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बनारस में कहावत है कि Antarvasna किसी जवान लड़की की गाण्ड देख कर अगर लौड़ा खड़ा नहीं हुआ तो वो बनारसी नहीं है। यहाँ लोग गाण्ड के दीवाने होते हैं। कोई चिकना लौण्डा हो तो भी लण्ड फ़ड़फ़ड़ा उठता है। फिर मैं और नसीम तो जवान, कम उम्र, और सुपर गोल गाण्ड वाली लड़कियाँ थी, किसी की नजर पड़ गई तो समझो लण्ड से नहीं तो उनकी नजरों से तो चुद ही जाती थी। हम दोनों ऐसी नजरें खूब पहचानती थी।
मैं और मेरी रिश्ते की बहन नसीम, जो मेरी अच्छी सहेली भी थी, हम दोनों बाल्कनी में खड़ी बाते कर रही थीं। नीचे ही देख रही थी कि मुझे दो लड़के नज़र आये।
“नसीम, ये दो नये लौण्डे कौन हैं?”
“वो तो अनवर है और ये जीन्स वाला फ़िरोज़ है, अपने ही रिश्ते में है।”
“यार, मस्त लौण्डे हैं, आज इनको पटाते हैं…”
“यार, तेरी तो बहुत जल्दी फ़ड़कने लगती है बानो…”
“सच कह रही हूँ, मुझे इन चिकने लौण्डों से चुदवाने में बड़ा मजा आता है…”
“हाय, दो सहेलियां खड़ी खड़ी, दोनों चुदायें घड़ी घड़ी …”
हम दोनों खिलखिला कर हंस पड़ी। नीचे से दोनों ने हंसी सुन कर ऊपर देखा और दोनों हमें देखते ही रह गये। फिर दोनों ने एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा।
“लगा तीर दिल पर…!” मैंने कहा,”अब ये तो गये काम से…समझ लो आज रात का काम बन गया !”
नसीम मुझे हैरानी से देखने लगी…”देख, वो फ़िरोज़ मेरा वाला है…!”
“भेनचोद, तुझे लण्ड चाहिये या शकल… जो पट जाये वही ठीक है… चल अब एक्टिंग शुरू करें !”
नसीम भी पटाने की अपनी तरह से तैयारी करने लगी। मैंने भी अपना मूड बना लिया और अन्दर जा कर तंग काली वाली कैप्री पहन ली और एक नीचे गले वाला छोटा सा स्लीवलेस टॉप डाल लिया। ऐसा टॉप था कि जरा सा पास आने से चूंचियो के दर्शन हो जाते थे। थोड़ा सा मेक-अप किया और कंटीली नार बन कर नीचे उतर कर आ गई। उनमें से एक युवक अन्दर की ओर आ रहा था। मैंने आव देखा ना ताव, सीधे उससे टकरा गई।
“हाय अल्लाह, आह्ह्ह, …” मैंने कराहते हुए उसे देखा।
“सॉरी…सॉरी… लगी तो नहीं…?” उस युवक ने कहा।
“हाय अम्मी… आप देख कर नहीं चलते…?” मैंने अपनी बड़ी बड़ी आंखे धीरे से उठाई… उसने ज्योंही मुझे देखा … उसका दिल धक से रह गया… आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर मुझे देखने लगा…
“या खुदा… रहम कर… ये हूर… आप कौन हैं…?”
उसके मुख से आह सी निकली। लगा कि काम बन गया।
“मैं… मैं.. शमीम बानो… ” नाटक चालू था… मैंने अपनी आंखे धीरे से झुका ली… और जान करके उसके और पास आ गई। उसके दिल पर कई कांटे गड़ चुके थे। उसकी नज़र मेरे पास आते ही मेरे टॉप के अन्दर पड़ गई, जहाँ मेरे उभार उसकी आंखो को रस पिलाने के लिये बेताब हो रहे थे। उसे समय दिये बिना डोरे डाले जा रही थी।
“सुभान अल्लाह… ये जिस्म है या जादू … !!” मेरा अगला तीर भी निशाने पर बैठा। मेरी नजर अचानक नसीम पर पड़ी तो बराबर हाथ हिला कर कुछ कहना मांग रही थी, पर मैं मौके की नजाकत को समझ रही थी, मुर्गा फ़ंसने को तैयार था…
“हाय… ये क्या कह रहे है आप…” मैं हाथ से छूटे कपड़े उठाने के लिये यूं झुकी कि कैप्री में से चूतड़ की दोनों गोलाईयां उभर कर उसके चेहरे के सामने आ गई। दोनों चूतड़ खुल कर खिल उठे… उसकी नजर ने इसका पूरा जायजा लिया, मेरे उठते ही काप्री मेरे चूतडों की दरार में घुस गई… उसके मुख से आह पर आह निकलती गई। तीर जिगर में धंसते चले गये।
“बानो, मैं फ़िरोज़… आपने तो जाने क्या जादू कर डाला ?” मैं नसीम का इशारा अब समझी। पर काम तो हो चुका था। मैंने तुरन्त उसकी तरफ़ कंटीली चिलमन से मुसकरा कर देखा।
“जादू… देखो आपने तो मुझे चोट लगा दी…” मैंने तिरछी नज़रों का एक वार और कर डाला।
“और मुझे जो चोट लगी है वो…?” घायल सा वो बोला।
“ओह… सॉरी… कहां लगी है…बताईये तो…!” मैंने अनजान बनते हुए कहा। उसका लण्ड का उठान शुरू हो चुका था, और पैंट में से उभर रहा था।
“यहां पर…!” उसने अपने दिल पर हाथ रख कर कहा।
“धत्त… हाय अल्लाह… !!” मैं कह कर नसीम वाले कमरे में भाग आई। फ़िरोज वहीं घायल सा तड़फता खड़ा रह गया। जाने कितने तीर लग चुके थे उसके दिल पर…।
नसीम ने मुझे देखते ही नाराजगी जाहिर की…”वो तो मेरा वाला था… साला बेईमान निकला… देखा नहीं तुझे देख कर मादरचोद ने लण्ड हिलाना चालू कर दिया।”
“अभी तो लण्ड हिला रहा है…देखना भेनचोद रात को यही लण्ड खड़ा मिलेगा… फिर क्या तेरी चूत और क्या मेरी चूत… सबको चोद देगा !”
“बानो, तू बड़ी खराब है… अब अनवर को मुझे पटाना पड़ेगा…!”
“सॉरी नसीम… साला वो पहले सामने आ गया… इरादा तो अनवर को पटाने का ही था!”
मैं ऊपर अपने कमरे में चली आई… । फ़िरोज मेरा पीछा कर रहा था। मेरे पीछे पीछे फ़िरोज भी आ गया। मैं कपड़े बदल चुकी थी और सिर्फ़ एक गाऊन जान करके डाल रखा था, अन्दर कुछ नहीं पहना था। पर अब तक वो आया क्यूं नहीं। उसने दरवाजा खटखटाया और अन्दर झांका… मैं उसके अचानक आने का मैंने घबराने का नाटक किया।
“आप… फ़िरोज जी…”
“खुदा कसम… मन नहीं माना… तो आपके पास आ गया…।”
“कहिये… क्या हुआ…” मुझे पता था कि हरामी का लौड़ा खड़ा हो रहा होगा… तो पीछे पीछे आ गया आशिकी झाड़ने। पर मुझे तो उसका पूरा आनन्द जो लेना था। सोचा चलो शुरुआत अभी कर लेते है…रात को चुदवा लेंगे। मेरी तैयारी पूरी थी, अन्दर से मैं पूरी नंगी थी, बस काम चालू होते ही मेरे नंगे जिस्म को मसल देगा वो…।
“बानो… आप मेरे मन को भा गई है… देखिये खुदा के लिये इन्कार मत करना…”
मैंने अपना मुख दोनों हाथों से ढक लिया…और शर्माने का भरपूर नाटक करने लगी।
“ऐसे मत कहिये… खुदा की मार मुझ पर… आप तो मेरे लिये खुद ही खुदा है…”
“क्या कहा… कबूल है… ओह्ह मेरी किस्मत… अल्लाह रे… आपने बन्दे की सुन ली…”
साला मरा जा रहा था मेरे पर… पर मुर्गा इतनी जल्दी लपेटे में आ जायेगा यकीन नहीं हो रहा था। मेरा जिस्म फ़ड़कने लगा कि अब उसके हाथ मेरे तन को सहलायेंगे। इतना सुन्दर, गोरा, लम्बा और सुडोल शरीर वाला लड़का… बिलकुल जैसे खजाने में से निकाला हो, नया नया जवान … 18-19 साल का… हाय… बेचारा गया काम से। आगे बढ़ कर मेरे हाथो को उसने पकड़ लिया। मैंने जैसे कांपने का नाटक किया।
“हाय अल्लाह, ना छुओ … मैं मर जाऊंगी” मैंने शरमाने का भरपूर नाटक किया। उसने जोश में मेरा मुख चूम लिया और उसके हाथ मेरी चूंचियों पर आकर उसे नापने लगे। मैंने शरम से झुक गई और उसे दूर हटाने लगी… “फ़िरोज… बस करो… छोड़ दो मुझे…”
“पहले वादा करो, रात को मेरे कमरे में मिलोगी ना…”
“बस करो ना… हाँ आ जाउंगी ना… बस” कहते ही फ़िरोज ने मुझे छोड़ दिया। मुझे निराशा हुई कि मेरा बदन तो कोरा ही रह गया। लेकिन नहीं … वो इतनी जल्दी मानने वाला नहीं था। फिर से नजदीक आया और मुझे लिपटा लिया। गाऊन के अन्दर उसके हाथ पहुंचने लगे। मेरा तन पिघल उठा। मेरा अंग अंग नपा तुला सा दबा जा रहा था। सभी उभारों को उसने एक कली की तरह मसल दिया। मेरी सिसकियाँ गूंज उठी। चूत पानी टपकाने लगी। मैं उसकी बाहों में तड़प उठी। फिर धीरे से उसने छोड़ दिया। मैंने अपना गाऊन ठीक किया। वो मुझे प्यार से निहारते हुए जाने लगा।
“तो फिर रात को…। बाय …बाय…” वो जैसे ही मुड़ा तो मुझे लगा कि मैंने तो उसे झटका दिया ही नहीं।
“फ़िरोज, रुको तो…” जैसे ही वो रुका , मैं उसके पास आ गई और उससे चिपक गई। वो कुछ समझता मैंने उसका लण्ड पकड़ लिया और दबाने लगी।
“बानो… मैं मर गया… छोड़ दे रे…”
“फ़िरोज प्लीज… दबाने दो… मेरी बहुत इच्छा थी इसे हाथ में लेकर दबाने की… बहुत मोटा और लंबा है?”
उसका लण्ड तन्ना उठा। वो तड़प उठा। मेरा हाथ हटाने लगा पर मैं कोई कच्ची खिलाड़ी थोड़े ही थी। जम के उसक लौड़ा पकड़ा और मसलने लगी। उसका डन्डा था भी लम्बा और हाथ में ऐसे फ़िट आया कि उसका मुठ ही मार दिया। वो लहरा उठा…
“बानो, अरे मेरा लण्ड तो छोड़ दे, हाय रे”
“प्लीज फ़िरोज… बहुत अच्छा है… मसलने दे ना” मैंने जिद करके मसलना चालू रखा। कुछ ही पलों में पेण्ट में एक काला धब्बा उभर आया। उसका वीर्य निकल पड़ा था। मेरा काम हो गया था। उसके मुंह से एक आह निकली…
मैंने कहा,”फ़िरोज… शाम को मेरा निकाल देना बस…” और हंस पड़ी।
“मेरी तो मां चोद दी बानो… तुझे भी नहीं छोड़ने वाला… तेरी भी फ़ोकी चोद डालूंगा देखना !” फ़िरोज़ भी झड़ने से थोड़ा शर्मिन्दा हो गया था।
रात के एक बज रहे थे। मेरे मोबाईल का अलार्म बज उठा, सुस्ती के मारे उठने का मन नहीं कर रहा था। पर फ़िरोज़ के मोटे लण्ड का ख्याल आते ही जिस्म तरावट से भर गया। मैं झट से उठी। मैंने नसीम के कमरे में झांक कर देखा और धीरे से उसे जगाया। हम दोनों ही दबे पांव कमरे से बाहर आ गये। हम दोनों ही रात के सोने वाले वाले कपड़े पहने थे। बस एक झीना सा पजामा और एक उटंगा सा कुर्ता…
“चल यार चुदना ही तो है क्या मेक-अप करना…” मैंने कहा और सीढ़ियां चढ़ कर फ़िरोज के कमरे के बाहर आ गई।
“अभी तू बाहर से देखना, फिर मैं तुझे बुला लूंगी” मैंने नसीम को तरकीब बताई।
“नहीं, मैं अनवर को बुलाती हूँ… तू जा…”
“पर अनवर… “
“मैंने उसे पटा लिया है… दिन को एक बार चुदा भी चुकी हूँ।” नसीम में फ़ुसफ़ुसा कर कहा। मुझे जलन हो उठी… साली भोसड़ी की… मेरे से पहले ही चुदा लिया। मैं तो चाह रही थी कि अनवर पर भी लाईन मार कर उसे फ़ंसा लेती और उससे भी खूब चुदाती…।
नसीम साईड वाले कमरे में अनवर के पास चली गई। मैंने फ़िरोज़ का दरवाजा खोला। मुझे किसी ने अचानक ही पीछे से दबोच लिया। सामने फ़िरोज़ खड़ा था… तो फिर मेरी गाण्ड में ये लण्ड किसका गड़ा जा रहा था।
“आज तो बानो की मां चोदनी है… साली ने मेरा दिन को मेरा माल निकाल दिया था” फ़िरोज़ ने मुस्करा कर कहा।
“चल तू क्या चोद रहा है…” ये आवाज अनवर की थी… मेरा मन मयूर नाच उठा… अनवर तो बिन पटाये ही लण्ड लिये हुए खड़ा है।
“मैं इसकी चूत चोदता हूँ और तू गाण्ड चोद इस… नमकीन की…” फ़िरोज़ बोला।
“साला हरामी, चोदने का मुझे वादा किया और चूत बानो की चोदेगा…” कमरे में अनवर को नहीं पा कर नसीम आ चुकी थी। मैं एक बार फिर ईर्ष्या से जल उठी। ये माँ की लौड़ी यहाँ कैसे मर गई। दो दो लण्ड की आश खत्म हो गई थी। फ़िरोज़ ने ज्योंही नसीम को देखा , वो उसकी ओर लपक उठा…
“अनवर , मेरे दिल की रानी आ गई…” और नसीम को अपनी बाहों में उठा कर बिस्तर पर आ गया। फ़िरोज़ का लण्ड देखते ही बनता था, नसीम को देखते ही वो फ़नफ़ना उठा था। मैं अब और निराश हो चली थी कि ये हरामी तो नसीम का आशिक निकला।
“मेरा पजामा मत फ़ाड़ना… नहीं तो नीचे नहीं जा पाउंगी !” नसीम में खुद ही अपना पजामा उतार दिया। मुझे भी अपना पजामा उतारने में भलाई ही लगी। अब कौन हमें छोड़ता… फ़िरोज़ ने नसीम को दबा डाला और लण्ड चूत में घुसेड़ दिया। नसीम ने फ़िरोज़ को जोर से कस लिया और सिसक उठी। मुझे नीचे पड़े बिस्तर पर अनवर ने प्यार से लेटाया और अपना खड़ा लण्ड मेरी चूत पर हौले हौले घिसने लगा। डबलरोटी की तरह फ़ूली हुई मेरी चूत के पट खुलने लगे। दोनों फ़ांकें खुल गई। बीच की पलकें जो हल्की भूरी सी, टेढी मेढी सी लहराती हुई मांसल चमड़ी और बीच में पानी का गीलापन और फिर झाग से बुलबुले से भरी मेरी रसीली चूत पर अनवर मर मिटा। उसके होंठ मेरी चूत से लग गये और उनका रसपान करने लगा। मेरी चूत से लगा मेरा दाना फ़ड़क उठा, उसके होंठ बार बार मेरे दाने को भी चूस लेते थे…
“अनवर मियां… मैं मर जाउंगी… प्लीज फ़िरोज की तरह चोद डालो ना…”
“नहीं, बानो… चोदेगा तो तुम्हें फ़िरोज ही, मैं तो गाण्ड का दीवाना हूँ…”
मुझे फिर थोड़ी सी निराशा हुई, पर कुछ ही देर में नसीम को चोद कर फ़िरोज़ मेरे पास हाज़िर हो चुका था। चूस चूस कर लगा था कि झड़ना बाकी है। पर मैंने अपने आप को कंट्रोल किया। फ़िरोज़ का खड़ा लण्ड, सुपाड़े की चमड़ी कटी हुई, सच्चा मुसलमान लग रहा था… उसकी मर्दानगी भी एक पठान की तरह लग रही थी। अनवर सामने से हट गया और फ़िरोज़ ने कमाण्ड सम्हाल ली। वो मेरे पर चढ़ गया और मुझे नीचे दबा लिया। मेरा सारा जिस्म कसमसा उठा। उसका भार बड़ा प्यारा लग रहा था। कुछ ही क्षणों में उसका गरम गरम लण्ड मेरे जिस्म के भीतर समाने लगा। मैं तड़प उठी।
“मेरे खसम… मजा आ गया… पूरा समा दे अन्दर… हाय…” उसने मेरा मुख अपने मुख से दबा लिया और निचले होंठ दबा कर चूसने लगा। अब उसका लण्ड अन्दर बाहर होने लगा। उधर नसीम की गाण्ड को अनवर लण्ड घुसेड़ कर चोद रहा था। नसीम भी मेरी ही तरह गाण्ड चुदाने में माहिर थी।
“बानो, आज आई है नीचे तू… तेरी आस तो मुझे कब से थी रे…अब तो चोद ही दिया !”
” हाय रे मेरे जिगर… तेरे नाम से ही मर मिटी थी जानू…मेरे दिल, मेरी जान… आह रे…” मैं भी अपने मन के लड्डू फ़ोड़ रही थी… साला ऐसा जवां मर्द कहाँ मिलेगा मुझे।
“मैंने कहा था ना तेरी फ़ोकी चोद कर मजा लूंगा… मस्त भोसड़ी है !”
“बस कुछ मत बोल, बस जोर से चोद दे…” मेरी बेताबी बढ़ती जा रही थी, पर मेरी चूत को और गहरी चुदाई चाहिये थी। उसके धक्के तेजी से चल रहे थे। मुझे भी वासना की आग घेर चुकी थी। जिस्म आग में सुलगने लगा था। मीठी मीठी आग तन को जला रही थी। पर मुझे और दबा कर चुदना था। मुझे लगा कि अभी लण्ड पूरा दम लगा कर नहीं चोद रहा है। बिना हल्के दर्द के कैसा चुदना। मैंने दांत भींचते हुये फ़िरोज को दबाया और पलटी मार कर उसके ऊपर आ गई।
“मादरचोद… लौड़े में दम नहीं है क्या… लौड़ा तो साले का मस्त दिखता है…” मैंने फ़िरोज़ को दबाते हुये चूत में उसका सुपाड़ा फ़ंसा लिया और उस पर सीधे बैठ गई और चूत पर पूरा जोर लगा कर लण्ड को अन्दर समा लिया। मुझे लगा कि अब सुपाड़ा की गद्दी ने जड़ में ठोकर मार दी है तब मैंने कस कस कर उसके लण्ड पर अपनी चूत पटक पटक कर मारनी चालू कर दी। हर बार मेरे मुख से आह निकल जाती… चूत की गहराई को उसका लण्ड और गहरा कर रहा था। गहराई की चोट एक अलग ही मजा दे रही थी, थोड़ा सा दर्द और खूब सारा मजा…। उसका लण्ड फ़ूलता सा लगा उसकी पकड़ मजबूत होने लगी। तभी अनवर ने मेरी गाण्ड थपथपा कर इशारा किया। मैं फ़िरोज पर लेट गई और गाण्ड ऊंची कर ली। मेरी गाण्ड में अनवर का लण्ड सरसराता हुआ घुस पड़ा। अनवर के लण्ड के झटके, मेरी चूत को फ़िरोज के लण्ड पर मार कर रहे थे।
फ़िरोज तो झड़ने के कगार पर था… और तभी फ़िरोज के मुख से सिसकारी निकल पड़ी और उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया। उसके बलिष्ठ हाथों ने मुझे जकड़ लिया। उसका लण्ड मेरी चूत में गरम गरम लावा भरने लगा… तभी मेरा शरीर भी गर्मी पा कर लहरा उठा और मेरा रज भी छूट पड़ा। मैंने अनवर को धक्का मार कर पीठ पर से उतार दिया और
फ़िरोज के ऊपर लेट कर सुस्ताने लगी। तभी अनवर अपना मुठ मार कर अपना वीर्य मुझ पर उछालने लगा। मेरा चेहरा और बदन उसके वीर्य से भीग उठा……
फ़िरोज़ ने मुझे अलग कर दिया और बाथ रूम में चला गया। मैंने भी सुस्ती छोड़ी और उठ खड़ी हुई, नसीम सो चुकी थी, उसको उठाया और हम दोनों ने अपने चूतडों और चूत के आस पास लगे वीर्य को धो कर साफ़ कर लिया। थोड़ा सा पानी से मैंने अपनी पीठ और सामना साफ़ कर लिया।
“शब्बा खैर… मेरे जानू…” फ़िरोज़ और अनवर ने मुसकरा कर हमें विदा किया। पर नसीम मुड़ मुड़ कर चुदासी आंखों से उन्हे निहार रही थी… मुझे हंसी आ गई…
“अरे कल फिर और चुदा लेना… अब चल साली, नहीं तो सुबह हो जायेगी…”
हम दोनों भारी मन से चुदने की इच्छा लिये दरवाजे से दोनों को एक बार और देखा और अंधेरे में कदम बढ़ा दिये…। Antarvasna
मेरा कॉलेज हमें हर साल कॉलेज ट्रिप पर लेकर जाता था.
मैं पहले तीन साल तो कॉलेज ट्रिप पर नहीं गया क्योंकि मैं मेरे पापा के दोस्त की कम्पनी में काम सीख रहा था.
कॉलेज खत्म होते ही एक अच्छी पोस्ट मिलने की लालच में मैं ज्यादा छुट्टियां भी नहीं लेता था.
पर मैंने लास्ट ईयर में कॉलेज ट्रिप जाने की सोची और साथ चलने के लिए सारे कॉलेज फ्रेंड्स को भी मना लिया.
कॉलेज के प्रिंसिपल सर मेरे पड़ोसी हैं और मेरे पापा के अच्छे दोस्त भी हैं.
तो मैंने उन्हें बाली ले जाने का आईडिया दिया और वह मान गए.
अब मैंने प्रिंसिपल सर और कॉलेज मैंनेजर ने बाली जाने का, वहां रहने और घूमने की पूरी तैयारी कर ली.
कॉलेज में अनाउंस भी करवा दिया.
मैं और मेरे सारे दोस्त तो पहले से ही तैयार थे … और भी बहुत से छात्र थे, पर सबके सब फ्रेशर थे.
हमें मिला कर कुछ ही सीनियर थे.
ट्रिप पर जाने से एक दिन पहले मैनेजर सर का एक्सीडेंट हो गया और वे अब हमारे साथ नहीं चल सकते थे.
प्रिंसिपल सर ने ट्रिप कैंसल करने की सोची, पर मेरे बहुत मनाने पर मान गए.
अब इस ट्रिप का नया लीडर और गाइड मैं हो गया था.
मेरे साथ प्रिंसिपल सर ने एक सर और दो मैडम को भी ट्रिप पर भेज दिया, जिनमें से एक का नाम सरोज है.
सरोज मैडम की हाईट 5 फीट है, रंग सांवला और शरीर भी थोड़ा मोटा है उनकी उम्र 50 साल होगी. वे दिखने में भी ठीक ठाक हैं.
हमारी दूसरी मैडम प्रिया कातिल फिगर की मालकिन हैं.
पूरा कॉलेज उन पर मरता है.
मैडम की उम्र 35 साल, रंग गोरा, हाईट 5.5 फीट और फिगर 36-30-38 का.
प्रिया मैडम के फिगर को देख कर ही लगता है कि वे रोज जिम जाती होंगी.
अब हम सब हवाई जहाज में बैठ गए.
मैं विंडो सीट पर बैठा था.
मेरे पास में प्रिया मैडम और उनके पास में सरोज मैडम बैठी थीं.
आज मैंने मौका देख कर प्रिया मैडम के साथ बहुत खुल कर बातचीत की.
वे भी बहुत ही फ्रैंक होकर मुझसे बात कर रही थीं.
हम सभी शाम को अपने रिज़ॉर्ट में पहुंच गए थे.
मैंने लड़कों के रूम्स का अलग और लड़कियों के रूम्स का अलग फ्लोर लिया था.
मेरा रूम लड़कियों के फ्लोर पर था जो मैंने जानबूझ कर प्रिया मैडम के रूम से लगा हुआ लिया था.
अब सब सुबह पूल में पहुंच गए.
पूल भी लेडीज का अलग था.
मैं लेडीज पूल में था.
प्रिया मैडम पूल के किनारे बैठी हुई थीं.
मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके पास स्विमिंग ड्रेस नहीं है.
तो मैंने उनके लिए स्विमिंग कॉस्ट्यूम अरेंज करवा कर दिया.
पर उनकी टी-शर्ट ज्यादा ढीली थी और निक्कर थोड़ी टाइट.
उन्होंने वह ड्रेस ले ली और जैसे ही वह उस ड्रेस को पहन कर आयी तो क्या कातिल लग रही थीं.
वह जैसे ही पूल में उतरीं, उनकी टी-शर्ट उनके बूब्स से चिपक गयी.
आह क्या नजारा था.
चौड़ी गांड, मोटे मोटे बूब्स देख कर तो मेरा लंड ही खड़ा हो गया.
मैडम को स्विमिंग नहीं आती थी तो वे पानी से थोड़ा डर रही थीं.
मैंने उन्हें दिलासा दी कि मैं आपको स्विमिंग सिखा देता हूँ.
थोड़ा समझाने के बाद वह मान गईं.
अब मैं उनको स्विमिंग सिखाने लगा.
मेरा एक हाथ उनके पेट पर और एक हाथ उनके पैरों को पकड़े हुए था.
वे पानी में पैर हिला रही थीं.
बीच बीच में मेरा हाथ उनके बूब्स पर टच हो रहा था पर उन्होंने कुछ नहीं कहा.
अब मैंने धीरे धीरे अपना हाथ पैरों से जांघ पर शिफ्ट कर दिया और बैलेंस बनाने के नाम पर उनकी जांघों को बार बार मसलने लगा.
उन्होंने अब भी कुछ नहीं कहा.
अब मेरा दूसरा हाथ धीरे धीरे उनके बूब्स को टच करने लगा और मेरी उंगलियां उनके बूब्स को मसलने लगीं.
मुझे लगा कि मैडम को भी मजा आ रहा था.
मैं अभी कुछ और कर पाता, पर तभी हमें पूल से निकलना पड़ा क्योंकि हमें घूमने जाना था.
पूरा दिन मैडम मुझे एक हल्की सी शरारत वाली स्माइल दे रही थीं.
शाम को रिज़ॉर्ट में लौट कर सब फिर से पूल में चले गए.
इस बार मैडम ने मुझे खुद से स्विमिंग सिखाने को बोल दिया.
अब मैं वापिस वही हरकतें करने लगा, धीरे धीरे मैं उनके बूब्स दबाने लगा, उनकी जांघों को मसलने लगा और एक दो बार मैंने उनकी गांड भी मसल दी.
कुछ देर बाद मैडम ने मुझे रोक दिया.
सब लोग पूल से निकल कर अपने अपने रूम में चले गए.
मैं बार बार बस मैडम को ही याद कर रहा था.
काफी रात गहरा गई थी.
तभी मेरे रूम की घंटी बजी.
मैंने जैसे ही रूम खोला, सामने प्रिया मैडम थीं.
वे एक टाइट टी-शर्ट और शॉर्ट में थीं.
मैंने उन्हें अन्दर बुलाया.
हम दोनों इधर उधर की बातें कर रहे थे.
तभी मैडम ने कहा- मेरे कंधे बहुत दुख रहे हैं, क्या तुम थोड़े दबा दोगे?
मैं उनके कंधे दबाने लगा.
इससे मैडम बहुत ही रिलेक्स फील कर रही थीं.
तभी मैडम मुझसे पूछने लगीं कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने मैडम को मना कर दिया.
तो मैडम ने कहा- तुम झूठ बोल रहे हो.
मैंने मैडम से कहा- अभी नहीं है, पर पहले थी.
मैडम ने पूछा- तो उसके साथ सेक्स भी किया होगा?
मैं यह सुन कर दंग रह गया.
मैंने कहा- थोड़ा बहुत किया है.
मैडम ने कहा- ऐसा क्यों?
मैंने मैडम को बताया कि उसे ये सब ज्यादा पसंद नहीं था.
मैडम हंस पड़ीं और बोलीं- सेक्स किसको पसंद नहीं होता!
अब मैंने मौका देखते हुए मैडम से कहा- अगर आपका शरीर ज्यादा थक गया हो, तो मैं आपके पैरों की भी मसाज कर दूँ?
कुछ पल सोचने के बाद वह मान गईं और बोलीं- पर आराम से करना.
मैंने उनके कहने के अंदाज से यही समझा कि ये चुदाई आराम से करने की कह रही हैं.
वे बेड पर उल्टा लेट गईं.
अब मैं उनके पैरों की उंगलियां दबाने लगा.
मैडम को मजा आने लगा.
मैं धीरे धीरे पैर दबाते दबाते उनकी जांघ तक पहुंच गया और जांघों को मसलने लगा.
अब मैडम थोड़ी थोड़ी कामुक आवाज निकालने लगीं.
मैं उनकी जांघ के अन्दरूनी हिस्से को भी मसलने लगा और धीरे धीरे मेरा हाथ उनकी चूत के करीब पहुंच गया, पर मैंने चूत को टच नहीं किया.
मैंने मैडम से कहा- अगर आपको मसाज पसंद आयी हो, तो मैं आपकी पीठ की ऑयल मसाज भी कर सकता हूँ.
मैडम ने थोड़ा झिझक कर हां कह दिया पर कहा कि किसी को बताना मत!
मैंने हामी भरी और बाथरूम से मसाज ऑयल लेकर आ गया.
तब तक वे भी टी-शर्ट उतार कर पीठ के बल बेड पर लेट गईं.
उन्होंने लाल कलर की डिजाइनर ब्रा पहन रखी थी.
उनके बूब्स ब्रा के साइड से बाहर आ रहे थे.
यह देख कर मेरा लंड उफान मारने लगा.
मैंने अपने को काबू किया और उनकी लोवर बैक की मसाज करने लगा.
धीरे धीरे मैं उनकी पूरी की पूरी पीठ को मसलने लगा.
मैडम को भी मजा आने लगा.
वे बहुत ज्यादा कामुक होकर मादक आवाजें निकाल रही थीं.
मुझे ब्रा की स्ट्रेप की वजह से मसाज करने में दिक्कत हो रही थी, तो मैंने मैडम को ब्रा स्ट्रिप को खोलने को कहा.
वे वासना में इतनी ज्यादा डूब चुकी थीं कि उन्होंने ब्रा की स्ट्रिप खोल दी.
अब मुझे उनके गोरे बूब्स साइड से साफ दिख रहे थे.
बिल्कुल दूध से सफेद.
मैं उनकी रगड़ कर मालिश करने लगा और मैडम जोर जोर से आह आह की कामुक आवाजें निकालने लगीं.
मैं हल्के हाथों से उनके बूब्स को साइड से सहलाने लगा.
मैडम और भी ज्यादा प्यार भरी आवाजें निकालने लगीं.
यहां मेरा लंड पैंट में दर्द करने लगा.
मैंने मौका पाकर मैडम से पेट की मालिश के लिए पूछ लिया.
पहले तो मैडम ने मना कर दिया, फिर तुरंत ही हां भी बोल दिया.
पर मुझसे आंखें बंद करके मालिश करने को कहा.
मैं मान गया और मैडम के आदेश को फॉलो करते हुए अपनी आंखें बंद करके उनके पेट पर धीरे से बैठ गया और उनकी मालिश करने लगा.
मेरा हाथ जैसे ही बूब्स के करीब पहुंचा, तो मैडम ने टोक दिया और नीचे नीचे मालिश करने को कहा.
मैंने भी डर के मारे आंखों को बंद रखा और मालिश जारी रखी.
थोड़ी देर में ही मैडम की कामुक आवाज फिर से शुरू हो गयी.
मैंने हिम्मत करके थोड़ी सी आंख खोली तो मैडम आंखें बंद करके मादक आवाजें निकाल रही थीं.
मैं अब आंख खोल कर मालिश करने लगा.
उनके बूब्स ब्रा से ढके हुए थे पर बहुत ही मस्त लग रहे थे.
मैं धीरे धीरे हाथ ऊपर की ओर बढ़ाने लगा तो मैडम अपनी ब्रा धीरे धीरे खिसकाने लगीं.
उन्होंने अपनी ब्रा पूरी तरह से साइड में कर दी.
क्या तो बूब्स थे उनके … मैं तो देखते ही पागल हो गया.
मैं धीरे धीरे उनके बूब्स को नीचे से टच करने लगा.
मैडम ने कुछ नहीं कहा.
मैंने हिम्मत करके उनके बूब्स पर हाथ रख दिया और आंखें बंद करके धीरे धीरे मालिश करने लगा.
मैडम ने अब भी कुछ नहीं कहा.
मैं मैडम के बूब्स मसलने लगा.
मैडम कराहने लगीं.
मैंने मालिश करते हुए अपने होंठ मैडम के होंठों पर रख दिए और उन्हें किस करने लगा.
मैडम भी मेरा पूरा साथ देने लगीं.
हॉट मैम पागलों की तरह मेरे होंठों को चूसे जा रही थीं और मैं उनके बूब्स दबा रहा था.
कुछ देर बाद मैं उनकी गर्दन को चूमने लगा तो वे मचल उठीं.
पर उनकी आंखें अब भी बंद थीं.
मैं उन्हें चूमते हुए नीचे आया और उनके बूब्स को चूसने लगा.
बूब्स चूसते चूसते मैंने मेरा एक हाथ उनके शॉर्ट के अन्दर डाल दिया और पैंटी के ऊपर से उनकी चूत मसलने लगा.
उनकी चूत पूरी गीली थी.
मेरी इस हरकत से वह जल बिन मछली की तरह तड़पने लगीं.
अब मैंने उनके शॉर्ट को खोल दिया और पैंटी उतार कर Xxx मैम की चूत को देखने लगा.
बिल्कुल क्लीन शेव, किसी कुंवारी लड़की की चूत की तरह लग रही थी.
मैं उनकी चूत पर टूट पड़ा और उनकी चूत को चाटने लगा.
उन्होंने अपना हाथ मेरे सर पर रख दिया और मेरे सर को चूत की तरफ दबाने लगीं.
साथ ही वे जोर जोर से उह आह आह हो आह की आवाजें निकालने लगीं.
उनकी ये कामुक आवाजें सुन कर मैं और जोर से उनकी चूत चाटने लगा.
कुछ देर बाद उन्होंने छटपटाते हुए सारा पानी निकाल दिया और खुद बेसुध हो कर लेटी रहीं.
मैं उनका सारा पानी पी गया.
क्या स्वाद और क्या खुशबू थी.
अब मैंने फटाफट अपने सारे कपड़े उतारे और उनके बूब्स पर बैठ गया.
मैंने मैडम को आंखें खोलने को कहा. उन्होंने जैसे ही आंखें खोलीं, मेरा बड़ा लंड ठीक उनके मुँह के ऊपर था.
वे मेरा लंड देख कर चौंक गयी और शर्म के मारे आंखें चुराने लगीं.
मैंने एक हाथ से उनकी गर्दन को ऊपर उठाया और लंड उनके मुँह में दे दिया.
वे भी बड़े प्यार से मेरा लंड चूसने लगीं.
लंड चूसने में वे पक्की खिलाड़ी थीं.
कुछ देर लंड चुसवाने के बाद मैंने उन्हें पेट के बल पलंग के किनारे लेटने को कहा और मैं पलंग के किनारे खड़ा हो गया.
मैंने उन्हें फिर से लंड चूसने को कहा, वह मेरा लंड पूरा अन्दर गले तक उतार कर चूसने लगीं.
मेरा लंड उनके मुँह में ठीक से आ भी नहीं रहा था, फिर भी उन्होंने वह पूरा अन्दर तक लेकर चूस लिया.
मैंने उनके बाल पकड़े और उनके मुँह को चोदने लगा.
उनकी सांस फूलने लगी पर वे बराबर अपना मुँह चुदवाने लगीं और मैं अपनी चरम सीमा पर आ गया.
मैंने अपना पूरा सारा वीर्य उनके मुँह में खाली कर दिया और उनके पास में लेट गया.
वे मेरा सारा वीर्य चूस गईं और मेरे पास में लेट कर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगीं, मेरे लंड को सहलाने लगीं.
कुछ ही देर में मेरा लंड फिर से चार्ज हो गया.
उन्होंने मुझसे कहा- आकाश, चोद दे अब मुझे … मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, कब से बड़े लंड के लिए तरस रही थी.
मैंने भी देर न करते हुए उनके ऊपर चढ़ कर अपना लंड उनकी चूत पर सैट कर दिया और एक जोर का धक्का दे दिया.
मेरा आधा लंड उनकी चूत में चला गया.
वे जोर से चीख पड़ीं, मैं रुक गया.
मैंने थोड़ा इंतजार किया और एक और जोर का धक्का दिया.
अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया.
उनकी आंखों से आंसू आ गए.
चूत लंड के हिसाब से थोड़ी टाइट थी.
मैं थोड़ा रुक कर उनके होंठों को चूसने लगा.
वे जैसे ही नॉर्मल हुईं, मैं धीरे धीरे उन्हें चोदने लगा और उनके होंठ चूसने लगा.
कुछ देर बाद वह भी अपनी गांड हिलाने लगीं तो मैंने अपने हाथों को पलंग पर रख कर पकड़ बनाई और धीरे धीरे स्पीड बढ़ाते हुए उन्हें जोर जोर से चोदने लगा.
वे जोर जोर से चिल्ला रही थीं- आह और जोर से … और तेज आकाश फाड़ दे मेरी चूत … भोसड़ा बना दे इसका.
मैं उन्हें और जोर जोर से चोदने लगा.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें बिस्तर से उठाया और बालकनी में ले आया.
उधर मैंने मैडम से बालकनी की रेलिंग पकड़ कर झुकने को कहा और पीछे से एक जोर का झटका दिया.
इस बार मेरा पूरा लंड एक बार में अन्दर चला गया.
वे जोर से चीखने लगीं.
मैंने Xxx मैम को चोदना जारी रखा और पूरी रफ्तार से चोदने लगा.
वे जोर जोर से चिल्लाती हुई ‘उह आह ओह … यस लाइक दैट …’ कहने लगीं.
कुछ देर बाद मैंने अपना सारा वीर्य उनकी पीठ पर निकाल दिया और हम दोनों जकुजी में जाकर आराम से बैठ गए.
बाद में बाहर आकर मैंने हॉट मैम को काउगर्ल और मिशनरी स्टाइल में चोदा.
उस पूरी रात में मैंने मैडम को चार बार चोदा.
अगली सुबह मैडम जल्दी अपने कमरे में जाकर सो गईं.
अगले पूरे दिन मैडम से ठीक से चला नहीं जा रहा था.
उस दिन के बाद मैडम और मुझे जब भी मौका मिलता, हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.
वैसे हम दोनों को बालकनी में चुदाई करते हुए स्वाति और राधिका ने देख लिया था.
उसी ट्रिप पर मैंने उन दोनों को एक साथ कैसे चोदा, ये मैं अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.
आशु वैसे तो छोटे शहर से था, पर अपने कॉलेज में फुटबाल टीम का केप्टन था।
बाद में उसने एक जिम भी जॉइन किया और धीरे धीरे उस ज़िले के नामी जिम में वो ट्रेनर बन गया।
गोरा चिट्टा, लंबा कद, कसा हुआ कसरती बदन, घुँघराले काले बाल और पठानों वाली तहजीब।
कुल मिला कर आशु एक पढ़ा लिखा बांका गबरू था, जिसकी रगों में तहजीब और नफासत थी।
लेकिन घरेलू कलह से आजिज़ आकर वह नॉयडा आ गया.
उसने नोएडा आकर यहाँ सभी तरह के काम करने के लिए अपने को तैयार किया।
सुबह पाँच बजे उठकर वो पास वाली सोसाइटी में जाता और गार्ड रूम में रखी 10-12 बाल्टियों में पास की डेयरी से अपने सामने कढ़वा कर दूध लाता और फिर उन्हें फ्लैट्स में पहुंचाता।
अक्सर कुछ फ्लैट वालियाँ उससे नाश्ते का कुछ न कुछ सामान मँगवाती तो वो उनको लाकर देता।
फिर उन्हीं फ्लैट्स के मालिकों की गाड़ियाँ धोकर 9 बजे तक तैयार कर देता।
उसके बाद कहीं उसे फुर्सत मिलती अपनी चाय पीने की।
वो काम इतना मन लगाकर और तसल्लीबक्श करता कि उससे सभी मेमसाब बहुत खुश रहतीं।
आशु ने अपने शहर में पढ़ाई के दौरान ही दोस्त से ड्राइविंग भी सीख ली थी।
एक दो महीने टॅक्सी भी चलायी तो उसे गाड़ी चलाने की प्रैक्टिस तो हो गयी थी।
अब उसे नोएडा रहते दो साल होने को आए तो वो यहाँ के लोगों के तौर तरीकों और मेमसाब लोगों को इम्प्रेस करने के तरीकों से अच्छा वाकिफ हो गया था।
पर जिंदगी उसे जिस ओर मोड़ रही थी, ऐसा उसने सोचा भी नहीं था।
उसे भी अब हवा लग गयी थी। उसके पास बढ़िया स्मार्ट फोन था जिस पर वो सभी मेम साब लोगों से व्हाट्सएप्प पर संपर्क में रहता।
मेमसाब लोग भी उससे अपने सभी काम करवातीं और उसे कपड़ों, खाने और पैसों से नवाजती रहतीं।
चूंकि आशु के सलीके और पहनावे को देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो मात्र एक सफाई करने वाला लड़का है, तो मेमसाब लोग उसे अपने साथ गाड़ी चलाने से लेकर शॉपिंग में समान उठाने तक ले जातीं।
दिल्ली में तो वैसे भी काम निकालने के लिए सिर पर चढ़ा कर रखते हैं, तो लेडीज आशु को अपने साथ ही रेस्तराँ में खिला पिला भी देतीं।
सभी लेडीज आशु के साथ बहुत कम्फर्ट फील करती थीं।
सुबह जब आशु उनके फ्लैट में दूध देने जाता तो उस समय लेडीज ऐसे कपड़ों में दरवाजा खोलती कि आशु भी निगाहें नीची कर के बाल्टी पकड़ा देता।
पर हाँ … आशु और उनकी मुसकुराती हुई गुडमॉर्निंग जरूर होती।
उन लेडीज के क्लीवेज की गहराई और उसमें से झाँकते मम्मे, निप्पलों की नोकें और मटकती गांड, इन सबका अंदाज़ उनके लेडीज टेलर के अलावा सिर्फ आशु को था।
आशु रात को सोते समय मूठ मारते समय उन्हीं सबको याद करता।
अब आशु उनके मज़ाक़ों में भी शामिल हो जाता।
लेडीज को एक दूसरे की बुराई करने और राज़ जानने का बहुत शौक होता है।
तो आशु मियां इसका पूरा फायदा उठाते।
वो एक दूसरे की बातें बड़ी नमक मिर्च लगा कर गपियाते. पर आशु ने किसी के राज़ कभी किसी से शयर नहीं किए।
इसीलिए सभी लेडीज का उस पर बहुत विश्वास हो गया था।
आजकल हाईसोसाइटी कि लेडीज के अपने किस्से होते ही हैं।
तो आशु सबका राज़दार होता।
कौन मेमसाहब का अफेयर किस्से है, कौन मेमसाब छिपकर स्मोक या ड्रिंक करती है, किसकी अपने पति से कब और क्यों लड़ाई हुई, किसके पति का कहाँ चक्कर चल रहा है, किस मेमसाब का किससे नैनमटक्का होता है, यह सब जानकारी आशु को सबसे ज्यादा होतीं।
एक दिन उसे 109 नंबर वाली रेखा मेमसाब का मेसेज आया कि क्या वो कल दिन के लिए खाली है, उन्हें अपने फ्लैट की सफाई करवानी थी, वो सुबह उससे मिल ले।
रेखा लगभग 35 साल की बहुत हंसमुख और अच्छे स्वभाव की फेशनबेल महिला थी।
उनका एक ही बेटी थी जो बाहर किसी बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी।
रेखा के पति अविनाश उससे बिलकुल उलट साँवले और साधारण व्यक्तित्व के व्यक्ति थे।
वो बड़े अधिकारी थे, अक्सर बाहर दौरों पर रहते।
जब वो यहाँ होते तो हर रात रेखा कि उनसे सेक्स को लेकर कहासुनी होती और फिर रेखा उनसे जबर्दस्ती सेक्स करवाती।
ये भी चर्चे थे कि अविनाश के दौरों पर उनके साथ उनकी एक कलीग जाती है जिसके साथ उनका चक्कर है।
हालांकि अविनाश रेखा के इस इल्ज़ाम को कोरी बकवास कहते।
अब रेखा का साफ फंडा था कि पति सिर्फ ढेर सारा पैसा कमा कर देता रहे और जब मौका हो उसकी बेड पर चुदाई सही से कर दे।
बाकी घर के बाहर वो कुछ भी करे।
अविनाश भी बजाए अपनी सफाई देने के रेखा की जेब पैसों से और उसकी चूत अपने माल से भर कर अपनी जान बचाते रहे।
रेखा को सिगरेट का शौक था, पर ये बात रेखा के अलावा सिर्फ उसकी बेटी या आशु जानता था।
अपने को रेखा खूब मेंटेन रखती।
जब रेखा अविनाश से लड़ती तो दूर खड़ा आशु सोचता कि इतनी खूबसूरत बीबी से अविनाश साहब की पटती क्यों नहीं।
आशु को तो 115 नंबर वाली मोनिका मेम ने चटकारे लेकर रेखा और अविनाश के किस्से बताए, इस गरज से कि कुछ आशु भी उन्हें बताए, पर आशु घाघ था, वो सुम्म मार जाता, जैसे उसे कुछ मालूम ही नहीं।
मोनिका खुद बहुत सेक्सी थीं।
वो जब नीचे पार्क में अपनी सहेलियों के बीच बैठी होती तो बताती कि रेखा और अविनाश का झगड़ा चुदाई को लेकर ही होता है।
रेखा चाहती है कि जब भी अविनाश यहाँ हों उसकी जम कर चुदाई करें, और अविनाश बस एक बार में ही थक कर सो जाते।
मोनिका और रेखा के बीच अश्लील किताबों और विडियोज़ का आदान प्रदान खूब होता था।
खैर जब अगली सुबह आशु 109 नंबर दूध की बाल्टी देने गया तो रेखा ने दरवाजा खोलते हुए कहा- आशु, सभी को दूध देकर मेरे पास होते जाना।
आशु पंद्रह मिनट बाद ही रेखा मेमसाहब के फ्लैट में पहुँच गया।
अविनाश बाहर जाने को तैयार खड़े थे, वो दो दिन के लिए अरुणाचल प्रदेश जा रहे थे।
आशु ने उनका सामान ले लिया और नीचे खड़ी टेक्सी में रख कर वापिस आया।
रेखा रोज की तरह लापरवाही से शॉर्ट्स और टी शर्ट पहने सिगरेट का धुआँ उड़ा रही थी, उसके शरीर की बनावट पूरी अंदर से झांक रही थी।
टेबल पर बैठे बैठे रेखा ने उसे चाय का कप दिया और बैठने को कहा।
वो बोली कि आज पूरे टाइम आशु उसके साथ रहे।
रेखा ने आशु को कुछ बोलने ही नहीं दिया और जबर्दस्ती दो हज़ार का नोट उसकी जेब में रख दिया।
अब आशु क्या कहता … उसने पूछा कि काम क्या है?
तो रेखा बोली कि घर साफ करवाना है, फिर शॉपिंग करनी है। अकेले उससे होगा नहीं।
रेखा ने उसको बोल दिया कि वह सुबह 9 बजे आ जाये और रात को देर भी हो सकती है, खाने की वो चिंता न करे।
आशु को ये मेमसाब अच्छी भी बहुत लगती थीं क्योंकि सोसाइटी में सबसे ज्यादा अच्छे से उससे वो ही बात करती थीं।
चाय पीकर आशु फटाफट चला गया और सारी गाड़ियाँ साफ कर के नहाकर रेखा के फ्लैट पर आ गया।
रेखा वैसे ही कपड़े पहने थी।
उसने आशु को सेंडविच और चाय दी।
नाश्ता करके आशु लग गया सफाई में। रेखा भी उसकी मदद करने लगी।
आशु ने कहा कि धूल धक्कड़ से आप दूर रहो।
पर रेखा नहीं मानी।
आशु साफ सुथरा ट्रेक सूट पहने था तो रेखा ने उससे कहा- ये कपड़े तो तुम्हारे गंदे हो जाएँगे, रुको मैं साहब के कोई कपड़े देती हूँ।
अब कहाँ अविनाश भारी शरीर के कहाँ आशु लंबा पतला समार्ट।
खैर रेखा ने उसे एक बरमुडा और टी शर्ट दी तो आशु ने जैसे तैसे पहन लिया।
अब आशु को डर था कि कहीं बरमूडा खिसक न जाये। वो तो नीचे अंडरवियर भी नहीं पहने था।
आशु का कसरती शरीर स्लीवलेस टी शर्ट से बाहर निकला पड़ रहा था।
रेखा उसे देख कर खूब हंसी।
आशु ने सीढ़ी पर खड़े होकर पंखे, ट्यूब लाइट, झूमर वगैरा साफ किए तो नीचे से रेखा ने उसकी सीधी को पकड़े रखा।
नीचे से रेखा को आशु का मोटा लंड बरमूडा में साफ दिख रहा था।
रेखा को मस्ती छाने लगी। उसके दिमाग में सेक्स का कीड़ा कुलबुलाने लगा।
नीचे कार्पेट उठाने में आशु ने रेखा की मदद चाही तो रेखा ने झुक कर कार्पेट उठाते समय अपने मम्मे आशु को दिखा दिये।
आशु ने मम्मे देख तो लिए पर वो रेखा मेमसाहब की नीयत से अंजान था तो मासूम बना रहा।
उसे लगा कि वो बहुत लापरवाह औरत है।
अब तो रेखा उससे बार बार टकराने का ड्रामा करती रही।
बेडरूम की सफाई में आशु को बेड के नीचे से कल रात का इस्तेमाल किया हुआ कंडोम मिला जिसे उसने बड़ी होशियारी से रेखा से छिपा कर कूड़े में रख लिया।
पर फिर भी उसका रेपर तो रेखा ने ही बड़ी बेशर्मी से उठाया।
बेडरूम साफ करते समय रेखा तो टांगें फैला कर वहीं सोफ़े पर लेट गयी।
आशु का लंड उसकी चिकनी जांघों और झूलते मम्मों को देख कर अब खड़ा हो गया था, जिस पर रेखा की निगाहें पड़ चुकी थीं।
बेड के नीचे की सफाई में आशु को एक मोटी मोमबत्ती मिली, जिसे रेखा ने हँसते हुए उससे ले लिया कि पता नहीं कब की पड़ी है।
हालांकि आशु भी समझ गया कि रेखा मेमसाब इससे अपनी चूत की गर्मी शांत करती हैं।
रेखा ने बियर की दो केन खोल लीं।
आशु के बहुत मना करने पर भी रेखा ने उसे जबर्दस्ती एक केन पिला ही दी।
दोपहर तक अधिकांश काम निबट गया।
अब फ्लैट्स में गंदगी आती भी कहाँ है। सब कुछ तो बंद रहता है।
आशु ने रेखा से एक घंटे की छुट्टी मांगी कि वो नहा कर खाना खा आएगा।
रेखा ने उससे कहा कि खाना उसने ऑर्डर कर दिया है और वो नहा उसी के बाथरूम में ले।
उसे रेखा ने तौलिया दे दिया।
आशु ने इतना खूबसूरत बाथरूम पहली बार इस्तेमाल किया।
वह फटाफट नहाया.
बाहर से रेखा कह रही थी- तुम जल्दी से नहा लो, फिर मैं नहाऊँगी।
आशु जल्दी से टॉवल लपेट के बाहर आया।
कपड़े तो उसने बाहर ही बदले थे।
उसके कसरती जिस्म और चौड़ी छाती को निहारती रेखा जल्दी से बाथरूम में घुस गयी।
आशु ने बाहर अपने कपड़े ढूँढे तो नहीं मिले। शायद सफाई में रेखा ने इधर उधर रख दिये होंगे।
उसने आवाज़ देकर पूछा भी कि मेमसाब मेरे कपड़े कहाँ रखे हैं तो अंदर से आवाज़ आई कि वहीं तो रखे थे तुमने, अभी आकर देखती हूँ।
थोड़ी देर में रेखा की अंदर से फिसलने की आवाज़ आई।
आशु ने एकदम पूछा- मेमसाब क्या हो गया?
रेखा बोली- फिसल गयी हूँ … ज़रा मदद करो।
उसने दरवाजा खोल दिया।
आशु टॉवल लपेटे अंदर गया तो रेखा तौलिया लपेटे खड़ी थी।
तब आशु ने उसे सहारा देने की कोशिश की तो रेखा ने हँसते हुए शावर चला दिया।
तेज पानी से दोनों भीग गए.
रेखा ने अपना और आशु दोनों का टॉवल उतार फेंका।
अब दोनों निपट नंगे थे।
रेखा तो उसका लंबा और मोटा तना हुआ लंड देख सकते में थी।
अब रेखा और आशु दोनों की ही सोचने समझने की ताकत के ऊपर चूत की चुलबुलाहट और लंड की गर्मी हावी हो गयी थी।
रेखा ने आशु को अपने से चिपटा लिया उसके गीले बालों को पीछे से पकड़ कर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिये।
आशु नहीं समझ पाया कि वो क्या करे।
पर उसका लंड भी अब बेकाबू हो रहा था।
उसने अपने दोनों हाथों से रेखा के बालों को पीछे से पकड़ा और अपने होंठों पर रेखा के होंठों की पकड़ को मजबूती दे दी।
अब रेखा उसके होंठों को काटते हुए अपनी जीभ उसके मुंह में घुसा रही थी।
रेखा के मदमस्त मम्मे देख आशु तो मानों पगला गया।
उसने रेखा के मदमस्त मम्मों को नफासत से चूसना शुरू किया.
रेखा के हाथों में उसका लंड मचल रहा था, वह आशु को अपने अंदर लेने के लिए बेचैन हो रही थी।
आशु ने शावर जेल की शीशी लेकर रेखा के मम्मों और पीठ पर उड़ेल दी और कुछ अपनी छाती पर भी लगाया।
अब दोनों के बदन चिकने हो गए। दोनों लिपटते तो साथ ही बदन फिसलते।
रेखा के गोरे गोरे मम्मे अब आशु की छाती पर मसल कर फिसल रहे थे।
आशु ने हेंड शावर से रेखा के मम्मों, सिर, पीठ और आखिर में चूत को धोया।
ऐसे ही रेखा ने आशु को भी नहलाया।
अब आशु को रेखा ने नीचे फर्श पर बैठा दिया और बड़े संभालते हुए अपनी चिकनी चूत में उसका फनफनाता हुआ लंड ले लिया।
ऊपर से दबाव देते हुए उसने पूरा लंड गहराई तक अंदर किया और लगी ऊपर नीचे होने!
आशु भी उसके मम्मे चूस रहा था।
क्या गजब का स्टेमिना था रेखा में!
कुछ देर में ही आशु ने रेखा को अपने ऊपर से हटा कर अपना लंड मालकिन की चूत से निकाल लिया और उसे गोदी में उठा लिया।
रेखा ने भी उसकी गर्दन में बांहें डाल अपनी दोनों टांगें उसकी कमर पर लपेट दीं।
अब रेखा के मम्मे उसकी छाती से भिड़े हुए थे और दोनों के होंठ एक दूसरे में समा जाने की लड़ाई लड़ रहे थे।
आशु का लंड नीचे से रेखा की चूत के अंदर जाने की गुहार लगा रहा था।
अब आशु ने ज्यादा वक़्त न लगाते हुए रेखा को बेडरूम में आहिस्ता से बेड पर लिटा दिया और नीचे खिसक कर रेखा की चिकनी मखमली चूत में जीभ घुसा दी।
हॉट सेक्सी भाभी कसमसा गयी, उसने अपने हाथों से अपने मम्मे मसलने शुरू किए, उसकी दोनों एड़ियाँ अकुलाहट में एक दूसरे पर घूम रही थीं।
उसकी सीत्कारें निकल रही थीं।
वो सोच रही थी कि क्यों उसने इससे पहले इस बाँके मर्द को नहीं बुलाया।
क्यों वो उस खूसट अविनाश की खुशामद करती रही।
इधर आशु का मन तो रेखा के मम्मों पर अटका हुआ था।
उसने हाथ आगे बढ़ाए और रेखा के मम्मे दबोच लिए।
अब वो थोड़ा बेरहम हो चला था।
उसने अपनी जीभ रेखा की चूत से निकाली और अपने होंठ वापिस लेटी हुई रेखा के होंठों से मिला कर धीरे धीरे रेखा के बदन पर तैरने-सा लगा।
उसने अपने आपको अपनी बांहों पर साध रखा था और उसका लंड रेखा की चूत के ऊपर नीचे बार बार तैर-सा रहा था।
उसकी जीभ कभी रेखा की जीभ से चुहल करती, कभी नीचे आते समय रेखा के निप्पलस को चूमते हुए नीचे ऊपर हो जाती।
रेखा अब अपने हाथों से उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत में घुसाने को बेताब थी पर आशु का लंड मेंढक की तरह उसके हाथ से हर बार फिसल जाता और उसकी चूत में आग और भड़क जाती।
दोस्तो ! मैं सेक्सी कहानियाँ सात महीनों Antarvasna से पढ़ रहा हूँ। मैं २५ साल का शादीशुदा मिडल परिवार का राजस्थान के एक छोटे से कसबे का सेक्सी लडका हूँ। मैं कम्प्यूटर इन्जीनियर हूं। मैं मेरी शादी को दो साल हो गये है।
आपने मेरी कहानी “कुंवारी सलहज को प्रेगनेंट किया” पढ़ी और बस एक मेल ही आया। दोसतो ये कहानी आपको लगता है पसंद नही आई। दोस्तो ! मैने वो पहली बार कहानी लिखी थी।
अब एक बार फिर हाज़िर हूँ अपने दोस्तो के लिए एक मसाले से भरी कहानी लेकर !
२००४ के दिसम्बर की छुट्टियों में मेरे मामा की लडकी हमारे घर १०-१५ दिन के लिए आई। वो २४ साल की थी. बहुत सुंदर है, उसका फिगर २८-२४-२८, ऊंचाई ५’३”, वो बहुत सेक्सी है. जब भी मैं उसके बारे मे सोचता तो उसको जमकर चोदने का मन करता लेकिन मैं कुछ नही कर पाता,वो मुझे तिरछी नजर से देखती थी।
बस तो सरदियों के दिन थे। सब लोग {परिवार वाले} रजाई ओढ़ के रात को बातें करते थे। वो मेरी वाली साईड में बैठ गयी। मैने धीरे से उसकी टांग पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। वो मेरी तरफ़ देख के मुस्करायी तो मुझे ग्रीन सिगनल मिल गया। मैने उसके बुबस दबाने शुरु किये वो मस्त हो रही थी। वो कहने लगी- मुझे कम्प्यूटर सिखाओ !
मैने कहा क्लास लगेगी, वो भी रात के ९ बजे के बाद !
वो कहने लगी ठीक है। मैं डिनर करके आपके कमरे में आ जाऊगी। वो रात को मेरे कमरे में आयी। गांव में सब ८:३० बजे तक सब सो जाते है। हमारा घर बहुत बड़ा था। मैने उसे कम्प्यूटर ओन करके दिया। उसको गाने चलाना, ओफ़ीस ,सीडी चलाना बताने लगा। मैं उसको बताते हुए छू रहा था। उसे अजीब सी मस्ती चढ़ रही थी। उसका ध्यान मेरी ओर हो गया। धीरे से मैं सेक्सी फ़िल्म पर क्लिक करके सोने का नाटक करने लगा। उसने वो फ़िल्म एक दम डर के बंद कर दी और फ़िर कुछ देर तक वो कम्प्यूटर चलाने के बाद सोने को जाने लगी। लेकिन उसका मन उस फ़िल्म को देखने का था तो वो उठ कर मेरी ओर देखा तो मैं सोने का नाटक करने लगा। वो इत्मिनान से फ़िल्म देखने लगी।
फ़िल्म देखने के बाद वो गरम हो गई। वो अपने बूबस को मसलने लगी। मैने धीरे से उसको किस किया तो वो चोंक गयी। मैं उसे अपने बैड पर उठा लाया तो वो बोली- भैईया यह क्या कर रहे हो?
मैने कहा जो तुम्हें चाहिए वो दे रहा हूं। मैं उसके बूबस दबाने लगा वो मस्त होती जा रही थी। और मैं होठ किस भी करने लगा। वो बोली ये नीचे मेरे से एक डंडा सा क्या है इतने में उसने मेरे लंड पे हाथ फ़ेरना शुरु किया। मुझे भी मस्ती चढ़ रही थी। मैने धीरे से उसकी सलवार को खोल दिया अब मैं सलवार को पैर से उतारने लगा वो बोली किसी को पता चल गया तो?
मैने कहा तुम बताओगी?
वो बोली- नहीं। मैने उसके और अपने सारे कपड़े उतार दिये। हम दोनो एकदम नंगे थे। मैं उसे बेसबरी से चूम रहा था। वो भी मुझे ‘चूमते रहो’ कह रही थी, इतने दिन पहले क्यों नहीं मिले। मेरा ९” का लंड एकदम खडा था। वो बेसबरी से उसे देखने लगी ओर बोली- इतना बडा पहली बार देखा है।
वो एकदम नंगी मस्त दिख रही थी उसकी छोटी छोटी चूचियाँ पूरी कसी हुई थी। मैने पहली बार उसे नँगी देखा था। मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो मस्त हो कर तडफ़ रही थी। मैं उसके पूरे शरीर को चूमता हुआ उसकी चूत को चूसने लगा। बाद में हम लोग ६९ पोजीसन में आ गये। वो मेरे लण्ड को चूस रही थी,मैं उसकी गोरी साफ़ चूत को जीभ से चूस रहा था।
‘चूसो मेरी चूत को……आ.आ..आआया.आआआआआअ..आआआ..उ.ऊउऊ.ऊ.ईई.ऊई..ऊई आह आआह्ह्छ’ वो मस्त हो रही थी। अब मैं झड़ने वाला था वो भी इस दौरान दो बार झड़ गई थी। मैं उसका नमकीन रस पीता रहा। मेरा रस उसके मुँह में झड़ गया। वो सारा रस मस्ती से पी गई।अब मैं फ़िर उसकी चूचियाँ चूसने लगा। वो बहुत खुश थी। मैने एक उँगली उसकी चूत में डाली। वो मेरे लँड को फ़िर चूसने लगी और मेरा ९” का लँड खडा हो गया।
अब वो बोली कि मुझे कुछ हो रहा है जल्दी करो, मेरी प्यास बुझाओ।
मैने कहा- इतनी भी जल्दी क्या है? मैने कहा दर्द बहुत होगा ! झेल लोगी?
वो बोली- चाहे मेरी चूत फ़ट जाये, मैं चाहे जितना भी चिल्लाऊँ, छोडना मत, बस अब जल्दी करो, चोद डालो, फ़ाड डालो मेरी चूत, जल्दी करो।
मैने ९” के लंड पर तेल लगाया और थोड़ा सा उसकी चूत पर लगा के, चूत पर लंड रखा और धक्का दिया तो लंड २” अंदर ही गया था कि वो चिल्लाने लगी- छोड दो, बस करो, मर जाऊगी।
मैं रुक गया और फिर वो शाँत हो गयी। मैने एक जोर से झटका मारा और चूत की सील तोड़ते हुए अँदर घुस गया। वो चिल्लाती रही, मैं रुक गया और उसके बूब्स चूसने लगा। वो मस्त हो रही थी। थोड़ी देर में मैंने झटके लगाने शुरु किये। वो भी मेरा साथ देने लगी थी। वो चूतड़ उठा उठा के चुद रही थी। २००-२५० झटके लगाने के बाद मैं झड़ गया, इस दौरान वो तीन बार झड़ चुकी थी।
वो रात ३१ दिसम्बर २००४ की रात थी, मैने उसे नये साल के जश्न में पूरी रात में लगभग १५ बार चोदा। वो अब पूरी तरह से टूट चुकी थी। उससे उठना ही मुश्किल हो गया था। सुबह के ६ बज चुके थे। वो उठ के अपने कमरे में चली गयी। ये सिलसिला १० दिन तक चलता रहा। वो पूरी पूरी रात मस्त होकर चुदवाती थी। १० दिन बाद वो अपने घर चली गयी। पर जब भी मौका मिलता था वो चुदने को तैयार रहती थी।
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