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कोई चार साल के बाद मैं नीरू Hindi sex stories , अपने मायके दिल्ली आई थी और अपने छोटे भाई के यहाँ ठहरी थी जो बाहर काम करता था
और मेरे आने का सुन कर वो मुझ से मिलने आया हुआ था। रोज़ ही किसी ना किसी के यहाँ दावत होती थी।
उस रोज़ मेरे बड़े भईया ने खाने पर बुलाया था तो मैं सुबह ही अपने छोटे भाई के साथ उनके घर चली गई। हम सब लोग बातें कर रहे थे कि मेरे छोटे भाई ने भाभी से कहा- भाभी, आप नीरू को भईया से घर भिजवा देना क्योंकि मैं आज दोपहर की गाड़ी से वापस जा रहा हूँ।
हम लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने बताया कि उसे और छुट्टी नहीं मिल सकती।
शाम के 7 बजे होंगे, सर्दियों की रात थी हम सब बातें कर रहे थे कि उसी समय कॉल बेल बजी तो भईया ने जा कर देखा और उनकी आवाज़ आई- आहा आईये ! यार अचानक ही, इस समय कौन सी गाड़ी आती है कब आये?
मैंने और भाभी ने देखा तो रवि भाई थे जो मेरे चचेरे भाई थे।
वो अन्दर आये और मुझे देखते ही हैरत से बोले- अरे वाह नीरू तुम ! कब आई?
और मुझे गले लगा कर मेरी पेशानी चूमते हुए शिकायत से बोले- यार, फोन ही कर देते नीरू के आने के बारे में !
तो भईया शरमिन्दा होकर बोले- हां मैं सोच ही रहा था।
हम सब बैठे तो भाभी ने रवि भाई से पूछा- आपका सामान?
तो मुस्कुरा दिये- सामान होटल में है, मैं यहाँ एक कॉनफ़ेरेन्स में आया हूँ, सोचा आज तुम लोगों से मिल लूं और नीरू को देख कर तो मज़ा आ गया।
तो मैं शरमा कर हंस दी।

सबने उनसे शिकायत कि यहाँ ही आ जाओ, पर वो ना माने। थोड़ी देर बाद भाभी ने खाना लगाया और इस बीच वो मुझ से बातें करते रहे। उनको देख कर मेरी अजीब सी हालत हो रही थी, रवि भाई
बिल्कुल नहीं बदले थे इन चार सालों में। वही मुस्कुराता चेहरा, वही प्यारी प्यारी दिल मोह लेने वाली बातें।
सारी पुरानी बातें याद आ रही थी, मैं पता नहीं कब उनको दिल दे बैठी थी और दिल ही दिल में उनको अपना मान लिया था। लेकिन कभी अपने दिल की बात उनसे कहने की हिम्मत ही ना हुई, लड़की
जो थी। बहुत रातें खराब की थी उन्होंने मेरी, रात-रात भर करवटें बदलती थी। आंखें बन्द करती तो उनका चेहरा सामने आ जाता। फिर तो मन ही मन उनके प्यार मैं इतना पागल हुई कि उन्हें अपने पति के रूप में देखने लगी।
एक बार तो मेरी बुरी हालत हो गई उस रोज़ एक शादी से हो कर आये और मैं सोने के लिये लेटी तो फिर रवि का चेहरा मेरी आंखो में था। वो दुल्हा बने खड़े हैं और मैं दुलहन के रूप में हूँ सब घर वालों ने हमें अपने कमरे मैं भेज दिया और रवि भाई ने दरवाजा बन्द कर लिया और फिर वो मेरे पास आकर बैठे और मेरा शर्म से लाल चेहरा उठा कर बोले- आज रात भी शर्म आ रही है?
मैंने नज़र उठा कर उन्हें देखा तो उन्होने अपनी बाहें फैला दी और मैं उनकी बाहों मैं जा कर सिमट गई। मेरा चेहरा अपने हाथों में लेकर उन्होने अपने तपते हुए होंठ एक एक करके मेरी पेशानी, आंखें और फिर मेरे सुलगते हुए होठों पर रख दिये तो जैसे मेरी जान ही निकल गई और मैं उनसे लिपट गई।
फिर तो जैसे तूफ़ान आ गया, पता ही ना चला के हमारे कपड़े कब हमारे जिस्मों से अलग हो गये और वो मेरे जिस्म से खेलने लगे थे। कभी वो मेरे गुलाबी गालों पर प्यार करते तो कभी होंठ चूमते तो कभी उनकी गरम ज़बान मेरे होठों पर मचल जाती, कभी वो मेरे दूध दबाते तो कभी उन पर प्यार करते। फिर उनकी जबान मेरे होंठो से होती हुई मुंह के अन्दर चली गई थी।
हम दोनो लिपट गये और मेरी हल्की सी चीख निकल गई, उन्होंने मेरे दोनों दूध थाम लिये थे और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे।
मैं सिसक उठी- आह प्लीज, धीरे धीरे करिये ना…।
‘उफ़ उफ़ आह! आह नीरू, मेरी जान कब से तड़प रहा हूँ इस गरम गरम रेशमी जिस्म के लिये। कितनी प्यारी हो तुम आह’
तो मैं भी सिसक उठी- सच्ची बहुत तड़पाया है आपने, ऊउइ आह !
‘क्या हुआ जान। वो मुस्कुराते हुए बोले, तो मेरी शरम से बुरी हालत हो गई।
‘कुछ नहीं, मैं धीरे से बोली; उनका गरम गरम सख्त सा वो … लण्ड मेरी चिकनी रानो मैं मचल रहा था मेरी रानों में जैसे चींटियां दौड़ रही थी।
‘बताओ ना जान अब क्योंकि शरमा रही हो? उन्होने मेरा होंठ धीरे से काट लिया।
‘ऐ ए ऊ न ह नहीं ना क्या कर रहे हैं आप? मैं कसमसाई तो वो होंठ चूस कर धीरे से बोले- कैसा लग रहा है जान?
तो मैंने शरमा करा उनका चेहरा अपने दूधों पर रख लिया तो वो फिर सटने लगे और मेरी एक चूंची मुह मे लेकर चूसी तो मैं बिलख उठी
‘आह शाम ! उफ़ ! आह ! यह कैसा मज़ा है आह सच्ची मर जाऊंगी मैं।’ नीरू मेरी जान मेरी गुड़िया पैर खोलो ना अब।
‘उफ़ आह रवि मेरे प्यार, मुझे बहुत डर लग रहा है मैं क्या करूं, अई मा धीरे ना उफ़ उफ़ आह।’
वो मेरे दूध ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे।
‘पगली डरने की क्या बात है?’ और मेरे ऊपर से उतर कर मेरी बगल मैं लेट कर फिर मेरे होंठ चूम कर मुस्कुराये।
‘लाओ मैं तुम्हारा परिचय इन मस्त चीजों से करा दूँ, फिर डर नहीं लगेगा।’
और मेरा हाथ थाम कर एकदम से अपने गरम गरम लण्ड पर रखा तो मैं तड़प गई और वो मेरे दोनों दूध में मुंह घुसा कर मचले ‘आह आहम निक्को मेरी जान। उफ़, आह रवि आह आह’
और उनका गरम लण्ड अब मेरे हाथ में था, मेरा हाथ पसीने से भीग गया और तभी मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी, उनका हाथ अब मेरी रानों के बीच मेरी चूत सहला रहा था जो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।
‘ऊ औ उइ, ऊओफ, आअनह ना ना नहीं’ और मेरे पैर खुद बा खुद फ़ैलते चले गये और उनके लण्ड को अब मैं ज़ोर ज़ोर से हिला रही थी।
‘आह मेरी निको मेरी जान मेरे प्यार, उफ़ कितनी प्यारी है इतनी चिकनी अह कितनी नरम और गरम है ये।
मैंने उनके होंठ चूम लिये और अपनी गरम जबान उनके होठों पर फ़ेरते हुए सिसकी।
‘क्या रवि,
‘यह मेरी जान ये…, वो मेरी चूत दबा कर और मेरे होंठ चूम कर सिसक उठे तो मैं ठुमकी।
‘बताओ ना क्या – तो मेरे होंठ चूस कर मेरी आंखों में देख कर मुस्कुराये।
‘तुम्हें नहीं मालूम इसका नाम?’
तो मैं शरमा कर ना में मुसकुराई- ऊन हूँह।
‘अच्छा तो इसका नाम तो मालूम होगा जो आपके हाथ में है? तो मैं शरमा कर धीरे से लण्ड दबा कर हंस दी,”हट गन्दे।’
मेरे दूध चूसते हुए एकदम से काट लिया तो मैं मचल उठी,”ऊउइ नहीं ना।’
और उनका चेहरा उपर किया तो बोले- पहले नाम बताओ, नहीं तो और सताऊंगा।
‘मुझे नहीं मालूम, बहुत गन्दे हैं आप।’
‘अच्छा एक बात बताओ, ये क्या, कैसा है ?’
मैं अनजान बन कर मुसकुराई- क्या?
तो मेरे होंठो पर ज़ोर से प्यार करके बोले- वो जिससे आप इतने मज़े से खेल रही हैं।
तो मेरी नजरें शरम से झुक गई और धीरे से उनका लण्ड दबा कर बोली- ये?
‘हाँ मेरी भोली सी गुड़िया इसी का तो पूछ रहा हूँ।’
तो मैं हंस दी, और शरमा कर बोली- बहुत प्यारा सा है।’
‘बिना देखे ही कह दिया प्यारा है।’ तो उनके सीने मैं मुंह छुपा कर मैं धीरे से बोली ‘आपने दिखाया ही नहीं तो फिर।’
‘देखोगी जान।’ तो मैं उनसे लिपट गई और अपने आप को ना रोक सकी।
‘कब से तरस रही हूँ सच्ची’। और वो एकदम से मुझसे लिपट गये उनकी पूरी जबान मेरे मुंह के अन्दर थी इतनी जोशीली इतनी गरम कि मैं पागल हो उठी। मेरे दोनो दूध दबा कर लाल कर दिये और मेरी चीख उनके मुंह मैं ही घुट गई मैं बुरी तरह तड़प उठी क्योंकि कि उनकी अंगुली एकदम से मेरी चूत मैं घुस पड़ी। मेरी पूरी चूत भीग गई। मेरे चूतड़ और गहराई से लेने के लिये उछलने लगे।
उनके गरम लण्ड के उपर रज की बूंदे आ गई। खूब चिकना हो गया उनका प्यारा सा लण्ड। मैं बेचैन हो कर सिसकी।
‘बस, ऊफ… बस ना प्लीज, दिखा ही दो ना अब, मेरी जान कब से तड़प रही हूँ।
मैंने उनसे अलग होने कि कोशिश कि तो मुझे फिर से लिपटा कर सिसके
‘क्या मेरी जान बताओ ना मुझे।’
‘मेरा, मेरा, उफ़ कैसे नाम लूं मैं मुझे शरम आती हैं रवि।’
‘मेरी जान मेरा ये प्यारा तुम्हे पसंद है ना’
‘हां हां मेरी जान है यह तो, कितना प्यारा है’ मैं लण्ड दबा कर सिसक उठी। – तो बताओ ना अपनी जान का नाम।’
‘मत सताओ ना प्लीज उफ़ आह आह, मत करो ना मर जाऊंगी मैं सच्ची, ऊउइ नहीं इतनी ज़ोर से नही, दुखती है ना’
‘क्या दुखती है मेरी जान।’
हाय रे मां, मैं क्या करूं प्लीज, दिखा दो ना, अब ना तरसओ अपनी निक्को को।’
वो मेरे होंठ चूस कर सिसके – बस एक बार नाम ले दो मेरी जान।’
मेरी शरम से बुरी हालत थी मैं उनके सीने मैं मुंह छुपा कर सिसक उठी – मेरा आह मेरा वाला लण्ड … ऊउइ ऊनह ऊनह आह’
और वो मेरे होठों से झुम गये। और फिर हम दोनो अलग हुए तो वो उठे और मुझे अपने सीने से लगा कर बैठ गये और अब जो मेरी नज़र पड़ी तो मैं देखती रह गई। सावँला, सलोना, तना हुआ लण्ड
मेरी हथेली पर रखा हुआ था। मैं उसे देख रही थी और वो मेरे गोल, भरे भरे और तने हुए दूधों से खेल रहे थे और उनकी अंगुली धीरे धीरे मेरी चूत की दरार मैं उपर नीचे चल रही थी। बहुत मस्ती छाने
लगी थी। खूब तना हुआ उनका 7 इंच लम्बा और खूब ,मोटा गरम लण्ड बहुत हसीन लग रहा था जिसका सुपारा उनकी चिकनी रज से गीला हो रहा था। मेरे होंठो पर होंठ रख मेरी चूत दबा कर वो
सिसके –
‘जान कैसा लगा मेरा।’ तो मैं मस्त हो गई, – ‘बहुत प्यारा है सच्ची, उफ़ कितना बड़ा और मोटा है ये।’
‘खेलो ना इस से’ तो मैं धीरे लण्ड सहलाने लगी और उन्होने चूंची पर होंठ रगड़ कर उस पर जैसे ही जबान फैरी तो उन्होने मेरा चेहरा अपने सीने पर दबा लिया ।
‘आह आअह मेरी जान मेरी निको मेरी उफ़ उफ़ आह कितनी गरम अह चिकनी जबान है अह मज़ा आ गया’ ‘उफ़ मेरी प्यारी सी चूत। ऊम ऊम मेरी जान मेरे रवि खूब ले लो मेरी आह पूरी ले लो आह ऊउइ। किस से खेलूं मेरी जान; मेरी मेरी अहा मेरी च च चूत से ऊफ’और मेरे मुंह में उनकी जबान घुस गई।
हम दोनों मज़े से अब एक दूसरे की जबान और होंठ चूस रहे थे। वो एक हाथ से मेरी चिकनी चूत को और दूसरे हाथ से मेरे दूध दबा रहे थे और मैं उनके तने हुए गरम लण्ड से खेल रही थी जो पूरा उनकी रज से चमक रहा था और यही हाल मेरी चूत का था। मेरी दोनों जांघे पूरी फ़ैली हुई थी और मेरी चूत का रस मेरी चिकनी सुडौल रानों पर मल रहे थे।
काफ़ी देर बाद हम दोनो अलग हुए तो दोनो की बुरी हालत थी। दोनो के चेहरे एक दूसरे के थूक से गीले हो रहे थे। मेरे दूध उनके दबाने से लाल हो रहे थे। फिर उन्होने मुझे लेटा दिया और मेरे उपर आकर मेरी आंखो मैं देख कर बोले – दिल बहुत चाह रहा है जान।’
तो मैं उनके कंधे थाम कर होंठ चबा कर मचली – बहुत हो गया, आ जाओ ना अब।
वो जैसे ही मेरे उपर लेटे तो उनका गरम चिकना लण्ड मेरी छोटी सी चिकनी चूत पर लेट गया और मैं सिसक गई ; ‘सुनिये’
‘हां जान’ वो मेरे होंठ चूस कर बोले, तो मैं होंठ चबा कर शरमा कर सिसकी, आपको कैसी लगी मेरी वो;
तो मेरे दूध सहला कर मुसकुराये – अब भी शरम आ रही है मेरी गुड़िया को’
तो मैं शरमीली नज़रों से उन्हें देख कर मुसकुराई – ‘हूँ।’
मेरी आंखो को चूमते हुए सिसके – ‘बहुत प्यारी है मेरी जान ।
तो मैं मस्ती में सिसकी- क्या रवि, नाम लो ना प्लीज मेरी वो का’
‘मेरी गुड़िया की चूत … आह बहुत प्यारी है सच मेरी जान इतनी चिकनी, नरम, गरम, छोटी सी चूत, जी चाहता है खूब प्यार करूं इसे।’
‘आह, आह, आह, रवि मेरी जान, तो करो ना उसे प्यार और … और। हां बोलो ना जान, रवि, आह मैं प्यार कर लूं इस प्यारे से अह अह लण्ड को’
मेरे होंठ पर फिर से उसने होंठ रख दिये – उफ़ मेरी निक्को पागल कर दोगी, आज तो सच में’
और मेरी जबान चूसने लगे और फिर मुझे करवट से लेटा कर एक दम से घूमे और मेरे चेहरे की तरफ़ पैर करके मेरी चिकनी रानों पर चेहरा रख मेरी चूत पर प्यार कर लिया – आह मेरी निक्को, सच
कितनी हसीन चूत है मेरी रानी की’
‘आह रवि उफ़ अह आराम आराम से, उफ़ ओह अह’ उनका तना हुआ गरम लण्ड मेरे गालों पर मचल रहा था और मैं उनके चिकने लण्ड के आस पास प्यार कर रही थी और अपनी गरम गरम जबान फैर रही थी। उनके लण्ड के आस पास बिलकुल बाल ना थे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मेरी गरम जबान की चिकनाहट से वो सिसके
“आह आह निक्को मेरी जान खेलो ना मेरे लण्ड से, मेरी जान, उफ़ मेरी नन्हीं सी चूत वाली गुड़िया’
‘ओह आह मज़ा उफ़ आ गया रवि मेरी जान, चाटो ना मेरी गरम चूत।’ मैं ने उनका लण्ड थाम कर उस पर प्यार किया तो मेरे होंठ रज से भीग गये मैं अपने होठों पर चिकनाई मलने लगी और तभी मैं तड़प कर चीख पड़ी – ऊउइ ऊउइ ऊऊम अहा उफ़ शहाआआआम मेरी मेरी आइ माअ उफ़ मेरी चूऊऊत।
उनकी जबान मेरी चूत मैं चल रही थी। वो बुरी तरह से मेरी चूत चूस रहे थे मेरी राने पूरी फैली हुई थी और मेरी चूत से चप चप की आवाज आ रही थी –
आआहम हम प्लीज, आह उफ़ धीरे, मर जाऊंगी मैं, हाय मेरी आह आह चूत उफ़’ – और मुझ से ना रहा गया तो मैं ने एकदम से गरम लण्ड अपने मुंह में ले लिया।
रवि मेरी चूत में चिल्ला पड़े – आअह आआह निक्को निक्कक्को उफ़ आअह उफ़्फ़फ़्फ़ पूरा का पूरा, आह पूरा ले लो मुंह में, ऊम आअह आह मेरी जान मेरी गुलाबी चूत वाली जान उफ़ उफ़ आह।’
गरम लण्ड मेरे मुंह मैं मचल रहा था और उनकी जबान मेरी चूत मैं घुसी जा रही थी। मेरी पूरी चूत और जांघे उनके थूक से भीग रही थी और मेरी चूत लाल हो चुकी थी और रस टपका रही थी। कभी सोचा भी ना था कि लण्ड चूसने और चूत चुसवाने में इतना मज़ा आयेगा।
उनका पूरा लण्ड मेरे थूक से भीग रहा था और उनका लण्ड मेरे गले के अन्दर तक जा रहा था कि वो तड़प उठे – रुक आह रुक रुक जाओ निक्को, रुक रुक जाओ बस’ अब तो मैं ने लण्ड मुंह से निकाला तो वो उठ कर बैठे।
‘क्या हुआ’ मैं ने उन्हें देखा तो अपने लण्ड का सुपारा दबा कर बोले – आह मेरी जान मैं निकल पड़ता और मुझे देख कर मेरे होंठ और गाल को चूसने लगे जो थूक से भीग रहे थे,
‘मेरी जान, मेरी निक्को, दे दो ना अब यह प्यारी सी चूत मेरी गुड़िया।’
मैं उन से लिपट गई- रवि आह मेरी जान और उन्होने मुझे लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गये । मैंने हाथ फैला कर बांहो मैं ले लिया और उनके होंठ चूस कर सिसकी ली,
‘सुनिये। हां मेरी जान धीरे कीजियेगा, बहुत बड़ा है आपका तो’ वो मुसकुराये – क्या बड़ा है मेरी जान।
तो मैं शरमा कर हंस दी।
‘आपका प्यारा सा लण्ड और क्या जान’
‘हूँ, रखो ना उसे अपनी रेशमी चूत पर’
‘मुझे शरम आती है।’
‘प्लीज जान, देखो अभी तो मज़े से खेल रही थी’
तो मैं उनके दोनो हाथ थाम कर अपने दूधों पर रख दिये और सिसकी’
‘दबाईये ना इन्हें’ और हाथ नीचे ले जाकर लण्ड थाम कर अपनी चिकनी मस्त चूत के छेद पर रखा तो जैसे मेरे जिस्म में करण्ट दौड़ गया हो। आह रवि और मैं उसे अपनी चूत की चिकनी और गरम फ़ांक से सटा कर ऊपर नीचे करने लगी: मेरी बुरी हालत थी।
वो मचले – बस बस अब रख लो छेद पर’ और जैसे ही मैं ने छेद पर रखा उनके होंठ मेरे होठों पर आ गये और सिसके – लो मेरी जान तैयार हो ना।
‘आह हां हां मेरी जान आराम से’ और उनकी कमर हिलने लगी तो मैं तड़प उठी
‘ऊऊउइ मा नहीई ऊऊफ ऊऊनह आआअघ उफ़्फ़फ़्फ़फ़ आआह ओह्हह प्लीज ऊओफ रवि्मम नहीइ, हाय नहीं ओह मां उफ़्फ़फ़’
चिकनाई के कारण उनका लण्ड 3 इन्च मेरी चूत मैं घुस पड़ा और मुझे लगा जैसे मेरी चूत मैं गरम गरम लोहा घुस पड़ा हो। मेरी चूत गरमी और चिकनाई से नहा गई और वो भी चिल्ला पड़े –
आआअह नीरू मेरी गरम चूत वाली आअह आअह गुड़िया आह बहुत तंग और अहा अहा गरम चूत है मेरी निक्को जान की’
मैं उनसे लिपट पड़ी
हाये रे रवि, बहुत गरम हो रहा है ये अह आराम से धीरे करो ना, अपनी निक्को का मत रुलाओ प्लीज’ ‘आह मेरी जान’ और उनके चूतड़ फिर हिले तो मेरी जैसे जान निकल गई।
‘अम्मम्मा नहीईइ ऊऊउइ ऊऊमफ मैं सर झटकने लगी। मेरी नज़ुक सी चूत का मुंह फैल गया और गरम लण्ड अन्दर जाने के लिये मचलने लगा।
‘आह निको निक्को मेरी जान बहुत हसीन, उफ़्फ़ कोरी चूत है मेरी रानी की, उफ़ मज़ा आ गया’
वो मेरे गाल और होंठ चूम और चूस रहे थे। इस धक्के ने मेरी बुरी हालत कर दी। दर्द के कारण मेरी आंखो से आंसू बहने लगे और मेरे आंखो को चूम कर वो सिसके – ना रो मेरी जान बस थोड़ी देर की बात है।’
‘नहीं नहीं प्लीज अब नहीं रवि बहुत दर्द हो रहा है, मैं मर जाऊंगी’
मेरा पूरा चेहरा लाल हो रहा था मैं ने उनकी कमर ज़ोर से पकड़ ली तो मेरे होंठ चूस कर सिसके ‘बस थोड़ा सा रह गया है मेरी निको, बस एक बार और।’
‘नहीं रवि नहीं’ मैं ने उनका चेहरा दोनो हाथों मैं लेकर होंठ चूम लिये, मत रुलाओ अपनी निक्को को, तरस खाओ, सच मैं बहुत दर्द है उफ़्फ़ ।’
‘बस मेरी गुड़िया देख, बस दो इंच लण्ड बचा है’
मैंने हाथ अपनी चूत पर लेजा कर लण्ड पकड़ा।
‘आहाह हां देखो मेरी जान बस इतना सा बचा है’
‘नहीं रवि सच मैं, तुम्हारा लण्ड तो बिलकुल सूखा रखा है’
तो मेरे होंठ चूम कर सिसके – एक मिनट जान” और उपर होकर ढेर सा थूक मेरी चूत पर डाला और मेरे होंठ चूम कर बोले – देखो खूब चिकनी हो गई मेरी गुड़िया की नन्ही सी चूत।
‘हाय मैं क्या करूं। बस जल्दी से घुसा डालो दो अब’
और फिर मेरे होठों पर होंठ रख कर ज़ोर का धक्का लगया तो फच से पूरा लण्ड मेरी चूत के अन्दर था। मैं लिपट गई उनसे। उफ़्फ़्फ़ इतना मज़ा; उफ़ इस मज़े मैं रवि से झूम गई और मेरे गोल बड़े
बड़े चूतड़ उनका लण्ड लेने को उछलने लगे और उन्होने मेरे होंठ से होंठ अलग किये और मेरा दूध मुंह मैं ले लिया और दोनो बुरी तरह तड़प रहे थे।
‘हाय रे मज़ा आ गया मेरे रवि और तेज़ करो, अह मुझे क्या हो रहा है उफ़ अह ऐयया आह ऐई मां मेरी च च चूत, बोहोत गरमा गरम लण्ड है और तेज़ करो ना जल्दी जल्दी।’
‘हाय मेरी निक्को उफ़ आह आह तेरी गरम चूत, उफ़ह बहुत तंग आह और गहरी चूत है मेरी चुद्दो की अह अह्ह्ह्ह निक्को चूतड़ उछालो अह अह हां ले लो मेरा लण्ड आह उफ़ अपनी आह गरम छोटी सी चूत में, मेरी आअह मेरी जान।
‘ऊउइ रवि हाय रे मज़ा आ गया खूब तेज़ करो ना अन्दर… बाहर , उफ़ मेरा प्यारा सा गरम मोटा लण्ड ऐ मां मज़ा आ गया।’
और फिर वो एकदम से चिल्ला पड़े – निक्को निक्को उफ़ आअह आऐई मैं अह मैं आने वाला हूँ ले लो मेरा लण्ड उफ़”
“आह लण्ड मेरी जान मेरी चूत मार दी।’
कमरे में फस्सह फस्सह और हम दोनो की सिसकियों की आवाजें गूंज रही थी।
‘आ जाओ मेरी जान, मेरे राजा उफ़ आह हाय रे मज़ा आ गया, झाड़ दे राजा लण्ड को’
और हम दोनो के धक्के तूफ़ानी हो गये और फिर मुझे लगा के मेरी पूरी चूत फैल गई हो उनकी लण्ड से। रवि की गरम मनी की पिचकारी जो निकली मेरी चूत के आखिरी छोर तक चली गई और
मेरी चूत का झरना भी फ़ूट पड़ा। वो मेरे दूधों पर निढाल हो कर लेट गये और मैं उनको अपने चिकने मुलायम और गरम जिस्म से लिपटा लिया। हम दोनो पसीने से नहा रहे थे।
इतना प्यारा सपना था, जब मैं सुबह सो कर उठी तो मेरी शलवार पूरी गीली थी। ऐसा लगा जैसे वो रात वो मेरे पास रहे हो, और चुदाई कर रहे हो। लेकिन वो तो सिर्फ़ एक सपना था। कुछ समय के बाद मेरी शादी दूसरी जगह हो गई। शादी के 4 साल बाद आज फिर रवि वही मेरे सामने थे।
‘अरे भाई नीरू कहां खो गई, मैं कुछ पूछ रहा हूँ।’
मैं एकदम से चौंक गई और उनको देखा और शरम के मारे उनसे आंख ना मिला सकी और भाग कर भाभी के पास किचन मैं घुस गई।
उनकी ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई, पता नहीं क्या हुआ इस लड़की को, ना जाने कहां खो गई थी। भाभी ने मुझ से पूछा – ‘क्या हुआ ‘ तो मैं अपने आप को कन्ट्रोल करके हंस दी।
‘नीन्द आ गई थी एकदम से।’ पर उन्हे क्या पता था कि मेरी नीचे से पूरी गीली हो गई थी।
वो भी हंस दी, मै भी अपने पैर समेटे हुये हंसने लगी। Hindi sex stories
यह बात 2008 की है, जब मैंने पहली बार घर से दूर कोटा में एडमिशन लिया था और कॉलेज की दहलीज पर कदम रखा था. मेरे पहले दिन ही कॉलेज में कुछ अच्छे दोस्त बन गए.. मुझे अच्छा भी लगा. दो दिन बाद मेरी क्लास में एक नई लड़की आई, जिसका नाम तान्या था. वो दिखने में एकदम गोरी, खूबसूरत, शांत स्वभाव की लड़की थी. उसके लिए मैं ये कह सकता हूँ कि उसे भगवन ने फुर्सत से बनाया था.
चूंकि उसका कॉलेज में पहला दिन था तो मैंने उससे पूछ लिया- न्यू एडमिशन?
तो उसने हाँ में जवाब दिया. उसके बाद मैंने उसका नाम पूछा, तो उसने अपना नाम तान्या बताया. वो इटारसी की थी. वो एक साधारण देसी लड़की थी. उसके बाद 10 दिन उससे कोई बात नहीं हुई.. न ही वो किसी लड़के से क्लास में बात करती थी. लेकिन पता नहीं उसे देख कर मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगती थी. मन ही मन मैं उसे प्यार करने लगा था, लेकिन उससे बात करने की हिम्मत नहीं कर पाता था.
धीरे धीरे मैंने उसका मोबाइल नम्बर पता किया और उसे कॉल किया. उसने हैलो बोला, तो मैं डर गया और बात नहीं कर सका. फिर जब वो अगले दिन कॉलेज आई तो मैंने हिम्मत करके जाकर उसे बताया कि वो कॉल मैंने किया था.
इस पर उसने कई सवाल किए कि मेरा नम्बर कहां से मिला था, क्यों फोन किया था.. मुझसे क्या चाहते हो?
मैंने उसके सारे सवालों का जबाब दिया.
धीरे धीरे मेरी उससे बात होने लगी. हम लंच शेयर करने लगे. लाइब्रेरी, कैंटीन लैब में साथ जाने लगे. फिर 6 महीने बाद मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया.
लगभग एक महीने तक उसने मुझसे बात नहीं की. मैं पहले से ज्यादा उदास रहने लगा. फिर मेरे कुछ दोस्तों ने उससे बात की और कुछ क्लास की लड़कियों ने भी तब जाकर उसने मुझसे बात की. तीन महीने बाद मैंने फिर से अपने प्यार का इज़हार किया.
तब जाकर उसने कहा कि मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ, लेकिन डरती हूँ कि इसका असर हमारी स्टडी पर ना आये.
मैंने उसे समझाया कि ऐसा कुछ नहीं होता.
अब मैं उससे हर रोज घंटों बात करने लगा. रात में दो बजे तक बात करता, कभी पूरी रात लगा रहता. कभी कॉल से बात करता तो कभी मैसेज से करता रहता. ऐसे ही दिन निकलते रहे.
एक दिन मैंने उससे बोला कि मुझे तुम्हारे साथ वो सब करना है.
उसने साफ़ मना कर दिया.
मैंने उससे कुछ नहीं कहा.
फिर एक दिन वो मेरे रूम पर आई तब हम दोनों ही थे और कोई नहीं था. उसने मेरी तरफ अनुराग भरी निगाह से देखा तो मैंने धीरे से उसे किस किया. वो कुछ नहीं बोली तो मैंने उसे गले से लगाया और धीरे धीरे उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगा. अब उसे लगने लगा कि कुछ गड़बड़ होने वाली है तो वो मुझसे अलग हो गयी.
वो मुझसे कहने लगी कि ये सब शादी से पहले किसी के साथ करना गलत है.
मैंने उसे बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं मानी और अपने होस्टल चली गयी. दो दिन हमारा झगड़ा बना रहा, उसके बाद उसका कॉल आया, वो बोली- मुझे तुमसे मिलना है.
तो मैंने उससे बोला कि आ जाओ बाहर किसी पार्क में मिलते हैं.
उसने बाहर मिलने से मना कर दिया और मेरे ही रूम पर मिलने का कहने लगी.
मैंने उसे बोल दिया कि ठीक है आ जाओ.. मैं अपने ही रूम पर हूँ.
जब वो आई तो उसने मुझसे सेक्स के बारे में बात की. मैंने उसे बहुत कुछ बताया और उसने भी, जो उसे पता था मुझसे शेयर किया.
फिर वो बोली कि तुम गुस्सा मत हो जानू… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ लेकिन वो सब नहीं कर सकती और अगर तब भी तुम करना चाहते हो तो ऊपर ऊपर से जो भी करना है, कर लो.
मैंने भी उसके जज्बातों को समझा और मना कर दिया कि नहीं मुझे कुछ भी ऐसा नहीं करना है.
यह सुन कर वो मुझसे लिपट गयी और मुझे किस करने लगी. उसने मुझे पन्द्रह मिनट तक लगातार किस किया और बोली- हम आज नहीं.. लेकिन सही समय आने पर इस बारे में जरूर सोचेंगे.
इस तरह समय निकलता गया. एक दिन किसी फेस्टिवल का टाइम था, वो अपने घर नहीं गयी थी. उसकी वजह से ही मैं भी घर नहीं गया था. कॉलेज 5 दिन के लिए बंद था और सभी दोस्त अपने अपने घर जा चुके थे. उसका भी हॉस्टल लगभग खाली था, तो उसे भी बुरा लग रहा था.
मैंने उसे अपने रूम पर रुकने का ऑफर किया, तो उसने बोला कि तुम्हारे मकान मालिक क्या कहेंगे?
मैंने उससे बोला- तुम उसका छोड़ो, वो मेरी परेशानी है.
तब मैंने अपनी मकान मालिक से बात की और उन्हें बात बताई कि वो अकेली हॉस्टल में रह गई है, जिस वजह से वो डर रही है और बुरा फील कर रही है.
यह सुनकर उन्होंने उसे मेरे रूम पर रुकने की इजाजत दे दी. तब मैंने उसे बता दिया कि मकान मालिक ने रहने की हां कर दी है. वो अपना बैग लेकर आ गयी.
अब हम दोनों साथ साथ टाइम स्पेंड करने लगे. दिन तो जैसे तैसे निकल गया अब रात आयी. चूंकि मैं अकेला रहता था तो एक ही बिस्तर था.
उसने बोला- कोई बात नहीं, हम सो जाएंगे.
मुझे भी ये सुनकर अच्छा लगा. खाना खाने के बाद जब हम बिस्तर पर आये तो वो मेरे सीने पर हाथ रख कर और मेरे हाथ पर अपना सर रख कर मुझसे बात करने लगी.
बात करते करते वो सो गयी और मैं उसे देखता रहा. मुझे जरा भी नींद नहीं आ रही थी. मैं रात को लगभग दो बजे तक जागता रहा.
तभी अचानक से उसकी नींद खुली और वो मुझे जागता देख कर पूछने लगी- अभी तक क्यों नहीं सोये?
मैंने उससे कहा- तुम सो रही थी तो मैं तुम्हें देख रहा था.
यह सुनकर उसने मुझे किस किया और वो मेरे ऊपर आ कर मुझे किस करती रही. काफी देर तक किस करने के बाद मैंने उससे बोला कि क्या आज मैं तुम्हारे साथ सेक्स कर सकता हूँ?
तो उसने थोड़ा टाइम लेकर जबाब दिया कि हां कर सकते हो अगर मुझे कोई प्रॉब्लम हुई तो वहीं पर रोकना पड़ेगा.
मैं मान गया, तब फिर मैंने धीरे धीरे उसके मम्मों को सहलाना चालू किया. जब काफी देर हो गयी तो मैंने उसके टॉप को अलग किया. अन्दर का जो नज़ारा देखा तो मैं उसे देख कर पागल हो गया.
एक दूध सी सफ़ेद लड़की ब्लैक रंग की ब्रा में मेरे सामने थी. मैंने उसको देख कर उसे चूमना स्टार्ट किया. चूमते चूमते मैंने कब उसकी ब्रा खोल दी.. पता ही नहीं चला.
वो मेरे सामने आधी नंगी होकर शर्माने लगी और खुद को चादर में छिपाते हुए बोली- अपने भी तो कपड़े उतारो.
मैं अपने कपड़े निकालने लगा और केवल फ्रेंची में उसके सामने खड़ा हो गया. तब वो मेरी फ्रेंची की तरफ नज़र टिका कर देख रही थी.
मैंने उसे टोका और पूछा- कहां ध्यान है तुम्हारा?
तो वो मुस्कुराने लगी. मैं भी झट से उसकी चादर में घुस गया और उससे चिपक गया. मैंने उसे सहलाते सहलाते उसके लोअर को नीचे किया तो उसने अपनी टाँगें उठाकर उसे उतारने में मेरी मदद की. फिर मैं उसे किस करने लगा और वो मेरा साथ देने लगी.
तभी मैं सहलाते सहलाते अपना हाथ उसकी पेंटी के ऊपर ले गया, जहां उसकी चूत पहले से ही भट्टी के जैसी गर्म थी. मैंने जरा सा हाथ नीचे किया तो पता चला कि कुछ गीला और चिपचिपा सा द्रव्य उसकी पेंटी से लगा है. मैंने उससे पूछा- ऐसा क्यों?
वो बोली कि मुझे खुद नहीं पता कि कैसे गीली हो गई?
मैं समझ गया कि वो एक बार झड़ चुकी थी और उसे खुद नहीं पता था.
मैंने अब देर न करते हुए उसकी पेंटी में हाथ डाल लिया और उसकी चूत को सहलाने लगा. वो गर्म होने लगी और मुझे कसके पकड़ने लगी. तो मैंने एक झटके में ही उसकी पेंटी उसके बदन से अलग कर दी और उसकी चूत में एक उंगली डालने लगा. जैसे ही मैंने उसकी चूत में उंगली डाली, वो चिहुंक उठी. उसे थोड़ा सा दर्द हुआ तो मैंने उसे समझाया कि दर्द तो होगा और ब्लड भी आएगा.
वो कहने लगी- हां ये सब तो पता है कि पहली बार में ये आएगा.
मैंने उसे चूमा और कहा कि अगर तुम न चाहो तो मैं ये सब यहीं पर रोक सकता हूँ.
तो वो बोली- मैंने तुमसे प्यार किया है तो तुम्हारा ही इस पर हक है. आज जो चाहे हो जाए.. हम एक बार तो जरूर ही ये सब करेंगे, इसके लिए मुझे कितना भी दर्द क्यों न हो.
तब मुझे उस पर और ज्यादा प्यार आने लगा और मैंने मना किया कि नहीं, मैं अब ये सब नहीं करना चाहता.
उसने जिद करते हुए बोला कि आज कर लो.. पता नहीं ऐसा मौका दोबारा कभी मिलेगा भी कि नहीं.
तो मैं उसकी बात मान गया. चूंकि आग दोनों तरफ लगी थी, सो मैंने अपनी फ्रेंची उतार कर साइड में रख दी और उसके ऊपर आ गया.
जब उसने मेरा लंड देखा तो वो थोड़ा डर गयी और कहने लगी- एक उंगली से इतना दर्द हुआ तो इससे तो बहुत ज्यादा होगा.
तो मैंने हाँ में सर हिलाया तो उसने बोला कि जो भी हो, अब यहाँ तक पहुँच गए तो आगे भी जाएंगे.
मैंने ओके कहा तो उसने मुझसे बोला कि जब तुम ये अन्दर डालो, तो मेरा मुँह बंद कर देना.
मैंने उसे फिर से समझाया कि अगर इतना ही डर हो रहा है तो मत करो.
तो उसने मेरी एक न सुनी और बोलने लगी- अब मैं रेडी हूँ, जो चाहे सो आज कर लो.
तब मैंने उसे अपनी एक टी-शर्ट दी और उससे बोला- इसे अपने मुँह में दबा लो, जिससे आंटी के रूम तक आवाज़ न जाये.
उसने मेरी बात मान ली और कपड़े को मुँह में उतना ठूंस लिया, जितना बन सकता था.
तब मैंने उसे इशारा किया कि मैं अपना लंड उसकी चूत में डाल रहा हूँ तो उसने हाँ में सर हिलाया.
फिर जैसे ही मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत पर रखा तो वो ऊपर तरफ खिसकने लगी. मैंने उसे प्यार से किस किया और धीरे धीरे उसकी चूत पर अपना लंड फिराने लगा.
इससे उसे कुछ अच्छा लगा और आँखों से सहमति दे दी कि करो अब.
तब मैंने उसकी गीली चूत पर अपना लंड रखा और उसकी तरफ देख कर हल्का सा झटका दिया. मेरा लंड का टोपा उसकी चूत के अन्दर चला गया. उसको बहुत ज्यादा दर्द हुआ और वो मुझे धकेलने लगी. मैंने उसकी तरफ देखा तो आँख में आंसू थे. उसी समय मैं झट से अलग हो गया और अपना टोपा बाहर निकाल लिया. फिर मैंने उसके मुँह से कपड़ा निकाला और उसके आंसू पौंछे.
उसने कराहते हुए कहा- बहुत ज्यादा दर्द हुआ है.
उसने नीचे हाथ लगाया तो देखा हल्का सा ब्लड लगा था, जो उसकी चूत की साइड की स्किन कटने से निकला था.
तब मैंने उससे बोला कि अब नहीं करते हैं, जब इतना दर्द हो रहा है तो रहने दो.
उसने बोला- एक बार और कोशिश कर लो.. अगर इस बार हुआ तो फिर नहीं करेंगे.
मैंने उसकी बात मानी और उसके मुँह में कपड़ा देकर अपने लंड पर पहले तेल लगाया और कुछ तेल उसकी चूत पर भी लगा दिया. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सैट किया और इस बार जोर का धक्का लगाया तो मेरा लंड लगभग तीन इंच उसकी चूत में चला गया. वो दर्द से आंसू बहाने लगी और अपने हाथ पैर छटपटाने लगी. तब मैंने उसके आंसुओं को पोंछा और समझाया कि अब अन्दर चला गया है. कुछ देर बाद दर्द नहीं होगा.
उसने मुझे ऐसे ही दो मिनट रुकने को बोला. मैं वैसे ही उसके ऊपर रुका रहा.. अन्दर मेरा लंड जल रहा था. मुझे लग रहा था कि जैसे मैंने किसी गरम भट्टी में अपना लंड डाल दिया हो.
कुछ देर बाद मैंने थोड़ा सा हिलना शुरू किया और अपना लंड अन्दर बाहर किया, तो उसे फिर से दर्द हुआ. मैंने अब उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और अन्दर बाहर करने लगा. कुछ देर बाद वो नार्मल हुई और अपने मुँह से कपड़ा निकल कर मादक सिस्कारियां निकालने लगी. वो मुझे किस करने लगी.
जब मैंने उससे पूछा कि अब कैसा फील हो रहा है?
तो उसने मुस्कुराकर कहा- बहुत अच्छा.
मैंने उससे बोला- अभी थोड़ा और बाहर बाकी है..
उसने बोला- डाल दो पूरा, पर मेरा मुँह पकड़ कर करना.
मैंने वैसा ही किया, अपने होंठ उसके होंठ से लगा कर एक तेज़ झटका दिया और पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया.
उसे फिर से दर्द हुआ और चीखने लगी लेकिन मेरी किस की वजह से उसकी चीख वहीं सिमट गयी.
फिर थोड़ा रुक कर मैंने उसे चोदना चालू किया. वो कुछ देर बाद झड़ने वाली थी. उसे बहुत अच्छा लगने लगा था, वो कहने लगी- और जोर से और जल्दी आह आह आह्ह ऊंह.
ये कहते हुए उसने मुझे जोर से पकड़ लिया और वो झड़ गयी. उसके एक मिनट बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने तुरंत अपना लंड बाहर निकाल कर सारा माल उसकी चूत के ऊपर गिरा दिया.
जब वो उठी और उसने जो देखा तो पागल सी हो गयी. उसकी चूत से बहुत ज्यादा खून निकला था. जिससे चादर का एक फीट का हिस्सा पूरी तरह ख़राब हो गया था, उसमें दाग लग चुका था.
फिर उसने अपनी चूत की तरफ देखा तो वो सूज गयी थी और लाल हो गयी थी. वो लंगड़ाते हुए बाथरूम गयी और खुद को साफ़ करके बाहर आई.
उसने मुझे किस किया और बोली- आज जो हुआ, वो करने की हिम्मत तुमसे मिली है.. और यह रात मेरी जिन्दगी की सुहागरात से कम नहीं है.
उसके बाद उसने वो बेडशीट हटाई और दूसरी बिछाई. हम फिर से बिस्तर पर आ गए.
मैं २२ साल का कुंवारा हूं। Sex stories मैं ने फर्गुसन कालेज में बी .एस सी . की है। मेरा निक नाम संजू है। मैं हिंदु हूं। मैं पुने का रहने वाला हूं। पुने में चवन नगर पुलिस कोलोनी में रहने वाला हूं। तो मैं आपको मेरी पहली स्टोरी और पहली ही हकीकत मेरे साथ घटी हुई है वो मैं आप को बता रहा हूं। ये कोई झूठ कहानी नहीं बल्कि मेरे साथ घटी हुई घटना है।
हमारे डैडी पुलिस में हेड कांस्टेबल है। पुलिस कोलोनी दो मंजिल की है करीबन उस कोलोनी में ४८ खोलियां है। हमारी खोली २१ की थी और २२ नम्बर में गुप्ता (पुलिस – हमारे पड़ोसी) रहते थे और उनकी पत्नी और उनकी एक ५ महीने की छोटी बेटी, ऐसा परिवार था। उनकी पत्नी बहुत ही सुंदर थी ( उनकी फ़ीगर मानो प्रीति ज़िंटा की तरह थी) और उनका चेहरा काफ़ी गोरा था। उनकी उमर शायद २३-२४ के बीच थी। तो हम सब यानि वहीं के सारे पुलिस और उनकी फ़ैमिली एक दूसरे के सम्बन्धी के तरह थे यानि रिलेशन बहुत अच्छा था।
ये घटी हुई कहानी २ साल पहले की है। जब हमारे पड़ोसी मिस्टर गुप्ता ६ दिन के लिये पंढरपुर बंदोबस्त चले गये थे इसलिये उनके यहां कोई मर्द नहीं था इसलिये उन्होने मेरे मम्मी को मुझको उनके यहां सोने के लिये भेजने को कहा। और हमारे यहां ऐसा ही होता है यानि किसी के घर में से कोई पुलिस (मर्द) किसी बन्दोबस्त या ड्युटी पे जाता है तो किसी के घर में रहने वाला यानि अच्छे कल्चर के उमर में काम वाले लड़के को सोने के लिये बुलाया जाता था। इसी तरह एक दिन (मैं उनको गुप्ता मामी कह कर बुलाया करता था।) गुप्ता मामी ने मेरे मम्मी को मुझे उनके यहां सोने के लिया भेजने को कहा। मम्मी फ़ौरन राजी हो गयी क्योंकि वो भी नेक इरादे की थी इसलिये फ़ौरन तैयार हो गयी। तो मैं कॉलेज से प्रैक्टिकल करके वापस आया और खाना खाकर पढ़ाई करने लगा तो मम्मी ने कहा कि गुप्ता मामी के यहां कोई नहीं है इसलिये वहां तुम्हे सोने के लिये जाना है तो तुम वहीं जाकर पढ़ाई करो, क्योंकि उन्हे सोना होगा तेरे लिये जागना पड़ेगा। तो मैं अपना बेग लेकर उनके घर में चला गया।
तब गुप्ता मामी खाना खा रही थी। तो उन्होने मुझे खाना खाने के लिये बुलाया, लेकिन मैने उन्हे कहा कि मैं अभी अभी खाना खा कर आया हूं और आप खाना खा लीजिये मैं पढ़ाई करता हूं। तो उन्होने कहा ठीक है। फिर उन्होने खाना खा कर अपनी बेटी को कोमप्लैन पिला के उसको पालने में सुलाया। फिर बाद में उन्होने बिस्तर लगाने के लिये मुझे मदद के लिये बुलाया। तो मैं उन्हे मदद करने गया। जब बिस्तर लगाते वक्त वे झुक जाती थी तब उनके ब्रेअस्ट का गैप दिखाई दिया मैं मर्द होने के कारण वो नजारा देख कर प्रेरित हो गया। लेकिन फिर मैने आपने आप को कंट्रोल कर के पढ़ाई करने लगा। पढ़ाई करने के बाद मैं उनके पास सोने गया वो जाग रही थी। मैं सोने के लिये बिस्तर पे लेट गया। तब उन्होने कहा कि हो गयी क्या पढ़ाई तब मैने कहा हो गयी।
कुछ देर तक हम टीवी देखते रहे फ़िर बाद में यानि करीब १२.१५ बजे के वक्त टीवी बंद करके सोने लगे लाइट ओन थी। इसलिये मुझे नींद नहीं आ रही थी। मुझे तो उस वक्त उनकी ब्रेअस्ट के अलावा कुछ भी सूझ नहीं रहा था। फ़िर बड़ी मुश्किल से नींद लग गयी। सुबह होने पर गुप्ता मामी मुझे जगाने लगी थी। जब वे मुझे जगा रही थी उस वक्त जब मैं जाग गया तो फिर से उनके ब्रेअस्ट का गैप दिखाई दिया वो हमेशा की तरह बहुत खूबसूरत नजर आ रही थी। और फिर मैं उठ कर अपने घर जा कर तैयार हो कर कोलेज चला गया।
हमेशा की तरह पहला लेक्चर मथस का था ( मेरा ग्रुप मथस था)। जब मथ्स के टीचर (खान) पढ़ा रहे थे उस वक्त मेरा ध्यान लेक्चर पे लग नहीं रहा था, क्योंकि मेरे सामने सिर्फ़ उनकी तस्वीर नजर आ रही थी। जब खान सर को पता चला कि मेरा ध्यान लेक्चर पे नहीं है तो वे बोले —– तुम्हारा ध्यान आज कहां है तबीयत ठीक नहीं है क्या ? तब मैने कहा हां सर, आप मुझे थोड़ी सी वीकनेस लग रही है। तब सर ने कहा तो तुम घर जाकर आराम क्यों नहीं लेते? मैं कोलेज में होशियार था। इसलिये उन्होने मुझे बेड रेस्ट लेने के लिये कहा। फ़िर मैं मथस का लेक्चर खत्म करके दो दिन की छुट्टी ले कर घर चला गया।
तब मम्मी ने पूछा कि आज जल्दी कैसे घर आ गये तब मैने मम्मी को कहा कि आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है इसलिये मैं दो दिन कि छुट्टी लेकर कोलेज से वापस आया हूं। फिर रात को खाना खा लेने के बाद मम्मी ने कहा कि आज तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो सोने के लिये मत जाओ। लेकिन मैने मम्मी से कहा कि मैं अब अच्छा महसूस कर रहा हूं और वहां भी तो सोने ही जा रहा तो फिर मैं यहां सो जाउं या फिर वहां सोउं बात तो एक ही है न, और तो और उनके यहां कोई नहीं है इसलिये वो डर जायेंगी। फिर मम्मी ने जाने के लिये कहा तब उनके यहां सोने के लिये गया।
जब मैं उनके यहां सोने के लिये गया था तब उनकी बेटी सो चुकी थी और गुप्ता मामी टीवी देख रही थी जैसे ही मैं अंदर गया, तब मामी ने पूछा क्या तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है न। तब मैने कहा कुछ नहीं थोड़ा सी वीकनेस लग रही थी। तब मामी आगे बढ़कर मेरे सामने आ कर मेरे माथे पर छुआ तो मेरे शरीर में अजीब सी रोशनी जगमगायी। फिर बाद में हमने बेड लगाया तब हमेशा की तरह बेड लगाते वक्त उनकी ब्रेअस्ट की गैप दिखाई दी। और फिर मैं हैरान हो गया। जब हम बेड पर लेट गये तब उनको नींद लग गयी, लेकिन मुझे नींद नहीं लग रही थी।
फिर मैने थोड़ी देर के बाद जान बूझ कर नींद का नाटक करके उनके बूब्स (चूची) पर रख दिये तो मैं अच्छा महसूस कर रहा था। उनकी चूची तो बहुत ही टाइट थी और उनकी चूची का निप्पल तो मुझे खुन्नस दिखा रहा था। थोड़ी देर के बाद मैने अपने पंजे को उनके चूची को कपड़ों के उपर के ही रगड़ रहा था तब वो जाग आ गयी। और मेरे तरफ़ देखा मैं नींद का नाटक कर रहा था। तब उन्होने मेरा हाथ उनके चूची के उपर से हटाया और फिर सोने लगी। जब मैं सुबह उठ गया तब मामी ने मुझे कहा कि कल रात तुम सोते वक्त क्या कर रहे थे? तब मैने कहा मुझे कुछ भी मालूम नहीं है। तब मामी ने कहा कुछ नहीं मुझे लगा कि तुम कहीं बीमारी के वजह से तड़प तो नहीं रहे थे।
क्योंकि तुम नींद में तड़प रहे थे इसलिये पूछा।
फिर रात को मैं सो गया तो मेरा आज हिम्मत भी नहीं थी कि उनकी चूची पे हाथ रखने को। फिर जब मैं सुबह जल्दी उठ कर मुंह धोने के लिये बाथरूम जाने लगा तब बाथरूम जाते वक्त उनका किचन लगता हुआ तो मैने किचन में मामी को कपड़े पहनते वक्त देख लिया मामी निक्कर पहने हुई थी और ब्रा पहनने वाली थी कि मुझे उनकी चूचियां दिखाई दी। और फिर उनका भी ध्यान मेरे तरफ़ गया तो वो अपने आप को साड़ी में लपेट कर दरवाजे की तरफ़ आने लगी तब मैने अपनी दोनो आंखें बंद कर दी। इसलिये उनको लगा कि मैं बाथरूम जाते वक्त वो मुझे दिखाई दी और मैने जल्दी से अपनी आंखें बंद कर दी होंगी इसलिये वो मुझे बहुत ही भला समझ बैठी। लेकिन मैने तो मन भर कर खूबसूरत नजारा देखा था। फिर अगली रात को हम हमेशा की तरह सोने लगे तो मामी कहने लगी कि तुम्हारे अलावा कोई और होता तो मुझे उस हालत में देख कर जाने क्या कर बैठ जाता, लेकिन तुमने तो अपनी दोनो आंखें बंद कर दी। मुझे माफ कर दो कल जो मैने तुम्हे पूछा था कि तुम नींद में क्या कर रहे थे? तो तुमने कहा था कि मुझे कुछ मालूम नहीं है। तो मैने कहा था कि तुम शायद बीमारी की वजह से तड़प रहे हो। वो सब मैने तुमसे झूठ कहा था क्योंकि कल रात तुम्हारा हाथ मेरे चूची पर था इसलिये मैने ऐसा पूछा था, लेकिन तुम तो बहुत हो नेक इरादे के हो मुझे माफ कर दो। तब उनके मुंह से उनकी ही चूची का शब्द सुनकर मेरे शरीर में एक गुदगुदी सी फ़ैल गयी।
फ़िर हम सो गये, उसके अगले दिन एकदास की छुट्टी थी इसलिये मैं घर में ही था। तब दोपहर के १२.३० बजे मम्मी और मेरा छोटा भाई (उमर में २ साल छोटा) बाज़ार के लिये गये थे और डैडी ड्युटी पे गये थे। उस वक्त घर में कोई भी नहीं था इसलिये मैं कंप्यूटर पे एक स्टोरी पढ़ने लगा (बहन के साथ चूदाई की स्टोरी थी) पढ़ते समय मुझे कुछ खाने का मन किया इसलिये मैं चाय बनाने के लिये अंदर (किचन) चला गया तो उसी वक्त गुप्ता मामी आयी, और उन्होने मम्मी को हांक मारी तो मैने अंदर से ही मम्मी बाज़ार गयी है ऐसा कहकर उन्हे चाय के लिये रुकने को कहा। तब वे मेरे कम्प्यूटर के पास आकर वो कहानी पढ़ने लगी। और जब मैं चाय लेकर आया तो वो हिचकिचा गयी और ऐसा बीहेव किया कि उन्होने उसे पढ़ा ही न हो।
फिर हम ने चाय पी तब मैं टीवी देखने लगे और मामी को टी वी देखने के लिये कहा और मैं कप धोने के लिये अंदर चला गया तब मैने उनके कप में थोड़ी सी बची हुई चाय डालकर पी ली तो मानो चाय नहीं मैं उनके बूब्स का दूध ही पी रहा हूं ऐसा मुझे एहसास हुआ। और मैं जान बुझ कर बाहर जाने के लिये देर करता रहा क्योंकि मामी टीवी नहीं देख रही थी, बल्की वो तो उस कहानी को ध्यान से पढ़ रही थी इसलिये मैं देर करता रहा फिर मैं २५ मिनट के बाद बाहर आया तो उन्होने वो कहानी पढ़कर खत्म कर ली थी। और उनका चेहरा खुश नजर आ रहा था। ऐसा लग रहा था कि उनको ऐसी कहानियां और पढ़नी थी लेकिन उनको कोम्पुटर के बारे में कुछ भी पता नहीं था इसलिये उन्हे दूसरी कहानी ओपन करनी नहीं आयी।
फिर वो अपने घर चली गयी। जब मैं उस रात को उनके घर सोने के लिये चला गया तो हम बिस्तर लगाके सोने लगे तो मामी ने कहा कि तुम मुझे जैसे लगते हो वैसे तो तुम हो नहीं। तो मैंने कहा क्या मतलब तो मामी ने कहा कि तुम कंप्यूटर पे क्या पढ़ रहे थे तो मैं बोला कि वो, वो तो मेरे दोस्त ने मुझे एक वेब साईट बताई और उसमें से उस कहानी को पढ़ने के लिये कही लेकिन मैने तो इसे पढ़ी तक नहीं क्या आपने पढ़ी है क्या? तो मामी बोली तभी तो तुम ऐसे कैसे कर सकते हो फ़िर मैने पूछा कि क्या आपने ये कहानी पढ़ी है तो मामी बोली कि हां लेकिन तुम मत पढ़ना बहुत बेकार कहानियां है ये।
तब मैने कहा अच्छा फिर हम सोने लगे लेकिन मामी को उस कहानी को पढ़ने से नींद नहीं आ रही थी। थोड़ी देर के मैने सोने का नाटक किया क्योंकि मुझे मालुम था कि आज कुछ न कुछ होने वाला है। फिर उसी मुताबिक ही हुआ मामी ने हल्के से मेरे सीने पे हाथ रखा और फिर ५ मिनट के बाद उन्होने अपना हाथ मेरे लंड के पास लाया और चुपचाप रह गयी फिर ५-१०मिनट के बाद उन्होने हल्के से उठ कर मेरे गाल पे किस किया तो मेरा लंड टाइट हो के तैयारी में था अचानक मैं हिल गया क्योंकि उनका हाथ मेरे लंड पे था और मैं हिल नहीं जाता हो मेरा लंड टाइट हो गया है ये उनको मालुम हो जाता और वो समझ जाती कि मैं सो नहीं रहा हूं। फिर थोड़ी देर के बाद मामी ने मेरे लिप्स पे अपने लिप्स रखकर हल्के से किस करने लगी तो मैने अचानक अपनी दोनो आंखें खोली तो मामी शरमा कर बाजु हट गयी। तब मैं मामी के गाल पे मेरा हाथ रखकर उनके गाल पे फेरने लगा।
तो वो गरम होने लगी और मैं भी गरम होने लगा और मेरा लंड पूरा (९ इंच) का टाइट हो गया और फिर मैं उनके गाल पे हाथ फेरते फेरते उनके लिप्स पे आ गया और उनके लिप्स पे मेरा हाथ रगड़ने लगा तो वो सिसकारियां भरने लगी। फिर मैं जरा सा उनके करीब गया और उनके गाल पे किस करने लगा ऐसे करते करते मैं उनके लिप्स पे मेरे लिप्स रख कर किस करने लगा उनके लिप्स तो बहुत ही नरम थे और उनके मुंह से गरम भाप निकल रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैं उनके गर्दन और पीठ पे जीभ फिराने लगा तब वो बहुत ही गरम हो गयी। फिर मैं जीभ फेरते फेरते एक हाथ उनके ब्लाउज़ के अंदर डाल कर उनके चूची को मसलने लगा तो उन्होने मेरा हाथ बाहर निकलना चाहा तो मैने अंदर की ब्रेसिअर को पकड़ के रखा तो उन्होने मेरा हाथ छोड़ दिया।
थोड़ी देर के बाद मैं फिर से उनकी चूचियां मसलने लगा इस बार उन्होने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश नहीं की बल्कि वो तो मजे लेने लगी थी। ऐसे ही हम आधे घंटे तक मजे लेते रहे। फिर थोड़ी देर के बाद मैं उनके ब्लाउज़ के बटन खोलकर ब्लाउज़ उतार डाला और फिर मैने उनका ब्रेसिअर भी उतार डाला। उनकी चूचियां मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी इसलिये उन्होने अपने दोनो हाथों को चूचियों पर रखकर चूचियां छिपाने लगी तो मैने २ मिनट के बाद फिर से उनके लिप्स पे किस करना चालु किया तो थोड़ी देर के बाद उन्होने अपना हाथ चूचियों पर से हटा दिया। फिर मैं उनके चूचियों के तरफ़ मुड़कर उनकी चूचियां चूसने लगा। उनकि चूचियां बहुत टाइट और रसीली थी। मैं एक एक करके उनकी चूचियां चूसता रहा। फिर चूचियां चूसते चूसते मैं उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट खीचने लगा तो उन्होने मुझे मना किया तो मैं रुक गया और उपर से ही उनके चूत को मसलने लगा तब वो गरम होने लगी और खुद ही उन्होने मुझे पेटीकोट उतारने में मदद की अब वे सिर्फ़ निकर में थी फिर थोड़ी देर के बाद वो भी मैने उतार डाली।
अब वे मेरे सामने पूरी नेकेड (नंगी) थी। फिर मैं उनके चूचियों का चूसना बंद करके उनके चूत को चूसने के लिये मैने अपना मुंह उनके चूत पे रखा तो उनके मुंह से इशह्हह्हह्हह्हह्ह अहह्हह्हह्ह ओह्हह्हह्ह इसे शब्द निकलने लगे तो मैं और उत्तेजित हो गया और उनकी चूत को चाटने लगा तो वो सिसकारियां भरने लगी। फिर मैने अपनी उंगली को उनके चूत में घुसायी तो उन्होने अपने दोनो टांगे टाइट कर दी तब मेरी उंगली उनकी चूत में फ़िट हो गयी और मुझे उनके चूत में उंगली को अंदर बाहर करने में दिक्कत हो लगी थी। और दूसरी तरफ़ मामी सिसकारियां भरने लगी थी।
ऐसे आधा घंटा करने के बाद मामी ने मुझे कहा कि अब मुझसे बरदास्त नहीं हो रहा है। जल्दी से कुछ करो तो मैने मामी की चूत चूसने को छोड़ दिया और अपने आप पे कंट्रोल करके बाजू हट गया। तो मामी बोली क्यों, क्या हुआ तब मैं बोला कि मामी आज नहीं कल करते हैं तो मामी बोली कि क्यों कल क्यों आज क्यों नहीं? तो मैं बोला कि मामी हम आज अनसेफ़ है अगर इसी हालत में कुछ किया तो हम दोनो को भी बड़ी बीमारी लग सकती है। तो मामी बोली कि तो हम आगे कुछ नहीं कर सकते क्या? तब मैं बोला कि नहीं हम आगे और भी कुछ कर सकते हैं लेकिन पूरी होशियारी के साथ। मामी बोली मैं तुम्हारा मतलब नहीं समझी तो मैं बोला कि हम जरूर करेंगे पर कल कंडोम पहन कर। तो मामी बोली ऐसा क्या तू तो बहुत ही होशियार है मैने कहा कि मामी हम अभी से ध्यान में रहकर मजे लेते रहे तो हम सेफ़ रहेंगे न और मजे भी मिलेंगे। तो मामी राजी हो गयी और कहा ओके गुड नाईट मेरे हसबंड तो मैं आश्चर्य से उनके मुंह को देखने लगा। और थोड़ी देर के बाद हम दोनो कपड़े पहन कर सो गये।
फिर सुबह जल्दी उठकर मैं मामी को लिप्स पे किस किया और मामी को जगाया और हम दोनो बाथरूम गये। फिर मैने मामी को नंगा करके उनके चूत और बूब्स पे पेस्ट लगाके उंगली से घिसने लगा तो वो सिसकारियां भरने लगी। बाद में मैने उन्हे साबुन लगाया और उनकी चूचियों को घिसने लगा तो वो मुझ से लिपट गयी। फिर थोड़ी देर के बाद मैने उनके चूत को साफ़ करने के लिये उनके चूत में उंगली डालते ही उनके मुंह से आईईईईईईईईईईईईईग की आवाज निकली। थोड़ी देर के बाद मैं उनको बाथ करके उन्हे कपड़े पहनाया और फिर मैने अपने घर आ कर स्नान किया और नाश्ता कर के कोलेज चला गया।
कोलेज से आते वक्त मैं मेडिकल जा कर दो कंडोम के पैकट ले लिया और घर आ गया। जब मैं रात को सोने जा रहा था तब मैने धीरे से सग में से कंडोम की दोनो पैकट निकाल कर जेब में रख लिया और सोने चला गया। जब मैं गुप्ता मामी के घर गया तो उनकी छोटी बेटी पालने में सो चुकी थी और गुप्ता मामी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में ही थी। उनको उस हालत में देख कर मैं उत्तेजित हो गया और उनको गोद में उठा लिया। ऐसे ही मैं उनको बेड पे लिटा दिया और जेब में से कंडोम निकाल कर एक कंडोम मामी के पास दे कर उसे छिपाये रखने के लिये कहा क्योंकि कभी भी जरूरत पड़ सकती है इसलिये। और मैने अपने सारे कपड़े उतार के कंडोम पहन लिया। और मामी को बिस्तर पे लिटा कर उनको नंगा कर के उनके चूचियों को चूसता रहा।
थोड़ी देर के बाद उनके चूत को चाटने के लिये मुंह लगाते ही सिसकारियां भरने लगी। जब मैं उनके चूत चाटता रहा तब मामी ने कहा कि अब मैं प्रेसर में हूं तो मैने अपना मुंह उनकी चूत पर से हटा कर झत से ही उनकी चूत पे मसलने लगा तो मामी झड़ गयी। और फिर थोड़ी देर के बाद मैने अपना रुमाल निकाल कर उसे पानी में भिगोकर मामी की चूत को साफ़ कर दिया। और मैं किचन में जाकर फ़्रिज में से आइस ट्रे निकाल कर उसमे से दो तीन आइस के पीस निकल कर ले आया। और साथ ही फ़्रिज में रखा हुआ आइस-क्रीम ही लेकर आया। और जो मैने फ़्रिज से लाये हुये आइस के तुकड़े मामी के चूत में सरकाया तो मामी चिल्ला उठी उनके मुंह से इशह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह की आवाज निकल पड़ी उसके बाद मैने उनकी चूत में आइस-क्रीम घुसेड़ दी तो वो खड़ी हो कर चिल्लायी। और मुझ से कहा कि क्या कर रहे हो ऐसा कोई करता है भला। देख तेरे बजह से मुझे पेशाब आ गयी है मैं अभी जाकर आती हूं। तब मैने कहा कि आप को पेशाब आई है तो आप यहां पोजिशन ले के बैठिये और कर दीजिये। तब मामी बोली यहां कैसे कर सकती हूं सारे कमरे में फ़ैल जायेगी। फ़िर मैं बोला कि आप पोजिशन ले लीजिये और मैं आप के नीचे सो जाता हूं और मैं सो गया फ़िर ओ मेरे मुंह के पास अपनी चूत सेट करके मेरे मुंह में पेशाब करने लगी।
हाय क्या स्वाद था उसका स्वीट के साथ नमकीन भी था। इस से मुझ में स्फ़ूर्ति आ गयी और वहीं पे मैने मामी को लिटाया और उनके चूत पे मेरा टाइट लंड रखकर रगड़ने लगा। और फ़िर ५ मिनट के बाद मैने एक स्ट्रोक लगाते ही मेरा लंड २ इंच अंदर जाते ही मामी चिल्ला उठी आईईईईइग उनके मुंह से सिसकारियां सुनकर मैं और मूड में आ गया। और मैने और जरा जोर का झटका लगाया तो मेरा लंड ३ इंच अंदर जाते ही मामी तड़पने लगी उनके मुंह से आईईइ आईईईई ग्गग्गग्गग ऐसे सुर निकल पड़े। और मुझसे सिसकारियां भरते भरते ही कहने लगी कि मुझसे बरदास्त नहीं हो रहा है प्लीज उसे बाहर निकालो न! फिर मैं २ मिनट रुक गया जब मैं समझ गया कि मामी अब शांत हो गयी हैं तो मैने और एक जोर का झटका लगाते ही उनके चूत से ब्लड (खून) निकलने लगा तो वो दर्द के मारे तड़पने लगी और मेरा विरोध करने लगी। तो मैने मैं उसे कहा कि प्लीज मामी ऐसे मत कीजियेगा वरना कंडोम अंदर ही फस जायेगा और फिर बड़ी मुसीबत हो जायेगी।
तब मामी ने कहा अभी क्या मुझपर कम मुसीबत आई है क्या? मेरा तो हाल बहुत बुरा हो गया है फ़िर भी तुम करो मगर धीरे धीरे करो न! फिर मैने मामी से कहा कि मामी आपकी चूत तो बहुत ही टाइट है इसलिये आपको इतना दर्द हो रहा है और मुझको आप के चूत में मेरा लंड डालने में दिक्कत आ रही है। तो मामी बोली मेरी चूत टाइट नहीं बल्कि तेरा लंड ही बहुत बड़ा है। क्या मैं इस से पहले अपने पति से नहीं चुदवाती थी क्या? तब तो मुझे इतना दर्द नहीं हो पाया था। फिर मैने मामी से कहा अच्छा ठीक है अब आप कुछ देर तक ऐसे धक्के सहन कर लीजियेगा बाद में आपको कोई परेशानी या दर्द नहीं महसूस होगा। तो मामी बोली तू तो मेरे चूत के आर पार लंड डाल के पीछे से ही बाहर निकालेगा।
और जब मैं पेशाब करने लगूंगी तो मेरे आगे से और पीछे से भी फ़ौव्वारे निकालेगा तू। तब मैने मामी से कहा मामी अगर ऐसा हुआ तो आप जब भी पेशाब के लिये जायेंगी तो मुझे बुला लीजियेगा मैं आप के पीछे मेरा लंड डालूँगा फिर आप सही तरह से पेशाब कर सकेंगी। ऐसे कहते ही मैने मामी को और एक झटका लगाया तो मेरा लंड ५ इंच उनकी चूत में चले जाते ही मामी दर्द के मारे चिल्ला उठी। और मुझे अपने शरीर से दूर ढकलने लगी तो मैने मामी को जोर से मेरे सीने से दबोच के रखा और फिर मेरा बैक साइड पीछे लेकर और एक धक्का लगाया तो मेरा लंड ५ इंच अंदर चले जाते ही मामी ने मेरे बाल खीच कर मेरा विरोध करने लगी तो मैने अपने लिप्स उनके लिप्स पे रख कर किस करना शुरु कर दिया और साथ में ही चूचियों को मसलने लगा तो मामी उत्तेजित हो गयी और मेरे बालो को छोड़कर किस करने में मेरा साथ देने लगी तो मैने और एक झटका लगाया तो मेरा पूरा का पूरा लंड अंदर चले जाते ही मामी ने मेरे लिप्स को काटा।
फिर थोड़ी देर के बाद मैने अपना लंड अंदर बाहर करना शुरु किया कुछ ही देर में मामी मुझे साथ देने लगी वो अपना चूतड़ उपर नीचे उठा कर साथ देने लगी। और कुछ ही देर के बाद मामी ने अपना सरा कम निकाल दिया मामी दो-तीन बार झड़ गयी फ़िर बाद में मैं भी झड़ गया कुछ देर तक हम वैसे ही पड़े रहे। फिर आधे घंटे के बाद मैने मामी को उल्टा लिटाके उनके पिछवाड़े पे लंड रखकर रगड़ने लगा फिर बाद में मैने मामी के चूतड़ के गैप में मेरा लंड रखकर एक जोरदार धक्का लगाया तो मेरा २ इंच लंड अंदर चले जाते ही मामी दर्द के मारे चिल्लाने लगी तो मैने मामी का मुंह दबाके रखा तो मेरे हाथ को काटा।
और फिर मुझे बड़बड़ाने लगी कि क्या आदमी है या जानवर ऐसा हाल करते है क्या कोई औरत के साथ। अब फ़ौरन तुम्हारा लंड बाहर निकालो वरना अच्छा नहीं होगा। तो मैं मामी से बोला मामी मुझे माफ कर दीजिये आइंदा मैं ऐसे बेरहमी से आपको नहीं चोदुंगा आपको धीरे धीरे चोदुंगा सिर्फ़ एक मौका और प्लीज। तो मामी तैयार हो गयी फिर मैं मामी को धीरे धीरे धक्के लगाता रहा लेकिन फिर भी मामी को दर्द हो रहा था। परन्तु मामी वो दर्द सहन कर रही थी जब मेरा पूरा लंड उनके चूतड़ के छेद में चला गया तो मामी के छेद में से खून बाहर आने लगा फिर मैं थोड़ी देर तक धीरे धीरे धक्के लगाता रहा। कुछ ही देर में मामी के छेद में से रेड कम (खून कि वजह से) बाहर आने लगा तो मैने थोड़ी सी स्पीड बढ़ा दी और मामी भी मुझे साथ देने लगी इस तरह हमने उस रात को फुक्किंग ( चूदायी) Sex stories का मजा लिया और उसके बाद मैने मामी को २ बार चोदा फिर मुझे पुणे में ही जोब लग गयी
आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। Antarvasna हमारे पड़ोस में रूपा आंटी रहने आई थी। वैसे तो वो हमारी दूर की रिश्तेदार थी इसलिए जान-पहचान बनाने की जरूरत नहीं थी।
उनकी लड़की थी गुड्डी, बड़े बड़े स्तनों वाली, जांघें भी गोरी गोरी और थोड़ी कामुक थी लेकिन सीधी होने का दिखावा करती थी। मैं थोड़ा इश्कबाज़ लड़का हूँ इसलिए मेरी उससे जमती थी।
एक बार गुड्डी मुझे सब्जी मण्डी में मिल गई, बोली- बिपिन मेरे पास बहुत वज़न है, मुझे अपनी मोटरसाईकिल पर बिठा लो!
मैंने कहा- चलो!
वो मेरे पीछे बैठ गई। बाज़ार में भीड़ के कारण मोटरसाईकिल चलाते समय मैंने बहुत बार ब्रेक लगाए तो वो मेरे ऊपर गिरती थी। दो तीन बार थोड़ा शरमाई पर बाद में वो सेट हो गई और बोली- एक बार तुम्हारे घर पर मिलते हैं।
दस दिन बाद वो दिन आ ही गया। मेरे घर पे कोई नहीं था। मैंने उसको सुबह ही इशारा कर दिया था। फ़िर गुड्डी सबह नौ बजे आई, बोली- स्कूल जाने के बहाने नज़र छुपा के निकली हूँ।
मैंने कहा- अन्दर आ जा! और उसे बेडरूम में छुपा दिया।
मैंने सारे दरवाज़े बंद कर लिए और बेडरूम में गया तो मेरे से रहा नहीं गया। मैंने उसको जोर से अपनी बाहों में ले लिया।
मैंने कहा- सलवार उतारो!
वो बोली- ऐसे नहीं!
इतना बोल कर वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड सहलाने लगी, फिर मुंह में ले लिया खूब रगड़ा उसने अपने मुंह से। और धीरे धीरे मेरे हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पे ले आई। मेरे से रहा नहीं गया। मैंने अपनी पैन्ट और टी-शर्ट उतार दी, मैं पूरी तरह नंगा हो गया और उसको भी नंगा कर दिया।
फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। उसे बहुत मजा आ रहा था ‘अह्ह्ह…अहह हह…अह हह…अह ह’ करने लगी और उसके नंगे बदन पे मेरे हाथ फिरने लगे।
फिर 69 पोसिशन में सेक्स करते रहे तो वो बोली- सोफे पर बैठ जाओ।
मैं बैठ गया तो वो फ़्रेंच स्टाईल में मेरा लण्ड चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लौड़ा लोहे जैसा हो गया।
फ़िर वो धीरे से मेरे कान में बोली-मुझे उठा कर बिस्तर पर पटक दे!
मैंने वैसा ही किया, उसके दोनों पैर मैंने फ़ैला लिए और चोदने लगा।
मेरे हर एक धक्के पर वो सिसकती थी।
फ़िर अचानक गुड्डी बोली- उतर जाओ!
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- कुछ नहीं!
और मैं उतर गया।
मेरे उतरने के बाद उसने अपनी गाण्ड मेरे लण्ड के सामने रख दी। मैं समझ गया और धीरे से उसकी गाण्ड में अपना लण्ड पिरो दिया।
शुरू में डालते हुए उसको दर्द हुआ और चिल्ला उठी- ओ… माँ .. ओह… धीरे यार!
बाद में पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में घुसा दिया और वो चिल्लाती हुई बोलती जा रही थी- बिपिन! फ़ाड़ दे मेरी गाण्ड को यार! बहुत मजा आ रहा है य्यार!
यह सारा कार्यक्रम दो बार चला। फिर मैंने घड़ी में देखा तो दोपहर के 2 बजने वाले थे, मैंने कहा कुछ खा लिया जाए. मैं रसोई में गया, गुड्डी भी मेरे पीछे पीछे आ गई फिर उसने बहुत सारा मक्खन, जैम और टोमाटो सॉस अपनी चूत और बूब्स पे लगाया वो सारा मैंने चाट लिया और जो मक्खन, जैम और टोमाटो सॉस मैंने अपने लण्ड पे लगाया वो उसने पूरा चूस लिया। फिर चद्दर बिछाके मैंने उसको रसोई में चोदा और चोदते समय बोली तू मुझे चोदते चोदते बिस्तर तक लेजा और मैंने वही किया मेरे लण्ड को उसकी चूत से अलग किए बिना चोदते चोदते बिस्तर तक ले गया और खूब चोदा।
तभी घर की घंटी बजी। मैंने देखा तो रूपा आंटी दरवाजे पे खड़ी थी।
मैंने जल्दी से गुड्डी को कपड़े रखने वाली अलमारी में छुपा दिया। दरवाजा खोला तो आंटी सामने खड़ी थी, बोली- बेटा! तेरी मम्मी कहाँ है?
मैंने कहा- सब जयपुर गए हुए हैं, मैं अकेला ही हूँ।
बोली- कल मैंने तुम्हारी मम्मी के कमरे में दो साड़ियाँ रखी थी, वो लेने आई हूँ।
मैंने कहा- ले लो!
रूपा आंटी बहुत ही हट्टी कट्टी थी जबकि अंकल दुबले और पतले से थे। मैं अपने कमरे में गया और गुड्डी को कहा- मैं अपना कमरा बाहर से बंद कर देता हूँ और आंटी जब जायेगी तब खोलूँगा।
गुड्डी बोली- ठीक है!
और मैं मेरी मम्मी के कमरे में गया जहाँ रूपा आंटी साड़ियाँ ढूंढ रही थी। साड़ियाँ मिलने पर आंटी मुझे कहने लगी- इनमें से मुझ पर कौन सी अच्छी लगेगी?
मैं तो इश्कबाज था ही, मैंने कहा- आंटी आप तो अप्सरा हैं, आप पर तो कोई भी साड़ी अच्छी लगेगी।
वो भी मेरे इशारे समझ गई, बोली- ठीक है मैं एक एक पहन के दिखाती हूँ! तू बता देना कौन सी अच्छी लगती है।
मैंने कहा- आंटी आज फ्री हो क्या?
हाँ, गुड्डी सुबह से स्कूल गई है और तुम्हारे अंकल ऑफिस के ऑडिट में हैं देर से आयेंगे! कहते हुए वो साड़ी बदलने गई। जैसे ही वो साड़ी बदल के बाहर निकली उसका पल्लू गिर गया और बड़े बड़े स्तन दिखने लगे। मेरा लण्ड खड़ा हो गया और नाईट सूट में से लण्ड बाहर उभर कर दिखने लगा।
आंटी समझ गई और वो शीशे के सामने खड़ी हो गई। मैंने पीछे से आंटी की कमर पकड़ी। वो कुछ नहीं बोली। बस इतना बोली- दरवाजा ठीक से बंद किया है न?
और मुझे लगा ग्रीन सिग्नल मिल गया है, मैं टूट पड़ा आंटी के ऊपर। बोली- धीरे धीरे चोद मुझे!
मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए। मैंने उनकी चूत में लण्ड डालना चाहा, वो बोली- रुक जा यार! और मेरा लण्ड पकड़ के मुंह में ले लिया खूब जोर से मुंह में अन्दर बाहर करने लगी। थोड़ी देर में बोली- मेरे से रहा नहीं जाता, प्लीज़, मुझे पलंग में पटक कर चोद!प्लीज़ चोद! बिपिन प्लीज़ चोद! यार चूत में बहुत खुजली हो रही है!
मैंने कहा- आंटी मैं भी सीधा लण्ड आपकी चूत में नहीं डालूँगा!
तो बोली- क्या करेगा?
मैंने कहा- आप पलंग के कोने पे पैर फैला के रखो, मुझे तुम्हारी चूत चाटनी है!
वो खुश हो गई- यार! पहली बार कोई मेरी चूत चाटेगा! चाट ले…जल्दी से चाट ….चाट!
करीब आधे घंटे तक मैंने उसकी चूत और उसने मेरा लण्ड चाटा। फ़िर बोली- तुम सामने सोफे पे बैठ जाओ। मैं सोफे पे बैठ गया और वो मेरे ऊपर इंग्लिश स्टाइल में बैठ गई और मेरा लण्ड अपनी चूत में डालकर पागलों की तरह गोद में कूद रही थी। मेरा ध्यान सामने लण्ड शेप में पड़ी हुई मोमबत्ती पर था और मेरी उंगली आंटी की गाण्ड में।
मुझे मोमबत्ती देखते हुए देख के बोली- जो तू सोच रहा है, वो कर दे!
और मैंने मोमबत्ती लेकर आंटी की गांड में घुसेड दी। आधे घंटे तक वो मेरे ऊपर सोफे में रही और मोमबत्ती उनकी गांड में।
फिर बोली- चलो बिस्तर पे चलते हैं!
और वो उसकी गांड मेरे लण्ड के सामने रख कर लेट गई। मैंने भी उनकी चूत में से हाथ डालकर चिकनाई को अपने लण्ड पे लगाया और उनकी गांड में घुसेड़ दिया। अब वो बहुत चिल्लाई- ओह माँ…ओह माँ…ओह…ओह…खूब मजा आ रहा है!
मेरा हाथ उसकी चूत में था और लण्ड उसकी गांड में!
तब वो बोली- मोमबत्ती कहाँ है?
मैं समझ गया, मैंने मोमबत्ती लेकर उनकी चूत में डाल दी और जोर से उनके बूब्स खींचने लगा। 2 घंटे तक उसको मैंने प्यार से चोदा।
बाद में बोली- अब मैं थक गई हूँ, तू अपना वीर्य मेरे मुंह में डाल दे!
और फिर मैंने लण्ड को आंटी के मुंह में डाल दिया लेकिन झड़ने का नम नहीं ले रहा था। मैंने आंटी से कहा- अपने बूब्स मेरे हाथ में दो, दूध निकलना है!
तो वो हंस के बोली- दूध निकलना तेरा काम नहीं!
हमने शर्त लगाई कि पहले मेरा वीर्य निकलता है या आंटी के बूब्स में से दूध (पानी)
फिर मैंने शुरू किया उनके स्तनों को मथना! 20 मिनट हुए और अ आ आ अआः…आ अ आ आह…अह हह ह्ह्छ मैं झड़ गया और साथ में ही आंटी के बूब्स में से पानी निकल गया। मैंने पूरा वीर्य आंटी के मुंह में डाल दिया।
अब वो भी थक गई और मैं भी थक गया।
आंटी बहुत खुश होते हुए मेरे लौड़े पे हाथ रखके बोली- कभी भी मेरी याद आए तो मुझे बुला लेना! मैं तुम्हारे साथ किया हुआ सेक्स कभी नहीं भूलूंगी।
वो अपने घर चली गई और मैं दरवाजा बंद करके अपने कमरे मैं आया तो देखा गुड्डी तो सो गई है, खर्राटे लेने लगी है। मैं रसोई में गया, 2 ग्लास दूध पीकर वापस आया। गुड्डी के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था और वो पैर फैलाये बिस्तर पे पड़ी थी।
मैं भी उसकी चूत को चाटने लगा और गुड्डी गरम हो गई। आधी नींद में ही कहने लगी- तुम कहाँ चले गए थे यार मुझे अकेली छोड़ कर!
मैं ये नहीं कह सका कि मैं तेरी माँ को चोद रहा था।
फिर वो पुराने रंग में आ गई और मेरा लण्ड चूसने लगी। बाद में बिस्तर पर लेट के दोनों पैर खोल दिए और मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड डाल दिया और बहुत चोदा।
फिर मैंने पूछा कि तेरे बूब्स में से दूध निकलेगा?
तो वो बोली- नहीं! अभी तो पानी निकलेगा!
और मैंने उसके बूब्स खींचना शुरू किया, वो मेरा लण्ड मुंह में ले रही थी। 20 मिनट तक ये चलता रहा और एक जोर से झटके ने मेरा सारा वीर्य गुड्डी के मुंह में डाल दिया और गुड्डी के स्तन से पानी निकल गया।
शाम के 6 बज चुके थे। गुड्डी ने मुझे किस करके कहा- आज का दिन मुझे पूरी जिन्दगी याद रहेगा।
मैंने हंसके गुड्डी से कहा- तुझे याद रहे न रहे पर मुझे आज का दिन सात जन्मों तक याद रहेगा!
पाठकों को मेरा ढेर सारा प्यार!
यह मेरी पहली असली कहानी है पसंद आई या नहीं, जवाब देना! Antarvasna
मैं अन्तर्वासना का Sex Stories नियमित पाठक हूँ। यहाँ कहानियाँ पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मुझे भी अपनी सेक्स अनुभव के बारे में आपको बताना चाहिए, जिसे पढ़ते हुए लड़के बार-बार मुठ मारने लगेंगे और लड़कियाँ, भाभियाँ और आन्टियाँ लण्ड की तलाश करने लग जाएँगी।
दोस्तो, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं। और सबको मेल भी किया वो सारी कहानियाँ बनावटी हैं। कोई भी आदमी इतनी आसानी से सेक्स के लिये औरतो को तैयार नहीं कर सकता, और किसी भी औरत को इतनी भूखी नहीं होती जितना वो अपनी कहानी में आपको बताते हैं। अगर है तो वो सब मेल का जवाब जरुर देती।
यह सब छोड़ो! हम आते हैं अपनी बात पर! हम कहानी पर आते हैं।
सबसे पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मैं 24 साल का हूँ, कद 5″7′ है और मैं एक सामान्य सा दिखने वाला लड़का हूँ। मैं वाराणसी (चौक) से हूँ।
बात करीब दो साल पहले की है, मेरे भैया की शादी थी, सारे रिश्तेदार, नातेदार सब आए हुए थे, उन सबमें मेरे गांव के चाचा की लड़कियाँ भी आई थी। उनमें से एक थी साधना। उसकी फ़िगर दोस्तो समझ लीजिये कयामत थी। स्वर्ग से उतरी अप्सरा जैसी तो नहीं थी, पर उससे कम भी नहीं थी।
मेरे खानदान में सब मेरी बहुत इज्जत करते हैं। वो लड़की भी मेरी बहुत इज्जत करती थी। शादी में दो दिन रह गये थे। मैं तो उसे देखकर पागल तो हो ही रहा था, सो मैंने उसे प्यार का इजहार करने का सोचा, मेरी गांड तो बहुत फट रही थी, लेकिन मैंने आखिर में हिम्मत जुटा ही ली। उस वक्त घर में कोई नहीं था, तो मैंने उससे चाय बनाने के लिये बोल दिया। थोड़ी देर में वो चाय बना कर लाई तो मैंने उससे उसकी चाय के बारे में पूछा तो उसने कहा कि मैंने अपनी चाय नहीं बनाई है।
तो मैंने उसे जबर्दस्ती कप मंगाकर चाय दी और उसे अपने पास बैठने को कहा। चाय पीते पीते मैंने उससे अचानक पूछा कि क्या मैं उसे अच्छा लगता हूँ?
तो उसने हाँ में जवाब दिया।
बस मैंने तपाक से अपने दिल कि बात कह डाली और अपनी आंखें बन्द कर ली।
उसने मुझसे कहा,”जान यह सुनने के लिये मैं कब से बेकरार थी, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
बस फ़िर क्या! मैंने अपना होंठ उसके होठों पर चिपका दिए और उसके गुलाबी होठों का रसपान करने लगा, वो भी मेरे होठों को पीने लगी जैसे कई जन्मों की प्यासी हो। मैं उसके कभी ऊपर के होठों को चूसता तो कभी नीचे के होठों को। करीब-2 दस मिनट तक मैं उसके होठों में चिपका रहा। जैसे ही मैं उसके होठों से दूर हुआ, वो रोने लगी। मैंने उसे बाहों में ले लिया और पीठ सहलाने लगा …
फ़िर धीरे-धीरे वो भी गर्म होने लगी, उसको छूते ही मेरा सामान एक्शन में आ गया। बस फ़िर मैंने उसके गले में किस करना शुरू कर दिया।
इस पर उसने कहा- क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- कुछ मत कहो, बस करने दो, बहुत दिनों से तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ.
वो शरमा गई … और अपने चेहरे को दोनों हाथों से छिपा लिया। मैंने मौका देखा और … और … धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, नाड़ा खोलते ही उसकी सलवार उसकी कमर से अलग हो गई। अब मैंने उसकी नंगी जांघ पर हाथ रख दिया। उसकी पैन्टी के भीतर मेरा हाथ चूत की तरफ़ सरकने लगा। उसके बदन की झुरझुरी मुझे महसूस होने लगी। मेरा हाथ उसकी झांटों तक पहुंच गया था। उसने झट से अपने हाथ से मेरा हाथ थाम लिया।
“कमल … ना … ना … कर … मैं मर जाऊंगी … ” उसकी वासना भरी आंखे मुझे बुला रही थी … पर शरम उसका रास्ता रोक रही थी।
“साधना … प्लीज़ … मत रोको … तुम्हारा जिस्म आग है … मुझे जल जाने दो।”
“हाय कमल … नहीं … यह पाप है.”
“नहीं … यह तो मर्द और औरत की जरुरत है … इसे देखो तो … यह क्या मांग रहा है … ”
मैंने जान करके अपने पेंट की ज़िप खोल कर अपना बेकरार तन्नाया हुआ लण्ड बाहर निकाल कर उसे दिखाया।
“हाय रे … ऐसे नहीं करो … ना … इसे सम्हालो … ” उसने हाथ बढ़ा कर उसे प्यार से पकड़ लिया.
“इसे इसका साथी चाहिये … साधना … प्लीज़ … मिला दो ना …”
“कमलऽऽऽ हाय … मत करो न …” उसने मुझे अपने हाथों खींच कर अपने ऊपर गिरा लिया.
“होंठों पर ना है … पर दिल में हां है … तुम्हारा जिस्म आग हो रहा है … कपड़े जल जायेंगे … हटा दो इनको … ”
मैंने फिर से उठ कर उसका पैन्टी नीचे खींच लिया। उसकी गदराई जवानी निखर आई। उसकी चूत के आसपास की झांटे उसकी चूत को सजा रही थी … चूत की दोनों पन्खुड़ियाँ फ़ड़फ़ड़ा रही थी। पानी से पूरी गीली थी। मैंने भी अपनी पैन्ट और अन्डरवीयर उतार दी। अब मैंने उसकी समीज को भी उतार दिया। उसके दोनों बोबे छलक उठे … एकदम गोरे और भारी से … भूरे रंग के कड़े चूचक …
मैंने बिना किसी संकोच के उसके दोनों बोबे अपने हाथो में भर लिये।
“कमल … हाय रे …” वो तड़प उठी।
उसने मेरा लण्ड खींच के अपने हाथ से मेरे लन्ड का हस्त मैथुन करने लगी। मैं उत्तेजित हो उठा और साधना के हाथ को ही धक्के मार मार कर चोदने लगा। मेरा सुपाड़ा वो कस कस कर हिला रही थी। सुपाड़ा भी और फूल कर चिकना हो कर चमक उठा था।
इतने में साधना ने मेरा लण्ड छोड़ा और मुझे कहा,” कमल … देख आज मेरी चूत कितना तड़प रही है … मेरी चूत चोद दे …”
मैं उसकी चूत को अपने हाथों से सहलाने लगा और अपनी दो उन्गली झट से उसकी चिकनी चूत में सरका दी, वो मचल गई और स्स्स्स्स की आवाजें निकालने लगी।
मुझसे भी ज्यादा इन्तजार नहीं हो रहा था, मैने उसे अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर लेटा दिया। मैं उसकी चूचियों को अपने दोनों हाथों से मसलने लगा। उसके बाद हम फिर एक बार एक दूसरे के होठों में खो गये।
करीब 15 मिनट के बाद मैं उसके होठों से अलग हुआ और उसे नीचे लिटाकर मैंने उसकी टान्गें फैला दी, और उसकी चूत को अपने हाथों से फैला कर निरीक्षण करने लगा, मैं अपनी किस्मत पर बहुत खुश हो रहा था, मैंने अब देरी नहीं की और अपना 7.5″ लम्बा और 2.5″ चौडे लन्ड का सुपारा उसकी चूत के छेद पर टिका दिया और अन्दर सरका दिया।
साधना तो चीख पड़ी और बोली,”बस कमल अब निकालो इसे, नहीं तो मैं मर जाउंगी।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने कस कर एक और धक्का मारा और मेरा पूरा लन्ड उसकी चूत में समा गया। साधना दर्द के मारे तड़प रही थी, मैंने उसका दर्द कम करने के लिये थोड़ी देर उसकी चूत में ही लन्ड को छोड़ दिया, जब उसने चिल्लाना बन्द किया तो मैंने अपना लन्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया।
क्या मजा आ रहा था, आ…ह आआआआ… हुम्म हुम्म्म्म, फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च फच्च,
अब उसे भी मजा आने लगा था, और गान्ड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
आखिर वो घड़ी आ ही गई, मेरा पूरा शरीर एक अद्भुत आनन्द में खो गया, और मैं शाट पे शाट दिये जा रहा था, फिर मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई हो और मेरे लन्ड में से कुछ निकलता हुआ महसूस हुआ, जो उसकी चूत में गिर रहा था। थोड़ी देर बाद मैं निढाल हो कर उसके ऊपर गिर गया, जैसे शरीर में जान ही खत्म हो गई हो।
थोड़ी देर में हम लोगों को होश आया तो हम लोग उठे और अपने अपने कपड़े पहने।
फिर उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा और मुझे चूम लिया और बाथरूम में चली गई, जब वो आई तो मैंने उसे एक बार फिर चोदा, और इससे पहले कि कोई आ जाये, हम लोग अलग अलग कमरे में जा कर लेट गये।
उस रात मैं सोया नहीं और रात भर अपनी चुदाई के बारे में सोचता रहा। खैर उसके बाद भैया की शादी हो गई, और साधना भी अपने घर चली गई। उसके बाद हम कभी मिल नहीं पाये। और आज साधना की शादी हो चुकी है।
खैर आप लोगों को ये मेरी सच्ची घटना कैसी लगी, कमेंट्स में जरूर बताइयेगा। Sex Stories
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