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भाभी अपने एक Antarvasna एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थी… चुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। लण्ड मेरा फ़ूलता ही जा रहा था। लग रहा कि बस भाभी की चिकनी चूत को मार ही दूँ। भाभी के हाथ जैसे कुछ ढूंढ रहे थे… और … और यह क्या … ढूंढते हुए उनका हाथ मेरे तने हुए लण्ड पर आ गया। उन्होंने उसे छू लिया … मेरा दिल अन्दर तक हिल गया। दो अंगुलियों से मेरे लण्ड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। मुझे कुछ बचैनी सी हुई… पर मैं हिल ना सका… भाभी ने मेरे होंठों में अपनी जीभ डाल दी और मुझे कस कर चिपका लिया। मुझे एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई। मेरे हाथ अपने आप भाभी की कमर पर कस गये। मेरा बड़ा सा लण्ड अचानक भाभी ने जोर से दबा दिया। मेरे मन में एक मीठी सी वासनायुक्त चिंगारी भड़क सी उठी।
“भाभी, आह यह कैसा आनन्द आ रहा है … प्लीज और जोर से दबाओऽऽ !” मैं सिसक उठा।
“आह मेरे भैया … क्या मस्त है … ” भाभी भी अपनी सीमा लांघती जा रही थी।
“भैया, अपना पजामा उतार दो !”
मेरे दिल यह सुनते ही बाग बाग हो उठा… आखिर भाभी का मन डोल ही गया। अब भाभी को चोदने का मजा आयेगा।
“नंगा होना पड़ेगा… मुझे तो शरम आयेगी !”
“चल उतार ना … “
“भाभी… मुझसे भी नहीं रहा जाता है … मुझे भी कुछ करने दो !”
भाभी की हंसी छूट गई …
“किसने मना किया है … कोई ओर होता तो जाने अब तक क्या कर रहा होता !”
“मैं बताऊँ कि क्या कर रहा होता?”
“हूँ… अच्छा बताओ तो…”
“तुम्हें चोद रहा होता… तुम्हारी चूंचियों को मसल रहा होता !”
“हाय ये क्या कह दिया कमल … ” उन्होंने मुझे चूम लिया और अपना पेटीकोट ऊपर उठा लिया।
“ले मैं अपना पेटीकोट ऊपर उठा लेती हूँ, तू अपना पजामा नीचे सरका ले !”
“नहीं भाभी, अब तो अपने पूरे कपड़े ही उतार दो… मैं भी उतार देता हूँ”
मैंने बिस्तर से उतर कर अपने सारे कपड़े उतार दिये और बत्ती जला दी। भाभी भी पूरी नंगी हो चुकी थी। पर लाईट जलते ही वो अपने बदन को छिपाने लगी। मैं भाभी के बिलकुल सामने लण्ड तान कर खड़ा हो गया। एक बारगी तो भाभी ने तिरछी नजरों से मुझे देखा, फिर लण्ड को देखा और मुस्करा उठी। वो जैसे ही मुड़ी मैंने उन्हें पीछे से दबोच लिया। मेरा लण्ड उनके चूतड़ों की दरार में समाने लगा।
“क्या पिछाड़ी मारेगा …”
“भाभी, आपकी गाण्ड कितनी आकर्षक है … एक बार गाण्ड चोद दूंगा तो मुझे चैन आ जायेगा… हाय कितनी मस्त और चिकनी है !”
“तो तेल लगा दे पहले …”
मैंने तेल ले कर उसकी गाण्ड में लगा दिया और अपनी अंगुली भी गाण्ड में घुसा दी।
“ऐ … अंगुली नहीं, लण्ड घुसा…” फिर हंस दी।
भाभी पलंग पर हाथ रख कर घोड़ी सी बन गई। मैंने भाभी के चूतड़ को चीर कर तेल से भरे छेद पर अपना लण्ड रख दिया।
“अब धीरे से अन्दर धकेल दे … देख धीरे से…!”
मुझे गाण्ड मारने का कोई अनुभव नहीं था, पर भाभी के कहे अनुसार मैंने धीरे से दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। मेरा सुपाड़ा फ़क से छेद में उतर गया।
“अब देख जोर से धक्का मारना … इतना जोर से कि मेरी गाण्ड फ़ट जाये !”
मैंने पोजिशन सेट की और जोर से लण्ड को अन्दर दबा कर पेल दिया। मेरे लण्ड में एक तेज जलन सी हुई। मैंने लण्ड को तुरन्त बाहर खींच लिया। मेरे लण्ड की सुपाड़े से चिपकी झिल्ली फ़ट गई थी और खून की एक लकीर सी नजर आई।
“क्या हुआ…? निकाला क्यूँ …? हाय कितना मजा आया था… !” भाभी तड़प कर बोली।
“यह तो देखो ना भाभी ! खून निकल आया है…!”
भाभी ने मुझे चूम लिया… और मुझसे लिपट गई।
“आह कमल, प्योर माल हो …”
“क्या मतलब … प्योर माल ?”
“अरे कुछ नहीं… इसे तो ठीक होने में समय लगेगा… तो ऐसा करो कि मन की आग तो बुझा लें … कुछ करें…”
भाभी ने मेरे हाथ अपने सीने पर रख दिये… और इशारा किया कि उसे दबाये। मुझे इसका पूरा आईडिया था। भाभी की नंगी छातियों को मैं सहलाने लगा। भाभी ने अपनी आंखें बन्द कर ली। उनके उभारों को मैं दबा दबा कर सहलाने लगा था।
वासना से उनकी छाती कड़ी हो चुकी थी और चुचूक भी कड़क हो कर तन से गये थे। मैंने हौले हौले से चुचूकों और उरोजों को दबाना और मसलना आरम्भ कर दिया। भाभी के मुख से सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मेरी नजरें भाभी की रस भरी चूत पर पड़ी और मैं जैसे किसी अनजानी शक्ति से उसकी ओर झुक गया। मैंने अब उसकी चूचियाँ छोड़ दी थी और उनकी जांघों को दबा कर एक तरफ़ करने लगा। भाभी ने स्वतः ही अपनी टांगें चौड़ी कर ली। चूत की एक मदहोश करने वाली महक आई और मेरा चेहरा उस पर झुकता चला गया। मैंने उसकी पतली सी दरार में जीभ घुमाई, भाभी तड़प सी गई। मेरा लण्ड बेहद कड़क हो उठा था पर हल्का दर्द भी था। मैंने भाभी की गाण्ड के छेद में एक उंगली घुसा दी और चूत के दाने और लम्बी से फ़ांक को चाटने लगा। भाभी तीव्र वासना की पीड़ा में जोर से कांपने लगी थी। उनकी जांघें जैसे कंपकंपी से लहराने लगी थी। उनके मुख प्यारी सी सी… सी सी करती हुई सिसकारियाँ फ़ूट रही थी। तभी उन्होंने मेरा चेहरा अपनी टांगों से दबा लिया और झड़ने लगी। उनका रज छूट गया था। अब उन्होने अपनी टांगें पर बिस्तर पर पसार दी थी और गहरी गहरी सांसें ले रही थी।
इधर मेरा लण्ड फ़ूल कर कुछ कर गुजरने को तड़प रहा था। पर दर्द अभी था।
भाभी ने कहा,” कमल, तुम अब बिस्तर पर अपनी आंखें बन्द कर के लेट जाओ… बस आनन्द लो !”
मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया। लण्ड कड़क हो कर लग रहा था कि फ़ट जायेगा। तभी मुझे अपने लण्ड पर कोमल सा स्पर्श महसूस हुआ। भाभी ने रक्त रंजित लण्ड अपने मुख में लिया था और हल्के से बहुत मनोहारी तरीके से चूस रही थी। मैं दर्द वगैरह सब भूल गया। भाभी ने अपने अंगूठे और एक अंगुली से मेरे लण्ड के डण्डे के पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। मेरे शरीर में वासना की आग जल उठी। भाभी की पकड़ बस डण्डे के निचले भाग पर ही थी। भाभी के होंठ मेरे जरा से निकले खून से लाल हो गये थे। उनकी आंखें बन्द थी और और उनकी अंगुलियाँ और मुख दोनों ही मेरे लण्ड को हिलाते और चूसते … मुझे आनन्द की दुनिया में घुमा रहे थे। मेरा दिल अब भाभी को चोदने को करने लगा था, पर भाभी समझदार थी, सो मेरे लण्ड को अब वो जरा दबा कर मल रही थी। शरीर में आग का शोला जैसे जल रहा था। मेरे सोचने की शक्ति समाप्त हो गई थी। बस भाभी और लण्ड ही नजर आ रहा था। अचानक जैसे शोला भभका और बुझ गया। मैंने तड़प कर अपना गाढ़ा वीर्य जोर से बाहर निकाल दिया। भाभी ने अपना अनुभव दिखाते हुये पूरे वीर्य को सफ़ाई के साथ निगल लिया। मैं अपना वीर्य पिचकारियों के रूप में निकालता रहा।
“अब कमल जी, आराम करो, बहुत हो गया…”
“पर भाभी, मेरा लण्ड बस एक बार अपनी चूत में घुसवा लो, बहुत दिनों से मैं तुम्हें चोदने के लिये तड़प रहा हूँ…”
“श्…श्… धीरे बोलो … अभी तीन चार दिनों तक इन्तज़ार करो… वर्ना ये चोट खराब ना हो जाये, दिन में कई बार इसे साफ़ करना…!”
वो मुझे हिदायतें देकर चली गई।
अब रोज रात को हम दोनों का यही खेल चलने लगा। तीन चार दिन बाद मेरा लण्ड ठीक हो गया और मैंने आज तो सोच ही लिया था कि भाभी की गाण्ड और चूत दोनों बजाना है… पर मेरा सोचना जैसा उसका सोचना भी था। उसने भी यही सोचा था कि आज की रात सुहागरात की तरह मनाना है।
रात होते ही भाभी अपना मेकअप करके आई थी। बेहद कंटीली लग रही थी। कमरे में आते ही उन्होंने अपना पेटीकोट उतार फ़ेंका। उनके देखा देखी मैंने भी अपना पजामा उतार दिया और मेरे तने हुये लण्ड को उनकी ओर उभार दिया। हम दोनों ही वासना में चूर एक दूसरे से लिपट गये। भाभी के रंगे हुये लिपस्टिक से लाल होंठ मेरे अधरों से चिपक गये। उनके काजल से काले नयन नशे में गुलाबी हो उठे थे। भाभी के बाल को मैंने कस के पकड़ लिया और अपने जवान लण्ड की ठोकरें चूत पर मारने लगा।
“बहुत करारा है रे आज तो तेरा लण्ड … लगता है आज तो फ़ाड़ ही डालेगा मेरी…!”
“भाभी, खोल दे पूरी आज, अन्दर घुसा ले मेरा ये किंग लिंग… मेरी जान निकाल दे … आह्ह्ह … ले ले मेरा लण्ड !”
” बहुत जोर मार रहा है, कितना करारा है … तो घुसा दे मेरी पिच्छू में … देख कितनी सारी क्रीम गाण्ड में घुसा कर आई हूँ … यह देख !”
भाभी ने अपनी गोरी गोरी गाण्ड मेरी तरफ़ उभार दी … मुझसे अब सहन नहीं हो रहा था। मैंने अपना कड़कता हुआ लण्ड उनकी क्रीम भरी गाण्ड के छेद के ऊपर जमा दिया। मेरा सुपारा जोर लगाते ही आप से खुल पड़ा और छेद में समाता चला गया। मुझे तेज मिठास भरी गुदगुदी हुई। भाभी झुकी हुई थी पर उनके पास कोई हाथ टिकाने की कोई वस्तु नहीं थी। मैंने लण्ड को गाण्ड में फ़ंसाये हुये भाभी को कहा,”पलंग तक चल कर बताओ इस फ़ंसे हुये लण्ड के साथ तो मजा आ जाये !”
“कोशिश करूँ क्या …”
भाभी धीरे से खड़ी हो गई पर गाण्ड को लण्ड की तरफ़ उभार रखा था। मेरा लम्बा लण्ड आराम से उसमें फ़ंसा हुआ था। भाभी के चलते ही मेरे लण्ड में गाण्ड का घर्षण होने लगा, मेरा लण्ड दोनों गोलों के बीच दब गया। वो और मैं कदम से कदम मिला कर आगे बढ़े … और अंततः पलंग तक पहुँच ही गये। इस बीच गाण्ड में लण्ड फ़ंसे होने से मुझे लगा कि मेरा तो माल निकला… पर नहीं निकला… पलंग तक पहुंच कर भाभी हंसते हुये बोली,”मेरी गाण्ड में लण्ड फ़ंसा कर जाने क्या क्या करोगे … फिर चूत में घुसा कर मुझे ना चलाना !”
“नहीं भाभी मुझे लगा कि अब तुम झुकोगी कैसे, सो कहा था कि पलंग तक चलो।”
“चल शरीर कहीं के …” भाभी ने हंसते हुये कहा और अपनी टांगें फ़ैलाने लगी और आराम जैसी पोजीशन में आ गई। आधा बाहर निकला हुआ लण्ड मैंने धीरे से दबा कर पूरा अन्दर तक उतार दिया। इस बार मुझे स्वर्ग जैसा आनन्द आ रहा था। कसी हुई गाण्ड का मजा ही कुछ और ही होता है। भाभी पीछे मुड़ कर मुझे देखने लगी। मैं तो धक्के मारने में लगा हुआ था। अचानक भाभी हंस दी।
“सूरत तो देखो… जैसे कोई खजाना मिल गया हो … चोदते समय तुम कितने प्यारे लगते हो !”
“भाभी, उधर देखो ना, मुझे शरम आती है…”
“अच्छा जरा अब जम कर चोद दे…” भाभी ने मुझे और उकसाया।
मेरे धक्के तेज हो गये थे। भाभी भी अपनी गाण्ड हिला कर आनन्द ले रही थी।
“अरे मर गई मां … ये क्या … मेरी चूत चोदने लगे…”
पता नहीं कब जोर जोर से चोदने के चक्कर में लण्ड पूरा बाहर निकल रहा था और पूरा अन्दर जा रहा था। इस बार ना जाने कैसे फ़िसल कर उनकी रस भरी चूत में चला गया।
“ओह भाभी सॉरी … ये जाने कहां कहां मुँह मारता रहता है !”
भाभी मेरी इस बात पर हंस दी,”चल चूत में अधिक मजा आ रहा है… साला भचाक से पूरा ही घुस गया।”
मैंने उनकी चूत को जोर जोर से चोदना आरम्भ कर दिया। इस बार भाभी की सिसकियाँ तेज थी।
“भाभी जरा धीरे से … मजा तो मुझे भी आ रहा है, पर पकड़े गये तो सारा मजा गाण्ड में घुस जायेगा !”
“क्या करूँ, बहुत मजा आ रहा है …” भाभी ने अपना मुख भींच लिया और सिसकारी के बदले जोर जोर से अपनी सांसें छोड़ने लगी।
“अरे मर गई साले … भेनचोद … फ़ाड़ दे मेरी … चोद दे इस भोसड़ी को … मां ऽऽऽऽऽ…”
“भाभी, खूब मजा आ रहा है ना … मुझे मालूम होता तो मैं आपको पहले ही चोद मारता…”
“बस चोद दे मेरे राजा … उफ़्फ़्फ़्फ़ … साला क्या लौड़ा है …अंह्ह्ह्ह्ह्…।”
भाभी का बदन मस्त चुदाई से मैं तो ऐंठने लगा था। उसने अपनी चूत और चौड़ा दी … मुझे चूत में फ़ंसा लण्ड साफ़ दिखने लगा था… मैंने शरारत की, उसके फ़ूल जैसे उभरे हुये गाण्ड के छेद में अपनी दो अंगुलियाँ प्रवेश करा दी। इसमें उसे बहुत मजा आया…”और जोर से गाण्ड में घुसा दे… साले तू तो मस्त लौण्डा है … जोर के कर !”
लण्ड चूत चोद रहा था और अंगुलियाँ गाण्ड में अन्दर बाहर होने लगी थी।
“भेन की चूत … मेरे राजा … मैं तो गई …”
“मैं भी आया… तेरी तो मां की चूत…”
“राजा और जमा के मार दे …”
“ले रानी … ले … लपक लपक कर ले … पूरा ले ले … साली चूत है या … ओह मैं गया…”
एक सीत्कार के साथ भाभी का रस चू पड़ा… और मेरा वीर्य भी… आह उसकी चूत में भरने लगा। वो और झुक गई, अपना सर बिस्तर से लगा लिया। हम दोनों पसीना पसीना हो चुके थे … उसके पांव अब थरथराने लग गये थे… शायद वो इस अवस्था में थक गई थी। मैंने भाभी को सहारा दे कर बिस्तर पर लेटा दिया। भाभी ने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे खींच लिया। मैं कटे वृक्ष के समान उनके ऊपर गिर पड़ा। भाभी ने अपने बदन के साथ मुझे पूरा चिपका लिया और बहुत ही इत्मिनान से मुझे लपेटे में लेकर प्यार करने लगी। जाने कब तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे, प्यार करते रहे… तभी भाभी चिंहुक उठी। मेरा खड़ा लण्ड जाने कब उनकी चूत में जोर मार कर अन्दर घुस कर चूत को चूमने लगा था। लाल टोपा चूत की गुलाबी चमड़ी को सहलाता हुआ भीतर घुस कर ठोकर मार कर अपनी मर्दानगी दिखाना चाह रहा था …… रात फिर से गर्म हो उठी थी… दो जवान जिस्मों का वासना भरा खेल फिर से आरम्भ हो गया था … दिल की हसरतें काम रस के रूप में बाहर निकल आती और फिर से एक नया दौर शुरू हो जाता.. Antarvasna
शाम गहरी होते ही Antarvasna दोनों साहिल के घर पहुँच चुके थे। साहिल राज के पास आ कर बैठ गया और उनके शराब के जाम चलने लगे। रूपल और अंजलि भी धीरे धीरे बातें करने लगी थी।
‘क्या बातें हो रही है…?’ साहिल ने पूछा।
‘अकेले अकेले पिये जा रहे हो, पूछ भी नहीं नहीं रहे है।’ अंजलि ने शिकायत भरे स्वर में कहा।
‘पहले अपने गिफ़्ट कबूल करो, फिर एक एक जाम!’
दोनों खुशी से उछल पड़ी। साहिल ने दो पैकेट राज को दिये। खुद ने भी दो अलग रख दिये।
‘अब हमारी गोदी में आ जाओ तो मिलेगा!’
अंजलि उठ कर राज की गोदी में बैठ गई।
‘जानू, मेरी गोदी में तो तुम रोज ही बैठती हो , आज साहिल को खुश कर दो!’
अंजलि इठला कर उठी और मुस्कराते हुये तिरछी नजरों से साहिल को देखा, उसका लण्ड खड़ा था। उसने अपनी चूतड़ पीछे उभारी और उसके उभार को देख कर अपने चूतड़ सेट करके धीरे से बैठ गई। रूपल थोड़ा शरमा रही थी, वो बस राज के पास आकर खड़ी हो गई। राज ने अपनी पैन्ट की ज़िप खोल दी और अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।
‘आ जाओ, आपकी गद्दी तैयार है।’
‘धत्त, साहिल के सामने ही…’ रूपल शर्मा उठी।
‘गिफ़्ट नहीं लेना क्या…’ राज ने रूपल की साड़ी ऊँची कर दी और उसके नंगे चूतड़ों को अपने कड़क लण्ड पर रख दिया। राज ने अपना लण्ड ठीक से दरार में फ़िट कर लिया।
‘ये आपका गिफ़्ट…’ साहिल ने अंजलि को एक सोने का हार और बालियों का सेट भेंट कर दिया। उसे देखते ही वो उससे लिपट गई और उसे चूमने लगी। राज ने भी वैसा ही सेट रूपल को दे दिया। उसने भी अपनी खुशी राज को चूम कर जाहिर की और उसकी गोदी में उछल सी पड़ी। और… और… लण्ड रूपल की गाण्ड में घुस गया। रूपल की आंखे खुली की खुली रह गई और उसने राज की तरफ़ आश्चर्य से देखा।
‘शैतान…! मेरी!’ और उसके अधर से अधर मिला दिये। साहिल ने भी राज को देखा, अंजलि ने भी इतरा कर कहा- अब मेरी भी मार दो ना, साहिल!’
‘राज, रूपल को छोड़ दे, साला फ़ाऊल कर रहा है’ साहिल ने राज को झिड़की दी।
‘ओह सॉरी…’ उसने धीरे से रूपल की गाण्ड से अपना लण्ड बाहर निकाल लिया।
‘अब चलो, अपनी जगह बैठ जाओ और एक पैग पी लो, और फिर दूसरा गिफ़्ट।’
दोनों उठ कर सोफ़े पर बैठ गई। चारों ने एक एक पैग पूरा पी लिया। साहिल ने एक पतला लम्बा सा पेकेट राज की ओर उछाल दिया।
‘ये लो…’ दोनों पैकेट दोनों ने आगे झुक कर भेंट कर दिये।
उत्सुकतापूर्वक दोनों ने पैकेट खोला और फिर दोनों चीख उठी- ये क्या… हाय रे! तुम दोनों कितने खराब हो?’
दोनों के हाथ में एक साधारण लम्बाई का पतला सा डिल्डो था। राज और साहिल दोनों ही जोर से हंस पड़े।
अंजलि बोली- अब देखो कमाल!’
‘अरे नहीं अंजलि… मत करो ये… शरम आयेगी।’ रूपल ने उसे रोका।
‘अभी तो राज का लौड़ा खाया था, फिर क्या है?’ अंजलि शराब और वासना में बहक रही थी।
शायद यह एक पैग का भी असर था। उसने अपनी साड़ी उतार दी। मजबूरन रूपल को भी उतारनी पड़ी। यह देख कर राज और सहिल ने एक दूसरे को देखा और उनके कपड़े भी उतर गये। अब चारों नंगे खड़े थे। रूपल राज से जाकर लिपट गई और अंजलि साहिल से चिपक गई। वो सभी धीरे धीरे पास के कमरे में जमीन पड़े बिस्तरों की ओर बढ़ चले। इस कमरे को खाली करके पूरे कमरे में नीचे ही मोटे मोटे गद्दे डाल दिये थे।
रिमोट से उन्होंने एयर कन्डीशन चालू कर दिया। वहाँ पहुँचते ही वो नीचे बिस्तर पर लोट लगाने लगे। राज और साहिल को लगा कि जैसे दो मछलियाँ बिन पानी के तड़पती है, वैसे ही ये चुदने के लिये तड़प रही हैं। दोनों की चूत गीली हो चुकी थी।
‘राज तुम घोड़ी बनो…’ रूपल ने राज को घोड़ी बना दिया और वही डिल्डो लेकर राज की गाण्ड की तरफ़ आ गई। डिल्डो उसने गाण्ड पर सेट किया और अन्दर घुसा दिया। थूक से चिकना डिल्डो उसकी गाण्ड में सरक गया। दूसरी और अंजलि भी यही कर रही थी। रूपल ने डिल्डो गाण्ड में पूरा उतार दिया और अन्दर बाहर करने लगी। रूपल और अंजलि दोनों ऐसा करके बहुत उत्तेजना महसूस कर रही थी।
‘ऐ अंजलि, डिल्डो का मजा आया ना…! ‘ रुपल हंसी में चीखते हुये बोली।
‘इन्हीं से इनकी शुरूआत अच्छी रही…’ अंजलि भी नशे में हंसने लगी।
दोनों का लण्ड मस्ती से फ़ूलने लगा था। बेहद कड़क भी होने लगा था। यह देख कर रूपल ने राज का लौड़ा थाम लिया और उसे घिस कर और उत्तेजित करने लगी। राज का शरीर मीठी सी गुदगुदी के कारण तन सा गया। रूपल ने डिल्डो को गाण्ड में पूरा घुसा दिया और स्वयं उसके शरीर के नीचे घुस गई।
‘ना ना… डिल्डो मत निकालो, बस अपना असली डिल्डो मेरी चूत में गड़ा दो…
देखो, तुम्हारा लौड़ा कैसा फ़ूल रहा है!’
‘डिल्डो के मजे से ही तो मेरा लौड़ा तन कर फ़ट रहा है… अब चुदोगी तो मजा आयेगा।’
राज की ग़ाण्ड में पतला सा डिल्डो किसी रॉड की भांति घुसा हुआ था। वो धीरे से रूपल के ऊपर चढ़ गया। रूपल ने चुदने के लिये अपनी दोनों टांगे चौड़ा दी।
उसकी गीली चूत राज ले लण्ड को घुसने का न्यौता दे रही थी। राज और साहिल ने एक दूसरे को देखा, साहिल ने राज को आंख मारी, राज मुस्कुरा दिया। राज ने अपना लण्ड पकड़ कर हिलाया और उसकी चूत पर रगड़ा। उसका लण्ड गीला हो गया।
अब उसने अपना लाल सुपाड़ा उसके उभरे हुये दाने पर रख कर दबा दिया। रूपल सिसक उठी। उसके लाल टोपे से उसका दाना रगड़ने लगा।
‘राज… अब बस करो… पूरा अन्दर घुसेड़ दो ना… हाय रे मेरी मां…’
राज के सुपाड़े की दरार में उसके दाने की मीठी चुभन कहर ढा रही थी। उसने हाथ से पकड़ कर अपने लौड़े को जोर जोर से हिलाया और उसकी चूत के द्वार पर तीन चार बार जोर जोर से मारा… रूपल वासना के मीठे दर्द से तड़प गई। तब राज ने अपना लण्ड हाथ से पकड़ कर उसकी करारी चूत में रख कर अन्दर डाल दिया।
रूपल ने अपनी आंखे बन्द किये उसे जोर से अपनी ओर खींच लिया। वो अपने हाथों के बल पर रूपल पर छा गया। रूपल में अपना हाथ पीछे ले कर उसका डिल्डो पकड़ कर उसकी गाण्ड में भींच दिया। दोनों लौड़े उनकी गहराईयाँ नापने लगे थे।
उधर अंजलि भी साहिल से चिपके जा रही थी। उसकी चूत में भी साहिल का लण्ड गहराई तक घुसा हुआ था। अंजलि की सिसकारियाँ राज तक आ रही थी।
‘अंजू… चुदा लो तबीयत से… साहिल, जरा मस्ती से चोदना मेरी बीवी को…’
‘मेरी बीवी तो तुझसे चुदाने को मरी जा रही थी, साली का चोद चोद कर कचूमर निकाल देना!’ फिर जोर से हंस दिया।
‘राज, उधर मत देखो… वो तो चुदेगी ही, मेरी मारो ना जरा जोर से…’ रूपल ने राज का ध्यान अपनी ओर खींचा। राज के हाथ रूपल के सीने पर चल रहे थे… रूपल ने उसे अपनी तरफ़ खींच कर उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिये। कुछ ही देर में साहिल और अंजलि झड़ चुके थे और अब वे दोनों अपने कपड़े पहन रहे थे। वे दोनों राज और रूपल के पास आकर बैठ गये और उन्हें और उत्तेजित करने लगे।
अंजलि को राज के बारे में पता था… इसलिये वो राज की गाण्ड में डिल्डो धीरे धीरे अन्दर बाहर करने करने लगी। राज की उत्तेजना बढ़ने लगी। उसका लण्ड और फ़ूलने लगा। उधर साहिल ने भी रूपल के चुचूकों को हिला हिला कर मसलने लगा। झड़ने के कगार पर दोनों आ चुके थे। उन्होंने मस्ती में जोर से आंखे बन्द कर रखी थी, उनके जबड़े भी कस गये थे। तभी रूपल ने राज का साथ छोड़ दिया और जोर से झड़ने लगी। राज ने भी कस कस कर तीन चार जोर के शॉट मारे और उसका लण्ड पिचकारी मारने को हुआ। अंजलि ने उसका लण्ड तुरन्त रूपल की चूत से बाहर निकाला और एक मुठ मारते ही उसका वीर्य छूट पड़ा।
अंजलि तैयार थी इसके लिये… उसने लण्ड खींच कर अपने मुख में ले लिया और आम चूसने की तरह उसे पीने लगी।
‘आह… राज आज तो तुम्हारा खूब माल निकला…’
‘यह दोनों तरफ़ से आनन्द मिलने के कारण था। रूपल को चोदने में बड़ा मजा आया!’
सभी बहुत खुश थे। कार्यक्रम समाप्ति पर था। सभी ने डिनर किया और राज और अंजलि को विदा किया। दोनों घर आये तो करीब रात के ग्यारह बज रहे थे। घर आते ही राज ने प्यार से अंजलि के मम्मे दबा दिये।
‘कैसा लगा, मेरी जानू, मजा आया ना चुदवा कर…?’
‘तुम कितने अच्छे हो राज! तुम्हारी वजह से मेरी आज मनभावन चुदाई हुई!’
‘चलो, अब किसी ओर का नम्बर लगाना है क्या…?’
‘सुनो राज… वो विपुल कैसा रहेगा?’
‘और तुम वो क्षिप्रा को मेरे लिये पटा दो ना!’
दोनों ठहाके मार कर हंस दिये और प्यार से एक दूसरे को चूमने लगे… हाँ क्षिप्रा का तो पता नहीं पर अगले दिन अंजलि विपुल से लिपट लिपट कर चुदवा रही थी और राज उन्हें छिप छिप कर देख कर मुठ मार रहा था… Antarvasna
मेरा नाम अभय है। मैं Antarvasna दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र २० साल की है। मैं एक बड़ी कंपनी मैं जॉब करता हूँ। मेरा वेतन २५००० रुपए महीना है। मेरा दिल्ली में अपना फ्लैट भी है और मैं अकेला रहता हूँ। मुझे घर पर काम करने वाली एक नौकरानी चाहिये थी जो मेरे घर का सारा काम करे। इसके लिए मैंने अख़बार में विज्ञापन छपवा दिया। कुछ दिनों बाद मेरे यहाँ कई लड़कियाँ और औरतें आईं। मैंने कई से बात करने के बाद एक औरत पसंद किया जो ३५ साल की थी। लेकिन वो अभी जवान दिख रही थी। वो अकेली थी और उसका पति नहीं था। मैंने उसे काम पर रख लिया।
अगले दिन से वो काम पर आ गई और मैंने उसे एक कमरा दे दिया। उस कमरे में मैंने टीवी रखवा दिया। मैंने उसे बाज़ार से चिक्केन लाने को कह दिया। वो चिक्केन लेकर आई, तो मैंने उसे बट्टर-चिक्केन और रोटी बनाने को कहा। उसने खाना बनाने के बाद मेज़ पर खाना सजा दिया। इसके बाद हम दोनों मिल कर खाना खाने लगे। मैं उससे उसके बारे में पूछने लगा। वो अपने बारे में सब बातें बताने लगी। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा।
मेरी नौकरानी साड़ी पहनती थी, जो मुझे नहीं पसंद था। मैं बाज़ार से उसके लिए अच्छे कपड़े और नाइट-ड्रेस लेकर आया और उसको पहनने को दे दिया। उसको शुरु-२ में परेशानी हुई, लेकिन बाद में उसको ठीक लगने लगा। वो खाना अच्छा बनाती थी। इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी मिलती थी। अब वो मेरे से घुल-मिल गई। इतवार को मैंने उसे मार्केट घूमाने का प्लान बनाया। मैं उसके लिए बाज़ार से अच्छी साड़ी खरीद कर लाया। वो तैयार हो गई, इसके बाद हम दोनों मिल बाज़ार घूमने निकल गये। मैंने उसके लिए बाज़ार से जींस, टी-शर्ट, घड़ी, सैंडल, और भी चीजें ख़रीदी। इसके बाद हम दोनों ने पिज्जा हट में जाकर पिज्जा खाया।
हम दोनों थक गये थे। खास कर वो बहुत थक गई थी। मैंने उससे पूछा- भूख लगी है?
तो वो बोली- भूख लगी है लेकिन मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने बोला- कोई बात नहीं ! मैं होटल से खाने का आर्डर दे देता हूँ !
इसके बाद मैंने खाने का आर्डर दे दिया और उसके पास जाकर बैठ गया और उससे पूछने लगा- तुम्हारे शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है?
वो बोली- हाँ।
इसके बाद मैं उसका पैर हाथ में लेकर दबाने लगा। उसने घबरा कर पैर हटा लिया और कहने लगी- आप ये क्या कर रहे हैं?
मैंने बोला- मैं तुम्हारा शरीर दबा रहा हूँ क्यूंकि तुम्हारे शरीर में दर्द हो रहा हैं।
वो बोली- आप मेरे मालिक हैं और आप मेरा शरीर दबायेंगे !
मैंने कहा- कोई बात नहीं, तुम्हारे शरीर का दर्द मिटना जरूरी है और इसमें मालिक और नौकर की कोई बात नहीं।
इसके बाद मैंने उसका शरीर दबा कर ठीक कर दिया। फिर थोड़ी देर बाद खाना आ गया, और हम मिल कर खाना खाने लगे।
कुछ दिनों बाद मैं उसको ब्यूटी-पार्लर लेकर गया और ब्यूटी -पार्लर में उसका मेक-अप, बॉडी-मसाज़, हेयर-स्टाइल और बहुत कुछ करवा दिया। इसके बाद वो गज़ब की लग रही थी। फिर घर पर आये और मैंने उसे जींस और टी-शर्ट, सैंडल, घडी, चश्मा पहनने को बोला। वो मना करने लगी क्यूंकि वो उसे पहली बार पहन रही थी। मेरे बहुत जोर देने पर उसन पहना। इसके बाद वो बहुत अच्छी लग रही थी। मैंने उसे हमेशा पहनने के लिए बोल दिया। अब वो हमेशा जींस पहनती थी। फिर कुछ दिनों बाद वो बीमार पड़ गई। मैंने उसका इलाज़ हॉस्पिटल में करवाया। फिर कुछ दिनों बाद वो ठीक हो गई। अब वो मुझे पसंद करने लगी थी। मैं भी उसे पसंद करने लगा।
फिर कुछ दिनों बाद उसका जन्मदिन आया। मैं बर्थडे का सारा इंतजाम करने लगा। मैं उसे सरप्राइज़ देना चाहता था। मैंने घर को अच्छी तरह से सजवाया। केक और खाने का आर्डर दे दिया। शाम को मैंने उसे हैप्पी बर्थडे बोला। और मैंने उसे एक गले का सोने हार दिया। वो हार को देखकर खुश हो गई और मेरे गले से लिपट गई। मुझे अच्छा लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने ड्रिंक लिया। पहले तो वो मना कर रही थी, फिर मेरे कहने पर उसने थोड़ी सी ले ली। इसके बाद मैंने उसे डांस करने के लिए बोला। तो फिर वो मना करने लगी। दुबारा मेरे कहने पर वो मेरे साथ डांस करने लगी। बहुत देर तक हम नाचते रहे। इसके बाद हम दोनों खाना खाया और सो गये।
कुछ दिनों बाद एक दिन वो नहा रही थी। उसका तौलिया बाहर छूट गया था। उसने मेरे से तौलिया मांगा तो मैंने उसे तौलिया देने के लिए दरवाज़ा ख़टखटाया तो उसने दरवाज़ा खोला। मैंने अंदर हाथ डाल कर तौलिया दिया तो उसने झटके से मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया। अंदर मैंने उसको देखा तो पागल हो गया, वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी। मैं तो सिर्फ उसे देखता रह गया। फिर अचानक होश आया कि यह गलत है।
मैंने उससे बोला- यह गलत है, मैं आपके साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता।
वो बोली- देखो अभय, मैं बहुत प्यासी हूँ, तुम मेरी प्यास बुझा दो। मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूंगी। मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम भी तो मुझसे प्यार करते हो।
मैंने बोला- यह गलत है, अगर आपको कुछ हो गया तो।
तो वो बोली- मुझे कुछ नहीं होगा। बस तुम मेरी प्यास बुझा दो।
मैं बोला- ठीक है।
इसके बाद मैं उसके शरीर पर साबुन मलने लगा। पहले मैंने साबुन को हाथ से शुरु किया, इसके बाद उसकी चूची पर लगाया। उसके शरीर में करंट दौड़ गया। फिर मैंने साबुन को उसको पेट पर लगाते हुए उसके पैर पर लगाया। फ़िर पीठ पर ! इसके बाद उसकी बुर में साबुन लगाया। फिर वो मेरे को साबुन लगाने लगी। जैसे-२ मैंने उसको साबुन लगाया था, वैसे-२ वो मेरे को साबुन लगाने लगी। फिर मैंने उसका शरीर अपने हाथ से मला। उसके बाद उसको नहलाया, उसने मेरे को नहलाया।
फिर मैंने उसका शरीर तौलिये से पौंछा, उसको ब्रा, पैन्टी, जींस टी-शर्ट पहनाई। इसके बाद मैंने उसको चूम लिया। फिर थोड़ी देर बाद वो खाना बनाने लगी, मैं भी उसका साथ देने लगा। अगले दिन रात को खाना खाने के बाद हम दोनों ऊपर छत पर बातें करने लगे। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों सोने के लिए जाने लगे। मैंने बोला- आज के बाद हम दोनों साथ में सोयेंगे।
वो खुश हो गई। इसके बाद हम दोनों साथ में सो गये। आधी रात बाद वो जगी और मेरा लंड सहलाने लगी। मेरी नींद खुल गई। वो डर गई।
फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूमने के लिए मैंने अपना ओंठ उसके ओंठ पर रख दिए। वो सिहर गई। बहुत देर तक हम दोनों अपने ओंठों को एक दूसरे से चिपकाते हुए किस करते रहे। मैंने अपनी जीभ उसकी जीभ से भिड़ा दी। इसके बाद में उसका नाईट-ड्रेस उतार दिया। मैं उसका शरीर देखता रह गया। उसकी बड़ी-२ चूची ! मज़ा आ गया।
मैं उसकी चूची अपने हाथ से दबाने लगा। वो सिसकारी भर रही थी। मैं अपने मुँह में उसकी चूची चूसने लगा। एक हाथ से मैं उसकी एक चूची दबा रहा था और मुँह से दूसरी चूची का रसपान कर रहा था। फिर मैंने उसके शरीर को जीभ से चाटा। जीभ से चाटते-२ मैंने अपनी जीभ उसकी बुर में डाल दी। वो सिहर गई और उसके मुँह से आवाज़ निकल गई। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर खूब हिला रहा था। वो आवाज़ निकाल रही थी। फिर थोड़ी देर में उसका रस निकल गया और मैं उसका सारा रस पी गया।
इसके बाद वो मेरा लंड चाटने लगी। मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। बहुत देर तक उसने लण्ड चूसा। इसके बाद मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया। उसने सारा वीर्य पी लिया। इसके बाद मैं उसकी गांड पर काटने लगा, जीभ से उसकी गांड चाट रहा था। फिर उन्गली डाल कर उसकी गांड के छेद को बड़ा करने लगा। इसके बाद मैं अपना लंड उसकी गांड में डालने लगा। वो चिल्ला उठी और बोली- बहुत दर्द हो रहा है।
फिर मैं उसके ओंठ अपने ओंठ से चाटने लगा। फिर मैंने धीरे से धक्का लगाया। वो फिर चिल्ला उठी। लेकिन इस बार मैंने रहम नहीं खाया और जोर से धक्का दिया। वो इतनी जोर से चिल्लाई कि रोने लगी। उसके आंख से आँसू आने लगे। मैं उसके ओंठ को किस करने लगा। फिर थोड़ी देर में वो शान्त हो गई। फिर मैं धीरे-२ अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। उसको मज़ा आने लगा । मैं उसे किस करते हुए उसकी गांड मार रहा था। कुछ देर बाद मैं झड़ गया। वो मेरा लंड चूसने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मेरा लंड टाइट हो गया। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर चूसने लगा। फिर मैंने जीभ निकला और अपना लंड उसकी बुर में डालने लगा। आधे घंटे तक उसकी बुर मारता रहा। फिर हम दोनों झड़ गये। फिर सारी रात हम दोनों अपना लंड और बूर एक दूसरे में डाल सो गये।
अब हम हर रोज़ नई स्टाइल में सेक्स करते हैं। मैं उसे अब अपनी पत्नी मानता हूँ और वो मेरे को पति। बाय ! Antarvasna
जब मैं इंटरमीडिएट में पढ़ती थी तो पूरी तरह जवान हो चुकी थी उम्र से भी और शरीर से भी!
मेरा बदन पूरा भर चुका था।
मेरे स्तन बड़े बड़े और सुडौल हो चुके थे.
मेरी कमर पतली और चूतड़ थोड़ा बड़े बड़े हो गए थे।
मेरी खुली खुली बांहें बड़ी सेक्सी दिखतीं थीं.
मुझे डांस करने का बड़ा शौक था तो मैं ठुमके खूब लगाती थी.
जो देख ले वो मदहोश हो जाए.
मेरी जाँघें मोटी मोटी हो गईं थीं और उनके बीच की चूत के तो कहने ही क्या …
मैं एक चुलबुली लड़की थी, पढ़ने में भी बहुत अच्छी थी और हंसी मजाक करने में भी सबसे आगे!
मेरा नाम रीतिका है दोस्तो!
मैं एक चंचल शोख़ और बिंदास लड़की हूँ.
मेरा कद 5′ 3″ का है, रंग गोरा है और चेहरा गोल है.
इंटर करने के बाद मुझे मेरे माता पिता ने शहर में मेरी बुआ जी के घर भेज दिया।
मैं उनके घर रह कर पढाई करने लगी।
मेरी बुआ जी का नाम श्रीमती साधना है और मेरे फूफा जी का नाम संजय है।
मेरे फूफा जी एक नेक सज्जन और शरीफ़ इन्सान हैं।
वे मेरी देख भाल अच्छी तरह करने लगे, मेरी पढ़ाई पर बहुत ध्यान देते थे, मेरी हर जरूरत को पूरा करते थे।
मेरी बुआ जी भी बड़ी अच्छी और मधुर स्वाभाव की थी और मुझे बहुत प्यार करती थीं।
मैं भी उन दोनों के साथ घुलमिल गयी थी।
मेरी पढ़ाई अच्छी चल रही थी साथ ही साथ कॉलेज में मेरी मस्ती भी हो रही थी।
मैं अपने सहेलियों से खुल कर बातें करने लगीं थीं।
मेरी सहेलियां अधिकतर लण्ड की बातें करतीं थीं. लण्ड के साइज और लण्ड के रंग की बातें।
कोई कहती- मेरे भाई का लण्ड बड़ा मोटा है.
तो कोई कहती- मेरे जीजू का लण्ड बड़ा लम्बा है.
कोई कहती- मेरे अब्बू का लौड़ा काला है और 8″ का है.
और कोई कहती- मेरे मौसा का लण्ड खड़ा होने पर तलवार की तरह हो जाता है।
मैंने तो कोई लण्ड न कभी देखा था और न कभी पकड़ा था तो उनकी बातें सुनकर मेरी झांटें सुलगने लगतीं थी।
लेकिन मेरी चूत जरूर गीली हो जाती थी।
अब मुझे गन्दी गन्दी बातें करना बड़ा अच्छा लगता था.
नॉन वेज चुटकुले तो मेरी जबान पर रखे ही रहते थे।
मैं अब अपनी दोस्तों के बीच खूब खुल कर बोलती थी लण्ड, चूत, गांड, भोसड़ा कहने में मुझे कोई शर्म नहीं आती थी।
एक दिन जब मैं रात में लेटी थी तो मेरे दिमाग में लण्ड की बातें घूम रहीं थीं।
मैं करवटें बदलते बदलते रात गुज़ारती रही।
तब तक रात के 12 बज चुके थे।
मैं बाथरूम जाने के लिए उठी.
बाथरूम से जब मैं वापस आ रही थी तो देखा कि बुआ जी के कमरे की धीमी धीमी लाइट जल रही है।
लाइट वैसे रात में तो जलती नहीं थी।
मैं उत्सुकता बस कमरे की खिड़की से अंदर झांक कर देखने लगी.
अंदर जो हो रहा था, उसे देख कर मैं दंग रह गयी।
मैंने देखा कि फूफा जी बिल्कुल नंगे चित लेटे हुइ हैं।
उनके पास बुआ जी भी बिल्कुल नंगी बैठी हुई हैं.
बुआ जी लण्ड मुठ्ठी में लेकर ऊपर नीचे कर रही हैं और लण्ड का टोपा भी चूम चाट रही हैं।
लण्ड पूरा तो नहीं दिखा पर जितना दिखा उससे लग रहा था कि लण्ड बड़ा मोटा था और सख्त भी।
ऐसे में मेरी चूत गीली हो गयी और मैं चूत में उंगली करने लगी, दूसरे हाथ से अपने मम्मे दबाने लगी।
Xxx अंकल सेक्सी भतीजी चुदाई की कहानी भी यहीं से शुरू हुई.
मुझे लगा कि अब बुआ की चुदाई होगी।
मैं चुदाई होने का बड़ी बेकरारी से इंतज़ार करने लगी।
अचानक बुआ ने अपनी टाँगें फैला दीं तो उनकी छोटी छोटी झांटों वाली चूत मुझे दिख गई.
इतने में फूफा जी बुआ के ऊपर चढ़ बैठे और लण्ड गच्च से एक ही झटके में पूरा घुसा दिया।
उसके बाद मैंने बुआ की पूरी चुदाई देखी।
फूफा जी को पीछे से चोदते हुए देखा और बुआ को झड़ता हुआ लण्ड चाटते हुए देखा।
इस तरह मैं हर रोज़ रात में बुआ फूफा की चुदाई देखने लगी और अपनी चूत में उंगली डाल डाल उत्तेजित होने लगी।
कई बार मेरी इच्छा हुई की मैं अंदर जाकर फूफा का लण्ड पकड़ लूँ पर मेरी हिम्मत नहीं हुई।
एक दिन बुआ ने कहा- रीतिका बेटी, मैं अपने मायके जा रही हूँ। क्या तुम चलोगी?
मैंने कहा- नहीं बुआ जी, मेरे एग्जाम चल रहे हैं, मैं नहीं जा सकती।
बुआ जी चली गई तो घर में हम दो, यानि मैं और फूफा जी रह गए।
रात में मैं अपने कमरे में और फूफा जी अपने कमरे में सोते थे।
एक दिन रात के 12 बजे फूफा जी उठ कर बाहर आ गए।
मैं जाग ही रही थी, उठ कर बाहर आ गई.
मैंने पूछा- क्या फूफा जी कुछ चाहिए?
वे बोले- नहीं बेटी, चाहिए कुछ नहीं, बस नींद नहीं आ रही है। तेरी बुआ जी भी चली गईं।
मैंने कहा- हां फूफा जी, नींद मुझे भी नहीं आ रही है।
उन्होंने पूछा- तुम्हें नींद क्यों नहीं आ रही बेटी?
मैंने कहा- अब क्या बताऊँ फूफा जी, आपको मुझे बताने में शर्म आ रही है।
वे बिना कुछ बोले अपने कमरे में चले गए।
ऐसे ही दिन बाद मैं अपने कमरे में अधनंगी लेटी हुई थी।
मेरे चूतड़, गांड खुली हुई थी, मेरे बूब्स दोनों खुले थे लेकिन चूत छिपी हुई थी।
फिर एकदम से फूफा जी कमरे में आ गए।
मैं सोने का बहाना किये लेटी रही और कनखियों से उन्हें देखती रही।
वे दो मिनट तक अपना लण्ड सहलाते हुए मेरे नंगे बदन को देखते रहे और फिर चले गए।
मेरी एक बार फिर झांटें सुलग गईं।
मैंने मन में कहा कि कितना बढ़िया मौका था … मुझे नंगी नंगी पकड़ क्यों नहीं लिया? पकड़ लेते तो मुझे आज लण्ड जरूर मिल जाता।
मैं लण्ड के लिए तड़पती हुई सो गयी।
फिर दूसरे ही दिन रात को 11 बजे मैं अपने आप को रोक नहीं सकी और फूफा जी के कमरे में चली गई।
मैंने देखा कि फूफा जी एकदम नंगे लेटे हुए अपना खड़ा लण्ड सहला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल देख रहे हैं.
मैं समझ गयी कि वे मोबाइल पर पोर्न देख रहे हैं।
वे मुझे नहीं देख सके.
उनका लण्ड धीरे धीरे कड़क होता जा रहा था.
मैंने आहिस्ते से हाथ बढ़ाकर उनका लण्ड पकड़ लिया और कहा- फूफा जी, यह काम मेरा है आपका नहीं! लण्ड हिलाना, चूसना, चाटना मेरा काम है।
वे एकदम से बोले- अरे बेटी रीतिका तुम? सॉरी सॉरी मैं बस ऐसे ही …
मैंने कहा- मैं जानती हूँ फूफा जी, अपने आप को अकेला मत समझो मैं हूँ न!
ऐसा कह कर मैंने लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पेल्हड़ भी चाटने लगी.
फिर मैं बोली- बड़ा मोटा, हैंडसम और प्यारा लौड़ा है आपका, फूफा जी! मुझे इससे प्यार हो गया है।
मैं मस्ती से नंगी नंगी लण्ड चूसती रही, उनके नंगे बदन पर हाथ भी फिराती रही।
उन्हें भी मज़ा आने लगा।
वे भी मेरा नंगा जिस्म बड़े गौर से देखने लगे।
मैंने लण्ड चूसने की स्पीड बढ़ा दी तो लण्ड ने जल्दी ही उगल दिया वीर्य जिसे मैं बड़े प्यार से चाट गयी।
फिर उन्होंने मुझे अपने बेड पर नंगी बड़ी देर तक लिटा कर रखा।
इस तरह मैं हर रोज़ रात को फूफा जी का लण्ड चाटने और चूसने लगी।
मैं चाहती थी कि वे लण्ड पेलें मेरी चूत में और चोदें मुझे … पर वे शरीफ़ इतने थे कि मैं उनसे कुछ कह नहीं सकी.
शायद वे मुझे बर्बाद नहीं करना चाहते थे।
ऐसे में 2 दिन इंतज़ार में और गुज़र गए।
चौथे दिन जब मैंने उसका नंगा नंगा लण्ड पकड़ा तो बोली- अरे फूफा जी, आज तो आपका लण्ड कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा है? बिल्कुल लोहे की तरह कड़क हो गया है।
उन्होंने पलट कर कहा- रीतिका बेटी, तुमने ही इसे चूस चूस कर इतना मोटा कर दिया है।
मैं समझ गयी कि फूफा जी आज कुछ ज्यादा ही रोमांटिक मूड में हैं.
तब मैंने कहा- आज आपका लण्ड कुछ ज्यादा ही फुफकार मार रहा है फूफा जी … क्या बात है? क्या करने वाला है आपका यह बहनचोद लण्ड?
ऐसा बोल कर मैंने लण्ड गप्प से मुंह में डाला और चूसने लगी।
मुझे कुछ ज्यादा ही मज़ा आने लगा।
मैं लण्ड बार बार अंदर डालती और बाहर निकालती।
तभी एकाएक फूफा जी बेड के नीचे उतर कर खड़े हो गये, मुझे किनारे घसीट लिया मेरी गांड के नीचे तकिया लगा कर अपना लण्ड मेरी चूत पर रगड़ने लगे।
फिर अचानक लण्ड गच गचा से घुसा दिया अंदर और बोले- आज मैं तुझे चोदूँगा रीतिका। तेरी चूत आज फाड़ूंगा मैं, पूरा लण्ड घुसेड़ दूंगा तेरी चूत में, रंडी की तरह चोदूँगा मैं तुझे!
मैं समझ गयी कि फूफा का कई दिन का गुबार आज निकल पड़ा।
इससे मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई।
फिर क्या … वे सच में घपाघप चोदने लगे मुझे और मेरी इच्छा पूरी होने लगी।
मैं भी मस्ती में बोली- चोद लो मुझे जितना चोदना चाहते हो, उतना चोद लो। यह चूत आपके लिए ही है यार!
फूफा जी को मैं यार कह कर बोलने लगी।
मुझे मज़ा आया तो बोली- हाय रे, पूरा लौड़ा पेल के चोदो मेरे राजा! आज मैं आपकी गर्लफ्रेंड हूँ। आप मेरे बॉयफ्रेंड हो! आपका लण्ड मुझे बड़ा मज़ा दे रहा है। फाड़ डालो मेरी चूत!
फिर मुझे और जोश चढ़ा, मैं उनको गालिया देने लगी- साले कुत्ते कमीने … भोसड़ी के … आज तू ले ले पूरा मज़ा मेरी चूत का!
वे वास्तव में मेरी टांगें अपने कंधों पर रख कर मुझे तूफान मेल की तरह चोदने लगे और मैं गांड उठा उठा के चुदवाने लगी।
मैं मस्ती करने लगी, मेरी सिसकारियां निकलने लगी- उई माँ … बड़ा अच्छा लग रहा है … क्या मस्त लौड़ा है! क्या मस्त चुदाई है! ऊऊऊ ऊओ ऊऊऊ हहा हाआआ आह ही हेहेह आहां … फट गई मेरी चूत, फूफा तूने मुझे रंडी बना दिया, यार! मैं कहीं मुँह दिखाने के काबिल नहीं रही!
इतने में उसने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से पूरा पेल दिया लण्ड मेरी चूत में, बोला- अब मैं तुझे कुतिया की तरह चोदूंगा रीतिका!
मैंने भी जोश में कहा- चोद ले साले कुत्ते, कमीने, हरामी तेरी बहन का भोसड़ा … तेरा जैसे मन हो वैसे चोद ले, मैं कहीं नहीं भागने वाली! तेरे लण्ड का कीमा बनाऊंगी मैं!
इस तरह वह मेरी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मुझे चोदे जा रहा था और मैं भी उसका साथ देती जा रही थी, अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।
मैं मस्ती में चूर थी।
और फिर एकदम से मेरी चूत ने छोड़ दिया पानी और मैं खलास हो गई.
लेकिन उसका लण्ड साला अभी भी तना हुआ था।
तब मैंने घूम कर लण्ड मुट्ठी में लिया और आगे पीछे करने लगी।
10 / 12 बार करने पर ही लण्ड से निकल पड़ी कई पिचकारियां!
मेरा मुंह वीर्य से सन गया।
थोड़ा बहुत मेरे स्तन पर गिरा और बाकी मैं खुद चाट गयी।
फिर हम दोनों बाथरूम में गए, खूब मजे से नंगे नंगे हम दोनों ने एक दूसरे को नहलाया फिर उसने मुझे गोद में उठा कर बेड पर पटक दिया और खुद मेरे बगल में नंगा लेट गया।
फूफा बड़े रोमांटिक मूड में थे।
लग ही नहीं रहा था कि ये पहले वाले फूफा जी हैं।
वे बिल्कुल मेरे दोस्त बन गए।
मैंने जैसे ही प्यार से लण्ड हिलाया, उसे चूमा तो उन्होंने मुझे अपने बदन से चिपका लिया और बोले- रीतिका, मैं तुम्हें एक बार फिर चोदूंगा।
पर फूफा जी ने मेरे जवाब का इंतज़ार नहीं किया, बस गच्च से लण्ड पेल दिया मेरे अंदर!
मैं तो चाहती ही थी चुदना … तो मजे से चुदने लगी।
Xxx अंकल सेक्सी भतीजी चुदाई जोर जोर से झटके मार कर करने लगे और मैं हर झटके का जवाब झटके से देने लगी।
मैंने कहा- यार तुम तो मुझे 24/25 साल के लड़के की तरह चोद रहे हो। मुझे नहीं मालूम था कि तुम्हारे लण्ड में इतनी आग है.
वे बोले- अरे रीतिका, मेरे लण्ड का तुम्हारी बुआ ने कभी इतनी अच्छी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जितनी तरह से तुम कर रही हो। तुम लेती रहो मेरे लण्ड का असली मज़ा!
फिर उन्होंने सोफा पर बैठ कर मुझे अपने लण्ड पर बैठा लिया और दनादन चोदने लगे।
इस बार फूफा जी ने मुझे इतना चोदा कि उनके लण्ड ने उगल दिया पूरा का पूरा वीर्य.
मैंने फिर झड़ता हुआ लण्ड बड़े प्यार से चाटा।
उसके बाद वे मुझे रोज़ सुबह, शाम, दोपहर और रात में खूब चोदने लगे।
मैं भी बड़ी मस्ती से चुदने लगी।
जब तक बुआ जी अपने मायके से वापस आईं तब तक मैं जाने कितनी बार फूफा से चुद चुकी थी।
aयह आज से 8 साल पहले की बात है Antarvasna जब मैं बी. कॉम फाइनल इयर में पढता था। हमारे कॉलेज में बहुत लड़कियाँ पढ़ती थी और हमारी क्लास में भी काफ़ी लड़कियाँ थी। लेकिन उनमें दो 2 लड़कियाँ ऐसी थी कि जिन को देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मैं सिर्फ़ उनकी तरफ़ देखता रहता था। एक का नाम रितु था और दूसरी श्रुति।
रितु मेरे साथ ज़्यादा खुली थी जबकि श्रुति इतनी नहीं थी। मैं हमेशा उनको चोदने का सोचा करता था लेकिन कभी भी मोका नहीं मिल सका था। एक दिन हमारी क्लास ख़त्म हुई तो हम सब विद्यार्थी नीचे आ गए। कुछ देर बाद मैंने देखा कि रितु और श्रुति ऊपर जा रही हैं। मैंने उनका पीछा किया। वो दोनों क्लास में चली गई और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं दरवाज़े के साथ लग कर खड़ा हो गया और सोचा कि जैसे ही वो निकलेंगी तो मैं क्लास में अंदर जाने के बहाने किसी एक के बूब्स को हाथ लगा लूँगा।
लेकिन काफ़ी देर गुज़र जाने के बाद जब वो बाहर नहीं आई तो मैंने दरवाज़े से कान लगा लिया। अंदर से कुछ सेक्सी आवाजें आ रही थी- आ आह ह्ह्ह्ह्छ हह ओह हह ह्ह्ह्ह्छ हम मम् म्मम्म।
मैं समझ गया कि कुछ तो हो रहा है। मैं इधर उधर देखने लगा कि कहीं से कोई ऐसी जगह नज़र आए जहाँ से मैं उनको देख सकूं। अचानक मुझे खिड़की में एक छेद नज़र आया और मैं वहां से उनको देखने लगा।
वो दोनों बिल्कुल नंगी थी, उनके कपड़े साइड वाली कुर्सी पर रखे हुए थे और वो लेस्बियन एन्जॉय कर रही थी। रितु श्रुति की योनि चाट रही थी और श्रुति दर्द और सेक्स के मारे आवाजें कर रही थी। जब मैंने उनको ऐसा करते देखा तो मेरा लंड भी खड़ा हो गया और ऐसा लग रहा था कि अभी अंडरवियर फाड़ कर बाहर आ जाएगा।
श्रुति चीख रही थी- हाँ हाँ ! कर रितु कर ! और तेज़ कर ! फ़टाफ़ट जोर जोर से कर !
कोई 10 मिनट बाद मैंने देखा कि श्रुति की टाइट चूत से एकदम सफ़ेद रस बाहर निकला जो सीधा रितु के चेहरे पर गिरा और रितु उसे मजे से चाटने लगी और श्रुति से कहा कि तुम भी चाटो। श्रुति बिल्कुल मदहोश हो गयी थी।
इसके बाद रितु कुर्सी पर बैठी और श्रुति से कहा कि अब तुम मेरी योनि को चाटो। श्रुति ने जब उसकी टांगों को खोला तो यह देख कर मैं बहुत हो गया कि रितु की चूत खुली थी बिल्कुल ब्लू फिल्मों की लड़कियों की चूत की तरह।
मुझे बहुत हैरत हुई। श्रुति ने रितु से कहा कि तुम्हारी चूत इतनी खुली क्यूँ है, तो रितु ने कहा कि श्रुति ज़ान ! तुम ने आज यह पहली बार किया है, जब तुम रोज़ करोगी और अपनी ऊँगली चूत में अन्दर बाहर करोगी तो तुम्हारी चूत भी ऐसी हो जाएगी और मैं तो रोज़ चुदाई भी करवाती हूँ। अगर तुम हमारे घर आओ तो मैं तुम्हें भी चुदवाऊंगी अपने पड़ोसी से, बहुत मज़ा आता है और मेरी एक इच्छा है कि मेरी चूत इतनी खुल जाए कि मैं अपना पूरा हाथ इस में अंदर ले सकूं।
कोई 8-10 मिनट बाद रितु भी चरमसीमा पर पहुँच गई और वो दोनों अपने कपड़े पहनने लगी कि अचानक मेरे मुंह से आवाज़ निकली और मैं भी झड़ हो गया।
उन्होंने वो आवाज़ सुन ली तो श्रुति ने कहा कि शायद कोई हमें देख रहा था, तो रितु बोली कोई बात नहीं मैं देखती हूँ रितु ने दरवाज़ा थोड़ा सा खोला क्योंकि वो अभी भी नंगी थी और बोली कौन है?
मैंने हिम्मत कर के कहा कि मैं राणा !
तो वो बोली कि क्यूँ आए हो?
मैंने कहा कि अपनी पेन भूल गया था वो लेने आया हूँ।
उस ने कहा ठीक है अंदर आ जाओ !
मैं जैसे ही अंदर गया तो देखा कि वो दोनों अभी तक नंगी थी। श्रुति ने ब्रा और अंडरवियर पहना था जब कि रितु बिल्कुल नंगी खड़ी थी। उसने मुझसे कहा कि मुझे पता था कि तुम ज़रूर आओगे क्यूँकि मैं तुम्हे रोज़ क्लास में देखती थी कि तुम सिर्फ़ हमारी गांड और स्तन को देखते हो लेकिन तुम कुछ कर नहीं सकते थे। मुझसे ज़्यादा तुम इस ब्लैक ब्यूटी श्रुति को पसन्द करते हो, जब वो चलती है तो तुम्हारी नज़र उसके शरीर को घूरती है।
मैं भी तुमको देखती थी लेकिन कुछ कह नहीं सकती थी। आज तुम आए हो तो तुम मेरी और मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊंगी। यह कह कर उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया और मैं भी उसे किस करने लगा श्रुति हम दोनों को देख रही थी वो बहुत डरी हुई लग रही थी।
मैंने उसको हाथ से पकड़ कर अपनी तरफ़ खींच लिया और रितु से कहा कि प्लीज़ तुम मेरा लंड अपने मुंह में ले लो। रितु ने मेरे लंड को चूसना शुरू किया और मैं श्रुति को किस करने लगा। मैंने उसका ब्रा खोल दिया और उसके अनछुए सांवले मुम्मे चूसने लगा वो बेकरार हो रही थी तो मैंने कहा कि तुम भी मेरा लंड चूस कर मज़ा लो।
तो उस ने कहा कि नहीं यह बहुत गन्दा है !
तो मैंने उसको कहा कि देखो रितु कैसे मज़ा ले रही है तुम भी ले लो !
लेकिन वो नहीं मानी तो रितु और मैंने ज़बरदस्ती उस के मुंह में अपना लंड डाल दिया तो उस ने धीरे धीरे चूसना शुरू किया उससे मज़ा आने लगा और वो चूसती रही। 15 मिनट के बाद मैंने उसका मुंह अपनी क्रीम से भर दिया तो रितु जो श्रुति की चूत को चाट रही थी अचानक ऊपर उठी और क्रीम उसके मुंह से अपने मुंह में लेने लगी।
अब मैं उन दोनों को चोदना चाहता था तो मैंने रितु से कहा कि मैं पहले श्रुति को चोदना चाहता हूँ !
तो उसने कहा कि वो अभी कुँवारी है बहुत मुश्किल है यहाँ !
लेकिन मैंने कहा कि प्लीज़ !
तो उस ने कहा ठीक है लेकिन श्रुति के मुंह पर कोई कपड़ा बांधो तो मैंने उसका ब्रा उसके मुंह पर बाँध दिया और अपना 7.5′ इंच का लंड उसकी चूत पर रख दिया और आहिस्ता आहिस्ता धक्के मारने लगा, उसे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर आहिस्ता आहिस्ता मैंने ज़ोर लगाना शुरू कर दिया।
आहिस्ता आहिस्ता मेरा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर जा रहा था और वो अपने हाथों से मेरा लंड हटाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मैंने उस के हाथ पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का लगाया और अब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में था। वो एक दम ऊपर उठी और नीचे गिर गयी। वो बेहोश हो गयी थी, उसकी चूत से खून बहने लगा था।
अब हम दोनों भी परेशान हो गए कि इसको होश में कैसे लाएं। वहाँ पर पानी भी नहीं था। मैंने रितु से कहा कि अब क्या किया जाए तो रितु ने कहा- तुम मेरे मुँह में पेशाब करो, मैं तुम्हारा पेशाब श्रुति पर छिड़कती हूँ।
मैंने अपना लण्ड श्रुति की चूत से निकाल कर रितु के मुँह में डाल दिया और पेशाब कर दिया। अभी रितु ने थोड़ा ही पेशाब छिड़का था कि श्रुति होश में आ गई। रितु ने बाकी पेशाब पी लिया और बोली- वाह ! क्या स्वादिष्ट पेशाब है तुम्हारा !
श्रुति ने और चुदाई से मना कर दिया और कहा कि आज़ बहुत दर्द हो रहा है। लेकिन रितु ने उसे समझाया कि पहले दर्द होगा फ़िर मज़ा आएगा।
बड़ी मुश्किल से वो मानी तो मैंने फ़िर अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के मारने लगा। अब उसे मज़ा आ रहा था। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि श्रुति की चूत से क्रीम बाहर निकल रही है तो मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और 25 मिनट बाद मेरी क्रीम श्रुति के मुँह में थी। मैं भी तीन बार झड़ चुकने के बाद काफ़ी कमजोरी महसूस कर रहा था इसलिए रितु से कहा कि तुम्हें कल करूंगा। तो वो बोली- नहीं एक बार तो आज ही करो !
मेरा लण्ड बिल्कुल ढीला हो गया था और उसने चूस कर उसको दोबारा तैयार किया तो मैंने रितु को भी चोदा और जब उसे चोद रहा था तो श्रुति बोली- प्लीज़ ! मुझे दोबारा करो !
तो मैंने उसको भी दूसरी कुर्सी पर बिठा कर उसकी टांगें ऊपर कर ली।
अब थोड़ी देर श्रुति और थोड़ी देर रितु को चोद रहा था और कोई 35 मिनट के बाद मैंने अपनी क्रीम रितु की चूत में ही निकाल दी।Antarvasna
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