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अगले दिन दोपहर को मौसा Antarvasna Sex Stories जी घर आ चुके थे। उनके साथ उसके एक पुराने मित्र राजेश भी थे। उनके आते ही रीना और रूपा में कुछ बदलाव सा लगा, दोनों ही कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रही थी। रीना भी पहले से अधिक सेक्सी लगने लगी थी। उसने थोड़ा मेकअप भी किया हुआ था और मौसा जी से वो हंस-हंस के बात कर रही थी। रूपा ने राजेश की खूब आवभगत की और उससे खूब बातें की।
मौसा जी बार-बार रीना की तरफ़ देखते, कभी उसका फ़िगर देखते, कभी उसके सुडौल चूतड़ों को निहारते। आज जाने क्यों रीना बड़ी आकर्षक लग रही थी। मौसा को क्या पता था कि आज रीना ने भरपूर चुदाई करवा कर अपना मन शांत कर लिया था।
पर हां इससे रीना के मन में एक नया जोश और मर्दों के प्रति एक आकर्षण पैदा हो गया था। जैसे अधिकतर मर्द नारी को एक भोग्य वस्तु मानते हैं, वैसे ही उसे पुरुष भी भोगने की वस्तु लगने लगे थे। उसे लगने लगा था कि मर्द तो बस चूत के दीवाने रहते हैं, इन्हें तो जब चाहो तब पटा लो और चुदा लो। बस थोड़ी सी चूची दिखा दो और मर्दों का तम्बू तन जाता है। चुनांचे मौसा जी भी रीना के लिये उसी श्रेणी में आ चुके थे।
रीना दो दिनों में ही मौसा जी के बहुत निकट आ चुकी थी। रीना उन्हें हर तरफ़ से उसे पटाने में लगी थी। उसे आशा थी कि उसे एक नया लण्ड जल्दी ही मिल जायेगा। अभी तो सभी कुछ पर्दे के पीछे था। उधर रूपा भी राजेश से खूब घुल मिल गई थी। शाम को सब मौसा जी के साथ राजेश को घुमाने ले जाते थे। रूपा ने रीना को और रीना ने रूपा को यह बता दिया था कि वो इन मर्दों को पटा रही हैं। दोनों ने अपने पत्ते खोल रखे थे। रीना यदि मौसा के अधिक करीब आ जाती थी तो रूपा जानबूझ कर दूसरी ओर चली जाती थी और मौसा यह समझते थे कि मौका मिल गया। इस दौरान वो हाथ दबा देते थे और कभी कभी चूतड़ पर हाथ भी मार देते थे। बदले में रीना शर्माने का अभिमय कर देती थी।
उधर रूपा ने भी राजेश को पटा लिया था। रूपा जरा तेज थी, सो वो तो चुम्बन तक पहुंच गई थी।
“रीना ! अब तो मुझे चुदने की लग रही है … अपने मौसा जी को कही बाहर ले जा ना !”
“शाम को मौसा जी को मैं घुमाने ले जाती हूँ और आप तबियत का बहाना बना लेना !”
दोनों ने अपनी ओर से सरल सा बहाना बना लिया। योजना के मुताबिक राजेश बाहर निकल गया और रूपा ने पेट दर्द का बहाना किया। मौसा जी तो चाहते ही थे कि उसे सिर्फ़ रीना का साथ मिले। रीना के थोड़े से ही कहने पर मौसा जी मान गये।
रूपा ने भी मंजूरी दे दी। दोनों कार में निकल पड़े और रूपा ने जल्दी से मोबाईल पर फ़ोन करके राजेश को वापस बुला लिया। राजेश तुरंत घर आ गया। राजेश सीधा रूपा के कमरे की तरफ़ बढ़ गया। रूपा उसे देखते ही शरमाती सी खिल गई।
“अब हम तुम इस कमरे में बंद हो तो…”
“धत्त, आप तो मजाक करने लगे…” रूपा ने राजेश को रिझाने का नाटक किया।
“अब तो मत शर्माओ … अब तो एक मैं और एक तू … दोनों मिले किस तरह… बताओ !”
“हाय रे … आप दूर रहें … मुझे कुछ होता है…!” राजेश ने रूपा का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया, रूपा जानबूझ कर उसके ऊपर गिरती हुई बोली,”हाय राम … बैंया तो छोड़ो, मोच आ जायेगी ना…” रूपा फ़िल्मी अदाएँ दिखाते हुये राजेश से लिपट गई। दूसरे ही क्षण रूपा के मद भरे अमृत कलश उसकी हथेलियों में दबे हुये थे।
“मां री ! … मत करो ना … गुदगुदी होती है …! ” रूपा ने आह भरते हुये कहा,”दूर रहो जी… नीचे कुछ गड़ रहा है…”
मेरी मतवाली रूपा यही है वो मस्त चीज़ जो हमे अभी मस्ती देगी … अब बनो मत …”
“ना जी … मत सताओ … इसे दूर ही रखो … मेरा मन डोल रहा है… हाय रे ! क्या कर रहे हो… घुसाये चले जा रहे हो… आह्ह्ह मेरे राजेश…!!”
“मस्ती आ रही है ना… आओ अब अधरों का रसपान करें” राजेश भी भावना में बह कर बोला।
दोनों के होंठो की पत्तियां टकरा गई और एक दूसरे की जीभ से वो भीग गये।
होंठो का कसाव दोनों ने बढ़ा दिया और अधरपान में लीन हो गये। राजेश के मुँह से सीत्कार निकल पड़ी… रूपा ने उसका लण्ड कस कर दबा दिया था।
“अरे रूपा, तुम मुझे मार डालोगी… जरा धीरे से… कहीं निकल गया तो मजा नहीं आयेगा…”
“तो फिर जी, क्या करें … मेरा तो मन डोल रहा है जी…!”
“चलो, पहले प्यास बुझा ले… कपड़े उतारो…”
“प्यास लग रही है तो कपड़े क्यूँ उतारें भला…?” रूपा ने शरमाते हुये कहा।
राजेश ने धीरे से रूपा की साड़ी उतार दी … फिर ब्लाऊज को जबरदस्ती उतार दिया। रूपा की तरफ़ से ब्लाऊज़ उतारने का विरोध तो मात्र एक नाटक था, ब्लाऊज उतरते ही उसने अपनी उभरी हुई जवानी को हाथों से छिपाने का नाकाम प्रयास किया। राजेश ने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार फ़ेंके। अब रूपा के पेटीकोट की बारी थी, बस नाड़ा खींचने की देर थी। पेटीकोट झम से नीचे पांवों पर आ गिरा।
“मैं मर गई राम जी… और कभी अपनी चूत छिपाती तो कभी अपने उभरे हुये स्तनों को ढकने की कोशिश करती। राजेश ने अपने नंगे बदन से रूपा को लिपटा लिया और दोनों फिर बिस्तर पर एक दूसरे को धकेल कर लेट गये। दोनों ही एक दूसरे के शरीर को दबाते हुये लोट लगाने लगे। तभी रूपा सिसक उठी। उसकी चूत में राजेश का कड़क लण्ड बिना किसी पूर्व सूचना के उतर चुका था। रूपा के बदन में तरावट आने लगी। कब से नये लण्ड का इन्तज़ार कर रही थी और नये लण्ड ने उसकी चूत को स्वीकार करते हुये खेल-खेल में प्रवेश कर लिया था।
राजेश रूपा के नीचे दबा हुआ था और रूपा उसके ऊपर लण्ड पर बैठ गई थी। रूपा उसके लण्ड पर अपनी चूत भींचे जा रही थी और राजेश के चूतड़ ऊपर की ओर जोर लगा कर पूरा लण्ड अन्दर तक बैठाने की कोशिश में थे।
रूपा राजेश पर पिघले जा रही थी। उसकी चूत फ़डफ़डा रही थी। राजेश ने रूपा के सुडौल स्तन हिलते हुये देखे और उसके हाथ उन्हें थाम कर ऊपर नीचे करके उसे मसलने लगा। रूपा उस पर झुक गई और चूत को आगे पीछे करके राजेश को चोदने लगी। राजेश का शरीर वासना में जलने लगा। वो अपने चूतड़ ऊपर उछाल कर रूपा को चोदने में सहायता करने लगा।
अब रूपा राजेश के शरीर के ऊपर लेट सी गई और आहें भरते हुये चूत को आगे-पीछे करके लण्ड का आनन्द लेने लगी। राजेश ने अतिउत्तेजना में रूपा को कमर से जकड़ लिया और धीरे से उसे अपने नीचे दबोच लिया।
राजेश अब ऊपर था और लण्ड जो कि इस उल्टा पल्टी में बाहर आ गया था, फिर से चूत में सरक गया। अब रूपा की भरपूर चुदने की बारी थी। राजेश के धक्के और झटके चूत पर चालू हो गये थे। और नीचे दबी रूपा आह्… उह्ह… हाय रे… जैसी सीत्कारें निकाल रही थी।
राजेश अपने लण्ड को अपनी तसल्ली के लिये दबा के धक्के मार रहा था। नीचे दबी चुदैल रूपा को ये धक्के बडे प्यारे लग रहे थे। उसके हर जोरदार धक्के पर रूपा के मुँह से आह निकल जाती थी। तभी रूपा को लगा कि उसकी चूत जवाब देने वाली है, उसने अपनी प्यारी चूत को पूरी तरह से झड़ने के लिये तैयार कर ली और आंखें बंद करके अपनी चूत को ढीली छोड़ दी ताकि अच्छी प्रकार से पानी निकल जाये। उसकी चूत अब रस छोड़ने वाली थी और बार बार अन्दर लहरें उठ रही थी। तभी रूपा ने अपनी चूत ऊपर की ओर दबाई और अपना रस छोड़ने लगी।
उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ी। उसने राजेश को अपनी बाहों में दबा लिया और लण्ड को चूत में कस लिया। तभी राजेश का वीर्य भी छलक पड़ा। उसकी पिचकारी चूत में समाने लगी और फिर चूत के बाहर रिसने लगा। दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में समाये हुये यूं ही अपना रस निकालने में लगे रहे। उनकी आंखें आनन्द के मारे बंद थी। काफ़ी देर दोनों यों ही दुनिया से बेखबर पड़े रहे।
फ़िर रूपा कुछ अलसाई सी पता नहीं क्या बोली और अपना मोबाईल पर रीना को मिस कॉल कर दिया। राजेश भी उठा और जल्दी से कपड़े पहन कर रूपा को चूमा और घर से बाहर निकल गया। कुछ ही देर में रीना मौसा जी के साथ घर आ गई।
“अरे, वो राजेश नहीँ आया…?” मौसा ने पूछा।
रूपा मुस्करा उठी,”आप जानें … आपका दोस्त है!”
रूपा रीना के कमरे में आ गई थी। दोनों सहेलियाँ कुछ गुपचुप बाते कर रही थी।
“मै सोने जा रहा हूँ… हम दोनों ने खाना बाहर खा लिया है… रूपा तुम भी खा लेना !”
मौसा जी अपने कमरे में जाकर बत्ती बंद करके लेट गये। रूपा भी मौसा जी के पीछे चली गई। रीना ने भी अपने रात को सोने वाले कपड़े पहन लिये या यूँ कहे कि बस एक सामने से खुला हुआ गाऊन डाल लिया और बिस्तर पर लेट गई।
कहानी का अगला भाग: कलयुग की लैला-3 Antarvasna Sex Stories
फिर मैंने रात को Antarvasna रीना के नाम पर दो बार मुठ मारी, बहुत मजा आया… मैं उसी के बारे में सोचता सोचता सो गया… सुबह उठा तो मुझे कमजोरी महसूस हुई जो मुठ मारने के कारण हुई थी..
फिर मैंने अपने सवेरे के सारे काम किये और पढ़ाई करने लगा…
मुझे आज का दिन कैसे भी करके निकलना था क्योंकि कल मुझे रीना को अपने ही घर में चोदना था…
आज शाम को मुझे छोड़ कर घर के बाकी सभी लोग मौसी के घर तीन दिनों के लिए जा रहे थे…
जब सब लोग चले गए तो… मैंने रीना को फ़ोन लगाया और बोला- जान, अभी आ जाओ… अभी मस्ती करेंगे !
बोली- धीरे बोलो ! बॉस पास ही है… हम रात को बात करते हैं..
मैं बोला- ठीक है…
फिर रात को मैंने उसे फ़ोन किया तो पता चला रीना के घर पर सब लोग सो गए, मैंने सोचा तब तो मस्त वाली सेक्सी बातें करुंगा।
फिर मैं बोला- जान, घर पर कोई नहीं है… तुम मेरी रात की पार्टनर बन कर आ जाओ, खूब मस्ती करेंगे…
रीना- जानेमन, तुम आज कल बहुत शैतान हो गए हो… कल तुम्हें बताती हूँ, पार्टनर बन कर दिखाऊँगी… मेरी तो चूत कल से तड़प रही है जबसे तुमने इसे फाड़ा है… कई बार पानी छोड़ चुकी है।
मैं बोला- जानू, मेरा लौड़ा है ही बड़ा मस्त.. तू देखती जा कल क्या मजे आते हैं !
और भी बहुत सारी बाते हुई जो मैं आप लोगों को नहीं बताउंगा… अंत में मैंने पूछा- कल कितने बजे आओगी?
बोली- ऑफिस टाइम दस बजे !
मैं बोला- यार, घर पर यह बोल कर आना कि सहेली के घर जाना है…आठ- साढ़े आठ तक आ जाओ ना ! मैं लेने आ जाउंगा…
रीना- ठीक है आ जाउंगी… बाय !
रात भर मैं रीना के बड़े बड़े स्तनों और उसकी गांड के बारे में सोचता रहा, सोचते सोचते नींद आ गई…
सुबह हुई, मैं जल्दी से तैयार हो गया और रीना को फ़ोन लगाया, उसने फ़ोन नहीं उठाया।
मैंने सोचा कि शायद कोई आस पास होगा…
फिर 15 मिनट बाद फ़ोन आया- 5 मिनट में निकल रही हूँ ! आ जाओ…
मैं उसे लेने चला गया…
हम दोनों घर आ गये घर को मैंने लॉक किया और रीना को उठा कर बेडरूम में ले गया !
वहाँ उसे लेटा कर एक मस्त सा जोरदार चुम्बन लिया..
वो बहुत टाइट जींस और टॉप पहन कर आई थी.. बहुत सेक्सी लग रही थी…
मैंने जल्दी से उसके स्तनों को उसके टॉप और ब्रा से आजाद कर दिया..
फिर उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा…
उसे बड़ा मजा आ रहा था, बोली- करते रहो जान…
मैं बोला- ये ले मेरी जानेमन, तुझे अभी बहुत मजे करवाने हैं !
करीब दस मिनट इस तरह करने पर मैंने उसकी जींस खोल दी, मैंने देखा कि उसकी पैंटी गीली थी…मैं समझ गया कि रीना झड़ चुकी है…
फिर मैं उसकी गीली पैंटी से ही उसकी चूत के छेद में हाथ डालने लगा।
वो बोली- यार, बड़ा मजा आ रहा है…अह आः ओह्ह्ह ऐसी आवाजें आने लगी..
मैं बीच-बीच में उसे चूमने लगा ..
थोड़ी देर बाद वो उठी और उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया।
वो मेरा सीना चाटने लगी…
बहुत मजा आ रहा था…
फिर उसने मेरा पूरे आकार में खड़ा हुआ लंड हाथ में लिया और बोली- जान यह तो बड़ा मस्त लग रहा है ! बड़ा मजा आने वाला है !
फिर उसने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर उसे मुँह में लिया, फिर वो मुँह में लेकर उसे ऊपर नीचे करने लगी।
थोड़ी देर बाद बोली- यार तेरा कितना बड़ा है ! मेरे मुँह में ही नहीं आ रहा है..
मैं बोला- जान, अभी तेरी चूत को इस बड़े लंड से ही मजे आने वाले हैं…
वो फिर से लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी…
बहुत मजा आ रहा था.. मैं उसके स्तन दबा देता, उसकी चूत में ऊँगली भी डाल रहा था…
15 मिनट बाद रीना बोली- तेरा लंड है या कुछ और? मैं कितनी देर से तेरे पानी का इंतजार कर रही हूँ लेकिन ये है कि निकलता ही नहीं..
मैं बोला- यह मर्द का लंड है ! इतनी जल्दी हार नहीं मानेगा..
करीब दस मिनट बाद मैं झड़ गया और उसने मेरा पानी चाट लिया।
मैं बोला- अब खुश…?
बोली- हाँ ..
फिर मैं बोला- अब तेरी चूत की बारी है…
वो बोली- कब से मैं इसका इंतजार कर रही हूँ ! चलो शुरू हो जाओ…
फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड एक झटके में डाल दिया, वो चिल्लाई- आई माँ ! मर गई ऽऽऽ
मैं बोला- क्या हुआ?
बोली- इतनी तेज़ नहीं घुसाना चाहिए था ! तेरा है भी कितना मोटा और बड़ा…
फिर मैंने बहुत तेज़ गति में उसे चोदना शुरू कर दिया…
वो बोली- बहुत अच्छा लग रहा है !
फिर मैं अपनी गति में उसे चोदने लगा…उसके स्तन भी एक साथ दबाने लगा..
थोड़ी देर बाद वो झड़ गई, बोली- तुम चालू रखो…
करीब बीस मिनट बाद मैं भी झड़ गया।
आगे की कहानी बाद सुनाउंगा..
मुझे मेल करते रहें… Antarvasna
मेरा नाम विक्की है. मैं इटारसी का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 23 साल है. मेरा लंड 6′ का है. अभी मैं भोपाल में रहता हूँ.
अन्तर्वासना की सब कहानियाँ पढ़ कर मैं भी अपनी एक बात बताना चाहता हूँ.
एक दिन मैं कंपनी के काम से नागपुर गया था. पूरे दिन में करके मैं शाम को घूमने निकलता था.
एक दिन शाम को एक रेस्टोरंट में गया. वहाँ बहुत भीड़ थी, एक मेज़ खाली था. मैं वहाँ पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद सामने के मेज़ पर तीन औरतें आकर बैठ गई. सभी तीस की उम्र की होंगी. उनमें एक औरत बहुत खूबसूरत थी. उसने काली साड़ी पहनी थी. उसका जिस्म बहुत सुन्दर था. उसके बड़े-बड़े स्तन जैसे मेज़ पर ही पड़े थे, ऊपर से उसकी दरार दिख रही थी.
वो मेरी तरफ देख रही थी. पता नहीं नज़रों से कुछ बात हो रही थी. वो मुस्कुराई. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा कर बाहर चला गया. वो मेरे पीछे बाहर आई. मैं खड़ा हुआ उसे देख रहा था. मैंने हि्म्मत की और थोड़ा उसके पास गया और उससे हाय किया. उसने भी हाय किया.
फिर मैंने थोड़ी बात की- आप कहाँ रहते हो, क्या करते हो?
वो एक घरेलू महिला थी.
मैंने कहा- मैं बाहर से आया हूँ, यहाँ होटल में ठहरा हूँ. अगर आप चाहें तो होटल में बैठ कर कुछ नाश्ता करें और बाते करें, फिर घूमने जायेंगे.
वो बोली- ठीक है, पर सिर्फ दस मिनट हैं मेरे पास.
हम दोनों होटल पर अपने कमरे में गए, थोड़ी देर बात की. फिर मैंने कोल्ड ड्रिन्क मंगाया. वो मेरे बेड पर एक तरफ़ और मैं दूसरी तरफ़ बैठा था.
मेरी नज़र उसके वक्ष पर ही थी. वो भी जानती थी पर कुछ कह नहीं रही थी.
थोड़ी देर बाद उसने कहा- मुझे जाना है, देर हो रही है.
मैंने कहा- सिर्फ पाँच मिनट रुकिए.
पर वो चलने लगी. अचानक मैंने उसके हाथ को पकड़ा, वो बोली- प्लीज़, मुझे जाना है.
मैंने उसका हाथ पकड़ कर एक हाथ उसके कंधे पर रख दिया.
वो बोली- मुझे जाने दो!
पर चाहती तो वो भी वही थी.

मैंने देखा तो वो आँखें बंद करके जाने को कह रही थी. मैंने धीरे से उसके गाल पर चूम लिया. वो कसक उठी, उसने एक हाथ से मेरे मुँह को हटाया और कहा- प्लीज़, मुझे देर हो रही है.
मैंने उसकी कमर पर धीरे धीरे हाथ फिरा दिया. उसने कमर हिलाई और मुँह से स्स्स्स स्स्स्स आवाज़ निकालने लगी.
फिर उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा करा उसके वक्ष पर हाथ फिराने लगा. बहुत ही बड़े स्तन थे उसके, मेरे हाथों में भी नहीं आ रहे थे. मेरा लंड भी रेलवे इंजन की तरह धुंआ निकालने लगा. उसका एक हाथ पकड़ कर मैंने अपने लण्ड रखा.
उसने मेरी जिप खोलकर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया, थोड़ी देर चूसा. फिर मैंने उसको खड़ा किया और उसकी साड़ी निकाली. उसने अन्दर सफ़ेद ब्रा और पेंटी पहनी थी. वो बहुत ही सेक्सी लह रही थी. मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया, चूत बहुत गीली हो गई थी.
मैंने उसको नंगी करके बेड पे लेटा दिया, फिर उसकी चूत चाटने लगा. वो आआ ऊऊऊऊ… स्स्स्स्स… करने लगी.
फिर उसकी कमर के नीचे तकिया रख दिया. उसकी चूत का दरवाज़ा मेरे खड़े लंड को आमंत्रण दे रहा था. मैंने अपना सुपारा उसकी चूत के ऊपर रगड़ा तो वो बोली- जल्दी डालो! ऐसे तड़पाओ नहीं!
धीरे से लंड उसकी चूत में डाला और अन्दर-बाहर किया…
मुझे बहुत मजा आ रहा था. वो आआअ… स्स्स्स स्स्स्स चोदो! चोदो! कह रही थी.
मैं भी एक भूखे शेर की तरह उसकी चूत को घिसने लगा. थोड़ी देर बाद वो अपने आप झटके मारने लगी. मुझे मालूम था कि वो झड़ने वाली है. उसने जोर से मेरे लंड पर ही योनि-रस छोड़ दिया.
मैं तो अपनी मस्ती में चालू ही था. थोड़ी देर बाद वो दोबारा झड़ गई…
वो पूरी तरह थक गई थी, वो बोली- जल्दी करो! मुझ में हिम्मत नहीं!
फिर मैं भी झड़ गया.
फिर थोड़ी देर बात करके वो अपने घर चली गई. मैं वहाँ दो दिन रुका था, दो दिन में मैंने उसको 5 बार चोद लिया.
मानो या ना मानो उसको चोदने जितना मजा आज तक मुझे नहीं आया.
अब भी जब मैं नागपुर जाता हूँ तो उसको बहुत ही प्यार करता हूँ और सेक्स करता हूँ.
मैं एक क्लब रिसॉर्ट में रिसेप्शन पर Antarvasna काम करता हूं। मेरी उम्र २९ साल है। हमारे यहाँ रूम भी है और हेल्थ क्लब भी है। हमारे यहाँ बहुत सी लड़कियां कसरत करने आती हैं और मैं उनको रोज देखता हूं। किसी के बोब्श बड़े हैं तो किसी की गांड देख के मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है। मैं सोचता रहता हूं कि किस दिन ऐसी प्यारी आंटी चोदने को मिलेगी लेकिन वो दिन आ गया।
एक दिन एक आंटी मेरे पास आई और कहा कि आप का फोन नम्बर हमें दो, हमें काम है और फ़िर पूछा कि आप कब फ्री होगे? हमने हमारा ओफ़िस टाइम बताया। फ़िर वो चली गई। मैं उनके बारे में सोचने लगा कि ऐसा क्या काम होगा। दो दिन बीत गए, वो सुबह एरोबिक में भी नही आ रही थी और थोड़े दिनों के बाद अचानक उनका फोन आया कि मैं कामिनी बोल रही हूं। मैं आप के वहां रोज सुबह आती थी, मैंने आप से आप का फ़ोन नम्बर लिया था।
हां ! हमने कहा- हां ! बताओ मैडम क्या काम था?
तो उन्होंने कहा कि आप हमारे घर अभी आ सकते हो,
तो हम ने उनका पता मांगा तो वो हमारे यहाँ से करीब ही था तो हमने कहा कि हम १० मिनट में आते है
और मैं उनके घर पे पहुंचा और डोर बेल बजाई तो वो आंटी दरवाजा खोलने आई और हमे अंदर बुलाया।
उन्हें देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो गया, उनकी सुंदरता की क्या तारीफ करू, ऐसा नही था कि मैंने पहले चुदाई नही की थी। मैं पहले से ही शादीशुदा हूं, लेकिन मुझे चुदाई का बड़ा शौक है। मैं सबको वोही नजर से ही देखता हूं। आंटी की उचाई ५.५’ थी और ३६.२०.३८ की फिगेर थी और उनका गोरापन देख के उसको छूने से भी डर लगे, ऐसी हसीन थी। उन्होंने हमें उन के बैठक रूम में बिठाया था और वो हमारे लिए पानी ले के आई, तो हम ने पानी पीने के बाद जब उन्हें पूछा कि क्या काम है तो उन्होंने थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा बहुत जल्दी में हो?
हमने कहा- नही !
लेकिन वो मेरी बात काटते हुए बोली- डर लगता है? जब मैं सुबह आती थी तब देखते हुए डर नही लगता था? आज जब तुम्हारे सामने बैठी हूं तो क्या डर रहे हो?
मैंने उनसे पूछा कि आप के पति?
वो बोली वो देहली गए है काम से और वो मेरे पास आके बोली चलो हम दूसरे कमरे में जाते हैं मैं खड़ा हो के उनके पीछे चलने लगा हम उनके कमरे में गए तो उन्होंने पलट के उनकी बाहों में भर लिया और मैंने उन्हें पकड़ लिया।
थोडी देर ऐसे ही हम एक दूसरे को सहलाते रहे। फ़िर मैंने उसकी साड़ी निकाल दी। उसके सफेद बदन पे रेड ब्लाउज और भी खूबसूरत लगता था। मैं उसे निकालता रहा कि उसने मेरा शर्ट और पैन्ट दोनों उतार दिए। हम दोनों नंगे हो गए थे। वो मुझे पूरा नंगा देख के बोलने लगी- मेरे राजा, तुम्हें जबसे देखा है तब से सोचती थी कि तुम्हें एक दिन चोदूंगी।
हमने भी कहा- ये तो हम भी सोचते थे, आज मौका मिला है। ये बोल के हमने उनको उठा के बेड पर डाल दिया। फ़िर उसके बालों में हाथ डाल के उसको किस की। वो भी इतनी उतेजित हो गई कि उसने मेरे मुंह में अपनी जीभ डाल के चूसने लगी और मैं उसके बूब्स दबाने लगा और उसकी निपल थोडी ब्राउन सी थी, मैं उसको मसलने लगा वो चीख पड़ी- धीमे से !
हमने कहा अब जो भी होगा ऐसे ही होगा जान ! वो मेरे लण्ड को पकड़ के मसलने लगी, बोली- कितना बड़ा है !
मैंने कहा- अभी देख लो कि कहां तक जाता है।
वो बोली- पहले मैं इसे चूस लूं। हम ६९ के पोज़ में हो गए। मैंने भी उसकी चूत चू्सना शुरू किया तो वो उछल पड़ी।
फ़िर मैंने उसे नीचे उतारा और उस पे मैं सवार हो गया और मेरा लण्ड उसकी चू्त में जाने को बेहाल हो उठा था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाला तो वो चिल्ला के बोली निकाल लो। फ़िर मैं पूरा अन्दर ही रहने देकर उसको सहलाने लगा और उसके बूब्स को चू्सने लगा। थोडी देर में उसने नीचे से धक्का देना शुरू किया और फ़िर मैंने धीरे धीरे हिलना भी स्टार्ट कर दिया फ़िर तो वो उछल उछल के जैसे वो मुझे चोद रही हो ऐसे चोदने लगी फ़िर मैंने उसे कहा कि कुतिया की तरह हो जाओ।
फ़िर तो बाकी ही क्या रहा। चोद दे ठोक दे ठोक ! वो चिल्लाती रही और मैं चोदता रहा। ३० मिनट के बाद मेरा पानी उसकी भोस को भरने लगा। वो तो पूरे टाइम में ५ बार हो चुकी थी और बुरी तरह थक गई थी फिर मेरे लण्ड को मुंह में लेते बोली ऐसा आज तक लण्ड नहीं देखा।
वो आज भी जभी उसका मन करता है मुझे बुलाती है और उसकी ५ सहेली से भी मिलवाया है। हम टाइम होने पे मिलकर अलग मजा लेते हैं मैं उनका लेता हूं और वो मेरा! Antarvasna
ट्रेन के डिब्बे में माहॉल शांत होता जा रहा था Sex Stories क्योंकि रात काफ़ी हो चली थी और अधिकतर लोग सोने लगे था या सोने की तैयारी कर रहे थे। मैं भी सोने की कोशिश करने लगा पर नींद थी कि आने का नाम ही नहीं ले रही उधर लॅंड कुछ देर पहले के सीन को याद कर के टनटनाता जा रहा था। फिर धीरे धीरे मेरी भी पलकें भारी होने लगी। जैसे ही नींद का झोंका आया तभी लगा कि किसी ने मुझे उठा दिया है। आँखे खोली तो आंटी सामने खड़ी थी और फिर वो बाथरूम की तरफ चली गयी। मैं उसे देखता ही रहा, समझ मैं नही आ रहा था कि क्या करना चाहिए। तभी उसने पलट कर देखा और मुझे पीछे आने का इशारा किया। मैं उसके पीछे पीछे टाय्लेट में जा घुसा। शुक्र था किसी ने देखा नहीं। उसने मेरे अंदर घुसते ही दरवाज़ा बंद कर दिया और झट से मेरा लंड पकड़ लिया। लंड तो पहले से टनटनाया हुआ था। उसने मेरी पैंट खोल कर नीचे खिसका दिया और गीला अंडरवेयर भी नीचे कर दिया। फिर उसे कसके पकड़ के उपर नीचे करने लगी पर मुझे कभी कभी दर्द भी होता क्योंकि लौड्ा तो खड़ा होने के बाद बिल्कुल पेट से जा लगता था। और किसी ने उसकी इस तरह मालिश नहीं की थी। आंटी ने अब अपना चेहरा मेरे लंड पर झुकाया तो मैं बोला कि ये गंदा हो रहा है मैने अभी इससे नही धोया है।
वो कहने लगी –अरे इसको गंदा नहीं कहते। इसमें ही तो सारा मज़ा है। कितनी प्यारी गंध आ रही है इसमें से। ऐसा कहते हुए उसने मेरे लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं बड़ी तेज़ी से झड़ने की ओर बढ़ने लगा। मैने कहा- आंटी रुक जाओ नहीं तो मेरा माल फिर से निकल जाएगा। आंटी ने लोड्ा चूसने की रफ़्तार तो कम कर दी पर चूसना जारी रखा। वो इस तरह चूस रही थी कि मुझे लगा कि मैं ज़्यादा देर तक नहीं टिक पाऊंगा। जब मेरा स्खलन नज़दीक आ गया तो मैंने चाहा कि उसके मुँह से लंड निकाल लूं पर उसने दाँत से हल्के से काट कर इशारा किया कि ऐसे ही रहो। इससे पहले कि मैं कहता कि निकलने वाला है उसे पहले ही लंड ने रस की बौछार करनी शुरू कर दी।
आंटी तो एक नम्बर की लंड चूसक्कर थी। एक भी बूँद नीचे नहीं गिरने दी। मैं लंबी लंबी साँसें ले रहा था और उसने अपना मुँह खोल कर मेरा रस मुझे दिखाया फिर उसने गले के नीचे उतार लिया। कैसा टेस्ट था- मैंने कहा। कहने लगी बहुत अच्छा तुम भी चाखोगे क्या। अपना नहीं पर आपका। मैंने कह दिया कि जो होगा देख जाएगा पर अगर इसने चूत दिखा दी तो जिंदगी की पहली चूत के दर्शन हो जाएँगे। फिर उसने मेरे लंड को सहलाते हुए कहा कि यहाँ जगह नहीं है और वक़्त भी। फिर कभी देखेंगे, मन वहाँ से जाने का बिल्कुल ही नहीं हो रहा था। लंड ने इस बार खड़ा होने में थोड़ी देर लगाई पर फिर पहले की तरह टनटना गया।
मेरे उछलते हुए लंड को देख कर आंटी ने कहा कि उसे कम उमर के लड़के इसीलये तो ज़्यादा पसंद हैं क्योंकि कई बार झड़ने के बाद भी उनका लंड ज़रा सा हाथ लगते ही खड़ा हो जाता है। फिर वो झुक कर खड़ी हो गयी और कहा कि पीछे से डालो। मैंने पीछे से लंड सटा कर धक्का मारा तो उसके गांड के छेद से रगड़ ख़ाता हुआ चूत को रगड़ता हुआ निकल गया। वो समझ गयी कि लाड़ला बहुत ही अनाड़ी है।
उसने हाथ नीचे से लगा कर अपने चूत के छेद पर भिड़ाया और कहने वाली थी कि अब डालो पर सुनने की फुरसत किसे थी।ये डर था कि कहीं चूत में घुसने से पहले ही मामला खराब न हो जाए। लेकिन जैसे ही आंटी ने अपने छेद पर रखा । लौड्ा सरसराता हुआ चूत को चीरता हुआ जड़ तक समा गया। इतना अनुभवी होने के बावजूद उसके मुँह से कराह निकल गयी। मार डाला। धीरे डाल।। फाड़ेगा क्या।
मैं अपनी धुन में धक्के पर धक्के लगाया जा रहा था। अब मेरे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था कि मैं इतनी उमर की औरत को इतनी अच्छी तरह चुदाई कर रहा हूं। मैं और कस कस कर धक्के मार रहा था। तभी आंटी का शरीर अकड़ने लगा। पूछा कि क्या हुआ आंटी तो कहने लगी गयी … गयी … आज तो मधु … समझ में नहीं आ रहा था कि अब ये मधु कौन है और कहाँ गयी।
मेरा ध्यान चोदने पर नहीं था पर मैं कस कस कर धक्के पर धक्के लगाये जा रहा था। तभी आंटी के शरीर ने झटका लिया और वो शांत पड़ गयी। चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया था जिसे पूरी चूत बुरी तरह फिसल रही थी। तभी मैंने ज़ोर ज़ोर से झटके मार मार के अपना ढेर सारा रस भी उसकी चूत में डाल दिया। हम दोनो हाँफ रहे थे। जैसे तैसे साँसों पर काबू पाया और फिर मुँह धोते हुए कहने लगी कि अब तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है। मेरी भी टाँगों में सिहरन हो रही थी। फिर ये कहती हुई कि थोड़ी देर बाद आना वो दरवाज़ा खोल कर निकल गयी।
२ मिनिट बाद मैं निकला। आस पास सब सोए पड़े थे । शुक्र मनाता हुआ अपनी सीट पर जा कर लेट गया।
आगे की कहानी अगले पार्ट में लिखूंगा । Sex Stories
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