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दोस्तो, मेरा नाम राहुल है. मैं राजकोट का रहने Sex Stories वाला हूँ. मेरी उम्र तेईस साल है और मैं एक अच्छा खासा मर्द दिखता हूँ. मेरी त्वचा भी काफी गोरी है, जो किसी भी लड़की या भाभी को आकर्षित कर लेती है.
आपको मैं अपनी पहली मगर सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ. यह कहानी दिसम्बर 2003 की है.
मैं राजकोट में अपना एक साइबर कैफे चलाता हूँ, वहां पर काफ़ी सारी लड़कियों का आना जाना रहता है. मगर मैं एक बहुत शर्मीला टाइप का बंदा हूँ, इसलिए मेरी किसी भी लड़की से बात करने की हिम्मत ही नहीं होती थी.
मुझे याद है ये काफी साल की बात है. उस दिन शाम के साढ़े सात बजे होंगे, तब मैं अपने साइबर कैफे में अकेला था. उस वक्त एक सुंदर सी लड़की अन्दर आई. उसने अपना नाम आरती बताया था.
मैंने उससे ओके कहा और इशारा किया कि किसी भी सिस्टम पर अपना काम कर ले.
वो मेरे सामने वाले कंप्यूटर पर आकर का बैठ गई थी. मैं उसे देख रहा था, वो बला की खूबसूरत माल लग रही थी. उसने शॉर्ट शर्ट और लो-वेस्ट जींस पहनी हुई थी. उसका बड़ा ही कातिलाना फिगर था. मैंने उसकी फिगर की नाप का अंदाजा 34-26-36 का लगाया था. उसके चूचे एकदम उभरे हुए थे.
कुछ मिनट बाद उसने मुझसे वो कम्प्यूटर ख़राब होने का बहाना बनाया. मैंने सोचा कि अभी तक तो सब सिस्टम सही थे, ये कैसे खराब हो गया है. मगर शायद उसने मुझे जानबूझ कर अपने पास बुलाया था. मैंने उसके करीब जाकर सिस्टम को चैक किया, तो वो बिल्कुल सही चल रहा था.
मैंने उससे कहा- क्या खराबी लग रही है. सिस्टम सही तो है?
इस पर उसने मुझसे कहा- मुझे कंप्यूटर चलाना ठीक से आता नहीं है. प्लीज़ आप मुझको थोड़ा सा सिखा दो.
अब इतनी हॉट लड़की देख कर मेरा भी मन डोल गया था.
मैंने कहा- ठीक है
जैसे ही मैं उसके बाजू में बैठा कि उसने पहले नीचे से अपने पैर को मेरे पैर पर रखा और धीरे धीरे उसको अपने पैर से सहलाने लगी. मैं तो एकदम से दंग रह गया. मुझे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.
मैं चुप रहा और मैंने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई.
ये देख कर उसने धीरे धीरे करके मेरे लौड़े पर अपना हाथ रख दिया. उसका हाथ जैसे ही मेरे लंड पर आया तो मुझे एक अजीब सी सिहरन हुई और मैंने वहां से उठ कर जाने की कोशिश की.
उसने मुझे मना करते हुए मेरा हाथ खींच लिया और कहने लगी- मेहरबानी करके मुझे अकेला मत छोड़ो, मुझे तुम बहुत अच्छे लगते हो.
मैंने कहा- ये क्या बात हुई .. अभी तो हम दोनों पूरी तरह से एक दूसरे को जानते भी नहीं हैं … और तुम मेरे से ये सब कर रही हो.
इससे आगे मैं कुछ और बोलता कि उसने मुझे गाल पर किस कर दिया और अगले ही पल मेरे होंठों से होंठ लगा कर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी.
बस फ़िर क्या था … मैं भी तो आख़िर मर्द ही था … मैंने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया और उसे अच्छे से किस करने लगा.
अब वो मेरी जुबान को चूस रही थी और मैं उसकी. तभी मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया, तो उसने कुछ नहीं बोला … बल्कि उसने मेरा दूसरा हाथ पकड़ कर खुद की गांड पर लगा दिया.
वो मुँह हटा कर मुझे देख कर जोर जोर से बोलने लगी- ओह रौनी .. प्लीज़ जोर से दबाओ आह .. और मेरे बूब्स जोर जोर से दबाओ आह कितना मजा आ रहा है.
मगर मैं डर रहा था कि कहीं कैफे पर कोई और कस्टमर न आ जाए, सो मैंने उसे वहीं पर रोका और उससे कहा- हम कहीं अकेले में आराम से मिलके एन्जॉय करेंगे. अभी इधर कोई आ जाएगा, तो सब गड़बड़ हो जाएगी.
उसने अपने टॉप को ठीक करते हुए कहा- ठीक है. मैं इसी संडे को सुबह छह बजे तुम्हारे कैफे पर आउंगी.
मैंने कहा- इतनी सुबह क्यों भला!
उसने कहा- सर्दियों के दिन हैं … सुबह सुबह का मजा ही कुछ और आएगा. वैसे भी मैं घर से सुबह घूमने के लिए निकलती हूँ, सो घर पर सबको यही पता रहेगा. फिर छह बजे थोड़ा सा अंधेरा भी होता है.
चूंकि सर्दी का मौसम था तो उसकी बात सही थी. मैं उसकी तरफ देखने लगा.
उसने कहा कि तुम्हें कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना!
मैंने सोचा और अपने आपसे भी कहा कि ऐसा मौका फ़िर नहीं मिलेगा … साली खुद ही चुत चुदने मचल रही है. मैंने कहा- ठीक है मैं आ जाऊंगा.
फ़िर उसने मुस्कुराते हुए मुझे एक किस की और गांड मटकाते हुए मेरे कैफे से निकल गई.
दो दिन बाद संडे था. मैं सुबह सुबह जल्दी पांच बजे उठा और फ्रेश होकर एक चाय पी और बाइक उठा कर फुल स्पीड से कैफे आ पहुंचा.
मैंने कल रात को ही पूरी व्यवस्था कर दी थी. एक बार अन्दर जाकर फिर से सब ठीक किया. थोड़ा रूम फ्रेशनर भी स्प्रे कर दिया और उसके आने का इन्तजार करने लगा. मैं कैफे की शटर आधी उठा रखी थी ताकि उसे मेरे आ जाने का अहसास हो जाए.
तभी वो शटर उठा कर अन्दर आ गई और आते ही मुझसे लिपट गई.
मैंने कहा- एक मिनट शटर तो बंद कर लेने दो.
वो अलग हुई, तो मैंने शटर बंद कर दी और उसकी तरफ घूम गया. वो मुझे देख कर सीधे आकर मुझसे लिपट गई.
मैंने ध्यान से देखा वो जॉगिंग सूट में आई थी. उसके खुले हुए लंबे बाल उसकी खूबसूरत जवानी को और भी ज्यादा मदहोश कर देने वाली बना रहे थे.
हम दोनों ने करीब दस मिनट तक किस किया. चूमाचाटी के दौरान एक बार तो उसने मुझे काटा भी, मगर मैंने कुछ नहीं कहा. वो काफी गरम हो रही थी.
मैंने उसके टॉप की जिप खोली, तो उसने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी थी.
जैसे ही मैंने उसके दूध दबाए, तो वो मादक सिस्कारियां भरने लगी- आह जोर से … और जोर से!
उसके चूचे काफी नर्म थे. मैंने उसका टॉप खोल दिया और उसकी ब्रा भी निकाल दी. उसकी चूचियां हवा में एकदम से फुदकने लगीं. मैंने उसका एक निप्पल मुँह में ले लिया.
बदले में उसने मेरी गांड पर जोर से दबाते और कहा- आह मेरे राजा और जोर से चूस ले इसको.
फ़िर मैं उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसता और चूमता हुआ उसके पेट तक आ गया. कुछ ही पलों के बाद मैंने उसके पैंट और पैंटी को भी उतार फैंका.
तभी उसने कहा- एक मिनट.
मैं रुका, तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे हर जगह पागलों की तरह चूमने लगी. अब चुदास बढ़ी … तो मैंने भी एक दो बार उसके निप्पल को काटा.
फिर वो नीचे बैठ कर तुंरत ही मेरा लंड अपने मुँह में लेने लगी. एक मस्त लौंडिया के मुँह में अपने लंड का अहसास पाते ही मैं अपने होश खो बैठा. ऐसा आनन्द आ रहा था मानो मैं किसी जन्नत की हूर से अपने लंड को चुसवा रहा हूँ.
मैंने आह भरते हुए कहा- आह जान अब और मत तड़पाओ … तुम अकेली अकेली मजा मत लो. मुझे भी मजा चाहिए.
वो तुंरत समझ गई और सोफे पर लेट गई. उसने मुझे अपने ऊपर उल्टा लेटा दिया. अब मेरे मुँह में उसकी चुत थी. मैं चुत पर टूट पड़ा. वो लंड को कुल्फी के जैसे चूसने लगी. उसे जो चाहिए था, उसे मिल गया और मुझे जो चाहिए था, मुझे मिल गया था. हम दोनों 69 में आकर मस्त मजा ले रहे थे.
सच में यार क्या मलाईदार चूत थी उसकी .. लगता था उसने अभी सुबह ही चुत की शेव की हो. उसकी चुत काफी गर्म भी थी और उसने चुत पर कोई मस्त स्वादिष्ट सा फ्लेवर भी लगाया हुआ था.
मैंने तुंरत ही अपनी जुबान नुकीली की और किसी पागल कुत्ते की तरह चुत चाटने लगा. मेरी जीभ उसकी चुत में अन्दर भी जाने लगी थी. वो भी काफी मजे से मेरा लौड़ा चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद मेरा पानी निकल गया और उसने बड़े मजे से मेरे लंडरस को चाट लिया. उसने मेरे वीर्य को पूरा का पूरा खा लिया था. एक बूंद भी बेस्ट नहीं जाने दी थी.
फ़िर पांच मिनट के बाद उसने फ़िर से मेरे लौड़े को चूस कर गरम किया और बोली- अब मेहरबानी करके मुझे जल्दी से चोद दो … मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है रानी.
उसकी टांगें चौड़ी करके मैंने अपने कंधे पर रख लीं और अपना लौड़ा अन्दर पेलने के लिए कोशिश की. मगर लंड चुत के अन्दर नहीं गया. उसे दर्द भी हो रहा था.
उसे दर्द से कराहते हुए देख कर मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- एक मिनट रुको.
उसने अपने मुँह से ढेर सारा थूक निकाल कर मेरे लौड़े पर लगाया और कुछ अपनी चूत पर भी लगा लिया. फिर अपने हाथों से अपनी चूत को चौड़ा करके बोली- अब आ जाओ मेरे राजा.
मैंने कहा- हां ये ले मेरी रानी.
ये कहते हुए मैंने अपने खड़े लंड को एक ही झटके में पूरा का पूरा अन्दर डाल दिया.
लंड लेते ही वो चिल्लाने लगी- उई मां … मर गई … मेरी फट गई.
मैंने कहा- चिल्लाओ मत … कोई आ जाएगा तो मुसीबत हो जाएगी.
वो अपनी चीख दबाते हुए बोली- दर्द बहुत हो रहा है रौनी … तुम एक काम करो तुम मेरे दर्द की परवाह किये बिना जल्दी से लंड को दो तीन बार अन्दर बाहर करो.
मैंने वैसे ही किया.
वो कराहते हुए अपने मुँह बंद किये हुए मेरे लंड के प्रहार झेलती रही.
कोई आठ दस धक्कों के बाद उसका दर्द जाता रहा. अब वो अपनी गांड उछाल उछाल कर चुदवाने लगी. मैं भी उसके मम्मों को दबा रहा था, उसे किस कर रहा था.
थोड़ी देर के बाद वो बोली कि मुझे तुम्हारे ऊपर आना है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं लंड खींच कर उठा और सोफे पर लेटने जा रहा था कि तभी उसे न जान क्या सूझा और वो मेरी गांड में उंगली डालने की कोशिश करने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
वो हंसने लगी और बोली- चलो लेट जाओ, मुझे रायडिंग करने दो.
मैंने कहा- नहीं, पहले मुझे तुम्हारी गांड मारने देनी होगी.
वो बोली- आज नहीं … फ़िर कभी ले लेना.
वो मुझे धक्का देकर मेरे ऊपर चढ़ गई और लंड पकड़ कर चुत में फंसा कर बैठती चली गई.
आह क्या गजब की बला थी वो .. मेरे ऊपर क्या मस्त माल लग रही थी. लंबे बाल और हिलते हुए चुचे मुझे काफी मदहोश किए जा रहे थे.
करीब दस मिनट के बाद मेरा पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- क्या करूं?
उसने कहा- अन्दर नहीं निकालना. मुझे पीना है … तुम्हारा गाढ़ा पानी बहुत मस्त स्वाद देता है.
मैंने कहा- ठीक है.
वो उठ कर अलग हुई और उसने मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. अगले ही पल मेरा रस छूट गया और उसने लंड का सारा पानी पी लिया.
चुदाई के बाद हम दोनों ने करीब आधे घंटे तक एक दूसरे को चूमा सहलाया और अपने अपने कपड़े पहने.
मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरा, तो उसने वादा किया कि वो मुझे अपनी गांड मारने देगी.
मेरे प्यारे दोस्तो, अन्तर्वासना के लिए ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, अगर कोई भूल हुई हो, तो प्लीज़ नजरअंदाज कर देना. कमेंट्स करना न भूलें. Sex Stories
मैं अन्तर्वासना की Sex Stories कहानियाँ बहुत दिनों से पढ़ता आ रहा हूँ। मैं भी अपना अनुभव पाठकों के साथ बाँटना चाहता हूँ।
मुझे एक बार काम के सिलसिले में दिल्ली से चेन्नई जाना था। प्रोग्राम देर से बना था इसलिए मुझे कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाई थी, मैं स्टेशन पर जाकर टीटी से सीट के लिए बात कर रहा था कि अचानक एक 20-21 साल की लड़की मेरे पास आई और कहने लगी- मेरे पास फर्स्ट एसी का एक एक्स्ट्रा टिकट है, अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो आप मेरे साथ चल सकते हैं।
मैंने तुंरत ही हाँ कह दिया। कन्फर्म टिकट और हसीन साथ और क्या चाहिए। ट्रेन में जाकर मुझे पता लगा कि वोह एक एसी केबिन का टिकट है।
मैंने उससे पूछा- तुम्हें डर नहीं लगेगा अकेले मेरे साथ?
वो बोली- नहीं, तुम ऐसे लगते नहीं हो, वैसे भी अकेले सफ़र करने में भी तो डर है।
सफ़र शुरू होने के थोड़ी देर बाद टीटी टिकट चेक कर गया, फिर वो भी बाथरूम जाकर अपनी ड्रेस बदल कर आ गई।
मैं लेट कर एक नॉवल पढ़ने लगा तभी उसने मुझे दूसरा झटका दिया। उसने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया और अपने सामान से एक वोड्का की बोतल निकाल ली और मुझसे पूछने लगी- तुम लोगे क्या?
मैं हैरान था, मैंने हाँ कह दिया। थोड़ी देर में दोनों को नशा होने लगा। हम लोग आपस में काफी खुल गए थे।
फिर उसने कहा- चलो, ताश खेलते हैं।
थोड़ी देर के बाद वो बोली- तुमने कभी स्ट्रिप पोकर खेला है?
यह सुनकर मेरा लंड खड़ा होने लगा। मैं समझने लगा कि यह लड़की चाहती क्या है, मैंने कहा- खेला तो नहीं है पर अगर तुम चाहो तो खेल सकता हूँ।
वो बोली- ठीक है पर पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे और तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !
मैंने कहा- ठीक है।
पहला गेम मैंने जीता।
उसने शर्त के अनुसार अपनी शर्ट उतार दी। अन्दर उसने काली सिल्की ब्रा पहनी हुई थी जिसमें से उसके गोरे मम्मे झांक रहे थे।
मेरा सर घूमना शुरू हो गया। मेरी नज़र अब उसके मम्मों पर बार बार जा रही थी, ध्यान भंग होने के कारण मैं अगले दोनों गेम हार गया और अब मैं सिर्फ अपने अंडरवियर में था जिसमें मेरा लंड खड़ा हुआ साफ़ दिख रहा था।
वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराकर बोली- और खेलना है?
मैंने कहा- मैं हार गया तो पूरा नंगा हो जाऊंगा !
वो बोली- तो क्या मैं भी तो हार सकती हूँ !
हमने अगला गेम खेला और वो जानबूझ कर हार गई। उसने अपना पजामा उतारा तो उसकी दूधिया जांघें देखकर मेरी आह निकल गई।
वो बोली- और खेलना है?
मैंने कहा- पर तुम तो कह रही थी कि पूरे कपड़े नहीं उतारेंगे?
वो बोली- मैं उतारने को तैयार हूँ अगर तुम मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा न करो तो !
मैंने कहा- ठीक है।
मैं अगला गेम हार गया।
उसने बोला- चलो उतारो !
मैंने धीरे से अपना अंडरवियर उतार दिया और मेरा आठ इंच का मोटा लंड बाहर निकल आया जिसे देख कर वो मुस्कुराने लगी।
उसने कहा- और खेलना है?
मैंने कहा- और क्या ! मैं भी तुम्हें नंगा देखना चाहता हूँ !
वो मुस्कुराई और खेलने लगी, और बार बार मेरे मोटे लंड को देखती रही।
अगला गेम वो हार गई और जैसे ही उसने अपनी ब्रा उतारी उसके सफ़ेद मम्मे मेरे सामने प्रकट हो गए।
मैंने अपने आप को कैसे संभाला मैं ही जानता हूँ।
पर इस धीरे धीरे होने वाले इस गेम में मुझे मज़ा आ रहा था। अगला गेम वो जानबूझ कर हार गई।
मैंने कहा- तुम्हारी पैंटी मैं उतारूंगा !
उसने कहा- ठीक है ! पर शर्त याद है न? तुम कुछ उल्टा सीधा नहीं करोगे !
मैंने कहा- है तो बड़ा मुश्किल ! पर कोशिश करूंगा !
वो मेरे सामने खड़ी हो गई और मैंने धीरे से उसकी पैंटी उतार दी और उसकी चिकनी चूत के दर्शन किये।
मैं उसके बाद बैठ तो गया पर कण्ट्रोल करना बड़ा मुश्किल हो रहा था। मैंने धीरे से अपना लंड सहलाना शुरू कर दिया।
वो हंस कर मेरे पास आई और बोली- कुछ तो करना पड़ेगा नहीं तो तुम तड़प कर मर जाओगे !
उसने अपने हाथ से मेरा लंड सहलाना शुरू कर दिया, फिर वो मेरे सामने नीचे बैठ गई और मेरे लंड को चाटने लगी, फिर धीरे धीरे उसने उसको चूसना शुरू किया।
मैं नियंत्रण से बाहर होता जा रहा था, मैंने उसके बाल पकड़ लिये और उसके मुँह को जोर जोर से चोदने लगा।
मुझे झड़ने में ज्यादा देर नहीं लगी, वो मेरा पूरा जूस पी गई। उसके बाद वो मेरे बगल में बैठ गई।
मैंने पूछा- आज तक तुम कितने लंडों का स्वाद चख चुकी हो?
वो बोली- मैंने गिना नहीं !
मैंने पूछा- और कबसे चुदवा रही हो?
“कई सालों से !”
“पहली बार कैसे हुआ था?”
वो बोली- ठीक है, जब तक तुम्हारा लंड दुबारा खड़ा होता है, तुम्हें पहली बार का किस्सा बताती हूँ।
वो मेरे बगल में बैठ गई और मेरा लंड अपने हाथ में लेकर धीरे धीरे सहलाते हुए मुझे बताने लगी- य बात तब की है जब मैंने नया नया अपनी जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा था, मेरी सहेलियाँ अपनी चुदाई के किस्से मुझे सुनाती थी, पर मैं तब तक कुँवारी ही थी। मेरे पापा के एक दोस्त हमारे साथ रहने हमारे घर आये। मैंने महसूस किया कि जबसे वो घर आये हैं बार बार मुझे देखते थे और मुझसे बात करते थे।
एक रात को जब सब सो गए तो वो मेरे कमरे में आये और बोले- मेरा आज अकेले मन नहीं लग रहा ! अगर तुम्हें कोई परेशानी नो हो तो तुम्हारे कमरे में सो जाऊँ?
मैंने कहा- ठीक है, जैसा आपका मन।
लाइट बंद होने के बाद थोड़ी देर में मेरी आँख लग गई। अचानक मैंने महसूस किया कि अंकल मेरी चादर में घुस गए हैं और मुझसे सट कर लेट गए हैं।
मैंने अंकल से दूसरी तरफ करवट ले ली। उन्होंने भी मेरी तरफ करवट ली और मुझसे फिर सट गए, उनका लंड मुझे अपनी गांड पर महसूस होने लगा। उन्होंने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और मेरे दाहिने मम्मे पर टिका दिया, फिर वो उसको धीरे धीरे मसलने लगे।
पहले तो मुझे थोड़ा डर लगा पर फिर मज़ा आने लगा। उन्होंने फिर अपना हाथ मेरी शर्ट के अन्दर डाल कर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए और आगे हाथ ले जा कर मेरे मम्मे मसलने लगे।
मैंने करवट ली और सीधी हो गई। उन्होंने मेरी शर्ट और ब्रा ऊपर उठाई और मम्मे चूसने और चाटने लगे।
मैं अब गरम होने लगी थी, मेरी चूत गीली हो रही थी। अंकल ने एक हाथ मेरी पैंटी में डाला और मेरी चूत को छेड़ने लगे।
मैं काबू से बाहर हो रही थी, मेरे मुँह से आह….. आह….. की आवाजें निकल रही थी।
फिर अंकल ने नीचे जाकर मेरी पैंटी और पजामा दोनों एक साथ उतार दिए। उन्होंने मेरी टाँगे मोड़ कर फैला दी और चूत को पूरी तरह खोल दिया। मेरी उनचुदी बुर देखकर उनसे रहा न गया।
अंकल अपनी पैंट और अंडरवियर दोनों उतार दिए और अपना लंड मेरी चूत के पास ले आये। उन्होंने मुझसे धीरे से पूछा- पहले किया है?
मैंने कहा- नहीं !
ठीक है ! मैं धीरे से करूंगा। शुरू में थोड़ा दर्द होगा पर बाद में मज़ा आएगा।
फिर उन्होंने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया और मेरी चूत से धीरे धीरे बाहर से ही रगड़ने लगे।
मैं धीरे धीरे पागल होती जा रही थी, फिर अचानक उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और मेरी चीख निकल गई।
अंकल ने मेरे मुँह पर हाथ रखा फिर मुझे धीरे धीरे चोदने लगे, मेरा दर्द धीरे धीरे आनंद में बदलने लगा, उनके धक्के तेज होने शुरू हो गए थे और मैं पागल हुई जा रही थी। मेरी आह आह की आवाज़ से पूरा कमरा भर गया।
फिर अचानक अंकल झड़ गए। वो मेरे ऊपर से उतरे और कपड़े पहन कर अपने कमरे में चले गए।
मुझे पहली बार ज़िन्दगी में इतना मज़ा आया था ! मैं कभी भूल नहीं सकती !
उसकी कहानी सुनकर मेरा लंड फिर पूरी तरह तैयार था।
वो मुस्कुराकर बोली- अब मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी ! जो करना है कर लो !
मैंने कहा- अब मैं भी कहाँ रुकने वाला हूँ !
और मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया, उसके मम्मों को मैं जोर जोर से मसल रहा था।
वो सीट पर लेट गई और मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू कर दिया। फिर मैंने उसकी टांगों को फैला दिया और उसकी चूत को चाटने लगा, वो पागल होने लगी और चिल्लाने लगी।
मेरा लंड बेताब हो चला था।
उसने फिर उठकर दोनों सीटों के बीच में चादर बिछाई और लेट कर कहा- नीचे चुदाई करेंगे ! ज्यादा मज़ा आता है !
उसने लेट कर अपनी टांगों को फैला दिया। मैंने नीचे जाकर उसकी चूत में अपना आठ इंच का लम्बा मोटा लंड घुसेड़ दिया।
उसकी चूत मेरा पूरा लंड पी गई। फिर मैंने उसको पेलना शुरू किया। इतनी देर रुकने के बाद कसम से उसको चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
वो भी चिल्लाने लगी थी। ट्रेन अपनी पूरी स्पीड पकड़ चुकी थी और हम भी फुल स्पीड पर थे।
करीब आधे घंटे तक मैं उसको पेलता रहा उसके बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया। उस दौरान वो कम से कम तीन या चार बार झड़ी होगी।
फिर मैं अपने लंड को उसकी चादर से पोंछ कर सीट पर बैठ गया। थोड़ी देर में वो भी उठकर आ गई।
बाकी का सफ़र हमारा कैसा कटा यह मैं आपको फिर बताऊंगा। Sex Stories
पहली बार सम्भोग Antarvasna यानि सेक्स करते वक़्त डर लगना स्वाभाविक है। आखिर उन खूबसूरत पलों को कौन यादगार नहीं बनाना चाहता।
लेकिन अगर ज़रा सी भी चूक हो जाए तो ये खूबसूरत लम्हे ज़िन्दगी के सबसे डरावने अनुभवों में से एक बन जाते हैं। लेकिन अगर कुछ बातों का ख्याल रखा जाए, तो फर्स्ट टाइम सेक्स को बेहद खुशगवार यादगार बना सकते हैं।
सबसे पहले सुरक्षा- ज़्यादातर लोग अपने पहले सम्भोग को लेकर काफी भावुक और अधीर होते हैं। अधीर होना जायज़ भी है। लेकिन दो पल की खुशी के लिए सुरक्षा से समझौता न करें।
यौन सम्बन्धी रोगों और अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉन्डम का इस्तेमाल ज़रूर करें। अपने लिए एक भरोसेमंद साथी चुनें जो आपकी कद्र करता हो। मस्ती के लिए सेक्स करने से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ज़्यादा उम्मीदें न रखें- हर कोई सोचता है कि उनका पहली बार एक जादुई और यादगार अनुभव हो। लेकिन ऐसा होगा ही, यह ज़रूरी नहीं है। अच्छे से सेक्स करना एक कला है, जो वक़्त के साथ आती है। ज़्यादा उम्मीदें रखने से आपको ही निराशा होगी।
फोरप्ले यानि सेक्स पूर्व क्रीड़ा करना न भूलें- चाहे कितने ही उत्सुक और उत्तेजित क्यों न हों- सीधा वहाँ’ पहुँचने से बचें। समय लें और अपने साथी को भी मुख्य कार्य के लिए गर्म होने, तैयार होने का वक़्त दें। पहली बार में आप जितना ज़्यादा फोरप्ले करेंगे उतना ही अच्छा रहेगा।
सम्भोग से पहले पूरी तरह उत्तेजित हों- इंटरकोर्स तक पहुँचने से पहले सुनिश्चित कर लें कि आप पूरी तरह उत्तेजित हैं। वरना पहली बार सेक्स में आपको काफी दर्द होगा। लड़की की झिल्ली फ़टने पर और लड़के के लिंग के तन्तु कटने पर दर्द अवश्यभावी है।
यह न सोचें कि वो अनुभवी है- अधिकतर मामलों में, पुरुषों को यह दिखावा करने में बहुत मज़ा आता है कि वे सेक्स के एक्सपर्ट हैं। ऐसा शायद इसलिए कि वह अपनी साथी के सामने अपना भय और अनुभवहीनता व्यक्त करने से डरते हैं। इसलिए, कभी भी यह मान कर न चलें कि वो इसके एक्सपर्ट हैं। अपनी अन्तर्वासना यानि सेक्ष की इच्छा को भी अपने साथी के सामने रखें और कोशिश करें कि हमेशा वो ही लीडिंग न हों।
झूठ न बोलें- कई लोग सिर्फ इसलिए कह देते हैं कि वो संतुष्ट हैं ताकि उनके सहभागी को बुरा न लगे। ऐसा करने से आप असंतुष्ट ही रह जाएँगे और आपका रिश्ता खतरे में पड़ सकता है, इसलिए सच बोलें। और पहली बार सेक्स करने जा रहे लोग तो कतई झूठ का सहारा न लें।
चरमोत्कर्ष परम आनन्द चरमसीमा पर पहुँचने की आशा न रखें- हालांकि चरमोत्कर्ष से काफी सुख मिलता है, लेकिन बिना उसके भी आप सेक्स को इंजॉय कर सकते हैं। पहली बार इसकी आशा न रखें। अगर होता है तो बहुत अच्छा और नहीं होता तो कोई बात नहीं। बस अपने अनुभव का आनंद लें।
दर्द ज़्यादा देने का मतलब प्यार नहीं? जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। पहली बार सेक्स करने में थोड़ा ज़्यादा दर्द ज़रूर होता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप अच्छे प्रेमी नहीं हैं। लेकिन अगर आपको दर्द हो तो उसे ज़रूर बताएँ। अगर आपका साथी संवेदनशील हैं तो वह इसे ज़रूर समझेगा और इस बात का ख़्याल रखेगा। Antarvasna
वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी में मैं पढ़ाई केर लिए किराये के कमरे में रहता था. माकन मालकिन की भतीजी उनके पास रहने आई तो वह मुझसे घुल मिल गयी और एक दिन उसने सेक्स की पहल की.
दोस्तो, कैसे हैं आप सभी … मेरा नाम संदीप यादव है. मैं बिहार का रहने वाला हूं.
मैं अन्तर्वासना का 6 साल से फैन हूं. यहां की लगभग सभी सेक्स कहानियां मैंने पढ़ी हैं.
इस कारण से मुझे पेलाई का पूरा ज्ञान तो हो गया था, पर कभी चुदाई करने का मौका नहीं मिला था.
मैंने सोचा कि जब भी चुदाई करने का मौका मिलेगा, तो मैं उसे आप सभी के साथ साझा करूंगा.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है … मेरी वर्जिन बॉय फर्स्ट Xxx स्टोरी एकदम सच है.
दोस्तो, जब ये वाकया हुआ था, तब मेरी उम्र 26 साल की थी. मेरी हाईट 5 फुट 6 इंच है और रंग भी काफी गोरा है.
बचपन से ही मेरा खानपान अच्छा रहा है, जिससे मेरा स्वास्थ भी काफी अच्छा है.
अपने घर में सबसे छोटा होने की वजह से घर और बाहर के सभी काम मैं ही करता था, जिससे काफी फिट और मजबूत भी हूं.
साथ ही पढ़ाई में भी अच्छा हूँ और आज्ञाकारी होने की वजह से सबका दुलारा भी हूँ.
मेरा अब तक किसी भी लड़की से कोई प्रेम संबंध भी नहीं था, पर कोचिंग की कई लड़कियां मुझे पसंद करती थीं क्योंकि पढ़ाई के साथ साथ मेरा व्यवहार भी अच्छा था.
मैं सबके डाउट्स भी क्लियर कर देता था.
किसी से प्रेम संबंध न होने की वजह से तब तक मेरे लौड़े का टांका भी नहीं टूटा था.
मेरे लंड का आकार भी मस्त है.
यह साढ़े छह इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा था. मेरा लंड किसी को भी संतुष्ट कर सकता था.
यह बात मुझे उसी लड़की ने बताई थी जिसकी चूत में पहली बार मेरे लौड़े ने घुस कर चुदाई की शुरुआत की थी.
उस लड़की का नाम लाली था.
उस वक्त मेरे लंड के टोपे पर खाल चढ़ी थी; उसे थोड़ा भी पीछे खिसकाने पर काफी दर्द होता था.
चुदाई के समय वह खाल फट गई थी और काफी दिन तक जख्म ठीक नहीं हुआ था.
मेरी स्नातक की पढ़ाई पूरी होने के कुछ साल बाद मेरे घर वालों ने मुझे आगे की तैयारी करने के लिए दिल्ली भेज दिया था जहां मैं बहुत मन लगाकर अपनी पढ़ाई में लग गया.
जहां मैं रहता था, वह एक पांच माले की बिल्डिंग थी.
उसमें मैं चौथे माले पर सिंगल और अटैच बाथरूम वाले कमरे में रहता था.
वहीं ग्राउंड फ्लोर पर किराए से एक 42 साल की आंटी रहती थीं जो टिफिन सप्लाई करती थीं व अपने घर में ही बैठा कर सबको खाना खिलाती थीं.
उन्होंने अपने घर से ही टिफिन सेवा का छोटा सा बिजनेस सैट कर रखा था.
उनके घर कई लड़के खाने आते या टिफिन मांगते.
उनकी अपने पति से बिल्कुल भी नहीं बनती थी. वे दोनों हमेशा अलग ही रहते थे.
जब मेरा मन होता तो वैसे ही खाना खा लेता था और आंटी की भी थोड़े पैसे से या फिर और भी किसी तरह से मदद कर दिया करता था.
मेरी इस बात से आंटी से मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी.
वे अपने सारे सुख दुख व्हाट्सएप पर मुझसे शेयर करने लगी थीं.
फिर कुछ दिन बाद उनकी भतीजी लाली आ गई.
उसकी उम्र 21 साल थी.
वह थोड़ी दुबली पतली और सांवली सी थी.
लाली अपनी चाची के घर कुछ दिनों के लिए रहने आई थी.
मेरा ये वाकया उसी के साथ हुआ था.
वह भी अपनी चाची के घर आते ही काम में मदद करने लगी थी. वह काफी सारे लोगों से और मुझसे भी घुल-मिल गई थी.
अब तो वह कभी कभी कुछ बहाने से मेरे रूम में भी आ जाती थी.
लेकिन मुझे पता नहीं चला कि वह मेरे पास क्यों आती है … और ना ही मैंने उस पर कभी ज्यादा ध्यान दिया.
फिर एक दिन जब दोपहर में मेरे अगल बगल वाले कमरे में कोई नहीं था.
मैं सिर्फ तौलिया लपेटे और बनियान पहने अपनी पढ़ाई कर रहा था.
तब वह अचानक से मेरे कमरे में आ गई और बोली- मैं कपड़े सुखाने आई थी. नीचे सब सो रहे हैं और मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं आ गई. तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है?
मैं बोला- नहीं, कोई दिक्कत नहीं है.
वह मेरे बगल में बैठ कर पूछने लगी- क्या पढ़ रहे हो?
मैंने उसे अपनी किताब दिखा दी.
वह हंस कर बोली- मुझे कुछ समझ नहीं आएगा.
शायद वह ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, पर काफी समझदार थी.
वह यह सब बोल कर मुझसे चिपकती जा रही थी.
मैं उससे दूर होने लगा, तो उसने मेरा तौलिया पकड़ लिया और मुझे बेड पर धकेल कर मेरे पास बैठ गई.
मैं- तू पागल हो गई है क्या?
वह- हां, मैं पागल ही हो गई हूं आपको देख कर … मैं आपको कब से लाइन दे रही हूं और आज बड़ी मुश्किल से मौका मिला है. इसलिए आपके पास आ गई हूं. पर आप समझते ही नहीं हैं.
यह बोल कर लाली नाराज़ सी हो गई.
मैं सब समझ रहा था.
अब तक मेरा लंड भी फन मारने लगा था.
तब भी मैं अंजान बना रहा.
मैं- अरे तो तू ऐसे नाराज़ क्यों हो रही है? अच्छा तू बता … क्या चाहिए तुझे … पैसे चाहिए क्या?
वह गुस्से से देखते बोली- नहीं, आप दूध पीते बच्चे नहीं हो, जो हर एक बात मैं ही बताऊं.
यह बोल कर वह मेरा हाथ अपने सीने के पास ले जाने लगी और मेरी जांघों पर लेटने सी लगी.
अब स्थिति मेरे आपे से बाहर जाने लगी. मैं भी इतना सीधा नहीं था कि कुछ समझ ही न पाऊं.
मैं फटाक से उठ गया और दरवाजे बंद करने आ गया.
मैंने देखा कि दरवाजे के बाहर उसकी चप्पलें पड़ी थीं. मैंने इधर उधर देखा और उसकी दोनों चप्पलों को उठा कर अन्दर करके दरवाजा लगा लिया.
उसकी चप्पलों से किसी को ये शक हो सकता था कि मेरे अन्दर से बंद कमरे में कोई लड़की है.
कोई बवाल न हो जाए तो मैंने जल्दी से यह सब किया और दरवाज़ा बंद कर दिया.
वापस आकर मैं लाली से लिपट गया और उसे चूमने लगा.
यह तो आप भी जानते हैं कि लड़की खुद से पहल कर रही थी और मैं बंद कमरे में उसके साथ था.
ऐसी स्थिति में बुर चुदने को रेडी हो, तो किसी भी लड़के का मूड बन जाएगा.
बस कोई प्यार और इज्जत से मजा लेता है तो कोई धोखा या पैसा देकर चूत चुदाई कर लेता है.
मुझे भी बुर चाहिए थी लेकिन इज्जत और सम्मान से.
अब हमारे होंठ आपस में कब मिल गए, हमें पता ही नहीं चला.
मुझे जो भी करना था, जल्दी करना था क्योंकि हमारे पास ज्यादा समय नहीं था.
जल्द ही उसको ढूंढते हुए उसकी चाची की दस साल की लड़की कभी भी आ सकती थी.
मैं लाली के होंठों को दस मिनट तक चूसता रहा.
वह भी मेरे लंड के आसपास हाथ घुमाती रही.
मैं उसके बूब्स दबाने लगा जो कि मध्यम आकार के थे.
मुझे उसके दूध दबाने में बड़ा मजा आ रहा था.
यह मेरा पहली बार का मामला था, जब मैंने किसी के मम्मों को ऐसे पकड़ा था.
कुछ देर बाद मैंने उसको अपने आप से अलग किया और गद्दे को बेड से निकाल कर नीचे फर्श पर बिछा दिया.
ऐसा इसलिए किया था कि मेरा बेड चूं चूं करता था और उस पर कबड्डी खेलता, तो ज्यादा आवाज होने लगती.
मैंने उसको नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं उसके कपड़े उतारने लगा, तो वह शरमा कर मना करने लगी.
पर अब तो मेरे मुँह को खून लग चुका था और मैं उसे छोड़ना भी नहीं चाहता था.
जैसे तैसे करके मैंने उसके कपड़े खोल कर दूर फेंक दिए.
मेरे सामने लाली सिर्फ पैंटी में थी और मैं जांघिया में था.
मेरा जाँघिया आगे से मेरे कामरस से काफी भीग गया था. मैंने ऊपर बनियान पहनी हुई थी.
इस धक्का मुक्की में मेरा तौलिया कब नीचे को सरक गया था, मुझे पता भी नहीं चला.
मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और खींचते हुए चूसने लगा.
साथ ही एक हाथ से मैं उसकी पैंटी के ऊपर से ही बुर को सहलाने लगा.
उसकी बुर काफी गर्म और गीली हो चुकी थी.
मुझे उसकी बुर चाटने का बड़ा मन था पर समय न होने के कारण उसकी पैंटी को खोल कर सूंघा और उसे दूर फेंक दिया.
फिर मैंने उसकी नमकीन बुर पर एक गहरा चुम्बन किया और अपना जांघिया भी उतार दिए.
अब मैंने उसके मुँह के पास अपने लौड़े को ले गया.
मैंने लंड को उसके होंठों के ऊपर रखा, तो वह मेरी इच्छा समझ गई.
उसने मुँह खोल दिया और लंड का चूसन कांड शुरू गया.
उस वक्त मैं सिर्फ एक बनियान में था.
मेरा लंड अपनी पूरी सख्ती पर था और उसके होंठों पर लार टपका रहा था.
वह अपनी जीभ से लंड से टपकने वाले शीरा को चाट कर मेरे रस का स्वाद लेने लगी.
मेरे लंड को देखते ही उसकी आंखें बड़ी हो गई थीं.
फिर वह सामान्य होकर सुपाड़े को मुँह में भरकर चूसने लगी.
वह सुपारे को अपने होंठों में दबा कर रगड़ रगड़ लंड की मां बहन करने लगी.
उसकी इस हरकत से मैं जल्दी झड़ जाने के डर से हटने लगा.
वह मेरे लंड को पकड़ कर उसे बार बार मुँह में लेने की कोशिश करने लगी.
मैं लंड हटा कर नीचे हो गया और चुदाई की पोजीशन में उसके ऊपर चढ़कर उसके होंठों को चूसने लगा.
उस वक्त मैं अपनी कमर हिला हिला कर अपने सख्त और मोटे लंड को उसकी गर्म गीली बुर पर रगड़ने लगा.
यह उसे भी अच्छा लगने लगा. उसने भी अपनी टांगें खोल दीं और अपनी चूत को लंड से रगड़वाने लगी.
अब हमारे कामरस आपस में मिल कर एक अलग ही लुब्रीकेंट का काम करने लगे थे.
इस क्रिया से मेरे अंडे भी गीले हो गए थे.
वह बोली- अब डाल दो अन्दर … मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा.
मैं बोला- थोड़ा दर्द होगा तो बर्दाश्त कर लेना!
उस समय तक मुझे नहीं पता था कि वह कुंवारी है या नहीं. मुझे इससे मतलब भी नहीं था क्योंकि मुझे पहली बार बुर का स्वाद मिलने जा रहा था.
उसने अपनी मौन स्वीकृति दे दी.
अब मैं भी जल्दी से अपने लौड़े के सुपारे को उसकी गीली चिकनी बुर की फांक में रगड़ने लगा.
उसकी बुर पर थोड़ी झांटें थीं, जबकि मैं अपने लंड को एकदम चिकना करके रखता था.
चिकने लौड़े को हाथ से पकड़ कर वह मेरी तरफ देख रही थी और एक अर्थ भरी मुस्कान देती जा रही थी.
मैंने पूछा- कैसा है?
वह बोली- एकदम चिकना है!
मैंने कहा- और तेरी चूत जंगली है.
वह हंस दी और बोली- कल से साफ मिलेगी.
अब मैंने उसकी बुर पर लंड सैट कर दिया और जैसे ही अन्दर पेलने के हिसाब से दबाया तो कुछ अधिक ही चिकनाई की वजह से लौड़ा फिसल गया.
वह हंसने लगी और बोली- चिकना है ना!
उसकी इस टिप्पणी से मेरी झांटें सुलग गईं.
मैंने फिर से कोशिश की तो इस बार मेरा आधा सुपारा एक गीली तंग सुरंग में फंस सा गया.
अब वह सिसकारी मारने लगी.
कुछ सेकेंड के बाद मैंने फिर से एक झटका मारा तो मेरा पूरा मोटा सुपारा उसकी बुर में घुस गया.
उसके हाथ में हाथ, होंठों पर होंठ रखने की वजह से न वह हिल पा रही थी और न ही आवाज कर सकी.
फिर मैंने उसके पैरों को अपनी गांड पर लपेटवा लिया जिससे लौड़े को घुसने में आसानी हो.
कुछ क्षण बाद मैंने एक और धक्का दिया ही था कि उसकी बुर में मेरा पूरा लौड़ा जड़ तक घुसता चला गया.
यह ऐसे हुआ, जैसे अंजाने में कोई सही काम पूरा हो जाता है.
उसकी झांटें मेरे लंड की जड़ में चुभने लगीं.
उसको तो जो दर्द हुआ सो हुआ और वह भी कुंवारी थी, तभी मुझे ये बात पता चली.
उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे लौड़े को किसी ने अपनी मुट्ठी में दबोच रखा हो.
साथ ही ऐसा भी लगा जैसे मेरा सुपारा उसकी बच्चेदानी में घुस गया था.
मेरा भी टांका टूटने से बहुत दर्द होने लगा.
लेकिन मुझे पता था कि ये दर्द मुझे एक न एक दिन होना ही है, तो आज ही सही.
जैसे ही मुझे पता चला कि उसका भी पहली ही बार था. तो यह जान कर मुझे बहुत अच्छा लगा कि कंडोम की यहां कोई जरूरत नहीं थी.
क्योंकि वैसे भी मेरे पास उस समय नहीं था.
जैसे ही उसके होंठ को छोड़कर मैंने उसके चेहरे का भाव देखना चाहा, तो वह चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने वापस से उसके होंठों को अपने होंठों से लॉक कर दिया.
उसकी घुटी सी आवाज निकली- साले मादरचोद फट गई मेरी … आह.
पर उसकी यह गाली भरी आवाज मेरे मुँह में ही दबकर रह गई.
मेरा मन हंस रहा था और यह कहने को आतुर था कि हां साली कुतिया मेरा लंड चिकना है न!
लेकिन मैंने अपना मुँह उसके मुँह से नहीं हटाया.
ये सेक्स कहानी लिखते हुए अभी भी मुझे दो बार मुठ मारनी पड़ी थी.
कुछ देर बाद वह अपनी कमर हिलाने लगी, तो मैं समझ गया कि इसको अब पेलाई चाहिए.
मैं भी फिर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और धक्कों की गति कब चौथे गियर पर चढ़ गई, मुझे भी पता नहीं चला.
मैं उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी बुर में धक्के पर धक्का लगाने लगा, जिससे गच गच … फच फच … चट चट गप गप … और न जाने कैसी कैसी आवाजें आने लगीं.
यह हमारे मिले-जुले कामरस का कमाल था, जिससे मेरे अंडे और लंड की जड़ सब गीले हो चुके थे.
मेरा गद्दा भी उसके और मेरे टांके के खून से सन गया था.
मुझे अभी भी अहसास हो रहा था कि मेरा कामरस अभी भी निकल निकल कर उसकी बुर में गिर रहा था.
उसकी चूचियां हिल हिल कर अपनी ख़ुशी जाहिर कर रही थीं.
इससे हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था.
फिर रुक रुक कर लंबे धक्के मार मार कर करीब 20-25 मिनट तक चोदने के बाद मैं झड़ने को हो गया था.
तब तक वह दो बार झड़ चुकी थी.
उसने मुझे भी बांहों में जकड़ रखा था और उसके पैर अभी भी मेरी कमर से लिपटे हुए थे.
मैंने काफी दिनों से मुठ भी नहीं मारी थी जिससे मेरा काफी रस इकट्ठा हो गया था.
इतनी लंबी चुदाई होने के बाद अब मेरा रुकना असंभव था तो उसकी बुर में जड़ तक लौड़ा ठांस के झड़ने लगा.
उसके बाद 1, 2, 3, 4 … न जाने कितनी लंबी पिचकारियां मेरे लंड से निकल कर उसकी बुर के रास्ते बच्चेदानी में गिरने लगीं.
मैं आंखें बंद करके न जाने कितनी देर तक उसके अन्दर झड़ता रहा.
मेरे साथ वह भी झड़ गई थी.
हम दोनों की सांसें ट्रेन की तरह दौड़ रही थीं.
दोनों अभी भी एक-दूजे की बांहों में चिपके पड़े थे.
कुछ मिनट बाद मैंने उसकी बुर से लौड़े को धीरे धीरे निकाला.
मेरा लंड अभी भी पूरे वेग से खड़ा था.
मैं दूसरा राउंड भी लगाता लेकिन हमारे पास समय बिल्कुल भी नहीं था.
मेरे लौड़े की चमड़ी पूरी खिसक कर नीचे आ गई थी.
मेरी और उसकी जांघों पर काफी खून भी लगा था.
यह नजारा देख वह घबरा गई.
फिर मेरे समझाने पर समझ भी गई.
उसकी बुर की पुत्तियां भी फैल कर सूज गई थीं.
मेरे अंडे भी पूरे गीले हो गए थे और गद्दा भी खून से सना था.
मेरे और उसके मिले हुए रस के कतरे बाहर आने लगे थे.
उसने मेरे रूमाल से सब साफ़ करके रूमाल को अपने पास रख लिया.
मैं भी कुछ नहीं बोला कि शायद वह अपनी पहली चुदाई की निशानी रखना चाहती हो.
उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान थी, जिसे देख मुझे भी सुकून मिला.
फिर मैंने पूछा- क्या तुम्हें यही चाहिए था?
यह कह कर मैंने आंख मार दी, तो वह मुस्कुरा कर अपने कपड़े पहन कर नीचे चली गई.
अब जब भी उसका मन होता, तो वह मेरे रूम में किसी बहाने से आ जाती या फिर मैं ही इशारे से उसे अपने कमरे में आने की कह देता.
वह आ जाती और मैं उसको जमकर पेलता.
बाद में मैंने उसकी गांड का भी उद्घाटन किया.
अगर वह रंगीन सेक्स कहानी भी आपको जानना हो, तो मुझे मेल करें.
उसके बाद मैंने अपनी इच्छा को पूरा किया. उसकी बुर चाटकर और अपना पूरा लौड़ा और आंड चुसवाकर मजा लिया.
वह लगभग 3 महीने वहां रही और लगभग हर दो तीन दिनों में हमारा काम लगने लगा था.
इससे मेरा लौड़ा और मजबूत और मस्त हो गया था.
उसकी पूरी खाल नीचे आकर पूरा सुपारा खुलने लगा था.
लाली गर्भ से न हो जाए इसलिए उसको बीच बीच में गोली भी देता रहा लेकिन मैंने कभी कंडोम इस्तेमाल नहीं किया.
अब उसकी चूत पूरी तरह से मैंने खोल दिया था.
यह बात किसी को भी पता नहीं चल पाई थी.
पर शायद आंटी समझ गई थीं.
उन्होंने भी कुछ नहीं कहा था तो मैं अब लाली को बिंदास चोदने लगा था.
कुछ समय बाद मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर चला गया.
जब वापस आया तब तक वह भी अपने घर चली गई थी.
मैं बहुत उदास हो गया था.
लाली के बाद आंटी मेरे लौड़े का सहारा कैसे बनी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा.
एक साल बाद मेरी भी एक अच्छी सरकारी नौकरी लग गई और मैं भी वहां से चला आया.
वह लड़की वहां पर फिर से आ गई थी पर अब मैं वहां नहीं था.
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