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दोस्तों, मेरा नाम मनीष है, मैं Antarvasna दिल्ली मैं नौकरी करता हूँ। मेरी उम्र २४ वर्ष है, यानि कि जवान हूँ। मैं अपने बारे में कुछ बता देना चाहता हूँ। मैं सेक्सी दिखता हूँ, ग़लती से या सही से, भगवान ने मुझ ग़रीब को अच्छे व्यक्तित्व का मालिक बनाया है। मेरा क़द ५.७ फीट है, देखने में कोई बॉडी-बिल्डर तो नहीं पर एक अच्छे बद़न का मालिक ज़रूर हूँ। मैं अन्तर्वासना में प्रकाशित हुई लगभग सारी कहानियाँ पढ़ता रहता हूँ। यह साईट मुझे काफ़ी अच्छी लगती है। आज मैं भी आप लोगों को अपनी आपबीती में शामिल करता हूँ।
बात तब की है जब मैं अपने चाचा-चाची और भाई-भाभी के पास रहने और नौकरी तलाश करने के लिए दिल्ली आया था। उस समय मेरे चाचा के घर में किरायेदार के रूप में मेरे ही गाँव का एक परिवार रहता था। उस परिवार में एक लड़की बुलबुल, जिसकी उम्र १८ वर्ष है और दूसरी उसकी छोटी बहन जो १० साल की है और उनके एक छोटा भाई है जिसका नाम अमित है और वह ६ साल का है।
बात बुलबुल की है, जो मुझसे प्यार करती थी, और मुझे पता भी नहीं था, पर एक दिन क्या हुआ… यह आप ख़ुद ही जान जाएँगे।
जब मैं रहने के लिए वहाँ गया था, तो शुरू-शुरू में तो वह मुझसे बात भी नहीं करती थी, सोचती थी मैं पहल करूँ। पर मैं तो ठहरा गाँव का आदमी, भला कहाँ से पहल करूँ? वैसे तो मुझे गाँव में काफी अवसर मिले पर मैं एक बार भी कर नहीं पाया क्योंकि डर रहता था कि अगर मैं कुछ ग़लत करता हूँ तो बद़नामी मेरे घरवालों की होगी। आप को तो पता ही होगा कि गाँव में अगर कुछ ग़लत करो तो बद़नामी घरवालों के सिर आती है। वैसे तो गाँव में मेरे काफी दोस्त ये सब काम मेरे सामने भी करते थे पर मैं मना कर देता था, इसलिए गाँव में काफी कम ही दोस्त थे। जो थे मेरी ही तरह के थे जो खीर देख तो सकते थे, पर खा नहीं सकते।
अब कहानी पर आता हूँ। तो दोस्तों काफी समय तक ना तो वो मुझसे कुछ कहती, ना ही मैं उसमें दिलचस्पी लेता, क्योंकि उस समय वहाँ कुछ बनने के लिए आया था। ऐसे ही दिन-महीने गुज़रते रहे। बात तो हो ही जाती पर कभी प्यार वाली बात नहीं होती। एक दिन शाम को मैं ऑफिस से घर आया और हाथ-पैर धोकर छत पर चला गया। वहाँ पर वह, उसका भाई और मेरी २ साल की भतीजी वहाँ खेल रहे थे। इतने में वे तीनों आकर मुझे च्यूँटी काटने लगे, तो मैंने भी बुलबुल की चुटकी ली। मेरे चुटकी काटने से वह रोने लगी और छत से नीचे चली गई। मैंने सोचा कि कहीं उसने नीचे जाकर सब को बता दिया तो मेरा जीना हराम हो जाएगा, क्योंकि मेरा भाई बड़ा हरामी है, साले ने मेरा जीना मुश्किल कर रखा था।
थोड़ी देर बाद वह फिर से ऊपर आई और आकर मेरे साथ खड़ी हो गई, तो मेरी जान में जान आई, वरना मैं तो सोच रहा था कि बेटा मनीष, आज पिटने के लिए तैयार हो जा। कुछ ही देर बाद उस के मुँह से अपना नाम सुनकर मैं चौंक गया। उसकी वह आवाज़ आज भी मुझे याद आती है। आए भी क्यों नहीं, आख़िर पहली बार मैं किसी के मुँह से ‘आई लव यू’ सुन रहा था। मेरा तो माथा ही ठनक गया। और वह यह बोलकर चली गई, फिर मैं काफी देर तक सोचता रहा कि मैं क्या करूँ। अन्त में बिना किसी निर्णय पर आए हुए मैं भी नीचे आ गया।
रात को खाना खाकर सोने के लिए अपने बिस्तर पर चला गया। मैं जहाँ सोता था वहाँ पर बर्तन धोने जाने का रास्ता था। मैं सो रहा था या यों कहें कि मैं उसी के बारे में सोच रहा था कि तब तक वह हाथ में बर्तन लेकर धोने के लिए वहाँ आकर खड़ी हो गई और मुझे देखने लगी। मैं आँखें बन्द करके सोच रहा था, तो उसने आराम से बर्तन नीचे रखे और मेरे होठों को किस कर लिया, वह मेरा किसी लड़की द्वारा किया गया पहला किस था। तो मैं उठ पड़ा और सोचा कि अगर यह एक लड़की होकर इतना कर सकती है, तो मैं लड़का होकर क्यों शान्त सोया पड़ा हूँ। मैंने भी उसी स्टाईल में लगभग १५-२० मिनट तक उसे किस किया। फिर मैंने जाना कि किस क्या होता है। फिर वह वहाँ से चली गई। अब ना तो मैं ठीक से काम कर पाता था, ना ही ठीक से पढ़ पाता था, दिन-रात उसी के बारे में सोच-सोच कर मैं ५४ से ४८ किलो का हो गया था। मेरे चाचा-चाची कहते कि द़िल लगाकर पढ़ाई कर रहा है तो बीमार हो गया है, एक काम कर यो तो तू काम कर या पढ़ाई कर, थोड़ा बोझ हल्का हो जाएगा।
पर उनको तो पता नहीं था कि मेरा द़िल तो कहीं और ही लगा हुआ है, तो पढ़ाई में कहाँ से लगेगा। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैं जहाँ भी उसे अकेले में देखता था या पाता तो तुरन्त ही जाकर उसके होठों को चूमने लगता। वह भी मना नहीं करती, क्या करूँ कुछ समझ में नहीं आ रहा था, तब तक होली भी नज़दीक आ रही थी। हमारे चाचा-चाची ने घर जाने का फैसला किया कि इस बार गाँव में ही होली मनाएँगे।
मैं तो जा नहीं सकता था। अगर मैं जाता तो मेरी कमाई, पढ़ाई, और चुदाई तीनों पर कोई और होली खेल जाता। तो वे लोग गाँव चले गए, घर में मैं रह गया, साथ में मैं मेरी भाई-भाभी और मेरी दो भतीजियाँ। और वह तो पहले से ही अपने पूरे परिवार के साथ वहाँ थी ही।
एक रात हम सब छत पर सो रहे थे कि तेज़ बारिश शुरू हो गई, सब नीचे भाग आए सोने कि लए। मौसम तो ऐसा था कि जिनकी शादी हो गई थी वो तो बीवी के साथ लगे होंगे, जिनकी नहीं हुई वह लण्ड पकड़कर सो रहे होंगे, मेरी तरह। उस रात मैं भगवान को कोस रहा था, आप को अगर पता न हो तो एक बात बता दूँ कि दिन में एक बार आप जो भी बोलते हैं, वह सच हो जाता है, शायद वही हुआ।
रात के लगभग २ बज रहे थे, मैं बरामदे में ही अकेला सो रहा था, भाई-भाभी अन्दर कमरे में कुण्डी लगाकर सो रहे थे। अचानक मुझे पायल की आवाज़ सुनाई पड़ी, मैंने आँखें खोली तो देखा कि बुलुबल आराम से नीचे उतर रही है। वह सीधा मेरे बिस्तर पर आई और मेरे साथ लेट गई। मैं तो अचानक हवा में उड़ने लगा, हे भगवान, आख़िर वह दिन आ ही गया ! मैंने उसकी तरफ मुँह किया और उसे किस करने लगा और वह भी मेरा साथ देने लगी। मैंने उसे सिर से लेकर पाँव तक किस किया, वह तो जाने कितने जन्मों की प्यासी लग रही थी पता नहीं।
जब मैं उसे किस कर रहा था तो इतने में उसने मेरा लण्ड पजामे में से बाहर निकाल लिया और हिलाने लगी। मैं तो हैरान रह गया, ये सब इसने कहाँ से सीखा? मैंने उसके होठों को जी-भर चूसा और लाल कर दिया। फिर उसकी शमीज खोलकर मस्त हो रहीं चूचियों को जी भरकर चूसा। उसकी ओओओओओओ… उउउउउउउ… आआआआआआ आआआआआआहहहह की आवाज़ मेरे जोश भर रही थी। मैं ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूचियों को दबा व चूस रहा था। फिर मैं धीरे से एक ऊँगली उस कभी खत्म न होने वाली गहराई यानि उसकी योनि के ऊपर घुमा रहा था, अचानक वह ज़ोर-ज़ोर से अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे करने लगी और कुछ देर बाद शान्त हो गई। फिर मैंने अपना लण्ड उस के मुँह में दे दिया और वह दनादन चूसने लगी और मैं उसकी चूत चाट रहा था कि कहानी में ट्विस्ट आ गया।
मुझे लगा कि कोई अन्दर से कुण्डी खोल रहा है। हम शान्त हो गए। फिर धीरे-धीरे कुण्डी खुलने की आवाज़ हुई तो हमारी जान ही निकल आई, वह वहाँ से उठकर सीढ़ियों से ऊपर चली गई, और मैं शान्ति से सो गया। फिर पाया कि काफी देर तक कोई अन्दर कमरे से नहीं आया फिर भी कुण्डी जैसी कुछ आवाज़ रह-रहकर आतीं, तो मैंने ध्यान दिया तो पाया कि हवा के कारण गाँधी की तस्वीर दरवाज़े में रगड़ खाकर आवाज़ पैदा कर रही थी। मैंने मन ही मन सोचा क्या यार सही में तुम गाँधी हो, अच्छी खासी चुदाई में तुमने आन्दोलन कर दिया। मैं लण्ड पकड़कर सो गया। थोड़ी ही देर में वह आई और अपना दुपट्टा लेकर जाने लगी तो मैंने उसे ज़बरदस्ती लिटा लिया, वो मना करती रही फिर भी मैं नहीं माना और उसे फिर से नंगा कर दिया, फिर से उसको चूमा-चाटा फिर कुछ देर तक ना-ना करने के बाद वह मान गई और साथ देने लगी।
फिर मैंने उस को उसकी कच्छी उतारने के लिए कहा तो वो बोली- सब तो तुमने उतार ही दिया है, अब ये मैं क्यों उतारूँ, तुम ही उतार दो।
मैंने फिर वह भी उतार दी और अपनी छोटी ऊँगली को ओ बना के घुमाने लगा तो मुझे ऐसा लगा कि वह अभी मझे धक्का देकर गिरा देगी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे ही घुमाना उचित समझा और उसकी चूचियों को एक-एक करके चूसता भी रहा। फिर मैंने ऊँगली निकाल कर अँगूठा डाला और फिर ओ की तरह घुमाने लगा तो वह उछलने लगी और सिसकारियाँ लेने लगी। अब ना तो मुझ से रहा जा रहा था ना ही उससे सहा जा रहा था।
मैंने उससे कहा- यार ! कब तक ये चूसते रहेंगे?
तो वह बोली- मैं तो कब से कहना चाह रही हूँ पर तुम हो कि चूस-चूस कर ही निकालते जा रहे हो।
तो मैंने कहा कि पहले बताना चाहिए था ना, मैं यह काम पहली बार कर रहा हूँ।
तो वह बोली- तो मैं कौन सी मास्टर हूँ, मेरा भी तो पहली बार ही है।
फिर मैं उसे चित लिटाकर उसके ऊपर आ गया और सारा काम अपने लण्ड के भरोसे छोड़ दिया। वह अन्दर जाने के लिए बेताब़ हो रहा था और रास्ता था कि लाख ढूंढने पर भी नज़र नहीं आ रहा था, फिर मैंने भी कोशिश की, पर बेकार। जब भी झटका मारता, लण्ड अन्दर जाने की बजाए पेट की तरफ निकल भागता।
फिर उसने कहा- कि किचन से थोड़ा तेल ले लो।
मैं किचन से तेल ले आया और उसकी चूत और अपने लण्ड पर खूब मालिश करवाई और की। फिर उसने लण्ड अपने हाथ में ले लिया और कहा- अबकी बार मैं कोशिश करती हूँ, पर धीरे-धीरे करना।
मैंने कहा- मुझे पता है जानम कि तुम और मैं दोनों ही नए हैं इस खेल में ! पर चिन्ता मत करो, मैं ख़्याल रखूँगा।
फिर उसने अपने हाथों से मेरा लण्ड अपने चूत की छेद के पास रखा और बोली- जानेमन थोड़ा रहम करना मेरे ऊपर और धीरे से धक्का लगाना !
तो मैंने पहला धक्का धीरे से लगाया, मुझे पूरा महसूस हो रहा था कि मेरे लण्ड का कितना हिस्सा बाहर है, और कितना अन्दर जा चुका है। मैंने अपने पहले ही झटके में अपना पूरा सुपाड़ा अन्दर पेल दिया तो वह तिलमिला उठी और अपने दाँतों को ज़ोर-जो़र से चबाने लगी फिर बोली- मुँह में कुछ दो नहीं तो मैं चिल्ला उठूँगी।
फिर मैंने अपनी जीभ उसे चूसने के लिए दी और वह चूसने लगी। इस बार मैंने एक और ज़ोरदार झटका मारा और मेरा आधा लण्ड अन्दर समा गया और वह इतनी ज़ोर से छटपटाई कि मैं घबरा गया, कि कहीं कुछ हो तो नहीं गया। उसने लाख़ छूटने का प्रयास किया पर मैंने छूटने नहीं दिया और फिर मैं वहीं रूक गया। उसकी जुबान को चूसने लगा, जब उसे थोड़ा आराम मिला तब उसने खुद ही कहा कि अब क्या चूस रहे हो, अब तो पूरा ही डाल दो, तो मैंने एक आख़िरी ज़ोरदार झटका मारा और वह उछल कर शान्त हो गई, फिर मैंने उसे हर कोण से चोदा और वह आ आआआआ आइ…. आआआआआ… आआआआआ उउउउउउ आआआहहह… उउउउभभभ… आआआआहहहह आआआआआ करती रही।
मैंने उसे अपने ऊपर आने के लिए कहा। यारों अगर आप चुदाई का असली मज़ा लेना चाहते हैं तो फिर आप ख़ुद लेट जाइए और उसे करने के लिए बोलें, फिर देखेंगे कि चुदाई क्या चीज़ होती है। और फिर वह मेरे ऊपर आकर पहले तो धीरे-धीरे फिर ज़ोर-ज़ोर से आटे की चक्की चलाने लगी। मेरा तो मत पूछिए, मैं तो जैसे हवाओं में था। तभी वह बोली- अब ज़रा ज़ोर-ज़ोर से कर दो, मैं आने वाली हूँ।
फिर मैंने उसे लिटा के जो झटके मारे, १०-१५ में ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे भी एक ऐसी सुखदायक कँपकँपी लगी जैसे कोई मुझे स्वर्ग की सैर करवा रहा हो। फिर शुरू से लेकर अन्त तक कर मैंने उसके एक पल का भी मज़ा खराब न करके वो मुझमें और मैं उसमें समाने की कोशिश करते रहे और वह मेरा हौसला बढ़ाती रही। मैंने ज़ोरदार शाट्स मारे, फिर हम शान्त होकर वहीं पड़े रहे। १५ मिनट बाद हम उठे, बाथरूम में साथ-साथ गए, एक-दूसरे को साफ़ किया। उसने मुझे गुडनाईट किस दिया और चली गई।
१५ दिन बाद मेरी नौकरी फ़रीदाबाद में डेवेलपमेन्ट में एक कैड ऑपरेटर के रूप में लग गई और मैंने दिल्ली छोड़ दी।
उसके बाद आज तक कभी सेक्स करने का दुबारा मौका नहीं मिला, उसके बाद ना तो उसने कभी मुझे फोन किया, ना मैंने उसे ही। उसकी शादी हो चुकी है, और वह काफी खुश है। Antarvasna
मैं आपका प्यारा Hindi Porn Stories मेजस्टी, जिसकी कहानियाँ आप सब बहुत पसंद करते हैं।
शायद इसलिये कि मेरी कहानियों में ज्यादातर लड़की या औरत मेरी करीबी होती है, जैसे मम्मी, बुआ या छोटी बहन।
बहन से याद आया कि मेरी कहानी ¨छोटी बहन के साथ¨ को पसंद करने के लिए सबका शुक्रिया करता हूँ।
इस बार मैं अपनी मम्मी और मौसी की चुदाई से शुरु करता हूँ।
क्योंकि लड़कियों को मेरी मम्मी की चुदाई की कहानियाँ बहुत पसंद हैं तो भला मैं इन कुँवारी नाजुक चूत वालियों का दिल भला कैसे तोड़ सकता हूँ, अब बात छोड़ कहानी शुरु करता हूँ..
बात उन दिनों की है जब मेरी ३५ वर्षीय मौसी अपने ३ बच्चों के साथ सहारनपुर से आई थी। उनकी शादी १६ साल पहले एक सरकारी कर्मचारी की साथ हुई थी।
सपना मौसी अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती थी। उनका रंग गोरा, गाल गुलाबी थे, पर चुँचियां बहुत बड़ी नहीं थी। पर हां ! उनकी गांड बहुत जबरदस्त थी, जब वो चलती थी तब मेरा ध्यान अक्सर उनकी गांड पर अटक जाता और वो साड़ी ही पहना करती थी! कसम से वो साड़ी में कयामत लगती थी, उनका साड़ी बांधने का अंदाज भी अलग था।
वो नाभि के काफी नीचे साड़ी बांधती थी और सदा गहरे गले का ब्लाउज पहना करती थी जिससे से वो जब भी झुकती थी तो उनकी दूध डेयरी का नजारा मैं बहुत आराम से देख करता था।
मै अपनी मम्मी, बुआ व बहन की चुदाई करने के बाद काफी चुदक्कड़ हो गया था।
मैने एक रात मम्मी को चोदते हुए मौसी की तारीफ की तो मम्मी ने कहा- साले ! मादरचोद ! मुझे पहले ही पता था कि तू मेरी बहन को बिना चोदे नहीं छोड़ेगा, क्योंकि मैं तुझे उसकी दूध डेयरी में झांकते हुए अनेक बार देख चुकी हूँ और जब भी तू उसके चूतड़ों की तरफ देखता है तो मै समझ जाती हूँ कि तू उसकी गांड भी मारेगा और वो छिनाल भी ऐसा ब्लाउज पहनती है कि सारी चूँचियां बाहर ताकती रहती हैं, रंडी ऊपर के हुक भी नही लगाती…
कई बार तो तेरे पिता जी भी मुझसे उसको सही ढंग से कपड़े पहनने के लिए कहने को कहते।
वो कहते- समझा लो मेरी साली को, वरना बाद में ना कहना कि मैंने उसकी चूँची दबा दी !
और मैं हंस कर टाल देती थी। लेकिन अब तू अपनी मौसी को चोदने को कह रहा है, तू भी बहुत हरामी हो गया है।
आप सब जानते ही होंगे कि मम्मी को चुदवाते वक़्त गालियों से बात करना बहुत अच्छा लगता है।
तभी मैं जो इतनी देर से मम्मी की बकबक सुन सुने जा रहा था, उनके बड़े-2 ब्लैडर जैसे स्तन दबाते हुए बोला- तो साली हर्ज ही क्या है जो अपनी बहन को मेरा लौड़ा खिला देगी तो उसको भी तेरे जैसे मजा आ जाएगा, वो तो वैसे भी तुझ से छोटी है और वैसे भी मौसा जी ज्यादातर घर से बाहर ही रहते हैं, उसकी चूत भी प्यासी ही रहती होगी। कसम से जब मेरा लौड़ा उसकी टाइट चूत में जायेगा तब बहुत मज़ा आयेगा। मम्मी प्लीज़ ! एक बार चुदवा दो न !
तब मम्मी ने कहा- अच्छा-2 अब अभी तो मेरी चुदाई कर !
उसके बाद मैने मम्मी की चूत को चाट कर उनकी बुर में बहुत ही ज़ोरदार ढंग से अपना पूरा 9″ का लौड़ा धंसा कर बहुत बेरहमी से पेला।
मम्मी ने थोडी देर बाद ही चूत से पानी छोड़ दिया। फ़िर मैने एक बार पलट कर उनकी गांड मारी जिससे मेरी माँ बहुत थक गई और फ़िर हम दोनों सो गये।
दूसरे दिन जब मैं नहा रहा था तब मैंने मम्मी की आवाज़ सुनी, वो सपनी मौसी से कह रही थी- सपना तुम उदास लग रही हो ?
तो मौसी ने न-नुकर करने के बाद बताया- क्या बताऊँ दीदी ! आजकल रिंकू के पापा मेरी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते, पहले वो मेरे साथ लगभग रोज़ ही सम्भोग करते थे(इतने में मैं नहा कर कमरे मे आ गया था)।
फ़िर माँ ने कहा- मैं तेरी परेशानी समझ गई, तू यही कहना चाह्ती है कि आनंद तेरी ठीक तरह से चुदाई नहीं करता। पर इसमें परेशान होने की कोइ बात नही क्योंकि वो तुम्हारे लिए ही काम कर रहा है, अब सारा वक्त तो तेरी चूत मारने में नहीं लगा सकता। चल कोई बात नहीं ! आज मैं तेरी प्यास बुझा दूंगी !
तब मौसी ने कहा- किससे? क्या मोमबत्ती से?
तो मम्मी बोली- नहीं पूरे 9″ का लौड़ा घुसवाउंगी आज तेरी चूत में।
मम्मी की बात सुन कर मैं खुश हो गया।
थोड़ी देर बाद ही मैने सुना कि मम्मी मौसी से बोली- देख सपना, मैं तुझे चुदवा तो दूंगी, पर एक शर्त है !
मौसी बोली- वो क्या?
मम्मी बोली- तुझे चूत और लंड की बातें खुल कर किसी रंडी की तरह करनी होंगी !
मौसी मान गई।
मौसी ने पूछा- आप मुझे चुदवाओगी किससे?
मम्मी ने कहा- यह तो रात को ही पता चलेगा।
रात होते सबके सोने के बाद मम्मी मेरे कमरे में आई और मेरे होंठों पर किस करते हुए बोली- चल मेरे चोदू राजा ! आज अपनी मौसी की चूत भी चेक कर ले, तूने ऐसी माँ कभी नहीं देखी होगी जो खुद के साथ अपनी बहन को भी चुदवाए !
तब मैंने कहा- मम्मी, मौसी को बता दिया कि उसकी चूत कौन मारेगा?
मम्मी बोली- बेटा, अभी नहीं बताया ! तू जब करेगा तो खुद ही देख लेगी।
मैं बोला- उसको बुरा नहीं लगेगा?
मम्मी ने कहा- अरे, बुरा कैसे मानेगी? साली की बुर में खुद ही कीड़े काट रहे हैं, और जब कोई औरत एक बार चुदाई कराने का सोचती है तो फ़िर वो किसी से भी चुदवा सकती है।
फ़िर मैं मम्मी के साथ उनके कमरे में चला गया। तब मौसी मम्मी के बेड पर बैठी थी और मुझे देख कर संभल कर बैठ गई।
मम्मी बोली- देख ले अपने चोदू को … आज यही तेरी चूत मरेगा !
यह सुनकर मौसी का मुख लाल हो गया।
वो झपाक से बोली- हाय दीदी ! मैं भला अपने भांजे से कैसे सम्भोग कर सकती हूँ?
तब मम्मी ने कहा- जब मैं अपने सगे बेटे से चुदवा सकती हूँ और इसको अपने सामने ही अपनी बेटी की चूत भी मरवाने का मज़ा दे चुकी हूँ, तब तुझे क्या मुश्किल है?
मौसी बोली- हाय दीदी, आप कितनी निर्लज्ज हो, भला अपने बेटे से भी कोई चुदवाता है।
मम्मी बोली- तू बोल- तुझे चुदवाना है या मैं अपनी चूत की खुजली मिटा लूँ तेरे सामने चुदवा कर ! साली नाटक करती है !और इससे तो घर की बात घर में ही रहेगी।
मौसी के नखरे दिखाने पर मम्मी ने उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर के पास चिकोटी काटते हुए कहा- रानी एक बार लंड घुसवा लेगी तो ससुराल जाना भूल जाएगी।
यह बोलते हुए मम्मी ने मौसी की साड़ी उतार दी, अब वो सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में रह गई। अब मैं बर्दाश्त से बाहर हो रहा था, मैंने मम्मी की चूँची दबाते हुए कहा- पहले एक बार आप चुदवा लो, फ़िर मौसी को देख लेंगे !
मम्मी ने कहा- अब तू अपनी मौसी को ही चोद ! इतने दिनों से तूने रट लगा रखी थी।
मम्मी ने मेरी लुंगी झटके से खोलते हुए मेरा अधखड़ा लंड हाथ मे लेकर मौसी की तरफ़ बढ़ाते हुए उसे हाथ में लेकर लंड की गर्मी महसूस करने को कहा और बोली- साली ले और जल्दी से इसे चूस !
मम्मी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए।
मौसी अभी भी शरमा रही थी लेकिन मम्मी ने उसके कान के पास चुम्बन लेते हुए उसे शर्म छोड़ने को कहा।
मैं झट से मौसी की चूंची दबाने लगा … वाह … बहुत मज़ेदार थी उनकी चूंचियां ! बिल्कुल टाईट ।
उनके गज़ब के चुचूकों को मैं हाथों से रगड़ रहा था, मम्मी पीछे से उसकी पीठ पर अपनी छाती रगड़ रही थी।
मौसी ओह…… ओफ़्फ़्फ़्… की सिसकियां निकाल रही थी। तब मैंने अपना हाथ साईड से उनकी पेटीकोट में डालकर धीरे से नाड़ा खोल दिया और पेटीकोट निकाल दिया।
अब मौसी बिल्कुल नंगी थी, पर उसने दोनों हाथों से अपनी बुर को छिपा लिया था।
मम्मी ने जल्दी से पीछे से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और मुझसे बोली- राज ! चल अब अपनी मौसी को चूत चाटने का मज़ा दे !
ये सुन कर मैं मौसी की बिना बालों वाली फ़ूली हुईं गुलाबी चूत पर हाथ फ़ेरने लगा, उसकी फ़ांके बहुत ही सुंदर थीं।
मैं अपना हाथ फ़ेरने लगा और मेरा हाथ अपनी चूत पर पाकर मौसी चिहुंक पड़ी और उसके मुँह से एस्स्स्स …स्स्स सिसकारियां निकलने लगीं। तभी मैंने अपने हाथों से उसकी फांकों को फ़ैला कर उसकी चूत का करीब से नज़ारा देखा।
उसके अंदर का गुलाबी भाग बहुत ही खूबसूरत था और उसकी भीनी-2 सुगंध आई।
मैंने जैसे ही अपनी ज़बान निकाल कर मौसी की चूत पर रखी, वो एकदम से उछल पड़ी और आईईई…एस्स्स्स्स हाय्य्य्य राज …उफ़्फ़्फ़्फ़्…क्या करते हो? बहुत गुदगुदी होती है !
तभी मौसी ने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर मेरा मुँह दबाने लगी।
कुछ देर चाटने के बाद मैंने उसकी चूत में अपनी ज़बान घुसा दी। वो ज़ोर से फ़िर उछल पड़ी … हाय राम ! दीदी यह राज कितना गंदा है … उफ़्फ़्फ़्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है !
मम्मी बोली- अभी तो ये सिर्फ़ तेरी चूत को चूस और चाट ही रहा है पर जब अपने खड़े लंड के झूले पे बिठाकर झुलाएगा, तू फिर देख्ना कितना दम है इसके लंड में !
और यह कह कर मम्मी ज़ोर-2 से मौसी मे स्तन और चुचूक मसलने लगी … कभी अपने होंठों से मम्मी उसकी चूँची को चूस रही थी।
अब तो मौसी के बदन मे आग लग चुकी थी और वो सारी लाज-शर्म भूल कर बोली- आओ मेरे चोदू राज …॥ आईईईइ…इस्स्स्स इस तरह का मज़ा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं दिया आह्ह्ह्ह्हह्ह,……
और वो अपनी चूत उचकाने लगी और मैं भी उनकी चूत की दरारों को फ़ैला कर उनकी टांगें अपने कंधों में फंसा कर बहुत ही ज़ोरदार तरीके से उसकी चुसाई कर रहा था …
मेरी छिनाल मम्मी ! आज तो तेरी बहन की चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा है ! मैं बोला।
मम्मी बोली- मादरचोद अब जल्दी से इसकी चूत से पानी निकाल ! इतनी देर से घुसा पड़ा है।
मैंने कहा- इसकी चूत इतनी चुदी नहीं है और आज पहली बार तो इसकी चुसाई हो रही है, भला इतनी जल्दी पानी कैसे छोड़ेगी ! अब तेरी बात तो अलग है, तेरा तो भोसड़ा बन चुका है !
इससे मम्मी तप गई और मेरे सर पे एक चपत मारते हुए बोली- अब मेरी चूत मारना ! तेरी गांड पे लात मारूंगी।
इतने में मौसी बोली- बात ही करते रहोगे या मेरा पानी भी निकालोगे, मैं झड़ने वाली हूँ… जल्दी… जल्दी जबान चलाओ ! मेरी बुर में ज़ोर से धक्का मारो …
कहते हुए अपनी चूत को उचकाने लगी और उनके मुँह से उईईईईईईईई आअ ह्ह्ह्ह्ह्ह, जल्दी करो…राज्ज्ज्ज…
और तभी मौसी ने पानी छोड़ दिया। उनका ढेर सारा रस मेरे मुँह पे पड़ गया, मैने बहुत ही चाव से सारा कामरस पी लिया।
झड़ने के बाद मौसी एक तरफ बेड पर गिर गई। उसके बाद मैंने अपनी मम्मी की गांड मारी और मौसी को उस रात मैंने चार बार चोदा।
उसका ज़िकर अगली बार करुंगा …
अब इज़ाज़त दीजिए…पर हर बार की तरह मुझे आपकी मेल का इंतज़ार रहेगा… Hindi Porn Stories
अगले दिन दोपहर को मौसा Antarvasna Sex Stories जी घर आ चुके थे। उनके साथ उसके एक पुराने मित्र राजेश भी थे। उनके आते ही रीना और रूपा में कुछ बदलाव सा लगा, दोनों ही कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी। रीना भी पहले से अधिक सेक्सी लगने लगी थी। उसने थोड़ा मेकअप भी किया हुआ था और मौसा जी से वो हंस-हंस के बात कर रही थी। रूपा ने राजेश की खूब आवभगत की और उससे खूब बातें की।
मौसा जी बार-बार रीना की तरफ़ देखते, कभी उसका फ़िगर देखते, कभी उसके सुडौल चूतड़ों को निहारते। आज जाने क्यों रीना बड़ी आकर्षक लग रही थी। मौसा को क्या पता था कि आज रीना ने भरपूर चुदाई करवा कर अपना मन शांत कर लिया था।
पर हां इससे रीना के मन में एक नया जोश और मर्दों के प्रति एक आकर्षण पैदा हो गया था। जैसे अधिकतर मर्द नारी को एक भोग्य वस्तु मानते हैं, वैसे ही उसे पुरुष भी भोगने की वस्तु लगने लगे थे। उसे लगने लगा था कि मर्द तो बस चूत के दीवाने रहते हैं, इन्हें तो जब चाहो तब पटा लो और चुदा लो। बस थोड़ी सी चूची दिखा दो और मर्दों का तम्बू तन जाता है। चुनांचे मौसा जी भी रीना के लिये उसी श्रेणी में आ चुके थे।
रीना दो दिनों में ही मौसा जी के बहुत निकट आ चुकी थी। रीना उन्हें हर तरफ़ से उसे पटाने में लगी थी। उसे आशा थी कि उसे एक नया लण्ड जल्दी ही मिल जायेगा। अभी तो सभी कुछ पर्दे के पीछे था। उधर रूपा भी राजेश से खूब घुल मिल गई थी। शाम को सब मौसा जी के साथ राजेश को घुमाने ले जाते थे। रूपा ने रीना को और रीना ने रूपा को यह बता दिया था कि वो इन मर्दों को पटा रही हैं। दोनों ने अपने पत्ते खोल रखे थे। रीना यदि मौसा के अधिक करीब आ जाती थी तो रूपा जानबूझ कर दूसरी ओर चली जाती थी और मौसा यह समझते थे कि मौका मिल गया। इस दौरान वो हाथ दबा देते थे और कभी कभी चूतड़ पर हाथ भी मार देते थे। बदले में रीना शर्माने का अभिमय कर देती थी।
उधर रूपा ने भी राजेश को पटा लिया था। रूपा जरा तेज थी, सो वो तो चुम्बन तक पहुंच गई थी।
“रीना ! अब तो मुझे चुदने की लग रही है … अपने मौसा जी को कही बाहर ले जा ना !”
“शाम को मौसा जी को मैं घुमाने ले जाती हूँ और आप तबियत का बहाना बना लेना !”
दोनों ने अपनी ओर से सरल सा बहाना बना लिया। योजना के मुताबिक राजेश बाहर निकल गया और रूपा ने पेट दर्द का बहाना किया। मौसा जी तो चाहते ही थे कि उसे सिर्फ़ रीना का साथ मिले। रीना के थोड़े से ही कहने पर मौसा जी मान गये।
रूपा ने भी मंजूरी दे दी। दोनों कार में निकल पड़े और रूपा ने जल्दी से मोबाईल पर फ़ोन करके राजेश को वापस बुला लिया। राजेश तुरंत घर आ गया। राजेश सीधा रूपा के कमरे की तरफ़ बढ़ गया। रूपा उसे देखते ही शरमाती सी खिल गई।
“अब हम तुम इस कमरे में बंद हो तो…”
“धत्त, आप तो मजाक करने लगे…” रूपा ने राजेश को रिझाने का नाटक किया।
“अब तो मत शर्माओ … अब तो एक मैं और एक तू … दोनों मिले किस तरह… बताओ !”
“हाय रे … आप दूर रहें … मुझे कुछ होता है…!” राजेश ने रूपा का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया, रूपा जानबूझ कर उसके ऊपर गिरती हुई बोली,”हाय राम … बैंया तो छोड़ो, मोच आ जायेगी ना…” रूपा फ़िल्मी अदाएँ दिखाते हुये राजेश से लिपट गई। दूसरे ही क्षण रूपा के मद भरे अमृत कलश उसकी हथेलियों में दबे हुये थे।
“मां री ! … मत करो ना … गुदगुदी होती है …! ” रूपा ने आह भरते हुये कहा,”दूर रहो जी… नीचे कुछ गड़ रहा है…”
मेरी मतवाली रूपा यही है वो मस्त चीज़ जो हमे अभी मस्ती देगी … अब बनो मत …”
“ना जी … मत सताओ … इसे दूर ही रखो … मेरा मन डोल रहा है… हाय रे ! क्या कर रहे हो… घुसाये चले जा रहे हो… आह्ह्ह मेरे राजेश…!!”
“मस्ती आ रही है ना… आओ अब अधरों का रसपान करें” राजेश भी भावना में बह कर बोला।
दोनों के होंठो की पत्तियां टकरा गई और एक दूसरे की जीभ से वो भीग गये।
होंठो का कसाव दोनों ने बढ़ा दिया और अधरपान में लीन हो गये। राजेश के मुँह से सीत्कार निकल पड़ी… रूपा ने उसका लण्ड कस कर दबा दिया था।
“अरे रूपा, तुम मुझे मार डालोगी… जरा धीरे से… कहीं निकल गया तो मजा नहीं आयेगा…”
“तो फिर जी, क्या करें … मेरा तो मन डोल रहा है जी…!”
“चलो, पहले प्यास बुझा ले… कपड़े उतारो…”
“प्यास लग रही है तो कपड़े क्यूँ उतारें भला…?” रूपा ने शरमाते हुये कहा।
राजेश ने धीरे से रूपा की साड़ी उतार दी … फिर ब्लाऊज को जबरदस्ती उतार दिया। रूपा की तरफ़ से ब्लाऊज़ उतारने का विरोध तो मात्र एक नाटक था, ब्लाऊज उतरते ही उसने अपनी उभरी हुई जवानी को हाथों से छिपाने का नाकाम प्रयास किया। राजेश ने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार फ़ेंके। अब रूपा के पेटीकोट की बारी थी, बस नाड़ा खींचने की देर थी। पेटीकोट झम से नीचे पांवों पर आ गिरा।
“मैं मर गई राम जी… और कभी अपनी चूत छिपाती तो कभी अपने उभरे हुये स्तनों को ढकने की कोशिश करती। राजेश ने अपने नंगे बदन से रूपा को लिपटा लिया और दोनों फिर बिस्तर पर एक दूसरे को धकेल कर लेट गये। दोनों ही एक दूसरे के शरीर को दबाते हुये लोट लगाने लगे। तभी रूपा सिसक उठी। उसकी चूत में राजेश का कड़क लण्ड बिना किसी पूर्व सूचना के उतर चुका था। रूपा के बदन में तरावट आने लगी। कब से नये लण्ड का इन्तज़ार कर रही थी और नये लण्ड ने उसकी चूत को स्वीकार करते हुये खेल-खेल में प्रवेश कर लिया था।
राजेश रूपा के नीचे दबा हुआ था और रूपा उसके ऊपर लण्ड पर बैठ गई थी। रूपा उसके लण्ड पर अपनी चूत भींचे जा रही थी और राजेश के चूतड़ ऊपर की ओर जोर लगा कर पूरा लण्ड अन्दर तक बैठाने की कोशिश में थे।
रूपा राजेश पर पिघले जा रही थी। उसकी चूत फ़डफ़डा रही थी। राजेश ने रूपा के सुडौल स्तन हिलते हुये देखे और उसके हाथ उन्हें थाम कर ऊपर नीचे करके उसे मसलने लगा। रूपा उस पर झुक गई और चूत को आगे पीछे करके राजेश को चोदने लगी। राजेश का शरीर वासना में जलने लगा। वो अपने चूतड़ ऊपर उछाल कर रूपा को चोदने में सहायता करने लगा।
अब रूपा राजेश के शरीर के ऊपर लेट सी गई और आहें भरते हुये चूत को आगे-पीछे करके लण्ड का आनन्द लेने लगी। राजेश ने अतिउत्तेजना में रूपा को कमर से जकड़ लिया और धीरे से उसे अपने नीचे दबोच लिया।
राजेश अब ऊपर था और लण्ड जो कि इस उल्टा पल्टी में बाहर आ गया था, फिर से चूत में सरक गया। अब रूपा की भरपूर चुदने की बारी थी। राजेश के धक्के और झटके चूत पर चालू हो गये थे। और नीचे दबी रूपा आह्… उह्ह… हाय रे… जैसी सीत्कारें निकाल रही थी।
राजेश अपने लण्ड को अपनी तसल्ली के लिये दबा के धक्के मार रहा था। नीचे दबी चुदैल रूपा को ये धक्के बडे प्यारे लग रहे थे। उसके हर जोरदार धक्के पर रूपा के मुँह से आह निकल जाती थी। तभी रूपा को लगा कि उसकी चूत जवाब देने वाली है, उसने अपनी प्यारी चूत को पूरी तरह से झड़ने के लिये तैयार कर ली और आंखें बंद करके अपनी चूत को ढीली छोड़ दी ताकि अच्छी प्रकार से पानी निकल जाये। उसकी चूत अब रस छोड़ने वाली थी और बार बार अन्दर लहरें उठ रही थी। तभी रूपा ने अपनी चूत ऊपर की ओर दबाई और अपना रस छोड़ने लगी।
उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी। उसने राजेश को अपनी बाहों में दबा लिया और लण्ड को चूत में कस लिया। तभी राजेश का वीर्य भी छलक पड़ा। उसकी पिचकारी चूत में समाने लगी और फिर चूत के बाहर रिसने लगा। दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में समाये हुये यूं ही अपना रस निकालने में लगे रहे। उनकी आंखें आनन्द के मारे बंद थी। काफ़ी देर दोनों यों ही दुनिया से बेखबर पड़े रहे।
फ़िर रूपा कुछ अलसाई सी पता नहीं क्या बोली और अपना मोबाईल पर रीना को मिस कॉल कर दिया। राजेश भी उठा और जल्दी से कपड़े पहन कर रूपा को चूमा और घर से बाहर निकल गया। कुछ ही देर में रीना मौसा जी के साथ घर आ गई।
“अरे, वो राजेश नहीँ आया…?” मौसा ने पूछा।
रूपा मुस्करा उठी,”आप जानें … आपका दोस्त है!”
रूपा रीना के कमरे में आ गई थी। दोनों सहेलियाँ कुछ गुपचुप बाते कर रही थी।
“मै सोने जा रहा हूँ… हम दोनों ने खाना बाहर खा लिया है… रूपा तुम भी खा लेना !”
मौसा जी अपने कमरे में जाकर बत्ती बंद करके लेट गये। रूपा भी मौसा जी के पीछे चली गई। रीना ने भी अपने रात को सोने वाले कपड़े पहन लिये या यूँ कहे कि बस एक सामने से खुला हुआ गाऊन डाल लिया और बिस्तर पर लेट गई।
कहानी का अगला भाग: कलयुग की लैला-3 Antarvasna Sex Stories
नमस्ते दोस्तो! मेरा नाम आशीष है, अब मेरी उम्र 32 साल है पर बात तब की है जब मैं अट्ठारह साल का था. मैं बारहवी में पढ़ रहा था.
मेरे बाजू वाले घर में गुड्डी भाभी रहती थी.उनका फिगर 34-32-36 का है उम्र 24 साल थी हमारा उनके यहाँ आना जाना तो था, थोड़ी मस्ती भी करता था पर गलत इरादे न उसके थे न मेरे थे.
मुझे मेरे मामा के घर जाना था. गाँव का नाम बताना यहाँ ठीक नहीं होगा लेकिन रात भर का सफ़र था, गुड्डी भाभी को भी गाँव जाना था, उनके बच्चे छुट्टियों में गाँव गए थे उनको वापस मुंबई लाना था. उनका गाँव मेर मामा से गांव से नजदीक था तो वो भी मेरे साथ आने को निकल पड़ी. अब उनको भी अकेले जाने से अच्छा था कि मेरे साथ जाये!
बस में भरी भीड़ थी छुट्टियाँ जो थी. हमें मुश्किल से पीछे वाली दो सीट मिली, सामान रखने की भी जगह नहीं थी. तो गुड्डी भाभी ने अपनी सूटकेस अपने पाँव के नीचे रख लिया. मैं खिड़की के साथ में बैठा था. बस निकल पड़ी अपने मुकाम की तरफ.
रात के 10 बजे होंगे जब हम निकले. टिकट कटवाने के बाद बस की लाइट बंद हो गई और कब नींद आई पता ही नहीं चला.
नींद में ही मेरे हाथ साथ में बैठी गुड्डी भाभी को लगा और मेरी नींद खुल गई. गुड्डी भाभी की साड़ी कमर तक ऊपर आ गई थी. मैंने ध्यान से देखा तो पता चला कि सूटकेस रखने की जगह नहीं होने के कारण उन्होंने जो सूटकेस अपने पैरों के नीचे रखा था उस वजह से उनके पैर ऊपर हो गए थे और साड़ी फिसल के कमर तक आ गई थी. अब मेरी हालत देखने लायक थी. क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा था.
तो मैंने भी नींद में होने का नाटक किया और धीरे धीरे मैं उनको हाथ लगाने की कोशिश करने लगा. डर तो बहुत लग रहा था कि कहीं उनकी नींद न खुल जाए. लेकिन जो आग मेरे अन्दर भड़कने लगी थी वो मुझे शांत कहाँ बैठने दे रही थी, तो मैंने भी नींद का नाटक कर के अपना हाथ चलाना चालू रखा. अब मेरा हाथ धीरे धीरे उनकी पेंटी को छूने लगा था. मेरी नजर हमेशा यही देख रही थी कि कहीं वो नींद से न जग जाय.
बस में काफी अँधेरा था और मैं एक नई रोशनी ढूंढ रहा था. मेरा हाथ अब उनकी जांघों पे फिसल रहा था. इतने में उन्होंने अपना सर मेरे कंधे पे रख दिया. मेरी तो डर के मारे जान ही निकल गई. मुझे लगा कि वो जग गई लेकिन वो तो गहरी नींद में थी. अब मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा.
लेकिन इस चक्कर में हम दोनों में जो दूरी थी वो और कम हो गई और इसको मैंने ऊपर वाले की मेहरबानी समझा. अब मेरी हिम्मत बढ़ने लगी थी और मेरा हाथ अब थोड़ी और सफाई से चलने लगा था लेकिन फिर भी सम्भाल के जांघों पे हाथ फेरने के बाद अब मैंने धीरे से उनकी पेंटी में हाथ घुसाया. बाल तो एकदम साफ किये हुए थे. अब मैं उनकी चूत को धीरे धीरे सहलाने लगा लेकिन एकदम संभल के.
थोड़ी ही देर में उनके बदन से अजीब सी खुशबू आने लगी थी और मेरी उंगली गीली हो गई थी, उनकी चूत अब पानी छोड़ने लगी थी. अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि वो सच में सोई है या उनकी नींद खुल गई है. लेकिन एक बात तो ध्यान में आ गई थी कि कोई भी औरत इतना सब करने के बाद भी सो नहीं सकती. अब मेरी हिम्मत तो बढ़ गई थी लेकिन मन में डर अब भी था. कही ओ सच में सोई हुई तो नहीं. लेकिन अब रुकना मेरे बस में नहीं था सो मिने भी सोचा जब उठ जायेगी तब देख लेंगे. वासना पे किसी का जोर नहीं चलता.
मैंने हिम्मत की और एक हाथ से उनकी चुत में उंगली करना चालू रखा और दूसरा हाथ उनकी चूची की तरफ बढ़ाया और धीरे से उन्हें मसलना चालू किया. मेरी जिंदगी का यह पहला अनुभव था और इतनी आसानी से मौका मिलेगा ये मैंने सोचा भी नहीं था. उनकी हलचल तो बढ़ गई थी लेकिन वो आँखें खोलने को तैयार नहीं थी. शायद अब उनका पानी निकलने को था. तो मैंने भी मेरी उंगली की रफ्तार बढाई और उन्होंने मेरी उंगली को अपनी चुत की फांकों से दबा कर रखा. शायद वो शांत हो गई थी. लेकिन मेरा तो लंड एकदम तना हुआ था. क्या करू समझ में नहीं आ रहा था. मैंने उनका हाथ उठाया और मेरी चैन खोल के लंड को बाहर निकला और उनके हाथ में दे दिया. लेकिन वो कुछ भी करने को तैयार नहीं थी.
तो मैंने फिर से उनकी चूची को दबाना चालू किया, चुत में उंगली भी डालना चालू रखा पर कुछ फायदा नहीं हुआ.
पूरी रात निकल गई जाने कितने बार ओ झड़ गई थी पर मेरे लंड से पानी नहीं निकला था. अब मेरे लंड में दर्द शुरू हो गया था. तो मैंने अपने हाथ से ही धीरे धीरे लंड हिलाना चालू किया 3-4 बार ही हिलाया था के मेरा भी पानी निकल गया. फिर नींद कब लग गई पता ही नहीं चला.
सुबह 8 बजे गाड़ी हमारे गांव में पहुँच गई. गुड्डी भाभी ने मुझे उठाया और हम बस से उतर गए.
यहाँ से हमारे रस्ते अलग होने थे. मुझे बड़ा दुःख हो रहा था कि जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव और वो भी अधूरा ही रह गया. मैं देख रहा था कि उनके चहरे पे कोई भाव नहीं था. मैंने रात को उन के साथ कुछ किया हो ऐसा कुछ भी नहीं जता रही थी. जैसे कुछ हुआ ही नहीं… मैं उदास था कि अब मुझे अपने मामा के यहाँ जाना था और वो अपने बच्चो को ले कर वापस मुंबई जायेगी.
लेकिन एक बात तय थी कि वो सोई नहीं थी, सोने का नाटक कर रही थी. और मुझे इस बात की ख़ुशी थी कि आज भले ही मैं कुछ नहीं कर सका लेकिन मैं जब वापस मुंबई जाऊँगा तो शायद मेरा काम बन जाये… और मैं जिंदगी का पहला सेक्स गुड्डी भाभी के साथ ही करूँगा.
आगे की कहानी किसी दूसरे दिन बताऊँगा. अगर आप को मेरी आगे की कहानी जाननी है तो मुझे लिखे कि आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी.
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