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मेरा नाम राहुल है और Hindi Sex Stories मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ।
मेरे परिवार में मेरी मम्मी, मेरे पापा, बड़ी बहन राखी, और फिर मैं हूँ।
मेरे पापा की रात की नौकरी रहती है इसलिए आप अन्दाज़ा लगा सकते हैं कि उन्हें रात में सम्भोग, मतलब चुदाई करने का मौक़ा नहीं मिलता है। इसलिए वह दिन में ही चुदाई करते हैं। अगर आप मेरी मम्मी को देखोगे तो कहोगे कि क्या पटाखा है। लाजवाब, जन्नत है। ठीक वैसी ही मेरी बहन राखी भी है, वो तो बिल्कुल बम है। घर में तीन कमरे हैं। एक मेरा, एक राखी का और एक मम्मी-पापा का।
एक दिन मम्मी-पापा उनके कमरे में सो रहे थे और मैं अपने कमरे में। तभी मैंने सुना कि मम्मी के कमरे से रोने की आवाज़ आ रही है। तभी मैंने खिड़की से देखा कि वहाँ चुदाई चल रही थी। मैं उनकी चुदाई के दृश्य देख मज़ा लेने लगा। मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। मेरी उम्र २० वर्ष है, मगर मैंने आज तक चुदाई नहीं देखी थी, बस उसके बारे में सुना था।
मैं यह बताने के लिए राखी के कमरे में गया कि मम्मी क्यों रो रही है। मगर जैसे ही मैं मुड़ा मैंने पाया कि राखी भी चुदाई के मज़े ले रही है। उसकी उम्र २२ साल है, और फिगर ३६-२४-३६ है। वह कमरे में बिल्कुल नंगी पड़ी थी और एक मोमबत्ती को अपनी चूत में डाल रखा था। मैंने मौक़ा देख अपनी मोबाईल में वह शूट कर लिया। फिर कमरे में घुस गया। मुझे देख वह हड़बड़ गई।
मैंने कहा,”दीदी, घबराओ मत। मैं भी तो तुम्हारा भाई हूँ। अगर तुम्हें इतनी चुदास उठ रही थी, तो मुझे बुला लेती।
राखी- राहुल, कैसी बात कर रहा है?
राहुल- नहीं, मैं सही कह रहा हूँ। चलो दोनों ही मज़े लेते हैं।
राखी- नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती।
राहुल- ठीक है तो मैं यह फिल्म दोस्तों को भेज देता हूँ।
राखी- नहीं, ऐसा मत करो। ठीक है, चलो दोनों साथ में मज़े लेते हैं। वैसे मैंने आजतक किसी लड़के के साथ मज़े नहीं लिए हैं।
राहुल- अरे मैंने भी आजतक किसी लड़की के साथ मज़े नहीं लिए हैं।
फिर क्या था। राखी ने मेरे कपड़े उतारने शुरु कर दिए।
मेरे कपड़े उतरते ही राखी बोली- राहुल, ये क्या? तुम्हारी झाँट तो बिल्कुल जंगल ही रही हैं। और लंड तो बिल्कुल नौ इंच का है।
मैंने कहा- हाँ, आज तक तु्म्हारे लिए ही तैयार करता आ रहा था।
यह सुनकर राखी हँस पड़ी।
मैंने कहा- चुप! आराम से! बगल के कमरे में मम्मी-पापा भी हैं।
फिर राखी ने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी।
तभी मुझे पेशाब लग आई, तो मैंने उसके मुँह में ही पेशाब कर दिया और वह पूरा पी गई। तभी मैं वहाँ से पानी पीने के बहाने आया और एक कैप्सूल खा लिया। फिर वापिस आकर हमारा कार्यक्रम चालू हो गया।
उसने 15 मिनट तक मेरा लंड चूसा। फिर मैंने उसकी चूचियों को पीना शुरु किया जो 5 मिनट तक चलता रहा फिर बारी थी उसकी चूत की। जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा तो उसकी चीख निकलने वाली थी तभी मैंने राखी के मुँह पर हाथ रख दिया नहीं तो फँस गए होते।
अब हमारी चुदाई चालू हो गई। मैंने उसे आधे घंटे तक चोदा। राखी छिनाल भी पूरी थी, झड़ने ही नहीं दे रही थी। मैंने अपना 9 इंच का लण्ड अन्दर दे रखा था और बार-बार अन्दर-बाहर कर रहा था। उसे दर्द के साथ-साथ असीम आनन्द का अनुभव भी हो रहा था। तभी मुझे लगा कि वह झड़ने वाली है, तो मैंने उसे बाँहों में भर लिया और 9 इंच का लण्ड उसकी चूत में समा दिया। तभी मेरा लंड भी उसकी चूत में झड़ गया। हम साथ में झड़ चुके थे।
इसके बाद मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में घुसा दिया। उसे दर्द तो हो रहा था पर मज़ा भी आ रहा था, इसलिए वह चुप थी। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदा, जिसमें मुझे बहुत मज़ा आया।
उस दिन के बाद मम्मी-पापा जब भी बाहर जाते हैं, हम दोनों घर में नंगे घूमते हैं और हर समय चुदाई करते हैं। वह मुझे नहलाती है और मैं उसे। मेरा लंड हमेशा उसकी चूत में रहता है। अब मेरा लंड दस इंच का हो चुका है। मुझे मेरे दोस्त बहनचोद भी कहते हैं। हमें सबसे ज़्याद मज़ा तब आता है, जब मम्मी-पापा घर पर नहीं होते. Hindi Sex Stories
मेरा नाम राज Hindi Porn Stories घई है, मैं लुधियाना में रहता हूँ। आज मैं आप लोगो को अपना एक व्यक्तिगत अनुभव बताने जा रहा हूँ जो पिछले साल जुलाई के महीने में मेरे साथ हुआ। मैंने तब तक सेक्स नहीं किया था पर इस बार एकदम से किस्मत मेरे ऊपर मेहरबान होगी मैंने कभी सोचा भी नहीं था। किस्मत जब मेहरबान होती है तो बस क्या कहने ! अभी तक मैंने तीन बार अलग अलग लड़कियों के साथ सेक्स किया है। सोचिये तब तक मैंने एक बार भी सेक्स नहीं किया था और अब तक तीन लड़कियों को संतुष्ट कर चुका हूँ। मैं आप लोगों को ज्यादा बोर नहीं करता हूँ।
मैंने पहली बार जिस लड़की से सेक्स किया उसका नाम शीना (बदला हुआ नाम) लुधियाना में ही रहती थी।
मैं कॉलेज़ का विद्यार्थी हूँ और मेरे कॉलेज में नया बैच आया था। उन्हीं में एक लड़की थी शीना ! दिखने में अच्छी थी पर कभी मैंने उसके बार में गलत नहीं सोचा था क्यूँकि एक तो मैं सीनियर और दूसरा उस लड़की की आवाज़ इतनी मधुर है कि कोई भी उससे बात करके ही खुश हो जाये। वो मेरे से काफी घुल मिल गई थी, धीरे-धीरे एक दूसरे के घर भी आना-जाना चालू हो गया। वो मेरे घर के पास में ही रहती थी।
परीक्षा का समय करीब आने लगा था। एक दिन उसने मुझे कॉल किया और बोली- सर, मुझे एक विषय में दिक्कत आ रही है, कल मेरा प्रैक्टिकल है, मुझे पढ़ा दीजिये !
मैंने कहा- इतनी रात में?वो बोली- सर, प्लीज़ !
मैं अपने घर वालों से आज्ञा लेकर उसके घर चला गया। उस दिन मैंने उसे पहली बार नाइटी में देखा था वो भी गुलाबी रंग की ! क्या गज़ब लग रही थी !
जुलाई के महीने में काफ़ी गर्मी हो जाती है, मुझे भी गर्मी लग रही थी तो मैंने उससे बोला और उसने एसी चला दिया। मैं उसके बैठ गया, पढ़ाते-पढ़ाते मुझे नींद की झपकी आने लगी और मैं सो गया। जब उसने मुझे देखा तो मुझे आवाज़ दी पर मैं जागा ही नहीं। तब उसने मुझे हिलाया। उस दिन पहली बार मुझे उसने मुझे छुआ था, क्या नाज़ुक स्पर्श था उसका !
खैर मैं उठा और अपना चेहरा धोया ताकि नींद न आए। मैं आकर उसे दोबारा पढ़ाने लगा और उसका सब काम ख़त्म करवाकर अपने घर वापिस आकर सो गया। उस दिन से वो मेरे सपनों में आने लगी। मुझे लगा यह सब गलत है तो मैंने उससे बात करना बंद कर दिया लेकिन उसे अच्छा नहीं लगा कि मैं उसे नज़रंदाज़ करूँ ! क्यूंकि जब भी वो मेरे सामने आती थी, मैं उस जगह से ही हट जाता था।
लेकिन एक दिन वो मेरे घर ही आ गई, मेरी मम्मी से पूछा कि मैं कहाँ हूँ तो मम्मी ने बोला- अपने कमरे में !
वो अंदर आ गई और मैं एकदम से उसे यहाँ देखकर फंस गया, मैंने सोचा- बेटा अब कहां जाओगे !
उसने मुझसे पूछा- क्या बात है आप मुझे नज़रंअदाज़ क्यूँ कर रहे हो?
तो मैंने उससे बोला- मैं नज़रंदाज़ नहीं कर रहा हूँ ! बस थोड़ा व्यस्त था !
तो बोलने लगी- नज़रअंदाज़ करने में और व्यस्त होने में बहुत फर्क है ! मैं सब समझती हूँ, आप मुझसे बात ही नहीं करना चाहते हो !
और रोने सा चेहरा बना लिया !
अब दोस्तो, मैं भी तो इन्सान ही हूँ न ! क्या करता ! फिसल गया !
मैं उससे बोला- चलो ! कहीं घूम कर आते हैं !
और हम घूमने के लिए निकल गए। तब उसने मुझसे दोबारा से पूछा- आप मुझे से बात क्यूँ नहीं कर रहे थे?
मैं फिर से टालने की कोशिश करने लगा, वो मुझसे जिद्द करने लगी- सही सही बताओ कि क्या बात है?
तब मैंने उसे बता दिया कि ऐसी-ऐसी बात है ! इसलिए मैं तुम्हें नज़रंअदाज़ कर रहा था !
तो वो शरमा गई और मुझसे बोलने लगी- आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो !
खैर कुछ दिन बीत गए, एक दिन दोपहर में उसका कॉल आया- आप क्या कर रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं ! मूवी देख रहा हूँ !
वो बोली- मैं घर पर अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ ! आप आ जाओ, यहीं बैठ कर देखते हैं ना मूवी !
तो मैंने बोला- ठीक है !
और मैं डीवीडी लेकर उसके घर चला गया। डीवीडी प्लेयर मैं डीवीडी लगा कर हम दोनों मूवी देखने लगे। मूवी में ऐक्टर इमरान हाश्मी था तो उसका एक सीन आ गया और वो इतना जबरदस्त सीन था कि मेरी तो हालत ही ख़राब हो गई। मैंने शीना की तरफ देखा तो उसकी भी हालत ख़राब हो चुकी थी।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो उसने मुझसे बोला- राज, आई लव यू !
मैं उससे ऐसी बात सुनकर हक्का-बक्का रह गया। मेरा तो उस पर उसी दिन दिल आ गया था। खैर मैंने उसको गले लगा लिया और उसे चूमने लगा इमरान हाश्मी स्टाइल में !
और पता नहीं क्या हुआ कि मेरे हाथ अपना आप उसके वक्ष पर पहुँच गए, उसके नरम स्तनों का अनुभव क्या गज़ब था कि बयान नहीं कर सकता !
दोस्तो, एक बात बता दूँ- सेक्स ऐसी चीज़ है जिसे आप जिसे आराम से करोगे उतना ही ज्यादा मज़ा आएगा। मतलब हर एक शॉट की गर्मी का अनुभव करो। कभी भी आपने शादीशुदा लोगों को फटाफट सेक्स करते नहीं देखा होगा और ना ही कभी सुना होगा। वास्तव में जब तक एक दूसरे की भावना को नहीं समझते, मज़ा नहीं आता ! ये तेज़-तेज़ शॉट्स साला सब ब्लू फिल्मों से देख-देख कर लोग करने लगते हैं, इसमें कोई सेक्स का मज़ा नहीं आता है। दोस्तो, बल्कि आप जल्दी थक भी जाते हो सेक्स का मज़ा ही आराम से एकदम चाय की चुस्की के जैसे जितने आराम से करोगे उतना ज्यादा मज़ा बढ़ता है।
खैर जब मैंने उसके स्तन दबाये तो उसे इतने मज़ा आने लगा कि उसने मुझे जोर से अपने बाँहों में जकड़ लिया और हम एक दूसरे को चूमते हुए ही बेड पर लेट गए और काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। अब अचानक मेरा सेल बजा और मेरा ध्यान टूटा, और किसी जरुरी काम की वजह से जाना पड़ गया।
मैं वहाँ से चला आया।
कहते हैं ना जो होता है अच्छे के लिए होता है !
मेरा काम हो जाने के बाद मैंने उसे काल करके पूछा- क्या कर रही हो?
तो उसने मुझे बोला- आज रात को मम्मी-पापा कोई नहीं है, आप आ जाओ ! यहाँ आओ प्लीज़ !
मैंने बोला- ठीक है !
मैंने अपने घर जाकर खाना खाया और अपनी किताबें और एक कंडोम का पैकेट लेकर उसके घर चल दिया। जब उसके घर पहुंचा तो वो खाना बना रही थी। वो मुझसे खाना खाने का बोलने लगी।
मैंने बोला- नहीं, मैं खाकर आया हूँ !
तो बोलने लगी- नहीं थोड़ा तो खाना पड़ेगा ! मैं आपके लिए बना रही हूँ !
फिर उसके इतना कहने पर मैंने बोला- ठीक है, थोड़ा खा लूँगा !
जब खाना बन गया तो उसने बोला- मैं नहा कर आती हूँ !
तो मैंने सोचा- चलो, मैं भी साथ मैं ही नहा लेता हूँ !
और उसके साथ बाथरूम में चला गया और पहले तो कपड़े उतारे फिर शॉवर चालू किया। हम दोनों ने साथ में शॉवर लिया। नहाने के बाद मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाया और बेड पर ले जाकर लेटा दिया। उसका पूरा शरीर तौलिए से पौंछ दिया। फिर रसोई में जाकर फ़्रिज से एक बर्फ़ का टुकड़ा ले आया और उसके टॉप पर बर्फ फेरने लगा और उसका पानी चूसने लगा और धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा- स्तन, फिर नाभि ! सबसे ज्यादा मज़ा यहीं आता है दोस्तो ! नाभि में पानी भर के पिया। जब नीचे उतरा तो उसकी चूत की गर्मी से बर्फ १० सेकंड में ही पानी हो गई। मैं उसकी चूत को चाटने लगा। क्या टेस्ट था दोस्तो ! आप सोच भी नहीं सकते हो ! उस समय निकलने वाली आवाजें इतना मज़ा देती हैं कि पूछो मत ! जोश चार गुना बढ़ जाता है। सेक्स ऐसी चीज़ है जिसे आप जब तक खुद सही ढंग से करोगे नहीं तो मज़ा नहीं आएगा।
मैंने उसे इतना ज्यादा चाट चाट कर बेहाल कर दिया था कि वो बस आऽऽआ अह करती रह गई, लेटे-लेटे आहें ही भरती रही और मेरे सर के बालों को नोचने लगी। कुछ ही देर में वो स्खलित हो गई। मैंने उसके पूरे रतिरस को चूस लिया और उसके बगल से जाकर लेट गया।
फिर वो उठी, मेरे लंड को हाथ में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी और उसके बाद उसे लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी। धीरे धीरे लंड महाराज अपनी असली औकात में आ गए और फनफनाने लगे खड़े होकर !
वो एकदम से डर गई- ये क्या हो गया ?
मैंने उसे प्यार से समझाया कि कुछ नहीं, यही तो मज़ा है इसका असली ! पगली ! और उसे चूसने के लिए कहता रहा। जब बहुत देर हो गई तो मैंने उसको बगल से लिटाया और उसके पैरों को अपने कंधे पर रखने के बाद अपने लंड पर एक कंडोम चढ़ाया। फिर उसकी चूत पर थोड़ी देर तक धीरे धीरे ऊपर ही रगड़ता रहा तो वो कराहने लगी- आह्ह्ह प्ल्ज्ज्ज़ अब डाल दो ! रहा नहीं जाता है मुझसे ! मैंने कहा- सब्र करो जानू ! सब्र का फल मीठा होता है !
और एकदम से एक तगड़ा शॉट लगा दिया। वो इसके लिए अभी तैयार नहीं थी और एकदम से दर्द के मारे बहुत जोर से चीख पड़ी- आआह्छ !
मैंने जल्दी से उसके होटों को अपने होठों से दबा लिया और थोड़ी देर आराम से पड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद उसने जब सांस ली तो मैंने एक और तगड़ा झटका लगा दिया और उसकी चीख निकल गई- आआआअह्ह्ह्ह माआआआ !
उसकी हालत ऐसी हो गई थी कि उसकी आँखों से आंसू निकलने लगे।
मैंने कहा- यदि कोई तकलीफ़ है तो रहने दो !
तो बोली- नहीं, आराम से करो बस !
मैंने धीरे-धीरे करके अपना ७″ का लंड पूरा अंदर कर दिया और हर एक शॉट के मज़े लेने लग गया- अ आया !
उससे पूछा- क्यूँ तुम्हें भी मज़ा आ रहा है ना?
तो बोली- जान ! हाँ ऐसा मज़ा कभी नहीं आया आआअह्ह्ह्ह्ह ! ऐसा सुख किसी चीज़ में नहीं है, जानू, तुम बहुत ही बढ़िया कर रहे हो !
और धीरे धीरे करके मैंने स्पीड बढ़ा दी और करीब 15 मिनट के बाद मैं स्खलित हो गया। इतनी देर में वो भी दो बार डिस्चार्ज हो चुकी थी। फिर मैं उसे अपनी बाँहों में जकड़ कर बगल में लेट गया और थोड़ी खामोशी का मज़ा लेने लग गया। फिर मैंने उसे जोर से चूम लिया गालों पर ! उसने भी लेटे-लेटे मेरी छाती के बालों में ऊँगली घुमाना चालू कर दी।
दोस्तो, ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं जन्नत में घूम रहा हूँ।
जब हम बिस्तर से उठे तो बिस्तर पर खून के लाल-लाल निशान बन गए थे। वो देख कर डर गई।
उसके बाद हम एक साथ नहाये, खाना खाया और फिर लेट गए। उस रात मैंने उसे 3-4 बार चोदा। सुबह जब मैं जाने लगा तो उसने मुझे किस दिया और बोलने लगी- आगे जब भी मौका मिलेगा हम यह करेंगे !
अब मेरी पढ़ाई ख़त्म हो चुकी है, मैंने उसके साथ कई बार सेक्स किया और किस्मत कि उसके बाद मुझे दो और लड़कियों से सेक्स करने का मौका मिला, कभी किसी और दिन सुनाऊंगा उनकी बातें।
दोस्तों कैसी लगी यह कहानी? जरूर बताना ! Hindi Porn Stories
मेरा नाम अंजलि है । मै, पापा Sex Stories और मम्मी बहुत दिनों बाद थियेटर में गये। स्थानीय कलाकार वहां अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। नाच, गाना व नाटक वगैरह चल रहे थे। मुझे एक डांस बहुत प्यारा लगा। कार्यक्रम चल रहा था। हम आगे ही बैठे थे। मैं पानी पीने के लिये स्टेज के पास गई। अचानक मुझे वो डांस करने वाली लड़की वहा मिल गई। मैं तुरन्त उससे जाकर मिली।
“आप डांस बहुत अच्छी करती हैं।”
“थेंक्स … यह मेरा बचपन का शौक है … ”
“आपका नाम जान सकती हूँ प्लीज … ?”
“कमल नाम है मेरा … ”
“मैं कभी आपसे मिलने जरूर आऊंगी !”
“आप अंजलि है ना … मेरा घर आपके पास ही है … ”
“अच्छा तो हम जरूर मिलेंगे … आप मेरे घर आना !”
औपचारिक बात होने के बाद मैं पानी पी कर अपनी सीट पर आ गई। कार्यक्रम समाप्त होने पर हम घर पर आ गये। दूसरे दिन सुबह ही कमल मुझे घर के बाहर दिख गई। वो स्कूटी से निकल रही थी … उसने मुँह पर कपड़ा बांध रखा था। उसने हाथ हिलाया और और स्कूटी रोक दी … मैंने उसे अन्दर बुला लिया … और उसका परिचय सबसे कराया। फिर मैं उसे कमरे में ले आई।
उसने टाईट जीन्स पहन रखी थी और सेक्सी लग रही थी। उसने मुँह पर से कपड़ा हटाया और बैठ गई। हम बातें करने लगे। उसके बात करने का करने का स्टाईल कुछ अलग सा था। कभी कभी वो लड़के के स्टाईल में बोलने लगती थी। मुझे कुछ शक सा होने लगा।
मैं एक दिन उनके डांस क्लब में गई। बाहर ही मेरे जान पहचान के अंकल मिल गये। बात बात में मुझे सब मालूम हो गया कि कमल वास्तव में लड़का ही है, पर मैंने उसे ये जाहिर नहीं होने दिया कि मुझे पता चल गया है कि वो लड़का है। चूंकि उसका जिस्म दुबला पतला था और नाचने में माहिर था, इसलिये वो ऐसा ही रहता था। उसके बाल वास्तविक लगे इसलिये बाल भी उसने लम्बे कर लिये थे। उसकी आवाज लड़कियों जैसी ही थी। उम्र भी 18 साल की थी। ना चेहरे पर कोई बाल … लड़कियों जैस चिकना चेहरा।
अब वो अक्सर मेरे घर आ जाता था। मैंने जान बूझ करके उसे मेरी सहेली बना लिया था … जब भी उसका कोई प्रोग्राम होता तो वो मुझे पास ला देता था। वो या तो जीन्स पहनता था या पैन्ट । एक दिन मैंने उससे पूछा।
“कमल … तुम्हारा कोइ बॉय-फ़्रेन्ड है क्या?”
“नहीं तो … और तुम्हारा … ”
“नहीं यार … कोई मुझे पसन्द ही नहीं करता है … ”
“तो मेरी फ़्रेन्ड बन जाओ … ”
“छी: तुम तो लड़की हो … मैं लड़कों की बात कर रही हूँ … ”
“अरे यार बॉय-फ़्रेन्ड तुम्हें परेशान कर देगा … तुमसे सेक्स की बातें करेगा और फिर जाने क्या क्या … ”
“तुझे क्या सेक्स की बातें अच्छी नहीं लगती है क्या ?”
“हां … लगती तो हैं … बातें क्या सेक्स भी अच्छा लगता है … कोई किसी के साथ सम्भोग करे मजा नहीं आयेगा क्या ?”
“क्या बात है … सम्भोग को चुदाई कहते हैं … ” मुझे सेक्स की बातों में मजा आने लगा था। मैं उसे उत्तेजित करने लगी।
“धत्त ये तो गाली होती है … पर हां च् … च् … चुदाई ही कहते हैं … ” कमल हड़बड़ा गया।
“अच्छा आज बाहर चल कर आईस्क्रीम खायेंगे … मैं ड्रेस बदल लेती हूँ … ”
मैंने अपना टॉप उतारा तो मेरी दोनों चूंचियां बाहर छलक पड़ी। मैंने जान कर उसे भड़काने के अपने बोबे सहला दिये।
“अरे … रे ये क्या कर रही हो … अन्दर जाओ ना … !” कमल आंखे फ़ाड़ कर मेरी चूंचियाँ देखने लगा।
“ऐसे क्या कर रही है … तेरे नहीं है क्या … ?” मैंने उसे छेड़ा।
“बड़ी सुन्दर हैं … सीधी तनी हुई … अच्छी लग रही हैं … ” उसके ऐसे कहने से मेरे शरीर में सिरहन दौड़ गई। मैंने जाल और कसा।
“कमल … हाथ लगा ना इसे … ” कमल ने धीरे से मेरे बोबे सहला दिये और मेरे चूंचक भी दबा दिये …
“मस्त है तेरी चूंचियाँ यार … ।” कमल उत्तेजित हो उठा था।
“हाय कमल … ला तेरे भी भी सहला दूं” मैंने उसे छेड़ने की नीयत से कहा और मुझे ये भी बताना था मैं उसे लड़की ही समझ रही हूं।
“नहीं … नहीं अभी नहीं … बाद में … मेरे तो अभी हैं ही नहीं … ” वो घबरा उठा।
“अरे जा … अभी दबा दबाऊंगी … ।” मैंने उसकी छाती पर जबरदस्ती हाथ लगाया तो साफ़ चट मैदान था। पर कमल की आंखो में वासना दिखने लगी।
मेरे हाथ दूर करके बोला,”आ ! तेरे और दबा दूं … !
“और उसने मेरे मेरे बोबे सहलाने शुरू कर दिये। मुझे मजा आने लगा। इतने में उसका एक हाथ मेरी चूतड़ पर आ गया … और दबाने लगा। उसने मुझे चिपका लिया और मेरे होंठ अपने होंठों से मिला दिये। मैंने भी उसके चूतड़ पकड़ लिये और दबाने शुरू कर दिये … अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और उसने जीन्स के ऊपर ही मेरी चूत भींच दी।
“हाय रे कमल … और भींच दे … साली तू लड़की क्यो है … लण्ड होता तो उसे ठूंस ठूंस कर चुदवाती … ” मेरे मुँह से एक वासना भरी कराह निकल पड़ी। उसके कड़े बदन में मर्दों वाली बात साफ़ नजर आ रही थी …
“ला मैं तेरी चूत भींच दूं !”
मैंने भी उसके लण्ड पर ज्योंही हाथ लगाया। वो दूर हो गया …
“बस अंजलि … अब नहीं … चल तैयार हो जा … चलते है … ” मेरा नशा टूट गया …
“कमल … रात को यहीं आ जाना … थोड़ा और मजा करेंगे … ऐसे ही … खूब मजा आया ना अभी … ”
हम दोनों स्कूटी पर बैठ कर निकल पड़े। हम दोनों ने मुँह पर कपड़ा बांध लिया था।
रात को मैं उसका इन्तज़ार करती रही, पर वो नहीं आया। मैंने उसे फोन किया तो वो बोला कि अभी रात हो गई है कल आऊंगी।
सुबह ही वो आ गया … मैं खुश हो गई … सोचा आज तो चुद के ही छोड़ूगी … साली चूत को शान्त तो करना ही है … ये चक्कर में आ गया है तो मजा कर लूँ … हमने चाय पी और कमरा बन्द कर लिया। और मम्मी से कह दिया कि हम एक घण्टा पढ़ेंगे … हमें डिस्टर्ब नहीं करना।
“चल यार मजे करते हैं … ” मैंने अपना नाईट सूट उतार दिया और नंगी हो गई …
“तू तो बड़ी बेशरम है … यार … ” कमल बोल उठा और मेरी चूचियाँ दाबने लगा … ।
“अरे उतार ना कपड़े यार … जल्दी कर … मेरी तो खुजली बढ़ रही है … ” मेरी वासना बढ़ती जा रही थी और कमल से चिपकती जा रही थी। उसने मेरी चूत दबा दी और मुझे लेकर बिस्तर पर गिर पड़ा … और मुझे बाहों में कसने लगा। मैं होश खोती जा रही थी … उसके लण्ड का दबाव अब मेरी चूत पर पड़ रहा था। मुझे मस्ती आने लगी थी। लण्ड की चुभन पा कर मुस्कराई। पर नंगा हो जाता तो उसकी पोल खुल जाती … जो कि अभी खुलने ही वाली थी।
“हाय रे कमल … काश तू लड़का होती … तेरे मोटा सा लण्ड होता … कितना मजा आता … अरे टॉप और जीन्स उतार ना … ” पर उसने नहीं सुना … वो मेरे अंगों को भींचती रहा। मैंने खींच कर उसका टॉप उतार दिया। उसने तुरन्त मेरी आंखें बन्द कर दी …
“प्लीज मत देखो शरम आती है … मैं जीन्स उतार रही हूँ … देखो आंखे बन्द ही रखना … ” अपना जीन्स उतार कर वो नंगा हो गया … मैंने तिरछी नजरों से उसका कड़कता लण्ड देखा। उसने वापिस से मुझे दबोच लिया।
उसका लण्ड अब मेरे जांघ पर लग रहा था … मैंने जान करके कुछ नहीं कहा।
“अरे ये चूत में क्या घुसा रही है … ” उसका मोटा लण्ड मेरी चूत पर रगड़ लगाता हुआ घुसने लगा।
“एक मजे की चीज़ है … ” मैंने आंखे बन्द किये हुये ही नशे में मजे लेने लगी। अचानक लण्ड का दबाव मेरी चूत पर पड़ा और मोटा और लम्बा लण्ड पूरा ही अन्दर घुस गया … मैं सिहर उठी … … उसने दुबारा धक्का दिया तो पूरा ही घुस गया। कमल के मुख से सिसकारी निकल पड़ी।
मेरे मुख से भी आह निकल पड़ी। मुझे भी असीम आनन्द आया … उसने धक्के मारना शुरु कर दिया … मैंने अचानक ही उसे धक्का दे दिया … पर नाटक तो करना था … मेरी चूत लप लप कर रही थी … चुदने को बेताब हो रही थी …
“हाय रे … तुम तो लडके हो … लण्ड तो असली है … और इतना मोटा ?”
उसने मुझे फिर से जकड लिया और लण्ड फिर से घुसा डाला। मैंने भी घुसने दिया … मजा कैसे छोड़ देती …
“हाँ … अंजलि मैं तो लड़का हूँ … प्लीज चुदाई चलने दो ना … मैं सब बता दूंगा … ” मुझे तो पहले से ही पता था … फिर उसे कैसे जाने देती।
“प्रोमिस … चोदने के बाद बताना … हाय अब चोद डालो … देखा तुम्हारे लण्ड आ ही गया ना … ” मैंने उसे छेड़ते कहा। उसका लण्ड चूत की जड़ तक घुसा हुआ था।
मुझे असली चुदाई का आनन्द मिल रहा था। चूंकी मामला खुल चुका था। उसके मन में भी अब चोर नहीं था। अब हम खुल कर मर्द औरत की तरह चुदाई का मजा लने लगे। मैंने भी उसे अब प्यार से अपनी बाहों में जकड़ लिया। और उसके होंठ से होंठ मिला दिये।
उसका लण्ड मेरी चूत में रगड़ मारते हुए उतर रहा था और फिर एक के बाद एक मजे के झटके … मैं अपनी चूत उछाल उछाल कर चुदाने लगी। मेरी वासना उबलने लगी। कमल भी अपने होश खो बैठा। बेतहाशा धचक धचक धक्के मारने लगा … तेज सिसकारियाँ उसके मुँह से निकल रही थी।
डांस में माहिर होने से उसकी कमर में बहुत लचक थी … मेरी सिर्फ़ चूत पर उसका लण्ड टकरा रहा था … उसने ऐसा पोज बना रखा था लण्ड और चूत के अलावा कोई भी अंग स्पर्श नहीं कर रहा था। लण्ड और चूत दोनों आग उगल रहे थे। फ़च फ़च और थप थप की मधुर आवाजें उभर रही थी।
“कमल मेरी चूचियाँ मसल दे राजा … दे और दे … साली को फ़ाड़ दे … ” वो बड़ी सफ़ाई से मेरी दोनों चूंचियों की घुंडियों को हल्के हल्के गोल गोल घुमा कर मसलने लगा। मुझे लगा कि ये मुझे मस्त करके मार ही डालेगा। मेर सारा जिस्म अंगड़ाई लेने लगा। सारे शरीर में मिठास भरने लगी … नसों उबाल आने लगा … लगा कि जैसे सब कुछ मेरा अब चूत में सिमटने लगा है … सारी मिठास खिंच कर चूत में समाने लगी। कमल की आंखें बन्द थी … अपनी कला से मेरी आनन्द दायक चुदाई कर रहा था …
“ईईईह्ह्ह्ह् … हाय … ये ये … मर गई … कमल गई मैं तो … मेरी मां रे … चोद दे जोर से … घुसा और जोर से घुसा … ” मेर बदन ऐंठने लग गया था … मैं अपने आपको रोकना चाह रही थी … पर हाय रे … पानी निकल ही पड़ा … और मैं झड़ने लगी … उसी समय कमल ने मेरी चूत में अपना लण्ड गड़ा दिया … और जड़ में दबाने लगाने … हाय कहते हुए अपना वीर्य मेरी चूत की गहराईयों में निकालने लगा।
अब उसने मेरे शरीर पर अपना भार डाल दिया। और चूतड़ों को मेरी चूत पर दबा दबा कर अपना वीर्य उगलने लगा। मैंने अपने दोनो पांव फ़ैला कर चित लेट गई। कमल पूरा झड़ चुका था। कमल भी एक तरफ़ बगल में आ गया। हमारी सांसे जल्दी ही नियन्त्रण में आ गई। दिल की धड़कनें सामान्य होने लगी। कमल तो जल्दी से खड़ा हो गया मैंने उसे खींच कर फिर लेटा लिया …
“कमल प्लीज ! एक बार और चुदाई करेंगे … ! ” कमल मेरी बगल में फिर से लेट गया। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी …
कमल कहने लगा,” अंजलि सॉरी … मैंने तुम्हे नहीं बताया कि … ”
मैंने उसके मुख पर अंगुली रख दी,” मुझे बहुत पहले से ही पता था कि तुम लड़के हो … मुझे तो सच में चुदना था … अब रोज चोदोगे ना … ”
कमल के लण्ड में एक बार और उफ़ान आ गया और मैं एक बार फिर नीचे दब गई … मेरे बोबे मसलने लगा … और मेरी चूत में मोटा सा लम्बा सा गरम लोहा घुस पड़ा … Sex Stories
मेरा नाम मोहित है। मैं गोरखपुर का रहने Sex Stories वाला हूं। मेरा एक संयुक्त परिवार है, मेरे घर में पापा, मम्मी, चाचा, चाची रहते हैं. मेरी उम्र २७ साल है मुझे शुरू से ही सेक्स का बहुत शौक रहा है. मुझे लड़कियों में उनकी चूची बहुत पसंद है. उनसे खेलना, चूसना मेरी पहली पसंद है. सेक्स करने से पहले मुझे पार्टनर के साथ खेलने और उसे बहुत ज्यादा उत्तेजित करने में बहुत मज़ा आता है. २ साल घर से दूर हॉस्टल में पढ़ा हूं। उस वक्त मेरे बेड पे मैं और मेरा एक रूम पार्टनर सोते थे.
एक दिन जब हम सो रहे थे तब रात को मुझे लगा कि कोई मेरे लंड के साथ खेल रहा है. मैंने धीरे से एक आंख खोली तो देखा कि मेरा रूम पार्टनर मेरे लंड के साथ खेल रहा है, उससे मस्ती कर रहा है। मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं सोने का बहाना कर के बेड पे पड़ा रहा. फिर वो मेरे लंड को चूसने लगा मुझे बहुत मज़ा आने लगा. तब मैंने उठने की सोची और उठते ही अपने रूम पार्टनर पे झूठ का गुस्सा किया। वो मुझे मनाने लगा। मैंने उससे कहा कि ठीक है लेकिन बस इतने में मज़ा नही आयेगा, उसने पूछा- क्या मतलब?
मैंने कहा- मुझे यह सब पसंद नही है और किसी लड़के ने मेरा लंड पहली बार पकड़ा है, तुम उसे चूस रहे थे, उसके अलावा क्या क्या करते हैं?
उसने बताया कि लंड को गांड में डाल का अन्दर बाहर करते हैं जैसे कि लड़कियों के चूत में डाल कर किया जाता है.
मैंने उससे कहा कि तुम मेरा लंड चूस सकते हो, ब़स मुझे गांड मरवाने का शौक नही है.
वो मान गया. उस दिन उसने मेरे लंड की खूब चुसाई की, फिर हम सो गये.
हम जिस स्कूल में पढ़ते थे वो लड़के लड़कियों का स्कूल थ। उस समय मैं कलास 12 में था. स्कूल में ही हमारा हॉस्टल था. लड़कियों से मेरी बहुत बनती थी क्योंकि मैं पढ़ने में बहुत तेज था। मेरी क्लास में एक लड़की थी जिसका नाम सुधा था. वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थी. वो अपने जवानी की दहलीज़ पर पहला कदम रख रही थी. उसके बड़े होते उभार किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थे. मैं उससे बहुत पसंद करता था और रात को उसके साथ ।सेक्स के सपने देखता था.
मैं दिखने में बहुत स्मार्ट नही था लेकिन किसी से कम भी नही था. मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार करने की सोची, लेकिन हिम्मत नहीं हुई. एक बार हम लोग पूरी क्लास के साथ आऊटिंग पे गए हुए थे, ब़स वही मुझे मौका मिल गया और मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया.
पहले तो वो कुछ नही बोली, फिर मेरे गाल पे एक किस देकर बोली कि मैं भी तुम्हे बहुत पसंद करती थी लेकिन बोलने की हिम्मत नही हो रही थी. फिर क्या, धीरे धीरे हम लोग एक दूसरे से बहुत खुल गये और सेक्स करने की प्लानिंग होने लगी. हॉस्टल से केवल रविवार को आऊटिंग की छूट थी तो हम लोगों ने रविवार के मिलने का प्रोग्राम उसकी सहेली के घर पे रखा. यह सब इंतज़ाम उसने किया और बताया कि कोई दिक्कत नहीं है उसकी सहेली तैयार है अपने घर पे बुलाने को. हम लोग रविवार को मिले और हमें एक कमरे में अकेला छोड़ कर उससके सहेली बाहर चली गई.
सुधा ने उस दिन लाल रंग का सूट पहना हुआ था उस पर सफ़ेद दुप्पटा जिसमें वो बहुत की सेक्सी लग रही थी. मैंने उससे तुरन्त अपने बाँहों में ले लिया और उसे किस करने लगा. किस करते करते मेरा एक हाथ उसकी चुचियों को मसल रहा था। अभी छोटी थी लेकिन बहुत हार्ड और मस्त थी. मैंने उससे कपड़े उतारने के लिए कहा तो वो शरमाने लगी.
फिर मैंने उसके ऊपर के कपड़े को उतार दिया और देखा उसने काले रंग की ब्रा पहनी हुई है। गज़ब की क़यामत लग रही थी वो.. फिर सलवार भी उतार दी, उसने नीचे कुछ नहीं पहना था और उसके चूत पे एक बाल भी नही था। फ़िर मैं उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा। वो आ आआ आह ह्ह्ह्ह्ह्अह्ह्ह करके सेक्सी आवाज़ निकलने लगी और मेरी पैन्ट के ऊपर से मेरे लण्ड को पकड़ने लगी। मैंने अपनी पैन्ट और अंडरवीअर उतार कर लण्ड उसके हाथों में दे दिया. फिर वो मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी.
मैंने उसे मेरे लण्ड को मुंह में लेने के लिए कहा तो वो मना करने लगी और कहा कि मुझे उलटी हो जायेगी. कमरे में एक फ्रीज रखा था, जिसे खोला तो देखा कि उसमें जैम रखा था। मैंने सुधा से जैम लण्ड पे लगाने के लए कहा तो उससे उसने प्यार से लगा दिया। फिर मैंने उससे उसे चाटने के लिए कहा, फिर वो मज़े से उससे चाटने लगी और उससे बहुत मज़ा आने लगा। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था. मैंने फिर उसको लिटा कर उसकी चूत चाटनी शुरू की तो वो फिर आवाज़ निकलने लगी. फिर उसने लंड को चूत में डालने के लिए कहा.
चोदने का यह मेरा पहला मौका था लकिन मैं बहुत कांफिडेंट था क्योंकि मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म देखी थी और गरमा गरम कहानियों की किताब भी पढ़ी थी। मैंने उसकी चूत पे लण्ड को रखा लेकिन वो अन्दर जा ही नहीं रहा था, बहुत कड़ी चूत थी. मैंने उसपे तेल लगाया फिर रखा तो वो थोड़ा अन्दर गया वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी और हटने के लिए कहने लगी।
मैंने उसे समझाया, तब वो फिर तैयार हुई। फिर मैंने उसकी चूत पे लण्ड रख कर धक्का मारा तो आधा अन्दर गया। क्या गज़ब टाइट चूत थी, वो चिल्लाने लगी पर मैं कहां मानने वाला था और एक बार मैंने धक्का मारा और लण्ड को पूरा अन्दर घुसा दिया। वो दर्द के मारे रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और उसकी चुचियों को चूसने लगा जिससे उससे मज़ा आने लगा. कुछ देर बाद वो अपनी गांड को उठाने लगी। तब मैंने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और लगभग १५ मिनट बाद झड़ गया. लण्ड को बाहर निकाला तो देखा कि चादर पे खून पड़ा है। जिसे देख कर हम दोनों डर गये.
तभी देखा कि दरवाज़ा धड़ाक से खुल गया और उसकी सहेली कमरे के अन्दर आ गई. शेष आगे की कहानी में. मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताएं। Sex Stories
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