Important Notice: Post Free Ads Unlimited...🔥🔥🔥

Male Escorts in Golaghat Premium Companionship and Escort Services

Read Our Top Call Girl Story's

प्रेषक : श्रेया  Hindi Porn Stories

मेरा नाम तपन घोष है! मैं Hindi Porn Stories आसनसोल का रहने वाला हूँ ! आज मैं आपको ऐसी कथा बताने जा रहा हूँ जो सुनकर सब कहेंगे तपन बना बहन चोद !

मैं अपनी माँ का एकलौता बेटा हूँ! मेरी एक बड़ी बहन है छाया ! मुझसे उम्र में चार साल बड़ी है! जब मैं अपने यौवन का स्वाद चख ही रहा था तब मुझे पता चला कि मैं हरामी हूँ .. उनकी अपनी संतान नहीं हूँ ! मेरे फ्लैट-सोसाईटी वाले मुझे छेड़ते थे इस बात को लेकर ! पापा मम्मी अलग कमरे में सोते थे और मैं और दीदी बाजू वाले कमरे में सोते थे।

वो मेरा बहुत ध्यान रखती थी ! मैं नया नया मुठ मरना शुरू किया था ! स्कूल के दोस्त कहते थे अगर किसी लड़की मुठ से मरवाई जाए तो क्या कहना . मैं सोचता था कि छाया मेरी अपनी बहन तो है नहीं ! क्यूँ न इस पर ही कोशिश करूँ?

एक रात वह बिलकुल मदहोश होकर सो रही थी! मैं अपना लंड उसके मुलायम हाथ में रखा ! आह अहह कितनी नर्म हैं दीदी की उंगलियाँ ! मज़ा आ गया ! फिर मैंने उसकी हथेली में अपना वीर्य निकाल दिया!

सुबह मैंने देखा वो अपने हाथ धो रही थी …

दीदी क्या हुआ ??

अरे देखो ना क्या लग गया है सोते सोते ! साबुन जैसा चिकना है !!

दीदी कैसी खुशबू है उसकी ?

उसने सूंघा, अहह पता नहीं अजीब सी है !

बेचारी अब तक कुँवारी चूत लेकर फिर रही है … मैं तो बेकार में ही सुनीश के साथ शक करता था ?

सुनीश की पास में परचून की दुकान थी।

एक दिन मैं स्कूल से जल्दी आ गया, घर का दरवाज़ा खुला था ..

मैंने अन्दर जाकर देखा कि सुनीश दीदी को चोद रहा था।

दीदी की गोरी-गोरी टाँगें फैली हुई थी और सुनीश की काली काली गांड हवा में उछल उछल के घस्से मार रही थी।

दीदी की गोरी गांड देख कर जैसे मेरा खड़ा हुआ कि सुनीश मुझे देख वहाँ से रफूचक्कर हो गया …

तपन ! मम्मी को मत बताना ! मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़ती हूँ !!

मैं ज़रूर बताऊंगा दीदी … मैं नाराज़ होकर बोला।

ठीक है ! बता देना ! फिर पापा को मैं भी तुम्हारे बारे बता दूंगी कि तुम रात में मेरे हाथ में मुठ मारते हो। हरामी कहीं के…

मैं चुप हो गया … रात आई .. मुझे नींद नहीं आ रही थी …

मैंने दीदी को पकड़ लिया।

अहह ! तपन यह क्या कर रहे हो ?

अपनी टांगें मैं उसकी नायटी में फेरने लगा …

नायटी में हाथ डाल कर उसकी पैंटी को छुआ !

आह्ह ! नहीं ! मैं तुम्हारी दीदी हूँ !

कैसी दीदी? मैं तो हरामी हू ना ?

कहकर मैंने उसकी पैंटी खोल दी … उसकी जांघें ! मानो जन्नत ..

आओ ना ! जो कसर सुनीश ने छोड़ी है, मैं पूरा किये देता हूँ !

ओह! आ जा मेरे राजा ! चढ़ जा !

उसने अपने नायटी हटाई, मैं उसके मम्मों को चूसने लगा।

दूध नहीं निकलता क्या ? मैं निचोड़ते हुए बोला।

हट पागल ..

उसने मेरे लौड़े को अपने चूत में घुसाया !

अहह ! मज़ा आ गया छाया दी !

अहह अह !

मैं स्खलित हो गया।

बस बच्चे ! दो चार ही बार में ही?

सुनीश तो पचास बार कम से कम करता है ! चलो मैं तुम्हें सिखाती हूँ !

उसने मेरे लण्ड को चूसा, जब खड़ा हो गया तो उसने अपने प्रवेश द्वार पर डाला। मैंने धक्के मारने शुरू किये ..

बस छाया दी निकल जायेगा ..

उसने पूछा- बता 5 गुने 5 ?

मैं सोचने लगा और मैं इस बार स्खलित नहीं हुआ ..

वाह दीदी ! क्या आईडिया है ..

मैंने इस तरह बहुत बार उस रात छाया दी को चोदा।

मैंने मुठ उसके होंठो पर मारी …

ओह तपन कितना शरारती हो ?

मैंने उसे अपने माल से नहला दिया।

अगले दिन छुट्टी थी ..

हम दोनों साथ में नहाए..

मैं उसे रोज़ चोदता था..

वो कहती थी- तुम सुनीश से भी एक्सपर्ट हो गए हो..

आज उसकी शादी है ..

मेरे दीदी के शादी में जजूल आना। Hindi Porn Stories

Sex Stories

हाय दोस्तों, मेरा नाम राहुल है Sex Stories और मैं राजस्थान का रहने वाला हूँ। मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं भी आपको अपने जीवन की एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।

मैं एक इंग्लिश की ट्यूशन में पढ़ाता हूँ। मैं २५ साल का एक कुँवारा नौजवान हूँ। मैं दिखने में गोरा और लम्बा हूँ। मैं कुछ समय पहले अपने पड़ोस में रहने वाली दूर के रिश्ते में लगने वाली मौसी की छोटी लड़की, जिसका नाम रम्या था, उसे पढ़ाने मैं हर शाम जाता था। वह अट्ठारह साल की थी और दिखने में ख़ूबसूरत थी, उसकी चूचियाँ अपेक्षाकृत काफी बड़ी थीं, जिन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था और उसे चोदने का भी मन करता था। मैं उसके भाई को पढ़ा करक अक्सर कमरे से बाहर आ जाता और रम्या से बातें किया करता था।

मुझे पता ही नहीं चला कि हम दोनों में कब प्यार हो गया और अब हम एक-दूसरे से फोन पर ढेर सारी बातें किया करते थे। रम्या से मैं बातें करते हुए कभी उसके हाथ पकड़ लेता तो कभी उसके गले में हाथ डालकर उसकी चूचियाँ छूता, तो कभी उन्हें दबा भी देता था। लेकिन रम्या इन सब के लिए कुछ भी नहीं कहती थी और मुस्कुरा देती थी। अक्सर उसकी चूचियों की गोलाईयों को छू कर मेरा मन बेक़ाबू हो उठता था। कभी-कभी मैं उसकी चूचियों को उसके कपड़ों से बाहर निकाल कर देर तक चूसता रहता था, तो कभी उसके कुर्ते में अपना हाथ डाल कर ब्रा के ऊपर से ही तो कभी अन्दर हाथ डालकर उन्हें दबाता था। कभी तो उसकी चूत में अपनी ऊँगली डालकर रम्या की सिसकियाँ निकाल देता था। सच दोस्तों, उन हसीन पलों को मैं कबी नहीं भूल सकता हूँ। रम्या एक कच्ची कली थी जिसका मैं मज़ा ले रहा था।

एक दिन सुबह जब मैं अपने घर से बाहर किसी काम से बाहर गया था तो मेरे पास रम्या का फोन आया और वह कहने लगी कि आज उनके घर पर कोई भी नहीं है और वह नहाने जा रही है। यह सुनकर मेरे मन में रम्या के नहाने वाली बात को सुनकर उसकी नंगी तस्वीर नज़र आने लगी और मैं उसे चोदने का विचार बनाने लगा।

मैंने सोचा कि आज मौक़ा है, पता नहीं कब मिले। मैं तुरन्त ही अपने काम को खत्म करके रम्या के घर रवाना हो गया। जब मैं रम्या के घर पहुँचा तो घर में उसकी सहेली थी। मैंने उससे पूछा कि रम्या कहाँ है तो उसने कहा कि वह तो बाथरूम में नहा रही है। यह सुनकर मेरा लंड और भी तेज़ी से खड़ा हो गया और मन ही मन उसके चोदने के ख्याली पुलाव बनाने लगा। मैंने रम्या की सहेली से कहा कि मैं तो घर जा रहा हूँ। यह कह मैं उसके घर से बाहर आ गया और क़रीब पाँच मिनट बाद मैं वापस गया तो रम्या की सहेली कमरे में थी और मैं चुपचाप बाथरूम में चला गया। वहाँ मैंने देखा कि रम्या बिल्कुल नंगी थी, उसने केवल पैन्टी ही पहनी थी और उसके चेहरे पर साबुन लगा था।

उसका नंगा बदन देखकर मैं दंग रह गया। उसकी चूचियाँ इस तरह मेरे सामने थीं कि मानो मुझे अपनी वासना बुझाने के लिए आमन्त्रित कर रहीं हों। मैं रम्या के पास जाकर साबुन उठाकर उसके गोरे जिस्म पर मलने लगा। रम्या घबरा गई और फटाफट अपना मुँह धोते हुए पूछने लगी कि कौन है? तो मैंने बताया कि मैं हूँ तेरा यार.. और आज तुझे असली मज़ा दूँगा।

रम्या ने कहा, उसकी सहेली आ जाएगी, तो मैंने कहा कि अगर वह आ गई तो वह भी हमारे साथ इस ज़न्नत का मज़ा ले लेगी। यह कहते हुए मैंने उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और होंठों को पागलों की भाँति चूमने लगा। फिर उसकी चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगा। रम्या की चूचियाँ छोटी थीं लेकिन उन्हें दबाने-चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था। अब रम्या धीरे-धीरे गरम हो रही थी। उसने अपने ही हाथों से अपनी पैन्टी हटा दी और मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत चटवान लगी और कहने लगी – “चाटो… आआआहहहहहह… आआआआहहहह…. शशशस्स्ससस्सस….”

मैं अपनी जीभ से उसकी चूत को चाट रहा था। कभी उसकी जाँघों को चाटता तो कभी उसकी चूत में ऊँगली अन्दर-बाहर करता। उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे. वह मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत इस तरह से चटवा रही थी कि मानों उसका बस चले तो मेरा सिर चूत के अन्दर ही डाल दे।

अब मेरा लण्ड भी बाहर आने को तड़प रहा था और अपने बिल में घुसने को बेक़रार था। मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और अपना लंड रम्या के हाथ में दे दिया और चूसने के लिए कहा तो रम्या शरमाने लगी। मैंने उससे कहा कि तुम इसे मस्त करोगी तभी ये तुम्हें पूरा-पूरा मज़ा देगा। तब रम्या ने मेरा लण्ड चूसना शुरु किया। थोड़ी ही देर बाद मैंने रम्या को फर्श पर लिटाकर उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया। वह दर्द के मारे चिल्ला पड़ी। उसे काफ़ी दर्द हो रहा था। वह लंड निकालने को कहने लगी। लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था, मैं उसकी चूचियों को पकड़कर उसके होंठों को चूमने लगा और धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर बाद मेरा लंड आधे से ज्यादा रम्या की चूत के अन्दर चला गया। उसे भी पूरा मज़ा आने लगा।

मैं बीच-बीच में रम्या की चूचियाँ भी चूस रहा था। बाद में मैंने रम्या को दीवार के सहारे खड़ा करके पीछे से उसकी चूचियाँ पकड़कर उसकी चूत में पीछे से लण्ड डाल दिया। अब मैं उसकी ज़ोरों से चुदाई कर रहा था। इस मस्ती में हम भूल ही गए थे कि उसकी सहेली भी पास वाले कमरे में ही है।

रम्या को चोदते हुए मेरे हाथ कभी उसकी चूचियों तो कभी उसकी चूत को सहला देते थे। इस बीच रम्या झड़ चुकी थी। मैं भी क़रीब बीस मिनट बाद झड़ गया और अपना सारा माल रम्या के मुँह में डाल दिया।

तभी रम्या की सहेली की आवाज़ आई कि वह घर जा रही है। यह सुनकर हम दोनों खुशी से झूम उठे। हम दोनों काफी देर तक साथ रहे, नहाया और बाद में उसे अपनी बाँहों में उठाकर कमरे में बिस्तर पर लिटा दिया। वहाँ जाकर रम्या मेरे लंड चूसने लगी, तभी मुझे एक ब्लू-फिल्म का एक दृश्य याद आया जिसमें पुरुष अपने लंड को लड़की की चूचियों के बीच की दरार में रखकर उसे आगे-पीछे करता है। मैंने भी ठीक उसकी तरह रम्या की चूचियों के बीच में अपना लंड रखकर उसे आगे-पीछे किया और बहुत देर तक उसकी चूचियों से खेलता रहा। उस दिन मैंने रम्या को पाँच बार चोदा।

उस कच्ची कली को फूल बना कर मैं उसे ‘आई लव यू’ कहकर अपने घर वापिस आ गया।

तो दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी। Sex Stories

हाय मेरा नाम अरबाज है, मेरी उम्र 27 साल है में एक इंजिनियर हु मेरे लन्ड का साइज औसत 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है , ये मेरी ओर मेरे कजिन सिस्टर जस्मीन दीदी की चूत चुदाई की सच्ची कहानी है कैसे मैने उसको चोदा इस कहानी को पढ़के जानिए मे antarwasna. story.com का पुराना रीडर हु, मुझे जादा तर फैमिली सेक्स स्टोरी पसंद है, कहानी पड़ते हुवे में हमेशा सोचता था काश मुझे भी मौका मिले , एकदिन मेरी ये तमन्ना पुरी हो गई मैने अपनी फैमिली में सेक्स का मजा लिया अपने कजिन सिस्टर जस्मीन दीदी को चोदकर, कैसे मैने मेरी रण्डी जस्मीन दीदी को चोदा और उसको अपने लन्ड की गुलाम बनाया इस कहानी में डिटेल में बताया हु , मेरी एक सबको सजेशन हे अपने घर की बहनों को बाहर का कोई चोदे उसके पहले ही चोदो बहुत मजा आता हे जब अपनी बहने अपने भाई का लन्ड लेती हे चूत में तब , चलिए कहानी शुरू करने से पहले सब लड़के अपने लन्ड को बाहर निकाल के मूठ मारने ओर सब लड़कियां चूत में उंगलियों करने तैयार हो जाए आपको सबमें पहले मेरी रण्डी जस्मीन के बारे में बताता हु, ओ मेरी कजिन सिस्टर हे जस्मीन जो मुझसे काफी बड़ी हे उसकी शादी हो गई हे ,उसकी उम्र 36 साल की हे वह दो बच्चों की मां हैं ,वह जादा गोरी नहीं ना जादा काली हे दिखने में ठीक हे उसका फिगर साइज बहुत सेक्सी हे, 34 के सेक्सी बूब्स 32 की कमर ओर गान्ड तो 36 की इतनी मस्त हे कि देखते ही बुड्ढे का भी लन्ड खड़ा करदे , तो चलिए अब जादा बोर ना करते हुवे कहानी शुरू करते हे, कैसे मैने अपनी सेक्सी रण्डी जस्मीन दीदी की चूत चोदी ओ भी पूरे रात भर जैसे कि मैने बताया मेरी अभी अभी शादी होई शादी की अब तैयारी चालू थी ,सब रिश्तेदार को इनवाइट किया गया किस्मतसे सबमें पहले मेरी रण्डी जस्मीन ही सबसे पहले आ गई घर, शादी को अभी एक हफ्ता था ओ आई पहले दिन सब नॉर्मल था सब तैयारी ही चालू थी, आपको बताना भूल गया में बचपन से जस्मीन के साथ रहा था, तो मुझे उससे लगाव था, बढ़ती उम्र में सेक्स कहानियां पढ़ते हुवे में जादा तर जस्मीन को ही याद करके अपना लन्ड हिलाता था जबसे ओ आई थी तबसे में बस मौका ढूंढता था कब इसको नंगी देखने मिलेगा कब चोदने मिलेगा कब मेरे नीचे आएगी चूत चोदने बट डरता था तो कुछ किया नहीं बस उसको ताड़ने का मौका नहीं छोड़ता था, जब ओ झाड़ू लगाती थी उसके बूब्स जब ओ झुककर कोई काम करती थी तो उसकी गोल मटर गान्ड देखता था तो मेरा लन्ड अपने आप खड़ा होता था, में किसी न किसी बहानेसे उसकी गान्ड को टच करता उसको लन्ड रगड़ा करता ओ भी कुछ बोलती नहीं थी, में रोज दिन में कई बार उसको सोचकर हिलाता ओर पानी गिरता था जस्मीन दीदी ने भी नोटिस किया में उसकी गान्ड बूब्स को घूरता था ,उसको छुता लन्ड रगड़ता था, ऐसे ही दो तीन दिन निकल गए फिर ओर मेहमान आए तब भी में मौका नहीं छोड़ता था उसको देखने का छूने का फिर उसी रात सब मेहमान आने की वजहसे सोने की जगह कम गिरी में अकेला बेडरुम में सोता था, तो मेरी अम्मी ने जस्मीन दीदी को ओर उसके बच्चों को मेरे बेडरुम में सुलाया मेरी तो बिन मांगे मुराद पूरी हुई उस दिन सब सोए पहले जस्मीन दी उसके बाद उसके बच्चे उसके बाद में बट मुझे नींद ही नहीं आरी थी पास जस्मीन दी को देखे मेरी हालत खराब थी , उस रात उसने सलवार कमीज पहनी थी जो उसके जिस्म से पूरी चिपक गई थी ऐसे देखे मेरे लन्ड ने हलचल मची में जस्मीन दी को देखे बेकाबू हुआ और अपना लन्ड पजामे से निकल कर हिलाने लगा बट डर के मारे में ओर कुछ करने की नहीं सोची उस रात मैने उसको पास में देखे खूब जोर जोर से मूठ मारी मेरा बहुत पानी निकला मेरी कब आंख लग गई पता ही नहीं चला, दूसरे दिन सुबह में उठा जब जस्मीन दीदी किचन में काम कर रही थी, में उधर गया तो ओ बस सेक्सी स्माइल की तो में पूछा रात में नींद कैसे आई आपको तो मुझे बोली मुझे तो आई तुझे रात भर नींद नहीं आई होगी मेरे होते हुवे ,में बोला नहीं ऐसे कुछ भी नहीं तो बोली में जानती हु तू रातभर सोया नहीं मुझे ही देखते बैठा था और अपना लन्ड हिलारा था दो बार पानी निकाला ऐसे मत हिलाते जा कमजोर हो जाएगा शादी के पहले ही ओर हंसने लगी, मैने भी मौका देखकर जस्मीन दीदी को कहा तो क्या करु तुमको देखकर काबू नहीं रहा लन्ड पे ,तो ओ मुस्कान के साथ बोली इतना बेकाबू हुआ था तो डाल ही देता अंदर ओर भर देता अपने पनिसे मेरी चूत को, में बोला आप सबको बता ना दे इसलिए हिम्मत नहीं होई तो ओ पास आकर मेरे लन्ड को पैन्ट के ऊपर से मसलते हुवे बोली बेचारा हिम्मत करता तो जन्नत का सुख मिलता, ओर बाहर जाने लगी तो मैने उसको पीछे से पकड़ा और लन्ड गान्ड पे रगड़ते हुवे बूब्स को दबाया और कहा आज रेड्डी रहना आज हिम्मत करके दिखाऊंगा आपकी ये चूत में मेरा लन्ड डालकर आपको मेरी रण्डी बनाऊंगा, तो मेरी जस्मीन दी बोली में तो कबसे तैयार हु चुदाने बहुत आग लगी हे चूत में आज देखती हु कितना चोदता है तू ओर तेरा ये लन्ड, ओर पीछे मुड़के मेरे पेंट में अंदर हाथ डाल दिया और जोरसे मेरे लन्ड को पकड़ा मेरे मुझे आह आह की आवाज निकली तो वैसे ही पकड़े हुवे मुझे बोली तेरा लन्ड तो बहुत दमदार हे आज तो मजा आयेगा ओर मुझे एक होटों पे चुम्मी देते हुवे दूसरे रूम में गई , मेरा तो दिन भर बुरा हालता लन्ड बैठनेका नाम नहीं लेरा था, फिर रात में जस्मीन दीदी सोने आई उसके बच्चे आज एक कोने में सुलाई ओर मेरे पास आई में कम्बल में लेता था ,ओ आके मुझे किस करने लगी आह अरबाज आज पूरी रात तेरी रण्डी बनके चुदाऊंगी फिर में भी जोर जोर से उसके होंठ चूसने शुरू किया जस्मीन दीदी पागलों की तरह मुझे किस करने लगी , उसके बाद मैने उसके कपड़ो के ऊपरी हिस्से से बूब्स को जोर जोर से दबाना शुरू किया जस्मीन की सिसकारियां बढ़ती गई ओ बोलने लगी आह आह ऐसे ही रगड़ आह अरबाज आह ऐसे ही जोर जोर से दबा आज रण्डी दीदी का दूध निकाल आह अह्ह्हं करके सिस्कारिया निकालने लगी , उसके बाद मैने उसका कुर्ता उतारा अह्ह्हं पिंक ब्रा में जस्मिन के दूध एकदम मस्त लगरे थे, में ब्रा के उपरसे दुध चुसने लगा जस्मिन दीदी सिस्कारिया लेने लगी मेरा मु को पकडके अपने बुब्स पे जोर से दबाने लगी फिर में उसके बुब्स को दबाते हुवे उसे किस्स करने लगा उसके बाद गर्दन पे किस्स किया जस्मिन दीदी पुरी रान्ड के तरह मुझसे लिपट गई मुझे नीचे किया और मेरे शर्ट के बटन खोलने लगी उसके बाद मेरे सिने पे गर्दन पे अपने होठों से चूमने लगी गर्दन सीने से होते हुवे ओ नीचे गई मेरी पेंट के ऊपरसे लन्ड पे जीभ चलाने लगी फिर एकदम से मेरी पेंट नीचे की उसके बाद अंडरवीयर को अपने होठों में पकड़ा और नीचे खींचा जैसे ही अंडरवीयर नीचे आई लन्ड एकदम से उसके मु पे लगा आह क्या नजारा था मेरा लन्ड एकदम टाइट हुआ था उसके नीचे जस्मीन दीदी का चेहरा,,, जस्मीन दीदी ने मेरा लन्ड को होठों से अपने मु में पकड़ा और गप्प से मु में लिया ओर जोर जोर से चूसना चालू किया मेरा लन्ड उसके मु में पूरा नहीं जारा था फिर भी ओ पूरा गले तक ले लेकर चूस रही थी फिर मु से बाहर निकालकर जस्मीन दीदी मेरे पास देखते हुवे बोली आह अरबाज पहले पता होता इतना कड़क ओर मोटा लन्ड हे तेरा अबतक में कितने बार तेरे से चूद गई होती में बोला जस्मीन दीदी आज तेरी चूत को इतना चोदूंगा कि रण्डी की सुबह तुझे चलने दिक्कत होगी मेरी रण्डी दीदी तुझे तो चोद चोद के मेरी रण्डी बनाऊंगा और तेरी ये मोटी गांड़ को इतने बेहरमनीसे मारूंगा कि तुझे सुबह हांगने टाइम भी मेरी याद आयेगी इतना चोदूंगा आज मेरी प्यारी रण्डी जस्मीन दीदी इसके बाद कैसे मैने पूरी रात अपने रण्डी जस्मीन दीदी को चोदा उसकी गान्ड मारी ये आपको अगले कहानी में बताऊंगा जबतक सब इंतजार करो आपका अपना अरबाज कहानी कैसी लगी comment करके जरूर बताना
Antarvasna

अभी तक अपना कौमार्य बचा Antarvasna कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।

…. इसी कहानी से

मैं बी.ए. में पढ़ रही हूँ। पिछले सावन तक तो मेरा नाम मेरा नाम मीनल ही था। लेकिन पिछले सावन की उस बारिश भरी रात में नहाने के बाद तो मैं मीनल से मैना ही बन गई हूँ। आप भी सोच रहे होंगे कि अजीब झल्ली लड़की है ! भला यह क्या बात हुई- कोई सावन की बारिश नहा कर कोई लड़की भला मीनल से मैना कैसे बन सकती है ?

ओह.. मैं बताना ही भूल गई।

दरअसल बात यह है कि मेरी एक बहुत ही प्यारी सहेली है शमा खान। एक नंबर की चुद्दक्कड़ है। अपने भाईजान के साथ चुदाई के किस्से इस तरह रस ले ले कर सुनाती है कि मेरी मुनिया भी पीहू पीहू बोलने लग जाती है। मेरे साथ बी.ए. कर रही है। अगले महीने उसकी शादी भी होने वाली है अपने चचा के लड़के के साथ। पर उन्हें शादी की कोई जल्दी नहीं है क्योंकि वो तो शादी से पहले ही रोज अपनी सुहागरात मनाते हैं।

शमा बताती है कि उनके भाईजान (गुल खान) उनके चचा का लडके हैं। उनका परिवार भी उनके साथ वाली कोठी में ही रहता है। उनका कपड़े का बहुत बड़ा कारोबार है। शमा अपने माँ-बाप की इकलोती औलाद है और गुल भी अपने माँ बाप का इकलौता लड़का और 5 बहनों का एक ही भाई है। दोनों की सगाई हो चुकी है और अगले महीने शादी है।

क्लास रूम में हम दोनों साथ साथ ही बैठती हैं। जब भी कोई खाली पीरियड होता है तो हम दोनों कॉलेज के लॉन या कैंटीन में चली जाती हैं और फिर शमा अपनी चुदाई के किस्से रस ले ले कर सुनाती है कि कल रात भाईजान ने किस तरीके या किस आसन में उसकी धमाकेदार चुदाई की थी।

एक बार मैंने उससे पूछा था कि तुम्हें शादी से पहले यह सब करने में डर नहीं लगता? तो उसने जो जवाब दिया था- आप भी सुन लें “चुदाई में डर कैसा ? खूब मस्त होकर चुदवाती हूँ मैं तो और रही हमल (गर्भ) ठहरने की बात तो आज कल बाज़ार में बहुत सी पिल्स (गोलियाँ) मिलती हैं जिनसे उसका भी कोई खतरा नहीं है।”

“लेकिन वो .. पहली चुदाई तो सुहागरात में की जाती है ना… तुमने तो शादी के पहले ही सब कुछ करवा लिया अब सुहागरात में क्या करोगी ?” मैंने पूछा तो वो हंसते हुए बोली

“अरे मेरी भोली बन्नो मेरी चूत की सहेली फिर किस काम आएगी ?”

मैंने हैरानी से उसे देखते हुए पूछा “वो क्या होती है ?”

“तुम तो एक नंबर की बहनजी हो अरे भाई मैं गांड बेगम की बात कर रही हूँ !” उसने आँख मारते हुए कहा तो मेरी हंसी निकल गई।

“छी … छी… उसमें भी भला कोई करता है ?” मैंने कहा।

“अरे मेरी जान इसमें नाक चढ़ाने वाली क्या बात है, चुदाई में कुछ भी गन्दा या बुरा नहीं होता ! इस जवानी का पूरा मजा लेना चाहिए। मेरे भाईजान तो कहते हैं असली मजा तो गांड बाजी में ही आता है ये तो जन्नत का दूसरा दरवाजा है !” वो जोर जोर से हंसने लगी।

“तो क्या उन्होंने तुम्हारी ? … मेरा मतलब …” मैं गड़बड़ा सी गई।

“नहीं उसके लिए मैंने ही मना कर दिया है। गांड तो मैं उनसे जरूर मरवाउंगी पर सुहागरात को !” शमा ने कहा “अच्छा चल मेरी छोड़, तू बता तूने कभी कुछ किया है या नहीं ?”

“मैंने ?? अरे ना बाबा ना … मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया ”

“तुम भी निरी बहनजी हो। शादी से पहले की गई चुदाई में अलग ही मज़ा होता है। लड़की की खूबसूरती चुदाई के बाद और भी बढ़ जाती है। ये देख मेरे मम्मे और चूतड़ (नितम्ब) कितने गोल मटोल हो गए हैं एक साल की चुदाई में ही। तू किसी को क्यों नहीं पटाती ? क्यों अपनी जालिम जवानी को बर्बाद कर रही है। इन मम्मों का दूध किसी प्यासे को पिला दिया कर 32 से 36 हो जायेंगे।”

कितना गन्दा बोलती है ये शमा। मुझे तो इन अंगों का नाम लेते हुए भी शर्म आती है फिर चुदाई की बात तो दूर की है। पर जब भी शमा अपनी चुदाई की बात करती है तो मेरी मुनिया भी चुलबुला कर आंसू बहाने लग जाती है और फिर मुझे टॉयलेट में जा कर उसकी पिटाई करनी पड़ती है।

मैंने अभी तक अपना कौमार्य बचा कर रखा था। मैं तो चाहती थी कि अपना अनछुआ बदन अपने पति को ही सुहागरात में समर्पित करुँ पर इस शमा की बातें सुन सुन कर और इस पिक्की में अंगुली कर करके मैं भी थक चुकी थी। मेरी रातों की नींद इस शमा की बच्ची ने हराम कर दी थी। पर अब मैंने भी सोच लिया था कि एक बार चुदाई का मज़ा ले ही लिया जाए।

पर सबसे बड़ा प्रश्न तो यह था कि किसके साथ ? मोहल्ले में तो कई शोहदे अपना लंड हाथों में लिए फिरते है पर मेरे ख़्वाबों का शहजादा तो उनमें से कोई भी नहीं है। हाँ कॉलेज में जरूर एक दो लडके मेरी पसंद के हैं पर वो भी किसी न किसी लड़की के चक्कर में पड़े रहते हैं।

और फिर जैसे भगवान् ने मेरी सुन ली। प्रेम भैया 3-4 दिन पहले ही तो हमारे यहाँ आये है अपनी ट्रेनिंग के सिलसिले में। पहले तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया था। ओह… मैं भी निरी उल्लू ही हूँ इतना सुन्दर सजीला जवान मेरे पास है और मैं अपनी चूत हाथों में लिए बेकार घूम रही हूँ। प्रेम भैया मेरी जोधपुर वाली मौसी के लड़के है। बचपन में तो हम साथ साथ ही खेलते और बारिश में नहाते थे पर पिछले 4-5 साल में मैं उनसे नहीं मिल पाई थी। परसों जब वो आये थे तो उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर लिया था। तब पहली बार मुझे लगा था कि मैं अपने भैया के नहीं किसी मर्द के सीने से लगी हूँ। मेरे उरोज उनके सीने से लग कर दब से गए थे। पर वो तो मुझे अभी भी छोटी बच्ची ही समझ रहे होंगे। मैंने सोचा क्यों ना प्रेम भैया से …..

ओह … पर यह कैसे संभव हो सकता है वो मेरे सगे तो नहीं पर मौसेरे भाई तो हैं और भाई के साथ… ओह ये नहीं हो सकता ? वो तो अभी भी मुझे बच्ची ही समझते होंगे। उन्हें क्या पता कि मैं अब बच्ची नहीं क़यामत बन चुकी हूँ। मेरे नितम्ब देख कर तो अच्छे अच्छों के पपलू खड़े हो जाते हैं और उनके सीने पर सांप लोटने लग जाते है रास्ते में चलते हुए जब कोई फिकरे कसता है या सीटी बजाता है तो मुझे बहुत गुस्सा आता है पर फिर मैं रोमांच से भी भर जाती हूँ। काश मैं भी शमा की तरह होती तो मैं भी प्रेम के साथ आसानी से सब कुछ करवा लेती और शादी के बारे में भी सोच सकती थी पर हमारे धर्म और समाज में ऐसा कैसे हो सकता है। पता नहीं इन धर्म और समाज के ठेकेदारों ने औरत जाति के साथ हमेशा ही अत्त्याचार क्यों किया है। औरत और मर्द का रिश्ता तो कुदरत ने खुद बनाया है। शमा बताती है कि उनकी एक रिश्तेदार है उसने तो अपने सगे भाई से ही चुदवा लिया है।

और फिर मैंने भी सब कुछ सोच लिया ….

बचपन में मुझे बारिश में नहाना बहुत अच्छा लगता था। पर मेरी मम्मी तो मुझे बारिश में भीगने ही नहीं देती थी। बात दरअसल यह थी कि जब भी मैं बारिश में नहाती तो मुझे जोर की ठण्ड लग जाती और मैं बीमार पड़ जाती तो मम्मी बहुत ही गुस्सा होती। अब भी जब बारिश होती है तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाती भले ही मुझे बाद में तकलीफ ही क्यों ना हो। और फिर सावन की बरसात तो मैं मिस कर ही नहीं सकती।

हमारा घर दो मंजिला है। ऊपर एक कमरा बना है और उसके साथ ही बाथरूम भी है। अगर कोई मेहमान आ जाए तो उसमें ही ठहर जाता है। प्रेम भैया को भी वही कमरा दिया है। वो इस कमरे में बिना किसी विघ्न बाधा के अपनी पढ़ाई लिखाई कर सकते हैं। उस समय रात के कोई 10.30 बजे होंगे। हम सभी ने खाना खा लिया था। मम्मी पापा सो गए थे। मैं प्रेम भैया के पास बैठी गप्प लगा रही थी। बाहर बारिश हो रही थी। मेरा जी बारिश में नहाने को मचलने लगा। मैंने प्रेम से कहा तो वो बोले “तुम्हें ठण्ड लग जायेगी और फिर मौसीजी बहुत गुस्सा होंगी !”

“ओह कुछ नहीं होता ! प्लीज भैया, आप भी आ जाओ ना ! बहुत मजा आएगा साथ नहाने में !”

और फिर हम दोनों ही बाहर आ गए। मैंने हलके पिस्ता रंग का टॉप और पतला सा कॉटन का पाजामा पहन रखा था। आप तो जानती ही हैं कि मैं रात को सोते समय ब्रा और पेंटी नहीं डालती। भैया ने भी कुरता पाजामा पहन रखा था। मैं कोई 2-3 साल बाद ही बारिश में नहा रही थी। नहाने में पहले तो मुझे बड़ा मजा आया पर बाद में ठण्ड के कारण मेरे दांत बजने लगे और मुझे छींके आनी शुरू हो गई। मेरे सारे कपड़े भीग चुके थे और गीले कपड़ों में मेरा सांचे में ढला बदन साफ़ नजर आ रहा था। मेरे गोल गोल उरोज भीगे शर्ट से साफ़ नजर आ रहे थे। भैया की घूरती आँखें मुझ से छुपी नहीं थी। भगवान् ने औरत जात को ये गुण तो दिया ही है कि वो आदमियों की नजरों को एक मिनट में ही पहचान लेती है, फिर भला मैं उनकी आँखों की चमक कैसी नहीं पहचानती ?

मुझे अपनी और देखते हुए पाकर भैया बोले, “मैंने तुम्हे मना किया था ना ! अब मौसीजी कितना नाराज होंगी ?”

“ओह भैया प्लीज मम्मी को मत बता … न … ओ … छीईईइ …..” मुझे जोर की छींक आ गई और उसके साथ ही मेरे उरोज टेनिस की गेंद की तरह उछले।

भैया मेरा बाजू पकड़ कर नीचे ले जाने लगे मैंने कहा, “नहीं, नीचे मम्मी देख लेंगी आपके कमरे में ही चलते हैं !” और हम लोग वापस कमरे के अन्दर आ गए। मेरे दांत बजते जा रहे थे भैया ने तौलिये से मेरा शरीर पोंछना शुरू कर दिया शरीर पोंछते हुए उनका हाथ मेरे उरोजों और नितम्बों से छू गया। मेरे शरीर में जैसे कोई बिजली सी दौड़ी। मैं तो रोमांच से ही भर उठी मेरा अंग अंग गीले कपड़ों में साफ़ झलक रहा था।

“ओह इन गीले कपड़ों को उतारना होगा… पर….. वो… तुम्हारे लिए सूखे कपड़े ?”

“कोई बात नहीं आपकी कोई लुंगी और शर्ट तो होंगी ?”

“आन … हाँ ” उन्होंने अपनी धुली हुई लुंगी और शर्ट मुझे दे दी। हम दोनों ने बाथरूम में जाकर कपड़े बदल लिए। ढीली शर्ट में मेरे उरोजों की घुन्डियाँ साफ़ दिख रही थी। गोल गोल संतरे जैसे मेरे उरोज तो इस समय तन कर खड़े क़यामत बने थे। भैया की नज़रें तो उन पर से हट ही नहीं रही थी। इतने में जोर से बिजली कड़की तो डर के मारे मैं भैया की ओर खिसक आई। मेरे दांत अब भी बज रहे थे।

भैया बोले,“तुमने तो जानबूझकर मुसीबत मोल ली है। लाओ, तुम्हारे हाथ और पैर के तलवे मल देता हूँ इससे तुम्हारी ठण्ड कम हो जायेगी !” और उन्होंने मेरे नाजुक हाथ अपने हाथों में ले लिए। मेरे लिए किसी मर्द का ये पहला स्पर्श था। मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ने लगी। भैया मेरे हाथ मलते जा रहे थे। मैंने कनखियों से देखा था उनका ‘वो’ कुतुबमीनार बन गया था। हे भगवान् ये तो कम से कम 7-8 इंच का तो जरूर होगा। उनकी साँसे गरम होती जा रही थी। मेरा भी यही हाल था। मेरे होंठ काँप रहे थे पर इस बार ठण्ड के कारण नहीं बल्कि रोमांच के कारण। पर मैंने ठण्ड का बहाना बनाए रखा।

फिर भैया बोले “मीनू लाओ तुम्हारे पैर के तलवे भी मल देता हूँ ”

मैं भी तो यही चाहती थी। मैं बेड से टेक लगाए उकडू बैठी थी। मैंने एक पैर थोडा सा आगे कर दिया। उन्होंने मेरे पैर के तलवों को मलना शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने मेरा पैर थोड़ा सा ऊपर किया मेरी ढीली लुंगी नीचे हो गई। मैंने जान बूझ कर इसकी और कोई ध्यान नहीं दिया। मैं जानती थी मेरी मुनिया अब उनको साफ़ दिख रही होगी। मैंने अधखुली आँखों से देखा भैया की कनपटी लाल हो गई है। थोडा सा पसीना भी आने लगा है। उनके होंठ भी कांपने से लगे हैं। भैया का बुरा हाल था। वो तो टकटकी लगाए मेरी जाँघों की और ही देखे जा रहे था। केले के पेड़ की तरह मेरी चिकनी जांघें और छोटे छोटे रेशमी बालों से लकदक मेरी पिक्की देख कर वो तो जैसे निहाल ही हो गए थे। और पिक्की की मोटी मोटी गुलाबी फांकें को देखकर तो उनकी आँखें जैसे फटी की फटी ही रह गई थी। उनके हाथ कांप रहे थे। मैं भी आँखे बंद किये रोमांच के सागर में गोते लगा रही थी। मैंने छेड़ने के अंदाज में उनसे कहा “भैया आपको भी ठण्ड लग रही है क्या ?”

“आन…. हाँ शायद ऐसा ही है !”

“पर ठण्ड में तो दांत बजते है, आपको तो पसीना आ रहा है ?”

“वो.. वो … ओह कुछ नहीं ” उनकी आँखें अब भी मेरी पिक्की की ओर ही थी। मैंने झट से अपना पैर खींचते हुए लुंगी से ढक लिया।

“ओह सॉरी ….” भैया की हालत तो अब देखने लायक थी।

“भैया ये चीटिंग है ?” मैंने झूटमूठ का गुस्सा किया।

“ओह सॉरी बाबा ! मैंने कुछ नहीं देखा !”

“तो फिर आप इतना घबरा क्यों रहे हैं ?” मेरी हंसी निकल गई।

“ओह.. आई एम… सॉरी !”

“अच्छा भैया एक बात पूछूं ?”

“क… क्या …?”

“सच बताना आपकी कोई गर्ल फ्रेंड है ?”

“अरे… वो … वो… नहीं तो … पर तुम ये क्यों पूछ रही हो ?”

“प्लीज बताओ ना भैया ?”

“अरे मैंने बताया ना कि मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है। मुझे तो पढ़ाई से ही फुर्सत नहीं मिलती। पर एक बात है ?”

वो क्या ?”

“तुम्हारी वो जो फ्रेंड है ना ! अरे वो ही जो सुबह आई थी ?”

“ओह… शमा ?”

“हाँ….”

“क्यों क्या बात है ?”

“यार … वो बहुत खूबसूरत है ?”

“ओह … तो मेरे भैया उस पर मर मिटे हैं ?” मैं हँसने लगी।

“नहीं ऐसी बात नहीं है। वैसे वो है लाजवाब !” भैया की आँखों में जैसे चमक सी आ गई थी।

“अरे उसका वीजा लग चुका है वो हाथ आने वाली नहीं है ?”

“ओह…”

“पर ऐसी क्या बात है उसमें ?”

“यार मीनू उसके बूब्स और नितम्ब तो कमाल के हैं” भैया बोले।

उनकी आंखों में अब लाल डोरे तैरने लगे थे। ये मर्द भी सभी एक जात के होते हैं. औरत की खूबसूरती तो उन्हें केवल नितम्बों और उरोजों में ही नजर आती है. मैंने अपने मन में कहा ‘एक बार मेरे देख लोगे तो सब कुछ भूल जाओगे” पर मैंने कहा “अच्छा मेरी फिगर कैसी है ?”

“अरे तुम तो हुस्न की मल्लिका हो अगर कोई फ़रिश्ता भी तुम्हारे भीगे बदन को देख ले तो जन्नत का रास्ता भूल जाए !”

जी में तो आया कह दूं ‘फिर तुम क्यों नहीं रास्ता भूल रहे हो’ पर मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए कहा “क्या वाकई मैं इतनी खूबसूरत हूँ ?”

“सच्ची मीनू कभी कभी तो मैं ये सोचता हूँ अगर तुम मेरी मौसेरी बहन नहीं होती तो मैं किसी भी कीमत पर तुमसे शादी कर के छोड़ता …” उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा “ओह … पर ऐसा कहाँ संभव है ?”

“क्यों ?” मैंने अनजान बनाते हुए कहा। मैं उनकी उखड़ी हुई साँसे अच्छी तरह महसूस कर रही थी। उनका पाजामा तो तम्बू ही बना था।

“ओह … मीनू … सच कहता हूँ मैं इन तीन दिनों से तुम्हारे बारे में सोच सोच कर पागल सा हो गया हूँ। लगता है मैं सचमुच ही तुम्हें पर … प्रेम … ओह … चाहने लगा हूँ। पर ये सामाजिक बंधन भी हम जैसो की जान ही लेने के लिए बने है !” भैया की आवाज कांप रही थी।

शेष अगले भाग में !

इस कहानी का मूल्यांकन दूसरे भाग में करें ! Antarvasna

Indian Sex Stories

दोस्तो, मैं मोहन एक Indian Sex Stories बार फिर आपकी सेवा में हाज़िर हूँ। मुझे बहुत खुशी हुई कि आप सबने मेरी पहली कहानी किराएदार और उसकी बेटी की काफी सराहना की और इसी के कारण मैं आप के सामने एक बार हाज़िर हूँ एक नई कहानी लेकर। आशा करता हूँ कि आप सब इसे काफी पसन्द करेंगे।

मेरे बड़े भाई की शादी को 3 साल हो गए हैं। मेरी भाभी उत्तर प्रदेश की हैं, और काफ़ी सुन्दर हैं। उनकी फिगर किसी हिरोइन से कम नहीं है और जब से वो मेरे घर में आई, तभी से मेरा लण्ड उनकी चूत में घुसने के लिए काफ़ी परेशान रहने लगा। मैं कभी-कभी उनकी चूत की कल्पना करके मुट्ठ भी मारने लगा। यह सिलसिला काफ़ी दिनों तक चला। पर एक दिन ऐसा आया जिसके कारण मेरी दिली तमन्ना पूरी हो गई।

हुआ यूँ कि एक बार भाभी अपने मायके गई हुईं थीं और काफ़ी दिनों तक वहाँ रहीं। भैया की नौकरी दूसरे जिले में होने के कारण वो भी बाहर ही थे और भाभी को वापस लाने के लिए पापा ने मुझे ही कहा। मैं भाभी को लेने के लिए उनके मायके गया। वहाँ मेरा काफ़ी स्वागत-सत्कार हुआ।

जब मैं उनके घर पहुँचा तो भाभी नहा रहीं थीं। बाथरूम घर के अन्दर ही था। बाथरूम के ठीक बाहर मैं कुर्सी पर बैठा था। कुछ ही देर में बाथरूम का द्वार खुला। मैंने उन्हें देखा तो मेरी नज़रें उन्हें देखती ही रह गईं। क्योंकि वो उस वक्त केवल पेटीकोट में थीं। उन्हें पता नहीं था कि बाहर कोई बैठा है। उन्होंने मुझे देखते ही दरवाजा बन्द कर लिया, फिर कुछ देर में पूरे कपड़े पहन कर बाहर निकलीं।

मुस्कुरा कर मुझसे पूछा- अरे देवरजी, आप कब आए?

‘अभी आधा घण्टा पहले’- मैंने उत्तर दिया।

फिर उन्होंने मुझे खाना खिलाया और आराम करने के लिए मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया। मैं छत पर सोने के लिए चला गया। बिस्तर पर पड़ते ही मुझे वह क्षण याद आया जब भाभी नहाकर निकलीं थीं। उसी क्षण को याद करके मैंने मुट्ठ मारी और कुछ ही देर में सो गया।

शाम को करीब चार बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी मेरे सामने खड़ी हैं और मुस्कुरा कर कहती हैं- अरे देवरजी, उठो शाम हो गई है।’ मैं तुरंत उठकर खड़ा हो गया, और तैयार होने लगा। इतने में भाभी ने कहा- अरे देवरजी, यह चादर में अकड़न कैसी है?’ मैं घबरा गया, पर वह मुस्कुरा कर नीचे चली गईं।

मैं समझ गया कि भाभी को सब पता चल गया है। कुछ देर बाद मैं भी नीचे चला आया। भाभी ने नाश्ता दिया। कुछ देर बाद भाभी ने कहा- चलिए मैं आपको गाँव का मेला दिखा लाती हूँ।’

मैं तैयार हो गया। भाभी और मैं मेले की ओर चल पड़े। रास्ते में भाभी के खेत पड़ते थे जो कि काफ़ी दूर तक फैले हुए थे। वहीं पर एक झोपड़ी भी थी। मैंने पूछा कि ये झोपड़ी किसकी है, तो भाभी बोलीं कि मेरे पिताजी की। वो कभी-कभी यहाँ रात में सोते हैं। हम झोपड़ी की ओर बढ़ गए क्योंकि हम कुछ थक गए थे।

वहाँ पड़ी चारपाई पर मैं लेट गया और भाभी मेरे पास बैठ गईं। कुछ ही देर के बाद मुझे ऐसा लगा कि वो रो रही हैं। मैंने उठकर देखा तो उनकी आँखों से आँसू गिर रहे थे। मैंने चौंक कर उनसे पूछा तो उन्होंने कहा- क्या बताऊँ देवरजी, जबसे मेरी शादी आपके भैया से हुई है, ऐसा लगता है कि जैसे मेरी क़िस्मत ही फूट गई है।’

‘कैसे?’- मैंने कारण जानना चाहा।

‘एक औरत अपने पति से क्या चाहती है… प्यार। लेकिन मेरी किस्मत में तो प्यार है ही नहीं। आपके भैया हमेशा बाहर ही रहते हैं जिस कारण से मेरे प्यार करने की चाह पूरी नहीं हो पाती है। अब आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ?’

‘ये आप कैसी बातें कर रहीं हैं?’
‘क्यों, अपने भाई की बुराई सुनी नहीं जाती। अगर ऐसा है तो तुम ही मेरी इच्छा पूरी क्यों नहीं कर देते!’
‘ये आप क्या कह रहीं हैं? कैसी इच्छा पूरी करूँ मैं? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।’

भाभी ने तब मुस्कुराते हुए कहा- अच्छा, अभी तो अंजान बन रहे हो, पर चादर में जो अकड़न थी, वो मुझे पता है कि वह कैसे हुआ था। अरे देवरजी अपने लंड का पानी बेकार में क्यों बहा रहे हो? उसे उसकी सही जगह में बहाओ।’

‘अभी तो सही जगह मिली ही नहीं, तो मैं क्या करूँ?’- मैंने तपाक से कहा।

‘चलो, अब मैं आपको सही जगह बता देती हूँ। आप अपना पानी इस चूत में बहाओ’ यह कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। उसमें से पहले से ही गरम पानी निकल रहा था, जिससे मेरा हाथ गीला हो गया। भाभी ने अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था।

अब भाभी ने मेरे पैंट की ज़िप खोल दी और मेरे तन्नाए हुए लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया जो कि साँप की तरह फुँफकार रहा था। उसे उन्होंने तुरन्त अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं। मुझे मजा आने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड ने अपना पानी गिराना चाहा तो मैंने भाभी को कहा कि अपने मुँह से मेरा लंड निकाल दे। लेकिन उन्होंने चूसने की गति और बढ़ा दी, जिससे मेरा पानी उनके मुँह में ही गिर गया, जिसे भाभी ने बड़े चाव से गटक लिया।

उन्होंने अब भी मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकाला, और चूसती रहीं। कुछ देर में मेरा लंड वापस तैयार हो गया। फिर भाभी ने मुझे खड़ा किया और ख़ुद चारपाई पर चित्त लेट गईं और कहा- अब चोद दो देवरजी। अब मैं पूरी तरह से तैयार हूँ। मेरी चूत की खुजली मिटा दो।’

मैंने अपने लंड को भाभी की चूत की छेद पर रखकर एक क़रारा झटका मारा जिससे मेरा आधा लंड भाभी की चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया। भाभी चिल्लाई- अअअअआआआआआ… मरी… मेरे… रा…जाआआआ…

मैंने पूछा- ‘क्या हुआ भाभी?’
तो उन्होंने कहा- आज पहली बार, इतना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा है, दर्द हो रहा है।’
‘अब क्या करूँ, बाहर निकाल लूँ?’
‘नहीं… मेरी चूचियों को चूसो।’

मैंने ऐसा ही किया। कुछ ही देर में भाभी ने अपनी गांड उछालनी शुरू कर दी। मेरी समझ में आ गया कि अब भाभी तैयार हैं। मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी के साथ भाभी की चुदाई करने लगा। वह भी नीचे से अपनी गांड उछाल-उछाल कर मेरा साथ देने लगी। मुझे काफ़ी मजा आ रहा था और भाभी भी बड़े मज़े से अपनी चुदाई करवा रहीं थीं।

कुछ देर के बाद भाभी ने अपनी गांड उछालने की रफ़्तार को और बढ़ाया और कहा- ‘अब मैं झड़ने वाली हूँ। और तेज़ देवरजी, और तेज़। आज तो मैं निहाल हो जाना चाहती हूँ… चोदो मेरे मोहना… चोदो… फाड़ दो मेरी चूत को… भुर्त्ता बना दो इस मादरचोद का।’

मैंने अपनी गति और भी बढ़ा दी और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए। मेरे लंड को भाभी ने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं तो मैंने पूछा- अब क्यों चूस हो रही हो मेरा लंड?’

‘अभी चुदाई पूरी कहाँ हुई है, अभी तो मेरी गांड भी प्यासी है, उसे कौन मारेगा?’- भाभी ने समझाया।
‘ठीक है, चलो, अब कुतिया बन जाओ, मैं तुम्हारी गांड मारने के लिए तैयार हूँ।’

वह तुरंत कुतिया बन गई और मैं उसके पीछे आ गया और उसकी गांड में पहले थूक लगाई, फिर गांड को फैलाकर अपना लंड उसकी गांड की छेद पर रखकर एक धक्का मारा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गांड में घुस गया। वह चीख पड़ी, पर मैंने कोई रहम नहीं किया और एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया। मेरा लंड पूरा का पूरा जड़ तक उसकी गांड में घुस गया। फिर मैंने तेज़ी के साथ उसकी गांड मारनी शुरु कर दी।

कुछ देर के बाद उसने भी अपनी गांड को आगे-पीछे करना शुरु कर दिया। मैंने करीब 10 मिनट तक उसकी गांड मारी और अपना पानी उसकी गांड के अन्दर ही गिरा दिया, फिर हम एक-दूसरे से लिपटकर सो गए। करीब एक घण्टे के बाद हमारी नींद खुली तो हम तैयार होकर घर की ओर वापस चले आए।

उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता मैं भाभी की ख़ूब चुदाई करता।

आपको यह कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल कीजिए। Indian Sex Stories

TOTTAA’s Disclaimer & User Responsibility Statement

The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first. 

We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.

 

👆 सेक्सी कहानियां 👆