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मेरा नाम सुरेंद्र है। मैं कॉलेज में Antarvasna अन्तिम वर्ष में पढ़ता हूँ। मेरी उम्र 24 है। मैं बीच की छुट्टियों में मेरे गाँव गया। गाँव में हमारा बड़ा घर है। वहाँ मेरी माँ और पापा रहते हैं। मेरे पापा एक बिल्डर हैं, और माँ एक गृहिणी। हम बहुत अमीर घराने से हैं। हमारे घर में नौकर-चाकर बहुत हैं।
मैं मेरे गाँव गया। दोपहर में मेरे घर पहुँचा। खाना हुआ और थोड़ी देर सोया। शाम को माँ के साथ थोड़ी बातें कीं और गाँव घूमने चला गया। रात क़रीब मैं 8 बजे घर आया। माँ का मूड ठीक नहीं था। मैंने माँ को पूछा- माँ, पापा कहाँ हैं?
माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया। मेरी माँ बहुत गुस्से वाली है। वह जब गुस्से में होती है तब वह गन्दी गालियाँ भी देती है। लेकिन वह नौकरों के साथ ऐसा नहीं करती, गालियाँ नहीं देती।
माँ ने कहा- चल, तू खाना खा ले… आज अपना बेटा आया, फिर भी यह घर नहीं आए… तू खा… हम बाद में फार्म-हाउस पर जाएँगे… वहाँ पर तेरे पापा का काम चल रहा है…’
मैंने खाना खाया और हम निकले। पापा ने मेरी माँ को स्कूटर दी थी। हमारा फार्म-हाउस हमारे घर से एक घन्टे पर ही था। माँ ने स्कूटर निकाली, मैं माँ के पीछे बैठ गया। हाँ मेरे माँ का नाम रीमा है, उसकी उम्र 45 है लेकिन वो सुन्दर है, वो एक सामान्य गृहिणी है… सेहत से तन्दरुस्त… थोड़ी मोटी सी।
‘चलो चलें…’ माँ ने पंजाबी पोशाक पहनी थी… मैं माँ के पीछे था… हम चल दिए… मैंने मेरे हाथ से स्कूटर के पीछे टायर को पकड़ रखा था। माँ बीच-बीच में कुछ कह रही थी लेकिन कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। शायद बहुत ही गुस्से में थी.
एक घन्टे में हम फार्म-हाउस पर पहुँच गए। फार्म-हाउस के दरवाज़े पर चौकीदार था। उसने माँ को टोका… और कहा- साहब यहाँ नहीं हैं… वो शहर गए हैं।’ वह हमें दरवाज़े के अन्दर जाने से रोक रहा था।
माँ ने कहा- ठीक है।
और स्कूटर चालू की… हम थोड़ी ही आगे गए और माँ ने स्कूटर रोक दी। उसे कुछ शक हुआ… उसने मुझसे कहा- तू यहीं रुक, मैं आती हूँ।
माँ बंगले की तरफ चली गई। और चौकीदार का ध्यान बचाकर अन्दर चली गई। बंगले में जाकर खिड़कियों में ताक-झाँक करने लगी। मैंने देखा कि माँ क्यों नहीं आ रही है, और मैं भी वहाँ चला गया। मैंने देखा- माँ बहुत देर तक वहाँ खड़ी थी और खिड़की से अन्दर देख रही थी। वह क़रीब 10-15 मिनट वहीं खड़ी थी। मैं थोड़ा आगे गया। माँ ने मुझे देखकर कहा- साले तुझे वहीं रुकने को कहा था तो तू यहाँ क्यों आया? चल वापिस चल, हमें घर जाना है।’ माँ को इतने गुस्से में मैंने कभी नहीं देखा था।
मैं फिर से स्कूटर पर बैठ गया। रास्ते में बारिश चालू हुई। मेरे हाथ पीछे टायर पर थे। गाँव में रास्ते में लाईट नहीं थी। तभी माँ की गांड मेरे लण्ड को लगने लगी। मैं थोड़ा पीछे आया। लेकिन माँ भी थोड़ा पीछे आई और कहा- ऐसे क्यों बैठा है, ठीक से मुझे पकड़ कर बैठ।’
मैंने मेरे दोनों हाथ माँ के कन्धों पर रखे, लेकिन ख़राब रास्ते के कारण हाथ छूट रहे थे।
माँ ने कहा- अरे, पकड़, मेरी कमर को, और आराम से बैठ!
मैंने माँ के कमर पर पकड़ा, लेकिन धीरे-धीरे मेरा हाथ उसकी चूचियोँ पर लगने लगे। वाह! उसकी चूचियाँ… क्या नरम-नरम मुलायम मखमल की तरह लग रहे थे। और मेरा लण्ड भी 90 डिग्री तक गया। वो मेरी माँ की गांड से चिपकने लगा। माँ भी थोड़ी पीछे आई। ऐसा लग रहा था कि मेरा लण्ड माँ की गांड में घुस रहा है।
हमारा घर नज़दीक आया। हम उतर गए। क़रीब रात 11:45 को हम घर आए। माँ ने कहा- तू ऊपर जा… मैं आती हूँ।
माँ ऊपर आई… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। मालूम नहीं, वो क्यों बीच-बीच में कुछ गालियाँ भी दे रही थी। लेकिन वो सुनाई नहीं दे रहा था।
माँ ने कहा- आ, मैं तुझे बिस्तर लगा दूँ।
उसने उसकी चुन्नी निकाली और वह मेरे लिए बिस्तर लगाने लगी। मैं सामने खड़ा था। वह मेरे सामने झुकी और मैं वहीं ढेर हो गया। उसकी चूचियाँ इतनी दिख रहीं थीं कि मेरी आँखें बाहर आने लगीं। उसकी वो चूचियाँ देखकर मैं पागल हो उठा। उसने काली ब्रा पहन रखी थी। उसकी निप्पल भी आसानी से दिख रही थी।
तभी माँ ने अचानक देखा और कहा- तू यहाँ सो जा।
लेकिन मेरा ध्यान नहीं था। वो सामने झुकी… और मेरा ध्यान उसकी चूचियों पर था। वो यह बात समझ गई और ज़ोर से चिल्लाई- सुरेंद्र, मैंने क्या कहा! सुनाई नहीं देता क्या? तेरा ध्यान किधर है? साले मेरी चूचियाँ देख रहा है?
यह सुनकर मैं डर गया लेकिन मैं समझ गया कि माँ को लड़कों की भाषा मालूम है।
उसने बिस्तर लगाया और कहा- मैं आती हूँ अभी!
वह नीचे गई। मैंने देखा उसने हमारे बंगले के चौकीदार को कुछ कहा और ऊपर मेरे कमरे में आ गई। हम दोनों अभी बारिश की वज़ह से गीले थे। माँ मेरे कमरे में आई, दरवाज़े की कड़ी लगाई और उसने अपनी पंजाबी पोशाक की सलवार निकाल कर बिस्तर पर रख दी, मैं मेरी कमीज़ निकाल ही रहा था, इतने में माँ मेरे सामने खड़ी हो गई।
माँ ने मेरी शर्ट की कॉलर पकड़ी और मुझे घसीट कर मेरे बाथरूम में ले गई। मेरे कमरे में ही एक बाथरूम था। माँ फिर बाहर गई और मेरे कमरे की बत्ती बन्द करके मेरे सामने आ के खड़ी हो गई। उसने मेरी तरफ देखा, एक कपड़ा लिया और मेरे बाथरूम की खिड़की के शीशे पर लगा दिया। इसके पीछ वज़ह होगी कि बाथरूम में रोशनी थी और खिड़की से कोई अन्दर ना झाँक सके।
फिर से उसने मेरी ओर देखा… वो अभी भी गुस्से में लग रही थी। तुरन्त ही उसने मेरे गालों पर एक ज़ोर का तमाचा मारा… मैं माँ की तरफ ही गाल पर हाथ रख कर देख रहा था। लेकिन तुरन्त ही उसने मेरे गालों को चूमा और अचानक उसने उसके होंठ मेरे होंठों पर लगा कर मुझे चूमना चालू कर दिया… मैं थोड़ा हैरान था लेकिन मैंने भी माँ की वो बड़ी-बड़ी चूचियाँ देखीं थीं और माँ के साथ मेरे विचार गन्दे हो चुके थे। चूमते-चूमते उसने फिर से मेरी ओर देखा, वो रुक गई… फिर अपनी पूरी ताकत लगा कर उसने अपनी ही ड्रेस फाड़ डाली। फिर तुरन्त उसने मेरी कमीज़ भी खोल दी।
जब उसने अपनी ड्रेस फाड़ी… ओओओहहह… मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि माँ की चूचियाँ इतनी बड़ी होंगीं। वो तो उसकी ब्रा से बाहर आने के लिए आतुर दिख रहीं थीं। फिर वो मुझे चूमने-चाटने लगी..
उसने मुझे चड्डी उतारने को कहा… ‘साले, अपनी चड्डी तो उतार!’
मैंने अपनी चड्डी उतार दी, और मैं अपनी माँ पर चढ़ गया… मैं भी उसकी चूचियों को चाटने लगा-चूमने लगा और ज़ोरों से दबाने लगा… मैंने भी माँ की ब्रा फाड़ डाली। मैं भी एकदम पागलों की तरह माँ की चूचियाँ दबाने लगा.
माँ के मुँह से आहें निकलने लगीं… ‘आआआ ओओओ ईईईमम ओओओ… साआआआलेएए आआआ… ओओओईईईएए’
इतने में उसने मुझे धक्का दिया और एक कोने में छोटी बोतल पड़ी थी उसमें उसने साबुन का पानी बनाया और शावर चालू किया और कहा- मैं जैसा बोलती हूँ… वैसा ही कर!
वह पूरी तरह से ज़मीन पर झुकी और दोनों हाथों से अपनी गांड को फैलाया और कहा- वो पानी मेरी गांड में डाल।
मैंने वैसा ही किया। साबुन का पानी माँ की गांड में डाला। माँ उठी और मेरे लंड को पकड़ा और साबुन लगाया। दीवार की तरफ मुँह करके खड़ी हुई और कहा- साले, भड़वे, चल तेरा लंड अब मेरी गांड में घुसा।
जैसा आप पहले पढ़ चुके हैं कि मेरी माँ कभी-कभी गालियाँ बहुत देती है। मैंने मेरा लंड माँ की गांड पर रखा और जोर का झटका मार दिया।
माँ चिल्लाई- आआआआ म्म्म्मउऊऊ… आआआआ, साले भँड़वे बता तो सही तू डाल रहा है!
साबुन की वज़ह से मेरा लंड पहले ही आधे से अधिक घुस गया, और मैं भी माँ को ज़ोरों के झटके देने लगा। माँ चिल्लाई… ‘साले, भड़वे… आआआ… उउऊऊऊ… उईईई… आआआ’
मैं भी थोड़ा रुक गया।
माँ बोली- दर्द होता है, इसका मतलब यह नहीं कि मजा नहीं आताआआआआआ… मार और ज़ोर से मार… बहुत मजा आता है… भँड़वे बहुत सालों के बाद मैं आज चुदाई के मज़े ले रही हूँ… आआआईईई आआईईई… आआउऊऊ… मार… मार… मार… आआआ’
वो भी ज़ोरों से कमर हिला कर मुझे साथ दे रही थी और मेरे झटके एकदम तूफ़ानी हो रहे थे। मेरा क़द 5.5 और माँ का 5… हम खड़े-खड़े ही चोद रहे थे… उसकी गांड मेरी तरफ, मैं उसकी गांड मार रहा था… उसका मुँह उस तरफ और हाथ दीवार पर थे… मैं एक हाथ की उंगली उसकी चूत में डाल रहा था.. और दूसरी ओर दूसरे हाथ से उसकी चूचियाँ दबा रहा था।
तभी उसने मेरी तरफ मुँह किया और एक हाथ से मेरे गाल पकड़े और मेरे होंठों पर उसके होंठ लगाए। हम कामसूत्र के एक आसन में खड़े थे। वह भी मेरे होंठों को चूम कर बोली… ‘तू… थोड़ी देर पहले मेरी चूचियाँ देख रहा था ना… मादरचोओओओद… हाय रे तू… मैं अभी तुझे पूरा मादरचोद बनाऊँगीईईई… .आआआ…’
तभी मैं माँ को बोला… ‘आज इतने गुस्से में क्यों हो?’
माँ बोली… ‘साले… सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। आआईईई उउओओओउऊऊ… जानता है… जब हम फार्म-हाऊस पर गए… ओओईईईई… मैंने क्या देखा… खिड़कीईईईई…ईईई सेएएए…’
मैं एक तरफ झटके दे रहा था इसलिए माँ बीच-बीच में ऐसी आवाज़ें निकालती हुई बात कर रही थी।
मैंने पूछा ‘क्या देखा तूने?’
माँ ने कहा- तेरा बाप किसी और औरत को चोद रहा था। ईईई ओओओओओ… आआआआ… मैं हमेशा इन्तज़ार करती थी… अब मुझे समझ आया… वो बाहर चोद लेता है… आआआ… ईईईई… ओओओओओओ’
मैं रुक गया। वह बोली ‘तू रुक मत… चोद मुझे भँड़वे… अपनी माँ को चोद। आज से तेरी माँ… हमेशा के लिए तेरी हो गई है। आज़…’
मैंने चोदना चालू कर दिया, माँ कहती रही- ‘ओओआआईईम्म तू ही मेरा सामान है… आआओओ ओईईम्म्म… अच्छा लग रहा है।’
तभी मैंने माँ की गांड में ओर ज़ोर का झटका मारा… वो भी उसकी गांड ज़ोरों से आगे-पीछे हिला रही थी… आख़िर में मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की गांड में डाल दिया… माँ चिल्लाई… ‘आआओओओम्म्म ईईई… कितना पानी है तेरे में… खत्म ही नहीं हो रहा है। आआउउऊऊ… क्या मस्त लग रहा है… साआआआला मादरचोद… सही चोदा तूने मुझे।’
थोड़ी देर हम एक-दूसरे से ऐसे ही चिपके रहे और फिर पलंग पर चले गए और सो गए।
थोड़ी देर के बाद मेरी नींद खुली… माँ मेरे पास ही सोई थी। हम दोनों अभी भी नंगे ही थे। मैं माँ की चूत में उंगली देने लगा।
तभी माँ की नींद खुली और वो बोली- क्या फिर से चोदेगा?
मैंने कहा- मुझे तेरी चूत चाहिए, तेरी गांड तो मिल गई, लेकिन तेरी चूत चाहिए…
और फिर से उसकी चूत में उंगली डालने लगा, उसे सहलाने लगा।
मुझसे नियंत्रण नहीं हुआ, मैंने माँ के दोनों पाँव ऊपर किए और मेरा लंड माँ की चूत पर रखा और ज़ोर से धक्का मारने लगा। मैंने झटके देना चालू किया। तभी माँ भी कमर हिला कर मुझे साथ देने लगी।
मेरे झटके बढ़ने लगे… माँ चिल्लाने लगी… ‘आआहह चोद.. और चोद.. फाड़ डाल मेरी चूत… तेरे बाप ने तो कभी चोदा नहीं… लेकिन तू चोद… और चोद… मज़े ले मेरीईईई चूत के… आआओउऊ… ईईईई… और तेज़…, और तेज…, आआआईईई मईईईओओआ… आआआ… ओओओ…’
माँ भी ज़ोरों से कमर हिलाने लगी और मैं माँ की चूचियों और ज़ोरों से दबा रहा था। माँ बोली ‘चोद रे… मादरचोद, और चोद… दबा मेरी चूचियाँ… और दबा… और चाट और काट मेरी चूचियों को… और उन्हें बड़े कर दे, ताकि वे मेरी ब्लाऊज़ से बाहर आ जाएँ। दबा और दबा… चल डाल पानी अब… भर डाल अपनी माँ की चूत… पानी से… आआओओ… तेरे गरम पानी से… आआओओ…’
तभी मैंने ज़ोर का झटका दिया और मेरे लंड का पानी माँ की चूत में डाल दिया। माँ चिल्लाई… ‘आआआ… ईईई… क्याआआआ गरम पानी है… जैसे असली जवानी… आज से तू मेरा बेटा नहीं… मेरा ठोकया है… आज से तू मुझे ठोकेगा… आआओओईई… क्या पानी है… सालों बाद मिलाआ… आज के बाद अच्छी हो गई… तेरे पाप उस रण्डी के साथ गए… लेकिन उनकी ही वज़ह से मुझे मेरा ठोकया मिल गया…’ आज से तू ही मुझे ठोकेगा…’
थोड़े दिनों के बाद मैं शहर चला गया और मेरे कॉलेज में रम गया। माँ और मैं छुट्टियों की प्रतीक्षा करते, और मौक़ा मिलते ही हम एक-दूसरे की चुदाई करते। Antarvasna
मैं रमेश 20 साल Hindi porn stories, अमदाबाद में रहता हूँ। मेरी हाईट 5’6″ गोर रंग और सबसे महत्त्वपूर्ण कि मेरा लंड 8″ का है जिसे सारी लड़कियाँ, भाभियाँ और आंटियाँ पसन्द करती हैं।
मेरी भाभी रीना, जो एक सुन्दर सेक्सी लेडी हैं, की उमर 27 साल है। उनके बड़े बड़े स्तन और मोटे चूतड़ जो चलते समय इधर उधर झूलते हैं, मुझे हर वक्त बेचैन किये रहते हैं।
मेरा भाई 28 साल का है और 8 महीने पहले उसकी शादी रीना से हुई है। वो एक बड़ी मल्टी नैशनल कम्पनी में सोफ़्टवेयर इंजीनीयर है। उसे अक्सर कम्पनी के काम से बाहर जाना पड़ता है। मैं भी एक कोलेज में पढ़ता हूँ और भैया भाभी के साथ रहता हूँ।
शुरू के महीनों में भैया भाभी ने अपनी मैरिड लाइफ़ को अच्छा एन्जोय किया। फ़िर भाभी भैया के लम्बे समय के विदेश के टूर से परेशान हो जाया करती। भैया चार महीने के लिये फ़िर गये तो मैं और भाभी दोनों ही घर मैं अकेले थे, भाभी एकदम उदास नज़र आती थी। मैं भाभी से बहुत बातें करता था और उनको खुश करने की कोशिश करता था, लेकिन यह बहुत मुश्किल था।
थोड़े दिन ऐसे ही बीत गये।
भाभी में मैंने थोड़ा चेंज नोटिस किया, मैं और भाभी अब अच्छे दोस्त बन गये थे। दोनों बाहर शोपिंग करने जाते थे, घूमते थे मज़े करते थे। जो लोग हमें नहीं जानते थे उन्हें हम दोनों पति और पत्नी लगते थे। मेरे मन में भाभी के बारे में बहुत सेक्सी ख्याल थे लेकिन वो मेरे बड़े भैया की पत्नी है यह सोच कर मैं अपने आप को कंट्रोल करता था। लेकिन रात को घर में हम दोनों अकेले होते तो मेरा लंड भाभी को चोदने के इरादे से खड़ा हो जाता था और मैं अपने लंड को अपने हाथों से हिला के अपनी आग बुझाता था।
भाभी और मैं बहुत सी बातें करते थे, वो हमेशा यह जानने की कोशिश करती थी कि कोई लडकी मेरी दोस्त है या नहीं?
मैं उसे कहता था कि मेरी कोइ गर्ल फ्रेंड नहीं तो वो मानने से इंकार करती थी, वो बोलती थी कि तेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं, ऐसा हो ही नहीं सकता। और कहती थी लड़कियों को तेरे जैसे सुडौल सुगठित लड़के चाहिये होते हैं। आज कल भाभी ऐसे ही बातें करती थी। मैं जान गया भाभी के मन में मेरे बारे में कुछ चल रहा है। उसका मेरे साथ व्यवहार भी थोड़ा बदल गया था। बातें करते समय वो मुझे छूने की कोशिश करती थी। मेरे करीब आया करती थी। मैं बड़े मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल करता था। भाभी अब सेक्स की कमी महसूस कर रही थी। उसकी हरकतों से ऐसे लगता था कि उनको सेक्स चाहिए बस!
सामान्यतया वो घर में साड़ी में रहती थी, साड़ी में उसके गोल गोल चूतड़ देख कर मेरा तो लंड हमेशा तन जाता था। उसकी नाभि, ब्लाउज़ में से दिखने वाली उसकी सेक्सी क्लीवेज, मैं इन सबके लिये पागल हुये जा रहा था। झाड़ू लगाते समय हमेशा मेरे सामने वो अपने साड़ी का पल्लू जानबूझ कर गिराया करती थी ताकि मैं उसके बड़े स्तन देख सकूँ। शायद वो मुझे पाने के लिये पागल हुए जा रही थी। लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं जाकर भाभी को चोदना शुरु करुं। मुझे बहुत डर लगता था।
एक दिन रात को बेडरूम मैं अपने सेक्सी भाभी के बारे में सोच कर अपना लंड हिला रहा था, मेरे कमरे का दरवाज़ा तो बंद था लेकिन मैंने लॉक नहीं किया था। तभी भाभी कुछ काम से या जानबूझ कर मेरे कमरे में बिना खटकाए चली आई, और मैं अपना लंड बड़े मज़े से हिला रहा था। भाभी को देख के मैं इतना शरमा गया, कुछ कह नहीं सका।
भाभी ने भी कुछ नहीं कहा, लेकिन मेरे बड़े लंड को 2-3 मिनट तक देखते रही और वहाँ से चली गई।
अगले दिन सुबह मैं जब कॉलेज जाने की तैयारी कर रहा था तब भाभी ने मुझे स्नैक्स और चाय दी। मैं तो रात की घटना से इतना शरमा गया था कि मैं भाभी से आंखें नहीं मिला पा रहा था। एक नज़र मैंने भाभी के तरफ़ देखा तो भाभी ने मुझे शरारती मुस्कान दी, लेकिन कुछ नहीं कहा। और मैं झट से वहाँ से कॉलेज के लिये निकल पड़ा।
मैं दोपहर को 1 बजे घर आया, भाभी ने दरवाज़ा खोला, उसने गुलाबी रंग की शीफ़ॉन साड़ी और सेक्सी स्लीवलेस ब्लाउज़ पहना हुआ था। वो सेक्सी दिख रही थी। उसकी पारदर्शक साड़ी में से उसका सेक्सी बदन साफ़ दिख रहा था। उसने मेरे हाथों से मेरा कॉलेज बैग लिया और मुझे अंदर लेकर दरवाज़ा बंद कर दिया और उसने मुझसे पूछा- प्यारे देवरजी, आप कल रात को क्या कर रहे थे??’
मैंने कहा- भाभी मैं कल रात को आपके बारे में सोच के अपना लंड हिला रहा था।’
मैं उसी के बारे में सोच के अपना लंड हिला रहा था, यह सुन कर वो एकदम पागल हो गई और मेरे पास आई, उसने मुझे धक्का दिया और सोफ़े पे गिरा दिया। अब वो कूद के मेरी छाती पर बैठ गई और बोलने लगी- रमेश, तुम कितने भोले हो, अपनी भाभी को चोदना चाहते हो लेकिन कभी ज़बरदस्ती नहीं की, मैं भी तुम्हारे लिये पागल हूँ, मैंने सोचा था कभी ना कभी आके तुम मुझे ज़रूर चोदोगे। लेकिन तुमने ऐसा नहीं किया। मैं तुम्हारा प्यार पाने के लिये तड़प रही हूँ। तूने भाभी को बहुत तरसाया है। मुझे तुम्हारे प्यार की बहुत ज़रुरत है।’
ऐसे बोल के उसने मेरे होंठों पे अपने होंठ कस के दबा दिये। 15 मिनट तक वो मेरे और मैं उसके होंठ चूसता रहा। अब मेरा भी लंड बहुत टाइट हो रहा था। होंठों के बाद वो मुझे सब जगह पे चूमने लगी, गाल छाती और सब जगह। मैं भी उसके गालों को चूसने लगा। चूस चूस के उसके गोरे गाल मैंने लाल कर दिये।
अब तो वो बहुत गरम हो गई थी उसने मेरे कपड़े निकाल दिये, और मैंने उसके। अब मैं सिर्फ़ मेरे अंडरवीयर में था। और मेरे लंड का आकार साफ़ नज़र आ रहा था। वो शेप देख के वो और पागल हो गई और बोली- रमेश, जब से तुम्हें अपना ये बड़ा लंड हिलाते देखा है, मैं तो इसके लिये पागल सी हो गई हूँ, अब मुझे और ना तड़पाओ!’
ऐसे बोल कर उसने मेरी अंडरवीयर निकाल दी। अब वो मेरा पूरा नंगा लंड देख के जो कि अब 8′ से बड़ा हो गया था, अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी। उसने उसे अपने हाथों से हिलाना शुरु किया और बोली- तुम्हारा तो तुम्हारे भैया से काफ़ी बड़ा है, इसलिये मैं तुम्हें कहती थी कि तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है क्या?? मेरे भोले देवर जी लड़कियों को ऐसे बड़े लंड वाले लड़के बहुत पसंद होते हैं!’
वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी। अब उसने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया। मेरा लंड पहली बार किसी छेद में जा रहा था। मेरे लंड को गुदगुदी सी हो रही थी। मैं जैसे स्वर्ग में था।
उसने मेरा लंड पूरा अपने मुंह में ले लिया। क्योंकि यह मेरा पहली बार था, मैं ज्यादा देर नहीं टिक पाया, 5 मिनट के बाद मैंने उसे कहा- मैं छूटने जा रहा हूँ!
उसने कहा- मुंह के अंदर ही छोड़ देना!
मैंने बड़े जोर के साथ अपना वीर्य उसके मुंह में निकाल दिया और उसने वो पूरा निगल भी लिया। अब छूटने की वजह से मेरा लंड फ़िर अपने सामान्य शेप में आ गया। तब भाभी और मैं बाथरूम में सफ़ाई के लिये चले गये। वहाँ वो तो और सेक्सी बातें करने लगी। लगता है अब तक उसकी गरमी ठंडी नहीं हुई थी। उसने कहा- तुम्हारे भैया का लंड तुमसे बहुत छोटा है, और वो मुझे इतना प्यार भी नहीं करते, भैया नहीं थे तो मैं सेक्स के लिये बहुत पागल हुये जा रही थी, मुझे तुम अपनी बीवी समझना और जब जी चाहे तब चोदना। ये भाभी आज से तेरी है।’
और उसने मुझे फिर चूमना शुरु किया। हम एक दूसरे को फिर चूसते रहे, चूमते रहे। मैंने उसे कहा ‘भाभी, देवर को दूधू पिलाओ!’उसने कहा- पूछो मत! ये दूध और दूधवाली सब आप ही के लिये हैं, जितना दूध पीना है पी लो!’
और मैंने बिना रुके उसके 36 डी साइज़ के सेक्सी बूब्स दबाने लगा। उसे ज़ोरो से चूसने लगा। वो चीखने लगी- चूसो और ज़ोरों से, पी जाओ सारा, रमेश् आआआआअ आईईइ ईइ अ दूध ऊऊऊह ह्हह्हा आऐइ ईई ईई…ऊऊ ऊऊओ ऊऊओ ऊओ ऊ…आ आआअ आ आअ।
मैंने अपनी चुसाई जारी रखी, और वो मेरे लंड से खेले जा रही थी। 20 मिनट मैंने उसके स्तन चूस चूस के लाल कर दिये, अब मेरा लंड फ़िर तन रहा था। अब तो मेरे लंड को उसके चूत के छेद में जाना था। अपना तना हुआ लंड मैंने उसकी चूत पर रख कर अन्दर करएने का प्रयत्न किया। मेरा लंड मोटा होने के कारण अंदर जाने में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन 2-3 जोर के झटकों के बाद अंदर चला गया। तब वो चिल्लाई- आआअ आआअ आऐइ ईईईइ ऐईईइऊ ऊऊऊईइ ईईईई माआ आआआ निकालो बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन वो उसे अलग नहीं होने दे रही थी। उसे भी बहुत मज़े आ रहे थे। मेरा लंड भी बहुत मजा कर रहा था। उसे चूत चुदवाना अच्छा लग रहा था। मैंने उसे लगभग 20 मिनट तक चोदा और उसकी चूत में पानी निकाल दिया, उसी समय पे उसके भी चूत से पानी निकला।
फिर हम दोनों बाथरूम में एक साथ शॉवर में नहाये, वहाँ भी मैंने थोड़ी मस्ती की। कॉलेज से घर आने के बाद शाम को 2।00 से ले के 5।00 तक चुदाई का ही प्रोग्राम चलता रहा। उस रात को हम दोनों एक ही बेड पे सोये थे एक दूसरे के बाहों में पति-पत्नी की तरह। मेरी सेक्सी भाभी के बदन की आग ठंडी हो ही नहीं रही थी। सुबह 5।30 को वो फ़िर से मेरे लंड के साथ खेलने लगी, मैं तब नींद में था। लेकिन उसकी मस्ती से मैं उठ गया और मेरा लंड भी उठ गया। और फिर एक बार मस्त चुदाई हुई।
उस पूरे दिन में हम दोनों ने 4-5 बार सेक्स किया, मैं तो पूरा थक गया था और वो भी। दूसरे दिन मैं कॉलेज जा ना सका।
इस लिये मैंने इस स्टोरी को ‘भाभी ने देवर को चोदा’ ये नाम दिया है। वो रात मैं अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं भुला सकता। उसके बाद मैंने भाभी को बहुत बार अलग अलग तरीके से चोदा है।
लेकिन अच्छी बातें कभी ज्यादा देर नहीं टिकती। वैसे ही हुआ, पिछले महीने में भैया का ट्रांसफ़र हो गया और उन्हें शिफ़्ट होना पड़ा। भाभी भी अब उन्हीं के साथ रहती है।
अब अमदाबाद में मैं बिल्कुल अकेला हूँ।
अब मेरे लंड को चोदने की अच्छी आदत लगी है, और जैसा भाभी ने कहा था कि लड़कियों को बड़े लंड वाले लड़के पसंद है वैसे ही हुआ। मेरे कॉलेज में एक लड़की है, उसने मुझसे फ़्रेंडशिप की, मैंने उसे परपोज़ भी किया। उसे भी मैं 3-4 बार चोद चुका हूँ। यह कहानी मैं आपको अगली बार Hindi porn stories ज़रूर बताऊँगा।
मेरी Hindi sex stories अपने दोस्त की मदद करने का ये सुनहरा मौका मिला कि अपने तो मजे ही मजे हो गए उधर दोस्त की माँ, इधर बुआ और आखिर में दोस्त की बहन की मदमस्त चुदाई का मौका मिला..
दोस्त की माँ को कैसे चोदा
प्यारे पाठकों और पाठिकाओं (चूत वालियों और लण्ड वालों) में रामू सबसे पहले मैं सभी चूत वालियों और लण्ड वालों को धन्यवाद देता हूँ.
मेरी कहानियाँ लोगों को काफ़ी पसन्द आई और मुझे ई-मेल के जरिये सभी का काफ़ी उत्तर मिला.
लोगों ने मुझे और सत्य कथा लिखने का हौसला दिया. इसलिए फिर से आप लोगों के पास एक सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ, आशा है पिछली कहानियों की तरह यह कहानी भी आप लोगों को पसन्द आएगी.
यह कहानी मेरे दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई की है. यह बात आज से 9-10 वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र 20-21 साल की थीं. उन दिनों मैं मुम्बई में रहता था.
मेरे मकान के बगल में एक नया किरायेदार प्रदीप रहने आया. वो किराये के मकान में अकेला रहता था. मेरी हमउम्र का था इसलिए हम दोनों में गहरी दोस्ती हो गई. वो मुझ पर अधिक विश्वास रखता था क्योंकि मैं एक सरकारी कर्मचारी था और उससे ज्यादा पढ़ा लिखा था. वो एक निजी फैक्ट्री मे मशीन ऑपरेटर था.
उसके परिवर में केवल 4 सदस्य थे. उसकी विधवा माँ 41 साल की, विधवा बुआ (यानी कि उसकी माँ की सगी ननद) 35 साल की और उसकी कुँवारी बहन 18-19 साल की थीं. वे सब उसके गाँव में रहकर अपनी खेती बाड़ी करते थे.
दीवाली की छुट्टियों में उसकी माँ और बहन मुम्बई में 1 महीने के लिये आए हुए थे. दिसम्बर में उसकी माँ और बहन वापस गाँव जाने की जिद्द करने लगे. लेकिन काम अत्यधिक होने के कारण प्रदीप को 2 महीने तक कोई भी छुट्टी नहीं मिल सकती थीं. इसलिए वो परेशान रहने लगा.
वो चाहता था कि किसी का गाँव तक साथ हो तो वो माँ और बहन को उसके साथ भेज सकता है. लेकिन किसी का भी साथ नहीं मिला.
प्रदीप को परेशानी में देख कर मैंने पूछा, क्या बात है प्रदीप? आज कल तुम ज्यादा परेशान रहते हो!
प्रदीप: क्या करूं यार, काम ज्यादा होने के कारण मेरे ऑफ़िस में मुझे अगले 2 महीने तक छुट्टी नहीं मिल रही है और इधर माँ गाँव जाने की जिद कर रही हैं. मैं चाहता हूँ कि, अगर कोई गाँव तक किसी का साथ रहे तो माँ और बहन अच्छी तरह से गाँव पहुँच जायेंगी और मुझे भी चिन्ता नहीं रहेगी. लेकिन गाँव तक का कोई भी साथ नहीं मिल रहा है ना ही मुझे छुट्टी मिल रही है, इसलिए मैं काफ़ी परेशान हूँ.
रामू: यार अगर तुम्हे ऐतराज ना हो तो, मैं तुम्हारी परेशानी का हल कर सकता हूँ और मेरा भी फ़ायदा हो जायेगा.
प्रदीप: यार, मैं तुम्हारा यह एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा! अगर तुम मेरी परेशानी हल कर दो तो. लेकिन यार, तुम कैसे मेरी परेशानी हल करोगे और कैसे तुम्हारा फ़ायदा होगा?
यार, सरकारी दफ्तर के अनुसार मुझे साल में 1 महीने की छुट्टी मिलती है. अगर मैं छुट्टी लेता हूँ तो मुझे गाँव या कही भी जाने का, आने जाने का किराया भी मिलता है और एक महीने की पगार भी मिलती है. अगर मैं छुट्टी ना लूँ तो, 1 महीने की छुट्टी समाप्त हो जाती है और कुछ नहीं मिलता है.
प्रदीप: यार, तुम छुट्टी लेकर माँ और बहन को गाँव पहुँचा दो, इस बहाने तुम मेरा गाँव भी घूम आना!
अगले रामू से मैंने छुट्टी के लिए आवेदन पत्र दे दिया, और मेरी छुट्टी मंजूर हो गई.
प्रदीप ने साधारण टिकट लेकर हम दोनों को रेलवे स्टेशन पहुँचाने आया. हमने टीटी से विनती कर के किसी तरह बर्थ की 2 सीट ले ली.
गाड़ी करीब रात 8:40 पर रवाना हुई.
रात करिब 10 बजे हमने खाना खाया और गपशप करने लगे. बहन ने कहा, भैया मुझे नींद आ रही है! और वो उपर के बर्थ पर सो गई.
कुछ देर बाद माँ भी नीचे के बर्थ पर चादर ओढ़ कर सो गई और कहा कि, तुम अगर सोना चाहते हो तो मेरे पैर के पास सिर रख कर सो जाना.
माँ की चूत और झांटों के दर्शन
मुझे भी थोड़ी देर बाद नींद आने लगी, और मैं उनके पैर के पास सिर रख कर सो गया. सोने से पहले मैंने पैंट खोल कर शोर्ट पहन लिया.
माँ अपने बाईं तरफ़ करवट कर के सो गईं. कुछ देर बाद मुझे भी नींद आने लगी और मैं भी उनकी चादर ओढ़ कर सो गया.
अचानक! रात करीब 1:30 मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि, माँ की साड़ी कमर के उपर थीं और उनकी चूत घनी झांटों के बीच छुपी थीं. उनका हाथ मेरे शोर्ट पर लण्ड के करीब था.
यह सब देख कर मेरा लण्ड शोर्ट के अन्दर फड़फड़ाने लगा. मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा था कि, क्या करूँ. मैं उठकर पेशाब करने चला गया.
जब वापस आया मैंने चादर उठा कर देखा कि, माँ अभी तक उसी अवस्था में सोई थीं. मैं भी उनकी तरफ़ करवट कर के सो गया. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थीं.
मेरे लण्ड से माँ की चूत का मिलन
बार बार मेरी आँखों के सामने उनकी चूत घूम रही थी. थोड़ी देर बाद एक स्टेशन आया. वहाँ 5 मिनट तक ट्रेन रुकी थी और, मैं विचार कर रहा था कि क्या करूँ!
जैसे ही गाड़ी चली मेरे भाग्य ने साथ दिया और हमारे डिब्बे की लाईट चली गई. मैंने सोचा कि, भगवान भी मेरा साथ दे रहा है.
मैंने अपना लण्ड शोर्ट से निकल कर लण्ड के सुपाड़े की टोपी नीचे सरका कर सुपाड़े पर ढेर सारा थूक लगा कर सुपाड़े को चूत के मुख के पास रख कर सोने का नाटक करने लगा.
गाड़ी के धक्के के कारण आधा सुपाड़ा उनकी चूत में चला गया लेकिन, माँ की तरफ़ से कोई भी हरकत ना हुई. या तो वो गहरी नींद में थीं, या वो जानबूझ कर कोई हरकत नहीं कर रही थीं.
मैं समझ नहीं पाया. गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा चूत में अन्दर बाहर हो रहा था.
एक बार तो मेरा दिल हुआ कि, एक धक्का लगा कर पूरा का पूरा लण्ड चूत में डाल दूँ. लेकिन संकोच और डर के कारण मेरी हिम्मत नहीं हुई.
गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा चूत में अन्दर बाहर हो रहा था. इस तरह चोदते चोदते मेरे लण्ड ने ढेर सारा फ़व्वारा उनकी चूत और झांटों के ऊपर निकाल दिया.
अब मैं अपना लण्ड शोर्ट में डाल कर सो गया.
करीब सवेरे 7 बजे माँ ने उठाया और कहा कि, चाय पिलो और तैयार हो जाओ क्योंकि 1 घन्टे में हमारा स्टेशन आने वाला है. मैं फ़्रेश हो कर तैयार हो गया.
स्टेशन आने तक माँ बहन और मैं इधर उधर की बातें करने लगे. करीब 09:30 बजे हम प्रदीप के घर पहुँचे.
वहाँ पर प्रदीप की बुआ ने हमारा स्वागत किया और कहा- नहा धोकर नाश्ता कर लो.
हम नहा धोकर आँगन में बैठ कर नाश्ता करने लगे.
करीब 11:00 बजे बुआ ने माँ से कहा- भाभी जी आप लोग थक गए होंगे, आप आराम कीजिये मैं खेत में जा रही हूँ और मैं शाम को लौटूंगी.
माँ ने कहा, ठीक है! और मुझसे बोली, अगर तुम आराम करना चाहो तो आराम कर लो नहीं तो बुआ के साथ जा कर खेत देख लेना.
मैंने कहा कि, मैं आराम नहीं करुगा क्योंकि मेरी नींद पूरी हो गई है! मैं बुआ जी के साथ खेत चला जाता हूँ, वहाँ पर मेरा समय भी पास हो जायेगा.
मैं और बुआ खेत की ओर निकल पड़े. रास्ते में हम लोगों ने इधर उधर की काफ़ी बातें की. उनका खेत बहुत बड़ा था. खेत की एक कोने मे एक छोटा सा मकान भी था. दोपहर होने के कारण आजू बाजू के खेत में कोई भी न था.
खेत पहुँच कर बुआ जी काम में लग गईं और कहा कि, तुम्हे अगर गर्मी लग रही हो तो शर्ट निकाल लो उस मकान में लुंगी भी है चाहे तो, लुंगी पहन लो और यहाँ आकर मेरी थोड़ी मदद कर दो.
मैं मकान में जाकर शर्ट उतार दिया और लुंगी बनियान पहनकर बुआ जी के काम में मदद करने लगा. काम करते करते कभी-कभी मेरा हाथ बुआ जी के चूतड़ पर भी टच होता था.
कुछ देर बाद बुआ जी से मैंने पूछा- बुआ जी यहाँ कहीं पेशाब करने की जगह है?
बुआ जी बोली- मकान के पीछे झाड़ियों में जाकर कर लो.
मैं जब पेशाब कर के वापस आया तो देखा बुआ जी अब भी काम कर रही थीं.
थोड़ी देर बाद बुआ जी बोलीं- आओ अब खाना खाते हैं और थोड़ी देर आराम कर के फ़िर काम में लग जाएँगे.
अब हम खेत के कोने वाले मकान में आकर खाना खाने की तैयारी करने लगे. मैं और बुआ दोनों ने पहले हाथ पैर धोये फिर खाना खाने बैठ गए. बुआ जी मेरे सामने ही बैठ कर खाना खा रही थीं.
बुआ की चूचियों और चूत के दर्शन
खाना खाते समय मैंने देखा कि, मेरी लुंगी जरा साईड में हट गई थी. जिस कारण मेरी चड्डी से आधा निकला हुआ लण्ड दिखाई दे रहा था और बुआ जी की नज़र बार बार मेरे लण्ड पर जा रही थी. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और, बीच बीच में उनकी नज़र मेरे लण्ड पर ही जा रही थीं.
खाना खाने के बाद बुआ जी बरतन धोने लगीं जब वो झुक कर बरतन धो रही थीं तो मुझे उनके बड़े बड़े बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे. उन्होंने केवल ब्लाऊज़ पहना हुआ था. बरतन धोने के बाद वो कमरे में आकर चटाई बिछा दी और बोलीं चलो थोड़ी देर आराम करते है. मैं चटाई पर आकर लेट गया.
बुआ बोलीं- बेटा! आज तो बड़ी गर्मी है!
कह कर उन्होंने अपनी साड़ी खोल दी और केवल पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन कर मेरे बगल में आकर उस तरफ़ करवट कर के लेट गईं.
अचानक! मेरी नज़र उनके पेटीकोट पर गई. उनकी दाहिनी ओर की कमर पर जहाँ पेटीकोट का नाड़ा बंधा था वहा पर काफ़ी गेप था और, गेप से मैंने उनकी कुछ कुछ झांटे दिखाई दे रही थी.
अब मेरा लण्ड लुंगी के अन्दर हरकत करने लगा. थोड़ी देर बाद बुआ जी ने करवट बदली तो मैंने तुरंत आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा.
थोड़ी देर बाद बुआ जी उठीं और मकान के पीछे चल पड़ीं. मैं उत्साह के कारण मकान की खिड़की पर गया. खिड़की बंद थीं, लेकिन उसमे एक सुराख था.
मैं सुराख पर आँख लगाकर देखा तो मकान का पिछला भाग साफ़ दिखाई दे रहा था. बुआ वहाँ बैठ कर पेशाब करने लगी.
सब करने के बाद बुआ जी थोड़ी देर अपनी चूत सहलाती रही फिर, उठकर मकान के अन्दर आने लगी. फ़िर मैं तुरंत ही अपनी स्थान पर आकर लेट गया.
बुआ जी जब वापस मकान में आईं तो, मैं भी उठकर पिछली तरफ़ पेशाब करने चला गया. मैं जान बूझ कर खिड़की की तरफ़ लण्ड पकड़ कर पेशाब करने लगा.
मैंने महसूस किया कि खिड़की थोड़ी खुली हुई थी और बुआ जी की नज़र मेरे लण्ड पर थी.
मालिश के समय बुआ की चुदाई का विचार
पेशाब करके जब वापस आया तो देखा, बुआ जी चित लेटी हुई थीं. मेरे आने के बाद बुआ बोलीं बेटा आज मेरी कमर बहुत दुख रही है. क्या तुम मेरी कमर की मालिश कर सकते हो?
मैंने कहा- क्यों नहीं!
उसने कहा, ठीक है! सामने तेल की शीशी पड़ी है उसे लगा कर मेरी कमर की मालिश कर देना, और फिर वो पेट के बल लेट गईं. मैं तेल लगा कर उनकी कमर की मालिश करने लगा.
वो बोली- बेटा थोड़ा नीचे मालिश करो.
मैंने कहा- बुआ जी थोड़ा पेटीकोट का नाड़ा ढीला करोगी तो मालिश करने में आसानी होगी और पेटीकोट पर तेल भी नहीं लगेगा.
बुआ जी ने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया. अब मैं उनकी कमर पर मालिश करने लगा. उन्होंने और थोड़ा नीचे मालिश करने को कहा. मैं थोड़ा नीचे की तरफ़ मालिश करने लगा.
थोड़ी देर मालिश करने के बाद वो बोली, बस बेटा और नाड़ा बंद कर लेट गईं. मैं भी बगल में आकर लेट गया. अब मेरे दिल और दिमाग ने बुआ को कैसे चोदा जाए!
यह विचार करने लगा. आधे घण्टे के बाद बुआ जी उठी और साड़ी पहन कर अपने काम में लग गईं.
शाम को करीब 6 बजे हम घर पहुँचे. घर पहुँचकर मैंने कहा- माँ मैं बाजार जा रहा हूँ और 1 घण्टे बाद आ जाऊँगा.
यह कहकर मैं बाजार की ओर निकल पड़ा.
कहानी जारी रहेगी.
कहानी का अगला भाग : दोस्त की माँ, बुआ और बहन की चुदाई-2 Hindi sex stories
हैलो डियर रीडर्स । मै सूरज २६ साल का लड़का भोपाल में Antarvasna रहता हूँ। मैं एम कोम फ़ाइनल इयर का स्टुडेंट हूं। अभी भी मैं अपने चाचा के यहां रह रहा हूं। मेरे चाचा मुझसे सिर्फ़ ९ साल बड़े हैं और उनकी शादी ४.५ साल पहले हुई थी। मेरी चाची बहुत खूबसूरत है ५.४ लम्बा कद खूबसूरत होंठ जूस से भरे हुए हिरनी जैसी आंखें पतली सी कमर और बड़े गोल मटोल बूब्स हैवी हिप शी लुक लाइक ए ब्युटी क्वीन। उसके बूब्स का साइज़ है ३८ /२७ /३६ ।
एक दिन मेरे चाचा घर वापस आये तो काफ़ी परेशान थे हमने (मैं और चाची) उनसे पूछा तो कहने लगे कि मुझे करोबार में बहुत नुकसान हुआ है और कुछ भी बाकी नहीं बचा फिर चाचा ने अपना सब कुछ बेंच दिया और बचने वाले रुपयों से मुम्बई चले गये और मेरे घर वालों से कहा कि सूरज को इधर ही चाची के पास रहने दें तो मैं चाची के साथ रहने लगा।
मैं रोज़ कोलेज़ जाता और वापस घर आता तो चाची मुझे खाना देती और फिर मैं खाना खा कर सो जाता और फिर शाम को उठ कर स्टडी के लिये चला जाता और फिर रात को वापस आता। एक दिन की बात है मैं कोलेज़ गया तो कोलेज़ बंद था क्योंकि कोलेज़ में झगड़ा हो गया था जिसकी वजह से कोलेज़ में स्ट्राइक थी तो मैं वापस घर आ गया मैं अपने कमरे मैं अपनी चीज़ें रख कर चाची के रूम की तरफ़ आया कि चाची को बता दूं कि मैं कोलेज़ से आ गया हूं अभी मैं कमरे के दरवाज़े पर पहुंचा ही था कि मैंने चाची को देख लिया वो अपने कपड़े बदल रही थी। मैं वापस होने लगा तो मेरा दिल चाहा कि मैं चाची को देखता ही रहूं तो मैं वापस आ कर दरवाज़े की ओट से चाची को देखने लगा चाची ने पहले अपना सूट उतारा फिर ब्रा भी उतार दी और शीशे के सामने खड़ी होकर खुद को देखने लगी
उफ़ कितना खूबसूरत बदन है चाची का क्या खूबसूरत बूब्स हैं और क्या पतली कमर है, मैं देखता ही रह गया और मेरा लंड खड़ा हो गया इससे पहले मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा था मगर आज अचानक ही मेरे दिल में ख्वाहिश जागी क्यों न मैं चाची की चूत का मज़ा लूं। सामने चाची नंगी खड़ी थी और मैं उसको देख रहा था और मैं उसको देखता ही रहा काफ़ी देर तक कभी चाची खुद को आगे से देखती कभी साइड से शायद वो अपनी फ़िटनेस देख रही थी फिर चाची अपने बूब्स को मसलने लगी और मैं अपने लंड को मसलने लगा। फिर वापस अपने कमरे में आ गया और कुछ देर के बाद मैं दोबारा चाची के कमरे में गया और उसको बताया के मेरा कोलेज़ बंद है इसलिये मैं वापस आ गया हूं। मैंने महसूस किया कि चाची की नज़रें आज कुछ बदली हुई हैं और आज उसने मुझे अजीब सी नज़रों से देखा। फिर कहने लगी कि अच्छा ठीक है।
रात को खाना खने के बाद मैं टीवी देखने लगा और फिर रात को काफ़ी देर तक टीवी देखता रहा और चाची के बारे में सोचता रहा चाची का जिस्म मेरी नज़रों में घूम रहा था फिर मैं सो गया अचानक रात को मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे कमरे में आया है मैंने उठ कर बेड लैम्प जलाया तो देखा कि चाची है तो मैंने उससे पूछा क्या बात है तो वो कहने लगी कि मुझे अकेले में डर लग रहा है मैं तुम्हारे पास सो जाऊं तो मैंने कहा कि हां आप इधर बेड पर सो जाओ मैं सोफ़े पर सो जाता हूं और मैं बेड से उठ कर खड़ा हो गया तो वो कहने लगी कोई बात नहीं तुम भी इधर ही बेड पर सो जाओ क्योंकि यह डबल बेड है और हम दोनो ही इस पर सो सकते हैं। तो मैं बेड की दोसरी साइड पर आ कर लेट गया अब मेरी नींद उड़ गई थी और मैं सोच रहा था कि कब चाची गहरी नींद सो जाये और मैं चाची के जिस्म को सही तरह देख सकूं।
काफ़ी देर मैंने इन्तज़ार किया, १ घंटे बाद मैंने चाची के जिस्म पर हाथ लगाया तो वो गहरी नींद में थी उसको कुछ पता नहीं लगा तो मैंने हाथ को फेरना चालू केर दिया आहिस्ता आहिस्ता मैंने हाथ को चाची के बूब्स की ब्रा खोल दिये और फिर मैंने चाची का एक बूब हाथ में ले लिया वो इतना बड़ा था कि मेरे हाथ में नहीं आया फिर मैंने आहिस्ता से चाची की कमीज़ के बटन को खोला और अब चाची के बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे उसने इस वक्त ब्रा नहीं पहना हुआ था। मैंने उसके मम्मे को हाथ लगाया तो वो टाइट हो गया। फिर मैं आहिस्ता से उस पर अपने होंठ रख दिये मैंने उसकी चूचियों को मुंह में ले कर आहिस्ता आहिस्ता चूसने लगा फिर मेरे दिल में आया कि मैं चाची के रस भरे होंठों पर किस करूं जब मैंने होंठों पर किस करने के लिये मुंह उठाया तो मुझे लगा कि जैसे मैं बर्फ़ का हो गया हूं क्योंकि चाची की आंखें खुली थी।
मैं चाची को जगता देख कर इस तरह हो गया जैसे मुझे सांप सूंघ गया हो और मेरे हाथों के तोते तो क्या चिड़िया कौव्वे तक भी उड़ गये हों। चाची ने मुझ को कहा यह क्या कर रहे हो? तो मैंने शरम से सर झुका लिया तो चाची ने मेरी थोड़ी से पकड़ कर मेरा चेहरा अपने चेहरे के सामने किया और कहने लगी जब तुम छुप छुप कर मुझे देख रहे थे तो तब भी मैंने तुम्हें देख लिया था यह तुम क्या कर रहे हो मैं तुम्हारे चाचा को बता दूंगी तो मैं बहुत डर गया और चाची से कहा कि आप चाचा को न बताना प्लीज़ मैं दोबारा ऐसी हरकत नहीं करूंगा। तो वो कहने लगी एक शर्त पर तुम्हारे चाचा को नहीं बताऊंगी तो मैंने कहा कि क्या शर्त है मुझे आपकी हर शर्त मंज़ूर है
तो चाची कहने लगी कि जो तुम कर रहे थे दोबारा करो, मैंने कहा के नहीं यह बात ठीक नहीं है चाची (वैसे मैं दिल में बहुत खुश हो रहा था) तो चाची ने कहा कि ठीक है मैं चाचा को बता दूंगी और तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त मंज़ूर है तो मैंने चाची से कहा कि ठीक है और चाची को बाहों में ले लिया और उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा तो चाची ने मुझे कहा कि तुम्हें तो किस करनी भी नहीं आती फिर चाची ने मुझे किस किया तो मेरे पूरे जिस्म में करेंट दौड़ गया और मैं ने चाची को ज़ोर से दबाया फिर चाची ने मुझे कहा कि मेरे कपड़े उतारो।
जब मैंने चाची की कमीज़ उतारी तो चाची के मम्मे पकड़ लिये और उनको मसलने लगा चाची को भी मज़ा आने लगा तो वो कहने लगी आआहह्ह ज़ोर से चूस ले आज मेरे मम्मों को और बुझा दे मेरी प्यास फिर चाची ने मेरी शर्ट के बटन खोल दिये और मेरी छाती पर किस करने लगी। मुझे भी मज़ा आने लगा फिर चाची ने मेरा ट्राउज़र भी उतार दिया और मेरे जिस्म पर हाथ फेरने लगी और फिर उसने मेरा लंड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी आआहह्ह कितना बड़ा है तेरा लंड गुड्डो यह तो बहुत बड़ा है रे अब मैं भी काफ़ी इज़ी महसूस कर रहा था क्योंकि अब बात खुल गई थी फिर मैं चाची के पूरे जिस्म पर हाथ फेरने लग गया। उसके मम्मों पर उसकी चूत पर उसकी गांड पर। मैंने एक उंगली डाली तो वो चीख उठी ओय उल्लू के पट्ठे क्या कर रहा है?
फिर मैंने चाची को कहा कि मुझे गाइड करो तो उसने मुझे कहा कि मैं उसकी टांगों के दरमियान आ जाऊं और उसकी टांगों को उठा कर कंधों पर रख लूं तो मैंने यह ही किया फिर उसने कहा कि अब अपने लंड को मेरी चूत में डालो फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो उसने नीचे से एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा पूरे का पूरा लंड उसने अपनी चूत में ले लिया और फिर कहा कि अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में अंदर डालूं और बाहर करूं तो मैं लंड को इन और आउट करने लगा। काफ़ी देर में चाची को इसी तरह चोदा फिर चाची ने मुझे कहा कि मैं थक गई हूं अब दूसरी तरह करो और फिर चाची ने डोगी स्टायल बना लिया और मैं चाची को डोगी स्टायल में चोदने लगा और चोदते चोदते मैंने चाची की चूत से लंड बाहर निकाल लिया और उसको चाची की गांड में डाल दिया।
जब मैंने गांड में डाला तो चाची चिल्लाने लगी अबे बहनचोद निकाल मेरी गांड से मुझे बहुत दर्द हो रहा है, अबे गांड से निकाल और उसको फुद्दी में डाल मैंने कहा कि आज गांड चोदने का मज़ा भी ले लो तो वो कहने लगी कि मेरी गांड तो कभी तेरे चाचा ने भी नहीं ली तो मैंने कहा कि मुझे तो तुम्हारी गांड लेनी है तो वो कहने लगी मुझे बहुत दर्द हो रहा क्या तुम आराम से नहीं कर सकते आआअहह्हह आराम से करो वर्ना मेरी गांड फट जायेगी हरामी, आराम से अबे मादर चोद कोई तेरी गांड में अपना लंड डाले तो तुझे पता चले कि कैसे दर्द होती है ओय तुझे मैं कह रही हूं आराम फिर उसने मुझसे अपना छुड़ा लिया और मेरा लंड उसकी गांड से बाहर निकल गया और वो बैठ कर अपनी गांड को दबाने लगी फिर मुझे कहने लगी तुम तो बिल्कुल ही वहशी हो। तुम्हें किसी के दर्द का कुछ ख्याल ही नहीं है। मुझा इतना दर्द उस वक्त नहीं हुआ जब मैं पहली बार चुदी थी जितना दर्द मुझे आज हुआ है
फिर कुछ देर बाद मैंने दोबारा चाची को चोदने लगा और फिर सारी रात हमने मज़े लिये और मैंने चाची को हर तरह से चोदा कभी डोगी स्टायल में तो कभी घोड़ी बना कर कभी सीधा लिटा कर तो कभी उसको अपने लंड पर बिठा कर, हर तरह से मैंने उसको चोदा। मैंने और चाची ने खूब चुदाई की और करवाई और अब हम रोज़ ही मज़े करते हैं लेकिन अब मुझे चाची को चोद कर पहले जैसा मज़ा नहीं आता क्यों अब उसकी चूत खुली हो गई है और जो मज़ा तंग चूत में है वो खुली चूत में कहां आप का क्या ख्याल है दोस्तों आप अपनी राय मुझे जरुर बतायें Antarvasna
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