से भी… मैं दोनों को नहीं छोड़ना चाह रही थी. पर
अब मैं झड़ने वाली थी.
“राज मैं गयी… साहिल जरा जोर से …मेरा निकला… आ अह ह्ह्ह्छ… गयी…निकल गया पानी … हाय …झड़ गयी रे …”
मेरा पानी जोर से निकल गया.
राज और साहिल को पता चल गया की मैं झड़ गयी हूँ. दोनों ने अपने अपने लंड को जोर से अन्दर घुसा कर… झड़ने के लिए जोर लगाने लगे. ऐसा लगा कि दोनों के लन्ड अन्दर टकरा गए हो. और अब हाय. ..रे…मुझे ठंडक महसूस होने लगी. उन दोनों के लन्ड ने अपना रस छोड़ना चालू कर दिया था. मेरी चूत और गांड उनके गरम गरम लावा से भरने लगी.
उनके झड़ने के मीठे मीठे झटके मुझे महसूस हो रहे थे. राज थोड़ा रुका और अपना लन्ड निकाल लिया. साहिल ने भी मुझे एक तरफ़ लेटा दिया और बड़ी बड़ी सांसे भरने लगा. राज तुंरत तोलिया ले कर आ गया… और मेरी चूत और गांड को साफ़ करने लगा. अब वो दोनों मेरे दोनों तरफ़ लेट
गए और चिपक कर प्यार करने लगे. हमारे नंगे शरीर फिर से रगड़ खाने लगे. मुझे चुदाई की पूरी संतुष्टि मिल गयी थी. अब वो मुझे कभी भी चोद सकते थे … मुझे अब जल्दी नहीं थी ..
हाँ वो बात अलग है कि राज ने अब साहिल का लन्ड पकड़ रखा था और उसे मसलने लगा था…
मैं समझ चुकी थी अब इन दोनों का गांड मारने का प्रोग्राम होगा… Hindi Sex Stories
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