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प्रेषक : सैम Antarvasna Stories

मैं सबसे पहले अन्तर्वासना Antarvasna Stories का धन्यवाद करता हूँ जो मेरी सच्ची कहानी छापी। मुझे यह सब कहानियाँ तब सच्ची लगी जब मेरे खुद के साथ यह सब हुआ, जो मुझे उम्मीद नही थी ! अब तो मैं गुरु जी का फ़ैन बन गया जिन्होंने हम सबकी प्यास सबके (जो हम जैसे हैं) सामने लाने का एक उचित रास्ता निकला !

मैं एक पंजाबी लड़का हूँ और मेरा नाम राजीव है। मेरी उम्र चौबीस साल है, एक अच्छे घर से हूँ। मेरा रंग गोरा, मेरी लम्बाई 5’8″ है और सुंदर हूँ। मेरे दोस्त कहते है कि मैं किसी मॉडल से कम नहीं ! यह कहानी तब की है जब मैं कॉलेज में पढ़ा करता था। मैं ट्यूशन पढ़ा करता था जहा कई लड़कियाँ और लड़के पढ़ते थे। वहाँ एक लड़की जिसका नाम मीनू था, मुझे बहुत सुंदर लगती थी। वहीं पर हम एक दूसरे के पास पास आ गए। हम एक दूजे को मिलने लगे। अब यहीं से मेरी असली कहानी शुरू होती है!

बात बहुत बढ़ चुकी थी, एक दूसरे को पसंद करने लगे। मैं और मेरी सहेली छुप कर मिला करते थे। हमने पहली बार एक दूसरे का चुम्बन किया। हम एक थिएटर में मूवी देखने गए जिसका नाम ‘हम तुम’ था ! उसके बाद हमने बहुत बार सेक्स किया और उसकी तसल्ली भी करवाई। हम दोनों कई बार दो दिन तक साथ रहे। हम दोनों में कुछ भी छुपा नहीं था। अकले में हम पति पत्नी की तरह रहते थे।

एक बार वह अपनी सहेली हरलीन के साथ आई। हरलीन एक सुंदर पञ्जाबी लड़की थी। उसके बाद हम तीनों बहुत बार साथ साथ मिले। अगर मीनू के घर कुछ प्रॉब्लम होती तो वह अपना संदेश हरलीन को दे देती और हरलीन मुझे कॉल कर देती, जिसके कारण हरलीन मेरे साथ काफी खुल चुकी थी। मुझे कई बार एहसास हुआ कि हरलीन भी मुझे मन ही मन चाहती है। वह मुझे फ़ोन करती, एस एम एस तो हर रोज किसी न किसी तरह जरूर करती ! कई बार वह मुझे अश्लील एस एम एस भी कर देती ! वो मेरे सामने कुछ ना कुछ ऐसा करती थी कि मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो शरीर में भरी पूरी थी और बदन गदराया हुआ था। उसके सुडौल स्तन बहुत ही मनमोहक थे और थोड़े भारी थे। मुझे उसके बोबे और मटके जैसे चूतड़ बहुत अच्छे लगते थे।

एक बार मुझे हरलीन का फ़ोन आया और कहा- मुझे आपसे कोई जरुरी काम से मिलना है। यह बात मीनू को मत बताना और हम मीनू को एक सरप्राईज़ देंगे !

उसने मुझे एक होटल में मिलने को बुलाया। हम दोनों एक पॉइंट पर मिले, मैने उसे वहाँ से लिया और होटल में चले गए। उस दिन उसने जींस-शर्ट पहनी हुई थी। मैं उसे देख कर दंग रह गया और उसके साथ सेक्स के लिए सोचने लगा।

शायद वह मेरे से भी ज्यादा बेताब थी। दरवाजे की कुण्डी लगते ही मुझे उसने बाहों में ले लिया और आइ लव यू ! बोलने लगी।

और इससे पहले कि मैं कुछ बोलता, वो अपने होंठ मेरे होंटों पर रख कर चूमने लगी। मैं भी गर्म हो चुका था। फिर मैं उसको उठा कर बिस्तर पर ले गया और पहले उसके होंटों को बहुत प्यार से चूमा, उसके बाद उसके गालों को खूब चूमा। धीरे धीरे हम दोनों पूरे नग्न हो गए। मैं उसके स्तनों को चूम रहा था और वो पागल हो रही थी। उसने मेरे बालों को जोर से पकड़ा हुआ था और जोर जोर से बोल रही थी- डाल दो अन्दर !

लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, चूमता हुआ मैं उसकी चूत पर आ गया, जो शेव की हुई थी बिल्कुल गुलाब की पंखुरी की तरह, और चूमने लगा। उसने अपनी टाँगें खोल ली थी और चिल्ला रही थी- जान फाड़ दो ! मुझे आज पता चला मीनू तुम से इतनी खुश क्यों रहती है !

मैं उसकी चूत चाट रहा था। फिर मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में दे दिया। वो उसको पागलों की तरह चूस रही थी।

फिर मैंने अपना लंड उसकी फुद्दी में डाल दिया और झटके देने लगा। इसी बीच उसका पानी छूट गया पर मैं झटके दे रहा था। थोड़ी देर बाद मैं भी शांत हो गया।

यह मुझे बाद में उसी ने बताया कि वो एक बहुत आमीर खानदान से है। उसके बाद उसने कई बार मुझे अपने घर भी बुलाया। हमने वहाँ जमकर मस्ती की।

उसके बाद मैं काल-बॉय की तरह काम करने लगा और कई तरीकों से नए शिकार खोजने लगा। मैंने कई भाभियों को भी खुश किया है जो अपने पति से खुश नहीं होती, पूरी पूरी रात मजे किये !

मुझे जरूर बतायें कि मेरी कहानी आप को कैसे लगी। मुझे इस पर मेल करें Antarvasna Stories

हेलो दोस्तो !Antarvasna

उम्मीद है आप सभी को Antarvasna मेरी पहली कहानी ‘अतृप्त पड़ोसन की तृप्ति’ पसन्द आई होगी।

सबसे पहले तो मैं गुरूजी का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने ना सिर्फ़ मेरी कहानी को आपके सामने पेश किया, बल्कि उसे एक अच्छा नाम भी दिया।

मुझे इस कहानी के लिए बहुत से पत्र आए जिनसे मेरा काफ़ी उत्साहवर्धन हुआ। मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

जैसा कि मैंने वादा किया था, मैं आपके सामने इस कहानी का अगला भाग पेश कर रहा हूँ।

उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम उसका पूरा पूरा फ़ायदा उठाते। मैंने उसे उसके घर में हर जगह और हर ढंग से चोदा, बेडरूम, रसोई, बाथरूम, सीढ़ियाँ जहाँ मौका मिला हमने अपनी वासना शांत की।

कई दिनों तक उसकी चूत चोदने के बाद मुझे उसकी उभरी गाण्ड में लण्ड डालने की जबरदस्त इच्छा होने लगी। पर जब भी मैं उसकी गाण्ड में लण्ड डालने की बात करता, वो मुझे मना कर देती कि इसमें बहुत दर्द होगा। पर मैं भी कहाँ मानने वाला था।

एक दिन जब उसके घर पे कोई नहीं था तो मैं वहाँ गया। वो रसोई में काम कर रही थी। मैंने उसे पीछे से बाहों में भर लिया और उसकी गर्दन पर प्यार करने लगा। साथ ही उसकी मैक्सी पीछे से उठा दी और गाण्ड पे हाथ फ़ेरने लगा।

वो उस वक्त रिफ़ाईण्ड तेल को पैकेट से डिब्बे में डाल रही थी। मेरे पकड़ने से उससे थोड़ा सा तेल स्लैब पर गिर गया। उसने पैकेट को डिब्बे पे रखा और घूम कर मेरे बालों में हाथ फिराने लगी। मेरे हाथ अभी भी उसकी कोमल गांड पर फिसल रहे थे। हम दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया। कभी मेरी जीभ उसकी होठों से होती हुई उसके मुंह में घूम कर आती कभी उसकी जीभ मेरे मुंह का स्वाद लेती।

उसकी गांड से खेलने में एक अलग ही मज़ा आ रहा था। अचानक मेरी नज़र स्लैब पर गिरे तेल पर पड़ी। मैंने उससे अपनी हथेलियों पर लगा लिया और गांड पर मलने लगा। वो बोली यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने जवाब दिया कि मालिश कर रहा हूँ।

वो हंसने लगी और हम फिर अपने चूमा चाटी के खेल में मशगूल हो गए। मैं तेल अच्छी तरह से उसकी गांड और गांड के छेद पर मलने लगा। उसे भी मज़ा आने लगा। वो समझ गई कि आज मैं मानने वाला नहीं हूँ पर उसने कुछ कहा नहीं। फिर मैंने उसे बाहों में भर लिया और उठाकर सोफे पे लिटा दिया। फिर मैंने उसकी मैक्सी को उसके बदन से अलग कर दिया। फिर उसे घुमाकर पीठ को चूमते और चाटते हुए मैंने उसकी ब्रा को दांतों से खोल दिया।

अब मैं उसके रसीले मोम्मों को मसलने लगा और उसके गर्दन का किस भी करने लगा। फिर उससे रहा नहीं गया और उसने मेरी शर्ट और पैंट को उतार दिया। अब मेरा हथियार उसके हाथों में था और वो उससे खेलने लगी। फिर वो नीचे बैठ गई और मेरा अंडरवियर उतारकर मेरे लंड को चूसने लगी। जैसा कि मैं अपनी पहली कहानी में जिक्र कर चुका हूँ कि उसके चूसने का तरीका बहुत अच्छा था और मुझे बड़ा आनन्द मिलता था।

फिर मैंने उसे उठाकर उसकी पैंटी भी अलग कर दी और उससे सोफे पे लिटाकर उसके चूत में अपना लंड दे दिया। पहले झटके से उसके सिसकारी निकल गई। मैं कुछ देर रुका और धीरे धीरे धक्के मारने लगा। अब हमारा खेल पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने लगा। मैं उसे चोदते चोदते कभी उसकी चूचियां मसल देता था और कभी उसे किस करने लग जाता था। मेरे हर एक्शन को उसका पूरा साथ मिल रहा था।

मैंने उसे कुतिया की तरह किया। जैसा कि मैं आप सभी को बता चुका हूँ कि कुतिया की तरह बना कर भी मैं उसकी पीछे से चूत ही मारता था। उसकी चूत मारते मारते गांड पे हाथ फेरने लगा। जैसे ही उसने अपनी गांड को ढीला छोड़ा और चुदाई का मज़ा लेने लगी, मैंने एक ऊँगली उसकी गांड में डाल दी।

मेरी उंगली वैसे ही चिकनी हो रखी थी और उसकी गांड भी, सो उंगली आसानी से उसकी गांड में चली गई। वो कराह उठी और उसने अपना सर पीछे फ़ेंक दिया। पर चूंकि चुदाई बहुत तेज़ हो रही थी और एक ऊँगली जाने से ज्यादा दर्द भी नहीं हो रहा था सो उसने कुछ बोला नहीं।

अब मैं चूत मारने के साथ साथ धीरे धीरे गांड में ऊँगली भी कर रहा था तो उसे बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे पूरी उम्मीद थी की आज तो मैं इसकी मोटी गांड की भी चुदाई कर सकूँगा।

उसने पूछा- आज इरादे नेक नहीं लगते जनाब के !

तो मैंने कहा कि जब इरादों का पता चल ही गया है तो मज़ा उठाओ। इतनी मस्त गांड होने के बावाजूद अगर मरवाई नहीं तो ग़ाण्ड जलन के मारे हड़ताल कर देगी !

तो वो हँसने लगी और बोली कि मैं अपना बदन तुम्हारे नाम कर चुकी हूँ पर जो भी करना आराम से करना ! मुझे बहुत दर्द होगा!

तो मैंने कहा कि चिंता न करो जानेमन, दर्द तुम्हें होता है तो आँख मेरी भर आती है। यह सुनकर वोह मेरी और भी दीवानी हो गई। और उधर मैंने अपना काम जारी रखा। फिर धीरे से मैंने अपनी दूसरी ऊँगली भी उसकी गांड में डाल दी। उसे थोड़ा दर्द और हुआ पर वो सह गई। तभी मैंने अपनी चुदाई तेज़ कर दी और दूसरे हाथ से उसकी चूत दबाने लगा और वो झड़ गई।

मैंने उसे घोड़ी बनाए रखा, और अपने लंड को गांड के छेद पे रखकर एक तेज़ धक्का मारा। मेरा लंड डर्बी रेस के घोड़े की तरह उसकी गांड में समां गया। और वो दर्द से तड़प उठी। मैं रुक गया और उसकी चूचियां मसलनी शुरू कर दी और धीरे धीरे उसे मज़ा आने लगा। फिर मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड में अन्दर बाहर करने लगा और वो मजे से सिसकारियां लेने लगी।

उसकी मादक सिस्कारियों से मेरा लंड मचलने लगा और मैंने अपने धक्के तेज़ कर दिए। अब वो भी मेरे धक्कों के साथ अपनी गांड आगे पीछे करने लगी। पूरे कमरे में हमारी सिसकारियां और बदन के आपस में टकराने की मदमस्त आवाज़ गूंजने लगी। इस सबसे वो समां बहुत ही उत्तेज़क हो चला था। हम दोनों को पहली बार गांड मारने और मरवाने का आनंद आ रहा था। थोडी देर में मैं उसकी मस्त गांड में झड़ गया और वोह मेरे गरम गरम लावे को अपनी गांड के अंदर महसूस करने लगी।

मैंने पूछा कैसा लग रहा है तो वो बोली कि इसमें बहुत मज़ा आया। ऐसा मज़ा मुझे अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं मिला।

फिर वो मुझसे चूत के साथ साथ गांड भी मरवाने लगी।

इसके बाद हमारा खेल करीब तीन साल तक चला और हम दोनों ने एक दूसरे को भरपूर मज़ा दिया।

दोस्तो, जैसा कि मैंने आपसे वादा किया था यह मेरी कहानी का दूसरा भाग था। अपनी मेल मुझे भेजते रहिएगा। और मैं अपनी कहानी आपके सामने पेश करता रहूँगा। Antarvasna

Hindi Sex Stories

बात कुछ साल पुरानी है पर है बिल्कुल Hindi Sex Stories सच्ची। उस समय मैं सेक्स के बारे में बिल्कुल अंजान था। मैंने कभी मुठ भी नहीं मारी थी। गर्मियों की छुट्टियों में मुझे अपनी दीदी की ससुराल में जाने का मौका मिला। दो माह की छुट्टियाँ बिताने मैं और मेरा छोटा भाई दीदी की ससुराल में पहुंचे। उनका घर काफी बड़ा था लगभग १०-१२ कमरे का। कुछ कमरे तो उपयोग में ही नहीं आते थे। उनके घर में दीदी और जीजाजी के साथ ही उनके चाचा-चाची तथा बड़े भाई और उनका परिवार रहता था। जीजाजी के बड़े भाई को हम बड़े जीजाजी कहकर बुलाते थे, वह फॉरेस्ट रेंजर थे तथा एक सप्ताह में दो तीन दिनों तक बाहर जंगल में रहते थे। उनके दो बच्चे थे उनका बड़ा बेटा मुझसे छोटा था।

बड़े जीजाजी बड़े कामुक प्रवृति के इन्सान थे हालाँकि मैं उस समय इस शब्द के बारे में नहीं जानता था। जब भी वे मुझे अकेला पाते, मेरे गाल पर चिकोटी काट देते। कुछ दिनों बाद वे मेरे गालों और ओंठों को चूमने लगे।

एक दिन जब मैं छत पर अकेला खड़ा उड़ती हुई पतंगों को देख रहा था तो वो भी छत पर आ पहुंचे। उन्होंने मुझे पकड़ कर मेरे कूल्हों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मुझे काफी अटपटा लगा। जैसे तैसे मैं हाथ छुड़ा कर भाग आया। अब मुझे उनके सामने जाने में भी डर लगने लगा, पर वे मौका ताड़ कर मुझसे छेड़-छाड़ करते रहते। अभी तक वह मेरे कूल्हे कपडों के ऊपर से सहलाते थे एक दिन उन्होंने मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डालकर कूल्हे सहलाये। मुझे अच्छा तो लगा पर डर भी लगा। मैं उनके इरादों को कुछ कुछ समझने लगा। पर वो क्या करने वाले हैं यह मैं अब भी पूरी तरह नहीं समझ पाया था। मैं उनसे बच कर रहने लगा और उनके सामने ना आने का प्रयास करता।

एक दिन दोपहर को वह अपने कमरे में लेटे कोई किताब पढ़ रहे थे कि दीदी ने मुझे उनको पानी दे आने को कहा। मैं डरते हुए उनके कमरे में गया। उन्होंने पानी लेकर मुझे अपने पास जबरन बिठा लिया तथा मेरी जांघों पर हाथ फिराने लगे। फिर झटके से मुझे बगल में लिटा कर अपनी टांगों के बीच में दबोच लिया। थोड़ी देर तक शांत रहने के बाद वह मेरी शोर्ट्स के अन्दर हाथ डाल कर मेरी जांघ को दबाते हुए मेरे कूल्हे भी दबाने लगे। उन्होंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर अपना लंड मेरी शोर्ट्स के अन्दर जांघ पर रख दिया। मैं सिहर उठा। मेरी सांसे तेज तेज चलने लगी। उन्होंने तभी एक झटका देकर मुझे थोड़ा तिरछा कर दिया। अब मेरी पीठ उनकी और थी। उन्होंने मेरी शोर्ट्स को थोड़ा ऊपर कर मेरे कूल्हे जोर जोर से मसलने शुरू कर दिए तथा अपना लंड मेरे कूल्हों की फ़ांकों में टिका दिया। मैं कसमसा रहा था पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। तभी बाहर कुछ शोर सा हुआ, वह थोड़ा अचकचाए और मैं उनकी पकड़ से भाग निकला। उनको बहुत गुस्सा आया तथा वह अगला मौका तलाशने लगे।

उन्हें अगला मौका शीघ्र ही मिल गया। पड़ोस में एक शादी थी जिसकी बारात इलाहाबाद जानी थी। वह मुझे भी जिद करके अपने साथ बारात में ले गए। सबको उन्होंने मुझे इलाहाबाद घुमाने के बहाने राजी कर लिया था। मैं किसी से कुछ कह भी नहीं सकता था। मुझे उनके साथ जाना पड़ा। बारात एक होटल में रुकी थी। उन्होंने सबसे अलग एक कमरा ले लिया। बारात लगने के तुंरत बाद ही वह मुझे लेकर होटल के कमरे में आ गए।

उस समय रात के १२ बजे थे। मुझे लेटते ही नींद आ गई। थोड़ी देर बाद मेरी नींद खुली तो मैंने पाया कि जीजाजी ने मेरी पैंट और चड्डी उतार दी है तथा वह मेरे लंड से खेल रहे हैं। मै अनजान बना लेटा रहा। उन्होंने मुझे तिरछा कर दिया तथा मेरे कूल्हे दबाने लगे। फिर उन्होंने अपनी एक उंगली मेरी गांड में डाल दी। मुझे दर्द हुआ पर मैं चुपचाप लेटा रहा। अब जीजाजी ने अपना लंड निकल कर मेरे चूतड़ों से रगड़ना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक वह ऐसा ही करते रहे। फिर उन्होंने अपने लंड को मेरी गांड के छेद में घुसाने की कोशिश की, पर वह नाकाम रहे। मेरी गांड का छेद काफी टाइट था। दोबारा कोशिश में भी वह अपना लंड छेद में नहीं घुसा सके।

अब उन्होंने मुझे पकड़ कर उल्टा कर दिया तथा वह मेरी टांगों को फैला कर बीच में बैठ गए। उन्होंने मेरे चूतडों की दोनों फांको को पकड़ कर फैलाया और अपना लंड एक जोर का झटका देते हुए मेरी गांड में पेल दिया। मैं दर्द से बिलबिला गया पर डर के कारण मेरी चीख भी नहीं निकली। अब उनका पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर था और वह धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर कर रहे थे। शुरू में तो मुझे काफी दर्द हुआ पर बाद में मजा आने लगा। १५ -२० मिनट के बाद उन्होंने पिचकारी मेरी गांड में ही छोड़ दी और वह मेरे ऊपर से उठ कर बगल में लेट गए। मेरी गांड में लंड पेलने के कारण पेट में काफी गैस बनने लगी थी तथा मुझे लगा कि खून भी मेरी गांड से निकल रहा है, यह अहसास भी मुझे हुआ। पर में बिल्कुल अंजान बना लेटा रहा।

थोड़ी देर में जीजाजी उठे और उन्होंने रुमाल में पानी लगाकर मेरी गांड पोंछी तथा मेरे चूतड सहलाये। मुझे राहत महसूस हुई। जीजाजी का लंड शायद फिर से खड़ा हो गया था। वह फिर से मेरी टांगों के बीच में बैठ गए लेकिन इस बार उन्होंने मुझे कमर में हाथ डाल कर घोड़े जैसी की अवस्था में कर लिया।

अब मेरी गांड का छेद ज्यादा खुल गया था। उन्होंने मेरे दोनों चूतड पकड़ कर फैला दिए तथा अपना लंड एक बार फिर से मेरी गांड में पेल दिया। इस बार मैंने भी अपनी गांड मराई का मजा लिया तथा कूल्हे हिला हिला कर जीजाजी का पूरा लंड गांड के भीतर जाने दिया। जीजाजी ने पूरे जोश से मेरी गांड मारी। उस रात सुबह होने से पहले जीजाजी ने तीसरी बार मेरी गांड मारी। इस बार उन्होंने मुझे पूरी तरह से नंगा कर मेरी गांड पिलाई की।

दोस्तों यह कहानी बिल्कुल सच्ची है। जीजाजी से गांड मराने के बाद कई दिनों तक मैं उनके सामने आने में शरमाता रहा पर वह अब भी मौका मिलते ही मुझसे छेड़-छाड़ अवश्य करते रहते थे। लेकिन उन्हें दोबारा मेरी गांड मरने का मौका घर में नहीं मिल सका। पर वह चूकने वालो में से नहीं थे।

उन्हें अगला मौका कब और कैसे मिला, पढिये अगली कहानी Hindi Sex Stories

प्रेषक : मोहित सिंह Sex Stories

मेरा नाम मोहित है। मैं गोरखपुर का रहने Sex Stories वाला हूं। मेरा एक संयुक्त परिवार है, मेरे घर में पापा, मम्मी, चाचा, चाची रहते हैं. मेरी उम्र २७ साल है मुझे शुरू से ही सेक्स का बहुत शौक रहा है. मुझे लड़कियों में उनकी चूची बहुत पसंद है. उनसे खेलना, चूसना मेरी पहली पसंद है. सेक्स करने से पहले मुझे पार्टनर के साथ खेलने और उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित करने में बहुत मज़ा आता है. २ साल घर से दूर हॉस्टल में पढ़ा हूं। उस वक्त मेरे बेड पे मैं और मेरा एक रूम पार्टनर सोते थे.

एक दिन जब हम सो रहे थे तब रात को मुझे लगा कि कोई मेरे लंड के साथ खेल रहा है. मैंने धीरे से एक आंख खोली तो देखा कि मेरा रूम पार्टनर मेरे लंड के साथ खेल रहा है, उससे मस्ती कर रहा है। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं सोने का बहाना कर के बेड पे पड़ा रहा. फिर वो मेरे लंड को चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आने लगा. तब मैंने उठने की सोची और उठते ही अपने रूम पार्टनर पे झूठ का गुस्सा किया। वो मुझे मनाने लगा। मैंने उससे कहा कि ठीक है लेकिन बस इतने में मज़ा नही आयेगा, उसने पूछा- क्या मतलब?

मैंने कहा- मुझे यह सब पसंद नही है और किसी लड़के ने मेरा लंड पहली बार पकड़ा है, तुम उसे चूस रहे थे, उसके अलावा क्या क्या करते हैं?

उसने बताया कि लंड को गांड में डाल का अन्दर बाहर करते हैं जैसे कि लड़कियों के चूत में डाल कर किया जाता है.

मैंने उससे कहा कि तुम मेरा लंड चूस सकते हो, ब़स मुझे गांड मरवाने का शौक नही है.

वो मान गया. उस दिन उसने मेरे लंड की खूब चुसाई की, फिर हम सो गये.

हम जिस स्कूल में पढ़ते थे वो लड़के लड़कियों का स्कूल थ। उस समय मैं कलास 12 में था. स्कूल में ही हमारा हॉस्टल था. लड़कियों से मेरी बहुत बनती थी क्योंकि मैं पढ़ने में बहुत तेज था। मेरी क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम सुधा था. वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. वो अपने जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम रख रही थी. उसके बड़े होते उभार किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थे. मैं उससे बहुत पसंद करता था और रात को उसके साथ ।सेक्स के सपने देखता था.

मैं दिखने में बहुत स्मार्ट नही था लेकिन किसी से कम भी नही था. मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार करने की सोची, लेकिन हिम्मत नहीं हुई. एक बार हम लोग पूरी क्लास के साथ आऊटिंग पे गए हुए थे, ब़स वही मुझे मौका मिल गया और मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया.

पहले तो वो कुछ नही बोली, फिर मेरे गाल पे एक किस देकर बोली कि मैं भी तुम्हे बहुत पसंद करती थी लेकिन बोलने की हिम्मत नही हो रही थी. फिर क्या, धीरे धीरे हम लोग एक दूसरे से बहुत खुल गये और सेक्स करने की प्लानिंग होने लगी. हॉस्टल से केवल रविवार को आऊटिंग की छूट थी तो हम लोगों ने रविवार के मिलने का प्रोग्राम उसकी सहेली के घर पे रखा. यह सब इंतज़ाम उसने किया और बताया कि कोई दिक्कत नहीं है उसकी सहेली तैयार है अपने घर पे बुलाने को. हम लोग रविवार को मिले और हमें एक कमरे में अकेला छोड़ कर उससके सहेली बाहर चली गई.

सुधा ने उस दिन लाल रंग का सूट पहना हुआ था उस पर सफ़ेद दुप्पटा जिसमें वो बहुत की सेक्सी लग रही थी. मैंने उससे तुरन्त अपने बाँहों में ले लिया और उसे किस करने लगा. किस करते करते मेरा एक हाथ उसकी चुचियों को मसल रहा था। अभी छोटी थी लेकिन बहुत हार्ड और मस्त थी. मैंने उससे कपड़े उतारने के लिए कहा तो वो शरमाने लगी.

फिर मैंने उसके ऊपर के कपड़े को उतार दिया और देखा उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई है। गज़ब की क़यामत लग रही थी वो.. फिर सलवार भी उतार दी, उसने नीचे कुछ नहीं पहना था और उसके चूत पे एक बाल भी नही था। फ़िर मैं उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा। वो आ आआ आह ह्ह्ह्ह्ह्अह्ह्ह करके सेक्सी आवाज़ निकलने लगी और मेरी पैन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड को पकड़ने लगी। मैंने अपनी पैन्ट और अंडरवीअर उतार कर लण्ड उसके हाथों में दे दिया. फिर वो मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी.

मैंने उसे मेरे लण्ड को मुंह में लेने के लिए कहा तो वो मना करने लगी और कहा कि मुझे उलटी हो जायेगी. कमरे में एक फ्रीज रखा था, जिसे खोला तो देखा कि उसमें जैम रखा था। मैंने सुधा से जैम लण्ड पे लगाने के लए कहा तो उससे उसने प्यार से लगा दिया। फिर मैंने उससे उसे चाटने के लिए कहा, फिर वो मज़े से उससे चाटने लगी और उससे बहुत मज़ा आने लगा। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. मैंने फिर उसको लिटा कर उसकी चूत चाटनी शुरू की तो वो फिर आवाज़ निकलने लगी. फिर उसने लंड को चूत में डालने के लिए कहा.

चोदने का यह मेरा पहला मौका था लकिन मैं बहुत कांफिडेंट था क्योंकि मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म देखी थी और गरमा गरम कहानियों की किताब भी पढ़ी थी। मैंने उसकी चूत पे लण्ड को रखा लेकिन वो अन्दर जा ही नहीं रहा था, बहुत कड़ी चूत थी. मैंने उसपे तेल लगाया फिर रखा तो वो थोड़ा अन्दर गया वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी और हटने के लिए कहने लगी।

मैंने उसे समझाया, तब वो फिर तैयार हुई। फिर मैंने उसकी चूत पे लण्ड रख कर धक्का मारा तो आधा अन्दर गया। क्या गज़ब टाइट चूत थी, वो चिल्लाने लगी पर मैं कहां मानने वाला था और एक बार मैंने धक्का मारा और लण्ड को पूरा अन्दर घुसा दिया। वो दर्द के मारे रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और उसकी चुचियों को चूसने लगा जिससे उससे मज़ा आने लगा. कुछ देर बाद वो अपनी गांड को उठाने लगी। तब मैंने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और लगभग १५ मिनट बाद झड़ गया. लण्ड को बाहर निकाला तो देखा कि चादर पे खून पड़ा है। जिसे देख कर हम दोनों डर गये.

तभी देखा कि दरवाज़ा धड़ाक से खुल गया और उसकी सहेली कमरे के अन्दर आ गई. शेष आगे की कहानी में. मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताएं। Sex Stories

डियर रीडर्स! Sex Stories

मैं अपना परिचय देना चाहता हूँ मैं अमन उर्फ विक्की हूँ मेरी Sex Stories उम्र 26 साल है और मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हू. मेरा बॉडी फिगर अट्रॅक्टिव तो नहीं कह सकते पर स्मार्ट फिगर कह सकते है और मैं स्मार्ट भी हूँ और लकी भी हूँ मेरे लक (भाग्य) ने हमेशा मेरा साथ दिया. अब ज्यादा बोर ना करते हुए मैं आपसे अपनी लाइफ के कुछ एक्सपीरियेन्स आप से शेयर करूँगा. जिन्हें सच मानना है वो वैसे् पढ़ें और जिन्हें झूट लगे वो सिर्फ़ स्टोरी का लुत्फ़ ले.

बात उन दिनो की है जब मैंने हाई स्कूल पास किया और इंटर मैं एडमिशन लेने के लिए कोशिश कर रहा था हालाकि मेरे मार्क्स अच्छे थे पर मैं जिस कॉलेज मे एडमिशन लेना चाहता था उसके हिसाब से कुछ कम थे. मेरे सब दोस्त एडमिशन ले चुके थे पर मैं उसी कॉलेज मैं एडमिशन लेना चाहता था. एक दिन मैं फॉर्म सब्मिट करने की कोशिश कर रहा था…कि एक लड़की मेरे पास आई. उसने कहा, हेल्लो! ‘विक्की’.

तभी मैंने उधर पलटकर देखा वोही आँखें वोही सीना वोही मुस्करता चेहरा. अब आप सोच रहे होंगे ये कौन है और कहाँ से आई. तो ये है वो आज की इस स्टोरी की हेरोइन. जी शिप्रा. दरसल हम लोग क्लास थर्ड से एक साथ स्टडी कर रहे थे एक ही स्कूल में. पर हम लोगो मैं कभी बात नहीं हुई, लेकिन आज उसने मुझे हेलो बोला, तो कुछ देर तक मेरे मुहँ से कुछ नहीं निकला. फिर उसने कहा- फॉर्म सब्मिट करना है?

मैंने कहाँ ‘हाँ’. तो उसने कहाँ फॉर्म मुझे दे दो और मेरे साथ आओ . मैं बिना कुछ बोले उसके पीछे हो लिया. तब वो मुझे साइंस के डिपार्टमेंट मे ले गयी और अपने अंकल से मिलाया और कहाँ मैं इनको फॉर्म दे देती हूँ आपका काम हो जाएगा. पर मैंने कहाँ मेरे मार्क्स कुछ कम है तो अंकल ने कहाँ कोई बात नहीं शिप्रा तुम्हे अप्रोच कर रही है तो तुम्हारा काम हो जाएगा.

हम लोग डिपार्टमेंट से बाहर आए तो मैं शिप्रा से बोला शिप्रा को ‘धन्यवाद ‘ उसने कहाँ किस बात के लिए. मैंने कहाँ तुमने एडमिशन मे मेरी हेल्प की इसलिए. उसने कहाँ हम लोग एक दूसरे को काफ़ी टाइम से जानते है. तो दोस्त है और सच पूछो मेरी सभी फ्रेंड्स ने एडमिशन अलग अलग कॉलेज मे लिया मैं अकेली थी यहाँ. अंकल की वजह से मैं यहाँ एडमिशन लिया लेकिन कोई परिचित का ना होने की वजह से मैं चाह रही थी कोई ऐसा हो जिसे मैं यहाँ जानती हू ताकि क्लास अटेंड करने मैं बोरिंग फील ना हो. तभी तुम मुझे दिखे और मैं आपके मार्क्स जानती थी इसलिए मैंने सोचा आप दोस्त भी है और जिस तरीके से आप एडमिशन ले रहे हैं वैसे तो एडमिशन होना नहीं है. इसलिए मैं और आपको अपने अंकल के पास ले गयी. तो नाउ वी आर फ्रेंड्स. तब मैंने अपना हाथ शेक करने के लिए उसकी तरफ बढाया और कहा श्योर……वाइ नोट.

जब इतनी बातें हम दोनों के बीच मैं हो गयी तब मुझमे कुछ हिम्मत जागी और मैं कहाँ शिप्रा क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी. उसने कहाँ अगर ये रिश्वत है तो नहीं और अगर एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा हैं तो श्योर.

मैंने कहा- रियली एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा है.
फिर हम लोग कॉफी पीने गये और ढेर सारी पुरानी बातें की कैसे आज तक मैं इतने सालों से उससे बातें करना चाहता था पर ना कर सका. इस प्रकार हम दोनों में दोस्ती हुई. जो पिछले 8 सालो से सिर्फ़ एक दूसरे को देख रहे हो बातें ना करते हो और अचानक वो इतनी जल्दी दोस्त बन जाते हैं. ‘हैं ना लक’. इसलिए मैं ये सब रामकथा सुनाई आप लोगो को. चलो अब अगर आप बोर हो गये हो तो ज़रा अटेंशन हो जाए क्योंकि अब मैं शिप्रा की जवानी के बारे में बताने जा रहा हूँ.

दरअसल शिप्रा एक नाटे कद की सावली लड़की थी. फेस उसका नॉर्मल था मेरा मतलब एक जनरल गर्ल आम लड़की का. उसके बावजूद वो गुड लुकिंग फेस थी. लेकिन उसमे जो सबसे अट्रॅक्टिव था वो उसके बूब्स (चुचिया) उस छोटे से बॉडी मैं छोटी फुटबॉल जितने बड़े बूब्स. सच बताऊँ मैं जब से उसे जनता था, उसको कम, उसके बूब्स ज्यादा देखता था. ये सिर्फ़ मैं नहीं करता था हर वो लड़का टीचर लड़की करते थे की फेस नहीं बूब्स देखते थे. क्यूकी उसकी बॉडी मैं अगर कुछ अट्रॅक्टिव था तो वो थे बूब्स. ये बूब्स ही उसे सेक्सी हॉट और मज़ेदार बनाते थे. मैं अक्सर ख्यालो में उसके बूब्स को अपने हाँथो में लेता था पर कमबख्त आते ही नहीं थे.

एंटर की क्लासस स्टार्ट हो गयी हम दोनों अगल-बगल बैठते थे. और स्टडी के साथ फन भी करते कॅंटीन में जाते बातें भी करते और एक दूसरे के साथ मज़ाक भी करते. फिर मैं उसे कॉलेज से उसके घर और घर से कॉलेज लाने ले जाने लगा. जब घर से वो निकलती अकेले मैं कुछ दूर पर उसका इंतज़ार करता और वो आकर मेरी मोटरसाइकल पर बैठ जाती और कॉलेज घर जाते टाइम मैं उसे घर से पहले छोड़ देता.

एक दिन उसने अपनी जन्मदिन में मुझे अपने घर बुलाया और सबसे मिलाया. मैंने उसके मम्मी और पापा के चरण छुए और उसकी एक बड़ी सिस्टर थी सुनीता लेकिन उससे बिल्कुल अलग पर एक चीज़ सेम थी मालूम है क्या उसके बूब्स. शायद शिप्रा से बड़े क्योंकि वो शिप्रा से दो साल बड़ी थी. उस दिन से मेरा उसके घर आना जाना शुरू हो गया. कुछ दो या तीन महीने निकल गये इन सब में. अब मैं कभी कभी स्टडी करने भी उसके घर जाने लगा. मेरा मतलब क्लोज़ हो गये हमदोनों एक दूसरे के. हमने कभी ‘आई लव यू ‘ नहीं कहा . क्यों…ये बात फिर कभी…पर बताऊँगा ज़रूर.

तो शायद अब आप लोग पूरी तरीके से समझ गये होंगे. तो अब मैं उस दिन की बात बताने जा रहा हूँ जिसके लिए आप ने इतना सारा पड़ा और मुझे शायद गाली भी दी होंगी. तो मेरे बेसब्र दोस्तो सब्र रखो. क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है. तो मैं स्टार्ट करता हूँ.

उस दिन सनडे था जब मैं उसके घर गया मैंने कॉल बेल दबाई अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई कुछ देर बाद मैं दुबारा बेल पुश किया. तभी अंदर से मधुर सी आवाज़ आई ‘कौन है?’
मैंने कहा- मैं… विक्की.
उसने कहा- एक मिनट!

मैं दरवाज़े के बाहर इंतज़ार करने लगा और कुछ सोचने जा ही रहा था की दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और खुल गया पर दरवाज़े पर कोई नही…मैं देख ही रहा था की फिर से वोही आवाज़ आई अरे जल्दी अंदर आओ क्या वही खड़े रहोगे.

मैं झट से अंदर घुसा और जैसे अंदर घुसा तभी दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई और मैं पलटा और पलटते ही दंग रह गया…वो भीगे हुए बदन एक घुटनो से भी ऊपर तक के गाउन से डाले हुई थी और जांघो के नीचे से नंगे पैर…वो जो नज़ारा था या कोई कयामत था वो कोई और नहीं अपनी फिल्म की हिरोइन शिप्रा थी.

उसने मेरी तरफ देखा और कहा तुम 5 मिनट वेट करो मैं बस अभी आती हूँ. और मुझे हतप्रभ वही छोड़ गयी.
मैं कुछ समय के बाद नॉर्मल हुआ और सोफे पर बैठ गया. कुछ देर बाद एक लो कट टी-शर्ट और ब्लू रंग की स्किन टाइट जीन्स पहने हुए भीगे बालों को पोछते हुए वो मेरे सामने आई और कहा- अरे! क्या हुआ ठीक से बैठते क्यों नहीं हो…

मैंने अपने आप को ठीक किया और नॉर्मल दरशाने के लिए पूछा आज कोई दिख नहीं रहा?
शिप्रा ने कहा- दिखेंगे कैसे जब कोई होगा तब ना. मम्मी-पापा और दीदी सीतापुर गये है शादी अटेंड करने लेट नाइट आएँगे मेरा मन नहीं था इसलिए नहीं गयी.

मैं अंदर अंदर बहुत खुश हुआ और अपने अंदर हिम्मत भी आ गयी. तो मैंने कहा- तो आज तुम अकेली हो.
उसने कहा- अकेले? नहीं तो, किसने कहा?
मैंने कहा- मम्मी-पापा और दीदी सब चले गये फिर कौन है तुम्हारे साथ?
उसने कहा- तुम हो ना…

मेरे मुह से ज़ोर सी हँसी निकल गयी… और वो भी हंस दी.
उसने तभी कहा- रियली मैं अभी तुम्हे फ़ोन करने वाली थी मैं यहाँ अकेली हूँ तुम आ जाओगे तो साथ भी हो जाएगा, स्टडी भी हो जाएगी और समय भी कट जाएगा. अच्छा तुम दो मिनट बैठो, मैं कॉफी ले के आती हूँ.

मेरी नज़र ना चाहते हुए भी बार बार उसके बूब्स की तरफ जा रही थी. भीगे बालों में वो इतनी सेक्सी लग रही थी की एक बरी तो मेरा लंड खरा होते होते बचा…

आज मैं शिप्रा की चूचियाँ दबा कर ही मानूंगा चाहें जो हो जाए पर कैसे, कहीं चिल्ला दी तो, अरे नहीं इतने सालों से जानती हैं नहीं चिल्लाएगी. लेकिन अगर कहीं बुरा मान गयी तो दोस्ती टूट गयी तो… फिर क्या किया जाए कैसे शिप्रा की चुदाई करूऊऊउ, कुछ समझ में नहीं आ रहा हैं…

मैं इन्ही ख़यालो मैं डूबा था की शिप्रा की आवाज़ आई- अरे विक्की क्या सोच रहे हो?
मुझे झटका लगा क्या बोलूं , बोलूं कि न बोलूँ.
तभी शिप्रा की दुबारा आवाज़ मेरे कानो मैं पड़ी- विक्की तबीयत तो ठीक हैं…मैंने कहाँ तबीयत…तबीयत को क्या हुआ ठीक तो है…बस कुछ सोच रहा था.
‘क्या सोच रहे थे?’ शिप्रा ने कहा.
मैंने कहा- कुछ खास नहीं!
और उसके हाथों से बढाया हुआ कॉफी का मॅग ले लिया और सिप लगाया. वाकई कॉफी बिल्कुल शिप्रा की ज़वानी जैसी कड़क बनी थी. तो मैंने कहाँ मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी अच्छी कॉफी बना लेती हों. वो मुस्कराई और कहाँ हाआआं कभी-कभी वरना दीदी ही बनाती है.

अब हम लोग खामोश होकर कॉफी सिप कर रहे थे और मेरी नज़र शिप्रा के बूब्स की तरफ जा रही थी बार-बार लगातार. मैं कॉफी सिप करता जाता और उसके बूब्स देखता जाता मुझे ये भी ख्याल नहीं रहा की शिप्रा जिसके बूब्स मैं देख रहा हूँ, वो मेरे सामने बैठें ही कॉफी सिप कर रही है.
दोस्तो एक बात बताऊँ हम लड़के चाहें जितनी होशियारी क्यों न आते हो, पर लड़कियों की नज़रों से नहीं बच सकते, की आप क्या सोच रहे हो क्या देख रहे हो. वो लड़की जो बचपन से ये देखती आ रही हो कि लोगो की नज़र मेरी तरफ कम मेरे बूब्स की तरफ़ ज़यादा जाती हैं…तो वो क्या सोचती होगी…

तबी उसने मुझे टोका- विक्की क्या देख रहे हो?
इस सवाल ने मेरा पसीना निकाल दिया और मैं बिल्कुल हकला गया मैंने कहा- कुछ, कुछ भी तो नही!
लेकिन शिप्रा आज कुछ और मूड में थी तो उसने कहा- नहीं, कुछ देख रहे थे…

उसके कहने के अंदाज़ ने मुझे और डरा दिया…
उसने कहा- बोलो… क्या देख रहे थे?
मैंने बरी हिम्मत करके उसके दोनों बूब्स की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- वूऊऊ दोनो!
शिप्रा ने मेरी ऊँगलियों का इशारा समझते हुए भी कहा- मैं समझी नहीं. मुह से बोलो क्या देख रहे थे?

अब मुझे ये नहीं समझ मैं आया की मैं क्या बोलूँ… मैंने कहा- सीना… देख रहा था!
शिप्रा ने कहाँ सीना, क्यों… सीने मैं क्या है?
अब मैं चुप, क्या बोलूं?
उसने फिर कहा- अरे! बोलते क्यों नहीं हो?
तो मैंने कहा- तुम्हारी चूचियों को…

जिस प्रकार डरते हुए उसको मैंने ये वर्ड बोला… वो ज़ोर से हंस दी… और कहा- आरीईई तो डर क्यों रहे हो, कौन आज पहली बार तुम इन्हें देख रहे हो या कौन से पहले तुम हो जो इसे देख रहें हो देखने वाली चीज़ है सब देखते हैं… तो तुम देख रहें हो तो क्या अपराध कर रहें हो…
जब शिप्रा ने ये वर्ड्स बोलें तब मेरी जान में जान आई और मैं मुस्कराए बगैर नहीं रहा सका…और अपनी झेप मिटाने लगा.

उसी वक्त शिप्रा सामने वाले सोफे से उठकर मेरे बगल में सटकर बैठ गयी और मेरे हाथों से कॉफी का मॅग ले कर टेबल पर रख दिया और मेरी आखों की तरफ देखने लगी…और कहा- अब देखो, जो देखना है…
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ.

तभी उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिए और कहाँ शायद अब तुमको देखने में आसानी होगी. और ज़ोर से मेरे होंठों को चूसने लगी थोरी देर में मैं गर्मा गया और मेरे हाथ उसकी चूचियों को दबाने लगे. और अब मैं भी उसके होंठों को चूस रहा था.
ये मेरी लाइफ का सबसे बड़ा और हॉट दिन था. आज से पहले मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया था. धीरे-2 हम दोनों की साँसे गर्म हो रही थी और मेरे हाथों का दबाव उसकी चूचियों पे बढता ही जा रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी.

तभी वो मेरे बगल से उठ कर मेरे ऊपर दोनों घुटनों को मोड़ कर अपने हिप्स को मेरे ऊपर रख कर मेरी तरफ अपना सीना दिखाते हुए बैठ गयी. मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों कों बदस्तूर दबाये जा रही थी. मैंने भी उसे अपनी बाहों मे कस कर भर लिया और उसेके रसीलें होंठों को चूसने लगा जिस अंदाज़ से वो मेरे ऊपर बैठी थी उससे उसेके हिप्पस का प्रेसर मेरे लंड पर पड़ रहा था. जिसकी वजह से मेरा लंड टाइट होने लगा और उसके हिप्स को छूने लगा.

शिप्रा ने पूछा- विक्की ये मेरे नीचे कड़ा कड़ा क्या लग रहा है?
मैंने कहा- शिप्रा ये मेरा लंड है.
‘क्या मैं इसे देख सकती हूँ?’
मैंने कहा- डार्लिंग ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही है.

और वो सोफे से उतर कर नीचे ज़मीन पर घुटने के बल बैठ गयी और अपने हाथों से मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड पकड़ लिया और वो मेरी तरफ़ देखते हुए मेरा लंड मसलने लगी.

मैंने बड़कर उसके होंठों को चूम लिया और हाथों से मैं अब उसकी टी-शर्ट उतारने लगा तो उसने अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दिया और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी. वो अंदर ब्रा में अपने मिनी फूटबाल जितनी चूचियाँ छुपा रखी थी. वो बिना परवाह किए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से मल रही थी.

मैंने ब्रा के ऊपर से उन हिमालय जितनी विशाल चोटिया देख कर दंग हो गया जो कल तक मेरे सपना था आज हक़ीक़त बनकर मेरे सामने खड़ा था, जिन्हें दबाने की मैं कलपना किया करता था आज मैं उन्हें रियल में दबा रहा हूँ… और मैंने उन्हें खूब जमकर दबाया उसके बाद उसकी ब्रा खोल दी दो उछालती हुई गेंदे बाहर आ गयी उन चूचियों को मैंने क़ैद से आज़ाद कर दिया और वो अब मेरे सामने सीना ताने खड़ी थी.

मैंने शिप्रा को अपनी गोद मैं बैठा लिया और उसकी चूचियों को अपने मुँह मैं भर लिया और दूसरी को अपने हाथों से दबाने लगा. अब शिप्रा के मुँह से सिसकारिया निकलने लगी- …आआ ईई… उसका बदन अंगारों की तरह तप रहा था.

मेरा लंड पैंट से निकलने के लिए बेताब हो रहा था, मैंने शिप्रा से कहा- जानू अब मेरा हथियार अपने होंठों से चूसो उसने तुरंत मेरी पैंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर निकाल लिया और उसे देख कर मेरी तरफ़ मुस्कराई और उसे चूसने लगी. में सोफे पर से उतर गया और पैंट पूरी उतार दी अब मेरा पूरा लंड शिप्रा के सामने था और वो मज़े से चूस रही थी. अब मैंने अपने बचे कपडे उतार दिए और शिप्रा मेरा लंड चूसने में मस्त थी अब मैंने उसको खड़ा करके उसे अंपनी बांहों मैं भर लिया और उसकी जींस उतार दी वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी औरे मैं उस नंगे बदन को निहार रहा था.

उसकी घाटी पे उगे छोटे छोटे बाल बिल्कुल फूलो जैसा अहसास दे रहे थे मुझे मैंने तभी एक हाथ से उसकी चूची पकड़ी और दूसरे हाथ की उंगली उसकी चूत मैं डाल दिया उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी, उसने हल्का हल्का पानी छोड़ दिया था.

मैंने अच्छी तरीके से अपनी उंगली को उसकी चूत में डाल दी धीरे से मैंने दो उंगली उसकी चूत मैं डाली तो वो सिहर उठी जब मेरी दोनों उँगलियाँ चूत के पानी से गीली हो गयी तो मैंने उन दोनों ऊँगलियों को मुंह में डाल ली फर्स्ट टाइम मुझे जन्नत का अहसास हुआ अब मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया हम दोनों पूरी तरीके से नंगे हो चुके थे जल्दी कोई थी नहीं क्योंकि अभी तो दोपहर थी और सबको आना था रात में.

मैं उसके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटने लगा और चूचियों को लगातार दबा रहा था उसका बदन पूरे तरीके से भभक रहा था वो गर्म हो चुकी थी पुरी तरीके से मैंने अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोद रहा था.
उसके मुहँ से सिसकरिया निकल रही थी- ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ ईईए विक्की अब मुझे चोद दो मैं बर्दास्त नहीं कर पा रही हूँ.

अब मैंने उसे अपने बदन के ऊपर लेता हुआ सोफे पर लेट गया और 69 का कोण बना लिया मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म्स में ऐक्टर और ऐक्ट्रेस को इस तरीके से मजा लेते देखा था इसलिए मैंने शिप्रा को बताया उसे क्या करना है वो मेरा लैंड लेकर उसे चूसने लगी और मैंने उसकी चूत को चाटने लगा मैंने उसकी चूत को कभी ऊँगलियों से तो कभी जीभ से चोद रहा था उससे रहा नहीं गया वो मेरे लंड को खा जाने वाली स्टायल से चूस रही थी और मैं उसकी चूत को बड़े प्यार से जीभ से चोद रहा था.

वो मेरा लंड चूसना छोड़ कर कहरारने लगी और मेरी तरफ़ याचना की नज़र से देखने लगी जैसे कह रही हो बस करो विक्की खेलना जो बाँध टूटने वाला है अब मुझसे नहीं रुक रहा है…

तो मैंने उसे अब सोफे पर लिटा दिया और अपने लंड का सुपाडा उसकी चूत के मुहँ पर रख दिया और बाहर से ही उसके ऊपर लंड का लाल वाला हिस्सा जिसे सुपाडा कहते है रगड़ने लगा हम दोनों को एक जलन सा अहसास होने लगा जो कभी तो ठंडा लगता और कभी भट्टी की तरह गर्म जब मुझसे भी रहा नहीं गया तब मैंने अपना लंड पकड़ के उसकी चूत के अन्दर डाला लेकिन चूत बहुत टाईट थी मैंने थोड़ा जोर लगाया तो शिप्रा चिल्ला उठी।

मैंने उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और चूसने लगा कुछ सेकेंड बाद मैंने एक जोर का धक्का धीरे से दिया तो मेरा आधा लंड चूत में चला गया उसने चीखना चाहा, पर मेरे होठों ने उसकी चीख रोक दी मैंने उसके होठों चूसना बदस्तूर जरी रखा जब उसे थोड़ा आराम मिला तो एक जोर का धक्का और लगाया की चीख के साथ ही खून की एक धारा भी निकल पड़ी चूत से पर मैंने परवाह नहीं की क्योंकि ये तो होता ही जब नई चूत फटती है.

मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरु किया पहले तो उसके मुहँ से आवाजें आती रही फिर कुछ देर बाद वो भी अपनी कमर उठा उठा के मेरा साथ देने लगी. अब हमदोनों हवा में ऊड रहे थे कमर एक ताल मैं चल रही थी जब मैंने देखा शिप्रा को अब कोई दर्द नहीं है तो हमने अपनी स्टायल को बदल कर के डॉग स्टाइल में आ गए मैंने उसे पीछे से खड़ा करके चोद रहा था और एक हाथ से उसके बाल पकडे हुए और एक हाथ से उसकी चूची दबा रहा था और अपने लंड से शिप्रा की चूत चोद रहा था और शिप्रा के मुहँ से आवाजें आ रही थी उसे लंड पहली बार खा रही थी इसलिए शोर मचा रही थी पर मैंने परवाह किए बगैर उसे चोद रहा था.

तभी शिप्रा को बदन मैं झटका लगा और वो ढीली हो गई मैंने दुबारा उसे जल्दी से तैयार किया और अबकी उसे अपनी गोद में लेकर चोदा उस दिन हमने एक दूसरे को कई बार चोदा वो दिन मेरी लाइफ का सबसे हसीं पल था. मुझे मेरी जवानी का अहसास शिप्रा ने ही कराया था…हम दोनों ने फर्स्ट टाइम जन्नत की सैर की. उसके बाद हम दोनों एक साथ बाथरूम में शावर लिया और काफ़ी पीने बैठ गए.

मैंने शिप्रा को आज के लिए थैंक्स कहा तो शिप्रा ने मुस्कराया और कहा- नहीं विक्की, तुम नहीं जानते आज मैंने तुमसे क्या पाया! इसका अगर तुम्हे अहसास होता तो तुम मुझे थैंक्स न कहते बल्कि मुझे तुम्हे थैंक्स कहना चाहिए!

फिर थोडी देर हम लोगो ने नोर्मल होने के लिए कुछ इधर उधर की बातें की और दुबारा इसी तरीके से मौका मिलने पर एक दूसरे को चोदने का वादा किया!

उसके बाद तो हम लोगो को कई मौके मिले और हमने भरपूर फायदा उठाया. हम लोग आपस में इतने पास आ गए थे तो आपस में अश्लील हरक़त करने से नहीं चुकते और शायद शिप्रा की बड़ी सिस्टर को हमारी हरक़तो की भनक लग गई थी उसे कुछ डाउट रहता था इसलिए न जाने क्यों वो हमदोनों को अलग नहीं छोड़ती थी. ये स्टोरी आगे बताऊँगा…

तो दोस्तो, आपको मेरा फर्स्ट एक्सपीरियेंस कैसा लगा? अगर अच्छा लगा तो मुझे जरूर लिखें और हाँ पाठक चाहे मेल हो या फीमेल- कमेंट्स लिखना जरूरी है .इस स्टोरी मैं कुछ गलती या कमी हो तो जरूर लिखें. आपने मेरी स्टोरी पड़ी इसके लिए शुक्रिया मैं जल्दी अपना एक दूसरा एक्सपीरियेंस आप लोगो के बीच जल्दी ले कर आऊँगा. Sex Stories

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