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मेरा नाम जय है, मैं Antarvasna पचमढ़ी का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 26 वर्ष है। मैं बहुत ही मिलनसार और सेक्सी हूँ। मेरा लंड काफी बड़ा और आप कह सकते हैं कि बस मस्त है। मेरे दोस्तों का कहना है- सिंधन की चूत, पंजाबन का दूध, हिमालय की ठण्ड और जय का लंड इनका कोई मुकाबला नहीं है।
मैं आज से 5 साल पहले भोपाल आ गया क्योंकि मुझे भोपाल में अच्छा लगता है। मैंने पंचशील नगर में कमरा किराये पर लिया। नीचे मकान मालिक और ऊपर मेरा कमरा, मेरे बाजू में एक और किरायेदार, जो ड्रायवर था, पति पत्नी रहते हैं। मेर कमरे में बाथरूम नहीं था तो मैं मकान मालिक का बाथरूम इस्तेमाल करता हूँ और मेरे कमरे की खिड़की से बाथरूम की झलक देखी जा सकती है जो मेरा टाइम पास हो गया है।
मालिक बैंक मैंनेजर है, उसके दो लड़के हैं बड़ा बाहर ही रहता है, छोटा लड़का मेरी उम्र का, नाम राकेश है, नशा भी करता है। उसके बाद सबसे छोटी उसकी लड़की मीनू जो स्कूल में पढ़ती है, रंग गोरा, भरपूर बदन, गोल-गोल मोटी गांड, बड़े-बड़े बोबे और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी!
मैं भोपाल आकर घर को बहुत याद करता था क्योंकि वहाँ खूब चुदाई करता था। यहाँ कोई जुगाड़ ही नहीं, बस मुठ ही मारते रहो।
जब भी मैं नहाने जाता, नंगा होकर खूब नहाता और मीनू की ब्रा और पेंटी से खूब खेलता। उसे पहनकर नहाता और कभी कभी उसे लंड में फँसाकर मुठ मारता। पैसे की मेरे पास कमी नहीं है, घर से खूब आते रहते हैं। मैंने मकान मालिक को बताया कि मैं पढ़ाई करता हूँ। कुछ दिन ऐसे ही गुजरते गए, कभी कभी मीनू को, कभी उसकी माँ को मैं बाथरूम में देखता, पूरा तो दिखता नहीं था पर जितना दिखता था मेरे मौसम बनाने के लिए काफी था।
मैं होम थियेटर लाया। मीनू को गाने सुनने का बहुत शौक था। जब भी उसके पसंद का गाना बजता, वो ऊपर मेरे कमरे के पास घूमती रहती और गाने सुनती या बाजू वाली भाभी के पास बैठती। पड़ोस में एक ही पड़ोसी के कारण मेरी उनसे अच्छी दोस्ती हो गई। मैं भाभी के कमरे में और कभी भाभी मेरे कमरे में घंटों बातें करते।
मैंने धीरे धीरे भाभी से भैया को न बताने की कसम देकर शादी के पहले उनके दोस्त से उनकी चुदाई की पूरी कहानी पूछ ली।
भाभी ने मुझसे पूछा तो मैंने कहा- अभी कोई मिली नहीं!
भाभी से मेरी खूब गन्दी गन्दी बातें होने लगी। मैंने सोचा क्यों न भाभी को ही चोद लिया जाये।
एक दिन मैंने बातें करते करते भाभी के बोबे दबा दिए। भाभी ने ज्यादा कुछ नहीं कहा तो मैं भैया के जाने के बाद खूब बोबे दबाता और भाभी को गर्म करता।
एक बार मैंने भाभी के बोबे खूब दबाये और उसकी साड़ी के अन्दर जबरदस्ती उसकी चूत में ऊँगली डाल दी। भाभी की चूत गीली हो गई। मैंने भी ऊँगली अन्दर-बाहर की और भाभी की चूत के चने को रगड़ दिया तो भाभी तो कोयल जैसे कूकने लगी। मैंने सोचा- बेटा जय! आज तेरा उपवास खुल गया!
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और भाभी को पकड़ा दिया।
भाभी ने कहा- यह तो तुम्हारे भैया के लण्ड से भी ज्यादा पहलवान है।
रगड़ा पट्टी में भाभी झड़ गई और हिला हिला कर मेरा मुठ मार कर वीर्य निकाल दिया और बोली- यह तो रो रहा है।
मैंने 5 मिनट तक कुछ नहीं कहा और फिर से लंड खड़ा करके बोला- भाभी, लो यह लड़ने के लिए तैयार है! अब जीत कर बताओ!
भाभी बोली- तुमसे क्या जीतना, मैं तो तुमसे हारना चाहती हूँ, मगर यह मैं नहीं कर सकती क्योंकि मेरे पेट में बच्चा है।
मैं उदास हो गया।
मुझे देखकर भाभी ने मेरा लंड पकड़कर मुँह में भर लिया और चूसने लगी। मैं तो पागल सा हो गया। कभी किसी ने मेरा लंड नहीं चूसा था। मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी। मैंने लंड छुड़ाना चाहा पर भाभी कहाँ मानने वाली थी। पूरी आइसक्रीम चूस कर ही दम लिया। लेकिन लंड की भूख तो चूत से ही मिटती है, भाभी के गर्भवती होने के कारण सब लफड़ा हो गया।
मैं अपने कमरे में गया और सो गया।
दूसरे दिन भैया के जाते ही भाभी से गपशप चालू हो गई। मैंने कहा- भाभी, मीनू तुम्हारे घर आती है, उससे दोस्ती करा दो!
भाभी ने कहा- यह तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है।
भाभी ने अगली दोपहर मीनू को घर पर बुलाया और मुझ से मिलाया। मीनू से मेरी दोस्ती की बात कही।
उसने सोच कर बताने को कहा और अगले दिन हाँ कर दी।उसकी हाँ सुनते ही मैं मीनू की चुदाई के सपने देखने लगा। कभी उसको स्कूल से घुमाने ले जाता, मैं उसे चूमता तो उसे बुरा लगता।
अब हम दोनों हमारे ही कमरे में मिलने लगे। मीनू का जन्मदिन आया, वो सुबह ही मेरे कमरे में आई और मुझे चूम लिया।
मैंने भी उसे बर्थ डे की बधाई दी और पूछा- तुम्हें क्या तोहफ़ा चाहिए?
मीनू ने कहा- तुम जो भी प्यार से दोगे, मैं ले लूंगी।
मैंने फिर से पूछा, उसने फिर वही कहा।
मैंने कहा- अपनी बात से मुकरोगी तो नहीं?
उसने कहा- बिल्कुल नहीं!
मैंने भी देर न करते हुए कहा- मैं अभी गिफ्ट देना चाहता हूँ।
मैंने मीनू हाथ पकड़कर खींचा और बिस्तर पर पटक लिया। वो सुबह सुबह नहा कर आई थी, बाल खुले थे, टॉप-स्कर्ट पहने हुए थी।
मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बोबे पहली बार दबाये।
मीनू सिसककर बोली- यह क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- गिफ्ट दे रहा हूँ।
इस पर मीनू बोली- ऐसे भी गिफ्ट देते हैं?
मैंने कहा- अभी तुम ही ने कहा था कि मैं बुरा नहीं मानूंगी, जो भी देना चाहो, दे देना।
मैं तो सो कर उठा था, तो सिर्फ चड्डी में था। मेरा सामान तो सुबह सुबह ही टन्ना गया।
मैंने समय ना गंवाते हुए उसके बोबे दबाना जारी रखा और मुँह में जीभ डालकर किस करने लगा। मीनू दो ही मिनट में अंगड़ाई लेते हुए मेरा साथ देने लगी। बोबे दबाते हुए उसकी टॉप हटा दी, ब्रा के हुक भी खोल दिए और स्कर्ट खींच कर अलग कर दी। मीनू सिर्फ पेंटी में गजब लग रही थी।
उसके बोबे के गुलाबी-गुलाबी चुचूकों को मैंने अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। मीनू कराहने लगी। चूसते चूसते उसकी पेंटी में ऊँगली डाली, उसकी झांटों में उन्गली घुमाते हुए मैंने अचानक उसकी चूत में घुसा दी।
मीनू उन्ह आंह आइंह कर रही थी, उसकी चूत से चिकना चिकना पानी निकल रहा था।
मैंने चड्डी अलग की और मीनू की चूत में लंड रगड़ने लगा। रगड़ते रगड़ते उसके कन्धों को पकड़कर ज्योंही लंड मीनू की चूत में एक ही झटके में आधा घुसा, मीनू चिहुंक उठी और धक्का देने लगी। मैंने भी लंड चूत की रगड़ा पट्टी चालू रखी उसकी चूत को घिस डाला, पूरा लण्ड अन्दर बिठा दिया।
अब मीनू मुझे कस कर पकड़े थी और मैं उसे बस चोदे जा रहा था। वो आइया उम्नह आहा ओई कर-कर के चुदवा रही थी।
मैंने उसको उस दिन दो बार चोदा, बड़ा मज़ा आया पर एक बात अखरी कि मीनू की चूत से खून नहीं निकला। मेरे पूछने पर भी वो अंजान बनी रही। खैर मुझे क्या!
उस दिन के बाद में दो साल तक जब भी मौका मिलता, मीनू को खूब चोदता!
भाभी को चुदाई की मिठाई भी खिलाई।
पर अब मीनू की पिछले साल शादी हो गई है और अब मैं भाभी को चोदकर काम चला रहा हूँ।
मेरी कहानी आपको कैसी लगी? Antarvasna
यह मेरी सच्ची कहानी है। मैं एक स्मार्ट, सेक्सी और Hindi Sex Stories सुन्दर लड़का हूं। वैसे तो मैंने बीस बाईस लड़कियों के साथ सेक्स किया है पर यह मेरी प्रेमिका के साथ पहली चुदाई थी।
१९९९ की बात है। मैं अपनी मौसीजी को देखने पी.जी.आई. लखनऊ गया था। वहां पर मुझे मेरी प्रेमिका से मुलाकात हुई। उसकी शादी लखनऊ में मेरी मौसी के खानदान में हुई थी। मैं और मेरे मामा सुबह ही पी.जी.आई. पहुंच गए थे। मैंने जब रितु को देखा तो मैं बहुत खुश हुआ। वो रात भर मौसी की देखभाल करने के लिए जागी थी।
थोड़ी देर बाद मौसी ने मुझसे कहा कि सैम तुम रितु को कमरे में ले जाओ, वो रात भर की जागी हुई है, उसे फ़्रेश होना है, नहाना धोना है। मौसी का घर पी.जी.आई. से बीस किलोमीटर दूर है, इसलिए मौसाजी ने हस्पताल के कैम्पस में कमरा ले रखा था। मैं रितु को लेकर कमरे में चला गया। रास्ते भर वो मुझसे मेरा हालचाल पूछती रही और कहती रही कि उसे मेरी बहुत याद आती है। मैंने कहा- तुमने तो शादी कर ली, मैंने भी शादी कर ली लेकिन मैं अकसर तुम्हारी याद में खोया रहता हूं। थोड़ी देर बाद हम कमरे में आ गए।
मैं तो बिस्तर पे जाकर सो गया, उसने कहा कि मैं नहा लेती हूं। वो रात भर की जागी हुई थी।बाथरूम में गई लेकिन भीतर से बंद करने के लिए चिटकनी नहीं थी। उसने सोचा कि और कोई तो आएगा नहीं ,वो अपने सारे कपड़े उतार के नहाने लगी क्योंकि उसे उन्हीं कपडों में घर भी जाना था, अचानक दरवाजा खुल गया। वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी। मै बेड पे लेटा दरवाजे की तरफ़ ही देख रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे को देखा। वो उसी हालत में दरवाजे को बंद करने लगी।
नहा के वो जब बाहर आई तो नजरे नहीं मिला पा रही थी। अचानक वो मेरे बगल में आ के बैठ गई, मुझसे कहने लगी …आइ लव यू सैम …आज मेरे साथ जो हुआ पहले कभी नहीं हुआ ..मैंने मौके की नजाकत को समझते हुए उसे अपनी बाँहों में भर लिया किस करने लगा। जीभ से जीभ टकराते ही मानो ऐसी हलचल होने लगी जैसे दो बिछडे प्रेमी आज मुद्दत के बाद मिले हों। हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े वहीँ पे उतार फेंके। बदन की गर्मी शोलों जैसी लग रही थी। उसकी चूची जैसे कह रही थी आज सिर्फ़ मुझे चूसो, मैं कभी उसके होंठ चूसता तो कभी उसकी चूची।
मैंने जब उसके बुर में ऊँगली रखी तो उसमे से पानी निकल रहा था। उसने मेरे लंड पे हाथ जब रखा तो मेरा लंड फनफना उठा। मैंने लन्ड को उसके मुंह पे रखा तो उसे वो चूसने लगी और बोलती जा रही थी ..आई विल किल यू ,फक मी ..फक मी ..!!!!!!!!!!!
मैंने उससे पूछा क्या तुम्हारे साथ तुम्हारे पति ये सब नहीं करते हैं क्या …?
वो बोली- उनके पास टाइम नहीं है ! १०-०५ मिनट में ही सब कुछ करके सो जाते हैं …!!!
मैंने सोचा कि आज इसे जम के चोदूंगा ..मेरा लंड जब तन्नाने लगा तो मैंने उसकी बुर में ७ इंच का लंड डाला तो वो तड़प उठी। मैंने चार धक्के ही लगाये थे उसकी बुर से खून आने लगा।
मैंने पूछा कि इतना अंदर कभी नहीं गया क्या?
उसने कहा नहीं मेरे पति मुझसे सेक्स नहीं कर पाते हैं, उनका लंड छोटा है .तुमने तो कमाल कर दिया …!
उसके बाद १० मिनट तक चोदते चोदते मै भी झड़ गया। १५-२० मिनट बाद वो मेरा लंड अपने मुंह से फिर चूसने लगी। मेरा लंड इतना लंबा और मोटा हो गया कि मैंने २०-२२ मिनट तक उसे चोदा तब जाके झड़ा…उसे बहुत आनद मिला ..
रितु की बुर में जो मजा मिला शायद ही कभी मिला हो …
मैं आज भी उसके सम्पर्क में हूँ … वो आज मेरे बच्चे की माँ भी है .वो आज लखनऊ में है और मैं उससे २०० किलोमीटर दूर।
अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगी हो तो मुझे इ-मेल करें। Hindi Sex Stories
मेरा नाम राहुल राज है और Antarvasna मैं रेल गाड़ी से भोपाल से मुम्बई जा रहा था मेरे आरक्षित बर्थ के सामने वाले बर्थ पर एक खूबसूरत कमसिन लड़की बैठी हुई थी। उसके माता पिता शायद ऊपर वाली बर्थ पर थे.
रात को करीब 11 बजे जब ट्रेन के सभी यात्री सोने की तैयारी कर रहे थे, मैं भी अपने बर्थ पर सोने की तैयारी कर रहा था। तभी अचानक मेरी सामने वाली बर्थ से उस लड़की की आवाज आई- क्या आपको नींद आ रही है?
मैँने कहा- नहीं!
तो लड़की ने कहा- तो फिर कुछ बात करिये न! मुझे नींद नहीं आ रही.
लड़की के माँ बाप सो गये थे ऊपर वाली बर्थ पर। फिर मैंने लड़की से पूछा कि आप क्या कर रही हैं?
लड़की ने कहा- मैं ऐम बी बी ऐस की तैयारी कर रही हूँ।
फिर लड़की अपने बर्थ से उठ कर मेरे बर्थ पे आ गई। दिसम्बर माह होने के कारण सरदी अपने पूरे शवाब पर थी तो मैंने उसे अपना कम्बल ओढ़ने को कहा। लड़की मेरे साथ कम्बल में मेरे से सट के बैठ गई। उसके जवान शरीर की खुशबू मेरे जहन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी। फिर उसने मेरे घुटने पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर धीरे धीरे उसके हाथ की हरकत बढ़ने लगी।
मैं समझ गया कि ये लड़की क्या चाह रही है, फिर मैंने अपनी पैन्ट की जिप खोल कर अपना सात इंच का लन्ड बाहर निकाल कर उस के हाथ में पकड़ा दिया। लड़की काफी चुदासी लग रही थी । उसने झट से मेरे लन्ड को अपने हाथों में ले लिया और जोर जोर से सहलाने लगी। तब मैंने उसे अपने बर्थ पर लिटा लिया, मैँने उसके लिप पर लऽऽऽम्म्म्बा किस किया तो लड़की के सारे बदन में सिरहन सी दौड़ गई। उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया।
मैंने उसकी शर्ट की बटन को खोलना चालू कर दिया, वो कुछ नहीं बोली और इस तरह हो गई कि उसके मक्खन जैसे स्तन मेरे सामने आ गये। मैंने उसकी ब्रा सरका कर उसके स्तन चूसना चालू कर दिया।
कुछ देर बाद वो सीईई ईईई कर के मेरे लंड पर टूट पड़ी और मेरे लंड को जो तीन इंच मोटाई का है को लालीपाप की तरह चूसने लगी। मैंने उसकी पैंट के हुक ख़ोल कर उसकी पेंटी में हाथ डाल कर उसकी चूत में उंगली करना चालू कर दिया।
वो सीऽऽ ई कर के पैर फैला के लेट गई। मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ना चालू कर दिय। वो आह उह उई श श करने लगी। जब मैंने अपने लंड को उसकी चूत में ठेला तो चार ईन्च तक अंदर चला गया। उसके मुँह से अजीब अजीब सी आवाज़ें निकलने लगी और वो अपने चूतड़ हिलाने लगी।
मैंने एक धक्का और दिया तो आधे से ज्यादा लंड अंदर चला गया। उसकी आँखों से आँसू आ गये, फिर भी बोले जा रही थी- और अंदर तक डालो!
मैंने अपना पूरा लंड उस की चूत में डाल दिया और ट्रेन के इंजन की तरह धक्के मारना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वो लड़की झड़ गई। मैंने अपने लंड को चूत से निकाल कर उसके मुंह में दे दिया। वो मेरे लंड को आईसक्रीम की तरह चूसने लगी।
मैं धक्के मारने लगा फिर मैं उसके मुँह में झड़ गया। वो मेरी सारी क्रीम को पी गई और मेरे लंड को चाट कर साफ कर दिया।
इस तरह मैंने रात में उसको कई बार चोदा। फिर मेरा स्टेशन आ गया।
तो आपको ये कहानी कैसी लगी मेल जरूर करना! Antarvasna
लॉकडाउन लगने पर मेरी बुआ की अविवाहित बेटी जो कॉलेज में पढ़ रही थी, मेरे किराए के फ्लैट में मेरे साथ रहने आ रही थी. मैं उसकी जवानी की ओर आकर्षित हुआ जा रहा था.
अब आगे सेक्सी कॉलेज गर्ल की कहानी:
मोनी ने सामान निकालते हुए, चहकते हुए कहा- अरे नीलू! तू इतना लम्बा है यार … बाप रे बाप! पाँच साल छोटा होकर भी मेरा बड़ा भाई लग रहा है!
“हे हे दीदी … आप न … बिल्कुल नहीं बदली!” मैंने झेंपते हुए कहा.
कहते हुए मैं सामान लेने मोनी के पास पंहुचा.
हम गले मिले, हमें गले लगते हुए टावर के गार्ड ने भी देखा.
“अरे वाह भाई … इतना हैंडसम हो गया है तू … और इतनी तगड़ी बॉडी शॉडी भी बना रखी है … सारी दिल्ली की लड़कियाँ पटाने का इरादा है क्या?” मोनी ने फिर मज़े से भरपूर लहजे में कहा.
“बस बस … बाकी की टांग ऊपर फ्लैट चलकर खींचना दीदी!” मैंने भी हँसते हुए जवाब दिया.
मोनी 3 बड़े सूटकेस में अपना सारा सामान पैक कर लायी थी.
हम दोनों ने मिलकर सामान खींचना शुरू किया और लिफ्ट की तरफ चल दिए.
मैंने कनखियों से देखा, टावर के गार्ड ने मोनी को नज़रें छुपकर ऊपर से नीचे तक पूरा चेक आउट किया.
खैर, हम सामान लेकर उन्नीसवीं मंजिल पर पहुंचे.
आलीशान कॉरिडोर से चलते हुए मोनी की आँखें बड़ी हो रही थी.
कुछ ही सेकंड में हम मेरे फ्लैट के सामने थे.
मैंने फ्लैट खोला और हमने अंदर कदम रखा.
मोनी के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो फ्लैट के अंदर घुसते हुए चौगुनी हो गयी.
ऐसा लग रहा था किसी बच्चे के हाथ उसका फेवरेट खिलौना लग गया हो. मोनी ने घूम घूम कर पूरे फ्लैट का जायज़ा लिया, खासकर बालकनी और वहां से मिल रहा व्यू देखकर तो वो मुग्ध हो गयी.
“वाह नीलू!! तू तो राजा की तरह रहता है, इतनी महंगी जगह पर … पहले कभी बुलाया क्यों नहीं मुझे? इतना सेक्सी फ्लैट हो तो मैं 3 घंटे भी सफर करके आती!”
मैंने ध्यान दिया, दीदी की भाषा में मॉडर्न शब्द बेपरवाह रूप से आये जा रहे थे.
“दीदी ये सब छोड़ो … ये बताओ क्या लोगी आप? चाय, कॉफ़ी, ठंडा?”
“बियर मिलेगी?”
“व्हाट!?”
मोनी ने एक ठहाका लगाया और बोली- तूने आज तक कुछ ट्राई नहीं किया? मुझे बेवकूफ मत समझ बेटा … तेरी बड़ी बहन हूँ मैं … इतने सालों से दिल्ली एन सी आर में रह रहा तू … संस्कारी किसी और के सामने बनना!
“हे हे दीदी … ट्राई तो बहुत कुछ किया है … बस आप मुँह मत खोल देना किसी के भी सामने इन सब बातों को लेकर … आप जानती ही हो कुछ चुगलखोर हैं हमारे खानदान में … काना-फूसी में सब बातें फैला देते हैं … फिर आपको पता ही है हमारी साइड की कम्युनिटी … काफी ऑर्थोडॉक्स और कन्सेर्वटिव है … तिल का ताड़ बन जाएगा.”
मोनी मुझे काटते हुए बोली- अरे पागल है क्या … मेरे मुँह से तो सपने में भी ये सब नहीं निकल सकता कानपुर में … भाई तू मत बोल देना गलती से भी कहीं भी … तू तो फिर भी लड़का है, बच जाएगा … मैं तो लड़की हूँ … तेरे बुआ फूफा कितने खतरनाक है तू भी जानता है … हिंट भी लगा तो मेरी लंका लग जाएगी … पी.एच.डी. वगैरह सब छोड़कर घर बिठा देंगे … क्या पता गुस्से में शादी ही करा दें!
मोनी एक सांस में बोलती चली गयी.
“अरे अरे … रिलैक्स रिलैक्स … कोई किसी को नहीं बोल रहा दीदी … मैं तो थोड़ा सतर्क था बस आपसे पहली बार बात हो रही इस बारे में इसलिए!”
मोनी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी- हाँ भाई, जानती हूँ. तुझ पर अंधा विश्वास कर सकती हूँ मैं. बचपन से सारे भाई बहनों में हम दोनों की खूब पटती थी … पता नहीं क्यों मिलना जुलना काम हो गया … मेरी पढ़ाई तेरी पढ़ाई और पता नहीं क्या क्या … चल कोई नहीं, अब तो अच्छे से टाइम मिला है … दोनों भाई बहन खूब गप्पें मारेंगे!”
मैं कुछ बोलता इसके पहले मोनी सोफे से उठी- तू बैठ नीलू, चाय मैं बनाकर लाती हूँ. कड़क अदरक वाली मसाला चाय, अपनी बहन के हाथ की चाय पीकर देख आज, मज़ा न आये तो बोलना!
यह कहकर मोनी सीधे किचन में चली गयी, पीछे पीछे मैं भी.
किचन व्यवस्थित था तो कोई भी सामग्री ढूंढने में दिक्कत नहीं हुई.
मैं किचन में प्लेटफार्म पर ही बैठ गया.
मोनी ने गैस पर चाय चढ़ाई और हम दोनों गपशप करने लगे.
काफी बातें करने के बाद चाय बनने को थी ही तभी मोनी बोली- देख नीलू, अब मैं आ गयी हूँ तो किचन का दारोमदार तू मुझ पर छोड़ दे. तू बस आर्डर कर, जो भी तुझे खाना है वो गर्मागर्म मिलेगा, वो भी ऐसे ज़ायके का कि अपनी उंगलियाँ चाटता रह जाएगा.
“ऑब्वियस्ली दीदी, आपके हाथ के लज़ीज़ खाने का तो मैं कानपुर से ही दीवाना हूँ!”
बातें करने के बीच में भी रह रह कर मेरी नज़रें छुप -छुप कर मोनी के बदन का मुआयना कर रही थीं.
आखिर मर्द तो मर्द ही ठहरा, गदराया जिस्म देखकर तो ईमान डगमगाता ही है.
चाहे वो जिस्म बहन का ही क्यों न हो.
चाय के कप लेकर हम दोनों वापस लिविंग एरिया में आये और सोफे पर बैठे.
अब तक हम इतना सहज हो चुके थे कि मानो कॉलेज के दो दोस्त हों.
एक अनकहा भरोसा हो गया था आपस में … कि आपस की बातें आपस में ही रहेंगी.
मोनी ने कहा- देख नीलू, अब जब हम दोनों को साथ ही रहना है तो छुपने छुपाने का कोई फायदा नहीं … देख, मैं खुद 8 महीने से दिल्ली रह रही, मैं समझती हूँ मेट्रो सिटी में रहते हुए अपनी ही एक मॉडर्न लाइफस्टाइल की आदत हो जाती है.
अब तक मैं भी काफी सहज हो चुका था, मैंने चुटकी लेते हुए कहा- दीदी, बियर फिलहाल तो नहीं है. लेकिन आपको पसंद है तो ठेका (वाइन शॉप) ज़्यादा दूर नहीं. शाम को चल के ला सकते हैं!
सेक्सी कॉलेज गर्ल मोनी के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान आ गयी- वाह भाई वाह … एक शर्त पर … अगर तू साथ देगा मेरा … तभी पियूँगी!
मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ?
हम दोनों ने ठहाका लगाया.
मैंने कहा- चलो दीदी, आपने शुरुआत करी तो मैं भी बताता हूँ. मुझे चाय के साथ सिगरेट पीने की आदत है … आपको अजीब न लगे तो जला लूँ एक?
मोनी ने मेरी आँखों में देखते हुए एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ धीरे से अपने पर्स की तरफ हाथ बढ़ाया, उसमें से क्लासिक माइल्ड सिगरेट की एक डिब्बी निकली और मुस्कुराते हुए कहा- नीलू, तूने मेरे मुँह की बात छीन ली … तू तो पूरा मेरा ही भाई है रे … आदतें भी हम दोनों की एक सी हैं … लाइटर दे मुझे, मेरा वाला ब्रांड पियेगा?
मैंने पास के एक दराज़ से मार्लबोरो गोल्ड एडवांस सिगरेट की डिब्बी और साथ में एक चमचमाता हुआ स्टील का लाइटर निकाला।
एक सिगरेट निकाल कर मैंने जलाई और लाइटर मोनी को पास किया.
मोनी ने अपनी सिगरेट जलाई और चहकी- वाह भाई, एडवांस पीता है तू? कितनी हार्ड होती है ये. पूरी मर्दाना सिगरेट है. तेरी पर्सनालिटी को भी सूट करती है … मैं तो अल्ट्रा-माइल्ड या माइल्ड ही पीती हूँ!
सिगरेट की इतनी नॉलेज के साथ साथ अब तक मुझे भी समझ आ रहा था कि मोनी भी मेरे पूरे कसरती जिस्म को अपनी आँखों से तोल रही थी.
कुछ भी बात अजीब न लगे इसलिए हम हंसी-ठिठोली में सारी बातों को हल्का कर दे रहे थे.
चाय के साथ जिस तरह से मोनी सिगरेट के कश पर कश ले रही थी, उससे साफ़ दिख रहा था कि दिल्ली की मॉडर्न हवा सर उसके अंदर तक बस चुकी थी.
हम दोनों ने चाय ख़त्म की और मोनी दूसरे खाली पड़े कमरे में अपना सामान ज़माने में लग गयी.
मैं भी ऑफिस में व्यस्त हो गया.
ऑफिस का काम करते हुए मैं उस दिन एक अलग ही जोन में था.
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि अपनी एक बड़ी बहन के साथ मैं सिगरेट पीकर आ रहा हूँ.
शाम को लगभग पांच बजे मैं अपने ऑफिस रूम से उठा और मोनी के कमरे में झाँका तो पाया कि वह सो रही है. दूर से आयी है थक गयी होगी समझकर मैं मोनी को नींद में छोड़कर मार्केट चला गया.
मैंने अंग्रेजी शराब के ठेके से एक पेटी स्ट्रांग बियर कैन की खरीदी, साथ में व्हिस्की, वोडका और रेड वाइन की भी बोतलें खरीदीं, कुछ और खरीददारी करी.
कुछ देर के लिए देवेश के फ्लैट गया, गप्पबाज़ी करी.
वापस आते आते साढ़े आठ बज गए.
आया तो देखा कि मोनी किचन में डिनर बनाने की तैयारी कर रही है.
मैंने शराब की बोतलें लिविंग रूम की एक अलमारी में रख दीं; बियर की पेटी लेकर किचन में गया और फ्रिज में सजा दीं.
रात्रि 10 बजे हमने भोजन किया.
भोजन के पश्चात बियर का एक-एक कैन पीते हुए हमने गप्पें मारी, साथ में सिगरेट के कश लगाए.
मोनी ने शॉर्ट्स और टॉप पहन रखा था.
अब तक हम दोनों के बीच पूर्ण रूप से सहजता आ चुकी थी.
हमारी भाषा में भी वह सहजता आ चुकी थी, दिल्ली की रेगुलर छोटी मोटी गालियां भी हमारी बातचीत का हिस्सा बन गयी थी.
हर बीतते पल के साथ हम और ज़्यादा दोस्ताना होते जा रहे थे.
और मित्रो, सच कहूं तो मोनी जैसी बड़ी बहन के साथ बियर पीने का मज़ा ही कुछ था.
बियर के सुरूर में हम गप्पें मार ही रहे थे, तब तक मैंने फ़ोन पर ख़बर देखी.
प्रधानमंत्री ने बाइस मार्च, रविवार को पूरे दिन के लिए ‘जनता कर्फ्यू’ की घोषणा कर दी थी.
साथ में ‘ताली बजाओ-थाली बजाओ’ के मीम भी आ रहे थे.
मैंने मोनी को भी वह खबर दिखाई और फिर हम दोनों ने कुछ प्लानिंग करी.
अगले दिन मैंने अखिल की कार निकाली और हम दोनों ने जाकर 3-4 महीने का राशन, किचन का सामान, आवश्यक दवाएं और फ्लैट के लिए अन्य आवश्यक सामान स्टॉक कर लिया.
शराब और बियर की पेटियां, और साथ में सिगरेट के 2-3 बड़े क्रैट का भी स्टॉक ले लिया.
यह आईडिया मेरा था, यह सोचकर कि सामान महंगा न हो और कालाबाज़ारी न होने लगे, इससे पहले स्टॉक कर लेते हैं.
लेकिन जो होने वाला था वह तो मैंने दूर दूर तक न सोचा था.
बाइस तारीख को ‘जनता कर्फ्यू’ लगा, और बहुत हद तक पूरा देश थम गया.
अगले दिन, तेइस मार्च, सोमवार को शाम पाँच बजे खबर आयी कि प्रधानमंत्री रात आठ बजे एक महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं.
और ठीक रात आठ बजे, प्रधानमंत्री ने पूरे भारत में इक्कीस दिन का सम्पूर्ण लॉकडाउन लगाने की घोषणा करी.
साथ में सभी प्रदेशों की सीमाएं भी सील होनी थी और आवागमन को कम से कम करना था ताकि कोरोना वायरस का फैलाव कम करने का प्रयास किया जा सके.
प्रचुर संख्या में पुलिस भी जगह जगह तैनात कर दी गयी.
लोगों को सख्ती से लॉकडाउन का पालन करने के निर्देश दिए.
लॉकडाउन में केवल आवश्यक सेवाएं ही चालू थीं, खान-पान की सामग्री, दवाइयाँ, दूध,फल, सब्ज़ी इत्यादि.
हम खबर देख रहे थे मेरे फ्लैट पर टीवी स्क्रीन के सामने!
मेरे और मोनी के साथ देवेश और सुमित भी मौजूद थे.
मोनी का मेरे दोनों मित्रों से परिचय उसी शाम को पहली बार हुआ.
उन दोनों ने भी मोनी को बड़ी बहन का सम्मान देते हुए दीदी कहकर ही सम्बोधित किया.
खबर देखने के पश्चात दोनों फटाफट भागे कि जल्दी से कुछ आवश्यकता की चीज़ें जाकर स्टॉक कर ली जायें.
मेरे दोस्तों के जाते ही मोनी ने फिर से टीवी पर चल रही न्यूज़ को देखा और उसके मुँह से निकला- फ़क बहनचोद!! क्या बाल बाल बची मैं!!
मैं बोला- दीदी, कितनों के तो लौड़े लग गए होंगे इस वक़्त!
“सच में यार नीलू … मेरी तो गांड फट गई ये न्यूज़ सुनकर!! थैंक गॉड मैं कानपुर नहीं गई यार!”
“आप सही टाइम पर आ गयी दीदी … इस टाइम अगर आप दिल्ली में होतीं तो यहाँ गुरुग्राम पहुंचना भी नामुमकिन होता. स्टेट बॉर्डर ही बंद हो रहा!!” मैंने सामने से कहा.
“नीलू, थैंक्स मेरे भाई, तूने एकदम सही टाइम पर प्लान बना कर सब सामान भी स्टॉक कर लिया. तू टेंशन मत ले अब किसी और चीज़ की. तू अपने ऑफिस पर फोकस कर, फ्लैट मेन्टेन करने, खाने पीने की पूरी ज़िम्मेदारी मेरी … वैसे भी कोई किराया तो दे नहीं रही मैं तुझे!”
“अरे यार मोनी दी, रिलैक्स ना … इतना फॉर्मेलिटी क्यों? भाई बहन के बीच सब चलता है!”
सुनकर मोनी ने मुझे एक स्माइल दी.
हमने डिनर किया, सुट्टा मारा और सो गए.
उस दिन मैं नाइट ड्यूटी करके सुबह साढ़े सात बजे घर पहुँचा मेरी Sex Stories वाइफ एक टीचर है और स्कूल जाने के लिए तय्यार हो रही थी.आठ बजे वो घर से निकल गयी. मैं नहा कर फ्रेश हो गया और रोज की तरह सोने की तय्यारी करने लगा.अचानक दरवाजे पर दस्तक हुई तो मैं चौंक गया. बड़ी गहरी नींद आ रही थी और मैं बहुत परेशान था की इस वक़्त कौन आ गया.मैने दरवाजा खोला तो सामने एक औरत खड़ी थी.
करीब पच्चीस साल की उमर की एक देहाती औरत को देखकर मैने सोचा शायद कोई माँगने वाली है.
“क्या चाहिए” मैने पूछा.
“मेरा भाई काम पर आया बाबूजी ?” वो बोली
“कौन भाई ?” मुझे गुस्सा आ रहा था
“मेरा भाई संजू बाबूजी” मीठी सी आवाज़ में वो बोली
“संजू बेलदार ?” मैने उसे उपर से नीचे तक देखते हुए पूछा. उन दिनों हमारे घर में कन्स्ट्रक्षन का काम चल रहा था और संजू एक बेलदार का नाम था
संजू हमारे बिल्डिंग ठेकेदार लल्लन का साला था.यानी मेरे सामने खड़ी औरत लल्लन की बीबी थी.
“जी बाबूजी संजू बेलदार मेरा भाई है कल रात से घर नही आया तो मैने सोचा की आपके यहाँ देख लूँ” वो बड़ी प्यारी मुस्कुराहट के साथ बोली.
मुझे उसकी मुस्कुराहट बड़ी सूंदर लगी. मैने उसे अंदर आने के लिए कहा तो वो अंदर आकर नीचे ज़मीन पर बैठने लगी
“अरे नीचे नही सोफे पर बैठो” वो शरमाती हुई सोफे पर बैठ गयी .मैं सामने के बेड पर बैठ गया.
“संजू तो कल शाम को पाँच बजे चला गया था और सुबह से आया नही” मैने कहा. वो गर्मियाँ के दिन थे कूलर की सीधी हवा बेड पर आ रही थी. वो सोफे पर बैठी तो शायद उसे गर्मी लग रही होगी.
“कोई बात नही बाबूजी , शायद किसी दोस्त के यहाँ रुक गया होगा संजू.मैं कहीं और देख लूँगी” वो बोली.
मैने पूछा ” क्या तुम लल्लन की घरवाली हो ?” उसने हाँ में गर्दन हिला दी ,बिल्कुल बच्चों की तरह.
“क्या नाम है तुम्हारा ?” मैने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाया.
“सीमा” कहकर वो शर्मा सी गयी.
“बहुत सूंदर नाम है” मैने कहा “चाय पियोगी सीमा ?’
मेरे मूह से अपना नाम सुनकर उसने अचानक मेरी देखा “आप तकलीफ़ क्यों करते हो बाबूजी ?”
“अरे तकलीफ़ कैसी सीमा , मैं अपने लिए तो बना ही रहा हूँ तुम भी पी लेना” मुझे बार बार उसका नाम लेकर बुलाने में मज़ा आ रहा था.
“ठीक है बाबूजी , बना लीजिए” वो फिर मुस्कुराइ . अब मुझे उसकी मुस्कुराहट और अच्छी लगी.
मैं किचन में चाय बना रहा था और मन में उल्टे सीधे विचार आने लगे.चाय बनाने में ध्यान कहाँ लगता.आँखो के सामने सीमा की खूबसूरत मुस्कुराहट
घूम रही थी.चाय उबल कर बाहर निकल गयी.
“क्या हुआ बाबूजी ?” सीमा ने आवाज़ लगाकर पूछा.ऐसा लगा मानो मेरी घरवाली कुछ पूछ रही हो
“कुछ नही “कहते हुए मैं चाय दो कपो में लेकर रूम में आ गया . सामने बैठी सीमा को पसीना आ रहा था.
“गर्मी लग रही हो तो इधर बेड पर आ जाओ सीमा” मैने कहा तो वो आकर मेरे सामने बेड पर बैठ गयी. मैने देखा की उसकी हाइट बहुत कम थी
लेकिन शरीर भरा हुआ था थोडा पेट भी निकला हुआ था रंग सांवला लेकिन नैन नक्श तीखे थे
हम दोनो चाय पीने लगे . मैने पूछा “और घर में कौन कौन है सीमा” मैं जान बूझकर उसका नाम ले रहा था
“हम दोनो मियाँ बीबी और एक बच्चा है बाबूजी. अभी छोटा है एक साल का और साथ में संजू भी रहता है” वो आँखों में आँखें डालकर बात कर रही थी
“दूसरा बच्चा होने वाला है क्या , सीमा ?” पूछते हुए मेरा मन जोरों से धड़कने लगा. कहीं सीमा बुरा मान गयी तो ?
“धत्त बाबूजी आप भी क्या पूछते हैं ” वो शर्मा कर मुस्कुरा दी “आपने ऐसा क्यों पूछा ?”
“तुम्हारा पेट देखकर” मैने हिम्मत करके कह दिया.
“धत बाबूजी अभी नही , अभी तो पहला ही छोटा है ” उसने चाय ख़त्म करते हुए कहा.”अच्छा अब मैं चलूं बाबूजी ?” वो उठने लगी
“थोड़ी देर और बैठो ना सीमा प्लीज़” कहते हुए मैने उसका हाथ पकड़ लिया.
“ये क्या करते हो बाबूजी ? कहीं किसी ने देख लिया तो ? ” उसने हाथ छुड़ाने की कोशिश नही की
मेरी हिम्मत और बढ़ गयी. मैने उसे अपने पास खींच लिया “हम दोनो के अलावा यहाँ है कौन जो हमे देखेगा सीमा ?” मैने उसका एक चुम्मा ले लिया
“नही बाबूजी हमे जाने दो ,हमे खराब ना करो” वो दरवाजे की तरफ जाने लगी. मैने उसका पल्लू पकड़ लिया.
“ऐसे नही सीमा , ऐसे मत जाओ प्लीज़ . मैं तुम्हारे साथ कुछ और देर रहना चाहता हूँ” मेरे स्वर में विनती थी
“नही बाबूजी मैं और नही रुक सकती. आप इतने लंबे और मैं इतनी छोटी , हमारा मिलन कैसे होगा “वो बोली और इसी छीना झपटी में उसकी साड़ी खुल गयी.उसने अपनी बाहे अपने सीने पर रख ली.
“ये क्या छुपा रही हो हमसे सीमा रानी ,दिखाओ ना” मैने उसकी बाहे हटाने लगा.
“आप बड़े गंदे हो बाबूजी ,कैसी गंदी बाते करते हो . ये तो मेरा बच्चा चूस्ता है इनमे आप क्या लोगे ?” सीमा बोली.
“तो हमे भी दिखाओ ना हम भी चूस लेंगे थोड़ी सी” कहते हुए मैने उंसकी दोनो चुचियाँ पकड़ ली . क्या पत्थर की तरह सख़्त चुचियाँ थी सीमा की
चुचियाँ पकड़ते ही सीमा बुरी तरह से काँपने लगी
” क्या बात है सीमा रानी ? काँप क्यों रही हो ” मैं घबरा गया था
“क्या बताउन बाबूजी , बहुत डर लग रहा है . पता नहीं आप मेरे साथ क्या करने वाले हो . मुझे छोड़ दो बाबूजी, जाने दो, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ.”
मुझे लगा कहीं सीमा शोर ना मचा दे , आख़िर अडोस पड़ोस में और भी लोग रहते हैं
“इसमे डरने क़ी क्या बात है सीमा रानी ? मैं तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती नहीं करूँगा. जो भी होगा तुम्हारी रज़ामंदी से होगा . आओ बेड पर बैठ कर बात
करते हैं . ठीक है सीमा रानी ?” मैने पूछा
” ठीक है बाबूजी” उसके हाँ कहते ही मेरी जान में जान आई . मैने सीमा को अपनी बाहों में उठा लिया और ला कर बेड पर लिटा दिया.
बिल्कुल फूल क़ी तरह कोमल थी सीमा. हल्की सी, छोटी सी और प्यारी सी
” अब बताओ सीमा रानी, किससे डर लगता है तुम्हे ” मैं उसके पास बैठ गया और सिर पर हाथ फेरने लगा
” बाबूजी आप मुझे बार बार सीमा रानी कहकर क्यों पुकारते हो ? मैं कहीं क़ी रानी थोड़े ना हूँ . मेरा नाम तो सिर्फ़ सीमा है .” वो बोली .
“रानी तो तुम बन गयी हो सीमा , आज से मेरे इस दिल क़ी ” कहकर मैने झुककर उसके होंठ चूम लिए
” हाय राम बाबूजी , आप तो बड़े बेशरम हो ” उसने अपना चेहरा अपने हाथों से छुपा लिया . सीमा क़ी इस अदा पर तो मैं जैसे फिदा ही हो गया. मैने उसके चेहरे से हाथ हटाते हुए कहा “सीमा रानी मेरा दिल करता है कि तुम्हारे इन होंठो क़ी सारी लिपस्टिक चाट लूँ. तुम बुरा तो नहीं मान जाओगी”
“इसमे बुरा मानने वाली क्या बात है बाबूजी ? बस एक बात का ख़याल रखना कि अगर आप मेरी लिपस्टिक चाटना चाहते हो तो नयी लिपस्टिक भी मुझे
दिलानी पड़ेगी , बोलो मंज़ूर है ?” मेरा कलेज़ा उछाल मारने लगा
“एक नही दस लिपस्टिक ले लेना मेरी जान ” मेरी किस्मत ज़ोर मार रही थी शायद .
“तो फिर आपको किसने रोका है लेकिन अपना वादा याद रखना ” सीमा मुस्कुराते हुए बोली. वही कातिलाना मुस्कुराहट जिसने मुझे पागल किया था. मैं पागलों क़ी तरह उसके होंठो को चूमने लगा . थोड़ी देर बाद सीमा भी मेरा साथ देने लगी .
सीमा ने अपना एक हाथ मेरे सिर के पीछे रख लिया और मेरा चेहरा अपने होंठों पर दबाने लगी. मेरे होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगी, मेरे होंठ अपने दाँतों से काटने लगी. पता नही कितनी देर तक हम दोनो एक दूसरे को चुसते रहे. कितने रसीले होंठ थे सीमा के ,ऐसा लगा मानो मैं शहद पी रहा था, इतने मीठे होंठ मैने आज तक नहीं चखे थे. जब हम अलग हुए तो मैने कहा “सीमा रानी , मेरा मन कर रहा है कि मैं तुम्हारे ये कोमल कोमल गाल भी चूसू “
“फिर तो आपको एक पाउडर का डिब्बा भी दिलाना पड़ेगा बाबूजी ” कहकर सीमा खिलखिलाकर हंस पड़ी. क्या नज़ारा था वो. सीमा के हंसते ही मानो सारे कमरे में मोती बिखर गये . मेरा रोम रोम खिल गया . क्या किसी औरत क़ी हँसी इतनी सुंदर भी हो सकती है
“मैं तो तुम्हे सारा मेकप का सामान ही दिला दूँगा मेरी जान और अपने हाथों से तुम्हे दुल्हन क़ी तरह सजाऊंगा “कहकर मैं उसके गालो को चूमने लगा
“सच बाबूजी ?” उसने मुझे ज़ोर से भींच लिया अपनी बाहों में, “ओह बाबूजी आप कितनी प्यारी बाते करते हो . आज आपने मुझे जीत लिया बाबूजी. मैं आज से सचमुच आपकी सीमा रानी बन गयी हूँ ” और वो भी मुझे बेतहाशा चूमने लगी
मैने अपना एक हाथ उसके सीने क़ी एक गोलाई पर रख दिया . सीमा ने कोई प्रतिरोध नही किया .मैं समझ गया कि सीमा अब कोई प्रतिरोध नहीं करेगी
वही हाथ मैने दूसरी गोलाई पर रख दिया . “कुछ ढूँढ रहे हो क्या बाबूजी ?” सीमा धीरे से मेरे कान में बोली
“हाँ सीमा रानी “मैने उसके कान में कहा
“क्या ढूँढ रहे हो बाबूजी ? क्या मैं आपकी मदद करूँ?” सीमा मेरा कान दाँतों से काटने लगी
” हाँ सीमा रानी मेरी मदद करो ना . मेरा दिल तुम्हारी चोली में कहीं खो गया है उसे ढूँढने में मेरी मदद करो ” मेरा दिल बेकाबू हो रहा था
“अगर आपका दिल मेरी चोली में खो गया है तो ऐसे उपर से टटोलने से थोड़े ही मिलेगा बाबूजी , ज़रा अंदर कोशिश करो ” फिर वही शरारती मुस्कुराहट
” वाह सीमा रानी तुमने तो मेरे दिल कि बात कह दी ,” ठीक है मैं अपना दिल तुम्हारी चोली के अंदर ढूंढता हूँ “
इतना कहकर मैने अपना हाथ उसके ब्लाउस में डाल दिया .उसकी एक गोलाई को पकड़ लिया . कितनी सख़्त चुचि थी सीमा क़ी. फिर दूसरी गोलाई को पकड़ कर बहुत देर तक दबाता रहा . इतना दबाने पर भी चुचियाँ नरम नही हुई . अब मेरा मन सीमा क़ी गोलाइयाँ चूसने के लिए बेताब हो रहा था
” क्या हुआ बाबूजी दिल मिला या नही ” सीमा आँखे बंद किए हुए बोली
“नहीं मिला मेरी जान . अब क्या करूँ सीमा रानी” मैने उसका स्तन ज़ोर से दबा दिया
“उफ्फ बाबूजी , ये क्या करते हो ?अगर नहीं मिला तो ऐसे दबाने से थोड़े ही मिल जाएगा , चोली उतार कर ढूँढ लो ना “सीमा गरम हो चुकी थी
मैं भी तो यही चाहता था. मैने उसके ब्लाउस के सारे हुक खोल दिए .सीमा ने अंदर ब्रा नही पहनी थी हुक खोलते ही दोनो मस्त कबूतर बाहर झाँकने लगे. मैने सीमा को बैठा लिया और उसका ब्लाउस उसके सीने से अलग कर दिया . दोनो सफेद कबूतर अब आज़ाद थे और तने हुए थे
“सीमा रानी ये बताओ तुम्हारी ये सुंदर चुचियाँ इतनी सख़्त और तनी हुई क्यों हैं” मैने चुचियों को सहलाते हुए पूछा .
” बाबूजी ये तनी हुई नही भरी हुई हैं . इनमे दूध भरा है मेरे बेटे के लिए , जब वो इनको चूस लेता है तो उसकी भूख मिट जाती है और मुझे भी बड़ा चैन मिलता है .जब तक वो नही चूस्ता इनमे दर्द होता रहता है जैसा क़ी अब भी हो रहा है ” सीमा बोली
“सीमा रानी तुम्हारी चुचियों में दर्द हो रहा है और मुझे भी भूख लगी है , क्या कोई ऐसा रास्ता नही है क़ी मेरी भूख मिट जाए और तुम्हारी छातियों का दर्द कम हो जाए मेरी जान ” मैने अपने दिल क़ी बात कह दी
“मैं समझ गयी बाबूजी आप क्या चाहते हो . मुझे मालूम था क़ी आप का दिल मेरी चुचियों पर आ चुका है और आप इन्हे चूसे बिना नही छोड़ोगे .आओ बाबूजी मेरी गोद में लेट जाओ आज मैं आपको अपने बच्चे क़ी तरह चुचि पिलाऊँगी . जी भर कर पियो बाबूजी लेकिन काटना मत ” सीमा ने कहा
मैं सीमा क़ी गोद में लेट गया और सीमा ने दो उंगलियों से पकड़ कर चुचि वैसे ही मेरे मूह में दी जैसे कोई माँ अपने बच्चे को देती है. मैं चूसने लगा तो सचमुच सीमा क़ी चुचि में से दूध आने लगा . कितना गर्म और मीठा दूध था सीमा क़ी चुचियों का. मैं एक एक बूँद चूस लेना चाहता था और शायद सीमा भी यही चाहती थी इसलिए एक चुचि खाली होते ही उसने मेरे मूह में झट दूसरी चूची डाल दी
” चूसो बाबूजी और ज़ोर से चूसो , जी भर कर पियो आज अपनी सीमा रानी क़ी छातियाँ , चूस चूस कर खाली कर दो बाबूजी , इनको थोड़ी नरम बना दो , इनका दर्द मिटा दो ” सीमा मस्ती में बड़बड़ा रही थी “हाँ बाबूजी ऐसे ही प्यार से चूसो , हाए बाबूजी आप कितनी अच्छी तरह चूसते हो इतना मज़ा तो पहले कभी नही आया . लल्लन तो कभी इन्हे चूसता ही नही “
“क्या कहती हो सीमा रानी लल्लन इन चुचियों को नही चूसता . भला ऐसा कौन सा मर्द होगा जो तुम्हारी इन मदभरी चूचियों को छोड़ देगा “
” सच कहा बाबूजी आपने कोई मर्द नही छोड़ेगा लेकिन लल्लन मर्द कहाँ वो तो नामर्द है , हिज़ड़ा है हरामी “सीमा क़ी आँखे भर आई
“तो फिर ये बच्चा किसका है सीमा रानी “मैं चोंक गया था
“ये बच्चा भी आप जैसे किसी बाबू का है बाबूजी दो साल पहले उनसे ऐसे ही मिली थी जैसे आज आप मिल गये बाबूजी और उन्होने अपने प्यार क़ी निशानी ये बच्चा मेरे पेट में डाल दिया ” मैने सीमा को अपने पास खींच लिया और जी भर कर चूमा
“तो क्या तुम मेरे बच्चे को भी जन्म दोगी सीमा रानी ” धीरे धीरे वासना क़ी जगह प्यार ने ले ली
” हाँ बाबूजी मैं आपके बच्चे को जन्म दूँगी , आज आप अपना बच्चा मेरे पेट में डाल दो , बाबूजी आप का बच्चा आप ही क़ी तरह होना चाहिए लंबा और तगड़ा बाबूजी . ऐसे ही प्यार से मेरी छातियाँ चूसे जैसे आज आपने चूसी हैं
“सच सीमा रानी मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा क़ी तुम मेरा बच्चा जनोगी ” मेरा दिल मेरे मूह को आ रहा था
” इसमे विश्वास ना करने वाली कौन सी बात है बाबूजी . मैं आपके साथ एक बिस्तर पर लेटी हूँ , नंगी पड़ी हूँ , आपने चूस चूस कर मेरी छातियाँ खाली कर दी मेरिचुचियाँ निचोड़ डाली और अब मैं आपसे एक बच्चे क़ी भीख माँग रही हूँ . प्लीज़ बाबूजी मुझे आपका बच्चा पैदा करना है ” सीमा गिड़गिदने लगी
“सीमा रानी इसमे भीख माँगने वाली कोई बात नही . मैं तो खुद चाहता हूँ क़ी तुम मेरा बच्चा पैदा करो मेरी जान “
” तो फिर दो ना बाबूजी देर किस बात क़ी , डाल दो ना अपना बच्चा मेरे पेट में , मैं तय्यार खड़ी हूँ बाबूजी आओ “सीमा को काफ़ी जल्दी थी चुद्वने क़ी
” अभी तुम पूरी तरह तय्यार कहाँ हो सीमा रानी , ये घाघरा भी तो खोलना है , तभी तो मैं तुम्हारे पेट में बच्चा डाल सकता हूँ ” मैं मज़े ले रहा था
“खोल दो घाघरा बाबूजी आपको किसने रोका है और नही तो ये लो मैं खुद ही खोल देती हूँ ” कहते हुए सीमा ने एक झटके से अपने घाघरे का नाडा
खींच दिया . अब उसका घाघरा ज़मीन पर था और मेरी सीमा मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी . कितनी सुंदर दिख रही थी. मैने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और पूरा नंगा होकर सीमा को बाहों में उठा लिया
” आओ सीमा रानी आज मैं तुम्हारी मनोकामना पूरी करूँगा . तुम्हारे पेट में अपना बच्चा डालूँगा और तुम्हारी योनि क़ी सारी प्यास बुझा दूँगा ”
कहते हुए मैने सीमा को बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके उपर चढ़ गया Sex Stories
बाकी अगले भाग में
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