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Massage Girl in Longleng: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Longleng who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Longleng that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Longleng massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Longleng who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Longleng massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Longleng massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Longleng who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Longleng employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Longleng helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Longleng

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Longleng at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

(Saasu Maa Ki Pyas) Sex stories

मेरे दोस्तो Sex stories ,मैं मुंबई से हूं और मेरा नाम राजेश है। मैं अपनी सासू मां के साथ बीता एक सेक्स का सच्चा हादसा आपके साथ बांटना चाहता हूं।
मेरी शादी एक वर्ष पहले ही हुयी थी। मैं एक उनतीस वर्ष का सुन्दर और सेक्सी लड़का हूँ।

मेरी शादी एक आठरह वर्षीय लड़की के साथ हुयी है और वो बहुत ही खूबसूरत है। उसकी मां भी उतनी ही सुन्दर व सेक्सी है। उस समय मेरी सासू मां की उम्र पैंतीस वर्ष की थी और उनका भी विवाह मात्र सोलह साल की उम्र में ही हो गया था। उन्हे कोई नहीं कह सकता था कि वे पैंतीस साल की है, वे तो देखने में चौबीस-पच्चीस साल की लगती थी। वो एक विधवा थी, उनके पति दो वर्ष पूर्व ही चल बसे थे।

तीन जुलाई 2003 को मैं और मेरी पत्नी मेरे ससुराल को गये। वहां पर मेरी सास हमारा इन्तज़ार कर रही थी। उन्हें देख कर मैं बहुत खुश हुआ।

मैंने कहा- कैसी हैं सासू मां?
वो बोली- ठीक हूं बेटा।
मैंने मुस्करा कर कहा- आपकी उम्र और मेरी उम्र में कोई ज्यादा फ़र्क नहीं है।
सास ने जवाब दिया- तो क्या हुआ रिश्ते में तो तुम मेरे दामाद लगते हो।

मैंने कहा- हाँ, दुर्भाग्य से मुझे पैदा होने में थोड़ी देर हो गयी वर्ना मै तो आपसे ही शादी करता!

ये सुनते ही वो शर्मायी और कहने लगी- ठीक है बातें तो होती ही रहेगी, तुम लोग जरा फ़्रेश हो जाओ.

हम लोग वहां से बाथरूम फ़्रेश होने के लिये चले गये।

फिर सबने साथ में डिनर लिया। फिर मैं और मेरी पत्नी बेड रूम में चले आये। बेड रूम में एक खिड़की भी थी जो मेरी सासू मां के कमरे में खुलती थी।
थोड़ी देर मैंनें और मेरी पत्नी ने आराम किया। रात करीब एक बजे मेरी नींद खुल गयी और मैं अपनी पत्नी के कपड़े उतारने लगा। मेरी पत्नी जाग गयी और कहने लगी- आज नही, मुझे नींद आ रही है..

मैंने कहा- तुम सो जाओ और मुझे अपना काम करने दो.
फिर मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिये। वो मुझे बार बार रोक रही थी।

इस तरह हमारी तकरार से सासू मां भी जाग गयी। उन्होंने धीरे से हमारी खिड़की खोली और अन्दर हमें देखने लगी। मैंने अपना काम जारी रखा और और अपनी पत्नी को चूमने लगा।

पहले उसके नाजुक होंठ पर किस किया, फिर उसके मादक चूचियों पर और फिर उसकी रस भरी चूत पर्। इतने भर से मेरी पत्नी अब मूड में आ चुकी थी और फिर उसने मेरे ऊपर के सारे कपड़े उतार दिये।

हम दोनो एक दूसरे के जिस्म पर चूमा चाटी करते रहे और फिर मैंने अपना पेण्ट खोला और अपना आठ इंच से भी लम्बा लण्ड निकाला। ये सब मेरी सासू मां देख रही थी। मैंने खिड़की पर चुपके से देखा वो वहीं पर खड़ी थी। मुझे देख कर वो थोड़ा सा पीछे हट

गयी। मैंने लण्ड को पत्नी की चूत में धकेल दिया और फिर जोरदार धक्के मारने आरम्भ कर दिये। मेरी पत्नी भी बहुत आनन्दित होने लगी थी।

वो आआह्हह… ऊओह्ह… ऊम्मम… की आवाजे निकाल रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। वो सफ़ेद वीर्य से भरा हुआ था। मेरी पत्नी ने जल्दी से मेरा लण्ड अपने मुख में ले लिया और मस्त हो कर उसे चूसने लगी।

ये सब देख कर मेरी सासू मां के मुख से सीत्कार सी आवाज निकल गयी। मैंने उनकी आवाज को सुन लिया था। वो बहुत बेचैन हो गयी थी। मैंने और मेरी पत्नी ने कुछ देर बाद कपड़े पहन लिये थे।

कुछ देर बाद मेरी पत्नी सो चुकी थी। मैं अपनी पेण्ट पहन कर कमरे से बाहर निकला और बालकॉनी में आ कर खड़ा हो गया। मैंने कमीज नहीं पहन रखी थी और अपनी ही धुन में गुनगुना रहा था।

अचानक मुझे पीछे से किसी ने पकड़ लिया। इसके पहले कि मैं पलटता वो मुझसे लिपट गयी। मैंने समझा कि मेरी पत्नी है। लेकिन कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उसके जिस्म से बहुत मधुर सी सुगन्ध आ रही थी जो मैंने अपनी पत्नी के जिस्म से कभी महसूस नहीं की थी। मैं परेशान था कि कौन है जो मुझसे आकर ऐसी लिपट गयी है।

मैं पलट कर उसका चेहरा नहीं देख सकता था। फिर उसके कांपते हाथ मेरी पेण्ट की जिप की तरफ़ बढे और मेरे लण्ड को पकड़ कर जोर जोर से सिसकते हुये दबाने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। पर मुझे अभी तक पता नहीं था कि ये कौन है।

मैंने उसके हाथ को अपने लण्ड से हटाया तो देख कर दंग रह गया और मेरी आंखे खुली की खुली रह गयी। वो और कोई नहीं मेरी सासू मां थी।

मुझे देख कर वो कहने लगी- तुम्ही ने तो कहा था कि हमारी उम्र में कोई फ़र्क नहीं है और अगर तुम जल्दी पैदा हो जाते तो मुझसे ही शादी करते। अब समझ लो ना तुम जल्दी पैदा हो गये हो’

इसके पहले मैं कुछ कह सकूं सासू मां के मुख से फिर आवाज निकली- देखो मैं एक जवान विधवा हूं, मैं अपने पति के बिना रह रही हूं, जो कि बहुत मुश्किल काम है। तुम मेरी इस मुश्किल को दूर कर सकते हो, मेरी इस बेचैनी को कम कर सकते हो। मेरी जिंदंगी रंगीन बना सकते हो.

ये कहते हुये वो मुझे बेताहाशा चूमने लगी और मेरे हाथो को अपने कसे हुये उभारो पर यानि चूंचियों पर रख दिया। सासू मां का सीना दबते ही उनके मुख से एक मद भरी सिसकारी निकल पड़ी।

इसके बाद क्या हुआ वो बहुत उत्तेजक और दिलकश Sex stories है। लेकिन आपको कुछ और इन्तज़ार करना होगा।

प्रेषक : अमन Hindi Sex Stories

मेरा नाम अमन Hindi Sex Stories है। अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ते-2 मैंने सोचा कि मैं भी पाठकों के समक्ष अपनी कहानी रखता हूँ।

यह मेरी सच्ची कहानी है। कंचन जिसे मैं पिछले चार साल से जानता हूँ, मेरे साथ ही मेरे ऑफिस में काम करती है। मैं ऑफिस का प्रबन्धन करता हूँ और वो मेरी सहयोगी है। हम दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह जानते हैं और गहरे दोस्त हैं। हम एक दूसरे के साथ अपनी हर एक बात शेयर करते हैं। मैं शुरू से ही उसे मन ही मन चाहता था पर वो किसी और को चाहती थी। यह बात उसने मुझे बताई थी, इसलिए मैं उसे कभी भी नहीं बता पाया कि मैं उसे चाहता हूँ।

खैर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उसकी शादी उस लड़के से न हो कर किसी और के साथ हो गई। जिसके साथ वो खुश तो थी पर सुखी नहीं थी।

यह तो था कहानी का एक हिस्सा ! अब चलते हैं असली कहानी की तरफ !

कंचन जो एक खूबसूरत और भरे हुए बदन वाली लड़की है जिसे देख कर कोई भी उसकी तरफ आकर्षित हो जाए। शादी के बाद वो कुछ परेशान सी रहती थी और मुझे कुछ बता भी नहीं पा रही थी क्योंकि शादी के बाद मैंने उससे कुछ दूरी सी बना ली थी। हम बात तो करते थे पर इतना खुल कर नहीं कर पाते थे।

शायद मैं सोचता था कि मेरी वजह से उसकी ज़िन्दगी में कोई समस्या न हो।

पर एक दिन ऑफिस में शाम को जब सारे चले गए तो मैंने उसको बुलाया और पूछा कि क्या कोई समस्या है? आजकल तुम कुछ परेशान सी रहती हो !

इतना कहते ही वो रोने लगी और कहा- आप को आज समय मिला है मेरा हाल पूछने का?

मैंने उसे गले लगाया और उसको चुप कराने लगा। उसने बताया कि उसके पति उसके साथ सेक्स तो करते हैं पर वो इतनी जल्दी और इस तरह से करते हैं कि मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता और मैं उनका साथ नहीं दे पाती और उनको बीच में ही रोक देती हूँ। क्या करुँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

मैंने उसे कहा- क्या मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ?

तो उसने हाँ कह दिया। फिर मैंने उसके आंसू पौंछ कर उसको चुप कराया और उसको कहा- पुरानी परेशानी भूल जाओ। नई के लिए तैयार हो जाओ।

इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए उसने विरोध करने की कोशिश की पर मैंने उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको किस करने लग गया।

मैंने महसूस किया कि उसके बदन में जैसे सनसनी सी दौड़ गई हो। अब वो भी मेरा साथ देने लगी। कुछ देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने धीरे से उसके स्तन पकड़ लिए और उनको कमीज के ऊपर से ही दबाने लग गया।

वो मुझे और कस के चूमने लगी। कुछ देर बाद मैंने उसे कहा- चलो दूसरे कमरे में चलते हैं।

फिर हम दूसरे कमरे में चले गए, वहाँ पर वो एक मेज के सहारे खड़ी हो गई। हम फिर से एक दूसरे को चूमने लगे। धीरे-2 मैंने उसकी कमीज में नीचे से हाथ डाल दिए और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तन पकड़ के दबाने लगा।

वो सिसकारने लग पड़ी। फिर मैंने धीरे से उसकी ब्रा खोल दी और उसके बड़े-बड़े वक्ष मेरे हाथों में आ गए। इतने बड़े स्तन पकड़ के दबाने बहुत मजा आ रहा था।

वो भी मजा ले कर आवाज करने लगी और कहने लगी- धीरे करो ! कुछ हो रहा है।

मैंने उसे कमीज खोलने को कहा। जैसे उसने कमीज उतारी, वाह ! क्या नजारा था ! उसके बड़े-बड़े स्तन मेरे सामने थे। मैं एक को पकड़ के चूसने लगा और दूसरे को दबाता रहा।

अब वो धीरे-धीरे गर्म होने लगी थी। उसका हाथ मेरे लण्ड की तरफ जाने लगा। उसने मेरी जिप खोल दी और मेरे लण्ड को हाथ से पकड़ लिया और उसको दबाने और आगे पीछे करने लगी।

मैं भी उसके स्तनों को चूसता और दबाता रहा। फिर मैं एक हाथ से उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा अब वो और गरर्म हो गई थी उसके हाथ की हरकतें बढ़ रही थी और वो तेजी से मेरा लण्ड आगे पीछे कर रही थी।

मैंने धीरे से उसकी सलवार खोल दी और उसकी पैंटी भी उतार दी। फिर मैं उसकी चूत को सहलाने लगा। वो और ज्यादा सिसकारने लगी और कहने लगी- धीरे करो ! कुछ हो रहा है।

मैंने उसे पूछा- तुम तो कहती हो कि मुझे कुछ भी महसूस नहीं होता पर अभी तो तुम को कुछ कुछ हो रहा है।

वो बोली- मेरे पति ऐसा कुछ नहीं करते, वो तो सीधा ही डाल देते हैं और करने लग जाते हैं।

फिर मैंने उसे पूछा- क्या मैं हद से आगे तो नहीं जा रहा हूँ?

तो उसने न में जवाब दिया।

फिर मैंने उसे सीधे लिटा दिया और टाँगे खुली कर के उसकी चूत पर चूम लिया। उसकी चूत एकदम गुलाबी रंग की थी और उससे बहुत ही भीनी-2 महक आ रही थी। मैं उसकी चूत को चूमने लगा और वो मजा लेने लगी।

वो अब पूरी गर्म हो गई थी और उसके मुँह से आवाजें निकलने लगी थी। मैं उसकी चूत को चूमते जा रहा था और अपनी जीभ उसकी चूत में डाल रहा था, यह सब अब उससे सहन नहीं हो रहा था।

वो एकदम से उठी और मेरे लण्ड को पकड़ कर अपने मुँह में डाल लिया और उसको चूसने लगी।

फिर मैंने उसको पूछा- क्या मैं आगे भी कुछ कर सकता हूँ?

तो उसने खुद ही मेरा लण्ड अपनी चूत पर लगा दिया। उसकी चूत पूरी गीली हो गई थी, मैंने लण्ड को धीरे से धक्का दिया तो वो थोड़ा सा उसकी चूत में चला गया। उसके मुँह से आह निकल गई। वो नीचे से जोर लगा के लण्ड को अन्दर डालने में मेरी मदद करने लगी।

दो तीन धक्कों में ही पूरा लण्ड अन्दर चला गया। मैं धीरे-2 लण्ड अन्दर बाहर करने लगा और उसके वक्ष को भी दबाने लगा।

वो पूरा मजा लेने लगी और कहने लगी- ऐसा मुझे कभी भी महसूस नहीं हुआ ! सच बहुत अच्छा लग रहा है।

हम दोनों बातें भी करते रहे और अपना काम भी ! उसने मेरा पूरा साथ दिया। वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर पूरा लण्ड अन्दर लेने लगी। मैंने धीरे-2 अपनी स्पीड तेज कर दी। वो भी मजा लेती हुई मेरा पूरा साथ देने लगी।

उसने कहा- जल्दी करो ! अब मैं झड़ने वाली हूँ।

मैंने भी अपना काम जारी रखते हुए पूछा- कहाँ निकालूँ?

उसने कहा- मेरे अन्दर ही निकालो ! मैं दवाई ले लूंगी।

हम दोनों एक साथ ही झड़े और कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे। उसने मुझे कस के गले लगा लिया और रोने लगी। मैंने उसे चुप कराया और हम दोनों ने एक दूसरे के चूत और लण्ड को साफ़ कर के अपने कपड़े पहन लिए।

दोस्तो, वो एक कमजोर पल था। जो हम दोनों को ख़ुशी के कुछ पल दे गया।

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(Callgirl Ka Pahla Call) - Antarvasna (एक प्रतिष्ठित बिजनेस वुमन, जो आज 35 वर्ष की है, के मेल पर आधारित)

मैंने अभी अभी 18वें वर्ष में कदम रखा है। antarvasna इतने सालों से मैं घर में माँ को ही देखते आ रही हूँ। मेर एक छोटा भाई भी है तो अभी सिर्फ़ 10 वर्ष का ही है। मेरी माँ की उमर लगभग 40 वर्ष की है। यूँ तो दिखने में वो आकर्षक लगती हैं, पर शायद अधिक काम की वजह से वो थकी हुई रहती है। मेरे पापा का देहान्त हुए 6 साल हो चुके थे। तब से मम्मी ही घर को सम्भालती आ रही है।

मुझे पता था कि माँ एक काल गर्ल के रूप में काम करती थी। अधिकतर वो जीन्स और शर्ट में रहती थी। और अपने आप को एक कम उम्र की लड़की बताया करती थी। पर अब लोगों की नजर मुझ पर भी पड़ने लग गई थी। उभरती जवानी की खुशबू फ़ैलने लगी थी। मैं भी अपनी माँ की तरह सुन्दर थी और मेरे नाक नक्शे और कट्स भी अच्छे थे। मैं अब कॉलेज जाने लगी थी। मुझे सेक्स का ज्ञान तो पहले से ही था। अब मुझे सहेलियों के द्वारा चुदाने और गाण्ड मरवाने की कहानियाँ भी सुनने को मिल जाती थी। चुदाने के बाद लड़कियाँ आई-पिल्स को भी बहुत काम में लाती थी। मेरे दिल में भी कभी कभी सेक्स की भावना जागृत हो उठती थी। पर मुझे इससे डर भी लगता था कि लड़के ना जाने क्या करते होंगे।

एक बार माँ रात को घर नहीं आई तो मैं घबरा उठी। मैंने बहुत बार मोबाईल पर सम्पर्क करने की कोशिश की पर फोन का स्विच ऑफ़ था। माँ के कॉल गर्ल होने के कारण, मैंने डर के मारे आस पास किसी की मदद भी नहीं ली। मैं आस पास धीरे धीरे सभी से पूछती रही, पर निराशा ही हाथ लगी।

फिर एक दिन एक पुलिस वाला घर आया और मुझे थाने में एक लाश की पहचान करनी थी। होस्पिटल में शव-गृह में एक बर्फ़ में रखी लाश को मैं पहचान गई। वो मम्मी ही थी, उनकी हत्या हुई थी। मुझे ये तो पता नहीं था कि क्या करना चहिये था पर डर के मारे मैंने मना कर दिया कि इसे मैं नहीं पहचानती हूँ। पर घर आ कर मैं बहुत रोई।

दिन ऐसे ही गुजरते गये, इस घटना को एक साल बीत गया। मेरा छोटा भाई भी बीमार रहने लगा था। अब मुझे पैसों से परेशानी आने लगी थी। हमें कभी खाना नसीब होता था कभी तो भूखे ही रहना पड़ता था।
माँ के मरने का प्रमाण पत्र मेरे पास नहीं था तो उनका पैसा भी मेरे काम नहीं आ सका। गरीबी मेरे सिर पर आ चुकी थी, मैंने एक घर में बर्तन और झाड़ू पोंछा का काम शुरु कर दिया था।

इस दिनों कॉलेज में मेरी एक लड़के कुलदीप से पहचान हो गई थी। बातों बातों में मेरे मुख से निकल गया कि इस बार पढ़ाई जैसे तैसे करके परीक्षा दे दूंगी पर आगे से तो ईशवर ही मालिक है।
वो लड़का एक बिजनेस मेन का लड़का था, शायद वो मुझे चाहता था, उसने अपने पापा से कह कर मुझे अपनी फ़ैक्टरी में लगवा दिया था।

अब मेरी मुश्किलें थोड़ी कम हो गई थी। उसके पापा रमेश चंद की बुरी नजरें मुझ पर पड़ चुकी थी।

एक दिन उन्होंने मुझे अपने दफ़्तर में बुला कर कहा कि यदि तुम अधिक पैसा कमाना चाहती हो तो तुम अपनी माँ का धन्धा अपना लो, मालामाल हो जाओगी। मैं घबरा उठी कि ये सब कैसे जानते हैं। पर जल्दी ही पता चल गया कि वो कॉल-गर्ल के शौकीन थे। शायद मेरी माँ उनके पास जाया करती थी। उनके पास दूसरी लड़कियाँ भी आती थी जिनके साथ वो मौज मस्ती करते थे।

एक बार उसने मुझे एक रात के लिये 1000 रु ऑफ़र किये। मैं चुप ही रही। पर पैसों की तंगी और पढ़ाई को देखते हुए एक बार मैंने यह निश्चय कर लिया कि जब मेरी माँ यह काम कर सकती थी तो मैं क्यों नहीं कर सकती हूँ। एक दिन मैंने उन्हें हिम्मत करके हाँ कर दी।

उन्होंने मुझे नई जीन्स और टॉप दिलाया। कई तरह की खुशबू और तरह तरह के कॉस्मेटिक्स दिलाये और रात को बुला लिया। यह वो घर नहीं था जहाँ वो रहते थे, इसे वो फ़ार्म हाऊस कहते थे। पूरा खाली था सिर्फ़ एक बड़ी उमर की औरत वहाँ काम करती थी। मैंने जिंदगी में पहली बार इतना मंहगा और स्वादिष्ट खाना खाया था।

बहुत देर तक तो वो मेरे से बातें करते रहे, फिर अपना फ़ार्म हाऊस घुमाया और अन्त में मुझे अपना बेड रूम दिखाया जहा मुझे उसके साथ खेल खेलना था।
खूबसूरत सा बेड रूम, नरम गद्दे, एयर कन्डीशन, कमरे में शानदार खुशबू, मन को खुश करने को काफ़ी था। उसे देख कर मैं अपने आप को बहुत छोटा समझने लगी।

उन्होंने मुझे कहा कि मैं अब आराम करूं, उन्हें कुछ काम करना है।

मैं बिस्तर पर लेटी तो जैसे स्वर्ग में आ गई। बदन को सहलाता नर्म गद्दा, और भीनी भीनी खुशबू ने मुझे कब सुला दिया मुझे पता ही नहीं चला।
पता नहीं कब, रात को मेरे बदन के अन्दर उनका हाथ रेंगने लगा। नींद में मुझे सपना जैसा लगा। मेरे बोबे में मिठास सी भरने लगी। इतना प्यारा सा अह्सास हुआ कि मैंने आंखे बन्द ही रहने दी और आनन्द लेने लगी।

मेरा टॉप ऊँचा हो गया, मेरी छातियाँ नंगी हो गई थी। मेरे निप्पल को होंठों से दबा कर चूसने लगा। मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने धीरे से अपनी आँखें खोली तो वो रमेश ही था। उसका नंगा बदन मेरे सामने था।
रमेश सेक्स के मामले में एक अनुभवी इन्सान था। उसने मुझे आहिस्ता से उत्तेजित किया और जब मैं वासना से भर गई तो उन्होंने मेरे कपड़े एक एक करके उतार दिये। मुझे उनका लण्ड बहुत प्यारा सा लगने लगा। मैं बार बार उसे पकड़ लेती थी और अपनी तरफ़ खींचती थी।

वो मेरे निप्पल को अपनी अंगुलियों से धीरे धीरे मसलने लगे। एक तीखा सा मजा आने लगा। मेरे उरोज को भी वो सहलाने और मसलने लगा। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी, चूत गीली हो उठी, धीरे धीरे चिकना रस छोड़ने लगी।
उसका बलिष्ठ शरीर मेरे जिस्म से रगड़ खा कर गुलाबी सा मीठा सा मजा दे रहा था। मेरे अंग अंग को मसल कर वो मस्त किये दे रहा था।

मैं चुदने के लिये बिल्कुल तैयार थी। अब महसूस हो रहा था कि वो मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दे और बस अब चोद दे। बिना इस बात को जाने कि ये मेरी पहली चुदाई होगी और मेरी झिल्ली फ़ट जायेगी। चूत में एक अन्दर वासना युक्त मिठास भरने लगी थी। मुझे पहली बार ऐसे अनोखे आनन्द का मजा आ रहा था। सोचा कि लोग इसे बुरा क्यो कहते हैं? जिस काम से इन्सान मस्त हो जाये, असीम सुख मिले, उससे परहेज़ क्यूँ?

तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुख के पास लाकर होंठों से सटा दिया। यह मेरा नया अनुभव था।
‘यह क्या कर रहे हो?’ एकाएक मुझे घिन सी आई।
‘इसे किस कर लो!’ रमेश ने कहा।
मैंने मजबूरी में उसे किस कर लिया।
‘ऐसे नहीं, मुँह में ले कर चूसो!’ उसने फिर से अपना मोटा सा लण्ड मेरे होंठों से छुला दिया।

‘हटो, ये नहीं करूंगी।’ मैंने घिन से अपना चेहरा घुमा दिया।
वो थोड़ा सा निराश हो गया।

मैंने ऐसा कभी नहीं किया था सो मुझे इस काम से और भी घिन आने लगी थी। मेरा सोचना था कि भला पेशाब करने की जगह को कौन मुँह में ले सकता है?

उसने कुछ नहीं कहा पर उसका चेहरा अब मेरी चूत पर झुक गया था और मेरी टांगें चौड़ी करके मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया।
‘अरे ये क्या कर रहे हो,… ये तो पेशाब की जगह है छी:, हटो, जाने क्या कर रहे हो?’ मुझे उसकी ये हरकत बड़ी अजीब सी और घिनोनी लग रही थी कि ये पेशाब करने की जगह को ही क्यों मुख से लगा रहा है। बस लण्ड घुसेड़ना हो तो घुसेड़ दो, दोनों ही पेशाब करने जगह ही तो हैं…

‘अब तुम मुझे कुछ करने दोगी या नहीं…!!’ वो कुछ नाराज़ से लगे।
‘तो करो ना, चालू करो ना वो, यहाँ वहाँ गन्दी जगह मुँह मत लगाओ।’ मैंने थोड़ा झिझकते हुए कहा।
रमेश मुस्करा उठा, और मेरे ऊपर चढ़ गया।

‘क्या पहला मौका है?’ रमेश मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया, उसका लण्ड तन्ना रहा था.
मुझे भी चुदाई का आनन्द पहली बार मिलने वाला था। मेरी चूत की दरारों में उसने अपना लण्ड ऊपर नीचे घिसा। मेरा दाना फ़ड़क उठा, एक मीठी सी टीस उठी।
‘हाँ, यह पहला मौका है, पर जल्दी करो ना, घुसा डालो ना…!’
‘मजा आ रहा है ना?’
‘जी हाँ, बहुत मजा आ रहा है!’ मैंने हाँ में सर हिला दिया।

मुझे चुदाने के लिये उन्होंने एक हज़ार रुपये भी दिये थे, और स्वर्ग सा आनन्द भी मिल रहा था, सो मैंने अपनी टांगें ऊपर कर ली और अपनी चूत खोल दी।
‘तुम्हें डर नहीं लगता है ऐसे?’ मेरे होंठों को चूमते हुए बोले।

‘डर कैसा, आप तो मेरे दोस्त के पापा हो ना, आपके पास तो मैं बहुत सुरक्षित हूँ।’ मैंने भोलेपन से कहा।
‘तुम्हारा कुंवारापन चला जायेगा, फिर मैं जो करने वाला हूँ उससे सुरक्षित कैसे रहोगी?’
‘मैं पैसे के लिये यहाँ वहाँ भीख मांगती हूँ, मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ेगा, अब मैं फ़ीस दे सकूंगी और परीक्षा दे सकूंगी, मेरी माँ नहीं है ना अब… घर में छोटा भाई भी है, भूख से बीमार रहता है। मुझे तो ये सब करना ही पड़ेगा ना। मेरी माँ भी यही करती थी ना।’

रमेश ने मुझे एक गहरी नजर से देखा, उनके चेहरे पर शर्मिन्दगी सी दिखी। उनका फूला हुआ लण्ड सिकुड़ता सा लगा। मैंने अपनी चूत का जोर उनके लण्ड पर लगाया, पर शायद वो मुरझा कर लटक गया था। मुझे लगा शायद ये कर नहीं पाते होंगे। पर ऐसा नहीं था।

‘तुम मेरे पास कैसे सुरक्षित हो, मुझे समझ में नहीं आया…!’ रमेश कुछ असमंजस में दिखा।
‘संदीप कहता है, आप बहुत अच्छे है, मुझे पता है आप ये सब करने के बाद मुझे पैसा देंगे।’ मैंने अपनी जरूरतें उसे बताई।
‘हाँ वो तो दूंगा ही!’ वो हैरान होता जा रहा था।

‘बस, तो मेरी कॉलेज की फ़ीस हो जायेगी, मेरे भाई को भी आगे पढ़ाऊँगी.’ मैंने सहजता से कहा।

वो बिस्तर छोड़ कर उठ खड़े हुए, कपड़े पहनते हुए बोले ‘उठो, और कपड़े पहन लो…! बस बहुत मजा कर लिया!’
मैं घबरा गई, और उनके पांव पकड़ लिये- नहीं नहीं जी, ये क्या… लाओ मैं चूस लेती हूँ, आप चाहे जो करो… पर प्लीज जाओ मत!’
‘दुनिया में यही सब कुछ नहीं है, बस अब नहीं… तुम इस काम के लिये फ़िट नहीं हो!’

मुझे अपने 1000 रुपए जाते हुए लगे। मेरी नजरों के सामने वही भूख और मजबूरियाँ नजर आने लगी। मुझे फिर वही अन्धेरे डराने लगे। मन में सोचा अरे मैंने यह क्या कर दिया… अब क्या होगा। इतना क्यूँ बोला मैंने… मैं रूआंसी हो उठी।
रमेश ने अपने पास बुलाया और मेरा टॉप मुझे पहना दिया, मेरी जीन्स उठा कर कहा- चलो पहनो इसे!

चेहरा उदास हो गया, जैसे मेरी जान निकल गई हो, मैंने जीन्स पहन ली और फ़फ़क के रो पड़ी ‘अब मैं परीक्षा नहीं दे पाऊँगी…’ रोते हुये हिचकी बंध गई।

रमेश ने मुझे गले से लगा लिया। उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। शायद वो खुद पर शर्मिन्दा हो रहे थे।
‘मुझे माफ़ कर दो… इस उमर में भी मैं जाने क्या करता रहा हूँ, तुमने तो मेरी आंखें खोल दी… क्या मैं तुम्हें कॉल गर्ल बनाने जा रहा था।’ रमेश के चेहरे पर से वासना गायब हो चुकी थी। हाँ, मुख पर एक उजाला सा जरूर नजर आ रहा था। मैं उन्हें देखती रह गई।

उनकी छाती पर सर रखे मैंने विनती की- मुझे आप फ़ीस जमा कराने लायक पैसे दे दें तो मेरी तन्ख्वाह में से काट लेना, प्लीज… नहीं तो हमें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जायेगा।

‘मुझे माफ़ कर दो, अपने सीने में ये राज दबा लो कि मैंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया था, और मुझे नहीं पता कि मेरा तुम से क्या रिश्ता रहेगा, पर तुम मेरी दोस्त बन कर रहो, चाहे बेटी बन कर, चाहे जो रिश्ता बना लो, पर अब से तुम मेरे साथ ही रहोगी, मेरी फ़ैक्टरी में ऑफ़िस का सारा काम तुम ही सम्हालना… फिर से ध्यान रखना ये बात अपने दिल में ही रखना!’

‘जी… पर आप तो… आप अब मेरे साथ कुछ भी नहीं करेंगे… पर मुझे तो कुछ करने की लग रही है!’

‘अब चुप भी हो जाओ, ये उमर ही ऐसी होती है, शादी के बाद तो रोज ही करना… मुझे अब ये नहीं करना है बस!’
‘अंकल जी… मुझे नहीं पता है ये सब… पर मैं क्या कहूँ…’
‘कुछ नहीं कहो बस, मुझे मजबूरी, मासूमियत का फ़ायदा नहीं उठाना…!’ कहते हुए वो दूसरे कमरे में चले गये।

मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। ये सब कैसे हो गया, ये मेरे पर अचानक इतने मेहरबान कैसे हो गये। मेरी मजबूरी और सच्चाई जान कर क्या उनका दिल पिघल गया था। क्या सच में मेरे अच्छे दिन आने वाले थे।

मैं धीरे धीरे उसके कमरे में आ गई, वो खिड़की पर खड़े हुए थे, मैंने उनकी पीठ पर हाथ लगाया, जैसे उन्हें झटका लगा। तुरन्त उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा। उनकी आंखों के आंसू छिप नहीं सके। मैंने धीरे से अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया।

‘अंकल मुझे माफ़ कर देना, पैसों के लालच में मैं बहक गई थी, आप नहीं होते तो जाने क्या हो जाता, मेरी तो इज़्ज़त ही लुट जाती…! फिर मेरी शादी भी नहीं होती ना!’
रमेश ने मेरे सर में चूम लिया और अपनी बांहों में भर लिया।

मुझे भी शायद इसी प्यार की तलाश थी जिसे मैं वासना में खोज रही थी। मेरे दिल में ठण्डक आने लगी। सुकून सा आ गया। ऐसा प्यार मेरी आत्मा तक को छू रहा था।

रमेश ने मुझे देखा फिर अपनी पत्नी की तस्वीर को देखा और सर झुका कर मुझसे मुस्करा कर कहा- गुड नाईट, अब सो जाओ… मुझे अब इनसे भी माफ़ी मांगनी है।
कह कर उन्होंने अपनी पत्नी की तस्वीर की ओर देखा, फिर अपने बिस्तर की शरण ली और मुँह तक चादर ओढ़ ली।

मैंने कमरे की बत्ती बुझा दी और बाहर जाने लगी। फिर जाने क्या ख्याल आया, मेरे मन में उनके लिये प्यार उमड़ पड़ा। मैं भाग कर गई और उनकी चादर के अन्दर घुस गई और उनसे लिपट गई। मैं भावना में बह गई थी। उनके मुख पर चुम्बनों की बौछार कर दी और रो पड़ी। मुझे प्यार से उन्होंने एक तरफ़ लेटाया और मैं उनसे लिपट कर सो गई। मेरे प्यासे दिल को माँ-बाप जैसा प्यार मिल गया था। शायद बहुत दिनों बाद इतनी गहरी नींद, सुकून भरी नींद, प्यार भरी नींद आई थी।

सुबह उठी तो रमेश अंकल ने फ़ार्म हाउस की चाबी मुझे दे दी और अपने घर चले गये। मुझे वो सुबह एक नई सुबह लगी, शायद एक नई जिन्दगी की शुरुआत थी… तभी मुझे अपना भाई याद आया कि वो मेरी राह ताक रहा होगा और मैं अपने घर की ओर जल्दी जल्दी चल पड़ी! Antarvasna

(Naukrani Ki Bur Me Lund)-Hindi sex stories

Hindi sex stories दोस्तो, लड़की को सिड्यूस (कामोत्तेजित) करने में बड़ा मजा आता है. बस उसको कामोत्तेजित करने का तरीका ठीक होना चाहिए.

मैंने अपने घर की नौकरानी को ऐसे ही कामोत्तेजित करके खूब चोदा. आज मैं आप सब को वही कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मेरा नाम है अजय. मेरे घर में उलूल-जुलूल नौकरानियों के बाद एक दिन बहुत ही सुन्दर नौकरानी काम करने के लिए आई. वह बहुत ही खूबसूरत थी. सुन्दर होने के साथ-साथ वह सेक्सी भी लग रही थी. उसकी हाइट मीडियम थी, बदन सुडौल था. उसका फीगर 33-26-34 का रहा होगा. वह शादीशुदा भी थी.

उस नौकरानी को देखकर मुझे उसके पति से मन ही मन जलन होना शुरू हो गई थी. उसका पति मुझे बहुत ही किस्मत वाला लग रहा था कि जिसके पास ऐसी सेक्सी बीवी है. मुझे पूरा यकीन था कि वह साला इस सेक्सी नौकरानी को खूब चोदता होगा. उसके बूब्स ऐसे थे कि देखते ही मन करता था बस यहीं पर दबा दो इनको. वह अपनी चूचियों को साड़ी से कितना भी ढकने की कोशिश करती लेकिन उसके बूब्स कहीं न कहीं से बाहर आकर दिखाई देने लगते थे. वह बहुत कोशिश करने के बाद भी अपनी चूचियों के ऊपर की दरार को छिपा नहीं पाती थी. जब मैंने उसकी दरार को तिरछी नजर से देखा तो पता चला कि उसने तो अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी.

शायद हो सकता था कि उसको लगता हो कि ब्रा पर बेकार ही पैसे क्यों खर्च किए जाएं. जब वह ठुमकती हुई चलती थी तो उसके चूतड़ हिलते थे और हिलते हुए ऐसे लगते थे जैसे कह रहे हों कि मुझे पकड़ो और दबा दो. अपनी पतली सी साटिन की साड़ी को जब वह चूत के पास से पकड़ कर संभालती हुई चलती थी तो मन करता था कि काश मैं भी इसकी चूत को छू सकूँ. काश मैं इसके मम्मों को दबा सकूँ. काश मैं इसकी चूचियों को चूस सकूँ. साथ ही साथ मेरा बहुत दिल करता था कि मैं इसकी चूत को चूसते हुए जन्नत का मजा ले सकूँ. इसकी चूत में अपना लंड डालकर उसको चोद सकूँ. मेरा लंड भी मानता ही नहीं था.
उसकी चूत में घुसने के लिए मेरा लंड बेकरार रहता था. मगर मैं सोचता था कि मेरा ये सपना पूरा हो तो हो कैसे? वह साली तो मेरी तरफ देखती भी नहीं थी. वह बस अपने काम से ही मतलब रखती थी. काम करने के बाद ठुमकती हुई वापस चली जाती थी. मैंने भी कभी उसको अहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसकी चूत पर है और मैं उसको चोदने के लिए इतना बेताब रहता हूँ. मगर मुझे किसी न किसी तरह उसकी चूत को चोदना ही था. मैंने सोच लिया था कि इसको किसी न किसी तरह गर्म करके ही यह सब संभव हो सकता है.

मगर यह सब मुझे धीरे-धीरे करना होगा. अगर ये नाराज हो गई तो मेरा सारा भांडा फूट जाएगा. कुछ दिन के बाद मैंने उसके साथ बहाने से बातें करना शुरू कर दिया. उसका नाम था किरण. मैंने एक दिन उसको चाय बनाने के लिए कह दिया. जब उसने अपने नर्म हाथों से मुझे चाय पकड़ाई तो मेरा लंड तो जैसे उछल ही गया. मैंने चाय पीते हुए उससे कहा- किरण तुम तो चाय बहुत अच्छी बना लेती हो.
उसने कहा- हां, बाऊजी, चाय तो मैं बना ही लेती हूँ.

उसके बाद मैंने किरण से हर रोज ही चाय बनवाना शुरू कर दिया. फिर एक दिन जब मैं ऑफिस जा रहा था तो मैंने किरण को अपनी शर्ट प्रेस करने के लिए दे दी.
मैंने कहा- तुम तो प्रेस भी अच्छी कर लेती हो.

इस तरह से जब मेरी बीवी मेरे आस-पास नहीं होती थी तो मैं किरण से बातें करना शुरू कर देता था.
मैंने पूछा- किरण, तुम्हारा पति क्या करता है?
वह बोली- एक मिल में काम करता है मेरा आदमी.
मैंने कहा- कितने घंटे की नौकरी होती है उसकी?
उसने कहा- 10-12 घंटे तो लग ही जाते हैं और कई बार तो रात को भी ड्यूटी लगा देते हैं.
मैंने कहा- तुम्हारे बच्चे कितने हैं?
उसने शर्माते हुए जवाब दिया- अभी तो मेरे पास एक लड़की ही है 2 साल की.

मैंने पूछा- तो क्या तुम उसको घर में अकेली ही छोड़कर आ जाती हो?
उसने कहा- नहीं, मेरी एक बूढ़ी सास है. वह उसकी देखभाल कर लेती है.
मैंने पूछा- तुम कितने घरों में काम करती हो?
उसने कहा- साहब, बस एक आपके घर में काम करती हूँ और एक नीचे वाले घर में काम करने जाती हूँ.
मैंने फिर पूछा- तो क्या तुम दोनों का गुजारा हो जाता है?
उसने कहा- साहब हो तो जाता है लेकिन बड़ी मुश्किल से ही काम चल पाता है. मेरा आदमी शराब में बहुत सारे पैसे बर्बाद कर देता है.
अब मेरे काम की बात यहाँ से शुरू हो गई थी.
मैंने किरण से कहा- ठीक है, कोई बात नहीं. अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ.

किरण ने मुझे अजीब सी नजरों से देखा.
उसने कहा- क्या मतलब है आपका?
मैंने कहा- अरे, मेरा मतलब है कि तुम अपने आदमी को मेरे पास ले आओ, मैं उसको समझा दूंगा.
उसने कहा- ठीक है साहब. कहते हुए उसने एक लम्बी और गहरी सांस ली.
इस तरह हम दोनों के बीच ये बातों का सिलसिला काफी दिनों तक चलता रहा और धीरे-धीरे बातों के सहारे मैंने किरण के मन में से उसकी झिझक को कम करने की कोशिश की.

एक दिन मैंने शरारत भरे लहजे में कहा- तुम्हारा आदमी तो पागल ही होगा. इतनी सुंदर बीवी होते हुए भी वह शराब पीता है.
दोस्तो, औरतें काफी समझदार होती हैं. किरण भी मेरा इशारा शायद समझ गई थी लेकिन उसने अपनी नाराजगी का मुझे जरा सा भी अहसास नहीं होने दिया. मुझे भी थोड़ा हिन्ट मिल गया था कि यह भी तैयार हो जाएगी. अगर मुझे मौका मिले इसे दबोचने का तो यह शायद चुदवा भी लेगी.

वो कहते हैं न कि भगवान के घर देर है मगर अंधेर नहीं है. एक दिन मेरे पास भी मौका आ ही गया. रविवार का दिन था. मेरी बीवी एक दिन पहले ही मायके चली गई थी. वह हमारे दोनों बच्चों को भी साथ में लेकर गई थी. मेरे बीवी ने कहा था कि अगर किरण आए तो घर का काम ठीक से करवा लेना. सुबह से ही मेरे मन लड्डू फूटने लगे थे और मेरा लंड फुदकने लगा था. मैं बार-बार किरण के बारे में ही सोच रहा था.

कुछ देर के बाद किरण घर में आ गई. उसने दरवाजा बंद कर दिया और अपने काम पर लग गई. इतने दिनों की बात-चीत के बाद हम दोनों अब आपस में काफी खुल भी गए थे. किरण को मेरे ऊपर भरोसा भी हो गया था. इसलिए शायद उसने मेरे बिना कहे ही दरवाजा बंद कर दिया था. मैंने सोचा कि अगर आज मैंने पहल नहीं की तो यह फिर कभी हाथ नहीं आएगी. बात मेरे हाथ से निकल जाएगी. फिर मैंने सोचा कि पहल मैं करूं कैसे? फिर दिल में ख्याल आया कि पैसे की बात ही कर लेता हूँ.
मैंने कहा- किरण, अगर तुम्हें पैसों की जरूरत हो तो मुझे बता देना. जरा सा भी झिझकना नहीं.
किरण ने कहा- साहब, क्या आप मेरी पगार काटने वाले हैं?

मैंने कहा- अरे नहीं पगली, अगर तुझे अगर कुछ फालतू पैसों की जरूरत हो तो मुझे बता देना. मैं तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूँ. मैं इस बारे में अपनी पत्नी को भी कुछ नहीं बताऊंगा. लेकिन एक वादा तुमको भी करना होगा कि तुम भी इस बारे में मेरे बीवी से कुछ नहीं कहोगी.
इतना कहकर मैं किरण के जवाब का इंतजार करने लगा.
किरण ने कहा- मैं क्यों बताने लगी आपकी बीवी को?

उसके मुंह से यह जवाब सुनकर मैं खुश हो गया. मेरा तीर एकदम सही निशाने पर जाकर लगा था.
मैंने कहा- तुम खुश हो जाओ अब.
वह बोली- हां साहब, इससे मुझे काफी आराम हो जाएगा.
मैंने कहा- किरण, मैंने तुम्हें खुशी दे दी. क्या तुम नहीं चाहती कि मैं भी खुश हो जाऊं? मगर उसके लिए तुमको अपना मुंह बंद रखना होगा.
कहते हुए मैंने किरण के हाथ में पांच सौ रुपये का नोट थमा दिया.

किरण ने पूछा- क्या करना होगा मुझे साहब?
मैंने कहा- पहले तुम अपनी आंखें बंद कर लो. अगर तुमने आंखें खोल दीं तो तुम शर्त हार जाओगी.
मेरे कहने पर किरण ने आंखें बंद कर लीं और मेरे सामने ही खड़ी रही. मैंने देखा कि किरण के गाल लाल हो रहे थे और उसके होंठ कांपने लगे थे.
मैंने फिर कहा- जब तक मैं ना कहूँ तब तुम्हें अपनी आंखें नहीं खोलनी हैं.
वह बोली- ठीक है साहब.

किरण शरमा रही थी और वहीं पर चुपचाप खड़ी हुई थी. उसने अपने दोनों हाथों को अपनी जवान चूत के सामने लाकर बांध रखा था. जैसे उसको छिपाने की कोशिश कर रही हो.
पहले मैंने किरण के माथे पर हल्का सा चुम्बन किया. अभी तक मैंने उसको अपने हाथों से नहीं छुआ था. वह चुपचाप आंखें बंद करके खड़ी हुई थी. फिर मैंने उसकी पलकों पर हल्के से चुम्बन किया. उसकी आंखें अभी भी बंद ही थीं. फिर मैंने आहिस्ता से उसकी आंखों को चूमने के बाद उसके गालों को भी धीरे से चूम लिया. इतनी ही देर में मेरा लंड तन गया था और मेरे कपड़ों के अंदर लोहे की तरह सख्त होकर खड़ा हो गया था.
उसके बाद मैंने किरण की ठुड्डी पर किस कर दिया.

अबकी बार किरण ने अपनी आंखें खोलने की कोशिश की लेकिन मैंने उसको पहले ही बोल दिया कि अगर उसने आंखें खोलीं तो वह शर्त हार जाएगी और इसलिए अभी अपनी आंखों को बंद ही रखे. उसने झट से आंखें बंद कर लीं.

अब मैं भी समझ गया था कि उसको तैयार करने में मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. अब मुझे बस उसको तैयार करना था, उसकी चूत की चुदाई का मजा लेना था. अबकी बार मैंने उसके कांपते हुए होंठों पर एक किस कर दिया.
मैंने अभी भी उसको अपने हाथों से टच नहीं किया था. उसके बाद किरण ने फिर आंखें खोलीं और मैंने अपने हाथों से ही उसकी पलकों को बंद कर दिया.

अब मैं थोड़ा और आगे बढ़ा, मैंने उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी कमर के दोनों तरफ रखवा दिया. फिर मैंने किरण को अपनी बांहों में लपेट लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रखकर उसको चूसने लगा. उसके होंठ नहीं बल्कि शराब के प्याले थे. उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर फिरने लगे थे. इधर मैं उसके गुलाबी होंठों को चूसकर उनका रस पीने में लगा हुआ था. बहुत मजा आ रहा था. मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी.

तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियां मेरे सीने पर दबाव बना रही हैं. उसकी चूचियां तनकर टाइट हो चुकी थीं. फिर मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और किरण को अपनी तरफ खींचते हुए उसके होंठों को जोर से चूसना शुरू कर दिया. उसकी चूचियां तो जैसे मलाई थी. अब मेरा लंड बहुत जोर से फुदकने लगा था. फिर मैंने किरण के चूतड़ों अपनी तरफ खींच कर अपने हाथों से दबाना शुरू कर दिया. मेरा लंड उसके बदन से सट गया. मैं किरण के शरीर पर अपने लंड को महसूस करवाना चाहता था.

दोस्तो, शादीशुदा लड़की को चोदना बहुत आसान होता है. इसका एक कारण यह है कि उन्हें सब कुछ पहले से ही पता होता है. इस तरह की लड़कियाँ घबराती नहीं हैं.
किरण ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी थी. उसके ब्लाउज के बटन पीछे की तरफ थे. मैंने अपने हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर उसके ब्लाउज के बटन को टटोला और फिर आराम से उनको खोलना शुरू कर दिया. मैंने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए उसके ब्लाउज के बटनों को खोलकर उसके ब्लाउज को उतार फेंका. उसकी चूचियां तो पहले से ही तनी हुई थीं इसलिए खोलते ही उछल कर मेरे हाथों में आ गईं.

उसकी चूचियां वैसे तो कड़क थीं लेकिन मलाई की तरह मुलायम भी थी. फिर मैंने उसकी साड़ी को उतारना शुरू कर दिया. मैंने हल्के से उसकी साड़ी को खींचते हुए किरण को अपने बेड की तरफ ले जाना शुरू कर दिया. जब मैं उसको लेकर बेड के पास पहुंच गया तो मैंने उसको वहां पर आराम के साथ लिटा दिया.

मैंने कहा- किरण, अब तुम आंखें खोल सकती हो.
किरण ने कहा- आप बहुत ही रसीले हो साहब. यह कहकर किरण ने फिर से आंखें बंद कर लीं.
मैंने भी झट से अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये. जल्दी ही मैं भी नंगा हो गया.

मेरा लंड उछल-उछल कर दर्द करने लगा था. मैंने उसके पेटीकोट को जल्दी से खोला तो देखा कि उसकी चूत बिल्कुल नंगी थी. उसने नीचे कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी.
मैंने कहा- किरण, तुम्हारी चूत तो बिल्कुल नंगी है. क्या तुम कच्छी नहीं पहनती हो?
उसने मेरी इस बात का जवाब दिये बिना ही कहा- साहब, बहुत रौशनी आ रही है. पर्दे बंद कर दो ना.
मैंने उठकर पर्दों को खींच दिया और रूम में थोड़ा अंधेरा हो गया. उसके बाद मैं तुरंत वापस आकर किरण के ऊपर लेट गया.

मैंने किरण के होंठों कस कर चूम लिया और उसकी चूचियों को दबाने लगा. फिर मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ फिराया. उसकी चूत पर घुंघराले से बाल थे. मुझे उसकी चूत के बाल बहुत अच्छे लग रहे थे. फिर मैंने उसकी चूची को मुंह में ले लिया और उसको पीने लगा. बहुत ही अच्छा लग रहा था मुझे.
उसके बाद मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत की दरार पर लगा दिया. फिर उसकी बुर में घुसा दिया. उसकी चूत में मेरी उंगली ऐसे घुस गयी जैसे मक्खन में छुरी घुस जाती है. उसकी चूत बहुत गर्म और गीली हो चुकी थी. उसके मुंह से सिसकारियाँ निकलना शुरू हो गई थीं. उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्ती से भर रही थी.
मैंने कहा- किरण रानी, अब क्या करना है?
वह बोली- साहब, अब और मत तड़पाइये. अब बस कर दीजिए.
मैंने कहा- नहीं, ऐसे नहीं. जान कहकर बुलाओ.

उसने मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब कर दीजिए, अब मत तड़पाओ.
मैंने कहा- नहीं, ऐसे नहीं.
वह बोली- साहब डाल दो न.
मैंने कहा- क्या डाल दूँ? मैंने शरारत करते हुए पूछा.
मुझे उसके मुंह यह सब सुनना बहुत मजा दे रहा था. वह बार-बार डालने की बात कह रही थी लेकिन मैं उसके मुंह से पूरी बात सुनना चाहता था.
वह बोली- यह लंड मेरे अंदर डाल दो ना साहब …

उसने मेरे होंठों से अपने होंठ चिपका दिये. मैंने भी उसकी चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.
मैंने कहा- हाँ, मेरी रानी, अब यह लंड तुम्हारी चूत में अंदर जाएगा. कहो तो चोद दूँ तुमको?
वह बोली- हाँ साहब, मुझे चोद दीजिए.

किरण काफी गर्म हो चुकी थी. अब मैंने उसकी चूत के ऊपर अपने लंड को रख दिया. एक झटका दिया और लंड को उसकी चूत के अंदर घुसा दिया. उसके बाद मैंने अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. कभी उसके होंठों को, तो कभी उसके गालों को चूमते हुए उसको चोदना शुरू कर दिया. मैं किरण को चोदने में मशगूल हो गया.

मेरा मन कर रहा था कि उसको चोदता ही रहूँ. वह भी मेरे लंड से उछल-उछल कर चुदवा रही थी.
उसने कहा- साहब, आप तो बड़ी ही मस्त चुदाई कर रहे हैं. आह्ह् … आप बस मुझे चोदते ही रहिए. मुझे बहुत मजा आ रहा है. ओह्ह …

धीरे-धीरे किरण के हाथ मेरी पीठ पर कसने लगे थे. उसने अपनी टांगें मेरे चूतड़ों पर लपेट दी थीं. साथ ही साथ वह नीचे से अपनी गांड को भी उछाल रही थी. वह चुदवा रही थी और मैं मजे से उसको चोद रहा था.
मैंने कहा- किरण रानी, तुम्हारी यह चूत तो मेरे लंड से चुदने के लिए ही बनी है. बहुत ही मस्त चूत है तुम्हारी. बहुत मजा दे रही है. बता ना, कैसी लग रही है मेरी चुदाई. मेरे लंड को लेकर कितना मजा आ रहा है मेरी रानी?
वह बोली- आप बस चोदते रहिए. बहुत मजा आ रहा है. आह्ह् … ओह्ह .. उफ्फ … उम्म …

इस तरह से हम दोनों बातें करते हुए बहुत देर तक चुदाई का मजा लेते रहे. उसके बाद अचानक ही हम दोनों एक साथ झड़ गए. लेकिन मेरा मन तो अभी भी नहीं भरा था. 20 मिनट के बाद मैंने अपना लंड फिर से उसके मुंह में डाल दिया और उसको चुसवाने लगा. अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए थे. जब वह लंड चूस रही थी तो मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. वैसे दूसरी औरत को चोदने का मजा ही कुछ और होता है यारो.
बल्कि दूसरी बार तो उसको चोदने में और भी ज्यादा मजा आया मुझे. इतना मजा आया कि मैं बता ही नहीं सकता. इस बार लंड ने भी मेरा बहुत देर तक साथ दिया. मेरे लंड को झड़ने में बहुत समय लगा. मैं उसको भरपूर मजा देता रहा.
फिर जब हम थक गए तो वह अपने कपड़े पहनने लगी.

मैंने कहा- किरण रानी, अब तुम चुदवाती रहना मुझसे.
वह बोली- आपने तो बहुत मस्त चुदाई की है साहब. मैं तो अब आपके ही लंड से चुदवाती रहूंगी. चाहे आप मुझे पैसे भी मत देना लेकिन अपने लंड से ही मेरी चूत को चोदना.

उसके बाद मैंने उसकी चूचियों को हल्के से दबा दिया और उसके हाथों को सहलाने लगा.
फिर मैंने किरण को अपने पास बेड पर लेटा लिया और बहुत देर तक उसके होंठों को चूसता रहा.

अब जब भी मौका मिलता है किरण खुद ही अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार हो जाती है.

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कहानी का पहला भाग: हम पाँच : बहनों की अदला बदली-1Antarvasna

मैं कुछ कहूँ इससे पहले वो मेरी गोद से सरक कर ज़मीन Antarvasna पर आ गयी मेरे पाजामा के आर पार उसने लंड टटोला. मैंने नाड़ा खोल दिया. आठ इंच का कड़ा लंड निकर में से वो निकाल ना सकी. मैंने निकर भी उतार दी और लंड आज़ाद किया. फ़ौरन उसने लंड पकड़ लिया. मुठ मारने लगी लंड और ज़्यादा तन गया. टोपी हटाकर उसने लंड का मत्था खुला किया और तुरंत अपने मुँह में ले लिया. मत्थे को जीभ और तालु के बीच दबाए रखकर वो स्थिर हो गयी दो मिनट तक वो हिली नहीं. मुझे बहुत अच्छा लगता था. लंड में हलके हलके ठुमके होते थे. बाद में उसने लंड का मत्था चूसना शुरू किया, जैसे बच्चा लॉलिपोप चूसता है वैसे. चूसते चूसते जीभ से चाटा और मुट्ठी में पकड़े हुए लंड के हिस्से पर मुठ मारने लगी मेरे हिप्स हिलने लगे. लंड ने भरपूर कामरस बहाया.

मेरा मोटा लंड लेने के लिए सपना को अपना मुँह पूरा चौड़ा करना पड़ा था. लंड के पानी के साथ मुँह का थूक मिलकर सारे लंड को गीला कर दिया था. मैंने उसका सिर पकड़ कर धक्के देना शुरू किया. गीला मोटा लंड उसका मुँह को पूच्च पूच्च आवाज़ से चोदने लगा. मेरी उत्तेजना तेज़ी से बढ़ गयी लंड और कड़ा हो गया और ठुमके लगाने लगा. सपना ने जब जीभ से मत्थे के नीचे छुआ तब मुझे लगा कि मैं उसके मुँह में ही झड़ जाऊँगा. मैंने झट से लंड निकाल दिया. सपना को फिर गोद में बिठाकर मैं फ़्रेंच किस करने लगा. उसके थूक के साथ मेरे लंड का पानी भी मेरे मुँह में आ गया.

अभिनव और उषा अपनी मस्ती में खोए हुए थे. अभिनव चित लेटा था. उषा उस पर औंधी पड़ी थी. अभिनव का सिर उषा की चौड़ी की हुई जांघें बीच था और मेरे ख़याल से वो उषा की पीकी को चुस रहा था. दूसरी ओर उषा अभिनव का तना हुआ लंड अपने मुँह में लिए चुस रही थी.

सपना को बाहों में भरकर मैं पलंग पर ले गया. उसे चित लेटा कर मैं बगल में लेट गया. मैंने उसके सीने पर जगह जगह पर चुंबन किए. ऐसे करते करते मैंने दोनों स्तनों भी चूम लिए. अंत में मैंने निप्पल मुँह में ले लिये. मैंने जीभ से निप्पल टटोले, बाद में चूसा. मुँह खोल कर मैंने एरोला साथ थोड़ा सा स्तन मुँह में लिया और चूसने लगा. सपना के नितंब हिलने लगे. मेरा हाथ पेट पर फिसल रहा था, उसका हाथ मेरे बालों में रेंग रहा था.

निप्पल चूसते चूसते मैंने मेरा हाथ भोस की ओर बढ़ाया. मैंने घाघरे के नाड़े को छुआ तो सपना ने मेरी कलाई पकड़ ली. मैंने ज़ोर लगाया लेकिन वो मानी नहीं. उसने टाँगें सीधी रखी थी. एक ओर मैं स्तन छोड़कर उसके पेट पर किस करने लगा और दूसरी ओर घाघरे के आरपार भोस सहलाने लगा. भोस ने भरपूर काम रस बहाया था. जिस तरह घाघरा गीला हुआ था इससे मालूम होता था कि सपना ने पेंटी पहनी नहीं थी.

मैं पेट पर किस करते करते भोस की ओर चला. मैंने जब उसकी नाभि पर होंठ लगाए तब गुदगुदी से वो तड़प उठी. मैंने उसे छोड़ा नहीं. मैंने जीभ से उसकी नाभि टटोली. सपना खिल खिल कर हँस पड़ी और उसकी जांघें ऊपर उठ गयी
फिर क्या कहना था? रेशमी घाघरा सरक कर कमर तक चढ़ गया मेरे कुछ किए बिना सपना की भोस खुली हो गयी उसने टांगे लंबी करने का प्रयत्न किया लेकिन मेरा हाथ जाँघ के पीछे लगा हुआ था, मैंने जांघें उठी हुई पकड़ रखी थी.

सपना जांघें सिकोड़ दे इससे पहले मैंने अपने हाथ से भोस ढक दी. मैं अब बैठ गया. होले से उसकी जांघें चौड़ी कर दी. सपना ने आँखें बंद कर दी. दोनों हाथ से मैंने जांघें सहलाई और चौड़ी पकड़ रखी.

सपना की जांघें सुडोल चिकनी और भारी भारी थी. जब पाँव लंबा रखती थी तब घुटनों से भोस तक दोनों जांघें आपस में सटी हुई रहती थी. दो भारी जांघें और उँची मोन्स ये तीनो बीच खड्डा सा बन जाता था जिसके तल में थी सपना की भोस. अलबत्ता इस पोजिशन में भोस का थोड़ा सा हिस्सा ही दिखाई दे सकता था.

ऊपर उठी हुई जांघें जब चौड़ी की गयी तब सपना की भोस ठीक से दिखाई दी.
उसके स्तन की तरह उसकी भोस भी छोटी थी, बारह साल की लड़की की हो वैसी. फ़र्क इतना था कि सपना की भोस पर झांट निकल आए हुए थे. बड़े होंठ मोटे और भरावदार थे, उस वक़्त सूजकर गुलाबी हो गये थे. तीन इंच की दरार में से छोटे होंठ सूजकर बाहर निकल आए थे. एक इंच लंबी और मोटी क्लाइटोरिस लंड की तरह खड़ी हो कर बाहर झाँख रही थी. दरार के पिछले कोने में था चूत का मुँह. इस वक़्त मुँह बंद था. सारी पीकी अपने पानी से गीली गीली हो गयी थी.

मैं अब ऐसे औंधा लेट गया जिससे मेरा सिर उसकी जांघें बीच आ जाये. अब सपना ने ख़ुद जांघें चौड़ी कर दीं. भोस से मादक सुगंध आ रही थी जिसे सूंघकर मेरा लंड ज़्यादा तन गया. लंड मेरे पेट से दबा हुआ था और कामरस उगल रहा था.

पहले मैंने ऊँगलिओं से भोस सहलाई. आगे से पीछे और पीछे से आगे सब जगह ऊँगलियाँ फिराई. एक उंगली पर चूत का पानी लेकर क्लाइटोरिस पर लगाया और उसे मसली. दो अंगूठे से बड़े होंठ चौड़े कर जीभ से छोटे होंठ चाटे. क्लाइटोरिस को मेरे होठों बीच ले कर चूसा. उसी वक़्त मैंने दो ऊँगलियाँ चूत में डाली और जी स्पोट का मर्दन किया. क्लाइटोरिस चूसते चूससते मैंने ऊँगलियाँ अंदर बाहर करके चूत को चोदा. सपना के नितंब डोलने लगे. उस से सहा नहीं गया. उसे पहला ओर्गाज़्म हो गया.

सपना का सारा बदन अकड़ गया और आँखे मिंच गयी भोस ने कामरस का फ़व्वारा छोड़ दिया. सिकुड़ कर उसकी जांघों ने मेरा सर भोस से दबा रखा चूत में फटाके हुए और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गये जब उसका ओर्गाज़्म शांत हुआ तब में उठा और उसकी जांघों के बीच आ गया. उसने ख़ुद लंड पकड़ कर भोस की ओर खींच लिया. मुझ से रहा नहीं गया. लंड का मत्था क्लाइटोरिस से घिसा, चूत के मुँह पर धरा और एक ही धक्के से सारा लंड चूत में पेल दिया. सपना के मुँह से आह निकल गयी.
चूत में लंड दबा के मैं रुका. लंड झटके पे झटका देने लगा जिसका जवाब चूत ने संकोचन करके दिया. मैंने लंड निकाला तो सपना ने मेरे चूतड़ पर हाथ रख कर मुझे अपनी ओर खींच लिया. लंड फिर से चूत की गहराई में उतर गया. ऐसे धीरे धक्के से मैं सपना को चोदने लगा.

उधर अभिनव अब पलंग पर लेटा था. उषा उसकी जांघें पर बैठी थी. अभिनव का लंड उषा की चूत में फसा था. अपने चूतड़ उठा गिरा के उषा लंड को चूत से अंदर बाहर किए जाती थी. कभी कभी अभिनव भी धक्का दे कर उषा को चोदता था. अभिनव के दोनों हाथ उषा के स्तनों पर लगे हुए थे. अभिनव का पूरा लंड बाहर निकल कर फिर चूत में घुसता हम दोनों देख सकते थे

हमें देख कर अभिनव बोला :यश, डरना मत. सपना दिखती है इतनी नाज़ुक नहीं है ज़ोर से चोदना, वरना उसे संतोष नहीं होगा. क्यूं, सपना?

जवाब में सपना ने चूत सिकोड़ी और लंड दबाया. मैंने कहा : उषा भी लंड ले सकती है तू भी उसे ज़ोर से चोदना.

अभिनव के कहने पर भी मैंने धीरे धक्के से ही सपना को चोदना चालू रखा. मैंने सपना से कान में पूछा: अभिनव सच कहता है क्या? चुदवाना है तेज़ धक्के से?
वो कुछ बोली नहीं, सिर हिलाकर न कही.
मैंने फिर पूछा: धीरे धक्के मीठे लगते हैं. हैं न?
बोले बिना ही फटाफट चूत से लंड दबा कर उसने जवाब दिया.
मैं: मोटा लगता है मेरा लंड? दर्द तो नहीं होता न?
वो बोली नहीं सिर हिला कर न कही.
मैं: कुछ तो बोल. जवाब दे, कैसा लगता है मेरा लंड? नहीं बोलोगी तो मैं उतर जाऊँगा.
उसने अपने पाँव मेरी कमर से लिपटाये और धीरे से बोली: बहुत मीठा लगता है.

प्यार से मैंने चार पाँच धक्के लगा कर सपना को चोदा. वो फिर बोली: आप ऐसा करते हें तब बहुत मीठी मीठी गुदगुदी होती है वहाँ
मैं: वहाँ मायने कहाँ?
सपना: आपका वो घुसा है वहाँ!
मैं: मेरा क्या कहाँ घुसा है? साफ़ साफ़ बोल तो.
सपना: मुझे शर्म आती है!
मैं: मुझ से शर्म? अब? एक बार बोल ज़रा, क्या कहाँ घुसा है तेरे मुँह से सुनना चाहता हूँ.
अपना मुँह मेरे कान से लगा कर वो बोली: आपका लंड घुसा है वहाँ से, मेरी चूत में गुदगुदी होती है.
सुन कर मेरा लंड और तन गया, मेरे कूल्हे हिल पड़े, कमर ने और धक्के लगा दिए.

धीरे चुदाई की वजह थी. एक तो ये कि सपना अभी उमर में कम थी और नयी नयी लंड ले रही थी. उसकी चूत बहुत सिकुड़ी थी. प्रमाण से मेरा लंड बहुत मोटा था. चूत में कहीं घाव न लग जाय इस लिए मैं सावधानी से लंड डालता था. चूत और लंड काफ़ी गीले थे फिर भी अंदर जाते समय लंड की टोपी उपर चढ़ जाती थी और नंगा मत्था चूत की दीवारों साथ घिस पाता था. जब लंड बाहर निकलता था तब टोपी उतर कर मत्थे को ढक देती थी. हाथ से मुठ मारते वक़्त ऐसा ही होता है न? मानो सपना की चूत मुठ मार रही थी मेरे लंड पर.

दूसरे, जब पूरा लंड अंदर घुस जाता था तब लंड का मूल जो ज़्यादा मोटा है वो चूत के मुँह में बैठ कर चूत को चौड़ा कर देता था. वैसे भी भोस की दरार लंड से चौड़ी होकर गोल बन गयी थी. लंड का मूल क्लाइटोरिस को छू लेता था. इसी वक़्त लंड का मत्था गर्भाशय का मुख धकेल देता था. बाहर निकलते वक़्त गर्भाशय वापस अपनी जगह पर आ जाता था. अब गर्भाशय की ये हलन चलन से आनन्द का फ़व्वारा छूट जाता था सपना की भोस में और पेडू में. वो अपने हिप्स हिलने से रोक नहीं पाती थी.

मुझे भी धीमी चुदाई से बहुत मजा आ रहा था. अंदर घुसे हुए लंड को जब सपना की योनी भींच लेती थी तब मेरे सारे लंड से रस झड़ता हो ऐसा महसूस होता था. योनी की करकरी दीवाल साथ घिसने से लंड में से इलेक्ट्रिक करंट निकल कर मेरे सारे बदन में फैल जाता था.
ऐसी मजेदार चुदाई को जल्दी से कौन ख़तम कर दे? लेकिन, अफ़सोस, सब चीज़ का अंत तो होता ही है चाहे वो चुदाई हो या और कुछ. क़रीबन दस मिनट तक आराम से मैंने सपना को चोदा होगा. हमारी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी. मेरा लंड इतना सेंसीटिव हो गया था कि अब वो चूत सहन नहीं कर पाता था अंदर घुसते ही ठुमक ठुमक करने लगता था. बार बार पूरा बाहर निकाल कर उसे हवा देनी पड़ती थी. सपना का बदन पसीने से छा गया था, चहेरा लाल लाल हो गया था, निप्पल्स खड़ी की खड़ी रहती थी. मेरा दिमाग़ सिर से निकल कर लंड के मत्थे में जा बैठा था और मेरी सुनता नहीं था.

मैंने लाख चाहा फिर भी धक्के की रफ़्तार अपने आप बढ़ने लगी सपना के कूल्हे भी ज़ोरों से हिलने लगे. मैंने सोचा कि पोजिशन बदलने से चुदाई लंबी चल सकेगी. मैंने कहा: तू ऊपर आ जा.

उसे बाहों में भरकर मैं पलटा और नीचे आ गया. तुरंत सपना धक्के लगाने लगी आगे पीछे सीधे गोल ऐसे सब तरह से उसने नितंब घुमा कर लंड से अपनी क्लाइटोरिस रगड़ दी. ओर्गाज़्म के क़रीब होने पर भी ओर्गाज़्म पा नहीं सकती थी. हमारे पेट बीच हाथ डाल कर जैसे मैंने क्लाइटोरिस को उंगली से छुआ कि तुरंत सपना को ओर्गाज़्म हो गया.

उसके धक्के बंद हो गये योनी फट फटा कर लंड को चुसने लगी सपना को बाहों में भर कर मैं फिर पलट गया और ऊपर आ गया. मैं स्थिर रहा, बड़ी मुश्किल से अपने आप को झड़ने से रोक सका. तीस सेकंड चले ओर्गाज़्म से सपना बेहोश सी हो गयी.

जब वो होश में आई तब बोली: ये क्या हो गया मुझे?
उसके सूजे हुए होंठों को चूम कर मैंने कहा: इसे ओर्गेज़्म कहते हें, प्यारी.
वो इतनी थक गयी थी कि मेरे गले में बाहें डालने सिवा और कुछ कर न सकी. उसकी आँख में आँसू आ गये और वो धीरे से बोली: मैंने सही सुना? आपने मुझे प्यारी कहा?
चुम्बन करते करते मैंने कहा: हाँ, प्यारी, तूने सही सुना. प्यारी प्यारी, हज़ार बार प्यारी.
ख़ुशी से वो रो पड़ी. मेरे चेहरे पर हाथ फिराकर बोली: मुझे आप कितने प्यारे लगते हें? आपको हुआ वो… वो ओर्गाज़्म?
मेरा लंड अभी उसकी योनी में था और कड़ा ही था. मैंने कहा: नहीं हुआ, अब होगा. तू थक गयी हो तो उतर जाऊँ, बाद में फिर चोदेंगे.
उसने मुझे हाथ पाँव से जकड़ लिया और बोली: न, अभी ही कर लीजिए जो चाहे सो, मेरी फिकर मत कीजिए.

अब आप ही कही ये मैं क्या करता? मैंने लंड निकाला. फिर डालने में ज़रा देर लगी क्योंकि वो थोड़ा सा नर्म पड़ गया था. नर्म लंड भी योनी के मुलायम स्पर्श से तन गया. ओर्गाज़्म से सपना की चूत काफ़ी खुल गयी थी. अब उसे लग जाने का डर नहीं था. थोड़ी देर में जब लंड पूरा अकड़ गया तब मैं घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से चोदने लगा. सपना भी नितंब उछाल उछाल कर लंड लेने लगी दो पाँच मिनट की ऐसी घमासान चुदाई बाद मैं ज़ोर से झड़ा. सपना को मैंने बाहों में जकड़ लिया. लंड से वीर्य की न जाने कितनी पिचकारियाँ छूटी. छोटी सी चूत में जगह कहाँ थी, लंड जो भरा था? ढेर सारे वीर्य से चूत छलक गयी सपना भी मेरे साथ एक बार फिर झड़ी.

शाम ढल चुकी थी. उधर अभिनव और उषा ने अपनी चुदाई पूरी कर ली थी.
अभिनव बोला : चल घर चलें, वरना माताज़ी को शक पड़ेगा.
मैं: मुझे नहीं आना. नींद आ रही है कह देना सेहत अच्छी नहीं होने से सो गया हूँ
वो तीनो स्वस्थ हो कर चले गये मैं गहरी नींद में सो गया.

दूसरे दिन सुबह आँख खुली तब सपना मुझे जगा रही थी: उठिये न. साढ़े नौ बज गये हें. सब आपका इंतेज़ार कर रहे हैं चाय पर अभी माताज़ी मंदिर से लौटेगी और यहाँ आ जाएगी.

मैंने उसे बाहों में भर लिया और किस करने लगा. ज़ोर लगा कर वो छूट गयी और हँसने लगी तब मुझे पता चला कि मैं नंगा था.

फटाफट कपड़े पहन कर मैंने फिर सपना को पकड़ लिया. मैंने कहा: जाने से पहले एक बात बता. मुझसे शादी करोगी, प्यारी?

पल भर के लिए वो आश्चर्य से अवाक हो गयी फिर मुझसे लिपट गयी फिर रो पड़ी. मेरे चहेरे पर प्यार से हाथ फिरा कर बोली: एक बार नहीं, हज़ार बार करूंगी. आप मुझे इतने अच्छे क्यों लगते हैं?
किस करके मैंने कहा : चल चलें, उन लोगो को बता दें हमारा इरादा.

उषा और अभिनव चाय पर हमारा इंतज़ार कर रहे थे. सुमन भी आ गयी थी. अभिनव बोला : चलो, चलो, अभी माताज़ी आ जाएंगी तो उसे शक पड़ जाएगा.

मुझे हँसी आ गयी और सपना शरमा गयी देखकर उषा ने पूछा : कितनी बार चोदा कल रात?
मैं: पहले तू बता.
अभिनव : हमने कुछ बाक़ी रखा है सुहाग रात के लिए
मैं: ओह हो. क्या मैं शाहनाईयाँ सुन रहा हूँ शादी की?
अभिनव: हाँ, हमने शादी का फ़ैसला कर लिया है आशा है कि माताज़ी और पिताजी मंज़ूर दे देंगे. मैं माताज़ी से पूछ लूंगा.

इस वक़्त सपना धीरे से बोली: भैया, साथ साथ हमारी भी पूछ लेना.

दो मिनट के लिए सन्नाटा छा गया. बाद में सब ख़ुशी से झूम उठे. उषा और सपना लिपट गये मुझे गले लगाते हुए अभिनव ने कहा: वाह मेरे छुपे रुसतम आख़िर तूने मेरी गुड़िया ले ही ली. सपना, कैसा जादू चलाया है इस बेवकूफ़ के लंड ने जिससे तू अपना दिल दे चुकी हो?

अब देखी ये दोस्तो, प्यार से की गयी चुदाई कैसे शर्म के परदे तोड़ डालती है कल की शरमिली सपना आज अपने भैया से बिँदास कहने लगी: वो ही जादू भैया जो आपके लंड ने उषा भाभी की चूत पर चलाया है

सुनकर उषा बोली: अरे वाह रे मेरी सपना भाभी, देखो न, लंड की कुंजी लगती है चूत में और खुल जाता है ताला ज़ुबान का.

इतने में माताज़ी आ गयी अभिनव ने हमारा इरादा सुना दिया. पहले तो वो घबरा गयी उन्हें किसी तरह तसल्ली हो गयी कि हम चारों ने चुदाई कर ली थी. लेकिन अब शादी की मंज़ूरी सबसे उत्तम रास्ता था. ख़ुश हो के उसने हा कह दी. हम चारों ने उन के चरण छुए. तब उन्होंने धमाका किया.
वो बोली: मैं तेरे पिताजी से बात करूंगी. हम यश और उषा के माताज़ी पिताजी को बूलवा लेंगे बाद में ये रिश्ता जाहिर करेंगे अगले हफ़्ते. यश, उषा बेटा, तुम लोग रह सकोगे न इतने दिन?
मैं: हाँ जी
माताज़ी: तब तो अच्छा. और सपना, उषा को लेकर घर आ जा अभी. आज से तुम दोनों घर पर सोओगी हमारी साथ.

आगे की कुछ कहे इससे पहले माताज़ी चली गयी हम चारों एक दूजे के मुँह देखते रह गये उषा बोली: चल सपना, माताज़ी को मदद करें,

जाते जाते दोनों दरवाज़े में खड़ी हो गयी दोनों ने अपनी चोली खोल कर चुचियाँ दिखाई. सपना बोली: शाब, मुझे यहाँ बहुत दर्द होता है ज़रा मालिश कर देंगे आप?

हम दोनों उनको पकड़ने गये लेकिन ठेंगा दिखाकर वो भाग गयी उस रात के बाद चुदाई का फिर चांस न मिला, माताज़ी ने कड़ा पहरा जो लगाया था. इन दौरान दोनों लड़कियों ने हम पर जो सितम गुज़ारे. कभी चुचियाँ दिखाकर कभी जांघें नंगी करके, कभी दूर से फ़्लाइंग किस करके तो कभी अंगड़ाई ले कर वो हमें लुभाती रही लेकिन कभी पकड़ी गयी नहीं. हमें उन दिनों अपना हाथ जगन्नाथ करना पड़ा.

अब आप ये बताईये, दोस्तों, सुहागरात पर उन दोनों से कैसा व्यवहार किया जाय? Antarvasna

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