Our site can help you find a professional massage girl in Karimganj who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.
Find Related Category Ads
Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Karimganj that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.
Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Karimganj massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.
Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Karimganj who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.
Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Karimganj massage service, which makes it easier to obtain more customers.
There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.
A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Karimganj massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.
This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Karimganj who are good at deep tissue treatments that function effectively.
Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Karimganj employ the use of custom oil preparations to make you feel good.
A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Karimganj helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.
Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Karimganj
Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Karimganj at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:
Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.
Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.
When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.
The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.
All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.
To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.
Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.
You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.
It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.
Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.
मैं रेलगाडी में मुंबई से हावडा जा रहा Sex Storiesथा. मेरे सामने वाली सीट पर एक सुंदर महिला बैठी थी. उसने नीली साडी पहनी हुई थी, वो पतली दुबली थी मगर उसके दूध बड़े बड़े थे, ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज़ फाड़ कर बाहर आने को बेताब हैं। उसका रंग भी बिल्कुल दूध की तरह सफ़ेद था। उसकी उमर कोई 28 साल की होगी।
मैंने ध्यान दिया कि वो मुझे बहुत देर से देख रही है तो मैंने भी उसकी तरफ़ देख कर थोड़ा मुस्करा दिया।
फिर वो मुझसे अपनी टिकट दिखाते हुए पूछी कि ज़रा देखो मेरा रिज़र्वेशन है कि नहीं?
मैंने देखा उनका वेटिंग टिकेट था।
मैंने कहा कोई बात नहीं आप मेरे सीट में सो जाना।
फिर मैंने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम रूपा है।
रूपा की खूबसूरती देख कर मेरे मुंह और लंड दोनों ही जगह से पानी निकल रहा था।
मैं मन ही मन उसे चोदने का प्लान बनाने लगा। ये सरदी की रात थी इसलिये सभी लोग कम्बल ढक कर सो रहे थे।
रात को हम खाना खाने के बाद मैंने रूपा से कहा के आप सो जाओ मैं बैठता हूं।
उसने कहा नहीं तुम भी कम्बल ओढ कर सो जाओ। और फिर वो ट्रेन की उस छोटी सी सीट पर इस तरह से लेट गये कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थी और चेहरा दूसरी तरफ़।
फिर मैं उसके सर की तरफ़ पैर को रख कर लेट गया और मैं उसकी गांड की तरफ़ मुंह घुमा कर सो गया। अब लंड बिल्कुल उसकी गांड की दरार में था उसकी गोल गोल गांड और मेरा लंड एक दूसरे से चिपके हुए थे।
रूपा के गोरे गोरे पैर भी बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने थे।
मेरे लंड को समझाना अब मुश्किल हो रहा था।
मैंने अपने हाथ उसके पैरों पर रख कर थोड़ा सहलाना शुरु किया और गर्म गर्म सांसो के साथ उसके पैरों को चूमने लगा।
थोड़ी देर बाद वो मेरी तरफ़ मुड़ गयी। अब उसका चेहरा भी मेरे पैरों की ओर था।
उसने मेरे पैरों को ज़ोर से पकड़ का अपने बूब्स से रब करना शुरु कर दिया।
फिर मैंने भी उसके पैरों को सहलाते हुए जांघ तक जा पहुंचा और जब मैं उसकी चूत पर हाथ रखा तो ऐसा लगा मेरा हाथ जल गया। उसकी चूत भट्टी की तरह गर्म हो रही थी और गर्म गर्म चूत बिल्कुल गीली हो रही थी।
मैंने उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँडालनी शुरु कर दी, उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे जिनको मैं अपनी ऊँगलियों से सहला रहा था।
फिर धीरे धीरे कम्बल के अन्दर ही मैं अपना मुंह उसके चूत तक लेकर गया और उसकी चूत को पीने की कोशिश करने लगा।
उसने अपने एक पैर को उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया। अब उसकी बुर बिल्कुल मेरे मुंह में थी मैं अपनी जीभ को उसके बुर के चारों तरफ़ घुमाना शुरु कर दिया वो भी अपनी कमर धीरे धीरे हिलाना शुरु कर दी।
मैंने भी अपने पैर को उठा कर अपना लंड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया।
वो बड़े प्यार से लंड को चूसने लगी।
हम अब बिल्कुल 69 की पोजिशन में थे लेकिन ऊपर नीचे नहीं थे बल्कि साइड बाइ साइड थे और हम जो भी कर रहे थे धीरे धीरे कर रहे थे क्योंकि ट्रेन में किसी को पता न चले।
वो अब कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपने कमर को उठा का अपने बुर को मेरे मुंह में रगड़वा रही थी।
अचानक उसने मेरे सर को अपने हाथ से अपनी बुर में ज़ोर से दबा दिया और कमर को मेरे मुंह में दबा दिया और ढीली पर गयी।
मैं उसके बुर की गर्मी धीरे धीरे अपने मुंह से चाट चाट कर साफ़ किया। वो अब भी मेरे लंड को चूस रही थी। मैं भी अब जोर जोर से अपने लंड को उसके मुंह में घुसा रहा।
मेरे लंड का पानी भी अब बाहर निकलने वाला था मैंने ज़ोर से उसके बुर में अपना मुंह घुसा दिया और मेरे लंड से पानी निकलना शुरु हुआ तो 8-10 झटके तक निकलता ही रहा।
उसने मेरे लंड के पानी को पूरा अपनी मुंह में लेकर पी गयी।
थोड़ी देर के बाद मैं उठा और टोइलेट गया।
मैंने अपनी पैंट उतार दी फिर अपनी चड्ढी भी उतार दी। अपने लंड को अच्छी तरह से साफ़ किया और पैंट पहन ली।
वापस आकर मैंने अपनी चड्ढी बैग में डाल दी। फिर वो भी टोइलेट जाकर आयी।
और मेरी तरफ़ मुंह करके सो गयी और कम्बल ढक ली। अब उसके बूब्स मेरी छाती से लग रहे थे। मैंने उसके ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। वो ब्रा नहीं पहनी थी। ब्रा को शायद टोइलेट में ही उतार कर आयी थी।
मैं उसके गोल गोल बूब्स को अपने हाथ से दबाने लगा और उसके निप्पल को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा।
उसने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को उठा कर कमर के ऊपर रख लिया।
अब उसकी कमर के नीचे कुछ भी नहीं था, मेरा हाथ उसके मक्खन जैसी जांघों को तो कभी उसके बुर को प्यार से सहला रहा था और रुपा अपने हाथों से मेरे लंड को सहला रही थी।
ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा।
मेरा लंड एक बार फिर से उसकी बुर की गहराई को नापने के लिये मचलने लगा था। मैंने धीरे से रूपा से पलट कर सोने को कहा। रुपा धीरे से पलट गयी। अब उसकी नंगी गांड की दरार मेरे लंड से चिपकी हुई थी।
मैंने धीरे से अपने लंड को हाथ से पकड़ कर पीछे से उसकी गांड के छेद में रखा और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी।लेकिन वो चीखी नहीं। वो जानती थी कि ट्रेन में सब सो रहे लोगों को शक न हो जाये।
मैंने धीरे से एक और धक्का मारा और लंड पूरा का पूरा अन्दर घुस गया। फिर मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को मसलने लगा। रूपा की चिकनी चिकनी गांड मेरे पेट से रगड़ खा रही थी। और मैं उसे चोदे जा रहा था।
फिर चार पांच मिनट के बाद मैंने अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। और जोर जोर से रूपा को चोदने लगा।
रूपा भी अपनी गांड हिला हिला कर चुदवा रही थी।
अचानक रूपा अपनी गांड को मेरे लंड पे जोर से दबा कर रुक गयी। मेरा लंड भी पिचकारी की तरह पानी छोड़ना शुरु कर दिया। लंड और बुर दोनों का पानी गिर जाने के बाद दोनों शान्त हो गये।
लेकिन हमारी चुदाई सुबह तक चलती रही। हमने रात भर में सात बार चुदाई की। और किसी को पता भी नहीं चला।
फिर सुबह मेरा स्टेशन आ गया। और मैं उतर गया। उसे आगे जाना था तो वो चली गयी और जाते जाते अपना फोन नम्बर भी दे गयी। Sex Stories
मैं मिसेज रागिनी हूँ दोस्तो.
मैं 30 साल की एक मद मस्त, जवान और पढ़ी लिखी औरत हूँ।
मेरी शादी दो साल पहले आनंद नाम के एक लड़के से हो गई थी।
आनद भी बड़ा स्मार्ट और हैंडसम लड़का है.
वैसे मैं कानपुर की रहने वाली हूँ।
मेरी ससुराल भी कानपुर में ही है मगर मैं आजकल अपने पति के साथ मुंबई के कोलाबा एरिया में रह रही हूँ।
मैं 5′ 5″ के कद वाली हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और चंचल स्वभाव की हूँ।
देखने में सेक्सी, खूबसूरत और हॉट हूँ।
ऐसा मैं नहीं कह रही हूँ लोग कहते हैं।
मेरे मम्मे थोड़ा बड़े बड़े साइज के हैं.
मेरी कमर पतली है, मेरी बाहों की गोलाई बड़ी मनमोहक है इसलिए मैं अक्सर स्लीवलेस कपड़े ही पहनती हूँ।
मेरे कूल्हे थोड़ा बड़े बड़े है जिससे मुझे ठुमके लगाने में बड़ी आसानी होती है।
मेरी जांघें केले के तने जैसी हैं और मेरे चूतड़ भी बड़े आकर्षक हैं।
साथ ही मेरी गांड़ भी ससुरी बड़ी मस्त है.
और फिर गरम चूत के तो कहने ही क्या!
उसके बारे में मैं आपको आगे बताऊंगी।
शादी के पहले कॉलेज के दिनों में मैं दो बातों के लिए बहुत मशहूर थी।
एक तो पढ़ाई के लिए और दूसरे चुदाई के लिए!
मतलब यह कि मैं जितनी बातें पढ़ाई के बारे में करती थी उतनी ही बातें चुदाई के बारे में भी करती थी।
चुदाई में सबसे ज्यादा लण्ड की बातें होतीं थीं।
मैं ही नहीं, सभी लड़कियां खुल कर लण्ड की बातें करती थीं।
‘लण्ड का साइज और लण्ड की बनावट’ कभी ख़त्म न होने वाला टॉपिक था।
कोई ऐसा दिन न था जब लण्ड पर कोई बात न होती हो.
लड़कियां वैसे भी लड़कों से ज्यादा गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं।
वैसे भी हर लड़की के मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा जैसे शब्द निकलते ही रहते थे।
उसके साथ साथ गालियां भी जैसे बहन चोद, मादर चोद, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, भोसड़ी वाली, बुर चोदी, गांडू और भी बहुत कुछ सबके मुंह से सुनाई पड़ता था।
वो सच में बड़े अच्छे दिन थे यार!
मैं याद करती हूँ तो सिहर जाती हूँ।
बस कॉलेज के दिनों में ही मैंने लण्ड पकड़ना शुरू किया, लण्ड मुंह में लेना शुरू किया और फिर लण्ड का सड़का मारना भी शुरू किया।
तभी मुझे एक सहेली ने लण्ड का वीर्य पीने की सलाह दी और उसके फायदे बताये।
उसने मुझे लण्ड का वीर्य पीते हुए दिखाया।
बस मैं भी वही करने लगी.
तो एक साल में ही मेरी चूचियाँ दूनी हो गईं।
मुझे लण्ड पीने में मज़ा आने लगा.
फिर एक दिन लण्ड चूत में पेलवाना भी शुरू कर दिया।
जी हां दोस्तो, मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
यह बात किसी को नहीं मालूम सिर्फ आपको बता रही हूँ।
किसी से मत कहना प्लीज!
मैं कॉलेज में पढ़ती थी तो हमारे पड़ोस में एक प्रशांत नाम के अंकल रहते थे।
वे बड़े मस्त, गोरे चिट्टे, स्मार्ट और हैंडसम थे।
हमारे घर आते जाते थे।
मैं कभी कभी उनके घर जाकर इंग्लिश पढ़ती थी।
अंकल बड़े प्यार से पढ़ाते भी थे।
मैं मन ही मन अंकल का बड़ा आदर और सम्मान करती थी।
मेरी जब शादी हो गयी तो हमारा संपर्क टूट गया।
वे कानपुर में ही थे और मैं यहाँ मुंबई आ गई।
मेरी शादी को दो साल हो गये हैं. इन दो सालों में मुझे अपने पति के लण्ड के अलावा कोई और लण्ड नहीं मिला।
मैं धीरे धीरे किसी पराये मरद के लण्ड के लिए तरसने लगी।
मेरी चूत मुझे बहुत परेशान करने लगी।
मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा था।
मुझे कॉलेज के लण्ड बहुत याद आ रहे थे।
एक दिन शाम को मैं अपनी दोस्त अंजलि के साथ चौपाटी पर घूम रही थी।
अचानक किसी के मुंह से निकला- अरे रागिनी तुम यहाँ?
मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो बोली- आप प्रशांत अंकल है न?
वे बोले – हां रागिनी, मैं प्रशांत ही हूँ।
मैंने कहा- अरे अंकल, कहाँ खो गए थे आप? मैं आपको बहुत याद करती हूँ … आपसे मिलना चाहती थी। आपसे बातें करना चाहती थी। पर यह बताओ यहाँ मुंबई में कैसे?
वे बोले- यहाँ कोलाबा में मेरी बेटी है। मैं उसी के यहाँ ठहरा हुआ हूँ।
मैंने कहा- अरे वाह, मैं तो कोलाबा में ही रहती हूँ।
वे बोले- फिर तो हमारा मिलना होता रहेगा।
मैंने कहा- होता रहेगा ये तो आगे की बात है, मेरे साथ अभी चलो मेरे घर!
फिर मैंने उन्हें अंजलि से मिलवाया और कहा- यह मेरी दोस्त अंजलि है। यह भी साथ चलेगी।
फिर हम तीनों लोग गाड़ी में बैठ कर घर आ गए।
मेरा पति एक हफ्ते के लिए विदेश गया था।
मैंने दोनों को बड़े प्यार से बैठाया और झुक कर पानी दिया।
झुकने से मेरी साड़ी का पल्लू गिर पड़ा।
मेरी छोटी सी ब्रा के अंदर से मेरी बड़ी बड़ी चूचियाँ अंकल को दिख गईं।
वे अपने होंठ चाटने लगे।
मुझे बहुत अच्छा लगा, मैंने राहत की सांस ली। मुझे पराये मरद के लण्ड का रास्ता दिख गया।
मैंने ठान लिया कि आज नहीं तो कल मैं अंकल का ओल्ड लंड अपनी गरम चूत में ले ही लूंगी।
सुना है कि बड़े बड़े लोगों के लण्ड भी बड़े बड़े होते हैं।
इतने में नकल बोले- रागिनी, तुम पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो। ज्यादा सेक्सी दिखने लगी हो. शादी के बाद तुम्हारा चेहरा ज्यादा खिल गया है।
मैंने कहा- वो तो मैं नहीं जानती अंकल … लेकिन शादी के बाद मैं बहनचोद ज्यादा बोल्ड हो गई हूँ। अब मैं किसी भोसड़ी वाले से शर्माती नहीं हूँ और डरती भी नहीं हूँ। बेशरम हो गई हूँ मैं! मेरे पति के न रहने पर मुझे कोई भी मादरचोद हाथ नहीं लगा सकता!
वे बोले- क्या मैं भी नहीं लगा सकता रागिनी?
मैंने हंस कर कहा- तुम्हारी बात और है अंकल! तुम तो मेरे साथ जबरदस्ती भी कर सकते हो.
वे हंसने लगे।
इतने में अंकल का अचानक फोन आ गया तो वे चाय पीकर चले गये।
उनके जाने के बाद अंजलि बोली- यार रागिनी, मुझे लगता है कि तेरे अंकल लण्ड बड़ा सॉलिड होगा। उनकी नज़रें बता रहीं थीं कि वे तुम्हें अपना लण्ड पकड़ाना चाहते हैं. उन्हें तुमसे प्यार हो गया है।
मैंने कहा- अरे यार अंजलि, मैं खुद उनका लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। मैं तो आज ही पकड़ लेती उनका लण्ड … लेकिन एक फोन ने सब काम बिगाड़ दिया बहनचोद!
अंजलि बोली- अच्छा पकड़ना तो फिर मुझे भी दिलवा देना उनका लण्ड! मैं भी लण्ड की प्यासी हूँ।
दूसरे दिन शाम को फिर घंटी बज उठी।
मैंने दरवाजा खोला तो बोली- अरे आप अंकल … अंदर आओ न प्लीज!
मैंने उन्हें बैठाया और फिर एक गिलास पानी का रखा।
आज मेरी चूचियाँ कुछ ज्यादा ही खुली हुईं थीं।
अंकल ने पानी पिया और बोले- थैंक यू रागिनी!
मैं उसके सामने बैठ गई।
इस समय मैं केवल ब्रालेट पहने थी नीचे एक छोटी सी टाइट नेकर।
मैं एकदम एक मॉडर्न गर्ल बनी हुई थी।
फिर मैंने पूछा- अंकल बोलो क्या पियोगे, ठण्डा या गर्म?
वे बोले- आज तो मैं व्हिस्की पियूँगा। तुम मेरा साथ दोगी तो!
मैंने कहा- हां जरूर दूँगी।
उन्होंने अपनी जेब से हाफ निकाला और मुझे दिया.
फिर क्या … हम दोनों व्हिस्की पीने लगे, सिगरेट भी पीने लगे.
हमारा मूड बन गया।
मैंने कहा- आज मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ रहें हैं अंकल!
फिर क्या … थोड़ा नशा हुआ तो दिल की बातें बाहर निकलने लगीं।
मैंने कहा- अंकल कल आपका फोन आया था. कोई खास बात थी क्या?
उन्होंने कहा- नहीं, कोई खास बात नहीं थी। पर हां, कल मुझे तुम्हारी गालियां बड़ी अच्छी लग रहीं थी रागिनी। मन करता था कि बस सुनता जाऊं? तेरी दोस्त न होती तो मैं तुमसे खुल कर बातें करता.
मैंने कहा- तो फिर आज कर लो न खुल कर बातें बहनचोद? आज तो वह बुरचोदी अंजलि नहीं है।
उन्होंने सिगरेट का एक कश लिया और मेरे मम्मों पर धुंआ छोड़ दिया।
मैं कहाँ चूकने वाली थी, मैंने भी कश लिया और उनके लण्ड पर धुआं छोड़ दिया।
वे बोले- तुम बहुत समझदार लड़की हो रागिनी!
मैंने कहा- हां, तभी तो मैंने तुम्हारे सवाल का जबाब देकर अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी।
वे बोले- रागिनी, एक बात है कि हमारे तुम्हारे बीच में उम्र का बड़ा अंतर है।
मैंने कहा- उम्र की माँ का भोसड़ा अंकल! औरत उम्र नहीं देखती, औरत मर्द का हथियार देखती है अंकल। हथियार टना टन हो तो उम्र की माँ चूत!
वे बोले- रागिनी, तुम इतनी हॉट हो कि मैं कल रात भर सो नहीं पाया।
मैंने कहा- अरे यार, मुझे भी तुम्हारी बड़ी याद आती रही रात भर!
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया तो मैं भी उसकी जांघ पर हाथ रगड़ने लगी।
तब उन्होंने मेरी चुम्मी ले ली और मेरी नंगी टांगों पर अपना हाथ फिराने लगे।
फिर मेरा भी हाथ अपने आप उसके लण्ड तक पहुँच गया।
मैं उनकी पैंट के ऊपर से ही लण्ड टटोलने लगी।
मेरे मुंह से निकला- तेरा हथियार तो मादर चोद बड़ा जबरदस्त लग रहा है अंकल?
मैं मन ही मन अंकल से पूरी तरह फंस चुकी थी।
मुझे बिना उनका लण्ड देखे एक मिनट का भी चैन न था।
मैं जल्दी से जल्दी उन्हें नंगा करना चाहती थी और इसी आवेश में मैंने उनकी शर्ट उतार दी।
उनके चौड़े कंधे बलिष्ठ भुजाएं, चौड़ी छाती और पूरा कसरती बदन देख कर मैं उन पर मोहित हो गयी।
तब तक उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल डाला तो मेरी दोनों मम्मे उसके सामने छलक पड़े।
वे मम्मे देख कर मस्त हो गये, उन्हें पकड़ कर सहलाने लगे, मसलने और चूमने लगे।
अंकल मेरे निप्पल मुंह में भर कर चूसने लगे।
मैं भी उत्तेजित होने लगी, मज़ा लेने लगी।
फिर बड़ी बेशर्मी से मैंने उनकी पैंट उतार दी उनकी नेकर भी खोल डाला।
नेकर खुलते ही लौड़े मियां ताल ठोकते हुए बाहर आ गए।
मैंने उसे देखा तो सन्न रह गयी।
सांप की तरह फनफनाकर खड़ा हो गया था उनका मोटा तगड़ा लण्ड।
लण्ड का अंडाकार 3″ का चिकना टोपा एकदम झकास लग रहा था।
मैंने उसे पकड़ा चूमा और बोली- वाह क्या मरदाना लण्ड है अंकल? ऐसा लौड़ा बहुत कम लोगों का होता है। तुम बड़े लकी हो. तुम्हारा लण्ड लाखों में एक है. मैं तो तुम्हारे लण्ड पर मर मिटी। मेरा तो दिल आ गया इस मादरचोद लण्ड पर! क्या मस्ताना लण्ड है भोसड़ी का! मज़ा आ गया यार ऐसा लौड़ा देख कर!
तब तक उन्होंने मेरी छोटी सी नेकर उतार कर फेंक दी।
मैं माँ की लौड़ी उसके आगे एकदम नंगी हो गयी।
मेरा यह पहला मौका था जब मैं शादी के बाद किसी पराये मर्द के आगे नंगी खड़ी थी वह भी उसका नंगा लण्ड पकड़े हुए!
मैं किसी पराये मर्द को पहली बार नंगा देख भी रही थी।
मुझे किंचित मात्र भी न शर्म थी और न झिझक … मैं बिंदास अपनी जवानी का मज़ा लूटने लगी.
मैंने मन में कहा कि मैं झांट किसी की परवाह नहीं करूंगी। अब तो मैं एक नहीं, कई लण्ड का मज़ा लूंगी।
बस मैं अंकल का लण्ड बड़े प्यार से चाटने लगी और अंकल भी उसी प्यार से मेरी फुद्दी चाटने लगे।
मेरी चूत बहुत गर्मा चुकी थी।
अंकल उसमें बार बार अपनी उं गली घुसेड़ रहे थे।
मैंने धीरे से अपनी टाँगें फैलाई तो मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी.
अंकल को यही चाहिए था।
उन्होंने फ़ौरन लण्ड पेल दिया अंदर और बिना रुके चोदने लगे मुझे!
मैं भी अपने कॉलेज के दिनों को याद कर कर के चुदवाने लगी … मैं एन्जॉय करने लगी।
मुझे लगा कि आज मैं सच में अपनी सुहागरात मना रही हूँ।
अपनी सुहागरात में भी मुझे इतना मज़ा नहीं आया था।
मैं बोली- अंकल, मुझे अपनी बीवी समझ कर चोदो। मैं ही तुम्हारी असली बीवी हूँ, मुझे चोदो। मेरी बुर चोदो, मेरी चूत चोदो, मेरी गांड चोदो। मैं तुम्हारी ही हूँ, जैसे चाहो वैसे चोदो। तुम्हारा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है यार!
वे बोले- ले भोसड़ी की रागिनी, आज मैं फाड़ डालूँगा तेरी चूत … भोसड़ा बना दूंगा मैं तेरी चूत का! मैंने जब मुंबई में तुझे पहली बार देखा था तो मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. और आज देख वही लण्ड तेरी चूत में घुसा है। तेरी माँ की चूत … तू भोसड़ी वाली एकदम रंडी है और मैं रंडियां खूब चोदता हूँ। मैं मुंबई में रंडियां चोदने ही आता हूँ। मैं हर रोज़ 2/3 लड़कियों की चूत में लण्ड पेलता हूँ।
अंकल को जोश आ गया था, वे बोलते रहे- मैं खुद बहुत बड़ा हरामजादा हूँ। मैं रंडीबाज हूँ, लौडियाबाज़ हूँ। मैं अपने दोस्तों की बीवियां फंसा फंसा कर चोदता हूँ। बीवियां भी बुरचोदी मेरे लण्ड की दीवानी है और बार बार मुझसे चुदवाने आतीं हैं।
सच में अंकल बड़े मूड में थे और मस्ती से अपनी ही पोल खोल रहे थे।
चुदाई का नशा शराब के नशे से ज्यादा ताकतवर होता है।
दूसरे की बीवी चोदने के नशे में वह सब सच उगल देता है।
मुझे अंकल की बातें, उनका जोश, उनकी गालियां सब कुछ बड़ा अच्छा लग रहा था।
मैं अपनी गरम चूत में ओल्ड लंड एन्जॉय कर रही थी।
मेरा मन सातवें आसमान पर था।
इस तरह उन्होंने मुझे हर तरफ से चोदा और मैं भी खूब मन से चुदी।
मैंने उसे रात में रोक लिया और तब उन्होंने मुझे रात में 3 बार चोदा।
सुबह उठ कर वे चले गये।
उस दिन मुझे अहसास हुआ कि बड़े लोगों से चुदवाने में ज्यादा मज़ा आता है।
मेरा नाम है कोमल। मैं Anatrvasna बीस साल की हूँ। दो साल पहले मेरी शादी राहुल से हुई।
परिवार में मैं, मेरे पति राहुल, मेरे ससुर जी रसिकलाल और मेरा छोटा सा बेटा किरण हैं। ससुर का बहुत बड़ा बिज़नेस है और हमें किस चीज़ की कोई कमी नहीं है।
मेरे पिताजी का परिवार बहुत ग़रीब था। चार बहनों में से मैं सबसे बड़ी संतान थी। मेरी माँ लम्बी बीमारी के बाद मर गई। तब मैं सोलह साल की थी। माँ के इलाज के लिए पिताजी ने क्या कुछ नहीं किया। ढेर सारा कर्ज़ा हो गया। पिताजी रेवेन्यू ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करते थे। इनकी आमदनी से मुश्किल से गुज़ारा होता था। मैं छोटे-मोटे काम कर लेती थी। आमदनी का और कोई साधन नहीं था कि हम कर्ज़ा चुका सकें। लेनदार लोग तकाज़े करते रहते थे। फिक्र से पिताजी की सेहत भी बिगड़ने लगी थी। ऐसे में मेरे सम्भावित ससुर रसिकलाल ने मदद दी। उनका इकलौता बेटा राहुल कुँवारा था। दिमाग़ से थोड़ा सा पिछड़ा होने के कारण उसे कोई कन्या नहीं देता था। रसिकलाल की पत्नी भी छः माह पहले ही मर चुकी थी। घर सँभालने वाली कोई नहीं थी। उन्होंने जब कर्ज़ के बदले में मेरा हाथ माँगा तो पिताजी ने तुरन्त ना बोल दी। मैं हाईस्कूल तक पढ़ी हुई थी। आगे कॉलेज में पढ़ने वाली थी। मेरे जैसी लड़की कैसे राहुल जैसे लड़के के साथ ज़िन्दगी गुज़ार सकेगी?
इस पर मैंने पिताजी से कहा,”आप मेरी फिक्र मत कीजिए। मेरी तीनों बहनों की सोचिए। आप रिश्ता मंज़ूर कर लीजिए, और सिर पर से कर्ज़ का बोझ दूर कीजिए। मैं सँभाल लूँगी।”
अपने हृदय पर पत्थर रख कर पिताजी ने मुझे राहुल से ब्याह दिया। तब मैं १८ साल की थी। मैं ससुराल में आई। पहले ही दिन ससुरजी ने मुझे पास बिठा कर कहा: “देख बेटी, मैं जानता हूँ कि राहुल से शादी करके तूने बड़ा बलिदान दिया है। मैंने तेरे पिताजी का कर्ज़ा पूरा करवा दिया है। लेकिन तूने जो किया है उसकी क़ीमत पैसों में नहीं गिनी जा सकती। तूने तेरे पिताजी पर और साथ ही मुझपर भी बड़ा उपकार किया है।”
मैंने कहा,”पिताजी…”
उन्होंने मुझे बोलने नहीं दिया। कहने लगे: “पहले मेरी सुन ले। बाद में कहना… जो तेरा जी चाहे… ठीक है? तू मेरी बेटी बराबर है। ख़ैर, मुझे साफ़-साफ़ बताना पड़ेगा।”
उन्होंने नज़रें फिरा लीं और कहा,”मैंने राहुल का वो देखा है, मुझे विश्वास है कि वो तेरे साथ शारीरिक सम्बन्ध बना सकेगा और बच्चा पैदा कर सकेगा। मेरी यह विनती है कि तू ज़रा सब्र से काम लेना, जैसी ज़रूरत पड़े वैसी उसे मदद करना।”
यह सब सुनकर मुझे शरम आती थी। मेरा चेहरा लाल हो गया था और मैं उनसे नज़रें नहीं मिला पा रही थी। मैंने कुछ न कहा।
वो आगे बोले,”तुम्हारी सुहागरात परसों है, आज नहीं। मैं तुम्हें एक क़िताब देता हूँ, पढ़ लेना। सुहागरात पर काम आएगी। और मुझसे शरमाना मत, मैं तेरा पिता जैसा ही हूँ।”
मुझसे नज़रें चुराते हुए उन्होंने मुझे किताब दी और चले गए। किताब कामशास्त्र की थी। मैंने ऐसी किताब के बारे में सुना था लेकिन कभी देखी नहीं थी। किताब में चुदाई में लगे जोड़ों के चित्र थे। मैं ख़ूब जानती थी कि चुदाई क्या होती है, लंड क्या होता है, छुटना क्या है इत्यादि। फिर भी चित्रों को देखकर मुझे शरम आ गई। इन में से कई तस्वीरें तो ऐसी थी जिनके बारे में मैंने तो कभी सोचा तक ना था। एक चित्र में औरत ने लंड मुँह में लिया हुआ था। छिः छिः, इतना गंदा? दूसरे में उसी औरत की चूत आदमी चाट रहा था। एक में आदमी का पूरा लंड औरत की गाँड में घुसा हुआ दिखाया था। कई चित्रों में एक औरत दो-दो आदमी से चुदवाती दिखाई थी। ये देखने में मैं इतनी तल्लीन हो गई कि कब राहुल कमरे में आए, वो मुझे पता ना चला। आते ही उसने मुझे पीछे से मेरे आँखों पर हाथ रख दिया और बोले,”कौन हूँ मैं?”
मैंने उनकी कलाईयाँ पकड़ लीं और बोली,”छोड़िए, कोई देख लेगा।”
मुझे छोड़कर वह सामने आए और बोले: क्या पढ़ती हो? कहानियों की किताब है?”
अब मेरे लिए समस्या हो गई कि उन्हें वह किताब मैं कैसे दिखाऊँ। किताब छुपा कर मैंने कहा,”हाँ, कहानियों की किताब है। रात में आपको सुनाऊँगी।”
खुश होकर वो चला गया। कितना भोला था! उसकी जगह कोई दूसरा होता तो मुझे छेड़े बिना नहीं जाता। दो दिन बाद मैंने देखा कि लोग राहुल की हँसी उड़ा रहे थे। कोई-कोई भाभी कहती: देवरजी, देवरानी ले आए हो, तो उनसे क्या करोगे?
उनके दोस्त कहते थे: भाभी गरम हो जाए और तेरी समझ में न आए तो मुझे बुला लेना।
एक ने तो सीधा पूछा: राहुल, चूत कहाँ होती है, वो पता है?
मुझे उन लोगों की मज़ाक पसन्द ना आई। अब मैं ससुरजी के दिल का दर्द समझ सकी। मुझे उन दोनों पर तरस भी आया। मैंने निर्णय किया कि मैं बाज़ी अपने हाथ में लूँगी, और सबकी ज़ुबान बन्द कर दूँगी, चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े।
तीसरी रात सुहागरात थी। मेरी उम्र के दो रिश्ते की ननदों ने मुझे सजाया-सँवारा और शयनकक्ष में छोड़ दिया। दूसरी एक चाची राहुल को ले आई और दरवाज़ा बन्द करके चली गईं। मैं घूँघट में पलंग पर बैठी थी। घूँघट हटाने के बदले राहुल नीचे झुक कर झाँकने लगा। वो बोला: देख लिया, मैंने देख लिया। तुमको मैंने देख लिया। चलो अब मेरी बारी, मैं छुप जाता हूँ, तुम मुझे ढूँढ़ निकालो। वह छोटे बच्चे की तरह छुपा-छुपी का खेल खेलना चाहता था। मुझे लगा कि मुझे ही शुरुआत करनी पड़ेगी।
घूँघट हटा कर मैंने पूछा: पहले ये बताओ कि मैं तुम्हें पसन्द हूँ या नहीं?
राहुल शरमा कर बोला: बहुत पसन्द हो। मुझे कहानियाँ सुनाओगी ना?
मैं: ज़रूर सुनाऊँगी। लकिन थोड़ी देर तुम मुझसे बातें करो।
राहुल: कौन सी कहानी सुनाओगी? वो किताब वाली जो तुम पढ़ रहीं थीं वो?
मैं: हाँ, अब ये बताओ कि मैं तुम्हारी कौन हूँ?
राहुल: वाह, इतना नहीं जानती हो? तुम मेरी पत्नी हो, और मैं तेरा पति।
मैं: पति-पत्नी आपस में मिलकर क्या करते हैं?
राहुल: मैं जानता हूँ, लेकिन बताऊँगा नहीं।
मैं: क्यों?
राहुल: वो जो सुलेमान है ना! कहता है कि पति-पत्नी गंदा करते हैं!
मैंने यह नहीं पूछा कि सुलेमान कौन है, मैंने सीधा पूछा: गंदा मायने क्या? नाम तो कहो, मैं भी जानूँ तो।
राहुल: चोदते हैं।
लम्बा मुँह करके मैं बोली: अच्छा?
बिन बोले उसने सिर हिला कर हाँ कही।
गम्भीर मुँह से मैंने फिर पूछा: लेकिन यह चोदना क्या होता है?
राहुल: सुलेमान ने कभी मुझे यह नहीं बताया।
शरमाने का दिखावा करके मैंने कहा: मैं जानती हूँ, कहूँ?
राहुल: हाँ, हाँ, कहो तो।
उस रात राहुल ने बताया कि कभी-कभी उसका लंड खड़ा होता था। कभी-कभी स्वप्न-दोष भी होता था। रसिकलाल सच कहते थे। उन्होंने राहुल का खड़ा लंड देखा होगा।
मैंने बात आगे बढ़ाई: ये कहो, मुझमें सबसे अच्छा क्या लगता है तुम्हें? मेरा चेहरा? मेरे हाथ? मेरे पाँव? मेरे ये…? मैंने उसका हाथ पकड़ कर स्तन पर रख दिया।
राहुल: कहूँ? तेरे गाल।
मैं: मुझे पप्पी दोगे?
राहुल: क्यों नहीं?
उसने गाल पर चूमा, और मैंने फिर उसके गाल पर। उसके लिए यह खेल था। जैसे ही मैंने अपने होंठ उसके होंठो से लगाया, तो उसने झटके से छुड़ा लिया और बोला: छिः छिः ऐसा गन्दा क्यूँ करती हो?
मैं: गंदा सही? तुम्हें मीठा नहीं लगता?
राहुल: फिर से करो तो।
मैंने मुँह से मुँह लगा कर चूमना शुरु कर दिया।
राहुल: अच्छा लगता है, करो ना ऐसी पप्पी।
मैंने चूमने दिया। मैंने मुँह खोल कर उसके होंठ चाटे, और वही सिलसिला दोहराया।
मैंने पूछा: प्यारे, पप्पी करते-करते तुमको कुछ होता है?
राहुल शरमा कर कुछ बोला नहीं।
मैंने कहा: नीचे पेशाब की जगह में कुछ होता है ना?
राहुल: तुमको कैसे मालूम?
मैं: मैं स्कूल में पढ़ी हूँ, इसलिए। कहो, उधर गुदगुदी होती है ना?
राहुल: किसी से कहना मत।
मैं: नहीं कहूँगी। मैं तुम्हारी पत्नी जो हूँ।
राहुल: मेरी नुन्नी में गुदगुदी होती है और कड़ा हो जाता है।
मैं: मैं देख सकती हूँ?
राहुल: नहीं। अच्छे घर की लड़कियाँ लड़कों की नुन्नी नहीं देखा करतीं।
मैं: मैंने तो स्कूल में ऐसा पढ़ा है कि पति-पत्नी के बीच कोई भी राज़ नहीं रहता है। पत्नी पति की नुन्नी देख सकती है और उनसे खेल भी सकती है। पति भी पत्नी की वो… वो… भोस देख सकता है, तुमने मेरी देखनी है?
राहुल: पिताजी जानेंगे तो बड़ी पिटाई होगी।
मैं: शह्ह्हह… कौन कहेगा उनसे? हमारी ये बात गुप्त रहेगी, कोई नहीं जान पाएगा।
राहुल: हाँ, हाँ कोई नहीं जान पाएगा।
मैं: खोलो तो तुम्हारा पाजामा।
पाजामा खोलने में मुझे मदद करनी पड़ी। निकर उतारी। तब फनफनाता हुआ उसका सात इंच का लम्बा लंड निकल पड़ा। मैं खुश हो गई, मैंने मुट्ठी में पकड़ लिया और कहा: जानते हो? ये तुम्हारी नुन्नी नहीं है। यह तो लंड है।
राहुल: तुम बहुत गन्दा बोलती हो।
मैंने लण्ड पर मुठ मारी और पूछा: कैसा लगता है?
लंड ने एक-दो ठुमके लगाए।
वो बोला: बहुत गुदगुदी होती है।
मैं: मेरी भोस देखनी नहीं है?
राहुल: हाँ, हाँ।
यह वक्त मेरे शरमाने का नहीं था। मैं पलंग पर चित्त लेट गई, घाघरी उठाई और पैन्टी उतार दी। वह मेरी नंगी भोस देखता ही रह गया। बोला: मैं इसे छू सकता हूँ?
मैं: क्यों नहीं? मैंने जो तुम्हारा लंड पकड़ रक्खा है।
डरते-डरते उसने भोस के बड़े होंठ छुए। मेरे कहने पर चौड़े किए। भीतरी हिस्सा काम-रस से गीला था। आश्चर्य से वो देखता ही रहा।
मैं: देखा? वो जो चूत है ना, वो इतनी गहरी होती है कि सारा लंड अन्दर समा जाए।
राहुल: हो सकता है, लेकिन चूत में लंड डालने की क्या ज़रूरत?
मैं: प्यारे, इसे ही चुदाई कहते हैं।
राहुल: ना, ना, तुम झूठ बोलती हो।
मैं: मैं क्यूँ झूठ बोलूँ? तुम तो मेरे प्यारे पति हो। मैंने अभी अपनी भोस दिखाई कि नहीं?
राहुल: मैं नहीं मानता।
मैं: क्या नहीं मानते?
राहुल: वो जो तुम कहती हो ना कि लंड चूत में डाला जाता है।
मुझे वो किताब याद आ गई। मैंने कहा: ठहरो, मैं दिखाती हूँ। किताब के पहले पन्ने पर रसिकलाल लिखा हुआ था. वो दिखा कर मैंने कहा: ये किताब पिताजी की है। तस्वीरें देख वह हैरान रह गया। मैंने कहा: देख लिया ना? अब तसल्ली हुई कि चुदाई में क्या होता है?
उसपर कोई असर न पड़ा। वो बोला: मुझे पेशाब लगी है।
मैं: जाईए पेशाब करने के बाद लंड पानी से धो लीजिए।
वह पेशाब कर आया। उसका लंड नर्म हो गया था। मैंने लाख सहलाया, फिर से हिला नहीं। मुँह में लेकर चूसना चाहा, पर राहुल ने ऐसा करने ना दिया। रात काफ़ी बीत चुकी थी। मैं उत्तेजित भी हो गई थी, लेकिन राहुल अनाड़ी था। लंड खड़ा होने के बावज़ूद उसके दिमाग़ में चोदने की इच्छा पैदा नहीं हुई थी। वो बोला: भाभी, मुझे नींद आ रही है।
उस रात से वो मुझे भाभी कहने लगा। मैंने उसे गोद में लेकर सुलाया, तो तुरन्त नींद में खो गया। मैंने सोचा आगे-आगे चुदाई के पाठ पढ़ाऊँगी और एक दिन उसका लंड मेरी चूत में लेकर चुदवाऊँगी ज़रूर। लेकिन मेरे नसीब़ में कुछ और लिखा था।
उनके कुछ शरारती दोस्तों ने उनके दिल में ठसा दिया कि चूत में दाँत होते हैं, नूनी जो चूत में डाली तो चूत उसे काट लेगी। फिर पेशाब कहाँ से करेगा। मैंने लाख समझाया, लेकिन वो नहीं माना। मैंने कहा कि ऊँगलियाँ डाल कर देख लो कि अन्दर दाँत हैं या नहीं। उसने वह भी नहीं किया। बिन चुदवाए मैं कँवारी ही रही। रसिकलाल की पहचान वाले और राहुल के कई मुँह-बोले दोस्तों में से कितनी ही ऐसे थे जिन्होंने मुझ पर बुरी नज़र डाली। दूर के एक देवर ने खुला पूछ लिया: भाभी, राहुल चोद ना सके, तो घबराना नहीं, मैं जो हूँ। चाहे तब बुला लेना। उन सबको मैंने कह दिया कि राहुल मेरे पति हैं और मुझे अच्छी तरह चोदते हैं। दिनभर मैं उन सब का हिम्मत से सामना करती थी। रात अनाड़ी बलम से बिन चुदवाए फूट-फूट कर रो लेती थी। रसिकलाल लेकिन होशियार थे, उन्हें यकीन हो गया था कि राहुल ने मुझे चोदा नहीं था। मुझे शक है कि चुपके से वो हमारे बेडरूम में देखा करते थे। जो कुछ भी हो, उन्हें पितामह बनने का उतावलापन था।
एक दिन एकांत पाकर मुझसे पूछा: क्यूँ बेटी? सब ठीक हैना? उनका इशारा चुदाई की ओर था जानकर मुझे शर्म आ गई। मैंने सिर झुका लिया और कुछ ना कह सकी… मैं रो पड़ी। मेरे कंधों पर हाथ रखकर वो बोले: मैं सब जानता हूँ, तू अभी भी कँवारी है। राहुल ने तुझे चोदा नहीं है सच है ना? ससुरजी के मुँह से चोदा शब्द सुनकर मैं चौंक गई, उनकी बाँहों से निकल गई, कुछ बोली नहीं। आँसू पोंछ कर सिर हिला कर हाँ कहा। वो फिर मेरे नज़दीक आए, मेरे कंधों पर अपनी बाँह रख दी और बोले: बेटी, ये राज़ हम हमारे बीच रखेंगे कि राहुल चोदने के क़ाबिल नहीं है। लेकिन मुझे पोता चाहिए, इसका क्या? मेरी इतनी बड़ी जायदाद, इतना बड़ा कारोबार सब सफ़ा हो जाएँगे, मेरे मरने के बाद। वो तो वो लेकिन जब मैं इस दुनिया में ना रहूँ तब तेरी और राहुल की देख-भाल कौन करेगा जब तुम दोनों बुड्ढे हो जाओगे? मुझे लड़का चाहिए। है कोई ईलाज तेरे पास?
मैंने कहा: मैं क्या कर सकती हूँ पिताजी?
रसिकलाल: तुझे करना कहाँ है? करवाना है समझीं?
मैं: हाँ, लेकिन किस के पास जाऊँ? आप की इच्छा है कि मैं कोई और मर्द छिः छि:। मुझसे यह नहीं हो सकेगा।
रसिकलाल: मैं कहाँ कहता हूँ कि तू ग़ैर मर्द से चुदवा।
ससुरजी फिर चुदवाओ शब्द बोले। मुझे शरम आ गई। सच कहूँ तो मुझे बुरा नहीं लगा, थोड़ी सी गुदगुदी हो गई और होंठों पर मुस्कान आ गई जो मैंने मुँह पर हाथ रख कर छुपा ली।
मैंने पूछा: आपकी क्या राय है?
कुछ मिनटों तक वे चुप रहे, सोच में पड़े रहे, अन्त में बोले: कुछ ना कुछ रास्ता मिल जाएगा, मैं सोच लूँगा। मुझे तू वचन दे कि तू पूरी सहायता करेगी। करेगी ना?
मैंने वचन दे दिया। वो चले गए। उस दिन के बाद ससुरजी का रंग ही बदल गया। अब वो अच्छे कपड़े पहनने लगे। रोज़ शेविंग करके स्प्रे लगाने लगे। बाल जो थोड़े से सफेद हुए थे, वो रंग लगवा कर काले करवा लिए। एक बार उन्होंने पानी का प्याला माँगा। मैंने प्याला दिया तब लेते वक्त उन्होंने मेरी ऊँगलियाँ छू लीं। दूसरी बार प्याला पकड़ने से पहले मेरी कलाई पकड़ ली। बात-बात में मुझे बाँहों में लेकर दबोच लेने लगे। मुझे यह सब मीठा लगता था। आख़िर वो एक हट्ठे-कट्ठे मर्द थे, भले ही राहुल की तरह जवान ना थे लेकिन मर्द तो थे ही। सासूजी का देहान्त हुए एक साल हो गया था। मेरे ख़्याल से उन्होंने उसके बाद कभी चुदाई नहीं की थी किसी के साथ। मेरे जैसी जवान लड़की अगर घर में हो, एकांत मिलता हो तो उनका लंड खड़ा हो जाए, इसमें उनका क्या क़सूर?
थोड़े दिन तक मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूँ। फिर सोचने लगी कि क्यों ना मैं उनका साथ दूँ! अधिक से अधिक वो क्या करेंगे? मुझे चोदेंगे! हाय यह सोचते ही मुझे गुदगुदी सी होने लगी। ना, ना, ऐसा नहीं करना चाहिए। क्यूँ नहीं? बच्चा पैदा होगा तो सब समस्याएँ हल हो जाएँगीं। किसे पता चलेगा कि बच्चा किसका है?
सच कहूँ तो मुझे भी तो चाहिए था कोई चोदने वाला। ऐरे-गैरे को ढूँढूँ, इनसे मेरे ससुरजी क्या कम थे? मैंने तय किया कि मेरे कौमार्य की भेंट मैं अपने ससुरजी को दूँगी और उनसे चुदवा कर जब चूत खुल जाए तब राहुल का लंड लेने की सोचूँगी। उस दिन से ही मैंने ससुरजी को इशारे भेजना शुरु कर दिया। मैंने ब्रा पहननी बन्द कर दी। सलवार-कमीज़ की जगह चोली-घाघरी और ओढ़नी डालने लगी। वो जब कलाई पकड़ लेते थे तब मैं शरमा कर मुस्कुराने लगती। मेरी प्रतिक्रियाओं व प्रतिभावों को देखकर वे बेहद खुश हुए। उन्होंने छेड़-छाड़ बढ़ाई। एक-दो बार मेरे गाल पर चिकोटी काट ली उन्होंने। दूसरी बार मेरी गाँड पर हाथ फिरा लिया। मैं अक्सर ओढ़नी का पल्लू गिरा कर चूचियाँ दिखाती तो कभी-कभी घाघरी खिसका कर जाँघें दिखाती रहती। दिन-ब-दिन सेक्स का तनाव बढ़ता चला। एक समय ऐसा आया कि उनकी नज़र पड़ते ही मेरी शरम जाने लगी, उनके छू जाने से ही मेरी चूत गीली होने लगी। उनकी मौज़ूदगी में घुण्डियाँ कड़ी की कड़ी रहने लगीं। अब वो अपनी धोती में छुपा टेन्ट मुझसे छुपाते नहीं थे। मैं इन्तज़ार करती कि कब वो मुझ पर टूट पड़ें।
आख़िर वो रात आ ही गई। राहुल सो गया था। ससुरजी रात के बारह बजे बाहर गाँव से लौटे। मैंने खाना तैयार रक्खा था। वो स्नान करने गए और मैंने खाना परोसा। वो नहाकर बाथरूम से निकले तब मैंने कहा: खाना तैयार है, खा लीजिए।
वो बोले: तूने खाया?
मैं: नहीं जी, आप के आने की राह देख रही थी।
वो बोले: कोमल, ये खाना तो हम हर रोज़ खाते हैं। जिसकी भूख मुझे तीन सालों से है, वो कब खिलाओगी?
मैं: मैं कैसे खिलाऊँ? कहाँ है वो खाना?
वो: तेरे पास है।
मैं समझ रही थी जो वह कह रहे थे। मुझे शर्म आने लगी। नज़रें नीची करके मैंने पूछा: मेरे पास? मेरे पास तो कुछ नहीं है।
वो: है, तेरे पास ही है, दिखाऊँ तो खिलाओगी?
सिर हिला कर मैंने हाँ कही। उधर मेरी चूत गीली होने लगी और दिल की धड़कन बढ़ गई। वो मेरे नज़दीक आए। मेरे हाथ अपने हाथों में लिए, होंठों से लगाए। बोले: तेर पास ही है बताऊँ? तेरी चिकनी गोरी जाँघों के बीच।
मैं शरमा गई, उनसे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन उन्होंने मेरे हाथ छोड़े नहीं, बल्कि उठाकर अपनी गर्दन में डाल दिए। मैं सरक कर नज़दीक गई। मेरी कमर पर हाथ रखकर उन्होंने मुझे अपने पास खींच लिया और बाँहों में जकड़ लिया। मैंने मेरा चेहरा उनके चौड़े सीने में छुपा दिया। मेरे स्तन उनके पेट के साथ दब गए। उनका खड़ा लंड मेरे पेट से दब रहा था। मेरे सारे बदन में झुरझुरी फैल गई। एक हाथ से मेरा चेहरा उठाकर उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह लगाया। पहले होंठों से होंठ छुए, बाद में दबाए, आख़िर जीभ से मेरे होंठ चाटे और अपने होंठों के बीच लेकर चूसे। मुझे कुछ होने लगा। ऐसी गरमी मैंने कभी महसूस नहीं की थी। मेरे स्तन भारी हो गए। घुण्डियाँ कड़ी हो गईं। चूत ने रस छोड़ना शुरु कर दिया। मुझसे खड़ा नहीं रहा जा रहा था।
चुम्बन का मेरा यह पहला अनुभव था, और बहुत मीठा लग रहा था। उन्होंने अपने बन्द होंठों से मेरे होंठ रगड़े। बाद में जीभ निकाल कर होंठ पर फिराई। फिराते-फिराते उन्होंने जीभ की नोंक से मेरे होंठों के बीच की दरार टटोली। मेरे रोएँ खड़े हो गए। अपने-आप मेरा मुँह खुल गया और उनकी जीभ मेरे मुँह में पहुँच गई। उनकी जीभ मेरे मुँह में चारों ओर घूम गई। जब उन्होंने जीभ निकाल दी तब मैंने मेरी जीभ से वैसा ही किया। मैंने सुना था कि ऐसे चुम्बन को फ्रेंच किस कहते हैं। फ्रेंच किस करते-करते ही उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में उठा लिया और बेडरूम में चल दिए, जाकर पलंग पर चित्त लिटा दिया।
ओढ़नी का पल्लू हटाकर उन्होंने चोली में क़ैद मेरे छोटे स्तनों को थाम लिया। चोली पतले कपड़े की थी और मैंने ब्रा पहनी नहीं थी इसलिए मेरी कड़ी घुण्डियाँ उनकी चुटियों में पकड़ी गईं, इतने से उनको संतोष हुआ नहीं। फटाफट वो चोली के हुक खोलने लगे। मैं चुम्बन करने में इतनी मशगूल थी कि कब उन्होंने चोली उतार फेंकी, उसका मुझे पता न चला। जब मेरी घुण्डियाँ मसली गईं तब मैंने जाना कि मेरे स्तन नंगे थे और उनके पंजे में क़ैद थे। स्तन सहलाना तो कोई ससुरजी से सीखे। ऊँगलियों की नोक़ से उन्होंने स्तन पंजे में दबोच लिया। मेरे स्तन में दर्द होने लगा। लेकिन मीठा लगता था। अन्त में उन्होंने एक के बाद एक घुण्डियों और स्तन का गहरा घेरा च्यूँटी में लिया और खींचा और मसला। इस दौरान चुम्बन चालू ही था। अचानक चुम्बन छोड़कर उन्होंने अपने होंठ घुण्डियों से चिपका दिए। उनके होंठ लगते ही घुण्डियों से करंट जो निकला वो चूत के भग्नों तक जा पहुँचा। वैसे ही मेरी घुण्डियाँ बहुत नाज़ुक थीं, कभी-कभी ब्रा का स्पर्श भी सहन नहीं कर पाती थी।
उस रात पहली बार मेरी घुण्डियों ने मर्द की ऊँगलियों व होंठों का अनुभव किया। छोटे लड़की की नुन्नी की तरह चूचियों का गहरा घेरा, और घुण्डियाँ सभी कड़े हो गए थे। एक-एक करके उन्होंने दोनों घुण्डियाँ चूसीं, दोनों स्तन सहलाए और मसल डाले। उन्होंने मुझे धकेल कर चित्त लिटा दिया, वो औंधे और मेरे बदन पर छा गए। मेरी जाँघ के साथ उन का कड़ा लंड दब गया था। ज़्यादा देर उनसे बर्दाश्त ना हो सकी। वो बोले, अब में देर करूँगा तो चोदे बिना ही झड़ जाऊँगा। तुम तैयार हो?
मेरी हाँ या ना कुछ काम के नहीं थे। मुझे भी लंड तो लेना ही था। मेरी सारी भोस सूज गई थी और काम-रस से गीली-गीली हो गई थी। मैंने ख़ुद पाँव लम्बे किए और चौड़े कर दिए वो ऊपर चढ़ गए। धोती हटा कर लंड निकाला और भोस पर रगड़ा। मेरे नितम्ब हिलने लगे। वो बोले: कोमल बेटी, ज़रा स्थिर रह जा, ऐसे हिला करोगी, तो मैं कैसे लंड डालूँगा?
मैंने मुश्किल से मेरे नितम्ब हिलने से रोके। हाथ में लंड पकड़कर उन्होंने चूत में डालना शुरु किया लेकिन लंड का मत्था फिसल गया और चूत का मुँह पा न सका। पाँच-सात धक्के ऐसे ही बेकार गए। मैंने जाँघें ऊपर उठाईं, फिर भी वो चूत ढूँढ़ ना सके। लंड अब ज़रा सा नर्म होने लगा। उनका उतावलापन बढ़ गया। उस वक्त मुझे याद आया कि नितम्ब के नीचे तकिया रखने से भोस का कोण बदलता है और चूत उठ जाती है। उनसे पूछे बिना मैंने तकिया नितम्ब के नीचे रख दिया। अबकी बार जब धक्का लगाया तब लंड का मत्था चूत मे मुँह में घुस गया। मेरी चूत ने संकुचन किया।
अब आगे क्या रहा बताने को?
( कहानी अधूरी लगती है पर रोचक है, इसलिए प्रकाशित की गई है !) Anatrvasna
मेरी दीदी Sex Stories का नाम सपना है, वो मुझसे तीन साल बड़ी है, उनका रंग गोरा चिट्टा है और हाँ उनके होंटों के नीचे एक काला तिल है, जिसकी वजह से वो बहुत सेक्सी लगती है! उनकी शादी एक अनिवासी भारतीय लड़के से यानि कि मेरे जीजा जी से हो गई, जो कि दुबई में नौकरी करते हैं! दीदी उन्हीं के साथ रहती है। वैसे तो वो दोनों बहुत खुश रहते हैं मगर शादी के दो साल गुजर जाने के बाद भी उनकी कोई औलाद न होने से दीदी उदास सी रहती है!
मेरा नाम राज है मैं भी एक अनिवासी भारतीय हूँ और कनाडा में एक कम्पनी में जॉब करता हूँ। यहाँ आने से पहले मेरे माँ-बाप का स्वर्गवास हो गया था इसलिए दीदी, जीजाजी के सिवा मेरा और कोई नहीं है!
एक दिन मैं अपने जीजा जी के साथ फ़ोन पर बात कर रहा था तो बातों ही बातों में मैंने जीजा जी को दीदी के साथ अपने पास घूमने आने का निमंत्रण दे दिया। तभी जीजाजी ने यह कह कर टाल दिया कि उनको अभी छुट्टी नहीं मिल सकती, उन पर कम्पनी के काम का बहुत भार है।
थोड़ा रुकने के बाद जीजा जी ने कहा- मैं कुछ दिनों के लिए तेरी दीदी को तेरे पास भेज देता हूँ, उसकी नौकरी भी छुट गई है, सारे दिन भर घर में बोर हो जाती है, वो पहले से काफी उदास सी रहने लगी है, कुछ दिन पहले तुझे ही याद कर रही थी, शायद वो तुझको देखना-मिलना चाहती है। वैसे भी राखी का त्यौहार नजदीक आ रहा है, दोनों भाई-बहन मिल भी लेना और उसको कहीं घुमा भी देना, शायद इसी बहाने उसका मन ही बहल जाए!
मैंने कहा- ठीक है जीजा जी! जैसा आप कहें!
और कुछ दिन बाद वो दिन भी आ गया जब दीदी मेरे पास आने के लिए दुबई से रवाना हुई। मैं भी दीदी को लेने के लिए ठीक समय पर एयरपोर्ट पहुँच चुका था। कुछ समय बाद दीदी की फ्लाईट लैण्ड होने की घोषणा हुई। मैंने अपनी आँखें एग्जिट-गेट पर जमा दी।
कुछ समय बाद मैंने दीदी को लोगों के साथ बाहर आते देखा तो मैं दीदी को देखता ही रह गया। सच क्या लग रही थी दीदी! मैंने कभी भी दीदी को इस रूप में नहीं देखा था। उन्होंने ऊँची ऐड़ी की सेंडल पहनी हुई थी और काले रंग की फेंसी साड़ी और हाफ कट वाला ब्लैक ब्लाउज़ पहना हुआ था। ब्लाउज़ का गला काफी खुला और बड़ा होने से उनके आधे नंगे स्तन ऊपर से साफ दिखाई दे रहे थे। उनके वक्ष के ऊपर एक काला तिल था जो अलग ही चमक रहा था जैसे दूध में मक्खी!
तभी दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी तो मैंने हाथ हिला कर उनको अपने होने का इशारा किया और दीदी ने एक हल्की सी मुस्कान देकर मेरी ओर बढ़ी और मेरे नजदीक आकर मेरे गले लगने लगी। मैंने भी मोके का फ़ायदा उठाया और दीदी की नंगी गोरी चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए जकड़ लिया। वहाँ खड़े सारे लोग शायद यही सोच रहे होंगे कि हम पति पत्नी हैं। फिर मैंने दीदी का सामान उठाया और हम दोनों घर की ओर चल दिए!
घर पहुँच कर दीदी फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चली गई ( क्यूँकि गर्मी के दिन थे और मेरी दीदी को बहुत पसीना आता है और वो तो उस दिन पसीने से बहुत भीग चुकी थी) मैंने दीदी जी का सामान सेट कर दिया और थोड़ी देर बाद दीदी भी फ्रेश हो कर बाथरूम से बाहर आ गई!
जैसे ही मैंने उनको देखा तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गई। दीदी सिर्फ पेटीकोट-ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर आ गई थी। काले पेटीकोट और ब्लाउज में उनका गोरा-गोरा अंग एकदम सोने की तरह चमक रहा था। दीदी को देख कर मेरे अंदर थोड़ी अजीब सी घबराहट होनी शुरु हो गई। मैं दीदी को न चाह कर भी देखना चाहता था! मैं कभी दीदी के वक्ष के ऊपर विराजमान काले तिल को देखता तो कभी उनकी नंगी कमर को, तो कभी उनके नाड़े वाले नंगे हिस्से को!
तभी दीदी ने मेरे पास आकर मेरे सर में प्यार से हाथ फेर कर पूछा- किया हुआ भईया? कहाँ खो गए?
मैं थोड़ा घबरा कर और शरमा कर बोला- कुछ नहीं दीदी! बस मैं… आप काले कपड़ों में बहुत सुंदर लगती हो!
दीदी समझ गई कि मैं क्यों ऐसे बोल रहा हूँ। दीदी शरमा कर बोली- भाई मैं क्या करूं, बहुत गर्मी है और साड़ी में बहुत घुटन हो रही थी, इसलिए मैंने साड़ी अलग निकाल दी!
मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं, हम दोनों के सिवा और कोई भी नहीं है यहाँ पर! और मैं बिल्कुल फ्रैंक लड़का हूँ, तुम निश्चिंत रहो, मैं तालिबानी जैसा भी नहीं हूँ कि जो अपनी इतनी सुन्दर दीदी को बुरके में पसंद करे!
दीदी हंस दी और बोली- भईया, तू तो बहुत शैतान हो गया है! चल जल्दी से तू भी नहा धो ले! आज राखी है राखी नहीं बंधवानी क्या!
फिर मैं भी बाथरूम मैं नहाने चले गया। बाथरूम में बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी। आज से पहले कभी ऐसी खुशबू बाथरूम में नहीं थी! मैं समझ गया कि यह खुशबू दीदी के बदन की है! आज मैं इस खुशबू में समां जाना चाहता था और मैंने पहली बार अपनी दीदी के बारे में कर उनके नाम की मुठ मार दी। इसका एक अलग ही आनंद आया और जब मैं बाथरूम से नहा धो कर बाहर आया तो दीदी बोली- क्या बात है, बड़ी देर लगा दी तूने?
मैं बोला- क्या करूँ दीदी जी! आज मेरा तो बाथरूम से बाहर आने का मन ही नहीं कर रहा था!
दीदी बोली- क्यों?
मैं चुप रहा और मैंने दीदी को एक स्माइल दी! दीदी भी शायद मेरा इशारा समझ गई थी और वो शरमाकर बोली- लगता है अब जल्द से जल्द तेरे लिए एक लड़की तलाशनी पड़ेगी! बोल मेरे राजा भइया, तुझको कैसी लड़की पसंद है, मैं अपने राजा भइया के लिए वैसी ही लड़की लाऊँगी!
मैं दीदी से बोला- सच!
दीदी हँस कर बोली- मुच!
मैंने तुंरत ही दीदी का हाथ पकड़ा और उनको शीशे के आगे ले जा कर बोला- मुझे ऐसी लड़की चाहिए!
दीदी थोड़ी शरमा कर बोली- पागल ऐसी लड़की लायेगा तो सुहागरात के बदले रक्षा बंधन मनाना पड़ेगा तुझे!
और जोर जोर से हँसने लगी!
मैं दीदी के पीछे की तरफ खड़ा था और दीदी मेरे आगे थी। हम दोनों भाई बहन एक दूसरे को शीशे में देख कर बातें कर रहे थे!
मैं बोला- दीदी अगर आप जैसी सुंदर लड़की मुझे मिल जाए तो मैं उससे राखी भी बंधवाने के लिए तैयार हूँ!
दीदी बोली- ऐसा क्या है मुझमें जो तू अपनी दीदी का इतना दीवाना हुआ पड़ा है! क्या देखा तूने मुझमें?
मैं बोला- दीदी आप गुस्सा तो नहीं होंगी ना!
दीदी बोली- मैं आज तक अपने राजा भइया से गुस्सा हुई हूँ जो अब होंऊगी!
मैं बोला- दीदी! मैं सच में तुम्हारा दीवाना हूँ! जब से मैंने तुम्हें एयर पोर्ट पर देखा है, मैं तुम्हारा दीवाना हो गया हूँ। पता नहीं क्यों मैं तुम्हें पाना चाहता हूँ, तुम्हें छूना चाहता हूँ, तुम्हें तुम्हारे नाज़ुक होटों के नीचे काले तिल का अहसास दिलाना चाहता हूँ!
और मैंने आव देखा न ताव! और दीदी की गर्दन के नीचे प्यार से एक किस कर दिया। दीदी मुझे शीशे में देख रही थी और वो वैसे ही खड़े रह कर मेरे गाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी! मैंने भी दीदी को अपने दोनों हाथों से आगे से जकड़ लिया और दीदी ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली जिससे मेरा थोड़ा और साहस बढ़ा और दीदी के कान में मैंने हल्की सी आवाज में ‘ आई लव यू दीदी ‘ बोल दिया और बोला- अगर आप मेरी बहन न होती तो मैं आप को ज़रूर प्रपोज़ करता! आप कितनी सुंदर हो! मैंने आप सी सुंदर कोई लड़की नहीं देखी! हम भाई बहन क्यों हैं?
दीदी ने अभी तक अपनी आँखें बंद कर रखी थी क्योंकि मैं उनके पेट पर, नाभि पर हल्का-हल्का हाथ फेर रहा था। अचानक मैंने दीदी के पेटीकोट के नाड़े की तरफ हाथ बढ़ाया तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी और बोली- भईया मैं तुम्हारी बहन हूँ!
मैंने बोला- मैं जानता हूँ! आज मैं सारे रिश्तों को भुला देना चाहता हूँ, तुम मेरी हो और मैं आज अपनी बहन की बाँहों मैं समा जाना चाहता हूँ!
दीदी बोली- किसी को मालूम चल गया तो समाज में हमारी थू-थू हो जायेगी!
मैंने कहा- हमें समाज देखने थोड़े ना आ रहा है!
दीदी चुप हो गई और कुछ सोचने के बाद मेरे से लिपट गई और रोने लगी।
मैंने पूछा- दीदी क्या हुआ? क्यों रो रही हो?
तो बोली- मैं बहुत प्यासी हूँ! तेरे जीजाजी से मुझे वो खुशी नहीं मिली जो हर औरत को शादी के बाद अपने पति से मिलती है!
मैं बोला- दीदी साफ साफ बताओ ना! मैं समझ नहीं पा रहा हूँ!
वो बोली- तेरे जीजा जी मर्द नहीं हैं!
यह सुनकर मुझे तो पसीना आ गया और मैं अंदर ही अंदर सोचने लगा- यानि कि दीदी अभी कुँवारी हैं और उनकी सील भी नहीं टूटी!
मैंने दीदी के आँसू को अपनी जीभ से चाट कर साफ किया और बोला- दीदी! तुम चिंता मत करो मैं हूँ ना! तुम बस मुझको यह बताओ कि तुम मुझको पसंद करती हो?
दीदी बोली- जान से भी ज्यादा!
क्या तुम मुझे भाई की जगह अपना पति मानोगी? मैं तुम्हें हर वो खुशी दूंगा जो तुम चाहती हो!
दीदी ने फ़ौरन मेरे होटों पर किस कर दिया और बोली- आज से तुम ही मेरे पति हो! मेरा तन-मन सब तुम्हारा है! जो तुम बोलोगे, वो मैं करूंगी!
मैंने दीदी को बोला- आज मैं तुमसे शादी करूंगा!
यह सुन कर दीदी जल्दी से सिंदूर और अपना मंगल सूत्र ले कर मेरे पास आ गई। मैंने उनकी मांग भर कर मंगल सूत्र उनके गले में पहना दिया।
दीदी बोली- भइया! मैं अपने कमरे में जा रही हूँ, तुम थोड़ी देर बाद कमरे के अंदर आ जाना! मैं तुम्हारा इन्तजार करूंगी!
और जब मैं थोड़ी देर बाद दीदी के कमरे में गया तो दीदी सज-संवर के अपने शादी के जोड़े में घूँघट ओढ़े पलंग पर बैठी मेरा बेसबरी से इंतजार कर रही थी। मैं दीदी के पास गया और प्यार से उनका घूँघट उठाया और उनकी ठुडी को अपने हाथ से ऊपर उठाने के साथ ही उनके होटों का चुम्बन ले कर बोला- ओह दीदी! आई लव यू! मैंने आज तक तुम जैसी सेक्सी लड़की नहीं देखी!
और उनके होटों के नीचे वाले काले तिल को अपने दाँतों में बुरी तरह दबोच लिया और चूसने लगा। दीदी को दर्द हो रहा था मगर दीदी मुझ से भी ज्यादा प्यासी थी, उसे दर्द में भी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने दीदी के ब्लाउज़ को अपने दोनों हाथों से फाड़ दिया और उनके गोरे गोरे आम के जैसे बूब्स बाहर आ गये। मैं उनको चूसने लगा। थोड़ी देर बाद दीदी ने मेरी पैन्ट की ज़िप खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाला और अपने कोमल गोरे हाथों से उसे सहलाने लगी। कुछ देर बाद जब मेरा लंड लौड़ा बन गया तो उसको अपनी जीभ से चाटने, सहलाने लगी और होटों से रगड़ कर उसे खड़ा कर दिया!
हम दोनों भाई बहन नंगे थे, मैंने दीदी को बिस्तर में लिटा दिया और उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
दीदी ओह माय भईया डार्लिंग! आई लव यू! बोल रही थी।
मैंने अपनी दीदी को गीध की तरह नौचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद जब मैंने अपनी बहन की चूत में अपना लौड़ा डाला तो दीदी ने उई माँ! बोल कर मुझको जोर से जकड़ लिया और मुझको फ्रेंच किस करने लगी और अपने दोनों हाथों को मेरे चूतड़ों पर रख कर भइया और जोर से! और जोर से! बोलने लगी।
कुछ देर बाद मैंने दीदी को डौगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। दीदी के गद्देदार चूतड़ को देख मैं ललचा गया और उनके चूतड़ चाटने लगा। दीदी को मैंने सारी रात चोदा!
सुबह जब मैं जागा तो दीदी मेरे लंड को चूस रही थी, मुझको प्यासी आँखों से देख रही थी और मेरा लौड़ा खड़ा करके उसके ऊपर बैठ गई और फिर दुबारा से मैंने दीदी को चोदना शुरु कर दिया।
हम दोनों चार साल बीत जाने के बाद भी हमेशा एक दूसरे के साथ सेक्स में डूबे रहते हैं।
सच अपनी बहन के साथ कितना मजा आता है, मैं क्या बताऊँ!
अब हम दोनों भाई बहन एक पति पत्नी की तरह जिन्दगी जी रहे हैं। मेरी दीदी से मेरी एक लड़की हुई है…! Sex Stories
आसाम की हरी भरी वादियां और जवान Antarvasna दिलों का संगम … किसको लुभा नहीं लेगा।
ऐसे ही आसाम की हरी भरी जगह पर मेरे पति का पदस्थापन हुआ।
हम दोनों ऐसी जगह पर बहुत खुश थे। हमें कम्पनी की तरफ़ से कोई घर नहीं मिला था इसलिये हमने थोड़ी ही दूर पर एक मकान किराये पर ले लिया था … उसका किराया हमें कम्पनी की तरफ़ से ही मिलता था।
मेरे पति मोहित की ड्यूटी शिफ़्ट में लगती थी।
घर में काम करने के लिये हमने एक नौकरानी रख ली थी। उसका नाम काजल था।
उसकी उम्र लगभग 20 साल होगी। भरपूर जवान, सुन्दर, सेक्सी फ़िगर … बदन पर जवानी की लुनाई … चिकनापन … झलकता था।
मोहित तो पहले दिन से ही उस पर फ़िदा था। मुझसे अक्सर वो उसकी तारीफ़ करता रहता था।
मैं उसके दिल की बात अच्छी तरह समझती थी।
मोहित की नजरें अक्सर उसके बदन का मुआयना करती रहती थी … शायद अन्दर तक का अहसास करती थी।
मैं भी उसकी जवानी देख कर चकित थी। उसके उभार छोटे छोटे पर नुकीले थे। उसके होंठ पतले लेकिन फ़ूल की पन्खुडियों जैसे थे।
एक दिन मोहित ने रात को चुदाई के समय मुझे अपने दिल की बात बता ही दी।
उसने कहा-नेहा … काजल कितनी सेक्सी है ना!
“हं आ … हां … है तो … जवान लडकियां तो सेक्सी होती ही है …” मैं उसका मतलब समझ रही थी।
“उसका बदन देखा … उसे देख कर तो… यार मन मचल जाता है.” मोहित ने कुछ अपना मतलब साधते हुए कहा।
“अच्छा जी … बता भी दो जानू … जी क्या करता है.” मैं हंस पड़ी … मुझे पता था वो क्या कहेगा.
“सुनो नेहा … उसे पटाओ ना … उसे चोदने का मन करता है.”
“हाय … नौकरानी को चोदोगे … पर हां …वो चीज़ तो चोदने जैसी तो है.”
“तो बोलो … मेरी मदद करोगी ना?”
“चलो यार …तुम भी क्या याद करोगे … कल से ही उसे पानी पानी करती हूं.”
फिर मैं सोच में पड़ गयी कि क्या तरीका निकाला जाये।
सेक्स तो सभी की कमजोरी होती ही है।
मुझे एक तरकीब समझ में आयी।
दूसरे दिन काजल के आने का समय हो रहा था … मैंने अपने टीवी पर एक ब्ल्यू हिन्दी फ़िल्म लगा दी।
उस फ़िल्म में चुदाई के साथ हिन्दी डायलोग भी थे।
काजल कमरे में सफ़ाई करने आयी तो मैं बाथरूम में चली गयी।
सफ़ाई करने के लिये जैसे ही वो कमरे के अन्दर आयी तो उसकी नजर टीवी पर पडी … चुदाई के सीन देख कर वो खड़ी रह गयी और सीन देखती रही।
मैं बाथरूम से सब देख रही थी।
उसे मेरा वीडियो प्लेयर नजर नहीं आया क्योंकि वह लकड़ी के केस में था।
वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गयी।
उसे पिक्चर देख कर मजा आने लग गया था।
चूत में लन्ड जाता देख कर उसे और भी अधिक मजा आ रहा था।
धीरे धीरे उसका हाथ अब उसके स्तनो पर आ गया था … वह गर्म हो रही थी।
मेरी तरकीब सटीक बैठी।
मैंने मौका उचित समझा और बथरूम से बाहर आ गयी.
“अरे … टीवी पर ये क्या आने लगा है?”
“दीदी … साब तो है नहीं …चलने दो ना …अपन ही तो है.”
“अरे नहीं काजल … इसे देख कर दिल में कुछ होने लगता है.” मैं मुस्करा कर बोली.
मैंने चैनल बदल दिया.
काजल के दिल में हलचल मच गयी थी … उसके जवान जिस्म में वासना ने जन्म ले लिया था।
“दीदी … ये किस चेनल से आता है?” उसकी उत्सुकता बढ़ रही थी।
“अरे तुझे देखना है ना तो दिन को फ़्री हो कर आना … फिर अपन दोनों देखेंगे … ठीक है ना.”
“हां दीदी …तुम कितनी अच्छी हो.” उसने मुझे जोश में आकर प्यार कर लिया।
मैं रोमांचित हो उठी … आज उसके चुम्बन में सेक्स था।
उसने अपना काम जल्दी से निपटा लिया और चली गयी।
तीर निशाने पर लग चुका था।
करीब दिन को एक बजे काजल वापस आ गयी।
मैंने उसे प्यार से बिस्तर पर बैठाया और नीचे से केस खोल कर प्लेयर में सीडी लगा दी और मैं भी बिस्तर पर बैठ गयी।
ये दूसरी फ़िल्म थी।
फ़िल्म शुरू हो चुकी थी।
मैं काजल के चेहरे का रंग बदलते देख रही थी। उसकी आंखो में वासना के डोरे आ रहे थे।
मैंने थोड़ा और इन्तजार किया … चुदाई के सीन चल रहे थे।
मेरे शरीर में भी वासना जाग उठी थी।
काजल का बदन भी रह रह कर सिहर उठता था।
मैंने अब धीरे से उसकी पीठ पर हाथ रखा। उसकी धड़कन तक महसूस हो रही थी। मैंने उसकी पीठ सहलानी चालू कर दी।
उसे मैंने हल्के से अपनी ओर खींचने की कोशिश की … तो वो मेरे से सट गयी।
उसका कसा हुआ बदन …उसकी बदन की खुशबू … मुझे महसूस होने लगी थी।
टीवी पर शानदार चुदाई का सीन चल रहा था।
काजल का पल्लू उसके सीने से नीचे गिर चुका था … मैंने धीरे से उसके स्तनों पर हाथ रख दिया.
उसने मेरा हाथ स्तनों के ऊपर ही दबा दिया और सिसक पडी।
“काजल … कैसा लग रहा है?”
“दीदी … बहुत ही अच्छा लग रहा है …कितना मजा आ रहा है.” कहते हुए उसने मेरी तरफ़ देखा.
मैंने उसकी चूचियां सहलानी शुरू कर दी … उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
“बस दीदी … अब नहीं …”
“अरे मजे ले ले … ऐसे मौके बार बार नहीं आते.” मैंने उसके थरथराते होंठों पर अपने होंठ रख दिये.
काजल उत्तेजना से भरी हुयी थी। काजल ने मेरे स्तनों को अपने हाथों में भर लिया और धीरे धीरे दबाने लगी।
मैंने उसका लहंगा ऊपर उठा दिया … और उसकी चिकनी जांघों पर हाथ से सहलाने लगी.
अब मेरे हाथ उसकी चूत पर आ चुके थे।
चूत चिकनाई और पानी छोड़ रही थी।
मेरे हाथ लगाते ही काजल मेरे से लिपट गयी।
मुझे लगा मेरा काम हो गया।
“दीदी … हाय … नहीं करो ना … मां …री … कैसा लग रहा है.”
मैंने उसकी चूत के दाने को हल्के हल्के से हिलाने लगी।
वो नीचे झुकती जा रही थी … उसकी आंखे नशे में बन्द हो रही थी।
उधर मोहित लन्च पर आ चुका था।
उसने अन्दर कमरे में झांक कर देखा।
मैंने उसे इशारा किया कि अभी रुको। मैंने काजल को और उत्तेजित करने के लिये उससे कहा- काजल … आ मैं तेरा बदन सहला दूं … कपड़े उतार दे!
“दीदी … ऊपर से ही मेर बदन दबा दो ना!” वो बिस्तर पर लेट गयी।
मैं उसके उभारों को दबाती रही … उसकी सिसकियां बढ़ती रही.
मैंने अब उसकी उत्तेजना देख कर उसका ब्लाऊज उतार दिया.
उसने कुछ नहीं कहा.
मैंने भी यह देख कर अपने कपड़े तुरन्त उतार दिये।
अब मैं उसकी चूत पर अपनी उंगली से दबा कर सहलाने लगी और धीरे से एक उंगली उसकी चूत में डाल दी।
उसके मुख से आनन्द की सिसकारी निकल पड़ी.
“काजल … हाय कितना मजा आ रहा है … है ना?”
“हां दीदी … हाय रे … मैं मर गयी.”
“लन्ड से चुदोगी काजल … मजा आयेगा.”
“कैसे दीदी … लन्ड कहां से लाओगी?”
“कहो तो मोहित को बुला दूं … तुम्हें चोद कर मस्त कर देगा.”
“नहीं …नहीं … साब से नहीं …”
“अच्छा उल्टी लेट जाओ … अब पीछे से तुम्हारे चूतड़ भी मसल दूं.”
वो उल्टी लेट गयी।
मैंने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया और उसकी गान्ड ऊपर कर दी।
अब मैंने उसके दोनों पैर चौड़ा दिये और उसके गान्ड के छेद पर और उसके आस पास सहलाने लगी।
वो आनन्द से सिसकारियां भरने लगी।
मोहित दरवाजे के पास खड़ा हुआ सब देख रहा था।
उसने अपने कपड़े भी उतार लिये।
ये सब कुछ देख कर मोहित का लन्ड टाईट हो चुका था।
वह अपना लन्ड पर उंगलियों से चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगा।
मैं काजल की गान्ड और चूतडों को प्यार से सहला रही थी।
उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ चुकी थी।
मैंने मोहित को इशारा कर दिया कि लोहा गर्म है … आ जाओ।
मोहित दबे पांव अन्दर आ गया।
मैंने इशारा किया कि अब चोद डालो इसे।
उसके फ़ैले हुये पांव और खुली हुयी चूत मोहित को नजर आ रही थी।
ये देख कर उसका लन्ड और भी तन्नाने लगा।
मोहित उसकी पैरों के बीच में आ गया।
मैं काजल के पीछे आ गयी.
मोहित ने काजल के चूतड़ों के पास आकर लन्ड को उसकी चूत पर रख दिया।
काजल को तुरन्त ही होश आया … पर तब तक देर हो चुकी थी।
मोहित ने उस काबू पा लिया था।
वो उसके चूतड़ों से नीचे लन्ड चूत पर अड़ा चुका था।
उसके हाथों और शरीर को अपने हाथों में कस चुका था।
काजल चीख उठी … पर तब तक मोहित का हाथ उसका मुँह दबा चुका था।
मैंने तुरन्त ही मोहित का लन्ड का निशाना उसकी चूत पर साध दिया।
मोहित हरकत में आ गया।
उसका लन्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया।
चूत गीली थी … चिकनी थी पर अभी तक चुदी नहीं थी।
दूसरे ही धक्के में लन्ड गहराई में उतरता चला गया।
काजल की आंखें फ़टी पड़ रही थी, घू घू की आवाजें निकल रही थी।
उसने अपने हाथों से जोर लगा कर मेरा हाथ अपने मुख से हटा लिया और जोर से रो पड़ी.
उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे … चूत से खून टपकने लगा था।
“बाबूजी … बहुत दर्द हो रहा है … धीरे धीरे करो!” उसने विनती भरे स्वर में रोते हुये कहा।
पर लन्ड अपना काम कर चुका था।
“बस …बस … अभी सब ठीक हो जायेगा … रो मत!” मैंने उसे प्यार से समझाया।
वो नीचे दबी हुयी छटपटाती रही।
हम दोनों ने मिलकर उसे दबोच लिया।
दबी चीखें उसके मुह से निकलती रही। मोहित ने लन्ड को धीरे धीरे से अन्दर बाहर करना शुरु कर दिया।
मोहित ने अब उसकी चूचियां भी भींच ली। वो नीचे से अपने बदन को छटपटाकर कर हिलाती कर निकलने की कोशिश करती रही।
लेकिन वो मोहित के शरीर और हाथों में बुरी तरह से दबी थी।
मोहित ने अपनी चुदाई अब तेज कर दी … उसका कुंवारापन देख कर मोहित और भी उत्तेजित होता जा रहा था।
धक्के तेजी पर आ गये थे। कुछ ही देर में काजल को अन्दर ही अन्दर शायद उसे मस्ती चढ़ने लगी.
“हाय मैं … मर गयी!” बस आंखें बन्द करके यही बोलती जा रही थी … नीचे तकिया खून से सन गया था।
अब मोहित ने उसकी चूचियां फिर से पकड़ ली और उन्हें दबा दबा कर चोदने लगा।
काजल अब चुप हो गयी थी … शायद वो समझ चुकी थी कि उसकी झिल्ली फ़ट चुकी है और अब ज्यादा दर्द नहीं होने वाला है।
अब उसके चेहरे से लग लग रहा था कि उसे मजा आ रहा है।
मैंने भी चैन की सांस ली।
मैंने देखा कि मोहित का लन्ड खून से लाल हो चुका था।
काजल की कुँवारी चूत पहली बार चुद रही थी।
उसकी टाईट चूत का असर ये हुआ कि मोहित जल्दी ही चरमसीमा पर पहुंच गया।
अचानक नीचे से काजल की सिसकारी निकल पड़ी और वो झड़ने लगी।
मोहित को लगा कि काजल को अन्तत: मजा आने लगा था और वो उसी कारण वो झड़ गयी थी।
अब मोहित ने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और अपनी पिचकारी छोड़ दी।
सारा वीर्य काजल के चूतडों पर फ़ैलने लगा।
मैंने जल्दी से सारा वीर्य काजल की चूतड़ों पर फ़ैला दिया।
मोहित अब शान्त हो चुका था। मोहित बिस्तर से नीचे उतर आया।
काजल को भी चुदने के बाद अब होश आया … वो वैसी ही लेटी हुई थी।
“बस अब तो हो गया … देख तेरी इच्छा भी तो पूरी हो गयी ना!”
उसने अपने कपडे उठाये और पहनने लगी … मोहित भी कपड़े पहन चुका था।
मैंने मोहित को तुरन्त इशारा किया … वो समझ चुका था … जैसे ही काजल जाने को मुड़ी मैंने उसे रोक लिया- सुनो काजल … मोहित क्या कह रहा है!
“काजल … मुझे माफ़ कर दो … देखो मुझसे रहा नहीं गया तुम्हे उस हालत में देख कर … प्लीज!”
मोहित ने अपनी जेब से सौ सौ के दो नोट निकाल कर उसे दिये.
उसने देख कर कोई खुशी नहीं दिखाई.
मोहित ने फिर और सौ सौ के पाँच नोट निकाल दिये.
उसकी आंखो में एकबारगी चमक आ गयी … मैंने तुरन्त उसे पहचान लिया।
मैंने मोहित के हाथ से नोट लिये और अपने पर्स से सौ सौ के कुल एक हज़ार रुपये निकाल कर उसके हाथ में पकड़ा दिये।
उसका चेहरा खिल उठा।
“देख … ये साब ने जो किया, ये उसका हरज़ाना है … हां अगर साब से और करवाना हो तो इतने ही नोट और मिलेंगे!”
“दीदी … मैं आपकी आज से बहन हूं … पैसों की जरूरत किसे नहीं होती है!”
मैंने उसे काजल को गले लगा लिया- काजल … तू सच में आज से मेरी बहन है … तेरी इच्छा हो … तभी ये करना!
काजल खुश हो कर जाने लगी … दरवाजे से उसने एक बार फिर मुड़ कर देखा … फिर भाग कर आयी … और मेरे से लिपट गयी … और मेरे कान में कहा- दीदी … साब से कहना … धन्यवाद!
“अब साब नहीं, जीजाजी बोल! और धन्यवाद किस लिये … पैसों के लिये?”
” नहीं … मेरी चुदाई के लिये!”
वो मुड़ी और बाहर भाग गयी.
मैं उसे देखती रह गयी.
तो क्या ये सब खेल खेल रही थी।
मेरी नजर ज्योंही मेज़ पर पड़ी तो देखा कि सारे नोट वहीं पड़े हुए थे.
मोहित असमंजस में था. Antarvasna
The user agrees to follow our Terms and Conditions and gives us feedback about our website and our services. These ads in TOTTAA were put there by the advertiser on his own and are solely their responsibility. Publishing these kinds of ads doesn’t have to be checked out by ourselves first.
We are not responsible for the ethics, morality, protection of intellectual property rights, or possible violations of public or moral values in the profiles created by the advertisers. TOTTAA lets you publish free online ads and find your way around the websites. It’s not up to us to act as a dealer between the customer and the advertiser.