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पहले दिन रात को ममता (दीदी की ननद) को तीन बार Antarvasna चोद कर मैं वहीं सोफे पर सो गया था ! जब सुबह उठा तो देखा दीदी के सास ससुर और जीजू काम पर चले गए थे ! और ममता भी अभी तक उठी नहीं थी क्योंकि मैंने रात को उसको कॉलेज जाने के लिए मना कर दिया था। इसलिए वो अभी तक उठी नहीं थी।
सब के जाने के बाद दीदी मेरे पास आई, मेरी लुंगी खोल कर मेरे लंड से खेलने लगी और मुँह में लेकर चूसने लगी और कहा- कि कल तो जल्दबाजी में कुछ ज्यादा नहीं हो सका पर आज मैं तुमको नहीं छोड़ूंगी ! आज सारा दिन मैं तुमसे चुदवाउंगी ! तुम आज जी भर कर मेरी इतने दिनों की चुदाई की कसर पूरी कर दो !
मैंने कहा- वो तो ठीक है पर तेरे साथ ममता को भी चोदना पड़ेगा !
उसने कहा- क्या मतलब !
मैंने कहा- कल रात को ममता को लंड भी चुसा चुका हूँ और ३ बार चोद भी चुका हूँ ! बड़ी चुद्दकड़ है तेरी ननद ! बहुत मस्त भी है ! मजे ले ले कर नए नए तरह से चुदवाती है ! उसका मम्मे भी बहुत मस्त हैं !
दीदी ने कहा- तू तो बड़ा शैतान है !
मैंने कहा- दीदी क्या करूँ ! तुम लोगों ने जो आदत डाल दी है ! अब तो एक दिन भी चुदाई के बैगर नहीं रह सकता !
तब दीदी ने कहा- अब तो कोई समस्या नहीं है, चल कपड़े खोल जल्दी से और तेरा लंड दे मुझे !
मैंने कहा- दीदी तुमने कपड़े ही कहाँ छोड़े हैं जो उतारूँ !
उसने कहा- बनियान भी उतार दो ! आज शाम तक तुमको कपड़े नहीं मिलेंगें !
मैंने कहा- दीदी, पहले बाथरूम जाकर पहले फ्रेश तो हो लेने दो !
तो उसने कहा- एक बार लंड चूसने दो और चोद दो ! फिर जाना ! मैं कल शाम से तेरे लंड के लिए मरी जा रही हूँ !
खैर एक बार कुछ देर दीदी को लौड़ा चुसवा कर उसको चोदा फिर फ्रेश होने को चला गया और दीदी को कहता गया कि कपड़े मत पहनना !
दीदी हंस कर रह गई ! फिर मैं बाथरूम से नंगा ही बाहर आया और सोफे पर बैठ गया !
दीदी नाश्ता लेने चली गई !
इतने में ममता नंगी ही बाहर आई और मुझसे शिकायत करने लगी कि मैंने तो सोचा था कि तुम आओगे और अपने लंड का प्रसाद देकर मुझे उठाओगे !
मैंने कहा- मैं अभी अभी उठा हूँ ! अगर तुम और कुछ देर नहीं आती तो मैं ही अन्दर आ जाता तुझे उठाने को !
वह तुंरत मेरी गोद में आ बैठी और मेरे मुँह से अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी हम दोनों एक दूसरे को बहुत बुरी तरह चूम रहे थे साथ ही वो मेरा लंड सहला रही थी। मैं उसकी चूत में ऊँगली डाले हुए मस्ती कर रहा था !
उसने कहा- संजय मुझे तेरी रबड़ी खानी है ! कल रात को खाकर बहुत मजा आया था !
मैंने कहा- कौन मना करता है जी भर कर खाओ !
इतने में दीदी नाश्ता लेकर आ गई और हम लोगों को देख कर बोली- तो यहाँ यह सब चल रहा है !
ममता बोली- भाभी ! संजय ने मुझे रात को बहुत मस्ती से चोदा है ! सच में बहुत दिनों बाद इतना मजा आया है ! नाश्ता-वाश्ता छोड़ो, जल्दी से आ जाओ, आज संजय का ही नाश्ता करते हैं !
चूकिं दीदी भी नंगी ही थी, वह तुरंत हमारे पास आ गई और हम दोनों से लिपट गई ! फिर दीदी ने ममता से कहा कि तुमने या विनय (जीजू) ने कभी नहीं कहा कि विनय तुमको भी चोदता है ! अगर मुझे पहले पता होता हम दोनों एक ही साथ चुदवाते ! सच में तीन या ज्यादा मिलकर चुदाई करते हैं तो बहुत मजा आता है क्योंकि सबके पास कई ऑप्शन्स रहते हैं !
ममता ने कहा- पहले संजय से तो चुदवा लूँ ! इसका लंड बहुत मजेदार है !
और हम तीनों चुदाई में लग गए ! कभी दीदी मेरा लंड चूसती कभी ममता !
फिर ममता ने कहा- संजय अपना अमृतरस मुझे पिलाओ !
मैंने कहा- मेरी रानी, घबराती क्यों हो ! आज दिन भर तुम दोनों को चोद चोद कर थका दूंगा !
दोनों ने कहा- देखेंगे कि तुम कौन सा तीर मार लेते हो !
फिर सिलसिला चालू हो गया और मैंने दोनों को बुरी तरह चोदा ! ममता तो जल्दी ही पस्त हो गई पर दीदी अभी फिर से तैयार थी !
मैंने दीदी से कहा- यहाँ तो दिन के अलावा टाइम नहीं मिलता, क्यों ना मेरे साथ चलती !
दीदी ने कहा- मैं तो तैयार हूँ ! तुम मेरे सास-ससुर से बात कर लो !
तो ममता ने कहा- मैं भी तुम लोगों के साथ चलूंगी !
मैंने कहा- ठीक है ! जब मैं बात करूँगा तब तुम कह देना कि तेरे कोलेज में एक हफ्ते की छुट्टी है और तुम भाभी के बिना यहाँ अकेली बोर हो जाओगी!
इस तरह हम चुदाई में लगे रहे फिर कुछ देर बाद ममता बोली- संजय मेरी गांड मारो ना ! मुझे गांड मरवाने में बहुत मजा आता है !
तो दीदी ने कहा- अगर ऐसी बात है तो मैं भी मरवा कर देखूंगी !
तब ममता ने कहा- भाभी पहली बार गांड मरवाने में बहुत तकलीफ होती है !
दीदी ने कहा- कोई बात नहीं ! मैं सह लूंगी, मज़े के लिए मैं सब कुछ कर सकती हूँ !
इसके बाद ममता उठ कर गई और क्रीम की ट्यूब ले आई और मेरे लंड पर मलने लगी और मुझे कहा- तुम भाभी की गांड चूस कर गीला कर दो तो तकलीफ कुछ कम होगी! दीदी ने कहा- हट ! गांड को भी कोई चूसते हैं !
ममता ने कहा- चुसवा कर तो देखो भाभी ! बहुत मजा आयेगा !
इस प्रकार ममता ने दीदी की गांड में भी क्रीम लगा कर और ऊँगली डाल कर कुछ ढीला कर दिया ! फिर मुझसे कहा- आ जाओ संजय ! अब भाभी की गांड तैयार है !
मैं दीदी को घोड़ी बना के उसकी गांड के छेद में लंड डाल कर लंड का सुपारा अन्दर करने लगा, लेकिन छेद इतना टाइट था कि अन्दर जा ही नहीं रहा था !
तब ममता ने कहा- संजय जरा जोर लगाओ !
और दीदी के नीचे आकर उसके मुँह को अपने मुँह से दबा लिया ! इस बार मैंने जोर लगा कर अपने लौड़े का सुपारा दीदी के गांड में घुसा दिया ! सुपारा घुसते ही दीदी चिल्ला उठी- अरे मेरी माँ ! मैं तो मर गई संजय ! और जोर जोर से चिल्लाने लगी !
मैंने कहा- दीदी जो होना था, वो हो चुका, ज्यादा जोर से चिल्लाओगी तो आस पड़ोस वालों को शक ना हो जाये !
दीदी कहने लगी- नहीं संजय, निकाल लो ! बहुत तकलीफ हो रही है !
ममता ने कहा- मुझे भी हुई थी ! पर बाद में जब धीरे धीरे पूरा लौड़ा अन्दर बाहर होने लगा तो बहुत मजा आया !
तो दीदी ने कहा- जब इतना बर्दाश्त किया है तो थोड़ी तकलीफ और सही ! लेकिन धीरे धीरे प्यार से डालना !
मैंने कहा- ठीक है !
फिर मैंने धीरे धीरे पूरा लंड अन्दर कर दिया !
ममता ने कहा- भाभी मेरी चूत चूसो ! मैं तुम्हारी चूची दबाती हूँ !
इस तरह दीदी को बहलाकर ममता ने मुझे कहा- संजय ! अब अपना लंड आगे पीछे करो !
कुछ ही देर में दीदी ने कहा- संजय, अब मजा आ रहा है ! जरा जोर जोर से चोदो !
काफी देर चोदने के बाद ममता ने कहा- अब मेरी गांड भी मारो ! मैं अब बर्दाश्त नहीं कर सकती !
इस तरह कहकर वह भी दीदी के बराबर घोड़ी बन गई ! अब मैं कभी दीदी की, कभी ममता की गांड मारने लगा ! मुझे भी बहुत मजा आ रहा था ! मैंने कहा- अब मैं छुटने वाला हूँ !
तब दीदी और ममता ने कहा- हम दोनों तो अब तक दो दो बार छुट चुकी हैं !
दीदी और ममता ने कहा- अपना अमृतरस हम दोनों को पिलाओ !
मैंने अपना कामरस दोनों के मुँह में डाल दिया। दोनों ने थोड़ा थोड़ा अपने मुँह में लिया फिर दोनों ने आपस में मुँह से मुँह मिला कर काफी स्वाद ले ले कर सारा चाट लिया। फिर मेरे लौड़े पर जो कुछ बचा था वह चाट चाट कर साफ कर दिया !
सच ! मुझे इतना मजा कभी नहीं आया ! फिर हम लोगों ने कुछ देर आराम किया ! उसके बाद दोनों मेरे लौड़े पर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और मैं भी उनके चुचे दबाने लगा ! इस प्रकार हम लोगों ने एक फिर जम कर चुदाई का आनंद लिया और कपडे पहन कर शरीफों के जैसे बैठ गए !
कुछ ही देर में दीदी के सास ससुर आ गए, विनय कुछ देर बाद में आया ! मैंने उनसे दीदी को ले जाने की इजाजत मांगी तो पहले कुछ ना नुकुर करने लगे, लेकिन मेरे काफी जोर देने पर एक हफ्ते के लिए मान गए ! जैसा कि हम लोगों ने प्लान बनाया था- ममता भी कहने लगी जाने को ! जैसे तैसे उसको भी मंजूरी मिल गई !
तब मैंने कहा- कल सुबह निकाल चलते हैं ! दोपहर तक पहुँच जायेंगे !
इस प्रकार हम हम करीब आठ बज़े की बस से रवाना हो गए ! बस में मैं बीच में बैठा था एक तरफ दीदी और एक तरफ ममता ! थोड़ी देर बाद ममता ने एक चद्दर निकाल कर हम तीनों पर डाल ली क्योंकि ठण्ड का मौसम चालू हो गया था इसलिए किसी को शक भी नहीं हुआ ! मैं पीछे से हाथ डाल कर दोनों एक एक चूची दबाने लगा !
और वो दोनों मेरे लौड़े से खेलने लगी ! करीब चार घंटे का सफ़र था। जब बस चाय पानी के लिए रुकी तो हम सब ने नीचे उतर कर चाय पी ! दोनों मुस्करा रही थी ! मैं समझ गया कि दोनों गरम हो रही हैं, दोनों घर पहुँचते ही चुदवाना चाहेंगी ! अब दोनों ने अपनी जगह बदल ली क्योंकि दोनों अपनी एक एक चूची दबवा चुकी थी अब दोनों की दूसरी चूची दबाने लगा और उन्होंने मेरा लंड निकाल लिया ! इस बीच ममता को ना जाने क्या सूझा कि वो अपना सर चद्दर में डाल कर मेरी गोद में आ गई और मेरा लंड चूसने लगी। अब दीदी को कैसे बर्दाश्त होता ! कुछ देर बाद उसने ममता को हटाया तो उसने कहा- पहले तुम कोने में बैठी थी, तेरे पास मौका था तुमने उसका फ़ायदा नहीं उठाया !
बात सही थी जिस तरफ दीदी बैठी थी उस तरफ से कोई मौका नहीं था !
इस प्रकार हम मजा करते हुए घर पहुँच गए ! जब मैंने घर की घंटी बजाई तो सीमा दीदी दरवाजा खोलने आई। चूकिं किसी को कोई खबर नहीं थी तो सीमा दीदी और विजय भैया चौंक पड़े एवं स्तब्ध रह गए ! इसके बाद विमला दीदी पहले सीमा दीदी के गले लगी फिर दौड़ कर विजय भैया के गले लग गई और उनको जोर जोर से चूमने लगी ! विजय भैया भी कहाँ चुप खड़े रहने वाले थे, वो भी दीदी चूमने लगे और उनकी चूची दबाने लगे।
इधर हम भी कहाँ चुप बैठने वाले थे मैंने सीमा दीदी और ममता को अपने से चिपका लिया और दोनों के मम्मे दबाने लगा ! कुछ देर ऐसा ही चला फिर भैया ने कहा- तुम लोग सफ़र के थके हुए आए हो, कुछ देर आराम कर लो !
विमला दीदी ने कहा- नहीं भैया, हम लोग बिलकुल भी थके नहीं हैं, चलो एक राउंड चुदाई-चुसाई का हो जाये, फिर आराम कर लेंगे ! क्योंकि आज रात तो जागना ही है तुमसे चुदाये बहुत दिन हो गए हैं और तुमको नया स्वाद ममता का भी तो लेना है !
इस तरह हम चाय पीते हुए एक दूसरे से छेड़ छाड़ करते हुए एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे ! इस तरह हम सब नंगे हो गए। ममता भी कम नहीं जा रही थी। वो उठ कर भैया के के पास चली गई और उनका लौड़ा मुँह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी। अब विमला दीदी को कैसे बर्दाश्त होता, वो ममता से झगड़ा करने लगी !
मैंने कहा- दीदी झगड़ा क्यों करती हो? हालांकि तुझे भैया का लंड काफी दिनों बाद मिला है पर ममता को नए लंड का स्वाद चखने दो !
दीदी ने कहा- सिर्फ़ एक बार ही चूसने और चुदवाने दूंगी ! आज भैया केवल मेरा है ! कल से हम लोग सब मिलकर करेंगे, क्योंकि मुझे और ममता को एक हफ्ते ही रहना है !
इस पर सब राजी हो गए। फिर एक बार चुदाई के बाद हम सब कपड़े पहन कर आराम से बैठ गए ! इसके बाद पापा-मम्मी, ताउजी-ताईजी आ गए और विमला दीदी और ममता को देख कर काफी खुश हुए!
इस तरह हम पांचों ने पूरे हफ्ते बहुत मस्ती की जो कि मैं अगले भाग में बताऊंगा।
इंतजार करें और अपनी राय देना ना भूलें जिससे मैं इसको और रुचिकर शब्दों में पिरोकर आपके सामने प्रस्तुत कर सकूँ ! घटना बिल्कुल सच है ! Antarvasna
सभी अन्तर्वासना पढ़ने वाले Hindi Sex Stories पाठकों को पम्मी पंजाबन का खुली योनि के साथ कोटि-कोटि प्रणाम। मेरा नाम पम्मी है। मैं पंजाब की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र २२ वर्ष है। मेरी शादी आज से ठीक २ वर्ष पहले हुई थी। शादी के पहले मैंने अपने हर आशिक के साथ जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाए।
एक बार मम्मी ने मुझे रात को अपने घर की छत पर अपने पड़ोसी से चुदवाते हुए पकड़ लिया। यहाँ मैं जिक़्र करना चाहती हूँ कि पापा के पीछे से मैंने अपनी माँ को बहुत से गैर मर्दों के साथ हम-बिस्तर होते देखा और मेरी बड़ी बहन २ बार लड़कों के साथ भाग गई। दूसरे नम्बर वाली बहन अपने आशिक़ के साथ शादी करके चली गई। एक भाई है जिसे मम्मी ने हॉस्टल में रखा है। जिस बेटी ने बचपन से अपनी माँ को ग़ैर मर्दों की बाँहों में झूलते देखा हो वो लड़की बड़ी होकर वही सब करेगी ही।
जिस दिन मेरी माँ ने मुझे पकड़ा, वो कुछ कहती, उसके पहले मैंने कहा- तुम कौन सी दूध की धुली हो?
चलो दोस्तों, इसी वज़ह से मेरी शादी कर दी गई प्रदीप शर्मा के साथ। पहली रात वो दारू के नशे में धुत्त होकर आया। उसने मुझे कुछ ही पलों में नंगी करके अपना लौड़ा मेरे हाथ में दे दिया। लौड़ा देखकर मैं भी गरम हो गई। वो भी जल्दी मुझ पर सवार हो गया। उसका लंड सामान्य आकार का था।
मेरे जैसी लड़की जिसने शादी के पहले मन-मर्ज़ी के हट्ठे-कट्ठे लड़कों के साथ चुदाई के मज़े लिए हों, उसके लिए छोटा ही था। उसके नशे ने मेरी पोल नहीं खुलने दी। मैंने झूठ-मूठ दर्द का नाटक किया और अपनी चूत को साँस खींच कस सा लिया। सुहागरात के बाद भी वो बिस्तर में दारू पी कर आता।
मेरी ननद पेट से है, और सासू माँ उसका ख़्याल रखती है, और मुझे बाँझ कह कर ताने मारती। ननद की वज़ह से ननदोई जी भी रोज़ रात को अपने कार्यालय से इधर ही आते, क्योंकि वो अकेले डिनर कहाँ से करते। उनका हमारे यहाँ आना मुझे बहुत भाता। उनकी नज़र भी शुरु से ही मेरे प्रति ख़राब थी। इसी बीच मेरे पति का आबूधाबी का वीज़ा आ गया। पापा ने उसको वहाँ काम दिलवा दिया और मुझे जल्दी साथ ले जाने को कह वो दुबई चले गए।
दोस्तों चाहे वो लण्ड छोटा था, लेकिन लण्ड तो लण्ड ही है, इसके बिना औरत शान्त नहीं होती। मैं भी प्यासी रहने लगी, बिस्तर पर करवट बदलती रहती। तभी एक रोज़ सासू-माँ ननद का चेकअप करवाने के लिए ले गई। ननदोई जी को ऊपर वाला हिस्सा दिया हुआ था। जब तक उनके बच्चा नहीं होता, दीदी ऊपर नहीं जाती थी।
ननदोई जी को मैं सुबह में कॉफी दे कर आती थी। ननदोई जी का आकर्षण मेरी ओर बढ़ता जा रहा था, जिसकी वज़ह मैं भी थी और वो भी। दोनों एक-दूसरे की आँखों में कुछ-ना-कुछ तलाश से करते रहते। वासना की आग बराबर लगी ती। मैं भी अब ननदोई जी की हरक़तों को रोकती नहीं। जानबूझ कर गहरे गले की कमीज़ पहन उनको पानी वगैरह देती, और देते वक्त सामने झुक जाती। वो भी मुझे दिखाकर पैन्ट के ऊपर से ही लंड को खुजलाते। एक-दो बार रसोई में निकलते हुए मेरी चूचियाँ भी उन्होंने दबाईं।
एक शाम मम्मी ननद को चेक करवाने अस्पताल गईं थीं। इधर मैं अकेली थी। तभी ननदोई जी आए, मैं जानबूझ कर अपने बिस्तर पर लेट गई। अपनी कुर्ती को इस तरह सरका दिया, और ब्रा भी खोल दी जिससे मेरी क़हर ढाती प्यासी जवानी दिखने लगी। मेरे दोनों मम्मे साफ़ दिख रहे थे। तभी दरवाज़ा खुला और आवाज़ आई, “मम्मी !”
जब किसी ने उत्तर न दिया तो वो मेरे कमरे में पहुँचे और देखकर आवाज़ दी। मैंने सोने की ऐक्टिंग की।
वो कुण्डी चढ़ा कर मेरे बिस्तर पर बैठ गए, फिर आवाज़ दी। मैं चुप ही रही। वो आहिस्ते से मेरे पैरों की तरफ बैठ अपना हाथ मेरी जाँघों पर फेरने लगे। साथ में एक हाथ से मेरा मम्मा दबोच लिया और निप्पलों को चूसने लगे। सीईईईईई मैंने आँखें खोलीं और उनको अपने ऊपर गिरा लिया। अचानक से यह देख वो हैरान रह गए।
मैंने उनकी शर्ट उतार कर उनकी घने बालों से भरी छाती पर हाथ फेरते हुए काट लिया। वो मेरे होंठों को चूसने लगे। नीचे से ऊँगली से योनि के दाने को मसलने लगा। मैं पूरी तरह गरम पड़ी हुई थी। मैंने जल्दी से पैन्ट के ऊपर से लंड पकड़ लिया। उन्होंने तुरन्त पैंट और अण्डरवियार उतार दिया।
बाप-रे-बाप, ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा साँवले रंग का लंड पकड़ते ही मेरी योनी में खुज़ली होने लगी। मैंने झट से उसका लंड बाहर निकाल और मुँह में भर कर चपड़-चपड़ करते हुए चूसने लगी। वो सीधे लेटे हुए अपने पाँव के अँगूठे से मेरी योनि मसलने लगे। फिर उन्होंने 69 में आकार बना कर अपनी पूरी ज़ुबान अन्दर डाल दी, बोले, “भाभी जी बहुत तड़पाया है आपने, आज मसल दूँगा आपके कोमल बदन को।”
मैंने कहा, “आपने भी कम नहीं तड़पाया है, दूर से इस लंड को खुज़लाते थे, वो भी इतना सॉलिड लम्ड। कितने दिनों से मेरे अन्दर कोई लण्ड नहीं गया है।”
मेरी कसी हुई गीली योनि को देख कर वह स्वयं को रोक नहीं पाए और बीच में बैठ लंड मेरी योनि पर रखते हुए धक्का मारा। थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन मैंने भी दाँतों को भींचते हुए सब सह लिया, क्योंकि मैं एक खेली-खाई लड़की थी। पता था कि मज़ा तो मोटा लंड ही देता है। एक बार दर्द के बाद जो मज़े देगा, वह मैं अच्छी तरह से जानती थी। फिर उनका पूरा लंड योनि में डलवा लिया।
आह्ह्ह ह्हहह ! दोस्तों ! इतना मोटा लौड़ा मैंने शादी से पहले नहीं लिया था। वेबसाईटों पर देखा था, क्या मर्द था वो, असली देसी घी खा-खा कर उसका सारा शरीर ही शक्तिशाली हो गया था। उनकी जाँघों में क्या दम था कि ज़ोर-ज़ोर से मुझे रौंदने लगे। दनादन मेरे मुँह से अचानक गन्दी बातें निकलने लगीं।
मैं जब चुदती थी शादी से पहले, तब इन्हीं गन्दी बातों से मुझे और गर्मी मिलती। ओह… यस्स्स बहनचोद… मार हरामी… मार हरामी… तेरी औरत पेट से है ना। मुझे अपनी रंडी समझ… आह्ह्हहह उह्ह्ह्हहह उसने लौड़ा निकाल लिया। मुँह में डाल दिया। गीला लौड़ा मैंने चाट-चाट साफ़ कर दिया और लॉलीपॉप की तरह चूस के बिल्कुल एक नंगी कुतिया बन गई।
बहुत दिनों से लौड़े की भूखी थी, भूल गई कि हमारा रिश्ता क्या है। बस दोनों के सिर पर चुदाई का भूत सवार था। थोड़ा चूसने के बाद जब मेरी योनि में लौड़े की प्यास बढ़ने लगी तो ननदोई जी को समझ में आ गया कि अब घोड़ी की तरह चुदने के लिए तैयार है।
मैं उनके सामने घुटने टेक घोड़ी बन गई और वो पीछे से मेरी योनि को फटाफट चोदने लगे। आहा… ननदोई जी फाड़ डालो आज इसको… कसम से मैं आपकी दीवानी थी। और मेरी बातें सुन-सुन कर वो और तेज़ी से लौड़ा आगे-पीछे करने लगे। वाह क्या लौड़ा था। माँ क़सम मान गई.. कई लड़कों ने मुझे चोदा था लेकिन ननदोई जी के तेज़ धक्कों से मैं पिघल चुकी थी, और मैं झड़ गई।
लेकिन ननदोई जी असली मर्द थे, उन्होंने मुझे फिर से सीधा लिटा कर दोनों टांगों के बीच आसन लगा लिया। मेरी योनि उनके लौड़े की रगड़ सहन नहीं कर पाई, पर अभी उनका काम अभी कहाँ बना था,। उन्होंने मेरी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख कर मेरी गांड के छेद पर थूक लगा कर अपना लंड पेल दिया। ईईईईईई… कमीने यह क्या किया मररररर गई… उईईईई माँआआआआ.. पूरा लौड़ा अन्दर गया और फिर तेज़ धक्कों से अब मुझे मज़ा आने लगा, और मैं नीचे से गांड उठा-उठा कर चुदवाने लगी और वो भी मेरी इस हरक़त से झड़ने के क़रीब आए तो लंड योनि में डाल दिया और फिर उनके लौड़े ने मेरी कोख में पिचकारी मारी। उसके पानी से मैं दूसरी बार झड़ गई।
दोस्तों, उसके बाद मेरे और ननदोई जी मैं अवैध सम्बन्ध बन गए। वो जितने दिन रुके, जब भी माँ ननद के चेकअप या किसी काम से सासू-माँ अकेली जाती लेकिन ननद का पेट अधिक निकल आया, तो वह अपने कमरे में रहती, मैं और ननदोई मज़े लेते। और दोस्तों ठीक हफ़्ता पहले मेरे पैर भी भारी हो गए। सासु माँ खुश हैं। पति को फ़ोन पर उसने बताया, वह भी खुश है। लेकिन मैं और ननदोई जी जानते हैं कि बच्चा हम दोनों का है।
मेरी यह सच्ची कहानी कैसी लगी, बताना मत भूलना। मैं जल्दी अपनी चुदाई के अन्य किस्से आपके साथ बाँटूँगी, क्योंकि मुझे अपने बिस्तर की बातें लोगों तक ले जाने से अजीब सी गर्मी मिलती है।
नमस्कार Hindi Sex Stories
दोस्तो, मेरी यह Antarvasna पहली कहानी है जो मैं अन्तर्वासना डॉट कॉम पर भेज रही हूँ।
मैं मुम्बई में एक साधारण परिवार में पली-बड़ी हुई हूँ। मेरे पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं। मेरी आयु 23 की है। यह बात तब की हैं जब मैं 20 साल की थी। तब मैं बारहवीं में पढ़ती थी। हमारे स्कूल सब लड़के-लड़कियाँ एक दूसरे के साथ मजाक-मस्ती करते रहते थे। मेरा भी एक बॉय फ्रेंड था, उसका नाम अमित था। मैं उसे बहुत पसंद करती थी। वो भी मुझे पसंद करता था।
वो पढ़ाई में भी बहुत होशियार था। जब हमारी बारहवीं की परीक्षा ख़त्म हुई तब उसने और उसके दोस्तों ने घूमने के लिए गोआ जाने की योजना बनाई और हमें भी आने के लिए कहा। हमने भी हाँ कर दी। चार लड़के और सबकी गर्लफ्रेंड, हम गोवा के लिए निकल पड़े। गोवा के सस्ते होटल में हमने कमरे लिए और अपना सामान कमरे में रखा और थोड़ा आराम किया। फिर हम बीच पर घूमने गए।
वहाँ हमने अपने कपड़े उतारे और बिकनी पहन ली और घूमने लगे। बाद में हमने होटल आकर खाना खाया और हम अपने कमरे में आराम करने लगे।
तभी रीता नाम की मेरी सहेली ने कहा- मैं तो आज राज के साथ मजे करने वाली हूँ!
मैंने कहा- मजे? कैसे मजे करने वाली हो?
उसने कहा- मैं उसके साथ सेक्स करने वाली हूँ!
मैंने कहा- सेक्स? यह क्या होता है?
दरअसल मुझे पता था कि सेक्स क्या होता है, मैं उसके मुँह से सुनना चाहती थी।
रीता ने कहा- बुद्धू! सेक्स का मतलब चुदाई! जो लड़का-लड़की करते हैं!
मैंने कहा- तूने पहले किया है कभी ऐसा राज के साथ?
रीता ने कहा- हाँ! कितनी ही बार किया है।
तभी वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे होठों को चूमने लगी। मैंने और उसने बिकनी ही पहनी थी इसलिए वो मेरे स्तन ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगी और चूमने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था, उसने मेरी ब्रा और पेंटी खोल दी और मैं उसके सामने नंगी हो गई। वो मेरे बदन को सहलाने लगी और बाद में वो मेरी चूत पर मुँह रख कर चूमने लगी।
मेरे मुँह से आह ऊह आह ऊह ओह्ह और करो आह चाटो आह जैसी आवाजें निकलने लगी।
तभी दरवाजा खुला और वहाँ अमित और राज ने कमरे में प्रवेश किया और हमें इस तरह देख कर मुस्कुराने लगे।
तभी राज ने कहा- क्यूँ! आज हमारे बिना ही अपनी प्यास बुझा लोगी?
रीता ने कहा- तो आ जाओ! तुम्हें किसने रोका है! अब तुम ही हमारी प्यास बुझा दो!
इतना सुनते ही दोनों हमें बिस्तर पर ले गए, अमित मुझे चूमने लगा। धीरे-धीरे वो मेरे नीचे की तरफ जाने लगा और वो मेरे चूत के दाने को चाटने लगा। मुझे और भी मजा आने लगा। तभी उसने अपना लंड मेरे हाथ में दिया और मुँह में लेने को कहा। मैं उसके लंड को मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
उसने मुझे चित्त लिटाया और अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रख कर फिराने लगा और तभी एक जोर धक्का दिया। उसका 8 इन्चा लंड मेरी चूत में आधा घुस गया।
मैं कराहने लगी, मुझे बहुत दर्द होने लगा और वो मुझे चूमने लगा। धीरे-धीरे दर्द ख़त्म होने लगा। मैंने उसे आगे बढ़ने को कहा और उसने पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया और घर्षण करने लगा।
मेरे मुँह से आह उह की आवाज निकलने लगी और कहने लगी- और चोदो! फाड़ डालो मेरी चूत! आह चोदो।
थोड़ी देर बाद मैं झड़ने वाली थी और वो भी झड़ने वाला था। उसने स्पीड बढ़ा दी और एक झटके के साथ मेरा कामरस निकल गया। दो मिनट बाद वो भी मेरी चूत में झड़ गया। गर्म-गर्म पानी चूत में गिरने से मुझे और भी मजा आया।
उधर रीता और राज़ दोनों का भी काम तमाम हो गया था। थोड़ी देर बाद राज ने मुझे चोदा। उस रात मैं तीन बार चुदी थी।
दोस्तो, कैसे लगी मेरी कहानी! मेल जरूर करना!
मैं और भी कहानी लिखूंगी नेहा दीदी की तरह! बस आपके मेल का इंतजार रहेगा। Antarvasna
प्रिय भाभियों और Sex Stories आंटियों को मेरा नमस्कार! मेरा नाम मनीष राणा है और मैं जयपुर से हूँ। मेरा रंग सांवला है, मेरा लंड औसत लम्बाई व मोटाई का है।
दोस्तो, मैं हमेशा से ही आंटियों और भाभियों के प्रति आकर्षित रहा। मुझे उनकी मोटी गांड और मोटे बोबे बहुत पसंद आते हैं। यह जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूँ यह एक वास्तविक घटना है।
यह बात आज से चार साल पहले की है जब मैं कॉलेज में था मेरा अन्तिम वर्ष था। मुझे एक शादी में कानपुर जाना पड़ा। हमारा एक घर कानपुर में भी है क्यूंकि हमारा बिज़नस कानपुर में भी है। शादी मेरी दूर की मौसी की थी इसलिए उनके और भी परिवार वाले आये हुए थे। मेरी मौसी की बेटी जिसका नाम संतोष था मतलब जो मेरी भी मौसी हुई, वो भी नॉएडा से अपने पति और बेटे के साथ आई हुई थी। क्या बताऊँ दोस्तो, क्या चीज़ थी- उम्र 25 साल, उसका फिगर ३६-३२-३८ था क्या माल थी वो!
मैं शादी से दो दिन पहले ही कानपुर पहुँच गया था। वो भी शादी की एक रात पहले ही आ गई थी। उससे मेरी पहली मुलाकात थी। तो जब वो आई तो मेरी उससे ज्यादा बात नहीं हुई पर हाँ हम दोनों ने एक दूसरे के इरादे भांप लिए थे।
जितने भी मेहमान आये हुए थे वो सब गेस्ट-हाउस में रुके हुए थे। वो भी वहीं थी। शाम को मेरे पिताजी ने कहा कि मैं वहीं रुक जाऊं क्यूंकि लड़की वाले कानपुर में अनजान थे तो अगर रात में किसी को स्टेशन से लाना हो तो मैं चला जाऊं।
खाना खाने के बाद करीब रात नौ बजे हम जवान लोग एक कमरे में बैठ कर अन्ताक्षरी खेल रहे थे। संतोष मेरे बगल में बैठी हुई थी सर्दी होने की वजह से हमने कम्बल ओढ़ रखा था। अचानक मेरे पैर से कोई पैर टकराया मुझे लगा कि किसी का पैर गलती से लग गया होगा, पर ५ मिनट के बाद मुझे फिर महसूस हुआ की कोई पैर मेरे पैर को हौले हौले रगड़ रहा है।
मैंने धीरे से कम्बल उठा के देखा तो मैं अन्दर ही अन्दर बहुत खुश हुआ वो संतोष का पैर था मैंने संतोष की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी। मैं भी कम्बल के अन्दर अपने एक हाथ से उसके हाथ को मसलने लगा मुझे भी मज़ा आ रहा था और उसे भी। थोड़ी देर तक अन्ताक्षरी और हमारा खेल चलता फिर मुझे स्टेशन जाना पड़ा, मन तो नहीं था लेकिन जाना पड़ा। खैर फिर उस रात हमारी मुलाकात नहीं हो पाई क्यूँकि जब तक मैं वापस आया वो सो चुकी थी।
अगले दिन मैंने मौका देख कर उसके होटों को चूम लिया उसने भी मेरा पूरा साथ दिया। बारात आने से कुछ देर पहले वो मेरे पिताजी के पास जा कर बोली कि गेस्ट हाउस में बहुत भीड़ है तो मैं उसे घर ले जा कर तैयार करा लाऊं।
पिताजी ने मुझे बुलाया और उसके साथ घर भेज दिया। मोटरसाईकिल पर भी वो मुझसे ऐसे चिपक कर बैठी कि हमारे बीच में से हवा का भी निकलना मुश्किल था। मैं जल्दी से घर पंहुचा, ताला खोल कर अन्दर पहुँच कर मैंने उससे कहा- आप नहा लो, फिर चलना है!
तो उसने कहा- तुम भी नहा के तैयार हो जाओ!
हमारे घर में दो बाथरूम थे, एक पिताजी के कमरे में और एक गेस्ट रूम में! माँ अपने कमरे का ताला लगा के गई थी क्यूंकि उसमें गहने और पैसे रखे हुए थे। सो मैं बोला- बाथरूम एक ही है पहले आप नहा लो, फिर मैं नहा लूँगा।
वो बोली- ऐसे तो बहुत लेट हो जायेंगे, क्यूँ न हम साथ में नहा लें!
तो मैं बोला- हम दोनों? आपको शर्म नहीं आएगी?
तो वो बोली- सुबह जब चूम रहे थे तब नहीं आई तो अब क्या आएगी।
यह सुनते ही मैंने उसे झट से पकड़ लिया और चूमने लगा। वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी। फिर मैंने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए और बेतहाशा उसके होठों को चूसने लगा। एक हाथ से मैंने उसका सर पकड़ रखा था और दूसरे हाथ से उसके एक स्तन को सहला रहा था। फिर मैंने उसका कुर्ता उतार दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसे बोबे चूसने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था, वो सिसकारी भरने लगी- आअह्ह्ह ह्ह्ह्ह ऊऊह् ह्ह्ह! ओ मनीष खा जाओ इनको, प्लीज चूसो, और जोर से चूसो, इस ब्रा को फाड़ दो और खा जाओ मेरे बोबों को! ऊम्म्म आआअह्ह ह्हह्ह!
उसने मेरी शर्ट खोल कर मेरे जिस्म से अलग कर दी और फिर मुझे खड़ा करके मेरे जिस्म को चूसने और चाटने लगी। फिर उसने मेरी जींस खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और मैं उसे कुछ कहता उससे पहले वो उसे चूसने और चाटने लगी। आह दोस्तो, क्या बताऊँ वो पहली और आखिरी औरत थी जिसका लंड चूसना मुझे सबसे ज्यादा अच्छा लगा।
फिर मैंने उसको खड़ा किया और फिर से उसके बोबों पर टूट पड़ा। उन्हें जोर से मसला रगड़ा और चूस चूस कर लाल कर दिया। एक दो बार तो मैंने उसके बोबों को काट भी लिया। फिर उसके पेट को चाटते हुए मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी सलवार नीचे सरक गई। फिर मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चाटा।
वो आअह्हह ऊम्म्म स्स्स्स्ष्ह्ह ईईइसस्स जैसी आवाज करने लगी। फिर मैंने उसको लेटा कर मैं ६९ पोजिशन में आ गया और उसने झट से मेरा लंड अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, बीच बीच में वो अंडों को भी चूस रही थी और मैं चूत चूसते चूसते उसकी गांड में उंगली भी कर रहा था जो उसे और भी मज़ा दे रहा था।
फिर हम सीधे हुए और मैं उसके ऊपर लेट गया और अपना लंड उस की चूत पर रगड़ने लगा तो वो कहने लगी- प्लीज अब मत तड़पाओ और मेरी चूत में अपना लंड डाल दो!
लेकिन मैं उसे और तड़पाना और भड़काना चाहता था तो मैंने उसकी एक न सुनी। वो कहती रही पर मैंने तो कुछ और ही सोच रखा था। फिर जब उसकी सहनशक्ति जवाब देने लगी तो वो बोली- मादरचोद, अब तो चोद दे! अब नहीं रुका जाता! घुसा दे अपना लंड मेरी चूत में! देख कितनी तड़प रही है मेरी चूत! बहन के लौड़े, जल्दी से मेरी चूत की भूख को शांत कर दे!
इतना सुनते ही तो मुझे भी जोश आ गया और मैंने अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया, उसकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और वैसे भी वो एक बच्चे को पैदा कर चुकी थी इसलिए चूत में डालने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
लंड अन्दर जाते ही जैसे हम दोनों की तन और मन को शान्ति मिल गई हो, ऐसा प्रतीत हुआ। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी चालू की। वो सिस्कारियां भरने लगी और कहने लगी- आआअह्ह्ह मनीष, मेरी जान ऊऊम्म्म चोद दे मेरे भोसड़े को! आज फाड़ डाल आज्ज ईईइस्स ऊऊईईई म्म्म्माआआ कितना मज़ा आ रहा है तेरे लंड में ऊऊम्म्म चोद, मादरचोद चोद इसे! मुझे अपनी रांड बना ले आआअह्ह ह्ह्ह्ह!
क्यूंकि मेरा पहला अनुभव था तो मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वो मेरे ऊपर आ गई और चुदने लगी। जब वो ऊपर नीचे होती तो उसके मोटे मोटे बोबे झूलने लगते और मुझे वो देख कर बड़ा मज़ा आता और मेरा जोश भी दुगना हो जाता था। हमें चुदाई करते हुए आधा घंटा बीत चुका था। वो इस बीच तीन बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने उस को डौगी पोजीशन में लिया और पीछे से उसकी चूत में डाल दिया। चोदते चोदते मैंने उसकी गांड में थूक लगा कर फिर से उंगली दे डाली और उंगली से गांड को चोदने लगा।
पर मैं भी कहाँ तक संभाल पाता मेरा भी स्खलित होने वाला था। जब मुझे लगने लगा कि अब नहीं रोक सकता तो मैंने उस से पूछा- कहाँ निकालूं?
तो वो बोली- मेरे मुहँ में निकालना, मुझे तुम्हारा पानी पीना है!
सो मैंने झट से लंड निकाल कर उसके मुँह में डाल दिया और आखिरी झटकों के साथ उसका मुँह पानी से भर दिया और वो उसे मज़े लेकर पी गई फिर उसने चाट कर मेरा लंड साफ़ किया।
हमें काफी देर हो चुकी थी तो हम जल्दी से साथ में नहाए और जल्दी से तैयार हो के शादी में पहुँच गए।
अगले दिन मैंने मौका निकाल कर उस की गांड भी मारी, वो मैं अपनी अगली कहानी में बताऊंगा।
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