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Massage Girl in Phek: Premium Relaxation Services

Our site can help you find a professional massage girl in Phek who will help you relax in the best manner possible. We connect you with professional therapists who can offer you a massage that will make you feel better and more relaxed. The pros on our list are ready to provide you with a fantastic experience at your house or in one of their particular spots, whether you want to relax or get away from it all.

Introduction

Massage is currently one of the finest methods to relax your mind, body, and overall health. Our website makes it easy to locate the top massage services in Phek that meet your demands. This will be a one-of-a-kind and calming experience for you.

Tottaa wants to make it simple for clients to find the top masseuse. The Phek massage service providers on our list offer the greatest quality, comfort, and competence, whether you want a full-body massage or a massage for a particular location.

How Tottaa Helps Advertisers Reach More Customers

Tottaa is not only a list of masseuses, it’s also a secure location for them to show off what they can do. People in Phek who are seeking massage services may find them on our website. This makes them easier to find and gets them more appointments.

Advertisers may simply put up profiles, offer their services, and talk about pricing and discounts on our sites. This makes sure that the relevant people notice your Phek massage service, which makes it easier to obtain more customers.

Different Types of Massages We Offer

There are a lot of different types of massage services on our site, so you may choose one that works for you. You may choose the kind of treatment that works best for you, whether it’s profound rest or a particular type of therapy.

1. Swedish Massage

A calm and gentle way to ease muscular tension and improve blood flow. This Phek massage is perfect for you if you want to relax and forget about your concerns.

2. Deep Tissue Massage

This approach employs a lot of pressure to get to deeper muscle layers. It’s helpful for folks who have muscular discomfort or stiffness that won’t go away. There are specialists on our profiles of massage girls in Phek who are good at deep tissue treatments that function effectively.

3. Aromatherapy Massage

Calming massage strokes and essential oils are beneficial in making people feel improved both emotionally and physically. Most massage companies in Phek employ the use of custom oil preparations to make you feel good.

4. Thai Massage

A therapy that wakes you up by using a mix of regular massage, stretching, and compression. This traditional massage in Phek helps you relax, become more flexible, and get your mind and body back in harmony.

5. Hot Stone Massage

Heated stones are placed on various parts of the body to help with deep muscular tightness. People who want to feel good, relax, and help their muscles recover quickly can use this massage service in Phek

How to Book Our Massage Services

Tottaa makes it simple and fast to book. With our listings, you can see what kind of massage you want, read about the providers, see that they are free and then contact them directly. After you choose, you can book a massage in Phek at your convenient time and location. In order to get your desired massage services, apply the following simple steps:

Step 1: Browse Our Listings

Take a peek around our site to view a few massage professionals. Each listing gives you information about the many sorts of massages, how long they last, how much they cost, and where they are situated. This makes it easier to choose the finest ones.

Step 2: Compare and Shortlist

Examine the profiles carefully to compare how the services, talents, and reviews posted by customers differ. This phase makes sure you choose a business that has the style, pricing, and supply you desire.

Step 3: Connect with the Provider

When you have decided, use the information that you are offered so that you can contact them directly. One can communicate it to the massage giver thus making it understood what massage you want at what time and when.

Step 4: Confirm the Appointment

The date, time and place of the service, which could be your home, a hotel or the spa where the therapist may be found. You also need to agree on the payment method and any other accords prior to commencement of the course.

Step 5: Relax and Enjoy Your Massage

All you have to do on the day of the appointment is have your area ready for the house visit. The remainder will be handled by the expert. Take it easy and enjoy a massage that is made just for you.

Frequently Asked Questions

To locate a professional who can meet your needs, read our biography, reviews and advertising.

Yes, many of the therapists on our site will come to your house so you may feel safe and at ease.

You may pick based on talents since most adverts provide their qualifications in their profiles.

It would be advisable to make a reservation earlier to guarantee that you would be able to get a massage, particularly against the prevalent services of massage.

Not at all. Tottaa exclusively connects users with service providers. The doctor gets to choose how to handle payment.

Read Our Top Call Girl Story's

पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ.
मेरा नाम हार्दिक है और मैं 20 साल का थोड़ा सीधा और थोड़ा टेड़ा किस का लड़का हूँ.
मैं उत्तर प्रदेश में रहने वाली एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ.

मेरा रंग हल्का सांवला सा है और मेरी हाइट 5 फीट 11 इंच है. लड़कियों को खास तौर पर बताना चाहता हूँ कि मेरे लंड का साइज़ सामान्य से बड़ा है.
बनाने वाले का मैं बस इसी चीज़ के लिए शुक्रिया करता हूँ कि उन्होंने मुझे एक अच्छा ख़ासा लंड दिया है.

मैं बी.कॉम. के अंतिम वर्ष का छात्र हूँ. मैं रोजाना जिम जाता हूँ तो मेरी बॉडी भी फिट है और मुझ पर एक दो लड़कियां भी मरती हैं, पर मैं फिर भी सबको यही बताता हूँ कि मैं सिंगल हूँ.

यह टीचर लव की कहानी की घटना उस साल की है जब मैं अपने स्नातक के दूसरे साल में था.

जब मैंने कॉलेज में बी.कॉम. में एड्मिशन लिया था तो उस समय कॉलेज में मेरा एक भी दोस्त नहीं था.

फिर मेरा कॉलेज शुरू हुआ, तो मैं पहले दिन क्लास में गया.
हमारे लेक्चर शुरू हुए.

मेरी क्लास में कुछ स्टूडेंट्स से बात भी हुई. उस दिन अपने आखिरी लेक्चर से मुझे कॉलेज से प्यार सा हो गया.

वो हमारा अकाउंट्स का लेक्चर था और हम सब सोच रहे थे कि पता नहीं अब कौन सा खड़ूस टीचर आएगा.
लेकिन जब लेक्चर शुरू हुआ तो हमारी क्लास में एक सुंदर, गोरी चिट्टी, नैन नक्स … एकदम झकास माल जैसी एक लेडी आईं … या यूं बोलूँ कि लड़की आई.

वे हसीन लड़की हमारी अकाउंट्स की टीचर थीं, जिनको देख कर मैं तो हक्का-बक्का रह गया क्योंकि इतना मस्त माल मैंने शायद ही कभी देखा था.
एक तो वो बिल्कुल दूध सी गोरी चिट्टी, ऊपर से उनके नैन नक्श इतने मस्त कि क्या ही खून.

उनकी उम्र भी 28 साल की थी, जो मुझे बाद में पता लगी थी.
मेम का 34-30-36 का साइज़ एकदम पर्फेक्ट था.
उनके तने हुए दूध और उठी हुई गांड देखते ही बन रही थी.

जब मैम क्लास में चल रही थीं तो उनकी हाई हील के कारण उनके मम्मे और चूतड़ कहर ढा रहे थे.

उस दिन उन्होंने क्रीम कलर की साड़ी एकदम चुस्त सी बांधी हुई थी जिसमें उनके बूब्स की झलक और कमर साफ दिख रही थी.

जब वो क्लास में आईं तो उन्हें देख कर मेरा तो मुँह खुला ही रह गया था.
फिर वो अन्दर आईं और ये नसीब की बात थी कि उनकी पहली नजर मेरे ऊपर ही पड़ी और उन्होंने मेरे खुले हुए मुँह और पथराई हुई आंखों को देख कर एक बहुत ही छिपी हुई कातिलाना मुस्कान दी और सामान्य हो गईं.

मैंने उनको आफ्टरनून विश किया.
उनका नाम पल्लवी था.

उन्होंने लेक्चर लिया और चली गईं, पर मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आया.
मुझे क्या, पूरी क्लास के लड़कों को कुछ समझ नहीं आया.
क्योंकि किसी का ध्यान उनके रूप सौन्दर्य से हटा ही नहीं. सबके लौड़े अकड़े हुए थे.

अब हालत ये हो गई थी कि पल्लवी नामक उस शै का सारी क्लास को इंतजार रहने लगा था.

ऐसे ही कुछ दिन निकल गए और एक दिन हमारी फ्रेशर पार्टी हुई, जिसमें मुझे कुछ टैलेंट दिखाने या कुछ करने को बोला गया.
मैंने अपनी बॉडी शो की, क्योंकि जिम जाने का भी तो कुछ फायदा उठना चाहिए ना!

मेरे बॉडी शो पर काफ़ी लड़कियों को मैं पसंद आया और मुझे मिस्टर फ्रेशर बना दिया गया.

उस दिन से कॉलेज में लड़कियों के झुंडों में मेरी बातें होने लगीं.
खैर … मेरा दिल तो मैम पर आ गया था या ये कहूँ कि मुझे उनको चोदना था.

मेरी लड़कियों से ज़्यादा टाइम तक नहीं बनती थी क्योंकि मैं उन पर पैसे खर्च नहीं कर सकता था … और मुझे कोई ऐसी मिली नहीं, जो कि मुझे समझे.

फ्रेशर पार्टी के अगले दिन मैम क्लास में आईं और वो लेक्चर लेने लगीं.
उस दिन उनसे मेरी थोड़ी बातें हुईं, कुछ पढ़ाई से संबंधित थीं और थोड़ी सी ऐसे ही मज़ाक वाली.

उन्होंने भी मेरे बॉडी शो को लेकर मुझसे एक दो बातें कहीं.
उन बातों से मैं सीधा सा ये मतलब निकाल सकता था कि उनके दिल ओ दिमाग में मेरी बॉडी बस गई थी.

अब उन्होंने बॉडी के किस पार्ट को ज्यादा तवज्जो दी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी.

ऐसे ही दिन निकलते गए और मेरी मैम से बातें होने लगीं.
मैं रात को अक्सर टीचर लव के कारण उनके नाम की मुट्ठ मार कर सोने लगा था.

एक दिन एक लड़के ने लेक्चर के बाद मैम से उनका नंबर मांगा, पर मैम ने बहाना बना कर कि कॉलेज वाला नंबर तो है तो पर्सनल नंबर का क्या करना, उसे मना कर दिया.

वैसे एक बात बताऊं कि हमारे कॉलेज में जो स्थायी प्रोफेसर्स हैं, उन सभी को एक नंबर दिया गया है, जो वो अपने स्टूडेंट्स को दे देते थे.
लेकिन वे उस पर रेस्पॉन्स बहुत कम करते थे, तो स्टूडेंट्स उन फोन्स पर बात ही नहीं करते थे.

फिर ऐसे ही कुछ दिनों बाद मुझे भी कुछ प्राब्लम थी.
मैंने अपनी समस्या को लेकर पहले भी मैम को काफ़ी बार मैसेज किया, लेकिन उन्होंने कभी तो रिप्लाई किया, कभी नहीं.

अब मैंने थोड़ी हिम्मत की.
मेम के लेक्चर के बाद जब सब चले गए, उस वक्त मैंने मैम से उनका नंबर मांगा.

उन्होंने कहा कि नंबर है तो तुम्हारे पास!
मैंने कहा- मेम, आप उस नंबर पर रेस्पॉन्स तो बहुत कम करती हैं … इसलिए अगर आप गलत न समझें तो …

तभी उन्होंने मेरी बात काटी और हंस कर कहा- हां तुम्हारी ये बात सही है. लो ये मेरा पर्सनल नंबर.

उन्होंने अपना नंबर मुझे दे दिया और कहा- प्लीज़ किसी और को नंबर मत देना, मुझे पसंद नहीं है कि कोई मुझे बिना मतलब के पर्सनली फोन करे.
मैंने उनको ओके बोला और साथ ही थैंक्स भी कहा और अपने घर आ गया.

मैंने उनको एक दो दिन बाद एक सवाल पूछने के लिए मैसेज किया.
उन्होंने तुरंत जबाव दिया.

उसके बाद से मैम से मेरी लगातार बात होने लगी.

अब तो क्लास में भी मेरी उनसे थोड़ी ज़्यादा बातें होने लगी थीं और वो क्लास में मेरे अलावा किसी ओर से इतनी बातें नहीं करती थीं.
मैं तो उनकी क्लास में अब कभी कभी फोन भी चला लेता था, पर वो मुझे कुछ नहीं बोलती थीं.

ऐसे ही मैंने उनको एक दिन व्हाट्सैप पर कुछ जोक सेंड किए.
तभी उनका मैसेज आया- थोड़ा पढ़ लो हार्दिक … ये नंबर मैंने तुम्हें क्वेस्चन पूछने के लिए दिया था और ये सब क्या है?

मैंने उनको सॉरी लिखा.
उन्होंने रिप्लाई किया- अरे बुद्धू, मज़ाक कर रही हूँ.

अब मेरी उनसे पढ़ाई से अलग भी बातें होने लगीं.

एक दिन उन्होंने मुझे कुछ काम बताया.
मैंने उसी समय उनका वो काम कर दिया.
उनको मुझ पर थोड़ा ज़्यादा ट्रस्ट हो गया था.

कुछ दिनों बाद हमारे एग्जाम आ गए.
इंटर्नल एग्जाम तो हो गए थे, अब फर्स्ट ईयर के फाइनल एग्जाम थे.

वैसे मैं पढ़ाई में एक सामान्य स्टूडेंट वर्ग से ही हूँ, जिनके 65-70% ही नंबर आते हैं.
फिर मेरे एग्जाम खत्म हुए और कॉलेज की भी छुट्टियां हो गईं.

उस वक्त बड़ा कठिन हो गया.
अब मेरा मन घर पर तो लगता नहीं था इसलिए मैं बाहर ही घूमता फिरता रहता या अपने रूम में सोता रहता.

जब तब मैं पल्लवी मैम से भी मैसेज पर बात कर लिया करता.

मैंने अब तक उनसे एक दो बार ही कॉल पर भी बात की थी, वो भी ये बहाना बना कर कि मुझे थोड़ी रिज़ल्ट की टेंशन हो रही है.
उन्होंने मुझे थोड़ा समझाया.

फिर रिज़ल्ट भी आ गया और मेरे 70% नंबर आए.
मेरी फैमिली मुझसे पढ़ाई को लेकर नाराज़ रहती थी कि तू कुछ पढ़ ले और अच्छा आदमी बन जा, जिससे हमारी कंडीशन जैसी है … तेरी तो ना रहे.

मैं भी काफ़ी कोशिश करता लेकिन मेरा मन पढ़ाई में ज़्यादा नहीं लगता था क्योंकि मुझे इंजीनियरिंग करनी थी लेकिन पैसों की वजह से मेरा एड्मिशन नहीं हुआ था तो मैंने बी.कॉम कर ली.
जबकि मुझे अकाउंट्स कुछ ख़ास पसंद नहीं है.
मैं तो बस मैम की वजह से अकाउंट्स के लेक्चर अटेंड करता था.

अब हमारी दोबारा क्लास शुरू हुई और मैंने फिर से कॉलेज जाना शुरू किया.
पल्लवी मैम अब हमारा दूसरा लेक्चर लेती थीं.

अब यह हो गया था कि क्लास में मैं मैम से मज़ाक कर लेता था और वे भी मुझसे मज़ाक कर लिया करती थीं.
वे मुझे कभी भी अपने काम से भेज दिया करती थीं.

एक दिन मैम ने सुबह सुबह मुझे कॉल किया और उन्होंने कहा- हार्दिक अगर तुमको कोई प्राब्लम ना हो, तो तुम मुझे घर से पिक कर सकते हो. वो आज मेरी स्कूटी खराब हो गई है.
मैंने उनको झट से कहा- ओके मैम, मैं आ जाता हूँ.

उन्होंने मुझे घर की लोकेशन भेजी और मैं वहां चला गया.

उनका घर एक बड़ी सोसाइटी में था जहां से रिक्शे मिलने मुश्किल रहते थे और उनकी कार भी काफ़ी दिनों से बंद पड़ी थी.

जब मैं उनके घर पहुंचा, तो देखा कि उनका घर बाहर से काफ़ी अच्छा और सुंदर है. उससे ये पता चल रहा था कि वो काफ़ी धनी हैं.

हों भी क्यों ना यार … आखिर वो एक प्रोफेसर हैं. उनकी सैलरी अच्छी खासी है.

मैंने उनको कॉल की.
वे बाहर आईं.
आज उन्होंने कुर्ती पहनी हुई थी.

वे मेरे पीछे बैठ गईं.
यहां से कॉलेज भी अच्छा ख़ासा दूर था.

तभी मैंने उनसे बातें करनी शुरू कर दीं.
बातों ही बातों में मैंने कहा- मैम आप तो काफ़ी रिच हैं!

वो बोलीं- अच्छा जी … तुमको ऐसा क्यों लगता है?
मैंने कहा- सब दिखता है मेम, आपका इतना बड़ा घर है … और आप प्रोफेसर हो, तो आपकी सेलरी भी अच्छी ख़ासी आती होगी!

उन्होंने कहा- हां, बात तो तुम्हारी सही है.
मैंने पूछा कि मैम आप बुरा ना माने, तो एक बात पूछ सकता हूँ?

वो बोलीं- हां जी बोलिए.
मैंने पूछा कि आपकी सेलरी कितनी है?

उन्होंने पूछा- क्यों, इसका क्या मतलब है?
मैंने कहा- मुझे बिना मतलब की बातें पूछना अच्छा लगता है. मुझे ये जानना है कि प्रोफेसर्स कितना कमाते हैं.

वो बोलीं- ओके मुझे लगभग 2 लाख रूपए महीने मिलते हैं.
मैं सोच में पड़ गया कि वाउ ये कितना ज्यादा कमाती हैं.

मैंने कहा- मगर मैम आप तो बिल्कुल सिंपल रहती हैं.
उन्होंने कहा- हां तो क्या हुआ हार्दिक, मुझे सिंपल रहना पसंद है … और वैसे भी सिंपल रहने में कोई बुराई थोड़े ही है.

मैंने उनसे पूछा- मैम और आपके हज़्बेंड मेरा मतलब सर क्या करते हैं?
वो बोलीं- वे एक कंपनी में जॉब करते हैं और उधर वे काफ़ी अच्छी पोस्ट पर हैं.

मैं बोला- मैम, आपकी लाइफ इतनी अच्छी है. आप इतनी रिच हो.
इस पर उन्होंने कहा कि रिच होना ही सब कुछ नहीं होता … तुम मेरा दुख नहीं समझोगे.
ये कह कर वो थोड़ा दुखी हो गईं.

उनका मूड ऑफ हो गया और उनकी आंखों में पानी आ गया था.

मैं अभी कुछ और बोलता कि तब तक हमारा कॉलेज आ गया और वे चुपचाप बाइक से उतर कर अन्दर चली गईं.
और मैं भी अपनी क्लास में चला गया.

मैं यही सोचता रहा कि मेरी वजह से मैम दुखी हो गईं.
मगर ऐसी क्या बात है, जिससे उन्हें दुख है.
मैं सोचता रहा और कुछ भी न जान सका.

फिर मैंने मैम का लेक्चर अटेंड किया.
उस वक्त वे कुछ ठीक लग रही थीं. उनका मूड भी सही था.

लेक्चर खत्म होने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- हार्दिक, तुम चले जाना, मैं खुद चली जाऊँगी, मुझको थोड़ा टाइम लगेगा.
मैंने कहा- तो क्या हुआ मेम, मैं वेट कर लूँगा आपका.

वो बोलीं- मुझे आधा घंटा लगेगा!
मैंने कहा- हां कोई दिक्कत नहीं है मेम, मैं बाहर आपका वेट कर रहा हूँ. आप मुझे कॉल कर देना.

उन्होंने हम्म कह कर सर हिला दिया और मैं क्लास के अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया.

मैं पार्किंग एरिया में रुक गया और मेरे दोस्त चले गए.

करीब चालीस मिनट बाद मैम की कॉल आई कि वे बाहर आ रही हैं.
मैंने पार्किंग से बाइक निकाली और उनको पिक किया.

उन्होंने मुझसे कहा- थोड़ा ज्यादा देरी हो गई … सॉरी.
मैंने उनसे कहा- तो क्या हुआ मेम. वैसे तो सॉरी मुझे बोलना चाहिए आपको.

वो बोलीं- क्यों?
मैंने कहा कि मैम आपका सुबह मेरी वजह से मूड ऑफ हो गया था, उसके लिए सॉरी!

वो बोलीं- नहीं कोई बात नहीं, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है.
मैं फिर से बोला- अगर आपको बुरा ना लगे, तो आप मुझसे अपनी बात शेयर कर सकती हैं. वैसे आपका मूड एकदम से क्यों ऑफ हो गया था?

उन्होंने मुझे बताया कि तुम सुबह बोल रहे थे ना कि मैं रिच हूँ. चलो तुमको बताती हूँ.
मैं उनकी बात सुनने के लिए कान उनकी तरफ लगाने लगा.

वे बोलीं- केवल रिच होने से कुछ नहीं होता. मैं एक प्रोफेसर हूँ और अभी तो 28 साल की हूँ. अभी तो पूरी लाइफ सामने पड़ी है. सोचो मैं कितने रुपए कमा सकती हूँ. मेरी अभी की सेलरी ही 2 लाख+ है … और साथ ही मैंने काफ़ी सारी इनवेस्टमेंट कर रखी है, जिससे मेरी हर महीने की टोटल इनकम मतलब सेलरी और इनवेस्टमेंट आदि मिला कर 3 लाख से ज़्यादा हो जाती है.

मैम बोली- और तुम सर के बारे में पूछ रहे थे ना. मैंने तुमको बताया था कि वे एक कंपनी में काम करते हैं. वे यहां से काफ़ी दूर रहते हैं … मुंबई में! और उनकी सेलरी ही 7-8 लाख रुपए महीने की है, जिसमें से वो 2 लाख रुपए हर महीने मुझे भेजते हैं. उनको लगता है कि मैं अकेली लाइफ में कुछ नहीं कर सकती हूँ. इसीलिए मैंने उनको नहीं बताया कि मैं प्रोफेसर बन गई हूँ. इसी बात को लेकर हमारी काफ़ी लड़ाई भी हुई क्योंकि उनको मेरा जॉब करना पसंद नहीं आया है. उनको उनकी बॉस मुझसे ज़्यादा पसंद हैं और यह बात मुझे पता लग गई थी. तभी मुझे तुम्हारे कॉलेज से ऑफर आया था तो मैं यहां शिफ्ट हो गई.

वे आगे बोलती रही- अब तुम ही बताओ कि मेरे पास हर महीने 5 लाख रुपए हो जाते हैं … पर मैं उन रुपयों का क्या करूँ! रहती तो अकेली ही हूँ ना, यहां तो कोई नहीं है मेरा … और अब तो मेरा उनके पास जाने का भी मन नहीं करता. पहले सोचा था कि वहीं शिफ्ट हो जाऊँ, पर फिर पता चला कि उनका उनकी बॉस से भी कुछ चक्कर है और उनको हमेशा यही लगता है कि मैं कुछ नहीं कर सकती, तो मैं वहां नहीं गई. मैंने उनको पैसे भेजने को भी मना कर दिया था कि मैं अपना खुद खर्चा उठा सकती हूँ. तभी वो बोले कि मैं सक्षम के लिए (उनका 5 साल का बेटा) के लिए भेज रहा हूँ. इनको रख लो. अब तुम ही बताओ कि इतने पैसों का मैं क्या करूँ … जब खुशी ही ना हो.

ये सब बता कर मैम फिर से अपसैट हो गईं.
मैंने उनसे कहा- सॉरी मैम मुझे ये सब नहीं पता था … लेकिन आप टेंशन मत लो, मैं हूँ ना. आपको कभी भी कुछ भी काम हो, मुझको याद करना, मैं फट से वैसे हाजिर हो जाऊंगा, जैसे चिराग से जिन निकलता है.

वे मेरी इस बात पर हंस पड़ीं.

उसी वक्त मैंने अचानक से बाइक रोकी, जिससे वो मेरी पीठ पर गिर गईं और उनका एक मम्मा मुझे मेरी पीठ पर अच्छे से रगड़ता हुआ सा महसूस हुआ.

मेरे दिल में उसी वक्त मैम के उस दूध को पकड़ कर मींजने का दिल किया मगर ये जल्दबाजी होती.

Antarvasna

वैसे तो मेरा नाम ही संजू है Antarvasna गुजरात की औरतों की चूत में हलचल पैदा करने के लिये वैसे आप सभी दोस्त मुझे जानते ही हो।

एक दिन एक मेल आया और मुझसे कहा- कोन्टक्ट मी।

तो मैंने जवाब दिया और ऑनलाइन टाइम दिया।

दोस्तो, आप यकीन नहीं करोगे, उसने मेरे रिप्लाई के लिये 6 घंटे ऑनलाइन वेट किया था, उसने बाद में बताया था।

और मैं उसे मेल करके अपना पीसी बंद ही कर रहा था कि उसका रिप्लाई मेल ओन थिस स्पॉट आया और उसी वक्त हम ओन-लाइन मिले, मैंने उससे पूछा तुम कोन हो?

उसने बताया- मैं 24 साल की विवाहित औरत हूँ और आपकी कहानी मुझे बहुत पसंद आई।

मैंने पूछा- मैंने तो बहुत कहानियाँ लिखी हैं, आपको कौन सी पसंद आई?

उसने कहा- वो सुहागरात वाली।

मैंने उसे कहा- बोलिये, मैं आप के लिये क्या कर सकता हूँ?

उसने कहा- आप जानते ही हो।

मैंने कहा- सॉरी, मुझे नहीं पता कि तुम क्या कहना चाहती हो?

उसने कहा- मुझे बताने में शर्म आती है।

मैंने कहा- आपके और मेरे बीच जो बात होगी वो किसी तीसरे को पता नहीं चलेगी।

उसने कहा- आई वांट टू मीट यू एंड एन्जॉय विद यू !

मैंने कहा- आपका मतलब क्या है?

उसने कहा- तुम बड़े फ़ास्ट हो… ओ के… मैं तुम्हारे साथ सेक्स एन्जोय करना चाहती हूँ।

मैंने कहा- ठीक है, बताओ कब, कहाँ मिलना है?

उसने कहा- मुझे नहीं पता, तुम ही बताओ।

मैंने कहा- बताओ तुम्हारा नाम क्या है और कहाँ रहती हो?

उसने कहा- मेरा नाम पायल है और मैं गुजरात में रहती हूँ।

आप समझ ही गये होंगे कि यह नाम बदला हुआ है।

मैंने कहा- आपके घर में कौन कौन है?

उसने कहा- मैं और मेरे पति।

मैंने कहा- तो क्या प्रोब्लम है? तुम्हारे घर पर ही मिलते हैं।

उसने कहा- नहीं, मुझे बहुत डर लगता है, किसी होटल में मिलें?

मैंने कहा- देखो, होटल से घर ज्यादा सेफ़ रहता है।

कुछ देर बाद उसने कहा- ओ के ! मेरे पति अगले मंगलवार को बिजनेस के काम से बाहर जाने वाले हैं। तुम मुझे अपना फ़ोन नम्बर दे दो, मैं तुम्हें काल करुंगी। मैंने कहा- ठीक है।

मंगलवार को उसने मुझे फोन किया उसकी आवाज़ बहुत ही सेक्सी थी उसके बात करने का अंदाज भी संजू सेक्सी था;

उसने कहा- मेरे हबी 12 बजे बाहर जाने वाले हैं, तुम एक बजे आ जाओ !

और अपना पता दिया।

मैं ठीक उसके दिये हुये टाइम पर उसके घर पर पहुंचा और डोरबेल बजाई तो उसने दरवाजा खोला।

मैं तो उसे देखता ही रह गया क्या लुक था उसका 5’6′ हाईट, गोरा रंग और सेक्स बम दिख रही थी।

मैं तो उसे देखता ही रह गया।

उसने पूछा- क्या है?

‘पायल?’

उसने हाँ में सर हिलाया, मैंने कहा- मैं सुनील हूँ।

तो उसने मुझे वेलकम किया और हम अंदर गये और उसने दरवाजा बंद कर दिया।

उसका फ़्लैट संजू शानदार था। उसने मुझे बैठने को कहा और वो पानी लेने किचन में चली गई।

उसने साड़ी नाभि के नीचे से बांध रखी थी और जब वो चल रही थी तो उसकी बैक साइड बैकलेस ब्लाउज़ होने की वजह से क्या कयामत ढा रही थी्।

वो पानी लेकर आई और पूछा- घर ढूंढने में कोई परेशानी तो नहीं हुई?

मैंने कहा- डियर, मैं इसी शहर में रहता हूँ, क्या परेशानी होती।

फिर उसने कहा- वेल, क्या पियोगे चाय, कोफ़ी या कुछ कोल्डड्रिंक्स?

मैंने कहा- डियर, आज मैं तुमको पीने के मूड में हूँ।

तो उसने एक मीठी सी मुस्कान के साथ अपनी आँखें बंद की और अपने होंठ आगे किये और कहा- लो डियर, पी लो, संजू गर्म हैं।

मैंने कहा- श्योर !

और हम फ़्रेंच किस करने लगे, मैं एक हाथ से उसके बालों, गर्दन और कमर को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से उसकी जांघें सहलाने लगा।

और हमारे लब और जीभ एक दूसरे में समा गये।

15 मिनट किस करने के बाद उसने कहा- सुनील, यहाँ नहीं, बेडरूम में चलो।

मैंने कहा- चलो जान !

वो मुझे बेडरूम में ले गई, वो आगे चल रही थी और मैं उसके पीछे !

बेडरूम में जाकर मैंने उसे पीछे से पकड़ कर अपने से जकड़ लिया और उसके उरोज दबाने लगा और उसकी गर्दन और कंधे पर चुम्बन करने लगा।

धीरे से उसके कान पर लव बाइट किया तो तिलमिला उठी और घूम कर मेरे सीने से लिपट गई।

मैं उसकी पीठ और हिप्स को सहलाता रहा और वो मुझे कसके पकड़े खड़ी रही।

फिर मैंने उसका चेहरा जो मेरे सीने में उसने छुपा लिये थे वो ऊपर किया और हम किस करने लगे।

मैंने उसके बूब्स सहलाते सहलाते उसकी साड़ी उतार दी और ब्लाउज़ के ऊपर से उसके बूब्स दबाने लगा।

वो आआअह्हह्ह आआअह्ह करने लगी।

फिर मैंने एक हाथ उसके पेटीकोट के ऊपर से उसकी चूत पर रखा तो वो पहले से ही गीली हो गई थी, मैंने चूत को थोड़ा सहलाया फिर उसके ब्लाउज़ और पेटीकोट को उतार दिया और वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। खुले रेशमी बाल ऐसा लगता था कि कोई मार्बल का स्टेच्यु हो वो किसी फिल्म में।

पायल को मैंने उसे सर से लेकर पांव तक उसके बदन के हर एक अंग को चूमा वो मेरे हर एक किस पर सिसकती जाती थी।फिर वो बोली- मुझे और मत तड़पाओ डियर… अब मुझसे सब्र नहीं होता।

उसने मेरे सारे कपड़े फ़टाफ़ट निकाल दिये और मेरी बदन को अपने हाथों से सहला के मेरे लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी और नीचे घुटनों के बल बैठ के मेरे लौड़े को मुंह में लेकर लोलीपोप की तरह चूसने लगी।

मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था दोस्तो, पूरी बोतल का नशा छा रहा था, मैं मदहोश हुआ जा रहा था, क्या बताऊं क्या हालत हुई थी मेरी उसके लंड चूसने से।

फिर मैंने उसे उठाया और हम बेड पे गये।

मैंने उसकी ब्रा और पैंटी उतार दी और उसको लिटा कर उसे किस किया फिर उसके बूब्स क्या कयामत थे, उन्हें दबाया और उसकी निप्पल को चूसा।

जब मैं उसकी निप्पल पे अपनी जीभ घुमाता था तब वो आअह्हह स्सस्सहुसूऊऊओ और दबवूऊऊओ आआअ मज़ा आआअ रह्हह्हह आआअहे डियर !

सच कहूँ दोस्तो वो इतनी गोरी थी कि जब मैंने उसके चूचे दबाये तो वो एकदम लाल हो गये।

फिर थोड़ा नीचे होकर मैंने उसकी नाभि में जीभ घुमाई तो वो मेरे बालों को पकड़ कर मुझे हटाने लगी।

फिर मैं थोड़ा और नीचे हुआ और उसके दोनो पैरों को खोल कर उसकी चूत पर मैंने अपने होंठ रखे और किस किया।

वो बोली- कितना तड़पा रहे हो सुनील, प्लीज़ जल्दी से खा जाओ इसे !

मैं उसकी क्लीन शेव चूत को बड़े मज़े लेकर चाटने लगा। मेरी जीभ से ही वो दो बार झड़ गई, उसकी आवाजें सुन कर तो मुझे ऐसा लगा कि वो जिंदगी मैं पहली बार चुदवा रही हो, ऐसा रियेक्ट कर रही थी।

उसने कहा- तुमने तो मुझे चाट कर ही ढीला कर दिया।

मैंने कहा- मेरी जान, तुमने एंजोय ही तो करना था न, बोलो हुआ कि नहीं एंजोय?

उसने कहा- हाँ बहुत…

फिर मैं साइड में लेट गया और वो मेरे लंड को थोड़ी देर चूसने के बाद मेरे लंड के उपर सवार हो गई।

क्या स्ट्रोक लगा रही थी वो।

दोस्तो जब वो मेरा लंड अपनी चूत में लिये आगे पीछे हो रही थी और आह्ह्हाअह कम ओन आह्ह्हाअह आआ अह आह कर रही थी, उसके बूब्स जो उछल रहे थे उसे देख कर मेरा सेक्स पावर और बढ़ गया वो मेरे सीने को सहलाते हुए स्ट्रोक कर रही थी और साथ साथ में किस भी कर रही थी और में उसके गोरे गोरे बूब्स भी दबा रहा था।

वो तो आह्ह्हाअह आह्ह्हाअह आआ अह आह कम ओन मी चोदो चोदो मुझे फ़क मी ! कर रही थी।

समझ में नहीं आ रहा था कि वो मुझे चोद रही है या मैं उसे चोद रहा हूँ।

वो ऐसे ही दो बार झड़ गई और बोली- बस अब और नहीं !

तो मैंने कहा- डियर, अभी तो तुम्हारा ही हुआ है, मेरा तो कुछ एंजोयमेंट करो !

तो वो साइड में लेट गई और मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसकी लाल लाल चूत में लंड डालकर उसे चोदने लगा।

थोड़ी देर में मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने कहा- आई एम कमिन्ग।

उसने कहा- डोंट वरी, अंदर ही डाल दो, मैं गोली ले चुकी हूँ।

और मैं उसे चोदते चोदते उसकी चूत में ही झड़ गया, मेरे माल से उसकी चूत चिकनी हो गई।

हम रिलेक्स होकर बेड पे लेट गये एक दूसरे को चिपक कर।

मैंने उससे पूछा- डियर, तुम क्या अपने पति से संतुष्ट नहीं हो क्या?

तो उसने कहा- मैं अपने पति से बहुत संतुष्ट हूँ।

तो मैंने पूछा- तो तुम मेरे साथ एंजोय करना क्यों चाहती थी?

उसने कहा- रोज एक ही तरीके के सेक्स से बोर हो गई थी, तो सोचा कुछ अलग करुं।

मैंने कहा- तो कैसा रहा?

बोली- आई एम वैरी हैपी!

तो मैंने कहा- जिसको जो चाहिये वो मिल ही जाता है।

तो बोली- लेकिन हम ये सब दोबारा नहीं करेंगे।

मैंने उसे कहा- डियर जो तुम्हारी मर्जी !

फिर हम बाथरूम में जाकर फ़्रेश हुए और फिर मैं कपड़े पहन अपनी फ़ीस लेकर वापस चला आया और फिर हम एक दूसरे को भूल गये, न ही कभी उसने मुझे सम्पर्क किया न ही मैंने कभी। Antarvasna

दोस्तों ! हेलो !Hindi Sex Stories

मेरा नाम मोहित है और मेरी उमर ३४ साल है मैं दिल्ली Hindi Sex Stories में रहता हूँ, मेरी बीवी का नाम सोनू है और उसकी उमर भी २५ साल है हम दोनों के एक बच्चा है ५ साल का ! सोनू का ५ साल का बच्चा होने के बाद भी फिगर इतना आकर्षक है कि उसको अगर कोई देख ले तो सिर्फ़ एक ही ख्याल उसके दिमाग में आता है कि काश मैं इसकी चुदाई कर पाता, वो भी नंगी करके ! उसका फिगर है भी क़यामत ३६ इंच के मोटे मोटे बाहर को तने हुए चुचे, २८ इंच की कमर, ३८ इंच की मोटी गोल गोल गांड ! गांड देख कर तो गांड को फाड़ डालने का ही ख्याल आता है !

वो कपड़े भी ऐसे पहनती है कि मज़ा आ जाता है ! चूड़ीदार पजामी पर नीचे गले का सूट जिसमें से उसके मोटे चुचे झांकते रहते हैं !

चलो खैर क्या बताऊँ उसके बारे में ! बिस्तर पर भी वो चुदाई में मेरा पूरा साथ देती है। बिस्तर पर मैं नहीं वो मुझे चोदती है ! हर तरह का आसन उसे आता है ! लण्ड चूसने में तो वो एक्सपर्ट है !

मेरा एक दोस्त है विकास ! वो थोड़ा बात करने में बहुत तेज़ है ! वो भी शादीशुदा है उसकी बीवी बबली अभी छोटी है।

मेरा मन करता है उसकी बीवी के छोटे छोटे चुचे मुँह में ले कर चूसता रहूं और उसकी टाइट चूत में लण्ड डाल कर अपने लण्ड को छलनी कर दूं ! पर क्या करूं ! सोच ही सकता हूँ !

काश ऐसा होता विकास मेरे सामने सोनू को चोदता और मैं विकास के सामने बबली को चोदूं !

खैर असल कहानी यहीं से शुरू होती है ……..

विकास और सोनू अक्सर बातें किया करते थे, मेरे सामने भी और मेरे पीछे भी। पर क्या करते थे, मैं नहीं जानता था। मैं सोचता था सामान्य बात होती होंगी !

पर मैं ये भी जानता था विकास बहुत बड़ा चोदू है, वो लड़कियों और औरतों को जल्द ही पटा लेता था और समझ जाता था कि औरत क्या चाहती है !

पता नहीं घर पर एक टाइट चूत होते हुए भी क्यों वो बाहर मुँह मारता था ! खैर !

एक बार मैं और सोनू विकास के घर पार्टी पर गए हुए थे हमारा बच्चा दादी के घर पर था।

रात को दारू पार्टी हुई और सभी ने जमकर दारू पी। रात होने पर सभी अपने घर चले गए पर मैं वहीं रह गया क्योंकि मुझे कुछ ज्यादा ही चढ़ गई थी ! मैं एक कमरे में जा कर सो गया ! कुछ रात होने पर मेरी नींद प्यास के कारण खुल गई ! मैं पानी पीने किचन पर गया तो देखा विकास के बेडरूम की खिड़की पर कोई खड़ा है !

पास जाकर देखा तो सोनू थी पहले तो मुझे देख कर थोड़ा सकपका गई ! पर जब मैंने देख ही लिया था तो मुझे चुप रहने का इशारा करके मुझे अन्दर दिखाने लगी ! अन्दर का सीन देखते ही मेरे लण्ड का पानी छुटने को हुआ अन्दर सोफे पर बबली बिल्कुल नंगी होकर कुतिया वाले पोज़ में खड़ी है और विकास उसकी जमकर गांड में लण्ड पेले जा रहा है ! बबली जोर जोर से चीख रही है- बस करो जी अब !

पर विकास रुक ही नहीं रहा है ! धकाधक गांड का कुंआ बनाए जा रहा था !

पता नहीं बबली को मज़े आ रहे थे या नहीं पर वो भी आपनी गांड को जोर जोर से हिलाए जा रही थी और चीखे जा रही थी !

ये देख कर मैंने सोनू से कहा,” अरे रे रे ! बेचारी की चूत तो इतनी टाइट है पर न जाने इस विकास को क्या मज़े चाहिएँ जो इसको इस तरह से चोद रहा है !”

तब सोनू ने कहा- नहीं ! ये बात नहीं है ! मैं तो शुरू से देख रही हूँ विकास जिस तरह से चुदाई चाहता है उस तरह से बबली नहीं कर पा रही है ! वो बेचारी वैसे ही इतनी छोटी है उसको क्या पता सेक्स के बारे में इतना ! उसको तो सिर्फ़ बिस्तर पर लेट कर अपनी टांगें खोल कर लण्ड लेने की आदत है ! उसे क्या पता कि क्या होता है लण्ड चूसना, गांड मरवाना, घोड़ी बनकर चुदना वगेरह वगेरह ! हर कोई मेरी तरह थोड़े ही होता है !

सच में सोनू ने ये सही कहा था !

” वैसे मोहित ! विकास का लण्ड भी तो बहुत बड़ा है ! तुमसे कम से कम २ इंच तो लंबा होगा ही और मोटा भी बहुत है !” मैं ये सुनकर थोड़ा मुस्कराया और सोनू को देखने लगा ! उसकी आंखों में भी एक शरारत थी।

” तो फिर तुम ही क्यो नहीं पहुँच जाती उसके पास ! बबली को भी आराम आ जाएगा !” ऐसा कहकर मैं चला गया सोने के लिए वापस !

मैं बिस्तर पर तो लेट गया पर नींद आँखों में नहीं थी ! सोचता रहा मेरा लण्ड बबली के लिए परफेक्ट है और विकास का सोनू के लिए ! क्यों न ……….?

ऐसा सोचते सोचते थोड़ा टाइम हुआ तो मैं फिर सोचने लगा- नहीं यार सोनू तैयार नहीं होगी इसके लिए ! बबली को तो मैं जबरदस्ती चोद भी सकता हूँ वो कुछ भी नहीं कहेगी !

पर सोनू ….?

एक बार फिर मैं विकास के कमरे की तरफ़ बड़ा तो सोनू वहाँ नहीं थी ! कहाँ गई होगी?

मैंने कमरे में देखा तो वहाँ अँधेरा था !

अन्दर गया और लाईट जला कर देखा तो वहाँ सिर्फ़ बबली थी ! वो सो रही थी उसने सिर्फ़ मेक्सी पहन रखी थी ! और वो भी पारदर्शक ! उसमें उसके छोटे छोटे सीधे खड़े हुए चुचे झलक रहे थे ! मेक्सी भी जांघों से ऊपर आ रही थी।

मैंने हल्का सा हिम्मत करके उसकी मेक्सी को ऊपर उठाया तो हाय ! ये क्या …?

बिल्कुल चिकनी चूत ! मन कर रहा था अपनी जीभ लेकर घुसा दूँ उसमें और पी जाऊं सारा रस ! चूत देखकर लग रहा था कि कब से इसको किसी ने चोदा नहीं था ! विकास तो गांड में ही लगा रहता है ! पर मैंने देखा सोनू और विकास कहाँ है ? मैंने सोचा चलो थोडी देर में आकर इस चूत को भी देखते हैं पर पहले अपनी चूत …… मतलब अपनी बीवी को तो देखूँ कहाँ है वो !

सोनू को खोजते हुए में दूसरे कमरे की तरफ़ पहुँचा तो एक कमरे से लाईट जलती देख कर उधर गया तो अन्दर का नज़ारा देखते ही सन्न रह गया ..!

अन्दर चुदाई का ऐसा खेल चल रहा था जिसमे सोनू अपने नंगे बदन को दो दो मर्दों को सौंप उनके नंगे जिस्म से अपनी प्यास को बुझा रही थी !

अन्दर सोनू बिल्कुल नंगी होकर घुटनों के बल बैठी थी ! उसके सामने विकास अपना लण्ड उसके मुँह में डाल कर हिलाए जा रहा था और सोनू उसे चूसे जा रही थी। विकास का लण्ड उसके मुँह में पूरा भी नहीं आ रहा था ! पर सोनू मदमस्त होकर ऐसे चूस रही थी जैसे आज तक लण्ड मिला ही न हो !

उधर एक और शख्स दीपक था मेरा एक और दोस्त वो पता नहीं कब वापस आया था, वो भी बिल्कुल नंगा था शायद अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा हो !

दीपक ने सोनू की कमर में हाथ रख कर उसे उठाया और उसकी गांड को ठीक अपने लण्ड की पोसिशन में ले आया ! ठीक सोनू की चूत के सामने आते ही दीपक ने अपना लण्ड उसकी चूत में पेल दिया !

आह ! मर गई ईई इ इ क्या शोट मारा है तूने दीपक मज़ा आ गया !

उधर विकास लण्ड चुसाये जा रहा था !फिर जो दीपक ने झटके मारने शुरू किए तो रुका ही नहीं !

पट ! पट की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी साथ साथ सोनू की भी चीखें अहा मार डाला !!!!! कितना मज़ा दे रहा है तेरा लण्ड दीपक !

बड़ी देर तक उसी पोज़ में चोदने के बाद सोनू ने पोज़ बदला और विकास के मोटे लण्ड को पकड़ कर उसको बिस्तर पर लेटा कर उसके लण्ड को अपनी चूत में समां ले गई, अब सोनू विकास के ऊपर थी और विकास का लण्ड सोनू की चूत पर था दीपक सोनू के सामने आ गया और अपना लण्ड उसके मुँह में डाल दिया

आह !!!!!! क्या मज़े का दिन है दो दो लण्ड एक साथ काश तीसरा भी होता तो!!!!!!!?

सोनू दीपक का लण्ड चूसती जा रही थी और विकास के लण्ड पर अपनी गांड हिलाए जा रही थी विकास को पूरा मज़ा आ रहा था !

तभी सोनू ने दीपक को कहा- दीपक ! क्यों ना तू मेरे इसी पोज़ में मेरे पीछे आए और मेरी गांड में अपना लण्ड घुसाए?

दीपक ने कहा- हाँ हाँ! क्यों नहीं ! भाभी जी ! जैसी आपकी इच्छा !

और दीपक सोनू के पीछे आ गया और किसी तरह सोनू की सहायता से अपना लण्ड उसकी गांड में डालने में सफल हो गया।

अब तो जो चुदाई चल रही थी वो किसी ब्लू फ़िल्म से कम नहीं थी सोनू अपनी गांड को आगे करती तो विकास को मज़ा आता अगर पीछे करती तो दीपक को और सोनू को तो मज़ा आ ही रहा था। ऐसा करते करते जब तीनों थक गए तब जाकर तीनों अलग हुए अब विकास ने सोनू को साधारण आसन में चोदा।

मतलब सोनू की दोनों टांगे खोल कर टांगों के बीच में ख़ुद लेट कर धक्का पेली करते हुए !

जैसे ही विकास झड़ने को हुआ तभी उसने अपना लण्ड निकल कर सोनू के मुँह पर धार मार दी सोनू बड़े प्यार से उसे चाटने लगी तब दीपक ने भी ऐसा ही किया वैसे ही सोनू को चोद कर उसके मुँह में अपना माल झाड़ दिया।

फिर उस रात वो दोनों सोनू को बारी बारी से अपने पोज़ में चोदते रहे और सोनू भी उनका पूरा साथ देती रही !

आज की तारीख में ये हाल है कि मेरे सारे दोस्त सोनू को चोद चुके हैं !

मैंने भी उस रात जोश में बबली को चोदा था पर वो मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा !

तब तक के लिए बाय Hindi Sex Stories

Antarvasna

दोस्तो सेक्स का अनुभव ऐसा Antarvasna होता है जो इंसान को पूरी जिंदगी याद रहता है और ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ था जो कि मैं आपको बता रहा हूँ।

बात तब की है जब मैं 18 साल का था, कक्षा 12 में पढ़ता था और मेरे इंस्टिट्यूट में एक सर और मैडम का अफेयर चल रहा था, मेरी कक्षा में सभी को उनके अफ़ेयर के बारे में पता था, सभी उनके मज़े लिया करते थे।
और एक दिन मेरी भी किस्मत का ताला खुल गया..

बात थी 12 जनवरी की, हमारे इंस्टिट्यूट का वार्षिक-उत्सव था, रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम होने थे.. मैंने भी 2 ड्रामों मे भाग लिया था इसलिए मुझे भी एक दिन पहले देर रात तक इंस्टिट्यूट में रुकना पड़ा। मैं और मेरा दोस्त नवीन शाम को खाना खाकर फिर से इंस्टिट्यूट आ गए थे और सर ने हमें कहा था कि शायद रात को यहीं रुकना पड़ सकता है इसलिए हम पूरी तैयारी के साथ आए थे और हाल में ही सभी के बिस्तर लगे थे।

सभी लगभग 10 बजे तक सो चुके थे पर हम दोनों दोस्तों को नींद नहीं आ रही थी, तो हम बाहर जा कर मैदान में घूमने लगे। तभी पास की लाइब्रेरी से कुछ आवाज़ आती हमें सुनाई दी और हम दोनों लाइब्रेरी की ओर चलने लगे। धीरे धीरे आवाज़ तेज होती गई, जो किसी लड़की की आवाज़ थी, वो दर्द से कसमसा रही थी।

लाइब्रेरी के पास पहुँचते ही हम सब समझ चुके थे कि मामला आख़िर क्या है ! लाइब्रेरी के अंदर वही सर जिनका नाम राकेश था, प्रिया नाम की 24 साल की मैडम के साथ काम-क्रिया में लिप्त थे.. सर मैडम के बोबे दबा रहे थे और मैडम मस्ती से सर का लंड मसल रही थी।

इसे देख कर मेरी हालत भी खराब होने लगी और मैं भी अपना लंड हाथ से हिलाने लगा। तभी नवीन ने कहा- प्रतीक कंट्रोल कर ! आज तो मैडम को चोदेंगे, बस तोड़ा सा इंतजार कर…

और फिर हम धीरे से लाइब्रेरी में घुस कर छिप गये। मैडम और सर ने अपने अपने कपड़े खोल लिए थे। तभी नवीन ने चुपके से मैडम के कपड़े छुपा लिए और मुझे बोला- अब देख मेरा कमाल ..

थोड़ी देर में सर मैडम को चोदने लगे और कुछ ही देर में सर झड़ गये और मैडम से ऊपर से उठ कर कपड़े पहनने लगे। तभी मैडम ने अपने कपड़े देखे, पर उन्हें नहीं मिले। वो इधर उधर कपड़े देखने लगी पर कपड़े तो हमारे पास थे ..

इतने में नवीन ने कहा- क्यों प्रिया ! कपड़े नही मिल रहे?

उसको देख कर मैडम एक दम सुन्न सी रह गई और अपने हाथों से अपने स्तन छिपाने लगी और कहने लगी- अरे नवीन मेरे कपड़े दो !

नवीन ने कहा- बहनचोद ! अभी तो तुझे हमसे चुदाना पड़ेगा..
वो रोने लगी- नही ऐसा नहीं होगा ! जल्दी से मेरे कपड़े दो !

इसी बीच सर वहाँ से खिसक कर चले गये..
नवीन ने कहा- मैडम कपड़े चाहिएँ तो एक बार चूत देनी पड़ेगी…

मरती क्या नहीं करती, उसने मजबूरी में अपने दोनों हाथ नीचे कर दिया और बोली- लो कर लो जो भी करना हो…

बस उसका ये बोलना हुआ और मैं और नवीन उस पर चढ़ गये और उसको तीन बार चोदा.. और वो करीब पाँच बार झड़ गई और फिर हम दोनों को किस करके बोली- मज़ा आ गया ! इतना मज़ा तो तुम्हारे राकेश सर से भी नहीं आया…

और फिर हम चुपचाप आकर हाल में सो गये..

अगले दिन कार्यक्रम था। उस रात भी हमने उसे होटेल में ले जाकर चोदा !

वो मैं आपको बाद में बताऊँगा और नवीन से भी आपको मिलवाउँगा।

तब तक के लिए इजाज़त दीजिए !
और हाँ मुझे मेल तो आप करेंगे ही ना !सूरज और राहुल को मेरे मकान में किरये पर रहते हुए करीब एक महीना हो चुका था। वो दोनों शाम के आठ बजे कमरे पर आ जाते थे, फिर बाहर नहीं निकलते थे। मेरे पति अधिकतर कुवैत में रहते थे। मेरी शादी को लगभग सात वर्ष हो चुके थे।

घर पर बस सास ससुर ही थे जो सामने के हिस्से में रहते थे। मैं पीछे के हिस्से में रहती थी, यहीं किचन भी था। साधारणतया वे रात को आठ बजे के बाद पीछे नहीं आते थे। खाना खाने के बाद वे दोनों टीवी देखते थे, फिर साढ़े नौ बजे तक वो दोनों सो जाया करते थे।

उस समय मेरे मन का शैतान जाग उठता था और कम्प्यूटर पर मैं अन्तर्वासना और अन्य सेक्सी चेनल देखती रहती थी। सूरज और राहुल का कमरा मेरे ड्रेसिंग-रूम से लगा हुआ था और उस कमरा का दरवाजा उनके कमरा में खुलता था।
किराये पर देने के बाद से उसे मैंने अपनी तरफ़ से बंद कर रखा था। ड्रेसिंग-रूम में मैं कम ही जाती थी। ऊपर का रोशनदान का कांच टूटा होने से उनके कमरे में से आवाजें मुझे स्पष्ट आती थी। पर मैंने कभी उस पर ध्यान नहीं दिया।

आज मुझे राहुल और सूरज के कमरे में से टीवी में से कुछ सेक्सी आवाजें आ रही थी। मैं ऐसी आवाजें खूब पहचानती थी। ये ब्ल्यू फ़िल्म की चुदाई की आवाजें, सिसकारियाँ और इंगलिश डायलोग की आवाजें थी। मेरा ध्यान अब उस कमरे की तरफ़ था। मन में जिज्ञासा जाग उठी कि उस कमरे में क्या हो रहा है।

मैं ड्रेसिंग-रूम में गई और टेबल के ऊपर स्टूल रखा और उस पर चढ़ कर कमरे में झांकने लगी। सूरज और राहुल बैठे दारू पी रहे थे और एक तरफ़ टीवी में ब्ल्यू फ़िल्म चल रही थी। उनके पास पलंग नहीं था। उनके बिस्तर नीचे फ़र्श पर ही बिछे थे। मैं धीरे से नीचे उतर गई। मुझे ये अब मालूम हो गया था कि ये दोनों ब्ल्यू फ़िल्म के शौकीन है।

मेरा मन मचल उठा, मेरे मन में वासना हिलोरे मारने लगी। मैं उनके लण्ड की कल्पना करने लगी, उनका खड़ा हुआ लण्ड मुझे महसूस होने लगा था और अपनी चूत में घुसते हुए की कल्पना करने लगती थी। मेरा मन उनसे चुदाने को करने लगा और उन्हे पटाने की तरकीब सोचने लगी।

सीधी सी योजना मन में उठी कि इन से पहले दोस्ती बढाई जाये।

प्लान के मुताबिक सवेरे मैंने नाश्ता बनाया और और उनके कमरे के बाहर आकर उन्हें उठाया। सूरज ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर चौंक गया।

‘दीदी आप… ! गुड मोर्निंग !’
‘चाय नाश्ता लाई हूँ, चलो उठो और नाश्ता कर लो’ मैंने उन्हें मुस्करा कर कहा। कमरे में आ कर मैंने मेज़ पर चाय और नाश्ता रख दिया।
‘नाश्ता कर लो तो बरतन दे जाना।’ कह कर मैं बाहर आ गई।

धीरे धीरे मेरी उनसे दोस्ती अच्छी हो गई। अब मैं बेधड़क उनके कमरे में आने जाने लगी। सूरज और राहुल दोनों ही इस दोस्ती से खुश थे। दोनों ही मुझे दीदी की नजर से नहीं, वासना की नजर से देखते थे। मैं उनकी नजरें भांप गई थी। वे दोनों ही अक्सर मेरे स्तनों को घूरते रहते थे। मेरे गाऊन में से मेरे तने हुए स्तनो को झांक कर देखने की कोशिश करते थे। शायद ये सब उनके ब्ल्यू फ़िल्म देखने का असर था। मैं चाहती भी यही थी कि उनकी भावना मेरे लिये जागे और मेरी चुदाई हो जाये।

मैं तो चाह रही थी कि अभी चोद दें ! पर शुरुआत कैसे हो।

आज मैं उनके कमरे में शाम को चिकन करी बना कर ले गई। वो दोनों नहा धो कर दारू पीने की तैयारी कर रहे थे। शायद फिर वो ब्ल्यू फ़िल्म देखते। इसलिये मेरा आना उन्हे अच्छा नहीं लग रहा था।

‘देखो ! दारू पी लो तब चिकन करी खा लेना…समझे?’
चिकन करी का नाम सुनते ही वो दोनों खुश हो गये।
‘अपनी दीदी को दारू नहीं टेस्ट कराओगे’
‘अरे दीदी आओ ना, सॉरी ! हमने पूछा नही, आओ बैठ जाओ’

मैं मुस्करा कर चली आई। मेरे दिल में आज हलचल थी। मन मचलने लगा था। मन मैला हो रहा था। चुदने की जबरदस्त इच्छा हो रही थी। कमरा उन्होंने बंद कर लिया और फिर ब्ल्यू फ़िल्म की आवाजें आने लगी थी। पर मुझे लगा राहुल और सूरज की आवाजें भी आ रही थी। ये दोनों क्या कर रहे होंगे। उत्सुकता के मारे कमरे में आकर मैंने फिर से मेज़ पर स्टूल लगाया और ऊपर चढ़ गई। अन्दर जो मैंने देखा तो मेरा मन डोल उठा।

सूरज और राहुल दोनों नंगे थे, उनके बलिष्ठ चिकने शरीर लाईट में चमक रहे थे। राहुल की गाण्ड चिकनाई से चमक रही थी और सूरज का लण्ड उसकी गाण्ड चोद रहा था। मेरे मुख से आह निकल गई, मैंने अपनी चूत दबा ली और उनकी लीला देखती रही। उनका कार्यक्रम समाप्त हुआ, तो मैं नीचे उतर गई और अपने कमरे में आ गई।

मेरी सांस उखड़ रही थी, दिल की धड़कन तेज हो गई थी, पसीना बह निकला था। मैंने जल्दी से लम्बा बैंगन उठाया और गाऊन ऊपर करके चूत पर घिसने लगी। कुछ ही देर में मैं झड गई। मैं बैचेन दिल से बिस्तर पर करवट बदलने लगी। रात को जाने कब नीन्द आ गई।

सुबह मैंने उन्हे नाश्ता दिया और प्लान के मुताबिक मैंने उनसे कहा,’आज मेरा जन्म दिन है, शाम का खाना मत बनाना, ये ड्रेसिंग-रूम वाला दरवाजा खोल देना’

‘दीदी आपको जन्म-दिन की बधाई … क्या खिला रही हो?’
‘तुम मिठाई तो खाओगे नही, इसलिये मेरे पास तुम्हारे लिये एक अच्छी दारु है, ठीक है ना?’
‘थेंक यू दीदी, मजा आ जायेगा’ राहुल ने जोश में मेरा गाल चूम लिया और फिर झेंप गया।
‘सॉरी दीदी !’

‘सॉरी क्यूँ, मेरे जन्म-दिन का चुम्मा तो देना ही है ना, आओ मुझे चुम्मा दो फिर से !’ मैंने मौका गंवाना उचित नहीं समझा।

राहुल ने फिर से मेरे गाल पर चुम्मा लिया। सूरज ने भी मेरे गाल पर चुम्मा दिया, पर उसने हल्की सी जीभ भी गाल से छुला दी। मैंने उसे देखा तो वो शरारत से हंस पड़ा।

‘अच्छा ! ! शरारत की… मारुंगी हांऽऽऽऽ !’ मैं मुस्कराती हुई वापस आ गई। दिल में एक आस जगी।

शाम को मैंने बड़े चाव से चिकन पुलाव और चिकन बनाया और उसे मैंने अपने ड्रेसिंग-रूम में रख दिया और दरवाजा खोला और उनके कमरे में आ गई। वो दोनों नहा धो कर पजामा पहन कर गिलास लगा कर बैठे थे। मैंने उन्हें बढ़िया शराब की बोतल दी और उनके साथ दीवार से लग कर बैठ गई। दोनों ने गिलास भरा और सोडा डाला और मुझे चियर्स किया। उनके जाम चालू हो गये।

‘दीदी, एक पेग तो ले लो, अच्छा लगेगा !’

‘अरे एक से क्या होगा, मौका आने दो, फिर खूब पेग लूंगी।’ मैं उनके सामने ही बिस्तर पर उल्टी लेट गई और कोहनी के बल सामने से शरीर उठा कर बाते करने लगी। मेरे झूलते हुए दोनों बोबे गाऊन में से उन्हें स्पष्ट नजर आने लगे थे। उनकी नजरे वही जमी थी। मेरा ये पोज सफ़ल रहा।
अचानक सूरज ने कहा- दीदी जन्म-दिन का किस तो किया ही नहीं। मैं अब सब समझ रही थी, उन्हें अब मुझसे खेलना था। मेरे झूलते बोबे देख कर उनका मन भी डोल उठा था। मैं भी इसके लिये तैयार थी कि कोई शुरुआत तो करे।

‘अरे हाँ रे… चलो पहले कौन करेगा?’ मेरे कहते ही राहुल लपक कर उठा।

‘दीदी, पहले मैं करूंगा’ मुझे लेटे ही लेटे उसने झुक कर किस कर लिया, उसका एक हाथ मेरे चूतड़ो पर से सहलाता हुआ पीठ पर आ गया और साथ में बधाई दी। मेरे शरीर में बिजलिया तड़क उठी। अब सूरज की बारी थी। आशा के अनुरूप उसने मेरे गाल पर किस किया पर मेरे झूलते हुए बोबे को भी एक उंगली से दबा दिया।

मेरा शरीर झनझना उठा। मैंने ऐसा जताया कि जैसे कुछ हुआ ही नही। पर दिल ने दिल का इशारा समझ लिया। मुझे लगा कि जल्दी ही खेल की शुरुआत होने वाली है। सूरज मेरे पास ही बैठ गया। तभी बिजली चली गई, कमरे में एकदम से अंधेरा हो गया। सूरज ने इसका तुरन्त फ़ायदा उठाया, और खेल शुरू हो गया।

‘दीदी, एक किस और ले लू, प्लीज़’

उसने मुझे हां या ना कहने का मौका दिये बिना मेरे गाल पर अंधेरे में किस कर दिया। उसके हाथ मेरे बोबे पर आ गये और दोनों हाथ मेरी चूंचियो पर कस गये। और दूसरे ही पल में वो मेरी पीठ पर सवार हो गया। मेरे बोबे उसके हाथ में थे, मेरे गाऊन के ऊपर से उसका लण्ड मेरे चूतड़ो पर गड़ने लगा। हाय रे, इतना कड़क लण्ड, लगा कि गया चूतड़ के अन्दर… पर नखरे तो करना था ना…

‘अरे सूरज, ये क्या, चल छोड़ मुझे…’

तभी मुझे लगा राहुल ने मेरे दोनों पांव पकड़ लिये और मेरा गाऊन उठा दिया। सूरज का पजामा राहुल ने खींच दिया। मेरी गाण्ड नीचे से नंगी हो चुकी थी और सूरज का लण्ड भी बाहर आ चुका था। मेरे मन के सितार बज उठे। मेरे बिना जतन के दोनों तैयार थे। मैं बस चुदने ही वाली थी।

‘क्या कर हो ये, मैं मर जाऊंगी देख सूरज, ना कर…हाय रे।’ सूरज ने मुझे धक्का दे कर चित लेटा दिया और मेरे गाऊन को ऊपर से खींच डाला।

तभी लाईट आ गई। पर बाज़ी सूरज के कब्जे में थी। राहुल ने मेरे पांव खींच कर चोड़ा दिये जबकि सूरज का लण्ड निशाने पर आ चुका था। मेरे पांव चौड़ाते ही मेरी चूत खुल गई और सूरज ने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा डाला। मुझे बहुत आनन्द आया पर उन्हे दिखाने के लिये मैं हल्की सी चीख उठी,’हाय रे ! मुझे मार डाला… सूरज प्लीज़ छोड़ दे, देख मैं तेरी दीदी हूँ !’ उसका मस्त लण्ड गहराई में उतरता जा रहा था।

‘दीदी प्लीज़, मुझसे रहा नहीं जा रहा है, करने दो ना।’
‘देख मैं चिल्लाऊंगी… राहुल इसे हटा दे।’
‘दीदी, प्लीज, देखो आपका जन्म-दिन है, आप भी मजा लो, हमें भी मजा लेने दो’

‘हां दीदी, देखो ना, हम दोनों आपका नाम लेकर कितना मुठ मारते है… दीदी मान जाओ ना’ राहुल ने भी अपने मन की कह दी।

‘दीदी मेरा लण्ड कितना फ़ड़क रहा है, चुदा लो ना’ लण्ड पूर जड़ तक बैठ चुका था। सूरज ने विनती की और अपना होंठ मेरे मुख से सटा दिया। मैं मदहोश होती जा रही थी। कब तक मैं नाटक करती, मुझे भी तो चुदाई का मजा भरपूर मजा लेना था। दोनों ही मुझे चोदने के लिये उतावले हो रहे थे। वास्तव में मेरी हालत तो और भी अधिक खराब हो रही थी। बस चुदने का मन कर रहा था।

मैंने सूरज से अपने होंठ अलग किये और राहुल से कहा,’राहुल मेरे पांव छोड़ दे प्लीज़, मैं कुछ नहीं करूंगी’ राहुल ने मेरे पांव छोड़ दिये। मैंने अपनी टांगे उपर उठा ली और चूत को पूरी खोल दी। उसका लण्ड आराम से पूरा ही चूत में उतर गया।

मेरे मुख से चीख निकल पड़ी,’हाय सूरज, चल चोद दे मुझे, पूरा चोद दे मेरे राजा।’ मैंने भी उसे भींच लिया। चुदाई की मिठास का पूरा सुख उठाने लगी।

‘दीदी आपकी चूत से खून निकल रहा है, सूरज मत कर यार, देख दीदी को तकलीफ़ हो रही है।’

‘राहुल चुप रह, सूरज चोद यार…ये तो महीनो बाद चुदाई का असर है, फिर इसका लण्ड भी तो मोटा और लम्बा है, चोदने दे’ मैंने राहुल को समझाया, मैं मजा छोड़ना नहीं चाहती थी। सूरज के शरीर में अचानक बिजलियाँ भर गई और तरावट आने लगी। लण्ड कस कर चूत पर ठोकर मारने लगा।

मेरे बदन में आग सी उतरने लगी। सारा खून लगा कि चूत में बह रहा है, तेज मिठास चूत में भर गई और …और… मेरा पानी छूट पड़ा। मेरे मुख से एक चीख सी निकल गई। मैंने बहुत महीनो बाद चुदाया था सो बहुत अधिक उत्तेजित होने से मैं जल्दी झड़ गई।

‘हाय रे सूरज, मुझे सम्भाल, मैं तो अह्ह्… गई, सूरजऽऽऽ’ मैं झड़ने लगी। सूरज ने भी लगा कि बहुत रोकने की कोशिश कर रहा था पर रूक नहीं पा रहा था। उसने भी शायद किसी लड़की को पहली बार चोदा था, सो वो अधिक उत्तेजना के कारण झड़ने वाला था।’मै मर गया दीदी, भोसड़ी की, हाय माँ चुद गई मेरी तो…दीदीऽऽ !’ सूरज भी झड़ने को था, उसके मुँह से उत्तेजना भरी गालियाँ निकलने लगी

‘सूरज बस, हो जा रे अब, निकाल दे तू…।’

‘इस लण्ड की मा चोदू, ये भी गया… तेरी चूत मस्त है रे… दीदी… हाय रे…।’ उसका वीर्य छुट पड़ा।

‘आहऽऽ मा की भोसड़ी… निकल गया रे’ लगभग चीखता सा पिचकारी छोड़ने लगा। राहुल ने उसका लण्ड बाहर खींच लिया था और उसका माल मसल मसल कर बाहर निकलने लगा। कुछ ही देर हम दोनों निढाल पड़े थे। सूरज उठ कर बैठ गया। मैं पांव पसारे लेटी रही। इतने में राहुल मेरे ऊपर चढ गया। और लण्ड का जोर मेरी चूत पर लगाने लगा।

‘राहुल ठहर जा रे, अपनी दीदी का कचूमर ही निकाल दोगे क्या… रुक के करना… मैं कही भाग थोड़ी रही हूँ।’ मैंने गहरी सांसे भरते हुए कहा।

राहुल धीरे से मेरे ऊपर से हट गया। मैं उठ गई और दीवार के सहारे टिक कर बैठ गई।

‘सूरज तुम बहुत बुरे हो, मुझसे पूछ तो लिया होता…अच्छे से चुदवाती तो मजा आता ना !’
‘दीदी मुझे माफ़ कर देना, तुम्हारे झूलते हुए बोबे देख कर मेरा मन डोल गया था…प्लीज़ माफ़ कर दो ना !’

मैने सूरज को गले लगा लिया, राहुल भी मेरे से लिपट गया।

‘अब मेरे लिये भी एक जाम बनाओ, सूरज…’ सहिल खुश हो गया। उसने मेरे लिये पेप्सी में एक जाम बनाया, हम तीनों ने जाम पूरा पी लिया।

‘अब तुम दोनों मेरे पास लेट जाओ, मुझे भी तुम्हारा चोदन करना है।’ दोनों ही हंस पड़े। मेरे दायें-बायें दोनों ही चित लेट गये। मैंने दोनों का लण्ड हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाना चालू कर दिया। दोनों के मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी। दोनों लण्डो की चमड़ी ऊपर निकाल दी और टोपे बाहर निकाल दिये। दोनों के लाल सुपाड़े चमक उठे। मैं एक एक करके उन्हें मुँह में भर कर चूसने लगी। कभी राहुल का लण्ड चूसती और कभी सूरज का।

मेरे दिल की इच्छा पूरी जो करनी थी। मेरे नसीब में दो दो लण्ड का मजा लिखा था। मैं हमेशा ये सोचती थी कि हाय कभी ऐसा दिन आयेगा कि नहीं जब मेरी चूत और गाण्ड एक साथ दो लण्ड चोदेंगे, और मुझे चोद चोद कर निहाल कर देंगे। दो लण्डो को एक साथ चूसने का मौका मिलेगा कि नहीं। हाय रे… आज तो मेरे दिल की इच्छा पूरी होने जा रही थी। उनके लण्ड फ़ुफ़कार उठे। सुपाड़े की रिन्ग को कस कर चूसे जा रही थी।

‘अब दोनों अपनी टांगे ऊंची कर लो…’ वासना में दोनों तडप उठे थे, उन्होंने अपनी टांगे ऊपर कर ली। उनके गाण्ड का फूल खिल उठा, और दरारो में से झांकने लगा। मैंने प्यार से वहा पड़ा देसी घी उंगली में लगाया और उनके फूल पर लगा दिया। फ़ूल स्पर्श पा कर अन्दर बाहर होने लगा, लपलपाने लगा। मेरी उंगली उनके गाण्ड के फूल में घी लगा कर चिकना कर रही थी। फिर मैंने दोनों हाथों की एक एक उंगली उनके फ़ूल में दबा दी और अन्दर सरका दी। और धीरे से अपनी पूरी उंगली अन्दर घुसा दी।

मेरी उत्तेजना बहुत बढ गई थी। चूत से एक बार फिर गीली हो कर पानी से तर हो गई थी। उन दोनों को इस काम में पूरा मजा आ रहा था, क्योकि वो दोनों गाण्ड मराने में माहिर थे। मेरे से अब रहा नहीं गया मैंने रोहल को सीधा किया और उस पर लेट गई।

‘राहुल मजा आया ना, अब मुझे चोद दे…और मजा करेंगे !’

मेरी गीली चूत पर उसका लण्ड दबा हुआ था। मैंने ऊपर से उस पर जोर लगाया और फ़क से लण्ड चूत में उतर गया। मैं ऊपर से ही अपने दोनों पांव खोल कर उसके लण्ड को अपनी चूत में समा लिया। इतने में सूरज ने भी मेरी पोजिशन देखी तो वो मेरे पीछे आ खड़ा हुआ और मेरी गोलाईयो को चीर कर मेरी गाण्ड को खोल दिया। मेरा फ़ूल मुस्करा उठा।

उसने घी अपनी उंगली में लगा कर मेरी गाण्ड में भर दिया। उसका लन्ड अब मेरी गाण्ड में घुसने कि कोशिश करने लगा। मुझे ये सोच कर ही मदहोशी छाने लगी कि मेरी गाण्ड और चूत को एक साथ लण्ड मिल रहा है। यही तो मेरी दिली तमन्ना थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस पड़ा।

‘राहुल, इस सूरज ने तो मेरी गाण्ड में लण्ड घुसा डाला !’
‘दीदी, मस्त हो जाओ, दोनों तरफ़ से मजे लूटो, सूरज मेरी गाण्ड भी बहुत अच्छी मारता है।’
‘हाय रे राहुल… मेरी किस्मत कितनी अच्छी है, चोद दो आज मुझे, मुझे स्वर्ग में पहुंचा दो’…।
‘दीदी, अब तो आज से रोज ही तुम्हें ऐसे ही चोदेंगे…तुम्हारी चूत की मा चोद देंगे, तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना देंगे’

‘चुप सूरज, ना बोल ऐसे, वरना ऐसे तो मेरा तो रस निकल जायेगा… चल मेरी भोसड़ी चोद दे…लगा लौड़ा जोरदार !’ मैं भी बहक उठी उसकी भाषा सुन कर, गाण्ड की जड़ तक लण्ड घुस पड़ा था। मुझे दर्द होने लगा। पर राहुल के लण्ड का मजा दुगना था। चूत भी लप लप कर रही थी और रस से भर चुकी थी। सूरज के धक्के ऐसे जोरदार थे कि उसके धक्को का सहारा मेरी चूत को भी मिल रहा था और वही धक्का राहुल के लण्ड पर जा रहा था। हम तीनों एक जिस्म होने की कोशिश कर रहे थे।

मुझे लग रहा था हाय राम… एक औरत को दो मर्दो से शादी करनी चाहिये। आखिर ऊपर वाले ने दो छेद भी तो दिये है दो लण्ड घुसाने को। अब हम तीनों बिस्तर पर करवट से लेट गये थे और मैंने अपना पांव राहुल की कमर पर डाल दिया था। अब मेरी चूत और मेरी ग़ाण्ड पूरे स्वतन्त्र थे।

सूरज भी फ़्री हो कर मेरी गाण्ड में लण्ड पेल रहा था और राहुल भी अब तेजी पर था। मेरे बोबे दोनों मिल कर खींच रहे थे, निचोड़ रहे थे। निपल को खींच खींच कर मजा दे रहे थे, दर्द भी निपल में हो रहा था पर मजा भी तो असीम आ रहा था।दोनों ने मुझे जबर्दस्त भींच रखा था। लण्ड फ़चाफ़च चल रहे थे।

मेरे पूरे जिस्म में मिठास भर चुकी थी। खुशी सम्हाले नहीं सम्हल रही थी। मेरा मुख को चाटते हुए पूरा थूक से भर दिया था और जीभ लपक लपक कर मेरा सुन्दर चेहरा चाटे जा रही थी। मैं आंखे बंद किये स्वर्ग जैसी अनुभूति प्राप्त कर रही थी। अचानक मेरा जिस्म इतनी खुशी झेल ना सका और बदन कसमसा गया।

‘हाय राहुल, बस अब नही, मेरी तो माँ चुद गई… गई रे… आह्ह्ह्ह’ और मेरा सारा आनन्द चूत में से पानी बन कर बाहर उछल पड़ा। दोनों के लण्ड तेजी पर थे, मस्त चोद रहे थे, मैं झड़ती जा रही थी। मैं राहुल से लिपट पड़ी। इतने में सूरज ने मेरी गाण्ड पर वीर्य की बौछार कर दी। मैं आनन्दित हो उठी।

तभी राहुल भी छूट पड़ा। मेरा निचला तन दोनों ओर से भीग उठा। दोनों के शरीर के वीर्य निकलते हुए, लण्ड के झटके बड़ा ही आनन्द दे रहे थे। दो मर्दों की चुदाई में इतना आनन्द आता है ये तो मुझे सपने में भी अहसास नहीं हुआ था। शराब का नशा, चुदाई का नशा, दो जवान जिस्मों का आनन्द, मुझे दो जन्मो का आनन्द दे गया।

हम धीरे से उठे और बाथ कमरा में चले आये। रोहल और सूरज ने दोनों ने मुझे प्यार से साफ़ किया, पानी डाल कर मेरी चूत और गाण्ड की सफ़ाई की। फिर दोनों ने मुझे लिपटा कर खूब प्यार किया। दोनों मुझे बैठा कर प्यार से मेरे मुख में खाना डाल कर खाना खिलाया। हम फिर से तरोताजा हो गये।

‘अब गुडनाईट, कल मिलेंगे…!’

‘दीदी रुक जाओ ना, देखो पूरी रात पड़ी है, मजे करेंगे।’

‘नही, बस अब नही, मुझे तुम दोनों ने इतनी खुशी दी है कि मैं भूल नहीं सकती हू। फिर आज तो पहला दिन है कल भी है, परसों भी…’ पर मुझे उन्होंने बोलने का मौका ही नहीं दिया। मुझे प्यार से उठा कर एक बार फिर बिस्तर पर लेटा दिया। फिर से वो दोनों मुझसे चिपक गये, पर इस बार राहुल मेरी गाण्ड से चिपका था और उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुसा जा रहा था।
सूरज ने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा डाला… एक बार फिर से कमरा आनन्द की सिसकारियो से गूंज उठा। मैं फ़िर से स्वर्ग का सा आनन्द उठाने लगी… Antarvasna

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लेखक: जतीन, हाय Antarvasna, अपनी पहली कहानी में मैंने बताया की मेरा दोस्त नवीन रसोई में मेरी भाभी के मम्मे दबा रहा था, किस भी कर रहा था लेकिन उन्होंने ज्यादा कुछ नही किया मै घर में था। मुझे पता था कि वो भाभी को खूब दबा के चोदेगा। मैं देखना चाहता था कि वो यह सब कैसे करता है, मैने एक योजना बनाई और उन दोनों को मूवी देखने जाने के लिये कहा। पहले तो वो मना करने लगी पर जब मैने बताया कि नवीन भी है तो मान गयी।

भाभी ने गहरे गुलाबी रंग का स्लीव्लैस सूट पहना। उनके बूब्स उस तंग सूट में काफ़ी उभर आये थे और वो बहुत प्यारी और सेक्सी लग रही थी। नवीन अपनी बाइक पर आया तो मैने भाभी से कहा कि मेरे स्कूटर में हवा कम है इसलिये वो सनी के बाइक पर बैठ जायें। वो मान गयी औरतके पीछे बैठ गयी। मैं आराम से पीछे आ रहा था, तो मैने देखा कि वो बार बार ब्रेक मार रहा था और भाभी उसके ऊपर झुकी हुई थी और उसके मोटे मम्मे उसकी पीठ पर गड़े जा रहे थे। वूऊऊओ, साले को कितने मजे आ रहे होंगे मैं सोच कर ही एक्साइट हो रहा था। दोनो पता नहीं क्या बात कर रहे थे पर भाभी हंस रही थी। प्लान बना कर मैं ने ऐसी मूवी का टिकट लिया जिसमे कम भीड़ थी। हम मूवी देखने लगे। थोड़ी देर बाद मैं ने महसूस किआ कि भाभी जो हम दोनो के बीच में बैठी हुई थी थोड़ी बेचैन हो रही है।

मैं ने अंधेरे में नजर घुमाई तो देखा उसने एक हाथ भाभी के मम्मे पे रखा हुआ है और दबा रहा था। ऊऊऊऊऊओ। यहां भी वो कोई मौका नहीं छोड़ रहा था धीरे धीरे वो अपने हाथ नीचे ले गया और सूट के अंदर डाल दिआ, उसका हाथ उनकी टांगो के बीच था। वो उसका हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी पर शायद उन्हे मजा भी आ रहा था। मैं समझ गया कि मेरे रहते कुछ नहीं होगा सो मैं ने फोन आने का बहाना बनाया। उनहे बताया कि मुझे अर्जेन्ट काम से जाना पड़ रहा है और वो मूवी देख के घर चले जायें मैं बाद में आ जाउंगा।

मैं हाल के बाहर पहुंचा और एक कोने से उन्हे देखने लगा थोड़ी देर मैं दोनो के बाहर आते देखा। दोनो बाइक पर बैठ कर निकल गये। मैं ने पीछा किया तो देखा कि वो एक होटल में चले गये। मैं ने सोचा था कि शायद वो घर ले जायेगा पर होटल में नहीं सोचा था। मैं अंदर गया और रिसेप्शन पे थोड़ी पूछ ताछ करने की कोशिश करी पर कुछ हाथ नहीं आया मैं मायूस हो रहा था उन्हे करीब २० मिनट हो गये थे और मैं सोच कर परेशान हो रहा था कि वहां क्या चल रहा होगा। जब मुझसे नहीं रुका गया तो मैं ने नवीन का फोन लगाया। बेल जाती रही पर उसने नहीं उठाया। वो ऐसी कंडीशन में थे कि उस समय फोन नहीं उठा सकता हो। मै बहुत बेचैन हो उठा।

मैं काल पे काल करता रहा आखिर उसने उठाया तो मैं ने बोला कहां हो यार।

पूछने लगा क्या हुआ, उसकी आवाज़ मेँ गुस्सा था। मैं ने बोला मेरा प्रोग्राम केन्सल हो गया है और मैं हाल के बाहर उनका इंतजार कर रहा हूं।वो कुछ देर चुप रहा मैं ने पूछा क्या हुआ? तो बोला यार मूवी अच्छी नहीं थी इसलिये हम बाहर आ गये और अब मार्केट में हैं, भाभी को शोपिंग करनी थी मेरी भाभी को किस चीज़ की शोपिंग करा रहा था मैं सब समझ रहा था। मैं ने कहा मुझे शोप बताओ मैं वहीं आता हूं, गुस्से में उसने भाभी को फोन दिया और बोला भाभी बतायेंगी।

जब मैं भाभी से बात कर रहा था उनकी सांसे फ़ूली हुई लग रही थी। बीच बीच में रुक रही थी, शायद मेरे से बात करते वक्त वो उनके साथ कुछ कर रहा था, अंतत: उन्होने मुझे एक शोप पे बुला लिया। थोड़ी देर में दोनो तेजी से होटल के बाहर आये जब वो घर से गयी थी उनके बाल बंधे हुए थे और अब बाल खुल गये थे मुझे वो एक शोप में मिले तो नवीन नाराज सा दिख रहा था और भाभी बहुत बेचैन और परेशान थी पर मुझे उनके चेहरे के भाव देख कर मजा आ रहा था लेकिन और मजा आता अगर दोनो को एक्शन में देखता। इसके लिये मैं ने एक और प्लान सोचा है जो जल्दी ही पूरा होगा, जब दोनो को एक होता हुआ देखुंगा। Antarvasna

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