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Massage Girl in Porbandar: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Porbandar who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Porbandar that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Porbandar massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Porbandar who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Porbandar massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Porbandar massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Porbandar who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Porbandar employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Porbandar helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Porbandar

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Porbandar at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषक : राहुल गुप्ता Antarvasna

तृतीय भाग से आगे : अगले Antarvasna दिन रविवार था। सभी लोग जल्दी ही उठ गए थे क्योंकि विशाल भैया लखनऊ मेल से सुबह आठ बजे ही आ गये थे। हम लोग विशाल भैया से कोई एक साल के बाद मिल रहे थे। विशाल भैया को मेरे इलाज के बारे में कुछ पता नहीं था। सभी लोग खुश थे, चाय नाश्ते के साथ हंसी मजाक चल रहा था। मैं कुछ जादा ही उत्साहित थी, यह सोच कर कि आज विशाल भैया मुझे चोदेंगे।

अचानक विशाल भैया मेरी तरफ देखते हुए मम्मी से बोले- लगता है रश्मि छोटी की छोटी ही रह जाएगी, बढ़ेगी नहीं।

इस पर मम्मी ने मेरे इलाज के बारे में विशाल भैया को विस्तार से, गम्भीरता से बताया।

ठीक है ! मैंने भी डाक्टर लाल का नाम सुना है काफी मशहूर हैं, उन्होंने जो राय दी है वह ठीक है। जब तक मैं यहाँ हूँ। मैं ही अपना वीर्य पिला दूंगा !

और फिर हंसी मजाक चलने, होने लगा।

विशाल भैया चाय नाश्ता करने के बाद मम्मी से बोले- बुआ जी ! मुझे नींद आ रही है मैं रात को सो नहीं पाया।

मम्मी बोलीं- ठीक है, तुम स्लीपिंग सूट पहन कर कुछ देर आराम कर लो, जब खाना तैयार हो जाएगा, तब मैं तुमको उठा दूंगी।

इसके बाद मेरे फूफा अपने काम से बाहर चले गए, मम्मी और मैं खाने की तैयारी में लग गए।

खाना एक बजे तैयार हो गया। मम्मी ने मुझ से कहा- जाकर विशाल को जगा कर खाने के लिए बुला लो।

मैं भैया को उठाने के लिए उनके कमरे में गई। विशाल भैया सो रहे थे लेकिन उसका लंड पजामे के अन्दर पूरी तरह से खड़ा दिख रहा था। तभी मेरे दिमाग में सुबह की डोज लेने का खयाल आया और मैं उनके लंड को पजामे के ऊपर से ही पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी। इतने में भैया की आँख खुल गई हम दोनों ने एक दूसरे की तरफ सामान्य तरीके से देखा।

मैंने अपना हाथ लंड पर से हटा लिया और बोली- आप जब सोए हुए थे तो आप का लंड पूरी तरह से खड़ा था, देखिए अभी भी खड़ा है ! यह बताइये कि आप सपने में किसको चोद रहे थे? इतने में मम्मी भी कमरे में आ गईं, उन्होंने मेरी बातें सुन ली और भैया के पजामे की तरफ देखने लगी जिसमें भैया का लंड अभी भी ठुनकी मार रहा था और भैया उसको बैठाने की कोशिश कर रहा था …

हाँ विशाल ! बताओ… कोई लड़की है जिसकी तुम लेते हो?

विशाल भैया थोड़ा सा शरमाते हुए बोले- रेनू ! मेरी क्लास-मेट है !

अच्छा तो तुम उसी को नींद में चोद रहे थे… मम्मी ने व्यंग्य में कहा।

भैया मुस्कराने लगा।

फिर मम्मी ने कहा- चलो, अभी तुम्हारा मूड है ! रेनू समझ कर अपनी फुफेरी बहन को सुबह की डोज दे दो फिर आकर खाना खा लेना।

यह कहते हुए मम्मी कमरे से बाहर निकल गई।

विशाल अभी भी लेटा था उसने मेरी तरफ सेक्सी निगाहों से देखा और बोला- चल रश्मि पहली बार चुदने के लिए तैयार हो जा।

मैं बोली- मैं तो सुबह से ही तैयार हूँ…

तो आ जा ! मेरा लंड पजामे के बाहर निकाल ! इसने भी बहुत दिनों से चूत के दर्शन नहीं किये हैं, तेरी अनचुदी चूत को चोद कर यह मस्त हो जाएगा।

फिर मैने विशाल का पजामा पूरा उतार दिया. उसका लंड अभी भी खड़ा था, मैं गप्प से मुँह में ले कर चूसने लगी। भैया का लंड और कड़ा हो गया। मैं लंड के सुपारे को कस कर चूस रही थी, भैया मेरे मुँह को कायदे से चोद रहा था।

पांच मिनट के बाद वह बोला- तुम अपने सारे कपड़े उतार दो ! अब मैं तुम्हारी चूत को चोदूँगा।

मैंने सारे कपड़े उतार दिए। फिर भैया ने मुझे बिस्तर पर लिटाया, मेरी टांगें फैलाई और फिर 69 की अवस्था में मेरी चूत को चाटने लगा। मैं उसके लंड को कस कर चूसने लगी। जैसे जैसे भैया मेरी चूत को चूस रहा था, वैसे-वैसे मेरी चूत में चुदाई की चाहत बढ़ती जा रही थी, मेरी चूत ने पानी का फव्वारा छोड़ना शुरू कर दिया था। भैया का पूरा चेहरा मेरी चूत के पानी से भीग गया था।

भैया ने कहा- तुम तो बहुत जबरदस्त झड़ती हो ! लगता है तुम्हारी चूत अब चुदने के लिए तैयार है।

मैंने कहा- जी भैया… !

और फिर विशाल उठ कर बैठ गया और मेरी टांगें फैलाकर अपना फनफनाता हुआ लंड मेरी चूत के मुँह पर रख कर धीरे से अन्दर की तरफ ठेला।

हालांकि भैया का लंड थोड़ा पतला था लेकिन लम्बा था। फिर भी सुपारा घुसते ही मेरा चेहरा दर्द के मारे लाल हो गया।

भैया ने मेरी तरफ देखा और बोले- दर्द हो रहा है?

मैंने कहा- हाँ… बहुत दर्द हो रहा है।

भैया बोले- बस थोड़ा सा सह लो ! अभी यह दर्द मस्ती में बदल जएगा।

और भैया लगा कस कर पेलने।

भैया ने सही कहा था ! करीब 5मिनट के बाद मेरा सारा दर्द गायब हो गया था और मैं भैया से चिपटने लगी। विशाल मुझे कस कर चोदे जा रहा था !

मेरे मुँह से अनायास ही निकलने लगा- … ओह्ह्ह्ह्ह……आह्ह्ह्ह्… और कस कर चोदो मेरे अच्छे भैया… ओह माई गॉड प्लीज और अन्दर तक पेलो, मेरी बुर को चोद चोद कर भक्काड़ा कर दो प्लीज भैया… प्लीजऽऽऽ !

इस अलौकिक आनन्द से जैसे मैं पागल हुई जा रही थी और कई बार मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरे बुर से पानी का फव्वारा निकला हो।

इतने में भैया ने झट से अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाल लिया और मुझसे बोले- ले मेरे लंड को जल्दी से चूस ले ! माल निकलने वाला है !

मैंने तुरन्त उनका लन्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। थोड़ी ही देर में भैया का ढ़ेर सारा वीर्य मेरे मुँह में भर गया, मैं तुरन्त वीर्य को गटक गई भैया का वीर्य काफी स्वादिष्ट था।

इसके बाद हम लोग खाना खाने चले गए।

क्रमश: ………….. Antarvasna

Antarvasna

मेरा नाम कुसुम है। मैं मुम्बई में नौकरी करती हूं। मैं Antarvasna और मेरा भाई सुमित दोनों जुड़वां हैं. मैं बचपन से ही पढने में तेज थी तो इस वजह से घर में मेरे भाई को हमेशा डांट पड़ती थी कि देख तेरी बहन कितनी तेज है और तू नालायक …

मैं मुंबई में अकेली रहती थी एक बी एच के हाउस में मलाड में, एक साल बाद मेरे भाई का भी मुंबई में जॉब लग गया ..मम्मी पापा ने उसे मेरे पास ही रहने को कहा, हम दोनों साथ रहते थे मगर हमारे अंदर कोई ग़लत फीलिंग नहीं थी …

मैं कभी कभी जब ज्यादा चुदाने के लिए भूखी हो जाती थी तो शायद होश नहीं रहते थे और भाई का अंडरवियर लेकर उसे अपने चूत में ऊँगली से डालती थी … मुझे पता नहीं था कि मेरा भाई मेरे बारे में क्या सोचता है। कुछ दिनों बाद मैंने नोटिस किया कि मेरी ब्रा और पैंटी कभी भी मेरे रखे हुई जगह पे नहीं मिलती थी और उन पे सिलवटें भी बहुत होती थी. मुझे शक हो गया था कि मेरा भाई भी मेरी ब्रा पैंटी प्रयोग करता है मुठ मारने के लिए … फ़िर भी हम चुप रहते …अब असली कहानी …

मैं अपने बॉस से पहले चुदवा चुकी थी और वही था मेरे एक साल में दो प्रमोशन का राज … मेरे बॉस की उमर ४० की थी और उसका बॉस ५० का था … मैं २६ की थी …

क्यूँकि अभी मेरा भाई मेरे घर पे रहता था तो बॉस को बहुत दिनों से मौका नहीं मिला था मुझे चोदने का .. तो वो मुझसे काफी नाराज रहता था और मुझे कभी कभी डांटता भी था ऑफिस में …

मेरा भाई अपने दफ्तर के काम से पुणे जा रहा था दो दिन के लिए ..

मौके का फायदा उठाते हुए मैंने अपने बॉस को कहा कि आज कुसुम आपकी है, मेरा भाई दोपहर को ही घर से निकलने वाला था, मैं शाम को जब घर आई तो मुझे लगा मेरा भाई जा चुका है .. मैंने अपने बॉस को फ़ोन लगाया और बातें करने लगी … मेरा भाई उस वक्त बाथरूम में था .. उसे मेरे बॉस की आवाज़ तो नहीं पर मेरी आवाज़ साफ साफ सुने दे रही थी … मैंने अपने बॉस से कहा .. आज कुसुम को चुदवाना है अपने डार्लिंग से.. कुसुम की चूत बहुत दिनों से प्यासी है…मैं थक गई हूं अपने भाई का अंडरवीयर अपनी चूत में डाल डाल कर.. मुझे लण्ड चाहिएप्लीज़ जल्दी से आ जाओ और मुझे जम कर चोदो…

उधर मेरा भाई मेरी बातें सुनकर गरम हो गया था.. वो नहा कर बाहर निकला तो उसका लण्ड तन कर खड़ा था टॉवेल के ऊपर से ही दिख रहा था … मैं समझ गई कि इसने सब सुन लिया फ़िर भी नाटक कर के बोली- तुम गए नही अब तक … तो उसने कहा नही मेरे पेट में दर्द है, मैंने कहा कुछ दवा ले लो, उसने कहा नही मम्मी ने जो तेल दिया है उस से मालिश कर के सो जाऊँगा … फ़िर मैं समझ गई कि आज भी मेरी चूत भूखी रह जायेगी क्यूँकि मेरा भाई नहीं जाने वाला …

मेरा भाई नाटक कर रहा था .. उसके दिमाग में सिर्फ़ मेरी बातें घूम रही थी … वो भी अपनी प्यास मेरी चूत से मिटाना चाह रहा था … उसने मुझसे कहा , कुसुम प्लीज़ इस तेल से मेरे पेट पर मालिश कर दो ना … मैंने कहा ठीक है .. वो अपना बनियान उतर कर बेड पर लेट गया .. मैंने उस वक्त बस नाईटी पहनी थी मैंने ना ही पैंटी ना ब्रा पहनी थी क्यूँ कि मुझे लगा था थोडी ही देर में मेरे बॉस आयेंगे और मुझे सब उतरना पड़ेगा …

मैं उसके पेट पे तेल मालिश कर रही थी, उसके नाभि के नीचे बहुत सरे बाल थे जो जैसे जैसे नीचे जाते थे और ज्यादा थे … मेरे थोड़ी देर मालिश करने पे वो बहुत गरम हो चुका था क्यूँकि उसके पायजामे के ऊपर से उसका तना हुआ लंड दिखाई देने लगा था फ़िर भी मैं चुप चाप मालिश करती रही …
थोडी देर बाद उसने कहा- पायजामा थोड़ा नीचे सरका कर थोड़ा नीचे तक मालिश करो न …

मैंने वैसा ही किया … अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था … मैं भी सोच रही थी कि कब अपनी प्यास मिटाऊँ अपने सगे भाई के लंड से … इतने में वो बोल पड़ा हाथ अंदर डाल न … मैंने कहा कहाँ अंदर .. उसने कहा पायजामे के अंदर .. मैंने मना कर दिया .. . मन तो बहुत कर रहा था मगर वो मेरा भाई था इसलिए मैंने ना कह दिया … उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और जबरदस्ती अपने लंड पे ले गया, मैंने एक झटके से उसका हाथ दूर कर दिया …फ़िर वो बेड से उठ गया और मुझे जकड लिया और बोला सिर्फ़ अपने बॉस से चुदवाओगी … कब तक तेरे ब्रा और पैंटी से मुठ मारता रहूँगा … मेरे लंड ने क्या पाप किए हैं?.. मैं ये सब सुन कर दंग रह गई … उसने कहा मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगा .. बस तू वो कर जो मैं कहता हूँ …

फ़िर …

अगले भाग में पढिये…

कि कैसे पहले मेरे भाई ने फ़िर मेरे बॉस ने फ़िर मेरे बॉस के बॉस ने मुझे चोदा, उसके बाद मेरे भाईसुमित ने अपने बॉस से भी मुझे चुदवा कर अपना प्रमोशन लिया ! Antarvasna

Hindi Porn Stories

हेलो पाठको, मैं अन्तर्वासना Hindi Porn Stories का नियमित पाठक हूँ। मैं अपनी कहानी आप सभी को बताना चाहता हूँ। यह करीब पाँच साल पुरानी बात है, जब मैं स्नातिकी के प्रथम वर्ष में था। कॉलेज की छुट्टियों में मेरे घर के सभी सदस्य गाँव चले गए थे। मेरा रहने का प्रबंध मेरी चाची के यहाँ कर दिया था। मैं बहुत खुश था।

मैं सुबह जल्दी से तैयार होके चाची के यहाँ चला गया। चाची ने दरवाजा खोला, वो बहुत ही अलग लग रही थी। उन्होंने साड़ी पहनी थी। साड़ी में वो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। मेरा मन बदलने लगा, मैं कभी कभी चाची के बारे में सोचता था और मुठ मारता था।

उन्होंने मुझसे बैठने को कहा और अन्दर रसोई में चली गई, कुछ देर बाद चाची कुछ खाने को लाई। मैंने उनसे चाचा और बच्चों के बारे में पूछा, तो पता चला कि चाचा सुबह ही गाँव गए हैं और बच्चे अपनी नानी माँ के पास गए हैं, दो दिन बाद लौटेंगे।

मैं यह सोच कर सोचता ही रह गया कि आज के बाद के आठ दिन मुझे उनके साथ रहना है, और दो दिन हम दोनों को अकेले ही रहना है। वैसे तो मुझे चाची पसंद ही नहीं, बल्कि वो तो मेरी ड्रीम गर्ल थी। उनको जब पहली बार देखा था तो वो बहुत ही सादगीपूर्ण थी। उन्होंने कभी मुझे अपने बच्चों से अलग नहीं समझा था। कुछ साल पहले जब मैं उनके घर गया था तो उन्होंने मुझे छोटा समझ के मेरे सामने अपनी साड़ी बदली थी, तब मैं सातवीं कक्षा में था। तभी से आज तक मैं उनके बारे में सोचता और अपने मन को शांत करता था। उनके उस सादे रूप में और अ़ब दो बच्चों को जन्म देने के बाद बहुत बदलाव हुए हैं, वो और भी सुन्दर होती जा रही हैं।

उस दिन तो वो गजब लग रही थी। मैं उनको चोरी से देखता हूँ, यह बात उन्हें पता चल चुकी थी। मगर उन्होंने इस बात का जिक्र कभी किसी से नहीं किया था और आज मैं उनके साथ अकेला था। उन्होंने मेरी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछना शुरु किया। वैसे तो मैं उनसे ज्यादा बात तो करता ही था, मैंने भी उनसे उनकी कॉलेज-लाइफ के बारे में पूछा और हम बातों में इतने घुल मिल गये कि हमें वक्त का लिहाज भी नहीं रहा। कोई एक बजे हमने खाना खाया। उन्हें मदद करने के बहाने (देखने के लिए) रसोई में चला गया। वहाँ बरतन मांजते समय मैंने एक दो बार उन्हें छू भी लिया था। उन्होंने कुछ भी नहीं कहते हुए सब अनदेखा कर दिया। यह देख कर मैं और भी उनकी तरफ आकर्षित हुआ।

काम निपटा के हम दोनों बाहर आ गये। टीवी उनके बेडरूम में होने के कारण हम दोनों बेडरूम में चले गए। वो बेड पर बैठी और मैं ठीक उनके सामने बेड से नीचे बैठा था।

टीवी पर कोई होरर फ़िल्म चल रही थी। बेडरूम में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था और होम- थियेटर होने के कारण आवाज कमरे में गूंज रही थी। डर के कारण उनके पैर मुझे छू रहे थे, यह देखकर मैंने उन्हें महसूस करना शुरु किया। चाची फ़िल्म के मज़े ले रही थी और मैं उनके स्पर्श का अनुभव कर रहा था। अचानक मरे कंधों को चाची ने दबोचा, मैं अपने गहरे सपने से जाग गया तो देखा कि चाची के दोनों पैर मेरे दोनों कंधों के बगल में थे। अगर मैं घूम जाता तो चाची की मांसल पिंडलियों में मैं अपने आपको खो देता। मैं उनके शरीर को महसूस करने लगा।

अचानक डर के मारे चाची ने अपना चेहरा मेरे सर और दाएं कंधे के बीच दबाया। उनके गदराये शरीर ने मानो मुझे पागल कर दिया। उनकी दोनों टांगों के बीच मेरा सर उनकी जांघों से और उनके रसीले मादक आमों से टकरा रहा था। अचानक वो फ़िल्म के माहौल से बाहर आ गई और अपने आपको मुझसे इतना चिपके देख हड़बड़ा गई। मैं उनके दोनों पैरों के बीच फंसा था, यह देख उन्हें मुझ पर हंसी आ रही थी, मगर मेरी होने वाली हलचल से उन्हें कुछ और महसूस होने लगा था। मैं उनके मम्मों के और चूत के इतने करीब था कि उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और मेरे बाल भीगी चूत के कारण गीले हो रहे थे। मेरी हालत पतली हो गई थी और यह देख कर वो वापिस फ़िल्म देखने लगी मगर उनके मन में कुछ और ही चल रहा था।

कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि उनका बायाँ हाथ मेरे कंधे से मेरे गले तक आ गया था और उनकी चुचियाँ मेरे सर को चुभ रही थी। एकाएक उन्होंने अपने बायें हाथ से मेरे सर को अपनी ओर घुमाया और मेरी आँखों में आँखें डालकर अपने रसीले होंटों को मेरे होंटों से लगाकर चूमना शुरु किया। मेरे लिए ये सब नया था, मैं पहले डर गया मगर थोड़ी देर बाद मैंने भी साथ देना शुरु किया। अ़ब मेरे हाथ चाची को टटोल रहे थे। मैंने उनके स्तनों को ऊपर से सहलाना शुरु किया वह भी यही चाहती थी। उनके हाथ मेरी पीठ और बालों में घूम रहे थे। उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया।

मैं अब बेड पर आ गया। मैं उनके ऊपर और वो मेरे नीचे थी। मैं अपने हाथों से उनके वक्ष सहला रहा था। एक एक करके उनके दोनों मम्मों को बारी-बारी ब्लाऊज़ के ऊपर से मुँह में ले रहा था, मेरे थूक के कारण उनकी ब्लाऊज़ गीली हो गई थी। वो भी उसका आनन्द ले रही थी। गर्मी के साथ मेरी थूक के कारण उन्हें ठंडी का एहसास हो रहा था और वो मुझसे और लिपटती सी जा रही थी।

तभी अचानक मैंने अपनी पैन्ट के ऊपर चाची के हाथ का जोर महसूस किया। वो मुझे छूना चाहती थी, मेरे साथ का पूरा आनन्द लेना चाहती थी। मेरी आँखों में उनके लिए जो वासना थी उसे वो पीना चाहती थी। मैंने उनकी तरफ देखा, वो आँखों को बंद कर के मेरे हर एक स्पर्श को महसूस कर रही थी। यह देख उनके ब्लाऊज़ के बटन मैंने अपने दांतों से एक एक करके खोल दिए। अ़ब उनके दोनों मम्मे खुले थे, बिना ब्रा के मैं उन्हें पहली बार देख रहा था। उन्हें देख कर मैं पागल हो गया और उन्हें मसलने लगा, अपने हाथों में ले के एक एक करके रगड़ने लगा अपने जीभ से उनके साथ खेलने लगा, अपने दांतों से उन्हें काटने लगा।

यह देख वो भी मचलने लगी, मेरे बालों को पकड़ के अपने हाथों से मेरा सर मम्मों पे दबाने लगी। यह देख मैं और जोरों से उनके दोनों मम्मों से खेलने लगा। अ़ब तक वो एक बार झड़ चुकी थी। उनके मम्मो को तो मैंने टमाटर की तरह लाल कर दिये थे, उन्हें देख वो बोली,”छोटेऽऽ आम ही खायेगा? और मुझे कुछ नहीं खिलायेगा? आआअ उईईईइ।”

तभी मैं बोला,”चाची मैं तो पूरा आपका तो हूँ जहाँ से चाहे खा लीजिये !”

तब चाची ने मुझे अपने नीचे ले लिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगी, मानो मेरे लिए ही तड़प रही थी। मेरा कच्छा छोड़ चाची ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे होंटों से अपने होंटों को गड़ा लिया और चूमने लगी। ऐसा लग रहा था मानो मैं उनके लिए नहीं, वो मेरे लिए प्यासी हैं !

फिर करीबन ५ मिनट के बाद वो मेरे ऊपरी शरीर को चूमते चूमते मेरे कच्छे तक पहुँच गई और मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लंड को ऊपर से ही चूमती रही। उनकी यह अदा देख मानो वो मुझे याद दिलाना चाहती थी, जितनी बार उन्हें देख मेरे लंड खड़ा होता था तब तब वो मेरे लौड़े को देख कर तरसती थी। मैं सोच ही रहा था कि उन्होंने मेरे ७ इन्च के लौड़े को कच्छे से बाहर निकाला और अपने दांतों से खाने ही लगी और मेरे कच्छा निकाल फ़ेंका। अपने दांतों से मेरे लंड को चबाती और फिर अपने होंटों से ऐसे चूमती रही मानो मेरा लंड नहीं कोई लोलीपोप है। करीबन ५ मिनट मुझे खाने के बाद चाची मेरे लंड से पानी निकाल कर गटागट पी गई। इस बीच वो भी दो बार झड़ गई। अभी तक साड़ी उनकी कमर पर ही थी। उन्हें कोई भी मौका दिए बिना मैं उनके ऊपर आ गया, अपने सारे शरीर का बोजझ उनके ऊपर डालते हुए मैं उन्हें चूमता रहा। उनके होंटों को करीबन ५ मिनट तक चूमने के बाद उनके गले को और फिर उन के मम्मों को ऊपर से हाथ मारते हुए कब मैं उनकी साड़ी और पेटीकोट को उनके शरीर से अलग किया, पता भी न चला।

मगर यह साजिश गहरी थी, यह पता चल गया क्योंकि उन्होंने ब्रा के साथ साथ अपनी पैन्टी भी नहीं पहनी थी। ब्रा घर पर रहने के कारण नहीं पहनी होगी मगर साड़ी के साथ पैन्टी नहीं, वो भी अंकल सुबह ही गाँव गए हैं तो पैन्टी न पहनने का कोई सवाल नहीं था। जब वो अंकल के साथ सेक्स करती तो वो दिन में दो से तीन बार अपनी पैन्टी बदलती थी, यह बात मुझे पता थी। अ़ब अंकल गाँव गए हैं तो जाहिर है कि अंकल से अपनी भूख तो जरुर मिटाई होगी उन्होंने। फिर भी उन्होंने पैन्टी नहीं पहनी थी और रही मेरे उनके यहाँ ठहरने की बात तो यहाँ तो एक हफ़्ते पहले ही उन्हें पता था कि मेरे घर के सभी लोग गाँव जाने वाले हैं।

तो क्या बस मैं शुरु हो गया उनके पेट के ऊपर से नाभि तक चूमते हुए मैं उनकी जांघों के बीच उनकी मुनिया पर आ गया। अपनी जीभ उनकी जांघों पर फेरते हुए मैं उनके भगोष्ठों के ऊपर से फेरने लगा। वो चहक उठी और मैं भी उस गंध के कारण रोमांचित हो उठा था। मैं धीरे धीरे उनके अन्दर अपनी जीभ को डालते हुए उनके अंदरूनी होंटों को अलग करने लगा। वो भी यह प्रयास कर रही थी कि मैं पूरी तरह से उनमें समा जाऊं ! मैं उनकी यह तड़प और बढ़ाना चाहता था। मैं धीरे धीरे उनको पी रहा था कि अचानक उन्होंने अपने पैरों की पकड़ कड़ी कर दी और मेरे मुँह को अपने अमृत से भिगो दिया। मगर मैं रुकने वाला नहीं था, मैं और जोर से उनमें समाने लगा, अपने होंटों से उनके आंतरिक होंटों का सारा रस पीने लगा। वो एक बार फिर मेरे मुंह में आ गई।

अ़ब मैं अपने हाथों की उंगलियों का उपयोग करते हुए उन्हें फिर से मेरे अगले कार्यक्रम के लिए तैयार करने लगा। अब मानो वो मेरे सामने गिड़गिड़ाने लगी और बोली,”छोटे, अ़ब तो तेरे लौड़े का स्वाद मेरी मुनिया को चखा दे, नहीं तो रो रो के दम तोड़ देगी ! आआआआआआ ईईईईईईईए “

यह सुनकर अ़ब मुझे उन पर तरस आ गया, मैंने कहा,”हाँ चाची ! थोड़ा सा और, बस फिर आप मुझे ही खा लेना !”

यह सुनकर मानो वो भी मेरे उंगलियों को साथ देने लगी। अपने कूल्हे पहले से अधिक उछालने लगी। अ़ब मैं अचानक रुक गया और अपने लौड़े को उनके मुँह तक ले गया। उनके चूमने से वो और मस्त हो गया। अ़ब उसे उनके सारे शरीर पर फिरा के उनके मम्मों से होते हुए मैं उनकी नाभि पर आकर उसे घुमाने लगा तो चाची और जोर जोर से मिन्नत करने लगी। उनकी भट्टी में मानो आग लगी थी, उनसे रहा नहीं जा रहा था। फिर मैं उनकी मुनिया को तरसाने लगा तो चाची ने अपना पूरा जोर लगा के मेरे बालों को पकड़ के मुझे अपने ऊपर ले लिया फिर भी मैं मानने वाला थोड़े ही था। मैंने अपने होट उनके होंटों से लगा लिये और उनको व्यस्त रखने की कोशिश करने लगा मगर उन्होंने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ के अपनी आंतरिक होंटों से खाने लगी। देखते ही देखते उन्होंने मेरे आधा लंड अन्दर ले लिया। अ़ब क्या था, मैं तो कबसे तरस रहा था इस दिन के लिए ! मैंने जोर लगा के सारा का सारा अन्दर डाल दिया। तभी चाची जोर से चिल्लाई और मुझसे लिपट गई। मैंने अपने धक्के आहिस्ता-आहिस्ता शुरु किये।

मुझे चाची की ज़कड़ से लगा कि चाची जल्दी ही झड़ जायेगी। मैंने अपने धक्के धीरे से चालू किये। फिर अचानक अन्दर मुझे ज़कड़न और दबाव महसूस होने लगा और चाची झड़ गई।

मैं अभी नहीं आने वाला था। झड़ने के कारण उनकी मुनिया और भी गीली हो गई और मैंने अपना काम जारी रखा। थोड़ी देर बाद वो भी फ़िर साथ देने लगी और अपने कूल्हे मेरे साथ साथ उछालने लगी। मैं समझ गया कि अ़ब तो मज़ा ही मज़ा है। हम दोनों भी एक दूसरे को चूमते रहे। चाची ने तो मुझे अन्दर बाहर आते समय अड़चन ना हो इसलिए अपने पैर हवा में उठा लिए। मैंने फ़िर वही ज़कड़न को महसूस किया इसलिए मैंने अपनी रफ्तार बढ़ाई। चाची भी बराबर का साथ देने लगी और हम एक साथ एक दूसरे में मिल गए। मैं फिर भी रुका नहीं जब तक चाची ने मेरे पूरे लंड का रस अपनी योनि में नहीं लिया। तब तक मैं नहीं रुका। फिर कुछ देर बातें करते हम वैसे ही पड़े रहे। मेरा लंड अभी तक उनकी मुनिया से बाहर नहीं निकला था। उनके मम्मों से खेलते खेलते और बातें करते करते हम दोनों सो गए फिर अगले दौर के लिए !

दोस्तो, कहानी अभी बाकी है।

यह कहानी कैसी लगी, मुझे जरुर बतायें ! Hindi Porn Stories

प्रेषक – राम कुमार Antarvasna stories

राम कुमार (ग्वालियर से) का Antarvasna stories अन्तर्वासना के सभी पाठकों को खड़े लण्ड का सलाम। मैं अपना एक सच्चा अनुभव लेकर हाज़िर हूँ जिस को पढ़कर आँटियाँ, चाचियाँ, मामियाँ, भाभियाँ और लण्ड की प्यासी लड़कियों की चूत गीली हो जाएगी और लंड के लिए तड़प उठेंगीं। और जिन लड़कों के पास चूत की व्यवस्था होगी, वो चूत चोदने लगेंगे और जिनके पास नहीं होगी, वो मूठ मारने लगेंगे।

यह बात मई की है। मेरी मामी जो लगभग ३२ साल की है और दो बच्चों की माँ है, रंग गोरा, शरीर भरा हुआ, न एकदम दुबला न एक दम मोटा-ताज़ा। मतलब बिल्कुल गज़ब की। पर चूचियाँ तो दो-दो किलो के और गाँड कुछ ज़्यादा ही बाहर निकले हैं। मेरे ख़्याल से उसकी फिगर ३८-३२-३९ होगी।

मैं उस मामी को चोदने के चक्कर में दो सालों से लगा था, और उसके नाम से मूठ मारा करता था। मेरे मामा (४०), जो ग्वालियर में ही रहते थे, रेडीमेड कपड़ों के धंधे में थे और अपना माल दिल्ली ख़ुद ही जाकर लेकर आते थे।

एक दिन जब मैं अपने घर पहुँचा तो मामा वहाँ थे, और मम्मी से बातें कर रहे थे। मैंने मामा से पूछा – “अब नये कपड़े कब आ रहे हैं?”

“बस आज ही लाने जा रहा हूँ। पर इस बार माल दिल्ली से नहीं, मुम्बई से लेकर आना है। वहाँ एक नामी कम्पनी से मेरी बात तय हो गई है। मुझे वहाँ से आने में चार-पाँच दिन तो लग ही जाएँगे। तब तक मैं चाहता हूँ कि तुम दिन में एक बार ज़रा दुकान जाकर काम देख लेना और रात में मेरे घर चले जाना।”

“तू कुसुम और बच्चों को यहीं क्यों नहीं छोड़ देता?” मेरी मम्मी ने पूछा।

“मैंने कुसुम से कहा था कि बच्चों के साथ दीदी के यहाँ रह लेना, पर वह कह रही थी कि चार-पाँच दिनों के लिए आप लोगों को क्यों परेशान करना, बस राम को बोल देना, वो तुम्हारे आने तक हमारे यहाँ ही आ जाए और दुकान को भी काम देख ले। नौकरों के भरोसे दुकान छोड़ना ठीक नहीं। तुझे कोई दिक्क़त तो नहीं?” – मामा बोले।

“अभी तो मैं पूरा खाली ही हूँ। परीक्षाएँ भी खत्म हो चुकी हैं। चलिए एक अनुभव के लिए आपकी दुकान को भी सँभाल लेते हैं (और मामी को भी)।”

“आज ८ बजे मेरी ट्रेन है, तू सात बजे घर आ जाना और मुझे स्टेशन छोड़ कर वापिस मेरे घर ही चले जाना।”

“ठीक है मैं ६:३० बजे आ जाऊँगा।”

६:३० बजे मैं मामा के घर पहुँच गया, मामा सफ़र की तैयारी कर रहे थे और मामी पैकिंग में मामा की मदद कर रही थी। पैकिंग के बाद मामी ने मामा को खाना दिया और मुझे भी खाने के लिए पूछा।

“मामा को छोड़कर आता हूँ, फिर खा लूँगा।” मैंने कहा।

७:३० बजे मामा और मैं स्टेशन पहुँच गए। मामा की ट्रेन सही समय पर आ गई, मामा का आरक्षण था, मामा अपनी सीट पर जाकर बैठ गए और पाँच मिनट के बाद ट्रेन मुम्बई के लिए चल पड़ी। चलते-चलते मामा बोले,”मामी और बच्चों का ख्याल रखना।”

“आप यहाँ की फिक्र ना करें, मैं मामी और बच्चों का पूरा ख्याल रखूँगा।”

मैंने स्टैण्ड से अपनी बाईक ली और ८:३० तक घर आ गया। मैंने दरवाज़े की कॉलबेल बजाई तो मामी ने दरवाज़ा खोला और बोली,”हाथ-मुँह धो लो, अब हम खाना खा लेते हैं।”

“आपने अभी तक काना नहीं खाया?” मैंने पूछा।

“बस तुम्हारा ही इन्तज़ार कर रही थी। बिट्टू और सोनू तो खाना खाकर सो गए हैं। तुम भी खाना खा लो।”

मैं और मामी डिनर की टेबल पर एक-दूसरे के आमने-सामने बैठ कर खाना खा रहे थे। जब मामी निवाला खाने के लिए थोड़ा झुकती उनकी चूचियों की गहराईयों के दर्शन होने लगते और मेरा लंड विचलित होने लगता। पर स्वयं को सँभाल कर मैंने खाना खतम किया और टीवी चालू कर लिया। उस समय आई पी एल मैच चल रहे थे, मैं मैच देखने लगा।

कुछ देर बाद मामी बर्तन साफ करने लगी और वह भी मैच देखने लगी। जल्दी ही उसे नींद आने लगी।
“मैं तो सोने जा रही हूँ, तुम भी हमारे कमरे में ही सो जाना, तुम डबल बेड में बच्चों के एक तरफ ही सो जाना” मामी बोली।

“ठीक है, बस एक घन्टे में मैच खत्म होने वाला है। आप सो जाओ, मैं मैच देखकर आता हूँ।”

मामी चली गई और मैं मैच देखने लगा।

कुछ देर बाद बाद ब्रेक हुआ और मैं चैनल बदलने लगा, और एक लोकल चैनल पर रुक गया। डिश वाले एक ब्लू-फिल्म प्रसारित कर रहे थे। अब काहे का मैच, मैं तो उसी चैनल पर रुक गया और वो ब्लू-फिल्म देखने लगा और मेरा लंड हिचकोले मारने लगा।

मेरा साढ़े पाँच इंच का लंड लोहे की तरह सख्त होकर तन गया, मैं अपनी पैंट के ऊपर से ही उसे सहलाने लगा। मेरा लंड चूत के लिए फड़फड़ाने लगा और मेरी आँखों के सामने मामी का नंगा बदन घूमने लगा और मैं मामी के नाम से मूठ मारने लगा। मैं मन ही मन मामी को चोद रहा था, कुछ देर बाद लंड ने एक पिचकारी छोड़ दी। मेरा वीर्य लगभग पाँच फीट दूर छिटका, और यह बस मामी के नाम का कमाल था।

अब मेरा दिमाग मामी को हर हाल में चोदने के बारे में सोचने लगा, तब तक फिल्म भी खत्म हो गई थी। मैंने टीवी बन्द किया और बेडरूम की ओर चल दिया। जैसे ही मैंने कमरे की बत्ती जलाई, मेरी आँखें फटी रह गईं। बिल्लू और सोनू, दोनों दीवार की ओर सो रहे थे, और मामी बीच बिस्तर में। उनकी साड़ी घुटनों के ऊपर तक उठ गई थी और उनकी गोरी-गोरी जाँघें दिख रहीं थीं। उनका पल्लू बिखरा हुआ था, ब्लाउज़ के ऊपर के दो हुक खुले थे और काली ब्रा साफ-साफ दिख रही थी। मामी एकदम बेसुध सो रहीं थीं।

मैंने तुरन्त लाईट बन्द की और अपने लंड को सहलाते हुए सोचा,’क़िस्मत ने साथ दिया तो समझ हो गया तुम्हारा जुगाड़ !’

मैं जाकर मामी के पास लेट गया, मामी एकदम गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी के गले पर रख दिया और हाथ को नीचे खिसकाने लगा। अब मेरा हाथ ब्लाउज़ के हुक तक पहुँच गया। मैं आहिस्ते-आहिस्ते हुक खोलने लगा। तभी मामी बच्चों की ओर पलट गई, इससे मुझे हुक खोलने में और भी आसानी हो गई और मैंने सारे हुक खोल दिए। ब्रा के ऊपर से ही मामी की चूचियों को सहलाने लगा।

मामी के स्तन एकदम मुलायम थे। पर ब्रा ने उन्हें ज़ोरों से दबा रखा था, इस कारण ऊपर पकड़ नहीं बन रही थी। मैं अपना हाथ मामी की ब्लाउज़ के पीछे ले गया और ब्रा के हुक को भी खोल दिया। अब दोनों स्तन एकदम स्वतंत्र थे। मैं उन आज़ाद हो चुके बड़े-बड़े स्तनों को हल्के-हल्के सहलाने लगा, फिर मैं एक हाथ उनकी जाँघ पर ले गया और ऊपर की ओर ले जाने लगा पर एक डर सा भी लग रहा था कि कहीं मामी जाग ना जाए। पर जिसके लंड में आग लगी हो वो हर रिस्क के लिए तैयार रहता है और लंड की आग को सिर्फ चूत का पानी ही बुझा सकता है।

हिम्मत करके मैं अपने हाथ को ऊपर ले जाने लगा। जैसे-जैसे मेरा हाथ चूत के पास जा रहा था, मेरा लंड और तेज़ हिचकोले मार रहा था।

अब मेरा हाथ मामी की पैन्टी तक जा पहुँचा था। पैन्टी के ऊपर से ही मैंने हाथ चूत के ऊपर रख दिया। चूत बहुत गीली थी और भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने साड़ी को ऊपर कर दिया और पैन्टी को नीचे खिसकाने लगा। थोड़ी मेहनत के बाद मैं पैन्टी को टाँगों से अलग करने में कामयाब रहा।

अब मैं हाथ को चूत के ऊपर ले गया और चूत को प्यार से सहलाने लगा। मामी अभी तक शायद गहरी नींद में थी। मैंने एक हाथ मामी की कमर पर रखा और उन्हें सीधा करने लगा।

मामी एक ही झटके से सीधी हो गई। मैं अपनी टाँग को मामी की टाँगों के बीच ले गया और मामी की टाँगों को फैला दिया। अब मैं नीचे खिसकने लगा और मैं जैसे ही चूत चाटने के लिए मुँह चूत के पास ले गया, मामी ने हाथ से चूत को ढँक लिया।

मेरी तो गाँड फट गई, रॉड की तरह तना हुआ लौड़ा एकदम मुरझा गया, दिल धाड़-धाड़ धड़कने लगला।

तभी मामी उठी और फुसफुसाकर बोली,”ये सब यहाँ नहीं। बिट्टू और सोनू जाग सकते हैं। अब तक तो मैंने किसी तरह अपनी सिसकियाँ रोक रखीं थीं पर अब नहीं रोक सकूँगी। हम ड्राईंगरूम में चलते हैं।”

इतना सुनते ही मेरा लंड फिर से क़ुतुबमीनार बन गया। मामी जैसे ही बिस्तर पर से उठी, मैंने मामी को अपनी बाँहों में भर लिया और उनके होंठों को चूमने लगा। वह भी मेरे होंठों पर टूट पड़ी। हम एक-दूसरे के होंठों को पागलों की तरह निचोड़ने लगे।

मैं उनके होंठों को चूमते हुए अपने दोनों हाथ उनकी गांड तक ले गया और उन्हें उठा लिया। मामी ने अपने पैर मेरी कमर के गिर्द लपेट दिए। मैं उन्हें चूमते हुए ड्राईंगरूम तक ले आया और मामी को लेकर सोफे पर बैठ गया।

मामी मेरी गोद में थी, ब्लाउज़ और ब्रा अभी भी मामी के कंधों से लटक रहे थे। पहले मैंने ब्लाउज़ को निकाल फेंका, फिर ब्रा और एक चूची को हाथ से मसलने लगा और साथ ही दूसरी चूची को चाटने लगा।

अब साड़ी की बारी थी, मैंने साड़ी भी निकाल फेंकी, अब पेटीकोट बेचारे का भी शरीर पर क्या काम था। अब मामी एकदम नंगी हो चुकी थी। लाल नाईट-बल्ब की रोशनी में मामी का नंगा बदन पूर्णिमा में ताज़ की तरह चमक रहा था और इस वक्त मैं इस ताजमहल का मालिक था।

अब मामी मेरे कपड़े उतारने लगी। मेरे सारे कपड़े उन्होंने उतार दिए और मैं सिर्फ अपनी फ्रेंची अण्डरवियर में रह गया पर वह भी अधिक देर न रह सका। उन्होंने वह भी एक ही झटके में उतार फेंकी और फिर मामी ने मेरे साढ़े पाँच इंच लम्बे विकराल लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

कभी मामी लंड पर, तो कभी अंडकोष से सुपाड़े तक जीभ फिराती, कभी लंड को हल्के से काटती, सुपाड़े पर थूकती और फिर उसे चाट जाती। मेरा तो बुरा हाल कर दिया और मेरे लंड ने मामी के मुँह पर अपनी पिचकारी मार दी। उनका पूरा चेहरा मेरे वीर्य से सन गया था। मैंने अपने दोनों हाथों से सारा वीर्य उनके चेहरे पर मल दिया।

“दूसरी बार में भी इतना माल? तेरा लंड है या वीर्य का टैंक?” – मामी ने कहा।

मैं यह सुनकर हैरान हो गया, मेरी हैरानी जानकर उन्होंने बताया – “जब तू ब्लू-फिल्म देख रहा था और मेरे नाम से मूठ मार रहा था तब मैं पानी पीने के लिए रसोईघर में आई थी और तेरे लंड की धार को देख कर मेरी कामवासना की प्यास जाग गई और मैं बेडरूम में अपने कपड़ों को जान-बूझ कर अस्त-व्यस्त कर लेट गई थी। वहाँ आने के बाद अगर तू ऐसी हरकतें नहीं करता तो आज मैं ही तेरा जबरन चोदन कर देती।”

“तरबूज़ तलवार पर गिरे या तलवार तरबूज़ पर, कटना तरबूज़ को ही है। अब तो आज रात सचमुच में जोरदार चोदन होगा। आज रात अगर आपसे रहम की भीख न मँगवाई तो मेरा भी नाम राम नहीं।” मैंने कहा।

“चल देखते हैं, कौन रहम की भीख माँगता है !” मामी ने भी ताना सा मारा।

मामी के ऐसा कहते ही मैंने मामी को ज़मीन पर लिटा दिया और उनकी चूत पर टूट पड़ा, अपनी जीभ को चूत में जितना हो सकता था अन्दर डाल दिया और जीभ हिलाने लगा। चूत के गुलाबी दाने को जैसे ही मैं हल्के-हल्के काटता-चूसता, वह तड़प उठती और आआहहहहहह आआहह्ह्हहहह करने लगती।

उसने टाँगों से मेरे सिर को जकड़ लिया और टाँगों से ही सिर को चूत में दबाने लगी और बालों में हाथ फेरने लगी। मैं चूत-अमृत पीते हुए दोनों स्तनों को मसल रहा था… तभी अचानक मामी का शरीर अकड़ने लगा उनकी चूत ज़ोरदार तरीके से झड़ने लगी।

मैंने चूत को चाटकर साफ कर दिया और जैसे ही मैं मामी के ऊपर आने को हुआ, मामी ने मुझे रोका और गेस्ट-रूम की ओर इशारा किया। मैं समझ गया कि वह उस कमरे में चलने को कह रही है। मैंने उन्हें गोद में लिया और चूमते हुए उस कमरे में ले आया। लाईट जलाई तो देखा, वहाँ एक सिंगल बेड था। मैंने पंखा चालू किया और उन्हें बिस्तर पर पटक दिया और उनके ऊपर आ गया। मैंने उनके होंठों को चूमते हुए अपनी टाँगों से उनकी टाँगे चौड़ी कीं।

अब मेरा लंड मामी की चूत के ऊपर था। मैंने अपने हाथों को सीधा किया और धक्के मारने की मुद्रा में आ गया। अब मैं अपनी कमर को नीचे करता और लंड को चूत से स्पर्श करते ही ऊपर कर लेता। कुछ देर ऐसा करने के बाद मामी बोली,”अब मत तड़पाओ, मेरी चूत में आग लग रही है, इसमें अपना लंड अब डाल दो और मेरी चूत की आग को शान्त करो, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ।

इस बार मैंने लण्ड चूत पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड चूत की गहराईयों में समाने लगा। चूत बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक चूत में समा गया और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। अब मेरे झटके शुरु हो गए और मामी की सिसकियाँ भी… मामी आआआहहहहह अअआआआआहहहह करने लगी। कमरा उनकी सिसकियों से गूँज रहा था।

जब मेरा लण्ड उनकी चूत में जाता तो फच्च-फच्च और फक्क-फक्क की आवाज़ होती। मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके मे चूत में पूरा समा जाता। मामी भी गाँड हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे। पंखे के चलने का कोई भी प्रभाव नहीं था।

दोनों के चेहरे एकदम लाल हो रहे थे पर हम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। झटके अनवरत जारी थे। कभी मैं मामी के ऊपर तो कभी मामी मेरे ऊपर आ जाती। दोनों ही चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे थे। पूरे कमरे में बस कामदेव का राज था। हम दोनों एक-दूसरे की आग को बुझा रहे थे। तभी हमारे शरीर अकड़ने लगे।

दोनों झड़ने वाले थे। मैं लण्ड को बाहर निकालने वाला ही था कि मामी ने रोक दिया और बोली – “अपना सारा माल चूत के अन्दर ही छोड़ दो।”

मैंने भी झटके चालू रखे। हम दोनों ने एक-दूसरे को भींच लिया। मामी ने टाँगों और हाथों को मेरे शरीर पर लपेट दिया। मैंने मामी के कंधों को कसकर पकड़ लिया और एक ज़ोरदार झटका मारा। मैं और मामी एक ही साथ झड़े थे। मामी की चूत मेरे वीर्य से भर गई।

वीर्य चूत से बह रहा था। मेरा मुँह अपने-आप चूत पर पहुँच गया और मैं मामी की चूत को चाट-चाट कर साफ करने लगा।

मामी ने भी मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ कर दिया और हम दोनों एक-दूसरे के बगल में लेट गए, पर मामी का हाथ मेरे लंड पर था और मैं मामी के बालों को सहला रहा था।

मामा के आने तक मैं और मामी पति-पत्नी की तरह रहे। मैं सुबह को दुकान का एक चक्कर लगा आता। दिन में हम नींद ले लेते और रात को…

मामा के आने के बाद भी जब भी मौक़ा मिलता, मैं उसको छोड़ता नहीं।

अन्तर्वासना के पाठकों, आपको मेरी यह दास्तान कैसी लगी, मेल कर बताएँ। Antarvasna stories

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हाँ तो दोस्तों, मेरा नाम है Hindi Porn Stories विकास, उम्र २२ वर्ष। मैं बंगलोर में रहता हूँ। यहाँ रहने वाले हजारों लोगो की तरह मैं भी एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर हूँ। तो मेरा अनुभव पेश है जो कि मैं आपके साथ बाटना चाहता हूँ। इसे कृपया मेरी कल्पना ना समझें।

मैं एक ६ फीट का गठीले शरीर का मालिक हूँ, लेकिन थोड़ा शर्मीला हूँ और लड़कियों से ज्यादा करीब नहीं रहा हूँ। उत्तर प्रदेश बोर्ड से मेरी शिक्षा होने के कारण मैं हमेशा लड़कों के स्कूल में ही रहा। कॉलेज में एक लड़की से ऐसा प्यार हुआ कि किसी दूसरी की तरफ नज़र उठा कर नहीं देखा।

लेकिन हाय री किस्मत, उसने मुझमें ज्यादा रुचि नहीं ली। तो अब तक की कहानी का निचोड़ यह है कि मैं २२ साल तक कुंवारा था।

किन्तु एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा ऐसा साथ दिया कि वो दिन ज़िन्दगी भर के लिए यादगार बन गया और वही अनुभव मैं आप लोगो के साथ बांटना चाहता हूँ।

यहाँ बंगलोर में एक अस्पताल है, संत जोन्स हॉस्पिटल।

कुछ महीने पहले ही मेरी आँखों में कुछ परेशानी हो रही थी, तो मैं वहां गया, मैंने रजिस्टर कराया और डॉक्टर के कमरे के सामने बैठ कर इंतज़ार करने लगा। ऐसे ही १५ मिनट गुज़र गए। मैं परेशान था क्योंकि कोई भी मरीज़ अन्दर नहीं जा रहा था और न ही किसी का नाम पुकारा जा रहा था।

तो मैंने ऐसे ही डॉक्टर के कमरे के अन्दर झाँक कर देखा। सही बता रहा हूँ दोस्तो ! अन्दर जो लड़की बैठी थी वो जैसे कि कोई अप्सरा थी और वो डॉक्टर के सफेद लैब-कोट में तो मैं बता नहीं सकता कि कितनी सुन्दर लग रही थी !

वैसे मैं बता दूं कि डॉक्टर के लिए मेरा ख़ास आकर्षण रहा है हमेशा से।

हाँ तो मैंने उससे पूछा- इतने लोग इंतज़ार कर रहे हैं?

वो बोली- वो वहां पर इन्टर्न है और डॉक्टर अभी आये नहीं हैं ! इसीलिए !

और एक बहुत प्यारी सी मुस्कान दी। मेरे शरीर का रोम रोम खिल उठा उसे देखकर। मैं भी मुस्कुरा दिया और कहा- ओके !

मैं बाहर आकर बैठ गया किन्तु इस बार मैं ऐसी जगह बैठा जहाँ से कमरे के अन्दर वो मुझे दिख रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और एक मध्यम सी मुस्कराहट दी, मैंने भी वही किया। इस से पहले कि इशारे कुछ और आगे बढ़ पाते, इतने में डॉक्टर आ गया और वो उसके साथ मरीजों को देखने में व्यस्त हो गई।

मेरी बारी आई, डॉक्टर ने आँखें देखीं और बोला- सामान्य जांच करा लो ! कोई ख़ास परेशानी नहीं है तुम्हारी आँखों में !

अब शायद आप लोगों को मालूम हो कि सामान्य जांच में एक टेस्ट होता है जिसमें एक डार्क-रूम में ले जाकर एक मशीन के जरिये रेटिना(आंख का हिस्सा) चेक किया जाता है. उस टेस्ट के लिए मुझे इंतज़ार करने के लिए बोला गया। मैं बाहर बैठ कर इंतज़ार करता रहा और बीच बीच में हमारी नज़रें मिलती रहीं।

जब आधे घंटे बाद डॉक्टर चला गया, तो उसने मुझे टेस्ट के लिए बुलाया, वो अँधेरा कमरा था इसीलिए कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, बस उस मशीन से जो प्रकाश आ रहा था उसमें मुझे वो दिख रही थी। उसने कहा- अपनी आँख को इस लेंस के सामने लाओ, फिर उसने कहा- नीचे देखो, दायें देखो, बाएँ देखो, सामने देखो, मैंने सामने देखा तो उसका वो चाँद जैसा चेहरा था।

मैं उसे देखता ही रह गया, वो बोली- बस टेस्ट फिनिश !

लेकिन मैं उसे सुन नहीं पाया और बस उसे ही देखता रहा।

उसने भी मेरी तरफ देखा, और फिर दोस्तों मुझको नहीं मालूम कि किसने शुरू किया लेकिन अगले ही पल हम दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे।

मैं पागल हो रहा था और उसके नरम होठों को चूसे जा रहा था, उसका भी यही हाल था। किस करते करते ही ५ मिनट के अन्दर हम दोनों टोपलेस थे. मैं उसके स्तनों के साथ खेले जा रहा था और वो मेरे बालों में हाथ फिरा रही थी। तभी अचानक से वो रुकी और मेरी तरफ देखा, मुझे देखते देखते ही थोड़ी दूर गई और मैं पूरी तरह से असमंजस में था, लेकिन तभी उसने अपनी जींस उतार दी और वहीं खड़ी रही।

मैं भाग कर उससे लिपट गया और फिर से किस करने लगा। मेरी जींस कब उतर गई मुझे पता ही नहीं लगा। मैं बस उसे सर से पैर तक चूमता रहा और वो मुझे अपने हाथों से अपने शरीर से चिपकाती रही।

फिर मैंने उसे मेज़ पर लिटाया और फिर हम लोगो ने लगातार दो बार सेक्स किया।

उसके बाद, जब हम अलग हुए और मैंने कपड़े पहनने शुरू किये तो देखा कि मेज़ पर थोड़ा बहुत खून था और वो रो रही थी।

मैंने उसके माथे पर किस किया और पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- आई फील लाइक ए सलट ! कितनी गिर गई थी मैं !

मैंने उससे कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, यह तो भगवान् का दिया उपहार है, जिसका आनंद लेना सबका हक़ है।

लेकिन उसने कपड़े पहने और चली गई, अपना नाम तक नहीं बताया। मैं भी थोड़ा खुश, थोड़ा दुखी अपने घर आ गया।

उसके बाद मैं कई बार वहां गया उससे मिलने, लेकिन वो नहीं दिखी, उसने शायद अपना तबादला किसी दूसरे अस्पताल में करा लिया होगा।

तो प्रियतमा !

मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि मैंने कभी तुम्हारे बारे में कुछ गलत नहीं सोचा। वो तो एक समय था जिसमें पूरी कायनात हमें साथ लाना चाहती थी। मैं तुमसे पहली ही नज़र में प्यार कर बैठा था और आज भी करता हूँ ! Hindi Porn Stories

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