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हैलो फ्रेंड्स. मैं राहुल जयपुर से हूँ. मैं देखने में बहुत ही आकर्षक लड़का हूँ. मैं आपको एक Antarvasna कहानी सुनाने जा रहा हूँ. मेरा एक दोस्त था राहुल. राहुल और मैं साथ साथ पढ़े लिखे, मगर राहुल की शादी मुझसे पहले हो गई. राहुल एक पायलट था.. उसकी शादी शिमला की विनीता नाम की लड़की से हुई थी. वो जब भी बाहर जाता, हमेशा मुझसे कह कर जाता कि विनीता का ख्याल रखना, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.
समय बीतता गया राहुल की बीवी विनीता एक बच्ची की माँ बन गई. मैं उनका बड़ा सम्मान करता था.
एक दिन मैं भाभी के घर गया, दरवाजा बंद था.. मैंने बेल बजाई मगर कुछ देर तक कोई नहीं आया. कुछ देर बाद राहुल की 3 साल की बेटी ने दरवाजा खोला. मैंने उससे पूछा कि मम्मी कहां हैं?
तो वो बोली- मम्मी अपने रूम में काम कर रही हैं.
मैं रूम की तरफ़ गया, मुझे वहां कोई नहीं दिखाई दिया, मैं वापस आ रहा था कि इतने में मुझे बाथरूम से कुछ आवाज़ ‘आआह.. ऊऊऊम्म..’ आती सुनाई दी. मुझे आवाज़ कुछ अजीब सी लगी और मैं बाहर चला आया.
कुछ देर बाद भाभी बाथरूम से बाहर निकलीं, बिना कपड़ों के पूरी नंगी.. उनको नंगा देख कर मेरा लंड जो कि 8 इंच का है, एकदम से खड़ा हो गया. भाभी ने मुझे देखा तो वो जल्दी से बाथरूम की तरफ़ वापस भाग गईं और तौलिया लपेट कर बाहर आईं. मुझे काफी डर लग रहा था कि भाभी मुझ पर चिल्लाएगीं.
मगर भाभी मेरे पास आईं और मुझसे कहने लगीं- अरे राहुल तुम कब आए?
मैं उनकी बातें समझ नहीं पा रहा था. मैंने भाभी से कहा- मैं चलता हूँ.. बाद में वापस आऊंगा.
वे हंस दीं.
मैं शर्मा गया और मैं वहां से निकल कर अपने घर पहुँचा, मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था.
अब मुझे हमेशा ही दिन रात भाभी का वो नंगा बदन याद आ रहा था. बार बार मेरा लंड खड़ा हुआ जा रहा था. मैंने उसे बुरा सपना समझकर भूलने की काफी कोशिश की, मगर भूल नहीं पा रहा था.
फिर एक दिन अचनक भाभी का मेरे सेल पे कॉल आया और उन्होंने मुझे घर आने को कहा. मुझे लगा कि शायद भाभी को कोई काम होगा इसलिये बुलाया होगा.
मैं उनके घर पहुँचा. मैंने दरवाजे की घंटी बजाई. कुछ देर बाद भाभी ने गेट खोला और मुझे अन्दर आने को कहा.
मैंने अन्दर आते हुए भाभी से पूछा कि स्वीटी कहां है?
तो वो बोलीं- अपनी सहेली के घर गई है.
मैं कुछ नहीं बोला.
उन्होंने मुझे अपने रूम में आने को कहा और मैं उनके पीछे चला गया.
मैंने वहां एक 18 साल की लड़की को बैठे देखा. मैंने भाभी से पूछा कि ये कौन हैं?
तो भाभी बोलीं- ये मेरे मामा की लड़की है, कल ही शिमला से आई है.
भाभी ने उसका परिचय दिया, उसका नाम रानी था.
मैंने भाभी से पूछा कि भाभी कुछ काम था, जो आपने मुझे याद किया?
तो भाभी बोलीं- क्या जब कोई काम होगा, तभी बुला सकती हूँ क्या?
मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि भाभी मुझसे क्या चाहती हैं.
भाभी बोलीं- तुम दोनों बातें करो मुझे जरा काम है मैं अभी आती हूँ.
भाभी हम दोनों को अकेला छोड़ कर चली गईं.
फिर मैं रानी से बातें करने लगा और धीरे धीरे वो मेरे करीब आने लगी. मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि मेरे इतना करीब क्यों आ रही है. अभी मैं कुछ समझ पाता कि उसने मेरे लंड पे हाथ रख दिया. मेरा लंड खड़ा हो गया. मैं बेकाबू हो गया, मैंने भी उसे पकड़ लिया और उसके होंठों पे किस करने लगा. मुझे कुछ ख्याल नहीं था कि मैं कहां और किस के घर में हूँ.
मुझमें और जोश आने लगा मैंने उसके मम्मों को, जो अभी काफी छोटे और नरम थे, जोर जोर से दबाने लगा.
वो मुझसे कहने लगी- आह.. धीरे करो राहुल.. दर्द हो रहा है.
लेकिन मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मेरा लंड बहुत तड़फ रहा था.
मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए और जल्द ही उसके सारे कपड़े उतार दिए. उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए, बस अंडरवियर उतरना बाकी रह गया था.
रानी में भी काफी जोश आ चुका था, वो कहने लगी- तुम अपना हथियार दिखाओ राहुल प्लीज़ शो मी..
ये कहते हुए उसने मेरा अंडरवियर फ़ाड़ दिया और लंड पकड़ लिया.
मेरा मोटा लंड देख कर वो कहने लगी- जल्दी डालो राहुल.. जल्दी करो.
मुझसे भी रहा नहीं जा रहा, मैंने उसको धक्का देकर बिस्तर पर चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. मैंने उसकी टांगें फैलाईं और उसकी छोटी सी चुत में अपना लंड एकदम से पेल दिया. वो जोर से चिल्लाई- आह.. मर गई.. राहुल आआआह आअह्हह्ह ह्हह्हह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… बाहर निकालो.
उसकी चीख सुनकर इतने में भाभी कमरे में आ गईं और उन्होंने हम दोनों को नंगा देखा तो उनमें भी जोश आ गया और वो भी जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगीं. मैं रानी के ऊपर से हट गया. मुझे लगा था कि शायद भाभी घर से बाहर कहीं चली गई होंगी.
मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि ये क्या हो रहा है.
फिर उन्होंने मुझे अपने बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे ऊपर रानी को चढ़ा दिया. भाभी कहने लगीं- अपना पूरा लंड इसकी चुत में डालो.
मैंने अपना लंड उसकी चुत में डाला. वो फिर से जोर से चिल्लाई- आआ आआआ.. ह्ह ह्ह.. राहुल धीरे..
मुझसे अब नहीं रहा जा रहा था, मैंने पूरा लंड घुसेड़ा और जोर जोर से शॉट मारना शुरू कर दिए.
वो चिल्लाने लगी- आआआअ.. ह्हह.. जी.त्ततू.. ऊउ…रे..
मैं और जोर जोर से शॉट मारने लगा. दस मिनट तक शॉट लगाने के बाद मेरा माल निकल गया और उसकी चुत में से खून निकलने लगा.
खून देख कर वो डर गई, मगर भाभी ने कहा- कुछ नहीं होता, पहली बार ऐसा होता ही है.
उसके बाद मैं अपने कपड़े पहन ही रहा था कि भाभी मुझसे कहने लगीं- नहीं राहुल रुको.. अभी मैं बाक़ी हूँ.
मैं उस दिन काफी जोश में था, सो भाभी के लिए भी तैयार हो गया. अब भाभी मेरे ऊपर चढ़ गई थीं और मैं उनके होंठों पे किस कर रहा था. मुझमें वापस काफी जोश आ रहा था. वो मेरे लंड को चूसने लगीं.
मेरे मुँह से ‘आआआ.. ह्हह्ह.. ओ.. हज.. ह्हह्ह प.. प्पप्प.. स्सस्स.. ह्हह..’ की कामुक आवाजें निकलने लगीं.
मुझे काफी मजा आ रहा था, उन्होंने लंड चूस कर मुझमें और जोश ला दिया, फिर मेरा लंड खड़ा हो गया और मुझसे भी रहा नहीं गया, मैंने भाभी की चुत में लंड डाल दिया.
वो कहने लगीं- राहुल तुममें काफी जोश है मेरी प्यास बुझा दो.
मेरे दिलो दिमाग पर भाभी छा रही थीं. मैं भी बेकाबू हो गया था. मैं भाभी की चूत में शॉट मारने लगा.
भाभी कहने लगीं- आआअ.. न.. इ.. स.. ए.. राहुल.. मजा आ गया..
मैं और जोर जोर से शॉट मारने लगा. हम दोनों को काफी मजा आ रहा था.
वो चिल्ला रही थीं- कम ऑन राहुल.. कम ऑन राहुल..
मैं पूरे जोश से शॉट मार रहा था लेकिन इस बार मेरा माल बाहर नहीं आ रहा था. मैं और जोर जोर से शॉट देने लगा.
भाभी ‘आआआआआ.. ओह.. ह्हह्हहह.. यू आर अ नाइस फकर राहुल..
कुछ देर में भाभी झड़ गईं लेकिन मैं दनादन चुदाई करता रहा. बीस मिनट तक शॉट लगाने के बाद मेरा माल निकल गया. फिर कुछ देर के लिये मैं उनसे लिपट गया.
उसके बाद मैंने कपड़े पहने और भाभी से कहा- मैं अब घर जा रहा हूँ.
भाभी कहने लगीं- राहुल, मुझे चोदने आते रहना.
इसके बाद हम दोनों का चुदाई का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा.
लेकिन आखिरकार राहुल दिल्ली शिफ्ट हो गया और हम दोनों जुदा हो गए. मुझे आज भी भाभी की याद सताती रहती है और साथ साथ रानी की कमसिन चूत भी याद आती है, जो शिमला वापस चली गई थी.
आपको मेरी यह Antarvasna की कहानी कैसी लगी
मित्रो.. नमस्कार.. मैं अंकित .. हरियाणा से हूँ.. मेरी उम्र 24 वर्ष..
यह मेरी पहली कहानी है जो मैं अन्तर्वासना पर लिख रहा हूँ। ये दरअसल मेरी जिन्दगी की एक सत्य घटना पर आधारित कहानी है।
इस घटना में मेरे साथ स्नेहा जोकि 32 साल की है.. जो उसने बताई थी, इस कहानी में नाम बदले हुए हैं।
यह 28 मई 2013 की बात है.. मैं शाम को चैटिंग कर रहा था.. तो एक औरत ऑनलाइन मिली.. उसके साथ चैटिंग शुरू हो गई। उसने अपना नाम स्नेहा बताया साथ ही उसने मुझे वेबकैम चालू करने को कहा.. मैंने अपना कैम ओपन किया और उससे भी कहा तो उसने भी अपना कैम ओपन कर दिया।
जब मैं उसे देखा.. मैं खिल उठा.. क्या मस्त माल थी.. सुपर हॉट.. एकदम बोल्ड.. बड़े-बड़े और एकदम गोरे मम्मे.. खुद दबा रही थी.. उसने सूट पहना हुआ था।
मैंने कहा- खोलो तो..
उसने मुझसे बोला- तुम भी अपना ‘टूल’ दिखाओ।
मैंने कहा- अभी तो मैं परिवार के बीच हूँ रात में सब दिखा दूँगा।
वो बोली- थोड़ी झलक तो दिखा..
मैं कमरे में अकेला था.. मैंने दरवाजा बंद किया और 2 मिनट तक अपना सामान दिखाया।
इतने में वो बोली- क्या तुम लुधियाना आ सकते हो??
मैंने कहा- अगर आप बुलाओगी.. तो क्यों नहीं..
बोली- ठीक है.. कल आ जाओ..
मैंने कहा- इतनी जल्दी ? मैं कल तो नहीं आ सकता..।
उसने कहा- मैं यहाँ पर कल तक ही हूँ.. उसके बाद दो महीने तक बाहर हूँ.. फिर बाद में ही मिल सकेंगे..
मैंने सोचा साला कोई लड़का होगा मुझे वेबकैम पर कोई ट्रिक करके पागल बना रहा होगा..
मैंने मोबाइल नंबर माँगा तो कहती हैं कल आ जाओ.. फिर वहीं देती हूँ।
मैंने कहा- ये भी कोई बात हुई?
फिर उसने कहा- तुम अपना नम्बर दो.. मैं फोन करती हूँ.. और तुम मुझे फोन मत करना..
मैंने कहा- ठीक है..
उसका फोन आया तो.. ओह.. क्या सुरीली स्वीट आवाज थी उसकी- हाय.. कैसे हो अंकित ?
मैंने कहा- वाह.. आपकी आवाज तो बड़ी प्यारी है.. मैं ठीक हूँ.. आप बताओ..
बोली- बस.. तुम कल आ जाओ..
मैंने कहा- यार कुछ समय तो दो मुझे..
अगले दिन ऑफिस में जरूरी काम था।
मैंने कहा- रात में मिलते हैं फिर बात करेंगे और आने के लिए कुछ करता हूँ।
इस तरह फोन पर कुल 2 से 3 मिनट बात हुई.. फिर चैटिंग पर आ गए।
वो बार-बार यही कहती रही- मुझे जाना है.. रात में 10 बजे मिलते हैं।
फिर मैं ऑफिस की प्लानिंग करने लगा.. रात 9 बजे तक फोन करता रहा.. तब जा कर बड़ी मुश्किल से कहीं बात बनी।
फिर रात में मैं ऑनलाइन आ गया और इन्तजार करने लगा। दस मिनट में वो भी आ गई।
फिर मैंने उसके बारे में मालूम किया.. वो शादीशुदा थी.. मैंने पति और बच्चों के बारे में पूछा तो बोली- नो पर्सनल..
मैं चुप हो गया। फिर वेबकैम चालू हो गए.. धीरे-धीरे हम नंगे होते चले गए.. बात चलती रही। उसने अपनी चूत और मम्मे साफ-साफ़ दिखाए।
मैंने भी कैपरी और चड्डी उतार दी। उस हसीन जवानी को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया.. मेरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लवड़ा पूरा टाइट हो गया था।
वो भी बोली- हाय.. बहुत मोटा है आपका..
अब मिलने का प्लान चलता रहा.. उसने बोला- कल बस स्टैंड पर 11 बजे तक मिल जाना.. मैं 1-2 घंटे के लिए ही मिलूँगी।
फिर प्लान तय हुआ कि होटल में मिलेंगे।
उसने कहा- तुम मुझे फोन मत करना.. मैं तुम्हें 9 बजे खुद फोन करूँगी..
अब उसके साथ 1 से 1.30 घंटे चैटिंग के बाद 12 के करीब मैं सो गया। सुबह 7 बजे घर से निकला और बस पकड़ कर अम्बाला पहुँचा.. उधर से शान-ए-पंजाब ट्रेन पकड़ी।
उसका लुधियाना में मिलने का 12 बजे का टाइम था.. इतने में उसका फोन का इन्तजार करते हुए कॉल भी आ गया।
“कहाँ हो.. कैसे हो… ये मेरा नंबर चालू रहेगा… इस पर फोन कर लेना।
फिर 40-45 मिनट पहले ही फोन चालू हो गए- कहाँ पहुँचे.. कब तक आ रहे हो..
मैं 12.15 पर पहुँच गया.. मैंने फोन किया- आप कहाँ हो?
बोली- मुझे स्टेशन दूर पड़ेगा.. आप बस स्टैंड आ जाओ.. वहाँ एक ढाबा है.. बहुत बड़ा बोर्ड लगा हुआ है..
उसने पता बताया और मैं पहुँच गया.. फोन किया तो बोली- इधर ये गली है.. वहाँ आ जाओ।
मुझे गली नहीं मिली.. आगे रोड पर गया तो एक गाड़ी पास आकर रुकी.. वो पीछे गॉगल्स लगा कर बैठी हुई थी.. क्या कयामत लग रही थी यार.. पूछो मत..
उसने गाड़ी का दरवाजा खोला.. मैं अन्दर बैठ गया।
हैलो.. हाउ आर यू.. चलता रहा.. आगे गाड़ी को ड्राइवर चला रहा था।
उसकी जवानी की क्या तारीफ करूँ.. 34-30-36 का फिगर.. दूध सी गोरी जवानी.. चुस्त जीन्स और गुलाबी रंग का टॉप पहना हुआ था।
मेरी आँखों में चमक और मुँह में पानी आ गया.. मैंने मुश्किल से सब्र किया.. ड्राईवर जो साथ था।
फिर बात शुरू हुई तो बोली- कहाँ चलना है?
मैंने कहा- होटल..
तो बोली- मैं इस तरह होटल कभी नहीं गई।
मैंने भी यही कहा.. फिर मैं एक होटल में गया। उधर पूछा एसी रूम का क्या लेते हैं तो मालूम हुआ 1500 का है।
अभी बात कर ही रहा था कि इतने में उसका फोन आ गया, बोली- कमरा बुक मत करना.. यूँ ही पूछ लो बस..
फिर मैं आ गया.. वो बोली- और कहीं चलते हैं..
मैंने कहा- हाँ.. सिटी के बाहर ही ठीक रहेगा।
तो गाड़ी आगे ले ली.. फिर उससे बात होने लगी।
‘पहले कभी किया है आपने?’
मैंने धीरे से कहा- हाँ..
फिर वो बोली- ये ड्राइवर नहीं.. मेरे पति हैं..
मैं एकदम से सकते में आ गया.. मैंने कहा- झूठ??
तो बोली- कसम से..
मैं अवाक था।
फिर आगे चल कर उसके पति ने ही एक होटल बुक किया।
उसने कहा- पति के साथ एडजस्ट कर लोगे ना.. वो भी कमरे में ही रहेंगे?
मैंने कहा- ओके..
हम लोग कमरे में गए। उसका पति बोला- मैं बाथरूम में जाता हूँ.. आप लोग कर लो..
मैंने पीने का पानी मँगवाया.. गर्मी बहुत थी.. मैंने पानी पिया.. उसने मना कर दिया।
मैं मूड में आ गया वो बिस्तर पर बैठी थी मैंने कपड़े उतारे.. बस चड्डी नहीं उतारी। फिर उसे अपनी बाँहों में ले लिया- आ जाओ जान..
उसे बिस्तर पर गिरा दिया.. उसके रसभरे होंठों को ज़ोर से चूसने लगा।
वो भी मेरे होंठों को जी भर के चूस रही थी।
फिर मैंने उसका टॉप उतारा.. और मैं चूंकि लेटा हुआ था.. सो पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया.. फिर उसको बाँहों में ले लिया।
मैं उसे ज़ोरों से चूमता-चूसता रहा.. उसके मम्मे यम्मी थे.. स्वीट सेक्सी निप्पल चूसे.. बोली- दर्द होता है..
फिर हम दोनों एक-दूजे के जिस्मों से खेलते रहे और पति बाथरूम से आकर पलंग के दूसरी ओर मुँह करके बैठ गया था।
फिर मैंने कहा- जान.. जीन्स तो उतारो..
उसने कहा- लो खोल लो।
मैंने उसकी जीन्स उतारी… क्या नरम-नरम कमर और टाँगें थीं.. नीचे उसकी पैन्टी वो भी गजब की थी.. भूरे रंग की.. फिर मैं उसके होंठ.. गला.. मम्मे.. नाभि… पेट चूसते-चूसते चूत पर आया तो उसकी हसीन मखमली चूत को चुम्बन किया.. उसको खूब चूमा-चाटा.. वो भी मस्ती से मचलने लगी।
फिर तो जितना चूमता था उतनी और प्यास लगने लगती थी। बड़ी ही मीठी महक थी.. नरम साफ चिकनी खूबसूरत चूत थी.. चूसने का और ज़ोर का मन हुआ और ज़ोर से चूसता गया।
वो ‘अहहा.. आहह.. आहह..’ की सिसकारियां लेती रही। फिर उसने एकदम से मेरे बाल पकड़ कर मेरा सर चूत के ऊपर दबा दिया और बोली- और ज़ोर से चूस… ज़ोर से चूस… अहहह..
उसकी चूत का स्वाद इतना मस्त.. जिंदगी भर ना भूलूँ.. हल्का सा नमकीन.. मस्त गीली चूत.. गर्म इतनी जितना जलता हुआ कोयला.. बस मैं भी चूसता जा रहा था। इस बीच मैंने चड्डी उतारी और लंड निकाल कर उसके मुँह में लगा दिया.. वो कामातुर होकर चूसने लगी…
उसे चूसने नहीं आता था.. फिर मैंने ही उसका मुँह पकड़ कर धक्के लगाए। इतने में मैं उसके मुँह में लंड डाले हुए ही उसके पेट के ऊपर से चूत पर पहुँच गया और चूत चूसने लगा।
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उसका पति भी नंगा हो गया और मेरे कान में कहने लगा- मैं मर्द नहीं हूँ.. तुम आज इसकी चूत चोद डालो..
मैंने कहा- ठीक है..
फिर वो अपनी बीवी से कहने लगा- आज जी भर कर चुदवा ले..
हम लंड-चूत चूसते रहे चूचियों से खेलते रहे.. इस हसीन जन्नत में बहुत मजा आ रहा था। फिर मैं उसे स्मूच करने लगा.. तो बोली- तुम्हें नहीं आता.. मैं सिखाती हूँ..
फिर तो वो मेरे ऊपर आ गई और मेरी बाजू पकड़ लीं.. मेरी दोनों टांगों में अपनी दोनों टांगों कर जोरों से बाँध लीं।
उसने मुझे इस कदर जकड़ लिया था कि मैं हिल भी नहीं सकता था।
फिर वो मेरे होंठों के किनारों पर धीरे-धीरे अपनी जीभ फिराती हुई चूम रही थी.. मैं अपने मुँह से उसकी जीभ पकड़ने की कोशिश करता तो सर ऊपर कर लेती।
मुझे बहुत सनसनी हो रही थी.. ऐसा लग रहा था.. जैसे वो मेरा देह शोषण कर रही हो। इस चुदाई के सबसे हसीन पल यही लगे थे मुझे।
इसके बाद वो मेरा लंड पकड़ कर मुझे चोदने लगी। फिर पोज़ बदल कर मैंने उसे लिटा कर उसकी गीली चूत चूसने लगा और उसके पति ने अपना नामर्द लंड उसके मुँह में डाल दिया।
फिर मैंने अपना लंड पकड़ कर उसकी गरम चूत में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा।
बोलती है- और ज़ोर से चोद.. और ज़ोर के धक्के मार.. अहहा.. उउहह..
उसे पकड़ कर चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था। दस मिनट तक चोदने के बाद वो अकड़ गई और झड़ गई उसके पानी की गर्मी से मेरा भी निकलने का था।
फिर मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह पर पर पिचकारी मारी.. उसने मुँह साइड में किया तो उसके मम्मों पर माल की पिचकारी दे मारी।
फिर पूछा- चूसोगी?

उसने सिर हिला कर मना कर दिया- नहीं..
इतने में वो मुस्करा रही थी.. क्या क्यूट लग रही थी.. और माल उसके मम्मों पर और चेहरे पर खूबसूरती बढ़ा रहा था।
इसके बाद उसके पति ने चोदा.. वो तो 2 से 3 मिनट में धक्के मार कर गिर गया। फिर हमें होटल में डर भी लग रहा था.. इस दौरान 2 घंटे तक हमने चुदाई के खूब मजे किए।
उसके बाद मैंने पूछा- मज़ा आया?
तो बोली- हाँ बहुत ज़्यादा.. तुम चूसते बहुत मस्त हो।
हम सबने कपड़े पहने और निकल गए।
उसने मुझे 2000 दिए.. बोली- रख लो कोई बात नहीं।
मैंने मना किया.. पर उसके प्यार के आगे मना नहीं कर सका।
बोली- अपने लिए कोई गिफ्ट खरीद लेना।
वो पैसे मैंने आज भी संभाल कर रखे हुए हैं।
फिर बोली- आज रात को वेबकैम पर ज़रूर मिलना..
मैंने इन्तजार किया.. पर वो नहीं मिली। मैंने एक-दो बार फोन भी किया तो अटेंड नहीं किया और मैसेज से जबाव दिया- मैं कॉल करूँगी।
उसका आज तक कोई फोन नहीं आया! मुझसे कहा था कि वो 6 से 7 हफ्ते के लिये वो बाहर जा रही है और मैं उसके बारे में कुछ भी नहीं जानता। पता नहीं शायद मेरे नसीब में उससे मिलना था।
उस दिन को कभी नहीं भुला सकता.. उसी हफ्ते मुझे एक कपल से मिलने दिल्ली जाना था.. पर मैं नहीं गया। एक सच्चे प्यार का सा एहसास था वो.. मैं उसे बहुत याद करता हूँ।
मुझे इसके बाद कई कपल और औरत तो मिलीं.. पर उसके जैसी आज तक नहीं मिली।
बेटी को धन की सुख देने के लिए मेरी Antarvasna बाप ने मेरी शादी एक ५० बरस के मर्द के साथ कर दी. मेरे पति की मुझसे उनकी दूसरी शादी थी. पहली की मौत हो चुकी थी. उनका एक लड़की थी जिसकी शादी हो चुकी थी. शादी के पहले मुझे उनके और परिवार के बारे मे अधिक जानकारी नही थी.
सुहाग रात मे मैं उनको देखकर हैरान रह गई. वे देखने मे ही बहुत कमज़ोर दिख रहे थे. मेरी उमर उस समय सिर्फ़ १८ बरस थी. वे आते ही दरवाज़ा बंद कर लिए और मेरी बगल मे बैठ गए. वे मुझे पकड़ कर चूमा लेने लगे. कुछ् इधर उधर के बाते करने के बाद वे मेरी ब्लाउज खोल दिए. मैं ब्रा पहन रखी थी. कुछ देर उपर से ही सहालाने के बाद ब्रा भी खोल दिए. उसके बाद मेरी चुची को चूसने लगे. मुझे अब अच्छा लगने लगा था.
मैने धीरे से अपनी हाथ उनके लंड तरफ़ बढ़ाया. अभी तक कुछ भी नही हुआ था. वे अपने कपड़े खोल दिए और सहालाने के लिए बोलने लगे. मैने भी कुछ देर तक हाथ से सहलाती रही. खड़ा नही होने पर मुख मे खाने के लिए कहने लगे. क़रीब १० मिनट के बाद भी जब नही खड़ा हो पाया तो मैं निराश हो गई. उनके लंड मे नाम मात्र का ही कडापन आया था. अब वे मेरी साडी खोल दिए और अपने मुरझाए हुए लंड से मेरी बुर रगड़ने लगे. मैं तो उनके लंड के तैयार होने का इंतज़ार कर री थी. वे मेरी बुर को अब जीभ से चूसने लगे. अभी भी उनका लंड बहुत नरम था. मैं मन ही मन अपने को कोसती रही और बाप को शराप्ती रही. वे मेरी बुर चूसने मे और मैं उनका लंड चूसने मे मशगुल थी. मुझे अब सह पाना मुश्किल था. जैसा था वैसा ही मैंने उनको चोदने के लिए कहने लगी. वे अपना नरम नरम लंड मेरी गरम गरम बुर मे प्रवेश करने लगे .मगर प्रवेश करने से पहले ही वे गिर गाये.मैं तड़पती रह गई . मैं सोचने लगी कि पहले रात के चलते ऐसे होगया. मैं चुप चाप रह गई. वे भी ऐसे ही कह रहे थे.
दूसरी रात भी मैंने बहुत कोशिश की मगर सब बेकार गया. इसी तरह महीनो बीत गाये. मैं जब भी बिस्तर पर तडपती रही. मेरी बड़ी बहन जीजाजी के साथ तबादला होकर उसी शाहर मे आ गयी. एक दिन मेरी बहन मुझसे मिलने मेरी घर पर आ गई. वे मेरा हाल ख़बर पूछने लगी. मैं चुप हो गई. जब वे ज़िद करने लगी तो मुझे सबकुझ बताना ही पड़ा. वे निराश हो गई और कुछ सोचने लगी. मैंने पूछने लगी तुम कैसी हो. जीजाजी कैसे हैं. वे कह रही थी की तुम्हारे जीजाजी तो बहुत तगडे है. वे मुझे बहुत मज्जे देते हैं. मान ही मान मैं इर्ष्या करने लगी .वे बोलने लगी की मैं कल तक कुछ सोचती हू. कल १२ बजे मेरी घर आजाना. वही पैर बैठ कर बाते करेंगे. मुझे कुछ आशा दिखाई देने लगी.
सुबह होते ही मैं जल्दी जल्दी काम निपटा कर तैयार हो गाई. ठीक १२ बजे मैं दीदी के घर पहौच गई. वे मुझे देख कर मुस्कुराने लगी. वे मुझे अपने बेड रूम मे ले गई .दीदी अपने रूम मे टीवी चला रही थी. वे बोलने लगी की तुम कुछ देर तक वीडियो देखो मैं काम निपटा कर आती हूँ. एक सीडी वही पर रखा हुआ था जिसपर लिखा हुआ था हम दोनो. मैंने उसी सीडी को लगा कर देखने लगी. सीडी देखते ही मैं घबरा गई और दरवाज़े की तरफ़ देखी. दीदी बाथरूम मे थी. मुझे और अधिक देखने का इच्छा जागृत होगई. इस सीडी मे तो जीजाजी और दीदी का रंगीन खेल भरा हुआ था. जीजाजी का लंड तो देखते ही बनता था. लग रहा था की दीदी बहुत रोएगी .मगर वा तो मज़े ले रही थी. मैं सोचने लगी काश मुझे कोई ऐसे चोदने वाला मिलता.
उसी समय दीदी अंदर आ गई और कहने लगी तुम को यह कैसा लग रहा है. मैंने सीडी बंद करदी. उसी समय जीजाजी भी आगये. मुझे देखते ही वे मुस्कुरा दिए. दीदी कहने लगी अरे साली तरफ़ भी तो देखो. वह बेचारी शादी होने के बाद भी कुँवारी है. दीदी कहने लगी आज तुम्हारे जीजाजी को तुम्हारे लिए ही मैंने बुलाया है . कल तुमसे मिलने के बाद मैने इनको सब कुछ बता दिया था. दीदी कहने लगी अब तुम लोग अपना काम करो मैं बाहर देखती हूँ. जीजाजी कह रहे थे तुम तो बहुत सेक्सी लगती हो. तुम्हारे स्तन तो काफ़ी बड़े है और वे दीदी के जाने के बाद बिना रूम बंद किए ही मेरी स्तन दबाने लगे.वह कह रहे थे की जब तुम्हारे दीदी ही है तो उससे छिपाना क्या. ऐसे तो साली तो आधी घर वाली होती ही हैं. लेकिन मैं तुम्हारे इच्छा के बिपरीत कुछ नही करूँगा.
मैं चुप चाप थी. मैं सोचने लगी की कही वे चले ना जाए. इससे अच्छा मौक़ा अब नही आने वाला मैं मुसकुराने लगी.जीजाजी समझ गए की मैं सहमत हू. वे अब मेरा ब्लोउज और ब्रा खोल दिए . मेरे चुचि को मसलने लगे . मैं भी अब सहयोग करने लगी थी. जीजाजी के लॅंड का उभार अब पैंट पैर दिखाई देने लगा था. मैंने उनका पैंट पैर हाथ डाला तो वे पैंट खोल दिए. अब उनका लॅंड बाहर निकल चुका था. मैं अपने हाथ से उनके लॅंड को सहालाने लगी. अपने पति का लॅंड से जीजाजी का लॅंड को तुलना कर रही थी. मन ही मन मैं सोचने लगी की मेरी दीदी कितनी लॅकी है की उसे ऐसे लॅंड वाला पति मिला है. कुच्छ देर तक मैं उनके लॅंड को देखती रही. इतने मे जीजा जी कहने लगे कैसा है मेरा हथियार. तुम्हारे पति का कैसा हैं. मैं कहने लगी, जीजाजी उनका तो खडा ही नही होता हैं. मैं महीनो से तरप रही हू. आपका लॅंड तो काफ़ी मोटा और बड़ा है. दीदी को तो बहुत दुखता होगा. उसी समय दीदी आगई. बोलने लगी अरे केवल देखते ही रहोगी.
मैं बोलने लगी दीदी इनका तो बहुत मोटा है, मैं नही सह पाऊँगी. दीदी कहने लगी हा, मोटा तो है लेकिन सहना ही पड़ेगा. पहली बार मुझे भी बहुत दर्द हुआ था. लेकिन अब तो मजा आता है. जीजाजी को दीदी कहने लग
बेचारी तुम्हारा घोड़ लॅंड देख कर डर गई है. मेरे बहन को मत रूलाना. बेचारी अभी तक तो कुँवारी जैसे ही तो है.इतन कह कर वा फिर चली गई. जीजाजी अब मेरी साड़ी और पेटी कोट भी खोल दिए .वे मेरे बुर को चटने लगे. मुझे बेड पैर सूता दिए और अपना लॅंड मेरे बुर मे डाल कर चूसने के लिए कहने लगे. वे मेर उपर चढ़े हुये थे . अपनी जीभ से मेरी टिट चाट रहे थे. मुझे काफ़ी मजा आरहा था. मैंने भी दोनो हाथो से उनका सिर पाकर कर दबाने लगा. ज़ोर ज़ोर से लॅंड चूसने के लिए कह रहे थे. उनका लॅंड का स्वाद लेने मे मुझे भी मजा आरहा था.
इतने ही मे अपना पूरा लॅंड मुख मे अंदर तक धकेलने लगे. मुझे तो पहली बार इतना तगड़ा लॅंड मिला था. मैं मज़े से उनका लॅंड चुस रही थी और जीजाजी मेरे बुर चुस रहे थे. उसी समय मुख मे गरम गरम और नमकीन टेस्ट आने लगा. वे और ज़ोर से लॅंड अंदर किए. मुझे तो मजे का स्वाद आ रहा था. कुछ देर तक और चूसती रही. वे बाहर लिए और बाथरूम मे चले गए. बाथ रूम से आने के बाद वे फिर मुझसे अपना लॅंड सहलवाने लगे. क़रीब ५ मिनट के बाद वे फिर तैयार होगए. जीजा जी का लॅंड फिर से पहले जैसे ही कठोर और मोटा होचुका था. इस बार वे मुझे पट सूता दिए. मेरे गाड़ मे थोडा थूक लगाए और एक अंगुली घुसा कर बाहर भीतर करने लगे. मैंने कहने लगी जीजाजी इसमे भी करोगे क्या. इसमे तो नही सहा जायगा. आज बुर मे ही कर लो. फिर कभी इसमे. जीजाजी नही माने और कहने लगे गाड़ लिए बिना मैं तुम्हारा बुर नही लूंगा. अगर मेरा शर्त मंज़ूर है तो बोलो नही तो छोड़ देता हूँ. मुझे तो आज चुदाई का भरपूर मजा लेना था. मैं चुप रही. मैं मुसकूरा दी और कहने लगी आप बहुत बदमश हो, आज मैं सब कुछ सहने को तैयार हूँ. जीजाजी Antarvasna
मैं सुरेश, मेरे प्रिय Antarvasna Sex Stories पाठकों और पाठिकाओं को मेरे लंड का नमस्कार।
मैं भी आपकी ही तरह अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मुझे इस साईट की कहानियों को पढ़कर लगा कि मैं भी आपके समक्ष अपनी सच्ची कहानी रखूं।
मैं जिस लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ, उसका नाम गौरी है। उसका कद करीब ५.३” है । रंग थोड़ा सांवला है और उसके मम्मे करीब ३४” के होंगे और उसके गांड करीब ३८” की होगी और उसकी पतली कमर अगर उसे कोई देख ले तो उसका लण्ड कड़क हो जाए।
बात उन दिनों की है जब मैं पटना(बिहार) के कोचिंग में पढ़ाया करता था, वो मेरे कोचिंग में पढ़ती थी। वो एक अमीर घराने की माडर्न ख्याल की लड़की थी, इसीलिए छोटे छोटे और पारदर्शक कपड़े पहन कर आती थी जिससे देख सभी लड़के उस पर फ़िदा रहते थे। गुरु होने के कारण मैंने वैसे तो कभी उसे उस नजरिये से कभी नहीं देखा था पर उस दिन बात ही कुछ ऐसी हो गई।
मैं आपको बताना भूल गया कि उसे बार-बार बेहोश होने की बीमारी थी। वो रविवार का दिन था और कोचिंग की छुट्टी थी पर उसे गणित में कुछ प्रोबलम होने के कारण उसने मुझसे अकेले में पढ़ाने को कहा था। वो ठीक १० बजे मेरे कोचिंग में आ गई, और हमने पढ़ाई शुरू कर दी। मैं उसे पढ़ा ही रहा था कि इतने में वो बेहोश हो गई। मैं उसके मुँह पे पानी के छींटे मार रहा था उसे होश में लाने के लिए। इस बीच मेरी नज़र उसके मम्मे पर चली गई। पानी और पारदर्शक कपड़े होने के कारण उसके मम्मे गीले हो गए जिस कारण वो पूरे साफ़ साफ़ दिख रहे थे। मैं न चाहते भी उसके मम्मे दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसके टॉप के अन्दर हाथ डाल दिया और उसे मसलने लगा और उसके होठों पे अपने होंठ रख कर चूसने लगा। इतने में वो होश में आ गई और हल्का सा मेरा विरोध करने लगी पर उसके बाद वो भी गरम हो गई।
मेरा भी लंड अन्दर ही पैंट फाड़ने लगा और उसने अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया। करीब १० मिनट की चुम्मा-चट्टी के बाद वो पूरी गर्म हो गई और मेरे कपड़े उतारने लगी। मैंने भी देर ना करते हुए उसके कपड़े उतार दिए और थोड़े ही समय में दोनों पूरे नंगे हो गए। वह घुटने के बल बैठ गई और मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबा रहा था। फिर मैंने उसे मेज़ पर लेटा दिया और उसकी संगमरमरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी चूत एकदम कसी और वह अनचुदी कलि थी। वह सिस्कारियां भर रही थी और इतने में वह झड़ चुकी थी। मैंने उसके अमृत-रस को चाट कर साफ़ कर दिया।
थोड़ी देर में वो फिर से गरम हो गई और तड़पने लगी। फिर मैंने उसे ज्यादा न तड़पाते हुए उसकी टाँगे मेज़ पर फैलाई और अपना लंड उसकी बुर पे रख दिया। लंड अन्दर नहीं जा रहा था इसलिए मैंने वैसलिन लगाया और धीरे धीरे अन्दर डालने लगा। लंड धीरे धीरे अन्दर चला गया और वह दर्द से तड़पने लगी। मैंने और जोर लगाया तो उसकी बुर से थोड़ा खून निकला और दर्द के मारे तड़पने लगी …..आआआ… ऊउम्म्म्म्म्म्म्म…. येस्स्स्स…..ये सब आवाजें निकलने लगी।
मैं थोड़ा रुका और उसके होंठ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और नीचे से वह गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। मैंने भी तब फिर से उसे चोदना चालू कर दिया और करीब १५ मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एकसाथ झड़ गए।
उस दिन मैंने उसे दो बार और चोदा। अब हमें जब भी वक्त मिलता है तो हम पढ़ाई के बहाने चुदाई किया करते हैं।
मेरे प्रिय पाठको, यह मेरी पहली कहानी है इसलिए जो भी गलती हुई उसके लिए माफ़ करियेगा और आपको अगर कहानी अच्छी लगी तो मुझे मेल कीजिये। आपके इ मेल्स मेरे लिए प्रेरणा-स्रोत का काम करेंगे तो मेल करने में कंजूसी न करें। Antarvasna Sex Stories
सभी साथियों को अभिवादन ! आप सभी Sex Stories को धन्यवाद ! ! आपकी प्रेरणा से मुझे लिखने का उत्साह मिलता है।
ज़रा सोच कर देखिये कि भगवान् ने सेक्स को इतना सुखदायक बनाया कि दुनिया इसकी दीवानी है। यदि यह सुखदायक नहीं होता तो………
दो इंच के खड्डे ने दुनिया को ख़ुद का दीवाना बना रखा है। सारी दुनिया की उत्पत्ति उससे हो गई।
क्या मनुष्य, क्या जानवर और क्या कीड़े मकोड़े….. सभी सेक्स के लिए उत्सुक होते हैं।
और सेक्स …….
इसको जितना तसल्ली से किया जाए उतना ही आनंद दायक हो जाता है।
और इसी सेक्स के कारण कई बार मनुष्य खेदजनक स्थिति में भी आ जाता है।
बहुत सी बार तो किसी में कोई दोष या परेशानी नहीं होती और वो सोचता है कि उसमे कोई दोष है।
यदि तसल्ली से, बिना किसी घबराहट के सेक्स करेंगे तो सेक्स का ख़ुद भी पूरा आनंद ले पाएंगे और साथी को भी सेक्स का पूरा आनंद दे पायेंगे।
जरूरत से ज्यादा उत्तेजित हो जाना, चिन्ता में होना, घबराहट होना और गुप्तांगों में कोई परेशानी होना (घाव या छीलन आदि) ही ज्यादातर परेशानियों का कारण हैं।
इनमे से एक परेशानी है स्त्री के बजाय पुरूष का जल्दी झड़ जाना।
और इस समस्या के निदान है, जो अच्छा लगे उनको अपना कर अनुभव करें —
-कंडोम का प्रयोग करें,
-स्त्री को अपने ऊपर ले लें,
-बैठ कर सम्भोग करें,
-सेक्स करते समय अपने दिमाग को शांत रखें, जरूरत से ज्यादा उत्तेजित न हों और जल्दबाजी न दिखाएँ,
-बहुत जल्दी जल्दी सम्भोग न करें अर्थात ५-७ दिन का अन्तर रखें,
सेक्स में किसी को कुछ ज्यादा अच्छा लगता है और किसी दूसरे को कुछ ओर !
इसलिए अपनी पसंद से दूसरों की तुलना करना बेकार है, यह मत सोचिये कि मुझको कोई बीमारी है।
मैं स्त्री को अपने ऊपर लेना ज्यादा पसंद करता हूँ।
इस आसन में स्त्री सेक्स करते समय जैसे जैसे अपनी गांड चलाती है तो उसकी चूत अदंर से फूलती पिचकती रहती है और लंड को अपार सुख देती है।
दूसरा आसन बैठ कर स्त्री को अपनी जांघों पर बिठा कर सम्भोग करना – इसमे दोनों के मुँह एकदम आमने सामने होते हैं, अतः चूमने में बहुत मजा आता है और पूरा शरीर होता हाथ की पहुँच में है, इस से हम एक दूसरे के पूरे शरीर के टांग से लेकर मुँह तक सहला सकते हैं।
आज मैं आपको जो बताने जा रहा हूँ उससे आप अपनी मन पसंद स्त्री को चोद सकते हैं।
हमारे एक परिचित का गोत्र मेरी मां के गोत्र का था। इसलिए हम लोग उनको मामा कहते थे। उनकी पत्नी का देहांत तीन बच्चों के पैदा होने के बाद, ४५ वर्ष की उम्र में हो गया। तब तक उनके दो लड़के और एक लड़की तीनों की शादी हो चुकी थी। अब मामाजी अकेले रह गए और उनमें सेक्स की प्रबलता देख कर कोई भी बेटा अपने साथ रखने को राजी नहीं था। मामा ५०-५२ के थे।
वो थे भी ज्यादा ही खुले हुए, उनके लिए उनकी बहु भी सेक्स संतुष्टि का एक साधन ही थी। अब अलग रहने से उनके खाने के साथ साथ सेक्स करने की भी समस्या हो गई। रुपयों की कोई कमी नहीं थी तो उन्होंने अपने लिए कोई औरत तलाशनी शुरू कर दी। आख़िर २-३ साल की तलाश के बाद हमारे ही समाज की एक तलाकशुदा ३० साल की औरत से उन्होंने मन्दिर में शादी कर ली।
ये मामी उम्र में मुझसे भी छोटी हैं। कोई सीधा सीधा रिश्ता तो है नहीं। लेकिन मान रखा था।
मामी दिखने में बहुत आकर्षक लगती हैं। जब कभी मेरे साथ स्कूटर पर बैठती तो कंधे पर हाथ रखकर बैठती और स्कूटर हलके से रोकने में भी अपने बोबे मुझसे टकरा देती। ३६+/३८ साइज़ के बोबे मेरी पीठ में गड़ते ही मेरा लंड फन्ना जाता। दिल उछल कर गले में आ जाता।
बात करते करते मेरे हाथो में ताली मार देती। यह जानते हुए भी कि यदि उनके साथ यदि मैं आगे बढूँ तो वो मान जाएँगी, मेरी गांड फटती थी उनसे ऐसी बात कहने में !
उनको चोदने की इच्छा बहुत थी इसलिए उनके बारे में बहुत सोचता था। सोते समय भी कई बार उनके बारे में सोचते सोचते सो जाता और गुसलखाने में नहाते समय कई बार उनकी सोच ले कर उनके नाम से मुठ मारी।
एक बार बरसात के सुहाने मौसम में, रात को खिड़की से छन कर आती मद्धिम रोशनी में उनको याद करते हुए आँख बंद कर के पत्नी के साथ लेटा हुआ था। उनको याद करते करते लंड में कठोरता आ गई। मैंने आँखें खोली तो पास में मामी को सोते हुए पाया। मैं उनके ख्यालों में इतना खोया हुआ था कि जाने पत्नी को कहीं भेजकर कब वो पास आकर सो गई पता ही नहीं चला।
मेरी तबियत बाग़ बाग़ हो गई। मैं करवट लेकर उन पर अधलेटा हो गया और उनके होटों पे अपने होंट रख कर चूसने लगा, लंड तन कर अकड़ गया। उन्होंने भी मेरे होंट चूसने शुरू कर दिए। मैंने उनके बोबे दबाने शुरू कर दिए और धीरे धीरे उनके ब्लाउज के बटन खोलता गया। उनकी तरफ़ से कोई प्रतिवाद नहीं हुआ तो लंड नई औरत के अहसास से एक दम टन्ना गया।
फ़िर उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्लाउज और ब्रा उनके शरीर से अलग कर दी। होंट और जीभ एक दूसरे के मुँह से अलग ही नहीं हो रहे थे। बहुत जोर लगा कर मुँह को हटा कर उनके बोबों पर लाया और चूसने लगा। फ़िर एक हाथ से उनका दूसरा बोबा दबाता रहा। और दूसरा हाथ उनके पेटीकोट को ऊँचा करने में लग गया। पेटीकोट को सरका कर नाभि तक ले आया और उसी हाथ से उनकी चूत सहलाने लगा, उनके मुँह से सीत्कार निकलने लगी जो मुझको और भी कुछ करने के लिए उत्साहित करने लगी।
उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और धीरे धीरे दबाने लगी तो मैंने अपने पायजामे और अंडरविअर का नाड़ा खोलकर लंड उनके हाथ में पकड़ा दिया। लंड स्टील के माफिक हो गया।
मन सात समंदर की लहरों पर मचलने लगा। सीत्कार और आहों ने कमरे को एक नए तराने से भर दिया। उनकी चूत पनीली होने लगी। मैं अपनी जीभ से उनका बदन चाटने लगा। उनकी नाभि में जीभ घुसेड़ कर हिलाने लगा।
तो वो मेरा लंड छोड़ कर मुझको अपनी बाँहों में लेकर जकड़ गई। और इतनी जोर से चिपक गई कि यदि मैं उठ जाता तो वो भी मेरे शरीर से जुड़ी हुई उठ जाती। उन्होंने अपना मुँह मेरी गर्दन पर चिपका दिया और चूसने लगी, मुझको अपने आपको सम्हालना भारी पड़ गया, मुझे लगा कि जैसे मैं सूर्य के सामने खड़ा जल रहा हूँ।
हम दोनों के शरीर से जैसे धुंआ उठने लगा, हम पसीने में नहा गए।
मेरा लंड उनकी चूत के दरवाजे पर दस्तक देने लगा। तो उन्होंने लंड को अपनी चूत के मुँह पर अड़ा लिया। और अपने चूतड़ उठाने लगी। मैंने भी लंड पर दबाव डाल कर पूरा लंड उनकी चूत में देता चला गया।
नई औरत के अहसास और उनके मुँह से लम्बी मादक आह ने मेरे मन को सातवें आसमान पर उड़ा दिया। अब मैं अपने घुटनों को मोड़ कर उनकी जांघों के नीचे लाता गया फ़िर जब मेरे घुटने उनकी जांघों के नीचे आ गए तो अपने हाथ उनकी बगल में टिका कर उनको बोला कि अपने हाथों से मुझको मत छोड़ना फ़िर अपने हाथों को कोहनी से सीधा करते हुए उनको अपनी जांघों पर ले आया और बैठ गया। मैं तकिया दीवार के सहारे सीधा लगा कर उसका सहारा लेकर बैठ गया और वो मेरी जांघों पर मुझको अपने हाथो से कसे बैठी थी। मैंने उनके चेहरे को पकड़ कर अपने होंट उनके मुँह से मिला कर उनकी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और हाथ उनके बदन पर छुआते हुए सहलाने लगा। तो वो अपने बदन को उत्तेजना के मारे लहराने लगी। दोनों पहली बार एक दूसरे से चिपके थे इसलिए अलग होना मुश्किल हो रहा था। लंड अंदर चूत की गहराई में डूबा हुआ मस्त हो रहा था।
अब मामी पिघलने लगी, मेरे चेहरे और गले पर जगह जगह चूमने और चूसने लगी। फ़िर धीरे धीरे जांघों को टाइट करते छोड़ते हुए चूत को हरकत देने लगी। मैं भी अपने हिप्स को धीरे धीरे धक्के की स्थिति में हिलाने लगा। मैंने अपने हाथ उनके शरीर से हटा कर उनके बोबों पर लगा दिए। उनके दोनों बोबे मेरे दोनों हाथों से दबे जा रहे थे। होंट उनकी जीभ पर और उनके हाथों में मेरा शरीर कसा हुआ। कही भी हवा जाने भर की भी जगह नहीं थी।
उनकी चूत ज्यादा गीली होती गई और उस गीले चिकने गरम पानी में लंड डुबकियां लगा कर नहाने लगा। उनका गदराया शरीर मेरी रग रग में आग भरता गया और मेरा लंड उनकी चूत को गहरे तक खोद कर कुवें में से पानी निकालने लगा। उनका शरीर तनता चला गया। फ़िर थोड़ी देर बाद उनके होंट, उनके हाथ ढीले हो गए। और उनका शरीर मेरे बदन पर ढल गया।
थोड़ी देर तक मैंने उनको समंदर की लहरों और सातवें आसमान की उड़ान का मजा लेने दिया, उनके बोबे धीरे धीरे दबाता रहा।
फ़िर लगभग ३-४ मिनट बाद मैंने उनका चेहरा उठाया और अपने होंट उनके होटों से मिला दिए। उनके शरीर में फ़िर हरकत होने लगी। शरीर जो ढुलका पड़ा था फ़िर कसाव आने लगा। मैंने अपना एक हाथ हमारे बीच में उनकी चूत पर लाकर उँगलियों से चूत के चारों और सहलाने लगा, मामी में आग फ़िर भड़कने लगी।
अब मैंने अपने शरीर को थोड़ा पीछे झुका कर कोहनी बिस्तर पर लगा दी और थोड़ा आगे सरक कर लेटता गया और उनको ऊपर ले लिया।
मैंने उनके बोबे थोड़ा जोर दे कर दबाने शुरू किए। फ़िर थोड़ी देर बाद दोनों हाथ उनकी कूल्हों की गोलाइयों पर सहलाते हुए घुमाने लगा।
फ़िर उत्तेजना के मारे वो अपने हिप्स को हाथों से बचाने के लिए इधर उधर करने लगी। तो लंड को मजा आने लगा। मैं नीचे से धक्के लगाने लगा। उनके भी हिप्स तेज चलने लगे तो मैंने अपने हाथों में मामी को जकड़ लिया और अपनी जीभ उनके मुँह में देकर धीरे धीरे धक्कों की रफ़्तार बढ़ाता गया। मामी का शरीर फ़िर अकड़ने लगा और ढीला पड़ता गया, मैं नहीं रुका लेकिन धक्के पूरी ताकत से लगाने लगा और ८-१० धक्कों में मैं भी जाने किधर उड़ने लगा।
मेरा पूरा शरीर नए अहसास से सुहागरात की जैसे तरंगित था।
फ़िर जब नींद से आँखें खुली तो मेरी बगल में मेरी पत्नी सोई हुई थी।
लेकिन वो नया अहसास ३-४ दिन तक मुझको तरंगित किए रहा।
आप भी किसी की यादों में इतना खो कर उसकी चुदाई कर सकते हैं।
कर के देखिये फ़िर बताइए ………….
न सिर्फ़ मर्द बल्कि औरतें भी ऐसा कर सकती हैं और नए अहसास से ख़ुद को तरो ताजा कर सकती हैं………। Sex Stories
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