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पूर्णिमा ताई की गुमनाम आग अध्याय 1: अकेलापन की शुरुआत मेरा नाम पूर्णिमा है, लेकिन सब मुझे पूर्णिमा ताई कहते हैं। उम्र हो चुकी है पचपन की, पर दिल अभी भी जवान है। लखनऊ की तंग गलियों में बसा मेरा छोटा सा घर, जहां कभी हंसी-खुशी की गूंज थी, अब सिर्फ खालीपन की सिसकारियां। मेरा पति, वो हरामी जिसने मुझे धोखा दिया, छह साल पहले चला गया। डिवोर्स के कागजों पर साइन करते वक्त मेरी आंखों से आंसू नहीं निकले, बस एक ठंडी उदासी ने सीने को जकड़ लिया। अब मैं अकेली हूं, बस अपने बेटे आरव के साथ। आरव, मेरा लाल, मेरा सहारा। वो अब पच्चीस का हो गया है, लंबा, सुंदर, वो जो हर मां का सपना होता है। लेकिन हमारा रिश्ता... वो तो एक काली रात की तरह गहरा हो गया है, जहां प्यार और वासना की लाइनें मिट चुकी हैं। सब कुछ तब शुरू हुआ जब आरव उन्नीस का था। वो कॉलेज में पढ़ता था, इंजीनियरिंग की डिग्री के चक्कर में। मैं घर संभालती, कभी-कभी पड़ोसियों के लिए सिलाई का काम करके दो वक्त की रोटी जुटाती। रातें लंबी लगतीं। पति के जाने के बाद मेरी देह में एक आग सुलग रही थी, जो बुझने का नाम न लेती। मैं खुद को संभालती, लेकिन सपनों में वो पुरानी यादें आ जातीं – मेरे पति की छुअन, उसकी सांसें मेरी गर्दन पर। लेकिन अब? अब सिर्फ आरव था, जो मेरे लिए सब कुछ था। एक शाम की बात है। बारिश हो रही थी, बिजली चली गई थी। घर में मोमबत्ती की रोशनी में हम दोनों बैठे थे। आरव ने चाय बनाई थी, गर्म-गर्म। उसके हाथ मेरे कंधे पर रखे, वो बोला, "मां, तुम्हें ठंड लग रही है ना?" उसकी आवाज में कुछ था, एक नरमी जो पहले न सुनी थी। मैंने मुस्कुरा दिया, "नहीं बेटा, बस थकान है।" लेकिन उसके हाथ रुक न गए। धीरे से मेरी कमर पर सरक गए। मैं चौंक गई, लेकिन कुछ बोली नहीं। शायद मुझे अच्छा लगा। वो मेरी उम्र की औरत था, लेकिन उसकी आंखों में एक भूख थी, जो बेटे की न होकर मर्द की लग रही थी। उस रात से सब बदल गया। आरव ने धीरे-धीरे कोशिशें शुरू कर दीं। सुबह उठते ही चाय लाता, मेरे पास बैठता, कभी मेरे बाल संवारता। "मां, तुम कितनी खूबसूरत हो," वो कहता। मैं हंस देती, "बावरी हो गई हो क्या?" लेकिन अंदर से एक सिहरन दौड़ जाती। रात को वो मेरे कमरे के बाहर खड़ा हो जाता, "मां, नींद न आ रही?" मैं बुलाती, वो आ जाता। बिस्तर पर लेटे, हम बातें करते। उसके हाथ मेरी जांघ पर फिसल जाते, मैं हटा देती, लेकिन दिल कहता – रहने दो। एक साल लगा उसे। एक लंबा साल, जहां हर दिन एक जंग थी। वो छूता, मैं बचती। वो किस करने की कोशिश करता, मैं मना कर देती। लेकिन वो हार न माना। धीरे-धीरे मैं भी पिघलने लगी। मेरी देह, जो सालों से सूखी पड़ी थी, फिर से हरी हो रही थी। एक रात, जब चांदनी रात थी, वो मेरे बिस्तर पर लेट गया। "मां, मैं तुमसे प्यार करता हूं, लेकिन वो प्यार जो पिता का होना चाहिए था।" उसके शब्दों ने मुझे हिला दिया। मैंने उसकी आंखों में देखा – वो आग, वो चाहत। और फिर... हम एक हो गए। अध्याय 2: पहली रात की आग वो रात भूल न पाऊंगी कभी। बारिश थम चुकी थी, लेकिन हवा में नमी बाकी थी। आरव मेरे बगल में लेटा था, उसकी सांसें तेज। मैंने अपना साड़ी का आंचल ढीला किया, दिल धड़क रहा था। "बेटा, ये गलत है," मैंने फुसफुसाया। वो मुस्कुराया, "नहीं मां, ये तो सबसे सच्चा प्यार है।" उसके होंठ मेरे गाल पर लगे। एक झुरझुरी सी दौड़ गई। मैंने आंखें बंद कर लीं। उसके हाथ मेरी ब्लाउज पर गए। धीरे से हुक खोले। मेरी चूचियां, जो सालों से किसी की नजरों से परे थीं, अब नंगी हो गईं। वो उन्हें देखा, आंखें फैल गईं। "मां... कितनी सॉफ्ट हैं," वो बोला और मुंह में ले लिया। मैं सिसकारी भर दी। "आरव... आह..." उसकी जीभ मेरी निप्पल पर घूम रही थी, चूस रहा था जैसे कोई बच्चा दूध पीता हो। लेकिन ये बच्चा न था, ये मेरा प्रेमी था। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा, दबाया। नीचे हाथ गया मेरा। उसकी पैंट में उभार साफ दिख रहा था। मैंने छुआ – कड़क, गर्म। "मां..." वो कराहा। मैंने पैंट उतार दी। उसका लंड, मेरा भगवान, कितना बड़ा था। उन्नीस साल का लड़का, लेकिन मर्दानगी पूरी। मैंने सहलाया, ऊपर-नीचे। वो मेरी साड़ी खींचने लगा। पेटीकोट खुला, मेरी चूत नंगी। बाल घने, गीली। सालों बाद किसी ने छुई थी। "मां, मैं घुसना चाहता हूं," वो बोला। मैंने सिर हिलाया। वो ऊपर चढ़ा। उसका लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं तड़पी, "धीरे... बेटा... आह..." फिर धक्का। दर्द हुआ पहले, फिर मजा। वो अंदर-बाहर होने लगा। तेज, जोरदार। "चोदो मुझे... आरव... अपनी मां को चोदो..." मैं चिल्लाई। वो हांफा, "हां मां... तेरी चूत कितनी टाइट है... साली रंडी... मैं तुझे रोज चोदूंगा।" गंदे शब्द उसके मुंह से निकले, लेकिन मुझे अच्छे लगे। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे में खोए। आखिर में वो झड़ गया, मेरे अंदर। गर्म वीर्य। मैं भी कांप गई, ऑर्गेज्म की लहर। उस रात हम सोए नहीं। फिर से किया। कुत्ते की तरह, मैं घुटनों पर। वो पीछे से मारा। "आह... तेरी गांड भी चोदूंगा एक दिन," वो बोला। मैं हंसी, "चोद ले हरामी... सब तेरा है।" अध्याय 3: रोज की लत उसके बाद सब बदल गया। सुबह उठते ही वो मेरे पास आता। किचन में खाना बनाते वक्त पीछे से गले लगाता, हाथ चूचियों पर। "मां, चाय में चीनी कम डालना, तेरी चूत की तरह मीठी है," वो मजाक करता। मैं लजाती, लेकिन चुदाई की चाहत रहती। दोपहर में, जब वो घर आता, सीधा बेडरूम। मैं नंगी लेटी रहती। "आ जा बेटा, अपनी मां की भूख मिटा।" एक दिन, वो दोस्तों के साथ घूमने गया। रात देर से लौटा। मैं बेचैन। "कहां था हरामी?" मैंने पूछा। वो हंसा, "मां, बस पार्टी। लेकिन तेरी याद आ रही थी।" फिर बेड पर। लेकिन वो थका था। मैं ऊपर चढ़ी। "अब मैं चोदूंगी तुझे।" उसका लंड मुंह में लिया। चूसा, चाटा। "आह मां... साली ब्लोजॉब क्वीन है तू।" फिर राइडिंग। मैं उछलती, वो नीचे से धक्के मारता। चीखें गूंजतीं – "चोद... फाड़ दे मेरी चूत... तेरी मां रंडी है तेरी।" हमारा राज था। पड़ोसी कुछ शक न करें, इसलिए सावधानी। लेकिन लत लग गई। हर रात, हर सुबह। कभी बाथरूम में, शावर के नीचे। पानी बहता, हम चुदते। "गांड मारूं?" एक दिन वो बोला। मैं डरी, लेकिन राजी। तेल लगाया, धीरे डाला। दर्द, फिर स्वर्ग। "आह... तेरी गांड भी कमाल," वो बोला। अध्याय 4: प्यार की गहराई ये सिर्फ चुदाई न थी। प्यार था। वो मुझे घुमाने ले जाता। लखनऊ के चिड़िया घर, जहां हम हाथ पकड़े घूमते। "मां, तू मेरी जान है," वो कहता। रात को गले लगे सोते। लेकिन चुदाई के बिना नींद न आती। एक बार, मैं बीमार पड़ी। बुखार। वो दिन-रात देखभाल। दवा दी, खाना खिलाया। "मां, तू ठीक हो जा, वरना मैं मर जाऊंगा।" मैं रो पड़ी। ठीक होते ही, धीरे से चुदाई। प्यार भरी। लेकिन डर भी था। समाज क्या कहेगा? अगर पता चला तो? लेकिन आरव कहता, "मां, ये हमारा राज है। कोई नहीं जानता।" और मैं मान जाती। अध्याय 5: नई ऊंचाइयां अब पच्चीस का हो गया वो। जॉब लग गई। लेकिन घर आता तो सीधा मेरे पास। नई-नई पोजिशन्स। 69, जहां मैं चूसती, वो चूत चाटता। "तेरी चूत का रस... अमृत है," वो बोला। कभी आउटडोर। पार्क में, छिपे हुए। हाथ डालता स्कर्ट में। "आरव... कोई देख लेगा," मैं फुसफुसाती। लेकिन उत्तेजना दोगुनी। एक रात, कैंडल लाइट डिनर। वो कुकिंग सीखा। खाना खाया, वाइन पी। फिर बेड पर। बॉन्डेज। मेरे हाथ बांधे, आंखें बंद। "अब तू मेरी गुलाम है," वो बोला। चाबुक से हल्का मारा। चूचियां, गांड। फिर चोदा। जोरदार। "चिल्ला रंडी... कह कि तू मेरी हो।" मैं चिल्लाई, "हां... तेरी चूत हूं मैं... चोद मुझे साला..." अध्याय 6: संघर्ष और समर्पण कभी झगड़े भी होते। एक दिन, वो देर से आया। शक हुआ। "किसी लड़की के साथ था?" मैंने पूछा। वो गुस्सा, "नहीं मां... तू ही सब कुछ है।" फिर चुदाई से सुलह। आंसू बहते, लेकिन लंड अंदर जाता तो भूल जाती। मेरी उम्र का असर। कभी थकान। लेकिन वो कहता, "मां, तू हमेशा जवान।" मसाज करता, तेल लगाता। फिर चुदाई। अध्याय 7: भविष्य की कल्पना अब सोचती हूं, आगे क्या? शादी? नहीं, ये प्यार अनोखा है। बस हम दोनों। वो कहता, "मां, हम कहीं चले जाएं, जहां कोई न जाने।" मैं हंसती, "हां बेटा, तेरी चूत बनकर रहूंगी।" अध्याय 8: चरमोत्कर्ष एक रात, जन्मदिन मेरा। वो सरप्राइज। फूल, केक। फिर नंगी डांस। मैं नाचती, वो देखता। फिर ग्रुप... नहीं, बस हम। तीन राउंड। मुंह, चूत, गांड। सब भरा उसके वीर्य से। "मां... आई लव यू।" "मैं भी बेटा... चोदते रहना।"
Antarvasna

मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार Antarvasna से हूँ, दो वर्ष शादी को हो चुके हैं, इस समय मेरी आयु सत्ताइस वर्ष है, मेरे पति की आयु उनतीस वर्ष है, वह एक बड़ी कंपनी में अच्छे पद पर हैं और अपने काम के सिलसिले में महीने में पंद्रह या बीस दिन शहर से बाहर रहते हैं.

मेरे पति एक सुन्दर और स्मार्ट व्यक्ति हैं, उनका व्यवहार भी अच्छा है. वे जब भी टूअर से लौटते हैं तो ढेर सारी अन्य चीजों के साथ विभिन्न तरह के सौंदर्य प्रसाधन आदि ले आते हैं, दरअसल वे एक कामुक व्यक्ति हैं, यौन में भी उन्हें हर बार कुछ नया ही चाहिये, वे एक ही जैसी क्रियाओं से बोर हो जाते हैं, उनके नये नये स्टाईलॉ और भांति भांति के आसनों से मुझे भी काफी आनन्द आता है और मैं उनके ऐसे क्रिया कलापों में ऐतराज नहीं करती हूँ.

मेरे पति ऑफिस गए हुए थे, कल ही वे टूअर से आये थे. आज मेरा छोटा भाई जिसकी आयु उन्नीस वर्ष है वह आ गया था. शाम का समय था, मैं और मेरा छोटा भाई बैडरूम में बैड पर बैठ कर टी.वी. देख रहे थे. टी.वी. पर एक हिंदी फिल्म आ रही थी, मैंने साडी-ब्लाउज पहना हुआ था और मेरा छोटा भाई पेंट-शर्ट में था. वह बिस्तर के एक कोने पर बैठा था जबकि मैं बैड की पुश्त से पीठ लगाये दोनों हाथों को सीने पर बांधे बैठी थी.
सात बजने जा रहे थे, तभी कॉल-बेल बजी!

मेरे उठने से पहले ही मेरा छोटा भाई उठा और दरवाजा खोल आया और बैड पर आकर बैठ गया, वहीं जहाँ पहले बैठा था.
कौन आया है- मैंने पूछा.
जीजाजी आये हैं… उसने सामान्य स्वर में उत्तर दिया.
मेरे पति बाहर के दरवाजे को लॉक कर के बैडरूम में आकर मेरे निकट बैड पर बैठ गए.

देर नहीं हो गई आज आपको आने में…? मैंने अपनी आँखों में कृत्रिम क्रोध लाकर कहा.
देर वाले काम ही में तो मजा आता है जानेमन…! मेरे पति ने मेरे गालों पर किस करते हुए कहा.

उनका एक हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर पहुँच गया था, ब्लाउज के ऊपर ही से उन्होंने मेरे स्तन पर चिकोटी काटी तो मेरे होंटों से हल्की सी कराह फ़ूट पड़ी.
मेरी कराह पर टी.वी. देखते मेरे भाई की दृष्टि मेरी ओर हुई और फिर टी.वी. की ओर हो गई.
मैंने अपने ब्लाउज से अपने पति का हाथ हटाया और आँखें तरेर कर बोली- आपको सब्र होना चाहिये! मेरा भाई भी बैठा है और आप उसकी उपस्थिति में भी ऐसी हरकतें कर रहें हैं? मेरा स्वर इतना धीमा था कि जो सिर्फ मुझे और मेरे पति को ही सुनाई दे सकता था.
ओ के… तुम जाओ और मेरे लिए एक बढ़िया सी चाय बनाओ! मैं हाथ मुँह धो कर आता हूँ. मेरे पति ने इतना कहा और फिर धोखे से मेरे होंठों को चूम कर मेरे निकट से उठ गये.

मैं बड़बड़ाती हुई उठी, मेरे भाई ने कनखियों से उनकी यह हरकत देख ली थी, इसी कारण उसके पतले पतले होंठों पर मुस्कान आ गई थी, थोड़ी देर बाद मैं चाय बना कर ले आई तो पति को बैड पर अपने स्थान पर बैठे पाया, मैंने चाय का कप उनको पकड़ा दिया और उनके निकट बैठ गई.

टी.वी. पर एक कैबरे गीत आ रहा था, जिसमें नायिका ने काफी कम कपड़े पहन रखे थे और वह उत्तेजक अंदाज में नाच रही थी.
हाय… क्या फिगर है…! कैसे पतली कमर को झटका देकर देखने वालों को हार्ट-अटैक दे रही है ये…! क्यों जानेमन…! क्या ऐसा डांस कर सकती हो तुम…? मेरे पति चाय पीते हुए बोले.
तुम चुप रहोगे या नहीं…!!! मैं धीमे स्वर में बोली.
“अमां… साले साब…! देख रहे हो तुम्हारी बहन हमें कुछ बोलने ही नहीं दे रही…! अब अगर हमने इस कैबरे डांस की तारीफ़ कर दी तो इसमें क्या गलत बात हो गई?” मेरे पति ने मेरे भाई से कहा.
मेरा भाई मुस्करा कर रह गया.

फिर चाय ख़त्म करने तक मेरे पति कुछ नहीं बोले किन्तु उनका हाथ मेरे ब्लाउज पर आ गया और वो मेरे स्तनों को मसलने लगे. मैं अपने भाई की उपस्थिति का ख्याल करके उनके हाथ अपने हाथों से हटाने का प्रयास करने लगी लेकिन फिर भी उन्होंने मेरे ब्लाउज के दो तीन बटन खोल कर मेरे ब्लाउज के भीतर हाथ डाल दिया और ब्रा के नीचे से मेरे निप्पल को इतनी सख्ती से मसला कि मैं तीव्र स्वर में कराह उठी.

मेरी कराह ने मेरे भाई का ध्यान हम दोनों की ओर खींचा, वह क्षण भर को हम दोनों को देखता रहा, उसकी जिज्ञासु दृष्टि मेरे ब्लाउज पर जम गई फिर वह अपनी आँखें नीची किये बैडरूम से बाहर जाने के लिये मुड़ने लगा तो मेरे पति ने उसका हाथ पकड़ कर उसे बेड पर अपने नजदीक बैठा लिया और अपना हाथ बिना मेरे ब्लाउज में से निकाले बोले- अरे यार… यह पति पत्नी की सामान्य नोंक झोंक है, तुम कहाँ चले! अच्छा मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ! जवाब सही सही देना!

मेरा भाई असमंजस के भाव से कभी उनकी आँखों में देखने लगता तो कभी मेरी आँखों में, वह कुछ बोल नहीं पाया.
“यह बताओ… क्या तुमने किसी जवान औरत के स्तन देखे हैं आज से पहले?” यह कहते हुए उनके हाथ ने मेरे ब्लाउज को थोड़ा और खोल कर मेरा स्तन ब्रा के कप में से बाहर ही निकाल दिया, मेरा भाई भी स्तब्ध था और मैं भी. हम दोनों ही इस स्थिति से सर्वथा अपरिचित थे.
“मुझे मालूम है… तुमने न तो अबसे पहले औरत का स्तन देखा है और न ही छुआ है… अपना हाथ इधर लाओ…!” मेरे पति उन्मुक्त भाव से उसके हाथ को पकड़ कर मेरे स्तन पर रख कर बोले- लो… देख लो.. कैसा होता है स्तन…! देखा कैसा होता है स्तन…? शर्माओ मत!

मेरे पति ने मेरे भाई का मुख मेरे बायें स्तन के बिल्कुल नजदीक कर दिया और गहरे गुलाबी रंग का निप्पल उसके होंठों के पास करके बोले- होंठ खोलो और इसे चूसो…!
लेकिन मेरे भाई ने होंठ नहीं खोले, वह तो फटी फटी आँखों से यह सब देख रहा था. तब मेरे पति ने मेरे दायें स्तन को भी मेरे ब्लाउज और ब्रा में से निकाल दिया और उसके निप्पल को चूसने लगे, मैं उत्तेजना में बहने लगी.
क्या तुम अपने भाई के होंठ नहीं चूम सकती…? मेरे पति ने मुझसे कहा तो मेरे मन में विचित्र प्रकार का प्यार उमड़ आया, यह सब मेरे लिये अनोखा था.

मैंने अपने भाई के गुलाबी होंठों को चूम लिया और उसके होंठों में अपने बायें स्तन का निप्पल भी दे दिया, अब उसने निप्पल ले लिया, मैंने कहा… चूसो इसे!
वह चूसने लगा वो भी इस तरह जैसे कोई शिशु स्तन में दूध खोजता है.

मैं अदभुत आनन्द से भरने लगी, मेरे हाथ उसके सर को सहलाने लगे थे, मेरे दोनों स्तनों को चूसा जा रहा था, मैं उत्तेजित होती जा रही थी, मेरे हाथ मेरे भाई की पीठ पर होकर उसकी पैन्ट पर पहुँच गये, मैंने उसकी पैन्ट की जिप खोल दी और उसमें हाथ डाल कर उसके अंडरवीयर के नीचे छिपे उसके अंगड़ाई भरते लिंग को अंडरवीयर के ऊपर से ही सहलाने लगी. मेरे पति ने मेरी साड़ी को पेटीकोट सहित मेरे घुटनों से ऊपर कर दिया था और मेरे दायें स्तन को चूसते चूसते मेरी चिकनी जाँघों को भी सहलाने लगे थे.

उनकी कोशिश देख कर मुझे करवट लेनी पड़ी और मैंने अपनी पीठ उनकी ओर कर ली, उन्होंने मेरा स्तन छोड़ दिया था, वे अब मेरी साड़ी और पेटीकोट को नितंबों तक पलट कर मेरे नितंबों को सहलाने लगे थे, मेरे नितंबों पर कसी पेंटी अभी उन्होंने उतारी नहीं थी, अभी तो वे जांघें सहला सहला कर ही मुझे उत्तेजित करते जा रहे थे.

मेरे आगे लेटा मेरा छोटा भाई मेरे स्तनों को ही चूसने में व्यस्त था, उसकी इस क्रिया ने भी मुझे तपा डाला था.
मैंने उसके अंडरवीयर में से उसका सात आठ इंच लंबा लिंग बाहर निकाल लिया था और उसे सहलाने लगी थी, मेरे भाई का लिंग अभी तक नया ही था, उसकी त्वचा लिंग-मुंड पर चढ़ी हुई थी, जिसे मैं धीरे-धीरे नीचे को उतार रही थी, मेरा एक हाथ उसकी पैंट को नीचे सरका चुका था.

अचानक मेरे पति ने मुझसे कहा- आज एक नये किस्म का मजा लेते हैं, तुम्हारे भाई का नया नया लिंग तुम्हारी योनि में नहीं बल्कि तुम्हारी गुदा (गांड) में डलवाते हैं… .तुम्हें तो मजा आयेगा ही… तुम्हारे भाई को भी आनन्द आयेगा… .तुम जानवर की भांति हाथ पांव बेड पर टिका कर अपने नितंब ऊँचे उठा लो!
मैंने ऐसा ही किया, मेरे नितंब ऊँचे उठ गये तो मेरे पति ने मेरे भाई को मेरे पीछे खड़ा करके उसके लिंग मुंड पर अपना ढेर सा थूक लगा कर उसे मेरे नितंबों के बीच जहाँ मेरी गुदा (गांड) थी, वहाँ टिकाया और मेरे भाई से कहा- धक्का मारो साले साब… लेकिन धीरे धीरे!

मेरे भाई ने मेरी कमर को पकड़ कर धक्का मारा तो लिंग ऊपर को फिसल गया,
“ओ… ओफ्फो.. यार… .रुको…! दोबारा कोशिश करते हैं!” मेरे पति ने मेरे भाई से कहा.

मैंने मुद्रा बदल कर करवट ले ली और अपने पति से बोली- ये पहली बार तो मैथुन (चुदाई) क्रिया कर रहा है और तुम ये उम्मीद कर रहे हो की एक ही बार में लिंग प्रवेश कर लेगा, वो भी बिना किसी चिकनाई के, जाओ जरा रसोई में से सरसों का तेल ले आओ, मैं तब तक इसके लिंग को और उत्तेजित करती हूँ!
तुम ठीक कहती हो… मेरे पति ने इतना कहा और चले गये.

मैंने अपने भाई को उसका हाथ पकड़ कर अपने सिरहाने बैठा लिया और उसकी टांगें फैला कर उसकी मजबूत जांघ पर अपना सर टिका कर उसके तने हुए लिंग की उपरी त्वचा लिंग मुंड से हटा कर उसे अपने मुंह में ले लिया, मैं उसे चूसने लगी.
वह मचल उठा, उसके कंठ से कामुक ध्वनि फूटने लगी- उफ..ओह… मेरे शरीर में चीटियाँ सी दौड़ रही हैं… उफ… वह टूटते शब्दों में कह उठा.

मैंने उसके हाथों को अपने स्तनों पर टिका दिया और बोली- इनसे खेलते रहो… और फिर उसके लिंग को अपनी जीभ से चाटने लगी.
मेरे पति एक कटोरी में सरसों का तेल ले आये और मेरी एक टांग को ऊँचा करके मेरी गुदा (गांड) में तेल लगाने लगे.
अब अपने जीजाजी के पास चले जाओ… मैंने अपने मुंह से अपने भाई का लिंग निकाल कर उससे कहा.
वह यंत्र की भांति चुपचाप मेरे पति के निकट जाकर बैठ गया.

मेरे पति ने मेरे नितंबों के नीचे एक तकिया लगा दिया, अब नितंब ऊँचे भी हो गए और उनके मध्य की खाई अधिक खुल गई.
तुम लेट जाओ.. मैं तुम्हारे लिंग को ठीक निशानें पर फंसा दूंगा, तुम जोर का धक्का मारना, और हाँ… पहली बार में थोड़ा दर्द होता है तुम घबरा मत जाना… उसके बाद खूब मजा आता है! मेरे पति ने मेरे भाई को समझाया.

मेरा भाई मेरे पीछे लेट गया, उसने मेरी बगलों में हाथ डाल कर मेरे पुष्ट स्तनों को पकड़ लिया, मेरे पति ने उसके लिंग पर तेल लगाया और मेरी टांग को ऊँचा करके उसके लिंग को मेरी गुदा पर रख दिया, मैंने भी अपने एक हाथ से लिंग मुंड को गुदा के तंग द्वार में फंसाने में उन दोनों की मदद की और बोली… मारो जोर का शाट! मैं तैयार हूँ…!
इतना कहते ही मैंने दांत भींच लिए क्योंकि गुदा में मुझे भी थोड़ी पीड़ा होनी थी, उतनी नहीं होनी थी जितनी पहली दफा में होती है, मेरे पति तो मेरी गुदा में अक्सर ही लिंग प्रवेश किया करते थे इसलिए मुझे आदत पड़ चुकी थी, उसी दम मुझे पीड़ा हुई और मेरे कंठ से कराह निकल गई.

मेरे भाई ने जोर का धक्का मारा था, उसका लिंग मुंड मेरी गुदा को फैलाता हुआ उसमें घुस गया था, मेरा भाई भी कराह उठा, वह जरा ज्यादा तड़प रहा था, उसके लिंग मुंड की सील टूट गई थी और हल्का हल्का सा रक्त स्राव भी हुआ था, किन्तु मेरे पति द्वारा उसका साहस बढ़ाये जाने पर उसने तड़पते तड़पते भी एक बार जरा पीछे हट कर एक और धक्का मारा, लिंग का आधा हिस्सा मेरी गुदा में समा गया.
“ओफ… मुझे बहुत दर्द हो रहा है… .मैं और आगे नहीं कर सकता, उफ… लगता है मेरा लिंग पिस जायेगा, दीदी के कूल्हे तो चक्की के पाट जैसे हैं.” यह कहते हुए मेरे भाई ने अपना लिंग मेरी गुदा से निकाल लिया तो मैं अपने पति से बोली- गुदा में तुम डाल दो और जल्दी करो, मेरे भीतर की आग अब भड़क उठी है, इसको मैं योनि का आनन्द देती हूँ! आ जाओ तुम इधर मेरे आगे!

मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ कर कहा और उसे अपने आगे लिटा लिया, मैंने उसका लिंग अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाते हुए अपनी योनि में फंसा कर कहा- अब धक्का मारो, इसमें दर्द नहीं होगा!
मैंने ऐसा कहा तो उसने डरते डरते हल्का सा धक्का मारा, लिंग मुंड आसानी से योनि में प्रविष्ट हो गया, वह आस्वस्त हो गया तो और धक्के मारने लगा, मैं आनन्दित होने लगी और उसके नितंबों को तो कभी उसके सिर को सहलाने लगी, वह मेरे होंठों को चूमने लगा तो मैंने उसके मुंह में अपने स्तन का निप्पल डाल कर कहा- इसे चूसो…!

वह निप्पल चूसते हुए योनि में लिंग का घर्षण करने लगा, उसके मुंह से भी कामुक ध्वनियाँ फूटने लगी थी तो मेरी भी गर्म साँसें तीव्र होती जा रही थी.
तभी मेरे पति ने अपना लिंग निकाल कर मेरी गुदा में प्रवेश करा दिया, वे आहिस्ता आहिस्ता उसे आगे बढाने लगे.

मैं तो काम-सुख का वह चरम पा रही थी कि जिसकी मिसाल नहीं दी जा सकती, मेरा युवा शरीर दो लिंगों के घर्षण से ऐसा आंदोलित हो उठा कि क्या कहूँ, ऐसा काम सुख मुझे पहले कभी नहीं मिला था, गुदा और योनि में आग सी लगती जा रही थी, मैं चरमोत्कर्ष पर पहुंची तो मेरा भाई भी स्खलित हो गया, मैंने उसका लिंग अपने मुंह में ले लिया और उसे अजीब किस्म का दुलार देने लगी.

वह भावावेश में मेरे शरीर से लिपट गया, मेरे पति ने मेरी गुदा में स्खलित होकर मुझे बांहों में भर लिया था.
इस तरह उस रात हम तीनों ने खूब शारीरिक सुख भोगा.

आपको मेरी मस्त कहानी में पढ़ने में मजा आ रहा है ना?
कहानी जारी रहेगी. Antarvasna

हाय दोस्तों यह एक सच सच्ची च**** की कहानी है मैं‌ बिहार बिजली विभाग में क्लर्क हूं मेरी नियुक्ति ग्राम में है सारी नौकरी होने के कारण मेरी शादी शहर की एक लड़की से हो गई मेरी बीवी एकदम सुंदर और मैडम है उसकी गांड बड़ी-बड़ी है च अभी बड़ी है उसके बाल सिल्की है की पूरी है एकदम सुंदर हीरोइन जैसी लेकिन मेरी सरकारी नौकरी की वजह से उसकी शादी हो गई मुझसे। उसका गांव में मन नहीं लगता है धीरे-धीरे बातों बातों में मैं उसको छोड़ते छोड़ते उतना नहीं छोड़ पाता हूं जितना चाहिए। एक दिन वह बोली कि आप अच्छे से नहीं छोड़ रहे हैं चलिए कहीं बाहर ले चल के चुटिया क्या बताऊं दोस्तों तो मुझे एहसास हुआ कि अच्छा बीवी को बाहर ले जाकर छोड़ने में बहुत मजा आता है एक बार मैं उसको बनारस ले जाकर चोदा। वह बहुत खुलकर च**** और बहुत मजा मुझे भी आया है तब मुझे एहसास हुआ की च**** का असली मजा तो बाहर ही च**** करने में है इसलिए चोदते समय वह पोर्न दिखा दिखा कर चोदने की बात करती है। ऐसे चोदते कुछ साल हो गए हैं और मेरे पैसे भी नहीं कि मैं उसको टूर पर ले जाकर चोदू।एक समय ऐसा आया जब उसे चोदने ले जाने में असमर्थ हो गया है तब उसने एक आईडिया दिया कि आपका एक दोस्त इंजीनियर है उसकी बीवी गांव की है और वह बाहर घूमने उसको पसंद नहीं है लेकिन इंजीनियर साहब को बाहर घूमना बहुत पसंद है। यह बात यह बात मैं अपनी बीवी को बताया कि मेरे इंजीनियर साहब घूमने की बहुत शौकीन है लेकिन उनकी बीवी घूमने की शौकीन नहीं है और हम लोगों का तुम घूमने की शौकीन हो मैं शौकीन नहीं हूं उनको तो इंजीनियर साहब जैसा पति चाहिए और मुझको उसकी जैसी पत्नी चाहिए। तब मेरी बीवी बोली उन्हीं के साथ भेज दीजिए कहीं चार-पांच दिन घूम के आएंगे। तो मेरा माथा ठनका का क्यों मेरी बीवी तुमसे भी चूदा ले ।लेंगे कोई अगर टूर पर ले जाने वाला रहे तीन-चार दिन ले जाकर पहले उसको चोदे तो उसको बहुत मजा आएगा। तभी से ख्याल मेरी बीवी के मन में और मेरे मन में आने वालों की जीनियस आपको पटाखे किसी तौर पर ले जाया जाए जहां दोनों मिलकर बड़ी-बड़ी से मेरी बीवी को छोड़ेंगे मेरी बीवी ने प्लान बनाया।धीरे-धीरे इंजीनियर साहब के नंबर से बात करना शुरू किया बात करते-करते इंजीनियर साहब इतने एक्साइटेड हो गए की मात्रा 7 दिन के अंदर उन्होंने केरल का ट्रिप बुक कर लिया है वहां एक रिजाट बुक किया एक टिकट बुक किया हम लोग पटना जंक्शन से सीधा चल दिए केरल के लिए एर्नाकुलम जंक्शन पर उतरे वहां होटल बुक किया और सीधे चलिए होटल में क्या बताऊं दोस्तों ट्रेन में भी इंजीनियर साहब ने कोई मौका नहीं छोड़ छोड़ने का मेरी बीवी को अब मैं एकदम खुल गया था मेरी बीवी भी खुल गई थी खुलकर चुदवा रहे थे ट्रेन की पहली च**** यादगार रही है और होटल की भी च**** याद कर रहे इंजीनियर साहब का उतना लैंड बड़ा तो नहीं था लेकिन च** चाट के मेरी बीवी को इतना चोदा कि मेरी बीवी उसके दीवाने हो गई और इस तरह से मेरी बीवी की यात्रा पूरी होगी हर साल इंजीनियर साहब के साथ टूर जाती है और मुझे भी ले जाते हैं। और हम उनको देखते हैं मेरी बीवी को चोदते हैं ।कहानीलिखते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है कि इस तरह से अगर कोई आकर मिल रहा है किसी पाठक को उसका लाभ तुरंत उठाया अगर कोई ऐसा दोस्त है जो बीवी क‌ ओ चोदना चाहता है तो टूर ले जाए ।आप दोनों मिलकर चोदे यह कहानी बिल्कुल सही है पढ़कर इंजॉय करिए और अपनी बीवी को खुला छोड़ दीजिए। ताकि वह चुदा सके अपनी बीवी की चुदासी की‌ इच्छा पूरी करिए पैसा बहुत बड़ी चीज है इसलिए दोस्तों कोई ऐसा दोस्त बनाया जो पैसे वाला हो समझदार हो उसके साथ ट्रिप करिए खूब चुदवा लिजिए। जवानी फिर नहीं आने वाली
Antarvasna

रात के बारह बज़ चुके Antarvasna थे। छोटे से गाँव राजापुर में बहुत ही सन्नाटा छ गया था। राजापुर गरीब की बस्ती है। इसी बस्ती के एक कोने में हरिया का घर है। हरिया की उमर 45 साल की है। और उसकी बीबी की उमर 40 साल की है। हरिया एक गरीब किसान है।

हरिया अपने घर के एक अँधेरी कोठरी में रोज़ की तरह अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल था। हरिया अपनी बीबी की चूत में लंड डाल कर काफ़ी देर तक उसकी चुदाई कर रहा था। उसकी बीबी मुन्नी बिना किसी उत्तेजना के अपने दोनों पैर फैला कर यूँ ही पड़ी थी जैसे कि उसे हरिया के बड़े लंड की कोई परवाह ही न हो या फिर कोई तकलीफ़ ही न हो रही है। केवल हर धक्के पर आह आह की आवाज निकल रही थी।
मुन्नी की बुर कब का पानी छोड़ चुकी थी। थोड़ी ही देर में हरिया के लंड से माल निकलने लगा तो उसने भी आह आह कर के मुन्नी की चूची पर अपना मुँह रख दिया। मुन्नी की बेजान चूची को वो मुँह में ले कर चूसने लगा। उसने अपना लंड मुन्नी के बुर से निकाला और मुन्नी के बगल में लेट गया।

उसने अपनी बीडी जलाई और पीने लगा। मुन्नी ने उसके लटक रहे लंड को अपने हाथों में ले लिया और उसको खींच-तान करने लगी। लेकिन अब हरिया के लंड में कोई उत्साह नही था। वो एक बेजान लता की तरह मुन्नी के हाथों का खिलौना बना हुआ था।

मुन्नी ने कहा- जानते हो जी ! आज क्या हुआ?
हरिया ने कहा- क्या?

मुन्नी ने कहा- रोज़ की तरह आज मैं और मालती ( मुन्नी की बहू) सुबह शौच करने खेत गए । वहाँ हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर पाखाना कर थे…
तभी मैंने देखा कि मालती अपनी बुर में ऊँगली घुसा कर मुठ मारने लगी।
मैंने पूछा- यह क्या कर रही है तू?

तो उसने मेरी पीछे की तरफ़ इशारा किया और कहा- जरा उधर तो देखो अम्मा।
मैंने पीछे देखा तो एक कुत्ता एक कुतिया पर चढ़ा हुआ है।
मैंने कहा- अच्छा, तो यह बात है।

मालती ने कहा- देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ इसलिए मुठ मार रही हूँ।
मैंने कहा- जल्दी कर, घर भी चलना है।
मालती ने कहा- हाँ अम्मा, बस अब निकलने ही वाला है।

और एक मिनट हुआ भी ना होगा कि उसकी बुर से इतना माल निकलने लगा कि एक मिनट तक निकलता ही रहा।
मैंने पूछा- क्यों री, कितने दिन का माल जमा कर रखा था?
उसने कहा- कल दोपहर को ही तो निकाला था।
मैंने भी सोचा- कितना जल्दी इतना माल जमा हो जाता है।

हरिया ने कहा- वो अभी जवान है ना। और फिर उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपना बेटा भी तो यहाँ नहीं है ना। कमाने के लिए परदेस चला गया। अरे मैं तो मना कर रहा था। तीन महीने भी नहीं हुए उसकी शादी को और अपनी जवान पत्नी को छोड़ कमाने बम्बई चला गया। बोला, अच्छी नौकरी है। अभी बताओ चार महीने से आने का नाम ही नहीं है। बस फोन कर के हालचाल ले लेता है। अरे फोन से बीबी की गर्मी थोड़े ही शांत होने वाली है? अब उसे कौन कहे ये सब बातें खुल के?

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मुन्नी फिर से हरिया के लंड को हाथ में ले कर खेलने लगी।

हरिया ने मुन्नी से पूछा- क्या तुम रोज़ ही उसके सामने बैठ के पाखाना करती हो?
मुन्नी ने कहा- हाँ।
हरिया- तब तो तुम दोनों एक दूसरे की बुर रोज़ देखती होगी।

मुन्नी- हाँ, बुर क्या पूरा गांड भी देखी है हम दोनों ने एक दूसरे की। बिल्कुल ही पास बैठ कर पाखाना करते हैं।
हरिया- अच्छा, एक बात तो बता। उसकी बुर तेरी तरह काली है या गोरी?

मुन्नी- पूरी गोरी तो नहीं है लेकिन मेरे से साफ़ है। मुझे उसकी बुर पर के बाल बड़े ही प्यारे लगते हैं। बड़े बड़े और लहरदार रोएँ की तरह बाल। एक बार तो मैंने उसके बाल भी छुए हैं।

हरिया- बुर कैसी है उसकी?
मुन्नी- बुर क्या है लगता है मानो कटे हुए टमाटर हैं। एकदम फुले फुले लाल लाल।

अचानक मुन्नी ने महसूस किया कि हरिया का लंड खड़ा हो रहा है। वो समझ गई कि हरिया को मज़ा आ रहा है। वो बोली- अच्छा, एक बात तो बताओ।

हरिया बोला- क्या?
मुन्नी- क्या तुम उसे चोदोगे?
हरिया- यह कैसे हो सकता है?

मुन्नी- क्यों नहीं हो सकता है? वो जवान है, अगर गर्मी के मारे किसी और के साथ भाग गई तो क्या मुँह दिखायेंगे हम लोग गाँव वालों को? अगर तुम उसकी गर्मी घर में ही शांत कर दो तो वो भला किसी दूसरे का मुँह क्यों देखेगी। जब वो किसी कुत्ते-कुतिया को देख कर मुठ मार सकती है तो वो किसी के साथ भी भाग सकती है। कितना नजर रख सकते हैं हम लोग? थोड़े दिन की तो बात है, फिर हमारा बेटा मोहन उसे अपने साथ बम्बई ले जाएगा तब तो हमें कोई चिंता करने की जरूरत तो नहीं है।

हरिया- क्या मालती मान जायेगी?

मुन्नी ने कहा- कल रात को मैं उसे तुम्हारे पास भेजूंगी। उसी समय अपना काम कर लेना।

हरिया का लंड पूरा जोश में आ गया। उसने मुन्नी की बुर में अपना लंड डालते हुए कहा- तूने तो मुझे गरम कर दिया रे।

मुन्नी ने मुस्कुरा कर अपनी दोनों टांगें फैला दी और आह आह की आवाज़ निकालने लगी। इस बार वो जोर जोर से आवाज निकाल रही थी। हालंकि उसे कोई ख़ास दर्द नहीं हो रहा था लेकिन वो जोर जोर से बोलने लगी- आह आह, धीरे धीरे करो ना। दर्द हो रहा है।

यह आवाज़ बगल के कमरे में सो रही उसकी बहू मालती को जगाने के लिए काफ़ी थी। चुदाई की मीठी दर्द भरी आवाज़ सुन कर मालती की बुर चिपचिपी हो गई। उसने अपने पिया मोहन के लंड को याद करके अपनी बुर में ऊँगली डाली और दस मिनट तक ऊँगली से ही बुर की गत बना डाली।

सुबह हुई, दोनों सास-बहू खेत गई, दोनों एक दूसरे के सामने बठी कर पाखाना कर रही थी।

मालती अपनी सास मुन्नी की बुर देख कर बोली- अम्मा, तुम्हारा बुर कुछ सूजी हुई लग रही है।

मुन्नी ने हंसते हुए कहा- यह जो तेरे ससुर जी हैं न, बुढापे में भी नहीं मानते। देख न कल रात को इतना चोदा कि अभी तक दुःख रहा है।

मालती ने कहा- एक बात पूछूं अम्मा?
मुन्नी- हाँ, पूछ न।
मालती- बाबूजी का लंड खड़ा होता है अभी भी?

मुन्नी- हाँ री। खड़ा क्या? लगता है बांस है। जब वो मुझे चोदते हैं तो लगता है कि अब मेरी बुर तो फट ही जायेगी। एक हाथ बराबर हो जाता है उनका लंड खड़ा हो के।
मुन्नी ने देखा कि मालती ने अपनी ऊँगली अपने बुर में घुसा दी है।

मुन्नी ने पूछा- क्या हुआ तुझे? क्या फिर कोई कुत्ता है यहाँ?

मालती बोली- नहीं अम्मा, मुझे तुम्हारी बातें सुन के गर्मी चढ़ गई है। इसे निकालना जरूरी है।

मुन्नी बोली- सुन, तू एक काम क्यों नहीं करती? आज रात तू अपने ससुर के साथ अपनी गर्मी क्यों नहीं निकाल देती?
मालती चौंक कर बोली- यह कैसे हो सकता है? वो मेरे ससुर हैं।

मुन्नी बोली- अरे तेरी जरूरत को समझते हुए मैंने ऐसा कहा। तुझे इस समय किसी मर्द की जरूरत है। अब जब घर में ही मर्द मौजूद हो तो क्यों नहीं उसका लाभ उठाया जाए।

मालती का मन अब डोल चुका था, वो बोली- कहीं बाबूजी नाराज हों गए तो?

मुन्नी बोली- अरे तू रात को उनके पास चले जाना। मैं बहाना बना के भेज दूँगी। धीरे धीरे रात के अंधेरे में जब तू उनको छुएगी ना तो तू भूल जायेगी कि तू उनकी बहू है और वो भूल जायेंगे कि वो तुम्हारे ससुर हैं।

यह सुन कर मालती की बुर में मानो तूफ़ान आ गया। उसकी बुर से इतना पानी निकलने लगा कि मुन्नी को लगा कि यह पेशाब कर रही है। अब मुन्नी खुश थी। दोनों तरफ़ मामला सेट था।

रात हुई, खाना-वाना ख़त्म कर मुन्नी हरिया के कमरे में गई और बता दिया कि मैं मालती को भेज रही हूँ। उसको भी समझा दिया है। तुम सिर्फ़ थोड़ी पहल करना। वो तो कुत्ते से भी चुदवाने के लिए तैयार बैठी है। तुम तो इंसान ही हों।

कह कर वो बाहर चली आई और जोर से बोली- बहू, ओ बहू, सुन आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है। तू जरा अपने ससुर जी को तेल तो लगा दे।

फिर दरवाजे के बाहर से हरिया को बोली- सुनते हो जी, मैं जरा छत पर सोने जा रही हूँ। मालती बहू से तेल लगवा लेना।

मालती जैसे ही दरवाजे के पास आई, मुन्नी ने उससे धीरे से कहा- देख मैं बहाना बना कर तुम्हें उनके पास भेज रही हूँ। मालिश करते करते उनके लंड तक अपना हाथ ले जाना। शरमाना नहीं। अगर उनको बुरा लगे तो कह देना कि अंधेरे में दिखा नहीं। अगर कुछ नहीं बोले तो फिर हाथ लगाना। जब देखो कि कुछ नहीं बोल रहे हैं तो समझना कि उन्हें भी अच्छा लग रहा है। ठीक है ना? अब मैं चलती हूँ।

कह कर मुन्नी छत पर चली गई। इधर मालती हाथ में तेल की शीशी लिए हरिया के कमरे में आई।

हरिया ने कहा- आजा, वैसे तो तेल मालिश की जरूरत नहीं थी, लेकिन आज मेरा पैर थोड़ा सा दर्द कर रहा है इसलिए मालिश जरूरी है।

मालती हरिया के बिस्तर पर बैठ गई। कमरे में एक छोटी सी डिबिया जल रही थी। जो की पर्याप्त रोशनी के लिए अनुकूल नहीं थी।

मालती ने कहा- कोई बात नहीं, मैं आपकी अच्छे से मालिश कर देती हूँ। आप ये लूंगी उतार ले।
हरिया ने कहा- बहू, जरा ये डिबिया बुझा दे क्योंकि मैंने लूंगी के अन्दर छोटी सी लंगोट ही पहन रखी है।

मालती ने डिबिया बुझा दी। अब वहां घुप अँधेरा छा गया। सिर्फ़ बाहर की चांदनी रात की हल्की रोशनी ही अन्दर आ रही थी। हरिया ने लूंगी उतार दी। मालती की सांसें तेज़ हों गई। वो तेल को हरिया के पैरों में लगाने लगी। धीरे धीरे वो हरिया की जांघों में तेल लगाने लगी। धीरे से वो जानबूझ कर हरिया के लंड तक अपना हाथ ले गई। हरिया ने कुछ नहीं कहा। मालती ने दुबारा हरिया के लंड पर हाथ लगाया।

हरिया ने कहा- बहू, तुम्हें गर्मी लग रही होगी। तुम अपनी साड़ी खोल दो ना। वैसे भी तेल लगने से साड़ी ख़राब हों सकती है।

मालती ने कहा- बाबूजी, साड़ी के नीचे मैंने पेटीकोट नही पहना है। सिर्फ़ पैंटी पहन रखा है। इसलिए मैं साड़ी नहीं खोल सकती।

हरिया ने कहा- तो क्या हुआ? वैसे भी अंधेरे में मैं तुम्हें देख थोड़े ही पा रहा हूँ जो तुम यूँ शरमा रही हों?

मालती तो यही चाहती थी, उसने अपनी साड़ी खोल कर एक किनारे रख दी और तेल को वो जांघों और लंड के बीच लगाने लगी। जिससे वो बार बार हरिया के अंडकोष पर हाथ लगा सकती थी। हरिया ने जब देखा कि बात लगभग बन चुकी है, उसने अपनी लंगोट की डोरी को कब खोल दिया, मालती को पता भी ना चला। धीरे धीरे जब वो हरिया के अंडकोष पर हाथ फेर रही थी तो उसी के हाथ से उसकी लंगोट हट गई।

लंगोट हटने पर मालती पूरी गरम हो गई। अब वो हरिया के लंड को छूने की कोशिश कर रही थी। धीरे धीरे उसने लंड पर हाथ लगाया और हटा लिया। हरिया का लंड सोया हुआ था। लेकिन ज्यों ही मालती ने हरिया का लंड छुआ, मालती के जिस्म में एक सिरहन सी दौड़ गई। अब वो दुबारा अपना हाथ हरिया के दूसरे जांघ पर इस तरह ले गई जिससे उसकी कलाई हरिया के लण्ड को छूती रहे। हरिया भी पका हुआ खिलाड़ी था। उसका लंड जल्दी खड़ा होने वाला नहीं था, वो बोला- बहू, तू थक गई होगी। आ जरा लेट जा।

उसने लगभग जबरदस्ती बहू को पकड़ कर अपने बगल में लिटा दिया और उसके चूची पर हाथ रख के बोला- इसे खोल दे ! बहुत गर्मी है।

मालती ने अपने ब्लाउज का हुक खोल दिया। हरिया ने ब्लाउज को मालती के चूची पर से अलग कर दिया और चूची को छूने लगा, बोला- अरे तुमने अन्दर ब्रा नही पहन रखा है? खैर कोई बात नहीं, अब गर्मी तो नहीं लग रही है न?

वो मालती के चूची को मसलने लगा, बोला- तेरी चूची तो एक दम सख्त है। मैं तेरी चूची छू रहा हूँ, तुझे बुरा तो नहीं लग रहा है न?

मालती बोली- नहीं, आप मेरे साथ कुछ भी करेंगे तो मैं बुरा नहीं मानूंगी।
हरिया ने कहा- शाबाश बहू, यही अच्छी बहू की निशानी है। बोल तुझे क्या चाहिए?
मालती- बाबूजी, मुझे कुछ नही चाहिए, सिर्फ़ आपका लंड छूना चाहती हूँ।
हरिया- एक शर्त पर। तू भी मुझे अपनी बुर छूने देगी।

मालती ने आव देखा ना ताव, एक झटके में अपना पैन्टी उतार फेंकी। हरिया ने नीचे जा कर मालती की बुर को पहले तो छुआ फिर मुँह में लेकर चूसने लगा।

मालती बोली- ऐसे मत चूसिये, मैं मर जाऊंगी।

हरिया उठ खड़ा हुआ और मालती के हाथ में अपना लंड थमा दिया। मालती के हाथ मानो कोई खजाना लग गया हो। वो हरिया के लंड को कभी चूमती कभी खेलती। काफी देर यह करने के बाद बोली- बाबूजी, इसको मेरी बुर में एक बार डाल दीजिये न।

हरिया ने अपने लटके हुए लंड को हाथ से पकड़ कर मालती के बुर में घुसा दिया। मालती की बुर में हरिया का लंड जाते ही फुफकार मारने लगा और मालती की बुर में ही वो खड़ा होने लगा। मालती- बाबूजी ये क्या हो रहा है? जल्दी से निकाल दीजिये।

हरिया- कुछ नहीं होगा बहू।

अब हरिया का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। मालती दर्द से छटपटाने लगी। उसे यह अंदाजा ही नहीं था कि जिसे वो कमजोर और बूढ़ा लंड समझ रही थी, वो बुर में जाने के बाद इतना विशालकाय हो जाएगा।

हरिया ने मालती को चोदना चालू किया। पहले दस मिनट तक तो मालती बाबूजी बाबूजी छोड़ दीजिये कहती रही। लेकिन हरिया ने नहीं सुना, वो धीरे धीरे उसे चोदता रहा। दस मिनट के बाद मालती की बुर थोड़ी ढीली हुई। अब उसे भी अच्छा लग रहा था। दस मिनट और हरिया ने मालती की जम के चुदाई की। तब जाकर हरिया के अन्दर का पानी बाहर आने को हुआ तो उसने अपना लंड मालती की बुर से निकाल के मालती के मुँह में लगा दिया, बोला- पी जा।

मालती ने हरिया के लंड को मुंह में ले कर ज्योंही दो-तीन बार चूसा कि हरिया के लंड से तेज़ धार निकली जिससे मालती का पूरा मुँह भर गया। मालती ने सारा का सारा माल गटक लिया।

आज जाकर मालती की गर्मी शांत हुई। उसके बाद वो रोज़ ही अपने ससुर के साथ ही सोने लगी। हाँ दो-तीन दिन में उसकी सास मुन्नी भी साथ सोने लगी। अब हरिया एक तरफ करवट ले कर बीबी को चोदता तो दूसरी तरफ़ करवट ले कर अपनी बहू मालती को। Antarvasna

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हेल्लो दोस्तो, मेरा नाम है नयन । मैंने अन्तर्वासना पर हजारों कहानियाँ पढ़ी हैं। यह मेरी पहली और सच्ची कहानी है। मैं वड़ोदरा (गुजरात) के कंपनी में एक पद नौकरी करता हूँ। मैं छः फुट लम्बा और कसरती बदन का मालिक हूँ। मैं jain परिवार से हूँ तो लड़कियाँ मुझे देखते ही फ़िदा हो जाती हैं। एक बार मेरा लैंड लाइन बी.एस.एन.एल. फोन में कुछ प्रॉब्लम आ गई। मैंने अपने नौकर से कहा कि कल वो फोन बी.एस.एन.एल. के कार्यालय ले जाकर इसे बदल लाये। लेकिन सुबह उसे आकास्मिक छुट्टी जाना था। इसलिए ऑफिस जाने से पहले फोन लेकर मैं खुद ही निकल गया। मैं अपनी गाड़ी से उतरा और फोन लेकर सीधा रिसेप्शनिस्ट के पास गया। सॉरी दोस्तो, उसे रिसेप्शनिस्ट कहना गलत होगा क्योंकि वो तो किसी पोर्न स्टार से कम नहीं थी, इतना क्यूट चेहरा, इतनी प्यारी हँसी मैंने आज तक नहीं देखी थी। वो अपने मोबाइल पर किसी से बात कर रही थी। जैसे ही मैं उसके पास गया तो वो फोन रख कर खड़ी हो गई। अब मैं उसका पूरा शरीर देख रहा था। क्या चूचे थे उसके ! मन कर रहा था कि जैसे चूम लो इन जालिम चूचों को जिन्होंने मेरा पहली नज़र मैं ही कत्ल कर दिया था। मेरा रोम रोम खड़ा हो गया और लंड का तो हाल क्या बताऊँ, लग रहा था कि अभी पैंट से बाहर निकल आएगा। मैं आप लोगों को बताना भूल गया कि जब भी मैं ऑफिस जाता हूँ तो फोर्मल पैंट ही पहन के जाता हूँ इसलिए उसकी नज़र मेरी पैंट के उभरे हुए हिस्से पर जा रुकी। उसने एक प्यारी सी स्माइल के साथ कहा- बैठ जाईये, मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ? लेकिन मुझे उस समय कुछ होश ही नहीं थी, मैं कभी उसकी जांघों की तरफ देख रहा था तो कभी उसके चूचों को। उसने मुझे फिर से कहा- कि बैठ जैए, मेरा नाम नैना है मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ? तब जाकर मुझे कहीं होश आया। 34-30-36 के करीब शरीर और पाँच फुट चार इंच के करीब उसकी लम्बाई थी। मैं एकदम चौंक कर जल्दी में बोला- मेरा नाम रॉकी है, आप बहुत खूबसूरत हैं, मेरा फोन खराब हो गया है, मुझे इसे रिपेयर करवाना है। मैं तुम्हें पहली नज़र में ही अपना दिल दे बैठा हूँ, मुझे मेरा फोन कब तक मिल जायेगा, मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ। वो एकदम से बोली- यह आप क्या कह रहे हो? मैं थोड़ा घबराते हुए बोला- मुझे माफ़ कर दो, मुझे नहीं पता कि मैंने आपको क्या बोला है, पर इतना बोलना चाहता हूँ कि आप बेहद सुन्दर हैं और मैं आपको प्यार करने लगा हूँ। नैना मुझे आँख मारते हुये बोली- प्यार करने लगे हो या मुझे चोदना चाहते हो???? मैं एक पल के लिये कुछ नहीं बोला, फिर मैं हंसते हुये बोला- प्यार करते हुये चोदना चाहता हूँ। नैना ने कहा- 500 रुपये एक घंटे के और पूरी रात के 1500 रुपये। मैंने हंसते हुये कहा- 3000 रुपये एक रात के। नैना खुश हो गई, उसने मेरा मोबाइल ‌नंबर लिया और मुझे कहा- रात को 8 बजे काल करती हूँ। वहाँ से मैं अपने ऑफिस निकल गया। ऑफिस से घर जाते हुए मैंने कॉन्डम का एक बड़ा पैकिट ले लिया। रात को ठीक 8 बजे नैना ने फोन किया और कहा कि वो बस स्टैंड पर है मुझे पिक कर लो। मैंने तुरंत अपनी गाड़ी निकाली और उसे लेने चला गया। उसने काले रंग की टी-शर्ट और हल्की नीली जींस पहन रखी थी। मैंने एक जेंटलमेन की तरह अपनी गाड़ी की खिड़की खोली और कहा- नैना जी प्लीज़ ! उसने एक प्यारी सी स्माइल दी और कहा- थैंक्यू ! मैंने रास्ते से कुछ स्नेक्स, डिनर और कोल्डड्रिंक पैक करवा ली। रास्ते मैं मैंने एक दो बार गेयर लगाते हुए उसकी मोटी मोटी जांघ को छू लिया था। मेरा लंड एकदम से अकड़ चुका था, खैर किसी तरह मैंने अपने ऊपर कंट्रोल रखा। 15 मिनट के बाद हम लोग घर आ गये। मैंने गाड़ी से पैक करवाया हुआ सामान उठाया और हम दोनों मेरे घर में आ गये। मैंने दरवाजा अंदर से लॉक किया और नैना को बाहों में भर लिया। नैना हंसते हुए बोली- आराम से प्यार का मज़ा लो ! पूरी रात बाकी है। लेकिन मैं कहाँ रूकने वाला था, मैंने कहा- प्यार से मज़ा लेने के लिए पूरी रात है। लेकिन अभी मुझे अपने तरीके से चोदने दो। मैंने उसे अपने दोनों हाथों में उठाया और सीधे अपने बेडरूम में ले गया। उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया, मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश में आ गया और उसको किस करने लगा और उसको अपनी बाहों में दबाने लगा। मैंने उसको खींच कर बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। दस मिनट तक मैं उसको चूमता रहा। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट खोल दी। उसके बाद मैंने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली तो उसके दूध उछल कर बाहर आ गये, मैं उन्हें देखकर दबाने लगा। फिर मैंने उसकी निप्पल को मुंह में लिया और चूसने लगा। वो आ आआह्ह ह्हा आ आआह हाह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा। थोड़ी देर बाद मैंने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी में ला दिया। उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी, उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं पैंटी को निकाल कर उसकी चूत को फैला कर चाटने लगा। वो सिसकारियाँ भर रही थी- अहा आआ अस्शहस आआ आअह्ह्हस्स स्सशाआ आआहह्हस्स अह्हह ह्ह हस्साआ आअह्ह ह्हहा हह्हाआ ह्हह्हह ! वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर नैना ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघों के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गई ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हें कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह मे ठेलते हुए कहा- चूसो इनको मुंह में लेकर। मैंने उसकी बाईं चूची को मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़ी देर के लिये मैंने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला- मैं पूरे दिन तुम्हारी चूचियों के बारे में सोचते हुए 8 बजने का इंतज़ार कर रहा था । इनको मसलने की बहुत इच्छा हो रही थी। जब मैं सुबह तुमसे मिला था तो मेरा दिल कर रहा था कि इन्हें वहीं मुंह में लेकर चूसूं और इनका रस पीऊँ। तुम नहीं जानती नैना कि तुमने मुझे और मेरे लंड को सुबह से परेशान कर रखा है। “अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो, मैं तो आज पूरी रात तुम्हारी हूँ ! जैसा चाहे वैसा ही करो।” फिर क्या था, मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैंने अपनी जीभ नैना के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाई। मैं दोनों अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हें चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लूंगा। नैना भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, उसके मुंह से ओह ! ओह ! अह ! सी सी ! की आवाज निकल रही थी, मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी बाईं टांग को मेरे कंधे के ऊपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघों के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघों के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। यह उसकी चूत थी। नैना ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों में घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था, मैं नैना से बोला- नैना, मुझे कुछ हो रहा है, और मैं अपने आपे में नहीं हूँ, प्लीज मुझे बताओ कि मैं क्या करूं? नैना बोली- करो क्या, मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को। पर मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली- अपनी नैना को चोदो ! नैना हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि नैना सम्भले या आसन बदले, मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। नैना चिल्लाई- उई ईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह ओह नयन ! ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय ! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा। नैना को काफ़ी दर्द हो रहा था, पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। नैना की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियाँ काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने हाथ बढ़ा कर दोनों चूचियों को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। नैना को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। फिर नैना बोली- अब लंड को बाहर निकालो ! लेकिन मैं लंड धीरे धीरे नैना की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर नैना ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। नैना को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया। चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुँच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। मैं नैना के ऊपर लेट कर दनादन शॉट लगाने लगा। नैना ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी। मैं भी अब नैना की चूची को मसलते हुए ठका-ठक शॉट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। नैना अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी- अहह आअह उनह ऊओह् ऊऊह् हाआआन हाआऐ माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद उईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआईई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा। और अपनी गांड हिलाने लगी। मैंने लगातर 30 मिनट तक उसे चोदा। मैं भी बोल रहा था- लीईए मेरीईइ रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयया है तूनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ नैना ये लंड अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्ह! उह्हह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरीईइ गुलाम हूऊऊ गईए। नैना गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी नैना को चोदे जा रहा था। नैना मुझको ललकार कर कहती- लगाओ शॉट ! और मैं जवाब देता- ये ले मेरी रानी, ले ले अपनी चूत में। “जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे नयन !” “ये ले मेरी नैना रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।” “देखो नयन, मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गई ! और जोर से आआईईए मेरे राजा। मैं गईईईए रीई !” कहते हुए मेरी नैना ने मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था, मैं बोला- मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन ! और मैंने भी अपने लंड का पानी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया। हम दोनों 10 मिनट इसी तरह लेटे रहे। फिर हम दोनों एक साथ नहाने गये। फ्रेश होने के बाद हम ने डिनर किया। रात को मैंने अन्तर्वासना स्टाइल में उसकी कुंवारी गांड मारी और पूरी रात उसे छ बार चोदा। आपको मेरी कहानी कैसी लगी प्लीज मुझे मेल कर के बताओ। jainnayan150@gmail.com

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