Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Gandhi Nagar Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मुझे दिया मेरी पड़ोस के लड़के ने! मैंने अपनी चूत फड़वाने के लिए उसे पसंद किया पर उसकी नजर मेरी छोटी बहन पर थी. उसको मैंने कैसे सेट किया?

दोस्तो, मेरा नाम रीता शर्मा है. मैं 19 साल की हूँ.
मैं हर रोज अन्तर्वासना की सेक्स कहानी पढ़ती हूँ और इस पटल की एक नियमित पाठिका हूँ.

आज मैं आप सबको अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ.
ये मेरे ब्वॉयफ्रेंड के साथ हुई चुदाई की कहानी है जिसमें टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा मैंने लिया.

वह मेरे घर के बगल में रहता था.

उन दिनों मैं हॉस्टल में रहती थी तो मैं विंटर वेकेशन में अपने घर गई थी.

उधर मेरी मुलाकात मेरे पड़ोसी लड़के से हुई.
वह काफी हैंडसम था और जिम भी जाता था.

उस दिन मैं नहा कर छत पर धूप सेंकने गई थी.

उधर वह सिर्फ एक गमछा लपेटे हुए छत पर खड़ा धूप ले रहा था.

मैंने उसे देखा तो वह काफी हॉट लग रहा था.
उसके सिक्स पैक साफ दिख रहे थे और सच में क्या मस्त लग रहा था.

पहली नजर में वह एकदम सलमान खान जैसा लगा था.
मैं उसे देखती रही, वह अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था इसी लिए शायद उसने मुझे नहीं देखा था.

फिर जब उसकी नजरें मोबाईल से हटीं तो वह मेरी छोटी बहन को देख रहा था.
शायद उसे मेरी छोटी बहन पसंद थी.
यही सब देख कर मैं छत की दूसरी तरफ चली गई.

फिर दूसरे दिन कुछ ऐसा हुआ कि मेरे घर में लाइट नहीं आ रही थी.

मैं उस वक्त छत पर थी.
वह उधर ही था.

मैंने उससे हाय कहा और उसको अपना फ़ोन चार्ज करने के लिए दे दिया.
उसे मैंने उसे बताया कि किसी वजह से मेरे घर की बिजली नहीं आ रही है और मोबाईल पूरा डिस्चार्ज पड़ा है.

उसने मेरा फ़ोन ले लिया और चार्ज पर लगाने के लिए नीचे ले लगा.
उसी दौरान उसने मेरा नंबर चुरा लिया.

शायद उसी शाम को वह अपनी नानी के घर चला गया क्योंकि वह अपनी पढ़ाई नानी के घर रह कर ही करता था.

उधर से उसने मेरे फोन पर मैसेज किया.
मैं उसके मैसेज से मन ही मन खुश हुई और धीरे धीरे उससे मेरी बात होना शुरू हो गई.

मैंने पहले तो उससे कहा- तुम्हारे पास मेरा नंबर कहां से आया है?
उसने कहा- वो सब छोड़ो, तुम बस ये बताओ कि तुम्हें मुझसे बात करना कैसा लगा?

मैंने कहा- मुझे बात करने में भला कैसे बुरा लग सकता है. बस यह बात मुझे बुरी लग रही है कि तुमने मेरा नंबर कुछ गलत तरीके से हासिल किया है.

वह बोला- क्या मैंने कोई पाप किया है?
उसके इस सवाल पर मैं चुप थी.

मेरे मन में अब बस वह सवाल चल रहा था कि क्या वो मुझमें दिलचस्पी रखता है या मेरी छोटी बहन में.
फिर मैंने उससे ये बात साफ साफ पूछने की बात ठान ली और उससे कहा.

मैं- मैं तुमसे एक बात साफ साफ पूछना चाहती हूँ. बिना कोई छिपाव के तुम मुझे बताओगे, तो मुझे अच्छा लगेगा और तभी मैं तुमसे बात करना या ना करना तय करूंगी.
वह बोला- क्या जानना चाहती हो?

मैंने कहा- मैंने तुम्हें अपनी छोटी बहन को देखते हुए देखा है. क्या तुम मेरी छोटी बहन में दिलचस्पी रखते हो?

उसने एक पल के लिए मौन साधा और उसके बाद कहा- वो मुझे पसंद नहीं करती है. मगर मैं तुम दोनों को पसंद करता हूँ.

उसके इस साफ जवाब से मैं मन ही मन खुश हो गई थी कि मैं अपनी छोटी बहन का हक नहीं चुरा रही हूँ.

उसके बाद हम दोनों में बातें होने लगीं और कुछ ही समय बाद हम दोनों में प्यार का इजहार हुआ.

प्यार मुहब्बत की बातें चलती रहीं और बातों में सेक्स भी हिस्सा बनने लगा.
फिर एक रोज वह अपने घर आया और उसने मुझे रात में बाहर बुलाया.

मैं उस रात बेहद घबराई हुई थी कि आज पहली बार एक लड़का मुझे अकेले में बुला रहा है.
अपनी सांसों को नियंत्रित करती हुई मैं उससे मिलने चली गई.

हमारे घर के पास में ही एक टूटा मकान था. उसमें रात में कोई नहीं जाता था.
उसी खंडहर में हम दोनों गए.

उसने मुझे कसके पकड़ा और किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को दबाने लगा.
मैं मदभरी सिसकारियां भरने लगी ‘अंह अंह धीरे करो आह.’

वह मान ही नहीं रहा था.

मैंने कहा- धीरे धीरे दबाओ … मुझे दर्द हो रहा है.
उसने मेरी एक न सुनी और मेरी दोनों चूचियों को बस दबाए जा रहा था.

उसी दौरान वह अपना एक हाथ मेरी चूत पर ले गया और उसे जोर जोर से रगड़ने लगा.
कुछ ही देर में मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया.
चूत के पानी से मेरी जींस गीली हो गई.

वह अभी भी मेरी चूत को रगड़ता ही जा रहा था.
फिर उसने अपना हाथ मेरी जींस में डालना चाहा लेकिन मैंने उसे डालने नहीं दिया.

मैंने उससे कहा- आज नहीं, कभी फिर कर लेना.
फिर हम दोनों वहां से चले गए.

दूसरे दिन वह अपनी नानी के घर चला गया.
उसकी हरकतें मुझे बार बार उसकी याद दिलाने लगी थीं.

उस दिन के बाद से वह रोज मुझे वीडियो कॉल करने लगा और मुझे अपनी चूत और चूची दिखाने को बोलने लगा.

जब मैं उसे अपने दूध दिखाती तो वह मेरे सामने अपना लंड निकाल कर मुठ मारने लगता.

उसका लंड बड़ा ही मस्त था और काफी लंबा व मोटा था.

इसी तरह से वीडियो कॉल से हम दोनों के मन में चुदाई की इच्छा ने जोर पकड़ लिया और मैं भी मन ही मन उससे चुदने के लिए बेचैन होने लगी.

काफी समय बीतने के बाद हमें चुदाई करने का मौका मिला.
मुझे अच्छी तरह से याद है कि उस दिन बीस फरवरी की तारीख थी.

वह अपनी नानी के घर से मुझसे मिलने आया था.

उन दिनों कोई छुट्टी भी नहीं थी.
वैलेंटाइन डे भी निकल चुका था.

उसी ने वैलेंटाइन डे पर मिलने के लिए मना किया था क्योंकि उस दिन हमारे आस-पास के इलाके में कुछ लोग प्यार के दुश्मन बन जाते हैं और उनके कारण हमारी निजता पर फर्क पड़ सकता था.

बीस तारीख के दिन हम दोनों ने मिलने के लिए बात की.
मैंने उससे कहा कि मैं खंडहर में मिलना नहीं चाहती हूँ.

वह समझ गया कि आज चुदाई का मुहूर्त आ गया है.
उसने एक ओयो रूम बुक किया और मुझे बताया कि तुम मुझे गली के बाहर मिलो.

फिर हम दोनों उधर उस होटल में गए.

कमरे के अन्दर जाते ही उसने गेट लॉक कर दिया और मुझे कसके पकड़ लिया.
वह मुझे किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.

वह मेरी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लगा.
मुझे दर्द होने लगा और मैं सिसकारियां भरने लगी- आह सीई … आह आराम से करो … मैं कहीं भागी थोड़ी न जा रही हूँ.

उसने कुछ देर बाद मेरा टॉप ऊपर उठाते हुए उतार दिया, फिर मेरी ब्रा को भी खोला और मेरी चूचियों को बारी बारी से चूसने लगा.
उसके दूध चूसने से मुझे काफी मज़ा आने लगा.

मैंने भी उसका सर अपने मम्मों में दबाते हुए सिसकारना शुरू कर दिया- आह चूसो मेरी जान … मेरी चूचियों को पूरा चूस लो आह बड़ा मज़ा आ रहा है.

कुछ देर बाद उसने अपनी टी-शर्ट को उतार कर अलग कर दी और मैं उसके सीने को सहलाने लगी.

थोड़ी देर बाद उसने मेरी जींस को उतार फेंका और मेरी पैंटी को भी निकाल दिया.
मैं पूरी नंगी हो गई थी.

उसने मुझे बेड पर चित लिटाया और मेरी चूत को चाटने लगा.
मुझे भी अपनी चूत चटवाने में मज़ा आने लगा.

मैं मजे से अपनी गांड उठाती हुई चूत चटवा रही थी और साथ में कामुक सिसकारियां भी भर रही थी- आह आह उन्ह चाटो मेरी चूत … आह आह!

कुछ ही देर में मेरी चूत ने उसके मुँह पर सारा पानी छोड़ दिया और वह मज़े से मेरी चूत का पानी पी गया.

अब उसने मुझसे कहा- बेबी, मेरा लंड चूसोगी?
मैंने उसे साफ़ मना कर दिया.

वह मेरी आंखों में वासना से देखता हुआ चूसने के लिए इशारा करने लगा.
मैंने साफ बोल दिया कि मैं लंड नहीं चूसूंगी.

उसने कहा- तो चलो हो गया. अब हम दोनों वापस चलते हैं.
मैंने कहा- क्यों मेरी लेना नहीं है?

वह कुछ नहीं बोला.
उसका मन था कि मैं उसके लौड़े को चूस कर उसे भी मजा दूँ.

उसकी इस बात को मैंने समझ लिया और उसके गले लग कर उसे मनाया, तब जाकर वह चुदाई के लिए राजी हुआ.

अब मैं उसका लंड चूसने के लिए मान गई थी.
मैंने अपना मुँह खोला और उसका सुपारा चाटने लगी.

मेरे मन की अजीब सी स्थिति को बदलने में देर न लगी और मुझे लंड चूसने में अच्छा लगने लगा.

मैंने उसके एक इंच लंड को अपने मुँह में ले लिया और जीभ से लिक लिक करके लौड़े को चूसने लगी.
उसने उसी समय मौका देखा और एक ही झटके में अपना पूरा का पूरा लंड मेरे मुँह में पेल दिया.

उसका लंड मेरे गले में जाकर फंसने लगा था.
फिर मैंने उसका लंड करीब 20 मिनट तक चूसा और उसने अपने लंड का सारा पानी मेरे गले में छोड़ दिया.

पानी छोड़ने के बाद भी वह अपने लंड को मेरे मुँह में दिए रहा, जिस वजह से मुझे उसका सारा पानी पी जाना पड़ा.

कुछ देर बाद उसने लंड बाहर निकाला और मुझसे पूछा- कैसा लगा स्वाद?
सच में मुझे अच्छा लगा था.
मैंने कहा- हां मुझे अच्छा लगा.

उसने कुछ देर बाद फिर से लंड चूस कर खड़ा करवाया और अब उसने मुझे लेटा दिया.

उसने मेरी जांघों को पूरा खोल दिया और मेरी चूत के मुख पर अपना लंड रगड़ने लगा.

वह मेरी चूत में लंड पेलने की कोशिश करने लगा.
लेकिन मेरी सीलपैक चूत काफी टाइट थी तो उसका लंड मेरी चूत नहीं जा रहा था.

फिर उसने बाथरूम से बॉडीलोशन लाकर अपने लंड पर लगाया और मेरी चूत की फांकों में भी थोड़ा बॉडीलोशन लगा दिया.
फिर उसने चूत के छेद पर लौड़े को रखा और एक ही झटके में लंड पेल दिया.

उसने अपना आधा लंड मेरी चूत में डाल दिया, जिससे मुझे काफी दर्द होने लगा, मेरी आंखों से आंसू आने लगे.

मैं दर्द से कराह उठी और बोली- लंड बाहर निकालो, मुझे दर्द हो रहा है.
लेकिन उसने मेरी चूत में अपना लंड पेले रखा.
वह मेरे ऊपर लेटा रहा और मुझे सहलाता रहा.

करीब 5 मिनट बाद मुझे थोड़ा ठीक लगा तो उसने एक और झटके में अपना पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर तक चला गया था.

कुछ दर्द के बाद अब मुझे टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स का मज़ा आने लगा.
मैं अपनी गांड उठा उठा कर उसके झटकों में उसका साथ देने लगी.

वह भी बेदर्दी से मेरी चूत को चोदता रहा.
मैं मज़े से अपनी चूत चुदवाती रही.

कुछ बीस मिनट की चुदाई के बाद उसने अपना सारा पानी मेरी चूत में छोड़ दिया और मेरे ऊपर ही लेटा रहा.
बाद में हम लोग साथ में नहाने बाथरूम में चले गए. नहाने के बाद उसने एक बार फिर से मेरी चूत को चोदा.

फिर हम लोग उधर से निकल आए.

मेरी टीनएजर गर्ल फर्स्ट सेक्स की कहानी आपको कैसी लगी?
आप अपनी राय मुझे मेल कर सकते हैं.
sauravjaikar2@gmail.com

लेखक की पिछली कहानी थी: गृह प्रवेश में भाभी की चूत में लंड प्रवेश

What did you think of this story??

पूर्णिमा ताई की गुमनाम आग अध्याय 1: अकेलापन की शुरुआत मेरा नाम पूर्णिमा है, लेकिन सब मुझे पूर्णिमा ताई कहते हैं। उम्र हो चुकी है पचपन की, पर दिल अभी भी जवान है। लखनऊ की तंग गलियों में बसा मेरा छोटा सा घर, जहां कभी हंसी-खुशी की गूंज थी, अब सिर्फ खालीपन की सिसकारियां। मेरा पति, वो हरामी जिसने मुझे धोखा दिया, छह साल पहले चला गया। डिवोर्स के कागजों पर साइन करते वक्त मेरी आंखों से आंसू नहीं निकले, बस एक ठंडी उदासी ने सीने को जकड़ लिया। अब मैं अकेली हूं, बस अपने बेटे आरव के साथ। आरव, मेरा लाल, मेरा सहारा। वो अब पच्चीस का हो गया है, लंबा, सुंदर, वो जो हर मां का सपना होता है। लेकिन हमारा रिश्ता... वो तो एक काली रात की तरह गहरा हो गया है, जहां प्यार और वासना की लाइनें मिट चुकी हैं। सब कुछ तब शुरू हुआ जब आरव उन्नीस का था। वो कॉलेज में पढ़ता था, इंजीनियरिंग की डिग्री के चक्कर में। मैं घर संभालती, कभी-कभी पड़ोसियों के लिए सिलाई का काम करके दो वक्त की रोटी जुटाती। रातें लंबी लगतीं। पति के जाने के बाद मेरी देह में एक आग सुलग रही थी, जो बुझने का नाम न लेती। मैं खुद को संभालती, लेकिन सपनों में वो पुरानी यादें आ जातीं – मेरे पति की छुअन, उसकी सांसें मेरी गर्दन पर। लेकिन अब? अब सिर्फ आरव था, जो मेरे लिए सब कुछ था। एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी, बिजली चली गई थी। घर में मोमबत्ती की रोशनी में हम दोनों बैठे थे। आरव ने चाय बनाई थी, गर्म-गर्म। उसके हाथ मेरे कंधे पर रखे, वो बोला, "मां, तुम्हें ठंड लग रही है ना?" उसकी आवाज में कुछ था, एक नरमी जो पहले न सुनी थी। मैंने मुस्कुरा दिया, "नहीं बेटा, बस थकान है।" लेकिन उसके हाथ रुक न गए। धीरे से मेरी कमर पर सरक गए। मैं चौंक गई, लेकिन कुछ बोली नहीं। शायद मुझे अच्छा लगा। वो मेरी उम्र की औरत था, लेकिन उसकी आंखों में एक भूख थी, जो बेटे की न होकर मर्द की लग रही थी। उस रात से सब बदल गया। आरव ने धीरे-धीरे कोशिशें शुरू कर दीं। सुबह उठते ही चाय लाता, मेरे पास बैठता, कभी मेरे बाल संवारता। "मां, तुम कितनी खूबसूरत हो," वो कहता। मैं हंस देती, "बावरी हो गई हो क्या?" लेकिन अंदर से एक सिहरन दौड़ जाती। रात को वो मेरे कमरे के बाहर खड़ा हो जाता, "मां, नींद न आ रही?" मैं बुलाती, वो आ जाता। बिस्तर पर लेटे, हम बातें करते। उसके हाथ मेरी जांघ पर फिसल जाते, मैं हटा देती, लेकिन दिल कहता – रहने दो। एक साल लगा उसे। एक लंबा साल, जहां हर दिन एक जंग थी। वो छूता, मैं बचती। वो किस करने की कोशिश करता, मैं मना कर देती। लेकिन वो हार न माना। धीरे-धीरे मैं भी पिघलने लगी। मेरी देह, जो सालों से सूखी पड़ी थी, फिर से हरी हो रही थी। एक रात, जब चांदनी रात थी, वो मेरे बिस्तर पर लेट गया। "मां, मैं तुमसे प्यार करता हूं, लेकिन वो प्यार जो पिता का होना चाहिए था।" उसके शब्दों ने मुझे हिला दिया। मैंने उसकी आंखों में देखा – वो आग, वो चाहत। और फिर... हम एक हो गए। अध्याय 2: पहली रात की आग वो रात भूल न पाऊंगी कभी। बारिश थम चुकी थी, लेकिन हवा में नमी बाकी थी। आरव मेरे बगल में लेटा था, उसकी सांसें तेज। मैंने अपना साड़ी का आंचल ढीला किया, दिल धड़क रहा था। "बेटा, ये गलत है," मैंने फुसफुसाया। वो मुस्कुराया, "नहीं मां, ये तो सबसे सच्चा प्यार है।" उसके होंठ मेरे गाल पर लगे। एक झुरझुरी सी दौड़ गई। मैंने आंखें बंद कर लीं। उसके हाथ मेरी ब्लाउज पर गए। धीरे से हुक खोले। मेरी चूचियां, जो सालों से किसी की नजरों से परे थीं, अब नंगी हो गईं। वो उन्हें देखा, आंखें फैल गईं। "मां... कितनी सॉफ्ट हैं," वो बोला और मुंह में ले लिया। मैं सिसकारी भर दी। "आरव... आह..." उसकी जीभ मेरी निप्पल पर घूम रही थी, चूस रहा था जैसे कोई बच्चा दूध पीता हो। लेकिन ये बच्चा न था, ये मेरा प्रेमी था। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा, दबाया। नीचे हाथ गया मेरा। उसकी पैंट में उभार साफ दिख रहा था। मैंने छुआ – कड़क, गर्म। "मां..." वो कराहा। मैंने पैंट उतार दी। उसका लंड, मेरा भगवान, कितना बड़ा था। उन्नीस साल का लड़का, लेकिन मर्दानगी पूरी। मैंने सहलाया, ऊपर-नीचे। वो मेरी साड़ी खींचने लगा। पेटीकोट खुला, मेरी चूत नंगी। बाल घने, गीली। सालों बाद किसी ने छुई थी। "मां, मैं घुसना चाहता हूं," वो बोला। मैंने सिर हिलाया। वो ऊपर चढ़ा। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं तड़पी, "धीरे... बेटा... आह..." फिर धक्का। दर्द हुआ पहले, फिर मजा। वो अंदर-बाहर होने लगा। तेज, जोरदार। "चोदो मुझे... आरव... अपनी मां को चोदो..." मैं चिल्लाई। वो हांफा, "हां मां... तेरी चूत कितनी टाइट है... साली रंडी... मैं तुझे रोज चोदूंगा।" गंदे शब्द उसके मुंह से निकले, लेकिन मुझे अच्छे लगे। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे में खोए। आखिर में वो झड़ गया, मेरे अंदर। गर्म वीर्य। मैं भी कांप गई, ऑर्गेज्म की लहर। उस रात हम सोए नहीं। फिर से किया। कुत्ते की तरह, मैं घुटनों पर। वो पीछे से मारा। "आह... तेरी गांड भी चोदूंगा एक दिन," वो बोला। मैं हंसी, "चोद ले हरामी... सब तेरा है।" अध्याय 3: रोज की लत उसके बाद सब बदल गया। सुबह उठते ही वो मेरे पास आता। किचन में खाना बनाते वक्त पीछे से गले लगाता, हाथ चूचियों पर। "मां, चाय में चीनी कम डालना, तेरी चूत की तरह मीठी है," वो मजाक करता। मैं लजाती, लेकिन चुदाई की चाहत रहती। दोपहर में, जब वो घर आता, सीधा बेडरूम। मैं नंगी लेटी रहती। "आ जा बेटा, अपनी मां की भूख मिटा।" एक दिन, वो दोस्तों के साथ घूमने गया। रात देर से लौटा। मैं बेचैन। "कहां था हरामी?" मैंने पूछा। वो हंसा, "मां, बस पार्टी। लेकिन तेरी याद आ रही थी।" फिर बेड पर। लेकिन वो थका था। मैं ऊपर चढ़ी। "अब मैं चोदूंगी तुझे।" उसका लंड मुंह में लिया। चूसा, चाटा। "आह मां... साली ब्लोजॉब क्वीन है तू।" फिर राइडिंग। मैं उछलती, वो नीचे से धक्के मारता। चीखें गूंजतीं – "चोद... फाड़ दे मेरी चूत... तेरी मां रंडी है तेरी।" हमारा राज था। पड़ोसी कुछ शक न करें, इसलिए सावधानी। लेकिन लत लग गई। हर रात, हर सुबह। कभी बाथरूम में, शावर के नीचे। पानी बहता, हम चुदते। "गांड मारूं?" एक दिन वो बोला। मैं डरी, लेकिन राजी। तेल लगाया, धीरे डाला। दर्द, फिर स्वर्ग। "आह... तेरी गांड भी कमाल," वो बोला। अध्याय 4: प्यार की गहराई ये सिर्फ चुदाई न थी। प्यार था। वो मुझे घुमाने ले जाता। लखनऊ के चिड़िया घर, जहां हम हाथ पकड़े घूमते। "मां, तू मेरी जान है," वो कहता। रात को गले लगे सोते। लेकिन चुदाई के बिना नींद न आती। एक बार, मैं बीमार पड़ी। बुखार। वो दिन-रात देखभाल। दवा दी, खाना खिलाया। "मां, तू ठीक हो जा, वरना मैं मर जाऊंगा।" मैं रो पड़ी। ठीक होते ही, धीरे से चुदाई। प्यार भरी। लेकिन डर भी था। समाज क्या कहेगा? अगर पता चला तो? लेकिन आरव कहता, "मां, ये हमारा राज है। कोई नहीं जानता।" और मैं मान जाती। अध्याय 5: नई ऊंचाइयां अब पच्चीस का हो गया वो। जॉब लग गई। लेकिन घर आता तो सीधा मेरे पास। नई-नई पोजिशन्स। 69, जहां मैं चूसती, वो चूत चाटता। "तेरी चूत का रस... अमृत है," वो बोला। कभी आउटडोर। पार्क में, छिपे हुए। हाथ डालता स्कर्ट में। "आरव... कोई देख लेगा," मैं फुसफुसाती। लेकिन उत्तेजना दोगुनी। एक रात, कैंडल लाइट डिनर। वो कुकिंग सीखा। खाना खाया, वाइन पी। फिर बेड पर। बॉन्डेज। मेरे हाथ बांधे, आंखें बंद। "अब तू मेरी गुलाम है," वो बोला। चाबुक से हल्का मारा। चूचियां, गांड। फिर चोदा। जोरदार। "चिल्ला रंडी... कह कि तू मेरी हो।" मैं चिल्लाई, "हां... तेरी चूत हूं मैं... चोद मुझे साला..." अध्याय 6: संघर्ष और समर्पण कभी झगड़े भी होते। एक दिन, वो देर से आया। शक हुआ। "किसी लड़की के साथ था?" मैंने पूछा। वो गुस्सा, "नहीं मां... तू ही सब कुछ है।" फिर चुदाई से सुलह। आंसू बहते, लेकिन लंड अंदर जाता तो भूल जाती। मेरी उम्र का असर। कभी थकान। लेकिन वो कहता, "मां, तू हमेशा जवान।" मसाज करता, तेल लगाता। फिर चुदाई। अध्याय 7: भविष्य की कल्पना अब सोचती हूं, आगे क्या? शादी? नहीं, ये प्यार अनोखा है। बस हम दोनों। वो कहता, "मां, हम कहीं चले जाएं, जहां कोई न जाने।" मैं हंसती, "हां बेटा, तेरी चूत बनकर रहूंगी।" अध्याय 8: चरमोत्कर्ष एक रात, जन्मदिन मेरा। वो सरप्राइज। फूल, केक। फिर नंगी डांस। मैं नाचती, वो देखता। फिर ग्रुप... नहीं, बस हम। तीन राउंड। मुंह, चूत, गांड। सब भरा उसके वीर्य से। "मां... आई लव यू।" "मैं भी बेटा... चोदते रहना।"
लेखिका : शमीम Antarvasna Stories

फ़रदीन भाई जान ने Antarvasna Stories मुझसे कहा कि आज मैं भी आप जैसा लिखूंगा, मैंने भी तो आपको चोदा है, मैं कहानी का स्वरूप लिखूंगा, बस आप उसे दिलचस्प बना देना। मेरे साथ फ़रदीन ने कैसे अपनी रंगीनियाँ बिखेरी, यह उसकी दस्तान है। वो इस तरह से अपनी आप बीती लिखते हैं…

मैं कानपुर में रहता था और अब्बू के साथ दुकान पर काम करता था। मेरे ही घर के आंगन में एक अखाड़ा भी था जहा उस्ताद उस्मान चाचा अपने पठ्ठों को पहलवानी का अभ्यास कराया करते थे। मैं तो बचपन से ही अखाड़े में बड़ा हुआ था अतः मेरा शरीर एक दम चिकना और इकहरा था। जवान होते होते तो मेरा रंग रूप और भी निखर आया था। पर उसमान चाचा हमें लड़कियों से दूर रखते थे। मेरे शरीर पर एक भी बाल नहीं था सिवाय मेरे लण्ड के आसपास नरम सी झांटों के, हां कुछ बाल मेरी बगल में भी थे। शमीम बानो के अब्बू मेरे अब्बू के बहुत पुराने दोस्त थे, उनकी दुकान पर काम करने वाला दो महीनों की छुट्टी पर चला गया था सो उन्होंने मुझे बुला लिया था। मैं वाराणसी पहुंच गया था। बानो मुझे लेने स्टेशन पर आई थी।

बानो के पति भी अपनी दुकान चलाया करते थे। उनके अब्बू ने उन्हें छत के ऊपर वाला भाग दे दिया था। उनके पति हैदराबाद से थे। मुझे भी ऊपर ही गैलरी के दूसरी तरफ़ का कमरा रहने को दे दिया था। मैं शाम को ही दुकान से फ़्री हो पाता था। फ़ारूख भाई जान और शमीम आपा शाम को रोज दारू पीते थे और पीते क्या थे, पी कर बिलकुल टुन्न हो जाते थे। कभी कभी तो वो खूब प्यार करते थे और कभी कभी तो खूब झगड़ते थे। प्यार करें या झगड़ा, उनमें गाली-गलौज का व्यव्हार बहुत होता था। यूँ तो मेरे लिये यह माहौल नया नहीं था, मेरे घर पर भी यही सब कुछ होता था। धीरे धीरे अब्दुल, फ़िरोज, अनवर आदि आपा के सभी दोस्तों से मेरा मिलना हो चुका था। तभी मुझे पता चला कि शमीम आपा तो बहुत ही रंगीन मिजाज की है, उनके दोस्तों का उनसे रिश्ता मुझे मालूम हो चुका था।

मैं आजकल काम से फ़ारिग हो कर शाम को नहा धो कर गैलरी के पास की खिड़की से शमीम आपा और उसके पति की मस्तियों को देखा करता था। आज भी मैंने उनके लिये भुना हुआ गोश्त और सलाद रख दिया था। वो भी नहा धो कर दारू पीने बैठ गये थे। पीते पीते कुछ ही देर में उन पर दारू का नशा चढ़ने लगा था और दोनों ही अश्लीलता पर उतर आये थे। फ़ारूख ने बानो को अपने ही पास सोफ़े पर बैठा लिया था और उसकी चूचियों से खेलने लगे थे।

“बानो, तेरी चूचियाँ अभी तक कड़क कैसे है, भोसड़ी की कैसी तन कर खड़ी हो जाती हैं !”

“तेरे लण्ड के लिये मैंने कुछ कहा है क्या कि इतना मस्त कैसे है, भेनचोद, कैसा इठला इठला कर मेरा दिल जीत लेता है साला !”

कुछ ही देर में दोनों एक दूसरे को नोचने खसोटने लगे। कमरे में आहें गूंजने लगी। उन्हें देख कर मेरा दिल भी पिघलने लगा। मेरा लण्ड फ़ूल कर फ़ड़क उठा। मैं कुंवारा, बेचारा यह सब देख कर मन मसोस कर रह गया। मेरा गोरा लण्ड बार बार कुलांचे मारने लगा। बानो आपा की गाण्ड को देख कर और फिर गाण्ड की चुदाई देख कर मेरा वीर्य उछल कर लण्ड से बाहर आ गया। मेरा पजामा गीला हो गया। हाय रे, बानो की मां की भोसड़ी… भेनचोद को मन करता है कि चोद डालूँ ! रात भर उनकी चुदाई को सोच सोच कर मेरा लण्ड पानी छोड़ता रहता था। आखिर कितनी बार मुठ मारूँ … यह तो उनकी रोज की बात थी।

दुकान का सामान लेने फ़ारूख भाई को दिल्ली जाना था। वो शाम की गाड़ी से दिल्ली चले गये थे।

रोज की तरह मैं रात को भुना हुआ गोश्त बानो के कमरे में रख आया था। दारू की बोतल भी बैठक में सजा दी थी। तभी बानो नहा धो कर सिर्फ़ पेटीकोट और एक बिना ब्रा के ब्लाऊज में बाहर आई। ओह ! मैं उसे देखता ही रह गया। वो तो सच में रूप की देवी थी, उसका भरा बदन, उसके उरोज, उसके मद भरे चूतड़ों के उभार, इतने पास से पहली बार देख रहा था। खिड़की से तो उस बड़े कमरे में दूर से तो उसका मद भरा हुस्न इतना कुछ नहीं नजर आता था। मुझे यूँ घूरता देख कर बानो ने सब कुछ भांप लिया। वो जानबूझ कर के मेरे बिल्कुल पास आ गई। उसके शरीर की खुशबू मेरे नथनों में समा गई। हाय! उसके शराबी गोल गोल स्तनों के उभार मेरे दिल को घायल कर रहे थे। मेरे शरीर में एक विचित्र सी सनसनी फ़ैलने लगी।

“यहाँ गिलास रख दे … और भेन चोद यूँ आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर क्या देख रहा है?”

“ह… हाँ … वो कुछ नहीं… मैं चलता हूँ !”

“अरे चलता हूँ …तेरी तो … यहीं बैठ भोसड़ी के …मेरे साथ दारू कौन पियेगा … तेरा बाप ?”

“पर मैं तो नहीं पीता हूँ आपा … आप लीजिये…”

“अच्छा मत पीना, बैठ तो सही, मेरे लिये पेग बनाना … और ये बोटी तो खायेगा ना !”

मैं उसके कहने के अन्दाज से चौंक गया। उसका इशारा तो उरोज की तरफ़ था, पर बात वो गोश्त की कर रही थी। मैं झेंप गया और एक टुकड़ा उठा कर खा लिया। उसका दारू का दौर शुरू हो गया। साथ में उसका गाली-गलौज और अश्लील हरकतें भी।

“ऐ फ़रदीन, तूने कभी कोई लौंडिया चोदी है…?”

“कैसी बातें करती हो आपा… ?”

“अरे बता ना … तेरी उम्र में तो मेरे कितने ही दोस्त थे… साले सब हारामी थे … मैंने तो खूब चुदाया।”

“क्या बताऊँ, उस्ताद ने कहा है कि किसी लड़की की तरफ़ देखा भी तो वो हमारी गाण्ड मार देगा।”

“अरे वो तो लड़की के लिये बोला था ना, मैं लड़की थोड़े ही हूँ, मैं तो औरत हूँ 27 साल की !”

“ओह हाँ, आपा … फिर आप तो मेरी आपा हैं ना, कोई लड़की तो हो नहीं … पर आपा…?”

“ओये होये, मेरे भाई जान, ले पास आ जा, अब तो ठीक है ना, मेरी बोटी चूसेगा?”

उसने अपना, एक चूचा पकड़ कर मुझे देख कर हिलाया और फिर दबा दिया। मैं तो अन्दर तक हिल गया। ये क्या कह रही है बानो ! मेरा मन तो पहले ही उस पर लट्टू था। मैं शरमा गया। वो मेरे पास सरक आई और उसने अपने ब्लाऊज का बटन खोल कर उसे ढीला कर लिया। उसने अपना एक चूचा बाहर निकाल लिया।

“ले तो, समझ ले अम्मी का बोबा चूस रहा है…!”

“आपा, यह क्या कह रही हैं आप…?”

उसने कुछ नशे की झोंक में, कुछ वासना के नशे में मेरे गले में हाथ डाल कर मेरा मुख अपने बोबे पर दबा दिया। हाय रे मेरी अम्मी जान ! यह क्या… मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरे होंठ अनायास खुल गये और उसकी चूची पर जम गये।

“अल्लाह रे, मजा आ गया … तू तो भोसड़ी का बड़ा नमकीन है रे !”

मैं बिना पिये ही मदहोशी में था। मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, पजामे में से उभर कर मेरी शोभा बढ़ा रहा था। बानो आपा, लण्ड के आकार को देख कर ही लालायित हो उठी थी। उनके हाथ लण्ड की तरफ़ बढ़ चले थे। मेरे कड़क लण्ड को पहले तो उसने अपनी अंगुली से हिला कर देखा, वो तो टनटनाता हुआ झूल कर फिर से सीधा खड़ा हो गया। मेरे तन बदन में जैसे बिजली तड़क गई।

“आपा, मुझे क्या हो रहा है…” मेरे तन में सनसनी सी होने लगी।

“मादरचोद, तेरा लण्ड मजबूत है … कितना कड़क है…!” बानो पर नशा असर कर रहा था। मैं धीरे धीरे अपना होश खोता जा रहा था। बानो भी पेग पर पेग पिये जा रही थी। इसी बीच मुझे भी उसने एक पेग पिला दिया था। गोश्त हम दोनों ने जल्दी ही साफ़ कर दिया था। मैंने बानो को धक्का दे कर सोफ़े पर लिटाने की कोशिश की और उसके होंठों को चूसने लगा।

“अरे उठ गाण्डू, साला चढ़ा ही जा रहा है… हट जा !”

मैं जैसे होश में आ गया।

“जा वो दूसरी प्लेट गोश्त की ले आ … सारा तो खुद ही खा गया। ऐसा कर पूरा ही ले आ !”

मेरे पजामे का बटन खुल गया था और उसमें से लण्ड बाहर निकल आया था। मेरा गोरा और मोटा मस्त लण्ड देख कर बानो तो चकित रह गई। मैं गोश्त की पूरी डेगची ही उठा लाया।

“ऐ, फ़रदीन अपना पजामा उतार तो … इसकी तो मुठ मारूँ, भेन के लौड़े की !”

मेरा मन तो पहले ही विचलित हो चुका था। उसकी फ़रमाईश पर जैसे मेरा मन बाग बाग हो गया। मैंने तो पजामे के साथ साथ अपनी बनियान भी उतार दी।

“साला, हरामी… तू इतना मस्त है… पहले क्यों नहीं मिला रे… आ पास तो आ… जरा इसे देखूँ तो !”

उसने मेरा लण्ड अपनी आंखों के पास लाकर देखा। उसे सूंघा … और सर ऊंचा करके मन में उसकी सुगन्ध ली और अहसास लिया। मेरा खतना किया हुआ लौड़ा पूरा खुला हुआ था। बीच में पेशाब की नलिका को उसने हाथ से ठपकारा … मेरे लण्ड में एक मीठी सी जलन हुई। मेरा डन्डा पकड़ कर उसने जोर जोर से हिलाया और अपने मुख के ऊपर मार लिया। बानो की हालत एक मदहोश, वासना भरी, नशे में धुत्त औरत जैसी हो रही थी। मैंने भी धीरे से हाथ बढ़ा कर उसके ब्लाऊज को सामने से पूरा खोल दिया। मैंने भी उसके चुचूक को मसल कर अपना जवाब दिया। शायद उसे होश ही नहीं था। मेरा लण्ड उसके मुख में बड़ी मुश्किल से समा पाया था। उसने मेरे पोन्द को दबाया और लण्ड को अपने मुख में अन्दर बाहर करने लगी। मेरे सुपारे को जीभ से रगड़ने लगी। उसका एक हाथ अब मेरे लण्ड के डण्डे के पिछले सिरे पर आ गया और … और … वो उसे मसलने लगी, मुठ मारने लगी।

“आपा, बस करो … मैं मर जाऊंगा … निकालो बाहर !”

पर उसने एक ना सुनी … उसकी तेजी बढ़ती गई। मैं सिहर उठा, मेरी सहन शक्ति जवाब देने लगी।

“तेरी माँ को चोदू, गण्डमरी, छिनाल साली छोड़ मुझे, अरे … अरे… आह … मेरी तो चुद गई… “

उसे भला कहाँ होश था। वो तो जोंक की तरह मुझसे चिपट गई थी। उसने मेरा लण्ड जैसे निचोड़ डाला। मैं तड़प उठा … तभी मेरे लण्ड से ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा।

“आह … साली हरामी … मैं तो मर गया … रण्डी, मेरी तो चोद दी ना साली … अब तुझे क्या खाक चोदूँगा ?”

उसके मुख से थोड़ा सा वीर्य बाहर उबल पड़ा। थोड़ा तो वो पी गई और थोड़ा उसने बाहर निकाल दिया। मेरा लण्ड मुरझाने लगा। मैं निराश हो गया कि … साली चुदने से बच गई। मैं नंगा ही बिस्तर पर जाकर बैठ गया। बानो ने वहीं प्लेट पर अपना हाथ धोया और अपना पेटीकोट उतार कर नंगी हो गई।

वो धीरे धीरे मेरे पास आई और मुस्कुरा कर बोली,”मजा तो धीरे धीरे ही आता है ना…!”

फिर उसने मुझे एक ही झटके में बिस्तर गिरा दिया और मुझे अपने नीचे दबा लिया।

“चल मेरे राजा, अभी तो मैंने नल का पानी पिया है अब तुझे ट्यूब वेल का पानी पिलाती हूँ !” उसकी हंसी कमरे में गूंज उठी। उसकी चूत मेरे मुख से चिपक गई।

“ले … ट्यूब वेल को खोल और पानी पी …”

मुझे लगा कि खेल तो अब आरम्भ होने वाला है।

शेष दूसरे भाग में ! Antarvasna Stories

मैं सुनील, 26 साल का राजस्थान से हूँ। यह बात उन दिनों की है जब मैं नया-नया जवान हुआ था।

मैं एक लड़की को पसंद करने लगा, कब प्यार हुआ पता ही न चला।
इतनी ज्यादा जानकारी भी नहीं थी।

स्कूल में मुझे सब अक्षय कुमार कहते थे।
स्कूल में बहुत लड़कियों से दोस्ती थी, लेकिन उनके लाइन देने के बाद भी मुझे उनसे प्यार नहीं था। मुझे प्यार अम्रता से हुआ जो कि मेरी ही कालोनी में रहने आई थी। वो दिल्ली से आई थी।

मैं वहाँ पर क्रिकेट खेलने जाता था। उसका कद 5.5 फुट का था, गोरा-चिट्टा रंग, कालोनी के सब लड़के उसे लाइन मारते थे।

नए साल पर मैंने हिम्मत करके उसे लव-लेटर दिया तो उसने जवाब दिया।

‘आई एम सीनियर.. यू आर जूनियर…’

वो मुझसे एक साल बड़ी थी, लेकिन मुझे उससे प्यार हो गया। मैं उसे किसी भी कीमत पर प्यार करना चाहता था।

मैंने उसकी सहेली जिसका नाम अंजलि था, उससे कहा- अम्रता मुझसे रिश्ता बनाए, चाहे जो भी रिश्ता बना ले, पर मुझसे बात करे।
मैं वास्तव में उसे बहुत प्यार करता हूँ।

मेरी हालत पागलों से भी बदतर थी। मुझे न भूख लगती थी, न प्यास.. सिर्फ़ वही दिखती थी।

आखिर वो दिन आ ही गया जब उसने मुझे अपने घर बुलाया बात करने के लिए। एक बात बताऊँ वो मेरी सीनियर थी, मेरी गांड फ़ट रही थी कि कहीं मेरे घर में बता न दे।

मैं एक टॉपर स्टूडेन्ट था इसलिए मेरे सभी इज़्ज़त करते थे। मैं उसके दरवाजे पर पहुँचा तो मुझे 103 डिग्री बुखार था।

उसके छोटे भाई ने मुझे कागज़ का एक टुकड़ा दिया और बोला- दीदी ने आपको देने को कहा है।

उस पर लिखा था- आई लव यू.. माई अक्षय कुमार और इसके आगे हम क्या कहें.. जानम समझा करो। शाम 6 बजे घर पर आना। कोई नहीं होगा। मैं आपको चाय पिलाऊँगी। प्लीज़ आ जाना- तुम्हारी अम्रता।

अब तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। शाम 6 बजे मैं उसके घर गया।

उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था मेरी अम्रता बहुत खूबसूरत थी, गोरा रंग 5.5 फुट का कद.. अच्छी फिगर.. गोल चूचियाँ… गोरी जांघें.. वो सब कुछ उसमें था, जो किसी को भी पागल कर दे, लंड को खड़ा कर दे.. हाथ से लौड़ा मसलने को मजबूर कर दे।

वो 18 साल की कमसिन चुदाई वाली उमर।

यहाँ तक कि अगर कह दें तो मैं किसी को भी गोली मार देता।

उसने मुझसे नमस्ते किया तो मैं बोला- सॉरी.. आप मेरी सीनियर हैं।

वो बोली- पहले सीनियर थी.. पर आप अब मेरे सब कुछ हो।

मुझे वो महसूस हुआ जो मैं शब्दों में नहीं कह सकता हूँ।

अम्रता मेरा पहला प्यार थी उससे मुझे बेइंतेहा मुहब्बत थी।

प्रिय पाठकों, मैं उसे आज भी प्यार करता हूँ।

अब आगे सुनिए उसने मेरा हाथ पकड़ा और कहा- डरो नहीं.. रियली आई लव यू… मैं भी आपको चाहती थी, पर डरती थी कि कहीं आप नाराज न हो जायें.. इसलिए कभी कहा नहीं, डियर सुनील जब तुम्हारे पास लड़कियाँ होती हैं तो मैं बहुत जलन महसूस करती हूँ, मुझे दूर मत करना।

इतना कहकर वो मेरे सीने से लिपट कर रोने लगी।

मैं भी रो रहा था। पहली बार कोई लड़की मेरे सीने से लिपटी थी, उसकी चूचियां मेरे सीने से चिपक रही थीं।

मेरा लंड खड़ा होने लगा, फ़िर उसने अपने गुलाबी होंठों से मेरे होंठों को चिपका दिया और हम लोग चुम्बन करने लगे।

मैं उसकी पीठ पर हाथ फ़ेर रहा था वो रो रही थी।

चुम्बन करते समय वो अपनी जीभ से मेरी को जीभ चाटने लगी ये मेरे लिए पहल अनुभव था। मेरा लंड खड़ा हो गया और उसकी चूत के पास छूने लगा।

मुझे लगा इससे वो बुरा मान जाएगी मगर वो धीरे से बोली- सुनील क्या पहले ही दिन यह सब ठीक रहेगा?

मैं बोला- क्यों.. क्या मतलब?

वो बोली- अच्छा चलो कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी ही हूँ.. जो करना चाहो.. करो। अब मेरे समझ में न आए कि क्या करूँ? कैसे करते हैं?

वो मेरे लौड़े पर हाथ रखती हुई बोली- सामान तो दिखाओ।

मैंने अपनी जीन्स की ज़िप खोल दी। उसके मुलायम गोरे हाथों ने मेरा 7 इन्च लम्बा मोटा लंड बाहर निकाला तो आँख मार कर बोली- यार ये तो बहुत बड़ा है।

मैं अब पूरे जोश में था।
मैं उसको बिस्तर पर ले गया और जींस उतार दी सिर्फ़ अंडरवियर में था।

मैं उसके होंठों को कसकर चूमने लगा। उसका कमीज उतारा, फ़िर ब्रा उतारी, मेरे हाथ में उसके गोरे-गोरे, गोल-गोल दूध थे उन पर भूरे रंग की भुंडी.. बहुत ही मस्त लग रहे थे।

वो ब्रा नहीं पहने हुए थी, सलवार का नाड़ा पकड़ कर खोला। तो उसने शरमा कर आँखें बंद कर लीं।

मैं बोला- डियर अब काहे की शरम.. मैं आपका पति हूँ।

वो बोली- तो मैं कुछ कह रही हूँ क्या…? अब आप ही मेरे सब कुछ हो… मेरा सब कुछ आपका ही है.. जो चाहो करो।

उसे विश्वास था कि हम लोगों की शादी हो जाएगी.. क्योंकि हम एक ही जाति के थे। उसके मेरे बीच प्यार बहुत था, हम दोनों के ही पिता अधिकारी हैं, इसलिए कोई दिक्कत का सवाल ही नहीं था।

मैं भी उससे शादी करना ही चाहता था। उसकी सलवार खोल कर अलग किया उसकी गोरी-गोरी जांघें मेरा स्पर्श पाकर और भी गरम हो गईं। उसकी पैंटी में थोड़ा छेद था, देखा तो मैंने उंगली डाली।

तो बोली- अरे यार दोनों पैंटी गीली थीं इसलिए यह पुरानी पहन ली थी।

मैं मुस्कुराने लगा, तो हँस कर बोली- यार तुम तो मेरी गरीबी का मज़ाक बना रहे हो।

मैं बोला- डियर आप बहुत ही मालदार हैं। बोली- माल तो नीचे है मेरे सजना.. इस चड्डी को उतार कर फ़ेंक दो और अपने माल को ले लो।

इतना कहकर वो शरमा गई।

मैंने उसकी पैंटी को उतारा तो उसकी बुर बिल्कुल गोरी.. और उस पर भूरे छोटे-छोटे बाल थे।

अब तो मैं पागल हो गया, बुर को छुआ तो लगा जैसे गरम-गरम भट्टी हो।
मैं बुर को सहलाने लगा।

‘आह ओह्ह.. क्या कर रहे हो.. प्लीज़्ज़..!’

मैंने उसकी बुर की दरार में ऊँगली डाली तो बोली- क्या ऊँगली ही डालेंगे आप? इतना कह कर चुप हो गई।

मैंने कहा- रुको डार्लिंग.. अभी सब डालूँगा जी भर कर तुझे चोदूँगा.. पहले तेरी चूत तो चाट लूँ।

मैं जीभ से उसकी चूत के दोनों हिस्सों को चाट कर चोदने लगा, इससे मैं तो उत्तेजित हो ही रहा था, वो भी ‘आह.. ओह्ह.. मार डालोगे… चोद दो.. प्लीज़्ज़..’ सिसकार रही थी।

फ़िर मैंने उसके मुँह में अपना लंड डाला वो मेरा लौड़ा चाटने लगी।
बहुत मज़ा आ रहा था।
इस 69 की अवस्था में हम दोनों पागल हो रहे थे।

अब बारी चुदने-चुदाने की थी।

वो बोली- सुनील.. लंड धीरे से डालना प्लीज़.. वरना मेरी खूबसूरत बुर फ़ट जाएगी..समझ रहे हो न…

मैंने अब उसकी बुर पर सुपारा रखा तो लंड बुर में नहीं गया..

फ़िसल गया तो हँस कर बोली- बुद्धूराम ऐसे नहीं होगा।
उसने अपने मुँह से थूक निकाल कर मेरे लंड पर मल दिया और लंड को बुर के मुँह पर खींचा।

मैंने हल्के से धक्का दिया तो बुर में दो इंच अन्दर घुस गया। वो आँखें फैला कर बोली- दर्द हो रहा है।

अब मेरे लंड को चूत की गरमी मिल गई थी।

मैं होंठों को चूसे जा रहा था… धीरे-धीरे 5-6 बार अन्दर-बाहर किया।

अब उसे भी मजा आ रहा था, वो नीचे से कमर भी हिला रही थी।
वो बोली- आप अभी इतना ही डालो… अब दर्द में भी मजा आ रहा है।

लेकिन मैं तो पूरा लंड उसकी बुर में डालना चाह रहा था।

मैं बोला- देखो अम्रता अब तुम्हें पूरे लंड का मजा देता हूँ।

मैंने दूसरा झटका लगाया तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बुर में घुस गया।
वो इतनी तेज़ चिल्लाई कि मैं डर गया कि कोई पड़ोस से न आ जाए।
अब जोर से मैंने उसके शरीर पर दबाया कि वो उठ न जाए। वो दर्द से तड़फ कर बोली- हटो.. मैं मर गई प्लीज़्ज़.. खून आ गया है.. मुझे छोड़ दो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है।

मैं जानता था कि अगर इसे छोड़ा तो फ़िर इस डर की वजह से कभी नहीं चुदवाएगी तो मैंने धीरे-धीरे 7-8 शॉट लगाए, तो उसका विरोध कुछ कम हुआ, बोली- मार डालोगे क्या?

अब वो हल्की मुस्कुराहट के साथ कमर भी हिलाने लगी।

Sex Stories

ये कहानी आज से करीब ४ साल पुरानी Sex Stories है। ये स्टोरी मेरे अंकल की है, जो कि मेरे घर के पास ही रहते थे। मेरी उमर २३ और अंकल की उमर ३३ है। वो मेरे रियल अंकल नहीं थे सिर्फ़ मेरी फ़ैमिली को जानते थे इसलिये मैं उन्हे अंकल कहता था। हम एक दोस्त की तरह थे। हम एक साथ बी ऍफ़ देखते थे। उनका घर और हमारा घर एक ही दीवार से बना हुआ था। मेरा रूम, अंकल के रूम के ठीक बगल वाला था। उनके और मेरे रूम के बीच एक खिड़की थी। अंकल एक गर्ल्स स्कूल टीचर थे। उनके पास कई गर्ल्स टूशन के लिये आती थी। उनके पास ७-९ लड़कियां आती थी, उनमे से एक लड़की, नेहा थी। जो कि बहुत दूर से टूशन के लिये आती थी। एक दिन तेज बारिश हो रही थी सब लड़कियां अपने-अपने घर चली गईं। नेहा भी उनके साथ घर जाने के लिये निकली, पर बारिश बहुत हो रही थी इस लिये वो बापस घर में आ गई उसके कपड़े पूरी तरह भीग गये थे। उसे देख कर अंकल ने कहा कि बारिश रुकने के बाद चली जाना। उसने कहा ठीक है।

फिर अंकल ने उससे कहा कि तुम कपड़े चेंज कर लो। पर अंकल के पास उसके साइज़ के लड़कियों के कपड़े नहीं थे। तो अंकल ने उसे अपनी लुंगी दी और कहा कि “लुंगी को लपेट लो और मैं चाय बना लाता हूं। और अंकल किचन में चले गये। नेहा कमरे में टीवी देख रही थी। उसने लुंगी के नीचे कुछ नही पहना था। वो एकदम नंगी थी। उसके छोटे-छोटे ‘दूध’ लुंगी के ऊपेर से साफ़ दिख रहे थे। टीवी पर ‘ऐड्स ‘ के बारे में जानकारी आ रही थी। नेहा ने ये सब पहले नहीं देखा था वो ये सब ध्यान से देखने लगी थी और उसे जोश आने लगा था वो अपने दूधों को हाथ से सहलाने लगी। इतने में अंकल चाय लेके आ गये।

उन्होने नेहा को देखा तो उनका ९” लम्बा लंड तनकर लोहे की रोड की तरह कड़ा हो गया। और लुंगी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा तो अंकल ने लुंगी के अंदर से ही अपनी चड्ढी उतार दी तो उनका लंड से उनकी लुंगी टेंट की तरह तन गई वो चाय लेके नेहा की तरफ़ गये तो नेहा ने पूछा सर आपकी लुंगी को क्या हो गया है। तो अंकल ने कहा कुछ नहीं। किसी को कम कपड़े में देखने पर ऐसा हो जाता है। ये कहते हुए अंकल ने उसकी लुंगी खींच दी और वो पूरी नंगी हो गई उसने कहा ये क्या कर रहे हो सर। कुछ नहीं वही जो तुम अभी कर रही थी। और अगर किसी से कहा तो एकज़ाम में फ़ैल कर दूंगा। तो वो डर गई और चुप हो गई।

अंकल उसके दूध दबाने लगे अब उसे थोड़ा-२ कुछ हो रहा था। वो सिसकारियां लेने लगी थी और अंकल का लंड अपने हाथ से पकड़ के सहला रही थी। अंकल उसकी चूत पे हाथ घुमा रहे थे। फिर उसकी चूत चाटने लगे उसके मुंह से आह्हह्हह्हह्हह्हह्ह इस्सस्सस्सस्सस्सस म्माज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ाआअ आआयययस जैसी अजीब सी आवाजें आ रही थी। अब अंकल ने उससे कहा कि वो उनका लंड अपने मुंह में लेके चूसे तो वो मना करने लगी। तब अंकल ने उसके बाल पकड़े और उसे नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके मुंह मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को धीरे से झटका देने लगे। और अपना ९” लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो अंकल के लंड को चाटने लगी। अब दोनो ६९ की पोजिशन में हो गये। अब नेहा को मजा आने लगा था और वो लंड को जोर जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। अंकल उसकी चूत में अपनी उंगली डाल कर हिला रहे थे। १५ मिनट बाद अंकल ने अपना पानी उसके मुंह में निकाल दिया। तो नेहा ने उल्टी कर दी। और कहा कि आपने अपना लंड, मेरी चूत में तो डाला ही नहीं। अब मुझे मज़ा कैसे आयेगा। क्योंकि अब अंकल का लंड खड़ा नहीं हो रहा था। तो अंकल ने कहा तू परेशान मत हो मैं अभी आया। कह कर वो कपड़े पहन के मेरे पास आये। और मुझे सब कुछ बता दिया।

मैं चलने के लिये तैयार हो गया। मैं उनके घर पहुंचा। तो मैने नेहा को नंगा देखा तो मेरा लंड तुरन्त लोहे की तरह हो गया मैने अपने कपड़े उतार दिये और अपना ७” का लंड उसके मुंह में देने लगा तो वो कहने लगी कि तुम भी सर की तरह अपना पानी मेरे मुंह में तो नहीं निकालोगे? मैने कहा नहीं निकालूँगा तो वो मेरा लंड चाटने लगी मेरे लंड की टोपी एकदम लाल हो गई मैने अपना लंड उसके मुंह से निकाला और उसे बेड पर पटक दिया। उसकी दोनो टांगों को फ़ैला कर उसके पैरों के बीच में आ गया और अपना लंड उसकी चूत पर रख कर धक्का मारने लगा पर लंड चूत में अंदर नहीं जा रहा था।

मैने अंकल से कहा थोड़ा तेल लेकर आओ। वो तेल लेके आये तो मैने अपना पूरा लंड तेल से तर कर लिया और उसकी चूत को भी नहला दिया। मैं अपना लंड चूत पर रख के रगड़ने लगा तभी अंकल ने पीछे से जोरदार धक्का दिया तो मेरा पूरा ७” का लंड एक ही बार में नेहा की कुंवारी चूत में घुस गया। नेहा बहुत जोर से चिल्लाई आऐइएएएईस्सस्स तो मैने लंड बाहर निकाल कर एक जोरदार झटका मारा और दोबारा पूरा लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। नेहा भी नीचे से उछल-२ कर चुदवा रही थी। उसकी चूत खून से तर हो गई थी। वो उस दिन ८ बार झड़ी थी Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆